Novel Cover Image

Substitute bride ( Complete✅)

User Avatar

🌹deepika07(⁠✷कविता05✷⁠)🌹

Comments

188

Views

211977

Ratings

5276

Read Now

Description

मानवी एक भोली भाली मासूम सी लड़की थी , जो कि दिखने में बेहद खूबसूरत थी। उसके होठों के पास बना तिल उसे सबके आकर्षण का केंद्र बनाता था। मानवी अनाथ थी जो अपनी सुनैना काकी के साथ मिलकर बाल आश्रम चलती थी। एक दिन वो अपनी फ्रेंड तान्या के साथ उसके मामा की ब...

Characters

Character Image

Rishabh Sehgal

Hero

Character Image

Manvi

Heroine

Total Chapters (163)

Page 1 of 9

  • 1. Substitute bride - Chapter 1

    Words: 1017

    Estimated Reading Time: 7 min

    माधवी, चंडीगढ़ में अपनी काकी सुनैना जी के साथ रहती थी। गोरा रंग, झील सी गहरी कजरारी आँखें, कमर तक लहराते काले लंबे बाल, 5.4 की ऊँचाई, 23 वर्ष की आयु, सुर्ख गुलाबी होठ जो सर्दियों में गहरे लाल हो जाते थे, और निचले होंठ के बगल में एक तिल – सब मिलकर उसका रूप मनमोहक था। जो भी उसे देखता, देखता ही रह जाता था।

    माधवी अनाथ थी और अनाथ आश्रम में रहती थी। सुनैना काकी, पूरे आश्रम की बड़ी अम्मा थीं, और माधवी को अपनी बेटी की तरह मानती थीं। माधवी भी उनके साथ मिलकर आश्रम को संभालने में मदद करती थी। कॉलेज की उसकी दोस्त तान्या, एक बड़े घराने से ताल्लुक रखती थी, वह भी आश्रम आया करती थी और बच्चों के साथ समय बिताती थी। दोनों बहुत अच्छी दोस्त थीं, क्योंकि दोनों ने हॉस्टल में रहकर साथ पढ़ाई की थी।

    आज भी तान्या माधवी से मिलने आई थी, पर मिलने नहीं, उसे ले जाने। उसकी ममेरी बहन की शादी थी, इसलिए वह उसे मुंबई ले जाना चाहती थी। पहले वह सुनैना काकी से इजाज़त लेना चाहती थी, क्योंकि दोनों उनकी मर्ज़ी के बिना कोई काम नहीं करती थीं।

    तान्या ने काकी से जिद करते हुए कहा, "काकी, प्लीज़ माधवी को मेरे साथ भेज दीजिए। सिर्फ़ दो दिन की ही तो बात है। आई प्रॉमिस, मैं उसका पूरा ख्याल रखूँगी!"

    काकी ने जवाब दिया, "मैं जानती हूँ बेटा, तू उसका पूरा ख्याल रखेगी, लेकिन माधवी के जाने के बाद ये बच्चे मुझसे नहीं संभाले जाएँगे। अभी भी दिन में काम की वजह से वह मुझसे दूर जाती है, तो ये बच्चे मेरी नाक में दम कर देते हैं। और अब तो वह दो दिन के लिए जाएगी, मैं कैसे इन्हें संभालूंगी?"

    तान्या ने कहा, "आप तो ऐसे बात कर रही हैं काकी, जैसे कभी माधवी को खुद से दूर करोगी ही नहीं। अरे, अब नहीं तो एक-दो साल में, जब उसकी शादी होगी, तब क्या आप उसे हमेशा ऐसे ही अपने पास रख पाएँगी?"

    उसकी बात सुनकर काकी माधवी की तरफ़ देखने लगीं। माधवी बच्चों के साथ हँस रही थी और कई बच्चों को अपने हाथ से खाना खिला रही थी। सच में, शादी लायक उम्र तो हो ही गई थी उसकी, और एक न एक दिन उन्हें माधवी को अपने से दूर करना ही था। दुनिया का यही दस्तूर है – बेटे चाहे दस हों, उन्हें घर में ही रखना होता है, पर बेटी चाहे एक ही क्यों न हो, उसे पराए घर जाना ही होता है। वह किसी और के घर की लक्ष्मी होती है। अगर उनकी खुद की बेटी होती, तो भी उन्हें उसे डोली में बिठाकर विदा करना ही होता। ये सब सोचते हुए काकी की आँखें नम हो गईं।

    फिर उन्होंने साफ़ शब्दों में तान्या से कहा, "ठीक है, जाकर दोनों अपना बैग पैक करो। और हाँ, दो दिन बाद अगर तुम दोनों यहाँ पर नहीं दिखीं, तो मैंने तुम्हारी टाँगें तोड़कर तुम्हारे हाथ में दे देनी हैं!"

    तान्या हँसते हुए बोली, "फिर तो काकी आपको हमारे लिए लंगड़े लड़के ढूँढ़ने पड़ेंगे, क्योंकि अच्छा-खासा तो हमें अपने घर ले जाने से रहा!" इतना कहकर वह वहाँ से भाग गई।

    काकी, "रुक, तुझे तो मैं अभी बताती हूँ," कहकर उसके पीछे गईं। तब तक तान्या माधवी के पास पहुँच चुकी थी और उसे काकी की सहमति की बात बताई। माधवी बहुत खुश हो गई, क्योंकि बहुत समय बाद उसे कहीं बाहर जाने का मौका मिला था। पिछली बार वह कॉलेज के साथ राजस्थान की ट्रिप पर गई थी; तब से उसका कहीं बाहर जाना नहीं हो पाया था। वह काकी के पास आकर उनके गले लग गई।

    माधवी ने काकी से कहा, "आई प्रॉमिस काकी, मैं जल्दी वापस आ जाऊँगी। और थैंक यू, जो आप मुझे भेजने के लिए मान गईं। अनुष्का दीदी भी बहुत खुश होंगी जब उन्हें पता चलेगा कि मैं भी उनकी शादी में आ रही हूँ। मेरे मना करने से वह बहुत उदास हो गई थी। मैं अभी जाकर उन्हें फ़ोन कर यह खुशखबरी सुनाती हूँ!" इतना कहकर वह उनसे अलग होकर जाने लगी।

    पर तान्या ने उसका हाथ पकड़कर कहा, "अरे, उन्हें मत बताओ। हम लोग वहाँ पहुँचकर उन्हें सरप्राइज़ देंगे!"

    माधवी ने हाँ में सर हिला दिया और कपड़े पैक करने चली गई। थोड़ी देर में दोनों मुंबई एयरपोर्ट के लिए निकल गईं।

    माधवी निकल चुकी थी एक ऐसे सफ़र पर जहाँ वह खुशी के कुछ पल बिताने जा रही थी। लेकिन उसे नहीं पता था कि जहाँ वह जा रही है, वहाँ से उसकी किस्मत ही बदलने वाली है। उसके जीवन में एक ऐसा मोड़ आने वाला था जो उसकी पूरी ज़िंदगी बदलकर रख देगा।

  • 2. Substitute bride - Chapter 2

    Words: 1136

    Estimated Reading Time: 7 min

    मानवी और तान्या दोनों मुंबई पहुँचीं। तान्या के घरवाले पहले ही तान्या के मामा के घर पहुँच चुके थे। इसलिए तान्या ने अपने मामा नवीन शर्मा के यहाँ के लिए टैक्सी बुक कर ली। और दोनों अपना सामान रखकर शर्मा मेंशन के लिए निकल गईं।

    थोड़ी देर में दोनों शर्मा हाउस पहुँच गईं। मानवी ने जाकर सबसे पहले तान्या के पापा के पैर छुए। उन्होंने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा, "खुश रहो मानवी बेटा, आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई?"

    मानवी मुस्कुराते हुए बोली, "नहीं अंकल, हमें कोई दिक्कत नहीं हुई!" फिर वह तान्या की मम्मी की तरफ गई। वह उसे आगे बढ़कर गले लगा लेती हैं!

    और मानवी बोली, "से फाइनली सुनैना जी ने कम से कम तुम्हें यहाँ तो आने दिया, नहीं तो हम तो बुला-बुलाकर थक गए थे! वैसे अब यह चमत्कार कैसे हुआ?"

    मानवी मुस्कुराते हुए बोली, "यह तो आप तान्या से ही पूछिए, जो कुछ किया है इसी ने किया है।"

    तान्या के मम्मी-पापा हैरानी से उसकी तरफ देखने लगे। तान्या अपनी शर्ट की कॉलर ऊपर उठाते हुए गर्व से बोली, "आखिर हम भी एडवोकेट पवन सिंह की बेटी हैं, तो भला कौन हमें मना करेगा?"

    तान्या की मम्मी आरती जी उसे फोन दिखाते हुए बोलीं, "अच्छा, तो फिर सुनैना जी से बात तो कर, तेरी बातें सुनकर वो तुझसे कुछ कहना चाहती हैं।"

    आरती जी की बात सुनकर तान्या की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। वह एकदम फोन लेकर हरबड़ाते हुए कान से लगाकर बोली, "नहीं काकी, मैं कुछ नहीं कह रही थी, वह तो यह मां थी, जो..." लेकिन जैसे ही फोन में से कुछ आवाज नहीं आई, तो तान्या उसे कान से उठाकर देखती है तो फोन बंद था। वह समझ गई कि उसकी माँ ने उसके साथ मज़ाक किया था।

    वह अपने माँ-पापा की तरफ देखती है, जो मुँह दबाकर हँस रहे थे। उन्हें देखते हुए गुस्से में फोन उनके हाथ में दे देती है। तो उसकी माँ आरती जी बोलीं, "अब बताएगी भी कि तूने सुनैना जी को कैसे मनाया या फिर मैं उनसे ही पूछूँ!"

    तान्या जल्दी से उन्हें सारी बातें बता देती है। पवन और आरती जी उसकी बातें हैरानी से सुन रहे थे। आरती जी बेहोश होने की एक्टिंग करते हुए बोलीं, "पवन, क्या यह हमारी ही बेटी है? क्योंकि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि हमारी बेटी कब इतनी बड़ी हो गई! जो इतनी समझदारी भरी बातें करने लगी और तो और इसने सुनैना जी को भी अपनी बातों में फँसा लिया।"

    पवन जी हँसते हुए बोले, "यकीन कर लो, तुम्हारी ही बेटी है, बिल्कुल तुम्हारे ऊपर ही गई है! जैसे तुम नौटंकीबाज हो, वैसे ही तुम्हारी बेटी।" उनकी बात पर आरती जी उन्हें घूर कर देखती हैं! पवन जी हँसते हुए मेहमानों के पास चले जाते हैं! आरती जी भी दोनों को अंदर जाने का कहकर मेहमानों की आवभगत में लग जाती हैं!

    वही दोनों अंदर अनुष्का के पास जाती हैं, जिसकी कल शादी थी। मानवी पीछे से अनुष्का को गले लगा लेती है। अनुष्का हल्का सा मुस्कुरा देती है। मानवी अनुष्का से बोली, "सरप्राइज!"

    उसकी आवाज सुनकर अनुष्का पीछे पलटती है और मुस्कुराते हुए तान्या और मानवी दोनों को गले लगा लेती है!

    मानवी मुस्कुराते हुए अनुष्का से बोली, "और दी, हमारे होने वाले जीजू कैसे हैं? आई मीन, कैसे दिखते हैं? जो आप उन पर फिसल गईं? क्योंकि जहाँ तक मुझे पता है, आपने कॉलेज में इतने लड़कों को रिजेक्ट किया था कि मुझे उनके नाम तक याद नहीं।"

    अनुष्का हल्के से मुस्कुरा देती है और मानवी से कहती है, "मैं कैसे बताऊँ? मैंने तो खुद उन्हें नहीं देखा, यहाँ तक की उनका नाम भी नहीं पता।" इतना कहकर खिड़की से बाहर देखने लगती है!

    वही मानवी और तान्या उसे हैरानी से देखने लगते हैं। मानवी एकदम से आगे बढ़कर अनुष्का को अपनी तरफ घुमाते हुए बोली, "क्या मतलब? ना आप उनका नाम जानती हैं, ना उन्हें देखा है, तो फिर शादी कैसे? और आप अरेंज मैरिज के लिए कैसे मान गईं? आप तो लव मैरिज करना चाहती थीं।"

    अनुष्का की आँखें नम हो जाती हैं और वह मानवी से कहती है, "क्या करूँ मानवी? इन दिनों पापा को बिज़नेस में बहुत लॉस हो गया है! ऐसे में पापा के बिज़नेस पार्टनर ने आगे आकर यह ऑफर रख दिया कि अगर मेरी शादी उनके बेटे से हो जाती है, तो वो पापा की कंपनी को अपनी कंपनी के साथ मर्ज कर लेंगे और इस तरह से पापा की कंपनी और शेयर्स डूबने से बच जाएँगे। तो पापा ने भी उनके इस ऑफर को मान लिया।" मानवी और तान्या शॉक हो जाती हैं।

    मानवी हैरान होते हुए बोली, "इसका मतलब आपकी शादी सिर्फ एक बिज़नेस डील है और आप इस शादी के लिए तैयार भी हो गई!"

    अनुष्का उदास होते हुए बोली, "इतना ही नहीं मानवी, उस लड़के ने मुझे फ़ोन भी किया था! और कह रहा था कि मैं इस शादी से मना कर दूँ क्योंकि वह किसी और से प्यार करता है। लेकिन मैं क्या करूँ? पापा ने मुझे कसम दी है कि अगर मैंने यह शादी नहीं की और मैंने उस लड़के की बात मानकर इस शादी से इनकार किया, तो वो अपनी जान दे देंगे!"

    तान्या अनुष्का से बोली, "तो दी, आपने माँ-पापा से क्यों नहीं कहा? वह ज़रूर आपकी मदद करते। मैं अभी माँ-पापा को बताकर आती हूँ, वह शादी को ज़रूर रोक देंगे!"

    अनुष्का उसका हाथ पकड़कर उसे रोकते हुए बोली, "कोई फायदा नहीं है तान्या। बुआ और फूफा जी को भी सब पता है! लेकिन वह लोग उस लड़के से मिल चुके हैं और उन्हें वह बहुत पसंद आया। इसीलिए उन्हें भी लगता है कि मुझे यह शादी कर लेनी चाहिए! और अब वैसे भी बहुत देर हो चुकी है। तुम लोग भी इस शादी को एन्जॉय करो क्योंकि घर पर सब रिश्तेदार आ चुके हैं! ऐसे में अब शादी से इनकार करना दोनों परिवार की बेइज़्ज़ती होगी! और वह लोग यहाँ के सबसे पावरफुल लोग हैं। इसीलिए मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से पापा को कोई भी परेशानी उठानी पड़े!"

    मानवी और तान्या दोनों सिर पकड़कर वहीं बैठ जाती हैं। तान्या मानवी से बोली, "यार, मुझे समझ नहीं आता क्यों लोग पैसे के खातिर अपने परिवार और बेटियों की खुशियों को क्यों दांव पर लगा देते हैं! क्या बेटियों को इसी के लिए पैदा करते हैं कि जब भी कोई मुसीबत आए तो उसे अपनी बेटी के सहारे दूर कर सकें!"

    मानवी खोए हुए अंदाज में बोली, "क्या कर सकते हैं तान्या? हम लोगों की सोच तो नहीं बदल सकते! लेकिन सब एक जैसे नहीं होते।" कुछ देर सब तीनों आपस में बात करती हैं! फिर तान्या और मानवी अपने कमरे में चली जाती हैं!

    आगे क्या होगा, जानने के लिए पढ़ते रहिए। सब्सटिट्यूट ब्राइड। एंड रेटिंग समीक्षाएं देना ना भूलें।

  • 3. Substitute bride - Chapter 3

    Words: 1500

    Estimated Reading Time: 9 min

    अगले दिन शादी के समय बरात आ चुकी थी। पंडित जी ने वरपूजा शुरू कर दी थी। सभी रिश्तेदार खड़े होकर दूल्हे को देख रहे थे। सभी लड़कियाँ दूल्हे को देखकर मंत्रमुग्ध हो रही थीं, क्योंकि वह किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था। मरून कलर की शेरवानी में गोल्डन साफ़ा बाँधे हुए, वह किसी राजकुमार जैसा लग रहा था; जो अपनी राजकुमारी को अपनी हमसफर बनाकर ले जाने वाला था। लेकिन दूल्हे के चेहरे पर शादी के उल्लास की कोई खुशी नहीं दिख रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसे बंदूक की नोक पर शादी के लिए मजबूर किया हो। तभी वरपूजा हो गई और दूल्हे को मंडप में बैठाया गया।


    तभी शादी का मुहूर्त हो गया। पंडित जी ने कन्या को लाने के लिए कहा। अनीता जी, अनुष्का की माँ, अनुष्का को लेने कमरे में गईं। जब वे कमरे में पहुँचीं, तो उन्हें अनुष्का कहीं दिखाई नहीं दी। शादी का जोड़ा और सारा सामान वहीं पड़ा हुआ था। अनीता जी परेशान हो गईं। तभी उन्हें टेबल पर रखा एक पत्र दिखाई दिया। उन्होंने वह पत्र उठाकर पढ़ा, तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई और वे धम्म से बेड पर बैठ गईं।


    अनीता जी को काफी देर तक आते न देखकर, नवीन जी स्वयं अनुष्का के कमरे में आए। वहाँ अनीता जी को बेसुध बैठे देखकर वे हैरान रह गए। वे कुछ कहने वाले ही थे कि उनकी नज़र अनीता जी के हाथ में पकड़े कागज़ पर गई। उन्होंने वह कागज़ हाथ में लेकर पढ़ना शुरू कर दिया।


    अनुष्का


    माफ़ करना पापा, मुझे माफ़ कर देना, लेकिन मैं यह शादी नहीं कर सकती। आपने अपनी कंपनी को बचाने के लिए अपनी बेटी को दांव पर लगा दिया, लेकिन एक बार भी मुझसे नहीं पूछा कि मैं क्या चाहती हूँ। मेरे भी कुछ सपने हैं, मैं भी किसी से प्यार करती हूँ, लेकिन आपने कभी मेरी बात नहीं समझी। एक पल के लिए आपकी बात मानकर मैं शादी करने को भी तैयार थी, लेकिन ऐसे लड़के से शादी करके क्या फायदा जो कभी मुझे प्यार ना करे? कभी मुझे अपनी बीवी होने का हक़ ना दे? इस तरह से तो मैं एक खिलौना बनकर रह जाऊँगी, जिससे जब मन किया आपने खेला और जब आपका मन भर गया, तो किसी और को खेलने के लिए दे दिया। तो माफ़ी चाहती हूँ, मैं खिलौना नहीं बन सकती पापा। मैं ऐसे लड़के से शादी नहीं कर सकती जो मुझे कभी अपनी लाइफ में अपनाएगा ही नहीं। मैं शेखर के साथ अपनी ज़िंदगी शुरू करने जा रही हूँ। मुझे ढूँढ़ने की कोशिश मत कीजिएगा, वरना जो धमकी आपने दी, उसे सच में करके दिखा दूँगी। आपकी नालायक बेटी अनुष्का। क्योंकि लायक तो मैं कभी बन ही नहीं पाई।


    अनुष्का


    पत्र पढ़कर नवीन जी वहीं सोफे पर बैठकर अपना सिर पकड़ लिए। वहीं नीचे मंडप में सभी लोग नवीन जी और अनीता जी का इंतज़ार कर रहे थे। काफी देर बाद उनके न आने पर, पवन जी और आरती जी दोनों कमरे में आए। उन्हें इस तरह देखकर एक-दूसरे को देखा।


    फिर आरती जी नवीन जी के पास आकर बोलीं, "क्या हुआ भैया? आप और भाभी यहाँ बैठे हुए हैं और अनुष्का कहाँ है? पंडित जी कब से वहाँ पर राह देख रहे हैं। शादी का मुहूर्त भी शुरू हो चुका है!"


    नवीन जी ने उन्हें देखते हुए कहा, "कैसी शादी बहना? जब दुल्हन ही शादी से भाग चुकी है, तो फिर शादी कैसी? अब तो यहाँ पर मातम होगा, मेरी मौत का मातम!"


    आरती जी गुस्से में बोलीं, "यह कैसी बात कर रहे हैं भैया? आप पागल हो गए हैं क्या? और अनुष्का कहाँ भाग कर जाएगी? देखिए होगी यहीं कहीं। और भाभी आप उसे ढूँढ़ने की जगह यहाँ पागलों की तरह बैठी हुई हैं! (फिर पवन जी की तरफ़ देखते हुए) सुनिए, आप बाहर जाकर देखिए, क्या पता अनुष्का बाहर हो, मानवी और तान्या के साथ।" पवन जी उनकी बात सुनकर बाहर जाने लगे, कि नवीन जी ने उन्हें रोकते हुए कहा, "रुक जाइए जीजा जी! बाहर उसे ढूँढ़ने जाने से पहले एक बार इस पत्र को पढ़ लीजिए। फिर आपकी सारी गलतफ़हमियाँ दूर हो जाएँगी!" इतना कहकर उन्होंने वह पत्र पवन जी की तरफ़ बढ़ा दिया। पवन जी जैसे ही वह पत्र पढ़ते हैं, वे भी शॉक हो जाते हैं! आरती जी ने भी वह पत्र पढ़ा, तो वे भी परेशानी में वहीं बैठ गईं!


    वहीं मानवी और तान्या, जो अभी तक शादी के मंडप में नहीं गई थीं, और न ही उन्हें दूल्हे को देखने में कोई रूचि थी, क्योंकि उनकी बहन इस शादी से खुश नहीं थी, वे दोनों बढ़िया-बढ़िया खाने पर हाथ साफ़ कर रही थीं, क्योंकि शादी में कुछ मजेदार हो या न हो, लेकिन खाना ज़रूर मजेदार होता है।


    तान्या रसमलाई खाते हुए मानवी से बोली, "यार मानवी, यह रसमलाई तो इतनी टेस्टी है कि मेरा मन कर रहा है, भाड़ में जाए शादी और मैं यहीं पर बैठकर पूरी रात रसमलाई खाऊँ!"


    मानवी गुलाब जामुन खाते हुए बोली, "हाँ यार, सही कह रही है तू। वैसे भी दीदी इस शादी से खुश नहीं है, तो हम वहाँ जाकर क्या करेंगे? इससे अच्छा तो यह है कि हम यहाँ बैठकर अपनी फ़ेवरेट चीज़ों को खाकर ही खुश हो लें।"


    तभी तान्या की मासी, जो कुछ परेशान सी घूम रही थी, जैसे ही उनकी नज़र मानवी और तान्या पर पड़ी, तो उन्होंने अपना सिर पीट लिया और गुस्से में उन दोनों के पास आकर दोनों के सर पर पीछे से एक-एक थप्पड़ मार दिया। जिससे दोनों ने "आउच" की आवाज़ करते हुए पीछे मुड़कर देखा, तो तान्या की मासी गुस्से में खड़ी दोनों को घूर रही थी। उन्हें देखते ही दोनों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और दोनों अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गईं।


    मासी गुस्से में बोलीं, "तुम दोनों यहाँ बैठकर चटकारे मारकर ठूस रही हो, और वहाँ भैया, भाभी और दीदी कितने परेशान हैं, पता भी है?" दोनों ने एक-दूसरे को देखा और फिर कंधे उचकाकर उनकी तरफ़ देखा। तान्या ने अपनी मासी से कहा, "मासी, हमें क्या पता वहाँ क्या हुआ है और वे इतनी परेशान क्यों हैं? शादी तो दीदी की हो रही है ना, परेशान तो दीदी को होना चाहिए।"


    मासी ने गुस्से में एक थप्पड़ दिखाते हुए कहा, "अभी मारूँगी! एक तो अनुष्का कहीं मिल नहीं रही है, ऊपर से तुम दोनों यहाँ पर खाना खा रही हो! जाकर वहाँ पर देखो और उन लोगों को संभालो। तब तक मैं पूरे घर में चेक करती हूँ, शायद झूठी चिट्ठी लिखकर यहीं कहीं छुपी हो। तुम्हारे मौसा जी भी एयरपोर्ट गए हैं, दीपक को भी मैंने रेलवे स्टेशन भेजा है। बस कैसे भी करके यह लड़की मिल जाए तो मेरी जान में जान आए!"


    वहीं अनुष्का के भागने की खबर सुनकर दोनों हैरान रह जाती हैं और जल्दी से अंदर ऊपर की तरफ़ जाने लगती हैं। तान्या मानवी से बोली, "यार मानवी, दीदी को अगर भागना ही था तो हमें ही बता देती, हम कौन सा उन्हें रोक रहे थे? और आज की जगह कल भागती तो इतना ड्रामा भी नहीं होता!"


    मानवी ने उसकी बात में सहमति जताते हुए कहा, "हाँ यार, फिर लड़के वालों को शायद इतनी इंसल्ट महसूस नहीं होती जितनी अब होगी जब वे बिना दुल्हन के वापस जाएँगे!"


    वहीं शादी में भर-भर के मीडिया आई हुई थी, क्योंकि मुंबई के सबसे बड़े बिज़नेसमैन ऋषभ सहगल की शादी थी, और यह कोई आम बात नहीं थी। अनुष्का के देरी करने की वजह से सभी लोग बातें बनाने लगे थे और इन बातों से सहगल परिवार परेशान हो रहा था।


    अब कौन जाने क्या होगा आगे? पढ़ते रहिए 'सब्सटिट्यूट ब्राइड' और रेटिंग समीक्षा ज़रूर दीजिएगा।

  • 4. Substitute bride - Chapter 4

    Words: 1185

    Estimated Reading Time: 8 min

    मानवी और तान्या जब अनुष्का के कमरे में आईं, तो सच में सब लोग बहुत परेशान बैठे थे। नवीन जी अचानक उठ खड़े हुए और अनीता जी की ओर देखते हुए बोले, "मुझे माफ़ कर दो अनीता, लेकिन अब मैं यह सब बर्दाश्त नहीं कर सकता। पहले मेरी कंपनी डूबेगी और फिर मेरा नाम भी। मैं इस बदनामी के साथ अब नहीं जी सकता। इससे अच्छा है कि यह सब देखने से पहले ही मैं अपने आप को खत्म कर लूँ।"

    उनकी बातें सुनकर सब लोग हैरान रह गए। तान्या और मानवी बुरी तरह डर गईं। अनीता जी रोते हुए बोलीं, "नहीं, प्लीज ऐसा मत कीजिए! मेरी ही गलती है। मुझे उसे इतना सर पर नहीं चढ़ाना चाहिए था, जिसकी सजा आज हम दोनों को मिल रही है। लेकिन आप चिंता मत कीजिए, गलती मैंने की है तो सजा भी मैं ही पाऊँगी। मैं अभी जाकर सबको बता देती हूँ कि यह शादी नहीं हो सकती।"

    नवीन जी हार मानकर बैठ गए। "लेकिन इससे क्या होगा अनीता? बदनामी तो भी होगी। आखिर में सबको पता चल ही जाएगा कि मेरी बेटी भाग गई है और जो नाम मैंने इतने सालों में कमाया है, वह मिट्टी में मिल जाएगा।"

    सब लोग वहीं पर परेशानी में बैठे हुए थे कि तभी नवीन जी की बुआ जी वहाँ आईं और नवीन जी से बोलीं, "देख नवीन, तेरी बेटी ने जो किया, सो किया, लेकिन अब हमें ही कुछ न कुछ रास्ता ढूँढना होगा! जिससे दोनों परिवारों की इज़्ज़त और नाम पर कोई दाग न लगे। मेरी मान तो, फ़िलहाल के लिए अपनी बेटी की जगह मंडप पर किसी और को बैठा दें घूँघट में। और तब तक अपनी बेटी को ढूँढ लें। जैसे ही तेरी बेटी मिल जाती है, तो उसे लड़कों वालों के साथ विदा कर देना। आजकल यह शादी-ब्याह की रस्मों को कौन मानता है? और वो लोग इतने बड़े बिज़नेसमैन हैं तो ज़ाहिर सी बात है, यह रीति-रिवाज़ों को तो वो बिल्कुल ही नहीं मानते होंगे! इससे तेरी और उनकी इज़्ज़त भी बच जाएगी और तुम लोगों की नाक भी नहीं कटेगी और उन लोगों को कुछ पता भी नहीं चलेगा!"

    उनकी बात पर सब लोग हैरान रह गए। आरती जी कुछ बोलने वाली थीं कि तभी नवीन जी बोले, "हाँ बुआ जी, आप सही कह रही हैं! लेकिन इस वक़्त इतने कम समय में कौन ऐसी भरोसेमंद लड़की मिलेगी जो इस वक़्त हमारी मदद भी कर दे और शादी के बाद उन लोगों की शान और शौकत देखकर उसका मन भी ना डोले? क्योंकि वह लोग इतने नामी-गिरामी हैं कि उनका रहन-सहन देखकर तो हमारे रिश्तेदार भी हमसे चिढ़ रहे हैं।"

    सब लोग फिर से परेशानी में कुछ न कुछ सोचने लगे थे। लेकिन वहीं पर नवीन जी की बुआ जी की नज़र मानवी पर ही टिकी थी। तान्या ने जब अपनी नानी की नज़र मानवी पर टिकी देखी, तो उसके दिमाग में कुछ खटका। उसने तुरंत मानवी का हाथ पकड़ उसे अपने करीब कर लिया और उसके कान में धीरे से बोली, "बेटा मानवी, जितनी जल्दी हो सके यहाँ से खिसक ले, क्योंकि पता नहीं, लेकिन मुझे बहुत ही स्ट्राँग फ़ीलिंग आ रही है कि मेरी यह चुड़ैल नानी बलि का बकरा बनाने की तुझे ही सोच रही हैं, क्योंकि इतनी देर में इनकी नज़र तुझ पर से नहीं हटी है!"

    तो उसकी बात सुनकर जैसे ही मानवी ने उसकी नानी की तरफ देखा, तो सच में उन्हें अपनी ओर देखता पाया। उनकी नज़रें देखकर मानवी घबरा गई और तान्या से घबराते हुए बोली, "तान्या, यह मुझे ऐसे क्यों देख रही है?" तान्या सामने देखकर मुस्कुराते हुए धीमी आवाज़ में बोली, "क्योंकि उनके मन में अनुष्का दी की जगह तुझे बैठाने का प्लान चल रहा है! इन शॉर्ट, तू अब अनु दी की सब्स्टिट्यूट बनेगी।" मानवी को जोर का झटका लगा और वो तान्या से बोली, "नहीं तनु, मुझे किसी की सब्स्टिट्यूट नहीं बनना। प्लीज, कुछ कर।"

    तो तान्या बोली, "तभी तो कह रही हूँ, यहाँ से निकल, वरना आज तेरा बलि का बकरा बनना तय है।" उसकी बात सुनकर मानवी धीरे-धीरे उस कमरे से निकलने लगी, और तान्या भी चुपचाप उसके पीछे खिसकने लगी।

    कि तभी नानी की आवाज़ उनके क़दम रोक देती है। नानी तान्या और मानवी को रोकते हुए बोलीं, "रुको! तुम दोनों कहाँ जा रही हो? चुपचाप यहीं खड़ी रहो! जब तक हम लोगों की बात खत्म नहीं हो जाती, इस कमरे से कोई नहीं जाएगा!"

    फिर नवीन जी की तरफ़ देखते हुए बोलीं, "नवीन, तू कहे तो मैं कुछ कहूँ? मेरी नज़र में एक लड़की है, जो अनु की जगह ले सकती है, और उससे हमें कोई प्रॉब्लम भी नहीं!"

    तो नवीन जी खुश होते हुए बोले, "हाँ तो बुआ जी, जल्दी बताइए कौन है वो? मैं अभी उस लड़की से बात करता हूँ। वैसे भी ज़्यादा वक़्त नहीं है! कभी भी लड़के वालों की तरफ़ से यहाँ पर कोई भी आ सकता है!"

    नानी जी मानवी की तरफ़ देखते हुए बोलीं, "मेरे हिसाब से मानवी बिल्कुल परफेक्ट है अनु की जगह बैठाने के लिए।" उनकी बात सुनकर मानवी हैरान हो गई! साथ ही उसके हाथ-पैर काँपने लगे! वहीं वहाँ बैठे सब लोगों को जोर का झटका लगा, और सबकी नज़रें मानवी की ओर चली गईं जो उनकी ओर पीठ करके खड़ी थी!

    मानवी उनकी ओर पलटते हुए बोली, "नहीं नानी जी, मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली। शादी कोई गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है जो एक की जगह दूसरे को बैठा दिया। मैं ऐसा नहीं कर सकती। मैं यहाँ से जा रही हूँ।" इतना कहकर जाने लगी कि नानी आकर उसका हाथ पकड़ लेती हैं और उसे रोक लेती हैं। और मानवी से बोलीं, "मानवी, क्या तू हमारे लिए इतना भी नहीं कर सकती? हमने तुझे अपनी बेटी माना है, और तू भी तो हमें अपना परिवार मानती है, तो हमारे लिए बस इतना सा कर दे!"

    तभी आरती जी बीच में बोलते हुए बोलीं, "नहीं बुआ जी, आप ऐसा सोच भी कैसे सकती हैं? अपने फ़ायदे के लिए मानवी का इस्तेमाल करना, यह कहाँ तक सही है? उस बच्ची को हमने अपनी खुशियों में शामिल करने बुलाया है, अपनी खुशियों के लिए उसका बलिदान देने के लिए नहीं!"

    तभी पवन जी बीच में बोलते हुए बोले, "और क्या मानवी की जगह अगर बात तान्या की होती, तो भी आप इस तरह से उसे अनु की जगह बैठा देती?"

    तो नानी जी तुनक कर बोलीं, "हाँ, अगर मेरी तान्या रोहित के साथ इंगेज्ड नहीं होती, तो मैं ज़रूर अनु की जगह तान्या को बैठा देती। और वैसे भी मैं कौन सा मानवी को हमेशा के लिए अनु की जगह लेने को कह रही हूँ? मैं तो सिर्फ़ मंडप में बैठने के लिए कह रही हूँ। दीपक और छोटे दामाद जी अनु को ढूँढने गए हैं ना? जैसे ही वो मिल गई, हम मानवी को उसकी जगह से हटा देंगे। और अगर मंडप में इसकी शादी हो भी गई तो किसी को कुछ कहाँ पता चलेगा? क्योंकि इसने घूँघट कर रखा होगा तो किसी को भी कुछ भी पता नहीं चलेगा, और हमारी इज़्ज़त की इज़्ज़त रह जाएगी। तुम लोग को कुछ समझते क्यों नहीं?"

  • 5. Substitute bride - Chapter 5

    Words: 849

    Estimated Reading Time: 6 min

    नानी जी की बातों से नानी खुद को कमजोर महसूस करने लगी थीं, पर उस वक्त वे हार नहीं मान सकती थीं। साथ ही उन्हें पवन जी पर गुस्सा भी आ रहा था। इसीलिए गुस्से में नानी जी तुनक कर बोलीं, "हाँ, अगर मेरी तान्या रोहित के साथ इंगेज्ड नहीं होती, तो मैं जरूर अनु की जगह तान्या को बैठा देती। और वैसे भी मैं कौन सा मानवी को हमेशा के लिए अनु की जगह लेने को कह रही हूँ? मैं तो सिर्फ़ मंडप में बैठने के लिए कह रही हूँ। दीपक और छोटे दामाद जी अनु को ढूँढने गए हैं ना? जैसे ही वह मिल गई, हम मानवी को उसकी जगह से हटा देंगे। और अगर मंडप में इसकी शादी हो भी गई तो किसी को कुछ कहाँ पता चलेगा? क्योंकि इसने घूँघट कर रखा होगा तो किसी को भी कुछ भी पता नहीं चलेगा, और हमारी इज़्ज़त की इज़्ज़त रह जाएगी। तुम लोग को कुछ समझते क्यों नहीं?"

    उनकी बात पर पवन जी और आरती जी चुप हो गए, क्योंकि उनके पास कोई जवाब ही नहीं था। तभी तान्या कुछ कहने वाली थी कि बुआ जी उसे चुप कराते हुए बोलीं, "तुम चुप करो। बड़ों के बीच में छोटे नहीं बोला करते!"

    तभी मानवी आगे आते हुए बोली, "लेकिन मैं तो बोल सकती हूँ नानी जी। भले ही वो लोग बड़े हैं, लेकिन मैं तो नहीं। आप जानती हैं, मैं अनाथ हूँ। अगर आपकी बात मानकर मैं मंडप पर बैठ भी गई, और आगे चलकर उन लोगों को पता चला कि उनके बेटे की शादी किसी अनाथ लड़की से हो गई है, तो वो लोग गुस्सा तो मुझ पर ही करेंगे। ऐसे में हम तो उनका सामना भी नहीं कर पाएँगे, और मैं अपनी सुनैना काकी को क्या जवाब दूँगी? उनके लिए तो शादी-ब्याह का क्या मतलब है, यह तो आप भी जानती हैं।"

    अब मानवी की बातों के आगे नानी जी कमजोर पड़ रही थीं। तो उन्होंने नवीन जी को आँखों ही आँखों में कुछ इशारा किया। उनका इशारा पाकर नवीन जी ने अपने पास बैठी अनीता जी को इशारा किया। उनका इशारा पाकर दोनों उठकर मानवी के पास आए, और मानवी के आगे अपने हाथ जोड़ते हुए बोले, "प्लीज़ मानवी बेटा, बुआ जी की बात मान लो। इस वक़्त तुमसे ज़्यादा भरोसेमंद लड़की हमारी नज़र में कोई नहीं है। मैंने तुम्हें अपनी बेटी माना है। तो क्या आपने पिता समान अंकल की इज़्ज़त को ऐसे ही नीलाम होने दोगी? मेरी अपनी बेटी ने तो मुझे कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। इसीलिए आज हमारे आगे हाथ जोड़कर तुमसे विनती करता हूँ, प्लीज़ इस शादी के लिए तैयार हो जाओ। अब मेरी इज़्ज़त और मेरी कंपनी तुम्हारे हाथ में है! जिसे तुम ही बचा सकती हो।" इतना कहकर अपनी पगड़ी उतारकर उसके कदमों में रख देते हैं। अनीता जी भी मानवी के आगे हाथ जोड़ते हुए बोलीं, "हाँ मानवी बेटा, प्लीज़ हमारी इज़्ज़त को बचा ले। वो लोग बहुत बड़े हैं। अगर उन लोगों की हमारी वजह से बेइज़्ज़ती हुई तो वो लोग हमें भी नहीं छोड़ेंगे। नाम-इज़्ज़त जाएगी तो जाएगी, वो लोग तेरे अंकल को जेल में भी भिजवा देंगे, क्योंकि हमारी वजह से ही उनकी बहुत बेइज़्ज़ती होगी। इसलिए हमारी बात मान ले।" इतना कहकर उसके आगे अपना सर झुका लेती हैं।

    अब उनकी बात से मानवी कशमकश में फँस गई थी। उसने पवन जी को देखा जो उसे ही देख रहे थे। फिर आरती जी को देखा जिनकी आँखों में भी आँसू भरे थे। इन दोनों को देखकर वह कमजोर पड़ने लगी, क्योंकि एक वक़्त पर जब सुनैना काकी को हार्ट अटैक आया था, तब पवन जी और आरती जी ने ही मानवी को सपोर्ट किया था। काकी के इलाज के सारे पैसे पवन जी ने भरे थे। वही जब तक काकी हॉस्पिटल में थी, आरती जी ने ही उनकी गैर-हाज़िरी में पूरे अनाथ आश्रम को संभाला था। ऐसे में वह इनके परिवार का सर कैसे झुकने दे सकती थी? उसने अपने आप को मज़बूत किया और नवीन जी की तरफ़ देखते हुए बोली, "ठीक है, मैं शादी के लिए तैयार हूँ, लेकिन अगर अनु दी इस शादी के बाद भी नहीं मिलती है, तो भी मैं एक पल यहाँ नहीं रुकूँगी। शादी के बाद तुरंत ही मैं यहाँ से चली जाऊँगी, और आपको मुझसे वादा करना होगा कि आप कभी भी इस शादी में मेरा नाम उन लोगों के सामने नहीं आने देंगे।"

    तो बुआ जी, नवीन जी और अनीता जी तीनों एक-दूसरे को देख मुस्कुरा देते हैं, क्योंकि उनका इमोशनल ब्लैकमेल काम कर गया था। और नवीन जी मानवी से बोले, "आई प्रॉमिस बेटा, मैं तुम्हारा नाम कभी सामने नहीं आने दूँगा कि मेरी बेटी की जगह तुम्हारी शादी ऋषभ से हुई थी!"

    मानवी अपने दिल में अंदर से इतनी टूट चुकी थी कि उसने नवीन जी के द्वारा लिए गए वादे पर बिलकुल ध्यान ही नहीं दिया, बस फीका सा मुस्कुरा दी।

  • 6. Substitute bride - Chapter 6

    Words: 979

    Estimated Reading Time: 6 min

    नीचे मंडप में बैठा ऋषभ परेशान हो रहा था। उसे शादी करनी ही नहीं थी, और जिस लड़की से उसकी शादी हो रही थी, वह इतनी देर से आई कि मानो कहीं की महारानी हो। इसी बात से ऋषभ चिढ़ रहा था।

    मेहमान बातें बनाना शुरू कर चुके थे। मीडिया उन बातों में मिर्च-मसाला लगाने में जुटी हुई थी। शिवम और जानवी जी बहुत परेशान हो गए थे। उन्होंने अपनी बेटी दीपिका से कहा, "दीपिका बेटा, देखो नवीन जी कहाँ हैं? और तुम्हारी भाभी अभी तक आई क्यों नहीं? उसे इतनी देर क्यों लग रही है? कोई प्रॉब्लम है क्या?"

    दीपिका ने कहा, "जी पापा, मैं देखकर आती हूँ।" वह जाने लगी, तभी उसकी नज़र सामने सीढ़ियों पर पड़ी। वह खुश होते हुए शिवम जी से बोली, "पापा, देखिए भाभी आ गईं।" उसकी बात सुनकर सब लोग उस तरफ देखने लगे।

    डार्क पिंक कलर के, गोल्डन वर्क वाले लहंगे में, फुल घूंघट किए हुए मानवी धीरे-धीरे चलकर आ रही थी। झीने दुपट्टे की जगह हेवी दुपट्टा इस्तेमाल किया गया था ताकि उसका चेहरा न दिखे। फिर भी, डार्क पिंक लहंगे में उसका गोरा रंग रात की डिम लाइट में वाइट रोज़ की तरह चमक रहा था। उसका फिगर बिल्कुल परफेक्ट था, किसी मॉडल जैसा। सब लोग उसका चेहरा देखने के लिए बेताब हो रहे थे। ऋषभ ने उसे एक नज़र देखा, तो देखता ही रह गया, लेकिन फिर उसने अपना सिर झटक दिया।

    घूंघट के अंदर मानवी के आँसू बह रहे थे, लेकिन किसी को उसकी कोई चिंता नहीं थी। आज उसे सुनैना जी की कही बात याद आ रही थी। जब उसने पहली बार तान्या से दोस्ती की थी, तब सुनैना जी ने उससे कहा था, "बेटा, ज़्यादा पैसे वालों से मेलजोल मत बढ़ाना। ये लोग बहुत मतलबी होते हैं। जब तक इनका फायदा होता है, तब तक तुम्हारे साथ रहते हैं। जैसे ही इनका मतलब पूरा हो जाता है, ये तुम्हें बीच मझधार में छोड़कर चले जाते हैं। इनसे जितना दूर रहोगी, उतना ही अच्छा होगा।" लेकिन पवन जी और आरती जी के व्यवहार ने सुनैना जी के विचारों को गलत साबित कर दिया था। लेकिन आज मानवी को वही बातें सच लग रही थीं। भले ही इन लोगों ने मानवी को कितना भी प्यार किया हो, लेकिन आज समय आने पर उससे दुगुना वसूल कर रहे थे, इतना कि उससे किसी और से प्यार करने का हक ही छीन ले रहे थे।

    अनीता जी मानवी को ऋषभ के बगल खड़ा कर देती हैं। ऋषभ भी उठकर खड़ा हो जाता है। दो लड़कियाँ उनके पास वरमाला लेकर आती हैं। अनीता जी एक वरमाला उठाकर मानवी को पकड़ा देती हैं और कहती हैं, "अनु बेटा, पहले तुम डालोगी, इसलिए इसे अपने हाथ में रखो।" उन्होंने वरमाला मानवी के हाथ में थमा दी। ऋषभ भी अपनी वरमाला उठा लेता है। मानवी जैसे ही वरमाला डालने जाती है, वह डाल नहीं पाती क्योंकि ऋषभ उससे काफी लंबा था। ऋषभ जानबूझकर और तनकर खड़ा हो गया था क्योंकि मानवी की वजह से उसे बहुत इंतज़ार करना पड़ा था, और वह बदला लिए बिना नहीं रह सकता था। शिवम जी आगे आकर ऋषभ को डाँटते हुए धीरे से कहते हैं, "क्या कर रहा है नालायक? क्यों बिचारी को परेशान कर रहा है? चुपचाप माला डलवा ले और शादी कर ले, वरना पूरी प्रॉपर्टी ट्रस्ट में जाने के लिए तैयार है!" उनकी बात सुनकर ऋषभ उन्हें गुस्से में घूरता है, फिर चुपचाप थोड़ा नीचे झुक जाता है। मानवी उसकी गर्दन में माला डाल देती है। इसी तरह ऋषभ भी उसे माला पहना देता है। दोनों हवन कुंड के आगे बैठ जाते हैं। पंडित जी मंत्र पढ़ने लगते हैं।

    दोनों ही शादी के पवित्र बंधन में बंध रहे थे, लेकिन दोनों ही इस रिश्ते से खुश नहीं थे। एक किसी और से प्यार करता था, दूसरी किसी और की जगह पर बैठी हुई थी। धीरे-धीरे पंडित जी ने सारी विधियाँ पूरी करनी शुरू कर दीं और मानवी और ऋषभ को फेरे लेने के लिए कहा। ऋषभ उठकर खड़ा हो गया, लेकिन मानवी खोई हुई सी वहीं बैठी थी। अनीता जी फीकी हँसी हँसते हुए मानवी के पास आईं और उसे उठाकर खड़ा कर दिया। पहले ऋषभ आगे चलने लगा, और उसके पीछे मानवी। चार फेरे पूरे हुए, तो पंडित जी ने मानवी को आगे आने को कहा। मानवी जैसे ही आगे आने लगी, उसका पैर लड़खड़ा गया, पर तभी ऋषभ ने उसके हाथों को पकड़कर उसे संभाल लिया।

    मानवी के कोमल हाथों का स्पर्श जैसे ही ऋषभ को अपने हाथों में महसूस हुआ, उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा, धड़कनें असामान्य हो गईं। इसी बीच ऋषभ की नज़र मानवी के हाथ पर पड़ी। उसकी कलाई पर ओम का कड़ा था, और उसकी हथेली में तिल बना हुआ था। तभी अनीता जी आकर मानवी को ऋषभ से अलग कर देती हैं और मानवी को ऋषभ से आगे कर देती हैं। ऋषभ चुपचाप उसके साथ सात फेरे लेने लगा। फेरों के बाद वे लोग बैठ गए। पंडित जी ने मंगलसूत्र और सिंदूर ऋषभ के आगे कर दिया। ऋषभ ने आराम से मंगलसूत्र पहना दिया। सिंदूर के लिए जैसे ही पंडित जी ने मानवी को घूंघट उठाने को कहा, मानवी के साथ-साथ सभी लोग घबरा गए। अनीता जी आगे आकर कहती हैं, "अरे नहीं, घूंघट नहीं उठ सकता।"

    अनीता जी की बात सुनकर सभी लोग हैरान रह गए और उनकी तरफ देखने लगे।

  • 7. Substitute bride - Chapter 7

    Words: 1084

    Estimated Reading Time: 7 min

    उनकी बात सुनकर लड़के वाले सभी लोग हैरानी से उनकी ओर देखने लगे। अनीता जी हँसते हुए बोलीं, "अरे, वह हमारे घर की रस्म है। अगर एक बार लड़की शादी के मंडप में घूंघट डालकर बैठ जाए, तो फिर वह घूंघट ससुराल में ही खुलता है। उससे पहले मायके में खोलना अशुभ माना जाता है।" सब लोग हामी भर गए। अनीता जी आगे आकर मानवी के घूंघट को थोड़ा चौड़ा किया। ऋषभ उसके घूंघट में हाथ डालकर उसकी मांग भर दी। तभी मानवी की आँखों से आँसू निकलने लगे जो ऋषभ के हाथ पर गिर गए। ऋषभ जैसे ही हाथ निकालकर देखा, उसके हाथ पर पानी की बूँदें ठहरी हुई थीं।


    ऋषभ मन ही मन सोचा, "शादी तो मेरी मर्ज़ी के खिलाफ़ हो रही है, तो रोना मुझे चाहिए था, यह क्यों रो रही है? क्या पता, इन लड़कियों का तो जब देखो रोना-धोना लगा रहता है! और इसे तो अब मैं छोड़ने वाला नहीं हूँ। मना किया था शादी ना करे, फिर भी यह लड़की नहीं मानी।" इतना कहकर उसने अपना सिर झटक दिया।


    तभी पंडित जी घोषणा की, "यह शादी संपन्न हुई। अब से आप दोनों पति-पत्नी हुए। जाकर सभी बड़ों का आशीर्वाद ले लीजिए।" और खुद उठकर भोजन की ओर चल दिए। सभी रिश्तेदार भी खाने पर टूट पड़े। ऋषभ और मानवी सबका आशीर्वाद ले रहे थे। अनीता जी मानवी को चुपचाप कमरे में ले जाने लगीं। तभी किसी ने उन्हें आवाज़ दी। अनीता जी मानवी से बोलीं, "बेटा, तुम जल्दी से यहां से ऊपर चली जाओ। मुझे अब यह काम है। बस थोड़ी देर रुक जाओ, फिर देखते हैं आगे क्या करना है।"


    वह पूरा हॉल खाली हो चुका था क्योंकि सब लोग खाने के लिए गार्डन की ओर चले गए थे। मानवी हॉल से होते हुए ऊपर अपने कमरे में जा रही थी कि तभी पीछे से किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया। इससे मानवी की धड़कनें बढ़ गईं और उसकी साँसें तेज चलने लगीं, जो पीछे खड़े शख्स को भी सुनाई दे रही थीं।


    उस शख्स ने मानवी के हाथ को पीछे मोड़ते हुए उसकी पीठ से लगा दिया। इससे मानवी को दर्द हुआ और उसकी जोर से आह निकल गई। वह शख्स गुस्से में बोला, "मना किया था ना तुमसे कि शादी के लिए मना कर दो, लेकिन तुम नहीं मानी। बहुत शौक चढ़ा है ना, ऋषभ सहगल से शादी करने का, अनुष्का शर्मा! इसीलिए मंडप पर आकर बैठ गई। लेकिन अब शादी तो हो गई, अब तुम बहुत पछताओगी, क्योंकि अब तुम ऋषभ सहगल का वह रूप देखोगी जिससे पूरी मुंबई काँपती है।"


    (जी हाँ, यह ऋषभ ही था जो सभी को बाहर जाते और मानवी को अकेला देखकर उसके पास आ गया था और उस पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहा था।)


    तभी उसके कानों में मानवी की मीठी सी आवाज़ पड़ी। मानवी दर्द से तड़पते हुए ऋषभ से बोली, "प...प्लीज...मेरा हाथ...छोड़ दीजिए, मुझे दर्द हो रहा है।"


    एक पल के लिए ऋषभ उसकी आवाज़ में खो गया, लेकिन फिर अपना सिर झटककर मानवी को एकदम से पलटते हुए दीवार की ओर धकेल दिया और उसे अपने से सटा लिया। उसने मानवी के दोनों हाथों को उसकी पीठ से लगाकर अपने एक हाथ में पकड़ लिया और दूसरे हाथ से मानवी का चेहरा, पीछे से सर को पकड़कर ऊपर किया हुआ था। वह मानवी से कुछ कहने वाला था कि मानवी के थरथराते होठों को देखते ही रह गया।


    क्योंकि इन सब में मानवी का घूंघट उसके चेहरे से काफी ऊपर खिसक गया था। मानवी के सुर्ख गुलाबी होठ, जिन पर डार्क रेड लिपस्टिक लगी थी, और उसकी नाक में डली बड़ी सी नथ, जिसका मोती उसके होठों के काँपने की वजह से उसके होठों को बार-बार छू रहा था, यह सब ऋषभ को अपनी ओर बहुत आकर्षित कर रहा था। तभी ऋषभ की नज़र मानवी के होठों के नीचे राइट साइड बने तिल पर पड़ी। उसे देखकर उसका गला सूखने लगा। साथ ही मानवी के बदन से आती खुशबू उसे मदहोश कर रही थी। पहली बार वह किसी को देखकर इस कदर आकर्षित हो रहा था कि उसका खुद पर से नियंत्रण हट रहा था।


    उसने मानवी के सर के पीछे से अपने हाथ को निकाल लिया और धीरे-धीरे मानवी के चेहरे की ओर ले जाने लगा। उसने अपने अंगूठे से मानवी के होठों को छुआ। उसकी इस हरकत से मानवी के पूरे बदन में सिहरन दौड़ गई। वह एकदम बर्फ की तरह अपनी जगह पर जम गई। वहीं ऋषभ धीरे-धीरे उसका घूंघट उठा रहा था। जैसे ही उसने मानवी के चेहरे से घूंघट उठाया, उसकी नज़रें मानवी की काली कजरारी आँखों से मिलीं। इससे उसका दिल जोरों से धड़कने लगा। तभी तेज हवा के साथ एक खिड़की खुल गई। इससे ऋषभ का ध्यान भटक गया और उसकी पकड़ मानवी के हाथों पर ढीली हो गई। इसका फायदा उठाकर मानवी ने उसे धक्का दिया और वहाँ से भागने लगी। ऋषभ जो उसके धक्के से पीछे हो गया था, उसे भागते देख वह भी उसके पीछे भागने लगा।


    चारों ओर रंग-बिरंगे लाइट्स और पर्दे लगे हुए थे। मानवी भागते हुए कॉरिडोर में आ गई और एक लाल रंग के पर्दे के पीछे छुप गई। वहीं ऋषभ भी भागते हुए कॉरिडोर में आ गया था और मानवी से दो-तीन पर्दे दूर खड़ा था। मानवी ने अपने आप को एकदम स्थिर कर लिया जिससे उसकी चूड़ियों और पायलों की आवाज़ ऋषभ तक न पहुँचे। ऋषभ को जब मानवी नहीं मिली तो वह वहाँ से बाहर जाने लगा। तभी एकदम से मानवी पीछे का दरवाज़ा खोलते हुए वहाँ से भाग निकली। उसकी पायलों की आवाज़ सुनकर ऋषभ भी उसके पास आया, पर तब तक मानवी भाग चुकी थी। ऋषभ वहाँ से वापस जाने लगा कि तभी उसकी नज़र जमीन पर गिरी पायल पर पड़ी। ऋषभ ने उसे उठा लिया और अपने हाथों में देखते हुए कहा, "तो मैडम खुद तो भाग गई, लेकिन अपनी निशानी यही छोड़ गई! कोई बात नहीं, भागकर जाओगी कहाँ? आना तो मेरे पास ही है। तब तुम्हें बताऊँगा कि ऋषभ सहगल क्या चीज है! तब तुम्हें एहसास होगा कि मेरी मर्ज़ी के खिलाफ़ जाना क्या होता है!" इतना कहकर मुस्कुराते हुए उसने उस पायल को अपनी जेब में रखकर वहाँ से चला गया।


    जारी है।

  • 8. Substitute bride - Chapter 8

    Words: 987

    Estimated Reading Time: 6 min

    मानवी भागती हुई ऊपर अपने कमरे में पहुँची। वहाँ उसे तान्या मिली। उसने मानवी को यूँ हाँफते हुए देखा तो उसने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और मानवी से बोली, "क्या हुआ मानवी? तू इस तरह से घबराई हुई क्यों है?"

    मानवी ने पहले अपनी बढ़ी हुई साँसों को सामान्य किया और फिर तान्या से बोली, "तान्या, वह नीचे..." उसने ऋषभ के साथ हुई सारी बातें तान्या को बता दीं। जिसे सुनकर तान्या भी हैरान रह गई।

    तभी वह कुछ सोचकर मानवी से बोली, "देख मानवी, नीचे जो भी बातें हुईं या उसने तेरा चेहरा देखा, यह बात तू किसी को मत बताना, वरना खा मा खा सब लोग तुझ पर गुस्सा करेंगे। इसीलिए जो हुआ, उस पर अपने मुँह पर ताला लगा ले। और अनुष्का दीदी मिल गई हैं, यह सब उन्हीं की वजह से हुआ है। मैं तो कहती हूँ तू अभी यहां से निकल, मैं भी तेरे साथ चलती हूँ। अगर यहां ज़्यादा देर रुकीं तो कहीं और परेशानी में ना फँस जाएँ। मैंने सुनैना काकी से वादा किया था कि तुझे सही-सलामत उनके पास पहुँचा दूँगी। इसीलिए मैंने तो बैग भी पैक कर लिए हैं, बस तेरा इंतज़ार कर रही थी। चल, हम यहां से अभी चंडीगढ़ वापस चलते हैं, सुबह तक तो पहुँच ही जाएँगे। भाड़ में जाएँ लोग, हम तो यहां मौज-मस्ती करने आए थे और इन लोगों ने हमारी ही वाट लगा दी।"

    मानवी कुछ कहती, उससे पहले उसकी नज़र आईने में दिख रहे अपने अक्स पर पड़ी। उसकी मांग में भरा हुआ सिंदूर, गले में पहना हुआ मंगलसूत्र जो चीख-चीख कर गवाही दे रहा था कि अब वह किसी की पत्नी है, लेकिन सिर्फ़ नाम के लिए। मानवी अब अपने आप को कमज़ोर महसूस कर रही थी।

    उसने अपने मन में कहा, "नहीं मानवी, तुझे कमज़ोर नहीं होना है! भूल मत, तू अनाथ है। तुझ में तो किसका खून है, यह भी तुझे नहीं पता? और ऐसे लोगों की किस्मत में शादी-ब्याह, प्यार-मोहब्बत कुछ नहीं होता। यह शादी भी सिर्फ़ एक दिखावा है और कुछ नहीं। कोई जानता तक नहीं कि मंडप में अनु दीदी की जगह तू थी। यह सिंदूर, यह मंगलसूत्र, इन सब पर दीदी का हक़ है, ना कि मेरा। मुझे तो बस दीदी की गैर-मौजूदगी में उनकी जगह इस्तेमाल किया गया है। और सही भी है, हम लोगों को लोग सिर्फ़ इस्तेमाल ही कर सकते हैं, उन्हें प्यार-मान-सम्मान नहीं दे सकते, क्योंकि हमारे तो घर-परिवार का पता ही नहीं।" यह सब सोचते हुए उसकी आँखें नम हो गई थीं।

    उसने अपने आप को मज़बूत किया और मंगलसूत्र और शादी का जोड़ा उतार कर वहीं रख दिया और अपने कैज़ुअल कपड़े पहनकर मांग का सिंदूर साफ़ कर दिया। फिर आईने में अपने आप को देखा, जिसमें वह पहले रूप में नज़र आ रही थी और अपने होठों पर एक प्यारी सी मुस्कराहट लाकर तान्या के साथ वहाँ से निकल गई। अपने नए सफ़र की ओर, जो अब उसे कहाँ ले जाने वाला था, इसका अंदाज़ा किसी को भी नहीं था।


    एक महीने बाद, सुनैना काकी सोफ़े पर बैठी हुई रो रही थीं और मानवी उन्हें चुप करा रही थीं। काकी गुस्सा करते हुए बोलीं, "तूने मुझे पहले क्यों नहीं बताया और अब बता रही है इस बात को? मैं तेरे बिना यहां अकेले क्या करूँगी?"

    मानवी उन्हें मनाते हुए बोलीं, "ओहो काकी, आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे मैं हमेशा के लिए आपको छोड़कर जा रही हूँ। अरे, तीन-चार महीनों की बात है, फिर तो मुझे वापस आना है ना आपके पास। अगर ज़रूरी नहीं होता तो मैं बिल्कुल नहीं जाती।"

    काकी गुस्सा करते हुए बोलीं, "पर तुझे ऐसी जॉब करने की ज़रूरत ही क्या है? जहाँ अभी जॉब करती थी, उसमें क्या बुराई थी? अच्छा-ख़ासा घर चल तो रहा था, फिर तुझे हमसे दूर जाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?"

    मानवी उनके पैरों के पास बैठकर उन्हें समझाते हुए बोलीं, "बेहक काकी, उन पैसों से हमारा घर अच्छे से चल रहा था! लेकिन सेविंग के लिए कुछ नहीं बच रहा था। आप जानती हैं, जब बच्चे बड़े होंगे तो उनके लिए ख़र्चे भी होंगे और हमारी ज़रूरतें भी अब बढ़ रही हैं। आप बीमार रहती हैं और अभी तक पवन अंकल के पैसे भी नहीं चुका पाई हैं, जो उन्होंने आपके ऑपरेशन के वक़्त दिए थे। तो इस तरह से मैं कब तक इस जॉब के भरोसे रहती? और इस जॉब में मुझे इतने पैसे मिल रहे हैं कि हम आराम से अपना घर भी मैनेज कर सकते हैं और सेविंग भी कर सकते हैं! तो इसमें बुरा ही क्या है?"

    काकी उसकी बात से मान गईं और फिर उसकी बात पर सहमत होते हुए बोलीं, "ठीक है, तू कह तो सही रही है, लेकिन तुझे कोई परेशानी तो नहीं होगी ना? और हमें फोन करके बताती रहियो अपना हाल-चाल और तू मुंबई में रहेगी कहाँ?"

    मानवी बोली, "वैसे तो पवन अंकल के घर रहूँगी! तान्या ने कहा है कि वह मुझे कहीं और जाने नहीं देगी। लेकिन अपने काम की वजह से मुझे एक असिस्टेंट के तौर पर उस मॉडल के साथ ही रहना होगा। जहाँ-जहाँ वह जाएँगी, वहाँ-वहाँ मुझे भी जाना होगा! तो ज़रूरी सामान अपने साथ रखूँगी, बाकी तान्या के घर रखा रहेगा।"

    काकी बोलीं, "ठीक है। तुझे कब निकलना है? इन बच्चों को भी समझा दे ताकि तेरे जाने के बाद मुझे परेशान ना करें!"

    मानवी उनके गले लगते हुए बोलीं, "आज शाम को ही निकलना है और आप चिंता मत करो, ये आपको बिल्कुल परेशान नहीं करेंगे!" इतना कहकर बच्चों के पास चली जाती है और उन्हें अपने जाने के बारे में बताने लगती है। बच्चे थोड़े उदास होते हैं, लेकिन जब मानवी कहती है कि वह लौटते हुए उनके लिए अच्छे-अच्छे गिफ्ट लाएगी, तो सभी खुश हो जाते हैं।

  • 9. Substitute bride - Chapter 9

    Words: 909

    Estimated Reading Time: 6 min

    मानवी वहाँ से उठकर अपने कमरे में गई और दरवाज़ा बंद कर वहीं खड़ी होकर कुछ देर गहरी साँसें लीं। उसने मन ही मन कहा, "नहीं मानवी, तुझे कमज़ोर नहीं बनना है। भले ही मुंबई में पहले कुछ भी हुआ हो, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा। तू बस अपने काम से जाएगी और अपने काम को खत्म करके वापस आ जाएगी। तुझे उन लोगों से कोई मतलब नहीं है, वो चाहे कुछ भी करें। और वो शादी, मैं उसे शादी नहीं मानती। मैंने तो जिससे शादी हुई, उसका चेहरा तक ठीक से नहीं देखा। तो फिर इस शादी को कैसे मानूँ? और अब तो उन लोगों को भी कोई फर्क नहीं पड़ता होगा क्योंकि किसी को पता ही नहीं कि मंडप में अनु दी की जगह तू थी। तो फिर तुझे उन लोगों से क्या करना? वो लोग तो अपनी अच्छी-खासी ज़िन्दगी जी रहे होंगे।" यह सब सोचते-सोचते उसकी आँखें नम हो गईं।

    उसने आँसू पोंछे और अपना सामान पैक करने लगी। क्योंकि सच तो यही था कि किसी ने उसके बारे में, उसकी भावनाओं के बारे में कुछ नहीं सोचा था। बस जो मन आया, वो किया। जब मन किया, उसे शादी के मंडप में बिठा दिया। और अनुष्का के आने के बाद सब कुछ अनुष्का को सौंप दिया गया। और किसी ने पलट कर उससे एक बार भी नहीं पूछा कि वह कैसी है, क्या कर रही है? इसीलिए कहते हैं लोग कि दुनिया बहुत मतलबी है! जब तक अपना फायदा हो, साथ देती है! जैसे ही मतलब ख़त्म, तो उसका साथ भी ख़त्म...!

    मानवी ने अपना सामान पैक करके एक तरफ़ रख दिया और बाहर निकलकर बच्चों के साथ खेलने लगी, क्योंकि अब वह समय कब आना था, यह तो उसे भी नहीं पता था।


    वहीं दूसरी तरफ़, मुंबई के सहगल हाउस में, ऋषभ फ़ोन पर किसी से बात कर रहा था। इस घर में वह अकेला ही रहता था। उसके माता-पिता और बहन दूसरे मेंशन में रहते थे। दादा-दादी अपने गाँव में रहते थे, जो शादी में भी अपनी बीमारी के चलते नहीं आ पाए थे। ऋषभ और अनुष्का शादी के बाद से ही इस मेंशन में अकेले रह रहे थे क्योंकि सब ने किसी भी रस्म या पार्टी को करने से मना कर दिया था। यहाँ तक कि मीडिया में भी अभी तक अनुष्का का चेहरा नहीं दिखाया गया था।

    ऋषभ बात करके पीछे पलटा तो अनुष्का उसके लिए कॉफ़ी लेकर खड़ी थी। ऋषभ उसे अनदेखा करके जाने लगा कि तभी अनुष्का उसके सामने आ गई और बोली, "इस तरह अनदेखा करके जाने की क्या वजह है, मिस्टर ऋषभ? क्या मैं जान सकती हूँ? एक महीने से हम दोनों इसी घर में एक-दूसरे से अलग, लेकिन दुनिया वालों के सामने पति-पत्नी बनकर रह रहे हैं! तो क्या घर में दोस्त बनकर नहीं रह सकते? वैसे भी मैंने तो तुम्हारी ही बात मानी है। तुमने कहा था तुमसे शादी ना करूँ, तो देखो, तुमसे शादी नहीं की। फिर किस बात की नाराज़गी?"

    ऋषभ उसकी ओर पलटते हुए बोला, "किसने कहा मैं तुमसे नाराज़ हूँ! और तुम कौन हो? क्या रिश्ता है मेरा तुमसे, जो मैं तुमसे नाराज़ होऊँगा! बात सिर्फ़ इतनी है कि ना तो मुझे तुमसे दोस्ती करनी है, और ना ही तुम्हें अपनी पत्नी बनाना है। और वैसे भी, शादी की मानें तो मेरी पत्नी कोई और है, ना कि तुम। तो फिर घर में तुम्हें यह दिखावा करने की कोई ज़रूरत नहीं है! तुम और मैं साथ सिर्फ़ अपनी प्रॉब्लम की वजह से हैं। जैसे ही हमारी प्रॉब्लम ख़त्म होती है, हम दोनों अपने-अपने रास्ते चले जाएँगे। तो तब तक मुझसे दूर रहो, वरना मॉम-डैड को पता है कि मैं किसी और से प्यार करता हूँ। लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि तुमने अपनी जगह शादी के मंडप में किसी और लड़की को बैठा दिया था, अपनी सब्स्टिट्यूट बनाकर, और उससे मेरी शादी करा दी। तो मॉम-डैड को दो पल नहीं लगेंगे तुमसे नफ़रत करने में और तुम्हें घर से निकालने में। सो, स्टे अवे फ्रॉम मी।"

    उसकी बात सुनकर अनुष्का घबरा गई और ऋषभ से दूर होते हुए बोली, "ओके, ओके, बट मैंने कहा ना, उस लड़की को उसकी पूरी पेमेंट मिल गई है! वो कभी भी इस शादी का ज़िक्र किसी से नहीं करेगी। इससे तुम्हारी फैमिली को कोई खतरा नहीं है।"

    ऋषभ गुस्से से बोला, "तुम जानती भी हो तुमने क्या किया है? एक बार ऐसा करने से पहले मुझसे पूछ तो लेती! मैंने तुमसे पहले ही मना किया था शादी करने के लिए, तो तुम्हें ज़रूरत क्या थी किसी और को अपनी जगह मंडप पर बैठाने की? तुमने भले ही मुझसे शादी ना की हो, लेकिन किसी और से तो मेरी शादी करा दी। जिसका नाम पता मुझे कुछ नहीं पता, सिवाय उसके चेहरे के। अगर कल को उस लड़की को मेरे स्टेटस के बारे में पता चला और उसने मेरे ऊपर कोई ब्लेम गेम खेला, तो उसका ज़िम्मेदार सिर्फ़ तुम होगी, और तुम्हारा परिवार, जिसने जिस कंपनी को बचाने के लिए इतना कुछ किया है, वह दिवालिया हो जाएगी। इसकी गारंटी मैं लेता हूँ। फिर तुम और तुम्हारा परिवार रोड पर ना आएँ तो कहना।"

    इतना कहकर गुस्से में वहाँ से चला गया। वहीं अनुष्का अपने पैर पटकती हुई अपने कमरे में पहुँच गई।

  • 10. Substitute bride - Chapter 10

    Words: 836

    Estimated Reading Time: 6 min

    ऋषभ वहाँ से निकल कर अपने कमरे में आया और तैयार होने लगा। कि तभी फिर से उसका फ़ोन बजने लगा। उसने स्क्रीन की तरफ़ देखा, जिस पर दीपिका का फ़ोन शो हो रहा था। उसने कॉल पिक की और कुछ बोलने लगा, कि उधर से दीपिका की आवाज़ आने लगी।

    "भाई आप तो भाभी और अपने में इतने बिज़ी हो गए हो, कि ना कॉल करते हो और ना ही हमसे बात करते हो। मुझे नहीं पता, या तो आप भाभी को लेकर यहाँ हमसे मिलने आओ या फिर मैं और माँ वहीं पर आपसे मिलने आ रहे हैं! माँ भी आपके मिलने की जिद कर रही है।"

    तो ऋषभ, अलमारी से अपनी शर्ट निकालते हुए बोला, "तुम लोगों को आना है तो आ जाओ, मैं तो नहीं आ रहा हूँ। और शायद घर पर भी ना मिलूँ। आज शाम मेरी ज़रूरी मीटिंग है, इसीलिए शायद रात में देर हो जाए। वैसे भी तुम अपनी भाभी से मिलना चाहती हो, मुझसे नहीं। जब मुझसे मिलना हो तब बता देना, टाइम निकाल लूँगा। अभी रखता हूँ, मुझे देर हो रही है।" इतना कहकर उसने कॉल काट दी।

    और तैयार होने लगा।

    दूसरी तरफ़ दीपिका अपने मन में सोचने लगी, "जानती हूँ भाई आप इस शादी से खुश नहीं है! मुझे भी अनुष्का भाभी पसंद नहीं, पर क्या कर सकते हैं? पापा के आगे हम दोनों की चली ही कब है। और मैंने तो हमेशा से ही निशा को अपनी भाभी के रूप में देखा है, क्योंकि आप उसे पसंद करते हैं। पर क्या कर सकते हैं, अब जो सच है उसे बदल तो नहीं सकते। अब अनुष्का भाभी को एक्सेप्ट करना ही होगा।"

    इतना कहकर उसने अपनी माँ से मुस्कुराते हुए कहा, "माँ तैयार रहना, भाई तो मीटिंग में होंगे, लेकिन भाभी के साथ हम लोग खूब गप्पे लगाएँगे। अब अभी तैयार होते हैं, शाम तक वापस आ जाएँगे।" इतना कहकर वह अपने कमरे में चली गई।

    थोड़ी देर में दोनों ऋषभ के घर पहुँच गईं और अनुष्का के साथ बातें करने लगीं। वहाँ दीपिका को अनुष्का कुछ बदली-बदली नज़र आ रही थी! और हाइट भी लंबी लग रही थी। जैसे शादी के टाइम जो अनुष्का थी, वो ये नहीं है। जब दीपिका से रहा नहीं गया तो उसने अनुष्का से पूछ ही लिया।

    "भाभी एक बात पूछूँ, अगर आप बुरा ना माने तो?"

    तो अनुष्का मुस्कुराते हुए बोली, "जी पूछिए।" हालाँकि उसे अंदर ही अंदर डर लग रहा था कि कहीं कोई समस्या तो नहीं?

    तभी दीपिका ने उससे कहा, "भाभी शादी के टाइम आपका फिगर एकदम परफेक्ट था, मतलब ज़्यादा मोटा-पतला नहीं था और अभी आप पहले से पतली लग रही हो! इतना ही नहीं आपका स्किन कलर भी थोड़ा डसकी लग रहा है, और हाइट भी ज़्यादा लग रही है, ऐसा क्यों?"

    उसकी बात सुनकर अनुष्का घबरा गई कि कहीं उसकी चोरी पकड़ी ना जाए। फिर उसने अपने आप को संभाल कर मुस्कुराते हुए जवाब दिया और दीपिका से बोली, "ऐसा कुछ नहीं है। उस दिन मैंने हील्स नहीं पहनी हुई थीं। एक्चुअली लहंगे की वजह से मुझे डर लग रहा था कि हील्स पहनने की वजह से मैं गिर ना जाऊँ। और यहाँ आकर मैंने डाइटिंग शुरू कर दी है। क्योंकि उस वक़्त लहंगे की वजह से मुझे अपनी फिगर को मेंटेन रखना पड़ रहा था। वरना मुझे अपना जीरो फिगर बहुत पसंद है। और रही स्किन की बात तो शादी के टाइम पार्लर पर आप तो जानती ही हैं, कितना कुछ कराया जाता है। तो और शादी के बाद मैं अभी पार्लर नहीं गई हूँ। बस उसी की वजह से आपको ऐसा लग रहा है।" उसकी बात पर दीपिका चुप हो गई, फिर तीनों मिलकर आपस में बातें करने लगीं।


    शाम को मानवी सब से मिलकर एयरपोर्ट के लिए निकल गई।

    वहीं ऋषभ अपने ऑफिस में बैठा काम कर रहा था। उसकी मीटिंग अभी हाल ही में ख़त्म हुई थी। तभी उसका असिस्टेंट पीयूष उसके पास आया और उसकी तरफ़ एक फ़ाइल बढ़ाते हुए बोला, "सर यह सभी मॉडल्स की लिस्ट है जो इस बार हमारी कंपनी को रिप्रेज़ेंट करेंगी और जैसा कि आपने कहा, निशा मैम का नाम सबसे ऊपर है। एक बार आप चेक कर लीजिये और हाँ, नीचे निशा आई हुई हैं और आपसे मिलने की कह रही थीं। पर आप मीटिंग में थे इसलिए वो वेटिंग एरिया में आपका इंतज़ार करने लगी हैं। आप कहें तो उन्हें भेज दूँ?"

    तो ऋषभ निशा का नाम सुनकर हैरान रह गया और उसे याद आया कि उसने काफी टाइम से निशा से ना तो बात की और ना ही उससे मिला! और आज जब उसने निशा से मिलने का वादा किया था, तो वह मीटिंग और काम में इतना बिज़ी हो गया कि उसे याद ही नहीं रहा कि उसे निशा से मिलने जाना था! उसने अपने असिस्टेंट से कहा, "ठीक है, उसे यहीं पर भेज दो और दो कॉपी भी भेज देना।"

    तो असिस्टेंट "ओके सर" कहकर चला गया।

  • 11. Substitute bride - Chapter 11

    Words: 1222

    Estimated Reading Time: 8 min

    थोड़ी देर बाद ऋषभ के केबिन का दरवाज़ा खुला, और एक लड़की अंदर आई। गोरा रंग, काली आँखें, छोटे-छोटे लक्षण, परफेक्ट फिगर, कंधे से नीचे खुले बाल, शॉर्ट ड्रेस पहने उसका फिगर बहुत हॉट लग रहा था। पैरों में हाई हील्स उसके परफेक्ट मॉडल होने का सबूत दे रहे थे। चेहरे पर डार्क मेकअप और अदा से अपने बालों को पीछे करते हुए, एटीट्यूड के साथ वह चलकर आ रही थी। ऋषभ ने उसे देखा तो मुस्कुरा दिया। वह लड़की अंदर आई और आते ही ऋषभ को गले लगा लिया। ऋषभ ने भी उसे गले लगा लिया, पर तभी उस लड़की ने ऋषभ को धक्का दिया और उससे दूरी बनाकर मुँह फुलाकर खड़ी हो गई। ऋषभ उसकी इस हरकत पर मुस्कुरा दिया। तभी पीयूष आकर दो कॉपी रखकर चला गया।


    अब केबिन में ऋषभ और निशा अकेले थे। निशा ऋषभ पर गुस्सा करते हुए बोली, "क्या हो गया है तुम्हें ऋषभ? तुम्हारी शादी के बाद से तुमने ना तो मुझसे बात की है और ना ही मुझसे मिले हो। क्या तुम उस शादी को सच में मानते हो? कहीं तुम्हें अपनी उस सो कॉल्ड बीवी से प्यार तो नहीं हो गया? जो तुम्हारी बीवी है ही नहीं! उसने तो अपनी जगह पर किसी और लड़की को पैसे देकर शादी के मंडप पर बिठा दिया।"


    निशा की बात सुनकर ऋषभ को मानवी का चेहरा याद आ गया। उसने गुस्से में निशा से कहा, "प्लीज निशा, तुम बार-बार उस शादी को बीच में क्यों लाती हो? वह सिर्फ़ मेरे पापा की मर्ज़ी से हुई थी और जल्दी ही मैं पापा को तुम्हारे और हमारे रिश्ते के बारे में समझाकर उस लड़की को अपनी लाइफ से बाहर कर दूँगा! इसीलिए मैंने अभी तक उस लड़की को अपनी वाइफ के तौर पर ना तो मीडिया के सामने इंट्रोड्यूस किया है और ना ही पब्लिक के सामने। फिर भी तुम उस लड़की के साथ मुझे जोड़ रही हो! निशा, मैं तुमसे कितनी बार कह चुका हूँ, अब अपनी इस शक करने वाली आदत को मेरे लिए अपने अंदर से निकाल दो, वरना हम दोनों का एक साथ रहना मुमकिन नहीं होगा। मैं अगर किसी का हाथ थाम सकता हूँ तो छोड़ भी सकता हूँ।"


    उसकी बात सुनकर निशा घबरा गई। कहीं ऋषभ उसे अपनी ज़िंदगी से निकाल ना दे। जाहिर सी बात है, जब तक ऋषभ उसके साथ है, तब तक वह मॉडलिंग की दुनिया में राज कर रही है। अगर ऋषभ ने उसका साथ छोड़ा तो फिर मॉडलिंग की दुनिया भी उसका साथ छोड़ देगी, और कौन लड़की ऋषभ सहगल को अपनी लाइफ से निकालना चाहेगी, जो बिज़नेस और इंडस्ट्री की दुनिया का बेताज बादशाह है? और वैसे भी उसने कितनी मुश्किल से ऋषभ को अपने साथ किया था! अभी छह महीने ही तो हुए हैं उनके रिश्ते को और अभी मॉडलिंग की दुनिया में भी उसका करियर जम नहीं पाया है। ऐसे में वह ऋषभ को कैसे अपने आप से दूर जाने दे? इतना सब सोचकर निशा जल्दी से ऋषभ के पास आई।


    और ऋषभ के चेहरे को अपने हाथों में भरते हुए बोली, "नहीं ऋषभ बेबी, मैं तुम पर शक नहीं कर रही हूँ। पर क्या करूँ? तुमसे गुस्सा थी, तो अपना गुस्सा इस तरह जाहिर कर दिया। एक महीने से ना तो हम मिले हैं और ना ही हमारी बात हुई है, तो ऐसे में मुझे गुस्सा तो आएगा ही। प्लीज मुझे माफ़ कर दो। और प्लीज मुझसे अलग होने की बात मत करना, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। तुम्हारे बिना मर जाऊँगी। जिस पल तुम मुझसे दूर हुए, समझ लेना मेरी साँसें भी मुझसे दूर हो जाएँगी। इसीलिए निशा से लड़ना-झगड़ना, पर कभी दूर मत जाना, क्योंकि ऋषभ है तो निशा है, ऋषभ नहीं तो निशा भी नहीं।" इतना कहकर वह उसके गले लग गई। ऋषभ भी उसे अपनी बाहों में भर लेता है। वहीं निशा उसके सीने से लगी हुई मुस्कुरा देती है। ऋषभ भी मुस्कुराते हुए उसे अपनी बाहों में भर लेता है।


    थोड़ी देर में दोनों अलग होते हैं। तो निशा उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर उसे किस करने के लिए अपने चेहरे को उसकी तरफ़ बढ़ाने लगती है। उसके इस मूव को समझकर ऋषभ अपनी आँखें बंद कर लेता है। तभी उसे शादी का समय याद आने लगता है। साथ ही मानवी के साथ बिताए हुए पल याद आने लगते हैं; जब उसने मानवी की गोरी नरम कलाई को पकड़कर कस के दबा दिया था, तो कैसे उसकी गोरी मखमली कलाई पर उसकी उंगलियों के निशान पड़ गए थे, कैसे मानवी के बदन की खुशबू उसे बहका रही थी, और कैसे जब उसने मानवी का घूँघट उठाया था, तब मानवी के लाल, गहरे लिपस्टिक वाले होंठ उसे अपनी तरफ़ आकर्षित कर रहे थे, कैसे वह मानवी की काली कजरारी आँखों में खो गया था। यह सब याद आते ही ऋषभ का दिल जोरों से धड़कने लगा; उसकी धड़कन असामान्य हो गई! उसे एक अजीब सी बेचैनी ने घेर लिया! जो कि उसे निशा की करीबी से भी नहीं हो रहा था, ना ही निशा की करीबी से उसका दिल धड़का था। निशा के होंठ उसके होंठों को छूने ही वाले थे कि ऋषभ ने एकदम से उसे अपने से दूर कर दिया। निशा हैरानी से उसे देख रही थी।


    ऋषभ ने उससे अपनी नज़रें फेरते हुए कहा, "प्लीज निशा, मैंने तुमसे पहले भी कहा है, शादी से पहले कुछ भी नहीं।"


    तो निशा ने उसके सामने आते हुए कहा, "पर क्यों ऋषभ? छह महीने हो चुके हैं हमारे रिलेशनशिप को, लेकिन हम दोनों ने एक लीप किस तक नहीं किया। क्या मुझे तुम्हारे इतने करीब आने का हक़ नहीं? और कपल तो पता नहीं क्या-क्या करते रहते हैं और तुम एक किस भी नहीं करने देते। आख़िर इसमें ग़लत ही क्या है? क्या मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती?"


    ऋषभ उसकी तरफ़ देखता है, फिर उसका चेहरा अपने हाथों में भरते हुए कहता है, "नहीं, बात यह नहीं है कि तुम मुझे अच्छी नहीं लगती, मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ। इसीलिए तुमसे शादी भी करना चाहता हूँ। बात बस यह है कि मैं नहीं चाहता कि कोई तुम्हें या मुझे ग़लत समझे और हमारे रिश्ते पर उंगली उठाए। दुनिया की नज़रों में मैं अब एक शादीशुदा मर्द हूँ।" (निशा कुछ कहने वाली होती है कि ऋषभ उसके होंठों पर अपनी उंगली रख देता है) और आगे कहता है, "जानता हूँ तुम क्या कहने वाली हो। भले ही अनुष्का से मेरी शादी ना हुई हो, लेकिन दुनिया की नज़रों में वह मेरी पत्नी है और तुम दूसरी औरत। और दुनिया का ना सही, लेकिन सच भी यही है कि मेरी शादी हुई है, अनुष्का से ना सही किसी और से। इसीलिए जब तक मैं पूरी दुनिया के सामने अनुष्का को तलाक नहीं दे देता, तब तक मैं कभी किसी को यह नहीं पता चलने दूँगा कि हम दोनों रिलेशनशिप में हैं। इसीलिए सबके सामने तुम मुझसे हमेशा दूर रहोगी और बाकी लोगों की तरह मेरे साथ पेश आओगी, ज़्यादा से ज़्यादा एक दोस्त की तरह। इससे ज़्यादा और कुछ नहीं। पूरी दुनिया में यह नाम, यह रुतबा मेरे पापा, मेरे दादा ने बहुत मेहनत से कमाया है और इसे मैं किसी भी हालत में डूबने नहीं दूँगा, चाहे इसके लिए मुझे अपने प्यार से, अपनी ज़िंदगी से समझौता क्यों ना करना पड़े! इसीलिए पापा की बातों के आगे झुककर मैं शादी के लिए तैयार हुआ था।"

  • 12. Substitute bride - Chapter 12

    Words: 996

    Estimated Reading Time: 6 min

    ऋषभ की बात सुनकर निशा हैरान थी। उसकी बातों से निशा को गुस्सा भी आया, पर उसने खुद को शांत रखते हुए मुस्कुराकर कहा, "और मैं इस फैसले में तुम्हारा साथ दूंगी। जैसा तुम चाहते हो, वैसा ही होगा।"

    ऋषभ प्यार से निशा का सिर सहलाते हुए बोला, "अच्छा, अब मुझे घर जाना होगा। तुम भी अपने घर जाओ और आराम करो। वो तुम्हारी नई असिस्टेंट का क्या हुआ? दो दिन बाद शूटिंग शुरू होनी है।"

    "हाँ, वो कल यहाँ पहुँच रही है। परसों से आ जाएगी। तुम उसकी चिंता मत करो!" निशा ने कहा।

    "ओके, परसों टाइम से शूटिंग पर आ जाना, और ड्रेस और ज्वेलरी का भी देख लेना।" इतना कहकर ऋषभ वहाँ से चला गया। निशा भी अपने घर के लिए निकल गई।


    ऋषभ घर पहुँचा तो अनुष्का आराम से सोफ़े पर बैठी टीवी देख रही थी, पॉपकॉर्न खाते हुए। ऋषभ ने उसे एक नज़र देखा और अपने कमरे में चला गया। थोड़ी देर बाद एक नौकर उसके कमरे में खाना रख गया। शादी के बाद से ऋषभ अपने कमरे में ही खाना खाता था, अनुष्का से बात नहीं करता था और न ही उसके साथ एक कमरे में रहता था।


    ऋषभ फ्रेश होकर आया और खाना खाया। फिर अपने बेड के बगल वाले अलमारी से एक बॉक्स निकाला और उसे लेकर खिड़की के पास खड़ा हो गया। उसने धीरे से बॉक्स खोला और उसमें से एक पायल निकाली। यह मानवी की पायल थी जो भागते वक़्त उसके पैर से गिर गई थी और ऋषभ को मिल गई थी। उस पायल को देखते हुए ऋषभ शादी के बाद की यादों में खो गया।


    फ्लैशबैक


    अगले दिन सुबह ही अनुष्का की विदाई हो गई थी। ऋषभ को नहीं पता था कि जो लड़की उसके साथ बैठी है, वह वही नहीं है जिसे वह समझ रहा है। विदाई के बाद जब अनुष्का ऋषभ के माता-पिता के घर पहुँची, तो जानवी जी ने उसकी आरती की और उसका घर प्रवेश कराया। शादी की भागदौड़ में सब थक चुके थे। ऋषभ ने सभी रस्मों में और अनुष्का को किसी से भी मिलवाने से मना कर दिया था। कोई उसकी बात टाल नहीं सकता था क्योंकि जब उसे गुस्सा आता था, तो कोई उसके आगे कुछ नहीं कर सकता था। वह तो ऋषभ अपने दादाजी की ही बात मानता था और इस शादी के लिए दादाजी ने ही उसे अपनी बीमारी का हवाला देकर मनाया था। इसीलिए ऋषभ शादी के लिए तैयार हो गया था। जानवी जी ने अनुष्का को ऋषभ के कमरे में भेज दिया और खुद सब लोग आराम करने चले गए।


    ऋषभ अपने कमरे में आया तो अनुष्का उसकी तरफ पीठ करके अपने कपड़े निकाल रही थी। ऋषभ एक डेविल स्माइल के साथ अनुष्का की तरफ बढ़ा और पीछे से उसके एकदम पास आकर बोला, "तो अब कहाँ बचकर जाओगी? वहाँ तो भाग गई थी, लेकिन यह मेरा रूम है। यहाँ से मेरी मर्ज़ी के बिना ना कोई बाहर जा सकता है और ना ही कोई अंदर आ सकता है। अब बोलो तुम्हारे साथ क्या किया जाए? क्योंकि मेरे मना करने के बावजूद तुमने मुझसे शादी की। मैंने कहा था मैं तुम्हारे पापा की कंपनी को बचा लूँगा, फिर भी तुम नहीं मानी?"


    उसकी बात सुनकर अनुष्का पीछे मुड़ी। ऋषभ देखकर हैरान रह गया और एकदम पीछे हटते हुए बोला, "तुम कौन हो? और अनुष्का कहाँ है?"


    अनुष्का उसके पास आते हुए बोली, "अनुष्का मैं ही हूँ, नवीन शर्मा की बेटी। आप कैसी बातें कर रहे हैं?"


    ऋषभ गुस्से से बोला, "झूठ मत बोलो! मेरी शादी किसी और से हुई थी और मैंने उसका चेहरा देखा था। तो तुम अनुष्का कैसे हो सकती हो? उसकी माँ खुद उसे लेकर मंडप तक आई थी। अगर तुम अनुष्का होती तो तुम्हारी माँ किसी और लड़की से मेरी शादी क्यों कराती?"


    उसकी बात सुनकर अनुष्का घबरा गई क्योंकि उसे नहीं पता था कि ऋषभ ने मानवी का चेहरा देख लिया है, न ही अनीता जी ने उसे कुछ बताया था।


    अनुष्का ऋषभ के सामने मासूम बनते हुए बोली, "तो और क्या करती? आपने मुझसे शादी करने से मना कर दिया था और मेरे फैमिली वाले मान नहीं रहे थे। तो मुझे आप दोनों की बात का मान रखना था! इसीलिए मैंने उस लड़की को पैसे देकर अपनी जगह शादी के मंडप में बिठा दिया... जिससे मेरी शादी आपसे ना हो और आप मुझ पर गुस्सा ना करें, साथ ही मेरे पापा की कंपनी भी बच जाए।"


    उसकी बात सुनकर ऋषभ को बहुत गुस्सा आया। वह गुस्से में बोला, "क्या मतलब तुमने किसी और को बिठा दिया? तुम पागल हो! ऐसे ही किसी लड़की को अपनी जगह शादी के मंडप पर बिठा दिया और मेरी उससे शादी करा दी! कल को अगर वह लड़की मुझ पर धोखाधड़ी का इल्ज़ाम लगाए तो मैं क्या करूँगा? तुमने ऐसा करने से पहले सोचा नहीं? कम से कम मुझसे तो पूछा होता! मुझे इतनी बड़ी प्रॉब्लम में फँसाकर अब मासूम बन रही हो! उस लड़की का नाम क्या है? मुझे बताओ, मैं अभी उसे यहाँ लेकर आऊँगा!" अनुष्का की घबराहट साफ़ दिख रही थी।

  • 13. Substitute bride - Chapter 13

    Words: 1261

    Estimated Reading Time: 8 min

    ऋषभ को उसकी बात सुनकर बहुत गुस्सा आया। गुस्से में उसने अनुष्का से कहा, "क्या मतलब तुमने किसी और को बैठा दिया? तुम पागल हो! ऐसे ही किसी लड़की को अपनी जगह शादी के मंडप पर बिठा दिया, और मेरी उससे शादी करा दी! कल को अगर वह लड़की मुझ पर उससे शादी करने के बाद धोखाधड़ी करने का इल्ज़ाम लगाए, तो मैं क्या करूँगा? तुमने एक बार ऐसा करने से पहले सोचा नहीं? कम से कम मुझसे तो पूछा होता! मुझे इतनी बड़ी प्रॉब्लम में फँसाकर अब मासूम बन रही हो। उस लड़की का नाम क्या है? मुझे बताओ, मैं अभी उसे यहाँ लेकर आऊँगा!"

    अनुष्का उसकी बात सुनकर घबरा गई।

    वह घबराते हुए बोली, "नहीं नहीं, प्लीज़! सबके सामने आपकी शादी मुझसे हुई है, इसलिए ऐसा मत कीजिए। दूसरा, मुझे नहीं पता उस लड़की का नाम, मुझे नहीं पता वह कहाँ से आई थी। बस उसे पैसों की ज़रूरत थी, तो मैंने उसके सामने यह शर्त रख दी। अगर मेरे परिवार वालों को पता चला कि मैंने ऐसा कुछ किया है, तो वो लोग मुझे मार डालेंगे।"

    ऋषभ गुस्से में बोला, "तो मैं क्या करूँ? वह लोग तुम्हारे साथ कुछ भी करें, आई डोंट केयर! तुम्हें तो लड़की के बारे में भी कुछ नहीं पता! ओ गॉड! अब मैं क्या करूँगा?" इतना कहकर वह परेशानी में अपने सर पर हाथ रख लिया।

    अनुष्का उसे समझाते हुए बोली, "मेरे पास एक रास्ता है।" ऋषभ उसकी तरफ देखने लगा।

    अनुष्का फिर बोली, "देखिए, दुनिया की नज़रों में मैं आपकी बीवी हूँ। किसी को नहीं पता कि आपकी शादी किसी और लड़की से हुई थी, तो उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। और वो लड़की भी यहाँ कभी नहीं आएगी, तो उसकी तरफ़ से आप निश्चिंत रहिए। रही मेरी बात, तो आप कौन सा इस शादी को हमेशा के लिए रखना चाहते हैं? आप किसी और से प्यार करते हैं, तो इससे अच्छा तो यही है कि जब तक आप इस शादी में रहना चाहते हैं, तब मेरे साथ रहिए, जिससे आपकी और मेरी प्रॉब्लम दोनों सॉल्व हो जाए! और बाद में आप और मैं यह कह देंगे—कि हम दोनों इस रिश्ते को निभा नहीं पा रहे हैं, हम दोनों की एक-दूसरे से नहीं बन रही है। तब आप मुझे तलाक देकर अपने प्यार से शादी कर लेना। इस तरह से आप भी खुश और मैं भी खुश।"

    हालाँकि ऋषभ उसकी बात से खुश नहीं था, लेकिन अपनी प्रॉब्लम के चलते गुस्से में उसे अनुष्का की बात माननी पड़ी। पर तभी से ऋषभ अनुष्का के साथ एक कमरे में नहीं रहा था। उसने अपने माँ-बाप से यह कहकर कि वह दोनों अकेले में टाइम स्पेंड करना चाहते हैं, अनुष्का को अपने साथ लेकर इस मेंशन में आ गया था, और तभी से दोनों अलग-अलग कमरे में रह रहे थे।


    ऋषभ उस पायल को देखते हुए किसी को फ़ोन लगा दिया। जैसे ही उधर से कॉल रिसीव हुई, ऋषभ ने कहा, "क्या हुआ? कुछ पता चला?"

    उधर से एक शख्स ने कहा, "नहीं सर, अभी तक हमें कुछ पता नहीं चला है। शायद नवीन शर्मा ने शादी वाले दिन के सभी सबूत मिटा दिए हैं। इसीलिए हमारे हाथ कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। हम कोशिश कर रहे हैं। जैसे ही हमें कुछ पता चलता है, हम आपको बता देंगे!"

    ऋषभ ने कहा, "ओके, लेकिन मुझे शादी वाले दिन क्या-क्या हुआ, इन सब की एक-एक डिटेल चाहिए। अगर पूरी जानकारी हासिल ना कर सको, तो मेरे पास लौटकर मत आना।"

    उधर से आदमी घबराकर बोला, "नहीं नहीं सर, हम जल्द ही उस लड़की का पता लगा लेंगे।" और कॉल काट दी।

    ऋषभ उस पायल को अपनी मुट्ठी में कसकर अपने आप से बोला, "कहाँ हो तुम? एक बार, बस एक बार मुझे तुम्हारे बारे में पता चल जाए, या तुम मेरे सामने आ जाओ, तब तुम्हें मैं बताऊँगा कि ऋषभ सहगल से धोखा करने का क्या अंजाम होता है! चंद पैसों के लिए तुमने मुझे, ऋषभ सहगल से धोखा किया, मेरे साथ खेल खेला! एक बार बस मेरे हाथ लग जाओ, तब तुम्हें बताऊँगा कि ऋषभ सहगल है क्या चीज़? उसके बाद उस अनुष्का को भी यहाँ से बाहर का रास्ता दिखा दूँगा।"

    फिर उस पायल को देखते हुए बोला, "और तुम्हें, तुम्हें तो तड़पा-तड़पाकर सजा दूँगा, क्योंकि तुम्हारी वजह से एक महीने से चैन की नींद नहीं सोया हूँ मैं! तुम्हारी वजह से जिस लड़की को पसंद करता था, उससे भी दूर होता जा रहा हूँ। मैं और यह सब सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी वजह से! अगर मुझसे बचना चाहती हो, तो गलती से भी मेरे सामने मत आ जाना, वरना पिंजरे में कैद पंछी की तरह फड़फड़ाती रह जाओगी। और इस ऋषभ सहगल के पिंजरे से तुम्हें कभी आजादी नहीं मिलेगी।" इतना कहकर डेविल स्माइल के साथ वह अपने बेड पर आकर लेट गया, और पायल को अपने सीने से लगाकर आँखें बंद कर ली। क्योंकि पता नहीं ये क्या एहसास थे—गुस्सा, नफ़रत, प्यार, लेकिन जो भी थे, सिर्फ़ मानवी के लिए थे।

    जब ऋषभ ने उसका घूँघट उठाकर उसका चेहरा देखा था, पता नहीं क्यों, लेकिन मानवी का चेहरा याद आते ही ऋषभ को यह सोचकर गुस्सा आने लगता था कि उस लड़की ने पैसों के लिए उससे शादी की थी, और शादी के बाद उसे आसानी से छोड़कर भी चली गई, बिना उससे मिले और उससे बात किए। आखिर कोई लड़की उसका स्टेटस जाने के बाद, ऊपर से उससे शादी हो जाने के बाद उसे छोड़कर क्यों चली गई? वो भी थोड़े से पैसों के लिए, जबकि ऋषभ से शादी के बाद उसे पैसा, नाम, शोहरत, सब कुछ आसानी से मिल चुका था, इतना कि वो जीवन भर उन्हें कुछ खर्च करती तो भी नहीं कर पाती। आखिर ऋषभ सहगल मुंबई का नंबर वन बिज़नेसमैन था, साथ ही मॉडल और फ़िल्म इंडस्ट्री में भी ऋषभ के बहुत गहरे कनेक्शन थे। वो अपने एक इशारे पर रातों-रात किसी को भी फ़िल्मों या फिर मॉडलिंग में काम दिलवा सकता था। साथ ही वो खुद इतना हैंडसम था कि लड़कियाँ उसे पाने के लिए दिन-रात सपने देखती थीं। एक तरह से कहा जाए तो वो लड़कियों के सपने का राजकुमार था, जिसको पाने का ख्वाब हर लड़की देखती थी, पर वो उनका ख्वाब ही था जो कभी सच नहीं हो सकता था। लेकिन उस लड़की की तो पूरी दुनिया के सामने उसके साथ शादी हो चुकी थी, वो उसकी लीगली वाइफ बन चुकी थी, फिर भी इतनी आसानी से उसे छोड़ने का रीज़न उसे समझ नहीं आ रहा था। एक पल को ऋषभ को यह भी लगता था कि उस लड़की को ऋषभ के नाम और स्टेटस के बारे में कुछ भी नहीं पता, इसीलिए उसने ऐसी गलती की, लेकिन अनुष्का ने उसे बताया कि वो ऋषभ के बारे में सब जानती है, और इसके बावजूद भी पैसों के लिए ही उससे शादी करने के लिए तैयार हो गई। और इस बात को ऋषभ ने अपने ईगो पर ले लिया था कि कोई लड़की चंद पैसों के लिए, उसके जैसे इतने हैंडसम और पॉवरफुल इंसान को कैसे छोड़ सकती है। इसीलिए उसके मन में इस वक़्त मानवी के लिए गुस्सा और नफ़रत पल रही थी। अगर मानवी उसके सामने होती, तो पता नहीं गुस्से में वो मानवी का क्या करता।

    अब क्या होगा? ऋषभ मानवी से नफ़रत करता है। ऐसे में अगर मानवी उसके सामने आ गई तो ऋषभ कैसे रिएक्ट करेगा? जानने के लिए पढ़ते रहिए।

  • 14. Substitute bride - Chapter 14

    Words: 1004

    Estimated Reading Time: 7 min

    उसी देर रात मानवी मुंबई पहुँची थी। पवन जी ने उसके लिए गाड़ी भेजी थी, और मानवी उसी में बैठकर उनके घर निकल गई। ज्यादा रात होने की वजह से उसने किसी को परेशान नहीं किया। बस तान्या, जो उसके लिए जाग रही थी, उससे मिली और उसके कमरे में ही सोने चली गई।

    अगले दिन सबका रोज़ की तरह ही बीता। शाम को मानवी अपने काम के हिसाब से कपड़े लेने के लिए तान्या के साथ मॉल निकल गई। क्योंकि वह ज्यादातर सादे कपड़े ही पहनती थी, वह तान्या के साथ वहाँ पर शॉपिंग करने लगी और अपने लिए कुछ जीन्स, वन-पीस ड्रेसेस, शर्ट और टीशर्ट खरीदने लगी।


    उसी मॉल में निशा भी अपने लिए ड्रेसेस खरीदने आई थी। अब इसे किस्मत कहें या कुछ और, उसने ऋषभ को भी फोन कर अपने साथ शॉपिंग के लिए बुला लिया था। पहले ऋषभ ने उसे बहुत मना किया, लेकिन पता नहीं क्यों उसका मन बार-बार यही कह रहा था कि उसे मॉल जाना चाहिए। तो आखिर में वह निशा की बात मानकर मॉल के लिए निकल गया।


    वह मॉल पहुँचा और निशा के साथ ड्रेस देखने लगा। लेकिन उसका ध्यान ड्रेस पर कम और मॉल पर ज़्यादा था, जिससे निशा चिढ़ गई और वह ऋषभ से बोली, "प्लीज़ ऋषभ, मेरे लिए ड्रेस चुनो ना। तुम तो इधर-उधर देख रहे हो, मेरी बातों पर तो कोई ध्यान ही नहीं है।"

    ऋषभ झेंप गया। अब वह उसे क्या बताता कि उसे लड़कियों की शॉपिंग में कोई इंटरेस्ट नहीं है? वो तो उसका मन था, इसीलिए वह यहाँ आया था। तभी उसका ध्यान एक डमी पर गया, जिसने ऑफ-शोल्डर वन-पीस रेड कलर की हॉट ड्रेस पहनी हुई थी।

    उसने निशा से कहा, "निशा, तुम ना उस ड्रेस को ट्राई करो। मैं बहुत देर से उसे तुम्हारे लिए देख रहा था। सच में, वो बहुत खूबसूरत है, तुम पर बहुत अच्छी लगेगी।"

    निशा अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई और सेल्स गर्ल्स से उस ड्रेस को अपने लिए मँगवा लिया और ट्रायल रूम में ट्राई करने चली गई।

    उसके जाने के बाद ऋषभ ने गहरी साँस ली और वहाँ से उठकर बाहर रेलिंग से हाथ टिकाकर इधर-उधर देखने लगा। तभी उसका ध्यान अपने सामने दूसरी साइड लगे मिरर पर गया, जिसमें उसे जाना-पहचाना चेहरा दिखा। वह हैरान रह गया।

    यह वही थी जो एक महीने पहले उससे शादी करके उसे छोड़कर चली गई थी। सिर्फ़ थोड़े से पैसों के लिए (सिर्फ़ ऋषभ के लिए सच क्या है, हम और आप जानते हैं)। इस वक़्त मानवी ने अपने हाथ में येलो कलर का गाउन पकड़ रखा था, जो तान्या ज़बरदस्ती उसे दिलवा रही थी और ट्राई करने भेज रही थी। ऋषभ ने पीछे पलटकर देखा तो सच में वह वहीं थी। तभी मानवी वहाँ से जाने लगी। ऋषभ ने उसे जाते देख जल्दी से उसका पीछा करना शुरू कर दिया। तभी अचानक सामने आ रहे आदमी से वह टकरा गया। वह आदमी "सॉरी" कहकर आगे बढ़ गया। इतने में ऋषभ ने आगे देखा तो मानवी उसकी आँखों से ओझल हो गई। ऋषभ को खुद पर ही बहुत गुस्सा आया कि क्यों वह आगे देखकर नहीं चल रहा था। उसने मानवी को इधर-उधर देखना शुरू कर दिया। वहीं मानवी आगे चलकर एक ट्रायल रूम में घुस गई।


    तभी ऋषभ के पास निशा का फ़ोन आने लगा। उसने कॉल रिसीव किया तो उधर से निशा गुस्से में बोली, "कहाँ हो ऋषभ? मैं तुम्हारे लिए ड्रेस चेंज करके आई और तुम यहाँ से ग़ायब हो। तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? तुम्हें मेरी कोई चिंता नहीं है ना?"

    ऋषभ ने कहा, "एक्चुअली निशा, मुझे एक बहुत ज़रूरी मीटिंग की वजह से वहाँ से निकलना पड़ा। मैं सॉरी। अगर तुम्हें वह ड्रेस पसंद आई हो तो तुम उसे ले लेना। अभी मैं रखता हूँ, बहुत बिज़ी हूँ।" इतना कहकर बिना निशा की बात सुने कॉल कट कर दिया।


    वहीं निशा पैर पटकती हुई रह जाती है और अपने मन में सोचती है, "कुछ कर निशा, कुछ कर! ऋषभ तेरे हाथ से निकल रहा है। एक तो तुझे अपने करीब नहीं आने देता, ऊपर से आजकल तेरे साथ ज़्यादा समय भी नहीं बिता रहा। ऐसे तो तेरा सारा बना-बनाया प्लान फ़ेल हो जाएगा।"


    वहीं ऋषभ चारों ओर मानवी को ढूँढ रहा था। वह मानवी को ढूँढते हुए ट्रायल रूम की तरफ़ पहुँच गया था, लेकिन कई सारे ट्रायल रूम होने की वजह से उसे नहीं पता था कि मानवी कौन से वाले ट्रायल रूम में है। इस वक़्त वह उसी ट्रायल रूम के सामने खड़ा था जिसमें मानवी थी। तभी वहाँ पर तान्या आई।

    उसने बाहर से दरवाज़ा खटखटाकर मानवी से कहा, "मानवी, और कितनी देर? बहुत भूख भी लग रही है। अब तो बाहर आ जा।"

    वहीं अंदर मानवी ने गाउन को चेंज कर दिया था। वह उसे थोड़ा लूज़ था, तो वह तान्या से बोली, "हाँ यार, मुझे भूख लग रही है और मुझे नहीं लेना यह गाउन। मुझे पसंद भी नहीं है, पता नहीं तू क्यों ज़िद कर रही है? यह मुझे बहुत लूज़ भी है!"

    तान्या ने मानवी से कहा, "अच्छा बाबा, ठीक है। कोई बात नहीं, हम फिर कभी कोई और देख लेंगे। अभी वैसे भी तुझे काम के हिसाब से कपड़े चाहिए थे, जो तूने ले लिए। अगर तुझे नहीं लेना तो कोई बात नहीं, मैं ज़िद नहीं करूँगी। अब तो बाहर आ जा!"

    मानवी ने कहा, "ठीक है, मैं चेंज करके आती हूँ!"

    तान्या वहाँ से चली जाती है। वहीं ऋषभ, जो उन दोनों की बातें सुन रहा था, उसने तान्या को नहीं देखा था, इसीलिए उसे नहीं पता था कि वह मानवी के साथ है। इसीलिए ऋषभ आगे जाकर देखने लगता है। तभी मानवी उसके पीछे से ट्रायल रूम से निकलकर बाहर चली जाती है। ऋषभ की पीठ उसकी तरफ़ थी, तो वह उसे देख नहीं पाता।

  • 15. Substitute bride - Chapter 15

    Words: 944

    Estimated Reading Time: 6 min

    ऋषभ मानवी के नाम मिलने की वजह से परेशान था। वह गुस्से में अपने आप से बोला, "शिट! कहाँ चली गई ये लड़की? कब से ढूँढ रहा हूँ, मिल ही नहीं रही है। एक बार मेरे हाथ लग जाए, छोडूँगा नहीं! इस की हिम्मत कैसे हुई मुझे धोखा देने की?" ऋषभ इधर-उधर देखते हुए कहता है। तभी उसका ध्यान मॉल में लगे कैमरे पर गया। वह डेविल स्माइल करते हुए मॉल के कंट्रोल रूम की ओर बढ़ गया।

    वहाँ के लोग उसे देखते ही खड़े हो गए। क्योंकि ऋषभ की पहचान मुंबई के बच्चे-बच्चे को थी। आए दिन टीवी में ऋषभ का चेहरा छाया रहता था। ऋषभ वहाँ जाकर अभी थोड़ी देर पहले की फुटेज दिखाने को बोला। वहाँ के स्टाफ ने बिना ना-नुकुर किए उसे फुटेज दिखानी शुरू कर दी।

    फुटेज देखकर ऋषभ हैरान था। क्योंकि इतनी देर से वह बिल्कुल मानवी के नज़दीक खड़ा था, फिर भी उसे पता नहीं चला। इतना ही नहीं, वो लड़की जिसे उसने इग्नोर कर दिया था, वो उसी लड़की के साथ थी जिसे वो ढूँढ रहा था, फिर भी उसे पता नहीं चला। और तो और, वो उसके बगल से ही होकर गई थी। ऋषभ को अपनी लापरवाही पर गुस्सा आ रहा था। लेकिन तभी उसे तान्या द्वारा लिया गया नाम याद आ गया। और उसने अपने मन में कहा, "ओह! तो मानवी नाम है मैडम का! चलो कोई नहीं, तुम तक ना सही, पर तुम्हारे नाम तक तो पहुँच गया! अब तुम मेरी पकड़ से ज़्यादा दूर नहीं, मिस मानवी... ओह सॉरी, मिसेज़ मानवी ऋषभ सहगल!" इतना कहकर वह मुस्कुराते हुए बाहर निकल आया।

    वह अपनी गाड़ी में बैठ ही रहा था कि तभी उसके पास उसके आदमी का फ़ोन आया, जिसे उसने मानवी की जानकारी निकालने के लिए लगाया था।

    ऋषभ ने कॉल पिक की। उधर से वह डिटेक्टिव बोला, "देरी के लिए माफ़ी चाहूँगा सर, लेकिन हमने उस लड़की के बारे में सब कुछ पता कर लिया है, जिसके बारे में आप जानना चाहते थे! लेकिन बस उस शादी वाले दिन के बारे में हमें अभी पता नहीं चल पाया है। अगर आप बाकी की जानकारी जानना चाहें तो बताइए, लेकिन वो जानकारी मैं आपको फ़ोन पर नहीं दे सकता!"

    उसकी बात सुनकर ऋषभ खुश हो गया, भले ही मानवी के बारे में शादी वाले दिन के बारे में पता ना चला हो, लेकिन बाकी की जानकारी उसे मिल गई थी। इसलिए उसने डिटेक्टिव से कहा, "ठीक है। अगले डेढ़ घंटे में मुझे ए एस होटल में, रूम नंबर 63 में मिलो। इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं होनी चाहिए।" डिटेक्टिव ने "ओके सर" कहकर फ़ोन रख दिया।

    डेढ़ घंटे बाद,

    ऋषभ होटल के कमरे में सोफ़े पर किसी राजा की तरह बैठा हुआ था। उसके हाथ में जली हुई सिगरेट लगी हुई थी और वह सिगरेट के कश भरते हुए डिटेक्टिव से बोला, "तुम्हें जो भी जानकारी मिली है, वो बिल्कुल सही होनी चाहिए। और जितनी जल्दी हो सके शादी वाले दिन की भी सभी जानकारी निकालो।"

    तो डिटेक्टिव, जो ऋषभ के सामने घबराया हुआ बैठा था, उसने गहरी साँस ली और कहना शुरू किया, "सर, जानकारी जितनी भी मिली है, वो बिल्कुल सही है।" इतना कहकर उसने एक फ़ाइल ऋषभ की तरफ़ बढ़ा दी।

    ऋषभ ने उस फ़ाइल को खोलकर देखा। तभी डिटेक्टिव कहना शुरू करता है, "इनका नाम मानवी बजाज है। चंडीगढ़ में सुनैना बजाज के साथ मिलकर शांति भवन अनाथ आश्रम चलाती हैं। सुनैना जी इन्हें अपनी बेटी मानती हैं। उम्र 23 साल है। स्टडी पूरी हो चुकी है। और यह अनुष्का शर्मा के अंकल की बेटी तान्या दीक्षित की फ्रेंड है, और उनके साथ ही आपकी शादी अटेंड करने आई थी। उसके बाद क्या हुआ यह हमें नहीं पता चला, लेकिन हाल-फ़िलहाल यह मुंबई में आई हुई है। यहाँ की टॉप मॉडल निशा परमार की असिस्टेंट की जॉब इन्हें ही मिली है। और आपकी कंपनी के अंदर ही इनका 1 साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ है।" इतना कहकर वह चुप हो जाता है।

    वहीं ऋषभ उसकी बात सुनकर डेविल स्माइल करते हुए अपने मन में बोला, "वाओ! मतलब किस्मत भी मेरा साथ ही दे रही है! जिसे मैं हर जगह ढूँढता फिर रहा था, वह मेरे ऑफिस में ही, मेरे साथ ही काम करेगी! क्या बात है! तो आखिर तुम खुद ही मेरे जाल में फँसने आ गई! अब तो तुम गई मानवी बजाज! तुमने मुझे धोखा दिया, अब मैं तुमसे उसके गिन-गिन कर बदले लूँगा। साथ ही उस अनुष्का को उसकी औकात दिखाऊँगा। क्या कहा था उसने कि तुम उसे ऐसे ही मिली थी? उसका एक झूठ तो पकड़ा गया, अब देखते हैं उसने मुझसे क्या-क्या छुपाया है?"

    फिर उसने उस डिटेक्टिव से कहा, "जितनी जल्दी हो सके शादी वाले दिन की इनफॉर्मेशन भी निकालो। जिसको जितने पैसे खिलाने पड़ें खिलाओ। मेरा नाम भी यूज़ कर सकते हो। रिसॉर्ट के मालिक से बात करो! लेकिन उस दिन की सारी इनफॉर्मेशन मुझे जल्द से जल्द चाहिए।"

    तो वह डिटेक्टिव "ओके सर" कहकर चला जाता है।

    वहीं ऋषभ मानवी को याद करते हुए बोला, "सो, फ़ाइनली तुमसे मिलने का समय आ गया है। रीज़न चाहे कुछ भी रहा हो, लेकिन सच यही है कि तुमने उस अनुष्का का साथ दिया, जिसकी सज़ा तुम्हें भी भुगतनी होगी। वेलकम टू माय हेल, मिसेज़ सहगल! अब तुम मेरी कैद से तभी बाहर जा पाओगी जब मैं चाहूँगा!" इतना कहकर वह मुस्कुराते हुए वहाँ से निकल जाता है।

  • 16. Substitute bride - Chapter 16

    Words: 1471

    Estimated Reading Time: 9 min

    अगली सुबह मानवी जल्दी उठ गई। आज उसका ऑफिस में पहला दिन था, और वह जिस मॉडल की असिस्टेंट बनी थी, उसके बारे में उसने सुन रखा था कि वह बहुत नकचढ़ी है और बात-बात पर गुस्सा करती है। इसीलिए मानवी गलती से भी कोई गलती नहीं करना चाहती थी। उसने जल्दी से अपने कपड़े लिए और बाथरूम में घुस गई। नहाकर आई तो उसने हाफ स्लीव्स वाली काली रंग की लॉन्ग कुर्ती और जीन्स पहनी। चेहरे पर मेकअप के नाम पर सिर्फ़ आँखों में काजल और होंठों पर पिंक लिप बाम लगाया; उसके होंठ पहले से ही गुलाबी थे, इसलिए उसे लिपस्टिक लगाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। उसने बड़े-बड़े झुमके पहने और अपने बालों को खुला रखा, जो उसकी कमर पर नागिन की तरह लहरा रहे थे।

    उसने अपना बैग लिया और ज़रूरी फाइलें लेकर सीढ़ियाँ उतरने लगी। तभी उसे आरती जी मिलीं जो हाथों में दही-शक्कर लेकर आ रही थीं।

    आरती जी उसे रोकते हुए बोलीं, "अरे रुक जा मानवी! आज तेरा ऑफिस का पहला दिन है, तो दही-शक्कर खाकर जा, इससे सब काम अच्छा होगा।"

    मानवी मुस्कुराते हुए उनसे दही-शक्कर खा लिया और तान्या के साथ ऑफिस के लिए निकल गई। तान्या भी मेहरा इंडस्ट्रीज में काम करती थी। मेहरा कंपनी का सीईओ रोहित मेहरा तान्या का बॉस होने के साथ-साथ मंगेतर भी था। साल भर पहले ही दोनों ने परिवार की आपसी सहमति से सगाई कर ली थी।

    वहीं ऋषभ सहगल मेंशन में था।

    आज ऋषभ भी जल्दी तैयार होकर नाश्ता करके ऑफिस के लिए निकल गया था। आखिर आज उसे मानवी से मिलना था। अनुष्का उससे कुछ कहना चाहती थी, लेकिन उसने अनुष्का को बिल्कुल अनदेखा कर दिया, जिससे अनुष्का चिढ़ गई। उसने अपनी माँ अनीता को फोन कर दिया, इस बात से अनजान कि ऋषभ ने पहले ही घर के नौकरों को उस पर नज़र रखने के लिए कह दिया था।

    थोड़ी देर में तान्या मानवी को लेकर सहगल ग्रुप ऑफ़ कंपनीज एंड टेक्सटाइल पहुँच गई, जिसकी दूसरी बिल्डिंग पर सहगल इंडस्ट्रीज लिखा हुआ था। मानवी इतनी बड़ी कंपनी को हैरानी से देख रही थी; उसके हाथ-पैर काँपने लगे थे यह सोचकर कि वह इतनी बड़ी कंपनी में जॉब करेगी।

    उसे घबराते देख तान्या ने उसका हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, "देख मानवी, इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। एक-दो दिन तुझे घबराहट होगी, लेकिन फिर यहाँ काम करने की आदत हो जाएगी। इसीलिए इतनी बड़ी ऑपर्च्युनिटी को अपनी घबराहट के आगे हाथ से मत जाने देना। बी कॉन्फिडेंट, सब कुछ अच्छा होगा।"

    उसकी बात सुनकर मानवी ने एक गहरी साँस ली और उसे गले मिलकर अंदर चली गई। तान्या अपनी कंपनी के लिए निकल गई।

    मानवी अंदर आई और रिसेप्शनिस्ट से जाकर निशा के बारे में पूछने लगी। रिसेप्शनिस्ट पहले एक पल उसे देखती रही। फिर मानवी से बोली, "आप अभी वेटिंग एरिया में वेट कीजिए। निशा मैम अभी तक नहीं आई हैं। आने के बाद सबसे पहले वह आर एस सर से मिलेंगी, उसके बाद ही किसी और से बात करेंगी। तब तक आप इंतज़ार कीजिए।"

    मानवी हल्की मुस्कुराहट के साथ लॉबी में जाकर बैठ गई और निशा का इंतज़ार करने लगी। तभी वहाँ पर एक और लड़की आकर बैठ गई और मानवी की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी। मानवी ने भी उसे मुस्कुराकर जवाब दिया। वह लड़की खुद को परिचित कराते हुए बोली, "हाय! मेरा नाम पायल है और तुम्हारा?"

    मानवी ने उससे हाथ मिलाते हुए कहा, "मेरा नाम मानवी है।"

    पायल मुस्कुराते हुए बोली, "अच्छा नाम है। तुम यहाँ किस पोस्ट के लिए आई हो?"

    मानवी ने कहा, "मैं यहाँ निशा परमार की असिस्टेंट की पोस्ट के लिए आई हूँ, और आप?"

    पायल ने कहा, "सीरियसली? मैं भी यहाँ उनकी ही मैनेजर की पोस्ट पर हूँ। चलो, अब हम लोग दोस्ती भी कर लेते हैं, क्योंकि हम दोनों को एक साथ ही रहना है और उसे झेलना है।" मानवी उसकी बात पर मुस्कुराई और बोली, "दोस्ती का तो ठीक है, लेकिन यह झेलने वाली बात कुछ समझ नहीं आई!"

    पायल मुस्कुराते हुए बोली, "हाँ, क्योंकि निशा परमार टॉप मॉडल भले ही हो, लेकिन एक नंबर की फ्लॉप पर्सन है। किसी से बात करने की तमीज़ नहीं है उसमें। अब तक उसकी ना जाने कितनी असिस्टेंट और मैनेजर बदल चुकी हैं, यह तो मुझे भी नहीं पता। अब हमारी बारी है। पता नहीं इस औरत को मॉडल किसने बना दिया। चेहरे पर तो इतना मेकअप रहता है कि इसका असली चेहरा भी किसी को याद नहीं। मैं तो सौ परसेंट ज़ोर हूँ कि रियल में इसकी शक्ल हातिमताई वाली चुड़ैल से मिलती होगी!"

    मानवी उसकी बात हैरानी से सुन रही थी, क्योंकि उसे यहाँ पर भी तान्या जैसा एफ़एम रेडियो मिल गया था, जो कभी बंद नहीं होगा और उसे इसे भी झेलना होगा।

    तभी पायल ने उसकी तरफ देखा और उसे हैरान देख बोली, "ज़्यादा बोल गई ना? क्या करूँ, मेरी आदत ही है ज़्यादा बोलने की!" उसकी बात सुनकर मानवी खिलखिला कर हँस पड़ी। उसकी प्यारी सी खनकती हुई हँसी सुनकर कई लोगों की नज़र उस पर आकर ठहर गई। इस बात से बेख़बर मानवी अभी भी खिलखिला कर हँस रही थी।

    वहीं दूसरी तरफ ऋषभ भी अभी-अभी ऑफिस आया था। उसका एंट्रेंस डोर बाकी सब से अलग था, जोकि लॉबी के पीछे से होकर गुज़रता था।

    ऋषभ अपने केबिन की ओर जा रहा था कि तभी उसके कानों में किसी की खनकती हुई हँसी की आवाज़ पड़ी। ऋषभ के आगे चलते कदम अपने आप ही रुक गए और वह वहाँ से लॉबी की तरफ लगे मिरर के पास आ गया। तभी उसकी नज़र एक चेहरे पर ठहर गई, जो मानवी का था। मानवी का गोरा रंग उसकी काली कुर्ती में उभर कर दिख रहा था। उसके खुले बालों की लटें हँसने की वजह से आगे आकर उसके गालों को छू रही थीं। कानों में बड़े-बड़े झुमके, जिनके मोती उसकी हँसी के साथ खनक रहे थे। आज ऋषभ ने पहली बार मानवी को इतने करीब से और इस रूप में देखा था।

    वह मासूम सा, बेदाग, दूध सा उजला चेहरा, जिसे खूबसूरत दिखने के लिए किसी भी मेकअप प्रोडक्ट की ज़रूरत नहीं थी; उसकी वह खनकती हुई हँसी, जो किसी मधुर संगीत की तरह कानों को सुकून पहुँचा रही थी; और उस पर उसके बाएँ होंठ के पास तिल, उसकी खूबसूरती और उसकी खूबसूरत हँसी में चार-चाँद लगा रहा था; उसके गुलाबी होंठ, जिन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे सफ़ेद गुलाबों के बीच दो गुलाबी गुलाबों को संजोकर रख दिया हो—ऋषभ का दिल मानवी को देखते ही धड़क उठा था। उसका अपनी धड़कनों पर कोई काबू नहीं था। मानवी को हँसते देख अनायास ही ऋषभ के होंठों पर भी मुस्कुराहट आ गई। लेकिन तभी उसकी मुस्कुराहट गुस्से में बदल गई जब उसका ध्यान ऑफिस के लोगों पर गया, जो मानवी को हँसते हुए देख रहे थे, खास तौर पर लड़के...!

    उसने गुस्से में एक नज़र लड़कों को देखा और फिर एक नज़र मानवी को देखते हुए ऊपर अपने केबिन में चला गया। वहाँ जाकर उसने अपने असिस्टेंट पीयूष को कॉल किया। जैसे ही पीयूष ने कॉल रिसीव किया, ऋषभ ने गुस्से में कहा, "अभी के अभी नीचे जाकर लॉबी में बैठे लोगों से कहो कि वो यहाँ काम करने आए हैं, ना कि हँसी-ठिठोली करने। अगर उन्होंने अपना काम टाइम पर ख़त्म नहीं किया, तो उन लोगों के साथ तुम्हारी भी आज की सैलरी कट हो जाएगी और एक महीने तक कोई बोनस भी नहीं मिलेगा। डू यू अंडरस्टैंड...?"

    उसकी बात सुनकर पीयूष घबरा गया। उसने अपने मन में कहा, "हे भगवान! अब ऐसा कौन है जो ऋषभ सर को भड़का रहा है? पता नहीं लोगों को ही इनके सामने हँसी-मज़ाक क्यों करना है। चल बेटा पीयूष, लग जा काम पर, वरना इन लोगों के साथ तेरी भी सैलरी और बोनस जाएगा!"

    और ऋषभ से बोला, "ओके सर, मैं अभी जाकर सभी को अलर्ट करता हूँ कि वह लोग काम को छोड़ अपनी हँसी-मज़ाक पर ध्यान दें..." तभी उसे ध्यान आया कि वह क्या बोल गया। वह घबराकर ऋषभ से बोला, "सॉरी सर, आई मीन हँसी-मज़ाक छोड़, काम पर ध्यान दें कहकर आता हूँ।" इतना कहकर वह जल्दी से नीचे भाग गया। वहीं मानवी और पायल अब बात कर रही थीं, लेकिन कुछ लड़के अब उन दोनों को ही देख रहे थे।

    तभी पीयूष वहाँ आया और उसने उन लोगों को डाँट लगाते हुए कहा, "अगर तुम लोगों ने अभी अपना काम टाइम पर ख़त्म नहीं किया, तो सर आज तुम लोगों की सैलरी के साथ-साथ एक महीने का बोनस भी काट लेंगे। इसलिए बेहतर यही होगा कि हँसी-मज़ाक बाद में करना और पहले काम करो।" उसकी बात सुनकर सभी घबरा गए और जल्दी से अपना काम करने लगे।

  • 17. Substitute bride - Chapter 17

    Words: 1438

    Estimated Reading Time: 9 min

    थोड़ी देर में ही निशा अपने हाई हील्स की टक-टक की आवाज करते हुए, एटीट्यूड के साथ अंदर आई। चेहरे पर विद मेकअप, एक वन-पीस हॉट ड्रेस पहने हुए थी जिससे उसके फिगर के एक-एक कट साफ उभर कर आ रहे थे। लड़के उसे हवस और ललच भरी नज़रों से देख रहे थे। जिससे निशा को अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड हो रहा था। वह सबको इग्नोर करते हुए, एटीट्यूड से ऋषभ के केबिन में चली गई। वहीं मानवी और पायल ने हैरानी से उसे देखा, और फिर एक-दूसरे को देखकर एक साथ कहा, "ओ नो! क्या हम अब इसके साथ काम करेंगे?" इतना कहकर दोनों थकी-हारी सी वहीं सोफे पर बैठ गईं।


    पायल मानवी से बोली, "देखा, मैंने पहले ही कहा था, इसके साथ हम काम नहीं करेंगे, बल्कि इसे झेलेंगे!"


    वहीं मानवी ना में सिर हिलाते हुए बोली, "लेकिन इस मेकअप की दुकान को टॉप मॉडल बनाया किसने? मुझे तो लगा था कि निशा परमार मुंबई की टॉप मॉडल है, तो ज़रूर उसने कोई बात होगी। लेकिन यहां तो उल्टी गंगा बहती दिख रही है!"


    तो पायल उसे देखते हुए बोली, "और किसने? यही कंपनी के बॉस हैं, ऋषभ सहगल! फिर उसके पास आकर उसके कान में धीरे से बोली," मैंने तो यह तक सुना है कि ऋषभ सहगल इसे डेट भी कर रहे हैं, जबकि उनकी शादी हो चुकी है। और यह पता नहीं कैसी औरत है, शादीशुदा मर्द पर भी डोरे डाल रही है। देख नहीं रही हो, कैसे छम्मक-छल्लो बनकर आई है, उन्हें रिझाने के लिए…!"


    उसकी बात सुनकर मानवी हैरान रह गई। साथ ही, ऋषभ नाम उसे कुछ सुना-सुना सा लग रहा था, लेकिन फिर उसने अपने खयालों को झटक दिया और पायल से बोली, "अब तुम चुप करो। हमें क्या करना है? वो कुछ भी करें, यह इन लोगों का पर्सनल मैटर है। हमें तो बस अपने काम से मतलब रखना है।" उसकी बात सुनकर पायल चुप हो गई।


    वहीं अंदर, ऋषभ के केबिन में, ऋषभ गुस्से में अपने केबिन में इधर-उधर घूम रहा था। उसे बार-बार मानवी का हंसता-खिलखिलाता चेहरा और लोगों का उसे घूरना याद आ रहा था। तभी उसके केबिन में निशा आई। उसने पीछे से ऋषभ को हग कर लिया और ऋषभ से पूछा, "हाय! इतनी बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रहे थे? अच्छा बताओ, मैं कैसी लग रही हूँ?" तो ऋषभ, जो उसके गले लगाने से और ज़्यादा चिढ़ गया था, उसने निशा को खुद से दूर कर दिया और बिना उस पर ध्यान दिए कहा, "ठीक लग रही हो, पर यह तुम बार-बार मुझसे गले मत लगाओ। कहा ना मैंने कि हम लोग अब सिर्फ़ दोस्त की तरह रहेंगे। मैं नहीं चाहता लोग हमारे बारे में बातें बनाएँ…!"


    तो निशा उसकी बात पर गुस्सा हो गई और गुस्से में ऋषभ से बोली, "जानती हूँ तुमने ऐसा कहा और तुम्हारी बात मानूँगी भी, लेकिन इस वक्त इस केबिन में तुम्हारे और मेरे अलावा कोई नहीं है, तो फिर तुम्हें किस बात का बुरा लग रहा है? और फिर मैंने तुम्हें एक नॉर्मल हग ही किया है, जो दोस्तों में भी होता है, तो इसमें क्या बुराई हो गई!"


    ऋषभ को एहसास हुआ कि वह निशा के साथ कुछ ज़्यादा ही रूड हो गया, इसलिए उसने निशा से कहा, "ओके फाइन यार, मैं आज कुछ परेशान सा हूँ, बस इसीलिए अपना गुस्सा तुम पर उतार दिया। और खैर, छोड़ो, तुम आज बहुत अच्छी लग रही हो, बहुत हॉट! ध्यान रखना, कहीं लोग तुम्हें देखकर जल ना जाएँ…!" उसकी बात सुनकर निशा मुस्कुरा दी और अपनी तारीफ़ सुनकर खुश हो गई। उसे नॉर्मल देख ऋषभ मन ही मन खुद को शाबाशी देता है।


    और फिर कुछ सोचकर निशा से बोला, "निशा, तुम्हारी असिस्टेंट और मैनेजर का क्या हुआ? उनका फाइनल करो जल्दी, ताकि हम शूटिंग के लिए ड्रेसेस देख सकें और भी बहुत सारे काम हैं। इसीलिए एक काम करो, अगर तुम्हारी मैनेजर असिस्टेंट आ गई हो तो, उन्हें यहीं बुला लो और जो कुछ भी पूछना है यहीं पूछो। क्या फ़ायदा पहले अपने केबिन में जाओगी, और वहाँ से उन्हें बुलाओगी? इस तरह टाइम ही बर्बाद होगा।"


    तो निशा हाँ में सिर हिला दी और बाहर रिसेप्शनिस्ट रैना को फ़ोन कर, उसे सब कुछ समझाकर फ़ोन रख दिया।


    थोड़ी देर में ऋषभ के केबिन का दरवाज़ा नॉक हुआ, जिससे ऋषभ एकटक दरवाज़े की ओर देखने लगा। वहीं निशा अंदर आने को कह दिया। तो मानवी और पायल दोनों एक साथ अंदर आईं और निशा को ग्रीट किया। वहीं मानवी ने निशा को हेलो कर, ऋषभ की तरफ़ देखकर हेलो किया और फिर से निशा की तरफ़ अपना रुख कर लिया। ऋषभ जो अपने चेहरे पर शैतानी मुस्कराहट लेकर बैठा था, वह मानवी के रिएक्शन से हैरान रह गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि मानवी ने उसे पहचाना क्यों नहीं…!!


    (दरअसल मानवी का घूंघट मोटे दुपट्टे का था, जिससे उसका चेहरा किसी को दिखाई ना दे। और जब ऋषभ ने मानवी का घूंघट उठाया था, तभी मानवी, जिसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं (क्योंकि ऋषभ ने उसके हाथ को बहुत जोर से मोड़ा था, जिससे उसके आँसू बह रहे थे), उसे भरी हुई आँखों से ऋषभ का चेहरा धुंधला दिखाई दिया था। और तभी मानवी ऋषभ को धक्का देकर भाग गई थी, जिससे ऋषभ ने तो उसका चेहरा देख लिया था, लेकिन मानवी नहीं देख पाई थी।)


    वहीं निशा ने दोनों को ऊपर से नीचे तक देखा और फिर उन दोनों से एटीट्यूड के साथ सवाल करने लगी। वहीं ऋषभ अभी भी खुद की सोच में उलझा हुआ था। वह यही सोच रहा था कि क्या यह लड़की उसे इतनी जल्दी भूल गई? साथ ही उसे मानवी पर बहुत गुस्सा भी आ रहा था कि उसने उसे पूरी तरह से इग्नोर कर दिया था। लेकिन इस वक्त निशा और पायल के सामने वह कुछ कह भी नहीं सकता था। आखिर वह निशा के बिहेवियर से वाकिफ था। उसे पता था अगर निशा को पता चला कि मानवी ही वह लड़की है जिससे ऋषभ की शादी हुई है, तो वह मानवी को एक पल इस ऑफिस में रहने नहीं देती।


    सभी सवाल करने के बाद निशा ने मानवी से कहा, "ठीक है, कल से तुम दोनों को अपना-अपना काम ठीक से करना है। इसीलिए आज ही सभी काम को सही से समझ लो। हमारे पास ज़्यादा समय नहीं है और मुझे यहाँ की शूटिंग के बाद गोवा भी जाना है। इसीलिए तुम दोनों जल्दी से सभी काम को समझ लो!"


    तो मानवी कॉन्फिडेंटली बोली, "हाँ श्योर मैम, हम आज से ही ज्वाइन कर लेंगे, और आई प्रॉमिस हमारी वजह से आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।" इतना कहकर वहाँ से जाने लगी…


    कि तभी ऋषभ उसे रोकते हुए बोला, "एक मिनट मिस मानवी! आप शायद भूल रही हैं कि यहाँ पर इस कंपनी का बॉस भी बैठा हुआ है और जब तक मेरी इजाज़त नहीं मिलती, आप यहाँ से नहीं जा सकती…!"


    उसकी आवाज सुनकर एक पल को मानवी हैरान रह गई। आखिर वह इस आवाज को कैसे भूल सकती थी? वह ऋषभ की तरफ पलटती है जो उसे ही देख मुस्कुरा रहा था।


    मानवी ने दिल ही दिल में खुद से कहा, "नहीं मानवी, यह वो नहीं हो सकते। और आवाज का क्या है? वह तो कई लोगों की मिल सकती है।" इतना कहकर अपना सर झटक कर ऋषभ से बोली, "सॉरी सर, लेकिन आपको इस तरह इग्नोर करने का मेरा कोई इरादा नहीं था। बस यह सब मिस्टेक से हुआ। आप बोलिए मुझे क्या करना है…?"


    तो ऋषभ मुस्कुराते हुए उसके सामने एक पेपर रखा और मानवी से बोला, "जब आप हमारी कंपनी के अंदर काम ही कर रही हैं, तो उस बेस पर आपको इस कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करना होगा। क्योंकि यहाँ पर जो भी आता है वह एक साल से पहले इस कंपनी को नहीं छोड़ सकता। कंपनी चाहे तो अपने मन से उससे निकाल सकती है, लेकिन आप अपने मन से नहीं छोड़ सकती…!"


    तो मानवी उस पेपर को लेकर साइन कर दिया और मुस्कुराते हुए ऋषभ से बोली, "मुझे भी इस कंपनी में काम करके खुशी होगी सर। मैं खुद भी यहाँ से नहीं जाना चाहूंगी।" इतना कहकर वहाँ से बाहर चली गई! वहीं ऋषभ उस पेपर को देखकर डेविल स्माइल कर रहा था।


    तभी पायल ऋषभ से बोली, "सर, मेरे पेपर कहाँ हैं? मैं भी साइन कर दूँ…!"


    तो ऋषभ उसे घूर कर देखते हुए बोला, "तुम्हारे कॉन्ट्रैक्ट पेपर तुम्हारे फ़ाइल में ही साइन हो गए थे, इसलिए तुम्हें साइन करने की ज़रूरत नहीं है। तुम जा सकती हो।" तो पायल ऋषभ की नज़रों से डरकर जल्दी से बाहर चली गई।

  • 18. ऋषभ मानवी की नजदीकी -1, Chapter 18

    Words: 1314

    Estimated Reading Time: 8 min

    निशा ने ऋषभ को मुस्कुराते हुए देखा और पूछा, "क्या हुआ ऋषभ? तुम इन पेपरों को देखकर क्यों मुस्कुरा रहे हो?"

    ऋषभ ने निशा की ओर देखा और कहा, "कुछ नहीं। तुम जाकर अपना काम करो।" इतना कहकर वह वहाँ से उठकर वॉशरूम में चला गया। निशा कंधे उचकाकर बाहर चली गई।

    बाहर मानवी ने पायल से "एक्सक्यूज मी" कहकर वॉशरूम जाने की अनुमति मांगी और अंदर जाकर दरवाज़ा बंद कर लिया। वह घबराई हुई थी। उसके कानों में बार-बार ऋषभ की आवाज़ गूंज रही थी। उसने अपने आप से कहा, "नहीं मानवी, यह सब तेरा भ्रम है। हो सकता है उनकी आवाज़ किसी और से मिलती हो। वैसे भी इस दुनिया में बहुत लोग हैं जिनकी आवाज़ एक-दूसरे से मिलती है। और अगर यह वही होते, तो वे मुझे देखते ही भड़क जाते। आखिर उन्होंने मेरा चेहरा तो देखा है! लेकिन उनका नाम भी तो ऋषभ जैसा ही कुछ था।"

    फिर उसने अपने आप को समझाते हुए कहा, "तो उससे क्या होता है? ऋषभ नाम तो अकेले किसी शख्स का नहीं है। दुनिया में लाखों ऋषभ हैं। मैं व्यर्थ परेशान हो रही हूँ। फोकस मानवी, फोकस! तुझे बस अपने काम पर ध्यान देना है। और कुछ नहीं।" इतना कहकर वह बासिन के पास आकर अपने चेहरे पर ठंडा पानी डाला। जब उसे कुछ अच्छा महसूस हुआ, तो उसने अपने चेहरे को दुपट्टे से साफ़ करते हुए वॉशरूम से बाहर जाने के लिए पीछे मुड़ी। कि तभी अचानक वॉशरूम की लाइट चली गई और पूरे वॉशरूम में अंधेरा छा गया। कुछ भी नहीं दिख रहा था। इस तरह अचानक लाइट जाने से मानवी एकदम घबरा गई। उसके चेहरे पर डर साफ़ दिखने लगा। उसे बचपन से ही अंधेरे से डर लगता था। वह खुद से बोली, "ये अचानक लाइट क्यों गई? इसे भी जाना था क्या?" (कुछ सोचकर घबराते हुए, एक हाथ कमर पर और एक माथे पर रखकर) "ओ नो! मेरा फोन और पर्स तो पायल के पास है। अब क्या करूँ? इस अंधेरे में कुछ दिख भी तो नहीं रहा। पता नहीं दरवाज़ा किधर होगा..." इतना कहकर उसने अपने हाथों को आगे बढ़ाते हुए, वहां हर चीज को महसूस करते हुए आगे बढ़ना शुरू किया। पर तभी उसे अपने पास किसी की मौजूदगी महसूस हुई। वह कुछ समझ पाती, इससे पहले ही कोई शख्स पीछे से आकर उसकी कमर पर अपने दोनों हाथ रखते हुए उसे अपनी बाहों में भर लिया। मानवी की साँसें रुक गईं और वह अपनी जगह जड़ हो गई। पर तभी उसे एक जानी-पहचानी सी परफ़्यूम की महक और अपने पास तेज़ चलती हुई साँसें महसूस हुईं। उन्हें पहचानते ही उसकी आँखें बड़ी हो गईं। यह परफ़्यूम की खुशबू, यह महकती हुई साँसें, वह इन्हें कैसे भूल सकती थी? यह वही महक थी जो एक महीने पहले शादी के वक़्त उसने महसूस की थी, जो उस शख्स के जिस्म से आ रही थी जिससे उसकी शादी हुई थी। और यह स्पर्श, यह भी बिलकुल उसी जैसा था। यह टच भी बिलकुल वही था। तो क्या यह वही है? यह सोचते हुए मानवी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसका दिमाग ब्लैंक हो चुका था, उसकी सोचने-समझने की शक्ति चली गई थी। उसे इस वक़्त इस बात का भी अंदाज़ा नहीं था कि वह इस वक़्त किसी अनजान शख्स की बाहों में है और उसे इस वक़्त किस तरह रिएक्ट करना चाहिए। वह बस खामोशी से एक मूर्ति की तरह उसकी बाहों में खड़ी थी।


    दूसरी तरफ, वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि ऋषभ था, जो निशा से बाथरूम जाने का बहाना बनाकर बाथरूम में घुस गया था ताकि वह अपने केबिन से भाग सके। और हुआ भी ऐसा ही। ऋषभ के जाने के बाद निशा उसके केबिन से निकल गई। इसके बाद ऋषभ तुरंत अपने केबिन से बाहर निकलकर मानवी के पीछे आया था। मानवी, जो ऋषभ की मौजूदगी से एक पल के लिए घबरा गई थी, जब बाथरूम की तरफ़ आई तो ऋषभ ने उसका पीछा किया। मानवी घबराई हुई थी, इसलिए उसने बाथरूम में आकर दरवाज़ा बंद कर लिया, पर अपनी घबराहट में उसने ध्यान नहीं दिया कि दरवाज़ा ठीक से बंद नहीं हुआ है। और इसी बात का फायदा उठाकर ऋषभ उससे मिलने के लिए चुपके से पीछे से बाथरूम में आ गया था और अपने असिस्टेंट पियूष को ऑर्डर देकर बाथरूम की लाइट भी बंद करवा दी थी ताकि मानवी उसे न देख सके क्योंकि वह मानवी को परेशान करना चाहता था। लेकिन इस वक़्त मानवी के करीब आने पर, उसे अपनी बाहों में भरने के बाद, ऋषभ जैसे सब कुछ भूल ही गया था, किसी और ही दुनिया में खो गया था। उसे ख्याल ही नहीं था कि वह यहाँ क्या करने आया था। वह तो बस मानवी को अपनी बाहों में थामे हुए, उसके बदन से आती महकती हुई खुशबू को अपनी साँसों में समा रहा था, जो उसे मदहोश कर रही थी और उसे मानवी के साथ गुस्ताखी करने पर मजबूर कर रही थी।

    पर फिलहाल वह कुछ भी ऐसा नहीं कर सकता था जो आगे उसके प्लान में रोड़ा बने। यही सोचकर उसने अपने मन में उठते जज़्बातों को कुछ वक़्त के लिए दबा दिया और हल्के से मानवी के कान की तरफ़ झुकते हुए, अपनी गर्म साँसों को मानवी की गर्दन पर छोड़ते हुए, उसके कानों में सरगोशी करते हुए धीमी आवाज़ में बोला, "कैसी हो वाइफी? मैंने बहुत मिस किया तुम्हें। तुमने मुझे मिस किया या नहीं? ये कौन सी बात हुई? भला कोई अपने हस्बैंड को ऐसे छोड़कर जाता है क्या? वो भी शादी वाले दिन ही?"

    उसकी बात सुनकर मानवी जैसे अपनी होश में वापस आई हो, वह एकदम से उसकी बाहों से निकलने की कोशिश करने लगी और घबराते हुए उससे बोली, "क-कौन हो तुम? छोड़ो मुझे! ये क्या बदतमीज़ी है? छोड़ो!" कहते हुए उसने खुद को उससे दूर करने के लिए धक्का दिया, पर ऋषभ के आगे उसकी एक न चली।

    तभी ऋषभ ने उस पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी और उसे अपने और करीब करते हुए, हल्के से उसके कान को चूमते हुए बोला, "ये क्या वाइफी? तुम मुझे भूल गई? अपने हस्बैंड को? दिस इज़ नॉट फेयर! ये तो बहुत गलत बात है। कोई अपने हस्बैंड को भूलता है क्या? गलत बात! दिस इज़ वेरी बैड! इसकी सज़ा तो तुम्हें ज़रूर मिलेगी, ताकि आगे चलकर तुम याद रख सको कि मैं तुम्हारा कौन हूँ। खैर, फिलहाल तुम इन बातों को छोड़ो और मुझे मेरी एक बात का जवाब दो। शादी करके मुझसे दूर क्यों भाग गई तुम? कोई ऐसे अपने नए-नवेले पति को छोड़कर भागता है क्या? वो भी शादी वाले दिन ही? ये तो गलत है ना? तो क्यों किया तुमने ऐसा? देखो, हमारी फर्स्ट नाइट भी नहीं हो पाई, सिर्फ़ तुम्हारी वजह से।"

    मानवी उसकी बातें सुनकर घबरा गई। वह लगातार उसके हाथों को अपने पेट से हटाने की कोशिश कर रही थी। वहीं ऋषभ अपनी पकड़ मज़बूत करता जा रहा था जिससे उसकी कोशिश काम नहीं हो रही थी। वह घबराते हुए ऋषभ से बोली, "देखो, मैं तुम्हें नहीं जानती, इसीलिए अपनी बकवास बंद करो। मुझे नहीं पता तुम किस शादी की बात कर रहे हो। प्लीज़ मुझे जाने दो। यूँ इस तरह मेरे साथ बदतमीज़ी करके तुम बहुत गलत कर रहे हो। मैं अभी तुम्हारी शिकायत ऋषभ सर से कर दूँगी, तो वो तुम्हें छोड़ेंगे नहीं। इसीलिए अच्छा यही होगा कि तुम चुपचाप यहाँ से चले जाओ।"

  • 19. ऋषभ मानवी की नजदीकी - 2 - Chapter 19

    Words: 1010

    Estimated Reading Time: 7 min

    मानवी उसकी बातें सुनकर घबरा गई। वह लगातार उसके हाथों को अपने पेट से हटाने की कोशिश कर रही थी, वहीं ऋषभ अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा था जिससे उसकी कोशिश काम नहीं हो रही थी। वह घबराते हुए ऋषभ से बोली,
    "देखो, मैं तुम्हें नहीं जानती, इसीलिए अपनी बकवास बंद करो। मुझे नहीं पता तुम किस शादी की बात कर रहे हो। प्लीज मुझे जाने दो। यूँ इस तरह मेरे साथ बदतमीजी करके तुम बहुत गलत कर रहे हो। मैं अभी तुम्हारी शिकायत ऋषभ सर से कर दूँगी, तो वो तुम्हें छोड़ेंगे नहीं। इसीलिए अच्छा यही होगा कि तुम चुपचाप यहाँ से चले जाओ।"

    उसकी बात सुनकर ऋषभ मुस्करा उठा। वह उसकी शिकायत करने के लिए उसी के पास जाएगी, यह सोचकर वह मानवी से कुछ कहने ही वाला था कि तभी अचानक ऋषभ का फ़ोन बज उठा। जिससे उसकी फ़्लैशलाइट ऑन हो गई और वॉशरूम में उजाला सा हो गया। मानवी पीछे पलटने की कोशिश करने लगी। वहीं इस तरह फ़ोन की लाइट जलने से ऋषभ भी थोड़ा घबरा गया, क्योंकि उसके शर्ट की पॉकेट में फ़ोन रखा हुआ था जिसकी लाइट उसके चेहरे की तरफ़ ही पड़ रही थी। जिससे साफ़ था कि अगर मानवी उसकी तरफ़ पलट जाती तो उसका चेहरा देख लेती। पर फ़िलहाल ऋषभ यह नहीं चाहता था क्योंकि उसने मानवी के लिए कुछ और ही प्लान कर रखा था। यही सोचकर उसने एकदम से घूमते हुए मानवी को हल्का सा धक्का दिया। जिससे मानवी आगे की तरफ़ झुक गई और ऋषभ जल्दी से वॉशरूम से बाहर निकल गया।

    उसके जाते ही वॉशरूम में फिर से अंधेरा हो गया, पर मानवी इस बार तेज़ी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी और वह दरवाज़े तक पहुँच भी गई कि तभी लाइट आ गई। जिससे मानवी चौंक उठी।

    मानवी ने अपनी नज़रें इधर-उधर घुमाईं। उसे कोई नहीं दिखा। पूरे वॉशरूम में वह अकेली थी। यह देख वह हैरानी से चारों तरफ़ देखने लगी। वह एकदम दीवार से लगकर खड़ी हो गई और खुद से बोली,
    "वह यहाँ था! वह सच में यहाँ आया था! वह जानता है कि मैं इस कंपनी में हूँ। इसका मतलब मैं उसकी नज़रों में हूँ और अब वह मुझे ज़रूर परेशान करेगा। (घबराते हुए) नहीं, मैं यहाँ जॉब नहीं कर सकती। मुझे जल्द से जल्द यहाँ से जाना होगा, इससे पहले कि वह मेरे लिए कोई परेशानी खड़ी करे या फिर शादी वाली बात काकी तक पहुँचे।"

    इतना कहकर वह वॉशरूम से निकलने लगी, पर तभी उसे याद आया कि उसने ऋषभ की कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट पेपर साइन किये हैं, जिसके बेस पर वह १ साल तक इस कंपनी को नहीं छोड़ सकती। यह याद आते ही मानवी अपने घुटनों के बल बैठ गई। उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे।
    "इस कंपनी को भी नहीं छोड़ सकती और यहाँ काम भी नहीं कर सकती! जिस तरह वह आज यहाँ वॉशरूम में आ गया, वह कहीं भी आ सकता है। कहीं उसने अपने गुस्से में, अपने बदले के लिए कुछ भी उल्टा-सीधा कर दिया, तो मैं क्या करूँगी? (कुछ सोचकर) मुझे जल्द से जल्द इन सारी बातों के बारे में अनुष्का दीदी को बताना होगा। अब वही हैं जो मुझे इस प्रॉब्लम से बाहर निकालेंगी। लेकिन मैं उनसे मिलूँगी कैसे?"

    यही सोचकर वह परेशान होने लगी और कुछ देर वैसे ही बैठी रही। तभी बाहर से पायल की आवाज़ आई, जो उसे बाहर आने को बोल रही थी। मानवी ने कहा, "हाँ, बस थोड़ी देर में आ रही हूँ।" कहकर वह खड़ी हो गई।
    "नहीं, मैं इस तरह नहीं घबरा सकती। मुझे हिम्मत रखनी होगी। वैसे भी शादी में जो कुछ हुआ उसमें मेरी गलती नहीं है। वह सारी गलती अनुष्का दीदी के फैमिली वालों की है। तो फिर वह उनकी सज़ा मुझे कैसे दे सकता है? अगर वह अगली बार मेरे सामने आया तो मैं उसकी शिकायत ऋषभ सर से कर दूँगी, तो वह खुद उसे इस ऑफिस से निकाल देंगे। बस मुझे अब उसे किसी तरह पहचानना होगा कि वह है कौन।"

    कहते हुए वह खुद को दिलासा देने लगी और कुछ देर बाद जब उसे अच्छा महसूस हुआ, तो वह वॉशरूम से बाहर निकल गई और पायल के साथ मिलकर काम करने लगी।

    वहीं ऋषभ अपनी केबिन की खिड़की से बाहर मानवी को देखते हुए मुस्कुरा रहा था। उसने किसी को फोन किया और उसे काफी सारी बातें समझाकर फोन रख दिया। फिर अपने आप से कहा, "तो अब वक़्त आ गया है अपने खेल को अंजाम देने का।" उसके बाद उसने पीयूष को कॉल कर अपने केबिन में बुलाया। थोड़ी देर में ही पीयूष उसके केबिन में हाजिर हुआ।

    ऋषभ उसे देखते हुए बोला, "२ दिन के लिए निशा को शिमला वाले प्रोजेक्ट के लिए जाना था ना, तो उसे कहो कि वह अपना शिमला वाले प्रोजेक्ट के लिए आज ही निकल जाए। मैं नहीं चाहता शिमला वाले प्रोजेक्ट में और देरी हो। अगर वह नहीं मानती तो उसे मेरे पास भेजो। और हाँ, कल शाम को दादा-दादी, माँ-पापा वाले मेंशन आ रहे हैं, तो ध्यान रहे उन्हें कोई दिक्क़त नहीं होनी चाहिए।"

    पीयूष ने ऋषभ से कहा, "ओके सर, दादा-दादी के काम में मैं देख लूँगा, लेकिन निशा मैम को मनाना मेरे बस की बात नहीं है। आप उनसे खुद ही बात कर लीजिये।"

    ऋषभ ने अपने हाथ से उसे जाने को कहा। और एक सिगरेट जलाकर अपने मुँह में रख ली और खिड़की के बाहर मानवी को देखते हुए कश लेने लगा। वहीं पीयूष जल्दी से बाहर आकर गहरी साँस ली और अपने आप से बोला, "पता नहीं सर के मन में क्या चल रहा है। खैर, पीयूष तुझे तो अपना काम करना है, शो कर।"

    वह जल्दी से निशा के पास चला गया, जो अपने लिए कपड़े चेक कर रही थी।

  • 20. ऋषभ का प्लान - Chapter 20

    Words: 812

    Estimated Reading Time: 5 min

    पीयूष शीघ्रता से निशा के पास गया, जो अपने परिधानों की जाँच कर रही थी। मानवी उसका माप और शेष परिधानों की जाँच कर रही थी, जबकि पायल उसका कार्यक्रम निर्धारित कर रही थी। पीयूष एक क्षण के लिए पायल को देखता ही रह गया, फिर सिर हटाकर निशा के पास आकर कहा, "मिस निशा परमार, सर ने आपको अभी अपने केबिन में बुलाया है!"

    उसकी बात सुनकर निशा प्रसन्न हुई। ऋषभ ने उसे स्वयं अपने पास बुलाया था। निशा खुशी से चहकती हुई ऋषभ के केबिन में चली गई।

    वहीं पीयूष वापस जा रहा था कि अचानक पायल कुछ पूछने के लिए मानवी की ओर आ रही थी। वह पीयूष से टकरा गई और गिरने लगी, कि पीयूष ने उसे संभाल लिया। दोनों की नज़रें आपस में टकरा गईं और दोनों एक-दूसरे में खोकर एक-दूसरे को देखने लगे।

    वहीं मानवी, जो इन दोनों को देख रही थी, उन्हें इस तरह देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने अपना गला साफ करने का नाटक किया। दोनों होश में आ गए और झिझक कर इधर-उधर देखने लगे। पीयूष वहाँ से चला गया, और पायल मानवी की ओर देखती है जो उसे देखकर मुस्कुरा रही थी। वह झिझककर अपना काम करने लगी। वहीं मानवी उसे देखकर हँसते हुए अपना काम करने लगी।

    वहीं निशा मुस्कुराते हुए ऋषभ के केबिन में आई और ऋषभ से खुशी से पूछा, "क्या हुआ ऋषभ? तुमने मुझे क्यों बुलाया?"

    ऋषभ उसकी ओर देखते हुए बोला, "क्योंकि मैं चाहता हूँ कि तुम शिमला वाले प्रोजेक्ट के लिए आज ही निकल जाओ। दो दिन बाद उन लोगों को यूएस जाना है, इसलिए इस काम का समाप्त होना ज़रूरी है।" उसकी बात सुनकर निशा का चेहरा उतर गया। उसे लगा था कि ऋषभ उसके साथ समय बिताना चाहता है, इसलिए उसे बुला रहा है, लेकिन यहाँ तो मामला ही कुछ और था।

    निशा मन मरोड़ कर रह गई। फिर झूठी हँसी हँसते हुए ऋषभ से बोली, "ठीक है, तुम कहते हो तो मैं चली जाऊँगी, लेकिन उससे पहले क्या तुम मेरे साथ कुछ वक़्त नहीं बिता सकते?"

    ऋषभ अपनी कुर्सी पर बैठते हुए बोला, "नहीं निशा, इस वक़्त मैं बहुत व्यस्त हूँ। अभी मेरी मीटिंग है, उसके बाद यहाँ का काम, फिर शाम को भी मीटिंग है!"

    निशा गुस्से में ऋषभ से बोली, "तो ऋषभ, तुम्हारे पास मेरे लिए समय होता ही कब है? हर वक़्त तुम व्यस्त रहते हो। तुमसे कुछ भी माँगो तो बस 'व्यस्त हूँ' कहकर टाल देते हो।"

    ऋषभ निशा की ओर देखते हुए बोला, "ओके, ठीक है। तुम चाहो तो हम रात को साथ में डिनर कर सकते हैं। अब इससे ज़्यादा मैं कुछ नहीं कर सकता।" निशा उसकी बात पर प्रसन्न हुई और ऋषभ से बोली, "ठीक है, लेकिन अपनी बात से मुकर मत जाना। मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगी।" इतना कहकर वह बाहर चली गई।

    वहीं ऋषभ उसे बाहर जाते देखकर गहरी साँस ली और अपने आप से कहा, "हूँ भगवान! किस मुसीबत को मैंने अपने गले लगा लिया है! खैर, कुछ समय की बात है, फिर यह मुसीबत भी टल जाएगी। अब जो काम हाथ में लिया है, उसे अधूरा छोड़ना ऋषभ सहगल को शोभा नहीं देता।" इतना कहकर वह अपना काम करने लगा।

    वहीं दोपहर हो चुकी थी, पर मानवी का मन अभी भी बेचैन था। उसने तान्या को कॉल करने का सोचा और उसने कई बार तान्या को कॉल भी किया, लेकिन उसका फ़ोन व्यस्त बता रहा था। इसलिए उसकी तान्या से बात नहीं हो पाई।

    तभी निशा उसके पास आई और मानवी से कहा, "क्या नाम है तुम्हारा?" मानवी ने निशा से कहा, "जी, वो मानवी।" निशा ने अहंकार से कहा, "व्हाटएवर! जो भी हो, लेकिन अभी दो-तीन दिन तुम ऑफिस मत आना। क्योंकि फिलहाल मैं कुछ दिन के लिए शिमला जा रही हूँ, वहाँ का प्रोजेक्ट हैंडल करने के लिए। और उसमें तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है। इसलिए जब मैं आ जाऊँगी तब मैं तुम्हें सूचित कर दूँगी।" फिर पायल से कहा, "और तुम, तुम मेरी मैनेजर हो, तो तुम्हें मेरे सारे प्रोजेक्ट और डील का ध्यान रखना है। तुम मेरे साथ शिमला चल रही हो, इसलिए यहाँ से जल्दी छुट्टी लेकर अपना सामान पैक करना। क्योंकि हमारी कल सुबह की फ़्लाइट है।" पायल ने हाँ में सिर हिला दिया। उसके बाद निशा वहाँ से चली गई।

    पायल मानवी से बोली, "कहा था ना मैंने, इस अहंकार की दुकान को झेलना बहुत मुश्किल होने वाला है हमारे लिए!"

    मानवी बोली, "रिलैक्स! अभी शुरू में तो परेशानी होगी ही, धीरे-धीरे आदत पड़ जाएगी। जाओ, तुम अपना काम खत्म करो, तुम्हें जल्दी वापस भी जाना है!" पायल ने हाँ में सिर हिलाकर जल्दी-जल्दी काम करने लगी।