येकहानी है शिवांश और जानवी की। शिवांश जो की दूसरो के लिए डेविल है,पर अपने भाईयो के लिए,हमेशा से सॉफ्ट ही रहा है। दूसरी तरफ हमारी चुलबुली सी जानवी बाला की खूसबूरत, प्यारी और मासूम दोनों ही अपनी अपनी जिंदगी जी रहे थे पर कुछ ऐसा हुआ जिसे दोनों को एक कर... येकहानी है शिवांश और जानवी की। शिवांश जो की दूसरो के लिए डेविल है,पर अपने भाईयो के लिए,हमेशा से सॉफ्ट ही रहा है। दूसरी तरफ हमारी चुलबुली सी जानवी बाला की खूसबूरत, प्यारी और मासूम दोनों ही अपनी अपनी जिंदगी जी रहे थे पर कुछ ऐसा हुआ जिसे दोनों को एक कर दिया ,,,क्या होगा, जब दोनो होने आमने सामने? क्या इनके बीच,पनपेगा प्यार क्या तकरार? जानने के लिए पढ़िए ,"
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चैप्टर नंबर वन दोस्ती कहानी शुरू करते है आई विश की आप लोगो को यह कहानी अच्छी लगे तो चलिए शुरू करते है कहानी का १ चैप्टर
शिमला
एक दो मंजिला घर मैं एक लड़की किचन मैं खाना बना रही थी साथ ही साथ वोह गाना भी गुण गुना रही थी और अपने अमी मगन हुए खाना बनाती और उसे टेस्ट करके रख देखती की कही कुछ काम ज्यादा तो नही है यू ही करके उस लड़की ने सब खाना बना दिया। उस लड़की की हाईट कुछ ५ ७ इंच होगी कमर से नीचे तक आते उसके सिल्की बाल जो की खुले होने के कारण हवाओ मैं लहरा रहे थे और कुछ बाल उसके आगे भी माथे तक थे जैसे कोरियन गर्ल का होता है।
उस लड़की ने एक वक्त एक सुंदर से रेड कलर की पटियाला ड्रेस पहनी हुई थी जो की उसके गोरे बदन पर बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था उस लड़की के वोह हिरनी जैसी आखें हार्ट शेप होठ पतली सी नाक और परफेक्ट ज़ीरो फिगर कोई भी अगर उस लड़की की देखे तो देखता ही रह जाए इतनी बाला की खुसबूरत है वोह लड़की उसक लड़की की उमर २३_ २४ साल के आस पास है।
उस लड़की ने सब खाने को रेडी कर डाइनिंग टेबल पर रख दी तभी उसने अपने भाई को आवाज लगना शुरू किया वेद भाई आ जाइए खाना तैयार है ।
वोही एक कमरे मैं एक लड़का जो की मिरर के सामने खड़े होके तैयार हो रहा था उसने जैसे ही उसके कानो मैं उस लड़की की आवाज गई ,"उस ने मुस्कुरा के बोला यह लड़की कभी भी सुधेरेगी।कितने बार बोला है खाना मत बनाया करे फिर भी किचन मैं चली जाति है"
यह है वेद राय हमारी हीरोइन की भाई जिनकी उम्र २८ है हाईट ६_५ इंच हल्का सावला रंग लेकिन दिखने मैं बहुत ही ज्यादा हैंडसम और अर्टेक्टिव तीखे नैन नक्श लंबी सी नाक पतले होठ सिली बाल उस लड़के ने एक वक्त एक ब्लू पैन्ट और ब्लैक शर्ट पहनी हुई थी
उसने अपने हाथो की स्लिप को फोल्ड करता हुआ अपने कमरे से निकल के उस घर के बने एक छोटे से डाइनिंग टेबल के तरफ चला गया
तभी उसकी नजर अपनी छोटी सी बहन पर गई जो की उसी का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी यह देख के वेद के चेहरे पर हल्की से मुश्कान आ गई और वेद उसके पास चला गया और कुर्सी खीच के बैठ गया।
तभी वेद ने अपनी बहन को देख के बोला जानवी बच्चा कितने बार बोला है ,"तुम्हे तुम किचन मैं मत जाया करो मैं हु ना मैं बना दिया करगा तुझे जो भी खाना है ऐसे क्यू करती है"
वोही जब जानवी की अपने भाई की बाद सुनी तो अपना आड़ा टेडा मुंह बना के उसको देख के बोली भाई आपको पता है ना मुझे खाना बना ना और खाना कितना अच्छा लगता है।
और तोह और मैं पढ़ाई भी इसी चीज की कर रही हु तो प्लीज आप मुझे रोका ना कीजे इतना बोल जानवी ने मासूमियत सा चेहरा बना लिया
जिसे देख के वेद के चेहरे पर हल्का सी मुस्कान आ गई और उसने पाने हाथ को उठा के उसके सर पर रख के बोला बहुत बड़ी हो गई है ना तू मुझे पता है तू जान बूझ के खाना बना ने जाति है
ताकि तुझे मेरे हाथ का बेसुवाद खाना ना खाना पड़े इतना बोल वेद खुद ही जोर जोर से हस पड़ा फिर रुक के बोला अरे यार जानवी मैं इतना भी बुरा खाना। नही बनाता हु ठीक थक ही बना लेता हु जिसे मेरी प्यारी सी गुड़िया खा सके।
इतना बोल वेद के चीन को पकड़ के उसके चेहरे को हिला दिया
हा हा भाई पता है कितना अच्छा बनाते है बचपन से ही आपके हाथ का खाना खाते आ रही हु मैं अब मुझे से आपका यह टॉर्चर झेला नही जा रहा प्लीज कृपा करके आप मेरे हाथ का खाना खाया किए सब सब बाते इश्की नोटकी करके बोले जा रही थी।
अच्छा बच्चू अब मेरा खाना तुझे टॉर्चर लग रहा है रुक जा विद्या को आने दे फिर फैसला करेगे की किसके हाथ का खाना बेस्ट है
अच्छा तो आप मुझसे चैलेंज कर रहे है जानवी ने वेद को देख के बोली
हा बिलकुल वेद ने भी तपाक से बोला
ठीक है फिर आने दो दिन को वैसे भी कल रक्षाबंधन है तो दी तो आज ही आ जाएगी ना भाई क्या अपने उन्हे फोन किया था।
वेद ने जानवी की बात सुन के ना मैं पाना सिर हिला दिया फिर कुछ देर रुक के बोला नही अभी तो पर पहले खाना खा लेते है फिर कॉल कर लूंगा चल अब खाना लगा मैं भी तो देखूं मेरे घर के मास्टरचेफ ने खाना कैसा बनाया है
इतना बोल वेद इश्की को देखने लगा जानवी ने भी मुस्कुरा के वेद को देखा और खाना लगाने लगी
तो दोस्तो आज बड़ने से पहले इन के बारे मैं जानते है वेद और जानवी दोनो ही भाई बहन है और इनके पापा की एक कार एक्सीडेंट मैं २० साल पहले ही मौत हो चुकी थी और उनकी मां भी अपनी बीमारी के चलते १० साल पहले चल बसी अब इस दुनिया मैं बस वेद जानवी और इनकी बहन विद्या जो की जानवी से बड़ी और बेद से छोटी थी उसकी शादी वेद ने १ साल पहले ही कर दिया थी।
और एक वक्त वोह अपने ससुराल मैं रहती है पर कभी कभी वोह इन दोनो से मिलने भी आती थी।
अब आगे
दूसरी तरफ
दिल्ली
दिल्ली के सड़को पर एक ही साथ सही सारी गाड़िया एक साथ गुजर रही की करीब २० से २५ गाड़िया होगी और सब गाड़िया ब्लैक कलर का था और उन सभी गाड़ीयों मैं एक लोगो बना हुआ था जो की(SSR) का था।
सभी गाड़िया तेजी से सड़को पर भागे जा रही थी और कुछ ही देर मैं उनकी गाड़ी एक सुनसान से जगह पर आके रुकी जहा दूर दूर तक किसी का भी कोई निशान नहीं था शिवाय एक विला के जो की एक फार्म हाउस जैसा दिख रहा था और उसके आजू बाजू सिर्फ ओर सिर्फ घना जंगल था इसके बौजूद भी वोह फार्म हाउस खतरनाक दिखने के जगह बहुत ही खूबसूरत था।
और वाहा पर बहुत ही टाइट सिक्रुटी थी ऐशा लग रहा था जैसे मानो कोई परिंदा भी यहां पर फर नही मर सकता था।
तभी एक के बाद एक गाड़ी आके उस फार्म हाउस के सामने आके रुकती है तभी पीछे से आ रही कार मैं से कुछ गार्ड निकल के बाहर आते है और बीचों बीच मैं खड़ी एक कार का दरवाजा खोलते है तब तक आगे खड़ी कार मैं से भी गार्ड बाहर आ गई थे
और सब के सब ने अपनी नजरे नीचे झुका के खड़े थे
तभी बीचों बीच मैं खड़ी कार से एक लड़का निकलता है जो करीबन लगभग २९_३० के आज पास का होगा हाईट ६.८ इंच और गोरा रंग लंबी नाक पतले होठ काली गहरी और मिडियम साइज की आखें दिखने मैं वोह लड़के किसी प्रिंस चेमिंग के जैसा दिखता था जो हर किसी के dream boy जैसा था बहुत है हैंडसम और अट्रैक्टिव पर्सनालिटी
लेकिन फिर भी उस लड़के के चेहरे पर कोई भी भाव नजर नही आ रहा था। इस वक्त उस लड़के ने एक बिजनेस शूट पहना हुआ था और पैरो मैं चम चमाते हुए shoes
वोह लड़का चलता हुआ उस फार्म हाउस के अंदर जाने के लिए अपने कदम बड़ा वोह फार्म हाउस पूरा व्हाइट कॉलर का था दिखने मैं वोह फार्म हाउस बहुत है सुंदर था
कहनी को आगे बड़ने से पहले इनसे मिलते है
(तो इनसे मिलते है यह है हमारे कहानी के हीरो शिवांश सिंह राणा वर्ल्ड नंबर नंबर बिजनेस टायकून जिसे दुनिया हर कोई जानता था यह जितना उप्पर से पत्थर दिल दिखते है उतने ही अंदर से इनका दिल सॉफ्ट है पर सिर्फ और सिर्फ अपने भाईयो के लिए
ओर बाकी सब के लिए तो यह एक राक्षस से कम भी है लोग तो इन्हे एक डेविल और खडूस और अकडू भी बोलते है और तो और इनकी एक और पहंचान भी है लेकिन वोह क्या है वोह आगे कहानी मैं धीरे धीरे पता चल जाएगा )
अब आगे
शिवांश ने फार्म हाउस के अंदर जैसे ही कदम रखा था वैसे ही उससे किसी ने छींकने और चिलाने की आवाज सुनाई देने लगी।
जिससे सुन के शिवांश ने अपने कदम उस तरफ बड़ा दिए जहा से आवाज आ रही थी।
शिवांश अपने कदम बड़ते हुए फार्म हाउस मैं बने बेसमेंट मैं चला गया जहा पर एक आदमी की रस्सी से बंधा गया था और कुछ गार्ड उससे टॉर्चर कर रहे थे
अब तक उस आदमी की हालत अध मेरे जितनी हो चुकी थी शिवांश उस बेसमेंट मैं इंटर हुआ और वाहा पर रखे एक किंग साइड सोफे पर जाके आराम से एक पैर पर दूसरा पैर रख के बैठ गया और अपनी लाल आखों से उस आदमी को देख रहा था।
इस वक्त शिवांश बहुत ही ज्यादा खतरनाक और डरावना लग रहा था जैसे मानो वोह अपनी आखों से ही आग उगल के उस आदमी को आग मैं जला देगा।
तभी उस कमरे में शिवांश की गुस्से से भारी आवाज गूंजती है जिससे सुन के एक पल के लिए वाहा खड़े गार्ड के साथ साथ उस आदमी की भी रूह डर के मारे काप जाती है।
तभी शिवांश ने अपने गार्ड को इशारा किया तो उसके गार्ड ने शिवांश की बात को समझते हुए जल्दी से उस आदमी को शिवांश के सामने कर दिया
शिवांश ने उस आदमी को देखा और अपना एक हाथ बड़ा दिया तभी एक गार्ड ने जल्दी से उसके हाथ मैं जलती हुई सिगार रख दी
शिवांश ने उस सिगार को अपने होठों से लगा के उसके लंबे लंबे कश लेने लगा साथ ही साथ उस आदमी को भी घूरे जा रहा था
तभी उस आदमी ने जैसे ही शिवांश की घूरती हुई नजरो को अपने उप्पर महसूस किया वोह एक डर गया और उसके अंदर बहुत घबराहट होने लगी उसको शिवांश की रूप मैं उसका मौत साफ साफ नजर आ रहा था उसने जल्दी से शिवांश के पैर को पकड़ के बोला मुझे माफ कर डीजे।
बॉस मुझे से गलती हो गई मुझे ऐशा नही करना चाहिए था प्लीज मुझे माफ कर डीजे मुझे बहुत बड़ी गलती हो गई।
शिवांश ने जैसे ही उसके बात सुनी तो शिव ने उस आदमी को घूर के देखा और अपनी गुस्सैल आवाज मैं उस आदमी को देख के बोला क्या बोला तूने गलती हो गई
मेरी मां के नाम से वोह आश्रम चल रहा है मैने तुझे भरोसा करके वोह आश्रम सोफा था ताकि तू उस आश्रम को देख भाल कर सके लेकिन तूने क्या क्या ????
तू उधर आश्रम की लड़कियो की स्मगलिंग करने लगा ओट तो उन लड़कियों की इज्जत के साथ खिड़वाल करने लगा तूने यह सब करने से पहले एक बार भी नही सोचा है यह बाद बाते शिवांश अपनी गुस्से से भारी आवाज मैं बोल रहा था उसकी आवाज ही काफी थी उस आदमी को डराने के लिए जिस वक्त शिवांश बहुत ही डरावना लग रहा था।
तभी शिवांश ने उस आदमी को गुस्से से घूरते हुए बोला यह सब तूने पैसे के लिए किया था ना चल फिर मैं तुझे तेरी मुंह बोली कीमत दुगा क्या तू बदले मैं तेरी बेटी को मेरे पास भेज दे शिवांश ने इतना कहा ही था की तभी उस आदमी ने ।
गिड़गिराते हुए शिवांश को देख बोला नही नही सर प्लीज ऐशा मत कीजे मेरी इकलौती बेटी है वोह उस आदमी। ने इतना बोला ही था की तभी शिवांश ने एक सारकास्टिक वे मैं मुस्कुरा के बोला शंकर खुद को बेटी की इज्जत की बहुत फिकर है तुझे तब यह फिकर कहा गई थी जब तूने उन लड़कियों का सौदा किया था।
तब तुझे यह खयाल क्यू नही आया की वोह लड़किया भी तेरी बेटी के जैसी ही है
तो अब बता क्या किया जा तेरे साथ तू अपनी जान खुद लेगा या यह तकलीफ भी मैं ही करू च्वाइस तेरी सोच ले या तो जान दे अपनी या फिर तेरी बेटी???
नही नही प्लीज मेरी बेटी को कुछ मत करना मैं आपके आगे हाथ जोड़ता हु
हम्मम ठीक है फिर तू अपनी जान दे बदले मैं तेरी बेटी को बक्श दुगा ।
इतना बोल शिवांश ने अपने एक गार्ड को इशारा किया तोह उस गार्ड ने जल्दी से शंकर के हाथो मैं गन दे दी
शंकर ने भी शिवांश से पहले श्योर हुआ की वोह उसकी बेटी को कुछ ना करे चाहे उसके लिए वोह अपनी जान भी दे सकता था शिवांश ने भी उसको बोल दिया था की वोह शकर की बेटी को और उसके फैमिली मैं से किसी को भी कुछ नही करेगा।
तभी इस पूरे बेसमेंट मैं एक गोली की आवाज गूंज उठती है और कुछ ही पल मैं शकर नीचे जमीन पर पड़ा हुआ होता है
शिवांश ने एक नजर उस शंकर को देखा फिर उसने अपने वफादार गार्ड राका को आवाज दी
राका लड़कियो सेवली आश्रम भेज दिया है ना शिवांश ने पूछा????
राका ने अपने सिर झुका के बोला जी सर पहुंचा दिया है और जल्द से जल्द वाहा के लिए एक वफादार कैरटेकर भी डूड लेगे।
शिवांश ने उसकी बात सुनी और अपना सिर हा मैं हिला के वाहा से चला गया तब तक शिवांश के गार्ड ने भी शकर को ठिकाने लगा दिया था।
दूसरी तरफ
वेद और जानवी दोनो ही डाइनिंग टेबल पर बैठ के नाश्ता कर ही रहे थे की तभी वेद के टेबल पर रखा फोन बजने लगा
वेद ने फोन पर रिंग हो रहे unknow नंबर देखा तो एक बार उसने उस कॉल को नही उठाया आप अपना नाश्ता करने लगा।
लेकिन तभी फिर से उसका फोन रिंग होने लगा यह देख के जानवी ने वेद से बोली भाई उठा लीजे सायाद कोई जरूरी काम हो
जानवी की बात सुन के वेद ने भी सोचा क्या पता सच मैं कोई जरूरी कॉल हो वरना बार बार थोड़ी बजते रहेगा यह सोच के उसने भी अपने फोन को हाथ मैं ले उससे रिसीव कर दिया।
किसका था वोह फोन जो बार बार वेद को आ रहा था क्या यह किसी शुभ कामनाएं के लिए था था या होने वाली है कोई न होनी
शिवांश का वोह दूसरा रूप क्या था जिसे उसने दुनिया से छुपा के रखा है जन ने लिए बने रहे मेरी कहानी के साथ।
चैप्टर नंबर two दोस्ती कहानी शुरू करते है,,,,आई विश की आप लोगो को यह कहानी,,,अच्छी लगे,,तो चलिए शुरू करते है कहानी का २ चैप्टर❤️❤️❤️
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राका ने अपने सिर झुका के बोला,,,जी सर पहुंचा दिया है,,और जल्द से जल्द वाहा के लिए एक वफादार कैरटेकर भी डूड लेगे।।।
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****दूसरी तरफ****
वेद और जानवी दोनो ही डाइनिंग टेबल पर बैठ,,,,के नाश्ता कर ही रहे थे की,,,तभी वेद के टेबल पर रखा फोन बजने लगा,,,
वेद ने फोन पर रिंग हो रहे unknow नंबर देखा,,,तो एक बार उसने उस कॉल को नही उठाया,,,, आप अपना नाश्ता करने लगा।।।।
लेकिन तभी फिर से उसका फोन,,,रिंग होने लगा यह देख के जानवी ने वेद से बोली,,,भाई उठा लीजे सायाद कोई जरूरी काम हो,,,,
जानवी की बात सुन के वेद ने भी सोचा,,,क्या पता सच मैं कोई जरूरी कॉल हो वरना,,, बार बार थोड़ी बजते रहेगा यह सोच के उसने भी अपने फोन को,,,,हाथ मैं ले उससे रिसीव कर दिया।।।।
****अब तक अपने पड़ा****
***अब आगे***
**शिमला***
वेद जल्दी से कॉल रिसीव किया,,,वेद ने जैसे ही दूसरे तरफ वाले आदमी की,,,,बात सुनी तो वोह अपनी जगह से घबराते हुए खड़ा हुआ,,,और अपने कदम बाहर के तरफ बड़ा दिया।।।।।
वोही जब जानवी ने वेद को इस तरह से भागते,,,,हुए देखा वोह भी जल्दी से उसके पीछे पीछे भागने लगी,,,,जानवी ने भागते भागते वेद को बहुत बार पुकारा लेकिन,,, वेद ने एक बार भी उसकी नही सुनी,,,और वोह वाहा से बेखायरी में भागता रहा,,,करीब १;३० भागने के बाद,,,
वेद एक घर के सामने रुका जो दिखने मैं घर कम बंगलो ज्यादा था,।।।
यह घर येहा के MLA अश्विन जी का था,,,
जहा इस वक्त पुलिस वाले खड़े थे और उस घर को घेर के खड़े थे,,,,वेद ने जैसे ही यह देखा उसके कदम,,,धीरे हो गए और उसने अपने कदम धीरे धीरे उस तरफ बड़ा दिया।।।
जानवी भी वेद के पीछे,,, पीछे जब वाहा पोहुची थी तो वोह जगह की देख के शॉक हो गई,,,तभी उसके मुंह से अचानक से निकला,,,दी का घर भाई भागते हुए यहां क्यू आए है,,,,
इतना सोच के जानवी ने भी अपने कदम,,,उस तरफ बड़ा दिया,,,,और जाइए ही उसने सब लोगो को साइड करके आगे जाने ही वाली थी,,,,तभी तभी उसकी नजर नीचे बैठे अपने भाई पर गई,,,,
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और बेसुद से बैठा हुआ था,,,यह देख के जानवी वेद के और करीब गई,,,ही थी की तभी उसके कदम सामने का नजारा देख के लड़खड़ा गए,,,,
और वोह सामने पड़ी लाश को एक तक,,,,देखने लगी वोह अब तक पूरी तरह से नीला पड़ चुकी थी,,,,यह लाश किसी और की नही विद्या की थी।।।।
तभी वेद खड़ा हुआ,,,और उसने अपने बहन के पति,,,,संजय के सामने जाके बोला क्या कमी रह गई थी मेरे बहन के प्यार मैं,,,,क्या उसने कभी भी तुम्हे किसी शिकायत का मौत दिया,,,,इतना बोल वेद ने संजय के कोलार के पकड़ के झंजोरते हुए,,,बोलो बोलते क्यू नही हो,,,,क्या कुछ नही किया मेरे बहन ने तुम्हारे लिए और तुम्हारे प्यार को अपने के लिए उस चीज का यह शीला दिया,,,तुमने।।।
वोही संजय खामोश सा खड़ा था,,,उसने वेद के सवालों का कोई भी जवाब नही दी,,,यह देख के वेद ने संजय को छोड़ा और उसके मां पापा के पास जाके,,,,बोला क्या हुआ आंटी क्या गलती हो,,,गई थी मेरी बहन से क्या वोह आप लोग को खाना नही बना के देती थी,,,या फिर आप लोगो के काम नही करती थी,,,,या आप लोगो को प्यार नही करती थी।।।।।
जिसका शिला उससे यह मिला,,,यह सब बाते वेद बोल तो रहा था लेकिन उसके आखों से अब भी,,,आसू झर झर बह रहा था।।।
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तभी उसने अपनी बहन को देखा,,,,जानवी ने विधा के सिर को अपने गोद मै लिए,,,,एक तक उसको देख रोए जा रही थी,,,,उसके आखों से पानी तो समुद्र के जैसे बह रहा था।।।
तभी संजय ने वेद को देख एक बोला,,,हम ने तुम्हारी बहन को नही मारा ही वोह खुद मारी है समझते तुम,,,तो हम लोगो पर ऐसे बेलेम लगाओ,,,
तभी संजय की मां को भी थोड़ी सी हिमत,,, मिली और उन्होंने भी कहा और नही तो क्या तुम्हारी बहन एक,,,, नंबर की बच्चलन थी,,,जिसे हम लोगों ने रंगे हाथो पकड़ा था किसी ने बात करते हुए,,,,फिर भी हम लोगो ने उसी कुछ भी नही बोला,,,
खुद तो मत गई लेकिन हम लोग के सर पर,,,के बोझ छोड़ गई अब उसे कोई देखेगा,,,,जब मां ऐसी थी तो सोचो बच्ची कैसी होगी,,,,
बस आंटी बस,,,अब एक शब्द नही आपको जो बोलना था अपने बोल दिया,,,अगर एक और शब्द अपने मेरे बहन के खिलाफ बोला ना तो मैं,,,यह भी देखूंगा की,,, आप मुझे बड़ी है जुबान खीच लुगा मैं आपकी,,,,यह सब बाते वेद अपनी जलती आखों मैं गुस्सा लिया,,,,वेद को बोल रहा था।।।।
तभी संजय का छोटा भाई,,,उसके सामने आते हुए बोला,,,तेरी इतनी हिमात तू मेरी मां के साथ बातमीजी करेगा,,,तुझे तो मैं बताता हु इतना बोल इतना बोल के संजय का छोटा भाई,,,नील उससे मारने की आगे बड़ा ही था की तभी एक पुलिस कांस्टेबल ने जल्दी से,,,के नील को रुक दिया।।।।
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और धीरे से उसको देख के बोला,,, अरे छोटे सरकार कहे आप तकलीफ करते है मैं हु ना इसके लिए मैं ही काफी,,,हु,,,
लेकिन वोह पुलिस कांस्टेबलकांस्टेबल कुछ बोलता उससे,,,पहले ही वेद ने बोला,,,वाह अश्विन अंकल इतना बड़ा घर है आपका और तो ओर आप तो यह,,,के MLA भी है ।।।।
आपके MLA का क्या फायदा अब आप अपने ही,,,घर के बहु को बचा नही पाए और तो आप सब ने मिल,,,के मेरी बहन को जो टॉर्चर किया है ना,,,,उसका बदला मैं ले के रहुगा,,,,
मैं अपलोगो का असली चेहरा सब को दिखा के,,,रहुगा इतना बोल वेद ने वाहा खड़ी एक मेड के तरफ बड़ा,,,,और उसके हाथो,,,,से एक २ महीने के बच्ची को अपने गोद मै ले लिया,,,
तभी नील ने बोला पापा यह कुछ ज्यादा ही,,,बोल रहा है इसका तो मैं अभी देखता हु,,,इतना बोल नील वेद के तरफ बड़ा ही था की,,,तभी अश्विन जी ने नील का हाथ पकड़ के बोले,,,अभी नही पहले इसे यहां से जाने दो इसको हम बाद मैं ठिकाने लगा देगे,,,,
अश्विन जी के बोलने पर नील अपनी जगह,,,ही रुक गया और अपने गुस्से भरी आखों से,,,,वेद को देख रहा था उसका बस चलता तो अभी वेद को,,यही मार देता।।।।
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वेद जानवी के तरफ बड़ा जो अभी भी,,,,विधा के सर को अपने सीने से लगा के रो रही थी,,,वेद नीचे घुटनो के बल बैठा और जानवी के कंधे पर हाथ रखा,,,,
जानवी ने अपने भाई ने अपनी आसू भारी आखों से अपने,,,,भाई को देखा और वेद ने जानवी के आखों से आसू को साफ करके,,,उससे उट्ठता है उसको अपने सीने से लगा के उससे चुप करा के बोला,,,shhhhh शांत हो जाओ अब हमे जल्द से जल्द यहां से जाना है,,,
जानवी ने वेद के सीने से सिर निकल के,,,हा मैं अपना सिर हिला दिया और उससे दूर हो गई वेद ने,,,,जानवी के हाथो मैं बच्ची देते हुए बोला,,,,जानवी ईशा को संभालो इतना बोल वेद ने जानवी के गोद मै ईशा को दे दिया,,,,
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फिर बाद वेद झुका और उसने विधा को अपने,,,गोद मै उठा के वाहा से पैदल ही,,,उससे ले जाने लगे।।।
वोही जानवी की वेद के साथ बच्चे को लेके,,,उसके साथ ही चल रही थी,,,कुछ ही टाइम वोह वोह दोनो अपने एरिया मैं आए गई थे जैसे ही सब लोगों ने वेद की,,,विधा को गोद मै लिए आते देखा सब,,,,धीरे धीरे कर वेद के घर के यह जमा हो गए।।।।।
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वेद ने विधा को आपने घर ले गया और अपने घर,,,के लिविंग हॉल मैं उससे लिटा दिया,,,,तभी घर के अंदर एक लड़की आई,,,उसकी आखें भी नम भी वोह जल्दी आके जानवी के गले लग गई,,,
यह लड़की है स्नेहा वेद की मंगेतर,,,जो की उनके घर के बगल मैं ही रहती है,,,दिखने मैं वोह लड़की भी किसी ने काम नही थी,,,,गोरा रंग,, छोटी छोटी आखें,,,पतले होठ,,घुगराले बाल जो की उसके कंधे तक ही आते थे,,,उसकी उमर २५ साल थी,,,हाईट ५,६ इंच,,,दिखने बहुत ही क्यूट थी वोह
***बैकग्राउड म्यूजिक***
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हां…
तेरी जुदाई झुमर झंझार डाले
मेहंदी लगायी फूलों वाली
झालर से डोली सजायी लाडो
तुझको होना तो था
पारयी जाते-जाते आँखों में
आंसु ले आई तेरी जुदाई आ..
रहना सुखी तू, नाज़ुक कली तू
पीहर करे तेरा तेरी बिदाई
पीहर करे तेरा तेरी बिदाई
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वेद वोही एक साइड बैठ गया और अपनी नम आखों से,,,विधा को ही देखे जा रहा था,,,तभी कुछ औरते वोह पर आई जिस मैं स्नेहा की। मां भी सामिल थी उन्होंने सब ने मिल के स्नेहा को के चारो तरफ,,,एक कपड़ा लगा दिया,,,फिर उसको हल्की तेल से नेहलाके,,,,उसको लाल कॉलर की साड़ी पहना दी,,,,
और वोही पर बड़े,,,,उसकी अर्थी पर उसको लिटा दिया,,,जेल औरतें ने उसके हाथो और पैरो मैं आलता लगाया,,,कुछ लोगो ने उसका पूरा शिगार कर दिया,,,
उसके बाद उसको लास्ट मैं सब लोगो ने उसके सामने हाथ,,,,जोड़ के फूल चढ़ा दिए।।।
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भीगे-भीगे आंखें आँखों में
हैं तारे तारे तेरी राहों पे सारे
हमने वारे सपने साजा तू,
ले जा दुआ तू पीहर करे
तेरा तेरी बिदाई पीहर करे
तेरा तेरी बिदाई आज हुआ
बेगाना माइका अपना तेरा
ससुराल हुआ एक दिन
साजन मानेंगे के तुम से
आंगन खुशहाल हुआ रौनक तू है
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तभी स्नेहा ने जानवी को उठा के,,,उससे विधा के पास ले गए और उसको सर के साइड बैठा दिया,,,
जानवी ने जैसे ही विधा को देखा,,,,वोह विधा के उप्पर ही अपना सर रख,,,,जोर जोर से रोने लगी,,,जिसे देखा वोह हर किसी का दिल फैसिस गया था,,, हर किसी की आखें नम थी,,,,
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वोही जानवी अब तक बेहोश हो चुकी थी,,,,तभी उसने अपने सामने मैं अपने बहन विद्या की,,,उसके सामने देखा विधा मुस्कुरा के जानवी को देख रही थी,,,,,तभी विधा ने जानवी को अपने पास आने को कहा।।।
जानवी भी झट से विधा के सीने से,,,जा लगी जानवी ने रोते हुए बोली,,,दी प्लीज मुझे छोड़ के मत जाइए प्लीज दी मैं आपके बिना नही रह पाऊंगी प्लीज मुझे मत छोड़ के जाइए,,,,
विधा ने जानवी की बात सुन के,,,जानवी के चेहरे को अपने हाथ को ले बोली,,,नही विधा मेरा टाइम हो चुका है मैं जा रहीं हु तू मेरी बात ध्यान से सुन,,,,तू मेरी सब से स्ट्रांग बहन है,,,,तुझे मेरी ईशा को एक मासी नही मां बन के पालना होगा,,,,कभी भी उससे यह यहसास मत होने देना की तू उसकी मां भी मासी है,,,,,मुझे वादा कर जान तभी मैं सुकून से मां पापा के पास जा पाऊंगी,,,,,बोल मेरी गुड़िया बोल,,,तू पालेगी ना उसे एक मां बन के।।।।
हा दी मैं उससे मां बन के पलुगी,,,उससे कभी भी यह यहसास नही होने दुगी की मैं,,,उसकी मां भी हु,,,,लेकिन दी मुझे भी आपके साथ जाना है,,,,मुझे भी के चलो।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
जानवी की बात सुन के विधा ने मुस्कुरा के,,,जानवी के आसू पोहुच्चे और उस से दूर खड़ी हो गई,,,,और उसे देख बोली गुड़िया तुझे कब स्ट्रॉन्ग बन ना होगा,,,,अपना खयाल रखना इतना बोल विधा वाहा से गायब हो गई,,,
तभी जानवी छींक के उठ गई नही दी नही आप,,,मुझे छोड़ के नही का सकते,,,
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को भी होगी तू जैसे
हमको प्यारे इतना यक़ीं है,
जीवन सुखी है पीहर करे तेरा
तेरी बिदाई पीहर करे तेरा तेरी
बिदाई साजन सच्चा सोना
सासु सच्चाई रानी जैसी बिटिया है
हमने बिहायी जाने वो भी
दुल्हन खुशी है लायी आंगन में
गूंजेगी अब शहनाई हमारी
बधायी (बधायी..) लंबी उमर हो,
सपनों सा घर हो पीहर करे
तेरा तेरी बिदाई पीहर करे
तेरा तेरी बिदाई पीहर करे तेरा तेरी बिदाई
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वेद जल्दी से जानवी के पास आया और उसको अपने,,,सीने से लगा लिया shhhhh शांत हो जाओ गुड़िया,,,देखो हम यही है शांत रहो।।।।
जानवी ने नम आखों से वेद को देखने लगी,,,तभी वाहा पर स्नेहा के पापा आ गए,,,और वेद को देख बोले चलो बेटा अब विदाई का समय हो गया है।।।
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उनकी बात सुन के वेद ने भी हा मैं,,,अपना सिर हिला के स्नेहा को देखा,,,तो स्नेहा ने भी हा मैं अपना सिर हिला के ईशा को गोद मैं लिए,,,,जानवी के पास आ गई।।।
कुछ ही देर मैं विधा की अंतिम यात्रा हो चुकी थी,,,,अब बस घर मैं स्नेहा और उसकी मां जानवी थे,,,,स्नेहा जानवी को संभाल रही थी।।।
और स्नेहा की मां ने अब तक घर की सारी,,,साफ सफाई कर दी थी।।।
और वोह भी उनके सामने आके बैठ गई,,,,तभी सबके कान मैं ईशा की रोने की आवाज सुनाई दी,,,,
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हेलो फ्रेंड्स तो आप लोगो को क्या,,,लगता ही वेद अपनी बहन के मौत का बदला ले पाएगा,,उसके ससुराल वालो से या कुछ और ही होने वाला है उसके साथ जान ने के लिए स्टोरी के नेक्स्ट पार्ट का वेट कीजे।।
हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
चैप्टर नंबर ३ दोस्ती कहानी शुरू करते है,,,,आई विश की आप लोगो को यह कहानी,,,अच्छी लगे,,तो चलिए शुरू करते है कहानी का ३ चैप्टर❤️❤️❤️
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वेद जल्दी से जानवी के पास आया और उसको अपने,,,सीने से लगा लिया shhhhh शांत हो जाओ गुड़िया,,,देखो हम यही है शांत रहो।।।।
जानवी ने नम आखों से वेद को देखने लगी,,,तभी वाहा पर स्नेहा के पापा आ गए,,,और वेद को देख बोले चलो बेटा अब विदाई का समय हो गया है।।।
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उनकी बात सुन के वेद ने भी हा मैं,,,अपना सिर हिला के स्नेहा को देखा,,,तो स्नेहा ने भी हा मैं अपना सिर हिला के ईशा को गोद मैं लिए,,,,जानवी के पास आ गई।।।
कुछ ही देर मैं विधा की अंतिम यात्रा हो चुकी थी,,,,अब बस घर मैं स्नेहा और उसकी मां जानवी थे,,,,स्नेहा जानवी को संभाल रही थी।।।
और स्नेहा की मां ने अब तक घर की सारी,,,साफ सफाई कर दी थी।।।
और वोह भी उनके सामने आके बैठ गई,,,,तभी सबके कान मैं ईशा की रोने की आवाज सुनाई दी,,,,
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***अब तक अपने पड़ा**
***अब आगे***
जानवी ने अपनी नम आखों से देखा तो,,,स्नेहा ईशा को गोद मै लिए चुप कराने की कोशिश कर रही थी,,,,स्नेहा बच्चे को लेके इधर से उधर चक्कर लगा रही थी,,,लेकिन ईशा चुप ही नही हो रही थी,,,,
तभी स्नेहा की मां शिल्पा जी ने,,,स्नेहा को देख के बोली,,,बेटा उससे दूध की बॉटल से दूध पिला दे स्नेहा ने,,,टेबल पर रखा दूध का बॉटल उठ के,,,ईशा को दूध पिलाने लगी।।।।
लेकिन ईशा दूध भी नही पी रही थी,,,तभी शिल्पा जी बोली लगता है बच्ची मां की गोद ढूंढ रही है,,,अब इस छोटी सी बच्ची को कोई समझाए की,,, इसकी मां इस छोड़ के हमेशा हमेशा के लिए चली गई है,,,,और अब वोह कभी भी नही आयेगी।।।।
इतना बोलते वक्त शिल्पा जी की भी,,,आंखे नम हो गई क्यू की वोह हमेशा से ही विधा,,,जानवी, वेद को अपने ही बच्चे समझती थी,,,उनके मां के गुजर जाने के बाद उन्होंने ने ही तीनो एक ख्याल रखा था,,,,
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ईशा अब जोर जोर से रोने लगी थी,,,तभी स्नेहा के सामने दो हाथ बड़ के आ गए,,,स्नेहा ने अपनी नजर उठ के देखा तो सामने जानवी खड़ी थी,,,,यह देख स्नेहा ने ईशा को जानवी के गोद मै दे दिया।।।।
ईशा भी जानवी के गोद मै जाते है जल्दी चुप हो,,,गई और जानवी की ही अपनी बड़ी बड़ी आखें करके,,,देखने लगी जिसे देख जानवी के चेहरे पर ही हल्की,,, मुस्कान आ गई जानवी ने ईशा की गोद मै ले सोफे पर बैठ गई,,,और उसको बॉटल से दूध पिलाने लगी,,,
तभी शिल्पा जी ने जानवी और ईशा को देखा,,,और बोली रूवाशी आवाज मैं बोली,,,अपनी मासी की गोद को मां की गोद समझ के शांत हो गई,,,उन्होंने इतना ही कहा था की तभी जानवी ने शिल्पा जी को देख के बोली,,,,
नही अंटी मैं इसकी मासी नही हु,,,जानवी के ऐसे बोलने पर स्नेहा और शिल्पा जी हैरानी जी,,,उसे ही देखने लगे।।
तभी स्नेहा ने जानवी को देख के,,,बोली अरे जानवी यह कैसी बाते कर रही हो।।।
जानवी ने स्नेहा को देखी और बोली,,,हा स्नेहा दीदी सही बोल रही हु मै इसकी मासी नही हु,,,आज से और अभी से मैं इसकी मां हु और मैं हमेशा उससे एक मां,,,बन के प्यार करुगी और इसकी देख भाल करुगी।।।।
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इतना बोल जानवी सोफे से उठ के,,,ईशा को अपनी गोद मै लिए वाहा से अपने कमरे मैं चली,,,गई।।।
वोही वेद जो की अभी अभी अपनी,,,बहन को अंतिम आग्नि,,,देखे आया था उसने जानवी की बात सुनी तो वोह एक तक जानवी को जाते हुए देखने लगा।।।।
तभी स्नेहा की नजर दरवाजे पर खड़े,,,वेद पर गई और उसने वेद को देख के बोली,,,वेद तुम उसकी बात को गलत मत समझना,,,
वेद ने स्नेहा को देखा और बोला,,,,नही स्नेहा उसने कुछ गलत नही बोली है,,,आज मुझे अपनी बहन पर गर्व है मुझे पूरा विश्वास है की वोह एक अच्छी मां,,,बन के ईशा को पलेगा।।।।
इतना बोल वेद भी अंदर आ गया कर सोफे,,,पर बैठ गया।।।
ऐसी ही देखते देखते १५ दिन यू ही बीत गए,,,
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***दूसरी तरफ***
दिल्ली के एक सबसे बड़े क्लब मैं जोरो,,,जोरो से पार्टी चल रही थी,,,, हर कोई नशे मैं धुध था और वाहा पर बज रहे लाउड म्यूजिक पर अपने पैर थिरक रहे थे,,,,
वोही बार काउंटर पर चार लड़के बैठे हुए थे,,,और एक के बाद एक शॉर्ट लगाए जा रहे थे,,,,
तभी उन चारो मैं एक लड़के ने बोला,,,एक शर्ट लगा के बोला,,,अरे यार मिहिर चला ना डांस करते है देखना कितनी ही परिया फ्लोर पर डांस कर रही है मेरा,,,भी मन डांस करने का हो रहा है,,,,
हा यार तुषार तूने सही बोला चल चलते है,,,दोनो अभी जा ही रहे थे की तभी,,,,एक लड़के ने उनके पीछे से ही साइट के पकड़ते हुए बोला,,,,डोंट क्रॉस योर लिमिट वरना भाई से हम तुम्हे नही बचाएगा समझे,,,
हा हा निहाल भाई मुझे पता है,,, आप चिंता मत कीजे हमे पता है भाई सो जस्ट chillll बोल तुषार और मिहिर वाहा से डांस फ्लोर मैं चले गए,,,
तभी निहाल ने अपने सामने बैठे लड़के को,,,,देख के बोला,,,यह दोनो कभीं नही सुधरेंगे लेकिन तुझे क्या हुआ है तू क्यों देवदास बन के बैठा,,,,हुआ है।।।
अंगद ने निहाल के बात सुनी तो,,,,उसे देख बोला अरे यार तो क्या करू बता आज मीरा ब्रेकअप हो गया,,,और तुम सब साले मिल के,,,,मेरे ब्रेकअप की पार्टी मैं यश कर रहे हो।।।।
अरे यार अंगद chill कर वैसे भी वोह लड़की तेरी टाइप की,,,बिलकुल भी नही थी,,,अरे उसका तो तुझ से पहले से किसी के साथ अफेयर चल,,,रहा था पर तुझे ही समझ में मै देर हो गई।।।।
चल छोड़ जो भी हुआ सही हुआ,,,,आखिर कार उससे उसकी सच्चाई तो पता चल गई,,,और तू उसके चागुल से फसते फसते बच गया,,,चल अब एंजॉय कर इतना बोल निहाल ने अंगद को डांस फ्लोर पर दिखते हुए,,,,बोला वोह देख उन दो नमूने को।।।।
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थोड़ा शोर मचाओ
देसी बॉयज़ के लिए
द बॉयज़ द बॉयज़
आओ चलें
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तुषार और मिहिर दोनो ही डांस फ्लोर कर जाके,,,,सब को साइड कर खुद वोह खड़े होके डांस करने लगे,,,,वोही जब लड़कियो ने दोनो का डांस देखा तोह,,,आखें और मुंह खोले उन्हे ही देखने लगी,,,,वोही उसके बॉयफ्रेंड को तुषार और मिहिर से जलन होने लगी थी।।।।।
अरे भाई हो भी क्यों ना क्युकी उनकी गर्लफ्रेंड उन्हे छोड़ के,,,तुषार और मिहिर को जो ताड़े जा रही थी।।।।
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कुड़ियां दे दिल
उत्ते रूल करांगे
एही बाजार विच
फैली है हवा
तोड़ेंगे रोमियो दे
लव दा रिकॉर्ड वी
लिखेंगे इश्के दा पाठ नवा
हम यारों बड़े हैं
दिल अपना है शरीफ बड़ा
थोड़ा शोर मचाओ
देसी बॉयज़ के लिए
एक दो तीन गो
अंग्रेजी ठुमके
दिल की लय पे
मारे जम जम
के देसी बॉयज़
सोहने मोहने बनके
छटी डोले तन के
नाचे जैम
जाम के देसी बॉयज
इंग्लिश ठुमके
दिल की रिदम पे
मारे जैम जैम
के देसी बॉयज
सोहने मोहने बनके
छटी डोले तन के
नाचे जम जम
के देसी बॉयज़
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वोही अंगद और निहार दोनो के दोनो,,,उन दोनो को देख के ड्रिंक के शर्ट लगा के उनके वीडियो बना,,,रहे थे ताकि जब उन दोनो को होश आए तो उन्हें यह,,,देखा सके।।।।
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अंगद ने निहार को,,,,देख के बोला निहार देख तो हमारे देसी बॉयज का डांस अगर इनकी इस हरकत,,,के बारे मैं हमने शिवांश को पता दिया,,,ना तो इनका देसी कही और पड़ा होगा और बॉयज कही और,,,,इतना बोल अंगद और निहार दोनो ही हस दिए।।।
क्यू की तुषार और मिहिर के आजू और बाजू,,,दोनो तरफ लड़कियो ने उन्हे घेर लिया,,,था और उन्हे टच करके डांस किए जा रही थी।।।
और वोह लोग भी शराब के नशे,,,मैं पूरी तरफ से धुत थे अब तो दोनो को बिलकुल भी होश ही नही,,,था की दोनो क्या कर रहे है।।।
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हो हम तो यारों
हेंगे प्यार दे व्यापार
सोनिया मांगे
साडे घर दा पता
कहेंदे है लेडी
गागा फैन हमारी
उसे कहो कदे मिल जा जरा
ओह कुड़ियों को खुश रखना
अपना तो है असली सदा
थोड़ा शोर मचाओ
देसी बॉयज़ के लिए
उन दोस तीन गो
अंग्रेजी ठुमके
दिल की लय पे
मारे जम जम
के देसी बॉयज़
सोहने मोहने बनके
छटी डोले तन के
नाचे जम जम
के देसी बॉयज़
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तभी तुषार और मिहिर दोनो ने भी,,,अपनी अपनी शर्ट निकाल दी,,,,और उसके बॉडी को देख के अब तो और भी लड़कियो डांस फ्लोर पर आ चुकी थी,,,,
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तुषार और मिहिर दोनो की ही बॉडी,,, मस्कुलर बॉडी और सिक्स पैक अप जो यह दिखाने के लिए,,,,काफी था की,,,दोनो ही gym मैं काफी मेहनत करते है,,,,दोनो ही दिखाने मैं बहुत ही ज्यादा हैंडसम और आर्टेक्टिव थे,,,आखिर हो भी क्यों ना दोनो ही शिवांश के भाई थे,,,और तुषार और मिहिर दोनो ही ट्विंस थे,,,दोनो की उमर २६ साल है,,,हाईट ६:५ इंच।।
दोनो अभी डांस कर ही रहे थे की,,,तभी एक लड़की वाइन के बॉटल को खोल के तुषार और मिहिर के,,ऊपर डाल दी।।।
जब यह नजारा निखिल और अंगद ने देखा,,तो अपनी आखें फाड़े उन दोनो को ही देख रहे थे,,,,
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कर लेते हैं अच्छी खासी
अपनी तो है ज़िम्मेदारी
जहाँ भी देखी कुड़ी कवारी
उसको घर तक छोड़ने जाना
आधी रात को लौट के आना
बल्ले नी आजा थल्ले
हम कुड़ियों की हैं कमजोरी
हम पे खाली करे तिजोरी
अपने पीछे मारा मारी
करती है ये दुनिया सारी
हम में देखी है क्या खूबी
आजा इन से पूछ ले तू भी
बल्ले नी आजा थल्ले
हम यारों बड़े हैं
दिल अपना है शरीफ बड़ा
थोड़ा शोर मचाओ
देसी बॉयज के लिए
एक दो तीन गाओ
अंग्रेजी ठुमके
दिल की लय पे
मारे जम्म जम्म
के देसी बॉयज
सोहने मोहने बनके
छटी डोले तन के
नाचे जम जम्म
br>के देसी बॉयज़
दुनिया के कोने
देखे औने पौने
सबसे है सोहने देसी बॉयज़
अपनी आवाज़ उठाओ
थोड़ा शोर मचाओ
तेरे लिए आए देसी बॉयज़
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तभी एक लड़की मिहिर के करीब जा पाती,,,उससे पहले ही एक लड़की ने आके उसके,,,पीछे से बालो को अपनी मुट्ठी मैं भर लिया,,,और एक ही झटके मैं उस ने मिहिर से अलग कर दिया,,,और कुछ ही पल मैं वोह लड़की नीचे जमीन पर कहराते हुए मिली।।।।।
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तभी सॉन्ग खत्म हुआ,,,और सब लोग उसको ही देखने लगे,,,तभी वोह लड़की कहराते हुए बोली,,,अच्छा यू b****dy b***ch तुम्हारी हिमात भी कैसे हुए,,,मुझे धक्का देने की इतना बोल वोह लड़की फिर से उठ गई,,,
तभी उस लड़की ने सामने वाली लड़की को घूरते हुए,,,देख के बोली अभी बताती हु,,,इतना बोल उस लड़की ने फिर से उसको धक्का दे दिया,,,,
तभी वोह लड़की खुद को संभाल,,, पाती उससे पहले ही उस लड़की ने उसके सर पर वाइन को,,,,बॉटल दे मारी और बोली तेरी हिम्मत भी कैसे हुए,,,,मेरी मिहिर को हाथ भी लगाने की तुझे तो मैं इतना बोल वोह लड़की,,,,वापस से अपना चेहरा इधर उधर,,करके कुछ ढूढने लगी।।।।
तब तक निहार और अंगद माहिर,,,और तुषार के पास आ गए थे,,,तभी निहार ने माहिर को देख के बोला,,,अरे मेरे छोटे से भाई जा जाके अपनी,,,,जंगली बिल्ली को संभाल नही तो आज यह यहां पर मर्डर करके मानेगी।।।।
तभी मिहिर खोए हुए बोला,,, अरे भाई रहने दो दो ना देखो कितना अच्छा फाइट कर रही है,,,,मेरी हीर हाय मैं सदके जावा।।।।
Oye हीर के रांझा,जा जाके रोक नही तो,,, नही तो भाई को पता चला ना बेटा,,,तो तो हंगामा जरूर होगा और तुझे फिर भाई से कोई भी नही,,,,बचा सकता तुषार ने बोला।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
अबे मैं तो भूल ही गया,,,,इतना बोल मिहिर जल्दी से हीर के पास गया और,,,उसको पीछे से ही पकड़ते हुए बोला,,,, अरे मेरी जान बस भी करो अब क्या जान लेके मानोगी,,,,
मार जायेगी बिचारी,,, छोड़ो उसको मिहिर की बात सुन के वोह लड़की पलटी,,,तो मिहिर ने हीर को प्यार भरी नजरो से देखने जहा,,,गोल चेहरा गोरा रंग,,,ब्राउन आखें,,क्रिंपी हेयर,,पलते होठ,,परफेक्ट फिगर उम्र २३ साल,, छोटी सी नाक,,,हाईट५:४ इंच दिखने बहुत ही क्यूट थी,,,
तभी हीर ने घूर के मिहिर को देख के,,,बोली हा सही बोला तुमने इसे नही मुझे तो तुम्हारा सर फोड़ना,,,,चाहिए
अरे अरे पर मेरा क्यू,,,मिहिर ने भी तपाक से बोला।।।।
क्यू अभी बताती हु,,,,यह जो तुम अपने बॉडी का अंग प्रदासन करने फिर रहे हो ना,,,,इसके लिए मुझे दूसरो को मरने या कुछ बोलने से पहले,,,,तुम्हारा ही पैर तोड़ देना चाहिए,,,,
इतना बोल हीर इधर उधर देखने लगी,,,तभी उस को नजर क्लीनर पर गई जो की अब वाहा की,,, सफाई करने आया था,,,,
जैसे ही मिहिर ने हीर की नजरो को,,,,फोलो किया तो उसकी भी नजर वाहा जाके रुक गई,,,,यह देख मिहिर अपने मन मैं बोला,,,,भाग ले बेटा वरना यह तेरी हीर आज तेरा सब के सामने कचरा कर देगी।।।।
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इतना बोल मिहिर दबे पांव क्लब से बाहर निकल गया,,,,तभी हीर ने पलट के मिहिर को देखा और उसे वोह पर ना पाके,,,,उसने अंगद,निहाल,तुषार के तरफ देखा तो तीनो ने ही बाहर के तरफ,,,,इशारा कर दिया।।।।
हीर भी जल्दी से बाहर के तरफ,, बाड़ गई यह सब तीनो ने ना मैं अपना सिर हिला दिया तभी निहाल ने,,,अंगद तुषार को देख के बोला,,,तुम दोनो बाहर जाके देखे कही सच मैं हमारे छोटे शेर का आज खून ना हो,,,जाए तब तक मैं यह का निफ्टा लेता हु,,,,निहाल के बोलने पर दोनो बाहर चली गए।।।।।।।
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
चैप्टर नंबर ४ दोस्ती कहानी शुरू करते है,,,,आई विश की आप लोगो को यह कहानी,,,अच्छी लगे,,तो चलिए शुरू करते है कहानी का ४ चैप्टर❤️❤️❤️
क्यू अभी बताती हु,,,,यह जो तुम अपने बॉडी का अंग प्रदासन करने फिर रहे हो ना,,,,इसके लिए मुझे दूसरो को मरने या कुछ बोलने से पहले,,,,तुम्हारा ही पैर तोड़ देना चाहिए,,,,
इतना बोल हीर इधर उधर देखने लगी,,,तभी उस को नजर क्लीनर पर गई जो की अब वाहा की,,, सफाई करने आया था,,,,
जैसे ही मिहिर ने हीर की नजरो को,,,,फोलो किया तो उसकी भी नजर वाहा जाके रुक गई,,,,यह देख मिहिर अपने मन मैं बोला,,,,भाग ले बेटा वरना यह तेरी हीर आज तेरा सब के सामने कचरा कर देगी।।।।
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इतना बोल मिहिर दबे पांव क्लब से बाहर निकल गया,,,,तभी हीर ने पलट के मिहिर को देखा और उसे वोह पर ना पाके,,,,उसने अंगद,निहाल,तुषार के तरफ देखा तो तीनो ने ही बाहर के तरफ,,,,इशारा कर दिया।।।।
हीर भी जल्दी से बाहर के तरफ,, बाड़ गई यह सब तीनो ने ना मैं अपना सिर हिला दिया तभी निहाल ने,,,अंगद तुषार को देख के बोला,,,तुम दोनो बाहर जाके देखे कही सच मैं हमारे छोटे शेर का आज खून ना हो,,,जाए तब तक मैं यह का निफ्टा लेता हु,,,,निहाल के बोलने पर दोनो बाहर चली गए।।।।।।।
***अब तक अपने पड़ा***
***अब आगे**
*** दूसरी तरफ***
शिमला मैं आज विधा की मारे,,,१५ दिन हो चुका था,,पर अब तक ना ही वेद खुद को संभाल पाया था,,,और ना ही जानवी,,,दोनो ही ना तो ठीक से खाना खाते थे और,,,ना ही सोते थे।।।
स्नेहा तो उन दोनो की ऐसी हालत,,,देख के बहुत परेशान हो गई थी,,,तभी स्नेहा ने वेद के कमरे मैं गई जहा वेद एक फोटो फ्रेम के सामने,,,खड़ा उन्हे एक तक देख रहा था,,,तभी वेद ने फोटो को देख के बोला,,,,,
मां मैने अपनी जिम्नेदारी निभाने मैं ना कमियाब्ब हो गया,,,मां मैं विधा को नही बचा पाया,,,उसने मुझे अगर पहले ही थोड़ी हिट दे दी होती तो,,,मैं उससे उस नरक से बचा के ले आता,,,कभी भी उस नरक मैं नही रहने देता पता नही क्या कुछ नही सहा होगा मेरी,,,फूल जैसे बहन ने कितना बोल वेद के आखों से एक बूंद आसू,,,,निकल के उसके गालों में लुड़क आए।।।।।
तभी वेद को अपने कंधे पर किसी के,,,हाथ महसूस हुआ वेद ने पीछे पलट के देखा जहा,,,,स्नेहा अपनी नम आखों से उससे ही देख रही थी।।।
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तभी वेद झट से स्नेहा के गले लग के,,, रो दिया स्नेहा ने भी जब वेद को इस तरफ से रोते हुए देखा,,,उसने भी कश के वेद को हग कर दिया,,,,और उसके पीट पर अपने हाथ रख के हल्के हल्के से सहलाने लगी।।।।
शांत हो जाओ वेद तुम ही अगर,,,ऐसे टूट जाओगे तो जानवी और ईशा का खयाल कॉन रखेगा,,,अब तुम ही खुद को स्ट्रॉन्ग करके दोनो को प्रोटेक्ट भी,,,करना है पीछे कुछ दिनों मैं पता है ना क्या हुआ,,,था।।।
एक्चुअली हुआ यह था की वेद ने,,,,अश्विन जी और उनके पूरे परिवार वालो के नाम पुलिस मैं,,,कंप्लेन कर दिया थी,,,साथ ही साथ वोह हाईट कोर्ट तक उन्हे ले जाने वाला था,,,
जैसे ही अश्विन जी को इस बारे मैं खबर,,,मिली वोह पूरे तरह से भोखला गए,,,और तभी उन्होंने अपने गुंडे भेज के वेद को धमकाने की भी कोशिश की,,,पर इसका कोई भी अशर नही हुआ,,,कल उनके कैसे की पहली हेरिंग थी,,,जिसके लिए अब वेद को सटक और सावधान रहना था।।।।
तभी वेद ने स्नेहा को देख के बोला,,,हा मैं सब जानता हु स्नेहा मुझे कुछ हो जाए मुझे इसकी कोई,,,भी परवाह नही है,,,मेरी यह जिंदगी मां की ही देन है,,,
तुम्हे पता है स्नेहा मैं एक अनाथ था,,,रोज अपना पेट पालने के लिए मुझे कुछ ना कुछ काम देखना,,,पड़ता काम नही मिलता,,,तो मुझे चोरी भी करनि पड़ती थी,,,एक दिन जब मैं चोरी करते हुए,,पकड़ा गया था तब कुछ लोग मुझे बहुत मार रहे थे,,,तब गीता मां ने मुझे उन लोगो से बचाया,,,और मुझे अपने घर ले आई उनका बेटा ना होने के बावजूद भी उन्होंने मुझे एक बेटे के तरफ पाला,,,और मैं सिर्फ ८ साल का था,,,
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भी वोह दोनो बात ही कर रहे थे,,की तभी उन्हे बाहर से अजीब आवाज सुनाई देने लगी,,,आवाज को सुन के स्नेहा और वेद ने एक दूसरे को देखा,,,लेकिन कुछ ही पल मैं वेद को कुछ गड़बड़ होने का एहसाह होने लगा,,,वेद ने जल्दी से स्नेहा को,,,उठाया और जल्दी से जानवी के कमरे मैं गया जहा जानवी ने भी वोही आवाज सुन के,,,ईशा को गोद मै लिए बाहर ही आ रही थी,,।।।
तभी समाने वेद को देख के बोली,,,भाई बाहर ऐसी आवाज वेद ने जानवी को चुप कराते हुए बोला,,,,,shhhhhh एकदम शांत अभी मैं जो कह रहा हु,,,उसे ध्यान से सुनो,,,तुम और स्नेहा अभी के अभी पीछे के दरवाजे से बाहर निकालो।।।
पर भाई आप,,,जानवी ने इतना कहा ही था की तभी वेद बोला गुड़िया मेरी बात को समझो,,,फिर वेद ने स्नेहा को देख के बोला जल्दी से ईशा के जरूरी सामान एक बैग मैं,,,रख दो।।।।
स्नेहा ने भी बात की गंभीरता को समझते हुए,,,जल्दी से ईशा का बैग पैक कर दिया,,,वेद ने दोनो का हाथ पकड़ा और पीछे के दरवाजे से उन्हे बाहर निकल के बोल,,,जाओ जब जल्दी गुड़िया तुझे मेरी कसम,,,बिना कुछ बोले या पूछे चुप चाप यहां से जा,,,,मैं तुझे जल्द से मैं लेने आ जाऊंगा,,
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लेकिन भाई मै कहा जाऊंगी यहां से जितनी,,,दूर जा सकती है,,,चली ना मेरी गुड़िया,,इतना बोल वेद ने नम आंखों से जानवी का फिर ईशा का माथा,,,चूम लिया।।।
तभी वेद के घर के दरवाजे पर जोर जोर से आवाज,,,होने लगी,,जैसे कोई दरवाजा थोड़ा चाहता हो,,,वेद ने जब आवाज को तेज होने सुना तोह उससे एहसास हो गया की,,,दरवाजा किसी भी वक्त टूट सकता है,,,वेद ने अपने जेब से अपना वॉलेट निकाला और,,,जानवी के हाथो मैं रख के बोला,,,इस मैं कार्ड कर पैसे है मैने पहले ही सारे पैसे अकाउंट मैं ट्रांसफर कर दिए थे,,,,
यह तुम्हारे काम आएगा अब जाओ,,,जल्दी इतना बोल वेद ने फिर से एक नजर मैन गेट के तरफ,,,देखा फिर स्नेहा को देख के बोला,,,स्नेहा अगर मुझे कुछ हो जाता है तो तुम अपनी जिंदगी मैं आगे बड़ जाना,,,
नही नही वेद ऐशा मत बोलो,,,तुम्हे कुछ भी नही होगा तुम भी चलो अब तीनो यहां से दूर चले जाएंगे।।।।
तभी वेद ने दरवाजा टूटने की आवाज सुनी,,,तभी एक आदमी ने बोला छापा छापा ढूंढो घर,,,पर ही होगा साला इसकी इतनी हिमात की MLA सर को धमकी देता है,,,इस तो आज जिंदा नही छोड़ेगे।।।
जब ईशा के कानो मैं यह आवाज गई तोह उसने,,,झट से वेद को पकड़ के बोली,,,भाई आप भी चलिए भी तोह यह लोग आपको मार देगे,,,,।
।जानवी तुझे मेरी कसम अब जा,,,इतना बोल वेद पलट गया वोही जानवी ने जैसे की वेद की बात सुनी,,,वोह अपनी जगह सुन खड़ी रही,,,तभी वेद पलटा और स्नेहा की देख के बोला,,,स्नेहा जितनी जल्दी हो सके इसे स्टेशन ले जाओ,,,,
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मैं जानवी की जिम्मेदारी तुम्हे सोफ रहा हु,,,,इतना बोल वेद ने दरवाजा बंद किया और घर के,,,अंदर एक तरफ आ गया,,,
स्नेहा जल्दी से जानवी को लेके वाहा से जाने को ही हुए की जानवी ने स्नेहा का हाथ,,छुड़ा के उस दरवाजे के तरफ। आओ और उस दरवाजे पर बने एक छोटे से,,, होल से अंदर का नजारा के देख,,,जानवी की मानो सास ही रुक गई हो।।।।
स्नेहा ने जानवी को खींचे के वाहा से लेके चली गई,,,उसके भी आखों मैं आसू था अपने प्यार ना कभी,,ना देखा या खो देने का,,,पर अभी जो वेद ने उससे जिम्मेदारी दी है सब से पहले,,,स्नेहा को वोह पूरा करना था।।।।
थोड़ी ही देर मैं स्नेहा और,,,जानवी दोनो ही शामिल के स्टेशन पर बैठे हुए थे,,,गाड़ी लगने मैं अभी भी २ मिनट का वक्त था,,,
तभी स्नेहा ने देखा की ट्रेन आ चुकी है,,,,यह देख के स्नेहा ने कुछ राहत महसूस हुआ,,,स्नेहा ने जल्दी से जानवी और ईशा को ट्रेन मै बैठा दिया,,,,तभी उसकी नजर रेल वे स्टेशन के गेट पर गई,,,जहा वोही गुडे आ रहे थे यह देख एक स्नेहा की सास ही आटक गई हो,,,,उसकी वक्त गाड़ी का भीं हों बजा स्नेहा ने जानवी को देख के,,,बोली अपना और ईशा का ध्यान रखा,,,और बिलकुल भी मत घबराना देखना।।।।
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मैं और तेरे भईया जल्द से तुझे लेने,,,आयेगे जानवी ने स्नेहा के बाद का कोई जवाब नही दिया,,,वोह बस अपनी खाली आखों से,,,स्नेहा को देखने लगी।।,,,,
तभी उन गुंडों मैं से एक की नजर,,,स्नेहा और जानवी पर गई,,,जिसे देख एक गुंडे ने बोला,,,,वोह देखो वोह दोनो वोह है गुंडे के आवाज सुन के,,,स्नेहा ने जानवी को जल्दी से ट्रेन के अंदर बैठने का बोली,,,,
और खुद नीचे उतार गई,,,और उसी वक्त ट्रेन भी अपने रफ्तार से चलने लगी,,,जानवी ने ट्रेन की खिड़की से झांकते हुए देखा,,,जहा स्नेहा उन लोगों की चकमा देखे,,,उन्हे ट्रेन से चढ़ने से रोक के भागने लगी,,थी तभी एक ऐसे ने एक स्टील का,,, ढंडा उठा के स्नेहा के पीछे से ही मारा ।।।।।।
जो की सीधा जाके,,,स्नेहा के सिर पर लगा और स्नेहा वोही पर गिर गई,,,यह नजर देख के जानवी के मुंह से एक छींक निकल गई,,,diiiiii, मेरी दी को मत मारी,,,इतना बोल जानवी के आखों से झर झर करके आसू बहने लगे,,जानवी ट्रेन से उतरने,,,को हुए की उसने देखा,,,स्नेहा अपनी नम,,,,आखों से उसे उतने की माना कर रही थी।।।।
और धीरे धीरे कर ट्रेन ने स्टेशन छोड़,,,दिया वोही जानवी नीचे बैठ के ईशा को गोद मै लिए,,,रोने लगी जानवी का पूरा चेहरा रोने के वेजेस,,,लाला हो चुका था कुछ देर रोने के बाद जानवी ने खुद से ही कहा मैं किसी को,,,नही छोडूगी।।।।
जिस जिस के वेजेस आज मेरा भाई,,,स्नेहा और दी यह ऐसे हालात है उन दोनो को कानून,,, नही मैं सजा दुगी।।।।
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***दूसरी तरफ***
शिवांश अपने कमरे बैठा लैपटॉप मैं उगलिया चला,,,,रहा था तभी उससे मैन गेट से कुछ आवाज सुनाई,,,देने लगी शिव अपने बालकनी पर आके खड़ा हो गया और नीचे देखें लगा।।।
तभी उसकी नजर मिहिर और तुषार,,अंगद,निहार पर गई,,,,
अंगद और निहार अपने दोनो हाथ बांधे,,,मिहिर और तुषार को ही देख रहे थे,,,,,,दोनो ने जी पूरे गार्डेन का नक्शा बदल दिया था,,,
तभी मिहिर ने तुषार को देख के,,,बोला चल आजा तुषार देख मैने कितने अच्छे से,,,कुश्ती के लिए रिंग तैयार किया है चल एक एक हाथ हो,,,जाए ।।।।
तुषार ने भी मिहिर को देखा और बोला,,,,अरे जा साले तू हार जाएगा तो फिर,,,रोने लगेगा मुझे तेरे साथ कुश्ती नही करनी,,,दोनो ही अपनी लड़खड़ाई आवाज मैं बोल रहे थे,,,,जिससे सुन शिवांश की भौंहे आपस में सिकुड़ गई,,,और वोह अपनी बालकनी से खड़ा हो उन दोनो को,,,ही घूर के देख रहा था।।।
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तभी मिहिर ने तुषार को देख बोला,,,,देखा मैं इतना स्ट्रॉन्ग हु,,,कोई भी मुझसे लड़ने से पहले ही हार मन जाता है,,,,,इतना बोल मिहिर अपने बाईसेल्फ,,,निहार और अंगद को दिखाने लगे।।।।
दोनो ने जैसे ही मिहिर की हरकत देखी,,,दोनो ने ही पाना सिर पीट लिया,,,तभी निहार ने बोला अबे यार किसने बोला था इन दोनो को वापस पीने,,,के लिए अभी भाई को पता चल ना तो इन के साथ साथ हम भी,,,जायेगे।।।।
तेरे तो पता नही पर मैं तो पक्का जाऊंगा,,अंगद ने बिचारी भरी नजरो से मिहिर और तुषार को देखने लगे,,,,को की अब मैं गेट के तरफ बड़ गए थे,,,,
यह देख के निहार ने बोला चल यार जल्दी इसे,,,पहले भाई उन्हे देख के उन दोनो को,,,इनके कमरे मैं छोड़ के आते है इतना बोल दोनो ही उनके तरफ,,, बाड़ गए।।।।
वोही मिहिर और तुषार दोनो ही दरवाजे के सामने खड़े थे,,,,जो की इस वक्त बंद था,,,मिहिर ने दरवाजे को देख के अपनी लड़खड़ा की आवाज में बोला,,,,यार तुषार यह भाई ने दरवाजा दो दो क्यू बना दिया है।।।।
मिहिर के बात पर,,,तुषार ने भी जवाब देते हुए बोला,,हा यार एक ही अच्छा था,,,लेकिन सुबह तक तो एक ही दरवाजा था फिर भाई ने दो क्यू बना दिया,,,,
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निहार और अंगद ने जब यह सुना तोह,,,दोनो ने फिर अपना सिर पीट लिया,,,तभी अंगद बोला,,,अबे सालो धीरे बोलो मरवाओगे क्या हमें यार खुद तोह मारेगे,,,,साथ मैं मुझे भी ले डूबेगे।।।।
अभी अंगद ने झुंझलाते हुए बोला,,,यार मैं लेके ही क्यू गया इन लोगो को ओह गॉड प्लीज मुझे,,,उस डेविल से बचा लेना।।।
अरे यार उससे बचने के लिए,,,पहले हूं इन दोनो को उनकी जगह ठिकाने लगाने होगा तू अभी,,,बड़बड़ बंद कर और इन्हे पकड़,,,,
तभी उन दोनो ने देखा की मिहिर और तुषार,,,दोनो ही दरवाजे के लेफ्ट और,राइट साइड खड़े,,,,होके दीवाल पर अपना हाथ फेर रहे थे।।।।
तभी तुषार ने मिहिर को देखे के बोला,,,,यह छोटे शेर यह भाई ने कैसा दरवाजा बनाया है खुल ही नही रहा है,,,,क्या यह दरवाजा लॉक है,,,इसकी चाबी किसके पास है।।।
तभी मिहिर ने अपने दांत दिखते हुए बोला,,,hehehehe मेरे पास तो नही है,,,
तब तक अंगद और निहार दोनो ही ने उन दोनो को पकड़ा,,,और बोला चलो हमारे पास है चाबी हम खोलते है उन लोगो ने इतना बोला ही,,,था की तभी मैन दरवाजा खुला।।।।।
और सामने खड़े इंसान को देख के,,,चारो की हवाइयां उड़ गई,,,चारो के चारो आखें और मुंह खोले सामने देखने लगे।।।
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तो दोस्तो आप लोगों को क्या लगता है जानवी,,,कहा जा रही होगी क्या वोह गुंडे अब भी जानवी का पीछा करेगे,,,और स्नेहा और वेद के साथ क्या हुआ होगा क्या दोनो ही मर गए या है जिंदा।।।
निहार,,अंगद और मिहिर तुषार ने अपने सामने किसको देख लिया था जिसे देख के चारो की,,सीटी पीटी गुल हो गई।।
जानने के लिए बने रहिए मेरी स्टोरी के साथ,,,,मिलने है अगले एपिसोड मैं।।।
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी
लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
चैप्टर नंबर ५ दोस्ती कहानी शुरू करते है,,,,आई विश की आप लोगो को यह कहानी,,,अच्छी लगे,,तो चलिए शुरू करते है कहानी का ५ चैप्टर❤️❤️❤️
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निहार और अंगद ने जब यह सुना तोह,,,दोनो ने फिर अपना सिर पीट लिया,,,तभी अंगद बोला,,,अबे सालो धीरे बोलो मरवाओगे क्या हमें यार खुद तोह मारेगे,,,,साथ मैं मुझे भी ले डूबेगे।।।।
अभी अंगद ने झुंझलाते हुए बोला,,,यार मैं लेके ही क्यू गया इन लोगो को ओह गॉड प्लीज मुझे,,,उस डेविल से बचा लेना।।।
अरे यार उससे बचने के लिए,,,पहले हूं इन दोनो को उनकी जगह ठिकाने लगाने होगा तू अभी,,,बड़बड़ बंद कर और इन्हे पकड़,,,,
तभी उन दोनो ने देखा की मिहिर और तुषार,,,दोनो ही दरवाजे के लेफ्ट और,राइट साइड खड़े,,,,होके दीवाल पर अपना हाथ फेर रहे थे।।।।
तभी तुषार ने मिहिर को देखे के बोला,,,,यह छोटे शेर यह भाई ने कैसा दरवाजा बनाया है खुल ही नही रहा है,,,,क्या यह दरवाजा लॉक है,,,इसकी चाबी किसके पास है।।।
तभी मिहिर ने अपने दांत दिखते हुए बोला,,,hehehehe मेरे पास तो नही है,,,
तब तक अंगद और निहार दोनो ही ने उन दोनो को पकड़ा,,,और बोला चलो हमारे पास है चाबी हम खोलते है उन लोगो ने इतना बोला ही,,,था की तभी मैन दरवाजा खुला।।।।।
और सामने खड़े इंसान को देख के,,,चारो की हवाइयां उड़ गई,,,चारो के चारो आखें और मुंह खोले सामने देखने लगे।।।
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****अब तक अपने पड़ा****
***अब आगे***
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***दूसरी तरफ***
जानवी ट्रेन के दरवाजे से उठ के खड़ी हुए,,,,और ट्रेन के अंदर खाली जगह देखने लगी,,,ट्रेन मै ज्यादा भीड़ नही थी इसलिए जानवी को आसानी सी सीट मिल,,,गया और वोह सीट पर बैठ गई।।।
तभी जानवी के कानो मैं ईशा के रोने की,,,आवाज सुनाई थी जानवी ने ईशा को अपनी नम आखों से देखा और,,,,ईशा को जल्द ही गले लगा की,,,तभी जानवी ने ईशा को देख के बोली,,,अब तुम ही मेरे जीने का सहारा हो मुझे नही पता की मैं,,,तुम्हे कैसे पलूगी।।।
कहा जाऊंगी कुछ भी नही पता मुझे,,,पर अब मैंने सब कुछ भोले नाथ पर छोड़ दिया है,,,मेरी जिंदगी ने इतना कुछ हो गया है की अब मुझ मैं समझने के चमथा बिकुल,,,भी नही बच्ची।।।।
बस मैं इतना जानती हु की,,,मुझे कैसे भी करके तुम्हारी रक्षा करनी है तुम ही अब मेरे जीने का सहारा,,,हो और मैं अपनी दी की आखरी निशानी को,,,अपने जान से ही ज्यादा संभाल के रखूंगी,,,,
इतना बोल जानवी ने ईशा के माथा चूम,,,किया को उससे ही अपनी ठुकुर टुकुर आखों से देखने लगी,,,जैसे जानवी की बातो को समझने की कोशिश कर रही हो,,,,
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यह देख के जानवी के चेहरे पर हल्की सी,,,मुस्कान आ गई,,,फिर जानवी ने अपने बैग से ईशा की दूध की,,,, बॉटल निकल के ईशा के मुंह मैं डाल दी,,,ईशा भी जल्दी जल्दी दूध पीने लगी,,,,
कैसा लग रहा था बिचारी काफी,,,टाइम से भूखी हो जानवी ने हल्के हाथ से ईशा के सिर को सहलाया,,,और कुछ देर मैं ईशा ने दूध खत्म कर,,,सो रही जानवी ने ईशा को देखा और फिर उसको,,,अपने दुपट्टे से ढक दिया।।।
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***दूसरी तरफ***
***शिवांश का विला***
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वोही मिहिर और तुषार की तो शिवांश को,,,पाने सामने देख के तो मानो पूरा नशा ही,,, उतर गया हो दोनो ही सिर झुके के खड़े थे।।।
तभी अंगद ने दोनो को देख के,,,धीरे से निहार के कान मैं बोला देख कैसे भीगी बिल्ली बन के बैठे,,,है और कब से हम शांत करा रहे थे तो,,,,सुन ही नही रहे थे अब देख सारा नहा एक ही बार मैं गायब हो गया,,,इतना बोल अंगद हल्के से हस दिया।।।
अबे साले हस ना बंद कर भूल गया क्या,,,तुम सब तेरी ही ब्रेकअप पार्टी करने गए थे,,,एक बार को हम बच भी जायेगे एक एक मार ख़ाके,,,पर तेरा क्या होगा कालिया वोह सोच और अपनी बातीसी बंद कर,,,निहार ने घूर के अंगद को देख के बोला।। ।
ओह तेरी मैं तोह भूल ही गया था,,,यह खडूस तो मेरी जाना ही ले लेगा,,,अंगद ने इतना कहा ही था की तभी सब के कानो मैं शिवांश की आवाज सुनाई,,,थी। ।।।
सब के सब अपने कमरे मैं जाओ,,,और हा कल सुबह ४ बजे मुझे ग्राउंड एरिया मैं सब नजर आ जाने चाहिए,,,इतना बोल शिवांश मुड़ा और अपने कमरे मैं चला गया।।।
उसको जाते देख सब ने एक राहत की सास भारी,,,ओह गॉड आज तो बच गए वरना पता नही,,,क्या होता हमारा अंगद ने बोला।।।
अरे भाई क्या बच गए सुना नही क्या,,,तुम लोग ने,,,४ बजे ग्राउंड पर बोला है अब तो हमारी हालत खराब,,,समझो अंगद ने बिचारा सा मुंह बना के बोला।।।।
अरे जो होगा देखा जाएगा पहले,,,जाके सोते है वैसे ही १२ बज ही गए है मुझे तो बहुत नींद आ रही,,,है इतना बोल निहार ने जमाई ली और वहा से अपने कमरे मैं,,,,चला गया।।।।
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उसके जाने के बाद अंगद ने भी घूर के,,,तुषार और मिहिर को देखा और वोह भी वाहा से चला गया,,,
शिवांश अपने कमरे मैं गया,,,और अपना लैपटॉप मैं फिर से काम करने लगा की था की तभी उसके फोन,,,की रिंग हुआ जिसे सुन के शिवांश ने एक नजर फोन,,,को देखा और फिर कॉल रिसीव कर दिया।।।
तोह उधर से एक शिवांश के असिस्टेंट मानव ने बोला,,, सर वोह अपने कभी मीटिंग करना चाहते है,,,,कल सुबह की फ्लाइट से वोह जाने वाले है तो क्या,,, आप अभी आ सकते है।।।।
यह बोलते वक्त मानव थोड़ा,,,सा डर भी रहा था,,लेकिन उसने हिमात करके बोल,,तो दिया था और अब बस शिवांश के जवाब का इंतजार कर रहा,,,था।।।।
तभी शिवांश ने बोला ओके आई एम कमिंग*** इतना बोल शिवांश ने कॉल डियाकनेट किया,,,और उठ के चेंजिंग रूम मैं चला गया।।।।
थोड़ी देर मैं शिवांश तैयार होके आया और,,,अपने गाड़ी मैं बैठ के वाहा से निकल गया उसके,,पीछे पीछे उसके गार्ड भी शिवांश के पीछे चलें गए,,,कुछ ही देर मैं शिवांश की कार एक होटल के सामने आके रुकती है।।।
शिवांश कर से उतरता है,,,और उसके पीछे शिवांश के बॉडीगार्ड अपने हाथो मैं बंदूक लिए,,, बाहर आते है और शिवांश को प्रोटेक्ट करते हुए,,,उसके साथ ही चलने लगते है।।।।
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उस लड़की ने बोला ही था की,,तभी प्रियल ने उसके हाथ पर एक जोर से छुट्टी कट दी।।।
अअह्ह्ह्ह कितने जोर से थोड़ी बोला था,,,
तभी दूसरी लड़की ने बोला,,अरे तुझे यकीन दिला रही थी की यह सपना नही हकीकत है,,,,, काश मुझे यह शादी करके,,,अरे शादी तो छोड़ मेरे साथ बस कुछ,,,पल जी बीता ले,,,मैं तो इसके इशारों पर इसके बेड पर भी जाने को तैयार हो जाऊ,,,,मैं तो उस रात को भी खास मानुगी,,,अगर इसने मुझे एक नजर देख भी लिया तो,,,,
ऐसी ही वोह खड़ी सब लड़किया,,,शिवांश को देख एक आहे भर रहीं थी,,,और कुछ तो उससे अपने इंटेंस नजरो से देख रही थी,,,पर उनका इस तरह से देखने का भी कोई फायदा नही हुआ,,,कुछ लड़कियो ने तो उससे शादी करने के सपने भी देख लिए,,थे तो कुछ उसके साथ डेट पर जाना चाहती थी,,,और कुछ शिवांश को छूना चाहती थी,,,
लेकिन शिवांश ने किसी भी लड़की को एक नजर भी,,,उटा के नही देखा और वाहा से चला गया,,,शिवांश लिफ्ट से ५ फ्लोर तक गया और वाहा पूछ के,,,वोह रूम मैं ५०२ मैं इंटर हुआ।।।
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तभी शिवांश वाहा पर रखे सिंगल सोफे पर,,,आराम से जाके किसी राजा के तरह बैठ गया,,,और सब को बैठने का इशारा किया।।।
सब वाहा बैठ गए,,,और कुछ ही पल मैं उनकी मीटिंग स्टार्ट हो गई,,,यह मीटिंग कुछ दो से तीन घंटे तक चलने वाली थी।।।।।
***दूसरी तरफ***
जानवी की ट्रेन दिल्ली आके रुकी,,,,जानवी ने ईशा को अपने गोद मै लिया और उससे लेके ट्रेन से उत्तर गई,,,जानवी दिल्ली पहुंच तो गई थी पर उससे अब यह नही पता,,,,था की उससे जाना कहा है।।।
जानवी ने स्टेशन को देख के बोली,,,मैं यहां आ तो गई हु पर ना तो मैं यहां पर किसी को जानती हु,,,ना ही किसी को पहचानती हु,,,,मैं कहा जाऊंगी ।।।
हे भोले नाथ आपने मुझे यहां तक,,,लाए है तो अब आप ही मुझे आगे का भी रास्ता,,,दिखाई इतना बोल जानवी ने अपनी आखें बंद कर ली,,,,,,और कुछ देर बाद खोल के उसने अपने कदम स्टेशन के बाहर,,,बड़ा दिया।।।।।
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कुछ देर बाद जानवी हु ही सड़को पर चलती जा,,,रही थी उससे पता नही था उसे जाना कहा,,है लेकिन फिर से वोह दिल्ली के रात मैं सुनसान सड़कों पर ,,,,,चली जा रही थी।।।।
अभी जानवी को भोले नाथ का मंदिर दिखा,,,,तो जानवी ने सोचा की आज रात यही मंदिर मैं रुक जाती हु,,,इतनी रात को ईशा को लेके कहा जाऊंगी,,,यह सोच जानवी के कदम मंदिर के तरफ बाड़ गए,,,,,तभी वोह से तीन लडको की बाइक गुजरने लगी,,,,और उन लडको मै से एक की नजर जानवी पर गई तो उसने अपनी बाइक,,,रुक दी तभी उस के दोनो दोस्तो ने बाइक रोक उसको देख,,,बोले क्या हुआ बाइक रुक क्यों दी,,,
तभी पहले वाले लड़ने ने जानवी को देख के बोला,,,अरे उधर तो देख क्या मस्त मॉल है,,उस लड़के के ऐसा बोलने पर तीनो की भी नजर जानवी पर,,,गई तो उन लोगों ने अपनी गंदी नजरो से जानवी को देख के बोला,,,,hmmm सही बोल रहा है,,,
तभी तीसरे लड़के ने बोला,,,और तो और फिगर तो देख क्या कमाल का है आज तो मजा ही आ,,,जायेगा।।।
तभी पहले वाले ने अपनी,,, हवास भरी नजरो से जानवी को देख के बोला तो फिर सोचा क्या है,,,,चलो वैसे भी अकेली लड़की है,,,,
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और आस पास कोई दिखाई भी,,,नही दे रहा है तभी दोनो लड़के पीछे मुड़ के वापस से देखते है,,,,तभी उस लड़के मैं से दूसरा बोलता है,,,आज की रात बड़ी रंगीन गुजरेगी,,इतना बोल तीनो हसने लगे,,,और अपनी अपनी बाइक को स्टार्ट करके जानवी के तरफ मोड़ दिए,,,जानवी अभी ईशा को अपने गोद मै छुपाए जा ही रही थी की,,,तभी उसके सामने वोह तीनों आ गए,,,
और जानवी ने जब उनकी यह हरकत देखी तो वोह एक पल के लिए डर गई,,,और उसके मन मैं घबराहट होने लगी,,,,जानवी डर से दो कदम पीछे हाट गई।।।
तभी उन लडको मै से एक ने जानवी के हाथ मैं,,,ईशा को देख के बोला,,,अरे भाई उसके पास तो बच्चा भीं है,,,
तभी दूसरे ने बोला छोड़ ना हमे बच्चे से क्या करना है,,,,हमें तो लड़की से मतलब है इतना बोल वोह तीनों भाई से उतार गए,,,,और जानवी के तरफ बड़ गए।।।।
जानवी ने भी यह देख पीछे होने लगी,,,तभी उन लड़के मैं से एक ने जल्दी से आके जानवी का हाथ,,,पकड़ के बोला अरे जानेमन कहा जा रही हो,,,,रुको तो जरा,,,
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हम तुम्हे छोड़ देने जा भी जाना है,,,साथ मैं थोड़ा एंजॉय भी कर लेगे इतना बोल वोह लकड़ा जानवी को उप्पर,,,से लेके नीचे तक देखने लगा,,,जानवी ने इस वक्त एक येलो कलर का पटियाला सलवार सूट पहना हुआ,,,था ।।।
जानवी ने जल्दी से उस लड़के के हाथ से अपना हाथ छोड़ा के ईशा को अपने,,, दुपट्टे से बांधी और और लड़के को घूर के देखा के बोली,,,दूर रहो मुझे से,,,,वरना जानवी को डर तो लग रहा था लेकिन फिर भी उसने हिमत करके,,,,उन लडको के सामने अपना मुंह खोल दिया,,,
तभी उस लड़के मैं एक दूसरे लड़के ने एक्टिंग करते हुए,,,बोला अरे बाप रे यह तो हम धमकी दे रहीं है हा मैने डर गया,,,इतना बोल वोह लड़का डरने की एक्टिंग करने लगा,,,,
वोही दोनो लड़के उससे देख,,,जोर जोर से हसने लगे,,,उनकी हसी इतनी गन्दी थी की जानवी को अब उन तीनों से डर लगने लगा।।।
तभी उन लडको मै से तीसरा लड़का बाहर निकला और,,,जानवी के तरफ,,, बाड़ के उसका हाथ पकड़ के बोला,,,चल अब जायदा नाटक मत कर,,सब पता है मुझे तुम जैसे लड़की इसलिए तोह रात को बाहर निकलती है ताकि,,,एंजॉय कर सके और अब नाटक कर रही है हमारे सामने इतना बोल के उस लड़के ने,,,जानवी का हाथ पकड़ के अपने तरफ खींचा,,,
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जिसे जानवी को उस लड़के पर बहुत गुस्सा आता है और उसने झट,,,से उस लड़के से अपना हाथ छुड़ा के उस लड़के के गाल पर एक जोर दार थप्पड़ मार देती है,,,थप्पड़ इतना जोर दार था की वोह लड़के का चेहरा एक तरफ झुक जाता है,,,
तभी उन लड़के मैं से एक लड़का। जानवी के सामने आते हुए बोला s*li k***ni हमारे दोस्त पर हाथ उठाएगी तेरी हिमत रुक अभी तुझे बताता हु।।।
इतना बोल के उस लड़के ने जानवी के गाल,,,पर एक जोर से खींच के थप्पड़ मार देता है,,,जिसे जानवी संभाल नही पाती और सीधा नीचे गिर जाती है,,,और ईशा को जल्दी से संभालती है ताकि उससे कोई भी चोट ना लगे,,,,
अब जानवी घबरा गई थी उसके आखों से,,,,झर झर करके आसू बहने लगते है,,,,जिस लड़के को जानवी ने थप्पड़ मेरा था,,,वोह जानवी के पास आता है और उसके बाल को अपनी मुट्ठी मैं भर के बोला,,,साली तेरी इतनी हिम्मत की तू मुझे थप्पड़ मरेगी,,,,
तभी दूसरा लड़का आके,,,जानवी के पैर पकड़ लेता है यह देख जानवी रोते हुए बोली,,प्लीज मुझे छोड़ दो,,,मुझे जाने दो।।।
साली तुझे यह पहले सोचना चाहिए था,,,अब देख हम तेरा क्या हालत करते है,,,पहले तो हमने सोचा था की तेरे साथ एंजॉय करके छोड़ देगे पर अब,,,तेरी ऐसी हालत करते की,,तू कभी भी हम भूल नही पाएंगी,,,
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जानवी ने जैसे ही उन लडको ही बात सुनी,,,वोह जल्दी से अपने पैर उन से छुड़ाने की कोशिश करने लगी,,,
तभी एक लड़का जानवी के दोनो हाथ,,पकड़ लेता है,,,तभी वोह लड़का जिसने जानवी के बालो को पकड़ा हुआ था,,,उसने जानवी के तरफ झुकते हुए बोला,,,क्या मॉल है यार इतना बोल उसने जानवी के,,,कंधे पर अपना हाथ रखा और उसके,,,ड्रेस की पकड़ के खींच दिया,,,जिसे जानवी की ड्रेस पट गई,,,और यह महसूस कर जानवी जोर से छिलाई,,, अअह्ह्ह्ह नही प्लीज मुझे छोड़ दो।।।
लेकिन उन लडको को जैसे कोई फर्क ही नही,,, पड़ रहा हो,,,वोह लड़का जानवी के तरफ झुक गया लेकिन जैसे ही वोह,,,जानवी को किस कर पता की तभी उसके आखों,,,के सामने गाड़ी की लाइट पड़ी,,,जिसे तीनो लड़के ने जल्दी से अपने आखों पर हाथ रख,,,दिया।।।।
तो दोस्तो क्या लगता है आपको जानवी का दिल्ली,,,मैं आना क्या सही था,,,क्या जानवी उन तीनो लड़के से बच पाएगी,,,,और किसकी लाइट की रोशनी तीनो के चेहरे पर पड़ी।।।।
जान ने के लिए बने रहिए मेरी स्टोरी के साथ
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती
ह आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
चैप्टर नंबर ६ दोस्ती कहानी शुरू करते है,,,,आई विश की आप लोगो को यह कहानी,,,अच्छी लगे,,तो चलिए शुरू करते है कहानी का ६ चैप्टर❤️❤️❤️
तभी दूसरा लड़का आके,,,जानवी के पैर पकड़ लेता है यह देख जानवी रोते हुए बोली,,प्लीज मुझे छोड़ दो,,,मुझे जाने दो।।।
साली तुझे यह पहले सोचना चाहिए था,,,अब देख हम तेरा क्या हालत करते है,,,पहले तो हमने सोचा था की तेरे साथ एंजॉय करके छोड़ देगे पर अब,,,तेरी ऐसी हालत करते की,,तू कभी भी हम भूल नही पाएंगी,,,
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जानवी ने जैसे ही उन लडको ही बात सुनी,,,वोह जल्दी से अपने पैर उन से छुड़ाने की कोशिश करने लगी,,,
तभी एक लड़का जानवी के दोनो हाथ,,पकड़ लेता है,,,तभी वोह लड़का जिसने जानवी के बालो को पकड़ा हुआ था,,,उसने जानवी के तरफ झुकते हुए बोला,,,क्या मॉल है यार इतना बोल उसने जानवी के,,,कंधे पर अपना हाथ रखा और उसके,,,ड्रेस की पकड़ के खींच दिया,,,जिसे जानवी की ड्रेस पट गई,,,और यह महसूस कर जानवी जोर से छिलाई,,, अअह्ह्ह्ह नही प्लीज मुझे छोड़ दो।।।
लेकिन उन लडको को जैसे कोई फर्क ही नही,,, पड़ रहा हो,,,वोह लड़का जानवी के तरफ झुक गया लेकिन जैसे ही वोह,,,जानवी को किस कर पता की तभी उसके आखों,,,के सामने गाड़ी की लाइट पड़ी,,,जिसे तीनो लड़के ने जल्दी से अपने आखों पर हाथ रख,,,दिया।।।।
***अब तक अपने पड़ा***
***अब आगे***
लेकिन उन लडको को जैसे कोई फर्क ही नही,,, पड़ रहा हो,,,वोह लड़का जानवी के तरफ झुक गया लेकिन जैसे ही वोह,,,जानवी को किस कर पता की तभी उसके आखों,,,के सामने गाड़ी की लाइट पड़ी,,,जिसे तीनो लड़के ने जल्दी से अपने आखों पर हाथ रख,,,दिया।।।।
वोही जानवी ने भी अपनी आखें बंद कर ली,,,लेकिन फिर जल्दी से अपनी आखों की खोल,,,उन तीनो को धक्का देखे वाहा से खड़ी हो,,और ईशा को अपने बाहों मै पकड़ के ,,,उस गाड़ी के तरफ बिना देखे भागने लगी,,,,
तभी जानवी भागते हुए किसी मजबूत सीने,,,से जा लगी,,,
जानवी ने जब यह महसूस किया तोह,,,,उसने अपनी नजर उठा के अपने समाने आदमी को,,,देखा जो उससे ही झुक के देख रहा था एक पल के,,,वोह आदमी जानवी की हरी आखों मैं,,, खो गया।।।
वोही जानवी भी उस आदमी की आखों,,,को ही देख रही थी,,तभी उसने उसकी आखों में देख के बोली,,,मुझे ऐशा क्यू लग रहा है जैसे मैने उन्हे कही देखा है।।।।
अभी वोह दोनो खोए हुए थे की तभी,,,, उन लडको मैं से एक चल के जानवी और उस आदमी के पास आ गया,,,,और जैसे ही उस लड़के ने जानवी के कंधे पर,,,अपना हाथ रखना चाहा,,,
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उस लड़के ने एक हाथ बड़ा के,,,,जानवी को अपने सीने से लगा लिया,,,और उस लड़के के हाथ को कश के पकड़ लिया,,,,
उसने कितने कश के उस हाथ को पकड़ा था की,,,,एक ही पल मैं उसको हाथ चटकने की आवाज सुनाई देने लगी,,,,तभी उन दोनो लड़के भी उस लड़के के सामने आ गाए और उसे देख के बोले,,,,
क्या क्या रे ज्यादा हीरो बनता है,,,तभी दूसरे लड़के ने उसको ध्यान से देखा उस लड़के ने इस वक्त,,,ब्लैक कलर का बिजनेस सूट पहना हुआ था,,,,उसके चेहरे के भाव पड़ पाना थोड़ा सा मुश्किल था,,,,तभी दूसरे लड़के ने अपनी जेब से knief, निकला के उस लड़के के,,,तरफ आते हुए बोला इसे मैं अभी बताता हु,,,इतना बोल वोह आगे बड़ने लगा।,,और उस लड़के को देख के बोला इसकी सारी हीरो गिरी मैं निकलता हु,,,,,,।
तभी जानवी ने इस शक्श के सीने से,,,अपना सिर निकल के पीछे देखा जहा एक आदमी नीचे,,,पड़े दर्द से कहराहरा रहा था,,,और दूसरा उसके तरफ,,knief लिए बड़ रहा था,,,यह देख के जानवी डर गई और उसके लड़के को,,,देख के बोली प्लीज मुझे बचा लीजे,,,जानवी पूरी तरफ से डर से कांप रही थी,,,
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तभी उस लड़के ने जानवी के आखों में,,,देख के बोला तुम्हे बचाने पर मुझे क्या मिलेगा,,,
जानवी ने जैसे ही उसकी बात सुनी,,,तो वोह उसे हैरानी से। देखने लगी,,,जानवी ने अपना मन मैं बोली इस दुनिया मैं कोई किसी का नही,,,होता इंसानियत नाम की कोई चीज ही नही है,,,
क्या आप इंसानियत के नाते मेरी मदद नही,,,कर सकते मैं आपको जिंदगी भर एहसान मन रहूंगी,,, जानवी ने कहा
तभी उस लड़के ने फिर से बोला,,,no no लिटिल रैबिट मैं एक बिजनेस मैन हु और बिजनेस मैन कभी भी,,,घाटे का सौदा नहीं करता ,,,,,बोलो क्या दोगी,,,अगर मैने तुम्हे बचा लिया तो,,,,अब जानवी हताश हो गई और उस लड़के को अपनी नम आखों से,,,देख के बोली मैं आपको क्या दे सकती हु मेरे पास कुछ भी नही,,,है देने लायक,,,
No no little रैबिट है तुम्हारे पास,,,,है जल्दी उस लड़के के ऐसे बोलने पर जानवी हैरानी से उससे देखेनें लगी,,,और सोचने लगी,,,की तभी उन्ही मैं से एक लड़का उसके पास,,आया और उसने जानवी के कंधे को,,पकड़ना चाहा पर उसने गलती से उसके पीछे से ड्रेस पकड़,,,ली और जानवी की ड्रेस पीछे से फट गई यह महसूस कर जानवी डर गई,,,और जल्दी से इस लड़के के सीने से लग गई,,,
वोही उस लड़के ने जब यह देखा तो,,,गुस्से दे उस लड़के को फिर इसके हाथ को देखने लगा,,,,उसकी आखें पूरी तरफ से लाल हो चुकी थी,,,तभी उस लड़के के कान मैं जानवी की आवाज आई प्लीज मुझे बचा,,,,लिए आप को बोलेंगे मैं वोही करुगी,,,,
जैसे ही उस लड़के ने यह सुना,,,तो उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई,,,और उसने जानवी को देख के बोला सोच लो,,,➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
जानवी ने भी अपनी रुवासी आवाज मैं बोली,,, हा मैने सोच लिया है लेकिन प्लीज मुझे इन लोगो से बचा,,,लीजे।।।।
जानवी ने इतना कहा ही था की,,,तभी उस लड़के के जानवी को अपने से थोड़ा सा दूर किया,,,और अपना ओवर कोर्ट निकल के जानवी को पहना दिया,,,और उससे अपने पीछे कर,,,जिस लड़के ने जानवी के कपड़े फाड़े थे उसके तरफ बाड़ गया,,,और कुछ ही पल मैं वोह तीनों लड़के जमीन पर बुरी तरह कहराते हुए,,,,दर्द से तड़प रहे थे,,,,
तभी उस लड़के ने उसी लड़के को,,,कोलर से उठ के उसके पेट पर जोर जोर से पंच मरनें लगा,,,यह पंच इतने जोर से था की उस लड़के के मुंह से खून निकलने लगा था,,,,ऐसी ही करके उस लड़के ने तीनो को हालत अध मारी कर दी थी,,,तभी वोह रुका और अपने हाथ से इशारा किया तोह,,,तभी उस लड़के के बॉडीगार्ड जल्दी आ गए जो इसी के,,,, इंस्ट्रक्शन का इंतजार कर रहे थे।।।।
तभी उस लड़के ने अपने गार्ड को देख के बोला,,,इन्हे ले आओ राका और तुम्हे पता है कहा ले,,,जाना है जी हां यह कोई और नही शिवांश था।।।।
शिवांश ने उन तीनो को देखा और,,,राका को एक नजर देख के जानवी के पास चला गया,,,,जो की अभी डरी सहमी सी ईशा को बाहों मै भर के खड़ी थी,,,,
जानवी ने जब शिवांश को अपने सामने देखा तो,,,,,अपनी नजरे उटा के उसको देखने लगी,,,शिवांश ने मुस्कुरा के जानवी को देखा और फिर अपना हाथ,,,आगे बड़ा के ईशा को अपने गोद मै ले लिया,,,,,यह देख जानवी डर गई और अपने मन मैं सोचने लगी,,,कही यह मेरी ईशा को तो मुझसे अलग नही कर देगें ना,,,
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शिवांश के ऐसे बोलने पर जानवी ने एक राहत की सास ली,,,,ही थी की तभी शिवांश ने जानवी को देख के बोला तो तुम्हारा वादा याद है ना,,,
जानवी ने जब ला चारी मैं हा मैं अपना सिर हिला दिया,,,,तभी शिवांश ने जानवी का हाथ पकड़ा और,,,उससे भोले जी के मंदिर के तरफ ले जाने लगा यह देख एक ईशा,,,कन्फ्यूज नजरो से उससे देख के बोली,,यह मुझे मंदिर क्यू ले जा रहे है,,,तभी शिवांश रुका और राका को देख के बोला जल्द से जल्द मैंने जो,,,बोला था १० मिनट के अंदर आ जाना चाहिए।।।
राका ने शिवांश की बात सुनी,,,और हा मैं अपना सिर हिला के वाहा से चला गया,,,,
१० मिनट के पहले ही ही राका,,,अपने हाथ मैं दो बैग लिए मंदिर मैं आ गया और उसने दोनो बैंग,,,शिवांश को दे दिया शिवांश ने भी वोह बैग लिया,,,और जानवी को लेते हुए बोला जाओ चेंज करके आओ,,,इतना बोल शिव राका को कुछ इंस्ट्रक्शन देने लगा,,,
जानवी ने वोह बैग देखा और मंदिर मैं ही बने,,,एक छोटे से कमरे मैं चली गई,,,उसने बैग खोल के देखा तो उस मैं एक रेड कलर की सुंदर सी साड़ी रखी,,, हुई थी।।।
और कुछ ज्वेलरी भी रखी क्यू थी,,,जानवी ने ज्यादा ना सोचते हुए उस साड़ी को पहन लिया,,,और जल्दी से तैयार होके बहार आ गई,,,, बाहर का नजारा देख के जानवी शॉक होके सब कुछ देखने लगी,,,,
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तभी जानवी को अपने सामने किसी का प्रेजेंट महसूस हुआ,,,तो जानवी ने अपनी नजर उठ के अपने सामने देखा जहा शिवांश,,,उससे ही देख रहा था,,,यह देख के एक पल की जानवी घबरा गई।।।
और दो कदम पीछे हट गई,,,तभी जानवी ने एक गहरी सास ली और शिवांश को देख के बोली,,,, यह सब क्या है अपने मंदिर को क्यू सजाया है।।।।
शिवांश ने जानवी की बात सुन अपने खयालों,,,से बाहर आया ओर उसको देख के बोला क्यू की आज हमारी शादी,,,,है।।।।
जानवी ने एक दम शॉक होके बोली,,,,क्या????
यह आप क्या बकवास कर रहे है,,,,मैं आपसे शादी नही कर सकती,,,
और क्यू नही कर सकती तुम,,,मुझसे शादी???? तुम भूल रही हो की तुमने अभी कुछ देर पहले मुझसे,,,,वादा किया था,,,की जो मैं बोलुगा तुम मुझे दोगी।।।।
हा पर इसका मतलब यह थोड़ी है की मैं,,,आपसे शादी कर लू,,,अरे मैं तोह आपको जानती भी नही हु,,,तो कैसे कर लू आपसे शादी सॉरी पर मैं आप से शादी नही कर सकती,,,
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कोई बात यही बात है ना की तुम मुझे जानती नही,,,,हो तोह यह कोई बड़ी प्रोब्लम नही है,,,,धीरे धीरे शादी के बाद तुम मुझे जान जाओगी,,,और मैं तुम्हे,,,,वैसे भी जानने और पहचाने के लिए तो पूरी उम्र पड़ी है,,शिवांश ने जानवी के तरफ देख के बोला,,,
जानवी ने शिवांश की बात सुनी और,,,उसको देख के बोली नही मैं आप से शादी फिर भी,,,नही कर सकती,,,
जानवी की बात सुन के वाहा खड़ा राका,,,जानवी को देख के बोला पहली ऐसी लड़की देख रहा हु,,,,जो बॉस से शादी के लिए मना कर रही है,,,और बॉस उससे मानना रहे है वरना तो बॉस,,किसी को नजर उटा के भी नही देखते है,,,और लड़किया तो लाइन लगी हुई है,,,इनसे शादी करने के लिए लेकिन मैडम माना,,,कीजे जा रही है।।।
राका अभी सोच ही रहा था की,,,तभी उसने देखा की जानवी उसके तरफ ही,,,, आ रही है यह देख राका ने जल्दी से अपनी नजरे जानवी से हटा ली।।।
वोही जानवी को जाता देख के,,,,शिवांश ने शांत आवाज मैं जानवी को जाते हुए बोला,,ठीक है तुम्हे जाना है चली जाओ लेकिन यह बच्ची तुम्हारे साथ,,,नही जाएगी मुझे बच्ची देके जाना।।।।
जैसे ही जानवी ने यह सुना उसके कदम वोही पर रुक गए,,,,और वोह हैरानी भरी नजरो से पीछे मुड़ के शिवांश को देखने लगी,,,,तभी शिवाश ने फिर बोल,,,सोच को या तो शादी या बच्ची फैसला तुम्हारा है,,,,इतना बोल शिवांश ने राका को देखा जिसने बच्ची को अपने गोद मै लिया था,,,,राका बच्ची को ले चलो इतना बोल शिवांश भी वाहा से जाने लगा।।।।
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जानवी ने जब यह देखा तो तो,,,उसकी तो मानो जैसे सास ही रुक गई हो,,,वोह जल्दी से शिवांश के पास गई और उसके हाथ को पकड़ के बोली,,,नही नही मेरी बच्ची को मत ले जाओ मैं तैयार हु शादी के लिए।।।।।
शिवांश ने जैसे ही जानवी की बात सुनी,,तो शिवांश ने जानवी को देखा,,, जिसकी आखों मैं आसू था और वोह अपनी आसू भारी नजरो से,,,उससे देख रही थी,,,,
शिवांश का दिल जानवी को देख के पिघलने लगा,,,,लेकिन फिर भी उसने अपने चेहरे पर कोई भी,,,, एक्सप्रेशन नही आने दिया,,,और जानवी का हाथ पकड़ के मंदिर मैं बने मंडप मैं बैठ गया।।।।
और पंडित जी को मंत्र पढ़ने को क्यों बोला,,,,पंडित जी भी शादी के मंत्र पढ़ने लगे,,,और कुछ ही देर मैं दोनो के फैरो हो गए,,,उसके बाद शिवांश ने अपने साइड मैं रखा एक बॉक्स लिया,,,और उस मैं से डायमंड का मंगलसूत्र निकाला,,,,जिस्म sr निकाला हुआ था,,,शिवांश ने जानवी को मंगलसूत पहना ही था की,,,तभी उसके हाथो मैं जानवी के आखों से एक बूंद आसू शिवांश के हाथो मैं गिर गया,,,,
शिवांश ने एक नजर जानवी को देखा जो,,,अपनी नजरे नीचे किए हुए बैठी थी,,,,तभी पंडित जी ने शिवांश को देख के बोले,,,,बेटा अब सिंदूर से माग भर दीजिए।।।
पंडित जी के बोलने पर शिवांश ने एक चुटकी,,,सिंदूर लिया और जानवी के माग मैं भर दी।।।
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तभी पंडित जी ने दोनो को देख के बोले,,,शादी संपन हुआ,,आज से आप दोनो पति पत्नी हुए,,,,अब आप दोनो जाके भोले नाथ का आशीर्वाद ले लीजे,,,जैसे ही पंडित जी ने यह बोला,,,जानवी के आखों से झर झर करके आसू बहने लगे।।।।
तभी शिवांश ने जानवी को देखा और उसका हाथ,,,पकड़ के उसे खड़ा कर के भोले नाथ के पतिमा के सामने,,,हाथ जोड़ खड़ा हो गया।।।
जानवी ने भोले नाथ को देखा और बोली,,,क्यू क्यू कर रहे है आप मेरे साथ ऐशा,,,क्या जितनी भी तकलीफ मुझे मिली क्या वोह काम था की,,,तभी आज यह सब हो गया,,,आखिर चाहते क्या है आप।।।।।
मुझे नही पता आगे क्या होगा,,मेरे साथ लेकिन अगर अपने मेरी किस्मत मैं इन्हे लिखा है,,,तो कुछ सोच के ही लिखा होगा,,,मैने सब कुछ आप पर छोड़ा है लेकिन आप भी सुन लिए अगर,,,मेरी ईशा को कुछ हुआ तो मैं आप से भी नाता खत्म कर दुगी,,,
अभी जानवी भोले नाथ को देख के अपने मन मैं बोल ही,,,रही थी की तभी शिवांश ने उसके कंधे पर अपना हाथ,,,,रखा,,जिसे महसूस करके जानवी ने नजर उठा के शिवांश को देखा,,,
तभी शिवांश बोला अगर भगवान से,,,शिकायत करके हो गया हो तो चले,,,,इतना बोल शिवांश ने जानवी का हाथ पकड़ के,,,राका के तरफ आया और राका ने भी जल्दी से बच्ची को शिवांश को दे दिया।।।।
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तभी जानवी ने अपने हाथ ईशा ,,,के लेने को बड़ा दिया,,,जब शिवांश ने जब जानवी के बड़े हुए हाथ को देखा तो उसने ईशा,,,को जानवी के गोद मै दे दिया।।।।।।।
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आखिर शिवांश ने जानवी से शादी क्यू की,,,क्या वोह हो सकती है वाली वजह,,,और शिवांश का उसी वक्त वोह पर आना क्या यह कंसीडेंस था,,,या शिवांश पहले से जानता था,,,,अब क्या होने वाला है जानवी की लाइफ मैं क्या आयेगी उसकी जिंदगी मैं खुशियां,,,या अभी और दर्द बाकी है।।।
जान ने के लिए बने रहिए मेरी स्टोरी के साथ मिलते है अगले एपिसोड मैं,,,
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
और हा स्टोरी को लाइक करना ना भूले,,,
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
चैप्टर नंबर ७ दोस्ती कहानी शुरू करते है,,,,आई विश की आप लोगो को यह कहानी,,,अच्छी लगे,,तो चलिए शुरू करते है कहानी का ७ चैप्टर❤️❤️❤️
जानवी ने भोले नाथ को देखा और बोली,,,क्यू क्यू कर रहे है आप मेरे साथ ऐशा,,,क्या जितनी भी तकलीफ मुझे मिली क्या वोह काम था की,,,तभी आज यह सब हो गया,,,आखिर चाहते क्या है आप।।।।।
मुझे नही पता आगे क्या होगा,,मेरे साथ लेकिन अगर अपने मेरी किस्मत मैं इन्हे लिखा है,,,तो कुछ सोच के ही लिखा होगा,,,मैने सब कुछ आप पर छोड़ा है लेकिन आप भी सुन लिए अगर,,,मेरी ईशा को कुछ हुआ तो मैं आप से भी नाता खत्म कर दुगी,,,
अभी जानवी भोले नाथ को देख के अपने मन मैं बोल ही,,,रही थी की तभी शिवांश ने उसके कंधे पर अपना हाथ,,,,रखा,,जिसे महसूस करके जानवी ने नजर उठा के शिवांश को देखा,,,
तभी शिवांश बोला अगर भगवान से,,,शिकायत करके हो गया हो तो चले,,,,इतना बोल शिवांश ने जानवी का हाथ पकड़ के,,,राका के तरफ आया और राका ने भी जल्दी से बच्ची को शिवांश को दे दिया।।।।
शिवांश ने एक हाथ से बच्ची को लिया,,,और दूसरे हाथ से जानवी का हाथ पकड़ के मंदिर की सीढ़ियों से उत्तर,,,कर नीचे आपने कार के पास आ गया,,,,,तभी एक बॉडी गार्ड जल्दी से आया और कार का गेट खोल दिया,,,,और सब से पहले शिवांश ने जानवी को कार मैं बैठाया,,,,फिर खुद बच्ची को लेके बैठ गया।।।।।।।
तभी जानवी ने अपने हाथ ईशा ,,,के लेने को बड़ा दिया,,,जब शिवांश ने जब जानवी के बड़े हुए हाथ को देखा तो उसने ईशा,,,को जानवी के गोद मै दे दिया।।।।।।।
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****अब तक अपने पड़ा***
***अब आगे***
जानवी ने भी ईशा को गोद मै लेके,,,जल्दी से उससे अपने सीने से लगा के उसके माथे को चूम,,,लिया।।।
शिवांश एक तक जानवी को,,, ही देख रहा था जो अपनी नम आखों से ईशा को गोद मै लिए,,,रो रही थी शिवांश को जानवी का ऐसे रोना,,,बिलकुल भी अच्छा नही लग रहा था।।।
जानवी को रोता हुआ देख के शिवांश के,,,दिल मैं एक दर्द हो रहा था शिवांश ने कश के अपनी हाथो की,,,मुट्ठी बंद कर दी,,, और अपनी आखों को बंद के कर एक गहरी सास ली,,,
फिर उसने सीट पर अपने सिर को,,,टिकाए बैठ गया अभी शिवांश ने एक गहरी सास लेके बैठा ही था,,की तभी उससे ईशा के रोने की आवाज सुनाई दी।।।।
शिवांश ने झट से अपनी आखें खोल के जानवी और,,,ईशा को देखा,,जानवी ईशा को चुप कराते हुए बोली अरे,,,अरे मेरी लाडो क्या हु तुझे क्यू रो रही है,,,चुप हो जा इतना बोल जानवी ईशा को गोद,,,में लिए उससे हल्के हल्के,,,हिलाने लगी।।।
लेकिन फिर भी ईशा चुप नही हो रही थी,,,,यह देख के अब जानवी परेशान हो गई अरे मेरा बच्चा क्या,,,हुआ तुझे पहले तो तू कभी कितना नही रोई,,,चुप हो जा बेटा इतना बोलते वक्त जानवी की भी आखें नम हो गई,,,,
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जिसे देख शिवांश ने गाड़ी का पाठीसन,,,,लगा दिया,,,और जानवी को देख के बोला इसे भूख लगी होगी दूध पिलाओ चुप हो जायेगी।।।।
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शिवांश के ऐसे बोलने पर जानवी ने शिवांश को देखा,,,फिर जानवी को याद आया की,,,ईशा को दूध पिए काफी टाइम हो चुका था,,,पर अभी प्रोब्लम यह थी की वोह ईशा को दूध कैसे पिलाए क्यू की,,,जितना दूध था वोह खतम हो गया था,,,
लेकिन फिर भी जानवी ने ईशा का छोटा,,,सा बैग निकाला और उसमे मैं हाथ डाल के दूध ढूढने लगी,,,इस उम्मीद से की शायद दूध मिल जाए।।।
जानवी को देख के शिवांश ने बोला,,,तुम बैग मैं क्या डूड रही हो,,,
जानवी ने भी बैग मैं ढूढते हुए बोली,,,दूध की बॉटल
क्यू बच्ची छोटी है तुम इसे,,,बॉटल से क्यू दूध पिला रही हु खुद फीड करो,,,,जैसे ही शिवांश ने यह बोला,,,जानवी के हाथ बैग मैं बॉटल ढूढते हुए रुक गए।।।।
वोही शिवांश जानवी को,,, एक मिस्ट्रिस स्माइल से देखने लगा।।।।
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वोही जानवी को कुछ समझ नही,,,,आ रहा था की वोह शिवांश के बातो का क्या जवाब दे,,,वोह शिवांश से अपनी नजरे चुराने लगी।।।
उसने शिवांश को बिना देखे ही बोली,,,नही मैं फीड नही करा सकती हु,, आप प्लीज कही से दूध का अर्रेज कर डीजे,,,
जानवी के ऐसे बोलने पर शिवांश ने भी,,,जानवी को देख के बोला क्यू क्यू नही,,,करा सकती तू तुम्हारी बेटी है,,और यह अभी मुश्किल से,,,दो महीने की ही लगती है ।।।।।
शिवांश ने इतना कहा ही था की,,,,तभी जानवी बोली,,ऐसे आपको कोई भी मतलब नही होना चाहिए,,, आप अरेंज कर सकते है तो बताइए वरना कार रोक डीजे,,,मैं खुद कही से भी दूध ले आऊंगी।।।।।।
जानवी के ऐसे बोलने पर शिवांश ने जानवी को,,,देखा और अपने मन मैं बोला अब तक चुपाओगी जाना,,,कभी कभी तो सच बाहर आना ही है,,,,मैं भी देखता हु अब तक तुम नही बताती हो।।।।
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शिवांश ने अपने मन मैं बोल,,जानवी को देखा जो अभी ईशा को शांत कराने की ना कामियाब कोशिश कर रही थी,,,,
तभी शिवांश ने जानवी के गोद के ईशा को लिया,,,और उसको अपने गोद मै ले,,,,शांत करने लगा।।।।
और जानवी को देख के बोला,,,५ मिनट मैं घर आ जायेगा,,,तब दूध पिला देना।।।
जानवी ने भी शिवांश के बात का कोई,,,जवाब नही दिया,,,वोह तो ईशा को देख रही थी जो शिवांश के गोद मै जा,,,उससे अपने बड़ी बड़ी आखों से टुकुर टुकुर देख रही थी।।।।
तभी ईशा ने अपने हाथ मैं शिवांश की,,,, उगली पकड़ ली यह देख एक शिवांश के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान,,,आ गई।।।
और वोह भी ईशा को ही देखने लगा।।।।और जानवी भी उन दोनो को,,,,देख रहीं थी।।।।
तभी उसने अपने मन मैं बोली इतने देर से मैं चुप,,करा रही थी तो चुप नही हुई और अब,,,,देखो कैसे इनके गोद मै जाते है खेलने लगी।।।
इतना बोल जानवी मुंह बनाने लगी,,,,और अपने मन मैं बोली वाह मेरी बच्ची इतने देर से मैं चुप करा रही थी,,,,तो चुप नही हुए,,,,अच्छा है।।।।।
शिवांश अपनी तिरछी नजरों से जानवी,,,को देख रहा था तभी उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई,,,लेकिन जानवी के देखने से पहले ही उसकी मुस्कान,,,,उसने छुपा लिया।।।।।
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वोही शिवांश के गार्ड को हैरानी,,,से उससे ही देख रहे थे क्यू की यह पहली बार होगा जब शिवांश ने ,,,,, किसी के लिए कार का गेट खोला होगा।।।।
शिवांश ने जानवी का गेट खोला,,,और उसके अपना एक हाथ आगे बड़ा दिया,,,
जानवी ने शिवांश का बड़ा हुआ,,,हाथ देखा तो कुछ पल उसके हाथ को देखने लगी,,फिर नजर उटा के शिवांश को देखा जो उससे ही देख रहा था।।।।
यह देख के जानवी ने बिना उसका हाथ,,,पकड़े जल्दी से कार से निकल गई,,,शिवांश ने जब यह देखा तोह वोह अपने बड़े हुए हाथ को ही,,,घूरने लगा।।।
तभी जानवी ने शिवांश को देख के बोली,,,अब ऐसे ही क्या खड़े है चलिए ईशा को भूख भी लगी,,,होगी जानवी के बात पर शिवांश ने घूर को जानवी को देखने लगा।।
एक पल के लिए तो शिवांश के ऐसे घूरने से,,,जानवी को डर लगने लगा,,लेकिन फिर उसने हिम्मत करके,,,शिवांश को देख के बोली,,, अ,,,, अ,,,,मुझे ऐसे मत घुरिए मैं आप से डरती नही हु।।।।
शिवांश ने जब जानवी की,,,,लड़कड़ती आवाज सुनी,,तो हल्के के मुस्कुरा के बोला हा हा,,,वोह मैने अभी भी देख लिए इतना बोल शिवांश आगे बड़ गया।।।।
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आह इनका क्या मतलब था,,,फिर उसने जब देखा की शिवांश आगे बड़ गया है तो,,,वोह भी उसके पीछे पीछे चली गई,,,,जानवी जैसे ही मैन डोर के सामने आके रुकी,,,तो घर को देखने लगी,,,जो की रात होने के बावजूद भी रात को वोह मेंशन बहुत सुंदर लग रहा था,,,,
दोनो अभी गार्डन एरिया से होते हुए में गेट तक पहुंचे ही थे,,,की तभी पीछे से किसी की आवाज को सुन के शिवांश और जानवी रुक गए,,,शिवांश ने आवाज को पहचाने के एक घेरी सास ली और पीछे पलट के अपने सामने चार नमूने को देखने लगा।।।।।
जो उससे ही हैरानी भरी नजरो से घूर घूर,,के देख रहे थे,,,जानवी ने पीछे पलट के उन चारो को देखा तो एक पल के डर गई,,,और जल्दी से शिवांश के बाह को पकड़ के उसके पीछे चुप गई,,,,
और उसके बाह के बीच से अपने,,,,चेहरे को निकल उन्हे देखने लगी,,,,
शिवांश ने जब जानवी की यह,,,हरकत देखी तोह उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई,,,जिसे तुषार,मिहिर,निहार,अंगद चारो ने देख ली थी,,,,और तो उन लोगो के हैरानी का कोई ठिकाना ही नही रहा था,,,वोह लोग कभी शिवांश को देखेत्ते तो कभी एक दूसरे को,,,
तभी निहाल शिवांश के सामने आके,,,बोला भाई यह लड़की कॉन????? और यह आपके पीछे क्यू छुपी है,??? और यह बच्ची???.
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तब तक तुषार,मिहिर,निहार,अंगद चारो ही,,,,उसके सामने खड़े थे,,,उन चारो के चेहरे पर सेम सवाल देख के शिवांश ने अपने पीछे देखा जहा जानवी,,,,चुप के उन्हे ही देख रही थी,,,,
शिवांश ने,,,अपने पीछे पलटा और जानवी का हाथ पकड़ के उसको चारो के सामने,,,करते हु बोला इसे मिलो यह तोह तुम्हारी भाभी,,,मिसेज जानवी शिवांश सिंह राणा,,,
सब ने जब यह सुना,,,चारो हैरानी से shocked होके शिवांश को देखने लगे,,,,और तभी सब एक साथ बोले,,,, what?????
सब के एक साथ चिलाने पर जानवी डर गई,,,और जल्दी से शिवांश के पीछे चुप गई,,,,जिसे देख के शिवांश ने घूर के तुषार,मिहिर,निहार,अंगद चारो को देखा और बोला,,,यह क्या तरीका है बोलने का तुम ने इसे डरा दिया।।।।
तुषार,मिहिर,निहार,अंगद चारो को जब,,,अपनी गलती का एहसास हुआ की,,,उन लोगो ने कुछ ज्यादा ही जोर से बोला तो उन चारो ने एक साथ ही बोल सॉरी भाई,,,,
सॉरी मुझे नही अपनी भाभी को बोलौ,,,,शिवांश ने भी गुस्से से घूर के बोला।।।
फिर तुषार,मिहिर,निहार,अंगद चारो ने एक साथ,,,जानवी को देख के एक साथ बोले,,,सॉरी माय स्वीट लिटिल भाभी,,,
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जानवी ने उनकी बात सुनी,,,पर उन्हे कोई भी रिस्पॉन्स भी दिया,,,ओर वैसे ही खड़ी रही,,,तभी मिहिर ने बोला,,,भाई अब आपने इतना बड़ा बॉम फोड़ ही दिया,,,है तो अब यह भी बता डीजे की यह बच्ची किसकी की,,,
शिवांश ने एक नजर बच्ची को देखी,,,फिर जानवी को देख के उसको फिर से अपने सामने करते हुए बोला यह,,,बच्ची मेरी है,,,
जैसे ही जानवी ने यह सुना,,,तो वोह हैरानी से उससे देखने लगी,,,वोही तुषार,मिहिर,निहार,अंगद चारो को अब शिवांश की बात सुन के जैसे चक्कर ही आ गया हो,,,तभी मिहिर ने तुषार को देख के बोला,,,,,अरे तुषार ब्रो मुझे तो लगता था भाई,,,gay है क्यू की,,,आज तक भाई की कोई,,,भी गर्लफ्रेंड नहीं रही थी,,,और तो और जो भी लड़किया उन्हे रिजाने की कोशिश करती थी,,,भाई तो उसका क्या ही करते उसका,,,तो अगले दिन पता ही नही चलता,,,,
और अब देखा भाई ने एक साथ दो दो बम फोड़ दिया,,,बीवी के साथ साथ बच्ची भी,,,
तभी मिहिर बोल ही रहा था की तभी निहार,,,ने मिहिर की बात को सुन के बोला,,,ज्यादा मत बोल अभी भूल मत अभी हमे एक पनिशमेंट मिला,,,है तेरी ऐसी बात सुन के और मुश्किल पनिशमेंट न मिल जाए,,,इसलिए अपने मुंह को बंद रख,,,
तुषार,मिहिर,निहार,तीनो अभी खुसुर पुसुर,,,कर ही रहे थे की तभी ईशा की रोने की आवाज सब के कानो मैं गई,,,जिसे सुन के सब ईशा को देखने लगे।।।
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शिवांश ने अब को देखा और बोला,,,तुम लोगो को मैंने जो काम बोला था जाके करो मैं अभी आया,,,इतना बोल शिवांश ने जल्दी से,,,जानवी को लेके अपने कमरे मैं गया।।।
और उसको बेड पर बैठते हुए,,,ईशा को उसके गोद मैं दे दिया और जानवी ने भी जल्दी से ईशा को गोद,,,मैं उससे चुप करने लगे,,,,
शिवांश ने जल्दी से बेड के साइड मैं रखा हुआ,,,, इंटरकॉम उठाया और,,,कॉल करके दूध मनवा दिया,,,करीब ५ मिनट के बाद ही शिवांश के कमरे का डोर नोक हुआ है,,,,शिवांश ने अपने बेड के साइड मैं लगा एक बटन press किया,।।।।।
तभी रूम का गेट खुल गया,,,और सर्वेंट दूध लेके आ गया,,,जानवी ने जल्दी से दूध लिया और ईशा को खाली बॉटल मैं डाल के उससे पिलाने लगे,,,
कुछ ही देर मैं ईशा दूध पी के सो गई,,,जिसे देख जानवी ने एक राहत की सास ली,,,
वोही शिवांश जानवी की हर एक,,एक्टिविटी को देख रहा था और जानवी के चेहरे पर थकान साफ नजर,,,आ रही थी जिसे देख के शिवांश अपनी जगह से उठ,,,और जानवी को देख के बोला,,,तुम बच्ची के साथ सो जाओ मैं बाहर जा रहा हु,,,इतना बोल शिवांश वाशरूम मैं गया और कुछ देर मैं फ्रेश होके,,,,आ गया एक वक्त उसने एक टी शर्ट और ट्राउजर पहना हुआ था,,,
शिवांश जैसे ही वॉशरूम मैं बाहर आया तो उसकी,,,नजर बेड पर गई जहा,,,जानवी ईशा को अपनी बाहों मै लिए से चुकी थी,,शिवांश ने एक नजर दोनो को देखा और फिर वोह से नीचे चला गया।।
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नीचे ग्राउंड मैं तुषार,निहार,मिहिर,अंगद चारो ने ग्राउंड के चक्कर लगा रहे थे,,तभी मिहिर ने सब के तरफ देख के बोला। अरे यार मुझे यह बात हजम क्यू नही हो रही है की भाई ने हमारे खडूस डेविल भाई ने शादी कर ली,,,,
और तो और जो हमेशा लड़कियो से भागते,,,रहते थे अचानक से शादी कर के आ गए और तो और एक,,,उनकी एक बच्ची भीं है।।।
हा सही बोला तूने यह अफवाह तो अब जगह,,है की भाई को लकड़कियो मैं भी लडको भी इंटरेस्ट,,,और तो और तुम लोग भी देखो हमारे घर मैं कोई भी लड़की,,,,नही है शिवाय सीमा काकी के,,, हर एक सर्वेंट male ही है,,,तुषार ने बोला।।।।
।तभी अंगद बोला वैसे कुछ भी बोलो,,,, हमारी भाभी बड़ी ही खूबसूरत है स्पेशली उनके आखें और बाल,,,,तुम लोगो ने देखा उनके बाल कितने लंबे थे,,,
हा सही कहा अपने आज कल की लड़किया कहा,,,इतना लंबा बाल रखती है,,उन्हे तो छोटे छोटे बाल ही अच्छे लगते है,,,,लेकिन हमारी भाभी सब से अलग है लगता है,,,तुषार ने बोला और एक्साईज करना लगा,,,इसी तरफ कुछ न कुछ बात कर रहे थे ।।।।
तभी निहार ने सबको देख के बोला,,,लेकिन मुझे एक बात समझ नही आ रही की भाई ने अचानक शादी,,,कर ली और हमे बताया भी नहीं निहार,,,, ने इतना बोला ही था की तभी उसके कानो की शिवांश की कड़क आवाज सुनाई दी,,,,
जिसे सुन के सब एक्साइज करते हुए,,,रुक गए ओर पीछे देखने लगे,,, जहा शिवांश अपने हाथो को अपने सीने पर बांधे खड़ा उन्हे ही देख रहा था।।।
तभी शिवांश ने उन अब को देख के बोला,,,तोह क्या कह रहे थे तुम लोग की मैने अचानक शादी,,,क्यू कर ली तो क्या तुम लोग को मेरे शादी करने,,,से खुशी नही हुई,,शिवांश ने सब के तरफ देख के बोला,,,
तभी निहार,तुषार,माहिर सब ने शिवांश को देखा,,,
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तो दोस्तो क्या लगता है आपको क्या शिवांश के यू,,, अचानक से शादी करने पर उसके भाई खुश नही है,,,और शिवांश ने सब के सामने क्यू कहा की ईशा उसकी बेटी है क्या है इसके पीछे का राज
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जानने के लिए स्टोरी के साथ बने रहिए,,,,
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी
लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
और हा स्टोरी को लाइक करना ना भूले,,,
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
हेलो दोस्तो आई होप की आप लोगो की,,,चैप्टर ७ का एपिसोड अच्छा लगा होगा,,,तो अब बड़ते है चैप्टर ८ की एपिसोड पर❤️❤️❤️❤️
हा सही बोला तूने यह अफवाह तो अब जगह,,है की भाई को लकड़कियो मैं भी लडको भी इंटरेस्ट,,,और तो और तुम लोग भी देखो हमारे घर मैं कोई भी लड़की,,,,नही है शिवाय सीमा काकी के,,, हर एक सर्वेंट male ही है,,,तुषार ने बोला।।।।
।तभी अंगद बोला वैसे कुछ भी बोलो,,,, हमारी भाभी बड़ी ही खूबसूरत है स्पेशली उनके आखें और बाल,,,,तुम लोगो ने देखा उनके बाल कितने लंबे थे,,,
हा सही कहा अपने आज कल की लड़किया कहा,,,इतना लंबा बाल रखती है,,उन्हे तो छोटे छोटे बाल ही अच्छे लगते है,,,,लेकिन हमारी भाभी सब से अलग है लगता है,,,तुषार ने बोला और एक्साईज करना लगा,,,इसी तरफ कुछ न कुछ बात कर रहे थे ।।।।
तभी निहार ने सबको देख के बोला,,,लेकिन मुझे एक बात समझ नही आ रही की भाई ने अचानक शादी,,,कर ली और हमे बताया भी नहीं निहार,,,, ने इतना बोला ही था की तभी उसके कानो की शिवांश की कड़क आवाज सुनाई दी,,,,
जिसे सुन के सब एक्साइज करते हुए,,,रुक गए ओर पीछे देखने लगे,,, जहा शिवांश अपने हाथो को अपने सीने पर बांधे खड़ा उन्हे ही देख रहा था।।।
तभी शिवांश ने उन अब को देख के बोला,,,तोह क्या कह रहे थे तुम लोग की मैने अचानक शादी,,,क्यू कर ली तो क्या तुम लोग को मेरे शादी करने,,,से खुशी नही हुई,,शिवांश ने सब के तरफ देख के बोला,,,
तभी निहार,तुषार,माहिर सब ने शिवांश को देखा,,
***अब तक अपने पड़ा***
****अब आगे****
हार,तुषार,माहिर,,अंगद ने एक साथ कहा,,,अरे हम बहुत खुश है,,,इतना बोल चारो के चारो अपने बत्तीसी दिखा दी,,,
यह देख के शिवांश ने एक गहरी सास लेके,,,बोला अच्छा है तुम लोग बहुत खुश हो तो चारो जाओ ग्राउंड के,,,२० चक्कर लगाके आओ।।।
पर भाई मैंने तोह अभी अभी ही,,,१० चक्कर लगाके आया हु,,,मिहिर ने बोला।।।
शिवांश ने मिहिर की बात पर मिहिर को देखा और,,,बोला अच्छा ठीक है इतना सुनते ही मिहिर खुस हो गया लेकिन शिवांश की,,,आगे की बात सुन के मिहिर के तोते उड़ गए,,,,मिहिर मुंह बना के शिवांश को देखने लगा
शिवांश ने बोला,,,जाओ तुम २० के जगह २५ चक्कर लगा के आओ,,,तुम भी याद करोगे तुम्हारा भाई कितना बड़ा दिल दर है।।।।
मिहिर ने शिवांश की बात सुन के,,,मुंह बना के धीरे से बोला इसे दिलदार नही,,,बे दिल कहते है,,,,
मिहिर के यह बोलने पर शिवांश ने मिहिर को,,,देख के बोला क्या हुआ कुछ बोला तुमने,,,
अरे नही नही भाई मेरी कहा इतनी हिम्मत की,,,मैं कुछ बोल सकू मैं अभी जाता हु,,,,इतना बोल मिहिर जाने लगा वोह सब लोग उसकी हालत देख के हसने लगे,,,,
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तभी शिवांश ने सब को देख के ,,,,बोला तुम लोगो को अलग से इनविटेशन देना होगा,,,या मिहिर की तरफ तुम्हारा भी,,,,शिवांश ने इतना बोला ही था की अंगद,तुषार,निहार वाहा से भाग गए,,,
उनके जाने के बाद शिवांश,,,ने अपना एक्साइज करना स्टार्ट किया,,,और करीब दो घंटे बाद सब का,,,वर्कआउट खत्म हो चुका था,,,
मिहिर तो अभी भी ग्राउड पर लेटा,,,गहरी गहरी सास ले रहा था तभी उसके सामने अंगद आते हुए,,,,बोला अबे साले इसलिए बोलते है,,,जहा ही बोल सोच समझ के बोल लेकिन तू है की मानता ही नहीं,,,।।।
ले मार अब अच्छा हुआ हमने तेरा साथ नही,,,दिया वरना पता नही क्या होगा,,,,,
हा हा ठीक है अब तुम भी लैक्चर देना का,,,काम मत करो वोह कोटा ऑलरेडी किसी और का है,,,तुम डॉक्टर हो तो डॉक्टर ही रहो,,, हुहूहु आए बड़े ज्ञान देने वाले,,इतना बोल मिहिर उठा और मेंशन के,,,,अंदर चली गया।।।।
यह कभी नही सुंधेगा,,,इसकी आदत तो लगता है किसी दिन शिवांश के हाथो पीट के लाइन पर आएगा,,,
उसके बाद अंगद भी अपने कमरे मैं चला गया,,,,
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****शिवांश का कमरा****
आज सन्डे था तो किसी को भी,,,,कही नही जाना था,,,इसलिए आज सब घर पर ही थे,,शिवांश अपने कमरे मैं आया तो उसने देखा की जानवी अभी भी,,,,से रही है यह देख के शिवांश ने एक नजर जानवी को देखा और,,,सीधा वाशरूम मैं चला गया,,,
सुबह का सूरज चढ़ चुका था लेकिन,,जानवी अभी भी सुकून से सो रही थी,,,जैसे मानो काफी टाइम के बाद उसे सुकून की नीद आई हो।।।।
कुछ देर बाद शिवांश फ्रेश होके आया,,,और सोफे पर बैठ के अपना लैपटॉप को खोल उसने अपनी,,, उगलिया तेजी से चलने लगा,,,
तभी उसके कमरे के दरवाजे कर हल्के से नोक,,,हुआ और कुछ ही पल मैं सीमा काकी,,,शिवांश के कमरे मैं आ गई शिवांश ने उन्हे देखा तो उन्हे गुड मॉर्निंग विश किया,,,
गुड मॉर्निंग बेटा,,,यह रही तुम्हारी काफी,,इतना बोल उन्होंने टेबल पर काफी रख दी,,,और वाहा से जाने को ही हुए की उनकी नजर बेड पर गई,,,कहा जानवी और ईशा सुकून से हो रहे थे,,,
यह देख के सीमा काकी ने कुछ पल के,,,दोनो को देखा और फिर शिवांश को देखने लगी,,,जो उसे ही देख रहा था तभी शिवांश ने उनके सवालियों नजरो को,,,समझ के बोला यह आपको बहु है काकी कल ही हम ने इनसे,,,शादी की है।।।
शिवांश की बात सुन के काकी,,,,मुस्कुराई लेकिन फिर वोह ईशा के बारे मैं शिवांश से पूछना,,,चाहती थी पर वोह उससे ज्यादा कुछ ना,,,पूछ के वोह से चली गई।।।।
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शिवांश भी फिर से अपने काम मैं लग गया,,,वोह एक हाथ मैं काफी का माग लिए,,,,और एक हाथ लैपटॉप पर अपनी उंगलियां चलाए जा रहा था,,,,वोह अपनी काम मैं पूरी तरह से डूब चुका था की तभी,,,शिवांश के कानो मैं ईशा के रोने की आवाज आई।।।
ईशा के रोने की आवाज को सुन के,,,शिवांश के हाथ लैपटॉप पर चलते हुए रुक गए ओर वोह अपनी जगह,,,,बैठ के बेड के तरफ देखने लगा जहा जानवी अब भी से रही थी,।।।।
यह देख के शिवांश अपनी जगह से उठता है,,,और जल्दी से जाके ईशा को अपनी गोद मै उटा लेता है,,,ईशा भी जैसे ही शिवांश के गोद मै गई उसने रोना बंद किया,,,और अपनी आखों को बड़ी बड़ी कर शिवांश को देखने लगी,,,,
शिवांश ने उसकी हरकत देख के मुश्कुरा,,,बिना नही रह सका,,,शिवांश ने ईशा को गोद मै लिए नीचे चला गया।।।
जहा इस वक्त सब सोफे पर बैठे,,,,काफी पी रहे थे तभी तुषार की नजर,,,शिवांश पर गई जो ईशा को अपनी गोद मै लिए नीचे आ रहा था यह देख के,,,तुषार जल्दी से शिवांश के पास गया और बोला,,,,।।
भाई मुझे भी डीजे ना मैं भी तो देखूं अपनी,,,भतीजी को इतना बोल तुषार ने अपना हाथ बड़ा,,,के ईशा को अपने गोद मै ले लिया,,,।।।
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और सब के तरफ आके बैठ,,,गया और सब लोग ने तुषार को घेर के बैठ गए,,,अरे भाई बैठे भी क्यू ना ईशा पहली बच्ची थी,,,जो उनके घर आई थी और वोह भी इतनी क्यूट
तभी मिहिर ने ईशा को तुषार के गोद से,,, लेते हुए बोला हाय यह कितनी क्यूट है ना,,,किसी डॉल की तरफ इसकी आंखे देखो कितनी प्यारी है,,,, छोटी सी नाक छोटे से हॉट,,,और छोटे छोटे हाथ पैर।।।
मिहिर की बात सुन के,,,,अंगद के उसके सिर पर तापड़ी मरते हुए बोला अबे साले बच्ची के,,,छोटी सी नाक छोटे से हॉट,,,और छोटे छोटे हाथ पैर नही होगे,,तो क्या तेरे जैसे होगे।।।।
हा तो क्या हो गया,,,मेरे जैसे होगे भी तो तुम्हे भी मालूम मैं कितना गुडलुकिंग हु,,,लड़किया मरती है मुझ पर मेरे साथ एक,,,बार फोटो लेने के लिए लड़कियो की लाइन लगी होती है,,,मैं तो अगर एक नजर देख भी लू तो लड़किया वोही बेहोश होके गिर जायेगी।।।।।
हा बिलकुल तुम्हारी शकल इतनी खराब,,,जो है अंगद ने भी मिहिर के बात का बारा बार जवाब देते हुए बोला।।।।
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मेरी शकल को खराब नही है,,, मैं तो बहुत ही ज्यादा हैंडसम एंड गुड लुकिंग दिखाता हु,,,तुम जाके अपना चेहरा देख लो तुम्हारा चेहरा खराब है,,,तभी तुम्हारे ब्रेकअप होते रहते है।।।।
इतना बोल बोल हसने लगा।।।।
तभी अंगद कुछ बोलता उससे पहले ही उन,,,सब के कानो मैं ईशा के रोने की आवाज सुनाई दी,,, जिसे सुन के निहार ने जल्दी से बेबी को अपने गोद मैं,,,ले बोला दोनो के दोनो नालायक है जब देखो तब लड़ते रहते है,,,,बिचारी बच्ची को भी रुला दिया।।।।
Hmm ना ना ना बच्चा भी रोते देखा मैने उन्हे अच्छे से डाटा है,,,,अब तुम भी मत रो लेकिन ईशा अब भी रोई जा रही थी,,,उसके आंखो से बहते आसू को देख के सब का दिल,,, पसीस रहा था ।।।।।
तभी शिवांश ने ईशा को अपने गोद मै लिया,,,और उसको लेके लिविंग हॉल मैं ही टहलने लागा,,,और अंगद जल्दी से जाके काकी को बुलाने के लिए किचन मैं चला गया,,।।।।
वोही काकी ने भी बच्चे की आवाज सुन ली थी,,,वोह भी किचन के गेट तक आ गई,,,और उसने बच्ची को इस तरह रोते देख के बोली,,, शिवास बेटा बच्ची को भूख लगी है आप इसे इसकी मां के पास ले,,,जाओ वोह इस दूध पिला देगी।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
शिवांश जो की ईशा को लेके,,,टेहलर रहा था जैसे ही उसने सीमा काकी की बात सुनी तो वोह काकी को देखने लगा,,,,कुछ पल उन्हें। देखे के बाद बोला काकी आप किचन से दूध ले आइए।।।
पर बेटा बाहर का दूध बच्ची के लिए,,बिलकुल भी ठीक नही होगा,,,अभी बच्ची बहुत ही छोटी है शिवांश ने उनकी बात सुन के,,,एक गहरी सास ली और बोला,,,काकी अभी वोह सो रही है आप दूध ले आइए किचन से,,,इतना बोल शिवांश सोफे पर ईशा को लेके बैठ गया।।।।
कुछ ही देर मैं काकी किचन से ईशा के लिए,,,,दूध ले आई और शिवांश ने दूध के बॉटल से ईशा को,,,,, दूध पिलाने लगा। ।।।।।
वोही सब शांति से बैठ बस ईशा को देख रहे थे,,,जिसकी आके अब हल्की हल्की बंद हो रही थी,,,कुछ देर मैं ईशा का पेट भर गया तभी वाहा काकी आई और शिवांश को देखे के,,, बोली बेटा अगर तुम बुरा ना मानो तो क्या मैं भी की मालिश कर दु।।।
वोह क्या है ना अभी यह बहुत छोटी है,,,,,और बहुत कमज़ोर भी है,,,,तोह इसे इस वक्त तीन टाइम के मालिश करने से इसकी सेहत अच्छी,,,रहेगी।।।
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जी काकी आपको जो भी ठीक लगे,,,आप कीजे वैसे भी हम भी तो अपने ही पाल के बड़ा किया है,,,तो आपको को तोह पता ही होगा की बचे के लिए किया अच्छा है,,,
इतना बोल शिवांश ने ईशा को काकी के गोद,,,मैं दे दिया सीमा काकी ने भी ईशा को लिया,,, और बाहर गार्डन मैं चली गई,,,उससे मालिश करने के लिए।।।
कभी कुछ देर ही हुए थे की तभी,,,उन सब के कानो मैं छम छम की आवाज सुनाई देने लगी,,,सब लोगो ने एक साथ पीछे मुड़ के देखा जहा,,,,जानवी अपने कमरे से भागते हुए,,,,आ रही थी,,,,
वोही शिवांश भी जानवी को ही देख रहा था,,,जो को सोते उतने के बाद और भीं ज्यादा खिले,,,हुए फूल की तरह सुंदर लग रही थी,,,भागने के वजह से उसके बाल हवाओ मैं लहरा रहे थे।।।
तभी जानवी भागते हुए,,ही सीढ़िया से उत्तर के नीचे आ रहीं थी की तभी,,,,वोह दो सीडियो पर आके लड़खड़ा गई,,,,यह देख के सब शॉक होके उससे देखने लगे।।।।
वोही जानवी ने गिरने के वजह से अपनी आखें,,,कश के बंद कर ली,,,लेकिन कुछ पल के बाद जब उससे कोई भी दर्द का एहसास नही हुआ तो,,,,तब उससे महसूस हुआ की दो मजबूत हाथो ने उसके,,,,कमर को मजबूती से पकड़ा हुआ है,,,,,,यह महसूस करके ,,उसने अपने आखें खोल के देखा।।।।
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जहा शिवांश उसे ही अजीब नजरो से देख रहा था,,,तभी शिवांश ने जानवी को ठीक से खड़ा करके,,,बोला पागल हो गई हो ऐसे भाग के कॉन आता है,,,वोह भी साड़ी मैं अभी गिर जाती तो।।।। और ऐसी भी क्या मुसीबत आ गई थी,,,जो तुम पागलों के तरफ भाग के आ रही थी।।।।।
जानवी ने शिवांश की बात सुन की अपनी नजरे नीचे,,,,कर ली और धीरे से बोली आई एम सॉरी,,,😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔
एक्चुअली हुआ यह था की जब,,,जानवी की नींद खुली तो उसने अपने बगल मैं ईशा को नहीं,,,,देखा और शिवांश भी कमरे मैं नही था यह देख जानवी घबरा गई,,,,और जल्दी से बेड से उतर के भाग के आने लगी।।।।
शिवांश ने जब जानवी का ऐशा उतरा हुआ चेहरा,,,देखा तो उसने और जानवी को कुछ नही बोला,,,वोह अब कुछ कुछ समझ चुका था की,,,जानवी क्यू इस तरफ भाग के आई होगी।।।
इसलिए उसने ज्यादा कुछ बोलना सही नही समझा,,,
और वाहा से जाने को हुआ की तभी रुक,,,और जानवी के सामने खड़े होते हुए जानवी का पल्लू ठीक किया,,,,वोही जानवी शिवांश को ही अपने बड़ी बड़ी आखें कर,,,देखने लगी,,,,
शिवांश ने जब जानवी के आखों को,,,खुद पर महसूस किया तोह उसने अपने एक फिगर से उसके,,, सर को टेप कर बोला मुझे घूरना बंद करो।।।।
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तभी जानवी ने भी बोली,,,मैं आपको भी घूर रहीं थी।।।।
हा हा पता है जाओ जाके फ्रेश होके आओ,,,,शिवांश ने जानवी को देख के बोला,,,
नही मेरी ईशा कहा है,,,???? जानवी ने बोली।।।
तभी शिवांश कुछ जवाब दे पता,,,,तभी मिहिर ने तपाक से वाहा पर,,,आते हुए बोला वोह मेरी क्यूट सी भाभी मेरी क्यूट सी भतीजी जो है ना गार्डन मैं है।।।।
जैसे ही जानवी ने सुना,,,वोह जल्दी से बोली क्या???? गार्डन मैं मेरी बच्ची गार्डेन मैं क्या कर रही है इतना बोल जानवी किसी की भी बात सुने बिना ही गार्डन चली गई।।।।
उसके जाने के बाद निहार ने शिवांश को,,,देख के बोला भाई आपको भाभी से ऐसे बात नही करनी चाहिए,,,थी।।।
हा देखा नही आपसे वोह कितना परेशान हो भाग के,,,,आ रहीं थी और तो और गिरते गिरते भी बच गई,,,लेकिन अपने उन्हे फिर भी डाट दिया,,,this is not fare bhai तुषार ने बोला।।।।
हा शिवांश यह लोग सही बोल रहे है,,,तुझे इस तरह उनसे बात नही करनी चाहिए थी अंगद ने भी बोला।।।
तभी शिवांश ने सब की बात सुन के,,,,मिहिर को देख के बोला तुझे भी कुछ बोलना है तो बोल दे।।।।
नही नही मुझे कुछ भी नही बोलना,,,इतना बोल मिहिर वाहा से चला गया,,,
शिवांश ने सब के देखा और अपने मन मैं बोला,,,,,चलो अच्छा है मुझे यह जान के खुशी हुई की,,,मेरे भाईयो को और मेरे दोस्त को मेरा जानवी से इस तरह बात करना,,,अच्छा नही लगा उन्हे भी अब जानवी की फिकर थी।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
शिवांश क्या छुपा रहा था,,,सब से क्या सब लोग शिवांश से जान पाएंगे की वोह क्या छुपने की कोसिसी कर रहा था,,,
जानवी अचानक से घबरा की क्यू,,भाग के आ गई उससे ऐसी क्यू लगा की शिवांश उसकी बच्ची की harm पोहुचा सकता है।।।
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जानने के लिए स्टोरी के साथ बने रहिए,,,,
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी
लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
और हा स्टोरी को लाइक करना ना भूले,,,
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
हेलो दोस्तो आई होप की आप लोगो की,,,चैप्टर ८ का एपिसोड अच्छा लगा होगा,,,तो अब आगे बड़ते है चैप्टर ९ की एपिसोड पर❤️❤️❤️❤️
तभी शिवांश कुछ जवाब दे पता,,,,तभी मिहिर ने तपाक से वाहा पर,,,आते हुए बोला वोह मेरी क्यूट सी भाभी मेरी क्यूट सी भतीजी जो है ना गार्डन मैं है।।।।
जैसे ही जानवी ने सुना,,,वोह जल्दी से बोली क्या???? गार्डन मैं मेरी बच्ची गार्डेन मैं क्या कर रही है इतना बोल जानवी किसी की भी बात सुने बिना ही गार्डन चली गई।।।।
उसके जाने के बाद निहार ने शिवांश को,,,देख के बोला भाई आपको भाभी से ऐसे बात नही करनी चाहिए,,,थी।।।
हा देखा नही आपसे वोह कितना परेशान हो भाग के,,,,आ रहीं थी और तो और गिरते गिरते भी बच गई,,,लेकिन अपने उन्हे फिर भी डाट दिया,,,this is not fare bhai तुषार ने बोला।।।।
हा शिवांश यह लोग सही बोल रहे है,,,तुझे इस तरह उनसे बात नही करनी चाहिए थी अंगद ने भी बोला।।।
तभी शिवांश ने सब की बात सुन के,,,,मिहिर को देख के बोला तुझे भी कुछ बोलना है तो बोल दे।।।।
नही नही मुझे कुछ भी नही बोलना,,,इतना बोल मिहिर वाहा से चला गया,,,
शिवांश ने सब के देखा और अपने मन मैं बोला,,,,,चलो अच्छा है मुझे यह जान के खुशी हुई की,,,मेरे भाईयो को और मेरे दोस्त को मेरा जानवी से इस तरह बात करना,,,अच्छा नही लगा उन्हे भी अब जानवी की फिकर थी।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
***अब तक अपने पड़ा***
***अब आगे****
शिवांश ने एक नजर सब लोगो को घूर के देखा,,,और फिर उसके बाद वाहा से गार्डन मैं चला गया,,,,जहा जानवी अभी भागते हुए गई थी।।।।।
जानवी जैसे ही गार्डन मैं गई तो उसने देखा की,,,,सीमा काकी ईशा को गार्डन मैं मेड बिछा के उसके,,,मालिश कर रही थी।।।।
ईशा को देख के जानवी के जान मैं जान आई,,,और जल्दी से उनके पास की गई,,,
सीमा काकी ने जानवी को देखा तो,,,बोली आओ बेटा बैठो,,,सीमा काकी के बोलने पर जानवी वोह पर बैठ और सीमा काकी को देख के बोली,,,,अम्मा आप इसे इतना तेल क्यू लगा रही है???????
सीमा काकी ने जानवी को देख के,,,मुस्कुरा के बोली वोह क्या है बेटा यह बच्ची बहुत ही कमजोर है,,,,तोह मैने सोचा क्यू ना इसकी मालिश करदू,,,,तुम्हे पता है बच्चे की रोज इस तरफ से मालिश करके,,,,कुछ देर धूप मैं रखने से बच्चे स्ट्रॉन्ग होते है।।।।
मैने तो मेरे चारो बाबा की मालिश मेरी,,,इन्ही हाथो से की थी,,,,
सीमा काकी की मुंह से यह बात सुन के,,जानवी कन्फ्यूज होके उन्हे देख के चारो बाबा मतलब,,,?????
सीमा काकी ने ईशा की मालिश करते हुए,,बोली तुम्हारे पति और तुषार निहार,,और मिहिर बेटा की बात कर रही हु,,,,
अच्छा,,,,क्या आप उनकी मां है,,,जानवी ने पूछा।।।।
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नही बेटा मैं उनकी मां भी हु,,,,मैं तो बस उन बच्चो की केयर टेकर हु,,,,जो उन्हे बचपन से पल रही हु,,,,इतना बोल सीमा जी ईशा की मालिश करने लगी,,,,और जानवी को बिना देखे ही फिर से बोली,,,इनकी मां तो बेटा १० साल पहले ही एक एक्सीडेंट मैं इनकी मौत हो गई थी,,,,
तभी जानवी ने बोली,,,अच्छा तो आप इन सब की यशोदा मां है,,,,
जानवी के मुंह से यह बात सुन की सीमा,,,काकी के हाथ रुक गए ओर वोह अपनी नजर उठा के जानवी को,,,देखने लगी।।।
वोही शिवांश जी उसके पीछे ही आ रहा था,,,,और उसके पीछे पीछे चारो बंदरो की टोली,,,,,उसने भी जानवी की बात सुनली जानवी के बात सुन के सब के चेहरे,,,पर मुस्कान थी।।।।
तभी मिहिर वापस बोला,,,वाह यार भाई ने क्या लड़की पसंद किया है,,, आई एम प्राउड ऑफ him
लो चालू हो गया इसका फिर से,,,जब भी बोलता है पागलों वाली बाते ही बोलता है,,,निहार ने मिहिर को देख के बोला।।।।
अबे साले उससे तुझ पर प्राउड होने चाहिए,,,या तुझे उस पर,,,वोह बड़ा है तुझे से अंगद ने बोला।।।।
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हा तो क्या हुआ प्राउड होने के लिए बड़ा छोटा थोड़ी ना,,,देखते है बस काम देखा जाता है इतना बोल मिहिर मुस्कुरा दिया।।।
सब ने फिर सीमा काकी के तरफ देखा,,,और आपस मै बाते कर रहे थी दोनो ही एक दूसरे से,,,, घुल मिल गई वोही वोही जानवी तो सीमा काकी को देख के,,,कुछ पल के लिए अपना दर्द भूल गई।।।।
तभी सीमा काकी ने जानवी को देख के बोली,,,,बेटा मैंने इसकी मालिश कर दी है अभी तुम इसे,,,फीड कर दो इतना बोल सीमा काकी ने ईशा को जानवी के गोद,,,मैं दे दिया।।।
तभी जानवी बोली ठीक है काकी मैं,,,अभी इसकी बॉटल लेके आती हु,,,,जानवी ने काकी को देख के बोली,,,,
काकी ने जब यह सुना तोह उन्होंने ने,,,जानवी को देख के बोली बुरा मत मन ना बेटा मैं मानती,,,हु यह मॉडर्न जमाना है इसलिए आज कल के लड़किया बच्चे को,,,अपना दूध न पिला के,,, बाहर का दूध देती है पर बेटा यह अच्छी बात नही है ऐसे बच्ची की सेहत पर असल होगा,,,,
तुम इसे बाहर का दूध देती हो इसलिए बच्ची बहुत कमज़ोर से,,,,सीमा काकी की बात को सुन के जानवी के चेहरे पर एक अनकहा दर्द,,,झलक आया और उसने अपने मन मैं बोली,,,मैं इसकी मां तो बन गई पर मैं इसे एक मां के तरफ कभी,,भी दूध नही पिला सकती ।।।।
वाली मां इस पहले ही छोड़ के इस दुनिया से चली गई,,,मैं कैसे बताऊं,,,,जानवी अभी सोच ही रही थी की तभी काकी को आवाज उसके कान मैं,,,सुनाई दी।।।
तो जानवी ने नजर उठा के उन्हे देखा,,,और तभी काकी बोली क्या हुआ बेटा क्या तुम्हे मेरा इस तरह,,,बोलना अच्छा नही लगा।।।
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नही नही काकी ऐसी बात नही है,,,वोह दरसल बात यह है की,,,,इतना बोल जानवी कुछ पल सोच मैं पड़ गई की बताया की नही,,,,जानवी ने अभी तक तुषार,मिहिर, निहार अंगद,,और शिवांश को भी देखा तो,,,वोह सब उनके पीछे ही खड़े थे।।।
तभी काकी ने जानवी के हाथ पर,,,अपना हाथ रख के बोली बोलो बेटा क्या बात है,,,तुम मुझे अपना समझ के बता सकती हो,,,,
सीमा जी का इतना अपना पन देखे के,,,जानवी की आखें थोड़ी से नम हो गई और उसने अपनी,,, नम आखों से उन्हे देख के बोली,,,
अम्मा बात यह है की यह मेरी खुद की बच्ची नही है,,,,लेकिन मैं इसकी मां हु।।
जानवी के ऐसे बोलने पर काकी और,,,बाकी सब कन्फ्यूज हो गए,,,काकी ने कन्फ्यूज होके,जानवी को देखा और वोही सब को हैरानी और,,,shocking होके शिवांश को देखने लगे,,,जो अपने पैन्ट के जेब मैं हाथ डाले शांत खड़ा था।।।
तभी ताकि ने जानवी को देख के बोली,,,,यह तुम क्या बोल रही हो बेटा साफ साफ बोलो,,,जानवी की उनकी बात सुन के बोली अम्मा यह मेरी बेटी नही है,,,यह मेरी दी ही बेटी है जो,,,२० दिन पहले इस दुनिया को छोड़ के चली गई,,,
वोह चाहती थी की मैं इसे एक मां बन के पालू,,,,और एक मां की तरह ही प्यार करू इसलिए,,,मैंने अब तक किसी को यह बात नही बताई की ईशा मेरी दी ही,,,बेटी है मेरी नही।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
सब ने एक बार शिवांश को हैरानी से और,,,शॉकिंग रिएक्शन को देखने लगी,,,तभी शिवांश ने उन सब को देखा और उनके रिएक्शन को देख के,,,उसने घूर के उन्हे देखा और वोह से जाने का इशारा किया,,,,
सब ने शिवांश को देखा और,,,,अपने अपने सवालों को ले वोह से जाने लगे तभी निहार शिवांश के पास,,,आ गया और उसके कान मैं धीरे से बोला हम आपका,,,स्टडी रूम मैं वेट कर रहे है जल्दी आना,,,
इतना बोल वोह भी वाहा से चला गया,,,,शिवांश ने एक गहरी सास ली और,,,फिर जानवी के पास जाके बोला,,,,चलो जाओ जाके फ्रेश हो जाओ काकी ईशा को फ्रेश कर देगी।।।।
जानवी ने जब शिवांश की बात सुनी तो,,,उसके तरफ देखने लगी,,,एक पल की जानवी डर है की कही शिवांश ने उसकी बात तो नही सुन ली,,,,
लेकिन शिवांश का इतना ठंडा रिएक्शन देखे के,,,,जानवी को कुछ राहत मिली और उसने सीमा काकी के तरफ देखा तो उन्होंने भी जानवी को देख के बोली हा बेटा तुम ईशा को हमे दे दो,,,,मैं इसे नहला दुगी और अच्छी से तैयार करके दूध पिला के सुला भी दुगी,,,तुम जाओ और जल्दी से आके तैयार होके आओ,,,सुबह के ८ बज गए है बेटा।।।।
तुम्हे नाश्ता भी करना होगा ना,,,,कब तक किसी ने भी नाश्ता नही किया है इसलिए जाओ जल्दी,,,सीमा काकी की बात सुन के,,,जानवी ने भी हामी भरी और ईशा को उनके गोद मै देके,,,, वाहा से कमरे मैं चली गई।।।।
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वोही शिवांश भी जानवी के पीछे पीछे,,,कमरे मैं आया लिविंग हॉल मैं बैठे जब चारो ने उससे कमरे मैं,,,जाते देखा तो घूर के निहार को देख ने लगे।।।
तभी निहार ने भी हकलाते हुआ बोला अबे,,,यार मैने उससे बोला है आ जाएगा,,,इतना बोल वोह चुप हो गया,,,करीब आधे घंटे बाद भी जब शिवांश अपने कमरे से नही निकला तो,,,मिहिर बोला अब मुझसे और इंतजार नही होगा मैं ही जाके बुला के लाता हु,,,,
तभी तुषार बोला अरे रुक मैं,,,भी आता हु इतना बोल वोह भी उठ गया और उसके पीछे पीछे,,,,एक एक कमरे निहार और अंगद भी उठते हुए बोला,,,रुको हम भी आते है वाहा से डायरेक्ट,,,स्टडी रूम चले जायेगे।।।।
इतना बोल सब शिवांश के कमरे के बाहर आके खड़े हो गए,,,,तभी निहार ने तुषार को देख के बोला,,,चल नोक कर,,,,
अरे मैं क्यू करू मुझे मरना थोड़ी है भाई के हाथ से,,,,यह मिहिर करेगा चल छोटे शेर कर नोक,,,,तुषार ने मिहिर को देख के बोला,,,,
अरे मैं क्यू मैं एक तो मैं तुम सब को यहां लेके,,,, भी आया और उप्पर से मुझे ही शेर के मुंह मैं हाथ,,,,डालने को बोल रहे हो,,,,सॉरी पर मैं नोक नही करुगा।।।।।
अरे तो क्या तुम सब यहां पर,,,भाई के कमरे का दरवाजा देखने आए हो क्या,,,निहार ने झुंझलाते हुए बोला बोला।।।।
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तभी तीनों ने एक साथ अंगद के तरफ देखा,,,,और एक डेविल स्माइल देने लगे,,,,अंगद ने जब उन्हे देखा और उसके चेहरे कर स्माइल को तो वोह,,,उन सब को देख के बोला क्या,,,मैं बिलकुल भी नही नोक कर रहा इतना बोल अंगद वाहा से जाने को,,,,ही हुआ की,,तभी तीनो ने उससे पकड़ लिया।।।।
अबे सालो छोड़ो मुझे मैं बिलकुल भी यह,,,,भी करुगा साले खुद तो बच के निकल जायेगे मुझे फसा जायेगे,,,नही अब बिल्कुल भी नही ।।।।
अरे अरे भाई बस एक बार,,,नोक कर दो तुषार ने बोला,,
चल हट पहले उतार मेरे पीट से वरना अभी,,,,उप्पर से नीचे गिरा दुगा,,अंगद ने बोला।।।।।
शिवांश के कमरे मैं शिवांश,,,मैं आया ही था की तभी उसने जानवी का हाथ पकड़ लिया,,,और उससे अपने तरफ खीच लिया।।।
अचानक से ऐसे खींचे जाने से,,,जानवी के मुंह से एक छींक निकल गई,,,, अह्ह्ह्ह्ह छोड़िए मुझे और इतना बोल अपनी बड़ी बड़ी आखें कर शिवांश को देखन लगी,,,,वोही शिवांश भी उसकी उन हरी आखों मैं ही देख रहा था।।।।
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बाहर खड़े जब सब लोगो के कानो मैं,,,जानवी की छींक सुनाई दी तो सब रुक गए,,, और एक दूसरे को देखने लगे,,,तभी तुषार झट से अंगद के पीट से उतर के शिवांश के दरवाजे पर अपना कान,,,लगा दिया,,,,
और उसके पीछे एक एक कर,,,,अपना अपना कान लगा दिए,,,,तभी निहार ने उन सब को देख के बोला अरे पागलों जैसी हरकत क्यू कर,,,,रहे हो,,,
ऐसे ही किसी की privacy मैं कान लगा,,,के नही सुनते है,,,,तीनो ने निहार को देखा और फिर मुंह बना के,,,फिर से दरवाजे पर खड़े हो गए।।।।
अबे नालायको चलो यहां से,,,,लेकिन निहार की तोह कोई। बात ही नही सुन रहा था।।।
तभी तुषार ने अंगद और मिहिर को देख के बोला,,,,तुम लोग को क्या लगता है भाभी चिलाओ क्यू होगी,,,,
तभी मिहिर बोला आई think यह छींक किसी और मामले की है,,,,
हा चल बे तुझे बड़ा पता है,,,निहार ने तीनो को देख के बोला,,,
तभी मिहिर ने हस्ते हुए बोला,,,,तुम्हे बड़ा पता है जैसे ना जाने तुम्हारी कितनी ही गर्लफ्रेंड हो,,,एक तक तुम्हारी एक भी गर्लफ्रेंड नही रही,,,,और ना ही भाई की दोनो के दोनो ही अनरोनेंटिक हो,,,,तो क्या खाक रोमांस के बारे मैं पता होगा,,, आप लोगो को,,,आपको और भाई को तो रोमांस की क्लास लेनी चाहिए,,,,इतना बोल मिहिर हसने लगा,,,वोही उसके साथ तुषार और अंगद भी हसने लगे।।।।
तभी निहार ने अंगद को देख के बोला,,,,तू क्यू दात दिखा रहा है तू भी आज सिंगल ही है,,,,
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हा तो क्या हुआ गर्लफ्रेंड थी तो,,,,तू भूल रहा है उसने तुझे क्यू छोड़ा,,,,इतना बोल निहार हसने लगा।।।।
वोही अंगद का मुंह बान गया,,,
और तीन के तीनो,,,फिर से दरवाजे पर खड़े हो गए।।।।
तभी शिवांश ने कमरे मैं जानवी की आखों मैं देख के बोला मुझे,,,तुमसे कुछ बात करनी है।।।
हा ठीक है लेकिन उससे पहले आप मुझे छोड़िए तो,,,,सही। जानवी ने शिवांश के बाहों से छूटते हुए बोली।।।।
तभी शिवांश ने जानवी को अपने बाहों मै,,,,और कसते हुए बोला क्यू तुम्हे मेरी बाहों मै,,,,रहने से क्या प्रोब्लम है में तुम्हारा पति हु और तुम्हारे जिंदगी पर ऐसे ही रहना है,,,,तो आदत डाल लो,,,
इतना बोल के शिवांश ने जानवी को और कश के पकड़ लिया,,,,जिसे जानवी की हल्की से छींक निकल गई,,,तभी शिवांश के कमरा अचानक से खुला और चारो एक के ऊपर एक आके,,,गिर गए।।।।
जानवी ने जब यह देखा तो जल्दी से,,,शिवांश से अलग हो गई और अपनी नजरे नीचे करके खड़ी हो गई,,,
वोही हमारे चारो आदिवासियों जल्दी से अपनी जगह,,,खड़े हो गए तभी शिवांश ने घूर के उन्हे देखा जिसे देख के चारो के,,,चारो जल्दी से पलट गए और तभी,,,निहार ने बोला ओह सॉरी भाई लगता है गलत टाइम पर आ गए,,,, इतना बोल निहार वाहा से भागा गया,,,
।
उसको जाता देखे के अंगद भी जल्दी से चला गया,,,तभी मिहिर ने शिवांश को देख के बोला,,,, सब तो चले गए लेकिन भाई भाभी छिलाई क्यू,,,,इतना बोल मिहिर ने जानवी को देख के बोला क्या हुआ भाभी,,,,
अबे चल ना क्या पूछ रहा है खुद तोह मरेगा और,,,,और हमे भी मरेगा।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
वोही जब जानवी ने मिहिर का सवाल सुनी तो वोह उससे,,,,अब क्या जवाब दे समझ ही नही आ रहा था,,,तभी शिवांश ने अपने गुस्से से भरी आखों से मिहिर को देख के बोला,,,,रुक मैं बताता हु इतना बोल शिवांश ने अपने एक कदम आगे बढ़ाया ही था,,,की तुषार ने खीच के मिहिर को बाहर ले गया। ।।।।।।।।
लेकिन तभी मिहिर ने फिर से,,,,कमरे के अंदर झटके हुए बोला आप लोग कंटिन्यू कीजे और बाद मैं,,,भाई आप स्टडी रूम आ जाना इतना बोल,,,मिहिर वाहा से नो दो,,,११ हो गया।।।
वोही मिहिर की बात सुन के,,,,जानवी के गाल हल्के गुलाबी हो गए थे,,,जानवी जल्दी से वाहा से जाने ही हुए की शिवांश ने जल्दी से उसका,,,हाथ पकड़ लिया,,,और जानवी की पीछे से ही,,,पकड़े हुए बोला,,,,चारो को बात का और हरकत का बिलकुल बुरा मत मन ना,,,,चारो दिल से बहुत अच्छे है।।।।।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖आखिर क्यू की है जानवी और शिवांश ने शादी और क्या अब वोह एक मां भाभी और बीवी का कर्ताव निभा पाएगी और जब ईशा की और जानवी की सच्चाई सब के सामने आयेगी तो क्या रिएक्शन होगा सब का क्या वोह लोग जानवी और ईशा को एक्सेप्ट कर पाएंगे।।।।जानने के लिए स्टोरी के साथ बने रहिए,,,,
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह
स्टोरी अच्छी लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
और हा स्टोरी को लाइक करना ना भूले,,,
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
हेलो दोस्तो आई होप की आप लोगो की,,,चैप्टर ८ का एपिसोड अच्छा लगा होगा,,,तो अब आगे बड़ते है चैप्टर ९ की एपिसोड पर❤️❤️❤️❤️
तभी शिवांश कुछ जवाब दे पता,,,,तभी मिहिर ने तपाक से वाहा पर,,,आते हुए बोला वोह मेरी क्यूट सी भाभी मेरी क्यूट सी भतीजी जो है ना गार्डन मैं है।।।।
जैसे ही जानवी ने सुना,,,वोह जल्दी से बोली क्या???? गार्डन मैं मेरी बच्ची गार्डेन मैं क्या कर रही है इतना बोल जानवी किसी की भी बात सुने बिना ही गार्डन चली गई।।।।
उसके जाने के बाद निहार ने शिवांश को,,,देख के बोला भाई आपको भाभी से ऐसे बात नही करनी चाहिए,,,थी।।।
हा देखा नही आपसे वोह कितना परेशान हो भाग के,,,,आ रहीं थी और तो और गिरते गिरते भी बच गई,,,लेकिन अपने उन्हे फिर भी डाट दिया,,,this is not fare bhai तुषार ने बोला।।।।
हा शिवांश यह लोग सही बोल रहे है,,,तुझे इस तरह उनसे बात नही करनी चाहिए थी अंगद ने भी बोला।।।
तभी शिवांश ने सब की बात सुन के,,,,मिहिर को देख के बोला तुझे भी कुछ बोलना है तो बोल दे।।।।
नही नही मुझे कुछ भी नही बोलना,,,इतना बोल मिहिर वाहा से चला गया,,,
शिवांश ने सब के देखा और अपने मन मैं बोला,,,,,चलो अच्छा है मुझे यह जान के खुशी हुई की,,,मेरे भाईयो को और मेरे दोस्त को मेरा जानवी से इस तरह बात करना,,,अच्छा नही लगा उन्हे भी अब जानवी की फिकर थी।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
***अब तक अपने पड़ा***
***अब आगे****
शिवांश ने एक नजर सब लोगो को घूर के देखा,,,और फिर उसके बाद वाहा से गार्डन मैं चला गया,,,,जहा जानवी अभी भागते हुए गई थी।।।।।
जानवी जैसे ही गार्डन मैं गई तो उसने देखा की,,,,सीमा काकी ईशा को गार्डन मैं मेड बिछा के उसके,,,मालिश कर रही थी।।।।
ईशा को देख के जानवी के जान मैं जान आई,,,और जल्दी से उनके पास की गई,,,
सीमा काकी ने जानवी को देखा तो,,,बोली आओ बेटा बैठो,,,सीमा काकी के बोलने पर जानवी वोह पर बैठ और सीमा काकी को देख के बोली,,,,अम्मा आप इसे इतना तेल क्यू लगा रही है???????
सीमा काकी ने जानवी को देख के,,,मुस्कुरा के बोली वोह क्या है बेटा यह बच्ची बहुत ही कमजोर है,,,,तोह मैने सोचा क्यू ना इसकी मालिश करदू,,,,तुम्हे पता है बच्चे की रोज इस तरफ से मालिश करके,,,,कुछ देर धूप मैं रखने से बच्चे स्ट्रॉन्ग होते है।।।।
मैने तो मेरे चारो बाबा की मालिश मेरी,,,इन्ही हाथो से की थी,,,,
सीमा काकी की मुंह से यह बात सुन के,,जानवी कन्फ्यूज होके उन्हे देख के चारो बाबा मतलब,,,?????
सीमा काकी ने ईशा की मालिश करते हुए,,बोली तुम्हारे पति और तुषार निहार,,और मिहिर बेटा की बात कर रही हु,,,,
अच्छा,,,,क्या आप उनकी मां है,,,जानवी ने पूछा।।।।
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नही बेटा मैं उनकी मां भी हु,,,,मैं तो बस उन बच्चो की केयर टेकर हु,,,,जो उन्हे बचपन से पल रही हु,,,,इतना बोल सीमा जी ईशा की मालिश करने लगी,,,,और जानवी को बिना देखे ही फिर से बोली,,,इनकी मां तो बेटा १० साल पहले ही एक एक्सीडेंट मैं इनकी मौत हो गई थी,,,,
तभी जानवी ने बोली,,,अच्छा तो आप इन सब की यशोदा मां है,,,,
जानवी के मुंह से यह बात सुन की सीमा,,,काकी के हाथ रुक गए ओर वोह अपनी नजर उठा के जानवी को,,,देखने लगी।।।
वोही शिवांश जी उसके पीछे ही आ रहा था,,,,और उसके पीछे पीछे चारो बंदरो की टोली,,,,,उसने भी जानवी की बात सुनली जानवी के बात सुन के सब के चेहरे,,,पर मुस्कान थी।।।।
तभी मिहिर वापस बोला,,,वाह यार भाई ने क्या लड़की पसंद किया है,,, आई एम प्राउड ऑफ him
लो चालू हो गया इसका फिर से,,,जब भी बोलता है पागलों वाली बाते ही बोलता है,,,निहार ने मिहिर को देख के बोला।।।।
अबे साले उससे तुझ पर प्राउड होने चाहिए,,,या तुझे उस पर,,,वोह बड़ा है तुझे से अंगद ने बोला।।।।
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हा तो क्या हुआ प्राउड होने के लिए बड़ा छोटा थोड़ी ना,,,देखते है बस काम देखा जाता है इतना बोल मिहिर मुस्कुरा दिया।।।
सब ने फिर सीमा काकी के तरफ देखा,,,और आपस मै बाते कर रहे थी दोनो ही एक दूसरे से,,,, घुल मिल गई वोही वोही जानवी तो सीमा काकी को देख के,,,कुछ पल के लिए अपना दर्द भूल गई।।।।
तभी सीमा काकी ने जानवी को देख के बोली,,,,बेटा मैंने इसकी मालिश कर दी है अभी तुम इसे,,,फीड कर दो इतना बोल सीमा काकी ने ईशा को जानवी के गोद,,,मैं दे दिया।।।
तभी जानवी बोली ठीक है काकी मैं,,,अभी इसकी बॉटल लेके आती हु,,,,जानवी ने काकी को देख के बोली,,,,
काकी ने जब यह सुना तोह उन्होंने ने,,,जानवी को देख के बोली बुरा मत मन ना बेटा मैं मानती,,,हु यह मॉडर्न जमाना है इसलिए आज कल के लड़किया बच्चे को,,,अपना दूध न पिला के,,, बाहर का दूध देती है पर बेटा यह अच्छी बात नही है ऐसे बच्ची की सेहत पर असल होगा,,,,
तुम इसे बाहर का दूध देती हो इसलिए बच्ची बहुत कमज़ोर से,,,,सीमा काकी की बात को सुन के जानवी के चेहरे पर एक अनकहा दर्द,,,झलक आया और उसने अपने मन मैं बोली,,,मैं इसकी मां तो बन गई पर मैं इसे एक मां के तरफ कभी,,भी दूध नही पिला सकती ।।।।
वाली मां इस पहले ही छोड़ के इस दुनिया से चली गई,,,मैं कैसे बताऊं,,,,जानवी अभी सोच ही रही थी की तभी काकी को आवाज उसके कान मैं,,,सुनाई दी।।।
तो जानवी ने नजर उठा के उन्हे देखा,,,और तभी काकी बोली क्या हुआ बेटा क्या तुम्हे मेरा इस तरह,,,बोलना अच्छा नही लगा।।।
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नही नही काकी ऐसी बात नही है,,,वोह दरसल बात यह है की,,,,इतना बोल जानवी कुछ पल सोच मैं पड़ गई की बताया की नही,,,,जानवी ने अभी तक तुषार,मिहिर, निहार अंगद,,और शिवांश को भी देखा तो,,,वोह सब उनके पीछे ही खड़े थे।।।
तभी काकी ने जानवी के हाथ पर,,,अपना हाथ रख के बोली बोलो बेटा क्या बात है,,,तुम मुझे अपना समझ के बता सकती हो,,,,
सीमा जी का इतना अपना पन देखे के,,,जानवी की आखें थोड़ी से नम हो गई और उसने अपनी,,, नम आखों से उन्हे देख के बोली,,,
अम्मा बात यह है की यह मेरी खुद की बच्ची नही है,,,,लेकिन मैं इसकी मां हु।।
जानवी के ऐसे बोलने पर काकी और,,,बाकी सब कन्फ्यूज हो गए,,,काकी ने कन्फ्यूज होके,जानवी को देखा और वोही सब को हैरानी और,,,shocking होके शिवांश को देखने लगे,,,जो अपने पैन्ट के जेब मैं हाथ डाले शांत खड़ा था।।।
तभी ताकि ने जानवी को देख के बोली,,,,यह तुम क्या बोल रही हो बेटा साफ साफ बोलो,,,जानवी की उनकी बात सुन के बोली अम्मा यह मेरी बेटी नही है,,,यह मेरी दी ही बेटी है जो,,,२० दिन पहले इस दुनिया को छोड़ के चली गई,,,
वोह चाहती थी की मैं इसे एक मां बन के पालू,,,,और एक मां की तरह ही प्यार करू इसलिए,,,मैंने अब तक किसी को यह बात नही बताई की ईशा मेरी दी ही,,,बेटी है मेरी नही।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
सब ने एक बार शिवांश को हैरानी से और,,,शॉकिंग रिएक्शन को देखने लगी,,,तभी शिवांश ने उन सब को देखा और उनके रिएक्शन को देख के,,,उसने घूर के उन्हे देखा और वोह से जाने का इशारा किया,,,,
सब ने शिवांश को देखा और,,,,अपने अपने सवालों को ले वोह से जाने लगे तभी निहार शिवांश के पास,,,आ गया और उसके कान मैं धीरे से बोला हम आपका,,,स्टडी रूम मैं वेट कर रहे है जल्दी आना,,,
इतना बोल वोह भी वाहा से चला गया,,,,शिवांश ने एक गहरी सास ली और,,,फिर जानवी के पास जाके बोला,,,,चलो जाओ जाके फ्रेश हो जाओ काकी ईशा को फ्रेश कर देगी।।।।
जानवी ने जब शिवांश की बात सुनी तो,,,उसके तरफ देखने लगी,,,एक पल की जानवी डर है की कही शिवांश ने उसकी बात तो नही सुन ली,,,,
लेकिन शिवांश का इतना ठंडा रिएक्शन देखे के,,,,जानवी को कुछ राहत मिली और उसने सीमा काकी के तरफ देखा तो उन्होंने भी जानवी को देख के बोली हा बेटा तुम ईशा को हमे दे दो,,,,मैं इसे नहला दुगी और अच्छी से तैयार करके दूध पिला के सुला भी दुगी,,,तुम जाओ और जल्दी से आके तैयार होके आओ,,,सुबह के ८ बज गए है बेटा।।।।
तुम्हे नाश्ता भी करना होगा ना,,,,कब तक किसी ने भी नाश्ता नही किया है इसलिए जाओ जल्दी,,,सीमा काकी की बात सुन के,,,जानवी ने भी हामी भरी और ईशा को उनके गोद मै देके,,,, वाहा से कमरे मैं चली गई।।।।
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वोही शिवांश भी जानवी के पीछे पीछे,,,कमरे मैं आया लिविंग हॉल मैं बैठे जब चारो ने उससे कमरे मैं,,,जाते देखा तो घूर के निहार को देख ने लगे।।।
तभी निहार ने भी हकलाते हुआ बोला अबे,,,यार मैने उससे बोला है आ जाएगा,,,इतना बोल वोह चुप हो गया,,,करीब आधे घंटे बाद भी जब शिवांश अपने कमरे से नही निकला तो,,,मिहिर बोला अब मुझसे और इंतजार नही होगा मैं ही जाके बुला के लाता हु,,,,
तभी तुषार बोला अरे रुक मैं,,,भी आता हु इतना बोल वोह भी उठ गया और उसके पीछे पीछे,,,,एक एक कमरे निहार और अंगद भी उठते हुए बोला,,,रुको हम भी आते है वाहा से डायरेक्ट,,,स्टडी रूम चले जायेगे।।।।
इतना बोल सब शिवांश के कमरे के बाहर आके खड़े हो गए,,,,तभी निहार ने तुषार को देख के बोला,,,चल नोक कर,,,,
अरे मैं क्यू करू मुझे मरना थोड़ी है भाई के हाथ से,,,,यह मिहिर करेगा चल छोटे शेर कर नोक,,,,तुषार ने मिहिर को देख के बोला,,,,
अरे मैं क्यू मैं एक तो मैं तुम सब को यहां लेके,,,, भी आया और उप्पर से मुझे ही शेर के मुंह मैं हाथ,,,,डालने को बोल रहे हो,,,,सॉरी पर मैं नोक नही करुगा।।।।।
अरे तो क्या तुम सब यहां पर,,,भाई के कमरे का दरवाजा देखने आए हो क्या,,,निहार ने झुंझलाते हुए बोला बोला।।।।
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तभी तीनों ने एक साथ अंगद के तरफ देखा,,,,और एक डेविल स्माइल देने लगे,,,,अंगद ने जब उन्हे देखा और उसके चेहरे कर स्माइल को तो वोह,,,उन सब को देख के बोला क्या,,,मैं बिलकुल भी नही नोक कर रहा इतना बोल अंगद वाहा से जाने को,,,,ही हुआ की,,तभी तीनो ने उससे पकड़ लिया।।।।
अबे सालो छोड़ो मुझे मैं बिलकुल भी यह,,,,भी करुगा साले खुद तो बच के निकल जायेगे मुझे फसा जायेगे,,,नही अब बिल्कुल भी नही ।।।।
अरे अरे भाई बस एक बार,,,नोक कर दो तुषार ने बोला,,
चल हट पहले उतार मेरे पीट से वरना अभी,,,,उप्पर से नीचे गिरा दुगा,,अंगद ने बोला।।।।।
शिवांश के कमरे मैं शिवांश,,,मैं आया ही था की तभी उसने जानवी का हाथ पकड़ लिया,,,और उससे अपने तरफ खीच लिया।।।
अचानक से ऐसे खींचे जाने से,,,जानवी के मुंह से एक छींक निकल गई,,,, अह्ह्ह्ह्ह छोड़िए मुझे और इतना बोल अपनी बड़ी बड़ी आखें कर शिवांश को देखन लगी,,,,वोही शिवांश भी उसकी उन हरी आखों मैं ही देख रहा था।।।।
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बाहर खड़े जब सब लोगो के कानो मैं,,,जानवी की छींक सुनाई दी तो सब रुक गए,,, और एक दूसरे को देखने लगे,,,तभी तुषार झट से अंगद के पीट से उतर के शिवांश के दरवाजे पर अपना कान,,,लगा दिया,,,,
और उसके पीछे एक एक कर,,,,अपना अपना कान लगा दिए,,,,तभी निहार ने उन सब को देख के बोला अरे पागलों जैसी हरकत क्यू कर,,,,रहे हो,,,
ऐसे ही किसी की privacy मैं कान लगा,,,के नही सुनते है,,,,तीनो ने निहार को देखा और फिर मुंह बना के,,,फिर से दरवाजे पर खड़े हो गए।।।।
अबे नालायको चलो यहां से,,,,लेकिन निहार की तोह कोई। बात ही नही सुन रहा था।।।
तभी तुषार ने अंगद और मिहिर को देख के बोला,,,,तुम लोग को क्या लगता है भाभी चिलाओ क्यू होगी,,,,
तभी मिहिर बोला आई think यह छींक किसी और मामले की है,,,,
हा चल बे तुझे बड़ा पता है,,,निहार ने तीनो को देख के बोला,,,
तभी मिहिर ने हस्ते हुए बोला,,,,तुम्हे बड़ा पता है जैसे ना जाने तुम्हारी कितनी ही गर्लफ्रेंड हो,,,एक तक तुम्हारी एक भी गर्लफ्रेंड नही रही,,,,और ना ही भाई की दोनो के दोनो ही अनरोनेंटिक हो,,,,तो क्या खाक रोमांस के बारे मैं पता होगा,,, आप लोगो को,,,आपको और भाई को तो रोमांस की क्लास लेनी चाहिए,,,,इतना बोल मिहिर हसने लगा,,,वोही उसके साथ तुषार और अंगद भी हसने लगे।।।।
तभी निहार ने अंगद को देख के बोला,,,,तू क्यू दात दिखा रहा है तू भी आज सिंगल ही है,,,,
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖हा तो क्या हुआ,,,,लेकिन मेरी गर्लफ्रेंड तो थी ना,,,,तुम्हारी तो आज एक एक गर्लफ्रेंड भी नहीं रही अंगद ने बोला।।।।
हा तो क्या हुआ गर्लफ्रेंड थी तो,,,,तू भूल रहा है उसने तुझे क्यू छोड़ा,,,,इतना बोल निहार हसने लगा।।।।
वोही अंगद का मुंह बान गया,,,
और तीन के तीनो,,,फिर से दरवाजे पर खड़े हो गए।।।।
तभी शिवांश ने कमरे मैं जानवी की आखों मैं देख के बोला मुझे,,,तुमसे कुछ बात करनी है।।।
हा ठीक है लेकिन उससे पहले आप मुझे छोड़िए तो,,,,सही। जानवी ने शिवांश के बाहों से छूटते हुए बोली।।।।
तभी शिवांश ने जानवी को अपने बाहों मै,,,,और कसते हुए बोला क्यू तुम्हे मेरी बाहों मै,,,,रहने से क्या प्रोब्लम है में तुम्हारा पति हु और तुम्हारे जिंदगी पर ऐसे ही रहना है,,,,तो आदत डाल लो,,,
इतना बोल के शिवांश ने जानवी को और कश के पकड़ लिया,,,,जिसे जानवी की हल्की से छींक निकल गई,,,तभी शिवांश के कमरा अचानक से खुला और चारो एक के ऊपर एक आके,,,गिर गए।।।।
जानवी ने जब यह देखा तो जल्दी से,,,शिवांश से अलग हो गई और अपनी नजरे नीचे करके खड़ी हो गई,,,
वोही हमारे चारो आदिवासियों जल्दी से अपनी जगह,,,खड़े हो गए तभी शिवांश ने घूर के उन्हे देखा जिसे देख के चारो के,,,चारो जल्दी से पलट गए और तभी,,,निहार ने बोला ओह सॉरी भाई लगता है गलत टाइम पर आ गए,,,, इतना बोल निहार वाहा से भागा गया,,,
।
उसको जाता देखे के अंगद भी जल्दी से चला गया,,,तभी मिहिर ने शिवांश को देख के बोला,,,, सब तो चले गए लेकिन भाई भाभी छिलाई क्यू,,,,इतना बोल मिहिर ने जानवी को देख के बोला क्या हुआ भाभी,,,,
अबे चल ना क्या पूछ रहा है खुद तोह मरेगा और,,,,और हमे भी मरेगा।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
वोही जब जानवी ने मिहिर का सवाल सुनी तो वोह उससे,,,,अब क्या जवाब दे समझ ही नही आ रहा था,,,तभी शिवांश ने अपने गुस्से से भरी आखों से मिहिर को देख के बोला,,,,रुक मैं बताता हु इतना बोल शिवांश ने अपने एक कदम आगे बढ़ाया ही था,,,की तुषार ने खीच के मिहिर को बाहर ले गया। ।।।।।।।।
लेकिन तभी मिहिर ने फिर से,,,,कमरे के अंदर झटके हुए बोला आप लोग कंटिन्यू कीजे और बाद मैं,,,भाई आप स्टडी रूम आ जाना इतना बोल,,,मिहिर वाहा से नो दो,,,११ हो गया।।।
वोही मिहिर की बात सुन के,,,,जानवी के गाल हल्के गुलाबी हो गए थे,,,जानवी जल्दी से वाहा से जाने ही हुए की शिवांश ने जल्दी से उसका,,,हाथ पकड़ लिया,,,और जानवी की पीछे से ही,,,पकड़े हुए बोला,,,,चारो को बात का और हरकत का बिलकुल बुरा मत मन ना,,,,चारो दिल से बहुत अच्छे है।।।।।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖आखिर क्यू की है जानवी और शिवांश ने शादी और क्या अब वोह एक मां भाभी और बीवी का कर्ताव निभा पाएगी और जब ईशा की और जानवी की सच्चाई सब के सामने आयेगी तो क्या रिएक्शन होगा सब का क्या वोह लोग जानवी और ईशा को एक्सेप्ट कर पाएंगे।।।।जानने के लिए स्टोरी के साथ बने रहिए,,,,
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह
स्टोरी अच्छी लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
और हा स्टोरी को लाइक करना ना भूले,,,
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
हेलो दोस्तो आई होप की आप लोगो की,,,चैप्टर ९ का एपिसोड अच्छा लगा होगा,,,तो अब आगे बड़ते है चैप्टर १० की एपिसोड पर❤️❤️❤️❤️
इतना बोल के शिवांश ने जानवी को और कश के पकड़ लिया,,,,जिसे जानवी की हल्की से छींक निकल गई,,,तभी शिवांश के कमरा अचानक से खुला और चारो एक के ऊपर एक आके,,,गिर गए।।।।
जानवी ने जब यह देखा तो जल्दी से,,,शिवांश से अलग हो गई और अपनी नजरे नीचे करके खड़ी हो गई,,,
वोही हमारे चारो आदिवासियों जल्दी से अपनी जगह,,,खड़े हो गए तभी शिवांश ने घूर के उन्हे देखा जिसे देख के चारो के,,,चारो जल्दी से पलट गए और तभी,,,निहार ने बोला ओह सॉरी भाई लगता है गलत टाइम पर आ गए,,,, इतना बोल नि तू टीहार वाहा से भागा गया,,,
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उसको जाता देखे के अंगद भी जल्दी से चला गया,,,तभी मिहिर ने शिवांश को देख के बोला,,,, सब तो चले गए लेकिन भाई भाभी छिलाई क्यू,,,,इतना बोल मिहिर ने जानवी को देख के बोला क्या हुआ भाभी,,,,
अबे चल ना क्या पूछ रहा है खुद तोह मरेगा और,,,,और हमे भी मरेगा।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
वोही जब जानवी ने मिहिर का सवाल सुनी तो वोह उससे,,,,अब क्या जवाब दे समझ ही नही आ रहा था,,,तभी शिवांश ने अपने गुस्से से भरी आखों से मिहिर को देख के बोला,,,,रुक मैं बताता हु इतना बोल शिवांश ने अपने एक कदम आगे बढ़ाया ही था,,,की तुषार ने खीच के मिहिर को बाहर ले गया। ।।।।।।।।
लेकिन तभी मिहिर ने फिर से,,,,कमरे के अंदर झटके हुए बोला आप लोग कंटिन्यू कीजे और बाद मैं,,,भाई आप स्टडी रूम आ जाना इतना बोल,,,मिहिर वाहा से नो दो,,,११ हो गया।।।
वोही मिहिर की बात सुन के,,,,जानवी के गाल हल्के गुलाबी हो गए थे,,,जानवी जल्दी से वाहा से जाने ही हुए की शिवांश ने जल्दी से उसका,,,हाथ पकड़ लिया,,,और जानवी की पीछे से ही,,,पकड़े हुए बोला,,,,चारो को बात का और हरकत का बिलकुल बुरा मत मन ना,,,,चारो दिल से बहुत अच्छे है।।।।।
****अब तक अपने पड़ा***
****अब आगे***
लेकिन जानवी तो जैसे कुछ सुन ही,,,नही रही हो वोह तो शिवांश के ऐसे पूछे से पकड़ने से shock हो गई,,,उसकी दिल की धड़कने तेजी से,,,बड़ने लगी थी,,,और उसके पूरे गाल लाल हो चुका ता।।।।
शिवांश ने भी जानवी की बड़ती हुईं धड़कनों को,,,महसूस कर लिया था,,,जिसे सुन के शिवांश के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई,,,और ।।।।।
तभी शिवांश ने जानवी को छोड़ते हुए,,,बोला जाओ जाके नहा लो,,,,,तुम्हारे लिए और ईशा के लिए कपड़े पहले ही अरेंज करके रखा हुआ तो,,,कबाड़ से ले लेना,,,,इतना बोल,शिवांश ने जानवी को छोड़ा,,,,शिवांश के छोड़ते ही जैसे जानवी को पंख लग गया हो,,,,और वोह तेजी से वोह से भाग गई
शिवांश ने एक नजर जानवी को ऐसे जाता हुआ,,,देख के मुस्कुरा के वाहा से स्टडी रूम के तरफ,,, बड़ गया।।।
बाथरूम मैं जानवी ने जल्दी से बाथरूम का दरवाजा बंद,,,करके दरवाजे से साट के खड़ी हो गई,,,और गहरी गहरी सास लेने लगी,,,
यह क्या था उन्होंने मुझे,,,,इस तरह से क्यू पकड़ा हुआ,,,था और उनके पकड़ने से मेरी दिल की धड़कने क्यू बड़ने लगी इतना बोल जानवी ने अपने,,,,सीने पर हाथ रख लिया,,को तेजी से धड़क रहा था,,,,और धीरे धीरे चल के वाशरूम के बने मिरर के सामने खड़ी हो गई,,,
तभी जानवी ने देखा की उसके गाल,,,लाल हो चुके थे,,,जानवी ने जल्दी से अपने चेहरे पर हाथ,,,रख के देखा और फिर जल्दी से नल चालू कर के मुंह धोने लगी।।।।
लेकिन फिर भी उसके गाल,,,अब भी गुलाबी ही थे,,,यह देख जानवी ने फिर से नल,,,चालू किया और मुंह पर लगातार पानी,,,डालने लगी।।।।
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***स्टडी रूम***
तुषार, निहार माहिर,अंगद चारो के चारो,,,स्टडी रूम के सोफे पर बैठे हुए थे,,,और एक दूसरे को देख रहे थे की तभी स्टडी रूम का दरवाजा खुला।।।।
और तुषार, निहार माहिर,अंगद चारो के चारो,,,स्टडी रूम के दरवाजे के तरफ देखा,,,जहा से शिवांश आ या और सिंगल सोफे,,,,पर जाके बैठे गया।।।।।।
तभी निहार ने बोला,,,भाई यह सब क्या चल रहा है क्या आप हमे बतायेगे,,।।।
हा भाई पहले तो अपने बोला की,,,अपने शादी कर ली,,,फिर आप ने बोला की वोह बच्ची आपकी है,,,तो भाभी ने ऐशा क्यू बोला की,,,बच्ची उनकी नही उनकी बहन की है।।।।तुषार ने शिवांश को देख के बोला।।।।
तभी मिहिर ने तपाक से बोला,,,कही ऐशा तो नही है भाई की आप का भाभी के बहन के साथ,,,रिलेशन हो,,,और वोह बच्ची आपकी हो,,,,मिहिर के जैसे बोलने पर शिवांश उससे घूर घूर के गुस्से से उससे देखने लगा,,,,
तभी मिहिर ने अपने उप्पर और तीन लोगो की नजर,,,,महसूस की मिहिर ने अपनी गर्दन घुमा के राइट एंड लेफ्ट साइड देखा,,,जहा अंगद,,तुषार,,निहार उसे ही गुस्से घूर के देख रहे थे।।।
जैसे के रहे हो जब भी खोलेगा,,,,बकवास ही करेगा,,,साला मुंह बंद नही रख सकता है क्या,,,मिहिर ने भी सब को देखा और फिर हकलाके बोला,,,अरे मैं बस यह बोल रहा था may be।।।।।।
तभी शिवांश बोला शर्ट अप सब के सब,,,चुप हो जाओ तुम्हे क्या मैं ऐशा लगता हु,,,,की किसी लड़की के इज्जत के साथ खिलवाड़ karuga,,,,,
फिर मिहिर ने बोला नही भाई मेरे बोलने का वोह मतलब,,,,बिलकुल भी नही था,,,,
हा तुम्हारा क्या मतलब था क्या नही उससे बाद मैं, मिहिर बाद मैं देखता हु,,,बहुत बोलने लग गए हो तुम,,,लगता है काम नही है अब तुम्हे,,,,तभी फालतू की चीज सोचने लगे हो,,,,
अब किसी के भी मुंह से एक शब्द नही,,,निकलना चाहिए वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा,,मैं एक थप्पड़ और टीम लोगो को पीटने से पहले एक बार,,,भी नही सोचूगा।।।
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शिवांश की बात सुन के सब चुप हो गए,,,और शिवांश को देखने लगे।।।।
तभी शिवांश ने एक गहरी सास ली,,,और कुछ देर रुकने के बाद बोला,,,,तुम सब को याद है मैं और अंगद,,,तीन महीने पहले शिमला,,,एक मीटिंग के लिए गए थे,,,शिवांश के इतना बोलने पर सब ने एक साथ हा मैं,,,अपना सिर हिला दिया।।।।
जिसे देख के शिवांश ने,,,अंगद को देख के बोला अंगद तुम्हे याद है जब हम होटल से निकल,,,रहे थे तब हम दोनो पर किसी ने अटैक किया था ।।।।।
शिवांश के बात आप अंगद ने हा मैं अपना,,,सिर हिला दिया।।।
तो तुम्हे यह भी याद होगा की उस फायरिंग,,,से मुझे एक लड़के नही बचाया था।।।।
जिस की बात पर अंगद ने भी हा,,,मैं बोला हा मुझे याद है उसका,,,,नाम कुछ🤔🤔🤔🤔इतना बोल अंगद सोचने लगा।।।।
वेद वेद राय नाम था उसका,,,,शिवांश ने बोला।।।
तभी तुषार बोला हा भाई,,,अपने इसके बारे मैं बताया था,,,,और एक बार हम सब भी तो मिल चुके है ना वेद से इतना बोल तुषार सब को देखने लगा। ।।।।।
लेकिन भाई वेद का आपके,,,शादी भाभी और बच्ची से क्या कनेक्शन है,,,निहार ने शिवाश को देख के बोला।।।
शिवांश ने सब के तरफ देख के बोला,,,जानवी वेद की छोटी बहन है,,,,
शिवांश की बात सुन के सब shocking होके,,,शिवांश को देखने लगे।।।।
तभी मिहिर ने बोला वोह तो ठीक है भाई पर आपको भाभी शिमला से ,,,दिल्ली मैं कैसे मिली,,,और अपने उन से शादी कब की और वोह बच्ची किसकी की है ।।।
शिवांश ने सब को देखा और बोला,मैं स्टार्टिंग से बोलता हु ध्यान से सुनो,,,
***फलशबैक***
३ महीने पहले जब वेद ने हमे बचाया था तब वेद को हमे बचाते हुए,,,,चोट लग गई थी,,,,
मैने और अंगद ने उससे हॉस्पिटल मैं एडमिट करवा दिया,,,था और वेद के फोन से हमने जो भी पहले डायल लिस्ट मैं नाम था उससे कॉल डायल किया तोह,,,कॉल वेद की बड़ी बहन विद्या ने उठाया जी जानवी से बड़ी और वेद से छोटी थी,,,,
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उसका नाम विधा था,,,उसने कॉल उठाया और अंगद ने उससे सब कुछ बता दिया था,,,,और कुछ ही देर मैं जानवी और विधा वाहा पर भागते हुए आ गई थी,,,उस वक्त विधा ९ मंथ प्रेगनेंट थी,,,,
दोनो ही वेद के कंडीशन सुन के,,,भागते हुए हॉस्पिटल आ गए थे तब मैने पहली बार जानवी को देखा था,,,,पर उसने मुझे नही देखा वोह उस waqt वेद को लेके,,बहुत परेशान थी और दोनो ही बस रोए जा रही थी,,,,वेद के मां पापा इस दुनिया नही है उसकी बस दो बहन ही है,,,जो उसकी जान है।।।।।
और मैंने और अंगद उस वक्त चेहरे पर मास पहना हुआ था,,,इसलिए दोनो ने हमे नही देखा हम उनके सामने भी गए,,,पर हमने चेहरे से मास्क नही हटाया था,,,अंगद ने उन्हे वोही पर रखे सोफे पर बैठा दिया,,,और शांत कराने लगा।।।
कुछ देर बाद वेद को ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा,,,और कुछ घंटे मैं उससे होश आ चुका था,,,,तभी जानवी और विधा दोनो ने जल्दी से जाके वेद से मिले,,,दोनो ही वेद को इस तरफ देख के रोने लगी थी,,,लेकिन फिर वेद के बोलने पर दोनो चुप हो गई और,,,उसका एक एक हाथ पकड़ के वोही बैठी रही,,,।।।
कुछ देर बाद वेद ने जानवी को देख के,,,विधा को लेके घर भेज दिया था पहले तो जानवी जाना नही चाहती,,,थी पर विधा की हालत देख के वोह मान गई और बाद मैं आने का बोल विधा को लेके,,, वाहा से चली गई और
उनके मिलने के कुछ देर बाद ही,,,मैं और अंगद वेद के कमरे मैं गए,,,और अपना मास्क निकल के शिवांश ने वेद को देख के बोला,,,,अपने जान पर खेल के तुमने मेरीजान बचाने के लिए thank you ।।।।
पर वेद ने शिवांश को देख के बोला की आप मुझे thank you ना बोले आपकी जगह कोई और भी होता तो मैं उसकी मदद करता ।।।
शिवांश ने वेद को देख के बोला,,,मैं तुम्हे पैसे देखे छोटा नही करगा पर कभी भी तुम्हे किसी भी चीज जी जरूरत होगी,,,मैं तुम्हे वोह चीज जरूर दुगा,,,पर शिवांश की बात सुन के वेद ने शिवांश से बोला,,,,नही नही मुझे आप से कुछ भी नही चाहिए।।।।।
वेद की यही बात शिवांश के दिल छू लिया था,,,,उसके जगह कोई और होता तो वोह शिवांश को देख के ना जाना,,,क्या क्या मगता पर वेद ने उससे कुछ भी नही मागा।
कुछ देर बाद करने के बाद शिवांश और अंगद ,,,,, वाहा से चले गए जितने दिन भी वेद हॉस्पिटल रहा शिवांश रोज उससे मिलने जाता था,,,,और उसकी मुलाकात कभी कभी जानवी से भी हो जाति थी,,,,जिसे देख पता नही क्यू शिवांश कही खो ही जाता था,,,,शायद इस ही पहली नजर का प्यार बोलते है यह सोच शिवांश मुश्कुरा दी,,,,और ऐसे ही करके वेद और शिवांश की अच्छी दोस्ती हो चुकी थी,,,,
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शिवांश ने वेद को एक वादा किया था की,,,जब भी उससे मेरी जरूरत होगी वोह बेझिजक मुझे बता सकता है,,,वोह मुझे बस एक कॉल या,,,मैसेज करे मैं उसकी मदद जरूर करुंगा।।।।
***फ्लैशबैक एंड**
उसके बाद वेद और मेरी हर रोज एक बार ना,,,एक बार कॉल या मैसेज मैं बात हो,,,जाती थी।।।।
और १५ दिन पहले ही,,,हमे वेद के कॉल आया था और उसने मुझे कॉल करके बोला था की,,,उससे मेरी कभी भी जरूरत पड़ सकती है,,,तो मैं उसकी मदद करू।।।
और उसने मुझे विधा के मौत,,,के बारे मैं बताया,,,यह सुन के मैं मैं १० दिन पहले शिमला गया हुआ था,,,वेद से मिलने।।।,
उस वक्त जानवी वाहा पर मोजूद नही थी,,,और अपने कमरे मैं ईशा को संभाल रही थी,,,और उस वक्त वोह भी टूट चुकी थी।।।।।
वेद से जब मैं मिलने गया था,,,,तब वेद ने मुझे विधा के सुसाइड के बारे मैं बताया,,,पर उससे शक था की,,यह कोई सुसाइड नही है,,,,क्यू की विधा इतनी कमज़ोर भी थी की वोह सुसाइड कर ले,,,वोह भी अपनी २ महीने की बच्ची को अकेले इस दुनिया मैं छोड़ के,,,,वेद को पूरा यकीन था की हो ना हो उसकी बहन के,,,,साथ कुछ न कुछ जरूर हुआ है,,,और यह सुसाइड नही मर्डर है,,, वोह अपनी बहन के मौत के कातिलों को सजा देना चाहता है,,,,
तो मैंने उससे कहा मैं मैं इस मैं उसकी,,,पूरी मदद करगा लेकिन वेद बहुत ही खुदर लड़का है उसने,,,मेरी मदद लेने से मना कर दिया,,,और बोला की वोह अपनी बहन के कातिलों को खुद अपने दम पर,,,सजा दिला के रहेगा,,,और कभी अगर उससे मेरी मदद की जरूरत हो तो,,,,वोह उससे खुद कॉन्टैक्ट करेगा।।।
उसके बाद मैने भी ज्यादा कुछ नही बोला,,, और वाहा से चला गया बस मैने वेद को इतना बोल दिया था की वोह जब चाहे मुझे कॉल करेगा तो,,,मैं हमेशा उसकी help के लिए रेडी रहुगा।
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तो मैंने भी उससे बोल दिया था की उससे जब,,,भी मेरी जरूरत हो एक मैसेज कर दे,,,और फिर मैं वाहा से उठ के वापस दिल्ली आ गया,,,,
और ३ दिन पहले,,,,वेद मैं मुझे एक मैसेज ड्रॉप किया था की मैं जानवी की जान खतरे मैं है और मैं उससे बच्चाऊ,,,और जब मैने मैसेज देखा तब मैने शिमला मैं जो मेरे आदमी थे,,,उन्होंने जानवी के घर से निकलने से लेके ट्रेन,,,मैं बैठने तक और उसका दिल्ली तक पौहुचेने तक की,,,सारी खबर मुझे मिल रही थी।।।।
तभी अंगद बोला,,,लेकिन शिवांश कैसा भी क्या हो गया की जानवी भाभी को,,,शिमला छोड़ के दिल्ली आना पड़ा?????,,,जरूर इसके पीछे कोई बड़ी वजह होगी,,,????.
मुझे बस इतना पता चला है की जिस जानवी,,,घर से भाग के दिल्ली आई थी उसी दिन वेद,,,को घर मैं आग लगने के वेजेस मौत हो गई,,,,और जिस लड़की ने जानवी को ट्रेन मै बैठाया था,,,,उस दिन उसका भी एक्सीडेंट हो गया था।।।।।।
पर मुझे नही लगता की यह दोनो,,,चीज एक हादसा है,,,इसके पीछे जरूर कोई ना कोई साजिश है,,,
इस बारे मैं मुझे भी अभी तक कोई,,,आइडिया नही है लेकिन मैं जल्द से जल्द इसका पता,,,लगा लूंगा।।।।
शिवांश ने कितना बोला की था की,,,तभी उससे स्टडी रूम के बाहर टेबल पर कुछ गिरने की आवाज आई,,,एक सुन सब ने अपनी नजर उठा के दरवाजे पर देखा जहा,,,,जानवी खड़ी अपने आखों में आसू लिए शिवांश को ही देख रही थी।।।
शिवांश ने जब जानवी को देखा तो,,,,उसने कश के अपनी आखें बंद की,,,,और कुछ देर बाद खोल के सब को देखा तो सब अपनी अपनी जगह से उठ,,,गए और स्टडी रूम से बाहर चले गए,,,,सब के जाने के बाद शिवांश उठा और,,,जानवी के पास जाके उसके हाथ को पकड़ के अपने तरफ खींचा जिसे जानवी,,,शिवांश के सीने से जा लगी।।।।।
और तभी शिवांश ने स्टडी रूम का दरवाजा बंद,,,,कर दिया,,,और वोही दीवाल से सट के खड़ा रहा,,जानवी शिवांश के सीने से लग के,,,रोए जा रहीं थी,,,,
उसके आसू तो जैसे रुकने का नाम,,, ही ना ले रहे हो।।।
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तो दोस्तो सच जानने के बाद जानवी का क्या रिएक्शन होगा क्या वोह वापस शिमला चली,,,जायेगी या दिल्ली मैं रह के अपने भाई बहन के मौत का बदला लेगी,,,क्या होगा इस कहानी मैंजानने के लिए स्टोरी के साथ बने रहिए,,,,तेरी सादगी मैं दिल कुर्बान
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप लोगो को यह स्टोरी अच्छी लग रही
हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
और हा स्टोरी को लाइक करना ना भूले,,,
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️
हेलो दोस्तो आई होप की आप लोगो की,,,चैप्टर १० का एपिसोड अच्छा लगा होगा,,,तो अब आगे बड़ते है चैप्टर ११ की एपिसोड पर
पर मुझे नही लगता की यह दोनो,,,चीज एक हादसा है,,,इसके पीछे जरूर कोई ना कोई साजिश है,,,
इस बारे मैं मुझे भी अभी तक कोई,,,आइडिया नही है लेकिन मैं जल्द से जल्द इसका पता,,,लगा लूंगा।।।।
शिवांश ने कितना बोला की था की,,,तभी उससे स्टडी रूम के बाहर टेबल पर कुछ गिरने की आवाज आई,,,एक सुन सब ने अपनी नजर उठा के दरवाजे पर देखा जहा,,,,जानवी खड़ी अपने आखों में आसू लिए शिवांश को ही देख रही थी।।।
शिवांश ने जब जानवी को देखा तो,,,,उसने कश के अपनी आखें बंद की,,,,और कुछ देर बाद खोल के सब को देखा तो सब अपनी अपनी जगह से उठ,,,गए और स्टडी रूम से बाहर चले गए,,,,सब के जाने के बाद शिवांश उठा और,,,जानवी के पास जाके उसके हाथ को पकड़ के अपने तरफ खींचा जिसे जानवी,,,शिवांश के सीने से जा लगी।।।।।
और तभी शिवांश ने स्टडी रूम का दरवाजा बंद,,,,कर दिया,,,और वोही दीवाल से सट के खड़ा रहा,,जानवी शिवांश के सीने से लग के,,,रोए जा रहीं थी,,,,
उसके आसू तो जैसे रुकने का नाम,,, ही ना ले रहे हो।।।
***अब तक अपने पड़ा***
***अब आगे***
शिवांश ने भी जानवी का दर्द समझते हुए,,,उससे जी भर रोने दिया,,,कुछ देर बाद शिवांश को जब महसूस हुआ की जानवी अब थोड़ी से शांत,,, हो गई है उसने जानवी को अपने गोद मै उटाया ।।।।।
और स्टडी रूम के सोफे पर जाके बैठ गया,,,और जानवी को अपने गोद मै बैठा लिया,,,
जानवी ने अपनी नम आखों से शिवांश को देखा,,,जो की उससे ही देख रहा था शिवांश ने अपने,,,हाथ आगे बड़ा के जाने के गालों पर रखे उसके आसू को साफ,,,कर दिया।।।
यह देख जानवी को और रोना आ गया,,,और उसने झट से शिवांश के गर्दन मैं अपना चेहरा छुपा के रोने लगी,,,वोही शिवांश ने जानवी के,,,पीट को हल्के हल्के से रफ करते हुए बोला shhhhh शांत हो जाओ,।।।।
तुम अगर इस तरफ से रो के तबियत खराब,,,करोगी तो ईशा को कोई संभालेगा,,,
देखो मुझे बच्चे पालने का एक्सपीरियंस बिलकुल भी नही,,,है मैं तो अभी अभी नया नया पापा बना हु,,,,जानवी ने जैसे ही शिवांश के मुंह से यह बात सुनी,,तो शिवांश के गर्दन से अपना चेहरा निकल के उसको,,,देखने लगी।।।
और फिर शिवांश को देख के बोली,,,,मैं यहां पर रो रही हु,,और आप है की मुझसे मजाक कर रहे है,,,जानवी ने घूर के शिवांश को देखे के बोला।।।
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अरे अरे मैं मजाक कहा कर रहा। हु,,,सही ही बोल रहा हु थे जिसे पलने कर मुझे एक्सपीरियंस grow up हो।।।।
हा तोह मुझे कॉन सा बच्चा पालना आता है,,,,जानवी ने रूवाशी आवाज मैं बोला जिसे सुन के शिवांश ने मुस्कुरा के,,,जानवी को देखा और बोला कोई बात नही अब ईशा है ना हमारे पास,,,दोनो मिल के उससे पलेगे फिर तोह हमे एक्सपीरियंस हो जायेगा,,,ना
और फिर बाद मैं जब हमारे बच्चे होगे तो,,,उससे पालने मैं हमे कोई भी प्रोब्लम नही होगी,,,,शिवांश के बात पर जानवी ने शर्माते हुए,,बोली धत कुछ भी बोलते है है,,,जानवी के गाल शर्म से हल्के गुलाबी हो गए थे।।।
जिसे देख के शिवांश ने अपने मन मैं बोला,,चलो अच्छा है कम से कम अभी के लिए तो उसके माइंड,,,दूसरी जगह फिसल गया वरना पता नही मुझे,,,इस रोने हुए कैसे संभाल पता।।।।
शिवांश अभी सोच ही रहा था की,,,तभी उससे जानवी की फिर से रोने की आवाज सुनाई दी,,,जिसे सुन के शिवांश अपने खयालों को झटक के,,उसको देखने लगा।।
जानवी को इस तरफ रोता हुआ देखे के,,,शिवांश के दिल मैं अजीब से बेचैनी हो रही थी,,,,तभी शिवांश ने जानवी के चेहरे को अपने हाथ मैं भर के बोला,,,क्या हुआ बोलो।।।
अब क्यू रो रही हो,,,जानवी ने शिवांश की बात सुनी तो उससे देख रोते हुए बोली,,,क्या सच मैं भाई मुझे छोड़ के चले गए,,,वोह मुझे छोड़ के कैसे जा सकते है उन्होंने मुझे कहा था की वोह,,,मुझे लेने आयेगे।।।।
क्या वोह मुझे लेने नही आयेगे,,,जानवी की पूरी बात सुन के शिवांश ने जानवी को देख के बोला,,जानवी पहले तुम शांत हो जाओ और मेरी बात को ध्यान से सुनो,,,,
इतना बोल शिवांश ने जानवी के आसू,,,साफ किए और जानवी की आखों में देख के बोला,,,जानवी मैं तुमसे बिलकुल भी झूट नही बोलुगा या ना ही कोई झूठा दिलासा और उम्मीद देना चाहूंगा देखा मैने मेरे,,,आदमियों से पता लगाया था,,,
और मुझे यह बात पता चली है की,,,तुम्हारे घर मैं आग लगने से वेद की मौत हो गई है,
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इतना सुनते ही जानवी फिर से रोने लगी,,,यह देख के शिवांश ने जानवी को अपने सीने से लगा लिया,,,और उसको पीट को सहलाने लगा।।।
और फिर जानवी को देख के बोला,,,जानवी यह वक्त ऐसे रोने का बिलकुल भी नही है,,,क्या तुम नही जान ना चाहती हो तुम तुम्हारी बहन की मौत कैसे हुए,,,,और तुम्हारे भाई को किसने मेरा है।।।
शिवांश की बात सुन के जानवी ने हा मैं,,,अपना सिर हिला दिया,,,यह देख शिवांश ने जानवी के आसू साफ कर बोला तो बस अब से तुम,,,रोना बिलकुल भी नही हम जल्द से जल्द विधा और वेद के कातिलों को सबोतो के साथ,,,सजा देगे।।।
नही उन लोगो को आप नही मैं सजा दुगी,,,जिस लोगो ने मुझसे मेरा सब कुछ चीन लिया,,,मैं उनसे उनका सूक चैन सब छीन लुंगी मैं मेरी दी और भाई के कातिलों,,,को खुद सजा दुगी।।।।
जैसे ही शिवांश ने यह सुना तोह एक पल के लिए,,वोह जानवी को देखते ही रह गया,,,जानवी की आखों मैं गुस्से की लहर और उन लोगो से बदला,,,लेना का जुनून साफ नजर आ रहा था।।।
जिसे देख के शिवांश ने जानवी को बोला ठीक,,,है अगर तुम खुद बदला लेना चाहती हो तोह,,,मैं तुम्हे बिलकुल भी नही रोकूगा लेकिन मैं,,,हर कदम पर तुम्हारे साथ रहुगा,,,
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शिवांश के ऐसे बोलने पर,,,जानवी उसको देखने लगी दोनो ही एक दूसरे मैं आखों मैं जैसे खो से गए हो,,,,जानवी एक टक शिवांश के आखों में देख रही थी,,,,कुछ देर के बाद जानवी जब शिवांश ने अलग होने लगी तोह शिवांश ने कस के जानवी,,,को कमर से पकड़ दिया और,,,उसके चेहरे को देखने लगा।।।
जानवी के बाल इस वक्त गीले थे और और उसने सिर्फ,,,अपने माग मैं सिंदूर और गले मैं मंगलसूत्र ही पहना था तब भी वोह,,,और इस वक्त जानवी ने येलो कलर की साड़ी पहनी हुई थी,,,बहुत सुंदर लग रही थी।।।
शिवांश तो बस जानवी मैं खोता हुआ,,,उसके चेहरे के तरफ झुकता चला जा रहा था,,,जिसे महसूस करके जानवी की दिल की धड़कने तेजी से बड़ने लगी,,,,जानवी अपनी नजर इधर उधर करके देखने लगी,,,की तभी शिवांश ने जैसे ही जानवी के होठ पर अपने,,, होठ रखे ही थे की तभी।।।
कमरे के अंदर,,,मिहिर दम दबा के आ गया और सामने का नजारा देखे के उसकी आखें बड़ी,,,,बड़ी हो गई और वोह जल्दी पलट गया।।।
वोही जैसे ही शिवांश और जानवी ने मिहिर को स्टडी रूम के अंदर देखा,,,जानवी झट से शिवांश के गोद से उत्तर गई और वोही शिवांश मिहिर,,,घूर के देखने लगा।।।
तभी मिहिर ने जल्दी बोला i m sorry भाई मुझे नही पता था,,,इतना बोल मिहिर वाहा से जाने को ही हुआ था की,,,तभी शिवांश ने उससे रोक के बोला रुक उधर ही,,,शिवांश के ऐसे बोलने पर मिहिर अपनी जगह पर रुक गया।।।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖बिचारे को अब पछतावा हो रहा था की,,,क्यू वोह बिना नोक किया आ गया,,,लेकिन फिर उसने अपने मन मैं बोला मुझे क्या मालूम था की यहां,,,यह सब हो रहा होगा यार एक तो मैंने इनका,क्वालिटी टाइम खराब किया,,,और तब भाई मुझे खराब करेगे,,,ओह गॉड बचा लेना।।।।
तभी शिवांश ने जानवी को जाने का इशारा,,,,किया जानवी ने भी जल्दी से अपने कदम,, बाहर के तरफ बड़ा दिए लेकिन जैसे ही वोह दरवाजे तक,,,पोहुचि योग उसने देखा की तुषार,अंगद, निहार उससे तरफ आ रहे थे यह,,, देख के जानवी जल्दी से वहा से,,,,भाग के चली गई।।।।
वोही जब तुषार,अंगद ,,निहार ने जानवी को ऐसे जाता,,,देखा तोह तीनो कन्फ्यूज हो गए,,,और एक दूसरे को देखने लगे,,, तभी उनकी नजर मिहिर पर गई जो अपने हाथ जोड़े खड़ा,,,ऊपर ही देख रहा था।।।
तभी तीनो समझ गए,,,जरूर इसने कुछ कांड किया होगा,,,और तीनो ही स्टडी रूम मैं वापस आ गए।।।
कुछ देर बाद मिहिर शिवांश के सामने मुर्गा बन के बैठा हुआ,,,,था और तुषार,निहार,अंगद मन ही मन उससे देखे हस रहे थे।।।
तभी शिवांश ने तीनो को देख के बोला,,,निहार मैं दो दिन के लिए शिमला जा रहा हु,,,तब तक तुम्हे यहां पर सब कुछ संभालना होगा,,,
और हा निहार अपने हॉस्पिटल मैं,,,मेडिकल की सारी फैसिलिटी रेडी रखना मैं,,,किसी को लेके आने वाला हु,,,और उसका ट्रीटमेंट सिर्फ तुम करोगे और कोई भी उससे हाथ नही लगाए,,,
या फिर एक काम करो हमारे घर मैं ही,,,मेडिकल की फैसिलिटी रेडी करवाओ,,,हम किसी पर भी भरोसा नही कर सकते है।।।
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तभी मिहिर टपक से खड़ा होते हुए ,,,,बोला भाई आप किसको लेके आ रहे हो?????
मिहिर के ऐसे बोलने पर शिवांश ने उसे घूर के,,,देखा और बोला तुझे मैंने मुर्गा बनने वाला था तू,,, उटा क्यू चल वापस मुर्गा बन।।
शिवांश के ऐसे बोलने और,,,मिहिर का मुंह बन गाया और वोह फिर से मुर्गा बन गया,,,तभी शिवांश ने तुषार को देख के बोला जा उदार से मोटी मोटी,,,४ या ५ बुक लेके आ ।।।
शिवांश के बोलने पर,,,तुषार उठ के स्टडी टेबल के पास गया और पंच छे मोटी मोटी बुक,,,लेके शिवांश के सामने आ गया,,
तभी शिवांश ने तुषार को देख के बोला,,,मुझे क्या देख रहा है उसके पीट पर रख,,,शिवांश के बोलने पर तुषार ने जल्दी से बुक को मिहिर के पीट पर रख दिया।।।।
नही भाई एक तो अपने मुझे मुर्गा भी,,,,बना दिया और अब यह बुक भी रख रहे है यह बहुत ही,,,गलत बात है भाई
चुप चाप मुर्गा अब के रह वरना,,,शिवांश ने इतना बोला ही। था की
मिहिर बोला अरे नही किसने मना किया है,,, आप बोली तो पूरी जिंदगी ऐसे ही मुर्गा,,,बन के रहुगा।।।
तभी तुषार ने बोला,,,हा भाई यह अच्छा आइडिया दिया है इस नालायक ने,,,यह मुर्गा बना रहेगा और रोज सुबह मुझे जगाने के लिए कुकरकु कुकरकु करेगा,,,,
तुषार के ऐसे बोलते है,,,,सब हसने लगे।।।
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अभी अब अपने मैं बाते कर ही रहे थे की,,,तभी उनके कानो मैं भजन की आवाज सुनाई दी,,,, जिसे सुने के निहार ने बोला यह हमारे घर सुबह सुबह स्पीकर किसने,,,लगा दिया।।।
अंगद ने निहार के बात पर उसके सर पर मरते हुए,,,बोला अबे साले खुद डॉक्टर है,,,खुद के कान का इलाज क्यू नही करता है,,,यह स्पीकर की आवाज नही है कोई भजन गा रहा है।।।।
हा पर कॉन,,???? तुषार बोला।।।।
यह तो नीचे जाके पता चलेगा,,,,ना चलो अब अंगद ने बोला और फिर सब अपने कदम नीचे बड़ा दिए,,,,तभी उन्हे घर के मेंशन के मंदिर से आवाज,,,आने लगी तो सब के कदम उस तरफ बड़ गए।।।
और वोह जाके,,,सब की आखें हैरानी से बड़ी हो गई सामने जानवी हाथो मैं आरती की थाल लिए पूजा कर रही थी,,,,और तो और जानवी ने कुछ ही पल मैं मंदिर का पूरा नक्शा बदल दिया था,,,,
पूरे मंदिर को साफ कर के फूलो से सजाया गया हुआ,,,था और भोले नाथ जी को भी अच्छे से सजा के,,,नए कपड़े पहना कर ,,,,,उन्हे माला भी पहन दिया था,,,और जानवी के पीछे सीमा काकी खड़ी,,,थी और जानवी के साइड मैं ईशा को एक छोटे से मेड पर,,,लिटाया गया था सब वाहा पोहुचे ।।।।
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सब के सब मंदिर मैं जाके जानवी की आरती की आवाज को,,,सुन के जैसे खो से गए हो,,,शिवांश ने जब ईशा को देखा जो,,,शांत सी लेती हुई थी यह देख वोह उसके पास गया और,,,उसे अपने गोद मै ले लिया।।।।
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इश्वर सत्य है
सत्य ही शिव है
शिव ही सुन्दर है
जागो उठ कर देखो
जीवन ज्योत उजागर है
सत्यम शिवम सुन्दरम - २
इश्वर सत्य है
सत्य ही शिव है
शिव ही सुन्दर है
सत्यम शिवम सुन्दरम - २
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सब हाथ जोड़े,,,मंदिर मैं खड़े थे और सब की आखें बंद थी सब के सब जैसे,,,जानवी के आवाज मैं मंथ मुक्त हो गए हो।।।।
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राम अवध में काशी में शिव कांहा व्ऱिन्दवन में
दया करो प्रभू देखूँ इन को - २
हर घर के आँगन में
राधा मोहन शरणम
सत्यम शिवम सुन्दरम - २
एक सूर्या है एक गगन है एक ही धरती माता
दया करो प्रभू एक बनें सब
सब का एक से नाता
राधा मोहन शरणम
सत्यम शिवम सुन्दरम - २
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जानवी ने आरती की,,,और सब ने पहले आरती भोले बाबा को दिखा दिया,,,और जैसे ही जानवी पलटी,,,अपने पीछे इतने लोग को देखा के,,,डर गई,,और दो कदम पीछे हाट गई।।।।
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मिहिर ने जानवी को देखा और बोला,,,क्या भाभी आप तो देखे के ऐसे डर रही है,,,जैसे हम इंसान नही भूत हो,,,
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तभी मिहिर ने,,,तुषार को देख के बोला अरे तुम्हे देखे के लोग डरते नही है उल्टा,,मेरे प्यार मैं पड़ते है समझा तू,,,
हा रुक जा तेरी यह बात मैं हीर,,को बताता हु,,,अभी दोनो बहस कर ही रहे थे की,,,तभी शिवांश अपनी कड़क आवाज मैं बोला बस करो दोनो के,,,दोनो कही भी शुरू हो जाते हो।।।।
तभी जानवी ने भी कुछ नही बोली,,,और एक एक करके सब को आरती दे दी,,,तभी जानवी शिवश के पास आई तो शिवांश ने एक हाथ से आरती ली,,,और सब से पहले ईशा के सिर पर पहरा,,,उसके बात उसने फिर आरती ली और जानवी के सिर पर फेर दिया।।।
यह देखे जानवी शिवांश को देखने लगी,,,,तभी उसके कानो मैं अब को आवाज सुनाई दी,,, ओह हो क्या बात है इतना प्यार कभी हम तो नही किया भाई,,,इतना बोल तुषार,,निहार,,मिहिर ने अपना मुंह बना के शिवांश और जानवी को देखने लगे।।।
शिवांश ने जब उन्हे देखा तो,,,उनके पास जाते हुए बोला,,,रुक जाओ अभी दिखता हु प्यार तुम लोगो को अपना ।।।
वोही जानवी ने तो शर्म से अपनी पलके,,,झुका ली थी उसकी तोह हिमत ही नही हो रही थी की वोह,,,नजर उटा के उन्हे देखे।।।।➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
***कुछ देर बाद***
सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे थे और नाश्ता,,,कर रहे थे जानवी ने जब नाश्ता देखा,,,तो वोह बस नाश्ते को घूरते ही। रह गई। ।।।
तभी तुषार ने जानवी को देख के,,,बोला क्या हुआ भाभी आप नाश्ता क्यू नही कर रही है।।।
जानवी ने तुषार की बात पर तुषार को देखा और,,,फिर सब को देखे के बोली क्या यह नाश्ता है,,,उबली हुए सब्जी सलाद,, ऑडस,,जूस, बटर और जेम क्या आप लोग रोज यही खाते है।।।।
जानवी के ऐसे बोलने पर निहार ने जानवी को देखे के,,,,बोला खाते नही है भाभी जबरदस्ती खाना पड़ता है हमारे भईया है ना,,,वोह health के हिसाब मैं बहुत पक्के है,,,उन्हे बिलकुल भी इनहाइजेनिक्स,,,खाना नही पसंद ।।।।
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क्या जानवी शिवांश के रंग ढंग मैं खुद को डाल पाएंगी,,,या वोह खुद शिवांश को अपने रंग मैं रंग देगी,,,क्या होगा इस कहानी मैं जानने के लिए स्टोरी के साथ बने रहिए,,,,तेरी सादगी मैं दिल कुर्बान
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हेलो दोस्तो उम्मीद करती हु आप
लोगो को यह स्टोरी अच्छी लग रही हो होगी,,,अगर कोई प्रोब्लम हो स्टोरी मैं तो आप मुझे कमेंट करके या रिव्यू मैं बता,,,सकते है।।।।
और हा स्टोरी को लाइक करना ना भूले,,,
बाय बाय☺️☺️
Thank you☺️☺️☺️