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Sun Mere Hamsafar

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शुरुआत  ❤☺ एक लड़की अपने रूम के खिड़की पर बैठी थी और एक टक आसमान में चांद को देख रही थी उस लड़की के चेहरे पर एक अलग ही खुशी और चमक दिख रही थी "प्राची सुबह हमें निकलना है और तू अब तक जाग रही है सो जा" एक औरत अंदर आते हुए बोली मां आप चिंता मत करो मै...

Total Chapters (86)

Page 1 of 5

  • 1. Sun Mere Hamsafar - Chapter 1

    Words: 1059

    Estimated Reading Time: 7 min

    एक लड़की अपने कमरे की खिड़की पर बैठी थी और एकटक आसमान में चांद को देख रही थी। उस लड़की के चेहरे पर एक अलग ही खुशी और चमक दिख रही थी।

    "प्राची, सुबह हमें निकलना है और तू अब तक जाग रही है? सो जा।" एक औरत अंदर आते हुए बोली।

    "माँ, आप चिंता मत करो, मैं सुबह जल्दी उठ जाऊँगी।" प्राची खिड़की से नीचे उतरकर पीछे मुड़कर अपनी माँ को देख मुस्कुरा कर बोली।

    प्राची की माँ, जिनका नाम राधिका जी है, प्राची के पास आकर उसके सिर पर हाथ रखा। "तू तो सुबह जल्दी उठ जाएगी, पर पाँच दिन बाद इंगेजमेंट है और अगर ऐसे ही इतनी रात तक जागेगी तो आँखों के नीचे डार्क सर्कल आ जाएँगे।"

    राधिका जी की बात सुनकर प्राची शर्मा गई। जिसे देख राधिका जी मुस्कुराते हुए बोलीं, "चल अब सो जा।"

    इतना कहकर राधिका जी कमरे से बाहर चली गईं। राधिका जी के जाने के बाद प्राची फिर से खिड़की से बाहर देखने लगी और कहा, "मुझे विश्वास नहीं हो रहा है, पाँच दिन बाद हमारी इंगेजमेंट है और तीन महीने बाद शादी। क्या अभी जैसे मैं तुम्हें याद कर रही हूँ, मैं जैसे तुम्हारे बारे में सोच रही हूँ, तुम भी सोच रहे हो? तुम भी मुझे याद कर रहे हो? जैसे मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूँ हमारी शादी का, क्या तुम भी कर रहे हो?"

    इतना कहते ही प्राची शर्मा गई और फिर मुस्कुराते हुए अपने बिस्तर पर आकर लेट गई। लेटने के कुछ देर बाद ही प्राची को नींद आ गई और वह सो गई। सोते हुए भी उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान थी।

    यह है हमारी कहानी की नायिका, प्राची गुप्ता। कत्थई आँखें, गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ, गोरा रंग, गोल चेहरा, कमर तक आते बाल, पतली कमर—बिल्कुल किसी परी की तरह दिखती है। कोई भी अगर देखे तो देखता ही रह जाए।

    वहीं दिल्ली में, एक बहुत बड़े विला में, एक आलीशान कमरे की बालकनी में एक लड़का खड़ा था, आसमान में चाँद को देखते हुए सिगरेट पी रहा था। उस लड़के का चेहरा बहुत ही कोल्ड था; उसके चेहरे पर कोई भी भाव नहीं था। वह अपनी खाली आँखों से आसमान में चाँद को देख रहा था।

    "तनिष्क, पाँच दिन बाद इंगेजमेंट है, तीन महीने बाद शादी। क्या तुम यह शादी करोगे? क्या तुम इसे नहीं तोड़ोगे? क्या तुम उस लड़की से शादी कर लोगे? अगर तुम उस लड़की से शादी कर लोगे तो मेरा क्या होगा?"

    पीछे से एक लड़की की मीठी पर रुँधी हुई आवाज़ आई। इस आवाज़ को सुनकर तनिष्क पीछे पलटकर देखा तो एक लड़की, जिसने एक लाल रंग का, घुटनों से काफी ऊपर तक नाइट ड्रेस पहना हुआ था, चेहरे पर मेकअप और आँखों में आँसू लिए तनिष्क को देख रही थी। वह लड़की काफी खूबसूरत थी। तनिष्क के पलटते ही वह लड़की दौड़ते हुए तनिष्क के पास आकर उसे गले लगा लेती है और रोते हुए कहती है, "प्लीज़ तनिष्क, तुम उस लड़की से शादी मत करो। अगर तुम उस लड़की से शादी करोगे तो मैं मर जाऊँगी। मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती। तुम्हें पता है ना मेरे तुम्हारे सिवा कोई नहीं है?"

    "डोंट वरी, शनाया। मैं यह शादी नहीं होने दूँगा। यह शादी नहीं होगी।" तनिष्क शनाया के बालों को सहलाते हुए बोला।

    तनिष्क की बात सुनकर शनाया खुश हो गई; उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने अपना चेहरा ऊपर करके तनिष्क को देखा।

    "अगर तुम उस लड़की से शादी नहीं करोगे तो क्या? आज रात हम..."

    "शनाया, तुम्हें अभी अपने कमरे में जाकर सो जाना चाहिए। बहुत रात हो गई है। कल सुबह तुम्हारे सूट की न्यू मूवी का शूट है, तो जाओ जाकर सो जाओ।" शनाया को खुद से दूर करके तनिष्क ने कहा।

    तनिष्क की बात सुनकर शनाया को गुस्सा तो आया, पर उसने अपने गुस्से को यह सोचकर शांत किया कि तनिष्क ने उसे कहा है कि वह यह शादी नहीं करेगा और इससे ही शनाया बहुत खुश थी। इतना सोचकर शनाया वहाँ से चली गई।

    शनिया के जाने के बाद तनिष्क फिर से आसमान में देखने लगा और कुछ देर आसमान में चाँद को देखने के बाद उसने अपने हाथ से सिगरेट को नीचे फेंक कर अपने पैरों से मसल दिया और अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गया। पर नींद तनिष्क की आँखों से कोसों दूर थी। वह एकटक सीलिंग फैन को घूर रहा था।

    तनिष्क सिंघानिया, देश का नंबर वन बिज़नेसमैन, जिसने अपनी मेहनत से अपने पापा की कंपनी को इतनी ऊँचाई पर पहुँचाया है जहाँ तक पहुँचना बस सब सपना ही देखते हैं। मस्कुलर बॉडी, हरी आँखें, रेशमी बाल, पतले होंठ, गोरा रंग—वह बहुत ही ज़्यादा हैंडसम था, बिल्कुल किसी प्रिंस चार्मिंग की तरह, जिसे कोई भी लड़की देखे तो उसके पीछे पागल हो जाए।

    सुबह का वक़्त। प्राची और उसका परिवार सुबह-सुबह ही अपनी कार से सिंघानिया मेन्शन की ओर निकल पड़े थे। कार में महेश जी अपने किसी दोस्त से हँस-हँस कर बातें कर रहे थे, टीना प्राची को चिढ़ा रही थी और राधिका जी अब तक सो रहे थे। टीना के चिढ़ाने से प्राची कुछ नहीं कह रही थी; वह बहुत ज़्यादा शर्मा रही थी और खिड़की से बाहर देख रही थी। उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी, जो वह चाहकर भी नहीं रोक पा रही थी।

    कुछ घंटे बाद उनकी कार एक बड़े से गेट के सामने रुकी और उनकी कार के रुकते ही गेट अपने आप खुल गए। कार अंदर दाखिल हुई। लगभग चार मिनट बाद कार पार्किंग में रुकी और सभी कार से बाहर निकल आए और अपनी आँखें घुमाते हैं तो उस कार पार्किंग में अनगिनत लग्ज़री कारें थीं। वे सब पार्किंग को घूम-घूम कर देख रहे थे, तभी वहाँ पर बहुत सारे नौकर आ गए और उनके सामान को लेकर उन्हें सम्मान के साथ उस बड़े से मेन्शन के अंदर ले गए।

    "वहीं रुक जाओ।"

    सभी अंदर चले गए और जब प्राची अंदर जाने ही वाली थी, तभी उसके कान में यह आवाज़ पड़ी और वह वहीं रुक गई और अपना सिर ऊपर करके सामने देखा।

    क्रमशः

  • 2. Sun Mere Hamsafar - Chapter 2

    Words: 1162

    Estimated Reading Time: 7 min

    अब आगे सामने एक औरत खड़ी थी जिनके हाथ में एक थाली थी उसमें एक दिया जल रही थी और वह मुस्कुराते हुए प्राची को देख रही थी प्राची भी उस औरत को देख कर मुस्कुरा देती है वह औरत प्राची के पास आकर उसके आरती उतारती है और कहती है "मैं अपने घर के लक्ष्मी को आरती उतारे बिना कैसे अंदर ले आती यह है रुकमणी सिंघानिया तनिष्क सिंघानिया की मां जो दिखने में काफी खूबसूरत और अपनी उम्र से काफी कम की लगती है रुकमणी जी की बात सुनकर प्राची शर्मा जाती है शर्म से उसके पलके झुक जाती है जिसे देख रुकमणी जी मुस्कुराते हुए प्राची को अंदर ले आते हैं अंदर आते हीं प्राची रुकमणी जी के पैर छूकर उनको प्रणाम करती है तो रुकमणी जी उसे आशीर्वाद देते हुए कहते हैं "हमेशा खुश रहो बेटा और जल्द से जल्द शादी करके इस घर में आ जाओ परमानेंटली "उनकी बात सुनकर प्राची की नजर और झुक जाती है और वह शर्माते हुए थोड़ी दूर खड़ा आलोक जी के पास जाती है और उनके पैर छूकर प्रणाम करती है तो वह आशीर्वाद देते हुए कहते हैं "सदा सुखी रहो जल्दी से शादी करके इस घर में आकर मुझे दादा बना दो इतना कहकर वह मुस्कुरा देते हैं और बाकी सभी मुस्कुरा देते हैं वही प्राची शर्म से किसी से आंख मिलाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी वह अपनी नजर उठा ही नहीं रही थी प्राची की चेहरा पूरा लाल हो चुकी थी फिर वह जल्दी से दौड़ते हुए वहां से गार्डन की ओर चली जाती है और माही के पीछे पीछे टिना भी गार्डन में चली जाती है एक मेड को कहो गार्डन में जाने को बच्चे गार्डन में गए हैं उनको उनके रूम दिखा देने को दूर से आई है पहले फ्रेश हो जाए और महेश जी राधिका जी को भी उनका रूम दिखा दो" रुकमणी जी एक मेल को देखते हुए बोली रुकमणी जी की बात सुनकर मेड अपनी सिर हां में हिलाते हैं और एक मेड गार्डन में चली जाती है और दूसरी मेड महेश जी और राधिका जी को उनके रूम की ओर ले जाने लगता है इवनिंग में आलोक जी रुकमणी जी राधिका जी और महेश जी गार्डन में बैठे बातें कर रहे थे रुकमणी जी हम आए इतने टाइम हो गए अभी तक तनिष्क बेटा को नहीं देखा कहां है वह ?" महेश जी रुकमणी जी को देखते हुए पूछा "तनिष्क के एक इंपॉर्टंट मीटिंग आ गया था जिस वजह से वह अभी इंडिया से बाहर है पर वह आज ही आ जाएगा रात तक शायद आलोक जी ने मुस्कुरा कर कहा हम आए हैं और वह अपने इंपॉर्टेट मीटिंग में है कहीं ऐसा ना हो कि अपने शादी और इंगेजमेंट में भी उसके कुछ इंपोर्टेट काम आ जाए मतलब वह जो कहा आप ने मीटिंग वह मीटिंग आ जाए और वह चला जाए मेरी बेटी को अकेला छोड़" राधिका जी ने कहा नहीं राधिका जी आप यह कैसी बातें कर रहे हैं? शादी और इंगेजमेंट यह तो एक लड़का और लड़की के लिए एक बहुत ही इंपॉर्टंट और खूबसूरत दिन है और इस दिन के लिए सभी लड़के लड़कियां इंतजार करता है चाहे वह अपने मुंह से कहें या ना कहें और तनिष्क उस दिन कोई भी मीटिंग नहीं रखेगा' रुकमणी जी राधिका जी को देखते हुए कहा ना रखे तो ही अच्छा है मैंने तो बस इसलिए पूछा क्योंकि मुझे अपनी बेटी की फिक्र है" राधिका जी ने भी रुकमणी जी को देखते हुए कहा वैसे हमारी प्राची इतनी खूबसूरत है ना कि जब एक बार तनिष्क उसे देख लेगा ना तो देखना अपना सारा काम छोड़कर बस घर पर ही बैठा रहेगा" ओलोक जी बात को संभालते हुए कहते हैं ओलोक जी की बात सुनकर सभी एक साथ मुस्कुरा देते हैं प्राची अपने रूम में बैठी थी और कुछ सोच रही थी तभी उसे पीछे से कोई हग करता है जिस से प्राची चौक जाती है और झट से खुद को छुरा के पीछे पलट कर देखती है पीछे एक प्यारी सी क्यूट सी दिखने वाली लड़की खड़ी थी उस लड़की को देखते ही प्राची के चेहरे पर स्माइल आ जाती है और वह मुस्कुराते हुए उसे हग कर लेती है और कहती है "मिश्का कहां थी तू? मैं जब से आई हूं तब से तुझे कितनी बार ढूंढा तू कहीं मिल ही नहीं रही थी मेरी होने वाली भाभी मैं तो तुम्हारे लिए ही गिफ्ट लाने गई थी इतने सालों बाद मेरे बेस्ट फ्रेंड मेरे घर आ रही है और वह भी मेरे भैया से इंगेजमेंट के लिये तो मुझे मेरी भाभी को गिफ्ट तो देना चाहिए ना" मिश्का ने भी प्राची को हग करके कहा मिश्का की बात सुनकर प्राची शर्माने लगी औरउसकी चहरा लाल हो गयी' आआऐएए हाएएए भाभी आप तो शर्माते हुए एकदम सेव लगते हो क्यूट से अगर भैया आपको ऐसे देखेंगे ना तो कच्चा खा जाएंगे और मैं भी बुआ बन जाऊंगी' अपने गाल पर हाथ रख पर्पाची देखते हुए मिश्का बोली मिश्का तू भी ना अभी तक इंगेजमेंट भी नहीं हुई और तू यह सब" प्राची मिश्का को छोड़ दूसरी साइड जाते हुए बोली हुई नहीं तो हो जाएगी और 5 दिन बाकी है बस एक बार बस भैया आपको देख ले उसके बाद बस कर और यह सब छोड़ तूने जो मेरे लिए गिफ्ट लाया है ना वह दिखा" प्राची बात बदलते हुए बोली मिश्का मुस्कुराते हुए अपने बैग से एक प्यारी सी कमरबंद निकालती है और उसे प्राची को दिखाते हुए देख "कैसी है ये ? इस कमरबंद में ना तेरी और भैया की नाम लिखा है Tanishq Prachi यह मैंने स्पेशल ऑर्डर देकर बनवाया है सिर्फ तेरे लिए कैसी लगी और मैं पहले सोच रही थी बेजलेट बनवा दूं पर फिर सोचा कि तेरी कमर इतनी प्यारी है वह खाली रहेगी तो यह कमरबंद तेरे कमरको और एक्ट्रक्टीब दिखायेगी इसे हमेशा तू अपने कमर पर पहन कर रखना यह कंफर्टेबल भी है थैंक यू सो मच मिश्का यह मेरी लाइफ की बेस्ट गिफ्ट है क्या तू मुझे इस पहना देगी? क्योंकि इसे तो मैं अकेले पहन नहीं सकती" प्राची ने तनिष्क के नाम के ऊपर अपनी उंगली फिराते हुए कहा हां में ही पहना देती हूं वैसे भी भाई तो अभी आएंगे नहीं तुझे पहनाने के लिए इतना कहकर मिश्का पहनाने ही वाली थी तभी वह प्राची के चेहरे को देखता है तो शर्म से लाल हो गई थी हाय मेरे प्राची अगर तू ऐसे बात बात पर शर्माएगी ना तो भैया सुहागरात के दिन नहीं रात तेरे साथ रोमांस करने की जगह तुझे देखते देखते ही पूरी रात बिता देंगे शमरि हुऐ कितनी प्यारी लगती हैं यार मिश्का तू ना" इतना कहकर प्राची खिड़की की तरफ मुड़ जाती है"ठीक है बाबा सॉरी अब इतना भी शर्मा मत और चल अब कमरबंद पहना देती हूं तुझे इतना कहकर मिश्का कमरबंद को प्राची के कमर पर पहना देती है तभी वहां पर नैना आ जाती है और तीनों बातें करने लगते हैं To be continue Crush_Queen  दोस्तों अपने प्यारे प्यारे कमेंट जरुर देना.... फॉलो और सब्सक्राइब भी जरूर करिएगा🙏❤

  • 3. Sun Mere Hamsafar - Chapter 3

    Words: 1134

    Estimated Reading Time: 7 min

    तीनों एक-दूसरे से बातें कर ही रहे थे कि प्राची की नज़र बाहर गई। वहाँ बारिश शुरू हो गई थी। बारिश देखते ही प्राची के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई और वह उठकर कमरे से बाहर जाते हुए बोली, "चलो, बारिश में भीगते हैं।"

    "यह लड़की कोई रेन एंजल है क्या! जो बारिश देखते ही भीगने के लिए भाग जाती है," मिश्का ने मुँह बनाकर कहा।

    "मिश्का, मैं परी नहीं, अप्सरा हूँ। अप्सरा! और अब चलो, मुझे भी बारिश में भीगना है।" इतना कहकर टीना मिश्का को पकड़कर खींचते हुए बाहर गार्डन में ले गई, जहाँ प्राची बारिश में भीग रही थी। तीनों साथ में मस्ती करते हुए भीगने लगे।

    प्राची गाना शुरू कर दिया और नाचने लगी।

    "छम छम छम... (छम छम छम छम छम) जुल्फों से बाँध लिए बादल, सीने पर से उड़ने लगे आँचल, मुझसे नैना मिला के मौसम होने लगे पागल..." (प्राची गाते-गाते नाच भी रही थी) "...सबसे होकर बेफ़िक्र नाचूँ मैं आज, छम छम छम छम छम छम छम छम छम छम..."

    प्राची के साथ-साथ टीना और मिश्का भी ताल से ताल मिलाकर नाचने लगीं। वहीं कोई था जो घर के टेरेस से गार्डन में एकटक प्राची को देख रहा था। वह अपनी पलकें तक नहीं झपक रहा था; उसकी नज़र प्राची पर टिकी हुई थी।

    "बारिशों के ताल पर ये खनके मेरी धड़कनों की, कह रही है जी ले तू जरा बार-बार साथ मेरे... सारे अब थिरकने लगे डोले, जमीं नाचे आसमाँ... कोई भी यहाँ कुछ भी कहे, मैंने तो कुछ सुना नहीं... दिल ने मेरी जो भी कहा, मैंने वो किया... हो गिरी हवाएँ झूमती हैं, तन को मेरा चूमती हैं... छोड़ के ये शर्म-हयाँ झूमे ये जिया... मैं तो हवा हूँ, हाथ ना आऊँ... मर्ज़ी से अपनी उड़ती ही जाऊँ... हो खुद की करूँ मैं क्या तारीफ़ें, रातों ने चुराया मेरा काजल... मुझसे नैना मिला के मौसम होने लगे पागल... सबसे होकर बेफ़िक्र नाचूँ मैं आज, छम छम छम छम छम छम छम छम छम छम..."

    तीनों बारिश में भीगते हुए नाच रहे थे, तभी वहाँ एक मेड आई और उन्हें देखते हुए बोली, "आप तीनों को अंदर बुला रहे हैं।" इतना कहकर वह मेड वहाँ से चली गई।

    "अब बहुत भीग लिया हमने, अब जल्दी से चलो, नहीं तो पिटाई पड़ेगी!" इतना कहकर मिश्का उन दोनों को खींचते हुए अंदर ले जाने लगी। पर जाते-जाते प्राची मिश्का से अपना हाथ छुड़ाकर खुद ही आगे-आगे चलने लगी। प्राची को ऐसा करते देख मिश्का और टीना एक-दूसरे को देखकर मुँह बनाते हुए प्राची के पीछे-पीछे चलने लगीं।

    प्राची के गार्डन से अंदर की ओर जाते ही वह शख्स भी टेरेस से चला गया। प्राची हॉल से होते हुए सीढ़ियों की ओर बढ़ ही रही थी कि वह किसी से टकरा गई और गिरने ही वाली थी, पर वह शख्स उसे कमर से पकड़ लिया। गिरने के डर से प्राची ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं। पर जब उसे कोई दर्द महसूस नहीं हुआ और अपने कमर पर किसी का हाथ महसूस हुआ, तो उसने अपनी आँखें खोलकर सामने देखा। उसके सामने एक बहुत ही हैंडसम सा लड़का था जो उसे देखकर मुस्कुरा रहा था। प्राची जो बारिश में भीगने की वजह से उसके बालों से अभी भी पानी टपक रहा था, उसकी सलवार उसके शरीर से चिपक गई थी और हल्की ट्रांसपेरेंट भी हो गई थी। भीगी हुई प्राची और भी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी।

    वह लड़का प्राची की खूबसूरती देखकर उसकी नज़रें ही नहीं हटा पा रहा था। वह बस एकटक उसे देखे जा रहा था।

    "एक्सक्यूज़ मी, मिस्टर, मुझे छोड़िए... हेलो!" प्राची ने उस लड़के से छूटने की कोशिश करते हुए कहा। पर वह लड़का प्राची की खूबसूरती में इतना खोया हुआ था कि उसके कान तक प्राची की आवाज़ नहीं पहुँची और वह वैसे ही प्राची को पकड़े उसे देखता रहा। इससे प्राची को काफी अजीब लगने लगा।

    "कहाँ खो गए आप, ऋषि भैया? प्राची को छोड़िए!" मिश्का और टीना दोनों उनके पास आईं और मिश्का बोली।

    मिश्का की बात सुनकर ऋषि होश में आया और प्राची को छोड़ दिया। ऋषि के अचानक छोड़ने से प्राची ज़ोर से फर्श पर गिर गई और उसकी जोरदार चीख निकल गई।

    "आआआआआआआआआआआ! मर गई! मेरी कमर टूट गई!" इतना कहकर प्राची अपने कमर पकड़कर फर्श पर पूरी तरह लेट गई। टीना और मिश्का जल्दी से प्राची के पास आकर उसे उठाया। उठते ही प्राची गुस्से में ऋषि को देखकर बोली, "बड़े बदतमीज़ हो! पहले तो छोड़ ही नहीं रहे थे और अब जब छोड़े तो मेरे कमर में दर्द कर दिया! अगर मेरी कमर टूट जाती तो क्या तुम मेरे कमर को ठीक कर सकते थे पहले की तरह? बदतमीज़!"

    ऋषि अपना कान पकड़कर बोला, "सॉरी, ब्यूटी! मैं तुम्हारे ब्यूटी में इतना खो गया था कि मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि तुम्हें छोड़ना भी है। और जब मिश्का ने मुझे आवाज़ लगाया तो मैं होश में आया और होश में आने के बाद मुझे यही होश नहीं रहा कि तुम मेरी बाहों में हो, तो मैंने छोड़ दिया। सॉरी।"

    ऋषि की बात सुनकर प्राची अजीब सा मुँह बनाती है और फिर कुछ कहे बिना वहाँ से चली जाती है। मिश्का और टीना भी प्राची के पीछे-पीछे चली जाती हैं और ऋषि वहीं खड़ा प्राची को एकटक देखता रहता है।

    "क्या हुआ, ऋषि भैया? आज भैया के कमरे में ना जाकर यहाँ क्या बात है? और तुम देख क्या रहे हो?" एक लड़का पीछे से आकर ऋषि के कंधे पर हाथ मारते हुए बोला।

    ऋषि वैसे ही सामने देखते हुए बोला, "ब्यूटी..."

    वह लड़का सामने देखता है तो उसे कोई भी नहीं दिखता। फिर वह ऋषि को देखकर कहता है, "ब्यूटी! कौन ब्यूटी? किसकी ब्यूटी? कैसी ब्यूटी?"

    इस बार ऋषि होश में आया और साइड में उस लड़के को देखकर बोला, "शौर्य, तू?"

    "आपको क्या हुआ, ऋषि भैया? यह मेरा घर है और ऑब्वियसली मैं यहीं रहूँगा। पर आप आज यहाँ हॉल में खड़े-खड़े क्या कर रहे हैं? आप तो जब भी आते हैं, तब सीधे तनिष्क भैया के कमरे में चले जाते हैं, कहीं भी देखे बिना।" शौर्य ने आकर छोटी करके ऋषि को देखते हुए पूछा।

    शौर्य की बात सुनकर ऋषि कुछ नहीं कहता, बस मुस्कुराते हुए लिफ्ट के अंदर चला जाता है और फिर लिफ्ट ऊपर की ओर चल जाती है। शौर्य वहीं खड़ा बस देखता रहता है। उसे कुछ भी समझ नहीं आता।

  • 4. Sun Mere Hamsafar - Chapter 4

    Words: 982

    Estimated Reading Time: 6 min

    रात का वक़्त था। सभी डिनर करके अपने-अपने कमरों में चले गए थे। प्राची भी अपने कमरे में थी और खिड़की से बाहर चाँद को देख रही थी। प्राची को रात का आसमान, चाँद और तारे बहुत पसंद थे। यहाँ तक कि अगर आसमान में चाँद-तारे न भी होते, तो भी प्राची को आसमान पसंद था। आसमान जैसा भी हो, उसे हर तरह से आसमान पसंद आता था। वह हमेशा आसमान को देखना पसंद करती थी, जिससे उसे सुकून मिलता था। आज भी प्राची खिड़की से आसमान को ही देख रही थी।

    बहुत देर तक ऐसे ही आसमान को देखने के बाद, अचानक उसका गला सूख गया। वह अंदर टेबल के पास आकर ग्लास उठाई, पर ग्लास में पानी नहीं था। फिर उसने बोतल उठाई, पर बोतल में भी पानी नहीं था।

    "मैं तो पानी लाना ही भूल गई! मैं इतनी भूलीक्कड़ क्यों हूँ?"

    इतना सोचकर प्राची अपनी बोतल लेकर बाहर निकल गई। किचन में जाकर प्राची पानी पीया और बोतल में पानी भरकर अपने कमरे की ओर जाने लगी। तभी एक कमरे के पास से गुज़रते हुए उसे उस कमरे का दरवाज़ा हल्का खुला दिखाई दिया।

    "यह तो तनिष्क जी का कमरा है ना? कितने साल हो गए, मैंने उन्हें नहीं देखा। बस फ़ोटो में ही देखा है। एक बार देख लूँ। पर अगर वे जाग रहे हों तो... नहीं-नहीं। अभी रात के 11:30 बज गए हैं। अब तक तो वे नहीं जाग रहे होंगे। और जाग भी रहे होंगे तो मैं कुछ कहकर मामले को ठीक कर लूँगी। पर एक बार उनको देख तो लूँ।"

    इतना सोचकर प्राची उस कमरे के अंदर चली गई।

    और इधर-उधर देखती है, तो उसे तनिष्क नहीं दिखा। तनिष्क को न देखकर प्राची उदास हो गई और दरवाज़े की ओर मुड़ी ही थी कि तभी किसी ने उसे हाथ से पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। प्राची के हाथ से बोतल छूट गई। प्राची सीधा जाकर उस शख्स के सीने से टकरा गई। और जब उसने अपना सिर ऊपर करके देखा, तो वह तनिष्क था। तनिष्क की आँखें लाल थीं और वह प्राची को ही घूर रहा था।

    तनिष्क को इतने पास देखकर प्राची के दिल की धड़कनें बेकाबू हो गई थीं। वह तनिष्क की गहरी आँखों में खोने लगी थी। एकटक वह तनिष्क को देख रही थी।

    प्राची तनिष्क को देखते हुए इतनी खोई हुई थी कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहा कि तनिष्क अपने चेहरे को उसके चेहरे के करीब ला रहा है। तनिष्क प्राची के चेहरे के करीब अपना चेहरा लाकर उसकी आँखों में देखते हुए उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और पागलों की तरह उसे किस करने लगा।

    तनिष्क के ऐसे किस करने से प्राची एकदम से चौंक गई और उसे समझ ही नहीं आया कि वह क्या करे। कुछ देर बाद, तनिष्क के काटने से प्राची होश में आई।

    "नहीं, शादी से पहले यह ठीक नहीं है। मुझे रोकना होगा।"

    इतना सोचकर प्राची तनिष्क को खुद से दूर करने की कोशिश करने लगी। प्राची के दूर करने की कोशिश करने पर, अचानक ही तनिष्क प्राची के होठों पर फिर से काट दिया, जिससे प्राची को दर्द हुआ और उसके होठों से खून आने लगा। प्राची के खून का स्वाद तनिष्क को और अच्छा लग रहा था और वह और गहराई से प्राची को किस कर रहा था। किस करते-करते तनिष्क प्राची को पीछे बिस्तर पर गिरा दिया और खुद भी उसके साथ ही बिस्तर पर उसके ऊपर आ गया।

    तनिष्क के ऐसे पागलपन भरे किस से प्राची भी बहकने लगी थी और अब वह भी तनिष्क के साथ देने लगी। वे दोनों एक-दूसरे को काफी देर तक किस करते रहे। जब प्राची को साँस लेने में तकलीफ़ हुई, तो उसने फिर से तनिष्क को खुद से दूर करने की कोशिश की। इस बार तनिष्क भी प्राची से दूर हो गया और फिर उसके गले और कॉलरबोन पर किस करते हुए उसके हाथ को अपने हाथों में इंटरवीन कर लिया। तनिष्क अब और भी उत्तेजित होता जा रहा था। तनिष्क के हरकतों से प्राची मदहोश होती जा रही थी। वह वह दर्द, जो तनिष्क दे रहा था, उसे भूलकर उसके प्यार में खो रही थी। पर फिर अचानक उसे होश आया और वह तनिष्क को खुद से दूर करने की कोशिश करने लगी। प्राची अपनी पूरी ताकत लगाकर तनिष्क को खुद से दूर करने की कोशिश कर रही थी। पर प्राची के ऐसा करने पर तनिष्क प्राची के दोनों हाथों को अपने एक हाथ में पकड़ लिया और एक ही झटके में प्राची के ऊपर से हट गया।

    प्राची को इस तरह से देखकर तनिष्क की आँखों में एक अलग ही नशा उतर रहा था। वहीं अब तक प्राची समझ चुकी थी कि तनिष्क नशे में है क्योंकि उसके मुँह से वाइन की बू आ रही थी। अब तनिष्क की आँखों में देखते हुए प्राची को पता चल चुका था कि तनिष्क क्या चाहता है। लेकिन प्राची शादी से पहले यह सब नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह एक संस्कारी लड़की थी। पर तनिष्क को वह बहुत प्यार करती थी। उसके लिए वह आज अपने संस्कारों को भूलने के लिए तैयार थी। वह उसके लिए कुछ भी कर सकती थी।

    प्राची अपनी आँखें बंद कर लेती है और उसके आँखों के कोने से कुछ बूँद आँसू बह जाते हैं। कुछ देर बाद दोनों ही शांत हो जाते हैं और वह तनिष्क के ऊपर निठाल सी लेट जाती है। दोनों पूरी तरह से पसीने से भीगे हुए थे। कुछ ही देर में तनिष्क को नींद आ जाती है और तनिष्क के साथ-साथ प्राची को भी नींद आ जाती है और वे दोनों वैसे ही एक-दूसरे को गले लगाकर सो जाते हैं। क्रमशः

  • 5. Sun Mere Hamsafar - Chapter 5

    Words: 1259

    Estimated Reading Time: 8 min

    सुबह पाँच बजे प्राची की नींद खुली। वह कसमसा कर उठने की कोशिश करने लगी, पर उसे कमर पर किसी का भारी हाथ महसूस हुआ। वह कसमसा कर आँखें खोली और सामने देखा। प्राची के चेहरे के बहुत पास एक हैंडसम सा चेहरा दिखाई दिया। उस चेहरे को देखते ही प्राची के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

    कल रात की सारी बातें उसे याद आ गईं। याद करते ही उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया। प्राची तनिष्क को देख ही रही थी कि तनिष्क का फ़ोन बजने लगा। प्राची पीछे मुड़ी और तनिष्क के फ़ोन को देखने लगी। वह यह देखने ही वाली थी कि कॉल किसने किया है कि तनिष्क की नींद खुल रही थी। यह देखकर प्राची झट से तनिष्क की बाहों से छूटकर वहीं रखे चादर को अपने ऊपर लपेट लिया और कमरे से बाहर भाग गई। प्राची का कमरा पास ही था और पाँच बजे होने की वजह से घर में कोई इतने जल्दी उठा ही नहीं था। प्राची अपने कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर दिया और जल्दी से बाथरूम चली गई।

    फ्रेश होकर प्राची बाहर आई और कल रात के बारे में सोचते हुए मुस्कुराने लगी। मुस्कुराते-मुस्कुराते उसे नींद आ गई और वह सो गई। जब प्राची की नींद खुली तो उसने घड़ी में समय देखा; दस बज रहे थे। यह देखकर प्राची झट से उठ गई और अपने कपड़े और बालों को सही करते हुए कमरे से निकल गई। प्राची जल्दी से हॉल में गई।

    प्राची को देख मिश्का मुस्कुराते हुए बोली, "प्राची, यहाँ क्या कर रही है? तुझे भाई ने बुलाया है, उनको तुझे बात करनी है, तू भाई के पास नहीं गई?"
    "उन्होंने मुझे क्यों बुलाया है?" प्राची थोड़ी घबराते हुए पूछी।
    "क्या उनको सब कुछ याद है? कल रात वाला बिलकुल याद होना चाहिए।" इतना सोचते ही प्राची का चेहरा शर्म से लाल हो गया।
    यह देख टीना बोली, "अरे दीदी, इतना भी ना शर्माओ! वह आपके होने वाले पति हैं। जाइए अपने पति से मिलकर आइए। हां बेटा, तनिष्क ने तुम्हें बुलाया है। उसका कमरा तो तुम्हें पता ही है कहाँ है, जाकर उससे मिल लो।" रुकमणी जी ने मुस्कुराकर कहा।

    प्राची ने एक गहरी सांस छोड़ी, सिर हां में हिलाया और ऊपर तनिष्क के कमरे की ओर चल दी। तनिष्क के कमरे के पास जाकर उसने दरवाज़े पर नॉक किया, "मैं अंदर आ सकती हूँ?" प्राची का दिल बहुत जोर से धड़क रहा था और वह तनिष्क के जवाब का इंतज़ार कर रही थी।
    "अंदर आ जाओ।" अंदर से आवाज़ आई।

    प्राची धीरे-धीरे कदमों से अंदर गई और सिर झुकाकर सामने बैठे तनिष्क के सामने खड़ी हो गई। तनिष्क ने एक बार प्राची को देखा, फिर अपनी नज़रें फेर लीं और कहा, "प्राची, तुम यह शादी क्यों कर रही हो?"

    "जी?" प्राची ने मन में सोचा, "जितना पूछा उतना कहो।"

    "तुम यह शादी अपनी फैमिली के प्रेशर में आकर कर रही हो ना? आई नो, मैं अभी इसीलिए ही कर रहा हूँ। तो इसलिए अच्छा यही होगा कि तुम अपनी फैमिली को यह बता दो कि तुम यह शादी नहीं कर सकती, क्योंकि मैं अभी शादी नहीं कर सकता। और मम्मी ने मुझे कसम दी है, तो मैं मम्मी को यह बात नहीं कह सकता और मैं खुद से यह शादी नहीं तोड़ सकता।"

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची जो शर्मा रही थी, वह चौंक गई। उसने सिर ऊपर करके तनिष्क को देखा, जो दूसरी तरफ़ अपना चेहरा करके खड़ा था। प्राची की आँखों में आँसू आ गए थे। प्राची ने फिर से अपना सिर नीचे कर लिया और कहा, "आप यह शादी क्यों नहीं करना चाहते?"

    "क्योंकि मैं किसी और से प्यार करता हूँ। और कल रात हमारे बीच जो भी हुआ, वह भूल जाओ। वह बस मैं नशे में था। नशे में मुझे तुम में शनाया दिख रही थी। इसलिए वह सब। वैसे भी गलती तुम्हारी ही थी क्योंकि मैं नशे में था, तुम नहीं। पर फिर भी तुमने मुझे नहीं रोका। और वैसे भी कल तुम मेरे कमरे में इतनी रात को क्या करने आई थी? छोड़ो यह सब। वैसे भी तुम जैसी लड़की के लिए कल रात जो हुआ वह कोई बड़ी बात नहीं है, बस एक वन नाइट स्टैंड ही है।" तनिष्क ने प्राची को देखते हुए कहा।

    तनिष्क की बातें सुनकर प्राची को ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिल में हज़ारों खंजर घोंपे जा रहे हों। उसे अपने दिल में इतना दर्द हो रहा था कि उसे लग रहा था कि दर्द के मारे वह अभी मर जाएगी।

    "मैं कल रात की सब बातें भूल गई और आप चिंता मत कीजिए। मैं यह इंगेजमेंट रोक दूंगी। यह शादी नहीं होगी। और एक बात, मेरे लिए कल की रात जैसी भी हो, पर आप मुझे जैसी लड़की समझ रहे हैं, मैं वैसी लड़की नहीं हूँ। मैं पहले जैसी थी, अब नहीं हूँ।" प्राची ने मुस्कुराकर कहा और तनिष्क के कमरे से बाहर निकल गई।

    बाहर आते ही प्राची की आँखों से आँसू गिरने लगे और वह भागते हुए अपने कमरे में जाकर दरवाज़ा लॉक करके दरवाज़े से सटकर नीचे बैठ गई और फफक कर रोने लगी। प्राची अपने घुटनों पर चेहरा छुपाकर रो रही थी। प्राची को कल रात की बातें याद आ रही थीं और साथ ही कुछ और भी, जिसे याद करके उसे और रोना आ रहा था।

    "तनिष्क कहाँ जा रहा है?" तनिष्क जो हाल से होते हुए मेन गेट की ओर जा रहा था, उससे आलोक जी ने पूछा।
    "ऑफिस जा रहा हूँ।" तनिष्क ने कहा और वहाँ से चला गया।

    "भैया यहाँ है, तो अभी तक प्राची क्यों नहीं आई?" मिश्का ने जाते हुए तनिष्क को देखकर कहा।
    "दीदी शायद शर्मा रही होगी और अपने कमरे में ही होगी।" टीना ने कहा।
    "कैसी शर्म? उसे बुलाकर लाओ। सुबह से कुछ नहीं खाया है, अब तो ग्यारह बज गए हैं। मैं जाकर बुलाकर लाती हूँ।" इतना कहकर मिश्का प्राची को बुलाने चली गई।

    "प्राची, तू अपने कमरे में ही है ना? दरवाज़ा ओपन कर और नीचे चल। तूने सुबह से कुछ नहीं खाया।" मिश्का प्राची के कमरे के दरवाज़े पर नॉक करते हुए बोली। प्राची सुन भी रही थी।
    "प्राची, दरवाज़ा खोल!" अंदर से प्राची की कोई आवाज़ न मिलने पर मिश्का ने फिर से दरवाज़ा पीटा। पर बहुत कहने के बाद भी प्राची दरवाज़ा नहीं खोल रही थी। जिससे मिश्का परेशान हो गई और जल्दी से भागकर नीचे जाकर सबको कहने लगी, "प्राची दरवाज़ा ओपन नहीं कर रही है। मैं कब से उसे बुला रही हूँ, पर वह तो अंदर से कुछ कह भी नहीं रही है।"

    मिश्का की बात सुनकर सभी परेशान हो गए और भागकर प्राची के कमरे की ओर जाने लगे।
    "कहीं ऐसा तो नहीं तनिष्क ने उसे कुछ कहा हो जिस वजह से..."
    "मुझे भी यही डर था। इसीलिए मैं कह रहा था प्राची को तनिष्क से मिलने मत दो, पर तुम... तनिष्क ने कहा और तुमने उसे मिलने दे दिया।" आलोक जी परेशान होते हुए बोले और वह भी प्राची के कमरे की ओर जाने लगे। तो रुकमणी जी भी थोड़ा उदास होकर उनके पीछे-पीछे जाने लगे।

    क्रमशः

  • 6. Sun Mere Hamsafar - Chapter 6

    Words: 1268

    Estimated Reading Time: 8 min

    सभी एक साथ प्राची के कमरे का दरवाज़ा पीट रहे थे। पर प्राची दरवाज़ा नहीं खोल रही थी और न ही अंदर से कोई आवाज़ आ रही थी। इससे सभी घबरा रहे थे।

    "हमें दरवाज़ा तोड़ देना चाहिए। न जाने अंदर मेरी बेटी क्या कर रही होगी," महेश जी चिंता करते हुए बोले।

    "हाँ, हमें दरवाज़ा तोड़ देना चाहिए," आलोक जी ने कहा। यह कहते ही दोनों ने जोर-जोर से अपने कंधों से दरवाज़ा धक्का देना शुरू कर दिया। दो-तीन बार ऐसा करने पर अचानक दरवाज़ा अंदर से खुल गया और सामने प्राची खड़ी थी।

    "प्राची, तू दरवाज़ा क्यों नहीं खोल रही थी? क्या हुआ बेटा? तू ठीक तो है ना?" राधिका जी जल्दी से प्राची के पास जाकर पूछने लगीं। सभी प्राची का चेहरा देखकर सदमे में थे। उसका चेहरा पूरा लाल हो गया था, आँखें भी पूरी लाल थीं। कपड़े अस्त-व्यस्त थे, बाल भी बिखरे हुए थे। प्राची को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत देर से रो रही हो। प्राची किसी से कुछ नहीं बोली और चुपचाप अपने कमरे में चली गई और खिड़की के सामने खड़ी हो गई। प्राची के पीछे-पीछे बाकी सभी कमरे में आ गए।

    "प्राची बेटा, क्या हुआ है? तुम रो क्यों रही थी? कुछ बात हुई है तो हमें बताओ," रुकमणी जी प्राची के पास आकर उसे कंधे पर हाथ रखते हुए बोलीं।

    "हाँ प्राची, हमें बता क्या हुआ है? तुझे भैया ने कुछ कहा है क्या?" मिश्का ने भी पूछा।

    "अभी मैं जो कह रही हूँ, वह आप सभी बस चुपचाप सुनेंगे। कुछ नहीं कहेंगे और जितना पूछूँगी, उतना ही जवाब देंगे।" प्राची पीछे मुड़कर सबको देखते हुए शांत आवाज़ में बोली।

    इस वक़्त प्राची की आँखों में एक खालीपन था, जिसे देखकर सभी के दिल में घबराहट फैल रही थी। पर कोई कुछ नहीं बोला और चुप रहा। तब प्राची ने कहना शुरू किया, "मुझे पता है मेरे माँ-बाप और टीना को कुछ नहीं पता, तो मैं उनसे कुछ नहीं कहूँगी।"

    "यह सब मैंने कहा है। जब तक मैं ना कहूँ, कोई कुछ नहीं कहेगा!" प्राची ने चिल्लाकर कहा।

    इस बार सभी चुप हो गए क्योंकि किसी ने भी कभी प्राची को ऐसे नहीं देखा था। प्राची एक शांत लड़की थी जो ज़्यादा गुस्सा नहीं करती थी, ऐसे तो कभी नहीं चिल्लाती थी। फिर प्राची सबको देखते हुए मिश्का के पास गई और अपने चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान लाकर बोली, "तुझसे मैं बाद में बात करूँगी।" इतना कहकर वह रुकमणी जी और आलोक जी के पास आ गई।

    "आप दोनों को पता था ना कि तनिष्क किसी और से प्यार करता है और यह शादी के लिए राजी नहीं है। पर आंटी, आपने तनिष्क को कसम दिलाई कि वह शादी नहीं तोड़ सकता, उसे यह शादी करनी ही है। पर आप यह कसम देना भूल गईं कि वह मुझे यह सच नहीं बता सकता।"

    "बेटा, मैंने..."

    "आप बस बताइए, यह सच है या झूठ? सच है, अंकल? आप तो कहते हैं ना कि मैं आपकी बेटी जैसी हूँ और आप सभी को पता है कि मैं तनिष्क से प्यार करती हूँ और वह भी बचपन से। जिस वजह से आप लोगों ने हमारी शादी तय की है। पर अंकल, अगर आप मुझे अपनी बेटी की तरह मानते हैं, तो आप कैसे एक ऐसे इंसान से मेरी शादी करा रहे हैं जो किसी और से प्यार करता हो? बताइए, आपने ऐसा क्यों किया?"

    "आई एम सॉरी बेटा। वह मैं... प्लीज अंकल, जितना पूछा है बस उतना ही कहिए।" प्राची ने हाथ जोड़कर कहा।

    "मैं अपने बेटे को एक खुशहाल जीवन देना चाहता हूँ, उसे खुश देखना चाहता हूँ। पर मेरे साथ वह खुश नहीं रहेगा, वह अपने प्यार के साथ खुश रहेगा और मैं उसे खुश देखना चाहता हूँ। अब कोई सगाई नहीं होगी, कोई शादी नहीं होगी।" प्राची ने सबकी नज़रें चुराते हुए कहा।

    "तू मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकता है? मैंने कभी सोचा भी नहीं था। मैं तो सोच रहा था तनिष्क बेटा भी इस शादी के लिए राजी है और तूने और भाभी ने भी हमें यही कहा था। पर सच तो कुछ और ही है। (प्राची को देख) यह शादी नहीं होगी बेटा। हम आज ही इस घर को छोड़कर चले जाएँगे। अभी आप लोग इस कमरे से जाइए, सिर्फ़ मिश्का को छोड़कर। मुझे उससे बात करनी है।"

    प्राची सबको देखकर बोली। प्राची की बात सुनकर सभी उसके कमरे से निकल गए। पर इतना सब हो जाने के बाद भी राधिका जी, जिन्हें देखकर लग रहा था कि वे शौक में ही चली गई हैं, वे भी सबके साथ बाहर चली गईं। सबके कमरे से बाहर जाते ही प्राची जाकर दरवाज़ा बंद कर देती है और पीछे मुड़कर मिश्का को देखती है।

    "तू मेरी बेस्ट फ्रेंड है ना मिश्का? मतलब तू तो यही कहती है कि तू मेरी बेस्ट फ्रेंड है, राइट?"

    मिश्का को पता था प्राची क्यों ऐसा पूछ रही है, जिसे समझकर उसका सिर अपने आप झुक गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए।

    "वह मैं... बस..."

    "मिश्का, पता है मुझे अंकल-आंटी के कुछ ना बताने से, शौर्य के कुछ ना बताने से इतना बुरा नहीं लगा क्योंकि वे तो मुझे अच्छे से जानते नहीं हैं ना। पर तू, जिसे बचपन से मैं अपनी बेस्ट फ्रेंड, बहन, फैमिली मानती हूँ, उसने मेरे साथ ऐसा किया। तू सब कुछ जानती थी ना, पर फिर भी तूने मुझे कुछ नहीं बताया, क्यों मिश्का?"

    "प्राची, तू मेरी बात..."

    "तू मेरी बात सुन!" प्राची मिश्का को आँखें दिखाकर बोली तो मिश्का चुप हो गई।

    "तुझे पता है बचपन से मैं तनिष्क से प्यार करती हूँ और इस शादी को लेकर ना जाने मेरे दिल में कितने सपने सजाए थे। पहले तो मुझे पता भी नहीं था कि मेरा सपना सच होगा। मैं तो बस सपना देखती थी। पर तब मुझे कभी यह नहीं लगा कि सचमुच उनके साथ मेरी शादी भी हो सकती है। कुछ महीने पहले अंकल-आंटी और तूने जाकर यह शादी तय करके आई और सभी ने मुझे यह विश्वास दिलाया कि तनिष्क भी मुझे पसंद करते हैं। और मैंने यह बात मान भी ली। मेरे दिमाग में एक बार भी यह बात नहीं आई कि जिस इंसान को मैं बचपन से देख रही हूँ, पर जिसने मुझे कभी नहीं देखा, आँख उठाकर। सात साल से जिससे मैं खुद भी नहीं मिली, वह इंसान मुझसे अचानक प्यार कैसे कर सकता है? मैं तो बस यही सोचकर खुश थी कि बचपन से जो सपना देख रही हूँ, यह पूरा होने वाला है। मैं अपने तनिष्क को पूरी तरह से पाने वाली हूँ।"

    अब प्राची की आवाज़ भर आई थी। कुछ देर रुककर फिर से उसने कहना शुरू किया। उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे, पर फिर भी वह बोली, "और इसी के चलते मैंने कल रात अपना सब कुछ उन्हें लुटा दिया क्योंकि मुझे लगा हमारी तो शादी होने ही वाली है। यह तो शादी के बाद भी होगा और यह तो हमारा प्यार है, तनिष्क का प्यार है मेरे लिए। पर उसके अगले ही दिन मुझे पता चला जिनको मैंने अपना मानकर लूटा दिया, जिसे मैंने उनका प्यार समझा, ऐसा कुछ है ही नहीं। उनके दिल में मेरे लिए कुछ है ही नहीं और हमारे बीच जो भी हुआ, वह सब कुछ उन्होंने मुझमें अपनी गर्लफ्रेंड को इमेजिन करके..."

    इतना कहते-कहते प्राची और कुछ नहीं कह पाई। पर प्राची की बात सुनकर मिश्का शॉक हो गई और पूछी, "कल रात सब कुछ लुटा दिया, मतलब...?"

    क्रमशः

  • 7. Sun Mere Hamsafar - Chapter 7

    Words: 1423

    Estimated Reading Time: 9 min

    प्राची की बात सुनकर मिश्का के पैर लड़खड़ा गए। वह रोते हुए प्राची के पास गई और उसे गले लगाते हुए बोली, "प्राची, तू मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती? एक छोटी सी गलती के लिए...यह तेरे लिए छोटी सी गलती है? हम सबको इतने बड़े धोखे में रखना? तू नहीं समझेगी हम जिससे प्यार करते हैं, अगर वह हमारे होकर भी ना हो, तो कितना दर्द होता है। मैं सहन कर लेती अगर यह शादी की बात ना होती, क्योंकि मैं बचपन से जानती थी तनिष्क मेरे नहीं होंगे और उनकी शादी किसी और से होगी। इससे मुझे बहुत दुःख होता था, पर मैं सहन कर लेती, रियलिटी को एक्सेप्ट कर। अब यह सब छोड़ और प्लीज जा यहाँ से। मैं और एक भी बात नहीं सुनना चाहती। मुझे अकेले रहने दे।"

    प्राची की बात सुनकर मिश्का रोती हुई वहाँ से चली गई। मिश्का के जाने के बाद प्राची फर्श पर बैठ गई और रोने लगी।

    "सिंघानिया कॉरपोरेशन"

    "भैया, आपने प्राची से बात कर ली? मतलब यह शादी नहीं करना चाहते हो आप?" तनिष्क ने कहा।

    तनिष्क की बात सुनकर शौर्य कुछ सोचते हुए बोला, "भैया, आपको ऐसे ही प्राची को यह सब नहीं बताना चाहिए था। उसे कितना दुःख हुआ होगा! वह भी यह शादी नहीं करना चाहती थी। अपने परिवार के प्रेशर में आकर शादी कर रही थी। पर तुझे क्यों उसके लिए इतना बुरा लग रहा है?" तनिष्क ने आँखें छोटी करके पूछा।

    "क्योंकि मैं उसे अपना दोस्त मानता हूँ। बचपन से हम साथ में हैं," शौर्य ने कहा।

    "दोस्त है या फिर गर्लफ्रेंड?"

    "यह कैसी बातें कर रहे हो भाई? अगर वह मेरी गर्लफ्रेंड होती, तो क्या मैं उसकी शादी आपसे होने देता? वह मेरी भाभी बनने वाली थी और भाभी माँ के समान होती है। इतना हायपर क्यों हो रहा है?"

    "ठीक है, अब मैं चलता हूँ।" इतना कहकर शौर्य उठकर वहाँ से चला गया। तनिष्क शौर्य को जाते हुए देख रहा था। तनिष्क के चेहरे पर कोई विशेष भाव नहीं था। कुछ देर शौर्य को जाते हुए देखने के बाद तनिष्क उठा और अपने केबिन में ही अटैच बने अपने कमरे में आ गया।

    कमरे में आकर तनिष्क ने, जिसकी शर्ट के तीन बटन खुले हुए थे, अपना कोट उतारा और अपनी शर्ट को थोड़ा साइड करके अपने नेक कॉलर बोन चेस्ट पर देखा जहाँ नाखूनों के निशान थे। इसे देखते ही पहले तो तनिष्क की आँखों में कुछ अजीब एहसास दिखाई दिया, पर फिर अचानक से वह गुस्से में शीशा तोड़ दिया और वॉशरूम में जाकर शॉवर के नीचे खड़ा होकर शॉवर ऑन कर दिया।

    "महेश जी, हमारी बात तो आपने सुन ली पर हम तैयार नहीं हैं। अब किसी भी हाल में हम यह शादी नहीं होने देंगे, और वह भी तब जब हमारी बेटी ही शादी नहीं करना चाहती।"

    "यह शादी करने के लिए हम भी प्राची को जबरदस्ती नहीं करेंगे। अभी ऐसे दोपहर को तो मत निकलिए, कल जाना, आज रुक जाइए।" आलोक जी ने कहा।

    "नहीं, मैं..."

    "हाँ, हम आज रुक जाते हैं। कल ही हम जाएँगे।" महेश जी के कुछ कहने से पहले राधिका जी ने कहा।

    महेश जी राधिका जी को घूरते हैं तो राधिका जी भी उन्हें आँखें दिखा देती हैं, जिसे देखकर महेश जी कुछ नहीं कहते। फिर रुकमणी जी और आलोक जी उनके कमरे से बाहर चले जाते हैं।

    "तुमने यहाँ रुकने के लिए हाँ क्यों कहा? तुम्हें पता है ना, हम जितना यहाँ रहेंगे, हमारी बच्ची को उतना ही दर्द होगा।" महेश जी राधिका जी को देखते हुए कहते हैं।

    "अब आप इसमें मत पढ़िए। मुझे पता है मेरी बेटी के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा। मैं संभाल लूँगी सब। अभी जाकर आप प्राची को यह कहिए कि हम कल शाम को जा रहे हैं घर, या फिर सुबह कुछ भी कह दीजिए, बस आज नहीं जा रहे।"

    राधिका जी की बात सुनकर महेश जी एक गहरी साँस छोड़ते हैं और रूम से बाहर निकल जाते हैं। प्राची, जो रोते-रोते खुद की बुरी हालत कर चुकी थी, अपने आँसू पोंछती है।

    "नहीं प्राची, तू क्यों रो रही है? तूने कुछ गलत नहीं किया और जो गलत हो रहा था उसे भी तूने सही कर दिया। अब बस तुझे यहाँ से जाना है।"

    खुद से इतना कहकर प्राची उठती है, तभी कमरे में महेश जी आते हैं।

    "प्राची बेटा,"

    "पापा, आप लोगों की पैकिंग हो गई?"

    "बेटा, हम आज नहीं, कल जा रहे हैं घर।"

    "कल! क्यों पापा? हमें अभी जाना चाहिए।"

    "बेटा, ऐसे दोपहर को निकलना सही नहीं है, तो हम शाम को निकल जाते हैं।"

    "शाम को निकलने की ज़रूरत नहीं है। बस आज की रात यहाँ पर रह लो, कल हम चले जाएँगे यहाँ से सुबह-सुबह।"

    "ठीक है पापा।" प्राची यहाँ एक पल भी नहीं रहना चाहती थी, पर फिर भी वह हाँ कह देती है। प्राची की बात सुनकर महेश जी उसके सिर पर हाथ फेर कर उसके कमरे से निकल जाते हैं। महेश जी के जाने के बाद प्राची फिर से रोने लगती है और खुद से कहती है, "क्या करूँ मैं महादेव? मैं जितना यहाँ रह रही हूँ, उतना मुझे कल रात की बातें याद आ रही हैं कि कैसे मैंने अपना सब कुछ तनिष्क को दे दिया। पर मुझे उस बात का दुःख नहीं है क्योंकि तनिष्क के साइड से जो भी हो, मैंने तो उनसे प्यार किया था ना। और कल रात जो भी हुआ, वह किसी और के हिस्से की प्यार हो, पर मेरी तो उनके लिए ही प्यार थी। पर तनिष्क जी...वह तो ना जाने मुझे कैसी लड़की समझते हैं, जो उन्होंने यह कह दिया। कल रात जो भी हुआ था वह मेरे लिए बस एक वन नाइट स्टैंड था। (कुछ देर रुक कर) मुझे पता नहीं था कि अगर मैं कल रात उनके साथ रहूंगी तो बाद में मुझे ही...वैसे गलती मेरी थी, मैं उनके कमरे में गई थी। मैं मानती हूँ मैंने उनको नहीं रोका था, पर जो भी हुआ वह मेरे लिए..."

    प्राची रुक जाती है और रोने लगती है। प्राची जो आज सुबह तक इतनी खुश थी, एक ही पल में उसकी दुनिया उजड़ गई थी। प्राची रो ही रही थी, तभी पीछे से कोई उसके कंधे पर हाथ रखता है। तो प्राची चौंक कर पीछे पलटती है और पीछे खड़े शख्स को देख उसके आँखों से और ज़्यादा आँसू गिरने लगते हैं।

    क्रमशः

  • 8. Sun Mere Hamsafar - Chapter 8

    Words: 1367

    Estimated Reading Time: 9 min

    मम्मा," इतना कहते ही प्राची राधिका जी के गले लग गई और रोने लगी। "मत रो बेटा, तुझे रोना नहीं है। तू तो मेरी स्ट्राँग बेटी है ना?" राधिका जी ने भी रोते हुए कहा। कुछ देर तक रोने के बाद प्राची काफी शांत हो गई। तब राधिका जी ने उसे ले जाकर बिस्तर पर बिठाया और पानी का गिलास दिया। प्राची ने पानी एक ही साँस में पी लिया।

    "देख बेटी, मैं तेरी आँखों में आँसू नहीं देखना चाहती। और मुझे पता है, तनिष्क के साथ अगर तेरी शादी नहीं हुई तो तू ज़िंदगी भर आँसू बहाएगी, दर्द में रहेगी। तू कभी खुश नहीं हो पाएगी क्योंकि तू तनिष्क से खुद से भी ज़्यादा प्यार करती है। और मैं एक माँ होकर अपनी बच्ची को ऐसे दर्द में कैसे देखूँ?"

    राधिका जी ने रोते हुए कहा।
    "मम्मा, प्लीज़ आप रोइए मत। मुझे कोई दर्द, कोई दुख नहीं हो रहा, मैं ठीक हूँ।" प्राची राधिका जी की आँखों से आँसू पोछते हुए बोली।

    "तू ठीक नहीं है बेटा। अपनी माँ को मत बता। यह शादी कर ले। लड़कों का क्या है? उनका दिल अभी किसी और पर आता है तो फिर किसी और पर। और जब एक बार शादी हो जाएगी ना, तो देखना तनिष्क बेटा भी उस लड़की को भूलकर तेरे पास आ जाएगा।"

    "नहीं माँ, वह उस लड़की से प्यार करते हैं और उनके और उस लड़की के बीच में सब कुछ हो गया है। मतलब पति-पत्नी वाला रिश्ता। वह दोनों अपने रिश्ते में बहुत आगे बढ़ चुके हैं।"

    "और अब अगर तनिष्क जी उस लड़की को छोड़ेंगे तो उस लड़की की ज़िंदगी खराब हो जाएगी, जो मैं कभी नहीं चाहती। एक लड़की की ज़िंदगी खराब हो, यह करने से महादेव मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे। यह लड़की समाज सेवा करने निकली है, कहाँ पर यह अपने बारे में सोचेगी? पर नहीं, जिस लड़की को यह जानती तक नहीं, उसके बारे में सोच रही है। और तुझे यह शादी करनी ही होगी प्राची, कुछ भी हो जाए, यह शादी तो होकर रहेगी।" इतना सोचकर राधिका जी खुद को सामान्य करके प्राची के पास गईं और उसके सिर को सहलाते हुए बोलीं,

    "सभी तेरी तरह नहीं होतीं कि अपने सम्मान को अपनी सब कुछ मानकर बैठे रहें। हर लड़की एक तरह नहीं होती और यह फैमिली चाहती है तुझे तनिष्क की पत्नी के रूप में, इस घर की बहू के रूप में। और जब वह तनिष्क उस लड़की को छोड़कर तुझे चुन रहे हैं तो इसका कोई तो वजह होगी ना?"

    "मम्मा, इसका क्या ही वजह हो सकती है?"

    "वह लड़की शायद उनको पसंद नहीं है, इसी वजह से वह तनिष्क जी की शादी उससे नहीं कराकर मेरे साथ कराना चाहते हैं।"

    "प्राची, तू..." राधिका जी इतना ही कह पा रही थीं कि तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। जब दोनों ने उधर देखा तो वहाँ रुकमणी जी खड़े थे।

    "क्या मैं अंदर आ जाऊँ?"

    "हाँ आंटी जी, आप आ जाइए। आप क्यों पूछ रहे हैं? यह घर तो आपकी ही है ना?"

    प्राची की बात सुनकर रुकमणी जी अंदर आ गए और प्राची को देखकर बोले, "बेटा, मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी।"

    "हाँ, बताइए, क्या बात करनी है?" प्राची ने कहा।

    "वह बेटा, मुझे तुमसे अकेले में कुछ बात करनी थी।" (राधिका जी को देखकर) "राधिका जी, क्या आप..."

    "हाँ हाँ, बात कर लेना। मैं बाद में आ जाऊँगी।" इतना कहकर राधिका जी बाहर चली गईं।

    "अब बस, यह किसी तरह इमोशनल ब्लैकमेल करके प्राची को मना ले शादी के लिए, नहीं तो मुझे ही करना पड़ेगा।" इतना सोचते हुए वह अपने कमरे की ओर चली गईं।

    "अब बताइए, आपको क्या कहना है?" प्राची ने हल्का मुस्कुराते हुए रुकमणी जी को देखकर कहा। "और सॉरी, मैंने शायद तब बहुत ज़्यादा रिएक्ट कर दिया था। मैं आप लोगों को वह सब नहीं कहना चाहती थी। हो सके तो मुझे माफ़ कर देना।" प्राची ने हाथ जोड़कर सिर नीचे करके कहा।

    "कोई बात नहीं बेटा, तुम हो शायद इसलिए इतना ही हुआ। और तुमने तो हमें कोई भी गलत कुछ नहीं कहा। तुम सही थीं, पर हम मजबूर थे। हमें डर था कि यह सब जानने के बाद तुम यह शादी करने से मना कर दोगी, इसलिए हमने नहीं बताया।"

    "पर आप लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं? तनिष्क जी जिससे प्यार करते हैं, उसी से आप लोग उनकी शादी करा दीजिए ना।"

    "हम ऐसा नहीं कर सकते बेटा, अगर कर सकते तो क्या हम नहीं कर देते? तनिष्क के साथ उसकी शादी क्यों आंटी? क्यों आप सब उस लड़की से शादी नहीं करा सकते तनिष्क जी की?" प्राची ने पूछा।

    प्राची के पूछने पर रुकमणी जी की आँखों में आँसू आ गए और वह प्राची को देखने लगीं। प्राची भी उनको ही देख रही थी।

    "बेबी, क्या कर रहे हो? क्या तुमने शादी तोड़ दिया?" तनिष्क, जो अभी अपने केबिन में कुर्सी पर बैठकर एक फ़ाइल पढ़ रहा था, उसके कान में यह आवाज़ पड़ते ही वह सामने देखता है। सामने शनाया खड़ी थी, जो उसे देखते हुए मुस्कुरा रही थी। उसने एक ऑरेंज कलर की क्रॉप टॉप और हॉट जीन्स पहनी हुई थी। उसके बाल स्टाइल से बंधे हुए थे, चेहरे पर हैवी मेकअप था और पैरों में हील्स थीं। वह बहुत ही ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी। पर तनिष्क उसे एक बार देखकर फिर से अपनी फ़ाइल को देखने लगा।

    तनिष्क को ऐसे देखकर शनाया अदाओं से चलते हुए तनिष्क के पास आई और तनिष्क के हाथ से उस फ़ाइल को लेकर उसकी गोद में बैठ गई और उसके चेहरे पर अपनी उंगलियाँ घुमाने लगी।

    "क्या हुआ बेबी? तुम गुस्सा हो मुझसे? मैंने क्या किया?" शनाया ने क्यूट सा चेहरा बनाकर कहा।

    "तुम्हारी शूट थी ना? एक महीने तक श्रीलंका गए थे ना तुम? तो आज इतनी जल्दी आ गए? मतलब तुमने इस बार भी..."

    "क्या करूँ बेबी? तुम्हारे बिना मुझे अच्छा ही नहीं लगता कहीं भी। और वहाँ पर मैं अकेली थी, तुम तो थे ही नहीं, इसीलिए मैं आ गई।" इतना कहते हुए शनाया तनिष्क के शर्ट के अंदर अपने हाथ डालकर उसके सीने को सहलाने लगी। तनिष्क भी उसके कमर पर हाथ डालकर उसके चेहरे से उसके बालों को हटाते हुए बोला,

    "पर मैं हर जगह तो तुम्हारे साथ नहीं रह सकता ना? मुझे भी बहुत काम है। और अगर ऐसे ही तुम शूटिंग को छोड़-छोड़कर आ जाओगी तब तो तुम्हारा एक्टिंग करियर खत्म हो जाएगा।"

    "ऐसा कुछ नहीं होगा बेबी। मुझे पता है, जब तक तुम मेरे साथ हो, मेरा करियर कोई खराब नहीं कर सकता।" इतना कहकर वह तनिष्क के होंठों की ओर अपने होंठ बढ़ाने लगी। पर तभी शनाया की नज़र तनिष्क के नेक कॉलर बोन और सीने पर पड़ी, जहाँ नाखूनों के निशान थे। शनाया झट से तनिष्क की गोद से उठ गई और तनिष्क के चेहरे को देखते हुए बोली,

    "यह तुम्हारे बॉडी पर नाखूनों के निशान कैसे आए? यह निशान तो..." इतना कहते हुए शनाया की आँखों में आँसू आ गए।

    "बेबी, तुम मेरी बात सुनो। यह क्या? यह बेबी? तुमने आज तक मुझे खुद के पास नहीं आने दिया। तुम तो बस कहते थे ना कि शादी के बाद सब होगा, तो फिर यह क्या है? तुम किसी और के साथ..." इतना कहकर शनाया बुरी तरह से रोने लगी और रोते हुए ही तनिष्क के केबिन से बाहर निकल गई। तो उसके सामने ही एक लड़की थी, जो दिखने में इतनी ज़्यादा खूबसूरत थी कि शनाया एक पल तो ठहर सी गई। पर उसने उस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि इस वक़्त वह गुस्से में थी और वह रोते हुए, गुस्से में वहाँ से निकल गई।

    वहीं प्राची, जो तनिष्क से मिलने आई थी और पहले से तनिष्क के केबिन से बाहर आई हुई थी, और उसने अंदर का सब कुछ देख लिया था, पर उसने कुछ सुना नहीं था। उसे अब बुरा लग रहा था। तनिष्क और शनाया को इतने करीब देखकर उसकी आँखें नम हो गई थीं।

    "बाहर कौन खड़े हैं? अंदर आ जाओ।" तनिष्क की आवाज़ सुनते ही प्राची एक बार के लिए काँप सी गई। फिर एक गहरी साँस लेकर वह अंदर चली गई।


    क्रमशः

  • 9. Sun Mere Hamsafar - Chapter 9

    Words: 1077

    Estimated Reading Time: 7 min

    प्राची डरते हुए अंदर आई। प्राची के अंदर आते ही दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया जिससे प्राची और भी घबरा गई।

    प्राची को देख तनिष्क की आँखों में गुस्सा उतर आया और वह गुस्से में प्राची के पास आकर उसके दोनों हाथों को पकड़, उसे पीछे ले जाते हुए दरवाज़े से सटा दिया। वह गुस्से में बोला, "तुम यहां क्या कर रही हो? किसने परमिशन दिया तुम्हें मेरे ऑफिस में, मेरे केबिन में आने को?"

    "आप...आप...आपने ही तो कहा था कि मैं अंदर आ जाऊँ," प्राची ने सिर झुकाकर कहा।

    "मुझे पता नहीं था कि तुम हो। अगर तुम होतीं, मुझे पता होता, तो मैं सिक्योरिटी गार्ड को कहकर तुम्हें ऑफिस से बाहर फेंक देता, ना कि अंदर बुलाता," तनिष्क ने प्राची के हाथ को और कसकर पकड़ते हुए कहा।

    तनिष्क के ऐसा करने से कृतिका की आँखों में आँसू आ गए थे। जब तनिष्क ने कृतिका की आँखों में आँसू देखे, तो ना जाने उसे क्या हुआ, वह कृतिका को छोड़कर थोड़ी दूरी पर खड़ा हो गया और बोला, "अब तक शायद तुमने यह शादी तोड़ दी होगी, कह दिया होगा तुम यह शादी नहीं कर सकती हो। और अब ठंडे दिमाग से यह बताओ, तुम यहां पर क्यों आई हो?"

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची को और घबराहट होने लगी।

    "आंटी...आंटी आपको घर जाने को बोल रही थीं। मैं यही कहने आई हूँ।"

    प्राची की बात सुनकर तनिष्क ने अपनी आँखें छोटी करके उसे देखा। "तुम झूठ भी कहती हो तो ढंग से कहो। सबके पास अभी फोन है, मेरे पास भी है और मॉम के पास तो मेरा नंबर है ही। तो वह मुझे कॉल ना करके तुम्हें क्यों भेजेगी?"

    "आपको कॉल किया पर आपने कॉल रिसीव नहीं किया।"

    प्राची की बात सुनकर तनिष्क फिर से प्राची के करीब जाने लगा जिससे प्राची घबरा गई। पर तनिष्क ने उसे कुछ नहीं किया और उसके पास जाकर बोला, "जो भी हो, तुम यहां आई हो तो अच्छा ही हुआ। मुझे तुम्हें कुछ देना है। चलो जाकर सोफे पर बैठो।"

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची कुछ नहीं बोली और चुपचाप जाकर सोफे पर बैठ गई।

    प्राची के बैठते ही तनिष्क ने अपने फोन को निकालकर किसी को मैसेज किया और फिर वहीं खड़ा होकर एकटक प्राची को देखने लगा। प्राची अपना चेहरा भी ऊपर नहीं कर रही थी, वह वहीं पर चुपचाप बैठी हुई थी।

    कुछ देर बाद केबिन का दरवाज़ा नॉक हुआ। तनिष्क बोला, "कम इन।"

    एक हैंडसम सा लड़का अंदर आया और तनिष्क को दवा देते हुए बोला, "यह लीजिए बॉस।"

    इतना कहते हुए उस लड़के की नज़र सोफे पर बैठी प्राची पर पड़ी तो वह पलकें झपकना भी भूल गया और एकटक प्राची को देखने लगा।

    तनिष्क जो उस दवा को लेकर प्राची की ओर मुड़ा ही था कि तभी वह कुछ कहने के लिए पीछे मुड़ा। और जब उसने उस लड़के को ऐसे प्राची को देखते हुए देखा, तो वह अपनी मुट्ठी बना ली और धीरे से दाँत पीसते हुए बोला, "राकेश, मुझे लगता है अब तुम्हें अपना जॉब और जान कुछ भी प्यारा नहीं है।" यह तनिष्क ने इतना धीरे से कहा था कि यह सिर्फ़ राकेश को ही सुनाई दिया।

    तनिष्क की बात सुनकर राकेश का साँस फूल गया और वह जल्दी से सॉरी कहकर केबिन से बाहर चला गया।

    राकेश के जाने के बाद तनिष्क प्राची को देखा जो उसे ही देख रही थी। और तनिष्क के देखते ही प्राची अपनी नज़र झुका ली।

    तनिष्क चलते हुए प्राची के पास आया और उसके सामने वाले सोफे पर बैठ गया। उसने प्राची को वह दवा देते हुए कहा, "अभी तक 24 घंटे नहीं हुए और यह प्रेगनेंसी पिल है। खा लो।"

    प्रेगनेंसी पिल का नाम सुनते ही प्राची एक बार उस दवा को देखी और एक बार तनिष्क के चेहरे को। "प्रेगनेंसी पिल? मतलब...?"

    "तुम इतनी भी मासूम नहीं हो कि तुम्हें इतना भी नहीं पता होगा। तुम कितनी बड़ी चालाक लड़की हो, ना मुझे बहुत अच्छे से पता है। तो नाटक करना बंद करो और इसे खा लो, क्योंकि मुझे कोई भी लफड़ा नहीं चाहिए, कल रात के उस एक्सीडेंट की वजह से।"

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची की आँखों में आँसू आ गए और वह जल्दी से उस पिल को तनिष्क के हाथ से ले ली और उसे खा ली।

    "अब मैंने इसे खा लिया है। अब मैं चलती हूँ।" इतना कहकर प्राची सोफे से उठ गई और दरवाज़े की ओर बढ़ी ही थी कि तभी उसके कान में तनिष्क की आवाज़ पड़ी।

    "वैसे तुमने अभी तक बताया नहीं, तुम यहां पर क्यों आई थी?"

    "मैं अगर वह बता दूँ तो शायद आप अपने गुस्से को कंट्रोल ना कर पाएँ और यहां पर तोड़फोड़ मचा दें। तो आप घर चलिए, वहां जाकर बताऊँगी।"

    इतना कहकर प्राची जल्दी से केबिन से बाहर निकल गई और तनिष्क बस जाते हुए प्राची को देखता ही रहा।

    रात का वक़्त था। प्राची अपने कमरे में अपनी सिर पकड़कर बेड पर बैठी थी। उसकी सिर में बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था।

    "क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?"

    "अरे शौर्य, तू मुझसे क्यों पूछ रहा है? आजा अंदर।" प्राची ने मुस्कुराकर कहा।

    शौर्य अंदर आया। शौर्य के हाथ में खाने की प्लेट थी। खाने की प्लेट देखते ही प्राची ने अपना चेहरा घुमा लिया और कहा,

    "शौर्य, प्लीज़ अब तू यह ज़बरदस्ती मत करना कि खाना खाना है मुझे। मैं खाना नहीं खाने वाली, मुझे भूख नहीं है।"

    "मैं तुझे ज़बरदस्ती नहीं कहूँगा, मैं तुझे ज़बरदस्ती खिलाऊँगा। देख, तुझे पता है यह मैं बहुत अच्छे से कर सकता हूँ। तो अभी अच्छे बच्चे की तरह खा ले। सुबह से तूने कुछ नहीं खाया है।"

    "मुझे भूख नहीं है, प्लीज़।"

    "प्लीज़ खा ले, प्लीज़, तुझे मेरी कसम।"

    "लड़कियों की तरह हर बार कसम दिया मत कर।" इतना कहकर प्राची मुँह बना ली। तो शौर्य हँस दिया। फिर शौर्य अपने हाथों से प्राची को खिलाने लगा और प्राची भी शौर्य को खिला रही थी। वहीं यह सब दरवाज़े के बाहर से कोई देख रहा था और उसकी आँखें इस वक़्त गुस्से से लाल थीं और वह गुस्से में प्राची को घूर रहा था, जैसे अपनी आँखों से ही प्राची को खा जाएगा।

  • 10. Sun Mere Hamsafar - Chapter 10

    Words: 1449

    Estimated Reading Time: 9 min

    खाना खाने के बाद शौर्य और प्राची बातें कर रहे थे। तभी वहाँ एक मेड आई और शौर्य को देखते हुए बोली, "आपको बड़ी मेडम नीचे बुला रही हैं।"

    "हाँ, तुम जाओ, मैं आ रहा हूँ।" शौर्य ने प्राची को देखते हुए कहा, "तू बैठ, मैं थोड़ी देर में आता हूँ।"

    "अब आके क्या करेगा? रात के ग्यारह बज रहे हैं। अब मुझे सोना है, तू भी जाकर सो जाना।" प्राची ने कहा।

    "तेरे आने के बाद से तो मैंने तुझसे बात ही नहीं की।" शौर्य इतना कहकर रुक गया।

    "मुझे पता है तूने मुझसे क्यों बात नहीं की थी। तेरी फैमिली वाले मुझे सच नहीं बता रहे, इसीलिए ना?" प्राची ने कहा।

    "हाँ, वो... वो..." शौर्य ने कहा। "हाँ, ठीक है, जा रहा हूँ। मुझे बुला रहे हैं।"

    प्राची के इतना कहते ही शौर्य उठा और कमरे से बाहर चला गया।

    शौर्य के जाने के बाद प्राची उठकर खिड़की के सामने आ गई और आसमान में देखने लगी। आसमान में चाँद नहीं था; आज आसमान में काले बादल छाए हुए थे। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ ही देर में वर्षा होने वाली है।

    प्राची आसमान को देख ही रही थी, तभी उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसके कमरे में आया है। प्राची झट से पीछे पलटी तो पीछे तनिष्क खड़ा था, जिसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था। उसकी आँखें जगमगा रही थीं; इसे देख प्राची बहुत डर गई।

    "आप... आप इतनी रात को मेरे कमरे में...?" प्राची बोली।

    प्राची की बात सुनकर तनिष्क कुछ नहीं बोला, बस प्राची की ओर अपने कदम बढ़ाने लगा।

    तनिष्क को इतने गुस्से में अपनी ओर आते देख प्राची और डरने लगी। वह जल्दी से बोली, "क्या हुआ तनिष्क जी? आप कुछ कह क्यों नहीं रहे?"

    तनिष्क प्राची के पास आकर उसके हाथ को कसकर पकड़ा और उसे अपने पास खींच लिया। जिससे प्राची तनिष्क से चिपक गई।

    तनिष्क ने प्राची को जबरदस्ती बिस्तर पर धक्का दे दिया और खुद भी प्राची के ऊपर आकर अपना पूरा भार प्राची के शरीर पर डाल दिया।

    "तुमने मुझे कहा था ना, तुम यह शादी तोड़ दोगी। तो अब क्या हुआ? अब तो यह शादी टूटने की जगह और भी आगे बढ़ गई है। पाँच दिन बाद अब हमारी इंगेजमेंट की जगह हमारी शादी है, और यह सब तुमने ही किया है ना?" तनिष्क ने दाँत पीसते हुए कहा।

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची कुछ नहीं बोली। उसने तनिष्क से अपनी नज़रें हटा लीं।

    प्राची को ऐसा करते देख तनिष्क को और गुस्सा आ गया। वह बोला, "तुम यह शादी क्यों कर रही हो? पैसों के लिए? हाँ, कितना पैसा चाहिए तुम्हें? वह मैं तुम्हें दूँगा, बताओ कितना चाहिए?"

    "मेरे ऊपर से हटिए तनिष्क जी, और मुझे कोई पैसा नहीं चाहिए। बहुत रात हो गई है, आप यहाँ से जाइए प्लीज़।" अपने अंदर हिम्मत जुटाकर प्राची इतना ही कह पाई।

    प्राची की इस बात को सुनकर तनिष्क उसके चेहरे के बिल्कुल पास अपना चेहरा ले गया। "रात हो गई है तो क्या हुआ? पाँच दिन बाद हमारी शादी है। मैं तुम्हारा होने वाला पति हूँ, तो अगर मैं तुम्हारे साथ पूरी रात भी यहाँ रहूँ तो भी कोई कुछ नहीं कह सकता।"

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची उसे देखने लगी। तनिष्क और कुछ नहीं बोला, वह प्राची के ऊपर से उठ गया। जिससे प्राची को लगा शायद अब तनिष्क उसके कमरे से चला जाएगा।

    पर तनिष्क ने प्राची को कमर से पकड़ा, उसे अपने कंधे पर उठा लिया और कमरे में बने बाथरूम में ले गया। और शॉवर के नीचे खड़ा करके शॉवर ऑन कर दिया, जिससे पानी उन दोनों पर गिरने लगा और दोनों ही भीगने लगे।

    अचानक तनिष्क के ऐसा करने से प्राची एकदम से चौंक गई। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह तनिष्क को कन्फ़्यूज़ होकर देखती रही।

    पर तनिष्क इस वक़्त गुस्से में था। वह साइड से साबुन लेकर आया और उसे प्राची के हाथ में लगाकर बुरी तरह से प्राची के हाथ को रगड़ने लगा, जिससे प्राची को दर्द हो रहा था।

    "तनिष्क जी, मुझे दर्द हो रही है, क्या कर रहे हैं आप? तनिष्क जी, प्लीज़ छोड़िए।" प्राची ने कहा।

    पर तनिष्क के कान तक तो जैसे प्राची की आवाज़ सुनाई ही नहीं दे रही थी। प्राची के हाथ बिल्कुल लाल हो चुके थे और दर्द से उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

    फिर तनिष्क झट से प्राची के दाहिने कंधे से उसके सलवार को एक ही झटके में फाड़ दिया। जिससे अब प्राची के कंधे से उसका सलवार हट गया और अब प्राची के कंधे पर बस उसके ब्रा का स्ट्रैप दिख रहा था।

    प्राची जल्दी से अपने हाथों से अपने कंधे और छाती को छुपाने की कोशिश करती है, पर तनिष्क उसके दोनों हाथों को अपने एक हाथ में पकड़कर ऊपर कर देता है और उसे पलटा देता है।

    तनिष्क ने प्राची के कंधे पर भी साबुन लगाकर वहाँ भी रगड़ना शुरू कर दिया। इस वक़्त तनिष्क इतना बेरहम था कि प्राची के कंधे बुरी तरह से जख्मी हो गए, जो तनिष्क ने खुद अपने हाथों से किया था। प्राची को बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था, पर फिर भी अब वह तनिष्क को कुछ नहीं कह रही थी। तनिष्क जो कर रहा था, वह उसे करने दे रही थी।

    बहुत देर तक प्राची के कंधे को बुरी तरह से रगड़ने के बाद तनिष्क ने वहाँ पर अपना होंठ रख दिया और बुरी तरह से काटने लगा, जिससे प्राची की चीख निकल गई।

    पर प्राची की चीख से तनिष्क को कोई फर्क नहीं पड़ा और वह इतनी बुरी तरह से प्राची के कंधे को काटता है कि वहाँ से खून निकलने लगा।

    खून का स्वाद अपने मुँह में पाते ही तनिष्क प्राची से दूर हो गया। तनिष्क के छोड़ते ही प्राची धड़ाम से वहीं दीवार से सटकर नीचे बैठ गई। प्राची पर अभी भी शॉवर का पानी गिर रहा था, जिससे वह पूरी तरह से भीग गई थी और उसका सूट एक तरफ से फटा हुआ था।

    प्राची का चेहरा दर्द से पीला पड़ चुका था, उसके हाथ इस वक़्त लाल हो गए थे।

    तनिष्क ध्यान से प्राची को देख रहा था और कुछ कहता उससे पहले बाथरूम का दरवाज़ा खटखटाया गया और बाहर से शौर्य की आवाज़ आई, "प्राची, तू इतनी रात को बाथरूम में क्यों गई? तुझे तो रात को नहाना पसंद नहीं है ना? तू ठीक है ना? तेरी तबीयत खराब हुई है क्या?"

    शौर्य की आवाज़ सुनते ही प्राची के चेहरे में चमक आ गई और वह उठकर जल्दी से बाथरूम से भागने ही वाली थी कि तभी तनिष्क ने उसके हाथ को पकड़ा, उसे अपनी ओर खींच लिया और गुस्से से प्राची के चेहरे को देखने लगा।

    तनिष्क के ऐसा करते ही प्राची को एहसास हुआ कि वह अभी क्या करने वाली थी।

    "श... शौर्य, तुझे तो मैंने कहा ना कि तू सो जाना। इतनी रात को आने की कोई ज़रूरत नहीं है। तू तो क्यों आया है?" प्राची ने कहा।

    "यार, मैं तुझे यह कहने आया था कि मोम ने मुझे बुलाया ही नहीं। उस मेड ने मुझे झूठ कहा। इतना गंदा है वह मेड यार! मैं तुझे पूछने आया था। तुझे याद है उस मेड का चेहरा? मुझे याद नहीं है। मैं उसे अच्छे से धुलाई करूँगा।" शौर्य ने कहा।

    "न... नहीं, मुझे याद नहीं है उस मेड का चेहरा। और क्या ज़रूरत है? शायद उनसे गलती हो गई होगी। तू जाकर सो जा।" प्राची ने कहा।

    "हाँ, मैं सो तो जाऊँगा, पर तू इतनी रात को नहा क्यों रही है? वह तो बता?" शौर्य ने पूछा।

    "मुझे बहुत गर्मी लग रही है, इसी वजह से मैं नहा रही हूँ।" प्राची ने जवाब दिया।

    "गर्मी लग रही है मतलब! बारिश हो रही है बाहर। कितने ठंडे-ठंडे मौसम हैं और तुझे गर्मी लग रही है? सीरियसली प्राची?" शौर्य ने कहा।

    "यार, गर्मी लग रही है तो लग रही है। इतना सवाल क्यों कर रहा है तू? जा जाकर सो जा और मुझे भी सोने दे प्लीज़।" प्राची ने कहा।

    "जा रहा हूँ। वैसे तू तो ऐसे कर रही है जैसे मैं अभी तेरे बाथरूम में घुसकर तुझे देख लूँगा। वैसे तुझे देख भी चुका हूँ मैं। हमेशा का गुस्सा करती है, चुड़ैल।"

    यह सब बड़बड़ाते हुए शौर्य प्राची के कमरे से बाहर चला गया। पर शौर्य की हर एक बात तनिष्क ने सुनी थी, और प्राची ने भी। पर शौर्य की बातें सुनकर प्राची को कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन तनिष्क की पकड़ प्राची पर बहुत ज़्यादा कस गई, जिससे प्राची को दर्द होने लगा।

    क्रमशः

  • 11. Sun Mere Hamsafar - Chapter 11

    Words: 996

    Estimated Reading Time: 6 min

    तनिष्क गुस्से में प्राची को घूरते हुए उसे दीवार से हटा दिया और दांत पीसते हुए कहा, "तो तुम शौर्य के साथ भी सो चुकी हो?" तनिष्क की बात सुनकर प्राची चौंक गई और बोली, "जी? आप यह कैसी बातें कर रहे हैं?"

    तनिष्क ने प्राची का गला पकड़ लिया। "तुम्हें समझ नहीं आ रही है मैं कैसी बातें कर रहा हूँ? या फिर समझकर भी ना समझने का नाटक कर रही हो? अभी शौर्य ने क्या कहा? वह तुम्हें देख चुका है। मतलब तो यही है ना कि तुम दोनों..." इतना कहकर गुस्से में तनिष्क ने प्राची का गला पकड़कर उसे पीछे धक्का दे दिया। प्राची दीवार से टकरा गई और उसकी चीख निकल गई।

    टकराने के बाद भी प्राची किसी तरह उठी और पीछे मुड़कर तनिष्क को देखा, जो अब भी वहीं खड़ा गुस्से में उसे घूर रहा था। "आप गलत समझ रहे हैं, शौर्य..."

    प्राची कुछ और कह पाती, इससे पहले ही तनिष्क फिर से गुस्से में प्राची के पास आया और उसके गाल कसकर पकड़ लिए। प्राची की आँखों से बेतहाशा आँसू बह रहे थे, जो ऊपर से गिर रहे शॉवर के पानी से छिप रहे थे। प्राची एकटक तनिष्क की आँखों में देख रही थी। वह रोने के साथ-साथ डर के मारे कांप रही थी, जिससे उसके होंठ भी थरथरा रहे थे। तनिष्क की नज़र प्राची के थरथराते हुए गुलाबी होंठों पर गई और वह एकटक प्राची के होंठों को देखने लगा।

    तनिष्क को अपने होंठों को देखते देख प्राची को कुछ समझ नहीं आ रहा था और वह भी एकटक तनिष्क की आँखों में देखने लगी। तभी उसे महसूस हुआ कि...

    तनिष्क धीरे-धीरे उसके चेहरे के करीब अपना चेहरा ला रहा था। पर प्राची ने तनिष्क को नहीं रोका और अपनी आँखें बंद कर लीं। तनिष्क ने अपने होंठ प्राची के होंठों पर रख दिए और प्राची की कमर पकड़कर उसे अपने से चिपका लिया। अपने दूसरे हाथ को प्राची के गले के पीछे ले जाकर उसने जोशीले किस करना शुरू कर दिया।

    जिससे प्राची का दिल जोरों से धड़कने लगा। साथ ही तनिष्क का दिल भी जोरों से धड़क रहा था। पहले-पहल प्राची तनिष्क का साथ नहीं दे रही थी, पर अब तनिष्क के ऐसे किस करने से वह पूरी तरह बहक गई और तनिष्क का साथ देने लगी। बहुत देर तक किस करने के बाद, जब प्राची को साँस लेने में तकलीफ हुई, तो तनिष्क ने प्राची के होंठ छोड़कर उसके गर्दन के पास किस करने लगा। लगभग तीन घंटे बाद तनिष्क शांत हुआ। वह प्राची को देख रहा था, जो बहुत थकी हुई थी। तनिष्क प्राची के ऊपर से हटकर बगल में लेट गया और प्राची को कसकर अपनी बाहों में भर लिया।

    लगभग पाँच मिनट बाद तनिष्क ने अपना चेहरा ऊपर करके फिर से प्राची के चेहरे को देखा। प्राची बहुत थकी हुई थी और इन पाँच मिनट में वह गहरी नींद में सो गई थी। प्राची के चेहरे को कुछ देर देखने के बाद तनिष्क उठा और बाथरूम में जाकर अपने भीगे हुए कपड़े बदलकर बाहर आया। उसने प्राची के ऊपर कंबल ओढ़ा और उसके कमरे से बाहर निकल गया।

    फ़्रांस के एक लग्ज़रीयस पैलेस के आठवें फ्लोर पर, जहाँ हर चीज लग्ज़रीयस थी जिसकी कीमत अरबों में थी, एक बड़े से कमरे में एक लड़का बैठा था। उसकी आँखें बिल्कुल शांत थीं; भूरी आँखें, साँवला रंग, मस्कुलर बॉडी। वह दिखने में किसी सुपरस्टार से कम नहीं था, पर उसका ओरा बहुत खतरनाक था। वह लड़का ठंडे भाव से सोफ़े पर बैठा कुछ सोच रहा था। तभी उसके कमरे में एक और लड़का आया और अपना सिर झुकाकर उस लड़के को नमस्कार किया। उसे देखते ही वह लड़का सिर झुकाए हुए ही बोला, "बॉस, इंडिया जाने का सारा इंतज़ाम हो गया है। आप कब जाना चाहेंगे?"

    वह लड़का बस उसे देखता रहा और ठंडी आवाज़ में बोला, "सब कुछ तैयार करके रखो। जब मुझे जाना होगा, तब तुम्हें पता चल जाएगा।" उसकी बात सुनकर वह लड़का सिर हिलाकर वहाँ से चला गया। उसे जाते देख वह लड़का अपनी आँखें बंद कर लेता है और खुद से कहता है, "मैं वापस आ रहा हूँ।"

    अफ़्रीका के एक शांत इलाके में एक लाल और नीले रंग का बड़ा विला बना हुआ था, जो काफी लग्ज़रीयस था। बाहर काफी सारे बॉडीगार्ड खड़े थे। आसपास देखकर ऐसा लग रहा था जैसे यह किसी बहुत बड़े आदमी का घर हो, जिसके चारों ओर बस सुरक्षा ही सुरक्षा थी। विला को अंदर से भी लाल और नीले रंग से सजाया गया था। वहाँ पर हर चीज लग्ज़रीयस थी, जिसकी कीमत अरबों में थी। तीसरे फ्लोर पर मास्टर बेडरूम, जो बहुत आलीशान था, उसके अंदर से एक लड़की की चीख सुनाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई उस लड़की के साथ बेरहमी से पेश आ रहा है। बाहर कुछ बॉडीगार्ड खड़े थे और वे उस कमरे की रखवाली कर रहे थे ताकि उस कमरे में कोई ना आ पाए।

    दो घंटे बाद एक हैंडसम लड़का, जो दिखने में भारतीय लग रहा था, बाहर आया और अपने गार्ड को देखते हुए बोला, "टॉमी को खाना खिला दो, टॉमी बहुत भूखा है।" वह लड़का सीधा चला गया। उस लड़के ने इस वक़्त सिर्फ़ नीले रंग की बाथरोब पहनी हुई थी, जिसमें उसका सीना दिख रहा था। उस लड़के की बात सुनकर सारे बॉडीगार्ड उस कमरे में चले गए। कुछ देर बाद एक बॉडीगार्ड एक लड़की को अपने कंधे पर उठाए हुए ले आया और उसे लेकर विला के पीछे की ओर चला गया।

  • 12. Sun Mere Hamsafar - Chapter 12

    Words: 1199

    Estimated Reading Time: 8 min

    सुबह का समय था। हॉल में सभी बातें कर रहे थे। तभी प्राची आई। सभी ने उसे देखना शुरू कर दिया।

    "दीतू, इतनी थकी हुई क्यों लग रही है? क्या हुआ? तबीयत ठीक नहीं है तेरी?" टीना प्राची के पास आकर पूछने लगी।

    "कहाँ थकी हुई लग रही हूँ? ठीक हूँ मैं।" इतना कहकर प्राची डायनिंग एरिया में चली गई।

    "ब्रेकफास्ट करके तुम चारों शॉपिंग करने निकल जाना। दो दिन बाद शादी है, तो इसके लिए शॉपिंग तो करना ही पड़ेगा ना। जो पहले ले ली है, तुम लोग बस हल्दी के लिए शॉपिंग करके आना।" रूकमिणी जी ने सभी को देखते हुए कहा।

    उनकी बात सुनकर प्राची कुछ नहीं बोली। शौर्य हॉल की ओर आ रहा था। अपनी माँ की बात सुनकर उसने उन्हें देखा।

    "मॉम, मैं इन लड़कियों के साथ नहीं जाने वाला। ये मुझे बहुत परेशान करती हैं।"

    "शॉपिंग करने जाएगी तो पूरा दिन लगेगा ही। और तू कुछ नहीं कहा? चुपचाप जाएगा।" आलोक जी ने शौर्य को आँखें दिखाकर कहा।

    टीना चुपचाप प्राची के पास गई और उसके बगल में बैठकर बोली, "दी, तू क्यों ये शादी कर रही है? प्लीज़ दी, ये शादी मत कर। जो इंसान तुझसे नहीं, किसी और से प्यार करता है, उससे शादी करके तू अपनी लाइफ को खराब कर रही है।"

    "टीना, तू इतना मत सोच। मैं जो भी कर रही हूँ, सोच समझकर कर रही हूँ। और तुझे अपनी दीदी पर इतना भरोसा तो है ना? तो तेरी दीदी कोई भी काम ऐसे ही नहीं करती।" प्राची ने मुस्कुराकर कहा।

    "मुझे अपनी दीदी पर पूरा भरोसा है, पर जब भी तनिष्क जीजू की बात आती है, तब तू कुछ सोचती नहीं है।" टीना ने कहा।

    प्राची उठी और हॉल में जाकर शौर्य को देखकर बोली, "चल, हमें शॉपिंग जाना है ना?"

    प्राची की बात सुनकर टीना भी वहाँ आ गई और अपनी मुँह लटकाए प्राची को देखने लगी।

    प्राची की माँ प्राची के पास आकर बोली, "जा रही है? अच्छे-अच्छे से कुछ खरीद लेना अपने लिए। और कोई जल्दी नहीं है। टाइम लगाकर शॉपिंग करना, आज का पूरा दिन है।"

    अपनी माँ की बात सुनकर प्राची ने हाँ में सिर हिलाया। फिर प्राची, शौर्य, टीना और मिश्का शॉपिंग के लिए निकल गए।

    कुछ देर बाद वे लोग शहर के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल में थे।

    "सबसे पहले लहंगे की शॉप में जाते हैं। प्राची के लिए हल्दी का लहंगा भी तो लेना है और बाकी सब के लिए भी।" शौर्य ने बेमन से कहा।

    वे चारों लहंगे की शॉप में पहुँचे। वहाँ पहुँचने के बाद सभी लहंगे देखने लगे। शौर्य ने एक येलो कलर का लहंगा लाकर प्राची को देते हुए कहा, "प्राची, ये जा ट्राई करके आ। ये बहुत प्यारी लगेगी तुझ पर।"

    प्राची ने वह लहंगा लिया और ऊपर से नीचे तक देखते हुए बोली, "ठीक-ठाक है। मानना पड़ेगा, चॉइस तो काफी अच्छा है तेरा।"

    शौर्य मुँह बनाकर बोला, "मेरा चॉइस हमेशा ही अच्छा होता है, बस तुझे ही नहीं दिखता। मतलब तुझे और मिश्का को।"

    प्राची और शौर्य मुस्कुराते हुए एक-दूसरे से बातें कर रहे थे और शौर्य का हाथ प्राची के कंधे पर था। वे चारों हँसी-मजाक कर रहे थे, पर उन्हें पता नहीं था कि कोई उन्हें गुस्से से भरी लाल आँखों से घूर रहा है।

    प्राची उस लहंगे को लेकर ट्रायल रूम की ओर जाने लगी, तभी वहाँ एक लड़की आ गई और प्राची से वह लहंगा छीनकर बोली, "ये लहंगा मैंने पहले देखा है। तुम इसे लेकर कहाँ जा रही हो?"

    उस लड़की को देखते ही प्राची पहचान गई, क्योंकि उसने उसे पहले भी देखा था—तनिष्क के केबिन में। टीना उसे पहचान नहीं पाई, पर मिश्का और शौर्य पहचान गए। मिश्का उस लड़की के पास आकर उससे वह लहंगा छीनते हुए बोली, "तुमने बस देखा है, लिया तो नहीं ना? तुम कुछ और चीज़ पसंद कर लो, क्योंकि ये लहंगा तो बस एक ही है। एक्सपेंसिव है ना बहुत, और ये हम ले रहे हैं।"

    "पर पहले मैंने इसे देखा है, तो ये मैं ही लूँगी। तुम लोग कुछ और देख लो।" इतना कहकर शनाया ने लहंगा अपने हाथ में ले लिया। तभी शौर्य आया।

    "तुम्हारी आदत है ना लोगों से उनकी चीज़ें छीनना और किसी और के पसंद को अपना पसंद बनाना।" इतना कहते हुए शौर्य ने लहंगा उसके हाथ से ले लिया। प्राची सिर पकड़कर वहीं खड़ी थी।

    वह कुछ कहती, उससे पहले शनाया रोती हुई आवाज़ में बोली, "बेबी, देखो ना, मुझे ये पसंद आई है और ये मुझे दे ही नहीं रहे हैं। तुम कुछ कहो ना।"

    शनाया को ऐसे कहते देख सभी पीछे देखे, तो पीछे तनिष्क खड़ा था। तनिष्क को देखते ही सभी एकटक उसे देखने लगे। प्राची भी।

    तनिष्क शनाया के पास आया और शनाया के गाल पर हाथ रखकर प्यार से पूछा, "क्या हुआ बेबी? तुम उदास क्यों हो? क्या हुआ बताओ?"

    "देखो ना, मुझे ये लहंगा कितना पसंद आया है, पर ये मुझे दे ही नहीं रहे हैं। ऊपर से मुझे कितना बोले रहे हैं।" शनाया ने तनिष्क को हग करके रोते हुए कहा।

    शनाया को ऐसे करते देख शौर्य, मिश्का और टीना प्राची को देख रहे थे, पर प्राची के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। मिश्का ने धीरे से शौर्य के कान में कहा, "ये चुड़ैल यहाँ क्या कर रही है? वो भी तनिष्क भैया के साथ? शौर्य भैया, कुछ करिए। प्राची को तो बुरा लग रहा है। वो बहुत हर्ट हो रही है।"

    मिश्का की बात सुनकर शौर्य तनिष्क को देख रहा था। तनिष्क ने कहा, "ये लहंगा शनाया को पसंद है, ये शनाया को दे दो।"

    शौर्य कुछ कहता, उससे पहले प्राची ने पीछे से वह लहंगा लेकर शनाया को दे दिया और शौर्य को देखकर बोली, "शौर्य, बहुत सारे लहंगे हैं। एक को लेकर क्यों हम पड़े रहे हैं? चल, दूसरा देखते हैं। चल।"

    प्राची मुस्कुराकर वहाँ से दूसरी ओर जाने लगी। शौर्य ने शनाया को देखकर कहा, "ले लो, पहन लो। ये तुम्हें मेरी प्राची ने दान किया है। प्राची का दिल बहुत बड़ा है।" इतना कहकर शौर्य कुछ देर तनिष्क को घूरता रहा, फिर प्राची के पीछे-पीछे चला गया। मिश्का भी उनके पीछे-पीछे चली गई। प्राची के ऐसा करने से तनिष्क का गुस्सा और बढ़ गया, और वह आँखों में आग लिए प्राची को जाते हुए देखने लगा।

    क्रमशः

  • 13. Sun Mere Hamsafar - Chapter 13

    Words: 1560

    Estimated Reading Time: 10 min

    प्राची, शौर्य, टीना और मिश्का दूसरी ओर जाकर लहंगा देख रहे थे। प्राची की नज़र एक पीले रंग के लहंगे पर गई जो हीरे से सजा था। वह बहुत खूबसूरत लग रहा था।

    प्राची उस लहंगे के पास गई और उसे छूते हुए ध्यान से देखने लगी। प्राची को वह लहंगा बहुत पसंद आया। "यह आपको पसंद है मैम? आप इसे ले सकती हैं। यह बिल्कुल आपके साइज़ का है, आपको बिल्कुल फिट आएगा और इसमें आपकी खूबसूरती और निखर कर आएगी। यह हमारे शॉप में आज ही आया है।

    अमेरिका से और यह सिर्फ़ एक ही है। यह एक लिमिटेड एडिशन का लहंगा है जो पूरे वर्ल्ड में सिर्फ़ तीन ही बने हैं, जिनमें से यह एक है।" प्राची उस लहंगे से नज़रें हटाकर अपने पास खड़ी लड़की को देखती है, जो मुस्कुराते हुए प्राची को देख रही थी। प्राची अपने मन में सोचती है, "यह लिमिटेड एडिशन का लहंगा है, जो इस पूरे वर्ल्ड में सिर्फ़ तीन ही हैं। इसका मतलब तो यह बहुत महँगा होगा और मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं।"

    इतना सोचकर प्राची सामने उस लड़की को देखकर बोली, "एक्चुअली..." प्राची कुछ कह पाती, उससे पहले वहाँ शनाया आ जाती है और एक बार उस लहंगे को देखकर, फिर उस लड़की को देखते हुए कहती है,

    "तुम भीना किससे पूछ रही हो? (प्राची को देखकर) इसकी इतनी औकात है क्या कि यह लाखों रुपये देकर इस लहंगे को खरीदे? (लड़की को देखकर) यह लहंगा मुझे पसंद आ गया है। तुम इसे मेरे लिए पैक कर दो।" प्राची को उसकी बात सुनकर बहुत बुरा लगा और वह अपना सिर नीचे कर लेती है।

    "मैम, आपको पसंद आ गया है, पर यह लहंगा आपके साइज़ का नहीं है," उस लड़की ने हिचकिचाते हुए कहा। "तुम कहना क्या चाहती हो? कि मैं मोटी हूँ? तुम्हें पता है मैं कौन हूँ? शनाया शनाया अरोरा। नाम सुना है? टॉप एक्ट्रेस हूँ मैं। मेरे फिगर पर मरते हैं सब और तुम..." शनाया कुछ और कह पाती, उससे पहले ही शनाया उस लड़की को थप्पड़ मार देती है और गुस्से में कहती है,

    "एक मामूली चीप लड़की तुम तो बस क्या? पता है मेरा बॉयफ्रेंड कौन है? अगर उसे पता चलेगा ना कि तुमने मुझे मोटी कहा है तो वह तुम्हारा वजूद मिटा देगा। आप ऐसे क्यों कह रही हैं? इन्होंने तो कुछ गलत नहीं कहा। यह लहंगा आपके साइज़ का नहीं है तो आप इसे लेकर बस अपना पैसा ही वेस्ट करेंगी। तुम्हें क्या?

    मेरे पास पैसा है, मैं जो चाहे वो करूँ। तुम्हारी औकात तो नहीं है इसे खरीदने की, तो चुप रहो। वैसे भी तुम्हें आदत है अपनी औकात से ऊँचे चीज़ों को छूने की कोशिश करने की।" शनाया की बात सुनकर प्राची अपनी नज़र झुका लेती है और वहाँ से जाने लगती है। तब शनाया फिर से कहती है, "कितनी चीप लड़की हो ना तुम्हें पता है...

    तनिष्क मुझसे प्यार करता है। वह तुमसे शादी नहीं करना चाहता, पर फिर भी कुछ पैसों के लिए तुम उससे शादी कर रही हो और तुमने तनिष्क को शादी के लिए मनाने के लिए उसके साथ रात बिताकर उसे ब्लैकमेल भी किया है। कितनी गिरी हुई लड़की हो तुम! तुम जैसी लड़कियों के लिए ही हम लड़कियों का नाम खराब होता है।"

    शनाया की बात सुनकर वह लड़की, जो अब तक प्राची को सम्मान से देख रही थी, उसकी नज़र में प्राची नीची दिखने लगी और वह नीची निगाहों से प्राची को देखने लगी। प्राची, जो मुड़कर शनाया को देखने लगी थी, उस लड़की की आँखों में अपने लिए ऐसे बदलते भाव देखकर उसे बहुत बुरा लगा क्योंकि आज तक किसी ने भी उसे ऐसी नज़र से नहीं देखा था। शनाया को देखते हुए प्राची अपने मन में कहती है,

    "तो तनिष्क जी ने अपनी गर्लफ्रेंड को मनाने के लिए यह कहा है कि मैं उनके साथ रात बिताकर उन्हें ब्लैकमेल कर रही हूँ।" इतना सोचते ही प्राची के चेहरे पर एक कड़वी मुस्कान आ जाती है और वह शनाया को देखकर कहती है, "देखिए शनाया जी, मुझे..." इतना कहते-कहते शनाया उसके पास आ जाती है

    और प्राची को अपनी उंगली दिखाकर कहती है, "यू ब्लडी बिच! तुम मुझसे मेरे तनिष्क को छीनने की कोशिश कर रही हो और मुझसे ही जुबान लड़ा रही हो!" इतना कहकर शनाया प्राची के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ देती है, जिससे प्राची का चेहरा एक तरफ़ झुक जाता है। प्राची को अचानक कुछ समझ नहीं आता। वह अपने गाल पर हाथ रखकर शनाया को देखने लगती है। शनाया प्राची को गुस्से में देखते हुए कुछ कहने ही वाली थी कि तभी अचानक वह प्राची का हाथ पकड़, उसके हाथ को आगे करके खुद फर्श पर गिर जाती है। प्राची को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि शनाया ने ऐसा क्यों किया?

    और उस लड़की को भी कुछ समझ नहीं आता। वह लड़की वहाँ से चली जाती है। वहीं प्राची एक कदम आगे बढ़ाती ही शनाया की ओर, कि तभी शनाया की आवाज़ उसके कान में पड़ती है, "बेबी देखो ना, मैं तो बस इस लड़की से यह कहने आई थी कि यह तुमसे शादी ना करे। हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं

    और हम एक-दूसरे के बिना नहीं जी सकते। पर इस लड़की ने मुझे इतनी गंदी-गंदी बातें कहीं और फिर मुझे थप्पड़ भी मारा और ऐसे ही फर्श पर गिरा दिया।" इतना कहकर शनाया मासूम सी शक्ल बनाकर जोर-जोर से रोने लगती है। और शनाया की रोने की आवाज़ सुनकर वहाँ पर जितनी भी लड़कियाँ थीं, सभी आ जाते हैं

    और साथ में शौर्य, टीना और मिश्का भी। तनिष्क, जो वहीं कुछ ही देर में आया था, जिसे देखकर शनाया ने यह हरकत की थी, वह शनाया के पास आकर उसे सहारा देकर उठाता है और फिर गुस्से में प्राची को देखकर कहता है, "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शनाया के ऊपर हाथ उठाने की?"

    "तनिष्क जी, मैंने..." प्राची इतना ही कह पाती है कि तभी तनिष्क गुस्से में कहता है, "अभी के अभी शनाया से माफ़ी माँगो।" प्राची अपना सिर झुकाकर तिरछी नज़र से सबको देखती है तो सभी उसे ही एकटक देख रहे थे

    और टीना, मिश्का, शौर्य अपना सिर ना में हिला रहे थे। बाकी सब यह ड्रामा एन्जॉय कर रहे थे, जो उनके चेहरे से पता चल रहा था। सबको देखने के बाद प्राची अपना सिर उठाकर सामने शनाया और तनिष्क को देखती है। तनिष्क जो गुस्से में उसे घूर रहा था

    और शनाया के चेहरे पर एक शातिर मुस्कान थी। प्राची को ऐसे देखते देख शनाया के दिमाग में एक और प्लान आता है और वह तनिष्क को हग करके डरने की एक्टिंग करते हुए कहती है, "बेबी देखो ना यह लड़की मुझे कैसे घूर रही है। मुझे डर लग रहा है। इसे माफ़ी माँगने की कोई ज़रूरत नहीं है। चलो हम यहाँ से चलते हैं।"

    शनाया की बात सुनकर तनिष्क शनाया को हग कर लेता है और उसके सिर को सहलाते हुए कहता है, "डोंट वरी बेबी। यह लड़की तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। मैं हूँ ना। यह अभी तुमसे माफ़ी माँगेगी।" गुस्से में प्राची को देखकर कहता है, "मैंने क्या कहा? तुमने सुना नहीं? माफ़ी माँगो!" तनिष्क ने यह चिल्लाकर कहा। तनिष्क के इतना कहते ही वहाँ पर जितने भी लोग खड़े थे, सभी काँप जाते हैं

    और फिर प्राची, जिसकी आँखों में आँसू आ गए थे, वह अपने आँसुओं को पोंछकर कहती है, "आई एम सॉरी।" "यह मुझे ऐसे सॉरी कह रही है जैसे अपने दिल से नहीं कह रही हो। और अगर उसे दिल से गिल्ट फील नहीं हो रहा हो तो मैं सॉरी को लेकर क्या करूँगी?"

    शनाया ने मासूमियत से कहा। शनाया की बात सुनकर तनिष्क फिर से गुस्से में प्राची को देखकर कहता है, "अपने हाथ जोड़कर घुटनों के बल बैठकर शनाया से माफ़ी माँगो।" "भैया आप यह क्या कर रहे हैं? हमें पता है प्राची ऐसा कुछ नहीं कर सकती। यह लड़की झूठ कह रही है।" शौर्य आगे आते हुए कहता है और प्राची का हाथ पकड़ उसे अपने पीछे कर लेता है। शौर्य को ऐसा करते देख तनिष्क का गुस्सा और बढ़ जाता है

    और उसकी नज़र शौर्य और प्राची के हाथ पर जाती है और वह उनके हाथों को अपनी आग उगलती आँखों से घूरने लगता है। शौर्य जो तनिष्क को ही देख रहा था, तनिष्क को ऐसे घूरते देख अपने आप उसका हाथ प्राची के हाथ से छूट जाता है।

    तो प्राची एक गहरी साँस छोड़कर फिर से सामने आती है और अपने घुटनों के बल बैठने ही वाली थी कि तभी टीना उसे रोक लेती है। "दीदी आप यह नहीं करोगी। आपने कुछ गलत नहीं किया। मुझे पता है अगर कोई गलत है तो यह लड़की है। यह लड़की आपके ऊपर झूठा इल्ज़ाम लगा रही है।" प्राची टीना को खुद से दूर करती है

    और घुटनों के बल बैठ जाती है और अपना हाथ जोड़कर अपना सिर नीचे करके कहती है, "मुझे माफ़ कर दो, प्लीज़ शनाया जी।" इतना कहकर प्राची उठती है और जल्दी से उस शोरूम से बाहर भाग जाती है।

    प्राची को ऐसे भागते देख प्राची के पीछे-पीछे शौर्य, टीना और मिश्का भी भागते हैं।

  • 14. Sun Mere Hamsafar - Chapter 14

    Words: 1300

    Estimated Reading Time: 8 min

    उन चारों के जाने के बाद, तनिष्क धूल झाड़कर चारों ओर देखता है। वहाँ खड़ी सभी लड़कियाँ डरकर अपने-अपने काम पर चली जाती हैं। तनिष्क सामने देखते हुए अपने मन में कहता है, "मैं तुम्हें इतना मजबूर कर दूँगा कि तुम खुद इस शादी को तोड़ दोगी। बेबी, तुमने उस लड़की के साथ कुछ ज़्यादा ही कर दिया, बेचारी रो रही थी।" शनाया अपने चेहरे को ऊपर करके, मासूमियत से तनिष्क को देखते हुए बोली,

    "तुम उसके बारे में मत सोचो। तुम्हारी शॉपिंग हो गई है ना? तो हम चलें।"

    "हाँ, मेरी शॉपिंग हो गई। चलो।"

    शनाया खुशी से उछलते हुए कहती है। फिर तनिष्क पेमेंट करके सारे शॉपिंग बैग शनाया के फ़्लैट में पहुँचा देने को कहकर वहाँ से निकल गया। वहीं प्राची कार ड्राइव करके अकेले ही घर आ गई थी। घर आकर वह सीधे अपने कमरे में जाकर खुद को कमरे में बंद कर लेती है। शौर्य, टीना और मिश्का, जो टैक्सी से उसके पीछे-पीछे आते हैं,

    वह जल्दी से प्राची के कमरे की ओर भागते हैं। इस वक़्त हॉल में कोई नहीं था, बस कुछ नौकरानी थीं जो अपने-अपने काम में व्यस्त थीं। जिस वजह से ना तो प्राची को कोई रोकता है और ना ही शौर्य, टीना और मिश्का को। तीनों जाकर प्राची के कमरे के दरवाज़े पर खटखटाने लगते हैं और बार-बार दरवाज़ा खोलने को कहते हैं, पर प्राची दरवाज़ा नहीं खोल रही थी।

    "प्राची, प्लीज़ दरवाज़ा खोल," शौर्य ने दरवाज़ा पीटते हुए कहा।

    "प्राची, तुझे शादी करने की ज़रूरत नहीं है," मिश्का कहती है।

    "हाँ दी, एक ऐसे इंसान से आप कभी शादी नहीं कर सकतीं जो आपकी इज़्ज़त ही ना करता हो, आपसे प्यार ना करता हो। वह भी चलेगा, पर सबके सामने बिना किसी गलती के ऐसे ही अपमान करना..."

    "और वह भी अपनी सो-कॉल्ड गर्लफ़्रेंड की बातें सुनकर... प्लीज़ दी, यह शादी मत करो," टीना भी कहती है।

    "प्लीज़, मुझे कुछ देर अकेले रहने दो और जाओ यहाँ से," अंदर से प्राची की आवाज़ सुनाई देती है।

    प्राची की बात सुनकर कोई और कुछ नहीं कहता और वहाँ से उदास होकर चले जाते हैं। वहीं अंदर प्राची, जो एक कोने में बैठी थी, अपने घुटनों में चेहरा छुपाकर रो रही थी। बहुत देर रोने के बाद, प्राची अपनी आँखों से आँसू पोंछकर अपने सिर को ऊपर करती है

    और कहती है, "मुझे पता है आप यह शादी तोड़ने के लिए मुझे ऐसे अपमानित कर रहे हैं, पर आप जो चाहें कर लें, यह शादी नहीं टूटेगी। यह शादी होगी, चाहे कुछ भी हो जाए। आप मुझे शादी तोड़ने पर मजबूर नहीं कर सकते। आपको पता नहीं है प्राची अगर कुछ ठान लेती है तो वह करके रहती है। मैं भी देखती हूँ आप मुझे कितना मजबूर कर सकते हैं, कितना दर्द दे सकते हैं।"

    वहीं मिश्का के कमरे में मिश्का, टीना और शौर्य बैठे थे और तीनों ही कुछ गहरी सोच में थे।

    "मैं यह शादी कतई नहीं होने दूँगी। अगर दी यह शादी करेगी ना, तो मेरी दी की ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी और मैं अपनी दी की ज़िंदगी कभी बर्बाद नहीं होने दूँगी। यह शादी रोकनी होगी, किसी भी हाल में। मैं भी अब यह शादी नहीं होने दे सकती।"

    "प्राची ने सही कहा था। मैं बस अपने भैया के बारे में सोच रही हूँ, प्राची के बारे में नहीं। और अब मैं प्राची के बारे में ही सोचूँगी। और अगर वह यह शादी करेगी तो भैया उसका जीना हराम कर देंगे, उसे जीने ही नहीं देंगे। और मैं अपने बेस्ट फ़्रेंड की ज़िंदगी ऐसे बर्बाद नहीं होने दे सकती।" शौर्य उन दोनों को देखते हुए कहता है,

    "तुम दोनों के पास कोई प्लान है यह शादी रोकने के लिए? कल मेहँदी और संगीत है, परसों शादी।"

    "मेरे पास एक प्लान है, पर मुझे नहीं लगता कि यह काम भी आएगा, पर हमें एक बार ट्राई करना चाहिए।" टीना कहती है।

    "कोई बात नहीं। अगर एक प्लान काम ना आए तो बहुत से प्लान हैं। हमारे पास। यह शादी रोक के ही रहेंगे। मैं ऐसे अपनी प्राची की ज़िंदगी बर्बाद नहीं होने दूँगी।" मिश्का कहती है।

    "तुम अपना प्लान बताओ। अगर यह प्लान फ़्लॉप हुआ तो बाद में और प्लान बना लेंगे। बस तुम जल्दी से प्लान बताओ," शौर्य ने पूछा।

    शौर्य के पूछने पर टीना अपना प्लान बता देती है। जिसे सुनकर मिश्का और शौर्य कुछ सोचते हुए कहते हैं,

    "हमें भी नहीं लग रहा कि यह प्लान काम भी करेगा, पर ट्राई करने में क्या बुराई?" मिश्का कहती है।

    "तुम जाओ काम शुरू कर दो। हमें लेट नहीं होना है। और जब हमें यह पता है कि यह प्लान फ़्लॉप भी हो सकता है तो जल्दी करो, हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं है।"

    शौर्य की बात सुनकर टीना अपना सिर हाँ में हिलाती है और कमरे से बाहर चली जाती है। टीना के जाने के बाद शौर्य भी अपने कमरे में चला जाता है और मिश्का अपने कमरे में बैठी कुछ सोचने लगती है। मिश्का सोच ही रही थी तभी उसके कमरे में रुकमणी जी आते हैं और मिश्का को देखकर कहते हैं,

    "इतनी जल्दी आ गईं तुम? बाकी सब भी आ गए क्या? इतनी जल्दी तुम तीनों की शॉपिंग हो गई?"

    रुकमणी जी की बात सुनकर मिश्का उनको देखती है और कहती है, "शॉपिंग कहाँ हुई है मॉम? हमारी गलती है कि हम शॉपिंग करने गए और सबसे बड़ी गलती यह है कि हम तनिष्क भैया के साथ प्राची की शादी करा रहे हैं। आपको नहीं लगता कि हम प्राची के साथ बहुत-बहुत गलत कर रहे हैं? क्या आपकी भगवान कभी इस चीज़ को माफ़ करेंगे? एक मासूम के साथ..."

    "यह सब क्यों कह रही है? अभी तो सब ठीक हो गया है ना? प्राची भी शादी के लिए मान गई है, सब जानते हुए भी।"

    "पर हम ऐसा कैसे कर सकते हैं? प्राची सब जानते हुए भी यह शादी इसलिए कर रही है क्योंकि वह भैया से प्यार करती है और हम तो सब जानते हैं ना? तो हम ऐसा कैसे कर सकते हैं? मैं यह शादी नहीं होने दूँगी। यह शादी अगर हुई तो प्राची की ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी और मैं अपने बेस्ट फ़्रेंड की ज़िंदगी ऐसे..."

    "बर्बाद नहीं होगी। तनिष्क अभी भटका हुआ है। शादी के बाद वह प्राची को समझ जाएगा, उससे प्यार करने लगेगा।" रुकमणी जी ने मिश्का को समझाने के लिए कहा।

    "नहीं मॉम, ऐसा कभी नहीं होगा। आप खुद भी अपने बेटे को जानती हैं, वह कैसा है। और आज आपको पता है भैया ने क्या किया?"

    "आज...आज क्या किया तनिष्क ने?" रुकमणी जी ने पूछा।

    रुकमणी जी के पूछने पर मिश्का ने उनको सब कुछ बता दिया जो हुआ। जिसे सुनकर रुकमणी जी को बहुत बुरा लगा।

    "अब बताइए आप अभी भी यह शादी कराना चाहती हैं?"

    "हाँ, अभी भी मैं यह शादी कराना चाहती हूँ और अब तो और भी ज़्यादा, क्योंकि वह लड़की तनिष्क के लिए एकदम सही नहीं है। इसकी प्रूफ़ अभी तुम्हारी बातों से मुझे मिल गई और मैं ऐसी लड़की से मेरे बेटे की शादी कभी नहीं होने दूँगी। उससे अच्छा मैं प्राची से शादी करा दूँ। और अब तुम इस बारे में और कुछ नहीं कहोगी। मैं तुम्हारे कमरे से, तुम्हें कल जो फ़ाइल दी थी ना मैंने, वह लेने आई हूँ, वह मुझे दो।"

    अपनी माँ की बातें सुनकर मिश्का एकदम निराश हो गई थी। उसकी आँखें नम हो गई थीं। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी माँ अपने बेटे के लिए एक और लड़की की ज़िंदगी बर्बाद करने से पहले भी एक बार नहीं सोच रही है। मिश्का चुपचाप फ़ाइल निकालकर अपनी माँ को दे देती है और बेड पर बैठ जाती है। रुकमणी जी भी फ़ाइल को लेकर कमरे से बाहर चली जाती हैं।क्रमशः

  • 15. Sun Mere Hamsafar - Chapter 15

    Words: 1139

    Estimated Reading Time: 7 min

    सारे नौकर सिंघानिया मेनशन को सजाने में लगे थे। आलोक जी उन्हें आदेश दे रहे थे।
    "हाय अंकल," ऋषि अंदर आते हुए बोला।
    "हेलो बेटा, तुम इतने लेट क्यों आए हो? तुम्हारे दोस्त की शादी है। कहाँ थे तुम? सब कुछ संभालोगे और तुम्हारा कोई नाम ही नहीं है।" आलोक जी थोड़े व्यस्त थे, व्यापार में। आप समझ सकते हैं ना? "पर अब मैं आ गया हूँ तो अब सब कुछ मैं संभालूँगा। लेकिन सबसे पहले मैं अपनी भाभी से तो मिल लूँ। भाभी कहाँ हैं?"

    "भाभी से कल मिल लेना," रुकमणी जी आते हुए बोलीं।

    "कल मिलूँगा? चलो ठीक है, कल ही मिलूँगा। पर यहाँ पर आपके सारे रिश्तेदार नहीं आए अब तक? मतलब, सारे लोग आ गए हैं और सभी अपने-अपने कमरों में हैं?" रुकमणी जी कह ही रही थीं कि तभी ऊपर से तनिष्क चलते हुए आया। उसने एक काला टक्सीडो पहना हुआ था, जिसमें वह बहुत हैंडसम लग रहा था।

    तनिष्क को देख आलोक जी ने पूछा, "तुम कहाँ जा रहे हो?"

    "एक पार्टी है डैड, तो मैं वहीं जा रहा हूँ।"

    "कल तुम्हारा..."

    "डैड, कल बस लड़कियों के रस्म होने वाले हैं। कल मेरा कोई काम नहीं है इस रस्म में और मैं आज रात ही वापस आ जाऊँगा।"

    "किसने कहा लड़कियों के लिए रस्म है? मेहँदी तो तुम्हें भी लगानी होगी," रुकमणी जी ने कहा।

    "मैं वह सब नहीं लगा सकता। प्लीज़, अब इस बात पर मुझे ज़ोर मत दीजियेगा," तनिष्क ने रुकमणी जी को देखते हुए कहा।

    "ठीक है, ठीक है। वह बात छोड़ो, वह कल की बात है। पर आज तुम्हारे साथ प्राची भी जाएगी," रुकमणी जी ने कहा।

    "प्राची?! वह क्यों जाएगी मेरे साथ?" तनिष्क थोड़ा गुस्से में बोला। "क्यों जाएगी? क्या मतलब? वह तुम्हारी होने वाली पत्नी है। दो दिन बाद तुम दोनों की शादी है। तो वह नहीं जाएगी तो कौन जाएगी तुम्हारे साथ? तुम रुको, मैं प्राची को तैयार करके लाती हूँ।"

    इतना कहकर रुकमणी जी सीढ़ियों से चलते हुए प्राची के कमरे की ओर चली गईं।

    "यार, तू जा रहा है पार्टी में? मुझे लगा तू नहीं जाएगा, इसलिए मैं अभी नहीं जा रहा था। पर अब ठीक है, तू जब जा रहा है तो मैं भी जाऊँगा। तू पार्टी में पहुँच, मैं भी तैयार होकर पहुँचता हूँ। बाय-बाय अंकल।"

    इतना कहकर ऋषि वहाँ से चला गया।

    "डैड, प्लीज़ आप मॉम को समझा देना। यह एक बिज़नेस पार्टी है। यहाँ पर उसे लेकर जाकर क्या करूँगा? और वही क्या करेगी? बस वहाँ पर बोर ही होगी।"

    "मैं तुम्हारा डैड हूँ तनिष्क, और मुझे अच्छे से पता है कि इस पार्टी में एक पार्टनर को ले जाते हैं। तो तुम्हारी पार्टनर प्राची है और तुम उसे लेकर जाओगे।"

    आलोक जी की बात सुनकर तनिष्क ने एक गहरी साँस छोड़ी। कुछ एक घंटे बाद रुकमणी जी प्राची को तैयार करके लायीं। प्राची को देखते ही तनिष्क की नज़र प्राची पर ठहर गई। प्राची ने एक काले रंग की मैक्सी ड्रेस पहनी हुई थी जो ऑफ-शोल्डर और बैकलेस थी। उसने अपने बालों की एक प्यारी सी बन बनाई हुई थी जिस वजह से उसकी गर्दन पूरी दिख रही थी और वह बहुत ही ज्यादा आकर्षक लग रही थी। चेहरे पर हल्का मेकअप, लाल लिपस्टिक, हाथों में हीरों की चूड़ियाँ, कानों में हीरों के झुमके, प्राची बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। तनिष्क बहुत देर तक प्राची को देखता रहा, पर फिर वह अपनी नज़रें हटा लेता है।

    प्राची नीचे आकर तिरछी आँखों से तनिष्क को देखती है जो दूसरी ओर देख रहा था।

    "तनिष्क, जाओ प्राची को लेकर जाओ और जल्दी आ जाना। दोनों को मॉम, इसे जाने की क्या ज़रूरत है?"

    "ज़रूरत है। अब तुम ज़्यादा सवाल मत करो और लेकर जाओ प्राची को।"

    रुकमणी जी की बात सुनकर तनिष्क कुछ नहीं कहता और मेन गेट की ओर बढ़ने लगता है। तो रुकमणी जी प्राची को भी जाने का इशारा करती हैं। प्राची जो बहुत घबराई हुई थी, वह तनिष्क के साथ जाना नहीं चाहती थी, पर रुकमणी जी के ज़बरदस्ती करने से उसे जाना पड़ रहा था। तनिष्क कार में बैठा था। प्राची धीरे-धीरे तनिष्क की कार की ओर बढ़ती है और जाकर पीछे की सीट में बैठ जाती है।

    "क्या मैं तुम्हें तुम्हारा ड्राइवर लग रहा हूँ?" तनिष्क गुस्से में प्राची को घूरते हुए कहता है। तो प्राची जल्दी से कार से उतर जाती है और जाकर पैसेंजर सीट में बैठ जाती है। प्राची अभी भी अपनी नज़रें नीचे करके बैठी थी। उसकी इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपनी नज़रें ऊपर करे। तनिष्क गुस्से में कार स्टार्ट कर देता है और तेज स्पीड में कार को चलाने लगता है। तनिष्क के मेनशन के गेट से निकलते ही उसके आगे-पीछे बहुत सारी कारें आ जाती हैं और उन कारों में बस बॉडीगार्ड ही थे। तनिष्क के इतनी स्पीड में गाड़ी चलाने से प्राची को डर लग रहा था और वह अपनी मैक्सी को अपने हाथों में जकड़ लेती है। कुछ देर में वे एक सेवन स्टार होटल के सामने पहुँचते हैं जहाँ पहले से बहुत सारी कारें रखी थीं और बहुत सारे रिपोर्टरों की भीड़ भी थी। तनिष्क की कार गेट के अंदर आते ही सारे रिपोर्टर उसकी कार की ओर आ जाते हैं, पर तनिष्क के बॉडीगार्ड उन्हें रोक देते हैं। वहीं तनिष्क कार को पार्किंग में पार्क करता है और खुद कार से उतर जाता है। फिर प्राची को देखकर कहता है, "अब क्या तुम्हें इन्विटेशन कार्ड चाहिए कार से उतरने के लिए?"

    तनिष्क के कहने पर प्राची जल्दी से कार से उतर जाती है। तनिष्क प्राची को थोड़ा आगे ले जाकर रुक जाता है।

    "तुम यहीं बाहर रहोगी क्योंकि मेरे साथ अंदर शनाया जाएगी, तुम नहीं।"

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची चौंक जाती है और अपने चेहरे को ऊपर करके तनिष्क को देखती है।

    "तुम्हें क्या लगा मैं अपनी गर्लफ्रेंड को छोड़कर तुम्हें ले जाऊँगा अंदर? हो तुम अंदर आने की कोशिश भी करोगी तो अंदर नहीं आ पाओगी क्योंकि यहाँ पर आने के लिए पार्टनर चाहिए और वह भी जो बिज़नेस से जुड़ा हो। तो यहाँ पर घूमते रहो, चाहो तो घर भी जा सकती हो।"

    इतना कहकर तनिष्क सामने की ओर चला जाता है और प्राची वहीं खड़ी रह जाती है। प्राची की आँखों में आँसू आ गए थे और वह देख पा रही थी कि सामने एक लड़की, जिसने लाल मैक्सी पहनी हुई थी, वह लड़की और कोई नहीं शनाया थी। वह आकर तनिष्क को गले लगाती है और तनिष्क भी उसे गले लगाता है। और फिर वे दोनों वहाँ से अंदर की ओर चले जाते हैं। सारे मीडिया वाले उन दोनों को लेकर बातें कर रहे थे, उनके फोटो खींच रहे थे और प्राची एक कोने में खड़ी होकर यह सब देख रही थी। जारी रहेगा...

  • 16. Sun Mere Hamsafar - Chapter 16

    Words: 1334

    Estimated Reading Time: 9 min

    हॉल में बहुत से लोग थे, पर कोई भी रिपोर्टर नहीं। सभी के हाथ में वाइन के गिलास थे और सभी एक-दूसरे से बातें कर रहे थे। तनिष्क के अंदर जाते ही सभी की नज़र उस पर गई और सभी उसे देखने लगे। वहाँ खड़े सभी बिज़नेसमैन तनिष्क से बात करना चाहते थे, उसके साथ काम करना चाहते थे। कोई यह चाहता था कि तनिष्क उनके बिज़नेस में निवेश करें। सभी को पता था कि तनिष्क जैसे बड़े बिज़नेसमैन का हाथ अगर एक बार किसी के ऊपर आ गया, तो उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। वहीं, वहाँ खड़ी सभी लड़कियाँ अपनी हवस भरी और लालची आँखों से तनिष्क को घूर रही थीं, और शनाया को देखकर सबको जलन हो रही थी। वहीं, शनाया सारी लड़कियों को खुद से जलते देख अपने में बहुत अभिमान महसूस कर रही थी।

    वह तनिष्क का हाथ कस के पकड़ लेती है और अपने बालों को अदा से अपने चेहरे से हटाते हुए, उसके साथ चलने लगती है। तनिष्क जाकर एक ग्रुप में बैठ जाता है जहाँ पहले से चार लोग बैठे थे।

    "मिस्टर सिंघानिया, हाउ आर यू?" एक आदमी, जो दिखने में विदेशी लग रहा था, तनिष्क को देखते हुए कहता है। उस आदमी के पूछने पर तनिष्क उसे अपनी आँखें छोटी करके देखता है। वह आदमी सहम जाता है और इधर-उधर देखने लगता है। वहीं दूसरा आदमी बात को संभालते हुए एक फाइल आगे बढ़ाते हुए कहता है,

    "यह कॉन्ट्रैक्ट है। आप इसे पढ़कर साइन कर दीजिए।"

    तनिष्क उस फाइल को लेता है और पढ़ने लगता है। वहीं शनाया, जो तनिष्क के पास ही बैठकर चारों ओर देख रही थी, फाइल को पूरा पढ़ने के बाद तनिष्क उस फाइल को टेबल पर पटक देता है और कहता है,

    "यहाँ पर मेरा शेयर कम है। मुझे 70% शेयर चाहिए। पहले 50% से 70% करो, फिर आना साइन कराने।"

    इतना कहकर तनिष्क उठने लगता है तो दूसरा आदमी कहता है,

    "बट मिस्टर सिंघानिया, हम आपको 50% दे रहे हैं और हम चार 50% ले रहे हैं। अगर हम आपको 70% दे देंगे तो हमारे लिए सिर्फ 30%..."

    "तो मैं क्या करूँ? अगर तुम्हें यह कंडीशन मंज़ूर है तो मैं इस पर साइन कर दूँगा, अगर नहीं है तो..."

    तनिष्क की बात सुनकर वह आदमी कुछ कहता है, उससे पहले एक और आदमी मुस्कुराते हुए कहता है,

    "हमें मंज़ूर है। आप पार्टी इन्जॉय कीजिए। हम एक घंटे में नया कॉन्ट्रैक्ट तैयार करके लाते हैं जिसमें आपका 70% होगा।"

    उस आदमी की बात सुनकर तनिष्क कुछ नहीं कहता और वहाँ से उठकर चला जाता है, और साथ में शनाया भी। तनिष्क के जाते ही तीनों आदमी आपस में घूमने लगते हैं और एक आदमी कहता है,

    "तुम पागल हो गए हो! 70%... हमारे लिए बस 30% बचेगा और हम चार लोग हैं।"

    "पर यह भी तो सोचो, अगर तनिष्क सिंघानिया का हाथ हमारे ऊपर होगा तो हम कितना आगे बढ़ सकते हैं। यहाँ पर जितने भी बिज़नेसमैन हैं ना, सब के सब तनिष्क सिंघानिया से बस एक छोटे से मीटिंग के लिए तरस जाते हैं, जो हम कर पाए हैं। और उसे ऐसे ही हम जाने दें?"

    उस आदमी की बात सुनकर बाकी तीनों आदमी भी उसके पॉइंट को समझ पाते हैं और अपना सिर हाँ में हिलाते हुए अपनी सहमति जताते हैं। वहीं तनिष्क और शनाया एक जगह पर खड़े थे। शनाया बिल्कुल तनिष्क से चिपकी हुई खड़ी थी। और तनिष्क के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। वह वाइन का गिलास अपने हाथ में लेकर अपने फ़ोन में कुछ कर रहा था। वहाँ पर सभी तनिष्क को देख रहे थे और सभी उससे बातें करना चाहते थे, पर किसी में भी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह तनिष्क के पास आकर उससे बातें करे, क्योंकि सबको पता था तनिष्क का स्वभाव कैसा है। तनिष्क अपने फ़ोन में ही बिजी था, तभी उसके कान में कुछ लड़कों की बातें सुनाई देती हैं।

    "वाओ! सि लुक्स डैम हॉट!"

    "कितना सेक्सी है यार!"

    "शायद यह ऋषि मित्तल की गर्लफ्रेंड है।"

    "आसमान से पूरे चाँद को ही ले आया है इस ऋषि ने! अगर यह मुझे मिल जाए ना, तो माँ कसम मैं तो अपना जान भी लुटा दूँ इस पर।"

    यह सब बातें सुनकर तनिष्क को थोड़ा अजीब लगता है, पर फिर वह इन सब बातों को अनदेखा कर देता है। पर तभी उसके कान में शनाया की बात सुनाई देती है,

    "प्राची! यह लड़की यहाँ पर क्या कर रही है? और वह भी ऋषि के साथ! यह ऋषि के पार्टनर बनकर आई है।"

    शनाया को बहुत जलन हो रही थी क्योंकि कुछ देर पहले सारे लड़के उसके पीछे पड़े हुए थे, वह स्पॉटलाइट में थी, पर अब सभी की नज़र प्राची पर थी। उसे कोई अब देख भी नहीं रहा था। शनाया की बात सुनकर तनिष्क सामने देखता है तो उसका पकड़ वाइन के ग्लास और अपने फ़ोन में कस जाता है और उसकी आँखें लाल हो जाती हैं और वह गुस्से में सामने देखने लगता है। सामने ऋषि और प्राची आ रही थीं। प्राची के चेहरे पर एक मुस्कान थी जो उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी, और ऋषि का हाथ प्राची की कमर पर था। ऋषि के चेहरे पर भी एक अलग ही चमक और मुस्कान थी। तनिष्क गुस्से में ऋषि के हाथ को घूरने लगता है जो प्राची की कमर पर है। प्राची चारों ओर देख रही थी, तभी उसकी नज़र साइड में खड़े तनिष्क और शनाया पर जाती है, और उन दोनों को इतने पास देख प्राची अपनी नज़रें नीचे कर लेती है। उसे बहुत बुरा लगता है। प्राची को ऐसे अचानक उदास होते देख ऋषि अपना चेहरा प्राची के चेहरे के पास करके कहता है,

    "ब्यूटी, ऐसे मुँह लटका के मत रहो, प्लीज! मेरा प्रेस्टीज का सवाल है। स्माइल करो! अपने चेहरे से स्माइल मत जाने दीजिए।"

    ऋषि की बात सुनकर प्राची के चेहरे पर फिर से मुस्कान आ जाती है और वह मुस्कुराते हुए ऋषि को देखती है, तो ऋषि भी मुस्कुरा देता है। वहीं, उन दोनों को इतने पास देखकर तनिष्क का पकड़ वाइन के गिलास और अपने फ़ोन में इतना कस गया था कि उसके हाथों की नसें दिखाई दे रही थीं। वहीं, शनाया जो तनिष्क के पास, उससे चिपक कर खड़ी थी, अचानक उसे बहुत ठंडा सा महसूस होता है, तो वह अपना चेहरा ऊपर करके तनिष्क को देखती है जो गुस्से में ऋषि और प्राची को घूर रहा था।

    तनिष्क को ऐसे गुस्से में उन दोनों को घूरते देख शनाया शैतानी मुस्कान करते हुए अपने मन में कहती है, "लगता है आग लग गया, अब मुझे घी डालनी होगी अच्छे से, ताकि तनिष्क के दिल में जो नफरत है इस लड़की के लिए, वह और बढ़ जाए। बेबी, यह दोनों इतने पास हैं और प्राची तो मुस्कुरा कर भी बात कर रही है। यह इसके साथ तो तुम्हारी शादी होने वाली है ना? आई थिंक यह और ऋषि रिलेशन में हैं। कितने क्लोज हैं यह दोनों! और ऋषि का हाथ भी देखो, उसके कमर पर है। पर अगर वह इसके साथ रिलेशन में है तो तुम्हारे साथ शादी क्यों करना चाहता है?"

    शनाया की बातें सुनकर तनिष्क और ज़्यादा गुस्सा हो जाता है और उसका पकड़ इतना मज़बूत हो जाता है कि वाइन का गिलास टूट जाता है और उसके हाथ में काँच चुभ जाता है और उसके हाथ से खून आने लगता है। तनिष्क के ऐसा करते ही शनाया भी डर जाती है और तनिष्क से दूर खड़ी हो जाती है, और साइड में खड़े सभी लोग तनिष्क से दूर हो जाते हैं। अब वहाँ पर डर का माहौल बना हुआ था। प्राची जो तनिष्क को देख भी नहीं रही थी और चारों ओर देख रही थी। वहीं ऋषि जो चारों ओर देखते हुए तनिष्क को ढूँढ लेता है और प्राची को लेकर तनिष्क के ओर बढ़ने लगता है। क्रमशः

  • 17. Sun Mere Hamsafar - Chapter 17

    Words: 1258

    Estimated Reading Time: 8 min

    ऋषि प्राची को लेकर तनिष्क और शनाया के पास गया। प्राची, जो अभी भी चारों ओर देख रही थी, अचानक ठंड लगने लगी। सामने देखने पर वह तनिष्क के बिल्कुल सामने खड़ी थी।

    तनिष्क गुस्से में उसे घूर रहा था। प्राची की नज़र तनिष्क के चेहरे से होते हुए उसके हाथ पर गई, जहाँ से खून टपक रहा था और कांच भी चुभे हुए थे। तनिष्क का हाथ देखकर प्राची जल्दी से उसके पास गई और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। उसके हाथ को देखते हुए उसने कहा, "यह कैसे हुआ?

    यहाँ से तो बहुत खून निकल रहा है! (ऋषि को देखकर) जल्दी से फर्स्ट एड बॉक्स।"

    इतना ही प्राची कह पाई थी कि तनिष्क अपना हाथ हटा लेता है और उसी हाथ से प्राची की कलाई पकड़ लेता है। गुस्से में उसने कहा, "तुम यहाँ क्या कर रही हो? तुम्हें मैंने बाहर रहने को कहा था ना? या फिर घर चली जाओ।"

    तनिष्क और प्राची को ऐसे देखकर ऋषि को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने तनिष्क को देखते हुए पूछा, "तनिष्क, तू प्राची को ऐसे क्यों ट्रीट कर रहा है? और वह मेरे साथ आई है। बाहर खड़ी थी, अकेले और रो रही थी। मुझे अच्छे से नहीं पता क्या हुआ और मेरे पास कोई पार्टनर भी नहीं था,

    तो मैं इसे लेकर आ गया। पहले तो वह राज़ी ही नहीं हो रही थी मेरे साथ आने को, पर फिर बहुत मुश्किल से मनाया।"

    ऋषि की बात सुनकर तनिष्क की पकड़ प्राची के हाथ में कस गई। जिस वजह से तनिष्क के हाथों में लगा कांच प्राची के हाथ में भी चुभ गए और प्राची के हाथ से भी खून टपकने लगा। अब एक साथ प्राची और तनिष्क दोनों के हाथों से खून बह रहा था और देखकर यह समझना मुश्किल था कि खून किसका है। प्राची अपने दर्द को सहते हुए वहीं खड़ी थी और अपने सिर को नीचे झुकाए हुए थी। तनिष्क गुस्से में ऋषि को कुछ कहने ही वाला था,

    तभी उसकी नज़र आसपास गई। आसपास देखते हुए तनिष्क ने प्राची का हाथ छोड़ा और उसे ऋषि की ओर धक्का देते हुए कहा, "मैंने भी देखा था जब अंदर आ रहा था तब यह रो रही थी। बाहर पार्टी में आना चाहती थी, पर मेरे साथ तो मेरी गर्लफ्रेंड है, तो मैं इसे क्यों लाता? अच्छा हुआ आया।

    कभी ऐसा पार्टी देखा नहीं तो तेरे साथ आकर देख तो ली।"

    तनिष्क की बात सुनकर प्राची की आँखें नम हो गईं, पर उसने किसी तरह अपने आँसुओं को छिपाते हुए ऋषि को कहा, "ऋषि जी, मैं थोड़ी वॉशरूम होकर आती हूँ।"

    इतना कहकर प्राची जल्दी से वहाँ से वॉशरूम ढूँढते हुए हॉल से बाहर निकल गई।

    प्राची को ऐसे बाहर जाते देख तनिष्क उसे घूरने लगा। तभी ऋषि भी अपनी गर्दन पर हाथ फेरते हुए बोला, "तनिष्क, मुझे भी कुछ काम है, तो मैं भी चलता हूँ। थोड़ी देर बाद आता हूँ। ओके, एन्जॉय।"

    इतना कहकर ऋषि प्राची के पीछे-पीछे चला गया। ऋषि को प्राची के पीछे जाते देख शनाया फिर से तनिष्क के पास आ गई और बोली, "बेबी, तुमने ऋषि से यह क्यों नहीं कहा कि तुम्हारी शादी उसके साथ फिक्स है?

    अगर तुमने यह कह दिया होता तो ऋषि उस लड़की से बच जाता। यह लड़की शायद ऋषि को फँसा रही है। देखा नहीं कैसे बहाना बनाकर यहाँ से चली गई? और मैंने देखा उसने ऋषि को कुछ इशारा किया, उसके बाद ही ऋषि उसके पीछे गया। ज़रूर यह दोनों अब रूम में अपना क्वालिटी टाइम स्पेंड करेंगे।"

    शनाया की बात सुनकर तनिष्क गुस्से में शनाया को घूरता है। तनिष्क को ऐसे देखते देख शनाया भी डर से काँप गई और अपना सिर झुकाकर उससे दो कदम दूरी पर चली गई। प्राची वॉशरूम ढूँढते-ढूँढते एक कमरे में गई

    और उस कमरे के वॉशरूम में जाकर अपने चेहरे को देखा। अब तक प्राची की आँखों में आँसू आ गए थे। प्राची आईने में खुद को देखते हुए बोली, "नहीं रोएगी प्राची। तुझे तो पता है ना कि तेरे साथ यह सब होगा, पर फिर भी तू इतने आगे तक आई है, तो अब तू नहीं रोएगी। यह शादी किसी भी हाल में होनी चाहिए।

    यह शादी नहीं रुकनी चाहिए।"

    इतना कहकर प्राची की नज़र अपने हाथ पर गई जहाँ पर कुछ कांच चुभे थे और अभी भी खून टपक रहा था। इसे देख प्राची के चेहरे पर एक दर्द उभर आया। फिर से आईने में खुद को देखकर उसने अपने चेहरे पर पानी के छींटे मारे। तभी अचानक वॉशरूम का दरवाज़ा खुला

    और जब प्राची पीछे मुड़कर देखती है तो ऋषि वहाँ था, जो प्राची को ही देख रहा था। "ऋषि जी आप यहाँ पर! आप क्यों यहाँ आए हैं? मैं थोड़ी देर में आ रही थी। ब्यूटी, हम जब पार्टी में नहीं जा रहे हैं..."

    "पार्टी में जाने के लिए मैं यहाँ नहीं आया।" ऋषि प्राची के पास आते हुए बोला।

    ऋषि की बात सुनकर प्राची को कुछ ठीक नहीं लगा और उसे ऋषि की आँखों में अपने लिए कुछ अजीब देखकर वह डर गई और पीछे हटते हुए बोली, "ऋषि जी आप..."

    प्राची कुछ और कहती, उससे पहले ऋषि ने उसका हाथ पकड़ लिया

    और प्राची को अपने पास खींचकर प्राची के गले पर किस करने लगा। प्राची ऋषि को खुद से दूर करने की बेहद कोशिश कर रही थी। किसी तरह ऋषि को खुद से दूर करके प्राची वॉशरूम से बाहर आ गई

    और दरवाज़े की ओर भागी। पर प्राची दरवाज़े तक पहुँच पाती, उससे पहले ऋषि ने प्राची का हाथ पकड़ लिया और उसे घुमाकर सामने फर्श पर फेंक दिया। जिससे प्राची को दर्द हुआ और उसके मुँह से चीख

    निकल गई। ऋषि अपने चेहरे पर एक डेविल स्माइल लेकर प्राची के ओर अपने कदम बढ़ाने लगा और प्राची डरते हुए सरकते हुए पीछे जाने लगी। "प्लीज़ ऋषि जी, मुझे जाने दीजिए। मैंने आपका क्या बिगाड़ा है? प्लीज़ मुझे जाने दीजिए।"

    प्राची के इतना कहते ही ऋषि बिल्कुल प्राची के पास आ गया और प्राची को अपनी गोद में उठाकर बेड पर ले जाकर पटक दिया। और खुद उसके ऊपर आकर प्राची को बेड पर दबाते हुए सेंसुअल आवाज़ में बोला, "मैं तुम्हें कैसे जाने दूँ ब्यूटी?

    जब से तुम्हें देखा है ना, सच कह रहा हूँ, तन-बदन में आग लगा हुआ है। बस तुम्हें पाने के लिए और अब तुम मेरे पास हो। यह मौका मैं कैसे हाथ से जाने दूँ? बस आज रात मेरा हो जाओ। मैं तुमसे प्रॉमिस करता हूँ, जिंदगी भर मैं तुम्हें रानी की तरह रखूँगा।

    तुम्हें कभी किसी भी चीज़ की कमी नहीं होने दूँगा। बस तुम मुझे खुश कर देना, हमेशा।"

    इतना कहकर ऋषि प्राची के गले पर किस करने लगा जिससे प्राची चीखने लगी। वह लगातार ऋषि से खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी और रो रही थी। प्राची के गले पर किस करते हुए ऋषि ने प्राची को पलटा दिया

    और प्राची की गोरी पीठ को देखने लगा। और अचानक ही वह प्राची की पीठ पर किसी जानवर की तरह टूट पड़ा।

    कृतिका लगातार चिल्ला रही थी, रो रही थी और ऋषि से खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, पर ऋषि, जो इस वक्त एक हैवान बन चुका था, उसे इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ता था। क्रमशः

  • 18. Sun Mere Hamsafar - Chapter 18

    Words: 1781

    Estimated Reading Time: 11 min

    ऋषि ने प्राची को पलटा और उसके जख्मी कलाई को पकड़ा। प्राची के हाथ में तेज दर्द हुआ और उसकी चीख निकल गई। प्राची ने ऋषि को ऊपर से धक्का देने की कोशिश की, पर ऋषि ने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए।

    "कोई फायदा नहीं है, ब्यूटी। तुम मुझसे बच नहीं सकती। क्यों कोशिश कर रही हो? आज तुम्हें मेरे होने से कोई नहीं रोक सकता।" इतना कहकर ऋषि प्राची के होठों की ओर बढ़ने लगा।

    "प्लीज, मेरे साथ ऐसा मत कीजिए। दो दिन बाद मेरी शादी है। प्लीज, मुझे जाने दीजिए।"

    "शादी होगी ना तुम्हारी? मेरे साथ। मुझे नहीं पता किसके साथ तुम्हारी शादी है, पर जिसके साथ भी हो, जब उसे पता चलेगा कि तुम किसी और के साथ रात बिता कर आई हो, तो वह तुमसे शादी नहीं करेगा। पर डोंट वरी, मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार हूँ, ब्यूटी।" इतना कहकर ऋषि फिर से प्राची के होठों की ओर बढ़ने लगा। प्राची अपने सिर को इधर-उधर हिला रही थी। ऋषि को गुस्सा आया और उसने प्राची के बालों को कसकर पकड़ लिया। वह प्राची के होठों पर अपना होठ रखने ही वाला था कि तभी दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आई।

    आवाज़ सुनकर ऋषि गुस्से में प्राची के ऊपर से उठा और चिल्लाया, "इस टाइम कौन आया है? बाहर देखा नहीं? डू नॉट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा हुआ है, इडियट लोग!" इतना कहकर ऋषि गुस्से में दरवाज़े की ओर देखा। वहाँ पर कोई खड़ा था, पर अंधेरे की वजह से वह साफ़ नहीं देख पा रहा था कि कौन है।

    ऋषि के उठते ही प्राची जल्दी से उठ बैठी और अपने ऊपर चादर लपेट ली। उसने भी सामने देखा। वह शख्स दो कदम आगे आया तो उसका चेहरा दिखा। उसके चेहरे पर इतना गुस्सा था कि लग रहा था वह अभी सब कुछ तबाह कर देगा। यह कोई और नहीं, तनिष्क था।

    तनिष्क को इतने गुस्से में देखकर ऋषि डर से काँप गया। प्राची रोते हुए उठ खड़ी हुई और तनिष्क के पास दौड़कर उसे गले लगा लिया और बेतहाशा रोने लगी। तनिष्क ने एक बार प्राची को गले लगाकर रोते हुए देखा, और फिर गुस्से में ऋषि को देखा। ऋषि ने तनिष्क को समझाते हुए कहा, "क्या हुआ? तू ऐसे गुस्से में क्यों देख रहा है मुझे? देख, मेरी कोई गलती नहीं थी। यह लड़की खुद मुझे सिड्यूस कर रही थी। सच कह रहा हूँ। अभी पता नहीं क्यों ऐसे एक्टिंग कर रही है?"

    "चिल, ऋषि। मुझे पता है यह लड़की क्या कर सकती है। इसने ही तुझे सिड्यूस किया होगा। इसकी काम ही तो यह है, अमीरों को फँसाना।"

    ऋषि की बात सुनकर प्राची, जो अभी तनिष्क को देखकर खुश थी और उसे गले लगाकर रो रही थी, तनिष्क को छोड़कर उससे दूर हो गई और एकटक तनिष्क के चेहरे को देखने लगी। अब प्राची के आँखों से आँसू बहना बंद हो गया था और वह एकदम शांत हो गई थी।

    "थैंक्स यार। आई नो, तू हमेशा मुझे समझता है। ठीक है, तो तू अभी यहाँ से जा। इस लड़की को मैं संभाल लूँगा।" तनिष्क प्राची को देखते हुए बोला। ऋषि यहाँ से जाना नहीं चाहता था, पर वह कुछ कह भी नहीं पाया और चुपचाप वहाँ से चला गया। ऋषि के जाते ही तनिष्क दरवाज़ा बंद कर दिया और गुस्से में प्राची को देखने लगा। प्राची जो बिल्कुल शांत हो गई थी, तनिष्क के ऐसे देखने से अंदर तक सिहर गई। तनिष्क प्राची के पास जाने लगा। इसे देख प्राची को होश आया और उसने अपने हाथ आगे बढ़ाकर तनिष्क को रोका।

    "तनिष्क जी, आपके दोस्त झूठ कह रहे हैं। मैंने उनको सिड्यूस नहीं किया। वह मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे थे।"

    प्राची इतना कह ही रही थी कि वह पीछे किसी चीज से टकरा गई और गिरने ही वाली थी, पर तनिष्क ने उसे कमर से पकड़ लिया और अपने पास खींच लिया। तनिष्क के ऐसा करते ही प्राची की आँखों के सामने अंधेरा छा गया और वह बेहोश होकर तनिष्क के बाहों में गिर गई। तनिष्क गुस्से में प्राची के चेहरे को देखा और फिर उसकी नज़र प्राची के गले पर गई, जहाँ पर किस निशान था जो ऋषि ने बनाया था। फिर तनिष्क की नज़र प्राची की कमर पर गई और उसे याद आया कि ऋषि ने प्राची की कमर को पकड़ा हुआ था।

    तनिष्क गुस्से में बेहोश प्राची को अपने गोद में लेकर बाथरूम में चला गया।

    सुबह का वक़्त था। सिंघानिया मेन्शन में आज बहुत चहल-पहल थी, पर साथ ही टेंशन का माहौल भी बना हुआ था। सभी के चेहरे पर टेंशन साफ़ दिख रहा था।

    "मुझे तो समझ नहीं आ रहा है। प्राची कहाँ है? रात जाके सुबह हो गया, प्राची कहाँ है? अभी तक नहीं आया, कोई इंफॉर्मेशन नहीं मिल रहा है। उसकी फ़ोन नहीं लग रही है।" मिश्का टेंशन में अपने रूम में घूमते हुए कह रही थी। तभी उसके रूम में टीना आई। टीना को देख मिश्का जल्दी से उसके पास गई।

    "कुछ पता चला? प्राची कहाँ है? या फिर तुमने बात किया अंकल आंटी से? उन्होंने क्या कहा?"

    टीना उदास होकर बोली, "कोई फायदा नहीं। मैंने कल ही बात किया था मम्मी पापा से। पापा तो यह शादी नहीं करना चाहते हैं। पता नहीं मम्मी ज़िद क्यों कर रही हैं? उनको पता है दीदी की लाइफ़ बर्बाद हो जाएगी इस शादी से, फिर भी यह शादी कराना चाहते हैं, किसी भी कीमत पर। तो अब हमें कोई और रास्ता देखना होगा।"

    "और मेरे पास एक अच्छा प्लान है, जिससे यह शादी रुक जाएगा।" शौर्य अंदर आते हुए बोला। मिश्का और टीना शौर्य को देखते ही उनकी नज़र शौर्य के दाहिने हाथ पर गई, जहाँ पर पट्टी बंधी थी।

    "आपके हाथ में क्या हुआ है? कल तो ठीक थी।" टीना ने पूछा।

    "पता नहीं। कैसे रात को मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरे हाथ को जला रहा हो। पर पता नहीं, हाथ जलने के बाद भी मुझे होश नहीं आया। मैं सब समझ पा रहा था, पर उठ नहीं पा रहा था। तो मुझे लगा यह मेरा सपना है। पर सुबह जब उठा तो सच में मेरा हाथ जला हुआ था।" शौर्य ने अंदर आकर उन दोनों को देखकर कहा।

    "कहीं ऐसा तो नहीं ना कि इस घर में कोई भूत है और उसने ही आपके हाथ को जला दिया?" टीना ने थोड़ा डरते हुए कहा।

    "ऐसे स्टूपिड बातें करना बंद करो, टीना। हमें यह पता करना है कि सबसे पहले प्राची अभी तक घर क्यों नहीं आई? वह कहाँ है? कल पार्टी में गई, उसके बाद आई ही नहीं। आज संगीत है, मेहँदी है, पर वह कहाँ है?"

    "एक तरह से तो अच्छा ही है ना, वह नहीं आएगी तो संगीत मेहँदी नहीं होगा।" शौर्य ने बेड पर बैठते हुए कहा।

    "अच्छा तो है, पर वह है कहाँ? मम्मी पापा सीक्रेटली पुलिस को इन्फॉर्म करके उसे ढूँढ रहे हैं, पर किसी को अभी तक कोई पता नहीं मिला। उसकी यह तो सोचने वाली बात है, क्योंकि तनिष्क भैया तो कल रात को ही आ गए थे। सुबह मैंने उनको देखा तो अगर तनिष्क भैया आ गए हैं तो प्राची कहाँ है? कोई उनसे क्यों नहीं पूछता?"

    "क्या? तनिष्क भैया आ गए हैं?" मिश्का ने हैरान होते हुए पूछा।

    "और नहीं तो क्या? मैंने उनको सुबह ही देखा, अपने बालकनी में खड़े होकर सिगरेट पी रहे थे। अगर तनिष्क जी आ गए तो दीदी कहाँ है? हम में से किसी को भी पता ही नहीं है कि तनिष्क जी आ गए हैं। घर में हम सभी को तो यही लग रहा है कि वह दोनों एक साथ हैं। अंकल आंटी को बताना होगा। तनिष्क जी को पूछते ही पता चल जाएगा दीदी कहाँ है?" इतना कहकर टीना दौड़ते हुए रूम से बाहर निकल गई और उसके पीछे-पीछे मिश्का और शौर्य भी रूम से बाहर निकल गए।

    तनिष्क जो अपने रूम में आराम से बैठा था और लैपटॉप में कुछ देख रहा था, तभी उसके रूम में रुकमणी जी और आलोक जी आ गए।

    "तनिष्क, प्राची कहाँ है?" आलोक जी गुस्से में पूछने लगे।

    "डैड, मैं सुन सकता हूँ। इतने जोर से कहने की कोई ज़रूरत नहीं है।"

    "तनिष्क, मैंने जो पूछा, वह कहो। कहाँ है प्राची? कल तुम दोनों एक साथ पार्टी में गए थे ना? फिर तुम अकेले आए हो, तो वह कहाँ है?"

    "मॉम, मैं उसके साथ पार्टी में नहीं गया था। मैंने तो उसे बाहर ही छोड़ दिया था और उसे कहा था कि तुम घर चले जाओ। मैं तो शनाया के साथ गया था और फिर मुझे नहीं पता कि वह कहाँ है। मुझे लगा वह घर आ गई।" तनिष्क ने बेफ़िक्री से लैपटॉप बंद करके खड़े होकर उनको देखते हुए कहा।

    तनिष्क की बात सुनकर आलोक जी गुस्से में बोले, "अगर तुम्हें प्राची को पार्टी में ना ले जाकर किसी और के साथ जाना था, तो तुम उसे लेकर गई ही क्यों थे?"

    "आप दोनों गलत हैं। मैं उसे लेकर नहीं गया था। आप दोनों ने जबरदस्ती मुझे उसे ले जाने पर मजबूर कर दिया था। इसमें गलती आप दोनों का है और अब मुझे नहीं पता वह कहाँ है।"

    तनिष्क को ऐसे बातें करते देख रुकमणी जी की आँखों में आँसू आ गए।

    "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा तनिष्क ऐसा होगा। जिसे एक लड़की, जिससे उसकी शादी होने वाली है, वह पूरी रात भर घर नहीं आ रही है। सुबह का इतना वक़्त हो गया, अभी तक उसकी कोई खबर नहीं है और उसे कोई फ़र्क ही नहीं पड़ रहा है।"

    "मॉम, प्लीज आप रोना बंद कीजिए। मैं आपको हर्ट नहीं करना चाहता हूँ, बट आपको खुद भी पता है ना कि इस शादी में मेरा कोई इंटरेस्ट नहीं है, ना उस लड़की में। तो मैं क्यों उसे लेकर सोचूँ?"

    तनिष्क की बात सुनकर आलोक जी और रुकमणी जी के पास कोई शब्द नहीं था। वे दोनों मायूस होकर तनिष्क के रूम से बाहर चले गए। उनके जाने के बाद तनिष्क ने फिर से लैपटॉप ओपन किया। लैपटॉप स्क्रीन पर उसी होटल रूम का सीसीटीवी फ़ुटेज था जहाँ पर रात को ऋषि प्राची के साथ जबरदस्ती कर रहा था।

    क्रमशः

  • 19. Sun Mere Hamsafar - Chapter 19

    Words: 2336

    Estimated Reading Time: 15 min

    मैं शादी करूंगी तनिष्क जी चाहे आप मुझे अपना सारा प्रॉपर्टी क्यों ना दे दे

    अब आगे.....



    होटल में प्राची की नींद खुलती है तो वह बेड पर अकेली थी वह अपनी आंखें खोल कर चारों तरफ देखती है तो पहले उसे कुछ याद नहीं आती पर धीरे धीरे उसे सब कुछ याद आ जाती है


    कि कैसे और कल रात क्या-क्या हुआ जिसे याद करके उसकी आंखें एक बार फिर से आसू बहने लग जाती है प्राची उठने की कोशिश करती है पर तभी उसे अपने गार्दन से लेकर पीठ कमर पूरे बॉडी में दर्द महसूस होती है और वह फिर से बैड पर लेट जाती है प्राची को समझ नहीं आ रही थी ऐसे उसे दर्द क्यों हो रही है? क्योंकि कल जब वह बेहोश हो गई थी


    उसके बाद का उसे कुछ याद नहीं थी बस हल्का हल्का यह याद थी कि कोई उसके पीठ गार्दन और कमर को बेतहाशा रगड़ रहा था जिससे उसे बहुत दर्द हो रही थी प्राची किसी तरह बैड से उठ बैठती है और पीछे टेक लगा कर बैठ जाती है फिर खुद को देखती है तो उसके बॉडी पर एक भी कपड़ा नहीं था

    और उसके ऊपर सिर्फ एक ब्लैंकेट ओढ़े हुए थे प्राची चारों ओर देखती है तो साइड में ही उसे एक ड्रेस दिखाई देती है जो एक ब्लैक कलर के फूल स्लीब लॉन्ग ड्रेस थी और साथ में एक सिंपल सी किटन हिल भी थी प्राची किसी तरह बेड से उतरती है और उस ड्रेस के पास जाकर उस ड्रेस को लेकर वॉशरूम में चली जाती है वॉशरूम में जाके प्राची खुद को देखती है


    तो उसके गर्दन से लेकर कमर पीठ हर जगह पर बुरी तरह से लाल हो चुके थे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके स्कीन को ही निकालना चाह रहा था प्राची चुपचाप वह फूल स्लीब ड्रेस पहन लेती है और बाहर आकर हिल पहन के चारों तरफ अपने फोन को ढूंढने लगती है तो उसे साइड टेबल पर अपनी फोन मिल जाती है फिर बह सीधा उस होटल से बाहर निकल जाती है और एक टैक्स में बेठ मेंशन की ओर चली जाती हैवही मिशन में एक कमरे में महेश जी और राधिका जी बैठे थे

    उन दोनों के चेहरे पर टेंशन साफ दिखाई दे रहे थे और दोनों ही कमरे में इधर-उधर घूम रहे थे यह लड़की कहां है? पूरी रात क्यों नहीं आई रात भर ना जाने कहां रंगरेलियां मना रही है ? बदतमीज लड़की" राधिका जी गुस्से में बार- बार आते हैं" राधिका बच्ची पूरी रात चर नहीं आई सभी उसे ढूंढ रहे हैं और तुम यह कैसी बातें कर रहे हो ?"

    महेश जी राधिका जी को देख गुस्से में कहते हैं" आप क्यों गुस्सा कर रहे हैं? तो मैं क्या कहूं? घर नहीं आई है तो कहां है वह ?" राधिका जी ने आंखें दिखा कर कहा" वह कोई मुसीबत में पड़ी होगी रात का वक्त है और वह भी मुंबई किस हालत में है मेरी बच्ची और तुम तुम कभी उसके आसली मां हो ही नहीं पाओगे" महेश जी गुस्से में कह कर रूम से निकल जाते हैं"


    कभी उसके रियल मदर हो ही नहीं पाओगे अगर उसकी रियल मदर ना हो पाती ना तो अब तक उसे पता चल चुका होता किमैं उसके स्टेप मदर हूं अब तक तो सही है पता नहीं चलने दिया में फिर भी कहता है रियल मदर बान नहीं पाओगे' महेश जी को जाते देख राधिका जी पीछे से कहते हैं पर महेश जी उनके बातों को इग्नोर करके बाहर चले जाते हैं' इस लड़की की इस कांड के बाद में शादी ना हुआ तो अगर यह शादी रुक जाए ना तब तो कांड हो जानी है किसी भी हाल में यह सारी होना ही होगा चाहे कुछ भी हो जाए राधिका जी कुछ सोचते हुए उसे कहते हैं हॉल में भी सभी टेंशन में थे


    और इंस्पेक्टर भी आया हुआ था जिनसे आलोक जी और रूकमणी जी बातें कर रहे थे पास में ही शौर्य मिश्का और टीना खड़ी थी वह लोग भी टेंशन में बड़ों की बातें सुन रही थी महेश जी ऊपर से चलते हुए आते हैं महेश जी को देख सभी उनको देखने लगते हैं तभी मेन डोर से भी किसी के आने की आहट सुनाई देती है सभी एक साथ डोर की तरफ देखते हैं जहां पर प्राची थी प्राची को देख महेश जी टीना शौर्य और मिश्का भागते हुए

    उसके पास जाते हैं महेश जी अपने बच्ची को गले लगा कर उसके सिर को सहलाते हुए "कहां थी पूरी रात तू? तू ठीक तो है ना ? और तेरा फोन ऑफ क्यों था ? टेंशन होती है ना हमें ऐसा कोई करता है भला" पापा मैं ठीक हूं" प्राची भी अपने पापा को हक करके कहती है" पर प्राची तू रात भर से कहां और तेरी ड्रेस चेंज कैसे हो गए तूने तो शायद कोई और ड्रेस पहनी थी है ना" शौर्य प्राची को ऊपर से नीचे तक देखते हुए पूछता है प्राची और महेश जी एक दूसरे से अलग होते हैं


    तो टीना प्राची कोहग कर लेती है "आप रात भर कहां थे? पता है हम सबको कितना टेंशन हुआ मैं वह मैं" प्राची को समझ नहीं आ रही थी वह अब क्या कहें ?? तभी उसके पास पुलिस इंस्पेक्टर आता है और प्राची को देखते हुए "मिस्टर एंड मिसेस सिंघानिया प्राची बेटी तो आ गई तो अब में चलता हूं इंस्पेक्टर की बात सुनकर आलोक जी और रुक्मणी जी अपना सिर हां में हिलाते हैं अरे इंस्पेक्टर प्राची को एक स्माइल पास करके वहां से चला जाता है



    रुकमणी जी और आलोक जी एक नजर प्राची को देखते हैं और रुकणी जी कहते हैं "प्राची बेटा तुम पहले कमरे में जाओ रेस्ट कर लो मैं तुम्हारे लिए ब्रेकफास्ट भेजता हूं तुम रूम में जाओ अभी तुम कहां थी वह सब बाद में बताना पहले रेस्ट करो और यह संगीत मेहंदी सब कुछ बंद" रुकमणी जी की बात सुनकर कोई कुछ नहीं कहता और प्राची भी वहां से सीधा अपने रूम में चली जाती हैं सभी प्राची को जाते हुए देखने लगते हैं तभी रूपमणी जी की नजर ऊपर तनिष्क पर जाता है


    जो ऊपर से सब कुछ देख रहा था तनिष्क को देख रुकमणी जी नीचे सब को देखते हुए कहते हैं "अब यह शादी परसों नहीं होगी" रुकमणी जी के बात सुनकर आलोक जी को कुछ समझ नहीं आता पर बाकी सब अंदर ही अंदर खुश हो जाते हैं पर बाहर नहीं दिखाते "परसों यह शादी नहीं होगी मतलब शादी कैंसल" आलोक जी कंफ्यूज हो कर कहते हैं" नहीं जी शादी कैंसिल नहीं होगी अब यह शादी कल ही होगी सभी को इन्फॉर्म कर दीजिए कल है शादी" रुकमणी जी की बात सुनकर टिना शौर्य और मिश्रा के चेहरे पर टेंशन साफ झलक ने लगत 4 है


    और वह तीनो एक दूसरे को देखते हैंवही ऊपर तनिष्क जो अपनी मॉम की बात सुनता है तो वह गुस्से में वहां से चला जाता है प्राची अपने रूम में जाती है और अपने ड्रेस को हल्के से सरकाकर के अपने गार्दन और पीठ को देखने लगती है जो पूरी तरह से लाल हो कर रखी थी उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा ?"

    प्राची खुद से ही सवाल करती है प्राची इतना कहती है तभी उसके रूम का डोर ओपन होता है और जब प्राची उस तरफ देखती है तो वहां पर राधिका जी थी जो घूर के उसे देख रही थी राधिका जी को देखते ही प्राची जल्दी से अपनी ड्रेस को ठीक कर लेती है पर राधिका जी ने उसके बॉडी में लाल निशान देख लिए थे ..राधिका जी गुस्से में प्राची के पास आते हैं



    और उसके बाजू पकड़ प्राची को घूरते हुए दांत पीसकर कहते हैं "कल पूरी रात कहां थी ? किसके साथ रंगरेलियां मना कर आयी है? बड़ा कहती है तनिक जी से प्यार करती हूं बह तो कल रात को ही घर आ गया तो तू कहां थी? अच्छे से सुन चाहे दुनिया इधर से उधर हो जाए चाहे तू मर ही क्यों ना जाए तुझे यह शादी करनी ही होगी अगर यह शादी टूटी तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा तेरे लिए" अपनी मां की बात सुनकर प्राची अपनी नजर नीचे कर लेती है उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी कि अचानक उसकी मां जो उसे इतना प्यार करती थी उनको हो क्या गयी है वह ऐसे उसको फॉर्स क्यों कर रही है इस शादी को लेकर ??


    प्राची के आंखों में आसू आ गयी थी" मम्मा आप ऐसेबात क्यों कर रहे हैं मुझसे? मैंने क्या किया है? कल रात तो मैं कल रात तो तू क्या?" कल रात में प्राची रोते हुए इतना कह रही थी तभी पीछे से एक आवाज आती है' प्राची बेटा तुम्हारी तबीयत कैसी है अब ?' इस आवाज को सून प्राची और राधिका जी जब डोर की तरफ देखते हैं तो रुकमणी जी थे और उनके हाथ में खाने की ट्रे थी रुकमणी जी अंदर आते है और टेबल पर खाने के ट्रे को रख के प्राची के पास आकर उसके सिर को सहलाते हुए


    "रेस्ट करने को कहा ना तो तुम यहां पर खड़े क्यों हो ?" रुकमणी जी ने प्यार से कहा रुकमणी जी की बात सुनकर प्राची हल्का सा मुस्कुरा कर "मैं ठीक हूं आंटी अब मुझे आंटी नहीं मॉम कहना क्योंकि कल तुम हमारे घर के बहू बनने वाली हो" रुकमणी जी ने मुस्कुरा कर कहा रुकमणी जी की बात सुनकर प्राची को कुछ समझ नहीं आती साथ में राधिका जी को भी राधिका जी पूछते हैं "आप यह क्या कह रहे हैं?"


    में यही कह रही हूं कि अब शादी कल होगी" रुकमणी जी ने मुस्कुराकर राधिका जी को देखते हुए कहा रुकमणी जी की बात सुनकर राधिका जी के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई और वह वहां से बाहर चले गए उनके जाने के बाद रुकमणी जी प्राची को ले जाकर सौफे पर बिठा देते हैं और खुद भी उसके पास बैठ के प्राची को देखते हुए "मैं तुमसे यह नहीं पूहूंगी कि कल रात तुम कहां थे ? पूरी रात तुम घर क्यों नहीं आए ?


    सुबह इतने लेट क्यों आए ? कुछ नहीं पूछेंगी क्योंकि मुझे पता है मैंने जिस लड़की को अपने तनिष्क के लिए चुना है वहकभी गलत नहीं हो सकती और में यह भी जानती हूं कि

    9:48 AM

    मेरा बेटा क्या क्या कर सकता है' रुकमणी जी की बात सुनकर प्राची की आंखों में आंसू आ जाते हैं तो रुकमणी जिसकी आंखों से आंसू पहुंचकर कहते हैं "सॉरी बेटा मुझे पता है तुम्हें क्या-क्या सहना पड़ रहा है पर तुम्हें तो पता है ना मैं मजबूर हूं अब अगर तुम्हें शादी नहीं करोगे मैं यह शादी करूंगी आंटी जी आप चिंता मत करना कुछ भी हो जाए मैं यह शादी करूंगी प्राची की बात सुनकर रुकमणी जी की आंखें नम हो जाते हैं


    और वह प्राची के सिर को से लाकर वहां से निकल जाते हैं उनके जाने के बाद प्राची एक नजर खाने को देखती है और फिर खाने को वैसे ही छोड़ कर चुपचाप बैठ पर जाकर लेट जाती है और एक टक खिड़की से बाहर देखने लगती है प्राची चुपचाप बाहर देख रही थी तभी उसकी रूम का डोर फिर से खुलता है पर प्राची उस तरफ नहीं देखती क्योंकि उसे लगती है


    शायद उसके मम्मी पापा या टिया शौर्य मिश्रा आए होंगे प्राची एक टक बाहर की और देख ही रही थी तभी कोई उसे हाथ से पकड़ खींच के बेड से नीचे उतरता है ऐसा होते ही प्राची चौक जाती है और अपने सामने देखती है तो एकदम से डर से कांप जाती है और उसकी नजर नीचे झुक जाती है उसके सामने तनिष्क गुस्से में आग बबूला होकर खड़ा था तनिष्क प्राची के दोनों बाजुओं को कस के पकड़ उसे अपने और खींचकर गुस्से में दांत पीसते हुए कहता है..


    "मैं तुम जैसे करेक्टरलेस लड़की से शादी नहीं करूंगा समझे तुम कितना पैसा चाहिए तुम्हें पैसों केलिए सब कर रहे हो ना जितना पैसा चाहिए में तुम्हें दूंगा तुम बस उन पैसों को लेकर यहां से दूर चली जाओ तनिष्क की हार एक एक बाते प्राची के दिल में किसी खंजर की तरह बार कर रही थी वह तनिष्क को देखती है जो गुस्से में उसे ही देख रहा था मैं शादी करूंगी तनिष्क जी चाहे आप मुझे अपना सारा प्रॉपर्टी क्यों ना दे दे और मैं कैरेक्टर लेस लड़की नहीं हूं मैं'


    प्राची की बात सुनकर तनिष्क प्राची को छोड़ देता है और प्राची को देख हंसने लगता है जैसे वह प्राची का मजाक उड़ा रहा हो यह बात तुम कह रहे हो जिसने जब में नशे में था तो मेरे रूम में जाकर मेरे साथ इंटिमट हुई और कल रात मेरे फ्रेंड को भी सिड्यूस कर रही थी मैंने आपको कहा ना आपका फ्रेंड झूठ कह रहा है मैंने उनको सिड्यूस नहीं किया वह मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे थे और उस रात मैं आपके रूम में गई थी पर में आपके साथ इंटिमेट नहीं होना चाहती थी .

    मैंने आपको पहले रोकी थी पर आपने मुझे फोर्स करके मेरे साथ इंटिमट हुये थे पर फिर भी मान लेती हूं गलती मेरी हैं पर फिर उसके बाद जब आप मेरे ही रूम में आकर मेरे साथ इंटिमेट हुए थे उसका क्या ?? आपके भी तो गर्लफ्रेंड है ना तो एक गर्लफ्रेंड के होते हुए एक दूसरी लड़की के साथ होशो हवास में जब आप इंटिमेट हुए थे उसका क्या ?? सारी गलती क्या लड़कियों की होती है ?? आप लोग लड़के हैं बड़े लोग हैं


    इसलिए आपके कोई कुछ नहीं कहेगा आपकी कोई गलती नहीं है" प्राची जो तनिष्क से बहुत ज्यादा डर रही थी पर अपने कैरेक्टरपर सवाल उठने पर वह हिम्मत करके अपने डर को पीछे रखकर यह सब कह देती है पर कहने के बाद जब प्राची तनिष्क के चेहरे को देखती है तो डर से कांप जाती है उसके पेर धरथराने लगती हैं क्योंकि तनिष्क का चेहरा गुस्से से लाल हो रखा था और वह प्राची के और ही बढ़ रहा था तनिष्क को गुस्से में अपने और बढ़ते देख प्राची अपनी सिर झुका लेती है और पीछे की ओर जाने लगती है To be continue❤❤❤❤❤❤❤❤

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  • 20. Sun Mere Hamsafar - Chapter 20

    Words: 2227

    Estimated Reading Time: 14 min

    अब आगे


    पीछे जाते जाते प्राची पीछे की वॉलों से लग गई थी और तनिष्क बिल्कुल उसके पास आ गया था और उसे ही गुस्से में घूरते हुए प्राची के और करीब जा रहा था तनिष्क प्राची के बिल्कुल करीब आ गया था और वह कुछ करता उससे पहले रूम के बाहर से आवाज आता है "प्राची क्या मैं अंदर आ जाऊं ?"



    यह आवाज मिश्का की थी मिश्का की आवाज सुनते ही प्राची सिर ऊपर करके तनिष्क को देखती है जो अब तक उससे दूर जा चुका था तनिष्क चलते हुए डोर के साइड में छुप जाता है जिससे प्राची समझ जाती है और वह मिश्का को अंदर आने को कहती है मिश्का के अंदर आते ही पीछे से तनिष्क रूम से बाहर चला जाता है


    तनिष्क के बाहर जाते हीं प्राची एक गहरी सांस छोड़ती है मिश्का जिसने अभी अपने चेहरे को नीचे झुकायी हुई थी वह यह सब कुछ भी नहीं देख पाती" मुझे माफ कर देना प्राची मुझे अब एहसास हो रही है मैंने कितनी बड़ी गलती की है और प्लीज तू इस शादी को मत कर चाहे तू मुझसे अपना फ्रेंडशिप तोड़ भी दे जो तूने तोड़ दिया है पर प्लीज और प्लीज तुझे किसने कहा मैंने अपनी फ्रेंडशिप तोड़ दी है?



    आंखें छोटी करके प्राची पूछती है प्राची की बात सुनकर मिश्का अपने चेहरे को ऊपर करके प्राची को देखती है प्राची के चेहरे को देख कर पता चल रही थी वह कुछ देर पहले तक भी रो रही थी जिस वजह से उसकी चेहरा बिल्कुल लाल हो गयी थी और उसकी आंखें भी सूजी हुई थी पर मेश्का प्राची को इस बारे में कुछ नहीं कहती" मतलब क्या है तेरी बातों का ?


    तू नहीं तो कहां के " इडियट तभी मैं गुस्से में थी और मैं गुस्से में अगर यह कहूंगी कि तू मर जा तो क्या तू मर जाएगी पागल" इतना कहते हुए प्राची मिश्का के सिर पर चपत लगाती है प्राची के ऐसा करते ही मिश्का के आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह प्राची को कस के गले लगा लेती है और कहती है "


    तुझे पता है मैं तो टूट गई थी यह सोच कर के मेरी एक गलती की वजह से मैंने तुझे खो दिया" हमारी फ्रेंडशिप पत्तों की नहीं बनी है जो एक हल्के से हवा से ही टूट जाएगी हमारी फ्रेंडशिप किसी पत्थर के महल से भी ज्यादा स्ट्रांग है जो हजारों हमलो से भी ना टूटे" प्राची ने भी मिश्का को गले लगा कर कहा वह दोनों एक दूसरे को हक करके खड़े ही थे कि इतने में ही टिना उस रूम में आ जाती है और उन दोनों को ऐसे एक दूसरे को गले लगाये देख वह भी मुस्कुराते हुए उन दोनों के पास जाकर उन दोनों को गले लगा लेती है


    जब उन दोनों को टीना के टच का एहसास होती है तो वह दोनों एक दूसरे से अलग होकर टीना को भी अपने साथ जोड़ लेते हँ कुछ देर एक दूसरे को हग करके रहने के बाद प्राची कहती है 'आज रात ना तुम दोनों मेरे साथ ही रुक जाना हम तीनों बहुत मस्ती करेंगे रात को "


    प्राची को ऐसे मुस्कुरा कर बातें करते देख मिश्का और टीना को बहुत ही अच्छा लग रहा था उनके दिल में एक सुकून सा बस रही थी पर उनको यह भी पता थी प्राची बस ऊपर ऊपर ही इतनी खुश दिखा रही है अंदर से वह बहुत ज्यादा टूट चुकी है दूखी हैं'


    दी प्लीज आप क्यों ऐसा कर रहे हैं अपने साथ ? ऐसा भी क्या हो गया? आप यह जानते हुए भी के तनिष्क जी आपसे प्यार नहीं करते आप उनसे शादी करना चाहते हैं क्यों?"टिना की बाते सुनकर प्राची उन दोनों से नजरे चुरा कर वहां से वॉशरूम की ओर चली जाती है प्राची के जाने के बाद मिश्का कहती हैं "



    प्राची पिछले 15 सालों से भैया से प्यार करती है पर भैया नहीं यह बह अब समझ क्यों नहीं रही है? पहले तो शादि तोडना चाहती थी पर अब शादी करना चाहती हैं" पर हम यह शादी नहीं होने देंगे टीना मिश्का को देखते हुए कहती है हां हम यह शादी कभी नहीं होने देंगे और हमारे पास अब ज्यादा वक्त नहीं है सिर्फ कल का टाइम में और कल प्राची के मंडप में जाने से पहले ही हमें हमारे प्लान के मुताबिक काम करना होगा"

    मिश्का की बात सुनकर टीना अपनी सिर हां हिलाती है तभी वॉशरूम का डोर ओपन होती है और प्राची बाहर आती है प्राधी ने इस वक्त फुल स्लीव टॉप और प्लाजो पहनी हुई थी प्राची को देख टिना मुंह बना कर कहती है "इतनी गर्मी में यह क्या पहना है आपने? गर्मी बाहर है अंदर नहीं प्राची बैड के और जाते हुए कहती है' हा पर टीना और कुछ कहती थी पर मिश्का उसे रोक देती है और फिर दोनों जाकर प्राची के पास बैठ जाते है तनिष्क अपने रूम में था और वह किसी को लगातार कॉल पर ट्राई किए जा रहा था पर उधर से कॉल रिसीव नहीं कर रहा था जिससे तनिष्क जो पहले से गुस्से में था


    वह गुस्से में अपने फोन को पटकने हीं वाला था पर तभी उसके फोन में उसी नंबर से कॉल आता है तनिष्क जल्दी से कॉल को रिसीव करते गुस्से में कहता है "अगर तुम्हें जीना नहीं है तो तुम मुझे सीधे-सीधे बता सकते हो ऐसे मुझे गुस्सा दिला कर अपने लिए इतने बुरे मौत ना मांगते तो भी चलता तनिष्क की बात सुन उधर से एक आदमी की डरी हुई आवाज सुनाई देती है


    "स सॉरी स सॉरी बॉस वह मैं वॉशरूम में था इस वजह से आपका कॉल रिसीव नहीं कर पाया आई एम सो सॉरी प्लीज लास्ट बार आप मुझे माफ कर दीजिए यह सब छोड़ो मैंने जो काम कहा वह किया तुमने कहा है वह तनिष्क के पूछने पर उसका असिस्टेंट जो इस वक्त अपने पूरे बॉडी पर साबुन लगाए हुए भीगे हुए ही वॉशरूम से बाहर आ गया था और बह विल्कुल नेकेड था वह कहता है "हां हां आपका काम हो गया है और वह अपने जहां कहा था वही है आप चाहे तो एक बार चेक कर सकते है और उसका खातिरदारी कैसा हो रहा है ?


    खातिरदारी आपने जैसा कहा था वैसा ही याद रखना उसके खातिरदारी में कमी नहीं आना चाहिए अगर उसके खातिरदारी में थोड़ा भी कमी आया ना तो मैं खुद तुम्हारा खातिरदारी करूंगा तनिष्क की बात सुनकर उसका असिस्टेंट डर से कांपने लगता है और जल्दी से कहता है "नहीं नहीं बॉस हम उसका खातिरदारी बहुत अच्छे से कर रहे हैं और में अभी जा रहा हूं और मैं खु खुद उसका खातिरदारी करूंगा याद रहे वह मारना नहीं चाहिए बह मरा तो तुम लोग जान से जाओगे"



    इतना कहकर तनिष्क कॉल कट कर देता है और बालकनी में जाकर आसमान में चांद को देखने लगता है बही तनिष्क का असिस्टेंट अंकीत कॉल काट होते ही एट गहरी सांस छोडती हैं और कहती हैं "बॉस सचमें हार्टलेस हैं नहीं तो कोई अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ ऐसा कैसे कर साकते हैं!" इतना कहते ही अंकीत के आंखों में साबून चला जाता हैं जिससे बह भागते हुए बॉशरूम में चला जाता हैं तनिष्क आसमान में चांद को देख ही रहा था


    तभी डोर को ओपन करके कोई अंदर आ जाता है" शौर्य तुझे मैंने कितनी बार कहा है मेरे रूम में ऐसे बिना नॉक किए मत आया कर" तनिष्क ने वैसे ही सामने चांद को देखते हुए सर्द आवाज में कहा" भैया आप ऐसा कैसे कर सकते हैं अपने छोटे भाई के साथ ?आप कोई अनजान थोड़ी है जो में नौकर के आऊंगा इतना कहते हुए शौर्य तनिष्क के पास चला जाता है और तनिष्क को देखते हुए "भैया पहले आप यह बताइए कल रात आप मेरे रूम में गए थे "हां गया था


    " तनिष्क वैसे ही ऊपर चांद को देखते हुए बिना भाब के सर्द आवाज में कहा " मतलब आपने ही मेरा हाथ जलाया है" शौर्य ने हैरान होकर पूछा "हां" तनिष्क ने शौर्य को देखते हुए कहा तनिष्क की बात सुनकर शौर्य और ज्यादा हैरान हो गया और उसकी आंखें इतना बड़ा हो गया जैसे उसके आंखें अभी बाहर को आ जाएगा "क्यों भैया ? मैंने क्या कर दिया? आपने अपने छोटे भाई का हाथ जला दिया आप इतना ज्यादा निर्दई कैसे हो सकते हैं? और वह भी तब जब अपके छोटे भाई सो रहे थे मुझे मम्मी को बताना होगा उनका बेटा सच में डेविल बन गया है उनके बेटे के अंदर दिल मर गया हैं"


    शौर्य यह सब नौटंकी करते हुए कह रहा था और तनिष्क उसके नौटंकी को इग्नोर करके उसे नजरें हटा के सामने देखते हुए कहता है "तुझे पता है मेरे चीजों को कोई छूये यह मुझे पसंद नहीं है और जो भी मेरे चीजों को छूयेगा उसे उसका कीमत चुकाना पड़ेगा तुझे भी परा सिंपल "शौर्य कुछ सोचते हुए "पर भैया मैंने आपके कौन से चीज को छुआ ?


    कल तो मैं आपके रूम में भी नहीं आया था और ना मैं आपके ऑफिस में गया था जो आपके कोई कीमती चीज टच करूंगा" शौर्य की बात सुनकर तनिष्क कुछ नहीं कहता बस उसे इग्नोर कर के सामने देखने लगता है जिसे देख शौर्य अपना मुंह बना लेता है अगले दिन सुबह का वक्त प्राची सोकर उठती है तो उसे अपने आसपास टीना और मिश्का नहीं दिखती जिससे वह थोड़ी हैरान तो होती है पर वह इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देती और उठकर बेड पर बैठ जाती है और जैसे ही सामने देखती है तो उसे वहां पर एक बॉक्स दिखता है

    प्राची उस बॉक्स के पास जाती है और उस बॉक्स को ओपन करके देखती है तो उसकी आंखें बड़ी बड़ी हो जाती है क्योंकि उस बॉक्स में वही लहंगा थी जिस लहंगे को प्राची ने मॉल में पसंद की थी "यह लहंगा ! यह यहां कैसे आया? यह लहंगा तो शनाया जी ने पसंद की थी ना !"इतना सोचते हुए कृतिका उस लहंगे को अपने हाथ में लेती है


    तभी रूम में मिश्का और टीना आ जाती है जो हल्दी के लिए प्राची को तैयार करने ही आयी थी प्राची के हाथ में लहंगा को देखकर टीना खुश होते हुए कहती है "वाओ कितना खूबसूरत लहंगा है और इसमें तो यह शायद डायमंड भी लगी हुई है ना वाह यह तो बहुत महंगा है और कितना ब्यूटीफुल भी" टीना की बात सुनकर प्राची टीना को देखती है और मिश्का प्राची को देखते हुए "प्राची हमने तो शॉपिंग मॉल से कुछ भी नहीं लाया था तो यह लहंगा तेरे पास कहां से आयी इस लहंगे को मैंने शायद मॉल में देखी थी तूने कब


    ""यार मैंने इसे नहीं लिया मुझे यह पसंद आई थी पर यह तो कोई और ले गयी थी तो पर यह मेरे पास कैसे आई ?" प्राची के इतना कहते ही शौर्य अंदर आते हुए हो कहा "सायेद मम्मी ने तेरे लिए खरीद लाया हो वैसे भी वह तेरे लिए जोड़ा भी ले आयी है सब कुछ वही कर रहे हैं और जब उन्होंने देखा कि हम खाली हाथ आ गए तो शायद उन्होंने ही हल्दी के लिए तेरे पसंदीदा लहंगा लायी हैं शौर्य की बात सुनकर प्राची खुद से कहती है


    "पर यह कैसे हो सकती है? यह लहंगा तो इंडिया में बस एक ही हैं जो शनाया जी ने ले ली थी तो यह मेरे पास कैसे आई ?" प्राची उस लहंगे को अपने हाथ में पकड़ कर यह सब सोच रही थी तभी राधिका जी और रुकमणी जी अंदर आते हैं और उन तीनों को देखते हुए "तुम तीनों अभी तक तैयार नहीं हुए हल्दी के रश्में भी तो है ना जल्दी तैयार हो जाओ और नीचे आ जाओ


    " इतना कहकर रुकमणी जी नीचे चले जाते हैं रुकमणी जी के जाते ही राधिका जी प्राची को आंखें दिखाती है जैसे कह रही हो "कोई भी चालाकी नहीं" और फिर वह भी वहां से चले जाते हैंउन दोनों के जाने के बाद शौर्य भी वहां से जाते हुए "ठीक है गर्ल्स तुम तीनों तैयार हो जाओ मुझे भी तैयार होना है"" पहले हम तुझे तैयार कर देते हैं फिर हम तैयार हो जाएंगे"


    मिश्का कहती है फिर कुछ देर बाद प्राची फ्रेस होकार आती हैं तिनों ब्रेकफास्ट करती हैं और फिर टीना और मिश्क मिलकर प्राची को तैयार करने लगती है तनिष्क वॉशरूम से बहार आता हैं इसbबक्त बस एक ब्लेक बाचरीब पहना हुआ था और उसके बालों से आभी भी पानी टपक रहा था वह बहुत सेक्सी लग रहा था तनिष्क मुडके चैंजींग रूम की और जाने लगता है तभी उसके फोन में किसीका कॉल आता है तनिष्क चलते हुए टेबेल के पास आके आपने फोन को देखता हैं


    और कॉल रिसिभ करता हैं तनिष्क के कॉल रिसिभ करते ही उधर से कुछ कहता हैं' ओके कल का रात के फ्लाइट में मैं आ रहा हूं' इतना कहकर तनिष्क कॉल कट कर देता हैं और फिर वॉशरूम की और जाने लगता हैं तनिष्क यह तुम्हारे लिये हैं इसे पहने निचे आ जाओ हल्दि कि रस्मे जल्दी स्टार्ट होगी मॉम यह क्या हैं ? मैं यह नहीं पहन सकता और शादि होगा बास शादि करा दिजीये और मॉम आप अपने प्रोमेस तोड रहे हैं

    मैं अपनी प्रोमेंस नहीं तोड रही तुझसे मैने जो प्रैमेंस किया मैं बह निभाउंगा किसीको पाता नहीं चलेगा तुम्हारा वाइफ कोन हैं अब तुम जल्दी इसे पहनके नीचे आ जाओ इतना कहकर रूकमणी जी रूम से बहार चले जाते हैं और तनिष्क भी उस बॉक्स को लेकर क्लोजेट रूम में चला जाता हैंTo be continue

    Crush_Queen😘🙈💞

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