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कोहीनूर,,,

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sonali jangir

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इक पूराना रहस्य जो विश्वकर्मा परिवार के हाथ लगा जिसे सुलझाने की कोशिशें करते हुए वे अपना किमती समय बर्बाद कर देते हैं,,, और जब आखिरकार वो रहस्य खुलकर उनके सामने आता है तो वो लोग बहुत ज्यादा शौक्ड हुए,,, ये नोवल इक कोडिंग लेंग्वेज पर आधारित इक रह...

Total Chapters (1)

Page 1 of 1

  • 1. कोहीनूर,,, - Chapter 1

    Words: 406

    Estimated Reading Time: 3 min

    हजारों साल पुरानी हवेली जो अब खण्डहर में बदल चुकी थी,,
    विश्वकर्मा परिवार के हाथ उसका एक रहस्य आ गया था,,
    जो उनकी समझ से बिल्कुल पड़े था ।

    मिस्टर विश्वकर्मा दो दिन पहले ही उस खण्डहर के पास अपने कुछ स्टूडेंट्स के साथ आए थे। लेकिन उन्होंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और शाम होने को थी इसलिए वह अपनी जिम्मेदारियां पर जिन विद्यार्थियों को लेकर आए थे उन्हें वापस उनके घर पहुंचाने की जल्दी में वहां से चले गए,,
    फिर वह दो दिन तक बहुत व्यस्त थे।

    मिस्टर विश्वकर्मा जियोग्राफी के टीचर थे । इसलिए वह अक्सर बिजी रहते थे। उन पर 3000 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी थी। वह एक बहुत शानदार टीचर थे। और उनकी समाज के लोग बहुत इज्जत करते थे।


    मिस्टर विश्वकर्मा अपनी पत्नी और बेटे को गांव से शहर शिफ्ट करते हैं।

    मिस्टर विश्वकर्मा को उस खण्डहर के पास एक अच्छा घर स्कूल की तरफ से मिला था।

    उनकी पत्नी मैसेज विश्वकर्मा एक हाउसवाइफ थी,, लेकिन वह इक छुपी हुई राइटर भी थी।  मिस्टर विश्वकर्मा को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था। होता भी कैसे??

    वे तो सुबह 5:30 से रात के 12:30 तक अपनी क्लासेस लेने में बिजी रहते थे। मिसेज विश्वकर्मा अक्सर मिस्टर विश्वकर्मा पर लिखा करती थी। और उनका एक आर्टिकल मिस्टर विश्वकर्मा तक अनायास ही पहुंच गया।


    उन्होंने आर्टिकल को स्कीप नहीं किया। वे उसे पढ़ रहे थे। इस वक्त वह बहुत खुश थे। उन्होंने आज स्कूल से ब्रेक लेने का सोचा।


    जब उन्होंने छुट्टी की बात की तो उन्हें एक दिन की बजाय एक सप्ताह की छुट्टी मिल गई। वह आज शाम के 4:00 बजे घर आ चुके थे।


    उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे को छुट्टी के बारे में बताया तो,,,
    वह बहुत खुश हुए। उन्होंने आज शाम की चाय और डिनर साथ किया।


    अगले दिन मिस्टर विश्वकर्मा किचन में जब चाय बना रहे थे। उनका बेटा आरव उनके पास आया और उनकी शर्ट खिंचते हुए बोला,, " पापा मेरे साथ चलो मैं आपको कुछ दिखाता हूं।

    आरव 7 साल का मिस्टर एंड मिसेज विश्वकर्मा का इकलौता बेटा था। वह तीसरी क्लास में पढ़ रहा था।

    लेकिन वह बाकी बच्चों से अलग था। सब बच्चों की रुचि जहां खेल कूद में होती है। उसकी रहस्यो को सुलझाने में थी।

    और आज वह ऐसे ही एक रहस्य को देख कर आया था और अब वह मिस्टर विश्वकर्मा उस रहस्य तक लेकर जाएगा।

    क्या है वो रहस्य जानने के लिए अगले पार्ट का इन्तजार करे।