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My Romantic Professor Husband ❣️(𝐂𝐨𝐦𝐩𝐥𝐞𝐭𝐞𝐝)

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Fictitious Writer| Falak

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Description

कहानी का सारांश: “रिमझिम और वेद” एक दिल छू लेने वाली प्रेम कहानी है जिसमें मासूमियत, रोमांस, इमोशन और हल्का सा सस्पेंस बुनकर रखा गया है। रिमझिम एक सीधी-सादी लड़की है, जिसे एक छोटी-सी ग़लती के कारण उसके माता-पिता घर से निकाल...

Total Chapters (85)

Page 1 of 5

  • 1. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 1

    Words: 873

    Estimated Reading Time: 6 min

    एंड कॉल्ड ग्रेट इंडियन…
    वेद ने पढ़ाते पढ़ाते चौक रिमझिम की तरफ फेंक मारा और चीखते हुए बोले..

    “धियान कहाँ है तुम्हारा….!?
    खिड़की से बाहर क्या देखती रहती हो और हाँ हमेशा की तरह सबसे अलग थलग लास्ट बेंच में जा बैठी…!!

    पूरी क्लास हंसने लगी और रिमझिम डर से सिर झुका के उठ खड़ी हुई…

    “वह सर बाहर तेज़ बारिश हो रही है…!!रिमझिम नाजाने क्या सोच के बोल गई..

    “तो मिस रिमझिम एक काम करिये बाहर निकलिए और बारिश में भीग जाएँ….क्लास करने की कोई ज़रूरत नहीं है…!!वेद की खतरनाक चीख पर हँसता हुआ क्लास खामोश होगया और रिमझिम सच में बैग लिए भागती हुई क्लास से निकल गई..

    वेद का पूरा मूड सत्यानाश होगया…
    वह मन में बोलने लगा…”इसे तो क्लास के बाद देखता हूं…!!

    फिर वेद ने क्लास ली और बाहर निकल आया तो फर्स्ट एंड सेकंड ईयर के स्टूडेंट्स खास कर लड़कियां रुक रुक कर गुडफ़्टरनून कहती हुई जाती क्यूंकि वेद की पर्सनालिटी थी…
    परफेक्ट मुक्युलर बॉडी जो शर्ट के ऊपर से ही साफ झलकियां मारती थी…नीली आँखे जिनमे अजीब सा सर्द ठंडा भाव रहता था और आइडियल हाईट….वह शायद हाईट में लड़की लड़कियों बाकि सब टीचर प्रोफेसर से ऊँचे थे…
    हथेली की उभरी नशे और गोरी सख्त मज़बूत कलाई पर बंधी महंगी घड़ी जो साफ इशारा करती थी की वेद राजपूत किसी अमीर घराने का एकलौता वारिस है जो बहुत ज़्यादा रूड रहता था…

    वेद कलाई में बंधी घड़ी पर टाइम देखता हुआ बाहर निकला और अपनी कॉर में जा बैठा….
    आराम से कॉर ड्राइव करता हुआ वह सड़कों पर गाड़ी दोड़ाने लगा तभी उसकी नज़र बारिश में भीगति लड़की पर गई जो कोई और नहीं रिमझिम थी…

    “ये आजकल की लड़कियां कितनी बचकानी हरकते करती थी…!!वेद रिमझिम पर एक सर्द निगाह डालते हुए अपनी कॉर को आगे ले गया…

    रिमझिम पर बारिश की बुंदे ज़ब गिरती तब वह बेहद हसीन लगती…
    एक एक कतरा उसके चेहरे से फिसल कर गर्दन तक आता और वह ख़ुशी से उछलने लगती…
    “मज़ा आरहा है मज़ा….!!रिमझिम रेनकोट पहन कर अपनी सुनहेरी हज़ल आँखों में शरारत लिए घर पहुंची…

    मम्मी…मैं आगई….!!रिमझिम आवाज लगाती हुई आँगन में खड़ी होगई…

    “फिर आज बारिश में भीग गई….हेय भगवान इसको कब अक्ल आएगी…!!उर्मिला जी रिमझिम को सुनाने लगी…
    रिमझिम खड़ी माँ की डांट सुनती रही…

    शाम हुई तो छीनकने लगी…
    रिमझिम को सर्दी लग गई और नाक भी बहने लगी…

    “काश मेरी एक बात भी तू सुन लेती तो आज ये हालत नहीं होता…!!उर्मिला जी चीखने लगी…
    तभी दरवाजे में बेल हुई…

    विमला जी सामने खड़ी थी…

    “जी मैं…विमला…आज ही आपके पड़ोस में शिफ्ट हुई हूं….मौसम खराब की वजह से सुबह नहीं आ पाई…!!विमला जी के हाथों मिठाई थी बस यही चीज पीछे खड़ी रिमझिम को अच्छी लगी…

    उर्मिला जी ख़ुशी से बोली…”जी…अंदर आये ना…!!

    विमला जी अंदर आगई…

    “चल जाके चाय बनाके ला…!!उर्मिला जी ने रिमझिम की तरफ देखा तो रिमझिम मुंह पिचका के चली गई…

    काफ़ी देर विमला जी बातों में लगी रही जबकि वह उर्मिला जी से काफ़ी छोटी थी और उर्मिला जी को आंटी बोल रही थी लेकिन संस्कार में वह बहुत ज़्यादा आगे थी…

    विमला जी के जाने के बाद रिमझिम मिठाई का डब्बा लेकर बैठ गई..

    “ऐसे किसी के सामने मोबाइल ऑन कर नहीं बैठते खराब बात होती है और हाँ वह बता रही थी कि सामने वाला बड़ा सा बंगला उन्होंने खरीदा है…
    पैसे वाले लगते हैँ पर हमें क्या…!!

    उर्मिला जी की बातें रिमझिम सुन ही कहाँ रही थी वह तो मिठाई मुंह में रखे ख़ुशी से आसमान की तरफ देख शुक्रिया बोल रही थी..

    “भगवान जी ऐसे पड़ोसी का भला हो जो इतनी टेस्टी स्वीट्स लाये हैँ…मज़े ही मज़े…!!

    “तू सुन भी रही है मैं क्या कह रही हूं….वह विमला बता रही थी कि वह अपने पति और छोटे देवर के साथ रहने आई है….तीन लोगों के लिए पूरा बंगला ही खरीद लिया…
    इसे कहते हैं मेहनत से मिली कामयाबी अगर तू भी अच्छे से पढ़ लिख तो तू भी इतना पैसा कमा के खुद के पैरो पर खड़ी हो सकती है…!!

    बस यही बात रिमझिम को पसंद नहीं आती थी कि पढ़ाई लिखाई की बात हर जगह कहाँ से आ जाती है…
    पढ़ाई में उसकी जान जाती थी,इतने धक्के खा खा कर तो वह कॉलेज में पहुंची थी…

    रात के वक़्त ज़ब रियान जी घर आये तो रिमझिम उनसे यहाँ वहाँ की बातों में लग गई…
    उनकी छोटी सी खुशहाल फॅमिली थी जहाँ वह तीनों बहुत ख़ुश थे…

    रात हुई तो रिमझिम अपने रूम में आई और नाईट ड्रेस वार्डोरोब से निकाल आईने के सामने खड़ी होकर चेंज करने लगी जबकि सामने की खिड़की खुली थी..

    नाईट ड्रेस पहन वह आईने के सामने डायलॉग बाज़ी करने लगी…

    “मुझे नफ़रत…पढ़ाई से,,इस एजुकेशन सिस्टम से जो हम मासूम बच्चों पर ज़ुल्म करते हैँ….क्यों आखिर क्यों हम जैसे मासूम बच्चे रोज़ यहाँ वहाँ फिरते हैँ….
    कितने ही नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैँ रोज़ धक्के खाते है….
    हुंह्ह्ह इससे अच्छा तो शादी करो और घर बसाओ…!!
    फिर वह आईने के सामने खड़ी दुपटे को सर पर रख चेहरा छुपाकर शर्मा गई..

    “हाय मेरे साजन जी कब आएंगे….जो मुझे मुझसे चुरा के इस ज़ालिम दुन्या से दूर ले जायेंगे….
    कब वह दिन आएगा….!!?

    रिमझिम की नौटंकी खतम हुई तो वह खुद ही ताली बजा कर हंसने लगी और खिड़की की तरफ बढ़ी की उसके क़दम बर्फ की तरह जम गए….


    To_be_continued…

  • 2. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 2

    Words: 930

    Estimated Reading Time: 6 min

    रिमझिम की नौटंकी खतम हुई तो वह खुद ही ताली बजा कर हंसने लगी और खिड़की की तरफ बढ़ी की उसके क़दम बर्फ की तरह जम गए….

    क्यूंकि सामने खिड़की से किसी का अंधेरा कमरा साफ नज़र आरहा था और बालकनी में खड़ी किसी की आकृति देख रिमझिम ने जल्दी से खिड़कियां बंद कर डाली और मुंह पर हाथ रख सोचने लगी…

    “मैं ये कैसे भूल गई कि सामने वाले बंगले में लोग रहने आगये हैँ…
    पता नहीं वह कौन होगा और खड़ा मुझे ही मेरे पागलपन को देख रहा होगा….अरे नहीं यारर मैंने तो कपड़े भी बदले हैँ….अब कुछ भी नहीं हो सकता है क्यूंकि मुझे आदत है इस तरह रहने की लेकिन….लेकिन मुझे अब चौकना रहना होगा क्यूंकि सामने वाला बंगला खाली नहीं रहा….!!

    रिमझिम की सारी ख़ुशी पल भर में हवा होगई और वह सिर पीट के बिस्तर पर लम्बा लेट होगई…

    “हमेशा मेरे साथ ही क्यों होता है याररर….पता नहीं वह मेरे बारे में क्या सोचता होगा….!!!
    रिमझिम तक्या मुंह में चापे शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी…
    लेकिन थोड़ी ही देर में वह नींद की गहराई में उतरती चली गई…

    सुबह ज़ब उठी तो मुंह ब्रश करते हुए खिड़की से पर्दा हटा कर देखा बालकनी में कोई नहीं था…
    रिमझिम ने ठंडी सांस ली और खुद को शांत करवाया कि रात को उसको वहम हुआ होगा…

    वाइट घेरदार फ्रॉक और लगींस पहन वाइट दुपटा गले में लपेटे वह नाश्ते की टेबल पर बैठने को हुई तभी उर्मिला जी बोली…”आज जल्दी आना पड़ोस वाली श्रद्धा जी के यहाँ पूजा है…!!

    “कोशिश करूंगी…!!रिमझिम बोलती हुई नाश्ता कर गेट खोल कर बाहर निकल गई…

    कॉलेज वह पैदल ही जाती थी क्यूंकि दो क़दम की दुरी पर ही कॉलेज था…

    कॉलेज गई तो प्रोफेसर श्री से टकरा गई..

    “गुडमॉर्निंग सर…!!

    “वैरी गुडमॉर्निंग….!!
    प्रोफेसर श्री मुस्कुराहट लिए बोले और आगे बढ़ गए…

    रिमझिम क्लास में बैठी थी तभी यूनियन की टीम से एक लड़का उसके करीब आया जो कॉलेज का मोस्ट पॉपुलर लड़का तृषाण था…

    “प्रोफेसर वेद तुम्हे अपने ऑफिस में बुला रहे हैँ…!!

    रिमझिम और बाकि लड़कियां भी डर गई थी…

    रिमझिम खुद पर ऊँगली से इशारा करते हुए बोली…”मुझे….मतलब मुझे बुला रहे हैँ…!!

    तृषाण बोला…”जी आपको….आपको बुलाया है…!!

    रिमझिम उठके चलती बनी और तृषाण उसके डेस्क पर बैठ गया और लड़कियों से बातें करने लगा..

    “मुझे क्यों बुलाया है,,कल के लिए डांट पड़ेगी….!!
    रिमझिम वेद राजपूत का नेम्पलेट पढ़ डोर में नॉक करने लगी…

    “सर आई कम अंदर….!!रिमझिम घबराहट में थी उल जुलूल ज़ुबान से निकल रहा था..

    “यस अंदर आजाये….!!रोबदार आवाज आई…

    रिमझिम बार बार सिल्क के दुपटे को कंधे पर टीकाने की जदोजहद में लगी थी क्यूंकि दुपट्टा बार बार सरक के गिर रहा था…

    वेद की नीली आँखे रिमझिम के सरापे पर ही टिकी थी जो घबराये जा रही थी…

    “ये तुम्हारे टेस्ट पेपर है….क्लास टेस्ट में तुमने ज़ीरो लाया है ज़ीरो…एक भी केमिस्ट्री का फार्मूला सही नहीं है और आखिर तुमने केमिस्ट्री में हिस्ट्री का आंसर क्यों लिखा है…!!वेद पेपर आगे टेबल पर रखता हुआ बोला…

    रिमझिम आगे आई और हाथों में अपनी आंसर शिट लिए देखने लगी…
    उसे तो अपने सारे लिखें आंसर सही लगे क्यूंकि भट्टा मार कर उसने जवाब लिखा था…

    वह डर से आंसर शिट को वापिस से रख बोली..”सॉरी सर अब इस बार विक्ली टेस्ट में अच्छा करूंगी…!!

    वेद तो रिमझिम की शक्ल से ही पहचान गया था कि ये लड़की टॉप करती होगी लेकिन पीछे से….

    “पढ़ाई पर धियान दो वरना फेल हो जाओगी…”वेद का लहजा अच्छा खासा बुरा था..

    “जी सर आइंदा ख्याल रखूंगी…!!रिमझिम जल्दी से बोली क्यूंकि वह जानती थी उससे पढ़ाई नहीं होती है…

    “यहाँ नाम तुम्हारा रिमशा लिखा है लेकिन फिर सब तुम्हे रिमझिम क्यों बुलाते हैँ…!!वेद के सवाल पर रिमझिम चोंकि और बोलने लगी..

    “सर वह रिमझिम मेरा पुकारू नाम है…मेरा असल नाम रिमशा रॉय है…!!

    वेद की नीली आँखों में अजीब सी ठंडक उतरी और वह अपनी जगह से उठा तो रिमझिम संभल के खड़ी होगई…

    वेद अपना बियर्ड सहलाता हुआ रिमझिम के तरफ कदम बढ़ाने लगा तो रिमझिम जो सम्भली थी वह डर से पीछे हटने लगी…

    “कहाँ रहती हो…..!?

    “G.K रोड…वही रहती हूं….!!रिमझिम बार बार हाथों में पहने सिल्वर कंगन को घुमाये जा रही थी..
    वह ये इसलिए कर थी ताकि घबराहट छुपा सके..
    वेद को उसका यूँ घबराना बहुत भला भला सा लग रहा था..

    खिड़की से छन कर आती सूरज की रौशनी रिमझिम के गोरे चेहरे को दमका रही थी..अजीब ख्वाबनाक माहौल था..

    “सुनो थोड़ा ख्याल रखा करो यूँ कोई खिड़की खोल कर आईने के सामने कपड़े नहीं बदलते है…!!वेद ने जैसे ही कहा रिमझिम के दोनों हाथ मुंह पर चले गए…
    चेहरा रंग बदलने लगा और वह सिर से पैर तक लाल पड़ गई…

    “घबराओ नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा था क्यूंकि मैं अँधेरे में खड़ा था….!!

    रिमझिम को तो कुछ समझ ही नहीं आया बस इस पल दिल कर रहा था की ज़मीन फ़टे और वह उसमे समा जाए…

    वेद की बातों में छुपी तपीश तन बदन में आग लगा गई थी..
    वेद की नीली आँखे पथर बनी नाजुक सी लड़की पर गई और वह आँखों से मुस्कुरा पड़ा..
    रिमझिम की पलकें शर्म से बोझल हुई झुकी हुई थी...

    वेद की मुस्कान गहरी होती जा रही थी और रिमझिम का दिमाग़ सनसन कर रहा था…
    वह मरे मरे कदमो से बाहर आई तो जो उसने सोचा वह ख्याल फिर से शर्म से दिल काट गया..

    “वह तो अँधेरे में थे लेकिन मैं…मैं तो लाइट्स ऑन कर कपड़े बदल रही थी और…और आगे सोचा ही नहीं जा रहा है…
    ये मैं क्या कर गई,,अब वेद सर से नज़रे कैसे मिलाऊँगी…!!

    रिमझिम वापिस क्लास में आ बैठी लेकिन मन में खलबली मची हुई थी..

    To_be_continued…

  • 3. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 3

    Words: 936

    Estimated Reading Time: 6 min

    रिमझिम घर वापिस आई तो चेहरे पर लालिमा देख उर्मिला जी बोली..”फिर किसी से झगड़ा कर लिया क्या..!?

    “नहीं झगड़ा नहीं खुद का कबाड़ा कर लिया है…!!रिमझिम बैग सोफे पर रख वही बैठ गई..

    “चल छोड़ तेरी बातें तू ही जाने मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आता है…
    हाथ मुंह धोकर आ फिर तुझे साड़ी पहनाती हूं..!!

    “मुझे नहीं पहननी कोई साड़ी वाड़ी,,मैं बस इन्ही कपड़ो में श्रद्धा आंटी के यहाँ जाउंगी..”रिमझिम बोली..

    उर्मिला बोली..”बस फिर बहस मत शुरू करना जितना बोला है उतना कर…चल जल्दी जा फ्रेस होकर आ…”

    रिमझिम पैर पटकती हुई उठी और कमरे में फ्रेश होने चली गई…

    रिमझिम टॉवल से मुंह पोंछते हुए आई तो उर्मिला जी ने सबसे पहले उसे ब्लैक ब्लाउज और पेटीकोट पहनाया और फिर काली बनारसी साड़ी पहनाने लगी..क्यूंकि रिमझिम को साड़ी पहनना नहीं आता था..

    थोड़ी देर बाद उर्मिला जी ने प्लेटस बनाये और पल्लू ठीक किया…
    फिर एक बार अच्छे से जायज़ा लेकर उर्मिला जी बालाएं लेने लगी…

    “तू कितनी सुन्दर लग रही है,,बिलकुल जवानी में मैं भी तेरी तरह दिखती थी…!!उर्मिला जी काली और सुनहेरे कड़े को रिमझिम के हाथों में पहनाती हुई नज़र भरके मोहब्बत से देख रही थी…

    “अच्छा तभी आपने पापा को सुंदरता का जाल बिछा कर फंसाया था…
    दादी ने सब बताया मुझे कैसे आप दोनों की लव मैरिज हुई थी…!!
    रिमझिम कहाँ सुधरने वाली थी..

    “हशतत पगली कहीं की….!!तेरी दादी को तो मुझसे शुरुआत से खार था,,,और अगर मुझे सुंदरता का जाल बिछा कर फासना ही होता तो मैं किसी अमीरज़ादे से शादी ना करती….!!
    मेरी माँ ने जज़्बात में आके मेरा हाथ अपने स्टूडेंट रियान के हाथों में थमा दिया,,मैं छोटी थी कुछ समझ भी ना पाई….फिर बहुत बवाल हुए थे की रियान साहब ने अपने पसंद की शादी की है जबकि ऐसा कुछ भी ना था…
    सब नाराज थे लेकिन ज़ब एक साल के बाद तू पैदा हुई तो सबकी नाराज़गी खतम होगई…!!

    रिमझिम आँखे तिरछी कर बोली…”अच्छा फिर वह हिंदी में लिखें लव लेटर्स और वह ब्लैक एंड वाइट फोटोज़…वह सब झूट है…!!

    उर्मिला जी का माथा ठंका और अँगारे चबा के बोली…”तू ज़्यादा नहीं बोल रही है…
    जो भी था सब तेरे पापा की तरफ से था समझी और आइंदा मेरे कमरे के सामानो को बिना इजाज़त छूना नहीं…!!

    रिमझिम होंट भींचे हंसी रोक गई…

    फिर रिमझिम काली छोटी सी बिंदी माथे पर सजाये,अपने लम्बे सियाह बालों को खोले तयार खड़ी थी..

    “सबसे ज़रा तमीज से पेश आना…वैसे भी श्रद्धा कल तेरा पूछ रही थी,,उसका बेटा मानव इंग्लैंड से आया है…!!उर्मिला जी आंगन में खड़ी खुद पर सफ़ेद चादर डाले रिमझिम की तरफ देख रही थी जो गेट से बाहर खेलते हुए बच्चों को देखने में बिज़ी थी…
    बच्चे रिमझिम को साड़ी में सज स्वंर के देख फ्लाइंग किस्सी दे रहे थे…

    “तू सुन भी रही है..!!उर्मिला जी बोली तो रिमझिम हाँ में गर्दन हिला गई..

    रिमझिम को आज मोहल्ले के बच्चे देख सिटी मार रहे थे और वह ख़ुशी से उड़े जा रही थी…

    “मम्मी अजीब सा लग रहा है…ऐसा लग रहा है साड़ी खुल जाएगी और मेरी इज़्ज़त का भाजीपाला हो जायेगा…!!रिमझिम बार बार साड़ी के प्लेटस को हाथों से छू रही थी…

    “बेटा थोड़ी देर के लिए अपना खाली दिमाग़ साइड रख और समझदार बन जा….
    पूजा है अंदर और तरह तरह के लोग आये होंगे तो ज़रा तमीज से,अच्छे से पेश आना…!!उर्मिला जी श्रद्धा जी के घर में आई जहाँ कई ओर औरतें भी खड़ी थी..

    नमस्ते आंटी….
    नमस्ते आंटी…
    रिमझिम उर्मिला जी के साथ हाथ जोड़े सबको नमस्ते करने में बिज़ी होगई…

    “यार ऐसा लग रहा है साड़ी खुल जाएगी,बार बार पैरो में क्यों फंस रही है…कहीं मैं मुंह के बल गिर ना जाऊं….!!रिमझिम को अभी सख्त टेंशन हो रही थी और वह अंदर भी हॉल रूम में साड़ी को एक हाथ से अनाड़ी की तरह पकड़े हुए आई..

    “नमस्ते आंटी…!!विमला जी अपने उम्र के एक मर्द के साथ खड़ी थी जो शेरवानी और पजामा पहने हुए था…
    नीली खूबसूरत आँखे और चेहरे पर गंभीरता भरी नरमी….हट्टे काठे मर्द लग रहे थे…

    “वीर ये हमारे पड़ोस में रहने वाली उर्मिला आंटी है जिनके बारे में कल बताया था…!!विमला बताने लगी फिर उर्मिला जी की तरफ घूम के बोली..

    “आंटी मेरे हस्बैंड है….!!विमला बोली तो वीर झुक कर उर्मिला जी के पैर छूने लगा..

    उर्मिला जी वीर के झुके हुए सिर पर प्यार से हाथ फेर कर बोलीं…
    “अरे नहीं बस बस बेटा…जीते रहो…भगवान तुम दोनों को ख़ुश रखे…!!

    रिमझिम वीर के शक्ल को गौर से देख रही थी कि इन्हे कहीं देखा है या फिर शक्ल कुछ जानी पहचानी है…

    उर्मिला जी ने रिमझिम को कोहनी मारी तो रिमझिम हाथ जोड़े बोली..”नमस्ते…आपसे मिलकर अच्छा लगा..!!

    विमला और वीर बस प्यार से मुस्करा पड़े…

    फिर उर्मिला जी श्रद्धा जी के पास पहुंची जो बहुत ही कीमती साड़ी पहने औरतों के बिच बैठी थी..

    “अरे उर्मिला आओ आओ….!!श्रद्धा जी की नज़र उर्मिला पर गई…

    रिमझिम वहाँ से पीछे हट गई और वाशरूम की तरफ बढ़ गई क्यूंकि कमर से साड़ी खिसक गई थी…

    रिमझिम इतनी हड़बड़ी में थी कि वाशरूम का दरवाजा बंद करना ही भूल गई..
    और पिन हटा कर कमर में साड़ी खोसने लगी,जैसे तैसे वह साड़ी अड़से जा रही थी…
    सीने से पल्लू भी सरक गया था…

    तभी वहाँ धोती सही करता हुआ वेद आया और रिमझिम को इस हालत में देख स्तब्ध होगया…
    फिर जैसे ही रिमझिम की नज़र सामने खड़े वेद पर पड़ी उसके होंटो के बिच दबी पिन निचे गिर गई….
    दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे…
    तभी रिमझिम डर से यहाँ वहाँ झूलने लगी वह बेहोश होने को थी कि वेद ने उसे संभाल लिया…
    वह कुछ कहता या करता उससे पहले ही वाशरूम का दरवाजा खोल श्रद्धा जी अंदर आगई…


    To_be_continued…

  • 4. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 4

    Words: 959

    Estimated Reading Time: 6 min

    दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे…
    तभी रिमझिम डर से यहाँ वहाँ झूलने लगी वह बेहोश होने को थी कि वेद ने उसे संभाल लिया…
    वह कुछ कहता या करता उससे पहले ही वाशरूम का दरवाजा खोल श्रद्धा जी अंदर आगई…

    “ये यहाँ चल क्या रहा है….!!श्रद्धा जी घृणा से बोली तो वेद समझ गया कि अब क्या होने वाला है…
    क्यूंकि जिस हाल में दोनों वाशरूम में थे उसकी बिना पर लोग ग़लत ही सोचते…

    “आप जैसा सोच रही हैँ वैसा कुछ भी नहीं है….!!वेद सर्द लहजे में बोला लेकिन देखते ही देखते श्रद्धा जी की ऊँची आवाज होगई और उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया…
    वेद ने सबसे पहले फुर्ती से रिमझिम के सीने पर पल्लू सही किया और गोद में उठाकर बाहर ले आया…

    “वाह्ह्ह्हह्ह कल का आया लड़का इतना बड़ा गुल खिला गया….!!सारी औरतें जमा थी…

    उर्मिला जी रिमझिम को बेहोश देख घबरा सी गई थी…

    मोहल्ले की औरतें बोलने लगी..“उर्मिला मैं तो तुम्हारी बेटी को बहुत मासूम समझती थी लेकिन वह तो सीधा कांड कर बैठ गई…!!

    “आप लोग ग़लत समझ रही है….मैं ज़ब वाशरूम में गया तो रिमझिम बेहोश पड़ी थी….!!वेद का तो दिल कर रहा था एक एक की ज़ुबान खींच ले लेकिन बातें बढ़ने लगी थी…

    विमला बिच में आगई…”नहीं हमारा वेद ऐसा नहीं कर सकता है….ज़रूर कोई ग़लतफहमी हुई है…!!

    उर्मिला जी बोली…”हाँ रिमझिम…मेरी बेटी बहुत मासूम है वह तो दुन्या ज़माने की मक्कारी से अनजान है….!!

    एक औरत बोली..”मासूम है और इतना बड़ा पाप कर बैठ गई….
    पूजा के घर में पाप कर गई और मासूम है…!!

    दूसरी औरत बोली…”वही तो मैं बोलूं आज ये इतना सज संवर के क्यों आई है…
    यार को फ़साने के लिए आई थी मतलब मछली कांटा निगल गई…!!

    वीर अपने गुस्से को काबू में रखता हुआ बोला..”क्या कुछ भी बोले जा रही है….कम से कम सोच समझ कर बोलिए…किसी पर लांछन मत लगाए..!!

    “लो भई सच बोलूं तो सबको मिर्ची लगती है….आँखों देखा वारदात है ये और अब छुपाने से नहीं छुपेगा..!!श्रद्धा जी जले पर नमक छिड़क रही थी..

    उर्मिला जी फट पड़ी…”बस करो सब…मुझे मेरी बेटी पर पूरा विश्वास है वह ऐसा कुछ नहीं कर सकती है…!!

    तरह तरह की बातें होने लगी थी…

    एक तो वेद का परिवार इस एरिया में नया था ऊपर से बहुत बड़ा इलज़ाम लग गया था…

    शाम को ज़ब रिमझिम को होश आया तो पता चला की उसका अचानक नर्वस ब्रेकडाउन होगया था…

    घर में भियानक सन्नाटा पसरा हुआ था…

    रियान और उर्मिला जी की ख़ामोशी तोड़ती रिमझिम की आवाज आई..

    “मम्मी कहाँ हो आप…!?

    रियान जी उठे और रिमझिम की तरफ बढ़ गए…
    रिमझिम अभी छोटे से बने हॉल रूम में आई ही थी कि रियान का ज़ोरदार थप्पड़ रिमझिम को ज़मीन पर गिरा गया…

    रिमझिम कुछ समझ ही नहीं पाई..
    पीछे खड़ी उर्मिला जी मुंह में दुपट्टा रखे रो रही थी…

    “आप…आप मुझे मार क्यों रहे हैँ पापा…!!रिमझिम मासूमियत से पूछने लगी क्यूंकि जिस बाप ने बचपन से आज तक उसपे एक ऊँगली नहीं उठाई थी आज उसने सीधा थप्पड़ जड़ दिया था…

    “जानती भी हो तुमने क्या किया है….क्या कर आई हो तुम श्रद्धा जी के घर में….पूरे खानदान,पूरे मोहल्ले में हमारे बारे में केसी केसी बातें हो रही है….कितनी घटया गलीज़ बातें लोग तुम्हारे बारे में कर रहे हैँ….
    समाज में मुंह दिखाने के काबिल नहीं छोड़ा…बदनाम कर रख दिया….!!

    रिमझिम के आँखों में आंसू उतर आये..

    रियान जी ने बालों से पकड़ के रिमझिम को उठाया और फिर एक थप्पड़ जड़ा इस बार उसका सिर दिवार से जा लगा…

    “जिस दिन पैदा हुई उसी दिन मर जाती तो आज हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता…
    इतनी जलालत,इतनी लीनामी इतनी बेइज्जती…..
    रियान जी गला फाड़ कर चीख रहे थे…

    “पापा मैंने कुछ नहीं किया…मैं सच कह रही हूं….मुझसे बस ग़लती होगई थी कि मैंने वाशरूम का दरवाजा बंद नहीं किया बाकि जैसा सब समझ रहे हैँ वैसा कुछ भी नहीं है…!!रिमझिम दिवार से लगी लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी…
    सिर दिवार से लगने की वजह से फट गया था…खून बहने लगा था…

    उर्मिला जी बोली…”छोड़ दीजिये…माफ कर दीजिये…!!

    रियान जी बोले…”तुम प्लीज खामोश रहो…ये सब तुम्हारी ग़लती है….जो तुमने इसे आज बिगाड़ कर रख दिया है…
    ये इस घर में नहीं रह सकती है जिसके साथ मुंह काला करवाया है जा उसी के साथ चली जा…!!

    रिमझिम हाथ जोड़ती हुई गिड़गिड़ाने लगी…”पापा नहीं….मुझे माफ कर दीजिये प्लीज….मैं आपके बिना नहीं रह पाऊँगी…!!

    रियान जी सख्ती से बोले…”लेकिन हम रह लेंगे क्यूंकि आज से तू हमारे लिए मर गई….तेरे जैसी औलाद की हमें कोई ज़रूरत नहीं है…!!

    रियान जी ने रिमझिम का हाथ पकड़ा और घिसटते हुए बाहर ले गए…

    “नहीं….नहीं पापा प्लीज…मैं कहाँ जाउंगी,,आप प्लीज मत निकालो…मैं मर जाउंगी….मम्मी….मम्मी….!!
    उर्मिला जी की तरफ रिमझिम देखने लगी लेकिन वह इस पल खुद रियान से बहुत डरी हुई थी क्यूंकि अपने पति को जानती थी वह गुस्से में किसी की भी जान ले सकता है चाहे वह कितना ही करीबी क्यों ना हो..

    रिमझिम की चीखे पूरे आँगन में गूंज रही थी लेकिन रियान जी का दिल पथर का होगया था इसलिए बेटी के आंसू भी उन्हें पिघला नहीं पाए और गेट खोलके बाहर धकेल दिया…
    तेज़ आवाज के साथ मुंह पर गेट बंद कर दिया…

    “पापा प्लीज खोलिये ना….पापा प्लीज…खोल दीजिये मैं कहाँ जाउंगी….मेरा आप लोगों के सिवा दुन्या में कोई अपना नहीं है…!!रिमझिम फुट फुट के रोने लगी और कसके हथेली से लोहे के गेट को पीटने लगी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ….

    रिमझिम की चीखे सुन कई लोग खिड़की और गेट से मुंडी निकाल कर झाँक रहे थे लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा…
    कोई बस हमदर्दी भरी निगाह से देख रहा था कोई घृणा भरी निगाहों से….

    रिमझिम के नन्हीयाल में कोई ना था और नाही ददयाल है…
    अगर रिश्तेदार थे भी तो दूसरे शहर में जा बसे थे..

    रात होगई थी लेकिन गेट ना खुला था…

    To_be_continued…

  • 5. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 5

    Words: 988

    Estimated Reading Time: 6 min

    रिमझिम वही बैठ गई…एक उम्मीद थी के पापा का ग़ुस्सा शांत होगा तो खुद दरवाजा खोलेंगे लेकिन दिल बहुत ज़्यादा रो रहा था…
    माँ बाप के बिना जिंदगी बेरंग थी लेकिन माँ बाप ने दिल को पथर कर लिया था…

    रात ज़्यादा गहरा गई और लोगों के घरो के लाइट्स भी ऑफ होगये…
    रिमझिम ने भी गौर किया की उसके घर से आती रौशनी बुझ सी गई…
    और वह जानती थी ठीक 11 बजे उसके पापा खाना खाके सो जाते थे…

    ये बात उसे तकलीफ देने लगी कि जवान बेटी को घर से बाहर सड़कों पर छोड़ वह अंदर सुकून की नींद सो गए…

    “चलो बच्चे हमारे साथ घर चलो…!!किसी ने बहुत नरमी से रिमझिम के कंधे पर हाथ रखा तो रिमझिम ने मुड़कर देखा जहाँ विमला खड़ी थी…

    रिमझिम के आँखों से मोटे मोटे आंसू गालों में बहह गए…

    रिमझिम ने सुनसान पड़ा इलाक़ा आँखों के सामने सनसन कर रहा था..

    रिमझिम ख़ामोशी के साथ विमला के साथ उनके बड़े से बंगले में आगई…
    वीर के साथ हॉल रूम में वेद भी बेचैनी से टहल रहा था…

    “मुझे लग था वह लोग बात को समझेंगे लेकिन हमें यहाँ आके पता चला कि यहाँ पर लोगों की सोच कितनी छोटी है…!!वेद रिमझिम को अंदर आता हुआ देखने लगा जिसकी हालत बदतर हो रही थी…

    विमला उसे अपने साथ ऊपर वाले कमरे में ले गई..

    “ग़लती लोगों की नहीं…तुम दोनों जिस हाल में पाए गए अगर वहाँ कोई भी होता तो ग़लत ही सोचता लेकिन…विश्वास नाम की भी कोई चीज होती है…
    हम लोगों की ज़ुबान को रोक नहीं सकते लेकिन ग़लती को सुधार सकते हैँ…!!वीर की गहरी बात पर वेद हाँ में गर्दन हिला गया..

    “लड़कियों की इज़्ज़त बहुत नाजुक होती है…तुम्हे शायद कोई फर्क ना पड़े पर उसकी पूरी जिंदगी पल भर में बर्बाद होगई है…उसके सगे बाप ने शक की बिना पर घर से निकाल दिया है…!!वीर वेद के कंधे पर हाथ रख बोल रहा था…

    “मैं रिमझिम का हाथ थामने को तयार हूं…!!वेद ने मज़बूत लहजे में कहा और वह अपने दिल की हमेशा सुनता था…
    इस मामले में रिमझिम बेकसूर थी…
    और वेद उसके लिए दिल में सॉफ्ट कार्नर भी रखता था इसलिए जिंदगी भर साथ निभाना उसे हर बदनामी से बचा सकता था…

    विमला ने रिमझिम का हाथ मुंह धुलाया और उससे बात करने की कोशिश की…

    “भाभी ये सब मेरी ग़लती है…मुझसे हमेशा ग़लतियां होती हैँ….मैं बहुत बड़ी लापरवाह हूं…!!रिमझिम की आँखे ज़्यादा रोने की वजह से लाल पड़ गई थी..

    “बच्चे ऐसे रोना नहीं चाहिए और तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है…वेद को भी एक बार नॉक कर वाशरूम जाना चाहिए था…
    तुम क्यों रो रो कर जी को जला रही हो हम कोई रास्ता निकाल लेंगे….!!

    रिमझिम ना में गर्दन हिलाती हुई बोली..”आप नहीं जानती मेरे पापा ग़ुस्से के बहुत तेज़ है….एक बार किसी चीज से मुंह फेर ले तो फिर कभी मुड़कर नहीं देखते हैँ…!!

    विमला जी उसके हाथों को थाम कर नरमी से बोली…”तुम हमारे साथ रह सकती हो और हाँ हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है….!!

    रिमझिम ना में गर्दन हिलाती हुई बोली..”नहीं पापा नाराज होंगे क्यूंकि बिना किसी रिश्ते के मैं यहाँ हरगिज नहीं रह सकती हूं…!!

    वेद कमरे में आता हुआ बोला…”तुम मेरी बीवी बनकर यहाँ रह सकती हो….
    मैं जानता हूं ये बात कोई यूँही कह देने वाली नहीं है लेकिन हम एक समाज में रहते हैँ जहाँ एक कुंवारी लड़की को किसी गैर के छत के निचे बिना रिश्ते के साथ रहना बदनाम कर सकता है और साथ ही मेरी वजह से आज जो कुछ भी हुआ वह मैं सही करना चाहता हूं….
    एक बार तुमसे शादी हो जाएगी सबकी ज़ुबान में ताले लग जायेंगे…!!

    रिमझिम हैरानी से खड़ी होगई….

    विमला जल्दी से बोली…”वेद तुम जाओ…रात ज़्यादा होगई है,, हम कल बात करेंगे…!!

    वेद सिर झुका के चला गया…

    विमला रिमझिम को पुचकारती बहला फुसला के सुला गई…

    सुबह वह देर तक सोती रही…

    ज़ब किसी ने उसके चेहरे पर आते बालों को एक साइड प्यार से किया तो वह कुमुनाती हुई आँखे खोल गई और खुद पर वेद को झुका देख हड़बड़ा के उठ बैठी और दुपट्टा सीने पर फैलाये बोली..

    “आप इस वक़्त यहाँ….!?

    वेद ने सख्ती से कहा..“ये मेरा बंगला है,मेरा कमरा है जहाँ तुम इस वक़्त पैर पसारे बेख्याली में सो रही थी,,आपको फिलहाल उठ जाना चाहिए क्यूंकि 10 बज चूका है…!!

    पीछे से विमला आती हुई बोली…”ये कपड़े पहनके जल्दी से तयार होकर बाहर आओ…शाबाश जल्दी करो उठी मेरा बच्चा…!!

    रिमझिम को कल रात की बात याद आई तो वह उठ खड़ी हुई..

    वेद नाजुक सी जान को देख बोला..“तुम खुद से चली जाओगी ना या फिर गिर पड़ कर बेहोश होने का इरादा है…!!

    रिमझिम मुंह बना के बोली..”मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं बस कल ज़्यादा ही घबरा गई थी,,वह सब अचानक हुआ और मैं डर गई थी…!!

    वेद चुप होगया वह ओर ज़्यादा कुछ पूछना नहीं चाहता था वरना वह और ज़्यादा उदास हो जाती…

    रिमझिम फ्रेश होकर बाहर आई और नीले रंग के आसमानी सलवार कमीज़ में खुले बालों को तोलये से झटकी मारने लगी..

    वीर दरवाजे में ऊँगली से खटखट कर बोला..”क्या मैं अंदर आसकता हूं बेटा जी…!!?

    रिमझिम ने जल्दी से दुपट्टा कंधे पर रखा और बोला…”जी जी अंदर आजाये…!!

    वीर अंदर आगये और उसे तयार देख प्यार से उसके सिर पर हाथ रख बोली…”मैंने सुबह सुबह मोहल्ले वालों और तुम्हारे पापा से बात की बेटा जी,,वह लोग तुम से बहुत नाराज है और वेद को भी यहाँ अब रहने नहीं देंगे….खेर अगर तुम दोनों पवित्र बंधन में बंध जाओ तो वह लोग हमें सुकून से रहने देंगे…
    तुम्हारे आगे पूरी एक जिंदगी पड़ी है और तुम अभी बच्ची हो,ग़लती हुई है कोई नहीं हम समझते हैँ लेकिन दुन्या वाले नहीं समझेंगे इसलिए क्या तुम वेद से शादी के लिए तयार हो….अगर नहीं हो तो कोई बात नहीं हम तुम्हारे फैसले की इज़्ज़त करेंगे…!!

    रिमझिम के सामने कोई और रास्ता नहीं था वह हाँ में गर्दन हिला गई…

    “मैं तयार हुँ…शायद पापा मुझे माफ ही कर दें…!!रिमझिम की बात सुन वीर फीका सा मुस्कुराया…

    To_be_continued…

  • 6. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 6

    Words: 971

    Estimated Reading Time: 6 min

    वीर फीका मुस्कुराया….
    क्यूंकि आज ज़ब वह रियान जी से बात करने गया था तब वह बहुत ही बुरी तरह पेश आये थे यहाँ तक रिमझिम को जहर पीला के मारने की भी बात की थी,उनकी बातों से ऐसा लग रहा था की अब उन्हें कोई मतलब नहीं है कि रिमझिम की शादी हो या कुछ भी…

    कुछ देर बाद रिमझिम शांति से सोफे पर बैठी थी और विमला ने उसके सिर पर लाल चुन्नी ओढ़ा दी…
    फिर चारों बंगले में बने माता रानी के मंदिर के सामने हाथ जोड़े खड़े थे…

    विमला के हथेली पर रखी सिंदूर के डब्बे से वेद ने सिंदूर चुटकी में भरी और रिमझिम के तरफ बेपनाह मोहब्बत आँखों में समोये उसे देखने लगा…
    वेद ने सिंदूर मांग में आराम से भरी तो रिमझिम के अंदर अजीब सा अहसास जन्म ले गया जो उसने आजतक महसूस नहीं किया था…..

    “चलो अब ये मंगलसूत्र रिमझिम के गले में बांध दो ताकि ये तुम्हारे रिश्ते में बंध जाए…!!विमला ने मंगलसूत्र आगे बढ़ाई तो वेद ने मंगलसूत्र हाथों में लिया और झटके से रिमझिम के गले में बांध गया…
    ज़ब मंगलसूत्र बांधते हुए वेद की उंगलियां रिमझिम के गले से लगी तो उसके पैट में गुदगुदी सी लगी…

    “चलो होगई…शादी होगई…!!वीर और विमला दोनों ख़ुशी से ताली बजाने लगे तो रिमझिम को लाज सी आने लगी और वेद मुस्करा पड़ा…..

    फिर थोड़ी देर बाद मैरिज सर्टिफिकेट में दोनों ने सिग्नेचर कर ठंडी सांस ली….

    विमला रिमझिम को गले से लगाकर बोली..”चलो तुम हमारी फॅमिली में शामिल हो ही गई…
    बहुत प्यारी हो तुम…कितनी नाजुक और पतली दुबली हो…!!

    रिमझिम हँस पड़ी क्यूंकि ये उसे बहुत सुनने को मिलता था लेकिन कोई नहीं जानता था कि वह कितना ठोंसती थी फिर भी उसका फिगर एक दम परफेक्ट था…

    वेद ने जानबूझकर कर गला खंखार कर कहा…”शादी ज़रूर हुई है लेकिन मेरे कमरे से दूर रहना समझी…!!

    विमला बोली..”बच्चा इसके बात पर ज़्यादा धियान मत देना,,ये वैसे भी ज़्यादा बोलता नहीं है….
    इसलिए मैं दिन भर घर में बैठी बैठी पक जाती थी अब तुम अगिई हो तो मुझे एक बेटी मिल गई है….और तुम मेरे बगल वाले कमरे में रहना ताकि हम दोनों साथ साथ ही रहें…!!

    रिमझिम मुस्करा पड़ी क्यूंकि विमला में ममता की ठंडी छाओ थी….

    “अब तुम कमरे में जाओ और आराम करो,,और हाँ बच्चा तुम कल से बेफिक्र होकर कॉलेज जाना…मैं हॉस्पिटल जाती हूं भया ऑफिस बाकि हम सब शाम तक आजाते हैँ और मिलजुल कर सब काम करते हैँ इसलिए ज़्यादा बिलकुल भी मत सोचना…!!विमला की बातों से पता चला की वह मशहूर गयनाइकोलोजिस्ट विमला राजपूत है…

    रिमझिम बातें कर उठी और सीढ़ियां चढ़ ऊपर जाने लगी तभी सामने रास्ता रोके वेद आ खड़ा हुआ…

    “सुनो कम दिमाग़ वाली लड़की हमारी शादी ज़रूर हुई है लेकिन मुझसे कोई उम्मीद नहीं रखना वरना….और हाँ मैं बहुत ज़ालिम और जल्लाद इंसान हूं जो बहुत ज़्यादा खतरनाक है….
    मुझसे दस हाथ की दुरी में रहना और कॉलेज में किसी को पता नहीं चलना चाहिए की तुम्हारी मुझसे शादी हुई है क्यूंकि बहुत सारी हॉट लड़कियों का दिल टूट जायेगा,,इसलिए किसी को बताने की हिम्मत नहीं करना की तुम जैसी धान पान नाजुक कली मेरी बीवी है…!!

    रिमझिम का चेहरा स्पाट होगया और वह ओबासी लेती हुई बोली…”ओके सर…अब मैं जाऊं…!!

    वेद सकपका गया क्यूंकि उसे लगा था इस बात पर रिमझिम लड़ेगी या फिर तमाशा लगाएगी और रोने लगेगी…

    रिमझिम कमरे में आई और सोचा उसने ज़रूर पिछले जन्म में कोई बहुत बड़ा पाप किया होगा तभी ऐसे खड़ूस सडु और अकड़ू प्रोफेसर से उसकी शादी होगई है…
    वह शादी तो करना चाहती थी लेकिन ऐसे खड़ूस इंसान से नहीं….

    रिमझिम के सपनों में बेहद हैंडसम राजकुमार था जो उसे खूब सारा प्यार करता और कम से कम उसे पढ़ाई से दूर ले जाता फिर रिमझिम को शादी के बाद कोई भी कॉलेज जाना नहीं पड़ता,पढ़ाई के लिए सिर मारना नहीं पड़ता लेकिन यहाँ तो हालात उलटे ही थी…
    शादी भी इतनी जल्दी होगई और सब वापिस से उसे कॉलेज जाना था..

    “मुझे चाहिए था मोस्ट रोमांटिक हस्बैंड लेकिन मिला क्या एक ज़ालिम नीली आँखों वाला प्रोफेसर हस्बैंड….और वह रोमांटिक बिलकुल भी नहीं है…!!रिमझिम का सपना पल भर में चकनाचूर होगया और वह हाथ पैर पटक कर बेड पर लौटने पोटने लगी..

    दिन में खाने के लिए ज़ब रिमझिम को बुलाया तो वह निचे बड़े से डाइनिंग रूम में जा बैठी…
    उनका घर बहुत बड़ा था और नए ज़माने के डिज़ाइन के ज़रिये ढाला गया था…

    वीर गला खंखार के डाइनिंग टेबल पर बैठता हुआ बोला…”ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिसकी वजह से सब खामोश है,अब धीरे धीरे फिरसे हमारी जिंदगी नार्मल होने लगेगी और ये चार लोग जो फालतू बातें पूरे एरिया में कर रहे हैँ वह भी भूल जायेंगे….
    वेद याद रखना अब रिमझिम तुम्हारी ज़िम्मेदारी है तो इसे कॉलेज ले जाना और अपने साथ वापिस ले आना,,उसके खाने पिने का हर चीज का ख्याल तुम रखोगे…तुम्हारे कमरे में कल से 2 बेड होगा और 2 वार्डोरोब होगा क्यूंकि रिमझिम तुम्हारी बीवी है तो तुम्हारे साथ ही रहेगी…!!

    वेद हाँ में गर्दन हिला गया…
    रिमझिम ने धियान दिया कि वीर की सारी बातें वेद मानता था…

    “और बेटा अगर कोई भी प्रॉब्लम हो या ये तुम्हे डराये धमकाये तो बेझिझक हमें बताना…!!वीर की बात पर विमला अपनी हंसी रोक गई लेकिन रिमझिम के लबों पर एक बड़ी सी मुस्कान तेर गई..

    दिन भर रिमझिम लिविंग रूम में बैठी टीवी देखती रही रात हुई तो अंगड़ाई लेती हुई वेद के कमरे में जा घुसी,,वेद इस वक़्त वाशरूम में था तो रिमझिम ने वेद का वार्डोरोब खोला और टी शर्ट और पैंट निकाल लिया ताकि वह नाईट सूट में कन्फर्मबली सो सके…

    जल्दी जल्दी रिमझिम ने अपनी कुर्ती उतारी और बेड पर बैठ कर ठंडा सांस लेने लगी कि चलो आज उसने दरवाजा लॉक कर रखा है…
    लेकिन जैसे ही बाथरूम से वेद टॉवल से गिला बाल पोंछते हुए निकला एक बार फिर उसके होश उड़ गए…

    To_be_continued…

  • 7. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 7

    Words: 985

    Estimated Reading Time: 6 min

    रिमझिम ने अपनी कुर्ती उतारी और बेड पर बैठ कर ठंडा सांस लेने लगी कि चलो आज उसने दरवाजा लॉक कर रखा है…
    लेकिन जैसे ही बाथरूम से वेद टॉवल से गिला बाल पोंछते हुए निकला एक बार फिर उसके होश उड़ गए…

    रिमझिम खुद से ही बातें कर टी.शर्ट को हाथों में पकड़े बैठी थी..
    रिमझिम की नज़र भी वाशरूम से निकलते वेद पर गई तो एक बार फिर वह वेद को तकने लगी जैसे यकीन करना चाहती हो कि सच में सामने खड़ा इंसान वेद ही हो..

    वेद उसके घूरने से तंग आगया और वाशरूम में दुबारा बंद होगया…

    रिमझिम ने जल्दी से टी.शर्ट पहनी और कपड़े बदल कर वाशरूम के दरवाजे पर नॉक कर बोली…”मैंने कपड़े बदल लिए है,,बाहर आजाये…!!

    वेद जो अंदर खड़ा सीने में उठती बेताबी पर काबू पाने की कोशिश में लगा था वह बाहर आया और रिमझिम को ओवरसाइज टी शर्ट और पैंट पहने देख बोला..

    “तुम हमेशा मेरे सामने बिना कपड़े क्यों आ जाती हो…!!?

    रिमझिम असहज होकर बोली…”सॉरी सर….मैं बहुत ज़्यादा शर्मिंदा हूं लेकिन मुझे लगा था आप रूम में नहीं है…!!

    वेद उसके कंधे पर हाथ रख मज़बूती से बोला…”ये हमारा कमरा है तुम मेरी वाइफ हो और मैं तुम्हारा हस्बैंड हूं…..!!

    रिमझिम नासमझी से वेद के नीली आँखों में देखने लगी और बोली…”मैं समझी नहीं सर…!!

    रिमझिम वेद कि नीली आँखों में बदलते जज़्बात देख सीहर उठी थी…

    वेद पीछे हट गया और बेड पर बैठता हुआ बोला..”कुछ नहीं…हटाओ तुम नहीं समझोगी….चलो सोजाओ कल तुम्हे कॉलेज भी जाना है…!!

    रिमझिम कॉलेज का नाम सुन पिली पड़ गई लेकिन मजबूर थी क्यूंकि अब उसे बात माननी पड़ेगी…

    वेद ब्लैंकेट ओढ़े बेड के एक साइड होकर सोगया…
    रिमझिम भी ब्लैंकेट ओढ़े एक साइड होकर लेट गई…

    रिमझिम मन में खुद से बोल रही थी…”यारर कितना वेयर्ड फील हो रहा है…मैं और प्रोफेसर एक साथ एक ही बेड में सोये हुए हैँ…
    हम लोग हस्बैंड वाइफ है मतलब जैसा रोमांटिक फिल्मो में दिखाया जाता है वैसा ही…लेकिन यहाँ तो कुछ भी वैसा नहीं है…!!

    वेद का भी वही हाल था वह मन में उठते जज़्बातो के तूफान को क़ाबू में किये था,,यकीन करना मुश्किल था पर इतनी जल्दबाजी में शादी हुई और कल तक वह जिस कमरे में अकेला रहता था आज उसी कमरे में एक नाजुक हसीन सा वजूद रच बस गया था..

    “यकीन नहीं होता मैं रिमझिम के इतने करीब कब आगया,,,शायद तब से ही ज़ब रिमझिम को पहली बार क्लास में खोया हुआ देख मैं खुद दिल खो बैठा था या फिर तब ज़ब वह बारिश में गिला बदन लिए नहा रही थी या शायद उस दिन ज़ब वह आईने के सामने कपड़े बदल कर छोटी छोटी शरारतें कर मेरा दिल धड़का गई थी…!!

    रिमझिम ने करवट बदल कर वेद की पीठ को घुरा और ठंडी सांस भर के रह गई..

    “ये सब तो बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है…क्या भगवान जी ने यही मेरी जिंदगी लिखी थी….
    डांट खाओ,पढ़ाई करो और बेइज्जती करवाओ….!!

    रिमझिम फिर पलट गई और आँखे बंद कर सोने की कोशिश में लग गई…
    वेद ने करवट बदली और रिमझिम को बांहो में खींच लिया…

    रिमझिम जो अभी आँखे बंद कर सोने की फिराक में थी वह पट से आँखे खोल काँप उठी…

    “ये सर कर क्या रहे हैँ….!?

    रिमझिम को अपने कमर में कसती हुई वेद की बांहे बहुत ज़्यादा शिद्दताना थी…
    वेद का स्पर्श रिमझिम की दिल की धड़कने दुगनी रफ्तार में तेज़ी से बढ़ा रहा था…

    “सर आप क्या कर रहे हैँ,,मुझे घबराहट हो रही है….!!
    रिमझिम अनजान बन गई..

    वेद रिमझिम के कानों में आहिस्ता से बोला..”कुछ भी नहीं तुम सो जाओ बस मुझे नींद नहीं आरही थी…!!

    रिमझिम फरमाबरदार स्टूडेंट की तरह बोली…”ओके सर….!!

    रिमझिम आँखे बंद कर गई….
    दिल में डर की जगह अब गुदगुदाहट ने ले ली और अजीब सी बेचैनी जी जान में फेल गई थी लेकिन हर चीज को रिमझिम नज़रअंदाज़ कर सोगई…

    वेद तो उसे बांहो में भरके उसके बालों की महक साँसो में उतारता रहा और खुद को यकीन दिलाता रहा कि हाँ उसका मेहबूब अब उसकी बांहो में आराम से सोरहा है…
    दिल मेहबूब को पाकर जहाँ ख़ुशी से झूम रहा था वही उसे अपना हक ना हासिल होने की वजह से उदास भी था…

    सुबह हुई तो रिमझिम की आँखे खुली और खुद को वेद की बांहो में सोता हुआ पाके नाजाने क्यों शर्म से वह लज्जा गई और फिर से एक बार दिल की बेकरार धड़कने तेज़ी से धड़कने लगी…

    “क्या सच में प्रोफेसर मेरे हस्बैंड है…क्या ये मुझे प्यार करेंगे लेकिन मैं तो….मैं तो स्टूडेंट हूं या फिर….
    रिमझिम आगे कुछ सोच नहीं पाई क्यूंकि वेद सूरज की किरणों से परेशान आँखों में बाज़ू रख करवट बदल कर सोगया था…

    “क्या मुझे इन्हे उठाना चाहिए या….!!रिमझिम उठ बैठी और वेद के गालो को प्यार से छू गई लेकिन फौरन अपना हाथ पीछे खींच के अपनी उंगलियों को देखने लगी जो गुलाबी पड़ गई थी…
    हिम्मत कर एक बार और वेद की बढ़ी हुई दाढ़ी को उंगलियों से सहलाया और बोली..

    “सर…उठ जाए कॉलेज जाना है….लेट हो रहे हैँ…!!

    वेद पर कोई असर नहीं हुआ…

    रिमझिम नाक फुला के रहगई और वेद का गाल थपथपाने लगी लेकिन वेद उठा नहीं…

    “कुम्भकरण बनकर सो रहे हैँ…!!रिमझिम को गुस्सा आने लगा था…

    वेद ने आँखे बंद किये ही रिमझिम का हाथ पकड़े अपनी तरफ खिंचा तो रिमझिम उसके सीने से जा लगी..

    “नई नई शादी हुई है….अपने हस्बैंड को बेहद प्यार से गुडमॉर्निंग बोलकर या किश कर उठाते हैँ….!!वेद की आवाज सुन रिमझिम के गालों में टूट कर सुर्खियां बिखर गई…

    वेद ने अपना गाल रिमझिम के गालों में मसला तो वह तड़प उठी क्यूंकि वेद की दाढ़ी चुभने लगी थी…
    वेद अपनी नीली आँखों से रिमझिम की शर्म ओ हया देख खुद पर क़ाबू नहीं कर पाया और उसपे झुका ही था की बाहर से विमला की आवाज आई..

    “चलो बच्चा लोग उठ जाओ…नाश्ता तयार है…!!

    दोनों चोंके और संभल के बैठ गए…
    रिमझिम जल्दी से वाशरूम में जा घुसी क्यूंकि उसे बहुत ज़्यादा शर्म आरही थी…

    To_be_continued…

  • 8. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 8

    Words: 1003

    Estimated Reading Time: 7 min

    वेद ने अपना गाल रिमझिम के गालों में मसला तो वह तड़प उठी क्यूंकि वेद की दाढ़ी चुभने लगी थी…
    वेद अपनी नीली आँखों से रिमझिम की शर्म ओ हया देख खुद पर क़ाबू नहीं कर पाया और उसपे झुका ही था की बाहर से विमला की आवाज आई..

    “चलो बच्चा लोग उठ जाओ…नाश्ता तयार है…!!

    दोनों चोंके और संभल के बैठ गए…
    रिमझिम जल्दी से वाशरूम में जा घुसी क्यूंकि उसे बहुत ज़्यादा शर्म आरही थी…
    वेद भाभी के यूँ अचानक आजाने से तिलमिला उठा क्यूंकि बेहद हसीन मौका वह हाथ से गवा बैठा था…

    रिमझिम ज़ब वाशरूम से बाहर आई तो रूम में कोई नहीं था…
    वह धड़कते दिल के साथ बाहर आई तो विमला हाथों में हरे रंग का सूट लिए खड़ी थी…

    “तुम आज ये पहन कर तयार होकर जाना सबकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाएंगी…!!

    रिमझिम कामदानी भारी भरकम सूट लेते हुए बोली…

    “भाभी मैं आपके कमरे में तयार हो जाऊं क्यूंकि सर…मतलब वह तयार हो रहे हैँ…!!

    विमला झिझक और शर्म देख रिमझिम को अपने साथ अपने कमरे में ले आई…

    ज़ब रिमझिम निचे डाइनिंग टेबल में तयार होकर आई तो वीर मुस्करा के विमला की तरफ देखने लगा और विमला गुरुर से सिर उठा गई..

    “देखा आपने कितने अच्छे तरिके से मैंने रिमझिम को तयार किया है…आज कोई भी नज़र भर हमारी रिमझिम को देखेगा तो बेहोश हो जायेगा…!!

    रिमझिम हरे कामदार दुपट्टा को कंधे पर सेट करे लम्बे बालों को खुले छोड़ सुनहेरी आँखों से अपनी आस्तीन में जड़े हरे और गुलाबी स्टोन को देख रही थी…

    रिमझिम ने नाश्ता किया और कॉलेज के लिए ज़िद कर अकेले ही निकल गई…
    वैसे उसे डर लग रहा था कि वह अगर बाहर निकलेगी तो फिर वही गंदी नज़रे और उसपे तंज कसे जायेंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ…
    क्यूंकि रिमझिम और वेद की शादी खबर फेल गई थी…
    अब कहने सुनने को कुछ बचा नहीं था..

    रिमझिम अपनी ही धुन में कॉलेज पहुंची और क्लास में जाके बैठ गई…
    क्लास की लड़कियां सब रिमझिम को आँखे फाड़े देख रही थी वह आज कुछ ज़्यादा ही प्यारी लग रही थी…

    तभी क्लास में प्रोफेसर श्री आये और लेक्चर देने लगे….
    तभी अचानक उनकी नज़र रिमझिम पर पड़ी जो खिड़की से बाहर देखने में बिज़ी थी…

    “गेट आउट….निकलो तुम अभी के अभी….
    कितनी बार इस लड़की को समझाया लेकिन ये ढीट ही रहेगी और फर्स्ट बेंच में बैठने में तुम्हारी मौत आती है ज़ब देखो लास बेंच में बैठी खिड़की से बाहर देखती रहती हो….
    खिड़की से बाहर आखिर तुम देखती क्या हो….!!
    प्रोफेसर श्री साँवले मगर बहुत ही ज़्यादा अट्रैक्टिव पर्सनालिटी रखने वाले बंदे थे जिनकी हाल फिलहाल में शादी हुई थी…

    “सॉरी सर…वह बस कुछ तबियत ठीक नहीं है…!!रिमझिम सॉरी करने वाले अंदाज़ में बोली तो प्रोफेसर श्री उसके सामने आ खड़े हुए और ऊपर से निचे तक एक नज़र देखने के बाद बोले…

    “तबियत ठीक नहीं है लेकिन मिस रिमझिम कितना बनठन के कॉलेज आई है ऐसा लगता है कल ही तुम्हारी शादी हुई है…!!

    फिर पूरा क्लास हँस पड़ा और आज रिमझिम को बहुत ज़्यादा बुरा लग रहा था क्यूंकि कल से जो भी हुआ वह किसी को बता नहीं सकती थी…

    “2 साल से तुम 2nd ईयर में अटकी हुई है,,तुम्हारे सारे दोस्त पास आउट होकर यूनिवर्सिटी भी चले गए लेकिन तुम…खेर तुम्हे बोलना ही बेकार है प्लीज लिव…!!
    प्रोफेसर श्री की बात पर रिमझिम आँखों में नमी लिए क्लास के बाहर जा खड़ी हुई…

    कभी किसी बातों से फर्क नहीं पड़ने वाली रिमझिम को आज बहुत रोना आने लगा था..

    फिर ज़ब प्रोफेसर श्री क्लास से बाहर निकले तो वेद से टकरा गए…

    “अच्छा तुम्हारी क्लास है…!!

    वेद बाहर सिर झुकाये खड़ी रिमझिम को देख रहे थे जो हरे कामदानी सूट पहने बालों को लापरवाही से खुले छोड़े हुए थी…
    हरे और गुलाबी मिले जुले दुपट्टे को कंधे पर फैलाये वह मासूम सी गुड़या दिख रही थी..

    “श्री ये बाहर क्यों खड़ी है फिर कुछ किया क्या…!?वेद के सवाल पर श्री के माथे पर बल पड़ गए…

    श्री चीड़ के बोला..”हाँ वही क्लास में पढ़ाई पर इस लड़की का बिलकुल धियान नहीं है बस खिड़की से बाहर देखती रहती है…
    पता नहीं ये लोग क्यों माँ बाप का पैसा और हमारा वक़्त बर्बाद करने चले आते है…मैं तो इस लड़की को समझा समझा के थक गया हूं,,हर साल ये फ़ैल ही होती आरही है…पता नहीं इसका क्या होगा देखो ज़रा कितना सज संवर के आई है बस स्टाइल करवा लो…
    वेद तुम भी इसे क्लास में मत लेना रहने दो आज पूरे क्लास में बाहर ही खड़ा…!!
    श्री बोलकर चला गया..

    “तुम जाओ जाके मेरे ऑफिस रूम में बैठो…!!वेद रिमझिम के सर पर प्यार से थपथपा के बोला तो रिमझिम वहाँ से चली गई…

    वेद क्लास में गया और ज़ब वापिस ऑफिस रूम में आया तो टेबल पर सिर रखे वह सोगई थी..

    वेद को रिमझिम सोते हुए कोई मासूम बच्ची जैसी लगी,,वेद उसके लाल पड़े गालो को उंगलियों से सहलाने लगा…
    दिल में बहुत सारे अरमान मचलने लगे थे…

    रिमझिम वेद की छुआन से आँखे खोले जाग गई..

    वेद स्पाट लहजे में बोला…”अब बताओ तुम आखिर ऐसा क्यों करती हो…पढ़ाई में सीरियस क्यों नहीं होती हो…”

    रिमझिम साफ साफ बोली..”क्यूंकि मुझे पढ़ाई नहीं पसंद…नहीं पढना मुझे…!!

    वेद कुछ सोचने लगा फिर बोला..”देखो रिमझिम…ग्रेजुएशन तो तुम्हे हर हाल में कम्पलीट करनी होगी वरना मैं नहीं चाहता कल हमारे बच्चे तुम्हारा मज़ाक़ बनाये इसलिए पढ़ लिख लो..!!

    रिमझिम बच्चों का नाम सुन ना में गर्दन हिला गई और शर्म से बोली..”नहीं प्लीज…मुझे नहीं पढ़ना है और अब तो शादी होगई है फिर मैं क्यों पढ़ाई करूँ…मैं घर के सारे काम करने को तयार हूं पर पढ़ाई नहीं करूंगी…!!

    वेद रिमझिम के करीब जाके खड़ा होगया और उसके लम्बे बालों की लट को ऊँगली में लपेट कर बोला…”देखो अभी सिर्फ तुम पढ़ाई पर धियान दो बाकि घर का काम करना,हाउसवाइफ बनना उसकी ज़रूरत नहीं है…
    और हाँ कान खोलके सुन लो या तो पढ़ाई करो या फिर पूरी तरह मेरी बीवी बनने को तयार हो जाओ…आज रात ही मैं तुमपे अपनी मोहब्बत की मोहर लगाकर हक जमा लूंगा…फैसला तुम्हारे हाथ में है…!!


    To_be_continued…

  • 9. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 9

    Words: 962

    Estimated Reading Time: 6 min

    वेद रिमझिम के करीब जाके खड़ा होगया और उसके लम्बे बालों की लट को ऊँगली में लपेट कर बोला…”देखो अभी सिर्फ तुम पढ़ाई पर धियान दो बाकि घर का काम करना,हाउसवाइफ बनना उसकी ज़रूरत नहीं है…
    और हाँ कान खोलके सुन लो या तो पढ़ाई करो या फिर पूरी तरह मेरी बीवी बनने को तयार हो जाओ…आज रात ही मैं तुमपे अपनी मोहब्बत की मोहर लगाकर हक जमा लूंगा…फैसला तुम्हारे हाथ में है…!!

    रिमझिम अपने दुपट्टे को कसके पकड़ आँखे मीच गई क्यूंकि वेद उसके चेहरे के बेहद करीब झुक गया था…

    वेद उसके चेहरे को अपने हाथों में दबा के रोब में बोला..
    “चलो जल्दी बोलो क्या करना है….पढ़ाई करोगी या आज रात पत्नी बनकर मुझे ख़ुश करोगी…!!

    “पढ़…पढ़ाई करूंगी और अच्छे से धियान से पढ़ाई करूंगी….”रिमझिम जल्दबाजी में बोली क्यूंकि वेद की बातें सुन दिल हलक में आ अटका था..

    वेद आँखे छोटी कर लापरवाही से बोला..”ठीक है फिर तब आजसे अभी से तुम्हे मन लगाकर पढना होगा और हाँ इस बार के क्लास टेस्ट में नम्बर कम आये तो फिर सोच लेना…!!

    रिमझिम यहाँ वहाँ देख पसीने से भीगी हथेली को देखने लगी…

    “लेकिन…!!

    वेद जो पलट के खड़ा कुछ सोच रहा था रिमझिम की आवाज सुन मुड़ा…

    “प्लीज सर मेरी स्टडी में थोड़ी हेल्प कर दीजिये क्यूंकि मैं कोई कोचिंग क्लासेस नहीं जाती हूं और कोई दोस्त वगेरा भी नहीं जो नोट्स दे सके…!!रिमझिम की सुनहेरी आँखे बार बार इधर उधर देख अपनी घबराहट छुपा रही थी…

    वेद की नीली आँखे रिमझिम की बातें सुन चमकी और फिर वेद बोला…”हाँ क्यों नहीं….मैं तुम्हारी मदद बिलकुल करूंगा…ओफ़्कौर्से मैं ही हूं जो सिर्फ तुम्हे प्यार से पढ़ा सकता हूं…!!

    रिमझिम थैंक्स बोलकर चली गई,दो मिनट और रूकती तो वेद की निगाहेँ उसपर जादू ही चला देती…

    “ओह्ह्ह गॉड ये वेद सर तो बहुत ज़्यादा रोमांटिक निकले…मैं बर्दास्त नहीं कर पारही हूं….इनकी बातें इनका लहजा और इनकी आँखे…नीली आँखे….!!
    रिमझिम मुस्करा पड़ी…
    लेकिन वेद की बातें याद आते ही वह खुद के गाल पर थप्पड़ लगा गई..

    “नहीं नहीं…रिमझिम होश में आ….वह सिर्फ तुझे बहका रहे हैँ अगर सच्ची मुच्ची में पढ़ाई नहीं की तो…
    नहीं मैं पढूंगी मन लगाकर पढूंगी…!!
    रिमझिम वापिस घर आई तो घर पर कोई नहीं था…

    विमला भाभी हॉस्पिटल गई थी और वीर भया ऑफिस…

    “क्या मुसीबत है…घर में रहो पढ़ाई करो,,सोचा था शादी हो जाएगी तो अपने हस्बैंड के साथ एन्जॉय करूंगी,,हनीमून पर लंदन पेरेस जाउंगी…लेकिन अब कुछ मुमकिन नहीं है…
    याररर वेद जी सर है मेरे….मुझे उनके करीब जाने से बहुत अजीब लगता है,,एक तो शर्म आती है दूसरा उन्हें देख दिल बहुत तेज़ी से धड़कने लगता है….!!

    रिमझिम ऊँची आवाज में बोलती हुई किचन में आई और फ्रिज खोलके खाना निकाला,,विमला भाभी खाना बनाके गई थी…

    रिमझिम को बुरा लगा की वह अकेली ही सारा काम कर गई है…
    पर रिमझिम ने ठंडी सांस भरी और खाना गर्म किया…

    फिर जैसे ही प्लेटस चमच लिए बाहर डाइनिंग रूम में आई वेद को वहाँ बैठा देख हैरान रहगई…

    “सर आप…इतनी जल्दी घर आगये…!?
    रिमझिम टाइम देखने लगी..

    वेद चेहरे पर हथेली रख आराम से बोला..”मैं रोज़ इसी टाइम में घर आता हूं,,तुम तो मेरे बिना ही कॉलेज से निकल भागी…मेरा इंतेज़ार तक नहीं किया…!!

    रिमझिम जल्दी से बोला…”सॉरी सर लेकिन मुझे लगा आप लेट से घर आएंगे इसलिए मैं जल्दी निकल गई..”

    वेद आँखे तिरछी कर बोला..”अभी मेरी नई नई शादी हुई है मुझे ज़्यादा घर में बीवी के साथ रहना वक़्त बिताना चाहिए इसलिए जल्दी आगया…!!वेद हाथ से इशारा कर रिमझिम को अपने पास बुलाने लगा..

    रिमझिम भारी कदमो से वेद के करीब आई..

    वेद ने उसका नर्म नाजुक हाथ अपने मज़बूत हाथों में थाम लिया…
    वेद ने अपने लबों तक अपने हाथ के साथ उसके हाथों को पकड़े सफर किया फिर उसकी हाथों को चुम गया तो रिमझिम झिझक के पीछे हटी और बोली..

    “आप थके होंगे ना और भूक भी लग रही होगी तो मैं आपके लिए भी खाना गर्म कर लाती हूं…”
    रिमझिम बस भागने के फिराग में थी..

    वेद ने कुछ नहीं कहा और रिमझिम का हाथ मज़बूती से पकड़े रहा…
    फिर धीरे से रिमझिम का हाथ छोड़ उसे कमर से पकड़ अपनी गोद में बिठा लिया..
    रिमझिम के पैट में कसके बाज़ूओं को बांधे उसके बालों में मुंह छुपा गया…

    “सरररर…ये आप….!!रिमझिम को वेद की गद्दारी पर गुस्सा आया क्यूंकि उसने कहा था वह कोई हक नहीं जमायेगा…

    वेद चेहरा उठाए खुमारी भरी गंभीरता से बोला…”याद है मुझे अपनी बात लेकिन बीवी थोड़ी बहुत गुस्ताखी तो इस दिल की माफ कीजिये….
    अब हम आपको थोड़ा थोड़ा प्यार तो कर ही सकते है….!!

    रिमझिम कुछ नहीं बोली क्यूंकि ज़ुबान में फिर शर्म से ताला लग गया था…
    हाँ तेज़ धड़कता दिल और उसकी झिझक दोनों साथ थी…

    वेद की सरसराती उंगलियों का स्पर्श,,उसकी तेज़ सांसे अपने गर्दन पर महसूस कर रिमझिम के बदन में झुरझुरी सी उठने लगी थी..

    “इतना तयार होकर कॉलेज गई लेकिन एक बार भी मुझे अपना ये खूबसूरत रूप दिखाने नहीं आई…ऐसा क्यों किया बीवी…!?
    वेद का सवाल रिमझिम को बहुत अटपटा सा लगा..

    “कॉ…कॉलेज में तो आप मेरे प्रोफेसर हैँ और मैं कोई ग़लती नहीं करना चाहती जिससे सबको पता चल जाए मेरी शादी होगई है…!!रिमझिम की बात पर वेद गर्दन हाँ में हिला गया..

    “हाँ सही है….लेकिन मुझसे कुछ मत छुपाना और एक बात याद रखना तुम मेरी हो…मेरी स्टूडेंट और मेरी बीवी…!!
    वेद ने बीवी पर अच्छा खासा ज़ोर दिया था जैसे वह जताना चाहता हो की वह सिर्फ अब उसकी ही है…

    “जी…जी समझ गई…!!रिमझिम फरमाबरदारी से बोली..

    वेद ने उसके बालों को गर्दन से एक साइड किया और अपने जलते होंट रख गर्दन चूमने लगा…
    रिमझिम ने मन में उठने वाली जज़्बातों की तूफान में बेहते हुए वेद का बाज़ू जल्दी से पकड़ लिया…

    वेद नीली आँखों में खुमारी लिए गर्दन पर जगह जगह होंट रख चूमने लगा और रिमझिम की हर स्पर्श के बाद हालत खराब होती जाती…


    To_be_continued…

  • 10. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 10

    Words: 949

    Estimated Reading Time: 6 min

    वेद नीली आँखों में खुमारी लिए गर्दन पर जगह जगह होंट रख चूमने लगा और रिमझिम की हालत हर स्पर्श के बाद हालत खराब होती जाती…

    रिमझिम भी बेकरार हो उठी और वेद की तरफ पलट कर उसके सीने से लगी छुप गई..

    “मुझसे शर्मा कर मेरे ही सीने से लगी चेहरा छुपा गई…!!
    वेद ने रिमझिम को सीने से लगाते हुए प्यार से थपकने लगा…

    शाम को वीर और विमला दोनों वापिस आई तो दोनों को सोफे पर बैठ कर पढ़ाई करता देख मुस्करा पड़े…

    वेद रिमझिम को इक्वशन समझा रहा था लेकिन रिमझिम के सब सिर के ऊपर से जा रहा था…

    “ये तीसरी बार है ज़ब मैं तुम्हे समझा रहा हूं…अब गौर से देखना….!!
    रिमझिम मुंडी झुकाये गौर से देखने लगी लेकिन इस बार भी उसे कुछ समझ नहीं आया लेकिन डर से उसने हाँ में गर्दन हिला दी…

    फिर सबो ने मिलकर रात का खाना खाया…
    रिमझिम ने एक बात नोटिस की के इस घर में सब ज़रूरत के हिसाब से बातें करते हैँ,,कोई फालतू बकवास नहीं करता है…

    रिमझिम किचन में हेल्प करने विमला भाभी के जाती तो वहाँ दोनों में ढेरो बातें होती..
    विमला भाभी बहुत ही प्यार और नरमी से पेश आती थी…
    वीर भया को देख वह गुडमॉर्निंग या गुडनाइट कहती तो वह बस प्यार से मुस्करा कर उसके सिर पर हाथ फेर देते…

    अब तो रिमझिम को भी इस शांति भरे माहौल की धीरे धीरे आदत होगई थी…

    रिमझिम को आये अब एक हफ्ता गुज़र गया और उसने कई बार अपने बालकनी से खड़े अपने पुराने कमरे को तका जहाँ वह खड़ी आईने के सामने बातें करती,तयार होती और बाल संवारा करती थी…

    खेर इस कमरे की भी आदत पड़ने लगी थी..

    वेद के सामने वह अभी तक पूरी तरह खुली नहीं थी,रिमझिम ने अपने और वेद के दरमियाँ शर्म का पर्दा गिरा रखा था…

    वेद बेड पर सो रहा था और रिमझिम अपने बेड पर लेटी रोमांटिक नॉवेल पढ़ हीहीही किये जा रही थी…
    फिर उसके गाल शर्म से लाल पड़ते गए और रिमझिम के होंट दांतो तले दबा लिया…

    “हान्नन्न ये सब नॉवेल स्टोरी में ही अच्छा लगता है…रियल लाइफ में ज़ब वेद सर मेरे करीब आते है तो मुझे बिजली के झटके लगने लगते हैँ…
    शर्म से पानी पानी हो जाती हूं…..!!
    रिमझिम तकये के निचे नॉवेल छुपाकर रख गई और वेद के बिसेप्स को घूरने लगी…

    “वेद सर की बॉडी….ऐसा लगता है रियल में कोई हैंडसम हीरो है…पर मुझे क्या मुझे तो स्टडी पर फोकस करना है…”रिमझिम आँखे बंद कर सोगई…

    सुबह हुई तो रिमझिम अंगड़ाई लेकर उठी और अपने वार्डोरोब से कपड़े निकाल वाशरूम की तरफ बढ़ गई…
    वीर भया ने रूम में एक एक्स्ट्रा बेड और वार्डोरोब खास कर रिमझिम के लिए लगवा दिया था…
    रूम वैसे भी काफ़ी बड़ा था…इतने बड़े रूम में चार बेड आराम से रखे जा सकते थे पर खेर इसकी अभी कोई फिलहाल ज़रूरत नहीं थी…

    ज़ब रिमझिम टॉवल से बाल पोंछती बाहर आई तब तक वेद भी उठ चूका था…

    “गुडमॉर्निंग सर….!!

    वेद को तो रोज़ गुडमॉर्निंग सुन सिर में दर्द पकड़ गया था…

    वेद उठा और उसके हाथों से टॉवल लेता हुआ बोला…”ये रोज़ गुडमॉर्निंग सर,गुडमॉर्निंग सर क्या लगा रखा है….
    हम घर पर है अपने बैडरूम में हैँ तो यहाँ तुम मेरी बीवी हुई…समझती हो ना बीवी का मतलब या मैं अपने तरिके से समझाऊं…!!

    रिमझिम वेद को करीब आते देख जल्दी से बोली…”जी जी समझती हूं….!!

    वेद मुस्करा के बोला…”गुड…फिर आज से मुझे वेद कहना….या फिर वेद जी जैसे बीवियाँ अपने पति परमेश्वर को बुलाती है…
    भाभी को देखा है वह भया को सुनते हो जी कर बुलाती है तुम भी मुझे वैसे ही बुलाना..”

    रिमझिम टुकुर टुकुर वेद को देखने लगी जो सुबह सुबह आज बहुत ज़्यादा रोमांटिक मस्ती भरे मूड में था…

    वेद की नीली आँखे बालों की लटों से गिरते हुए पानी की बुंदे पर गई जो गर्दन से फिसल कर सीने तक जा रही थी…

    रिमझिम ने वेद की नज़र अपने खुले हुए सीने पर महसूस की तो जल्दी से वहाँ से हटी और दुपट्टा ओढ़ लिया…

    “इतनी शर्म काहे केलिए करती हो…ऐसा वैसा कुछ देख भी लूंगा तो क्या होगया…
    हस्बैंड….पति परमेश्वर और क्या कहते हैँ उसे शोहर हूं तुम्हारा….
    कुछ तो हक जताने दो…!!
    वेद बोलता हुआ वाशरूम की तरफ बढ़ गया..

    रिमझिम मुंह पर हाथ हलकी सी हंसी हँस पड़ी…
    सच में वेद जी बहुत ज़्यादा शरारती हैँ…

    वेद भी थोड़ी देर में बाहर निकल आया ज़ब रिमझिम अपने बैग में बुक्स डाल रही थी..

    वेद को देख रिमझिम को पसीने छूट गए…
    वेद सिर्फ टॉवल ही लपेट कर आगया था..

    वेद के सिक्स पैक और मज़बूत बांहे खुली हुई थी…

    रिमझिम को अपने हलक में कांटे चुभते हुए महसूस हुए…

    “वेद…वेद जी आप अंदर जाके कपड़े पहनये प्लीज…!!रिमझिम आँखों पर हाथ रख रिक्वेस्ट करने लगी..

    “क्यों…तुम्हे मेरी हॉटनेस बर्दास्त नहीं हो रही क्या…
    देखो बीवी जी क्या है ना मैंने तुम्हे कई बार कपड़े बदलते और बिना कपड़ो के देख ही लिया है तो अब तुम भी देख लो…हिसाब किताब पूरा कर लो…"

    अब रिमझिम को लगने लगा था कि उसकी शादी एक निहायत बेशर्म प्रोफेसर से हुई है…

    “देखिए प्लीज मेरी इन मासूम आँखों पर रहम कीजिये…जाए प्लीज…”
    वेद रिमझिम की बात सुन अपनी नीली आँखों में नाराज़गी लिए रिमझिम की तरफ बढ़ा और उसके हाथों को आँखों से हटाकर बोला..

    “बीवी जी देखना तो तुम्हे पड़ेगा…वरना आज तुम्हे कॉलेज नहीं जाने दूंगा..”

    रिमझिम हँस पड़ी और बोली…”वेद जी ये अजीब ज़बरदस्ती है…
    आप पागल होगये है क्या…!?

    “प्लीज आप ऐसा मत करये आपका टॉवल खुल जायेगा…प्लीज मत करे…

    वेद मासूम बनता हुआ बोला..”ओह्ह्ह समझ गया मतलब तुम मुझे बिना टॉवल के देखना चाहती हो..कोई बात नहीं ये ख्वाहिश तुम्हारी पूरी कर देता हूं…

    रिमझिम सकपका गई और जल्दी से ना में गर्दन हिला गई..

    To_be_continued…

  • 11. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 11

    Words: 1399

    Estimated Reading Time: 9 min

    वेद मासूम बनता हुआ बोला..”ओह्ह्ह समझ गया मतलब तुम मुझे बिना टॉवल के देखना चाहती हो..कोई बात नहीं ये ख्वाहिश तुम्हारी पूरी कर देता हूं…

    रिमझिम सकपका गई और जल्दी से ना में गर्दन हिला गई..

    “वेद जी नहीं देखना….प्लीज कपड़े पहन लीजिये…”

    वेद उदास होगया…

    “हाँ….मैं समझ गया तुम मुझे देखना ही नहीं चाहती हो….आखिर हमारी शादी यूँ मजबूरी में जो हुई है…”

    रिमझिम दोनों हाथ उठाकर बोली…”मजबूरी में हुई या जैसे भी हुई…आप मेरे हस्बैंड है और मैं बात दिल से क़ुबूल कर चुकी हूं….”

    वेद शर्ट पहनता हुआ बोला…”झूट बोलने की कोई ज़रूरत नहीं है…तुम्हारे हर एक एक्शन से पता चलता है कि तुम मुझसे कतराती हो…!!

    रिमझिम तंग आके बोली…”कतराती नहीं हूं बस अजीब लगता है आप मेरे टीचर है इसलिए…”

    वेद टाई हाथों में लेता हुआ बोला…”तुम्हे टाई बांधनी आती है…!?

    “नहीं आती…!?

    तुमसे कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए…!!
    वेद खुद ही अपनी टाई को बाँधने लगा..

    “ज़ब इन्हे टाई खुद से बाँधने आती है तो मुझसे क्यों पूछ रहे थे…!!?
    रिमझिम मन में सोचती हुई वेद को मुक़म्मल तयार होते देखने लगी जो खुद पर परफ्यूम छिड़क रहा था…
    कीमती थ्री पीस सूट,महंगी घड़ी और बालों एक स्टाइल से एक साइड कोम्ब कर वह तयार खड़े थे…

    “यकीन नहीं आता की सर इतने ज़्यादा हैंडसम है और इनकी आजतक कोई गर्लफ्रेंड नहीं रही होगी या फिर रही होगी…खेर मुझे क्या मैं तो इनकी बीवी हूं…”

    वेद रिमझिम के सामने चुटकी बजा के बोला…”क्या सोचने लगी चलो कॉलेज के लिए हम लेट हो रहे हैँ…”

    रिमझिम और वेद निचे नाश्ते के टेबल पर बैठे ख़ामोशी से नाश्ता कर बाहर निकल गए…

    वेद अपनी गाड़ी में जा बैठा और रिमझिम पैदल चल दी…
    वैसे वेद ने उसे साथ चलने को कहा था लेकिन उसने साफ इंकार कर दिया क्यूंकि दो कदम की दुरी पर ठहरा कॉलेज इतनी बड़ी मेरसीडीस में बैठकर जाने से उसकी शान घट जाती…

    रिमझिम सीधा क्लास में आई और आज फर्स्ट बेंच में मिताली के साथ बैठ गई बाकि सब भी हैरान थे…
    रिमझिम ने आज पहली बार सबसे बात की थी क्यूंकि अब उसे लगने लगा था की दोस्त बनाने ज़रूरी है वरना नोट्स नहीं मिलेंगे…

    सारे क्लास अटेंड करने के बाद रिमझिम तृषाण से जा टकराई जो कभी उसका क्लासमेट हुआ करता था लेकिन वह पास होकर सीनियर बन गया था और अब कॉलेज में यूनियन कम्युनिटी ज्वाइन कर ली थी…

    रिमझिम उससे भी हाल चाल पूछने लगी वैसे तो तृषाण बहुत फेमस प्लेबॉय के नाम से कॉलेज में मशहूर था लेकिन रिमझिम के आगे उसकी चक्की नहीं चलती थी..

    ज़ब तृषाण के हाथों में हाईफाई करते हुए हँसते हुए रिमझिम बात कर रही थी तभी वहाँ से वेद 3rd ईयर के रजिस्टर लेकर क्लास में जा रहा था…
    रिमझिम पर नज़र पड़ी तो हटी ही नहीं…

    रिमझिम को तृषाण के साथ देख वेद वही जम के रह गया….पता नहीं क्यों बहुत ही खतरनाक फिलिंग जागने लगी…

    रिमझिम अब सिर्फ स्टूडेंट ही नहीं उसकी बीवी भी थी और कोई उसकी बीवी के साथ यूँ हँस हँस के बातें करे….
    वेद का दिल किया एक मुक्का मार तृषाण के दांत ही तोड़ डाले लेकिन नहीं…अभी सही वक़्त नहीं था…
    और रिमझिम से तो वह फुर्सत में बात करेगा…

    वेद क्लास में चला गया और आज उसका मूड बहुत ज़्यादा बिगड़ा हुआ था…
    बार बार रिमझिम का हँसता हुआ चेहरा याद आरहा था…
    उसके साथ तो कभी इतना हँसकर बात नहीं किया…

    वेद का सारा गुस्सा 3rd ईयर के स्टूडेंट्स पर निकला और वह लोग डर से काँप ही उठे थे..

    आज वेद के साथ रिमझिम कि क्लास कोई नही थी इसलिए रिमझिम जल्दी ही घर आगई…
    वेद आज जल्दी घर नहीं आये थे..

    रिमझिम कमरे में गई और शॉवर लेकर निचे आई…
    वह लुज़ सी शर्ट और प्लाज़ो पहने उसपे दुपट्टा ओढ़े हुए थी क्यूंकि घर में वीर भया भी थे…
    अपने घर में तो जिस तरह मन था वैसे रहती थी…

    रिमझिम ज़ब लिविंग रूम में आई तो वेद टाई की नॉट ढीली करता हुआ टांग पर टांग चढ़ाये परेशानी में उंगलियों से टेबल और खटखटा रहा था..

    “आप अभी आये हैँ….!?

    वेद रिमझिम की आवाज सुन नाखुशी से बोला…”तो तुम क्या चाहती थी मैं आज घर ही नहीं आता…”

    रिमझिम वेद का बदला हुआ मूड देख बोली..”नहीं मेरा वह मतलब नहीं था…!!
    आप परेशान लग रहे हैँ…!?

    वेद नज़रे रिमझिम पर टिकाते हुए बोला..”हाँ परेशान हूं पर तुम्हे क्या फर्क पड़ता है…जाओ मुझे अकेला छोड़ दो..!!

    रिमझिम का मुंह बन गया..”एक तो मैं इनसे इनकी परेशानी पूछ रही हूं और ये मुझे नखरे दिखा रहे हैँ…”

    रिमझिम जाते हुए बोली..”पानी लाऊं आपके लिए….या फिर कुछ…

    वेद रिमझिम की बात काट कर बोला..”एक काम मुझे जहर पीला दो…”

    रिमझिम ना में गर्दन हिलाकर बोली…”नहीं…ये मैं नहीं कर सकती हूं…आप जैसे भी हैँ हस्बैंड है मेरे अगर आपको कुछ होगया तो मेरा क्या होगा..”

    वेद माथे को छूकर बोला..”तुम दो मिनट अकेली नहीं छोड़ सकती…सिर दर्द से फटा जा रहा है…”

    रिमझिम चली गई तो वेद ने ठंडी सांस ली..

    “कॉमन वेद तुम ज़्यादा सोच रहे हो…होसकता है वह रिमझिम का कासुअली फ्रेंड हो या फिर भाई….एक मिनट भाई नहीं होसकता क्यूंकि रिमझिम वन पीस है…”

    रिमझिम वेद को गहरी सोच में डूबा देख गला खंखार के बोली…”ये लीजिये सिर दर्द की गोली और पानी…”

    वेद रिमझिम के हथेली में रखी गोली को घूरने लगा…

    “डरये नहीं जहर नहीं है…”

    वेद ने गोली ली और पानी के साथ हलक के पार कर गया..

    “तुम्हारे हाथों से तो जहर भी पी लूंगा…”वेद की बात पर रिमझिम का मुंह टेढ़ा होगया..

    वेद रिमझिम की तरफ देख बोला..”ये तुम्हारा मुंह क्यों टेढ़ा होगया..”

    रिमझिम टाइट लिप स्माइल कर बोली..”आप कभी ठीक रहते हैँ फिर कभी अजीब रियेक्ट करने लगते है…”

    वेद से रहा नहीं गया और वह पूछ बैठा..”वह लड़का तृषाण कौन है…!?

    रिमझिम बिना किसी भाव के बोली…”कज़न है मेरा पहले हम साथ में क्लासमेट हुआ करते थे…वह पास आउट होता हुआ आगे पहुंच गया और मैं फ़ैल होकर जूनियर बन गई…”

    वेद को पता नहीं क्यों अब बुरा लगने लगा क्यूंकि उसने रिमझिम पर ख्वामखवा शक किया था और पता नहीं क्या क्या सोचने लगा था…

    “मुझे लगा….---

    रिमझिम फीके लहजे में बोली..”आपको लगा वह मेरा बॉयफ्रेंड है….
    वेद जी मैं आपकी बीवी हूं और मुझे इस बात का आपसे ज़्यादा ख्याल है….माना की हमारे बिच ऐसा कोई रिश्ता नहीं जुड़ा है जिससे आपको तस्सली हो जाए की मैं वफ़ादार हूं या सिर्फ आपकी हूं लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि मुझे आपके इलावा हर दूसरा पसंद है…
    अब जो कुछ भी है आप ही है मेरे लिए…और मेरे लिए काफ़ी है…प्यार का नहीं पता लेकिन आप ही थे जिसने मेरा उस वक़्त हाथ थामा था ज़ब मेरे खुद के माँ बाप ने धक्के देकर घर से निकाल दिया था..
    आपने अपना नाम दिया और यकीन करये आपका नाम मेरे नाम से जिंदगी भर जुड़ा रहेगा…
    क्यूंकि इज़्ज़त करती हूं मैं आपकी….

    वेद इतने लम्बे चोड़े स्पीच के बाद बोला..”बस इज़्ज़त….प्यार नहीं करती हो मुझसे…!!

    रिमझिम माथे पर बल डाले रही..

    “कम से कम एक महीना तो होने दीजिये,साथ में रहने की आदत होने दीजिये…ऐसा थोड़ी होता है यूँही प्यार हो जाए..”

    वेद उसे कमर से खींच कर अपनी तरफ कर गया…”अचानक और यूँही प्यार होता है..
    सोच समझ कर कभी प्यार नहीं होता…”

    रिमझिम के दोनों हथेली वेद के सीने से टिक गई थी…

    “ठीक है समझ गई अब छोड़ दीजिये भाभी के आने का वक़्त होगया है…!!

    वेद अपना चेहरा उसके करीब कर मधिम आंच देते लहजे में बोला…”अभी कोई फिलहाल घर नहीं आएगा क्यूंकि आज वीर भया भाभी को डिनर पर बाहर ले गए हैँ…”

    रिमझिम जो अभी तक शेर बनी हुई थी ये बात सुन उसकी हालत खराब होगई..

    वेद रिमझिम का चेहरा दोनों हाथों से थामता हुआ बोला…”मैं चाहता हूं तुम मेरे प्यार को महसूस करो…”

    रिमझिम चेहरा फेर गई…

    “डरो नहीं मैं काटता नहीं हूं…!!

    रिमझिम के गाल लाल पड़ गए…रिमझिम के आँखों में इकरार के दिए रोशन थे लेकिन फितरती शर्म ओ हया उसपे हावी हो रहे थे…

    वेद की जलती अंगारा सांसे रिमझिम के चेहरे को दहकाने लगी थी,,नीली आँखों की खुमारी और सरसराती उंगलियां जो कमर पर गुदगुदा रही थी…
    रिमझिम ने लरजते पलकें उठाई तो वेद मुस्करा पड़ा क्यूंकि शर्माता हुआ मेहबूब दुन्या जहांन में सबसे ज़्यादा प्यारा था..

    वेद से तो और ज़्यादा बर्दास्त ही नहीं हुआ और वह रिमझिम के होंट को पूरी शिद्दत से अपने होंटो में कैद कर गया..
    रिमझिम ने पूरी शिद्दत से आँखे मुंद कर वेद की शर्ट को हथेली में भींच ली…

    To_be_continued…

  • 12. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 12

    Words: 895

    Estimated Reading Time: 6 min

    वेद की जलती अंगारा सांसे रिमझिम के चेहरे को दहकाने लगी थी,,नीली आँखों की खुमारी और सरसराती उंगलियां जो कमर पर गुदगुदा रही थी…
    रिमझिम ने लरजते पलकें उठाई तो वेद मुस्करा पड़ा क्यूंकि शर्माता हुआ मेहबूब दुन्या जहांन में सबसे ज़्यादा प्यारा था..

    वेद से तो और ज़्यादा बर्दास्त ही नहीं हुआ और वह रिमझिम के होंट को पूरी शिद्दत से अपने होंटो में कैद कर गया..
    रिमझिम ने पूरी शिद्दत से आँखे मुंद कर वेद की शर्ट को हथेली में भींच ली…

    जितना वेद बेताबी दिखा रहा था उतना ही रिमझिम बेचैन हो उठ रही थी…

    वेद की ये तड़प रिमझिम अपने अंदर उतार रही थी…
    वेद की बढ़ी हुई दाढ़ी रिमझिम के गालो में चुभ रही थी लेकिन परवाह किसे थी..

    दोनों के होंट आपस में मिले हुए थे,,थोड़ी देर बाद वेद उसके होंटो से प्यार करता हुआ अलग हुआ…
    अब वह अपने होंट रिमझिम के गालो पर रगड़ता हुआ भारी आवाज में कह रहा था..

    “बीवी जी आपके होंटो में अलग ही नशा है…आपके होंटो की आदत लग गई तो हम बुरे फंसेंगे…!!

    रिमझिम वेद की मज़बूत बांहो में कैद अब तक आँखे बंद किये हुए थी..

    “आँखे तो खोलिये…”
    वेद उसके चेहरे पर नज़रे जमाये था…

    रिमझिम कुछ भी नहीं बोली…

    “इतना भला कौन शर्माता है…”
    वेद अब खफा होने लगा था…

    “ओये चलो नार्मल हो जाओ ऐसे रहोगी तो मैं कुछ कर बैठूंगा…”
    वेद खफा खफा सा हँस पड़ा की क्या एंटीक पीस बीवी मिली है…

    रिमझिम कुछ नहीं बोली बस वेद के सीने में मुंह छुपा गई…

    “वेद जी प्लीज मुझे ऐसे मत देखिए…”

    “कैसे नहीं देखूँ….बीवी हो मेरी,,मैं तो देखूंगा…”
    वेद ज़िद्दी बच्चों के जैसे बोला और रिमझिम के बालों को उंगलियों में फंसाए खेलने लगा..

    फिर थोड़ी देर बाद वेद रिमझिम के साथ किचन आगया ताकि उसे फिर तंग कर सके…

    वेद रिमझिम को काम करते देखता रहा,वह नज़रे चुराए खुद को नार्मल शो कर रही थी…
    फिर दोनों ने साथ में मिलकर खाना खाया…

    वेद जाके रूम में फ्रेश हो आया तब तक रिमझिम बुक्स लिए बैठी सिर मारती रही…

    वेद उसके करीब ही बेड पर बैठता हुआ बोला…”चलो अब प्यार को साइड रख पढ़ाई कर ली जाए…”

    वेद रिमझिम को पढ़ाने लगा लेकिन रिमझिम को कुछ भी समझ ही नहीं आरहा था फिर भी वह हाँ में मुंडी हिला देती…
    लेकिन ज़ब वेद कोई सवाल पूछता तो वह ऐसा दिखाने लगती कि वह याद करने की कोशिश में लगी हो…

    वेद अच्छे से समझ गया था की ये लड़की पढ़ाई में बिलकुल ज़ीरो है…

    “ज़ब तुमसे पढ़ाई नहीं होती तो इतने बड़े कॉलेज में एडमिशन क्यों लिया…!?

    वेद का सवाल सुन रिमझिम बोली..”पापा की वजह से…एक्चुअली मुझे 12th के बाद फाइन आर्ट्स करने थे लेकिन उन्होंने करने नहीं दिया….वह चाहते थे मैं B.com करू इसलिए कर रही हूं….!!

    वेद समझ गया कि फॅमिली प्रेशर…कई स्टूडेंट्स के साथ होता है…

    रिमझिम मुस्कान लिए बोली…”वैसे तो मैं बचपन से पढ़ाई में कोई ब्रिलियंट स्टूडेंट नहीं थी लेकिन मैंने कोशिश बहुत की…पर पापा कभी अप्प्रेसियट नहीं करते बस मम्मी ही थी जो खुलके तारीफ करती थी…
    पापा को तो हमेशा बेस्ट सुपर बेस्ट बेटी चाहिए थी पर शायद मैं वह कभी बन ही नहीं सकी,,ज़ब पढ़ाई में फ़ैल रही तो पापा का धियान अपनी तरफ करने केलिए घर के सारे कामों में परफेक्ट होगई पर उसमे भी उन्होंने बस यही कहा की शादी की जल्दी है इसे….ये कहकर मेरी सारी मेहनतों में शादी का लेबल लगा दिया…
    मैंने घर के काम उन्हें ख़ुश करने के लिए सीखे उन्होंने शादी का ठप्पा लगा दिया…बस यही सब सुनते आरही हूं…”

    वेद ने रिमझिम के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा…”मैं क्या ही कहूँ लेकिन मेरे हिसाब से उनलोगो को तुम्हे सपोर्ट करना चाहिए था…पर कोई बात नहीं अब तुम्हारी ज़िम्मेदारी मुझपर है अब तुम देखना दिन रात तुम्हारी तारीफों के पुल बांध दूंगा…!!

    रिमझिम ने आँखे छोटी कर कहा…”कुछ दिन मेरे साथ रहिये फिर आपको खुद पता चल जायेगा की मैं किसी लायक की नहीं हूं….!!
    सिर्फ घर के काम आते हैँ…”

    वेद अपना माथा उसके माथे से टकरा के बोली…”और तुम मेरे साथ कुछ दिन रहो फिर तुम्हे खुद पता चल जायेगा की तुमसे मैं किस तरह काम ले सकता हूं….”
    रिमझिम अपना माथा सहलाने लगी..

    “तुम हद से ज़्यादा इंसिक्योर हो…शायद तुम्हे बचपन से वैसा ही फील हुआ हो लेकिन हमारे घर में ऐसा कुछ नहीं है…
    तुम जैसी भी हो परफेक्ट हो और क्यूंकि मैं तुम्हारा हस्बैंड हूं इसलिए मुझे तुम्हारी ज़रूरत है,,कभी खुद को बेकार मत समझना तुम मेरी ज़रूरत ख्वाहिश सब बन सकती हो क्यूंकि बिवी हो मेरी…”

    रिमझिम बुक्स समेट अपने बेड पर जाने लगी क्यूंकि बीवी बीवी सुनकर उसके कान पक गए थे..

    वेद रिमझिम को दूसरे बेड पर जाता हुआ देख बोला…”कब तक दूर भागती रहोगी..कभी तो तुम्हे मेरी मोहब्बत तड़प समझ आएगी…”

    रिमझिम कान पर हाथ रख बोली…”आपकी नवाज़िशो का शुक्रिया लेकिन रात होगई है सो जाए…”

    वेद एक तक्या रिमझिम के मुंह पर फेंक मारा और वह अपने बिस्तर पर धब से गिर गई…
    वेद मुंह पर हाथ रख हीहीही करने लगा..

    रिमझिम गुस्से से उठी और वही तक्या वेद की तरह पूरी ताकत से उछाल फेंका…
    जो वेद के कंधे से आ टकराया…फिर देखते ही देखते दोनों अपने अपने बेड पर बैठे बैठे एक दूसरे को तक्या फेंक कर मारने लगे..

    रिमझिम को बहुत मज़ा आने लगा क्यूंकि कभी उसने किसी के साथ इस तरह झगड़ा नहीं किया था…
    दोनों की हंसी कमरे में गूंजने लगी थी…

    To_be_continued…

  • 13. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 13

    Words: 940

    Estimated Reading Time: 6 min

    रिमझिम को बहुत मज़ा आने लगा क्यूंकि कभी उसने किसी के साथ इस तरह झगड़ा नहीं किया था…
    दोनों की हंसी कमरे में गूंजने लगी थी…

    •••

    सुबह की एक नई शुरुआत हुई दोनों ही बहुत ख़ुश थे क्यूंकि दोनों में दोस्ती अच्छी होगई थी और शरारतें भी बढ़ने लगी थी..

    रिमझिम नीले रंग के सिम्पल सलवार सूट और हमरंग दुपटे में भी वेद को बहुत प्यारी लग रही थी…

    वेद भी तयार खड़ा था वही अपने रोबदार प्रोफेसर वाले लुक में….
    शर्ट में ब्लैक टाई बांधे,ब्लैक कोट और सेम कलर की पैंट….वह बहुत ही हैंडसम था उसकी नीली आंखे स्टूडेंट्स को डराने के लिए काफ़ी थी…

    लेकिन अब रिमझिम को नीली आँखों में खुद के लिए मोहब्बत की गहराई देख सुकून सा मिलता था…
    लेकिन वेद को रिमझिम की सुनहेरी आँखे ज़्यादा पसंद थी जो हमेशा उसके सामने होने से शर्म ओ लिहाज से झुक जाती थी..

    “वेद मैं आज घर जाके मम्मी से बात करूंगी…”

    वेद बोला…”मुझे बताने या पूछने की कोई ज़रूरत नहीं है…वह तुम्हारा माँ बाप का घर है ज़ब जाना चाहो जा सकती हो…तुम कहो तो मैं भी चलूँगा…!!

    रिमझिम ना करती हुई बोली…”नहीं वेद जी पहले मैं तो घर का हाल देख आऊं,,मैं मिल आती हूं और बात करने की कोशिश भी करूंगी अगर सब अच्छा रहा तो नेक्स्ट टाइम आप साथ चलना…”

    वेद उसकी परेशानी और चिंता को समझ रहा था…

    “सब अच्छा ही होगा और वह माँ बाप है तुम्हारे…माफ कर ही देंगे आखिर एकलौती बेटी हो…”

    वेद रिमझिम के कंधो पर मोहब्बत से हाथ रख मज़बूत हौसले कर गया..

    वेद ने वीर भया को भी इस बात का बताया तो वह चिंतित होगये क्यूंकि रियान जी का मिजाज बहुत सख्त था लेकिन जितना ही सख्त था आखिर रिमझिम बेटी थी उनकी…
    विमला जी खामोश रही बस रिमझिम के मन की उठती तकलीफ समझती थी..

    वेद रिमझिम को आल दी बेस्ट बोलकर चला गया और विमला भाभी और वीर भया भी काम पर निकल गए…

    रिमझिम ने भी टाइम देखा और अपना गेट खोल जी कड़ा कर घर के आंगन में कदम रखा तो मन भारी होगया और रोना सा आगया…

    घर के अंदर जैसे ही आई उर्मिला जी रिमझिम को देखते ही नाखुशी से बोली…

    “यहाँ क्यों आई है….!?

    रिमझिम को लगा शायद उसे सुनने में ग़लती हुई है…लेकिन उसकी सगी माँ जिसने उसे जन्म दिया पाल पोश के बड़ा किया वह ऐसा बोल रही थी…
    रिमझिम का पहले ही मन भारी हो रहा था ये सुनने के बाद उसकी आँखे बरस पड़ी..

    “मम्मी मुझे आपकी याद आरही थी और पापा….

    उर्मिला जी बात काट कर गंभीरता से बोली…”तेरी शादी होगई है…इतने बड़े घर में रहने लगी है….!!
    फिर भला तुझे हमारी याद क्यों आने लगी..और पापा का मत पूछ तूने उन्हें कहीं मुंह दिखाने के काबिल छोड़ा है या अब भी कोई दामन में दाग लिए आई है…”

    रिमझिम ही जानती थी अपनी माँ के मुंह से ऐसे शब्द सुन उसके दिल पर क्या बीत रही थी…
    दिल कट के खून खून हो रहा था अजीब सी क़यामत थी जो उसपे गुज़र रही थी…

    रिमझिम आंसू दुपट्टा से साफ करती नज़र दीवारों पर गड़ा गई तो वहाँ पर भी जो देखा वह बर्दास्त से बाहर था…
    दिवार पर उसकी सारी लगी तस्वीरें गायब थी और फॅमिली फोटो में से भी उसकी फोटो गायब थी…

    उर्मिला जी सर्द लहजे में बोली…”मेरे कितने अरमान थे कि मैं तेरी शादी अपने पसंद के लड़के से करवाती लेकिन तूने तो पहले ही अपने लिए एक यार ढूंढ रखा था जिससे तूने शादी भी कर ली और अब शादी कर ली है तो वही उसी घर में रह…बार बार यहाँ आके झूटी हमदर्दी जताने की कोई ज़रूरत नहीं है…
    हम आलरेडी बहुत तकलीफ में है और हमारी तकलीफे मत बढ़ा तू वापिस लोट जा….!!

    रिमझिम के गालों में लगातार आंसू गिरे जा रहे थे…
    वह स्तब्ध होकर खड़ी अपनी माँ को देखने लगी थी जो बचपन से उसको बहुत प्यार करती थी पर सिर्फ एक बचकानी ग़लती पर किस तरह मुंह मोड़ के खड़ी थी..

    रिमझिम कांपती टांगो से बिना कुछ बोले ही बाहर निकल आई और वापिस से अपने बंगले के गेट खोल अंदर चली आई…

    वेद कॉलेज पहुंच गया था लेकिन उसका धियान रिमझिम की तरफ था…

    1 घंटा होने को था लेकिन रिमझिम नहीं आई थी…
    वेद ने कई बार रिमझिम को कॉल भी किये लेकिन रिमझिम ने कॉल ही नहीं उठाया…
    वेद का मन घबरा रहा था क्यूंकि वह पूरे घर में अकेली होगी या फिर अपने मम्मी के घर में होगी…शायद उन्होंने माफ कर दिया होगा तो उनके यहाँ बैठी बातों में लगी होगी…

    वेद पॉजिटिव बातें सोचता रहा…

    जैसे तैसे कर उसने क्लासेस लिए और शाम होते ही ज़ब घर लोटा तो घर सुनसान पड़ा था पूरे हॉल रूम में मौत सी ख़ामोशी पसरी हुई थी…

    वेद ने रिमझिम को पुकारा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला फिर वह किचन में भी आया लेकिन आज वह यहाँ पर भी नहीं थी..

    वेद का मन खटका और वह भागते हुए सीढ़ियों से अपने कमरे में गया और खटखटाने लगा…

    “रिम…रिमझिम दरवाजा खोलो….तुम सुन रही हो दरवाजा खोलो….!!
    वेद काफ़ी देर तक आवाज़े लगाता रहा..

    तेज़ आवाज़ों से कसके पीटने से भी रिमझिम ने ज़ब कमरे के अंदर से कोई जवाब नहीं दिया तो वेद ने दरवाजा तोड़ दिया…

    जहाँ रिमझिम बैठी बहुत सारी दवाइयां फास्टेड बॉक्स से निकाले बेड पर फैलाये बैठी थी…
    वेद को देख उसने जल्दी से मुठी बंद कर ली…

    वेद ने रिमझिम की तरफ देखा जिसकी आँखे ज़्यादा रोने की वजह से लाल हो रही थी…

    “ये सब क्या है…!?

    रिमझिम घबरा के बोली…”कू…कुछ भी नहीं बस सिर दर्द की गोली तलाश रही थी..!!

    वेद समझ गया और एक ज़ोरदार थप्पड़ रिमझिम के गालो पर लगाया...

    To_be_continued…

  • 14. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 14

    Words: 994

    Estimated Reading Time: 6 min

    वेद समझ गया और एक ज़ोरदार थप्पड़ रिमझिम के गालो लगाया…

    “ये क्या करने जा रही थी….!!वेद ने रिमझिम को दोनों बाजाओं से पकड़े उठाया और झींझोड़ के सख्ती से बोला…

    “ये दवाइयाँ….ये सारे स्लीपिंग पिल्स है,,जानती भी हो क्या करने जा रही थी…”

    रिमझिम एक बार फिर सुबकने लगी..”जानती हूं इसलिए हमेशा के लिए ये दवाइयाँ खाके मौत की नींद सो जाना चाहती हूं….
    वैसे भी अपने सगे माँ बाप ने जीते जी मुझे मार ही दिया है…!!

    वेद समझ गया की आज वह अपने घर गई थी ज़रूर वहाँ कुछ हुआ होगा…

    “मर जाना चाहती हो…सिर्फ तुम पर तो तुम्हारे माँ बाप का हक है…..मैं तो तुम्हारा कुछ नहीं लगता हूं,,मैं हूं ही कौन तुम्हारा जो तुम मेरे बारे में सोचोगी….!?

    रिमझिम वेद की बात सुन और ज़्यादा रोने लगी…
    आँखों को मलते हुए बोली…”आ…प प्लीज ऐ..ऐसा…मम्…मत बोल..बोलिए….!!

    वेद रिमझिम को छोड़ कर कमरे से बाहर चला गया तो रिमझिम वापिस से बेड पर बैठकर घुटने में मुंह दिए सिसक सिसक कर रोने लगी..

    थोड़ी ही देर में वेद वापिस आया और बेड पर से फास्टेड बॉक्स की सारी दवाइयाँ समेट कर रिमझिम के सिर पर मोहब्बत से हाथ रख चला गया…

    रिमझिम बिना कुछ बोले बस वैसी ही बैठी रोती रही,वेद से उसका रोना देखा नहीं गया इसलिए वह कमरे से ही चला गया…

    ज़ब शाम को विमला भाभी आई तो उसने रिमझिम को सीने से लगाए रखा और बहुत ही प्यार से छोटे बच्चे की तरह पुचकारा…
    वीर भया ने बहला फुसला के रिमझिम को रात का खाना खिलाया…

    इस सारे वक़्त में वेद गायब रहा…

    विमला भाभी भावुक होती हुई बोली…”तुम्हे पता है बेटा मैं एक गयनाइकोलोगिस्ट हूं और बहुत कामयाब डॉक्टर हूं लेकिन ज़ब मुझे मेरी शादी के 6 महीने बाद पता चला की मैं माँ नहीं बन सकती तो मैं अंदर से टूट कर रह गई…कुछ समझ नहीं आया कि करू तो क्या करू,,डर भी लगने लगा था कि अगर वीर जी को पता चलेगा तो वह मुझे छोड़ देंगे…
    मुझे लगा की मेरा घर टूट जायेगा..
    पर जिसने मुझे उस वक़्त सपोर्ट किया वह मेरे घरवाले थे खास कर मेरे डैड….उन्होंने कहा की अगर तुम्हे लगे की तुम रिश्ता नहीं निभा पा रही हो या तुम्हारा हस्बैंड तुम्हे छोड़ दे तो बेशक तुम हमारे पास लोट आना क्यूंकि तलाकशुदा बेटी ज़िंदा लाश बेटी से ज़्यादा अच्छी होती है…
    खेर ऐसा लेकिन कुछ नहीं हुआ कभी मायके जाने की नौबत ही नहीं आई क्यूंकि वीर जी ने साफ कह दिया कि उनके लिए मैं काफ़ी हूं ज़रूरी नहीं अपनी कोई सगी औलाद हो,,हम बच्चा गोद ले सकते हैँ….
    और मुझे भी इस बात से कोई दिक्कत नहीं थी…
    वीर के मम्मी पापा को भी इस बात कोई फर्क नहीं पड़ा और हमारी जिंदगी वापिस से अच्छी गुज़रने लगी लेकिन ज़ब वीर के मम्मी पापा मतलब मेरे सास ससुर अचानक ही एक प्लेन क्रेश में चल बसे तो हॉस्टल में पढ़ता 8 साल का वेद मेरे पास आगया…
    और मेरा छोटा प्यार देवर मेरा बेटा बन गया..
    मेरी ममता वेद को देख मचलने लगी और मैंने उसे सीने से लगा लिया….
    भगवान हमें हर चीज सौंपता है लेकिन सब्र रखना पड़ता है…
    तुम भी आज वही खड़ी हो जहाँ कभी मैं 20 साल पहले खड़ी थी…
    कुछ समझ नहीं आरहा था लेकिन भरोसा था ऊपरवाले के फैसले पर…बस यही मेरा यकीन था….वीर जी मेरे साथ थे और मेरा परिवार भी मेरे साथ था…
    रिमझिम हम भी तुम्हारे साथ हैँ,,एक बात याद रखना माना की मैं तुम्हारी माँ की जगह नहीं हूं लेकिन तुममें मुझे बेटी दिखती है…ज़ब भी दिल करे मेरे सीने से लग जाना,मेरे गोद में सिर रख सो जाना…मेरा प्यार जितना वेद के लिए है उतना तुम्हारे लिए भी होगा…
    वीर जी भी तुम्हे लेकर फ़िक्रमंद रहते है…बेटा जी कोई बड़ा क़दम उठाने से पहले हमारे बारे में सोच लेना कि तुम्हारे बिना हमारा क्या होगा…
    और वेद…वह तो दीवाना हो जायेगा,,मैंने उसके आँखों में मोहब्बत का जहांन बस्ता हुआ देखा है….बस समझो बेटा हम तुमसे प्यार करते है…!!

    रिमझिम आंसू साफ किये हाँ में गर्दन हिला गई…

    “आप सचमुच बहुत अच्छी हैँ…..!!

    रिमझिम कसके विमला भाभी के सीने से लग गई तो ना जाने क्यों दोनों रो पड़ी..

    वीर दूर खड़ा मुस्करा पड़ा क्यूंकि जानता था विमला हमेशा हर बच्चे को माँ जैसा प्यार देती है…

    ज़ब रिमझिम बहतर महसूस करने लगी तब बोली..”आपको पता है वेद जी कहाँ हैँ…!?

    “वह ज़ब भी उदास होता है छत पर जाके बैठ जाता है…अभी भी वहाँ होगा….!!

    रिमझिम कतराते हुए कसमक्स में खड़ी रही..

    विमला भाभी उसे छेड़ती हुई बोली…”वेद हमेशा खामोश रहता है लेकिन ज़ब मूड में हो तो बहुत बातें करता है…
    बचपन से ही चुपचाप रहने वाला हमारा वेद दिल से बहुत नर्म है….
    अगर वह उदास है तो जाओ जाके बात करो वह जल्दी ही मान जायेगा…!!

    रिमझिम गड़बड़ा गई और जल्दी से बोली “जी…जी मैं जाकर माफ़ी मांगती हूं…”

    रिमझिम लाल सुर्खियां आँखों में बटोरे मासूमियत लिए छत पर गई जहाँ वेद झूले पर बैठा था…

    रिमझिम छोटे छोटे कदम लेती झूले के दूसरे तरफ आ बैठी और बोली…”मैं…मैं आपसे माफ़ी मांगने आई हूं….
    आई ऍम सॉरी वेद जी….मैं जज़्बाती होगई थी और मम्मी की सख्त सुस्त बातें सुन तकलीफ में आके खुदखुशी करना चाहती थी लेकिन…मैं भूल गई थी मेरा एक भरा पड़ा प्यार करने वाला परिवार है…वीर भया,,जो हमेशा बाप की सफ़क़त लुटाते रहते हैँ,,विमला भाभी जो माँ की ममता हर वक़्त मुझपर निछावर करती रहती है…और….
    रिमझिम खामोश होगई…

    और वेद जो दूसरी तरफ मुंह किये बैठा नाराज सा था…अब उसे ख़ामोशी खलने लगी थी…

    “और क्या स्टुपिड….!?

    रिमझिम वेद का मज़बूत हाथ थाम कर बोली…”और आप…जो हमेशा मेरी फ़िक्र करते है और प्यार करते है…हाँ हाँ अच्छे हैँ...बहुत प्यारे और अच्छे हैँ अब तो मुझे माफ कर दीजिये…!!

    वेद हुंह कर बोला…”बिलकुल नहीं…मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है…मेरे बारे में एक बार भी नहीं सोचा बस अपने दुख तकलीफ की पड़ी है…!!

    वेद निचे अपने कमरे में चला आया..
    रिमझिम मुस्कान लिए गाल पर हाथ रख खुद से बोली…”बीवी हूं आपकी…माना तो मैं आपको लुंगी ही…!!


    To_be_continued…

  • 15. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 15

    Words: 975

    Estimated Reading Time: 6 min

    वेद निचे अपने कमरे में चला आया..
    रिमझिम मुस्कान लिए गाल पर हाथ रख खुद से बोली…”बीवी हूं आपकी…माना तो मैं आपको लुंगी ही…!!

    रात होगई थी और ये रात नाराज़गी से भरी रात थी…
    वेद जानबूझकर लाइट्स ऑन किये अपना वार्डोरोब खोले खट पट कर रहा था…

    रिमझिम मिठास लिए लहजे में बोली..”कुछ ढूंढ रहे हैँ…!?
    मैं आपकी मदद कर दूँ…!!

    वेद बोला..”ज़रूरत नहीं है बीवी जी…वैसे भी मुझसे इतने प्यार से बात मत कीजिये मैं इतनी आसानी से मानने वाला नहीं हूं…!!

    रिमझिम अपनी दिलकश मुस्कान दबा गई क्यूंकि वह समझ रही थी कि वेद पर उसकी बातों का अच्छा खासा असर हो रहा है…

    रिमझिम मन में खुद से बोली…”सही कहा था भाभी ने….वेद जी ज़्यादा देर नाराज नहीं रह सकते हैँ..”

    वेद वार्डोरोब बंद करता हुआ अपने बेड पर आके सोगया और लाइट्स भी ऑफ कर दी..

    रिमझिम ठंडी सांस भरके बोली…”वेद जी मैं आपके बेड पर आज रात सो सकती हूं…!?

    वेद करवट बदल कर कोहनी और सिर टिकाये झूटी नाराज़गी लिए बोला..”नहीं बीवी जी…आपका नाजुक वजूद मेरे बिस्तर पर सोभा नहीं देगा इसलिए मुझपर अहसान करिये और जाके अपने बेड पर सोजाये…”

    रिमझिम अंगड़ाई लेती हुई बोली..”हाँ रात भी काफ़ी होगई है और मेरा बदन भी टूट रहा है….
    अह्ह्ह्ह मौसम भी सर्द है….ऐसे में नींद नहीं आने वाली है…!!

    वेद हलकी डीम बल्ब की रौशनी में रिमझिम को देखने लगा जो बड़े ही मस्त अंदाज़ में अंगड़ाई ले रही थी…

    “मैंने सुना है मेहबूब की बांहो की गरमाहट सर्दी को कम कर सकती है…!!
    रिमझिम अपने नॉवेल में पढ़े डायलाग मार रही थी…

    वेद आँखे छोटी किये रिमझिम को ही देखे जा रहा था जो क़यामत बनकर उसके दिल पर कहर ढाने पर तुली थी…
    ऐसी होशरुबा और दिलफरेब बातें वह जानबूझकर कर रही थी ताकि वेद पिघल जाए…

    “आप मुझे माफ कर दीजिये….!!

    वेद जल्दी से बोला..”नहीं…मुझे माफ कर दो मैंने तुमपे हाथ ही उठाया…सॉरी मैं गुस्सा कण्ट्रोल नहीं कर पाया,,पर तुम्हे भी ऐसी बेवकूफ़ी नहीं करनी चाहिए…”

    रिमझिम अब गंभीरता से बोली…”वेद जी आपने जो भी किया सही किया…अगर आज वह थप्पड़ मुझे नहीं पड़ता ना तो मेरे होश भी नहीं खुलते…मैं सचमुच अपनी जिंदगी खतम करने जा रही थी ये सोचे समझे बिना की अब मुझसे कई रिश्ते जुड़े है…
    मुझे शर्मिंदगी है कि मैंने आपको मायूस किया और माफ़ी भी मुझे मांगनी चाहिए,,जानती हूं आपको मेरी वजह से बहुत तकलीफ हुई है….”

    वेद रिमझिम का हाथ मज़बूती से थामे बोला…”बात सही है…लेकिन मुझे थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था….मैं खुद पर काबू ही नहीं कर पाया ज़ब तुम्हे हाथों में ढेरो नींद की गोली लिए देखा तो डर गया और सोचने लगा कहीं तुम मुझसे दूर ना हो जाओ…
    रिमझिम मैं ये नहीं कहूंगा की तुमसे पहले ही दिन से बहुत शिद्दत वाली मोहब्बत होगई थी या तुम्हारे लिए चाँद तारे तोड़ लाऊंगा…
    लेकिन अब तुम्हारे बिना मेरा गुज़ारा मुमकिन नहीं है,,ओवर लगेगा सुनने में लेकिन सोचता हूं अगर तुम कहीं चली गई तो मेरा क्या होगा…तुम समझ रही हो ना मैं क्या कह रहा हूं…अजीब सा खालीपन और डर लगने लगता है शायद मैं तुम्हारी तरह ज़्यादा इमोशन शो नहीं करता हूं लेकिन..तुम साथ हो तो हर पल हसीन लगता है…

    रिमझिम वेद की बातें सुन एक बार फिर ख़ुशी,शर्म और भावुकता से भर गई…
    लेकिन दूसरे ही पल उसके दिमाग़ में नॉवेल की हीरो की मोहब्बत भरी बातें समा गई..

    लेकिन रिमझिम ने खुद को संभाला और कहा…”वेद जी वैसे ये आपका खुद का लिखा हुआ डायलाग है या फिर कहीं से चुराया है…!!

    वेद नासमझी से बोला..”मतलब समझा नहीं…!?

    रिमझिम ना में गर्दन हिला कर हँस पड़ी और बोली…”कुछ नहीं बस मज़ाक़ था…!!

    वेद रिमझिम के कमर में बाज़ू बांध कर अपनी तरफ खिंचता हुआ बोला…”बहुत बड़ी बड़ी बातें कर रही थी ना तुम…कि बदन टूट रहा है,नींद नहीं आरही है और सर्द मौसम है वगेरा वगेरा…

    रिमझिम वेद के सीने से लगी ना में गर्दन हिलाने लगी…”वह तो सिर्फ आपको मनाने के लिए ऐसे ही बोल रही थी…!!

    वेद बोला..”लेकिन मैं तो सीरियस होगया बीवी और अब मैं ये सोच रहा हूं की सर्द के मौसम में रात को शॉवर लेना केसा रहेगा…!!

    रिमझिम घबरा उठी…

    “शो…शॉवर…लेकिन मैंने अभी कुछ देर पहले ही नहाया है…!!

    “हाँ मैंने भी अभी थोड़ी देर पहले लिया है…!!
    लेकिन मेरे कहने का मतलब ये था कि अगर हम दोनों मिलकर कुछ ऐसा काम ही करे जिसके बाद हमें साथ में शॉवर लेना ही पड़े तो….

    रिमझिम वेद के सीने में हाथ मार कर उठते हुए बोली…”आप बहुत ज़्यादा डबल मीनिंग वाली बातें करते है और हाँ बहुत बेशर्म है आप….!!

    वेद ने उसे वापिस से खींच लिया और चेहरे पर फूँक मारते हुए बोला…”बीवी जी हम तो ठहरे बेशर्म….और अभी अपने सिर्फ ट्रेलर देखा है पिक्चर अभी बाकि है…!!

    रिमझिम वेद की बातों में छिपी शरारत को भली भांति समझ रही थी..

    रिमझिम को महसूस हो रहा था कि वेद की उंगलियां रेंगति हुई पैट से ऊपर की ओर बढ़ रही है,,रिमझिम के बदन में सिरहन दौड़ रहा था लेकिन शर्म का भार फिर बढ़ने लगा तो वह बस कसमसा के रह गई..

    “मुझे गुदगुदाहट लग रही है…!!

    वेद रिमझिम के चेहरे पर झुकते हुए बोला..”मेहबूब की बांहो की गरमाहट साँसो को जला देती है और दिल कतरा कतरा पिघलने लगता है…”

    रिमझिम ने आँखे मीच ली और वेद के बांहो में समा गई…
    वेद ने भी अपनी नियत साफ की और रिमझिम के बालों पर हाथ फेर कर चुम लिया…
    वह अभी खुद पर बर्दास्त कर रिमझिम पर बस हलकी फुलकी प्यार की बरसात कर गया…
    अभी मिलन में वक़्त था क्यूंकि वह तयार नहीं थी..ना ही वह अपनी ख्वाहिश के लिए उसके मासूम जज़्बात को ठेस पहुंचाना चाहता था…

    और वेद एक बात जानता था जितना इंतेज़ार करेगा उसकी मोहब्बत और तड़प बढ़ती जाएगी लेकिन सब्र का फल मीठा होता है….
    बाकि वह रिमझिम को छेड़छाड़ कर छोटी मोटी गुस्ताखी कर ख़ुश हो जाता था क्यूंकि थी तो बीवी…वेदांश राजपूत की बीवी…


    To_be_continued…

  • 16. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 16

    Words: 1003

    Estimated Reading Time: 7 min

    और वेद एक बात जानता था जितना इंतेज़ार करेगा उसकी मोहब्बत और तड़प बढ़ती जाएगी लेकिन सब्र का फल मीठा होता है….
    बाकि वह रिमझिम को छेड़छाड़ कर छोटी मोटी गुस्ताखी कर ख़ुश हो जाता था क्यूंकि थी तो बीवी…वेदांश राजपूत की बीवी…

    सुबह हुई तो सबसे पहले वेद की ही आँखे खुली और वह रिमझिम को अपने सीने से लगकर सोता देख मुस्कुराया…

    रिमझिम ने भी आँखे खोली और जल्दी से वेद से अलग हुई और बोली…”सुबह भी होगई और मैं अभी तक सोइ हुई थी…
    वेद जी आपको मुझे उठाना चाहिए था…!!

    वेद कुछ नहीं बोला बस वह भी उठ बैठा और रिमझिम को हड़बड़ी में अपने बालों का जुड़ा बनाते हुए देखने लगा..

    पता नहीं अचानक से वेद के दिल में क्या बात समाई उसने रिमझिम को गर्दन से कसके पकड़े हुए बोला..

    “तुम इस तरह मेरे सामने बालों को ना संवारा करो…नादान दिल है मेरा बेकाबू हो जायेगा…!!

    वेद की गर्म तेज़ चलती सांसे रिमझिम को अपने कानो के पास महसूस हुई लेकिन वह कुछ ना बोली…
    उठके जल्दी से वाशरूम में चली गई..

    रिमझिम वाशरूम में जाके दरवाजा लॉक कर शर्म से चेहरे पर हाथ रख दबी दबी मुस्कान लिए अजीब सी तपन महसूस करने लगी…
    दिल की धड़कने बहुत ही तेज़ रफ्तारी में चल रही थी….और सबसे ज़्यादा शर्म आरही थी…

    वही वेद अभी भी बिस्तर पर पड़ी सिलवटे देख रहा था जो रिमझिम के सोने से आई थी…

    “बीवी…..!!
    हरकते पूरी शर्मीली दुल्हन की जैसी होती जारही…”

    वेद हँस पड़ा…

    रिमझिम वाशरूम से फ्रेश होकर निकली और जल्दी से बाहर भाग गई…

    विमला भाभी के कमरे में दस्तक दिया तो भाभी आलरेडी जाग कर थी..

    “सॉरी मैंने कहीं आपको डिस्टर्ब तो नहीं किया…!!रिमझिम पीछे खड़े वीर भया को देखने लगी जो कोट पहन कर तयार हो रहे थे..

    “अरे बिलकुल भी नहीं…आजाओ शाबास अंदर आओ…!!
    विमला भाभी ने रिमझिम को अंदर लिया और बैठने को कहा जो अभी भी असमंजस की हालत में खड़ी थी..

    “वह…भाभी मेरे पास तो कोई पहनने के कपड़े ही नहीं है,,ज़ब से आई हूं आपके ही कपड़े पहन कर कॉलेज जाती हूं…!!रिमझिम ने जल्दी से सब कह दिया…

    वीर मुस्कान लिए बोले…”मैंने वेद से कहा था,,की हमारी रिमझिम को कॉलेज के बाद शॉपिंग पर ले जाए लेकिन वह कुछ ज़्यादा ही बिज़ी रहता है…!!

    विमला ने भी धियान दिया था वह घर में ज़ब भी होती थी वेद की टी.शर्ट और पैंट कर घूमती थी…

    “हाँ डोंट वरी….मैं किसलिए हूं….अभी मैं तुम्हे एक सुन्दर सी साड़ी निकाल कर देती हूं…!!

    विमला के मुंह से साड़ी सुन रिमझिम का सिर ही चकरा गया…

    “नहीं….नहीं नहीं एक बार फिर से नहीं,,साड़ी मुझे पहनने नहीं आती और ऊपर से सम्भलती भी नहीं है…!!

    वीर रिमझिम के करीब आया और उसके सिर पर प्यार से हाथ रख बाहर चला गया..

    विमला भाभी अपने वार्डोरोब से एक ऑरेंज कलर की सिम्पल सी साड़ी निकाल कर ले आई…

    “अब तो रोज़ रोज़ तुम कॉलेज में भारी भरकम बनारसी साड़ी या कामदानी गरारा या सूट तो पहन कर नहीं जा सकती इसलिए तुम्हारे लिए कासुअल से कपड़े लेने होंगे….
    आज मैं वेद की कान खिंचती हूं की हमारी रिमझिम को इग्नोर कर रहा है…शॉपिंग पर नहीं ले जा रहा है…!!

    रिमझिम ना में गर्दन हिलाती हुई बोली..”नहीं भाभी उन्हें कुछ मत कहना…मेरी ही सब ग़लती है क्यूंकि मैं उनसे थोड़ी दूर रहती हूं बाकि ये साड़ी वगेरा मुझे पहनना नहीं आता है…!!

    विमला भाभी हँस पड़ी..”मैं किस दिन काम आउंगी…!!

    रिमझिम हाथों में पकड़ी उम्दा क्वालिटी की साड़ी को तकने लगी जिसका बॉर्डर रेड कलर का था…

    थोड़ी देर बाद विमला भाभी ने रिमझिम को साड़ी पहनाया और कंधे पर पल्लू अच्छे से पिन से सेट कर दिया..

    “हायययय सच्ची में तुम कितनी प्यारी लग रही हो….!!
    रुको ऐसी ही खड़ी रहना मैं अभी तुम्हारी एक प्यारी सी पिक्चर क्लिक करती हूं..!!
    विमला भाभी बेड साइड टेबल से मोबाइल ऑन कर रिमझिम की दो तीन पिक्चर्स लेने लगी..

    रिमझिम बस चुपचाप खड़ी पोज़ देती रही…

    नज़र का काला टिका लगा लो,,,कहीं मेरी बच्ची को नज़र ना लग जाए…!!
    विमला भाभी प्यार से रिमझिम का माथा चुम अपने आँखों के काजल से रिमझिम के कान के निचे हलकी सी सियाही लगा गई ताकि उनकी प्यारी रिमझिम को बुरी नज़र ना लगे….

    वेद और वीर निचे तयार बैठे नाश्ता कर रहे थे…

    वेद थक गया कि आखिर इतना लेट क्यों हो रहा है…
    वीर तो आराम से बैठा नाश्ता एन्जॉय कर रहा था,,अपने छोटे भाई की हालत अच्छे से समझ रहा था…
    ज़ब उसकी भी नई नई शादी हुई थी वह भी ऐसे ही उतावला रहता था..

    कुछ ही देर में विमला भाभी वेद के सामने खड़ी मुस्कान लिए बोल रही थी…”आज कॉलेज के बाद तुम और रिमझिम शॉपिंग पर चले जाना,,वह बेचारी रोज़ मुझसे शर्मिंदा होकर कपड़े मांगती है…खेर मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन हम दोनों के साइज में फर्क है इसलिए उसके लिए अच्छे अच्छे कपड़े खरीदना…!!

    वेद चिढ़ गया…”लेकिन वह है कहाँ…!?
    आलरेडी में कॉलेज के लिए लेट हो गया हूं…”

    विमला भाभी अपने पीछे खड़ी रिमझिम को खींच के सामने खड़ी कर गई जो घबराई हुई थी..

    वेद रिमझिम को बिना पलक झपकाये देखने लगा….
    रिमझिम विमला भाभी का हाथ पकड़े अजीब सी उलझन में खड़ी थी और वेद की बेबाक नज़रे रिमझिम के सरापे को तके जा रही थी..

    “हुंह्ह्ह्ह अब तुम लेट नहीं हो रहे हो…!!वीर की आवाज पर विमला हँस पड़ी..

    रिमझिम को खेर कुछ समझ ही नहीं आया..

    वेद उठा और सबको बाय कर रिमझिम का हाथ पकड़ तेज़ी से बाहर निकल गया…

    “आज पैदल नहीं जाउंगी वरना साड़ी खुल गई तो….!!!?
    नहीं नहीं रिमझिम शुभ शुभ सोच…थिंक पॉजिटिव…सब ठीक होगा…!!

    वेद बिना उसकी तरफ देखे ही रिमझिम को अपनी गाड़ी की तरफ ले आया…

    वेद ने रिमझिम के लिए मेरसीडीस का दरवाजा खोला तो रिमझिम वेद पर एक नज़र डालती हुई बैठ गई…
    रिमझिम को कुछ बोलने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी,,आज वेद खुद ही उसे हाथ पकड़े हुए मेरसीडीस तक ले आया था…

    रिमझिम अपना बैग पीछे रख वेद को देखने लगी जो ड्राइविंग सीट पर बैठ चूका था और अब उसी को देखे जा रहा था…


    To_be_continued…

  • 17. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 17

    Words: 1002

    Estimated Reading Time: 7 min

    रिमझिम अपना बैग पीछे रख वेद को देखने लगी जो ड्राइविंग सीट पर बैठ चूका था और अब उसी को देखे जा रहा था…

    “बहुत खूबसूरत लग रही हो….!!

    रिमझिम शर्मीली सी मुस्कान दबाते हुए बोली..”बहुत शुक्रिया….!!

    फिर मेरसीडीस चल पड़ी…
    और आज पता नहीं क्यों चंद घड़ी का रस्ता रिमझिम को काफ़ी लम्बा लग रहा था…
    और वेद जानबूझकर कर रिमझिम की खुसबू साँसो में उतारते हुए ड्राइविंग में सुस्ती दिखा रहा था..

    “आज हम पहुंच जायेंगे ना….!?
    रिमझिम को अब कुफ्त होने लगी थी..

    वेद गंभीर होकर बोला…”क्यों मुझपर भरोसा नहीं है क्या….!?

    रिमझिम गड़बड़ा गई क्यूंकि अचानक वेद ने इसकी तरफ देख सवाल दाग दिया था..

    “बात भरोसे की नहीं….कॉलेज टाइम से पहुंचने की है….
    मैं स्टूडेंट हूं मेरी बात अलग है लेकिन आप प्रोफेसर है,टीचर है….वैल्यू होती है….!!रिमझिम समझाने लगी..


    वेद कुरेदने लगा…”क्यों टीचर,प्रोफेसर की परसनल लाइफ नहीं होती क्या…!?
    उनका दिल नहीं होता है…!?
    या फिर उनमें जज़्बात नहीं होते…!?

    रिमझिम ने ठंडी सांस ली और बोली…”आप मेरी बात को कहाँ से कहाँ ले जा रहे हैँ…..मेरे कहने का मतलब कुछ और था….!!

    “जो भी हो तुम्हारा मतलब…मेरा मतलब तो साफ है,,तुम शादी के बाद पहली बार मेरे सामने यूँ तयार होकर आई हो और मैं तुम्हे जी भर के देखूँ भी ना….!!

    अब रिमझिम सकपका गई…

    सामने कॉलेज की गेट देख रिमझिम ने दिल में ख़ुशी से बल्ले बल्ले किया क्यूंकि अब वेद जी की रोमांटिक बातें और तेज़ नज़रो से बचा जा सकता था…

    वेद ने पार्किंग एरिया की तरफ अपनी मेरसीडीस पार्क किया पर दोनों साथ में निकल आये…

    “ठीक है फिर मैं चलती हूं…क्लास के बाद आपसे मिलूंगी फिर साथ में शॉपिंग पर चलेंगे..!!

    “एक मिनट…..!!वेद रिमझिम का बाज़ू खींच खुद के करीब कर गया और प्यार भरी निगाहों से देखते हुए अपनी बात जारी रखा…

    “तुम मुझे बहुत प्यारी लग रही हो और ये रंग तुमपे बहुत जच रहा है…!!

    रिमझिम को डर था कहीं कोई उन्हें कॉलेज में देख ना ले…

    “बहुत शुक्रिया सर…..लेकिन अभी फिलहाल इजाज़त दीजिये हम कॉलेज पहुंच चुके हैँ और ये बातें घर पर भी तो बोल सकते थे…!!

    वेद कुछ भी नहीं बोला और उसके चेहरे पर झुकने लगा…
    रिमझिम जल्दी जल्दी ना में गर्दन हिलाने लगी…

    “अरे वेद यहाँ क्या कर रहे हो….!?

    वेद और रिमझिम बिजली के झटके की तेज़ी से अलग हुए और रिमझिम जल्दी से सिर झुका के बोली…

    “गुडमॉर्निंग सर…..!!

    प्रोफेसर श्री हाथ उठाकर बोले..”वैरी गुडमॉर्निंग लेकिन तुम इस वक़्त यहाँ पार्किंग एरिया में क्या कर रही हो…!?

    वेद श्री की तरफ बढ़ते हुए बोला…”एक्चुअली श्री….ये मेरे साथ आई है,,रास्ते में दिखी तो लिफ्ट माँगने लगी…
    मैंने भी लिफ्ट दे दी सोचा कहीं क्लास के लिए लेट ना हो जाए…!!

    श्री रिमझिम की तरफ देखते हुए बोला…”अच्छा किया वेद जो आपने इसे लिफ्ट दे दिया वरना ये हमेशा लेट ही होती है लेकिन कुछ दिनों से एक्टिव रहने लगी है…
    स्टडी में भी फोकस करना शुरू किया है…
    अच्छी बात है तुम्हे ज़िम्मेदारी का अहसास हो रहा है…!!

    रिमझिम हाँ में गर्दन हिला गई…

    वेद सिटी बजा के वहाँ से जाते हुए बोला..”क्लास के बाद मुझसे मेरे केबिन में मिलने आना…!!

    “जी….जी जी समझ गई सर….!!रिमझिम वेद की नीली आँखों में देखने से कतरा रही थी…

    श्री बोला…”अब क्लास जाने का इरादा है या भी नहीं….चलो आओ…!!

    रिमझिम सिर झुकाये प्रोफेसर श्री के पीछे चलती हुई बोली…”सर आपको पता है…वेद सर की शादी होगई है…!!

    श्री रुक गया और पलट कर बोला..”क्या….सचमे….!?

    रिमझिम की सुनहेरी आँखे चमक उठी और जानबूझकर कर बोली…”नो वे….क्या सर उन्होंने आपको कुछ भी नहीं बताया….
    आज ज़ब मैं उनके साथ आई तब पता चला…
    वैसे मुझे तो लगा था आप दोनों पक्के दोस्त हैँ…!!

    श्री ज़बरदस्ती हँसते हुए गुरुर से बोला…”ओफ़्कौर्से वेद मेरा बड्डी है….
    और तुमसे पहले उसने मुझे बताया था बस शर्मिला है इसलिए उसने इस बात को मुझसे राज रखने को कहा था…
    और हाँ बाकि तुम दिमाग़ थोड़ा कम चलाओ और क्लास में जाओ…!!

    रिमझिम हंसी दबाती हुई आगे बढ़ गई क्यूंकि अब वेद की बैंड बजने वाली थी…

    रिमझिम इतना तो समझ गई थी की प्रोफेसर श्री झूट बोल रहे हैँ,,उनके चेहरे का हाव भाव देख पता चल रहा था कि उन्हें कुछ नहीं मामूम है बस ऐसे ही बोलबचन गिरी कर रहे हैँ….

    रिमझिम क्लास में गई और ख़ुशी से अपना धियान पढ़ाई पर लगा दिया…

    क्लास कर ज़ब वह नोट्स की फोटोज़ मोबाइल से क्लिक कर रही थी तो कुछ लड़कियों को बातें करते सुना…

    “तुझे पता है…प्रोफेसर वेद शादीशुदा है…अभी उनकी कुछ हफ्ते पहले शादी हुई है….!!

    हाँ यार….मेरा तो ये सुन कर दिल ही टूट गया,,सर कितने हैंडसम हैँ और उनकी नीली आँखे…हायययय कातिलाना आँखे हैँ,,,मैं सिर्फ कॉलेज उनकी एक झलक देखने आती हूं….!!

    “खेर होगी कोई नसीब वाली जो इतना हैंडसम माल उड़ा ले गई,,ये सब तो किस्मतो का खेल है…हमारा कहाँ ज़ोर चलेगा पर….पर वेद सर अह्ह्ह्हह मेरा दिल टूट कर बिखर गया….!!

    रिमझिम ये सब पीछे मुड़ी और गला खंखार कर बोली…”ऐसा भी तो हो सकता है वह लड़की लाखों में एक हो,,मासूम दिल वाली शर्मीली सी नाजुक लड़की हो….और बहुत प्यारी सी हो….तो कह सकते है सर नसीब वाले हैँ….!!

    कशीश हँस पड़ी और बोली…”खेर हमने तो नहीं देखा है…पर अगर सर की पसंद है तो प्यारी ही होगी….!!

    रिमझिम आँखे छोटी कर गई…

    रिमझिम की तरफ देख मिताली सीटी मार कर बोली…”वह सब छोड़ पहले तू ये बता आजकल तुझे क्या हुआ है…
    मैडम आप इतना बन ठन कर क्यों आती हैँ,,नीली पिली साड़ी तो कभी कामदानी सूट….किसके लिए इतना सज संवर कर आरही है…!!?

    रिमझिम सबकी नज़र खुद पर महसूस कर बोली…”तुम सब ग़लत समझ रही हो वह दरअसल बात ये है कि मैं बस ऐसे ही…

    रिमझिम खामोश होगई और बहाना ढूंढने लगी…

    “किसी से प्यार होगया है क्या….!?

    रिमझिम के गाल टमाटर बन गए और वह चीख कर बोली…”नहीं पता और हाँ तुम सब बहुत बुरी हो…मुझे कोई बात नहीं करना मैं जा रही हूं…!!

    रिमझिम के यूँ लाल पड़ने और चीखने से क्लास की लड़कियां हँस पड़ी…

    रिमझिम जल्दी से क्लास से बाहर आई तो उसका पैर साड़ी में फंस गया और निचे से साड़ी खुल गई…

    To_be_continued…

  • 18. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 18

    Words: 980

    Estimated Reading Time: 6 min

    रिमझिम जल्दी से क्लास से बाहर आई तो उसका पैर साड़ी में फंस गया और निचे से साड़ी खुल गई…

    “मुझे पता था यही होगा….मेरे साथ हमेशा यही होता है….!!
    रिमझिम ने सीधा वेद की केबिन की तरफ कदम बढ़ा दिया…

    वेद थक कर आर्मचेयर पर गिर कर बैठा था क्यूंकि सबने उससे बहुत से सवाल किये थे और सारे मेल फीमेल टीचर्स यहाँ तक स्टूडेंट्स ने भी शादी का पूछ पूछ कर थका दिया था…
    वेद ने बस इतना ही कहा की जल्दी और हड़बड़ाहट में शादी हुई है बाकि कोई बड़ी बात नहीं थी…

    प्रोफेसर श्री ने तो वेद को अच्छा खासा सुनाया था….
    और अब उसे भाभी से मिलना था…भाभी भाभी की रट लगा रखी थी…

    “सर मैं अंदर आ सकती हूं…!?

    रिमझिम की आवाज सुन वेद बोला..”हाँ आजाओ….!!

    रिमझिम संभल संभल कर कदम रखते हुए आरही थी…

    “क्या हुआ सर…!?

    वेद चिढ़ गया और बोला..”कुछ भी नहीं बस सब को मेरी शादी का पता चल गया है और सबों ने आफत मचा दी…
    पता नहीं आखिर किसने ये बात श्री को बताई….!?

    रिमझिम ना में गर्दन हिलाते हुए बोली..”अह्ह्ह्हह….ये तो बहुत बुरा हुआ…!!

    वेद रिमझिम को मुस्कुराते देख शक से बोला…”एक मिनट….कहीं तुमने तो……

    रिमझिम वेद की बात काट के बोली…”भला मैं क्यों बताउंगी….हुंह्ह्ह मैं किसी को कुछ नहीं बताती और मेरी खुद अपनी इज़्ज़त है…
    आपको सच में लगता है मैंने बताई होगी सीरियसली,,,,आपसे ज़्यादा मैं ये बात छुपा कर रखती हूं वैसे भी मैं कहाँ और आप कहाँ….!!

    वेद की नीली आँखे सुकेड गई..

    “ये तारीफ था या बुराई….!!

    रिमझिम सीने में बाज़ू बांध कर बोली…”जो आप समझे,,, और वैसे भी मुझे खुद कोई शौक नहीं है पूरी क्लास को अपने ऊपर हंसने का मौका दूंगी….!!

    वेद बोला…”अच्छा अच्छा अब मैं समझा…मतलब तुम्हे ये बताने में शर्म आएगी की मैं तुम्हारा हस्बैंड हूं…!!

    “हाहाहाहा हस्बैंड….नानाना…प्रोफेसर हस्बैंड….!!
    आप नहीं समझ सकते पूरा क्लास मेरे मज़े लेगा,मज़ाक़ बनाएगा की अपने प्रोफेसर से शादी कर लिया…
    क्या कहेंगे सब कि रिमझिम ने अपने हैंडसम डैशिंग प्रोफेसर से शादी किया है..
    और लड़कियां आप नहीं जानते सब मुझे चिढ़ाएंगी…!!

    वेद रिमझिम के सिर पर चपत लगाते हुए बोला…”हाँ मज़ाक़ बनाएगी क्यूंकि मुझमे खराबी जो है…खोट है मुझमे इसलिए अपनी स्टूडेंट पर नियत खराब कर बैठा और शादी कर उसे बीवी बना लिया..!!

    रिमझिम हँस पड़ी और भूल गई कि वह यहाँ किस बात के लिए आई थी..

    “वैरी फनी…सचमे आप बहुत मज़ाकिया हैँ….!!
    रिमझिम हँसते हुए वेद के बाज़ू में हथेली से मारने लगी..

    वेद ने उसे खुद पर हँसते देखा तो मुंह फेर कर रहगया…

    “आप तो नाराज होगये….!!
    रिमझिम हंसती ही रही..

    “तुम्हे घर पर बताऊंगा…बहुत हंसी आरही है ना तो हँस लो….
    घर पर कैसे भीगी बिल्ली बन के रहती हो…!!

    वेद की बातें सुन रिमझिम और ज़ोर से हंसने लगी…
    हँसते हँसते उसके आँखों के किनारे भीग गए और वह थक कर वेद की कुर्सी पर गिर गई..

    “ये देखिए हंसी मज़ाक़ में इम्पोर्टेन्ट बात ही बताना भूल गई,,वेद सर मेरी साड़ी खुल गई ये कमर से खिसक गई है…कुछ समझ नहीं आरहा है किस तरह खोसोंगी…!!
    वेद रिमझिम की साड़ी अजीब तरह से निकलते हुए देख कर बोला..

    “ये क्या है…ये किस तरह खुल गई…!?
    वेद नीचे झुक कर साड़ी को गौर से देखने लगा..

    रिमझिम वेद को परेशानी में देखते हुए बोली…“देखिए आपको साड़ी पहनानी आती है ना,,अगर नहीं आती तो रहने दीजिये मैं कमर में किसी तरह एडजस्ट कर खोस लुंगी…!!

    वेद साड़ी का निचला बॉर्डर पकड़ कर बोला…”मुझे सब आता है बस तुम दो मिनट खामोश बैठी रहो…!!

    वेद ने अपने कॉलेज के ज़माने में साड़ी पहन माँ सीता का रोल किया था इसलिए उसे अच्छे से साड़ी पहननी और एडजस्ट किस तरह कहाँ किया जायेगा सब आता था…
    लेकिन वह ये बात रिमझिम को नहीं बताना चाहता था वरना वह और ज़्यादा हंसती…

    वेद ने दो मिनट में ही रिमझिम की साड़ी वापिस से परफेक्ट कर दी..

    रिमझिम सचमे इम्प्रेस हुए बिना नहीं रह सकी के वेद जी को ये साड़ी वगेरा भी ठीक करने आता है वरना उसे तो पल्लू तक संभालने नहीं आता था..

    वेद रिमझिम के गाल खींच के बोला..”चलो अब चलते हैँ….तुम्हे शॉपिंग भी करवानी है…!!

    “लेकिन फिर अगर साड़ी खुल गई तो…!?
    रिमझिम का डर सामने आगया..

    “तो मैं हूं ना,,तुम्हे गोद में उठा लूंगा…!!वेद अपने मज़बूत हाथों को रिमझिम के कमर पर रख मुस्कराने लगा…

    फिर रिमझिम कसमसाई और बोली…”अच्छी बात है लेकिन फिलहाल चलते हैँ…!!

    रिमझिम और वेद केबिन से साथ में बाहर आये और रिमझिम थोड़ा पीछे चलने लगी ताकि कॉलेज में किसी की नज़र ना पड़े..
    वेद को अब ये नाटक लगने लगा था…
    आखिर ये बात छुपा कर क्या फायदा,,शादी हुई है,बीवी है उसकी….डर किससे और किस बात का करे…हक है भाईई कोई भाग वाग कर चुप चाप छुप कर शादी थोड़ी की है…

    वेद ने मुड़ कर देखा रिमझिम इधर उधर देखती हुई चोर नज़रो से तके जा रही थी…

    “ओये जल्दी करो…कच्छवे की चाल क्यों चल रही हो…!!
    वेद ने बिगड़ कर कहा तो रिमझिम साथ में जल्दी जल्दी चलने लगी…

    “इतना डर क्यों रही हो अगर पता लग भी गया तो लगने दो…
    मैं अपनी शादी की बात इसलिए छुपा रहा था ताकि किसी की नज़र में तुम ना आओ,तुम स्टूडेंट हो मैं प्रोफेसर हूं इसलिए लेकिन अगर देखा जाए तो हमारी शादी हो ही गई है और इस बात को ना मैं बदल सकता हूं और ना तुम….
    और हक से बीवी हो तुम मेरी,शादी किया है और प्यार भी करता हूं तो डरने की कोई ज़रूरत नहीं है…!!

    रिमझिम की सुनहेरी आंखे बड़ी होगई..
    वेद को रिमझिम हैरत से देखने लगी..

    “ऐसे मत देखो सब के सामने किश कर लूंगा…!!
    वेद आँख मार कर बोला तो रिमझिम गड़बड़ा गई…

    दोनों साथ में पार्किंग एरिया तक आये और वेद बोला…”आज सुबह में जो काम मैंने अधूरा छोड़ा था उसे घर जाके पूरा करूंगा इसलिए तयार रहना…!!

    रिमझिम तो वेद की बातें सुन गिरने पड़ने लगी क्यूंकि वह फिर से मूड में आने लगा था…

    To_be_continued…

  • 19. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 19

    Words: 989

    Estimated Reading Time: 6 min

    रिमझिम तो वेद की बातें सुन गिरने पड़ने लगी क्यूंकि वह फिर से मूड में आने लगा था…

    “कौन…कोनसा अधूरा काम…!?
    रिमझिम अनजान बन गई..

    “ओह्ह्ह अच्छा तो तुम भूल गई,,घर चलो आराम से बताऊंगा कोनसा अधूरा काम…!?
    वेद की बात सुन रिमझिम का दिल किया वह वेद को बेशर्म कह दे…

    दोनों सीधा बड़े से मॉल में गए जहाँ रिमझिम ने अपने साइज और कम्फर्ट के लिए कपड़े खरीदे…
    वेद तो रिमझिम के साथ साथ था..

    रिमझिम बहुत सारे कलर में ज़ब कंफ्यूज हो जाती तो वेद उसकी हेल्प कर देता…

    आखिर में ज़ब रिमझिम ने एक सेक्सी नाईट गाउन दिखाया..

    “ये मुझे लेनी है….रात के वक़्त लुज़ और कम्फर्ट कपड़े पहनके सोना चाहिए…
    और आपको केसी लगी,,आप को ऐसी ड्रेस ज़रूर पसंद होगी…!!रिमझिम जानबूझकर वेद को इतनी बोल्ड नाईट ड्रेस सेक्शन में ले आई थी…

    वेद ने भी शरारत से उसके हाथों से वह ड्रेस लेते हुए वापिस रखते हुए कहा…”अंह्ह्ह मुझे पसंद नहीं आई…
    होते होंगे हस्बैंड जिन्हे अपनी बीवी सेक्सी नाईट ड्रेस में अच्छी लगती होगी पर….मैं और मेरी पसंद बिलकुल अलग है…!!

    रिमझिम शर्मिंदा होगई और सोचने लगी कि वेद जी कितने अच्छे है और उसकी कितनी इज़्ज़त करते हैँ..

    लेकिन वेद की आगे की बात सुन रिमझिम के हाथ पैर ठंडे पड़ गए.. “नाईट ड्रेस…ननाहहहहह मैं तुम्हे किसी कपड़े में ही नहीं देखना चाहता..
    और रात को कपड़े तुम्हे मैं पहनने ही नहीं दूंगा…
    तुम मेरे सामने ये नाईट ड्रेस क्या कुछ भी नहीं पहनोगी…भला अपने पति के सामने कौन कपड़े पहनता है वह भी रात को,,नहीं बिलकुल भी नहीं…

    रिमझिम ने गर्दन आगे पीछे कर देखा अच्छा हुआ कोई आस पास नहीं था वरना शर्म से वह डूब मरती..

    “आप को कोई शर्म है भी या सब धो कर पी गए हैँ….
    कुछ तो लेहाज कीजिये कि हम पब्लिक पैलेस में हैँ…!!
    रिमझिम का दिमाग़ तप गया..

    “अरे पब्लिक पैलेस हो या प्राइवेट पैलेस तुम रहोगी तो मेरी बीवी ही ….और शर्म किस बात की…!?
    अपनी बिवी से फ़्लर्ट नहीं करूंगा तो किससे करूंगा….!?

    रिमझिम वेद का जवाब सुन उसके सीने पर हलका सा मार कर वहाँ से चली गई…

    वेद हँस पड़ा…

    रिमझिम कुछ नहीं बोली….

    वेद ने बिल पेय किया और सारे शॉपिंग के बैग्स उठाकर मॉल के बाहर आया…

    “अभी तक तुम्हारा मुंह फुला हुआ है…!?

    रिमझिम ना में गर्दन हिला गई..”आपके साथ आइंदा मैं कभी शॉपिंग पर आउंगी ही नहीं…!!

    वेद ने सारे शॉपिंग बैग्स पिछली सीट पर रखते हुए कहा…”हाँ हाँ मत आना…!!

    वेद ने ड्राइविंग सीट संभाल ली…

    “आपको तो बिलकुल भी शर्म नहीं आती है बस कॉलेज में अकड़ कर घूमते है..
    और मेरी क्लास की बेचारी लड़कियां आपको तो कोई महान इंसान समझती है उन्हें कहाँ पता कि आप इतने बड़े ठरकी हैँ….!!

    वेद आइबरों चढ़ा कर बोला…”व्हाट ठरकी….बीवी के साथ मज़ाक़ किया तो ठरकी….
    कल को तुम्हारे करीब आऊंगा तो हवसी भी कह दोगी….!!

    रिमझिम सिर पकड़े टेंशन से बोली…“अरे बीवी बीवी….हूं आपकी बीवी लेकिन बाहर ऐसा कौन मज़ाक़ करता है अगर कोई सुन लेता तो….

    वेद लापरवाही से बोला..”तो क्या….नार्मल हस्बैंड वाइफ कन्वर्सेशन समझ लेते और हाँ बेवी अभी तुम बच्ची हो…
    नार्मल मिया बीवी के बिच इस से भी ज़्यादा रोमांटिक और डीप बातें होती हैँ….
    खेर तुम्हे समझ नहीं आएगा तुम जाओ और वही करिंज नॉवेल हीरो के डायलाग पढो…!!

    रिमझिम को नॉवेल के हीरो का ताना बहुत बुरा लगा..

    “आप मुझे ताना दे रहे हैँ….!!रिमझिम नाराज़गी से बोली…

    वेद कुछ नहीं बोला बस एक नज़र रिमझिम पर डाल गया…

    “अच्छा सॉरी मैं ज़्यादा बोल गई…!!

    वेद ठंडी सांस भरके बोला…”इट्स ओके…मैं भी सॉरी करता हूं बस तुम्हे परेशान कर रहा था…!!

    रिमझिम हाथ उठा के बोली…”सचमे आप भी ना….!!

    रिमझिम शर्म से इधर उधर देखते हुए बोली..”क्या…आप…सचमुच मुझे बिना कपड़ो के देखना चाहते हैँ…!?

    वेद बंगले के पोर्च में गाड़ी रोकता हुआ बोला…”नहीं…बिलकुल नहीं क्यूंकि मैं तुम्हे आलरेडी देख चूका हूं….!!

    वेद सारे शॉपिंग बैग्स लेकर झट से अंदर की तरफ बढ़ गया और रिमझिम मुंह पर हाथ रख पथर की तरह जम गई…

    कुछ था जो याद आया,,वह आईने के सामने खड़ी होकर कपड़े बदलती थी और सामने खिड़की खुली रहती थी और वेद बालकनी में खड़ा था…
    ये बस एक ही बार हुआ था वह इसमें रिमझिम की ही ग़लती थी…

    रिमझिम पोर्च में खड़ी सब बातें याद कर शर्म से पानी पानी हो रही थी…

    रिमझिम कुछ देर वैसे ही खड़ी रही फिर हिम्मत कर बंगले के अंदर चली आई…

    रिमझिम हॉल रूम में आई और सोफे पर बैठ कर कमर सीढ़ी करने लगी क्यूंकि आज दिन भर थकान बहुत लगी थी..

    वेद रिमझिम के सामने पानी का ग्लास रख कर साथ बैठ गया…

    रिमझिम ने पानी पिया और वेद की तरफ देख बोली…”भाभी भया…अभी तक नहीं आये…!?

    “आते होंगे और मुझे लगता है वह लोग आजकल जानबूझकर कर लेट आरहे हैँ ताकि हम साथ में टाइम स्पेंड कर सके…!!

    “हम्म्म्म….!!

    “रिमझिम….!!

    “जी बोलिए….!!

    “मुझे आज सुबह से ही तुम्हे प्यार करने का बहुत दिल कर रहा है तो क्या तुम मुझे एक छोटी सी किश दे सकती हो…!!

    रिमझिम पीछे खिसक कर बोली…”अभी कुछ भी नहीं क्यूंकि मैं बहुत थक गई हूं…!!

    वेद रिमझिम के दोनों पैर उठाकर अपने पैरो पर रख गया..”ठीक है फिर तुम आराम करलो…मैं पैर की मसाज कर देता हूं…!!

    रिमझिम ने फौरन कहा…”नहीं नहीं…आप मेरे पैर नहीं छू सकते हैँ…!!

    “अब पैर भी नहीं छू सकता यारर…क्या बीवी दी है भगवान जी आपने…!!वेद ड्रामा करने लगा…

    “अच्छा बाबा छू लीजिये नहीं करती मना…!!रिमझिम को डर लगने लगा कहीं वेद जी फिरसे नाराज नहीं हो जाए…!!

    रिमझिम आँखे मुंद कर लेट गई और वेद अपनी गोद में उसके दोनों पैर रख हलकी हलकी मसाज देने लगा जिसकी वजह से रिमझिम सुकून से नींद में चली गई..

    वेद भी मसाज करते हुए सोगया क्यूंकि वह भी थका हुआ था…
    अब दोनों का हाल कुछ ऐसा था की रिमझिम सोफे पर पसरे सो रही थी और वेद उसके दोनों पैरो को गोद में लिए बैठे बैठे सोगया था…

    विमला और वीर ज़ब वापिस आये तो दोनों को यूँ सोता देख मुस्करा पड़े…


    To_be_continued…

  • 20. My Romantic Professor Husband ❣️ - Chapter 20

    Words: 953

    Estimated Reading Time: 6 min

    विमला और वीर ज़ब वापिस आये तो दोनों को यूँ सोता देख मुस्करा पड़े…

    विमला भाभी ने आहिस्ता से रिमझिम का कंधा हिलाया तो वह आँखे खोल विमला भाभी और वीर भाई को देखने लगी…
    फिर जैसे ही नींद की खुमारी छटी वह उठी और बोली…”आप…आप लोग आगये वह मैं तो बस थकान के मारे यही सोगई….सॉरी…!!

    वीर भाई बोले…”कोई बात नहीं बेटा जाओ अपने कमरे में जाके आराम करो…”

    रिमझिम हाँ में गर्दन हिला कर सीढ़ियां चढ़ कमरे में चली गई…
    वेद भी थोड़ी देर बाद अंगड़ाई लेता हुआ उठा और कमरे में आगया जहाँ आज उसके बेड पर रिमझिम सो गई थी..

    वेद वेद पर चढ़ बैठा और बोला…”ओये बीवी जी उठिये और अपने बेड पर जाए…”

    रिमझिम कुछ नहीं बोली और पड़ी रही क्यूंकि नींद अब भी आँखों में भरी हुई थी..
    लेकिन रिमझिम अधखुली आँखों से वेद को देखते हुए उठी और अपने बेड पर जाके धब से गिर गई…
    वेद की नज़र रिमझिम से हटने को तयार ही नहीं थी,,वह फिर लापरवाही में सोइ हुई थी पीठ पर काले घने बाल गेले हुए थे और ब्लाउज की डोरियाँ मज़बूती से बंधी थी और वेद की नज़रे निचे तक जाती तो भराया और कमर और कसा हुआ ज़िस्म जो उसे बुरी तरह अपनी तरफ खींच रहा था…
    दिमाग़ में बुरे बुरे ख्याल आने लगे…

    वेद उठा और रिमझिम के बेड के किनारे खड़ा उसके बालों को गर्दन से साइड से हटाकर बोला…”कितनी ज़ालिम है….मुझे तड़पता मरता छोड़ सुकून की नींद ले रही है…”

    रिमझिम ने करवट बदली तो उसके सीने का पल्लू भी सीने से सरक गया…
    वेद आँखों पर हाथ रख बोला…”कण्ट्रोल वेद कण्ट्रोल….!!

    फिर वेद चुपके से जाके अपने बेड पर सोगया…
    सुबह हुई तो उठा और रिमझिम को बालों से गिरते पानी को टॉवल से पोंछते हुए देखने लगा…
    बहुत ही सिम्पल सा ग्रीन फ्रॉक पहने रूप की रानी लग रही थी..

    “आओ इधर मेरे पास बैठो…”

    वेद के हाथ के इशारे से बुलाने पर रिमझिम झिझकती हुई वेद के बेड के किनारे पर बैठ गई…

    वेद उसके कमर में हाथ डाल कर करीब खिंचता हुआ बोला…”सुबह सुबह नियत बिगाड़ रही हो…!!

    रिमझिम ने दूर होते हुए वेद की तरफ देखा जो नीली आँखों में जूनून लिए उसे ही देख रहा था…

    “सुनो…एक प्यार भरा स्पर्श मुझे होंटो पर महसूस करना है…”वेद अपना अंगूठा रिमझिम के पतले होंटो पर रगड़ने लगा तो पल भर में रिमझिम काँप उठी और अटक अटक के बोली…

    “हम…है…कॉलेज..के लिए..ले..लेट हो..होरहे हैँ…!!

    वेद कुछ नहीं बोला और रिमझिम का चेहरा हथेली में थामता प्यार से बोला…”इतना तड़पाना अच्छा नहीं है बीवी,,ज़रा सा करीब आने नहीं देती हो…”

    रिमझिम आँखे बंद कर गई तो वेद उसके होंटो पर झुका और शिद्दत भरा स्पर्श अपने होंटो से भरने लगा…
    रिमझिम का दोनों हाथ वेद की टी.शर्ट को पकड़े हुए था…
    वेद पूरा हक जमाता हुआ रिमझिम के होंटो से मिठास चुराता रहा इतना की रिमझिम को सांस आनी बंद होगई…
    वेद धीरे धीरे निचले होंटो पर काटने भी लगा जिसकी वजह से रिमझिम की हालत ज़्यादा बिगड़ने लगी…
    रूकती सांसे और मचलते अरमान और धड़कता दिल सब बेकाबू हो रहे थे…

    वेद ने रिमझिम के होंट छोड़े और बेड पर लेटा कर बोला…”अब बताओ कितना प्यार करूँ तुम्हे….!?

    रिमझिम आँखे बंद किये तेज़ तेज़ सांसे ले रही थी और होंट गीले हो रहे थे..

    “बस होगई बोलती बंद…!!वेद हँस पड़ा..

    रिमझिम को शर्म आरही थी…

    वेद उसके सीने से दुपट्टा हटाता हुआ बोला…”तुम्हारी शर्म दूर कर दूंगा…”

    रिमझिम ने दुपट्टा कसके पकड़े रखा और जल्दी से आँखे खोल बोली…”प्लीज अभी नहीं,,अभी कॉलेज के लिए आप लेट हो रहे हैँ…”

    वेद सख्ती से जानबूझकर कर पूछने लगा..”अभी नहीं तो कब….!?

    रिमझिम जान छुड़वाने के लिए बोल पड़ी…”रात को प्यार कर लीजियेगा…!!

    वेद रिमझिम की तरफ झुकता हुआ बोला…”चलो छोड़ दिया….बस कल टेस्ट है अगर नंबर कम आये ना फिर देखना बेड से उठने नहीं दूंगा…”

    रिमझिम को इतनी खतरनाक धमकी की उम्मीद नहीं थी…

    रिमझिम हिम्मत जमा कर बोली…”मैंने इस बार अच्छी तयारी की है और पक्का इस बार मार्क्स ज़्यादा आएंगे…”

    वेद उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपाते हुए बोला…”चलो देखते हैँ….अगर तुम्हारी तयारी बेकार रही और वेकली टेस्ट में फ़ैल हुई तो मेरी तयारी देखना…मैं क्या करता हूं तुम्हारे साथ फिर हाथ जोड़ो या पैर लेकिन मैं नहीं छोडूंगा बीवी…”

    “सम..समझ गई…!!

    वेद उसे बांहो में लिए उठ बैठा और बोला…”एक तो मुझसे अब ये दुरी बर्दास्त नहीं हो रही है और अगर तुम फ़ैल हुई तो मुझे तो अच्छा मौका मिल जायेगा…”

    रिमझिम ना में गर्दन हिला गई तो वेद को उसकी मासूम डरी हुई शक्ल पर बड़ा प्यार आया…

    वेद उससे छेड़छाड़ करता रहा फिर दोनों तयार होकर कॉलेज गए जहाँ रिमझिम को सिर दर्द करने लगा क्यूंकि वेद के सामने उसने बचने के लिए झूट तो बोल दिया था लेकिन अब भी उसका दिल पढ़ाई में नहीं लग रहा था…
    थोड़ा बहुत तो आता था लेकिन ज़्यादा तर वह हर सब्जेक्ट में ज़ीरो थी…

    रिमझिम ने सोच लिया था वह लाइब्रेरी जाके दो घंटे पढ़ेगी लेकिन वह जाके भी वह यहाँ वहाँ की बातों में लड़कियों से लग गई और बार बार दिमाग़ में वेद ही समा जाता था…
    आज सुबह वाली किश से उसके बदन में सुरूर दौड़ गया था और उसे बार बार अजीब सा अहसास होने लगता…
    जैसे उसे भी वेद की बांहो में समाने की हो ख्वाहिश हो…

    लेकिन जितना भी वह कर लेती वेद के सामने मुंह खोलने की और ऐसी बातें करनी की हिम्मत नहीं थी,,वह शर्माहट घबराहट और झुंझलाहट से परेशान थी…खुद वेद को करीब आते देख गड़बड़ा जाती थी लेकिन वेद का प्यार करना अच्छा लगता था बहुत ज़्यादा अच्छा लेकिन ज़ुबान में शर्म से ताला लगा था…

    रिमझिम पूरे दिन लाइब्रेरी में यही सब सोचते हुए निकाल गई और शाम को थके हुए वजूद के साथ घर वापिस आगई..

    To_be_continued…