कहते है आग और पानी कभी एक नहीं हो सकते पर क्या हो जब ये मिल जाए,,अबीर खन्ना the billionares और एक अंडरवर्ल्ड माफिया जिसका खौफ पूरे शहर में फैला हुआ है वहीं दूसरी तरफ है मायरा वर्मा कॉलेज स्टूडेंट जो बेहद खुशमिजाज किस्म की लड़की है लेकिन मायरा के बाप... कहते है आग और पानी कभी एक नहीं हो सकते पर क्या हो जब ये मिल जाए,,अबीर खन्ना the billionares और एक अंडरवर्ल्ड माफिया जिसका खौफ पूरे शहर में फैला हुआ है वहीं दूसरी तरफ है मायरा वर्मा कॉलेज स्टूडेंट जो बेहद खुशमिजाज किस्म की लड़की है लेकिन मायरा के बाप ने की अतीत में एक ऐसी गलती जिसका बदला लेने के लिए अबीर मायरा को हर रात सजा देता है लेकिन इसी बदले में मायरा अबीर की सनक बन जाती है, तो क्या होगा इस बदले का अंजाम, क्या कभी मायरा हो पाएगी अबीर की कैद से आजाद या बनकर रह जाएगी उसकी desire जानने के लिए पड़ते रहिए mafia's dark desire only on story mania..
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अध्याय १
बैंगलोर, भारत। रात का समय था।
"बैंगलोर को भारत का सबसे जाना-माना और बड़ा शहर कहा जाता है। यहाँ हर चीज़ बेहद खूबसूरत है। बड़ी-बड़ी इमारतें वहाँ की खूबसूरती को चार-चाँद लगा रही थीं।"
"लेकिन कहते हैं ना, कभी-कभी बड़े महलों में खुशियाँ नहीं, बेहिसाब दर्द होता है। महलों में रहने वाला हर कोई शहज़ादा नहीं होता। कभी-कभी उन महलों में इंसान के रूप में राक्षस भी रहते हैं।"
बैंगलोर में एक बड़ा सा विला था, जो काफी खूबसूरत था। उस विला के बाहर एक नेम प्लेट थी जिसमें बड़े-बड़े अक्षरों में 'A.K विला' लिखा था, जो रात की रोशनी में और चमक रहा था। उस विला के आस-पास काफी टाइट सिक्योरिटी थी, जो विला के चप्पे-चप्पे पर नज़र बनाए हुए थी। यह विला एक बिलियनेयर का था, जिसके हज़ारों दुश्मन थे।
उसी विला के एक मास्टर बेडरूम में एक आदमी एक लड़की के ऊपर था। लड़की की सिसकियाँ और चीखें किसी के भी रूह को हिला सकती थीं। वह लड़की दर्द में तड़पते हुए उस आदमी को दूर करने की कोशिश कर रही थी।
वह जितना उस आदमी को दूर करने की कोशिश कर रही थी, वह आदमी उसके साथ और रफ़ हो रहा था। ना जाने रात के किस पहर उस लड़की की सिसकियाँ बंद हुईं। वह लड़की दर्द की शिद्दत को सहन कर बेहोश हो गई। वह आदमी उसे अपनी बाहों में भरकर सो गया।
अगली सुबह।
धूप की हल्की किरण उस आदमी के चेहरे पर पड़ी। धूप पड़ते ही वह आदमी उठा और एक नज़र उस लड़की को देखा। उसने अपना लोअर पहनकर जिम चला गया।
जिम एरिया में वह आदमी पसीने से लथपथ जिम कर रहा था। उस आदमी के सिक्स पैक्स इस बात के गवाह थे कि वह घंटों जिम करता है। उसका बेदाग़ गोरा चेहरा, उसकी भूरी आँखें जो भावहीन थीं, तीखी नाक, सख्त पतले नेचुरल पिंक होंठ, उसे और भी हॉट बना रहे थे। उसकी उम्र छब्बीस साल थी।
वह बिलकुल परफेक्ट था। वह इतना हैंडसम था कि हर लड़की उसे पाने की चाहत रखती थी, लेकिन वह किसी को अपने आस-पास भी भटकने नहीं देता था।
यह आदमी हमारी कहानी का नायक, अबीर खन्ना है। अबीर का नाम बिज़नेस की दुनिया में हर शहर, हर देश में फैला हुआ है।
अबीर तौलिये से पसीना साफ़ करते हुए कमरे में आया। वह लड़की अभी भी बेड पर सो रही थी। उसने एक नज़र उसे देखा और शावर लेने चला गया।
कुछ देर बाद वह तैयार होकर सीढ़ियों से उतरता हुआ आया। उसने एक ब्लैक कलर का बिज़नेस सूट पहना हुआ था। वह नीचे आया और डाइनिंग टेबल पर बैठ गया।
इसके आते ही सभी नौकर एक-एक करके नाश्ता लगाने लगे।
कुछ देर बाद उसने नाश्ता किया और नैपकिन से हाथ साफ़ करते हुए एक नौकरानी से कहा, "मैडम उठ जाएँ तो उन्हें कह देना ऑफिस आ जाएँ।"
"जी साहब," नौकरानी ने सर झुकाकर कहा।
अबीर नाश्ता करके ऑफिस चला गया। वहीं मास्टर बेडरूम में उस लड़की की आँख खुली। वह बेड से उठी तो उसकी जोरदार चीख निकल गई। वह दर्द की शिद्दत से आँखें बंद कर लीं। कुछ आँसू उसके गाल पर लुढ़क कर आ गए। वह लड़की अपने आँसू साफ़ कर, ब्लैंकेट लपेटकर लड़खड़ाते हुए बाथरूम में घुस गई।
वह लड़की गरम पानी का शावर ऑन कर बाथटब में बैठ गई। कुछ देर में वह मिरर के सामने खड़ी थी और अपने शरीर को देख रही थी। उसके शरीर पर जगह-जगह काटने के निशान थे। उसके ज़ख्म बता रहे थे कि रात अबीर ने उसके साथ किस तरह दरिंदगी की है।
वह लड़की अपने आँसू को साफ़ करके बोली, "कंट्रोल मायरा, कंट्रोल। ये पहली बार नहीं हुआ जब मिस्टर खन्ना ने ऐसी दरिंदगी की है।"
जी हाँ, यह है हमारी कहानी की नायिका, मायरा वर्मा। यह एक मिडिल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करती है। इसकी उम्र उन्नीस साल है। मायरा का रंग गोरा और चेहरा बेदाग़ है। उसकी तीखी नाक, मुलायम पिंक होंठ, हर लड़का अपना दिल हार जाए उस पर। वह इतनी खूबसूरत थी।
मायरा अपनी आँखें बंद कर अपनी पिछली ज़िंदगी के बारे में सोचने लगी।
अध्याय २ मायरा ने आँखें बंद कर अपनी पिछली जिंदगी के बारे में सोचना शुरू किया। फ्लैशबैक शुरू दो महीने पहले बैंगलोर, भारत एक कमरे में एक लड़की, दुनिया से बेख़बर, आराम से बिस्तर पर सो रही थी। उसके लम्बे बाल बिस्तर पर बिखरे पड़े थे। उसका चेहरा बालों से ढँका हुआ था। लड़की नींद में करवट लेती है, तो उसके सारे बाल दुबारा बिस्तर पर बिखर जाते हैं और उसका चेहरा दिखने लगता है, जो बिलकुल बेदाग था, जो धूप की किरणों से और चमक रहा था। यह कोई और नहीं, मायरा थी। तभी उस कमरे में एक चालीस साल की औरत आती है। वह भी काफी खूबसूरत थीं। उनका नाम सुधा था, जो मायरा की माँ थीं। सुधा उसके ऊपर से कम्बल हटाते हुए कहती हैं, "मायरा, उठ जाओ बच्चे, कॉलेज जाना है ना।" "मम्मा, बस कुछ देर और सोने दो।" मायरा ने कम्बल दुबारा ढँकते हुए कहा। "उठ जाओ चुपचाप मायरा, मैं मार्केट जा रही हूँ। तुम कॉलेज चली जाना, नाश्ता बना दिया है मैंने।" मायरा की माँ ने एक बार फिर उसके ऊपर से कम्बल हटाते हुए कहा। मायरा ने कम्बल को फिर से अपने ऊपर ढँक लिया और नींद भरी आवाज़ में कहा, "जी मम्मा।" सुधा उसे इस तरह देखकर नाराज़गी में सिर हिलाती हैं, जैसे कहना चाहती हों, 'इस लड़की का कुछ नहीं हो सकता।' वह मायरा को एक नज़र देखकर कमरे से बाहर चली जाती हैं। मायरा एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखती थी। उसकी माँ के सिवा कोई नहीं था। मायरा के पिता, रोहन वर्मा, तीन साल पहले एक एक्सीडेंट में गुज़र चुके थे। रोहन जी खन्ना फैमिली के ड्राइवर थे। रोहन जी के पूर्वज बरसों से खन्ना फैमिली के लिए काम करते थे, इसलिए रोहन वर्मा खन्ना फैमिली के ड्राइवर बने। मायरा के पिता के गुज़र जाने के बाद सुधा जी ने जॉब करके मायरा का ख्याल रखा। कुछ देर में मायरा तैयार होकर बाहर आती है। पता नहीं क्यों, पर उसे अजीब सी घबराहट हो रही थी। वह अपनी सोच में गुम थी। तभी उसका फ़ोन बजता है। फ़ोन की आवाज़ सुनकर उसका ध्यान टूटता है और वह जाकर फ़ोन उठाती है। फ़ोन पर 'मम्मा' फ़्लैश हो रहा था। वह बालों को जूड़ा बनाते हुए कहती है, "जी मम्मा, बोले?" मायरा के "हेलो" बोलते ही दूसरी तरफ़ से आवाज़ आती है, "हेलो, जिसका यह फ़ोन है, उनका बहुत बुरा एक्सीडेंट हो गया है। हम उन्हें सिटी हॉस्पिटल लेकर जा रहे हैं। आप भी वहीं आ जाएँ।" इतना कहकर फ़ोन कट जाता है। एक्सीडेंट की ख़बर सुनकर मायरा का फ़ोन हाथ से छूटकर गिर जाता है। वह तो एकदम जम गई थी। उसे होश ही नहीं था। अपने पिता को खोने के बाद उसके पास सिर्फ़ उसकी माँ थी, जो उसे बेहद अज़ीज़ थी। वह उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं खो सकती थी। मायरा ज़मीन पर गिर जाती है और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगते हैं। उसके कानों में एक बार फिर वही आवाज़ गूंजती है, "जिसका यह फ़ोन है, उनका एक्सीडेंट हो गया है।" मायरा अपने होश में आती है और खड़ी होती है। वह ऐसे बैठ नहीं सकती थी। उसे अपनी मम्मा के पास जाना था। वह "मम्मा, मम्मा" चीखती हुई बाहर की तरफ़ भागती है। और कुछ देर में वह हॉस्पिटल में आईसीयू बोर्ड के बाहर खड़ी, रोती हुई, अपनी मम्मा को देख रही थी। उसकी हँसती-खेलती ज़िंदगी पल में बदल गई थी। वह अपनी मम्मा को बिस्तर पर देखकर टूट रही थी। उसकी मम्मा उसका इकलौता सहारा थी। वह अपनी सोच में गुम थी। तभी हॉस्पिटल के बाहर चार-पाँच गाड़ियाँ रुकने की आवाज़ आती है और एक शख्स, जिसने थ्री पीस सूट पहना था, आस-पास के लोग उसे देख रहे थे, लेकिन वह बॉडीगार्ड से घिरा हुआ था, जिससे कोई उसका चेहरा नहीं देख पा रहा था। बॉडीगार्ड से घिरा हुआ शख्स हॉस्पिटल के अंदर आता है और चलते हुए ठीक मायरा के सामने आकर खड़ा हो जाता है और भारी आवाज़ में कहता है, "कैसी हो, Sunshine?" किसी की भारी आवाज़ सुनकर मायरा नज़र उठाकर देखती है और हैरानी से दो कदम पीछे हट जाती है क्योंकि अबीर उसके ठीक सामने खड़ा था, जिससे वह एक पल के लिए डर गई थी। उसके पीछे हटते ही उस शख्स के चेहरे पर डेविल स्माइल आ जाती है। यह कोई और नहीं, बल्कि अबीर था। "आप यहाँ क्या कर रहे हो? आपकी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की?" मायरा ने उसे यहाँ देखकर हैरानी और गुस्से में कहा। अबीर उसकी बात सुनकर डेविल स्माइल करता है और उसके आगे-पीछे चक्कर लगाते हुए कहता है, "My innocent sunshine, माँ हॉस्पिटल के बिस्तर पर आखिरी साँसें गिन रही है और तुम्हारी अकड़ तो ख़त्म ही नहीं हो रही है। वैसे मानना पड़ेगा, रस्सी जल गई, लेकिन बल नहीं गया।" "आप जाएँ यहाँ से! आप क्यों आए हो? मैं आपके साथ अभी बहस नहीं कर सकती, Mr. अबीर खन्ना।" मायरा उसकी बातें सुनकर उस पर भड़कते हुए कहती है। मायरा के पिता, रोहन जी, अबीर के यहाँ काम करते थे, इसलिए कभी-कभी मायरा वहाँ जाती थी, तो वह अबीर को अच्छी तरह पहचानती थी। "तुम्हारी मदद करने आया हूँ, my innocent sunshine।" अबीर उसकी अकड़ देखकर तिरछी स्माइल करते हुए कहता है। "मुझे नहीं चाहिए आपकी मदद। आप जाएँ यहाँ से।" मायरा उसकी बात सुनकर उसे इग्नोर करके वहाँ से जाते हुए कहती है। अबीर उसकी अकड़ देखकर उसकी कलाई पकड़ता है और अपने नज़दीक खींच कर कहता है, "तुम्हारे बाप ने मेरा पूरा परिवार ख़त्म कर दिया और तुम मुझे अकड़ दिखा रही हो। ख़ैर, अब बदले का वक़्त आ गया है। वह सुना है ना, माँ-बाप के कर्मों का फल बच्चे को भुगतना पड़ता है। बाप तो तुम्हारा है नहीं, तो अब तुम बनोगी मेरा मोहरा।" "मेरे बाबा ने कुछ नहीं किया। वह सिर्फ़ एक एक्सीडेंट था।" मायरा उसकी बात सुनकर अपनी कलाई को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहती है। अबीर आगे कुछ कहता, तभी वहाँ डॉक्टर आ जाते हैं, जिससे अबीर मायरा को छोड़ देता है। डॉक्टर मायरा के पास आकर कहते हैं, "मिस मायरा, हमे आपकी माँ का बहुत blood loss हुआ है। हमे फ़ौरन उनकी सर्जरी करनी होगी, वरना उनकी जान भी जा सकती है। आप सर्जरी के लिए तीस लाख ट्रांसफ़र करा दीजिये।" तीस लाख सुनकर मायरा की आँखें हैरानी से बड़ी हो जाती हैं और वह धड़ाम से चेयर पर बैठ जाती है। तीस लाख कोई छोटी रकम नहीं थी। मायरा ने आज तक कभी तीस लाख नहीं देखे थे। उसे इस हालात में देखकर अबीर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ जाती है। "तीस लाख, मैं कहाँ से लाऊँगी डॉक्टर?" मायरा डॉक्टर की बात सुनकर रोते हुए कहती है। "सॉरी मिस, पर जब तक आप पैसे जमा नहीं करेंगे, तब तक हम सर्जरी नहीं कर सकते।" डॉक्टर उसकी बात सुनकर कहते हैं। "ऐसे कैसे नहीं करेंगे? मेरी माँ को कुछ नहीं होना चाहिए।" मायरा उनकी बात सुनकर गुस्से में कहती है। "हम बिना पेमेंट के सर्जरी स्टार्ट नहीं कर सकते। रूल इस रूल। आपकी माँ के पास दो घंटे हैं। अगर दो घंटे में उनकी सर्जरी स्टार्ट नहीं की तो उनकी जान भी जा सकती है।" डॉक्टर उसकी बात सुनकर कहते हैं। इतना कहकर डॉक्टर चले जाते हैं। मायरा अपना चेहरा ढँककर रोने लगती है। वह बहुत मुश्किल में थी। यह सिर्फ़ वही जानती थी। कहाँ से लाएगी वह इतने पैसे? यही सोचकर वह और घबरा रही थी। उसे इस तरह तड़पता देखकर अबीर को सुकून मिल रहा था। वह उसके पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर तिरछी स्माइल करते हुए कहता है, "मेरे पास एक ऑफ़र है तुम्हारे लिए, sunshine। मैं तुम्हें तीस लाख दे सकता हूँ।" "मुझे नहीं चाहिए आपका ऑफ़र। चले जाएँ आप यहाँ से। मेरे पास आपकी बकवास के लिए फ़ालतू वक़्त नहीं है। मुझे मेरी माँ को बचाना है।" मायरा उसकी बात सुनकर उसके हाथ को अपने कंधे से हटाती है और कहती है। "कोशिश करके देख लो। अगर तीस लाख न मिले तो मेरे विला चली आना। मुझे तुम्हारा इंतज़ार रहेगा, sunshine।" अबीर उसे देखकर वहाँ से जाते हुए कहता है। इतना कहकर अबीर वहाँ से चला जाता है और मायरा उसे जाता हुआ देखती रहती है। उसका कोई रिश्तेदार भी नहीं था। वह किससे मदद लेती? उसके पास सिर्फ़ उसके दोस्त थे जो उसकी मदद कर सकते थे। यही सोचकर वह अपने दोस्तों को फ़ोन करती है, लेकिन उसके सारे दोस्त उसकी हेल्प करने से मना कर देते हैं। उसने नहीं सोचा था कि वह जिन दोस्तों की मदद करती थी, वे सारे दोस्त आखिरी वक़्त में उसका साथ छोड़ देंगे। सच कहते हैं, मुसीबत के वक़्त कोई काम नहीं आता। सब तरफ़ से उम्मीद हारकर मायरा रोने लगती है। एक घंटा गुज़र चुका था। उसके पास सिर्फ़ एक घंटा बचा था। वह अपने चेहरे को छुपाकर एक बार फिर रोने लगती है और खुद से कहती है, "भगवान जी, मेरी माँ ने तो हमेशा आपको पूजा है। मेरी माँ को बचा लो। मेरी मदद करो। एक घंटे में तीस लाख का इंतज़ाम कैसे करूँ?" मायरा रो रही थी, तभी उसे अबीर की बात याद आती है और वह अपने आँसू साफ़ करते हुए कहती है, "अब मेरे पास एक ही रास्ता है।" मायरा गहरी साँस लेकर बाहर आती है और टैक्सी में बैठ जाती है। कुछ देर में उसकी कार A.K. विला आकर रुकती है। वह बाहर से विला को देखती है, जो बेहद खूबसूरत लग रहा था। वह एक बार फिर लम्बी साँस लेती है और हिम्मत करके अंदर जाती है। बाहर बहुत सारे बॉडीगार्ड थे, लेकिन उसे किसी ने नहीं रोका। अंदर अबीर सोफ़े पर पैर पर पैर चढ़ाए सिगरेट के लम्बे-लम्बे कश भर रहा था। मायरा को आते देख अबीर के चेहरे पर शैतानी मुस्कराहट आ जाती है। वह अपनी सिगरेट को अपने हाथों से बुझा देता है और खड़ा हो जाता है और मायरा को देखते हुए कहता है, "Welcome, sunshine। मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था।" "मुझे आपके सारे ऑफ़र मंज़ूर हैं। मुझे तीस लाख चाहिए, अभी।" मायरा उसके सामने खड़े होकर अपनी लाल आँखों से उसकी आँखों में देखते हुए कहती है। "सोच लो, sunshine। एक बार अबीर खन्ना के जाल में फ़ँस गई तो निकालना नामुमकिन हो जाएगा।" अबीर उसकी बात सुनकर तिरछी गर्दन करके उसे देखता है और कहता है। "मेरे पास वक़्त नहीं है। मुझे तीस लाख चाहिए। आपका जो भी ऑफ़र है, मुझे वह मंज़ूर है।" मायरा उसे गुस्से में घूरते हुए कहती है। अबीर और मायरा बात कर रहे थे, तभी अबीर का असिस्टेंट, अंश, कुछ कागज़ लेकर आता है। अबीर टेढ़ी मुस्कराहट के साथ अंश से कहता है, "sunshine को पढ़कर सुनाओ, अंश। इस कागज़ में क्या लिखा है।" "जी बॉस।" अंश अबीर की बात सुनकर कागज़ को देखकर कहता है। अंश कागज़ पढ़ना शुरू करता है, "मिस मायरा वर्मा, अबीर खन्ना आपको आपकी माँ के इलाज के लिए तीस लाख देंगे, लेकिन उस तीस लाख के बदले अबीर खन्ना आपको खरीद रहे हैं और आपको उनकी हर बात माननी होगी। आप दुनिया के सामने उनसे कोई मतलब नहीं रखेंगी। वह जब चाहे आपके साथ शारीरिक संबंध बना सकते हैं। आपको उन्हें रोकने का कोई हक़ नहीं होगा। आप सिर्फ़ उनकी रखैल होंगी। अगर आपने कोई भी रूल तोड़ा तो आपको अबीर खन्ना को पाँच करोड़ देने होंगे।" यह सुनकर मायरा के पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है। फ्लैशबैक जारी...
अध्याय ३
जैसे-जैसे अंश पेपर्स पढ़ रही थी, मायरा का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। उसने अपने हाथों की कसकर मुट्ठी बना ली और गुस्से में अबीर की ओर बढ़कर झटके से उसका कॉलर पकड़ लिया। अपना कॉलर पकड़े देख अबीर की आँखें डार्क हो गईं। धीरे-धीरे वहाँ का तापमान भी गिरने लगा और कुछ ही देर में वहाँ का माहौल सर्द हो गया। अबीर की आँखें गुस्से में लाल हो गईं। अबीर की आँखों में देखकर मायरा के अंदर डर की लहर दौड़ गई, फिर भी उसने अपने डर को छिपाते हुए अबीर का कॉलर पकड़ा रहा।
"आपकी हिम्मत कैसे हुई मेरा सौदा करने की? मैंने तो आपको अच्छा इंसान समझा था! आप इतने घटिया निकलोगे, मैंने कभी नहीं सोचा था!" मायरा ने अपने डर को काबू करते हुए गुस्से में कहा।
अबीर ने मायरा के हाथों को झटके से अपने कॉलर से हटाकर उसके हाथ उसकी पीठ से लगा दिए। मायरा दर्द से अपनी आँखें बंद कर ली। अबीर ने व्यंग्यात्मक मुस्कान करते हुए कहा, "त्छत्छत्छ सनशाइन! मानना पड़ेगा तुम्हारी हिम्मत को! तुम्हारी माँ हास्पिटल के बेड पर है और जो इंसान तुम्हारी मदद करना चाहता है, तुम उसी का कॉलर पकड़ रही हो!"
मायरा ने अबीर से अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उस छोटी-सी लड़की के लिए अबीर जैसे तगड़े व्यक्ति को हटाना नामुमकिन था।
"आप मेरी मदद नहीं कर रहे, आप मेरा सौदा कर रहे हैं! आप बहुत घटिया इंसान हैं! नफरत है मुझे आपसे!" मायरा गुस्से में बोली।
"तुम्हारे पास सोचने के लिए पाँच मिनट हैं, तुम्हारी माँ के पास एक घंटा है। तुम जितना वक्त लोगी, तुम्हारी माँ की साँसें उतनी ही कम होती जाएँगी। अगर खुद का सौदा नहीं करोगी, तो कहाँ से लाओगी तीस लाख?" अबीर ने उसकी बात सुनकर तिरछी मुस्कराहट के साथ कहा।
"कुछ भी करूँगी, लेकिन आपकी मदद नहीं लूँगी, समझे आप?" मायरा ने खुद को छुड़ाने की एक बार फिर कोशिश करते हुए गुस्से में कहा।
अबीर ने उसके हाथों को झटके से छोड़ दिया। मायरा जमीन पर गिर गई। उसके मुँह से आह निकल गई और वह अबीर को घूरने लगी। उसे खुद को घूरते देख अबीर ने तिरछी मुस्कराहट के साथ कहा, "ठीक है, तो जाओ कर लो तीस लाख का इंतज़ाम। और अगर नहीं हो पाया, तो मेरे पास चली आना। ऑफ़र अभी भी उपलब्ध है।"
मायरा गुस्से में उठी और अपने हाथ साफ करते हुए अबीर को एक नज़र देखकर वहाँ से चली गई। कुछ देर में सड़कें बारिश के पानी से भीग रही थीं और मायरा रोते हुए बेसुध होकर सड़क पर चल रही थी। उसे कोई होश ही नहीं था। आस-पास के लोग उसे देख रहे थे। वह रोते-रोते सड़क पर बैठ गई। उसके सड़क पर बैठने से जाम लग गया और आने-जाने वाले लोग उस पर गुस्से में बरसने लगे, लेकिन वह दुनिया से बेखबर रो रही थी।
थोड़ी देर रोने के बाद उसने हिम्मत करके उठकर एक टैक्सी में बैठकर एक ऑफिस निकल गई। यह वही ऑफिस था जहाँ मायरा पार्ट-टाइम जॉब करती थी, जहाँ उसने एक साल पहले ही जॉब शुरू की थी।
मायरा ऑफिस में आकर रिसेप्शन पर आई और रिसेप्शनिस्ट से पूछा, "बॉस कहाँ हैं? क्या वह ऑफिस में हैं?"
रिसेप्शनिस्ट ने उसकी बात सुनकर कहा, "सॉरी मैडम, लेकिन बॉस एक महीने के लिए मलेशिया गए हैं।"
रिसेप्शनिस्ट की बात सुनकर मायरा की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई। उसकी आँखों से झर-झर आँसू निकलने लगे। उसके पास ज़्यादा वक़्त नहीं था। डॉक्टर के दिए हुए वक़्त में से सिर्फ़ आधा घंटा बचा था। वह रोते हुए वहाँ से निकल गई। उसकी टैक्सी एक बार फिर ए.के. विला आकर रुकी।
वह टैक्सी से बाहर आई और आसमान की तरफ़ देखकर बोली, "आज मैं अपना सौदा करने जा रही हूँ। भगवान जी, आपने मुझे ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। कुछ घंटों में मेरी ज़िंदगी बदल गई। जिस इंसान से नफ़रत करती थी, आज उसी से खुद का सौदा करने जा रही हूँ। अगर मेरी माँ को बचाने के लिए मुझे खुद को बेचना पड़े, तो मैं वो भी करूँगी।"
मायरा ने अपने आँसू साफ़ करके अंदर गई। कोई भी गार्ड उसे नहीं रोका। वह अंदर गई। अबीर सोफ़े पर बैठा फ़ाइल पढ़ रहा था। उसने एक नज़र मायरा को देखा और दुबारा अपनी नज़रें फ़ाइल की तरफ़ कर लीं।
मायरा उसके सामने आकर खड़ी हो गई और अपने हाथों की मुट्ठी बनाकर बोली, "मुझे आपका ऑफ़र मंज़ूर है।"
यह सुनकर अबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कराहट आ गई। वह अपनी फ़ाइल बंद करके खड़ा हुआ और अपनी पॉकेट में हाथ डालकर व्यंग्यात्मक मुस्कान करते हुए बोला, "यही औक़ात है तुम्हारी मेरी मिस्ट्रेस बनने की? मेरे नीचे रहने का मज़ा आएगा, जब तुम्हारी इज़्ज़त को मैं हर रोज़ अपने नीचे कुचलूँगा।"
अबीर की बात सुनकर कुछ आँसू मायरा के गाल पर लुढ़क कर आ गए। अबीर ने उन पेपर्स को मायरा के मुँह पर फेंक दिया। मायरा ने कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं। अबीर ने उसे देखकर कहा, "साइन करो।"
मायरा ने काँपते हाथों से जमीन पर पड़े पेपर्स उठाए और उन पेपर्स को एक नज़र देखकर अपनी माँ का ख्याल करके काँपते हाथों से साइन कर दिए। ये पेपर्स साइन करना उसके लिए सौ मौतों के बराबर था। एक औरत के लिए उसकी इज़्ज़त उसकी जान से बढ़कर होती है, जिसे वह हीरे की तरह संभालकर रखती है, लेकिन अपनी माँ के लिए मायरा सौ तो क्या हज़ार मौतें भी मर सकती थी।
उसके साइन करते ही अबीर ने किसी को फ़ोन करके कहा, "सुधा वर्मा की सर्जरी शुरू करो।"
वह फ़ोन डिस्कनेक्ट करके सामने देखा जहाँ मायरा खड़ी थी। मायरा ने उसे पेपर्स देते हुए कहा, "मैं हास्पिटल जा रही हूँ।"
वह बाहर जाने के लिए मुड़ी, तभी उसके कानों में भारी आवाज़ पड़ी। अबीर शैतानी मुस्कान करते हुए बोला, "क्या मैंने तुमसे कहा था जाने को? पहले मुझसे परमिशन लो और मेरी इजाज़त लेने की आदत डाल लो।"
मायरा ने उसकी बात सुनकर कसकर मुट्ठी बना ली और कहा, "क्या मैं अपनी माँ से मिलने हास्पिटल जा सकती हूँ, Mr. Khanna?"
अबीर ने उसकी बात सुनकर कहा, "जाओ देख लो अपनी माँ को आखिरी बार। उसके बाद तुम उनसे जब मिलोगी, जब मैं चाहूँगा। और हाँ, शाम को घर पर मिलना।"
अबीर की बात सुनकर मायरा ने सर हिलाया और चुपचाप वहाँ से निकल गई। उसके जाते ही अबीर शैतान की तरह हँसने लगा। उसे देखकर लग रहा था जैसे उसने कितनी बड़ी जंग जीत ली है आज।
मायरा अपनी पिछली जिंदगी को याद करके सिसक रही थी। वह दो महीने में अर्श से फर्श पर आ चुकी थी। उसकी ज़िंदगी बहुत बुरी तरह बिखर चुकी थी। उसकी इज़्ज़त हर रात अबीर के नीचे कुचली जाती थी। मायरा यह ज़िंदगी अपनी माँ के लिए जीती थी। मायरा की माँ ज़िंदा तो थी, लेकिन सर्जरी के बाद वह कोमा में चली गई थी। हॉस्पिटल में उनका अच्छा इलाज हो रहा था।
मायरा सब याद करके रो रही थी। वह रोते हुए खुद से बोली, "भगवान जी, क्या ज़िंदगी हो गई है मेरी? दो महीने में इतना सब कुछ बदल गया। मेरी माँ, जिसको दो महीने से मैंने नहीं देखा... भगवान जी, क्यों किया आपने मेरे साथ ऐसा? क्या गलती की थी मैंने? मेरी माँ तो हमेशा आपको पूजती थी, वह तो आपकी सबसे बड़ी भक्त थी ना, फिर क्यों किया आपने ऐसा?"
मायरा रोते हुए जमीन पर बैठ गई। उसने अपने हाथों से खुद को बाहों में भर लिया था। वह अपने आँसू साफ़ करके बोली, "मायरा, तुम कमज़ोर नहीं पड़ सकती। तुम्हें हिम्मत करनी होगी। आज मैं Mr. Khanna से ज़रूर बात करूँगी। मुझे अपनी मम्मा से मिलना है। दो महीने हो चुके हैं, मैंने उन्हें देखा भी नहीं है।"
मायरा ने अपने आँसू साफ़ किए, बथरोब पहना और बाहर आई। वह चेंजिंग रूम की तरफ़ बढ़ गई। कुछ देर बाद वह ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी होकर अपने बाल सँवार रही थी। उसने नीले रंग का अनारकली सूट पहना था। उसने हल्का टच-अप किया और अपने बाल खुले छोड़ दिए। खुले बालों में वह कहर ढा रही थी। उसकी खूबसूरती ही ऐसी थी कि कोई भी उसकी ओर आकर्षित हो जाता। वह तैयार होकर कमरे से बाहर आई और सीढ़ियों से नीचे उतरी। तभी एक मेड उसके सामने सर झुकाकर खड़ी हो गई, जिसका नाम शालिनी था। अबीर को अपने घर में ज़्यादा नौकर पसंद नहीं थे। हमेशा से उसके घर में शालिनी रही है। वह शालिनी की बहुत इज़्ज़त करता था।
"मैडम, नाश्ता कर लीजिए और ऑफिस चली जाएँ। साहब ने कहा है।" शालिनी ने मायरा के पास आकर खड़ी होकर सर झुकाकर कहा।
"मैं ऑफिस जा रही हूँ, नाश्ता ऑफिस कैंटीन में कर लूँगी।" मायरा ने कहा।
"जी मैडम।" शालिनी ने सर झुकाते हुए कहा और किनारे हो गई।
मायरा आगे बढ़ी, तभी उसे याद आया कि वह अपना फ़ोन कमरे में भूल गई है। वह मुड़ी और शालिनी से बोली, "शालिनी, मेरा फ़ोन ला दो प्लीज़। मैं जल्दी में कमरे में भूल गई।"
"जी मैडम, अभी लाती हूँ।" शालिनी मुस्कुराते हुए बोली।
शालिनी फ़ोन लेने ऊपर चली गई। मायरा हॉल में खड़ी अपनी घड़ी में समय देख रही थी। तभी शालिनी नीचे आई और मायरा को फ़ोन दे दिया। मायरा ने अपना फ़ोन लेकर मुस्कुराते हुए कहा, "थैंक्यू शालिनी।"
"कोई बात नहीं मैडम।" शालिनी ने सर झुकाकर कहा।
मायरा फ़ोन लेकर विला से बाहर चली गई और एक कार में बैठ गई। यह कार पार्किंग एरिया के अलग साइड में खड़ी थी। अबीर ने मायरा के बाहर आने-जाने के लिए एक अलग कार रखी थी। क्योंकि अबीर की सारी कारें अलग-अलग ब्रांड की और बहुत महँगी थीं, जिन्हें देखकर कोई भी पहचान सकता था कि ये खन्ना फैमिली की कारें हैं। अबीर नहीं चाहता था कि किसी को भी पता चले कि मायरा का अबीर से कोई रिश्ता है, इसलिए उसने मायरा के लिए अलग ब्रांड की कार रखी थी।
कुछ देर में मायरा की कार एक आलीशान ऑफिस के आगे रुकी। मायरा कार से बाहर निकली। ऑफिस दिखने में काफी बड़ा था। वह ऑफिस 50वीं मंज़िल पर था, जो बाहर से बहुत खूबसूरत लग रहा था। उस बिल्डिंग पर बड़े-बड़े अक्षरों में "A.K. Industry" लिखा हुआ था, जो बेहद चमक रहा था। मायरा ने एक लंबी साँस ली और ऑफिस की तरफ़ बढ़ गई। वह ऑफिस में दाखिल हुई। ऑफिस में अजीब सी शांति थी। वहाँ सभी लोग मशीन की तरह काम कर रहे थे। अबीर के नियम थे कि कोई उसके ऑफिस में फ़ालतू बात नहीं करेगा, सिर्फ़ काम करेगा, जिसके लिए उन्हें तनख्वाह मिलती है। इसलिए सब अपने-अपने काम में व्यस्त थे।
मायरा रिसेप्शन पर गई। वहाँ एक मशीन रखी हुई थी। मायरा ने उस पर अपना एंट्री कार्ड लगाया। तभी उस मशीन में हरी बत्ती जलने लगी। यह अबीर के ऑफिस का एक नियम था कि जो भी कर्मचारी आएगा, सबसे पहले रिसेप्शन पर आकर यह प्रक्रिया करेगा, तभी उसे ऑफिस में प्रवेश मिलेगा। यह एक ऐसी मशीन थी जिससे कंपनी के कर्मचारियों और सदस्यों की पहचान होती है और इससे पता चलता है कि कौन सा कर्मचारी अनुपस्थित है और कौन सा उपस्थित। इस मशीन का सारा डेटा अबीर के पास ट्रांसफ़र होता था।
मायरा भी ऑफिस में सिर्फ़ एक मामूली कर्मचारी थी। किसी को नहीं पता था कि उसका अबीर से क्या रिश्ता है। वह भी सभी की तरह आकर अपनी जगह पर बैठ गई। मायरा अबीर की सचिव थी जो अबीर के साथ रहती थी।
मायरा चेयर पर बैठी अपनी फ़ाइल पढ़ रही थी, तभी उसके पास एक चपरासी आया और बोला, "मैडम, आपको बॉस ने बुलाया है।"
मायरा ने उसकी बात सुनकर फ़ाइल बंद की और खड़ी होकर बोली, "ठीक है।"
मायरा वहाँ से अबीर के केबिन की तरफ़ बढ़ गई। अबीर का केबिन अलग फ़्लोर पर था जहाँ किसी के बिना अनुमति के जाना मना था। अबीर के फ़्लोर के नीचे वाले फ़्लोर पर मायरा का केबिन था। वह ज़्यादातर अबीर के साथ ही रहती थी। वह केबिन के बाहर खड़ी होकर गेट खटखटाया। अंदर से उसे कोई आवाज़ नहीं आई। मायरा ने गहरी साँस ली और खुद ही अंदर चली गई।
अबीर का केबिन भी उसके ऑफिस की तरह बहुत खूबसूरत था, लेकिन वहाँ ज़्यादातर काले रंग का इस्तेमाल हुआ था। क्योंकि अबीर का कहना था कि जिसकी ज़िंदगी में काला रंग ना हो तो उसकी ज़िंदगी बेरंग लगती है। इसलिए उसने अपने विला और ऑफिस में काले रंग का ही इस्तेमाल किया था।
मायरा अंदर गई तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। वह कन्फ़्यूज़न से इधर-उधर देखने लगी। तभी उसे कोई पीछे से आकर अपनी बाहों में भर लेता है। इस स्पर्श को महसूस करके मायरा ने अपनी आँखें मूँद लीं क्योंकि वह इस स्पर्श को बहुत अच्छी तरह पहचानती थी। यह कोई और नहीं, अबीर था। अबीर के छूने से मायरा के माथे पर पसीने की बूँदें चमकने लगीं।
"कैसी हो सनशाइन? कब से वेट कर रहा हूँ तुम्हारा, जानेमन।" अबीर ने उसे बाहों में भरे हुए ही उसकी गर्दन पर गरम साँसें छोड़ते हुए कहा।
अबीर के पास होने से मायरा सिहर रही थी। वह उससे दूर होने की कोशिश करने लगी। उसे इस तरह खुद से दूर जाते देख अबीर की पकड़ उसकी कमर पर कस गई और वह उसके कान पर हल्का सा किस करते हुए बोला, "मुझसे दूर जाने की गलती मत करो सनशाइन, वरना इसकी कीमत तुम्हारी माँ को चुकानी होगी।"
अबीर की बात सुनकर मायरा के आँसू उसके गाल पर लुढ़क गए। मायरा ने अपने आप को संभालते हुए कहा, "बॉस, प्लीज़ छोड़ दीजिए मुझे। आज का शेड्यूल बताना है।"
अबीर ने उसकी कमर सहलाते हुए तिरछी नज़रों से उसे देखते हुए कहा, "यह ऑफिस तुम्हारे बाप का नहीं है सनशाइन, जो तुम डिसाइड करोगी कि यहां क्या होगा क्या नहीं।"
अबीर ने उसे अपनी ओर घुमाया, उसकी कमर पकड़कर उसे अपने और करीब किया और उसके होंठों को अपने मुँह में भर लिया।
5. अध्याय
"अबीर, ये ऑफिस तुम्हारे बाप का नहीं है सनशाइन, जो तुम डिसाइड करोगी कि यहां क्या होगा, क्या नहीं।"
"मायरा कुछ कहती, इससे पहले ही अबीर ने उसे अपनी ओर घुमाया और उसके होठों को अपने मुँह में भर लिया। उसके ऐसा करते ही मायरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपनी पकड़ अबीर के ब्लेज़र पर कस ली। अबीर उसके होठों को शिद्दत से चूम रहा था; कभी वह उसके ऊपरी होंठों को चूमता, तो कभी निचले होंठों को। उसका एक हाथ मायरा की कमर को सहला रहा था। उसकी किस वाइल्ड होती जा रही थी। अब उसने मायरा के होठों को काटना शुरू कर दिया था। मायरा की चीख उसके गले में घुट रही थी। मायरा के होठों से खून निकलने लगा। मायरा को साँस नहीं आ रही थी। वह अबीर को खुद से दूर करने की कोशिश करती रही, लेकिन अबीर उसे और बेतहाशा चूमने लगा।"
"जब उनके दोनों के मुँह में खून घुलने लगा, तो अबीर उसके होठों को छोड़कर उसकी गर्दन को चूमने लगा। वह उसकी गर्दन को बहुत शिद्दत से चूम रहा था। अबीर उसकी गर्दन पर काटने लगा। मायरा के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं। अबीर उस काटे हुए स्थान को चूमने लगा। वहाँ का माहौल गर्म हो चुका था। मायरा की सिसकियाँ सुनकर अबीर और पागल हो रहा था।"
"वह उसकी गर्दन को छोड़कर दुबारा उसके होठों पर झपटा और उसे चूमने लगा। उसका एक हाथ मायरा के शरीर पर चल रहा था। मायरा की आँखों से आँसू निकलने लगे थे। वह अबीर को दूर करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह जानती थी कि इसका कोई फायदा नहीं है। अबीर ने मायरा को टेबल पर धक्का दे दिया। उसकी किस अभी भी नहीं रुकी थी।"
"वह मायरा की कुर्ती के अंदर हाथ डालकर उसके उभारों को मुट्ठी में भर लेता है और उन्हें बेतहाशा चूमने और काटने लगा। मायरा लंबी-लंबी साँसें ले रही थी। उसकी सिसकियाँ इतनी तेज थीं कि अगर कैबिन साउंडप्रूफ ना होता, तो बाहर तक पहुँच जातीं। उसने अपनी पैंट की ज़िप खोली, मायरा के कपड़े थोड़े नीचे किए, उसे कमर से पकड़कर अपनी ओर खींचा और उसमें समा गया। मायरा की चीख निकल गई और वह अपने नाखूनों को अबीर के कंधों पर गड़ाने लगी। उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे थे।"
"थोड़ी देर बाद, संतुष्ट होकर अबीर ने मायरा को धक्का दे दिया। मायरा टेबल पर गिर गई। उसके मुँह से आह निकल गई। अबीर उसे एक नज़र देखकर कैबिन से जुड़े वाशरूम में चला गया।"
"मायरा सोफे पर बैठी रो रही थी क्योंकि कल रात ही अबीर ने उसके साथ यह सब किया था और अब दुबारा उसने उसके साथ यह सब किया था। मायरा को बहुत दर्द हो रहा था। अबीर बाहर आया, उसके चेहरे पर सुकून दिख रहा था। वह मायरा के पास गया और उसे एक झटके में खड़ा कर दिया, जिससे मायरा के मुँह से चीख निकल गई।"
"अबीर ने उसकी चीख को अनसुना करते हुए कहा, "यहाँ खड़े-खड़े मुँह क्या देख रही हो? वाशरूम जाओ और हुलिया सुधारकर बाहर आओ।"
"मायरा ने उसकी बात सुनकर अपने आँसू साफ करते हुए कहा, "जी, बॉस।"
"मायरा लड़खड़ाते हुए वाशरूम चली गई। उसे बेहद तीव्र दर्द हो रहा था। वह अपना हुलिया सुधारकर बाहर आई और अबीर के सामने खड़ी हो गई। अबीर ने उसे एक नज़र देखकर कहा, "आज का शेड्यूल बताओ।"
"मायरा ने अबीर की बात सुनकर अपने दर्द को सहते हुए आज का शेड्यूल बताया, "मिस्टर चोपड़ा के साथ एक घंटे बाद आपकी मीटिंग है।"
"अबीर ने शेड्यूल सुनकर हामी भरी और अपनी फाइल पढ़ते हुए कहा, "आज का हाफ डे ले लो और घर जाओ।"
"मायरा ने उसकी बात सुनकर सिर झुकाकर कहा, "नहीं, बॉस। मैं ठीक हूँ। मैं अपना काम करके जाऊँगी..."
"अबीर उसके मना करने पर खड़ा हुआ और उसके पास जाकर उसके कंधों को पकड़कर गुस्से में कहा, "जितना बोला जाए, उतना करो। ज़्यादा आगे बढ़ने की कोशिश मत करो।"
"अबीर के ऐसे पकड़ने से मायरा को दर्द होने लगा और उसकी आँखें नम हो गईं। उसने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, "बॉस, दर्द हो रहा है। कृपया छोड़ दीजिए।"
"अबीर ने उसे धक्का दिया। वह ज़मीन पर गिर गई। उसके मुँह से एक बार फिर आह निकल गई। अबीर व्यंग्यात्मक मुस्कराहट करते हुए बोला, "ये है तुम्हारी औकात। मेरी नज़रों में तुम जैसे लोग ज़मीन पर रहने लायक हो। अब मेरा मुँह मत देखो और घर जाओ।"
"मायरा ने अपने आँसू साफ किए और बिना कुछ कहे कैबिन से बाहर निकल गई। उसके जाते ही अबीर अपनी चेयर पर बैठकर अपना काम करने लगा। मायरा कैबिन से बाहर आकर अपनी डेस्क पर गई और अपना पर्स उठाया। तभी वहाँ एक लड़का आया, जिसकी उम्र लगभग 25 साल थी। यह कियान मेहरा था, यह ऑफिस का कर्मचारी था, जो मायरा के साथ ही काम करता था।"
"वह मायरा के पास आया। उसे मायरा के चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी। वह मायरा को देखकर चिंता भरे लहजे में बोला, "मायरा, क्या हुआ? तुम ठीक हो ना? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?"
"मायरा, जिसका ध्यान कियान पर नहीं था, किसी की आवाज़ सुनकर अचानक आने से घबरा गई और दो कदम पीछे हट गई। जब उसने सामने खड़े कियान को देखा, तो सीने पर हाथ रखकर गहरी साँस लेते हुए कहा, "तुमने तो मुझे डरा ही दिया, कियान।"
"कियान ने उसकी बात सुनकर हँसना शुरू किया और कहा, "सॉरी। तुम अकेली खड़ी थीं, तो मैं यहाँ आ गया। तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही, थकी हुई लग रही हो। तुम ठीक हो ना?"
"अबीर, जो कैबिन में बैठा सीसीटीवी फ़ुटेज देख रहा था, मायरा को किसी से बात करते देख उसकी मुट्ठी कस गई। मायरा ने उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, बस थोड़ी तबीयत खराब है। मैं घर जा रही हूँ। तुम सब संभाल लेना यहाँ।"
"कियान ने मायरा के गाल पर हाथ रख दिया। सीसीटीवी देख रहे अबीर ने जब कियान को मायरा को छूते हुए देखा, तो उसकी आँखें गुस्से से लाल हो गईं। उसके हाथों की नसें उभरने लगीं। वह झटके से लैपटॉप बंद कर किसी को फ़ोन लगाया और कुछ कहकर फ़ोन काट दिया।"
"अबीर ने फ़ोन काटकर सीसीटीवी फ़ुटेज को देखते हुए गुस्से में खुद से कहा, "तुमने खुद को किसी को छूने दिया, सनशाइन? वेरी बैड। बहुत गलत किया, बेबी। इसकी सज़ा तुम्हें ज़रूर मिलेगी।"
"कियान ने उसके गाल को छुआ। मायरा को बुखार नहीं था। वह अपना हाथ हटाते हुए मायरा से बोला, "लेकिन तुम बॉस से पूछ लो एक दफ़ा, वरना वह तुम्हें ऑफिस से निकाल देंगे। जानती हो ना, तीन दिन पहले अप्लाई करना होता है छुट्टी के लिए।"
"मायरा ने उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, मैंने बॉस से पूछ लिया है। उन्होंने कह दिया है घर जाने के लिए।"
"कियान कुछ कहता, इससे पहले ही एक चपरासी आया और कियान के हाथ में एक पत्र देते हुए बोला, "बॉस ने यह लेटर आपके लिए भेजा है।"
"कियान ने लेटर खोला और देखा। लेटर पढ़कर उसकी पकड़ लेटर पर कस गई। उसके भाव बदल गए। कियान को ऐसा करते देख मायरा ने उससे लेटर लेकर पढ़ा। लेटर पढ़कर उसकी आँखें बड़ी हो गईं। मायरा हैरानी से बोली, "रिजाइनशन लेटर? बॉस ने तुम्हें जॉब से क्यों निकाल दिया?"
"कियान ने उसकी बात सुनकर गुस्से में कहा, "पता नहीं। मैंने तो कुछ किया भी नहीं। मैं अभी बॉस से बात करूँगा और पूछूँगा उन्होंने मुझे क्यों निकाला।"
"कियान गुस्से से जाने लगा, तो मायरा ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे रोकते हुए कहा, "कृपया मत जाओ। जानते हो ना, उनके पास जाना मतलब मौत को गले लगाना।"
"कियान ने उससे अपना हाथ छुड़ाते हुए गुस्से में कहा, "होने दो। डरता नहीं हूँ मैं उनसे। वह मुझे ऐसा कैसे निकाल सकते हैं?"
"मायरा ने उसे रोकते हुए कुछ कहा, जिससे कियान रुक गया।"
मायरा डरते हुए उसका हाथ पकड़कर बोली, "प्लीज मत जाओ। जानते हो ना, उनके पास जाना मतलब मौत को गले लगाना।"
"कियान अपने हाथ को छुड़ाते हुए गुस्से में बोला, "होने दो, मैं डरता नहीं हूँ उनसे। वो मुझे ऐसे कैसे निकाल सकते हैं?"
मायरा ने उसके हाथ को कसके पकड़ लिया और उसे जबरदस्ती चेयर पर बिठाकर पानी दिया। वह उसे शांत कराने की कोशिश करते हुए घबराहट से बोली, "प्लीज शांत हो जाओ कियान। हम बॉस की बराबरी नहीं कर सकते। वो बहुत पावरफुल है। तुम उनसे उलझकर अपनी फैमिली को भी मुश्किल में डाल रहे हो।"
"कियान मायरा की बात सुनकर गुस्से में बोला, "तो बताओ क्या करूँ? ऐसे जॉब से निकाल दिया। इतने शॉर्ट नोटिस में जॉब कैसे मिलेगी?"
मायरा ने उसकी बात सुनकर उसे समझाते हुए कहा, "मिल जाएगी, फिक्र मत करो। भगवान जी सब ठीक कर देंगे। अभी तुम जाओ, बॉस ने देख लिया तो प्रॉब्लम हो जाएगी।"
कियान ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए मुस्कुराकर कहा, "इस पूरे ऑफिस में एक तुम ही हो जो मुझे समझती हो। मुझे थैंक्यू सो मच मायरा।"
मायरा मुस्कुराई। कियान ने उसके गाल पर हाथ रखा और उसे एक नज़र देखकर वहाँ से निकल गया। वहीं सीसीटीवी देख रहे अबीर की आँखें लाल अंगारे की तरह जल रही थीं। ऐसा लग रहा था वो अभी अपनी आँखों से कियान को जला देगा। उसने लैपटॉप बंद करके खड़ा हुआ और कैबिन की एक बालकनी में खड़ा हो गया। वह तिरछी नज़रों से मायरा को गाड़ी में जाते हुए देख रहा था। गाड़ी को देखकर उसने पॉकेट में हाथ डालकर गुनगुनाना शुरू कर दिया-
है ये नशा या है जहर,
इस प्यार को हम क्या नाम दें,
कब से अधूरी है एक दास्तां,
आजा उसे आज अंजाम दें।
गुनगुनाते हुए उसकी आँखें लाल हो रही थीं। वह गुस्से में बालकनी की दीवार पर अपना हाथ मार लिया। उसके हाथ से खून बहने लगा। वह इस टाइम पूरा सनकी लग रहा था। वह उस खून को देखकर एक सनकी की तरह बोला, "सनशाइन, तुम खुद को कैसे छूने दे सकती हो? बहुत आग है ना तुम्हारे अंदर, दूसरे मर्दों को अट्रैक्ट करने के लिए। आज उसे ऐसा ठंडा करूँगा कि किसी मर्द के पास जाने से पहले हज़ार बार सोचोगी, माई लवली सनशाइन।"
अबीर ने एक बार उसकी गाड़ी की तरफ देखा और अंदर आ गया।
रात का समय था।
मायरा डाइनिंग टेबल पर बैठी खाना खा रही थी क्योंकि उसने कैंटीन में भी कुछ नहीं खाया था। सुबह अबीर उसके साथ अंतरंग हुआ था जिससे उसे अभी तक दर्द हो रहा था। वह खाना खा ही रही थी कि शालिनी वहाँ आई और उससे पूछा, "मैडम आपको और कुछ चाहिए लेकर आऊँ आपके लिए?"
मायरा अपना डिनर कर चुकी थी। वह खड़े होते हुए नैपकिन से अपने हाथ साफ करते हुए बोली, "नहीं, मैंने खाना खा लिया। तुम एक काम करो, ये खिड़कियाँ बंद कर दो। मौसम खराब है, शायद तूफान आने वाला है।"
शालिनी मायरा की बात सुनकर सर झुका कर बोली, "ठीक है मैडम।"
शालिनी वहाँ से खिड़कियाँ बंद करने चली गई। मायरा भी एक नज़र मौसम को देखकर अपने रूम में आ गई। मायरा और अबीर का रूम अलग-अलग था, लेकिन अबीर मायरा को ज्यादातर अपने रूम में ही रखता था।
मायरा अपने रूम की बालकनी में खड़ी थी। वहाँ अँधेरा था। कुछ लाइट गार्डन में जल रही थीं। हवा बहुत तेज़ चल रही थी। यह हवा आने वाले तूफान का अंदेशा दे रही थी। अब कौन सा तूफान, ये तो वक्त ही बताएगा। मायरा अपने हाथों से खुद को बाहों में भरकर खुद से बोली, "क्या ज़िन्दगी है तुम्हारी मायरा वर्मा? हर रोज़ तुम्हारे साथ खेला जाता है और मेरे बाबा की ऐसी सज़ा दी जाती है जो मेरे बाबा ने की ही नहीं। खैर, तुम्हारी सुनने वाला कोई नहीं है यहाँ। तुम बिल्कुल अकेली हो मायरा।"
अपने साथ हुई ज्यादती याद करके मायरा की आँखें भर आईं। वह आसमान की तरफ देखते हुए नम आँखों से बोली, "बाबा, आपकी बेटी हार गई। बहुत कोशिश की मैंने खुद को और मम्मा को बचाने की, लेकिन आज फिर भी मम्मा कोमा में है और आपकी बेटी हर रात अपनी इज़्ज़त को नीलाम होते हुए देखती है। कैसे साबित करूँ सबको कि आपने कोई गलती नहीं की थी? वो किसी की साज़िश थी।"
मायरा आसमान की तरफ देख रही थी। उसे आसमान को देखकर बहुत सुकून मिलता था।
एक सुनसान एरिया, जहाँ परिंदों को भी पर मारने की इजाजत नहीं थी, उस एरिया में एक फ़ार्म हाउस के अंदर से किसी के चीखने की आवाज़ आ रही थी। उस फ़ार्महाउस के अंदर काफ़ी सारे बॉडीगार्ड थे और कुछ बॉडीगार्ड एक आदमी को मार रहे थे। उस आदमी के जिस्म से जगह-जगह खून निकल रहा था। उस आदमी को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता था उसे कितने घंटों से टॉर्चर किया जा रहा है। तभी उस फ़ार्म हाउस में एक परछाई एंटर करती है। उस परछाई की मौजूदगी से सारे गार्ड्स एक साइड हट जाते हैं। उस परछाई के आने से वहाँ का माहौल सर्द हो जाता है। किसी को अपने पास महसूस कर, कुर्सी से बाँधा आदमी अपनी धुंधली आँखों से उस परछाई को देखता है।
उस परछाई को देखते ही उस आदमी की आँखें बड़ी हो जाती हैं और उसके चेहरे पर पसीना आ जाता है। और अनायास ही उसके मुँह से निकलता है, "बॉस।"
जी हाँ, ये कोई और नहीं अबीर था और जो आदमी कुर्सी से बाँधा हुआ था, ये कियान था। कियान अबीर को अर्द्ध खुली आँखों से देखते हुए बोला, "आपने मुझे किडनैप क्यों किया है और मुझे इतना टॉर्चर क्यों किया जा रहा है?"
अबीर उसके पास आया और उसके हाथ पर अपना जूता रख दिया। जिससे कियान की आँखें फैल गईं और वह चीखने लगा। उसकी चीखें अबीर को सुकून दे रही थीं। उसने एक जोरदार पंच कियान के पेट में मारा जिससे कियान को खून की उल्टी हो गई और उसके मुँह से आह निकल गई। अबीर उसके बालों को पीछे से पकड़कर उसके सिर को टेबल पर मारा। कियान के सिर से खून निकलने लगा।
वह उसके बालों को मुट्ठी में भरकर गुस्से में बोला, "तूने अबीर खन्ना की चीज़ को छुआ, मेरी सनशाइन को छुआ तूने।"
कियान अब तक अधमरा हो चुका था। वह बेहोशी की हालत में बोला, "कौन सी चीज़? कौन सनशाइन? आप किस बारे में बात कर रहे हैं और मुझे क्यों मार रहे हैं?"
अबीर उसकी बात सुनकर अपनी पकड़ उसके बालों पर मज़बूत कर लेता है और गुस्से में बोला, "मायरा वर्मा, मेरी सनशाइन, मेरी प्रॉपर्टी। तूने उसे छुआ कैसे?"
अबीर का एक-एक लफ़्ज़ कियान के कानों में शीशे की तरह पिघल रहा था। मायरा का नाम सुनकर उसकी आँखें हैरानी से बड़ी हो जाती हैं और वह हैरान होते हुए बोला, "क्या बकवास कर रहे हैं आप? वो आपकी प्रॉपर्टी नहीं है, एक ज़िंदा इंसान है, समझे आप?"
अबीर उसकी बात सुनकर हँसते हुए बोला, "वो मेरी है, मेरी प्रॉपर्टी, मेरी सनक, वो लत है मेरी और तूने उसे हाथ लगाकर अपनी ज़िन्दगी की बहुत बड़ी गलती कर दी।"
अबीर की बात सुनकर कियान की आँखें हैरानी से बड़ी हो रही थीं। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसका बॉस, अबीर खन्ना, किसी के लिए इतना पागल होगा। कियान दाँत पीसते हुए बोला, "आप झूठ बोल रहे हैं। मायरा तो आपको देखना भी पसंद नहीं करती। उसका आप के साथ कोई रिश्ता कैसे हो सकता है?"
कियान की बात सुनकर अबीर हँसने लगा और उसकी तरफ झुककर कुछ ऐसा बोला जिससे कियान के चेहरे पर पसीने आ गए और वह डर से काँपने लगा।
अध्याय 7
"अबीर उसके पास झुककर गुस्से में कहा,"अभी तुझे बहुत तड़पना है। तुझे इतनी आसान मौत नहीं दूँगा। मैं भीख माँगेगा अपनी मौत के लिए, और मैं हर बार तुझे मौत के मुँह में धक्का देकर वहाँ से वापस लाऊँगा।"
"अबीर ने उसके सिर को एक बार फिर टेबल पर मारा। कियान की चीख निकल गई। उसका चेहरा खून में लथपथ हो गया और आखिरकार वह बेहोश हो गया।"
"अबीर ने अपनी जेब से रुमाल निकालकर हाथ और चेहरे पर लगे खून को साफ किया। रुमाल जमीन पर फेंकते हुए उसने कहा,"इसकी ऐसी हालत करो कि यह मरे नहीं, लेकिन ज़िन्दगी भर बिस्तर पर पड़ा रहे।"
"बॉडीगार्ड ने अबीर की बात सुनकर सिर झुकाकर कहा,"जी बॉस।"
"अबीर ने एक नज़र कियान को देखा, जो बेहोश पड़ा हुआ था। उसे देखकर वह तिरछी मुस्कराहट मुस्कराया और वहाँ से निकल गया।
वहीं, ए.के. विला में मायरा अभी भी बालकनी पर खड़ी ठंडी हवा ले रही थी। तभी उसे बाहर गाड़ी रुकने की आवाज़ आई। वह गाड़ी की आवाज़ सुनकर बिना वक़्त गँवाए, हवा की रफ़्तार से कमरे में भाग गई। वह बिस्तर पर आई और खुद को चादर से ढँककर घबराते हुए खुद से बोली,"मिस्टर खन्ना के आने से पहले सो जाती हूँ। वरना वह फिर वही सब करेंगे और मुझे झेल पाने की इतनी ताक़त नहीं है अभी मुझमें।"
अबीर गाड़ी से निकलकर आया। उसने अपने ब्लेज़र को एक हाथ में पकड़ा हुआ था। उसकी शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले थे और उसने अपनी शर्ट की स्लीव्स को कोहनी तक मोड़ा हुआ था। उसके बाल बिखरे हुए थे। उफ़्फ़! अगर अभी कोई लड़की उसे देख लेती, तो अपना दिल ज़रूर हार जाती। लेकिन एक लड़की है जो उसे देखती भी नहीं है, और वह है मायरा वर्मा। अबीर विला में आकर अपने कमरे की ओर बढ़ गया। कमरे का दरवाज़ा खोलते ही उसकी नज़र चारों तरफ़ मायरा को ढूँढ़ रही थी। उसे अपने कमरे में न देखकर अबीर की आँखें गहरी हो गईं और उसने अपना ब्लेज़र बिस्तर पर फेंक कर अपनी घड़ी हाथ से निकालकर टेबल पर रख दी और वाशरूम चला गया।
पन्द्रह मिनट बाद अबीर वाशरूम से बाहर आया। उसने एक काली टीशर्ट और ट्राउज़र पहना हुआ था। वह अपने कमरे से मायरा के कमरे की ओर चला गया। उसने कमरे का दरवाज़ा खोला। कमरे में बहुत अँधेरा था। दरवाज़े के खुलने की आहट सुनकर मायरा चादर में अपनी आँखें मूँद लेती है और मन में बोली,"कृपया भगवान जी, यह राक्षस यहाँ से चला जाए। वरना फिर से मेरे साथ वही सब करेगा। कृपया बचा लो भगवान जी।"
अबीर कमरे में आकर डिम लाइट ऑन करता है। तभी उसकी नज़र बिस्तर पर जाती है। मायरा को ऊपर से नीचे तक ढँके हुए लेटा देख अबीर की आँखें छोटी हो जाती हैं। फिर कुछ सोचकर उसके चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ जाती है। अबीर मायरा के बिस्तर के पास आता है। बिस्तर के पास साइड टेबल पर एक पानी का जग रखा हुआ था। अबीर उसे उठाकर एक झटके में मायरा के ऊपर डाल देता है। अचानक पानी पड़ने से मायरा घबरा जाती है और घबराकर उठकर बैठ जाती है। वह गहरी साँस लेने लगती है। तभी उसकी नज़र पास खड़े अबीर पर जाती है, जो उसे ही शैतानी मुस्कराहट देते हुए देख रहा था। उसे देखकर मायरा अपनी आँखें मूँद लेती है।
अबीर उसके पास आकर उसके बालों की कुछ लटों को पीछे करते हुए कहता है,"तुम्हें क्या लगा सनशाइन? तुम मुझे पागल बना दोगी? ऐसे चादर ढँककर सोने से मुझे लगेगा तुम सो रही हो। दो महीने से मुझे जानती हो, इतना भी नहीं पहचानती अपने खरीदार को?"
अबीर के मुँह से "खरीदार" सुनकर मायरा की आँखें नम हो जाती हैं। अबीर बिना किसी चेतावनी के उसे अपनी गोद में उठा लेता है। मायरा डर की वजह से अपने हाथ अबीर के गले में डाल देती है। अबीर पैर से वाशरूम का दरवाज़ा खोलता है और तेज आवाज़ से बंद करता है। एक सेकंड के लिए मायरा भी काँप जाती है।
अबीर मायरा को शावर के नीचे खड़ा कर देता है और शावर ऑन करता है। पानी पड़ने से मायरा घबराते हुए कहती है,"ये क्या कर रहे हैं आप? मुझे शावर के नीचे क्यों...?"
मायरा अपनी बात पूरी करने से पहले ही उसकी चीख निकल जाती है और उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं क्योंकि अबीर उसके हाथों को तेज़ी से रगड़ रहा था। मायरा अबीर को खुद से दूर करने लगती है और रोते हुए कहती है,"ये आप क्या कर रहे हैं? प्लीज़ छोड़िये मुझे, दर्द हो रहा है।"
अबीर उसके गालों को रगड़ता है और उसकी आँखों में देखते हुए सनक भरे लहज़े में कहता है,"श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह शांत, सनशाइन! तुम ऐसा कैसे कर सकती हो मेरे साथ?"
मायरा उसकी बात सुनकर कन्फ़्यूज़ हो जाती है और रोते हुए कहती है,"क्या किया है मैंने आपके साथ?"
अबीर उसके गाल को रगड़कर लाल कर देता है। मायरा और तेज़ी से रोने लगती है। अबीर ने उसके हाथ और गालों को इतना रगड़ दिया था कि जैसे अभी खून आ जाएगा। अबीर रगड़ते हुए गुस्से में कहता है,"तुमने उस कियान को खुद को क्यों छूने दिया और तुमने उसका हाथ क्यों पकड़ा सनशाइन?"
अबीर की बात सुन मायरा की आँखों के सामने ऑफिस का दृश्य घूम जाता है और वह रोते हुए कहती है,"वो मेरा दोस्त है। हम सिर्फ़ बात कर रहे थे। प्लीज़ मत करिये, मुझे दर्द हो रहा है।"
अबीर उसकी बात सुनकर सनक भरे लहज़े में कहता है,"उसे मैंने उसके अंजाम तक पहुँचा दिया। उसने मेरी लत को, मेरी सनक को छूने की हिम्मत की थी। सज़ा तो मिलनी ही थी।"
अबीर की बात सुन मायरा की आँखें हैरानी से बड़ी हो जाती हैं और वह घबराकर पूछती है,"क्या... क्या किया है आपने उसके साथ? प्लीज़ उसकी कोई गलती नहीं है?"
अबीर उसकी बात सुनकर तिरछी मुस्कराहट मुस्कराता है और उसकी बाज़ू को पकड़कर गुस्से में कहता है,"बहुत फ़िक्र हो रही है तुम्हें अपने यार की? क्या उसके साथ भी सो चुकी हो तुम?"
अबीर की बात सुन मायरा गुस्से में भर जाती है और अबीर को धक्का देती है। अबीर इस हरकत के लिए तैयार नहीं था। मायरा के धक्का देने से वह दो कदम पीछे हट जाता है। मायरा उसके पास जाकर उसके कॉलर को पकड़ लेती है और गुस्से में चीखते हुए कहती है,"आपने क्या समझ रखा है मुझे? आप खुद मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाकर मेरे साथ खेलते हैं। मैं आपकी तरह गिरी हुई नहीं हूँ जो किसी के भी साथ सो जाऊँ। घिन आ रही है मुझे आपसे। कोई इतना घटिया कैसे हो सकता है?"
अबीर मायरा के हाथों को अपने कॉलर से हटाकर उसके बालों को पीछे से मुट्ठी में भरकर गुस्से में कहता है,"बहुत शौक है ना तुम्हें चीखने का? आज तुम्हारी यह इच्छा भी पूरी कर दूँगा। आज पूरी रात तुम मेरे नीचे चीखोगी।"
इतना कहकर अबीर उसे दीवार से सटा देता है और उसके होठों को अपने मुँह में भर लेता है। मायरा की आँखें डर से बड़ी हो जाती हैं। अबीर मायरा के होठों को पागलों की तरह चूस रहा था। वह उसके होठों को काटने लगता है। दर्द से मायरा की आँखों में आँसू आ जाते हैं। अबीर उसके होठों को छोड़कर उसकी गर्दन को बेरहमी से चूमने और काटने लगता है। आज अबीर पूरा जानवर बन चुका था। आज वह मायरा को निगल जाना चाहता था। उसके हाथ मायरा के पूरे शरीर पर चल रहे थे। वह मायरा के शरीर के हर हिस्से को अपने दाँतों से काट रहा था। मायरा की चीखें पूरे वाशरूम में गूँज रही थीं।
अबीर मायरा के सारे कपड़े उतार देता है। वह अपना ट्राउज़र निकालकर मायरा को अपनी गोद में उठा लेता है। मायरा डर के मारे अपने पैरों को उसकी कमर पर लपेट देती है। वह मायरा के अंदर बिना किसी चेतावनी के खुद को समा लेता है। एक दिल चीरने वाली चीख पूरे वाशरूम में गूँज जाती है। अबीर मायरा के साथ बेरहमी से सब करने लगता है।
अध्याय 8
"वाशरूम में मायरा की चीखें निकल रही थीं क्योंकि अबीर उसके साथ यह सब बहुत बुरी तरीके से कर रहा था। अबीर उसे गोद में उठाकर वॉशरूम से बाहर आया और उसे बेड पर पटक दिया। मायरा की चीख निकल गई। अबीर बेड पर आकर उसके पैरों को अलग किया और एक बार फिर उसमें समा गया, और बहुत ही बेरहमी से उसके साथ अंतरंग होने लगा। सुबह के पाँच बजे मायरा की चीखें बंद हुईं। अबीर उसे धक्का देकर बेड पर पेट के बल सो गया। मायरा बेड पर बेहोश पड़ी हुई थी। अबीर कल से उसके साथ अंतरंग हो रहा था जिससे वह बहुत थक चुकी थी।"
अगली सुबह
"करीब आठ बजे अबीर की आँख खुली। वह भी रात थक हारकर पाँच बजे सोया था। वह बेड से उठा और मायरा को एक नज़र देखा। मायरा बेड पर ज़िंदा लाश की तरह पड़ी हुई थी। मायरा को ऐसी हालत में देखकर अबीर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई। उसने उसे उसी हालत में छोड़कर जिम के लिए चला गया।"
"अबीर जिम कर रहा था। उसके चेहरे पर रात के बाद से बहुत सुकून था। वह दाँत पीसते हुए खुद से कहता है, "तुम्हारी इस हालत की ज़िम्मेदार तुम और तुम्हारा बाप है। नफ़रत करता हूँ मैं तुम लोगों से। तुम्हारे बाप की वजह से मैं अनाथ हो गया। जब मुझे खुशी नहीं मिली तो तुम्हें खुशी कैसे मिल सकती है? ऐसे ही हर रोज़ तुम तड़पोगी।""
"अबीर जिम करके जब रूम में आया तो उसकी नज़र मायरा की तरफ़ गई। मायरा अभी भी उसी हालत में पड़ी हुई थी। वह इधर से उधर हिली भी नहीं थी। उसे देखकर लग रहा था मानो उसमें जान ही नहीं है। अबीर मायरा को उठाने के लिए उसके करीब आया और उसका हाथ पकड़ा। तभी उसे फील हुआ कि मायरा को बहुत तेज बुखार है।"
"वह उसका हाथ छोड़कर पॉकेट से फ़ोन निकालकर अंश को कॉल करता है और कहता है, "बीस मिनट में एक फ़ीमेल डॉक्टर को भेजो।""
"अपनी बात कहकर अबीर फ़ोन काट देता है और अपने फ़ोन को टेबल पर रखकर गहरी साँस लेकर मायरा को गोद में उठाकर वाशरूम की तरफ़ बढ़ जाता है। मायरा अभी भी बेजान गुड़िया की तरह उसकी गोद में सिमटी हुई थी। अबीर उसे वाशरूम ले जाकर बाथटब में लिटाकर उसे साफ़ करने लगा। थोड़ी देर साफ़ करने के बाद अबीर उसे बाथरोब पहनाकर अपनी गोद में उठाकर वाशरूम से बाहर लाया। उसने मायरा को बेड पर लिटा दिया। उसने मेड को कहकर पहले ही बेडशीट बदलवा ली थी। वह मायरा के लिए अपने वॉर्डरोब से अपनी टी-शर्ट और लोअर लाता है और उसे पहना देता है। मायरा टी-शर्ट और लोअर में जोकर लग रही थी। कहाँ वह पाँच फीट की चुहिया और कहाँ छह फीट इंसान के कपड़े! अबीर उसे शांति से, इमोशनलेस होकर देखने लगा।"
"करीब बीस मिनट बाद किसी ने गेट पर खटखटाया। अबीर भारी कदमों से जाकर गेट खोल दिया। रूम में अंश और एक फ़ीमेल डॉक्टर एंटर करते हैं। अबीर की प्रेजेंस से ही डॉक्टर काँप रही थी क्योंकि वह जानती थी कि यह कितना सनकी इंसान है। अगर डॉक्टर ने कोई भी गलत काम किया तो वह उन्हें मौत के घाट उतारने में वक्त नहीं लगाएगा। यही सोचकर डॉक्टर डर रही थी।"
"अबीर मायरा की तरफ़ देखकर डॉक्टर को कहता है, "चेक करो इसे, क्विकली।""
"अबीर की बात सुनकर डॉक्टर मायरा के पास जाकर उसे चेक करती है। वह अबीर के जाने का इंतज़ार कर रही थी, लेकिन अबीर अपनी जगह पर खड़ा डॉक्टर को घूर रहा था। डॉक्टर उसकी नज़रों से ही काँप रही थी। आखिर में डॉक्टर डरते हुए हिम्मत करके कहती है, "मिस्टर खन्ना, आपको बाहर जाना होगा, प्लीज़।""
"डॉक्टर की बात सुन अबीर की आँखें छोटी हो जाती हैं और वह डॉक्टर को खा जाने वाली नज़र से घूरता है, जिससे डॉक्टर के अंदर डर की लहर दौड़ जाती है। अबीर उन्हें घूरते हुए कहता है, "जो करना है मेरे सामने करो।""
"डॉक्टर अबीर की बात सुनकर रोने जैसी शक्ल बना लेती है और रोने जैसी शक्ल बनाकर अबीर के पीछे खड़े अंश को देखती है। अंश उसका इशारा समझकर अबीर के पास आता है और अबीर से कहता है, "बॉस, प्लीज़ बाहर चलिए। ऐसे डॉक्टर चेकअप नहीं कर पाएगी।""
"अबीर अंश की बात सुनकर डॉक्टर को घूरते हुए कहता है, "मैं कहीं नहीं जाऊँगा। बोला ना, जो करना है मेरे सामने करो।""
"अबीर की बात सुनकर अंश अपना सर पीट लेता है और एक बार फिर से कोशिश करते हुए अबीर से कहता है, "प्लीज़ बॉस, बात समझने की कोशिश करें और बाहर चलें। डॉक्टर ऐसे आपके सामने चेकअप करने में अनकम्फ़र्टेबल है।""
"अबीर डॉक्टर और अंश को खा जाने वाली नज़र से देखकर बाहर चला जाता है। डॉक्टर तो उसकी नज़रों से ही सहम चुकी थी। अबीर के जाते ही अंश भी उसके पीछे चला जाता है। अबीर के जाते ही डॉक्टर गहरी साँस लेती है और मायरा को चेक करने लगती है। अबीर बाहर खड़ा इधर से उधर टहल रहा था।"
"करीब पंद्रह मिनट बाद डॉक्टर रूम से बाहर आती है और डरते हुए अबीर के सामने खड़ी हो जाती है और हिचकिचाते हुए कहती है, "मिस्टर खन्ना, मुझे आपसे अकेले में कुछ बात करनी है।""
"डॉक्टर की बात सुनकर अबीर अंश को वहाँ से जाने का इशारा करता है, जिससे अंश वहाँ से चला जाता है। अबीर डॉक्टर की तरफ़ देखकर कहता है, "बोलो, क्या बात करनी है? और वह ठीक तो है ना?"
"डॉक्टर अबीर की बात सुनकर एक गहरी साँस लेती है। अबीर की मौजूदगी से तो डॉक्टर की आवाज़ भी नहीं निकल रही थी। वह खुद को शांत करते हुए एक ही साँस में बोलना शुरू करती है, "मिस्टर खन्ना, मिस मायरा का रेप हुआ है। बहुत बेरहमी से उनके साथ यह सब किया गया है। उनके शरीर पर काटने और नोचने के निशान हैं। उन्हें बहुत तेज बुखार है और उनके प्राइवेट पार्ट में सूजन हो गई है। मैंने उन्हें इंजेक्शन दिया है जिससे वह गहरी नींद में सो रही है। उन्हें प्रॉपर केयर की ज़रूरत है। आप उनका ख्याल रखें। यह पुलिस केस है। बेहतर होगा आप पुलिस को इसमें इन्वॉल्व कर लें।""
"डॉक्टर ने एक ही साँस में सब बोल दिया था जिससे वह गहरी-गहरी साँसें लेने लगती है। डॉक्टर को क्या ही पता, वह जिसे मायरा के रेप के बारे में बता रही है उसी आदमी ने उसके साथ यह सब किया है। अबीर डॉक्टर की बात सुनकर उसे घूरते हुए कहता है, "तुम्हारी एडवाइस नहीं चाहिए, इसलिए अपनी बकवास बंद करो और दफ़ा हो जाओ।""
"अबीर की बात सुनकर डॉक्टर का मुँह बन जाता है और वह अबीर को एक डिस्क्रिप्शन देते हुए कहती है, "आप उन्हें यह दवाई देते रहना। अब मैं चलती हूँ। कोई प्रॉब्लम हो तो यू विल कॉल मी।""
"अबीर डिस्क्रिप्शन लेकर अपना सर हिला देता है। अबीर की परमिशन लेकर डॉक्टर वहाँ से निकल जाती है। डॉक्टर के जाते ही अंश वहाँ आता है। अबीर अंश को डिस्क्रिप्शन देकर अपने रूम में बढ़ जाता है। डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन दिया था इसलिए वह गहरी नींद में सो रही थी। अबीर उसके ऊपर से ब्लैंकेट हटाता है और उसके पूरे शरीर को देखता है जिस पर उसके दिए हुए ज़ख्म चीख-चीख कर उसकी बेरहमी की गवाही दे रहे थे। अबीर के चेहरे पर कोई इमोशन नहीं था। वह बिना भाव के एकटक उसे देख रहा था। वह मायरा के माथे को छूकर देखता है। मायरा को अभी भी बुखार था। वह उसे ब्लैंकेट से अच्छे से कवर करके मायरा को एक नज़र देखकर वहाँ से चला जाता है।"
"अबीर हाथों की स्लीव्स को कोहनी तक फोल्ड किए हुए और एक हाथ में ब्लेज़र पकड़े हुए नीचे आता है और डाइनिंग एरिया में काम कर रही शालिनी से आकर कहता है, "मैडम, उठ जाएँ तो उन्हें सूप बनाकर दवाई दे देना। कोई प्रॉब्लम हो तो अंश को कॉल कर लेना और मैडम से कहना वह घर पर रहकर आराम करें।""
"शालिनी अबीर की बात सुनकर हाँ में सर हिला देती है। अबीर बिना कुछ कहे वहाँ से चला जाता है।"
अध्याय 9
"अबीर, मैडम उठ जाएँ तो उन्हें सूप बनाकर दवा देकर सुला देना। और कोई समस्या हो तो अंश को फ़ोन कर देना।"
"शालिनी ने अबीर की बात सुनकर हाँ में सिर हिला दिया। अबीर बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया।"
दोपहर का समय था।
"मायरा नींद में कसमसाने लगी। खिड़की से आ रही तेज धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। वह धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलने लगी। उसकी आँखों के आगे अभी भी अंधेरा छाया हुआ था। वह पूरी तरह से ठीक नहीं हुई थी। इंजेक्शन लेने से उसकी नींद पूरी हो चुकी थी, इसलिए उसे थोड़ा आराम था। उसने अर्द्ध-खुली आँखों से पूरे कमरे को देखा।"
काफी देर बेहोश रहने की वजह से उसका सिर दर्द से फट रहा था। मायरा ने अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहा, "आह! ये सिर में इतना दर्द क्यों हो रहा है मेरे?"
"मायरा ने अपनी आँखें खोलकर मसलीं और ब्लेन्केट को अपने ऊपर से हटाकर उठकर बैठ गई। तभी उसकी एक चीख निकल गई। उस दर्द को महसूस करके उसे पिछली रात अबीर की दरिंदगी याद आ गई और पल भर में उसकी आँखें नम हो गईं। तभी उसकी नज़र अपने कपड़ों पर गई। उसने अबीर की शर्ट पहन रखी थी जो उसकी जांघों तक आ रही थी। वह इस शर्ट को अच्छी तरह पहचानती थी। उस शर्ट से आ रही खुशबू से उसे नफ़रत हो रही थी।"
"मायरा ने गुस्से में उस शर्ट को उतारकर फेंक दिया और खुद को चादर से ढँक लिया। मायरा ने उसकी शर्ट को देखते हुए गुस्से में कहा, "मुझे आपके वजूद के साथ-साथ आपकी हर उस चीज़ से नफ़रत हो रही है जो आपसे संबंधित है, मिस्टर खन्ना! आपने जो मेरे साथ किया है, वो कोई अपने दुश्मन के साथ भी नहीं करता। इसके लिए मैं आपको कभी माफ़ नहीं करूँगी।""
"वह हिम्मत करके बिस्तर से उठी, कि एक बार फिर उसकी चीख निकल गई। वह खुद को संभालते हुए लँगड़ाकर बाथरूम गई। कुछ देर बाद वह शॉवर लेकर बाहर आई। उसने बाथरोब पहना हुआ था। वह चेंजिंग रूम की ओर बढ़ी और वॉर्डरोब से एक टॉप और जीन्स निकालकर बदल ली। वह बाहर आकर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हुई और अपने बालों को संवारने लगी।"
"उसने अपने बालों की पोनीटेल बना ली। वह अपने होंठों पर लिप बाम लगा रही थी, तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया। उसने गेट की ओर देखते हुए कहा, "आ जाओ।""
"इजाज़त पाकर शालिनी अंदर आई और मायरा के पास सिर झुकाए हुए बोली, "गुड आफ्टरनून मैम, आपके लिए सूप बनाया है। क्या मैं ले आऊँ? फिर आपको दवा भी लेनी है।""
"मायरा ने शालिनी को सिर झुकाए खड़ा देखकर नाराज़ होते हुए कहा, "शालिनी, मैंने कितनी बार कहा है मेरे आगे सिर ना झुकाया करो। सिर सिर्फ़ भगवान के आगे झुकता है।""
"शालिनी ने मायरा की बात सुनकर सिर उठाकर उसे देखा और कहा, "अगर मैं भगवान जी के बाद किसी को अपना मानती हूँ, वो सिर्फ़ आप और साहब। आप दोनों के बिना इस जहाँ में मैं और मेरी बेटी बिल्कुल लाचार हैं।""
"मायरा ने शालिनी की बात सुनकर मुस्कुराया और उसके पास आकर उसके कंधे थपथपाते हुए कहा, "अपने भक्तों को सब कुछ देने वाला भगवान होता है। उसने तुम्हारे लिए सहारा बनाया है और उसके होते हुए तुम कभी लाचार नहीं हो सकतीं। वह खुद देता है, लेकिन ज़रिया दूसरे को बनाता है। इसका यह मतलब तो नहीं कि हम ज़रिये को याद रखें और देने वाले को भूल जाएँ। और मैं भी तुम्हारे जैसी आम लड़की हूँ, इसलिए मेरे सामने सिर ना झुकाया करो। मैं भी यहाँ सिर्फ़ अपनी माँ के लिए हूँ।""
"शालिनी ने उसकी बात सुनकर हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा, "भगवान आपको हमेशा खुश रखें मैडम।""
"शालिनी की बात सुनकर मायरा की मुस्कान गायब हो गई और उसके चेहरे पर दर्द छा गया। पुरानी बातें सोचकर उसकी आँखें नम हो गईं। उसने नम आँखों से शालिनी की तरफ़ देखते हुए कहा, "जिस दिन मेरी माँ का एक्सीडेंट हुआ था, मेरी दुनिया उसी वक़्त उजड़ गई थी और खुशी से मेरा रिश्ता भी उसी वक़्त टूट गया था। खुश रहने की दुआ मत दो, ये दुआ दो कि मेरी माँ ठीक हो जाए।""
"शालिनी ने मायरा की बात सुनकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, "मैडम, आप भगवान को मानती हैं?"
"शालिनी की बात सुनकर मायरा कंफ्यूज़ हो गई और उसे देखते हुए बोली, "ये कैसा सवाल है शालिनी? भगवान को कौन नहीं मानता? वो हमारे कर्ता-धर्ता हैं, हमारी किस्मत लिखने वाले हैं।""
"शालिनी ने मायरा की बात सुनकर हल्की मुस्कान करते हुए कहा, "तो आप ये भी मानती होंगी कि भगवान अपने बच्चों के साथ कभी गलत नहीं करते?"
"मायरा शालिनी की बातों से बहुत कंफ्यूज़ हो रही थी। उसने उसे देखकर कहा, "हाँ, मानती हूँ, पर तुम ये क्यों पूछ रही हो?"
"शालिनी ने उसे कंफ्यूज़ होते देख हँसने लगी और उसे देखते हुए बोली, "वो अपने बच्चों के साथ गलत नहीं कर सकते, तो आप भी तो उनके बच्चे हो ना? क्या पता अगर उन्होंने आपको इस मुश्किल में डाला है, तो आगे चलकर वो आपको बेहतरीन नसीब करें। या हो सकता है आपकी किस्मत में बेहतर लिखा चुका हो, वो सिर्फ़ उस बेहतर को बेहतरीन बनाना चाहते हों।""
"मायरा ने शालिनी की बात सुनकर उससे दूर होकर बिस्तर की ओर जाते हुए कहा, "जानती हूँ वो अपने बच्चों के साथ कभी गलत नहीं करते, लेकिन इन सब में मेरी माँ का क्या कसूर है शालिनी? वो हॉस्पिटल के बिस्तर पर ज़िंदा लाश बनी हुई है। मैंने उन्हें दो महीने से नहीं देखा है। मेरा दिल तड़पता है उनके बारे में सोचकर।""
"शालिनी मायरा की तरफ़ आई और उसकी आँखों में देखते हुए बोली, "ये भी भगवान की मर्ज़ी है मैडम। क्या पता उन्होंने कुछ अच्छा सोचा हो आपकी और आपकी माँ की ज़िंदगी के लिए। भगवान पर भरोसा रखें, वो आपको कभी निराश नहीं करेंगे। आपकी माँ जल्दी ठीक हो जाएंगी। आप रोना बंद करो, वो आपको ऐसे देखकर बहुत तकलीफ़ करेंगी।""
"शालिनी की बात सुनकर मायरा ने अपने आँसू साफ़ किए। शालिनी की आँखों के सामने कुछ गुज़र गया और उसे अपने अतीत की याद आ गई। वह मायरा के बगल में बैठ गई और अपने अतीत की याद करते हुए बोली, "आपको पता है मेरे माँ-बाप ने मेरी शादी बहुत कम उम्र में एक शराबी से करा दी थी। उन्होंने अपनी लालच के लिए अपनी बेटी की बलि चढ़ा दी। मेरा पति रोज़ शाम आकर मुझे मारता था, मुझसे शराब पीने के लिए पैसे माँगता था। ऐसे ही एक साल गुज़र गया। हमारी शादी के एक साल बाद हमारी एक बेटी हुई। मेरे पति को बेटा चाहिए था। उसने मेरी बेटी से हमेशा सिर्फ़ नफ़रत की। फिर एक दिन..."
"शालिनी अपनी बात अधूरी छोड़कर सिसकने लगी। शालिनी को देखकर मायरा को भी दुख हुआ क्योंकि वह बहुत नर्म दिल की थी। दूसरों की तकलीफ़ देखकर उसे दर्द होता था। मायरा शालिनी के पास आकर उसे गले लगाकर उसके सिर को सहलाते हुए बोली, "एक दिन क्या शालिनी?"
"शालिनी सिसकते हुए मायरा से अलग होकर अपने आँसू साफ़ करते हुए बोली, "एक दिन मेरे पति ने मेरी बेटी को जलाने की कोशिश की। उस वक़्त मेरी बेटी तीन साल की थी। लेकिन भगवान की कृपा से मेरी बेटी बच गई। और उस दिन मैं अपनी तीन साल की बेटी को लेकर उसके घर से चली गई। मैं रात में अकेले रास्ते में अपनी बेटी को लेकर भटक रही थी। सर्दी का समय था और मैं बहुत कमज़ोर थी। मैं चलते-चलते रोड पर बेहोश हो गई। मेरी बच्ची मेरे पास बैठी बिलख रही थी। अगर उस रात मैं अपनी बेटी को लेकर उसके घर से नहीं निकलती, तो वो मेरी बेटी को ज़रूर मार देता। और माँ के लिए उसके बच्चे से ज़रूरी कोई नहीं होता।"
Chapter_10
"शालिनी सिसकते हुए मायरा से अलग होकर अपने आंसू साफ करती है और कहती है_एक दिन मेरे पति ने मेरी बेटी को जलाने की कोशिश की उस वक्त मेरी बेटी 3 साल की थी लेकिन भगवान की कृपा से मेरी बेटी बच गई और उस दिन मैं मेरी 3 साल की बेटी को लेकर उसके घर से चली गई मैं रात में अकेले रास्ते में अपनी बेटी को लेकर भटक रही थी सर्दी का टाइम था और मैं बहुत कमजोर थीं मैं चलते चलते रोड पर बेहोश हो गई मेरी बच्ची मेरे पास बैठी बिलख रही थी अगर उस रात मैं अपनी बेटी को लेकर उसके घर से नहीं निकलती तो वो मेरी बेटी को जरूर मार देता और मां के लिए उसके बच्चे से जरूरी कोई नहीं होता."
"शालिनी नम आंखों से घबराहट में अपने हाथो को rough करती है और कहती है _3 घंटे बाद मेरी आंख खुली तो मैं किसी के घर पर थी मैं नहीं जानती थी ये किसका घर है मेरे लिए अनजान जगह थी खुद को अनजान जगह पर देखकर मैं घबरा गई फिर मुझे मेरी बेटी याद आई मैंने आस_पास घबराते हुए देखा तो मेरी बेटी मेरे पास लेटी सो रही थी उसे देखकर मेरी जान में जान आई और मैं उसे अपने सीने से लगाकर रोने लगी तभी उस रूम में कोई आया वो कोई और नहीं अंश साहब थे तब उनकी उमर 12_13 के आसपास होगी और अबीर साहब की उमर 13_14 होगी मैं उनके चेहरे को गौर से देख रही थी क्युकी मैने उन्हे आज से पहले मैने उन्हें कभी नही देखा था वो दोनों बच्चे थे लेकिन फिर भी शकल से बहुत समझदार लग रहे थे किसी अनजान को देखकर मैं खौफ से भर गई और अपनी बेटी को और कसकर अपनी बाहों में भर लिया और घबराई नजरो से उन्हे देखने लगी."
वो मेरी हालत समझ रहे थे वो मेरी हालत समझते हुए मुझसे दो कदम दूर हो गए और बोले_ की आपको घबराने की जरूरत नहीं है आप बीच रोड पर बेहोश पड़ी थी तो मेरे बॉस आपको यहां ले आए उनकी बात सुनके मुझे थोड़ी राहत हुई उन्होंने मुझसे पूछा की मैं इतनी रात को सुनसान रोड पर क्या कर रही थी मैने उन्हे शुरू से आखिर तक सारी कहानी बताई तो उन्होंने कहा की मुझे चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है आप यहां रह सकती है मैं पहले तो डर गई थी मैं उनका अहसान नहीं चाहती तो मैने कहा मैं यहां नही रहूंगी उन्होंने बोला मेरी तबियत खराब है डॉक्टर ने रेस्ट को कहा है तो मैने कहा मैं आपका अहसान नहीं चाहती तो अंश साहब ने मुझे मेड का काम सजेस्ट किया क्युकी मेरी पढ़ाई पूरी नहीं हुई थी तो मुझे और कही जॉब नहीं मिलती."
"मैं काम के लिए मान गई मैं A.K Vila में काम करने लगी तभी एक दिन मैं मार्केट जा रही थी तो मेरा पति मिल गया वो मुझसे जबरदस्ती करने लगा रोड पर कुछ लोग ने वीडियो बनाई पर कोई मदद के लिए नहीं आया तभी वहा अंश साहब की कार गुजरी उन्होंने मेरे पति को तमाशा करते देखा तो उन्होंने मेरी मदद की अबीर साहब ने मेरी बेटी को पढ़ने के लिए स्कूल भेजा अब मेरी बेटी 18 साल की है और वो हॉस्टल रहती है
अबीर साहब ने जितना मेरे लिए किया है उतना कोई सगा भी नही करता पहले वो काफी अच्छे थे एक दिन उनकी फैमिली का एक्सीडेंट हो गया पता नही कैसे तब से साहब बेरहम पत्थर दिल बन गए और उन्हे किसी से फर्क पढ़ना बंद हो गया क्युकी उनकी फैमिली उनकी जान थी अबीर साहब मेरे लिए किसी फरिश्ते की तरह आए थे."
"मायरा जैसे जैसे शालिनी की बात सुन रही थी उसकी आंखे हैरानी से बड़ी हो रही थी उसके लिए यकीन करना मुश्किल था जो आदमी उसके साथ हर रोज बेदर्दी करता है उसे रुलाता है उसे तकलीफ देने में कोई कसर नहीं छोड़ता वो किसी के लिए इतना कर सकता है मायरा अपने ख्यालों को झटक कर शालिनी की तरफ देखकर कहती है_क्या नाम है आपकी बेटी का.??
"अपनी बेटी का जिक्र सुन शालिनी के चेहरे पर चमक आ जाती है और वो मुस्कुराते हुए कहती है_उसका नाम कशिश है और वो कल आने वाली है उसकी graduction कंपलीट हो गई."
"मायरा उसकी बात सुनकर घबराते हुए कहती है_तो क्या वो भी यहां मेड का काम करेगी.?
"शालिनी मायरा को अपनी बेटी की फिक्र करता देख हल्का सा मुस्कुराती है और कहती है_नही मैडम वो यहां ये काम नही करेगी वो अबीर सर की जान है उसे बहन मानते है उन्होंने इसे पढ़ा लिखाकर इस मकाम तक इसलिए पहुंचाया है ताकि वो अपनी मां की तरह बेसहारा ना रहे वो आजाद रह सके उसे लड़ने के लिए किसी के सहारे की जरूरत नहीं पड़े."
"शालिनी की बात सुनकर मायरा के चेहरे पर चमक आ जाती है और वो खुशी से चहकते हुए कहती है_ये तो और अच्छी बात है कोई लड़की आ जाएगी घर में, मैं बहुत बोर हो जाती हूं बैठे बैठे जब वो आएगी तो हम खूब बाते करेंगे."
"शालिनी उसकी खुशी देख मुस्कुराकर कहती है_जी बिल्कुल मैडम अभी आप नीचे चलकर सूप पी लीजिए और दवाई ले लीजिए वरना साहब गुस्से करेंगे."
"अबीर का जिक्र सुन मायरा की मुस्कुराहट गायब हो जाती है और वो कहती है_आप चले मैं आती हूं."
"शालिनी वहां से जाते हुए कहती है_जी मैडम."
"शालिनी वहा से चली जाती है तभी मायरा बेड के एक हिस्से से एक फोटो निकालती है उस फोटो को देखकर उसकी आंखे नम हो जाती है वो उस फोटो चूमकर अपने सीने से लगा लेती है और सिसकते हुए कहती है _ मम्मा उठ जाओ आपकी बेटी आपको बहुत मिस करती है मेरे पास बाबा तो है नही अब आपने भी अपनी बेटी को अकेला छोड़ दिया i miss you so much mamma प्लीज जल्दी ठीक हो जाओ."
"मायरा उस फोटो को अपने सीने से हटाकर एक बार फिर चूम लेती है और उसे बेड के कोने पर छुपा देती है और अपने आंसू साफ कर नीचे की तरफ बढ़ जाती है वही कोई था जो उसपर नजर रखे हुए था उसके हर एक्शन को नोटिस कर रहा था ये कोई और नही अबीर था जो ऑफिस मे बैठे हुए मायरा के कमरे की लाइव फोटेज देख रहा था अबीर ने अपने घर के हर हिस्से में सीसीटीवी लगवाए है जिससे वो अपने घर पर नजर रख सके."
"मायरा को इस तरह अपनी मां के फोटो को चूमता देख अबीर की मुट्ठी कस जाती है और वो सनक लहजे में खुद से कहता है _ सनशाइन नॉट फेयर तुम ऐसा कैसे कर सकती हो मेरे साथ तुम्हारे इन लबों पर तो सिर मेरा हक है तुम अपने इन होटों से किसी और को कैसे छू सकती हो सजा तो मिलेगी बहुत बुरी सजा कोई मेरी चीज को छुए तो मुझे सहन नही तुम तो फिर भी मेरी मिस्ट्रेस हो."
"इतना कहकर वो किसी सनकी की तरह तिरछी गर्दन करके मुस्कुराने लगता है अगर कोई उसे इस तरह देख लेता तो हार्ट अटैक से ही मर जाता."
thankyou for read..
अध्याय 11
"अबीर, सनक भरे लहजे में बोला, 'सनशाइन नॉट फेयर! तुम ऐसा कैसे कर सकती हो मेरे साथ? तुम्हारे इन होठों पर तो मेरा ही हक है! तुम अपने होठों से किसी और को कैसे छू सकती हो? सजा मिलेगी, बहुत बुरी सजा! कोई मेरी चीज को छुए, तो मुझे सहन नहीं! तुम तो फिर भी मेरी मिस्ट्रेस हो।'"
"इतना कहकर वह सनकी की तरह हँसने लगा। अगर कोई उसे इस तरह देख लेता, तो हार्ट अटैक से ही मर जाता।"
रात का समय था।
"आज आसमान बहुत खूबसूरत लग रहा था। हवाएँ अपनी चरम सीमा पर थीं। वहाँ का मौसम बहुत ठंडा था, जो वहाँ के नज़ारे को और खूबसूरत बना रहा था। उसी टैरिस पर मायरा झूले पर सिमटी हुई, एकटक चाँद को देख रही थी। उसे बचपन से ही चाँद देखना बहुत पसंद था। मंद-मंद हवा के झोंके उसके रूह में उतर रहे थे। उसने अपना नाईट सूट पहना हुआ था और बालों को पोनी बनाई हुई थी, जिसमें हवा की वजह से कुछ बाल उसके चेहरे पर आकर उसे तंग कर रहे थे, जिसे वह बहुत अदा से पीछे कर रही थी।"
"चाँद की रौशनी में उसका चेहरा और चमक रहा था। मायरा चाँद को देखकर खुद से बोली, 'कितना खूबसूरत लगता है चाँद! दूर से कोई नहीं कह सकता कि इसमें दाग होगा। लेकिन कहते हैं ना, अक्सर खूबसूरत चीज सिर्फ़ बाहर से अच्छी होती है, अंदर से दागदार होती है, इस चाँद की तरह।'"
मायरा हवाओं को महसूस कर एक बार फिर अपनी पुरानी यादों में चली गई और अपनी आँखें बंद कर लीं।
फ्लैशबैक शुरू
"सात साल की एक लड़की, छत्तीस साल के एक आदमी के साथ टैरिस पर बैठी हुई थी। उस लड़की ने एक पिंक फ्रॉक पहनी हुई थी और अपने बालों को दो चोटी किया हुआ था, जिसमें वह बहुत खूबसूरत लग रही थी। चाँद की रौशनी में उसका गोरा रंग चमक रहा था। यह मायरा थी और इसके साथ जो आदमी था, वह मायरा के बाबा, रोहन थे।"
"मायरा अपने बाबा के साथ बैठी चाँद देख रही थी। तभी मायरा मुस्कुराते हुए अपने बाबा का हाथ पकड़कर बोली, "बाबा, ये चाँद कितना खूबसूरत लग रहा है ना?"
रोहन जी अपनी बेटी की बात सुन मुस्कुराकर उसके माथे को चूम लेते हैं और कहते हैं, "हाँ बेटा, यह चाँद बहुत खूबसूरत है, लेकिन सिर्फ़ दूर से। वरना पास देखने पर पता चलता है कि चाँद में भी दाग हैं। कुछ खूबसूरत चीजें सिर्फ़ बाहर से अच्छी होती हैं, अंदर से दागदार होती हैं। हर इंसान में कोई न कोई कमी होती है।"
"मायरा अपनी बाबा की बात सुन कन्फ्यूजन से अपना सर खुजाती है। उस मासूम सी बच्ची को इतने बड़े-बड़े लफ़्ज़ कहाँ समझ आने वाले थे? वह अपने बाबा को टुकुर-टुकुर देखने लगती है। फिर अचानक उसके दिमाग में कुछ आता है, जिससे वह उदास हो जाती है और तभी वह उदास चेहरे से कहती है, "बाबा, तो क्या मायरा में भी दाग है? वह भी तो बहुत प्यारी है।"
"रोहन जी अपनी बेटी की मासूमियत देखकर उसे अपने सीने से लगा लेते हैं और उसे प्यार से समझाते हुए कहते हैं, "नहीं बाबा की जान, मेरी गुड़िया में कोई दाग नहीं है। मेरी मायरा तो सबसे प्यारी है।"
"रोहन जी की बात सुनकर मायरा की आँखों में चमक आ जाती है और वह चहकते हुए कहती है, "सच बाबा? क्या मायरा सबसे प्यारी है?"
"रोहन जी उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए कहते हैं, "जी, बाबा की जान।"
"मायरा अपने बाबा के पास से उठती है और नीचे भागते हुए कहती है, "मैं मम्मा को बताकर आती हूँ कि मायरा सबसे प्यारी है।"
"मायरा को इतनी तेज भागते देख रोहन जी घबराते हुए कहते हैं, "संभाल के बच्चे, गिर मत जाना।"
फ्लैशबैक खत्म
"मायरा अपनी आँखें खोलती है और गहरी-गहरी साँसें लेने लगती है। उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं। वह दर्दभरी मुस्कराहट से कहती है, "बाबा, आप सही कहते थे। खूबसूरत चीज हमेशा खूबसूरत नहीं होती, जैसे यह विला बाहर से खूबसूरत है और अंदर से जेल है। ऐसी जेल जहाँ मैं बिना गलती के कैद हूँ।"
"उस ठंडी हवा के झोंकों ने उसके ज़ख्म ताज़े कर दिए थे। कहते हैं ना, अगर दिल में तूफ़ान हो, तो हवाएँ भी सुकून नहीं देती हैं।"
वहीं दूसरी तरफ़, एक आदमी रात के उस पहर सड़कों पर भाग रहा था। उसका चेहरा पसीने से लथपथ था, जिस पर खौफ साफ़ नज़र आ रहा था। वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था, जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो। वह आगे भागता है, तभी उसकी टक्कर एक कार से हो जाती है और वह जमीन पर पीठ के बल गिर जाता है। तभी उसकी नज़र कार के बोनट पर बैठे एक आदमी पर जाती है, जो बोनट पर बैठा सिगरेट के कश भर रहा था। बोनट पर बैठा आदमी कोई और नहीं, अबीर था।
"अबीर को देख वह आदमी घबराने लगता है और डर से पीछे खिसकने लगता है। लेकिन जब वह अपने चारों तरफ़ नज़र घुमाता है, तो वह और डर से बेहाल हो जाता है, क्योंकि वह चारों तरफ़ से घिर चुका था। वह अपनी मौत को करीब देखकर घबराने लगता है और अपने हाथ जोड़ते हुए कहता है, "प्लीज, मुझे छोड़ दो! प्लीज, मुझे माफ़ कर दो! मैं यहाँ से बहुत दूर चला जाऊँगा! प्लीज, मुझे छोड़ दो!"
"उस आदमी की बात सुनकर अबीर शैतानों की तरह हँसने लगता है। उसकी हँसी उस शांत जगह पर गूंज रही थी। उसकी हँसी वहाँ खड़े हर शख्स के अंदर डर पैदा कर रही थी। वह आदमी काँपने लगता है।"
"अबीर शैतानी हँसी हँसते हुए कुछ पल रुककर कहता है, "अबीर खन्ना के ऑफ़िस में आकर उसकी इनफ़ॉर्मेशन लीक करोगे और उसे पता भी नहीं चलेगा? नॉट बैड! क्या प्लानिंग थी? टीच टीच! मैंने सारी प्लानिंग ख़राब कर दी।"
"अबीर एक बॉडीगार्ड को इशारा करता है। वह बॉडीगार्ड इशारा समझकर उस आदमी को अबीर के कदमों में धक्का दे देता है। अबीर उसके बालों को पकड़कर ऊपर उठाता है और कहता है, "इनफ़ॉर्मेशन चाहिए थी ना तुझे? मैं दूँगा तुझे इनफ़ॉर्मेशन।"
"आदमी अबीर की बात सुन डर से घबरा जाता है और गिड़गिड़ाते हुए कहता है, "प्लीज, प्लीज, मुझे माफ़ कर दो! मुझे कोई इनफ़ॉर्मेशन नहीं चाहिए।"
"तभी अबीर कुछ कहता है, जिससे वह आदमी और बाकी सब हैरान हो जाते हैं।"
अध्याय 12
"अबीर ने एक बॉडीगार्ड को इशारा किया। वो बॉडीगार्ड इशारा समझकर उस आदमी को अबीर के कदमों में धक्का दे गया। अबीर ने उसके बालों को पकड़कर ऊपर उठाया और कहा, ""इनफॉर्मेशन चाहिए थी ना तुझे? मैं दूंगा तुझे इनफॉर्मेशन।"""
""आदमी अबीर की बात सुनकर डर से घबरा गया और गिड़गिड़ाते हुए बोला, ""प्लीज, प्लीज मुझे माफ कर दो। मुझे कोई इनफॉर्मेशन नहीं चाहिए।"""
""तभी अबीर कुछ ऐसा बोला जिससे वो आदमी और बाकी सब हैरान हो गए।"""
"अबीर उसके पास आया और उसकी आँखों में आँखें डालकर बोला, ""जिसके लिए आया था वही नहीं चाहिए। इन्फॉर्मेशन तो लेनी पड़ेगी। ऐसे नहीं जाने दूंगा।"""
""वो आदमी कुछ कह पाता इससे पहले ही अबीर ने उसके मुँह में बंदूक डालकर गोली मार दी। एक गोली की आवाज उस सुनसान इलाके में गूंज गई और वो आदमी वहीं दम तोड़ गया। अबीर ने अपनी जेब से एक रुमाल निकाला और अपने हाथों और चेहरे को साफ किया। फिर उसने उस रुमाल को वहीं फेंकते हुए कहा, ""इसकी लाश इसके मालिक को गिफ्ट कर देना। ताकि उसे भी पता चले अबीर खन्ना कौन है और उसने मुझसे पंगा लेकर कितनी बड़ी गलती की है।"""
"अबीर की बात सुनकर अंश ने अपना सिर हिला दिया। अबीर उस आदमी को एक नजर देखकर अपनी गाड़ी में बैठ गया। कुछ देर में उसकी गाड़ी हवा में बातें करने लगी। लगभग पंद्रह मिनट बाद उसकी कार विला के बाहर आकर रुकी। वह गाड़ी से निकलकर विला के अंदर चला गया। विला में बहुत शांति थी क्योंकि शालिनी अपने कमरे में सोने जा चुकी थी। अबीर अपने कमरे में पहुँचा और अपनी घड़ी को साइड टेबल पर रखकर बाथरूम चला गया। कुछ देर बाद वह बाथरूम से आया। उसने अपनी कमर पर तौलिया लपेटा हुआ था। बिना शर्ट के उसकी छाती इतनी आकर्षक लग रही थी कि देखने वाला दिल हार जाए। उसने खुद को आईने में एक नज़र देखा और कपड़े बदलकर बाहर आया। उसने ब्लैक टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना हुआ था।"
"वह अपने कमरे से आकर मायरा के कमरे की तरफ बढ़ा। उसने मायरा के कमरे में प्रवेश किया और अपनी नज़रों से पूरे कमरे को देखा। कमरा खाली देखकर उसके भाव ठंडे हो गए। उसने बाथरूम चेक किया, वो भी खाली था।"
"मायरा को यहाँ ना देखकर उसके हाथों की नसें उभरने लगीं और आँखें खून की तरह लाल हो गईं। अबीर गुस्से में बोला, ""ये तुमने अच्छा नहीं किया, सनशाइन।"""
"वह कमरे का दरवाज़ा जोर से बंद करके बाहर हॉल में आया और मायरा को फोन करने लगा। तभी उसके कानों में फ़ोन की घंटी सुनाई दी। वह घंटी की आवाज को फ़ॉलो करते हुए ऊपर टेरेस पर आया। टेरेस पर आते ही फ़ोन की आवाज तेज हो गई। वह फ़ॉलो कर ही रहा था तभी उसकी नज़र झूले पर बैठी मायरा पर गई, जो बैठी-बैठी सो रही थी। उसे ऐसे सोता देखकर अबीर की आँखें छोटी हो गईं और वह गुस्से में उसकी तरफ़ बढ़ा और उसे एक झटके में उठाकर खड़ा कर दिया।"
""इस झटके से मायरा की आँख खुली और वह घबराते हुए सामने देखी। उसकी नज़र अबीर की गुस्से भरी नज़रों से मिली, जिसे महसूस कर मायरा के पूरे शरीर में सनसनी दौड़ गई। अबीर गुस्से में उसकी कमर को पकड़कर अपने करीब किया, जिससे मायरा के हाथ उसके सीने पर आ गए और वह घबराते हुए अबीर को देखने लगी।"""
"अबीर ने उसकी कमर पर अपनी पकड़ मज़बूत की और बेहद ठंडी आवाज़ में कहा, ""क्या कर रही हो यहां अकेले? भागने का प्लान था तुम्हारा?"""
""मायरा अबीर की ठंडी आवाज़ सुनकर डरते हुए आँखें बंद कर लीं। उसके ऐसा करते ही अबीर की आँखें छोटी हो गईं और वह उसे घूरते हुए बोला, ""मेरी बात को इग्नोर करने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी?"""
""मायरा उसकी ठंडी आवाज़ से ही डर रही थी क्योंकि वह जानती थी अबीर कितना सनकी इंसान है, पल भर में बिना सोचे-समझे कुछ भी कर देता है। मायरा डरते हुए अपना गला साफ़ किया क्योंकि अबीर उसे खा जाने वाली नज़रों से घूर रहा था। मायरा ने गहरी साँस लेते हुए हकलाते हुए कहा, ""वो... नीचे मेरा दम घुट रहा था तो मैं ठंडी हवा खाने ऊपर आ गई और बैठे-बैठे कब मेरी आँख लग गई मुझे पता ही नहीं चला।"""
"अबीर ने उसकी बात सुनकर उसकी कमर पर अपनी पकड़ कसी। जिससे मायरा की आँखों में आँसू आ गए। अबीर गुस्से में उसकी आँखों में आँखें डालते हुए बोला, ""तुम अबीर खन्ना की कैद में हो, जहाँ सिर्फ़ तुम्हें दर्द मिलेगा, बेहिसाब दर्द।"""
"अबीर ने मायरा की कमर को इतना कसकर पकड़ रखा था कि अबीर की उंगलियों के निशान उसकी कमर पर छप गए थे। मायरा की आँखों से आँसू निकलने लगे। उसे दर्द सहन नहीं हुआ तो उसके मुँह से आह निकल गई। उसकी आह सुनकर अबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कान आ गई क्योंकि उसे भी अंदाज़ा था कि उसने मायरा को कितने कसकर पकड़ा हुआ है। उसने मायरा की कमर पर अपनी पकड़ ढीली की और उसकी कमर को सहलाया।"
"अबीर उसकी कमर को सहला रहा था जिससे मायरा को राहत मिल रही थी। तभी अचानक अबीर ने उसकी कमर को चुटकी ली जिससे मायरा की आह निकल गई और उसके आँसू निकलने लगे। अबीर ने उसके आँसुओं पर अपने होंठ रखकर उन्हें चूमा, जिससे मायरा की आँखें बड़ी हो गईं।"
"अबीर ने मायरा की कलाई पकड़कर उसे टेरेस की दीवार से लगा दिया और उसके होंठों को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूमने लगा। मायरा ने उसके कॉलर को अपनी मुट्ठी में भरकर आँखें बंद कर लीं। अबीर एक हाथ से उसकी कमर सहला रहा था और दूसरा हाथ मायरा के गाल पर था। अबीर का चुम्बन गहरा और भावुक होता जा रहा था। मायरा को साँस लेने में तकलीफ होने लगी तो उसने अबीर को धक्का देने की कोशिश की, लेकिन अबीर ने उसके हाथों को पकड़कर ऊपर करके अपने एक हाथ से नियंत्रित कर लिया और उसे और ज़्यादा जोश के साथ चूमने लगा।"
"बीस मिनट बाद अबीर ने मायरा को छोड़ा। अबीर को छोड़ने पर मायरा उसके कंधे पर ही निढाल हो गई और लंबी-लंबी साँसें लेने लगी। अबीर भी लंबी-लंबी साँस ले रहा था और एक हाथ से वह मायरा की पीठ सहला रहा था। कुछ देर बाद दोनों सामान्य हो गए। अबीर ने मायरा को अपनी बाहों में उठा लिया। अबीर के इस तरह उठाने से मायरा डर से उसके गले में अपने हाथ लपेट लिए। अबीर उसे लेकर नीचे चला गया।"
20 मिनट बाद अबीर ने मायरा को छोड़ा। मायरा ने उसके कंधे पर सिर रखकर लंबी-लंबी साँसें लेना शुरू कर दिया। अबीर भी लंबी-लंबी साँसें ले रहा था और एक हाथ से वह मायरा की पीठ सहला रहा था। कुछ देर बाद दोनों सामान्य हो गए। अबीर ने मायरा को अपनी बाहों में उठा लिया। अबीर के इस तरह उठाने से मायरा डर के मारे उसके गले में अपने हाथ लपेट लिए। अबीर उसे लेकर नीचे चला गया।
उसने उसे कमरे में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया। मायरा एकटक अबीर को देख रही थी। अबीर ने अपना ब्लेज़र उतारकर एक कोने में फेंक दिया और मायरा के ऊपर आ गया। मायरा ने उसे ऊपर आता देख आँखें बंद करके लंबी साँस ली। वह जब तक आँखें खोलती, अबीर उसके होठों को चूमने लगा था। मायरा की पकड़ बेडशीट पर कस गई। अबीर उसे चूम रहा था; कभी उसके ऊपरी होठों को अपने दाँतों से काट रहा था, तो कभी निचले होठों को। लगभग 15 मिनट बाद मायरा को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी। उसने अबीर को धक्का देने की कोशिश की, लेकिन इतने बड़े आदमी को हटाना उसके लिए नामुमकिन था। अबीर उसकी लिप किस से संतुष्ट होकर उसकी गर्दन चूमने लगा। मायरा लंबी-लंबी साँसें लेने लगी और उसकी पकड़ बेडशीट पर और टाइट हो गई। अबीर उसकी गर्दन को चूमने के साथ काट भी रहा था। अबीर ने उसकी ड्रेस को कंधे से हटाकर उसके कंधे और कॉलरबोन को चूमना शुरू कर दिया। मायरा की सिसकियाँ निकल रही थीं।
अबीर ने उसकी ड्रेस एक झटके में फाड़ दी। अब मायरा अबीर के सामने सिर्फ़ अंडरवियर में थी। अबीर उससे दूर होकर उसे लालची निगाहों से देखने लगा। उसकी आँखों में वासना साफ़ दिखाई दे रही थी। मायरा ने खुद को हाथों से ढँकने की कोशिश की, जिससे अबीर के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान आ गई और वह उसे देखकर बोला, "मुझसे क्या छिपा रही हो, सनशाइन? मैंने तो सब देख लिया है।"
मायरा का चेहरा सुनकर लाल हो गया और उसने अपने हाथों से खुद को ढँकते हुए कहा, "प्लीज़ अभी मत कीजिए। आपने कल किया था, मुझे अभी तक दर्द हो रहा है। मैं आपको हैंडल नहीं कर पाऊँगी।"
अबीर की आँखें सुनकर छोटी हो गईं और वह मज़ाक उड़ाते हुए बोला, "तुम्हारी इतनी औकात है कि तुम मुझे रोक सको? और तुम्हें मना करने का हक़ किसने दिया, सनशाइन?"
मायरा की आँखों में आँसू आ गए, पर उसने उन्हें बहने नहीं दिया। अपनी आँखें बंद करके गहरी साँस लेते हुए, दर्द भरी मुस्कान के साथ उसने कहा, "हाँ, शायद मैं भूल चुकी थी। रखैलों को मना करने का हक़ नहीं होता।"
पता नहीं क्यों, पर अबीर को यह 'रखैल' शब्द अच्छा नहीं लगा। वह गुस्से में मायरा का जबड़ा पकड़कर बोला, "रखैल नहीं हो तुम, मिस्ट्रेस हो मेरी।"
अबीर के इस तरह पकड़ने से मायरा को दर्द हो रहा था। वह अपना दर्द सहते हुए झूठी मुस्कान से बोली, "आप अमीर लोग मिस्ट्रेस कहते हैं, लेकिन हम गरीबों में बिना शादी के साथ रहने वाली औरत को रखैल कहा जाता है।"
मायरा की बातें अबीर को बुरी लग रही थीं। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था। वह गुस्से में अपनी शर्ट के बटन खोलकर अपनी शर्ट को एक कोने में फेंक दिया और मायरा के हाथों को बिस्तर पर दबाकर उसकी आँखों में देखते हुए बोला, "बहुत ज़ुबान चल रही है ना तुम्हारी? लगता है कुछ दिन से मैं जेंटल हो रहा हूँ तुम्हारे साथ।"
मायरा ने उसकी बात सुनकर उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा, "आप कभी जेंटल नहीं हो सकते, Mr. Khanna। आप में इतनी हवस भरी है।"
मायरा की बात सुनकर अबीर गुस्से में बोला, "मेरी हवस देख लेगी तो सुबह का सूरज नहीं देख पाओगी, समझी?"
इतना कहकर वह मायरा की गर्दन चूमने लगा और जोर से काटा, जिससे मायरा की चीख निकल गई। मायरा को चीखते देख अबीर की वासना और बढ़ गई। वह मायरा के सीने को बेतहाशा काटने लगा, जिससे मायरा की चीखें निकल रही थीं। अबीर ने उसकी कमर को अपनी ओर खींचा और फिर मायरा की एक जोरदार चीख निकल गई। उसकी पकड़ बेडशीट पर कस गई और वह अपने नाखून अबीर के कंधे पर गाड़ने लगी। अबीर उसके साथ बहुत बेरहमी से अंतरंग हो रहा था, जिससे मायरा की सिसकियाँ और आहें पूरे कमरे में धीमे संगीत की तरह गूंज रही थीं।
अबीर सुबह के चार बजे मायरा को छोड़कर चला गया। थक-हारकर मायरा तुरंत सो गई। अबीर ने अपनी बाहें उसकी चारों तरफ़ लपेट लीं और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
मायरा की आँख खुली। उसकी पूरी बॉडी में बेतहाशा दर्द हो रहा था। उसने अपने बगल में देखा, जहाँ अबीर नहीं था। मायरा ने एक लंबी साँस लेकर बिस्तर से उठने की कोशिश की। बिस्तर से उठते ही उसकी चीख निकल गई और उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने कम्बल लपेटकर लड़खड़ाते हुए बाथरूम जाकर शावर लेना शुरू कर दिया। 25 मिनट बाद मायरा बाथरूम से बाहर आई। उसने एक बाथरोब पहना हुआ था। वह बाथरूम से निकलकर चेंजिंग रूम की ओर बढ़ गई और वहाँ से एक ब्लैक टॉप और ब्लू जीन्स पहनकर आई। वह आईने के सामने खड़ी होकर अपने बाल संवारी और अपने होठों पर लिप बाम लगाकर नीचे आई।
शालिनी डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा रही थी। मायरा आकर कुर्सी पर बैठ गई। शालिनी ने उसे देखकर हल्की मुस्कान करके कहा, "गुड मॉर्निंग, मैडम।"
मायरा ने उसकी बात सुनकर कुछ पल रुककर कहा, "गुड मॉर्निंग, शालिनी। नाश्ते में क्या है?"
शालिनी ने मायरा की बात सुनकर उसके सामने नाश्ता रखते हुए कहा, "मैडम, सैंडविच है और भी डिश हैं। अगर आपको कुछ और खाना है तो बता दीजिये, मैं बना दूँगी।"
मायरा ने उसकी बात सुनकर चाय अपने कप में लेते हुए कहा, "नहीं, मैं यही खा लूँगी। वैसे भी बहुत लेट हो गया है।"
शालिनी ने अपना सिर हिला दिया। कुछ देर में मायरा नाश्ता करके बाहर निकल गई। तभी वह विला के गार्डन में किसी से टकरा गई।
मायरा ने उसकी बात सुनकर चाय अपने कप में ली और कहा, "नहीं, मैं यहीं खा लूँगी। वैसे भी बहुत लेट हो गया है।"
"शालिनी ने अपना सिर हिलाया। कुछ देर में मायरा नाश्ता करके बाहर निकल गई। तभी वह विला के गार्डन में किसी से टकरा गई।"
जब मायरा घर से बाहर आई, तो गार्डन में किसी से टकरा गई। वह "ouchh" करती हुई अपने सामने देखा। उसके सामने एक लड़की खड़ी थी। टक्कर लगने से वह भी अपना सिर सहला रही थी। उस लड़की का चेहरा उसके बालों से ढँका हुआ था। मायरा उसे देखकर घबरा गई और चिंता से बोली, "आई एम सॉरी, मैंने आपको देखा नहीं। यह गलती से टक्कर हो गई।"
किसी की आवाज़ सुनकर वह लड़की अपना सिर उठाती है। उसके बाल उसकी कमर पर झूल गए और उसका चेहरा दिखने लगा। वह लड़की सत्रह-अठारह वर्ष की लग रही थी। उसने जीन्स और टॉप पहना हुआ था। उसकी काली आँखें, तीखी नाक, गुलाबी होंठ; वह बहुत प्यारी लग रही थी, लेकिन मायरा के आगे वह अब भी फीकी लग रही थी।
मायरा उस लड़की को देखकर सोच में पड़ गई। मिस्टर खन्ना के विला में यह लड़की कौन है? वह अपनी सोच में गुम थी, तभी उसे उस लड़की की आवाज़ सुनाई दी। वह लड़की मुस्कुराते हुए उसे देखकर बोली, "जी, मैं ठीक हूँ। आपको कहीं चोट तो नहीं लगी?"
मायरा ने उसकी घबराहट को समझकर हल्का मुस्कुराया और उसे देखते हुए कहा, "नहीं, मैं ठीक हूँ।"
वह लड़की मुस्कुराकर सिर हिलाती है और एक नज़र विला के आस-पास देखती है। फिर एक नज़र मायरा को देखकर, भ्रम से पूछती है, "क्या आप अबीर भाई की कोई इम्प्लॉयी हो?"
उसके मुँह से "अबीर भाई" सुनकर मायरा सोच में पड़ गई। क्योंकि अबीर ने कहा था कि उसकी पूरी फैमिली एक्सीडेंट में मारी गई थी। फिर यह कौन थी? वह सोच ही रही थी, तभी उसके दिमाग में कुछ क्लिक हुआ और वह हैरानी से बोली, "तुम कशिश हो, शालिनी की बेटी?"
मायरा की बात सुनकर वह लड़की अपना सिर हाँ में हिलाती है और भ्रम से उसे देखते हुए कहती है, "हाँ, पर आप मुझे कैसे जानती हो?"
यह लड़की कोई और नहीं, कशिश थी। मायरा ने उसकी बात सुनकर चहकते हुए कहा, "मुझे शालिनी ने बताया था कि तुम आज आने वाली हो और मैं इसी घर में रहती हूँ।"
मायरा की बात सुनकर कशिश को झटका लगा और वह हैरानी से मायरा को देखते हुए पूछती है, "आप मज़ाक कर रही हैं ना? अबीर भाई के घर में कोई लड़की हो ही नहीं सकती। उन्हें तो चिढ़ है लड़कियों के नाम से भी।"
मायरा ने उसकी हैरानी देखकर हँसते हुए कहा, "जी, मैं यहीं रहती हूँ।"
कशिश उसे घूरते हुए कुछ पल रुक कर कहती है, "कहीं ऐसा तो नहीं अबीर भाई ने शादी कर ली हो और मुझे बताया भी नहीं?"
कशिश की बात सुनकर मायरा के होठों की मुस्कान गायब हो गई। एक दर्द उसके दिल में उमड़ आया और वह सोच में पड़ गई। क्योंकि अबीर और उसका तो कोई रिश्ता ही नहीं था। वह तो सिर्फ़ उसकी मिस्ट्रेस थी, जो उसके बेड तक सीमित थी। अब वह कशिश से क्या कहे? हमारा क्या रिश्ता है?
मायरा अपनी सोच में गुम थी, तभी कशिश ने उसके आगे चुटकी बजाई। चुटकी की आवाज़ सुनकर मायरा होश में आई और हकलाते हुए बोली, "नहीं, मैं उनकी दोस्त और इम्प्लॉयी हूँ। कुछ दिन के लिए यहाँ आई हूँ।"
मायरा की बात सुनकर कशिश की आँखें चमक उठीं और वह उछलते हुए बोली, "वाह! आप हमारे साथ रहेंगी? कितना मज़ा आएगा! वरना मैं जब भी यहाँ आती हूँ, तो बोर हो जाती हूँ।"
मायरा ने उसकी खुशी देखकर हल्का सा मुस्कुराया और कुछ पल रुक कर कहा, "हाँ, बिलकुल। हम साथ में मस्ती करेंगे। बाय द वे, आई एम मायरा वर्मा।"
मायरा ने उसके आगे अपना हाथ बढ़ाया। उसका नाम सुनकर कशिश भी मुस्कुराकर अपना हाथ आगे बढ़ाती है। मायरा को याद आया कि उसे ऑफिस जाना है। वह घबराते हुए जल्दी से बोली, "शिट! अभी मुझे ऑफिस जाना है। हम शाम को मिलेंगे।"
कशिश ने हाँ में सिर हिलाया और अंदर चली गई। मायरा भी उसे एक नज़र देखकर ऑफिस के लिए निकल गई। कुछ देर बाद मायरा की कार ऑफिस के बाहर रुकी। वह कार से निकलकर ऑफिस में गई और अपनी डेस्क पर आकर अपना पर्स और फोन रखकर, लंबी साँस लेकर अपना काम शुरू कर दिया। वह काम कर रही थी, तभी एक इम्प्लॉयी उसके पास आई और बोली, "मायरा, तुम्हें बॉस बुला रहे हैं।"
इम्प्लॉयी की बात सुनकर मायरा का चेहरा उतर गया। क्योंकि उसे पता था कि अबीर उसे क्यों बुला रहा है। अबीर के ऑफिस में सिक्योरिटी कोड था। जो भी इम्प्लॉयी ऑफिस आता है, उसकी सारी जानकारी अबीर के लैपटॉप पर पहुँच जाती है। अबीर को पता चल गया था कि मायरा ऑफिस आ चुकी है। मायरा अपना फोन उठाकर अबीर के केबिन की तरफ़ चली गई। केबिन के बाहर पहुँचकर मायरा ने लंबी साँस ली और नॉक किया।
अबीर, जो लैपटॉप पर काम कर रहा था, गेट पर नॉक होते देख, उसके चेहरे पर तिरछी मुस्कान आ गई और वह गहरी आवाज़ में बोला, "कम इन।"
अबीर की गहरी आवाज़ सुनकर मायरा ने आँखें मींच लीं और धीरे से गेट खोलकर अंदर चली गई। केबिन में अबीर टेबल से टेक लगाकर, दोनों हाथ बाँधे, गेट की तरफ़ देख रहा था। मायरा को देखकर अबीर की मुस्कान गहरी हो गई। मायरा धीरे कदमों से उसके पास चलकर आई और ठीक उसके सामने खड़ी हो गई। उसे देखते हुए बोली, "बॉस, आपने बुलाया?"
अबीर ने उसे नीचे से लेकर ऊपर तक देखा और एक झटके में उसे कमर से पकड़कर टेबल पर बिठा दिया। अचानक ऐसा होने से मायरा ने अबीर की शर्ट को मुट्ठी में भर लिया और कसकर आँखें मींच लीं। जब उसे एहसास हुआ कि वह गिरी नहीं है, तो उसने अपनी आँखें खोलीं। अपने आपको टेबल पर देखकर उसने गहरी साँस ली और अबीर की शर्ट को छोड़ दिया। अबीर ने उसे देखकर तिरछी मुस्कान के साथ कहा, "इतने में डर गई, सनशाइन? बहुत डरपोक हो तुम तो।"
मायरा ने उसे घूरते हुए कुछ पल रुक कर कहा, "डरपोक नहीं हूँ मैं। बस मुझे लगा मैं गिर जाऊँगी।"
अबीर उसके करीब आकर उसके बालों को सूँघने लगा और उसके बालों को मुट्ठी में भरकर कहा, "मेरे होते हुए तुम कैसे गिर सकती हो, सनशाइन?"
मायरा ने उसकी बात सुनकर दर्दभरी मुस्कान के साथ उसकी आँखों में देखकर कहा, "आपने ही तो इतना गिराया है, मिस्टर खन्ना।"
मायरा की बात सुनकर अबीर के होठों के कोने मुड़ गए। उसने ड्रॉअर से एक पेपर निकाला और मायरा की तरफ़ बढ़ा दिया। मायरा उस पेपर को समझ नहीं पाई और कुछ पल रुक कर बोली, "यह क्या है?"
अबीर तिरछा मुस्कुराते हुए कुछ पल रुककर, उसकी आँखों में आँखें डालकर बोला, "मैरेज सर्टिफिकेट।"
अबीर की बात सुनकर मायरा हैरान हो गई और उसकी आँखें फैल गईं। वह टेबल से हड़बड़ी में उतरती हुई गुस्से में बोली, "क्या आपका दिमाग खराब है? मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगी, समझे आप?"
अबीर ने उसे घूरते हुए कुछ पल रुक कर कहा, "मैंने तुमसे पूछा नहीं है, बताया है। साइन करो इस पर।"
मायरा गुस्से में उसके पास जाकर उसका कॉलर पकड़ ली और चिल्लाते हुए बोली, "आप समझते क्या हैं? मुझे पहले मिस्ट्रेस बनाते हैं, फिर बीबी? मैं आपका खिलौना नहीं हूँ, जिसे आप अपने अनुसार चलाएँगे। मैं आपसे शादी नहीं करूँगी।"
अबीर ने अपने कॉलर से उसके हाथ हटाते हुए, तिरछा मुस्कुराते हुए कहा, "शायद तुम भूल गईं उस दिन जब तुमने मेरा कॉलर पकड़ा था, तो तुम मेरे नीचे रात भर चीखी थीं। अब दुबारा वही गलती कर रही हो? क्या चाहती हो? पूरे एक हफ़्ते तक रूम से बाहर ना निकलने दूँ?"
अबीर की बात सुन मायरा की आँखें खौफ़ से भर गईं और उसका हाथ खुद अबीर के कॉलर से हट गया। जिसे देखकर अबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कान तैर गई। अबीर की धमकी सुनकर मायरा की हिम्मत टूट गई और उसके आँसू निकलने लगे। अबीर आगे बढ़कर उसके आँसू को साफ़ करते हुए बोला, "सनशाइन, साइन करो, वरना तुम्हारी मम्मा का ट्रीटमेंट रुक जाएगा और तुम्हारी माँ को हॉस्पिटल से बाहर फेंक दिया जाएगा।"
अपनी मम्मा को याद करके मायरा रोने लगी और रोते हुए बोली, "क्यों कर रहे हो आप मेरे साथ ऐसा? बस कीजिए आप खेल तो रहे हो मेरे शरीर से, तो शादी क्यों करना चाहते हो?"
मायरा के बालों की कुछ लटें आगे झूल रही थीं, जिन्हें अबीर नोटिस कर रहा था। अबीर आगे आकर उसके बालों की एक लट को पीछे करते हुए, उसकी आँखों में देखते हुए बोला, "तलब हो गई है तुम्हारे जिस्म की। अब मैं इसे जिंदगी भर अपने पास रखना चाहता हूँ।"
मायरा ने उसकी बात सुनकर रोते हुए कहा, "प्लीज़ ऐसा मत करो।"
मायरा के बार-बार इनकार करने पर अबीर का गुस्सा भड़क रहा था। उसने उसकी कलाई पकड़कर अपनी तरफ़ खींचा। वह कटी पतंग की तरह अबीर के सीने से जा लगी और आँसू भरी आँखों से उसे देखने लगी। अबीर ने उसे घूरते हुए कहा, "साइन करो, वरना मेरा एक कॉल और तुम्हारी मम्मा हॉस्पिटल के बाहर होंगी।"
मायरा जानती थी अबीर झूठ नहीं बोलता। वह जो चाहता है, वह करके रहता है। वह उससे दूर होकर एक नज़र पेपर्स को देखती है और एक नज़र अबीर को, और रोते हुए पेपर्स पर साइन कर देती है।
मायरा के साइन करते ही अबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कान आ गई। अबीर उन पेपर्स को देखता है और कुछ पल रुक कर कहता है, "फ़ाइनली तुम बन गईं मिसेज़ मायरा अबीर खन्ना। कांग्रेचुलेशन्स, वाइफ़ी।"
आज पहली बार अपना नाम सुनकर मायरा की आँखों में आँसू आ गए और वह केबिन से बिना कुछ बोले निकल गई।
मायरा जानती थी, अबीर झूठ नहीं बोलता; जो चाहता है, वो करके रहता है। उसने उन पेपर्स को एक नज़र देखा, फिर अबीर को एक नज़र देखा और रोते हुए पेपर्स पर साइन कर दिए।
"मायरा के साइन करते ही अबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कान आ गई। उसने उन पेपर्स को देखा और कुछ पल रुककर कहा, ""फाइनली तुम बन गईं Mrs. Mayra Abeer Khanna, congratulations wifeyy।""
आज पहली बार अपना नाम सुनकर मायरा की आँखों में आँसू आ गए और वो बिना कुछ बोले कैबिन से निकल गई।
रात का समय था। मायरा और कशिश डाइनिंग टेबल पर बैठकर अबीर का इंतज़ार कर रही थीं। इंतज़ार दरअसल सिर्फ़ कशिश कर रही थी; मायरा तो उसके साथ बस बैठी थी। अपनी बेटी के आने पर शालिनी बहुत खुश थी। आज मायरा ने शालिनी को कशिश के पसंद का खाना बनाने को कहा था। कशिश मायरा के साथ घुल-मिल गई थी; दोनों हँसते हुए बातें कर रही थीं। तभी बाहर गाड़ी रुकने की आवाज़ आई। गाड़ी की आवाज़ सुनकर मायरा का चेहरा उतर गया, जबकि कशिश का चेहरा खिल उठा क्योंकि उसे सुबह से अपने भाई का इंतज़ार था।
सभी लोग गेट की तरफ़ देखने लगे जहाँ अबीर अपने हाथ में कोट पकड़े हुए अंदर आ रहा था। उसकी शर्ट के दो बटन खुले हुए थे, जिसमें उसकी आकर्षक छाती दिख रही थी। उसने अपनी शर्ट की स्लीव्स ऊपर तक फोल्ड की हुई थीं। उसके बाल बिखरे हुए थे और चेहरा हमेशा की तरह अभिव्यक्तिहीन था। अबीर को देखकर कशिश भागती हुई आई और उसके गले लग गई। कशिश के गले लगते ही अबीर के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई और जल्दी ही गायब भी हो गई, लेकिन मायरा ने उसे मुस्कुराते हुए देख लिया था। यह पहली बार था जब अबीर मुस्कुरा रहा था और सच में उसकी मुस्कान बहुत प्यारी थी। मायरा उसकी मुस्कान देखकर हैरान थी कि किसी मर्द की स्माइल इतनी प्यारी कैसे हो सकती है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि अबीर बहुत हैंडसम था। उसके चेहरे के फीचर्स, उसका रौबदार आभा, सब बहुत अच्छा था। ऐसी ही लड़कियाँ उस पर जान नहीं देती थीं। कशिश अबीर से अलग होकर बोली, ""आई मिस यू सो मच भाई।""
अबीर ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कुछ पल रुककर कहा, ""आई मिस यू टू बच्चा, आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई ना?""
अबीर की बात सुनकर मायरा उसे देखने लगी। उसने कभी अबीर को किसी के साथ खुश नहीं देखा था। यह पहली बार था जब वो मुस्कुराया था। कशिश अबीर की बात सुनकर जल्दी से बोली, ""आपके होते हुए कोई परेशानी हो सकती है क्या मुझे? आप तो दुनिया के बेस्ट भाई हो।""
अबीर आगे बढ़कर उसका माथा चूम लिया और कुछ पल रुककर कहा, ""तुम बैठो, मैं चेंज करके आया, फिर साथ में डिनर करते हैं।""
""ओके भाई।"" कशिश मुस्कुराते हुए बोली।
अबीर एक नज़र मायरा को देखकर ऊपर चला गया और कुछ देर बाद हल्के ट्राउज़र और टी-शर्ट में नीचे आकर मायरा के बगल में बैठ गया। मायरा ने उसे एक नज़र देखने की भी जहमत नहीं की थी। अबीर मायरा को तिरछी नज़रों से देखते हुए कशिश से कहा, ""कशिश, क्या तुम अपनी भाभी से मिली?""
अबीर की बात सुनकर मायरा की आँखें बड़ी हो गईं और वो अबीर की तरफ़ देखने लगी। कशिश अनजान सी होकर बोली, ""कौन भाभी?""
कशिश की बात सुनकर अबीर तिरछी मुस्कान करते हुए मायरा से कहा, ""सनशाइन, तुमने कशिश को नहीं बताया कि तुम उसकी भाभी हो?""
अबीर की बात सुनकर शालिनी और कशिश हैरान रह गईं। अबीर की बात सुनकर मायरा ने अपने हाथों की मुट्ठी बना ली। कशिश अबीर की बात सुनकर जल्दी से बोली, ""भाई, आपने शादी कर ली और मुझे बताना भी ज़रूरी नहीं समझा।""
अबीर मायरा को देखकर तिरछी मुस्कान करता रहा। उसे मुस्कुराता देखकर मायरा की आँखें छोटी हो गईं। अबीर मायरा को देखकर कुछ पल रुककर कशिश से कहा, ""बस बेटा, सब जल्दी-जल्दी में हुआ। तुम्हारी भाभी चाहती थी कि हमारी शादी शांति से हो।""
अबीर की बात सुनकर मायरा हैरान हो गई और अबीर को घूरने लगी। कशिश मायरा को देखते हुए नाराज़गी से बोली, ""भाभी, ये क्या बात हुई? मैंने भाई की शादी के लिए कितना सोचा था, सब ख़राब हो गया।""
मायरा कुछ कहती, इससे पहले ही अबीर जल्दी से बोला, ""कशिश, आप अपने अरमान हमारे रिसेप्शन पार्टी पर निकाल लेना। मैं दो दिन में पार्टी ऑर्गेनाइज़ करने वाला हूँ। आख़िर सबको तो पता चलना चाहिए कि अबीर खन्ना की शादी हो गई।""
अबीर की बात सुनकर मायरा की आँखें बड़ी हो गईं और कशिश चहकते हुए बोली, ""ठीक है भाई, मैं अपने अरमान रिसेप्शन पर पूरे करूंगी।""
कशिश की बात सुनकर अबीर अपना सर हिलाया और तिरछी नज़रों से मायरा को देखता रहा जो उसे ही घूर रही थी। तभी शालिनी बोली, ""अब खाना खा लीजिये वरना ठंडा हो जाएगा।""
शालिनी की बात सुनकर सब डिनर शुरू कर दिया। सभी लोग डिनर कर रहे थे, तभी मायरा को अपनी जाँघ पर किसी का हाथ महसूस हुआ। उसे महसूस करते ही उसका खाना गले में अटक गया और वो जोर-जोर से खांसने लगी। शालिनी उसे पानी देती हुई फ़िक्र से बोली, ""अरे मैडम, संभलकर! और ये लीजिये पानी।""
""भाभी, आप ठीक हो ना?"" कुछ पल रुककर कशिश बोली।
मायरा शालिनी से पानी लेकर पीया और रोई हुई शक्ल बनाकर अबीर को देखते हुए खाना जबरदस्ती अपने गले में उतारते हुए बोली, ""हाँ, मैं ठीक हूँ।""
मायरा की बात सुनकर अबीर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई और उसने मायरा की जाँघ को और कसकर मसल दिया जिससे मायरा सिसक उठी। उसकी आवाज़ सुनकर कशिश और शालिनी उसकी तरफ़ देखने लगे। तो मायरा नकली हँसी हँसते हुए घबराते हुए बोली, ""वो चूहा था, नीचे चला गया। आप लोग खाना खाइए।""
मायरा की बात सुनकर अबीर की आँखें छोटी हो गईं और वो उसे देखकर तिरछी मुस्कान करते हुए बोला, ""देखकर सनशाइन, कहीं चूहा तुम्हारे अंदर ना घुस जाए।""
अबीर की बेशर्मी भरी बात सुनकर मायरा शर्म से लाल हो गई। अबीर धीरे-धीरे अपना हाथ उसके प्राइवेट एरिया की तरफ़ ले जाने लगा। उसे महसूस करते ही मायरा ने अपनी आँखें मूँद लीं। अबीर उसके प्राइवेट पार्ट को छूता उससे पहले ही मायरा एकदम खड़ी हो गई। उसके खड़े होते ही अबीर का हाथ हट गया।
सब मायरा को देखने लगे। सबकी नज़र अपनी तरफ़ महसूस करके मायरा खुद को संभालते हुए बोली, ""मेरा खाना हो गया, मैं हाथ धोकर आती हूँ।""
मायरा की बात सुनकर सब ने सर हिला दिया, लेकिन अबीर डेविल स्माइल करते हुए उसे देख रहा था। मायरा वहाँ से जल्दी से किचन में भाग गई। अबीर अपनी जगह से उठा और उन दोनों को देखते हुए बोला, ""आप लोग डिनर करिए, मैं हैंड वॉश करके आता हूँ।""
इतना कहकर अबीर वहाँ से किचन की तरफ़ चला गया।
" सब मायरा को देखने लगते है सबकी नजर अपनी तरफ महसूस कर मायरा खुद को संभालते हुए कहती है_मेरा खाना हो गया मैं हाथ धोकर आती हूं."
"मायरा की बात सुन कर सब सर हिला देता है लेकिन अबीर डेविल स्माइल करते हुए उसे देख रहा था मायरा वहां से जल्दी से किचेन में भाग जाती है अबीर अपनी जगह से उठता है और उन दोनो को देखते हुए कहता है- आप लोग डिनर करे मैं हैंड वॉश करके आता हूं."
"इतना कहकर अबीर वहा से किचेन की तरफ चला जाता है।
अब आगे
"किचेन में मायरा अपने दिल पर हाथ रखकर अपने सांसों को
थामने की कोशिश कर रही थी वो तो घबरा ही गई थी कही
शालिनी और कशिश अबीर को और उसे देख लेती तो उसकी
क्या इज्ज़त रह जाती मायरा सांस ले ही रही थी तभी उसे अपनी कमर पर किसी के हाथ महसूस होते है उस टच को महसूस कर मायरा अपनी आंखों को कसके बंद कर लेती है क्योंकि वो जानती थी ये touch अबीर का है अबीर के हाथ मायरा की कमर पर हरकत कर रहे थे."
"मायरा आखिरी कोशिश करते हुए उसे रोकते हुए कहती
है_प्लीज mr Khanna कोई आ जाएगा."
"अबीर उसकी कमर पर अपनी पकड़ कस लेता है और अपने
होठों से उसकी गर्दन पर हरकत करते हुए सिड्यूस आवाज में
कहता है_अपनी बीवी के साथ रोमांस कर रहा हूं किसी गैर औरत के साथ थोड़ी जो डर जाऊं."
"मायरा अबीर के बोलने पर मुंह बना लेती है अबीर उसके हाथो
की उंगलियों से अपनी उंगलियां intervert करके उसे फ्रिज से
लगा देता है और उसके होठों को मुंह में भर लेता है अबीर अपने
एक हाथ से उसकी कमर सहला रहा था तो दूसरा हाथ मायरा के
गाल पर था अबीर की किस wild हो रही थी वो मायरा के मुंह
को खोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन मायरा अपना मुंह
नहीं खोल रही थी गुस्से में अबीर उसकी कमर को पिंच करता है
जिससे मायरा के मुंह से आह निकलती है और उसका मुंह खुल
जाता है मौका मिलते ही अबीर उसके मुंह में अपनी tounge इंटर करके उसके पूरे मुंह को explore करने लगता है मायरा अबीर के बालो को अपनी मुट्ठी में भर लेती है अबीर उसे और डीप किस करने लगता है."
"जब मायरा को सांस लेने में तकलीफ होती है तो वो अबीर को
धक्का देने लगती है अबीर उसके हाथो को ऊपर करके अपने
एक हाथ से दबा देता है आखिर में अबीर उसे छोड़ता है तो
मायरा अबीर की बाहों में ही निढाल हो जाती है और जोर जोर से सांसे लेने लगती है अबीर खुद भी सांसे ले रहा था और एक हाथ से मायरा की पीठ सहला रहा था "
"कुछ देर बाद मायरा नॉर्मल हो जाती है और अबीर से दूर होती
है मायरा दूर होकर अबीर को घूरने लगती है अबीर उसे घूरता
देख कर अपनी आंखे छोटी कर लेता है मायरा उसे घूरते हुए कहती है_ जानती हूं आप मुझसे नफरत करते हो लेकिन फिर भी मुझे मारने का इरादा है क्या. ?
"मायरा की बात सुनकर अबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ जाती है और वो मायरा के थोड़े और करीब होकर कहता है_इतनी जल्दी नहीं मरने दूंगा मैं तुम्हे अभी तो बहुत हिसाब देना है तुम्हे. "
"अबीर की बात सुन कर मायरा के चेहरे पर दर्दभरी मुस्कुराहट आ जाती है और वो कहती है_हिसाब तो आप ले रहे हो उस गलती का जो मेरे बाप ने कभी की ही नहीं."
"मायरा के कहने पर अबीर की आंखों के सामने वो मंजर आ
जाता है जब उसके मां बाप का एक्सीडेंट हुआ था उसकी हाथो
की मुठ्ठी कस जाती है और पल भर में उसकी आंखे लाल हो जाती है और वो गुस्से में मायरा के जबड़े को पकड़ लेता है
और उसकी आंखों में आंखे डालकर घूरते हुए कहता है_तुम्हारे बाप ने गलती की थी जिसकी सजा तुम्हे पल पल मिलेगी समझी."
"वो गुस्से में मायरा को छोड़ के एक बार फिर उसके होठों को मुंह में भर लेता है लेकिन इस बार उसकी किस बहुत हार्ड थी वो उसके होठों को काट रहा था लेकिन उसका मुंह बंद होने की वजह से उसकी चीख नहीं निकल पा रही थी उसकी आवाज उसके गले में ही घुट रही थी जब मायरा के होठों से खून रिसने लगता है तो अबीर उसे धक्का देकर किचेन से बाहर चला जाता हैं."
" मायरा खड़ी उसे जाते हुए देखती रहती है वो रो रही थी लेकिन अफसोस उसके आंसू पोछने वाला कोई नहीं था वो अपने होठों से खून साफ करती है अबीर ने उसके होठों को जख्मी कर दिया था मायरा अपना हुलिया ठीक करती है और बाहर आती है बाहर शालिनी और कशिश दोनों बाते कर रही थी कशिश मायरा को आता देखकर जल्दी से कहती है_ भाभी यहां आए ना कुछ गेम खेलते है।
"मायरा उसके सामने अपने होठों पर झूठी हंसी सजाकर कुछ पल रुक कर कहती है _नहीं तुम लोग बात करो मेरे सर में थोड़ा दर्द है तो मैं आराम करने जा रही हूं.'
"शालिनी मायरा की बात सुनकर जल्दी आ कहती है_मैडम क्या मैं मालिश करदू आपके सर की.??
"मायरा शालिनी की बात सुनकर कहती है_नहीं कशिश इतने टाइम बाद आई है आप दोनों बात करो मैं सोने जा रही हूं."
"शालिनी मायरा की बात सुन कर जल्दी से कहती है_मैडम कोई बात नहीं | हम बाद में बात कर लेंगे लाए मै आपकी मालिश करदू."
" मायरा शालिनी की बात सुनकर कुछ पल रुक कर कहती है_मैने कहा ना आप दोनो बात करे मैं सो जाऊंगी तो खुद ठीक हो जाएगा आप फिक्र मत करो."
" शालिनी और कशिश मायरा की बात सुनकर हामी भरती है मायरा उन दोनो को smile देकर वहां से अपने कमरे की तरफ बढ़ जाती है."
Thankyou for read comment aur rating date rahna aur ho sakta hai kal chapter na aaye adjust kar lena main puri koshis karugi ki chapter de du.
मायरा शालिनी की बात सुनकर बोली, "नहीं कशिश, इतने टाइम बाद आई है। आप दोनों बात करो, मैं सोने जा रही हूँ।"
"मैडम, कोई बात नहीं। हम बाद में बात कर लेंगे। आपकी मालिश कर दूँ?" शालिनी ने तुरंत कहा।
"मैंने कहा ना, आप दोनों बात करो। मैं सो जाऊँगी, तो खुद ठीक हो जाऊँगा। आप फ़िक्र मत करो।" मायरा ने कुछ पल रुककर कहा।
शालिनी और कशिश ने मायरा की बात पर हामी भरी। मायरा ने उन्हें मुस्कुराकर देखा और अपने कमरे की ओर चल दी।
मायरा अपने कमरे की ओर जा रही थी। स्टडी रूम से गुज़रते हुए उसके कदम रुक गए। वह स्टडी रूम को देखकर कुछ सोचती हुई खुद से बोली, "क्या मुझे मिस्टर खन्ना से बात करनी चाहिए? क्या वो मुझे मम्मी से मिलवा देंगे? पर क्या वो मेरी बात मानेंगे?"
मायरा स्टडी रूम को घूर रही थी। फिर कुछ सोचते हुए बोली, "चार महीने हो चुके हैं मम्मी से मिले हुए। एक बार कोशिश करके देख लेती हूँ।"
अबीर ने मायरा की माँ को अस्पताल में शिफ्ट कराया था। डॉक्टर को सख्त हिदायत दी थी कि उसकी मर्ज़ी के बगैर कोई रूम में नहीं आएगा। मायरा ने एक-दो दफ़ा कोशिश की थी, लेकिन उसे मिलने नहीं दिया गया था। अबीर को अलग से शिकायत भी कर दी गई थी।
मायरा कुछ देर तक स्टडी रूम को घूरती रही। फिर एक गहरी साँस लेकर उसने दरवाज़े पर दस्तक दी। अंदर से अबीर की भारी आवाज़ आई। अबीर की भारी आवाज़ सुनकर मायरा के शरीर में सनसनी दौड़ गई। वह डरते हुए स्टडी रूम में दाखिल हुई और एक नज़र स्टडी रूम को देखा। तभी उसकी नज़र टेबल पर बैठे अबीर पर पड़ी जो सर्द निगाहों से उसे घूर रहा था।
अबीर को देखकर मायरा डर से अपना गला साफ़ करती हुई छोटे-छोटे कदमों से उसकी ओर बढ़ी। वह इतनी धीरे चल रही थी कि अगर उसकी और कछुए की दौड़ कराई जाती, तो कछुआ जीत जाता। अबीर ने उसकी स्पीड देखकर आँखें छोटी करके कहा, "सनशाइन, अगर तुम इस स्पीड से आओगी, तो सुबह हो जाएगी।"
मायरा धीरे-धीरे चलते हुए उसके सामने आकर खड़ी हो गई और कुछ पल रुककर बोली, "वो...मुझे आपसे कुछ बात करनी थी।"
"सुन रहा हूँ मैं।" अबीर ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए कहा।
मायरा बार-बार घबराहट से अपने हाथों को रगड़ रही थी। अबीर यह अच्छे से देख रहा था। मायरा ने अबीर से नज़रें चुराते हुए एक गहरी साँस लेते हुए कहा, "मुझे मम्मी से मिलना है।"
अबीर आराम से बैठा उसे देख रहा था। मायरा की बात सुनकर उसके चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान तैर गई। उसने मायरा की कलाई पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। अचानक अबीर के खींचने से मायरा संभल नहीं पाई और अबीर की गोद में गिर गई। अब मायरा की पीठ अबीर के सीने से लगी हुई थी और उसके दोनों पैर अबीर के पैरों के बीच में थे। मायरा उसकी गोद से उठने की कोशिश करने लगी, तभी अबीर ने उसकी कमर पर अपनी पकड़ कस ली और उसके बालों को एक तरफ़ कर दिया। अबीर के छूते ही मायरा ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं।
मायरा ने बैकलेस टॉप पहना हुआ था। उसकी पीठ पर अबीर की ठंडी उंगलियाँ चल रही थीं। अबीर ने उसकी कमर को ढीला करते हुए अपने होठों को उसके गले पर घुमाते हुए कहा, "मैं तुम्हारी मम्मी से मिलवा दूँगा, पर इसके बदले मुझे क्या मिलेगा?"
मायरा जो अबीर की बात सुनकर खुश हुई थी, अबीर की पूरी बात सुनकर उसका चेहरा उतर गया। उसने साँस लेते हुए कहा, "क्या करना है मुझे?"
"मुझे seduce करो।" अबीर ने उसकी गर्दन पर किस करते हुए कहा।
"मतलब...?" मायरा अबीर को हैरानी से देखते हुए बोली।
अबीर के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान तैर गई। उसने उसकी गर्दन पर जोर से काटा, जिससे मायरा चीख उठी और उसकी आँखों में आँसू आ गए। अबीर ने उस जगह को चाटते हुए कहा, "हमेशा मैं खुद इंटीमेट होता हूँ, लेकिन आज तुम मेरा साथ दोगी। मैं बेड पर तुम्हारे मुँह से अपना नाम सुनना चाहता हूँ। तुम मुझे मजबूर करोगी तुम्हारे साथ इंटीमेट होने के लिए।"
मायरा की आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं। अबीर हमेशा से खुद उसके साथ इंटीमेट होता था। कभी मायरा ने उसका साथ नहीं दिया था।
अबीर ने उसे तिरछी नज़रों से देखते हुए डेविल स्माइल करते हुए कहा, "तुम्हें कंडीशन मंज़ूर है तो बोलो। मैं कल तुम्हारी मम्मी से मिलवा दूँगा?"
मायरा सोच में पड़ गई। उसने अपनी मम्मी को चार महीने से नहीं देखा था। उसे किसी भी कीमत पर अपनी मम्मी से मिलना था। उसने एक गहरी साँस ली और अबीर को देखकर बोली, "मंज़ूर है।"
अबीर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई।
अबीर की बात सुनकर मायरा की आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं। अबीर हमेशा से खुद उसके साथ अंतरंग होने की कोशिश करता रहा था, पर मायरा ने कभी उसका साथ नहीं दिया था।
"तुम्हें शर्त मंज़ूर है तो बोलो, मैं कल तुम्हारी मम्मी से मिलवा दूँगा?" अबीर ने उसे तिरछी नज़रों से देखते हुए, शैतानी मुस्कान के साथ कहा।
अबीर की बात सुनकर मायरा सोच में पड़ गई। उसने अपनी मम्मी को चार महीने से नहीं देखा था। उसे किसी भी कीमत पर अपनी मम्मी से मिलना था। उसने गहरी साँस ली और अबीर को देखकर कहा, "मंज़ूर है।"
मायरा की बात सुनकर अबीर के चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ गई।
अबीर और मायरा उस वक्त कमरे में थे। मायरा दीवार से सटी हुई थी और अबीर उसे अपने हाथों में कैद करके किस कर रहा था। उनके होठ आपस में जुड़े हुए थे। अबीर का एक हाथ मायरा की कमर पर था, जिसे वह धीरे-धीरे सहला रहा था। वह कभी उसके ऊपरी होंठों को चूस रहा था, तो कभी निचले होंठों को काट रहा था। मायरा उसकी शर्ट को मुट्ठी में भरकर किस बैक कर रही थी। उसे किस करना नहीं आता था; मायरा की गति अबीर से मेल नहीं खा पा रही थी। अबीर उसके बालों को मुट्ठी में भरकर उसे और गहराई से चूमने लगा।
पन्द्रह मिनट किस करने के बाद अबीर उससे दूर होकर उसकी गर्दन चूमने लगा। मायरा उसके बालों को अपनी मुट्ठी में भरकर धीरे-धीरे उसकी पीठ सहला रही थी। अबीर उसकी गर्दन को और गहराई से चूमने लगा और उसकी गर्दन पर जोर से काटा। अबीर के काटते ही मायरा की चीख निकल गई और वह उसके बालों को और कसकर पकड़ ली। अबीर उस काटे हुए स्थान को चूसने लगा। मायरा भी आज पहली बार उसके स्पर्श से मदहोश हो रही थी।
अबीर उससे दूर होकर गहरी साँस लेते हुए उसकी आँखों में देखने लगा। वह अनियंत्रित हो रहा था। वह कामुक नज़रों से उसे देख रहा था। मायरा उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर उसके होठों को चूम ली। मायरा उसे किस करके पीछे हटने वाली थी कि अबीर उसके सर के पीछे हाथ रखकर उसके होठों को मुँह में भरकर चूमने लगा।
पाँच मिनट बाद अबीर उससे दूर होकर उसकी आँखों में देखते हुए बोला, "मैं खुद को नियंत्रित नहीं कर पा रहा हूँ, मैं तुम्हारी चीखें अपने बिस्तर पर सुनना चाहता हूँ।"
"कृपया, कोमल रहें," मायरा ने उसकी बात सुनकर उसकी आँखों में देखते हुए कहा।
"नहीं, मैं कोमल नहीं रहूँगा। मैं अपना नाम तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हूँ," अबीर ने उसे अपनी बाहों में उठाते हुए कहा।
मायरा उसकी बात सुनकर डर से भर गई और उसकी शर्ट को मुट्ठी में भरकर बोली, "मैं तुम्हें संभाल नहीं पाऊँगी।"
अबीर उसे लेकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर आते हुए बोला, "मुझे पता है तुम कर लोगी।"
अबीर उसके ऊपर आकर उसकी गर्दन चूमने लगा और मायरा उसकी पीठ और बालों को धीरे-धीरे सहला रही थी। अबीर उसके टॉप को उसके शरीर से अलग कर दिया। अब मायरा उसके सामने सिर्फ़ अन्दरूनी कपड़ों में थी। वह मायरा को कामुक नज़रों से देखते हुए अपनी शर्ट उतारकर एक तरफ़ फेंक दी और दुबारा उसे चूमने लगा। मायरा की सिसकियाँ धीरे-धीरे तेज हो रही थीं, जिसे सुनकर अबीर और पागल हो रहा था। उसने उसके बचे हुए कपड़े भी उसके शरीर से अलग कर दिए और कमरे की सारी लाइट बंद करके डिम लाइट ऑन कर दी।
अबीर उसके संवेदनशील अंग को छू रहा था जिससे मायरा बेचैन हो रही थी। उसके लिए खुद को नियंत्रित करना भी मुश्किल हो रहा था। वह मदहोशी में उसके बालों को मुट्ठी में भरकर बोली, "कृपया, अबीर।"
अबीर ने उसके मुँह से अपना नाम सुनकर सर उठाकर उसे देखा और उसके संवेदनशील अंग को सहलाते हुए मदहोशी से बोला, "कृपया क्या?"
मायरा ने बेडशीट को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अबीर को देखकर बेचैन होकर बोली, "कृपया, मुझे ले लो।"
मायरा की बात सुनकर अबीर के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। उसने मायरा की कमर पकड़कर अपनी तरफ़ खींचा। मायरा की जोरदार चीख निकल गई और उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसकी सिसकियाँ पूरे कमरे में धीमी संगीत की तरह गूंज रही थीं।
अबीर ने उसके मुँह से अपना नाम सुनकर सिर उठाकर उसे देखा और उसके संवेदनशील अंग को सहलाते हुए मदहोशी से कहा, "प्लीज क्या..?"
"मायरा ने बेडशीट अपनी मुट्ठी में भर ली और अबीर को देखकर बेचैन होकर कहा, "Please take me."
"मायरा की बात सुनकर अबीर के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। उसने मायरा की कमर पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। मायरा जोर से चीखी और उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसकी सिसकियाँ पूरे कमरे में धीमी संगीत की तरह गूंज रही थीं।"
सुबह अबीर और मायरा एक-दूसरे की बाहों में सो रहे थे। अबीर ने सुबह मायरा को छोड़ा, जिससे वह थककर उसकी बाहों में निढाल हो गई। सुबह 8 बजे अबीर की आँख खुली। खिड़की से सूरज की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने आँखें मलते हुए उठा और उसकी नज़र अपनी बाहों में सोई मायरा पर गई। अबीर ने उसके चेहरे को गौर से देखा- मायरा की छोटी नाक, बड़ी पलकें, गुलाबी प्राकृतिक होंठ, उसके चेहरे के लक्षण बहुत ही अच्छे थे। आज पहली बार अबीर उसके चेहरे को इतनी गौर से निहार रहा था।
अबीर उसे देख ही रहा था कि उसका फ़ोन बज उठा। फ़ोन की आवाज़ सुनकर अबीर घबरा गया और पास पड़े फ़ोन को उठाकर बंद कर दिया। फिर उसने मायरा की ओर देखा। फ़ोन की आवाज़ सुनकर उसकी पलकें फड़क रही थीं। उसने अपना हाथ उसके बालों में ले जाकर धीरे-धीरे सहलाते हुए कहा, "स्लीप, sunshine।"
अबीर के हाथों में पता नहीं क्या जादू था, मायरा उसकी आवाज़ सुनकर तुरंत सो गई। अबीर ने अपना हाथ धीरे से उसके बालों से हटाकर उससे दूरी बनाई और बेड पर पड़ा कंबल मायरा के ऊपर डाल दिया। सोते हुए मायरा बहुत मासूम और प्यारी लग रही थी। अबीर के दिमाग में पता नहीं क्या आया, वह आगे बढ़कर उसके माथे को चूम लिया। नींद में ही मायरा के चेहरे पर सुकून छा गया। अबीर उससे दूर होकर अपनी पैंट पहनकर, मायरा को एक नज़र देखकर जिम के लिए चला गया।
लगभग डेढ़ घंटे बाद अबीर कमरे में आया। उसने कमरे में आकर बेड पर देखा तो मायरा कहीं नहीं थी। तभी उसे बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ सुनाई दी। पानी की आवाज़ सुनकर अबीर ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और बालकनी में जाकर मुंबई के नज़ारे को देखते हुए सिगरेट के लंबे-लंबे कश लेने लगा। लगभग 10 मिनट बाद मायरा बाथरूम से बाहर आई।
जब अबीर बालकनी से अंदर आया तो उसे आईने के सामने खड़ी मायरा दिखाई दी। मायरा को देखकर अबीर अपनी आँखें झपकना भी भूल गया। आईने के सामने खड़ी मायरा ने नीले बैकलेस ब्लाउज़ वाली साड़ी पहनी हुई थी। वह हेयर ड्रायर से अपने बालों को सुखा रही थी, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही थी।
अबीर बेसुध होकर अपने कदम मायरा की ओर बढ़ा दिया और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया। मायरा का ध्यान अबीर पर नहीं था, वह अपने बालों को सुखाकर पीछे कर रही थी। उसके बाल अबीर के चेहरे से होते हुए उसकी कमर पर झूल गए। अबीर ने उसके बालों की खुशबू को अपने अंदर उतारते हुए आँखें बंद कर लीं।
धीरे-धीरे अबीर का हाथ मायरा की खुली कमर पर पहुँच गया। अपनी कमर पर किसी का हाथ महसूस करके मायरा घबराकर सामने देखी। अबीर का हाथ मायरा की कमर पर हिल रहा था। मायरा आईने में उसे देखते हुए बोली, "हम हॉस्पिटल कब जाएँगे, Mr. Khanna?"
अबीर ने उसकी बात सुनकर उसके बालों को साइड किया। अब मायरा की खुली पीठ अबीर के सामने थी। वह आगे बढ़कर उसकी खुली पीठ को चूम लिया। अबीर के चूमते ही मायरा की आँखें बंद हो गईं। अबीर उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसके कानों में फुसफुसाया, "बहुत खूबसूरत लग रही हो।"
अबीर के मुँह से तारीफ़ सुनकर अनजाने में ही मायरा के चेहरे पर मुस्कान आ गई। अबीर ने उसके कान को चूमते हुए मदहोशी से कहा, "तुम इतनी खूबसूरत बनकर बाहर नहीं जा सकती।"
अबीर की बात सुनकर मायरा का मुँह बिगड़ गया और वह उसे देखते हुए बोली, "लेकिन क्यों?"
मायरा की बात सुनकर अबीर ने उसके कान को हल्का सा सहलाते हुए कहा, "तुम्हें लोगों के सामने इतना खूबसूरत बनने का कोई हक नहीं है।"
अबीर की बात सुनकर मायरा का मुँह बन गया, लेकिन वह कुछ बोली नहीं। अबीर उसके कान से होते हुए उसकी गर्दन पर आया और चूमने लगा। मायरा ने अपने हाथों की मुट्ठी कस ली। अबीर ने उसकी गर्दन को हल्का सा काटते हुए उससे दूर होकर कहा, "साड़ी बदलकर आओ, फिर हॉस्पिटल जाना है हमें।"
मायरा ने अबीर की बात सुनकर मुँह बना लिया। वह जानती थी कि अबीर से बहस करने का कोई फायदा नहीं है। वह चुपचाप वॉर्डरोब से कपड़े निकालकर बाथरूम चली गई।
अबीर की बात सुनकर मायरा का मुँह बन गया, लेकिन वह कुछ नहीं बोली। अबीर उसके कान से होते हुए उसकी गर्दन पर आया और चूमने लगा। मायरा ने अपने हाथों की मुट्ठियाँ कसकर बंद कर लीं। अबीर ने उसकी गर्दन को हल्का सा काटा और उससे दूर होकर कहा, "साड़ी चेंज करके आओ, फिर हॉस्पिटल जाना है हमें।"
मायरा अबीर की बात सुनकर मुँह बना लेती है। वह जानती थी अबीर से बहस करने का कोई फायदा नहीं है। वह चुपचाप वॉर्डरोब से कपड़े निकाल कर वॉशरूम चली गई।
मायरा हॉस्पिटल में अपनी माँ के कमरे में थी। उसकी माँ मशीनों के बीच घिरी हुई, ज़िंदा लाश की तरह बिस्तर पर पड़ी थी। उनकी आँखें खुली हुई थीं। वे चुपचाप, एकटक मायरा को रोता हुआ देख रही थीं। एक औलाद के लिए अपनी माँ को बिस्तर पर ज़िंदा लाश बनी देखना आसान नहीं होता। माँ-बाप के ना होने पर यह दुनिया औलाद के लिए अज़ाब बन जाती है। हर कोई उसकी मजबूरी का फ़ायदा उठाता है। अबीर ने उसकी मदद करके कोई एहसान नहीं किया था; उसने तो मायरा की मजबूरी का फ़ायदा उठाकर सिर्फ़ एक डील की थी।
मायरा अपनी माँ को देखकर पल-पल मर रही थी। उसने सुधा जी का हाथ अपने हाथ में लेकर चूमा और आँसू भरी आँखों से कहा, "मम्मा, बाबा तो थे ही नहीं, अब आपने भी अपनी मायरा को अकेला छोड़ दिया। आपको पता भी है, आपको इस तरह देखकर मुझे कितनी तकलीफ होती है? मैं थक चुकी हूँ, मम्मा। प्लीज़ आप ठीक हो जाओ।"
मायरा ने उनके हाथ को एक बार फिर चूमकर अपने सीने से लगा लिया। मायरा के आँसू उनके हाथ को भीगा रहे थे। वे बेड पर लेटी अपनी बेटी को देख रही थीं, लेकिन अफ़सोस, वे आगे बढ़कर उसे गले नहीं लगा सकती थीं। कुदरत का नियम है यह। कई दफ़ा इंसान इतना बेबस हो जाता है कि ना वह खुद के लिए कुछ कर पाता है और ना अपने अपनों के लिए। यही हालत सुधा जी की थी।
मायरा उन्हें देखकर रोते हुए कुछ पल रुकी और बोली, "मम्मा, प्लीज़ ठीक हो जाओ। जल्दी आप ठीक हो जाओगे तो हम दोनों यहाँ से कहीं दूर चले जाएँगे, सबसे दूर, Mr. Khanna से दूर चले जाएँगे। उनका साया भी हम तक नहीं पहुँच पाएगा। हम दोनों अपनी नई ज़िंदगी शुरू करेंगे। बस आप एक दफ़ा ठीक हो जाएँ। आपकी बेटी आपको बहुत मिस करती है।"
मायरा आगे कुछ कहती, तभी कमरे में डॉक्टर आ गए। उन्होंने मायरा को देखकर कहा, "Mrs. Khanna, आप पेशेंट से ज़्यादा बात करके उन्हें स्ट्रेस मत दें। ऐसे उनकी हालत बिगड़ सकती है।"
डॉक्टर की बात सुनकर मायरा अपनी माँ का हाथ छोड़कर उठी और नीचे झुककर उनके माथे को चूमकर खड़ी हो गई। फिर डॉक्टर को देखते हुए बोली, "मेरी मम्मा का ख्याल रखना, डॉक्टर।"
डॉक्टर मायरा की बात सुनकर बोले, "जी, Mrs. Khanna, आप बिल्कुल फ़िक्र मत करें।"
डॉक्टर की बात सुनकर मायरा अपना सिर हिला देती है और एक नज़र अपनी माँ को देखकर वहाँ से निकल जाती है। मायरा कॉरिडोर में भी रोते हुए जा रही थी। आने-जाने वाले लोग सब उसे देख रहे थे। वह हॉस्पिटल से बाहर आती है। बाहर अबीर अपनी गाड़ी में इंतज़ार कर रहा था। अबीर कार में अपना फ़ोन स्क्रॉल कर रहा था। मायरा को आता देखकर उसने अपना फ़ोन रख दिया। मायरा चुपचाप आकर गाड़ी खोलकर उसमें बैठ गई। अबीर उसके बैठते ही गाड़ी के शीशे ऊपर चढ़ा लेता है और कार स्टार्ट कर देता है।
मायरा अभी भी गाड़ी में बाहर देखते हुए सिसक रही थी। अबीर उसे बार-बार देख रहा था। वह उसके रोने से डिस्ट्रैक्ट हो रहा था। सुनसान जगह पर, आधे रास्ते में अबीर एकदम गाड़ी रोकता है। अबीर के गाड़ी रोकते ही मायरा सिसकते हुए उसकी तरफ़ देखने लगती है। अबीर उसकी तरफ़ देखता है। एक पल के लिए दोनों की आँखें मिलती हैं। अबीर हाथ आगे बढ़ाकर उसकी सीट बेल्ट खोलता है। मायरा नासमझी में अबीर को देखती है। अबीर सीट बेल्ट खोलकर एकदम उसे अपनी तरफ़ खींचकर अपने सीने से लगा लेता है। मायरा अबीर की गोद में थी।
अबीर की बाहों की गर्मी महसूस करके मायरा उसके कॉलर को अपने हाथों में भरकर उसकी गर्दन में अपना चेहरा छुपाकर जोर-जोर से रोने लगती है। वह अबीर से किसी छोटे बच्चे की तरह चिपकी हुई थी। अबीर को अपनी गर्दन पर उसके आँसू महसूस हो रहे थे। अबीर ने उसे चुप होने के लिए एक बार भी नहीं कहा था; बस वह उसे बाहों में भरकर धीरे-धीरे उसके बालों में अपनी उँगलियाँ चला रहा था। उसके चेहरे पर कोई इमोशन नहीं था।
थोड़ी देर रोने के बाद उसकी आँखें भारी होने लगती हैं। कुछ देर में वह नींद की आगोश में चली जाती है। जब अबीर को अपनी गर्दन पर उसकी गरम साँसें महसूस होती हैं, तो वह उसे ऐसे ही बाहों में भरकर कार स्टार्ट कर देता है। वह गाड़ी बहुत हल्के चला रहा था, जिससे मायरा की नींद ना टूटे। वह बीच-बीच में मायरा को थपकियाँ दे रहा था।
कुछ देर में अबीर की कार विला के बाहर आकर रुकती है। वह अपनी सीट बेल्ट खोलकर मायरा को आहिस्ता से गोद में उठा लेता है और गाड़ी की चाबी ड्राइवर को देकर अंदर बढ़ जाता है। अंदर कशिश हॉल में बैठी फ़ोन स्क्रॉल कर रही थी। मायरा को अबीर की गोद में देखकर वह घबराकर खड़ी हो जाती है। वह कुछ कहती, इससे पहले ही अबीर अपनी उंगली से उसे चुप रहने का इशारा करता है और मायरा को लेकर अपने कमरे में बढ़ जाता है।
कमरे के बाहर पहुँचकर अबीर अपने पैर से गेट खोलता है और मायरा को बेड पर लिटा देता है। मायरा अभी भी गहरी नींद में सो रही थी। अबीर बेड से ब्लैंकेट उठाकर उसे कवर करके उसके माथे को चूमता है और एक नज़र उसे देखकर कमरा बंद करके नीचे आता है।