"Billionaire's Ordinary Wifey" Siya Yadav ek seedhi-saadhi ladki hai, jo apni simple zindagi mein khush rehna chahti hai. Lekin jab takdir uska rasta Siddharth Kapoor se milati hai—jo ek arrogant, cold-hearted billionaire hai—uski duniya hi ba... "Billionaire's Ordinary Wifey" Siya Yadav ek seedhi-saadhi ladki hai, jo apni simple zindagi mein khush rehna chahti hai. Lekin jab takdir uska rasta Siddharth Kapoor se milati hai—jo ek arrogant, cold-hearted billionaire hai—uski duniya hi badal jati hai. Siddharth sirf apni family aur business ko maayne deta hai, aur uske liye emotions sirf ek weakness hain. Siya ki masoomiyat aur uska pyar bhari dil uske liye ek ajeeb paheli hai, jise woh samajh nahi pata. Ek anjaani majboori Siya ko Siddharth ki zindagi mein le aati hai. Uska simple aur pyara dil kya Siddharth ke sakhth aur arrogant dil ko pighla paayega? Ya phir Siya bhi sirf ek aur mohra ban kar reh jayegi us billionaire ki duniya mein? Pyar, takraar aur emotions se bhari yeh kahani aapka dil jeet legi!
Page 1 of 1
🅲🅷🅰🆁🅰🅲🆃🅴🆁 🅸🅽🆃🆁🅾🅳🆄🅲🆃🅸🅾🅽 --- 🄼🄰🄸🄽 🄻🄴🄰🄳 🔷 सिद्धार्थ कपूर (The Ruthless Business Tycoon) Age: 26 years Position: CEO of Kapoor Industries Personality: Cold-hearted, arrogant, and merciless Loves: His family above all Dislikes: Two-faced people and pretentious women Habits: Enjoys spending nights with different women but never commits सिद्धार्थ कपूर एक ऐसा शख्स है, जिसे सिर्फ अपने परिवार की परवाह है। वह हर रिश्ते को अपनी शर्तों पर निभाता है और अपनी दुनिया में किसी बाहरी को जगह नहीं देता। पैसों और पॉवर का दीवाना नहीं, लेकिन जो चाहे, वह उसे हासिल करना जानता है। उसके लिए प्यार और इमोशंस कोई मायने नहीं रखते—बस एक खेल की तरह हैं। --- 🄵🄴🄼🄰🄻🄴 🄻🄴🄰🄳 🔷 सिया यादव (The Innocent Yet Strong-Hearted Girl) Age: 22 years Education: Recently completed her graduation Personality: Kind-hearted, sweet, and caring Loves: Only her parents (both deceased) Hates: Any form of cruelty and injustice Special Traits: Even after her stepmother and stepsister’s mistreatment, she holds no grudges against them सिया यादव एक मासूम लेकिन आत्मनिर्भर लड़की है। हालातों ने उसे तोड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया। अपने माता-पिता की मौत के बाद, वह अकेली रह गई, लेकिन उसने अपनी अच्छाई नहीं छोड़ी। वह हर किसी की मदद करने में विश्वास रखती है, लेकिन दुनिया उसे उसकी मासूमियत के लिए कमजोर समझती है। --- 🆂🆃🅴🅿 🅼🅾🆃🅷🅴🆁 🅾🅵 🆂🅸🆈🅰 🔷 रीमा यादव (The Power-Hungry Businesswoman) Age: 45 years Position: CEO of Yadav Enterprises Personality: Arrogant, rude, and materialistic Loves: Only her daughter Maya, money, status, and beauty Hates: Siya and everything related to her रीमा यादव एक शक्तिशाली और निर्दयी महिला है, जिसे सिर्फ अपनी बेटी और अपनी दौलत से प्यार है। अपने पति की मौत के बाद, उसने यादव एंटरप्राइजेज को अपने कंट्रोल में लिया और अपनी ताकत बढ़ाने में लगी रही। उसके लिए सिया की कोई कीमत नहीं है; बल्कि वह चाहती है कि सिया उसकी जिंदगी से हमेशा के लिए खत्म हो जाए। --- 🆂🆃🅴🅿 🆂🅸🆂🆃🅴🆁 🅾🅵 🆂🅸🆈🅰 🔷 माया यादव (The Jealous and Manipulative Sister) Age: 21 years Education: Final year college student Personality: Arrogant, materialistic, and cunning Loves: Only her mother, wealth, status, and the attention of rich, handsome men Hates: Siya and wants to take everything from her माया यादव अपनी मां की परछाई है। वह खूबसूरती और चतुराई से खेलना जानती है। अपनी मां की तरह, उसके लिए दुनिया में पैसा और स्टेटस ही सबसे ऊपर हैं। वह सिया से नफरत करती है और उसकी हर खुशी छीन लेना चाहती है। उसके लिए सिया का अस्तित्व ही सबसे बड़ा खतरा है, जिसे वह मिटाना चाहती है। --- 🔥 Storyline Essence 🔥 एक क्रूर बिजनेसमैन, एक मासूम लेकिन मजबूत लड़की, एक निर्दयी सौतेली मां और एक जलन से भरी सौतेली बहन—यह कहानी सिर्फ रिश्तों की नहीं, बल्कि ताकत, बदले और प्यार के खेल की है। क्या सिया इस दुनिया में अपनी पहचान बना पाएगी? क्या सिद्धार्थ कपूर का बर्फ सा दिल कभी पिघलेगा? या फिर यह सिर्फ एक और खतरनाक खेल है, जिसमें कोई भी जीत सकता है और कोई भी हार सकता है? To be continued...
Chapter 2: सौदेबाज़ी रीमा का कमरा रीमा यादव, सिया की सौतेली माँ, अपने कमरे में बैठी फोन पर किसी से बात कर रही थी। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी संतुष्टि थी, मानो कोई बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा हो। "डोंट वरी, मिस्टर शुक्ला। आपको जो चाहिए, वो आपको मिल जाएगा।" उसने अपनी आवाज़ में हल्की सी मिठास घोलते हुए कहा। "आई होप कि आप हमारी डील को नहीं भूलेंगे?" फोन के दूसरी तरफ़ मिस्टर शुक्ला थे—42 वर्षीय बिजनेसमैन और शुक्ला इंडस्ट्रीज़ के ओनर। उन्होंने यादव एंटरप्राइज़ेज़ को एक बड़ा प्रोजेक्ट देने का वादा किया था... बस एक शर्त पर—सिया के बदले! मिस्टर शुक्ला: "आप फ़िक्र मत कीजिए, मिस रीमा! जैसे ही सिया मुझे मिल जाएगी, वैसे ही वो डील आपकी होगी। आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।" रीमा के चेहरे पर एक शातिर मुस्कान फैल गई। "ठीक है, तो मैं अब फोन रखती हूँ," उसने इत्मीनान से कहते हुए फोन काट दिया। "Mom..." पीछे से एक जानी-पहचानी आवाज़ आई। रीमा ने पलटकर देखा, उसकी बेटी माया दरवाज़े पर खड़ी थी। माया और रीमा की बातचीत रीमा: "यस, माय बेबी?" माया: "क्या हुआ, मॉम? आज आप इतनी खुश क्यों लग रही हैं?" रीमा अपनी खुशी को और दबा नहीं पाई। "ओबवियसली, बेबी! आज हमारे लिए बहुत बड़ा दिन है। तुम्हें तो पता ही है, आज हमें कितनी बड़ी डील मिलने वाली है!" माया: "हाँ, मैं जानती हूँ, मॉम!" रीमा ने प्यार से माया के बालों पर हाथ फेरा और मुस्कुराई। "मेरी बेटी कितनी समझदार हो गई है!" फिर अचानक उसने माया की तरफ देखा और भौंहें चढ़ाईं। "लेकिन तुम अभी तक तैयार क्यों नहीं हुई? तुम तो जानती हो कि आज की पार्टी में कितने हैंडसम और रिच बॉयज़ आने वाले हैं!" माया: "Mom!" "ओ माय गॉड, मेरी बेटी शर्मा रही है!" रीमा ने चिढ़ाते हुए कहा। माया झेंप गई और तेजी से अपने कमरे की तरफ़ भागी। "पागल," रीमा ने हँसते हुए कहा और खुद को शीशे में देखने लगी। --- सिया का कमरा सिया वॉशरूम से बाहर आई ही थी कि तभी रीमा दरवाज़ा खोलकर अंदर आई। "सिया!" रीमा ने रूखे स्वर में कहा। सिया ने तुरंत उसकी तरफ देखा। "यस, मॉम? आपको कुछ चाहिए?" उसकी आवाज़ हमेशा की तरह नर्म और सम्मानजनक थी, क्योंकि वह अपनी सौतेली माँ और बहन से बेहद प्यार करती थी। "आज शाम 7 बजे तैयार रहना। हमें पार्टी में जाना है," रीमा ने बिना कोई भाव दिखाए कहा। "ओके, मॉम!" सिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा। रीमा ने हल्की आवाज़ में बुदबुदाया, "बिच!" वह तुरंत कमरे से बाहर निकल गई। लेकिन... सिया ने वो शब्द सुन लिए थे। उसकी आँखों में नमी उतर आई। एक अकेला आँसू उसके गाल पर लुढ़क पड़ा... --- क्या सिया इस सौदे का शिकार बन जाएगी? या किस्मत उसके लिए कोई और राह चुन चुकी है? ✨🌷✨🌷✨🌷✨🌷✨🌷✨🌷✨🌷✨🌷 प्रिय पाठकों, अगर आपको मेरी कहानी पसंद आ रही है, तो अपने विचार कमेंट में ज़रूर साझा करें और चैप्टर को रेटिंग देना न भूलें! ⭐⭐⭐⭐⭐ आपका एक छोटा सा कमेंट और रेटिंग मुझे आगे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करता है। ❤️✨ साथ ही, मेरी आईडी को फॉलो करना न भूलें, ताकि आप कोई भी नया अध्याय मिस न करें! 📖🔔 अगर आप चाहें, तो कॉइन देकर मुझे सपोर्ट कर सकते हैं, जिससे मुझे और भी अच्छा कंटेंट देने की प्रेरणा मिलेगी। 🪙💖 आपका प्यार और सपोर्ट ही मेरी असली ताकत है! ✨🙏
Chapter 3: सौदे का शिकार माया का कमरा रीमा ने दरवाज़ा खोला और अंदर झाँकते हुए मुस्कुराई। "बेबी, आर यू रेडी?" उसने उत्साहित स्वर में पूछा। "यस, मॉम!" माया ने जवाब दिया और शीशे के सामने खड़े होकर लिपस्टिक लगाने लगी। कुछ सेकंड बाद उसने घूमकर अपनी माँ से पूछा, "मॉम, ये ड्रेस कैसी लग रही है?" रीमा ने उसे ध्यान से देखा और संतोष से सिर हिलाया। "इट्स लुकिंग ब्यूटीफुल, माय बेबी! 😍" फिर उसने माया की तरफ़ थोड़ा झुकते हुए कहा, "आई एम श्योर, आज तुम्हें देखकर मिस्टर कपूर तुम पर फ़िदा हो जाएँगे!" "मॉम, अब मुझे चिढ़ाना बंद कीजिए!" माया ने झेंपते हुए कहा। रीमा हँस दी। "चलो, अब हमें नीचे जाना चाहिए," माया ने कहा और दोनों नीचे हॉल में पहुँच गईं। --- हॉल में नीचे आते ही माया ने इधर-उधर देखा और फिर भौंहें चढ़ाते हुए पूछा, "मॉम, व्हेयर इज़ दैट बिच?" 😏 रीमा ने झुंझलाकर इधर-उधर देखा। "रुको, मैं बुलाती हूँ," उसने सख्त लहज़े में कहा और सीढ़ियों की तरफ़ मुँह करके चिल्लाई। "सिया! व्हेयर आर यू?" उसका स्वर बेहद रूखा और हुक्म देने जैसा था। कुछ ही सेकंड में सिया अपने कमरे से बाहर आ गई। "मॉम, मैं तैयार हूँ," उसने हल्की आवाज़ में कहा। माया ने सिया को ऊपर से नीचे तक घूरा और मन ही मन बुदबुदाई, "पता नहीं, ये बिच हमेशा सिंपल कपड़ों में इतनी खूबसूरत कैसे दिखती है?" बचपन से ही माया, सिया की नैचुरल ब्यूटी से जलती थी। सिया की मासूमियत और कोमलता किसी को भी उसकी तरफ़ आकर्षित कर लेती थी, और यही बात माया को खलती थी। --- रीमा की क्रूरता रीमा तेज़ी से आगे बढ़ी और अचानक सिया के बालों को जकड़ लिया। "तुम जल्दी तैयार नहीं हो सकती थी?" उसने गुस्से से चीखते हुए कहा। सिया दर्द से तड़प उठी। "आह... मॉम, प्लीज़, छोड़िए मुझे!" 🥺 उसकी आँखों में आँसू आ गए। "ओह मॉम, मैं घर के काम कर रही थी, इसलिए मुझे तैयार होने में देर हो गई..." सिया ने घबराई हुई आवाज़ में सफ़ाई दी। रीमा ने उसे धक्का दिया और तिरस्कार भरी नज़र डाली। "माया, चलो! हमें पहले ही बहुत देर हो चुकी है, और वैसे भी, इस बिच की वजह से काफ़ी टाइम बर्बाद हो चुका है!" माया रीमा के साथ बाहर जाने लगी, लेकिन तभी रीमा अचानक रुकी और पलटकर सिया को घूरते हुए बोली, "अब क्या यही खड़ी रहने का इरादा है? जल्दी हमारे पीछे आओ!" सिया ने अपनी आँखों के कोरों को पोंछा और चुपचाप उनके पीछे चल दी। --- पार्टी हॉल हॉल में चकाचौंध रोशनी थी। ऊँचे ओहदे वाले बिजनेसमैन और उनकी पत्नियाँ महंगे कपड़ों में सजी थीं। हर तरफ़ संगीत, हँसी-मज़ाक और चीयर्स की आवाज़ें गूंज रही थीं। रीमा और माया मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रही थीं, जबकि सिया चुपचाप उनके पीछे चल रही थी। लेकिन तभी, रीमा अचानक रुक गई। माया हॉल के अंदर चली गई, लेकिन रीमा ने सिया का हाथ पकड़ लिया और उसे दूसरी दिशा में खींच लिया। "मॉम?" सिया हड़बड़ा गई। लेकिन रीमा ने कोई जवाब नहीं दिया और उसे एक सुनसान कॉरिडोर से होते हुए होटल के एक प्राइवेट रूम में ले गई। दरवाज़ा बंद करते ही रीमा ने सिया को धक्का देकर बेड पर गिरा दिया। "तुम यहीं रहोगी! पार्टी में आकर मेरी इज़्ज़त मत खराब करो!" सिया स्तब्ध रह गई। "मॉम, प्लीज़... मैंने कुछ भी गलत नहीं किया!" उसकी आवाज़ काँप रही थी। लेकिन रीमा ने उसकी बात अनसुनी कर दी और बिना एक बार पलटे बाहर चली गई। दरवाज़ा ज़ोर से बंद हुआ और सिया अकेली रह गई... --- सिया का दर्द कमरे में गहरा सन्नाटा था। सिया की आँखों में आँसू छलक पड़े। उसने खुद को आईने में देखा—एक मासूम, टूटी हुई लड़की। "आख़िर मेरी गलती क्या है? क्यों मुझे हमेशा दर्द सहना पड़ता है?" उसने अपने मम्मी-पापा की तस्वीर निकाली और उसे सीने से लगा लिया। "काश, आप लोग मेरे साथ होते..." उसकी आँखें धीरे-धीरे बंद होने लगीं। --- 1 घंटे बाद दरवाज़े पर "खटाक!" की आवाज़ हुई। सिया ने घबराकर सिर उठाया। दरवाज़ा खुला... कोई अंदर आया... कौन है वो शख्स? क्या सिया की ज़िंदगी में कोई बदलाव आने वाला है? जाने के लिए पढ़ते रहिए मेरी कहानी!
Chapter 4: अंधेरे से रौशनी की ओर सिया के दिल की धड़कनें तेज़ हो चुकी थीं। डर और गुस्से का एक अजीब सा मिश्रण उसके भीतर हावी हो रहा था। उस अजनबी आदमी के इरादे सुनकर उसकी आंखें अविश्वास और आंसुओं से भर गई थीं। कमरे के भीतर दरवाजा खुला और एक भारी-भरकम आदमी अंदर आया। उसकी आंखों में एक अजीब सी वहशी चमक थी। सिया उसे देखते ही सहम गई। उसने अपने दोनों हाथों से खुद को समेटने की कोशिश की, मानो कोई सुरक्षा कवच बना रही हो। "Hey beautiful..." आदमी ने भद्दी मुस्कान के साथ कहा। सिया को एक झटका सा लगा। उसकी आवाज़ में इतना घिनौना पन था कि उसे खुद से घिन आने लगी। उसने कांपती आवाज़ में कहा— "जी... आप कौन हैं? और... मेरे कमरे में क्या कर रहे हैं?" आदमी उसकी बात अनसुनी कर धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा। "यह कमरा मेरा है, तो मैं यहां आऊंगा ही ना," उसने संजीदगी से कहा। सिया ने खुद को मजबूत करने की कोशिश की और जवाब दिया— "आप शायद गलत कमरे में आ गए हैं। मेरी माँ ने यह कमरा मेरे लिए बुक किया है।" वह जाने के लिए मुड़ी ही थी कि अचानक आदमी ने उसकी कलाई पकड़ ली और पूरी ताकत से उसे खींचकर बेड पर गिरा दिया। "Ahhh!" सिया के मुंह से चीख निकल गई। उसका सिर दीवार से टकराते-टकराते बचा, पर गिरने की वजह से उसकी बाजू में चोट आ गई। वह दर्द से कराह उठी। आदमी उसके ऊपर झुकते हुए फुसफुसाया— "बेब, इतनी जल्दी कहाँ जा रही हो? तुम्हें तो मेरे लिए भेजा गया है।" सिया का संसार बिखर गया सिया को उसकी बातें सुनकर यकीन नहीं हुआ। उसने आंखें फाड़कर उसे देखा। "क्या बकवास कर रहे हो आप!?" उसकी आवाज़ कांप रही थी। "तुम्हारी मॉम ने तुम्हें एक रात के लिए मुझे सौंप दिया है," आदमी ने घिनौनी हंसी के साथ कहा। सिया की दुनिया ही उजड़ गई। "नहीं!! यह झूठ है! ऐसा नहीं हो सकता!! मेरी माँ ऐसा क्यों करेगी?" सिया के दिल को एक झटका लगा। लेकिन उसकी मॉम यानी रीमा से तो वह यही उम्मीद कर सकती थी। वह सिया को हमेशा ताने मारती थी, उसे हिकारत भरी नजरों से देखती थी, पर... क्या वह इतनी गिर सकती थी? उस आदमी ने ठहाका लगाया— "नौटंकी बंद करो। तुम्हारी मॉम और बहन ने मुझे सब कुछ बताया है। तुम पहले भी बहुत लोगों को खुश कर चुकी हो। तो अब यह मासूमियत दिखाने का नाटक मत करो!" "नहीं!! मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ!!" सिया चीख पड़ी। पर उस आदमी ने उसकी बात को एक थप्पड़ से चुप करा दिया। "थप्पड़!!" सिया के गाल पर लाल निशान पड़ गया। उसकी आंखों से आंसू गिर पड़े। सिया की हिम्मत पर इस बार सिया ने हार नहीं मानी। उसकी अंतरात्मा ने उसे झकझोरा— "तू ऐसे नहीं हार सकती सिया... तुझे लड़ना होगा!" यह सोचते ही न जाने कहां से उसमें ताकत आ गई। उसने पूरी ताकत से मिस्टर शुक्ला को धक्का दिया। आदमी का संतुलन बिगड़ गया और वह बेड से नीचे गिर पड़ा। सिया ने मौके का फायदा उठाया और तेजी से दरवाजे की ओर भागी। मिस्टर शुक्ला ज़मीन पर गिरा हुआ था, और गालियाँ बक रहा था— "साली! तू बच नहीं सकती! मैं तुझे ढूंढ ही लूंगा!" पर सिया ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। भागते हुए... वह पार्टी हॉल की ओर भाग रही थी। उसकी आंखों से आंसू लगातार गिर रहे थे। उसकी सांसें तेज हो रही थीं, और दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। पर अचानक... किसी ने उसकी कलाई पकड़ ली और उसे खींचकर एक कमरे में बंद कर दिया। "आह!" सिया एक झटके से दीवार से जा टकराई। उसने डर से सिर उठाया और सामने देखा... अब ये कौन था? क्या सिया की तकदीर में अब भी अंधेरा था, या कोई रौशनी की किरण उसकी राह देख रही थी? अगला अध्याय जल्द...
--- Chapter 5 – वो एक रात सिया को जैसे ही किसी ने अपने कमरे में खींचा, उसके शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। "कौन हो तुम?" उसने घबराई हुई आवाज़ में पूछा, लेकिन सामने खड़ा शख्स नशे में लग रहा था। उसकी आंखें लाल, सांसों से शराब की महक और चाल डगमगाती हुई थी। "प्लीज़... मुझे जाने दो..." सिया ने कांपते हुए कहा। लेकिन उस आदमी ने उसे दीवार से टिकाकर उसकी कलाई पकड़ ली। "तुम... मेरी मदद कर सकती हो... बस एक रात के लिए..." उसकी भारी आवाज़ में बेचैनी थी। सिया कुछ समझ नहीं पा रही थी। उसने खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसकी ताकत उस मजबूत शरीर के सामने नाकाफी थी। वो आदमी लड़खड़ाते हुए सिया के और करीब आया। "प्लीज़... मुझे अकेला मत छोड़ो..." उसकी आवाज़ अब कमजोर और दर्द से भरी हुई थी। सिया ने गौर से देखा, तो उसकी आंखों में गहरा दर्द नजर आया। वो सिर्फ नशे में नहीं था, शायद टूट चुका था। सिया ने एक गहरी सांस ली और खुद को संभालते हुए कहा, "ठीक है, मैं आपकी मदद करूंगी... लेकिन खुद पर काबू रखिए।" वो आदमी कुछ देर तक सिया की आंखों में देखता रहा, फिर उसका सिर चकराया और वो पीछे हट गया। "शायद... मुझे नींद की जरूरत है..." इतना कहकर वो बेड पर गिर पड़ा। सिया कुछ देर तक घबराई खड़ी रही, फिर उसने कमरे से बाहर जाने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही उसने दरवाजे का हैंडल पकड़ा, वो आदमी बुदबुदाया, "प्लीज़... मत जाओ..." सिया रुक गई। उसकी आंखों में उलझन थी। वो चाहती थी कि भाग जाए, लेकिन वो देख सकती थी कि सिद्धार्थ पूरी तरह टूटा हुआ है। वो बस एक अजनबी की मजबूरी को समझने की कोशिश कर रही थी। उसने धीरे से बेड के पास जाकर कंबल उठाया और सिद्धार्थ पर डाल दिया। "काश आप इस हालत में न होते..." सिया ने बुदबुदाया और धीरे से कमरे से बाहर निकल गई। सुबह की कड़वी सच्चाई सिद्धार्थ की आंखें खुलीं, तो उसका सिर फट रहा था। उसे हल्की-हल्की रात की कुछ झलकियां याद आने लगीं। "कल रात... वो लड़की?" उसने जल्दी से अपने आसपास देखा, लेकिन कमरा खाली था। "वो चली गई?" उसने बेड की तरफ देखा, तो वहां एक रेशमी दुपट्टा पड़ा था। और वहीं, बिस्तर के कोने पर एक हल्का सा खून का धब्बा भी था। सिद्धार्थ का दिल जोर से धड़का। "क्या वो...?" तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। "कम इन।" राघव अंदर आया, "सर, माफ कीजिएगा, कल रात लड़की अरेंज नहीं हो पाई थी।" सिद्धार्थ का दिल एक पल के लिए रुक सा गया। "तो फिर कल रात... वो लड़की कौन थी?" उसका सिर घूम गया। उसने जल्दी से फोन उठाया और गुस्से में कहा— "अभी के अभी पता करो कि वो लड़की कौन थी!" लेकिन उसके अंदर अजीब सा डर घर कर चुका था। "कहीं मैंने... कोई बहुत बड़ी गलती तो नहीं कर दी?" --- आगे क्या होगा? सिया अब क्या करेगी? सिद्धार्थ जब सच्चाई जानेगा, तो उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी? क्या ये एक गलतफहमी है या किस्मत की एक नई चाल? [अगले चैप्टर में जानिए कहानी के साथ बने रहिए...! ]
Chapter 6 – अनकही यादें और अधूरे एहसास Somewhere on Earth... 🌎 एक अपार्टमेंट में, सिया अपने लैपटॉप पर काम कर रही थी। हल्की रोशनी में उसकी आँखें स्क्रीन पर टिकी थीं, मगर उसका ध्यान बार-बार भटक रहा था। तभी, अचानक, पीछे से किसी ने उसे गले लगा लिया। सिया एक पल के लिए डर गई, मगर फिर जैसे ही उसने उस नन्ही-सी प्यारी आवाज़ को सुना, उसकी घबराहट मुस्कान में बदल गई। "मम्मी!" सिया ने पीछे मुड़कर देखा और तुरंत अपनी नन्ही परी को गोद में उठा लिया। "सारा ❤️" उसने प्यार से कहा। (सारा—सिद्धार्थ और सिया की 5 साल की बेटी) Siya: "ओह! सारा बेबी, आप स्कूल से आ गईं?" Sara: "यस मम्मी!" Siya: "और बताओ, आज का दिन कैसा रहा स्कूल में?" Sara: "इट्स गुड मम्मी!" Siya: "गुड गर्ल! अब बताओ, क्या खाओगी?" Sara: "आई वांट टू ईट पैनकेक्स! 🥞" Siya: "ओके, मैं बना देती हूँ। तब तक तुम फ्रेश हो जाओ।" Sara: "ओके मम्मी!" सारा उछलती-कूदती अपने कमरे की ओर भाग गई, जबकि सिया किचन में चली गई। कुछ ही देर में उसने गरम-गरम पैनकेक्स बना लिए और टेबल पर रख दिए। जब सारा वापस आई, तो उसकी आँखें चमक उठीं। Sara: "थैंक यू मम्मी!" (खुश होकर) सिया मुस्कुराई और अपने हाथों से सारा को खिलाने लगी। Sara: "यम्मी! मम्मी, आप बेस्ट हो!" Siya: "थैंक्स, डियर!" तभी सिया का फोन बज उठा। उसने स्क्रीन पर नाम देखा—Lily। Siya: "बेबी, तुम वेट करो, मम्मी अभी फोन पर बात करके आती है।" Sara: "ओके मामा!" सिया अपने कमरे में चली गई और फोन उठाया। Siya: "हाय लिली!" Lily: "सिया! गुड न्यूज़! हमें एक बहुत बड़ा डिज़ाइन कॉन्ट्रैक्ट मिला है!" Siya: "वाओ! किस कंपनी से?" Lily: "सिंघानिया इंडस्ट्रीज़... इंडिया से!" सिया का चेहरा अचानक सख्त पड़ गया। Siya: "इंडिया?" (मन ही मन) क्या मुझे सच में वहाँ जाना होगा...? Lily: "सिया, ये डील हमारे लिए बहुत ज़रूरी है। तुम तो जानती हो, सिंघानिया इंडस्ट्रीज़ बहुत बड़ी कंपनी है। प्लीज, मना मत करना!" सिया ने गहरी सांस ली। उसके दिल की धड़कनें तेज़ हो गई थीं। Siya: "...ठीक है। टिकट्स बुक कर दो।" फोन कटते ही सिया सारा के पास आई और उसे प्यार से सहलाने लगी। Siya: "बेबी, हमें इंडिया जाना है। जल्दी पैकिंग कर लो।" सारा खुशी-खुशी कमरे में भाग गई, लेकिन सिया वहीं खड़ी रह गई। उसकी आँखों में अजीब सा दर्द उभर आया। रात में जब सारा सो गई, तो सिया की आँखों में नींद नहीं थी। वह लेटी रही, लेकिन दिमाग़ में सिर्फ अतीत की यादें घूम रही थीं— वह दिन, जब उसने पहली बार महसूस किया था कि वह प्रेग्नेंट है। वो लम्हा, जब उसने सारा को पहली बार अपनी बाहों में लिया था। और वो रात... जिसने उसकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी थी। "कहीं न कहीं, दिल के किसी कोने में वो एहसास अभी भी ज़िंदा है..." --- दूसरी तरफ, मुंबई – सिंघानिया मैंशन सिद्धार्थ बालकनी में खड़ा था। उसकी निगाहें शहर की चमचमाती रौशनी पर थीं, लेकिन उसका दिमाग कहीं और था। उसके हाथ में सिगरेट थी, लेकिन वो सिर्फ जल रही थी, बिना कश लिए। जैसे ही उसके असिस्टेंट राघव ने कमरे में प्रवेश किया, उसकी सोच टूटी। Raghav: "सर, मिस यादव इंडिया आने के लिए तैयार हो गई हैं।" सिद्धार्थ की भौहें हल्की सी उठीं। Siddharth: "उनके रहने का इंतज़ाम करो। कोई भी कमी नहीं होनी चाहिए।" Raghav: "ओके, सर!" राघव चला गया, लेकिन सिद्धार्थ अभी भी वहीं खड़ा था। "कौन है ये लड़की?" "मैंने उसे सिर्फ एक रात के लिए देखा था... अंधेरे में।" "उसका चेहरा तक साफ़ नहीं दिखा था।" "लेकिन फिर भी, उस एक रात ने मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी।" सिद्धार्थ ने अपनी मुट्ठी भींच ली। उसकी आँखों में कुछ बेचैनी थी, कुछ सवाल, जिनका जवाब उसे अब तक नहीं मिला था। "वो लड़की... अगर वो फिर से मेरे सामने आई, तो इस बार मैं उसे यूं ही नहीं जाने दूँगा।" --- To be continued...
Episode 7 – Unexpected Encounters Next Morning… सिया जल्दी से अपने और सारा के सामान की पैकिंग पूरी कर चुकी थी। उसकी आँखों में हल्की थकान थी, लेकिन चेहरे पर एक अजीब-सा सुकून था। आज वो सालों बाद इंडिया वापस जा रही थी। Siya: "Sara baby, are you ready?" Sara: "Yes, mummy!" (उत्साह से) Siya: "Then let's go!" Sara: "Okay!" दोनों एयरपोर्ट पहुँचते हैं, चेक-इन के बाद वे फ्लाइट में बैठ जाती हैं। --- 3 Hours Later – Mumbai Airport फ्लाइट की अनाउंसमेंट होते ही सिया और सारा एयरपोर्ट पर उतरते हैं। चारों तरफ लोगों की भीड़ थी, लेकिन सिया की नज़र बस अपनी फ्रेंड रिचा को ढूँढ रही थी। Sara: "Mummy, अब हम कहाँ जाएंगे?" Siya: "जस्ट वेट बेबी, मेरी फ्रेंड रिचा आने वाली है हमें लेने।" Sara: "Okay, Mummy!" सिया ने इधर-उधर देखा, लेकिन रिचा अभी तक नहीं आई थी। --- At The Same Time – Mumbai Airport वहीं दूसरी तरफ, एक 40 साल की ख़ूबसूरत औरत एयरपोर्ट के बाहर फोन पर बात कर रही थी। उसके चेहरे पर गुस्से के भाव थे। Lady: "अरे उल्लू के पट्ठे, कहाँ रह गया तू?" (गुस्से में) Voice from the phone: "Mom, on the way!" Lady: "मैं यहाँ 10 मिनट से खड़ी हूँ, और तेरा इंतजार कर रही हूँ! अभी तक नहीं आया, उल्लू कहीं के!" Voice: "Mom, can you please stop saying like this? I am not a child now!" Lady: "ए, डोंट 'टी' कर! जल्दी आ!" Voice: "Okay, Mom!" फोन कट हो जाता है। --- Meanwhile, Siya & Sara सिया अभी भी रिचा का इंतजार कर रही थी, तभी सारा ने उसका हाथ खींचा। Sara: "Mummy, I want to use the washroom." Siya: "Okay baby, let's go." Sara: "Mummy, आप यहीं वेट करो, मैं खुद चली जाऊँगी।" Siya: "Are you sure, baby?" (चिंतित होकर) Sara: "हाँ मम्मी, मुझे डर नहीं लगता! I am a strong girl!" (मासूमियत से मुस्कुराते हुए) सिया उसकी प्यारी-सी मासूमियत देखकर हँस दी और उसके गाल खींचते हुए बोली— Siya: "Okay, but be safe!" Sara: "Okay, Mummy!" --- Unexpected Meeting सारा वॉशरूम जाकर अपना काम खत्म करके बाहर आ रही थी, तभी गलती से किसी से टकरा गई। Sara: "Ouch! 🤕" वो हल्का-सा गिरने ही वाली थी कि सामने खड़ी औरत ने उसे सँभाल लिया। Lady: "बेबी, बी केयरफुल!" (नरम आवाज़ में) सारा ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से उस औरत की तरफ देखा, जो काफी स्टाइलिश और क्लासी लग रही थी। Lady: "तुम अकेली यहाँ क्या कर रही हो?" Sara: "मैं वॉशरूम गई थी।" Lady: "मम्मी-पापा कहाँ हैं? तुम अकेले आई हो? डर नहीं लगता?" Sara: "I am strong girl!" (मासूमियत से मुस्कुराते हुए) Lady: "You are so cute, बच्चा!" तभी उनकी बातें सिया की आवाज़ ने रोक दी— Siya: "Sara! तुम कहाँ हो?" (चिंतित स्वर में) Sara: "ग्रैंडमा, अब मैं चलती हूँ! मेरी मम्मी बुला रही है!" सिया सामने आई और सारा की तरफ बढ़ी। Siya: "सारा, तुम यहाँ क्या कर रही हो? तुम्हें वॉशरूम जाना था ना?" Sara: "मम्मी, मैं इनसे गलती से टकरा गई थी! ग्रैंडमा, ये मेरी मम्मी हैं!" वो औरत, जो अभी तक सारा से प्यार से बात कर रही थी, अब सिया की तरफ देख रही थी। उसने हल्की मुस्कान के साथ सारा के माथे पर किस किया। Lady: "तुम्हारी बेटी बहुत प्यारी है!" Siya: "थैंक यू!" (नम्रता से) Lady: "अब मैं चलती हूँ, मुझे लेट हो रहा है। बाय!" और वो चली गई... --- Siya Meets Richa तभी बाहर से एक लड़की की आवाज़ आई— "सिया!" सिया ने मुड़कर देखा तो उसकी दोस्त रिचा थी, जिसकी उम्र सिया के बराबर ही थी। रिचा दौड़कर आई और सिया को कसकर गले लगा लिया। Richa: "यार! बहुत मिस किया तुझे!" (भावुक होकर) Sara: (गुस्से में) "मासी, आप तो मुझे भूल ही गईं! सारा बेबी को कोई प्यार नहीं करता!" (नाटकीय अंदाज में मुँह फुलाते हुए) रिचा तुरंत सिया को छोड़कर सारा को गोद में उठा लेती है। Richa: "ओहो! मेरी प्यारी सारा को मैं कैसे भूल सकती हूँ?" सारा अब खुश हो गई और रिचा के गालों पर चूमा। Richa: "चलो, अब जल्दी से घर चलते हैं!" --- Meanwhile, in the Car वहीं दूसरी तरफ, जो लेडी अभी-अभी सारा से मिली थी, अब एक गाड़ी में बैठी थी और सामने सिद्धार्थ बैठा था। वह काफी गुस्से में थी और सिद्धार्थ पर भड़क रही थी। Lady: "इतना टाइम लगता है फोन उठाने में? मैं इतने साल बाद लौटी हूँ, और तुम्हें मुझे लेने आने में इतना वक्त लग गया? कैसे बेटे हो तुम!" सिद्धार्थ अपनी माँ को चुपचाप देख रहा था। Siddharth: "Mom, आप ऐसे अचानक आ जाएँगी, ये मुझे पता भी नहीं था। मैं मीटिंग में था, तभी आपका फोन आया और मैं तुरंत आपको लेने के लिए निकला!" अनु सिंह (सिद्धार्थ की माँ) उसकी तरफ देखती है और अचानक हल्का-सा हँस देती है। Anu Singh: "तेरा बिहेवियर देखकर ना मुझे अभी एक छोटी बच्ची की याद आ गई… ठीक तेरे जैसे एक्सप्रेशन्स थे उसके! काश वो तेरी बेटी होती!" सिद्धार्थ चौंक कर उसकी तरफ देखता है। Siddharth: "Mom! कैसी बातें कर रही हैं आप? वो मेरी बेटी कैसे हो सकती है?" (भौहें सिकोड़ते हुए) Anu Singh: "अच्छा बाबा, गुस्सा मत हो! पर तू शादी के लिए कब तैयार होगा?" Siddharth: "Mom, अभी तो प्लीज़ ये शादी का टॉपिक मत निकालिए। मैं अभी शादी नहीं करने वाला!" (सख्त आवाज़ में) अनु सिंह हल्का-सा मुस्कराई और खिड़की से बाहर देखने लगी, जैसे कोई पुरानी याद उसे परेशान कर रही हो... (To Be Continued…) --- Next Episode Preview: ➡ सिद्धार्थ और सिया की पहली मुलाक़ात! ➡ सारा और सिद्धार्थ का आमना-सामना! ➡ क्या सिया पहचान पाएगी कि जिस औरत से सारा टकराई थी, वो सिद्धार्थ की माँ थी? ---
EPISODE 8 सिद्धार्थ का संदेह और सिया की बेचैनी सिद्धार्थ अपनी माँ को उनके मेंशन पर छोड़ने के बाद सीधा अपने ऑफिस निकल गया। लेकिन उसका मन अशांत था। एयरपोर्ट पर उसकी माँ ने जिस बच्चे से बात की थी, उस मासूम के चेहरे में कुछ ऐसा था जो उसे बेचैन कर रहा था। ऑफिस: जैसे ही सिद्धार्थ अपने केबिन में पहुंचा, उसने तुरंत राघव को बुलाया। सिद्धार्थ: "राघव, मुझे एयरपोर्ट की सीसीटीवी फुटेज चाहिए।" राघव थोड़ा हैरान हुआ, लेकिन बिना कोई सवाल किए तुरंत फुटेज निकलवाने चला गया। थोड़ी देर बाद, राघव लैपटॉप लेकर वापस आया और सिद्धार्थ के सामने फुटेज प्ले करने लगा। सिद्धार्थ ध्यान से स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए देख रहा था। तभी अचानक, उसका ध्यान एक खास हिस्से पर अटक गया। उसने स्क्रीन को ज़ूम किया और कुछ सेकंड के लिए ठहर गया। वह मासूम चेहरा… वह नन्हीं-सी बच्ची… उसकी शक्ल कितनी उससे मिलती थी! सिद्धार्थ (मन ही मन): "नहीं… ये कैसे हो सकता है? कहीं ये मेरा ही खून तो नहीं?" वह थोड़ा और पीछे फुटेज को स्क्रॉल करता है और देखता है कि वही बच्ची उसकी माँ से बातें कर रही थी। तभी, स्क्रीन पर एक और चेहरा आता है— सिया। सिद्धार्थ का दिल ज़ोर से धड़क उठा। सिद्धार्थ (आँखें संकरी करते हुए): "सिया… तुम वापस आ गई?" इतने सालों तक वह उसे ढूंढता रहा था, लेकिन उसने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी। आज अचानक उसे उसकी झलक मिल गई थी, और सबसे चौंकाने वाली बात—उसकी बेटी। "मुझे सिया और सारा दोनों को अपनी ज़िंदगी में वापस लाना होगा।" रिचा का घर दूसरी ओर, सिया रिचा के घर पर ठहरी हुई थी। रिचा: "यार सिया, इतने सालों बाद मिल रही है, और देख, तू अब भी वैसी ही है!" सिया (हंसते हुए): "अच्छा? तो क्या मैं बूढ़ी हो जाऊं?" रिचा: "नहीं पगली! पर तू बता, इतने सालों तक कहाँ गायब थी?" सिया ने बात टालने की कोशिश की, लेकिन उसके चेहरे की बेचैनी रिचा से छुपी नहीं। रिचा (गंभीर होकर): "सिया, क्या हुआ? तू इतनी परेशान क्यों लग रही है?" सिया एक गहरी सांस लेकर खिड़की की तरफ देखने लगी। सिया (मन में): "अगर वह आदमी फिर से मेरी ज़िंदगी में आ गया तो? अगर उसने सारा को मुझसे छीन लिया तो?" वह एयरपोर्ट पर सुनी हुई आवाज़ को याद कर रही थी— वही भारी, रौबदार आवाज़। सिया (खुद से बुदबुदाते हुए): "नहीं… यह संभव नहीं है।" लेकिन उसके दिल के किसी कोने में एक डर घर कर गया था। अगला मोड़: क्या सिद्धार्थ सच में सिया और सारा को अपनी ज़िंदगी में वापस ला पाएगा? क्या सिया सारा को बचा पाएगी? क्या सारा को कभी अपने असली पिता के बारे में पता चलेगा? आपको क्या लगता है? कमेंट करके बताइए! 💕 कहानी के अगले एपिसोड के लिए तैयार रहिए ! 💕 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 प्रिय पाठकों, अगर आपको मेरी कहानी पसंद आ रही है, तो अपने विचार कमेंट में ज़रूर साझा करें और चैप्टर को रेटिंग देना न भूलें! ⭐⭐⭐⭐⭐ आपका एक छोटा सा कमेंट और रेटिंग मुझे आगे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करता है। ❤️✨ साथ ही, मेरी आईडी को फॉलो करना न भूलें, ताकि आप कोई भी नया अध्याय मिस न करें! 📖🔔 अगर आप चाहें, तो कॉइन देकर मुझे सपोर्ट कर सकते हैं, जिससे मुझे और भी अच्छा कंटेंट देने की प्रेरणा मिलेगी। 🪙💖 आपका प्यार और सपोर्ट ही मेरी असली ताकत है! ✨🙏
EPISODE 9: बेकरारी का सिलसिला --- अगले दिन सिद्धार्थ अपने ऑफिस में बैठा हुआ था, मगर उसका दिमाग काम में नहीं था। उसकी नज़रें लैपटॉप स्क्रीन पर थी, मगर मन कहीं और भटक रहा था। रातभर सिया की शक्ल उसके जहन में घूमती रही थी। वो लड़की, जिससे वो इतने सालों से ढूंढ रहा था, अचानक यूं उसके सामने आ जाएगी, यह उसने कभी नहीं सोचा था। तभी राघव केबिन में दाखिल हुआ। राघव: "सर, मिस यादव आई हैं।" सिद्धार्थ, जो अपने ख्यालों में खोया हुआ था, राघव की बात सुनते ही सतर्क हो गया। सिया… वो यहीं थी, उसके ऑफिस में! सिद्धार्थ (गहरी सांस लेते हुए): "उन्हें अंदर भेजो।" राघव बाहर निकलते ही सिया अंदर आई। मगर जैसे ही उसने सिद्धार्थ की आवाज़ सुनी, वह वहीं ठिठक गई। सिया (मन में सोचते हुए, धड़कनों को महसूस करते हुए): "यह… यह आवाज़…! नहीं, यह नहीं हो सकता!" उसकी सांसें तेज़ हो गईं। दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी कि उसे लगा कि यह धड़कन पूरे कमरे में गूंज रही है। वहीं, सिद्धार्थ भी जब कोई जवाब नहीं सुनता, तो वह चेयर से उठकर मुड़ता है। सिद्धार्थ (हैरान होकर, लगभग फुसफुसाते हुए): "सिया…!" सिया की आंखें चौड़ी हो गईं। वो… वो सच में सिद्धार्थ था! जिस इंसान से वह इतनी दूर भागना चाहती थी, वो इंसान आज उसके सामने खड़ा था। सिद्धार्थ का चेहरा भी उतना ही हैरान था। वह भी उसे देखकर हिल गया था। सिद्धार्थ (धीमे से, उम्मीद भरी आवाज़ में): "सिया…" मगर सिया को जैसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। डर, सदमा, गुस्सा—सभी भावनाएं मिलकर एक बवंडर बन गई थीं। उसके पैरों ने खुद ही उसका साथ छोड़ दिया, और वह वहां से भागी। सिद्धार्थ (तेज़ आवाज़ में, हाथ बढ़ाते हुए): "सिया! सुनो मेरी बात! प्लीज, एक बार तो रुको!" मगर सिया बिना मुड़े ऑफिस के बाहर निकल गई। --- सिया की उलझन सिया घर आते ही दरवाजा बंद करके दरवाजे से टिककर ज़मीन पर बैठ गई। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। सिया (अपने आप से बड़बड़ाते हुए): "नहीं… नहीं… यह नहीं होना चाहिए था। वो यहाँ कैसे मिल सकता है? अगर उसने सारा को मुझसे छीन लिया तो? मैं उसे सारा को नहीं लेने दूंगी!" उसकी आंखों में खौफ था। --- सिद्धार्थ का फैसला सिद्धार्थ ऑफिस के गेट के पास खड़ा था। बारिश हो रही थी, मगर उसे इसकी परवाह नहीं थी। सिया के डर को वह साफ़ देख सकता था। सिद्धार्थ (मन में सोचते हुए): "सिया… इतनी नफरत? इतने सालों में तूने मुझसे इतनी नफरत पाल ली?" उसने तय कर लिया था—अब सिया और सारा उसकी जिंदगी से दोबारा नहीं जाएंगी। सिद्धार्थ (राघव से): "मुझे सिया की पूरी आइडेंटिटी चाहिए। उसका अतीत, उसका वर्तमान, उसका हर एक डिटेल!" --- सिया के घर के बाहर बारिश लगातार हो रही थी। सिया ने बालकनी से नीचे झांका, और जो उसने देखा, उससे उसकी सांस अटक गई। सिद्धार्थ…! वह अब भी बाहर खड़ा था, भीगता हुआ। उसके चेहरे पर दर्द था। सिया ने खुद को झटक कर अंदर बंद कर लिया। मगर उसके दिल ने उसे सुकून नहीं लेने दिया। --- अगली सुबह सिया की आँख खुली, और सबसे पहला ख्याल आया—सिद्धार्थ! उसने घबराकर बालकनी से नीचे झांका, और उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। सिद्धार्थ अभी भी वहीं था। मगर अब वह ज़मीन पर बैठा था, उसका चेहरा उतरा हुआ था। वह रातभर वहां खड़ा रहा था! सिया (मन में): "पागल है क्या? बारिश में पूरी रात खड़ा रहा!" घबराकर वह नीचे दौड़ी और दरवाज़ा खोला। सिया (गुस्से में): "सिद्धार्थ, क्या कर रहे हो? अंदर आओ!" सिद्धार्थ उसे देख मुस्कुराया, मगर उसकी आँखों में दर्द था। वह हिलने की कोशिश करता है, मगर उसका शरीर जवाब दे चुका था। सिया ने तुरंत उसे सहारा दिया और अंदर ले आई। --- इज़हार-ए-मोहब्बत थोड़ी देर बाद, डॉक्टर उसे चेक करके चला गया। सिद्धार्थ को होश आया, तो उसने खुद को सिया के अपार्टमेंट में पाया। सिद्धार्थ (धीमे से मुस्कुराते हुए): "लगता है तुम अब भी मेरी परवाह करती हो, सिया।" सिया कुछ नहीं बोली, बस उसके लिए काढ़ा बना रही थी। सिद्धार्थ उसे अपलक देख रहा था। वह अब भी उतनी ही खूबसूरत थी। जैसे ही सिया ने काढ़ा पकड़ा, सिद्धार्थ ने उसका हाथ पकड़ लिया। सिद्धार्थ (गंभीर होकर, उसकी आंखों में देखते हुए): "सिया, मुझे सुनो। सिर्फ एक बार।" सिया के दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। उसने खुद को शांत किया और कहा— सिया: "ठीक है, मैं सुनूंगी। लेकिन एक शर्त पर—सारा को मुझसे अलग करने की बात कभी मत करना।" सिद्धार्थ का चेहरा दर्द से भर गया। सिद्धार्थ: "तुम समझ नहीं रही हो, सिया। मैं सारा को तुमसे अलग नहीं करना चाहता। मैं तो बस… अपनी फैमिली वापस चाहता हूँ। तुम्हें वापस चाहता हूँ।" सिया अवाक उसे देखती रही। सिद्धार्थ (गहरी सांस लेते हुए): "मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ, सिया। मैं तुम्हें और सारा को छोड़ नहीं सकता। तुम मेरी ज़िम्मेदारी ही नहीं… मेरा प्यार भी हो। मैं तुमसे हमेशा से प्यार करता था… और अब भी करता हूँ।" सिया (सदमे में): "तुम… मुझसे शादी करना चाहते हो?" सिद्धार्थ: "हाँ, और इस बार अपनी मर्ज़ी से। कोई और वजह नहीं। सिर्फ तुम और सारा।" सिया कुछ नहीं बोल सकी। उसके दिल में ज्वालामुखी फूट रहा था। --- नई उलझन—माया की वापसी कुछ दिन बीत गए। सिद्धार्थ अब अक्सर सारा के साथ समय बिताने लगा। सारा उसे बहुत पसंद करने लगी थी। एक दिन, सिया सारा को लेकर बाज़ार गई। तभी सारा गलती से किसी से टकरा गई। सामने खड़ी लड़की की सारी शॉपिंग ज़मीन पर गिर गई। लड़की (गुस्से में): "बदतमीज़ लड़की! चलने का ढंग नहीं है?" सारा डरकर पीछे हट गई। लड़की का हाथ उठा, जैसे वह थप्पड़ मारने वाली थी— मगर तभी… सिया ने उसका हाथ बीच में ही पकड़ लिया। सिया (आंखों में गुस्सा लिए): "अगर मेरी बेटी को हाथ भी लगाया, तो जान से मार दूंगी, माया!" माया चौंककर पीछे हटी। माया!—वही लड़की जिसने सिया की ज़िंदगी बर्बाद की थी। अब क्या होगा? क्या सिया और सिद्धार्थ का प्यार फिर से मुश्किलों में पड़ जाएगा? --- To Be Continued... अगर आपको यह एपिसोड पसंद आया, तो रेटिंग और कमेंट देना ना भूलें! आपके प्यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया! बाय बाय ❤️🙏
---
पार्टी
सिया पार्टी में जाने के लिए तैयार हो रही थी। वहीं पास में बैठी सारा, रिचा से बातें कर रही थी।
सारा अपने नए स्कूल के बारे में बता रही थी, जहाँ उसका एडमिशन सिद्धार्थ ने कराया था। वह स्कूल ‘सिंघानिया स्कूल’ था, जो सिंघानिया इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित किया जाता था और वहाँ सिर्फ अमीर घरानों के बच्चे पढ़ते थे।
"सिंघानिया स्कूल मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है," सारा गर्व से कह रही थी, "यह स्कूल पूरे भारत के टॉप स्कूल्स में आता है।"
जहाँ सारा अपनी स्कूल की बातें शेयर कर रही थी, वहीं सिया की सोच कहीं और ही थी। उसका ध्यान सिर्फ सिद्धार्थ पर था।
अब सिया को भी सिद्धार्थ अच्छा लगने लगा था। उसे सिद्धार्थ के साथ वक्त बिताना बहुत पसंद था। पिछले कुछ महीनों में वह उसकी पर्सनालिटी को अच्छी तरह समझ चुकी थी।
इसीलिए उसने खुशी-खुशी सिद्धार्थ के साथ पार्टी में चलने के लिए हाँ कह दिया था।
इसी दौरान, सिद्धार्थ खुद सिया को पिक करने उसके अपार्टमेंट पहुंच गया और दरवाज़े की बेल बजाई।
🛎️ डिंग डॉंग 🛎️
जैसे ही बेल की आवाज़ आई, सारा दौड़ती हुई जाकर दरवाज़ा खोलती है।
सिद्धार्थ को सामने देखकर सारा खुशी से उसकी गोद में चढ़ जाती है।
सिद्धार्थ (मुस्कुराते हुए): "सारा बेबी, बताओ तुम्हारा स्कूल का पहला दिन कैसा रहा?"
सारा (उत्साहित होकर): "बहुत अच्छा रहा अंकल! मुझे बहुत मज़ा आया।"
सारा अब भी सिद्धार्थ को "अंकल" ही कहती थी, क्योंकि सिया ने अभी तक उसे ये नहीं बताया था कि सिद्धार्थ ही उसके असली पापा हैं।
फिर भी, सारा सिद्धार्थ के बहुत करीब आ चुकी थी और उसके साथ खुद को बहुत सुरक्षित महसूस करती थी — जैसे वो उसके पापा ही हों।
इसी बीच, सिया बाहर आ जाती है। सिद्धार्थ का ध्यान अब भी सारा पर ही होता है। यह देख सिया हल्की सी खांसी की एक्टिंग करती है।
"खां..खां..."
सिया की आवाज़ कानों में पड़ते ही सिद्धार्थ उसकी ओर देखता है — और देखते ही रह जाता है।
सिया आज बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसकी सुंदरता ने सिद्धार्थ का दिल चुरा लिया था।
सिया को ऐसा महसूस हुआ जैसे सिद्धार्थ उसे बिना पलकें झपकाए देख रहा हो। वह थोड़ी-सी अनकंफर्टेबल हो गई।
तब तक, रिचा सारा को लेकर अपने कमरे में जा चुकी थी।
कुछ देर बाद...
सिया और सिद्धार्थ पार्टी वेन्यू पर पहुँचते हैं। वहाँ मौजूद सभी लोग बस उन्हीं दोनों को देख रहे थे — एक परफेक्ट कपल की तरह।
सिद्धार्थ, सिया को अपने कुछ बिज़नेस पार्टनर्स से मिलवाने ले जाता है।
लेकिन तभी, एक औरत जो भीड़ में मौजूद थी, सिया को देख घबरा जाती है — माया।
माया (गुस्से में): "ये सिया यहाँ क्या कर रही है? वो भी सिद्धार्थ के साथ? मैं इसे यूँ नहीं छोड़ूंगी... अब बस, देखती जाओ!"
माया आँखों में नफरत लिए वहाँ से चली जाती है।
इधर, सिद्धार्थ बिज़नेस मीटिंग में व्यस्त था और सिया थोड़ी बोर हो रही थी। उसकी नज़र एक खूबसूरत फ़ाउंटेन की ओर जाती है जो बाहर बना हुआ था। वह वहाँ चली जाती है।
कुछ देर बाद जब सिद्धार्थ को एहसास होता है कि सिया उसके पास नहीं है, तो वो उसे ढूँढने निकलता है। उसकी नज़र सिया पर पड़ती है, जो अब थोड़ा-सा नशे में लग रही थी।
सिद्धार्थ उसके पास जाता है।
सिद्धार्थ (फिक्र में): "सिया, तुम यहाँ क्या कर रही हो?"
लेकिन उसके कुछ कहने से पहले ही सिया उसके गले लग जाती है। सिद्धार्थ हैरान रह जाता है।
फिर सिया उसके कान में धीरे से कहती है:
सिया (लड़खड़ाती आवाज़ में): "I... lo...ve yo...u.... Si..dd..harth..."
सिद्धार्थ सन्न रह जाता है।
फिर सिया दोबारा कहती है:
"I love you Siddharth... I love you..."
सिद्धार्थ के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वो कुछ बोलने ही वाला होता है कि सिया उसे किस कर लेती है।
इस बार सिद्धार्थ पूरी तरह से हैरान था, मगर कुछ कहने से पहले ही सिया उसकी गोद में बेहोश हो जाती है।
दूर खड़ी माया उन्हें घूरती रहती है, उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ झलक रहा था।
सिद्धार्थ, सिया को अपनी बाहों में उठाकर वेन्यू से बाहर निकल जाता है।
---
To Be Continued...
---