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Billionaire 's obsessed love

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stuty Kumari

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Atishya Khurana, India's top businessman, is known for his arrogant demeanor. At a high-profile party, he encounters Shayash Mehra and is instantly captivated. However, Shayash is already married with two children. Driven by an obsessive desire,...

Total Chapters (13)

Page 1 of 1

  • 1. Billionaire 's obsessed love - Chapter 1

    Words: 1107

    Estimated Reading Time: 7 min

    मुंबई 


    रातो मे सुबह  का अहसास  कराते हुए  मशहूर  होटल Khurana's paradise hotel मे एक बहुत  ही आलीशान  पार्टी  चल रही थी।

    उस पार्टी मे हडकंप  सा मच गया ,जब उस पार्टी मे एंट्री हुई, मेरे फेवरेट  इंसान  अतिशय खुराना की। मै विभा ऑबेराय हू जो अतिशय  की बचपन  की दोस्त है और उसे पाना चाहती है।मै उससे बहुत  प्यार  करती हू।


    विभा जैसे ही अतिशय के पास  आने लगी, अतिशय  ने एक हाथ  से उसे दूर रहने का इशारा कर देता है।उसे ज्यादा लोगो का अपने करीब  रहना बिल्कुल पसंद  नही था।

    अतिशय  खुराना जिसकी उम्र  लगभग  चौबीस  साल है। वह नीली आंखोवाला लडका है जिसकी आंखो मे समुंदर  सी गहराई  है।वह लगभग  छह  फुट  की हाइट  का हाइट,  दूध सा फेयर  स्कीन  और दमदार  पर्सनालिटी  का बंदा है। उसकी चेहरे  मे हमेशा गुस्सा भरा रहता है।

    यह इंडिया के नंबर वन  बिजनेस मैन  है। इनकी खुबसुरती लोगो को दीवाना कर देती है। यह किसी को भी अपनी ओर  attract कर सकते है। इनकी कंपनी का नाम  खुराना इंडस्ट्रीज  है जो इनके दादा जी ने बनाई  थी। इनके माम  डैड  की मौत  तभी हो गई  थी जब ये दो साल  के थे। उसके बाद  से ही उसकी परवरिश इनके दादा प्रीतम  खुराना और  दादी प्रीति  खुराना ने की है।

    अतिशय  अपने पैसे और रुतबा के बल पर इंडिया का मोस्ट  पॉपुलर मैन है। वह इंडिया का मोस्ट  एलीजिबल बैचलर है। पर ये प्यार  मे यकीन नही रखता है।

    वह आते ही उस तरफ  चला जाता है जहा पर शांति थी।वह अपने अंगुलियों के बीच  वाइन  का गिलास  लिए  हुए  था। वह बीच बीच  मे उससे एक सिप लगा रहा था।

    वह अचानक  ही बोल पडा -" कितना शोर करते है? पार्टी मे मुझे बिल्कुल  मन नही लगता ,पर मजबूर  हू। कुछ  तो अपने आप  को सोशल दिखाना ही पडता है। बस यह गिलास  वाइन  खत्म  हो जाए  और  मै इस पार्टी से निकल जाऊगा।"

    कुछ देर बाद वह अपने असिस्टेंट  के साथ  उस पार्टी से जाने लगा।  तभी वह अपने सामने से आते इंसान  से टकरा कर  गिरने लगा।


    तभी उस इंसान  ने अतिशय  को उसकी कमर से पकड़कर  अपनी ओर  खींच  लिया।उसके इस तरह  खींचे जाने से अतिशय  अपने को संभाल  नही पाया और  जाकर  उस शक्स  के सीने से टकरा गया।


    वह जैसे ही उससे टकराया ,अतिशय  की सांसे अपने आप  बढ गई।  उसका दिल जोरो से धड़क  गया। वह अपनी धडकने साफ साफ  सुन पा रहा था।

    वह शक्स  उसे अपने से अलग कर  सीधा खडा कर  देता है।फिर  सामने खडा शक्स अपनी प्यारी सी आवाज  मे कहता है-

    " साॅरी सर ,मेरा ध्यान  नही था।मै अपने बाॅस  को ढूंढ  रहा हू। "

    उसकी आवाज सुन कर  अतिशय  लगातार  अपने सामने खडे शक्स  को देखने लगा। उसके सामने लगभग  तीस  साल  का एक बेहद ही हैंडसम  चेहरा था। उसकी काली आंखे ,गोरा स्कीन और हल्के बियर्ड  अतिशय  को अपना दिवाना बना गए  थे। उसकी हाइट  लगभग  सात  फीट  के लगभग  थी। उसकी बाॅडी बिल्कुल  परफेक्ट  थीउसकी आवाज सुन कर  अतिशय  लगातार  अपने सामने खडे शक्स  को देखने लगा। उसके सामने लगभग  तीस  साल  का एक बेहद ही हैंडसम  चेहरा था। उसकी काली आंखे ,गोरा स्कीन और हल्के बियर्ड  अतिशय  को अपना दिवाना बना गए  थे। उसकी हाइट  लगभग  सात  फीट  के लगभग  थी। उसकी बाॅडी बिल्कुल  परफेक्ट  थी।

    वह शक्स  उसे एक्सक्यूज  कर पार्टी हाल मे अंदर  चला गया।उसे अंदर जाता देख कर  अतिशय  भी अंदर  चला गया। वह जाकर  उसी जगह खडा हो गया ,जहा पर वह अब से कुछ  देर पहले खडा था।

    उसकी आंखे अभी भी उसी शक्स पर बनी थी।उसी समय एक लगभग  चालीस  साल  का इंसान  आकर  उस शक्स के कंधे पर हाथ  रख  देता है।

    उसके इस तरह  हाथ  रखने से पहला शक्स  चिहुंक  जाता है। जब वह अपने कंधे पर हाथ  दिए  शक्स  को देखता है तो उसके चेहरे पर मुस्कान  आ  जाती है।

    उसके इस तरह  हाथ  रखने से पहला शक्स  चिहुंक  जाता है। जब वह अपने कंधे पर हाथ  दिए  शक्स  को देखता है तो उसके चेहरे पर मुस्कान  आ  जाती है। शयश यह सुनकर  स्माइल  के साथ  बोलता है-" सर ,आपके अलावा मै यहा किसी को जानता हू जो किसी और को ढूंढूगा। मै आपको ही खोज रहा था।  सर मैने आपको हाल मे खोजा तो भी आप नही थे ,ना ही बाहर या गार्डन  मे थे।"

    वह शक्स  शयश का बाॅस पहल राजपूत था जो कि एक हैंडसम  इंसान  है। उसकी कंपनी पी एस इंटरनेशनल  इंडिया की एक जानी मानी कंपनी है। यह देश की टाप टेन कंपनी मे से एक है। शयश मेहरा पहल का पर्सनल  असिस्टेंट है।

    फिर  उन दोनो के बीच  बाते होने लगी। पहल शयश को ड्रिंक  ऑफर  करता है जिसे स्माइल  के साथ  मना करते हुए  शयश कहता  है-" सर ,मुझे इतनी जल्दी नही मरना है। अभी मेरी उम्र  भी ज्यादा नही है। बुढापा मे आराम से मरुगा ।"

    उसकी बात  सुनकर  पहल भी हसने लगा और  शयश  भी उसका साथ  देने लगा।वह दोनो सबसे बेफिक्र  होकर  हंस  रहे थे।

    उसकी हंसी देख  कर  अतिशय  बोल पडा-"
    जब से उसे देखा
    धड़कन  ही बढ गई
    दिल मे उसकी छवि बस गई
    एक बार  देख कर  असर यो हुआ
    उसको बार  बार  देखने की
    तमन्ना जगा गया
    वो अंजान  मेरे दिल  पर छा गया

    अपने बाॅस को इस तरह  शायरी करता देख, उसका असिस्टेंट  मेहुल सदमे मे आ गया । वह अपनी आंखे फाड़कर  अपने सामने खडे शक्स  यानी अपने बाॅस  को देख रहा था जो कि आज बियर्ड बिहेव  कर  रहा था।आज उसके चेहरे पर गुस्से की जगह  स्माइल  थी। वही वह किसी को अपनी आंखो से स्टाक  कर रहा था।

    वह जाकर  अतिशय  के पास  कहता है-" सर आप ठीक  तो है?"

    अतिशय-" आज ही तो ठीक  हुआ  हू।आज  ही समझ आया कि मेरे दिल  को भी धडकना  आता है।"

    फिर  वह शयश  को देखते हुए  कहता है-"


    तू जरूरत  है मेरी
    जैसे जिंदगी हो मेरी
    तुझे देख  कर  धडका करे
    धडकनो को जरूरत  तेरी
    मेरी रुह तक समायी है
    मेरी सांसो पर छायी है

    तेरा इश्क  इबादत  है
    दिल  से दिल  तक
    तेरी राहत है

    मै तुझको चाहू
    फितरत  है मेरी
    इस दिल  को
    जरूरत  है तेरी
    जिस्म  की बात  नही
    मेरे रुह की राहत है

    तेरे सिवा कोई  और  ना मेरा
    मेरी धड़कन  भी अब है तेरी

    दिल से दिल  तक राहत  है तेरी

    उसकी बाते मेहुल  के सिर  के उपर से जा रही थी। वह मन ही मन कहता है-" लगता है यह डीमन पागल हो गया है। बेटे अब तुझे और संभल कर रहना होगा।" यह सोच  कर  ही उसके पूरे बदन मे सिहरन हो जाती है। कुछ देर बाद  पार्टी खत्म  हो जाती है और  सारे लोग  घर लौट  गए।

    अगले भाग  मे जारी.........

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    Take care bye

  • 2. Billionaire 's obsessed love - Chapter 2

    Words: 848

    Estimated Reading Time: 6 min

    अब आगे:-






    एक बहुत  ही सुंदर  सा विला था। जिसका गेट बहुत  बडा था।  इसमे महाराजा गेट लगा था। यह गेट की तरह  के गेजेट  से जुडा था। बाॅडीगार्डस की बहुत  बडी फौज हमेशा इसकी सुरक्षा करती थी।

    इस गेट को पार कर  बहुत  ही बडा गार्डन था जिसमे तरह तरह के फूल पौधे लगे थे। साथ ही साथ  कुछ  फलो  के पेड भी थे। इसके एक और गेस्ट  हाउस  भी था जिसके साथ  सर्वेट  क्वार्टर  भी था।

    एक ओर बडी सी नर्सरी  थी जिसमे साग सब्जी और  फूल तथा अलग अलग तरह के हर्ब भी थे। साथ ही साथ वहा पर दस डाॅग  हाउस भी था जिसमे अलग अलग नस्ल  के वेल ट्रेंड  डाॅग  रहते थे।

    साथ ही एक तरफ  घोडो  को रखने का अस्तबल  भी बना था।

    उस लाॅन  को पार कर  एक बहुत  ही आलीशान  और  खुबसूरत  बंगला था जो सफेद  रंग  का था। उसकी दीवारे  एलिगेंट  थी। दीवारो पर रोमन ढंग का कसीदाकारी  की गई  थी।इसकी छत पर अलग अलग देशो से लाए गए  झूमर  लगे थे। साथ  ही साथ  अलग अलग  लाइट  भी थी।

    यह बाहर की तरह  ही अंदर से भी बहुत  सुंदर  था।इसी विला के डायनिंग  हाल मे लगभग  सत्तर  वर्षीय  बुजुर्ग  बैठे थे जो आज भी दिखने मे पचास  साल  के आदमी जैसे लगते है। यह बुजुर्ग  आदमी और  कोई  नही अतिशय  के दादा जी प्रीतम  खुराना है। यह एक रोबीले  व्यक्ति है।

    उनके साथ  ही उनकी वाइफ  प्रीति भी बैठी है जो लगातार  हाल की सीढियो की तरफ  देख कर कहती है -" लगता है कि आज अति नही उठा है। इतनी देर तक  तो वह नही सोता ,फिर  आज क्या हो गया, कही वो बीमार  तो नही है ,हे मेरे कृष्णा  मेरे बच्चे का हमेशा ख्याल  रखना। मै जाकर  देख कर  आती हू।"

    वह जब तक  जाती ,तभी सामने किचेन  से अपने आफिस  सूट  के उपर  से एप्रन  पहनकर  अतिशय  आता दिखा। उसके दोनो हाथो मे खाने से भरा बाउल था और  उसके पीछे से सर्वेटंस  ट्राॅली  मे खाना लेकर  आ रहे थे।

    अतिशय  सबसे पहले अपने हाथ  मे पकडा बाउल को डायनिंग टेबल पर  रख देता है। फिर  वह  अपने दादा जी के पास  जाकर  पैर छूकर  आर्शीवाद  लेता है।

    अतिशय-" दादा जी ,आर्शीवाद  दीजिए  कि आपका पोता आपका नाम  चारो कोनो मे फैला सके, उसे बिजनेस  मे तरक्की मिले।"

    प्रीतम जी  झुक कर उसके माथे को हल्का उठाकर उसपर  किस कर कहते है-" मेरा बच्चा सबसे टाप पर रहे। वह इतनी उचांई  छुए  जो किसी ने ना छुए  हो।"

    अतिशय  उसका हाथ  पकड़कर  अपने माथे पर  रखते हुए  कहता है कि " जब तक आपका हाथ  मेरे सिर पर  है ,तब तक  मुझे तरक्की  करने से कोई  नही रोक सकता। आप तो पारस पत्थर  हो जिसे छु लो वही कुंदन  बन जाए।  आप तो किसी की भी किस्मत संभाल सकते है।"

    प्रीतम-" बहुत  हो गया मेरी तारीफ  करना। जब आदमी मे खुद का टैलेंट  भी होता है, तभी वो तरक्की करता है।किसी चूहे को शेर नही बना सकते है।  अब तू मेरे पैरो के पास  से उठकर  इस कुर्सी पर बैठ जाओ। "

    अतिशय-" यह तो मेरी फेवरेट  जगह है। यह तो मेरा स्वर्ग  है ,पर  पता नही क्यो आप मुझे अपने स्वर्ग  मे रहने देना नही चाहते ।" यह बात  उसने एक मासूम  बच्चे की तरह  जिद करते हुए  बोल  रहा था। अभी वह बहुत  क्यूट  पांडा की तरह  लग रहा था।

    उसकी बात  सुनकर  उसकी दादी उससे कहती है -" अति मेरा बच्चा ,तू अपने दादा जी को छोड  और  मेरे पास  आ जा।ये अब सठिया  गए  है। इन्हे हर बात मे प्राब्लम  होती है। अभी के समय  जब बच्चे अपने माम डैड  की भी इज्जत  ना करते ,यह हमारी इतनी इज्जत  करता है"

    अतिशय  उसके पैरो को भी छु कर कहता है -" ये जगह भी मेरा स्वर्ग  है। मै तो अपनी पूरी लाइफ  भी ऐसे बीता  सकता हू। पर मै जानता हू कि आप  लोग  चाहते है कि मै बहुत  तरक्की करू तो मेरा आफिस  भी जाना जरुरी है। पर उसके बाद  का सारा समय केवल आप लोग  के लिए  है।"

    प्रीति-" सिर्फ  हमारा नही, तूने जो इतने सारे जानवरो  को पाल रखा है ,उसके पास  ही तो समय बिताता है।"

    अतिशय-" वह जानवर  नही मेरे दोस्त  है।आप  बता नही क्यो उन्हे पसंद  नही करती।"

    प्रीति-" तुझे अब बीवी के साथ  समय बिताना चाहिए, शादी कर लेनी चाहिए। पर ,तू उन  फिटेमूंह  के साथ  रहता है। पता नही जीते जी तेरी शादी देख भी पाऊगी या नही।"

    अतिशय-" दादी ऐसी बात  करोगी तो बात नही करुगा। आपको कुछ  भी नही होगा। आप के लिए  कुछ  भी कर सकता हू। आप यही चाहती है ना कि मै शादी कर लू। तो ठीक  है,पर मुझे इसके लिए  दो महीने का वक्त चाहिए।  अब यह सब बात छोड़कर  यह खाकर  बताइए  कि यह खीर कैसा बना है" यह बोलकर  वह एक चम्मच   खीर उठाकर उसे मूंह मे डालता है। फिर वह  प्रीतम  को भी खिलाता है।

    प्रीतम  भी उसे अपने हाथ  से खिलाने लगे। कुछ  ही देर मे सारा ब्रेकफास्ट  फिनीश  हो गया।वह फिर  से प्रीतम और  प्रीति को प्रणाम  करते हुए  निकल  गया।

    अगले भाग  मे जारी....

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    Take care bye

  • 3. Billionaire 's obsessed love - Chapter 3

    Words: 1032

    Estimated Reading Time: 7 min

    अब आगे:-




    मुंबई 

    एक छोटी सी सोसायटी मे दो बच्चे जिनकी उम्र लगभग पांच  साल  है । वह बाहर लगे नल मे नहा रहे थे।वह दोनो बच्चे जुडवा  थे। वह सोसाइटी मे लगे काॅमन नल मे खेल रहे थे। वह  दोनो बच्चे एक दो बेडरूम  वाली एक छोटे से अपार्टमेंट  मे रहते है। वह अपार्टमेंट  बहुत  ही साधारण  है। उसमे केवल  जरूरत  की चीजे ही है।

    यह अपार्टमेंट  थर्ड  फ्लोर पर था। इसमे सिक्योरिटीज  नही था। यहा लोग अपने फ्लैट  की देखभाल  खुद  ही करते थे।

    तभी उसकी मा आकर उसे अंदर ले आती है। उसी समय उस औरत  का हसबैंड अपने आफिस  जाने का कपडा  पहन कर  आया।

    " पारुल  मेरी जान,  क्या हुआ  जो इतना गुस्सा हो?"

    पारुल-"  सक्षु  और  शुश्रू  ने दिमाग  खराब  कर दिया है। जब देखो बाहर ही जाकर  खेलना होता है। अभी बाहर  जाकर  सारे कपडे गंदे कर दिए  है। "


    चलिए  इन लोगो का इंट्रोडक्शन  करा देती हू।

    यह शयश की फैमिली है। शयश की फैमिली मे उसके मा पापा भी रहते है।

    शयश मेहरा इस कहानी के मैन लीड है। इनकी उम्र  लगभग  तीस साल  है।इनकी हाइट  लगभग  सात  फीट  है। इनकी आंखे काले रंग  की है। इनका स्कीन  गोरा है। इनके चेहरे पर हल्की बियर्ड  है। यह एक शानदार  पर्सनालिटी  के मालिक  है। यह बहुत  अट्रेक्टिव  है। यह पी एस इंटरनेशनल के मालिक  पहल राजपूत  के पी ए है।

    शयन के डैड का नाम शुंभाकर  मेहरा है। इनकी उम्र लगभग  पचपन  साल है। यह एक सरकारी कंपनी मे क्लर्क  है। यह एक साधारण  शक्ल सूरत  के इंसान  है। ये बहुत  मेहनती और  ईमानदार  शक्स  है। यह अपनी फैमिली को बहुत  प्यार  करते है।


    इनकी वाइफ  का नाम  रुपा है। रुपा अपने नाम की तरह  ही सुंदर है। शयश  की खुबसूरती  अपने मा पर गई  है। ये पचास  साल की उम्र  मे भी किसी अप्सरा से कम नही है। यह बहुत  टैलेंटेड  है। यह एक बेहतरीन  सिंगर है। यह कई बार  स्टेट लेबल सिंगिंग  कंपटीशन  जीत चुकी है।


    इनकी एक ही संतान है जो शयश  है। शयश  अपने माम  डैड  से बहुत  प्यार  करता है।

    शयश  की शादी हो चुकी है। उसकी वाइफ  का नाम  पारुल मेहरा है। यह लगभग  चौबीस  साल  की बहुत  खुबसूरत और  टैलेंटेड  औरत है। यह नेशनल  लेवल कराटे चैंपियन  है। यह एक मल्टी नेशनल  कंपनी मे कैशियर  का काम करती है।

    इनके दो जुडवा बच्चे है,दोनो की उम्र  लगभग पांच  साल है।एक बच्चे का नाम  सक्षम  मेहरा है। इसकी आंखे नीली है। यह बहुत  गोरे है।

    दूसरे बच्चे का नाम शुश्रुत  मेहरा है। यह बिल्कुल  दिखने मे सक्षम  की तरह  ही है ,बस आंखो का कलर चेंज  है। इसकी आंख का कलर  ब्लैक  है।

    ये दोनो बच्चे बहुत  शरारती है। पूरे परिवार  की जान इन दोनो मे थी।

    ........




    पी एस इंटरनेशनल 

    यह एक शानदार  आफिस  था। यह बहुत  लग्जीरियस  आफिस  था। पहल अपने केबिन  मे बैठ  कर फाइल  देख रहा था, उसी समय  शयश एक प्यारी सी स्माइल  लिए  आता है और  कहता है-" गुड मार्निग सर, हैव ए नाइस  डे।

    उसकी आवाज सुन कर  पहल उसकी तरफ  देखते हुए  कहता है-" शयश  आज भी पूरे पंद्रह  मिनट  लेट हो। कभी तो टाइम  पर आया करो। तुम जानते हो ना कि तुम मेरे असिस्टेंट  हो, मेरा पूरा शेड्यूल  तेरे पास  ही होता है,उसपर  तुम लेट आओगे तो काम  कैसे खत्म  होगा। अब जल्दी से शेड्यूल  बनाओ।"



    शयश  जाकर  अपनी जगह पर  बैठ  कर  पूरे ध्यान  से शेड्यूल  तैयार  करने लगा। साथ  ही साथ  वह कुछ  फाइल  भी पढ रहा था और  इंपोर्टेंट  प्वाइंट  नोट कर रहा था। करीब  आधा घंटे बाद वह  सब रेडी कर लेता है।


    कुछ देर बाद वह  पहल को उसकी पूरा  शेड्यूल  समझा देता है। उसके बाद  भी वह वही पर खडा था। उसे एसे ही खडा देख कर  पहल  को अजीब  लग  रहा था।

    पहल-" ऐसी क्या बात  है जो तुम  कहना चाह रहे थे।पर कह नही पा रहे हो"

    शयश-" सर ,अचानक  ही हमारी कंपनी के सेल घट गए  है। खुराना इंडस्ट्रीज  के इस फील्ड  मे उतरने का हमे बहुत  नुकसान  हो रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो हमारे शेयर  भी लुढ़क  जाएगे।"

    पहल-" तुम  बताओ, हमे क्या करना चाहिए "


    शयश-" सर, हमे एक बार  खुराना इंडस्ट्रीज  से बात करनी चाहिए।  मेरे ख्याल  से अगर दोनो कंपनी पार्टनर  बन जाए  और साथ मे काम करे तो दोनो कंपनी इस मार्केट  की बेताज बादशाह  बन जाएगी। "

    पहल-" मुझेभी तुम्हारा ये आइडिया  बहुत  पसंद  आया। तुम तुरंत  ही इस आइडिया पर काम शुरु करो।तुम  मि खुराना के साथ  एक मीटिंग फिक्स  करो।"

    शयश-" ओके सर"

    सर क्या मुझे छुट्टी मिल सकती है,मेरे इन ला घर आ रहे है। मुझे उन्हे रिसीव  करने स्टेशन  जाना है। अगर मै नही गया तो परी नाराज  हो जाएगी।  मैने सारे चीजे शेड्यूल  कर दिए  है, किसी को भी कोई  प्राब्लम  नही होगी।"


    पहल-" आज तक किसी चीज के लिए  मना किया है ,जो आज मना करुगा। आज शाम  को तेरे घर डिनर  करने आ रहा हू। बहुत  दिन  से मैने और तेरी भाभी ने आंटी के हाथ  का चटपटा  खाना नही खाया है।"

    शयश-" जी जरुर  सर,मै वेट करुगा। पर अभी मै जाता हू।" यह कहकर वह  निकल  गया।

    कुछ देर बाद  शयश  रेल के आने का इंतजार  करता  हुआ,  प्लेटफार्म पर खडा था। उसी समय  पारुल  का फोन आता है ।

    पारुल-" शयश,  माम डैड आ गए "



    शयश-" अभी नही आए है। मै स्टेशन  पर  ही हू। उन्हे लेकर  सीधे घर पहुंचा दूंगा और  नाश्ता पानी भी करा दूंगा। अपने घर लेकर गया तो वहा महाभारत  होने लगेगा। मेरी मा और तेरी मा जानी दुश्मन  है।"

    कुछ देर बाद  ट्रेन  आ जाती है। पारुल  के माम डैड  ने सारा लगेज शयश को ही पकडा दिया था। वह खुद  आराम  से चल रहे थे। शयश  उन लगेज को कैरी करते हुए  ट्रैक्सी मे रखता है और  फिर  उन्हे उनके घर छोड देता है।

    वहा से वो वापस  अपने काम  पर चला गया। वह कभी भी फालतू की छुट्टी नही बर्बाद  करता था।वह अपना काम  खत्म कर  वापस  आफिस  पहुंच  जाता था। उसके इसी आदत के कारण  शयश  के बाॅस ने कभी उसे छुट्टी देने से मना नही किया था।

    वह पहल के केबिन  मे जाकर  कहता है- " सर एक गुड न्यूज  है।"

    अगले भाग  मे जारी.......


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    Take care bye

  • 4. Billionaire 's obsessed love - Chapter 4

    Words: 1032

    Estimated Reading Time: 7 min

    अब आगे:-









    खुराना इंडस्ट्रीज  के बडे से वेटिंग  हाल मे शयश  बैठा हुआ  था। वह इस बात  का लगातार  प्रयास  कर  रहा था कि उसे एक बार  अतिशय  खुराना से डायरेक्ट  बात करने मिल जाए। 

    खुराना इंडस्ट्रीज  मे पहले अतिशय के असिस्टेंट  मीटिंग  कर लेते थे। जब उन्हे लगता था कि यह मैटर अतिशय  के पास  जाने लायक  है तो वह लोग  उसे अतिशय  को देते थे। शयश  आमने सामने बैठकर अतिशय  से बात  करना चाहता था।

    वही दूसरी ओर  अतिशय  अपनी फाइल  पढने मे बिजी था ,तभी उसका असिस्टेंट कम फ्रैंड मेहुल शर्मा आता है।

    उसे अपने केबिन मे आता देख कर अतिशय  एक स्माइल  के साथ  उसे कहता है-" गुड मोनिंग , तुम्हारी मीटिंग  कैसी रही?

    मेहुल-" मेरी मीटिंग  अच्छी रही। तुम यहा फाइल  के साथ  जंग क्यो लड रहे हो"

    अतिशय-" कुछ  पेंडिंग  काम बचा था ,उसे ही कर रहा हू। देख यार, मुझे तुम्हे कुछ  बताना है।

    तुम  तो यह बात  जानते ही हो कि मेरा इंट्रेस्ट  लडकियो मे ना होकर  लडको मे है। मुझे एक लडका पसंद आ  गया है। मुझे उसके बारे मे पता करना है।"

    उसकी बात  सुनकर  मेहुल  झटके से उछलकर  उसके पास  आकर  कहता है कि " तू कही उसी लडके की बात  तो नही कर रहा जो कल की पार्टी मे तुझसे टकराया था।


    जिसे देख कर  तू शायरी पढ रहा था और  स्माइल कर  रहा था।"

    अतिशय  उसकी बात सुनकर  शर्माते हुए  कहा -" हा, मुझे उससे लव एट फस्ट  साइट  हो गया  है।जब से उसे देखा है ,वह मेरे दिलो-दिमाग पर  छाया हुआ  है।प्लीज  यार,  उसके बारे मे सब कुछ  जानना है।

    ऐसे भी मैने अपनी दादी को वादा किया है कि मै दो महीने मे शादी कर लूंगा। मै सिर्फ  और  सिर्फ  उससे ही शादी करना चाहता हू।

    जब मै उससे टकराया था तो मुझे लगा कि मेरी धडकने बढ गई  है। मुझे लगा कि मेरा दिल बाहर  आ जाएगा। जब अपने हाथो को मेरी कमर मे डाला तो मेरी हवाईया  उड  रही थी।

    उसकी आंखो को जब मैने देखा तो उसकी गहराई  मे खो गया। मुझे नही पता था कि किसी की आंखे भी इतनी खुबसूरत  हो सकती है। प्लीज  यार,  उसके बारे मे सब पता कर दो। पता नही ,मेरी किस्मत  मे वह है भी या नही।"


    मेहुल-" अगर वो मेरे दोस्त  का पसंद  है तो उसे तेरा बनना ही होगा। वो मेरे दोस्त  को मना नही कर सकता है। बस मुझे तीन घंटे का टाइम  दो, मै उसके बारे मे हर एक इंफॉर्मेशन  निकाल  लूंगा। अपने दोस्त  के लिए  अगर ये भी नही किया तो क्या किया।"

    तभी उसका ध्यान  सामने रखे लैपटॉप  पर  जाता है, जहा उसे शयश  आफिस  मे बैठा नजर आ रहा था। वही अतिशय  अपने फाइल  मे दुबारा खो चुका था। शयश  को देख कर  उसे एक ख्याल  आता है और  वह  एक काॅल  करता है।

    कुछ देर बाद  अतिशय  एक क्लाइंट  से मिलने के लिए  अपने केबिन  मे बैठा था। वह अभी भी फाइल  मे खोया था। उसे उन फाइल  को कंप्लीट  करने का भूत सवार था।

    कुछ  समय  बाद  उसके केबिन  का डोर  नाॅक  होता है। उधर से आवाज  आती है-" सर क्लाइंट  आ गए  है।"

    अतिशय-" उन्हे आदर के साथ  अंदर लेकर  आ जाओ।  मै भी तैयार  हू"

    उसी समय  गेट से मेहुल और  शयश  अंदर आते है। शयश  को अपने सामने देख  कर  अतिशय  फिर  से एक बार अपनी सुध बुध खो बैठा था।वह बस शयश  को देख  रहा था।

    शयश उसके पास आकर  उसका हाथ पकड़कर  कहता है- "थैंक्स  यू वैरी मच। नाइस टू मीट  यू। मैने नही सोचा था कि आप मुझे पहली ही बार  मे अपना टाइम  दे देंगे।

    उसके टच से अतिशय  अपने होश मे आ गया था। उसका बात पर वह बेख्याली  मे बोलता है-" आप टाइम  की बात  कर रहे है। मै तो आपको अपने आप  को भी दे सकता हू।"

    शयश उसकी बात  सुनकर  कहता है-" सारी सर, पर आपकी बात  मेरे समझ मे नही आई।"

    अतिशय अपने मन मे " अति पागल हो गया है क्या, कैसी बहकी बहकी बात कर रहा है। आज पहली बार  उससे बात  कर रहा है। इस तरह की बकवास  बाते करेगा तो वह तेरे बारे मे क्या सोचेगा। वह तुझे पागल समझ लेगा। यह करना मै बिल्कुल  बर्दाश्त नही कर सकता हू।"

    अतिशय-" हैलो मि.?

    शयश-" साॅरी सर, आप जैसी हस्ती से मिलने की खुशी मे मै अपना बेसिक काम भी भूल गया। माय नेम इज शयश  मेहरा। मै पहल राजपूत  का पर्सनल असिस्टेंट  हू। मै उनकी कंपनी पी एस इंटरनेशनल  मे काम  करता हू। मुझे आपसे कुछ  बात  करनी थी।"

    अतिशय-" जी शयश  जी कहिए,  आप क्या डील  लेकर आए है। "

    शयश-" सर,  आप मुझे जी मत बोलिए,  मै आपके आगे बहुत  छोटा आदमी हू। मेरी हैसियत  कुछ  भी नही है।"

    अतिशय-" शयश  जी, आदमी की हैसियत  उसकी दौलत या पोजिशन  पर डिपेंड  नही करती। आप कितने अच्छे इंसान  है इस बात पर डिपेंड करता है। अगर आप बहुत  अमीर और  बडा औहदा रखते है ,पर आपमे इंसानियत  नही है तो मेरी नजर मे आपकी कोई  औकात  नही है।

    मेरे लिए  अच्छा और सच्चा इंसान सबसे बडा है। आप अगर चाहे तो अपनी बात  आगे बढा सकते है। "

    शयश उसे बिजनेस  प्रपोजल  देता है जो उसे पसंद  आता है। वह उसे हा बोल देता है। फिर  वह  कहता है कि " शयश जी यह डील मै आज की जगह कल साइन  करना चाहूगा। अगर आप बुरा ना माने तो इसे कल करना सही रहेगा। आप कल मि राजपूत  के साथ  होटल सनशाइन  आ जाइएगा।"

    शयश-" ओके सर ,जैसा आप कहे। मै कल की मीटिंग  फिक्स  कर लेता हू। आपने मेरा प्रपोजल  एक्स्पेक्ट  कर  लिया। ये मेरे लिए  बहुत  बडी बात है। आपके बारे मे यह फेमस है कि आप जल्दी किसी चीज  को हा नही करते है। आपसे मिलना ही ,एक बहुत  बडी बात होती है और  आपने पहली बार  मे ही मेरा प्रपोजल  एक्स्पेक्ट  कर लेंगे ,ये तो मै सपने मे भी नही सोच सकता था । ठीक  है सर, कल मिलता हू।"

    शयश  के जाने के बाद  मेहुल  उसके केबिन  मे आया। उसने देखा कि उसका दोस्त  अपने हाथो को चूम रहा है। यह देखकर  वह उसे और डिस्टर्ब  नही करता और केबिन  से बाहर  चला जाता है।

    अगले भाग  मे जारी......

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    Take care bye

  • 5. Billionaire 's obsessed love - Chapter 5

    Words: 1031

    Estimated Reading Time: 7 min

    अब आगे:-







    अगले दिन

    अतिशय  अपने कमरे मे आईना के सामने खडा होकर  अलग अलग ड्रेस  को अपने उपर रख कर  देख रहा था। वह आज शयश से  मिलने को लेकर  बहुत  ही ज्यादा एक्साइटेड  था। उसे कोई  भी कपडा पसंद  ही नही आ रहा था।

    उसके पास  सब एक से बढ़कर एक  क्लेशन  मौजूद  था फिर  भी उसे कुछ  भी अच्छा नही लग रहा था।

    अतिशय-" सुबह  से दो सौ ड्रेस  देख लिया पर मुझे कोई  भी पसंद  नही आया। अब  मै क्या करु।

    तभी उसकी नजर एक सूट  पर गई।  वह सूट  उसके दादा जी ने गिफ्ट  मे दी थी । वह एक ब्लू कलर  का सूट था। वह उसी सूट  को पहन लेता है । उसे ऐसा लगा कि इसे पहनने से उसके दादी और  दादा जी का आर्शीवाद  भी उसे मिल जाएगा।

    वह अपने दादा दादी का आशीर्वाद  लेकर  तेजी से निकल  गया। वह अपनी पहली ही मीटिंग  मे लेट  हो कर अपना पहला इंप्रेशन  बर्बाद  नही करना चाहता था।

    वह आफिस  पहुंच कर  अपने केबिन  मे इधर उधर  टहल रहा था ,तभी उसके पास  आकर मेहुल  खडा हो गया। जिस कारण  वह मेहुल  से टकरा गया। उससे टकराने  के कारण अतिशय  चिढते हुए  कहता है -" तुझे खंभे की तरह  मेरे सामने खडा होने किसने कहा था। यार तेरी वजह  से चोट  लग  गई।

    एक तो ऐसे ही टेंशन  से जान निकल  रही है। उपर से चोट भी लग गई।  पता नही ,आज मीटिंग  मे क्या होगा। वह मेरे बारे मे और लोगो की तरह का ओपिनियन  तो नही बनाएगा।"

    मेहुल-" शांत हो जा ,मेरे बाप। ये क्या दस क्लास  के बच्चे की तरह  बिहेव  कर  रहा है। तू कोई  टीनएज  बच्चा नही है। तू एक कामयाब  बिजनेस मैन  है। तुझे देख कर  लग ही नही रहा कि तू द ग्रेट  अतिशय  खुराना है जिससे मीटिंग  के लिए  लोग महीनो इंतजार  करते है और  एक तू है कि यहा दिवानो  की तरह  उसके इंतजार  मे ओलंपिक  का रेसर बन गया है। तब से केबिन  का दो सौ चक्कर  लगा चुका होगा। रिलेक्स  करो और  आराम  से बैठो।"

    " अति यार,  मै जानता हू कि तुम  उसे पसंद  करते हो,पर तुम्हे भी सही से बिहेव  करना ही होगा।तेरी ये बेताबी तेरा काम  बिगाड  देगी। इसलिए  अपने दिमाग  को शांत रखो।"

    अतिशय-" जब तुम्हे किसी से प्यार  होगा, तब पता चलेगा । यहा उसे देखने के बाद  मेरा दिल बुलेट  से भी तेज धडकने लगता है।और तू कह रहा है कि मै अपने दिल को शांत  रखू। अरे , कर पाता तो कर नही लेता।"



    तभी उसके केबिन  का डोर नाॅक  हुआ। अतिशय उसे अंदर  आने कहता है। वह उसका प्यून था।

    अतिशय- " अरे काका, आप चुप  क्यो हो गए,  क्या बोलने आए थे"

    प्यून-" सर,कोई  मि पहल राजपूत और  शयश मेहरा आपसे मिलने आए है"

    अतिशय-" आप उन्हे मीटिंग  हाल  मे बैठाईए,  मै दो मिनट  मे आता हू।तब तक  उनसे चाय ,काॅफी भी पूछ लेना।"

    थोडी देर बाद  अतिशय  पूरे बाॅसी एटिट्यूड  मे मीटिंग  हाल  मे आता है।  वह उस ब्लू कलर  के सूट  मे वह बहुत  हैंडसम  लग  रहा था।

    वह आते ही अपने चेयर पर बैठ  कर  सबको ग्रीट करता है।शयश  और पहल भी उसे ग्रीट  करते है।

    अतिशय-" मि राजपूत,  क्या मीटिंग  स्टार्ट  हो सकता है,ऐसे तो हमारी सारी बाते हो चुकी है। बस डील  साइन करना बाकी है।

    आप भी एक बार  क्रास  चेक कर लिजिए। मै बिजनेस  मे हंड्रेड  पर्सेंट  पारदर्शिता रखने मे यकीन  रखता हू। "


    उसकी बात पर  पहल मुस्कुराते हुए  कहता है-" इसे तो सारी दुनिया ही जानती है। आपकी ईमानदारी पर किसी को कोई  शक  नही हो सकता। मै तो आंख बंद कर  भी आप पर विश्वास  कर सकता हू।"

    अतिशय-" किसी पर भी आंख बंद कर  भरोसा नही करना चाहिए।  जहा भरोसा होता है ,वही धोखा होता है।"


    ........................


    पच्चीस साल  बाद

    मुंबई

    मूनलाइट  सनसाइन  बार

    बार पूरी तरह खचाखच  भरा था ,क्योकि इंडिया के बेस्ट सिंगर अवनीश  मेहरा परफार्मेस  देने वाला था।

    तभी वहा पर लगभग अठारह  साल  का एक लडका आता है। वह बार टेंडर  था। वह जल्दी से आने के चक्कर  मे एक लडके से टकरा जाता है। जिससे  वह पहला  लडका  दूसरे लडके को घबडाकर  सारी बोलता है।


    दूसरा लडका जो यही कोई  पच्चीस  साल  का होगा। उसका नाम रवि था। वह चिढते हुए  पहले लडके से कहता है- सूर्य,  तुझे दिखता नही है क्या। हर दिन टकराता ही चलता है। पता नही आई और  बाबा ने क्या सोच कर  तेरा नाम  सूर्य  रख दिया। तेरे आंखो पर तो हमेशा ग्रहण  ही लगा रहता था। तेरा नाम  तो सूर दास रखना चाहिए।  "

    सूर्य  एक अठारह साल का लडका था। उसके माम डैड  की डेथ तब हो गई  थी जब वह केवल  एक  साल  का था। उसके बाद उसे उसके बगल मे रहने वाले अंकल  आंटी ने पाला था।

    वह दोनो उसे बहुत प्यार  करते थे पर उनके दोनो बच्चे रवि और कवि  सूर्य  को बिल्कुल पसंद  नही करते थे।

    सूर्य  रवि से-" सारी सर ,दुबारा गलती नही होगी।"

    यह पूरा बार भी रवि के डैड  जयेश  शाह का था। रवि यहा का मालिक था। उसे यह बिल्कुल  पसंद  नही था कि किसी के सामने सूर्य  उसे भाई  बोले, इसलिए  उसने उसे सर बोलने कहा था।"

    सूर्य  रवि के पास  से हटकर अपने बार  काउंटर  पर चला गया। वह अपने साथ मौजूद  दूसरे बार टेंडर  से कहता है- " आज क्लब  मे इतनी भीड क्यो है"

    दूसरा बार टेंडर  जिसका नाम  आयु था वो बोल पडा - " तू अपनी ही दुनिया मै खोया रहता है।आज मशहूर  सिंगर अवनीश  आने वाला है। वह आज यहा परफार्मेस  देगा। कितनी खुशी की बात  है। कि मै आज अपने क्रश देख पाउगा।"

    उसकी बात सुनकर  भी सूर्य  कुछ  भी नही बोला और अपना पूरा ध्यान केवल  काम पर  लगा दिया। यह देखकर  आयु बोल पडा-" पता नही ,किसी बात पर  रिएक्ट  क्यो नही करता  है। एक नंबर  का खडूस है।"

    कुछ देर बाद  वहा पर भीड बढने लगी। सूर्य  का काम  बढता जा रहा था। पर जब तक वह  काम करता था रवि किसी और  को मदद  के लिए  जाने नही देता था।

    सूर्य  जल्दी जल्दी ड्रिंक  सर्व  कर रहा था। तभी अवनीश  का गाना शुरु हो गया। सूर्य  भी उसका गाना सुनने लगा।

    अगले भाग  मे जारी.....

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    Take care bye

  • 6. Billionaire 's obsessed love - Chapter 6

    Words: 1060

    Estimated Reading Time: 7 min

    अब आगे:-















    अगले दिन 



    अतिशय  अपने कमरे मे आईना के सामने खडा होकर  अलग अलग ड्रेस  को अपने उपर रख कर  देख रहा था। वह आज शयश से  मिलने को लेकर  बहुत  ही ज्यादा एक्साइटेड  था। उसे कोई  भी कपडा पसंद  ही नही आ रहा था। 



    उसके पास  सब एक से बढ़कर एक  क्लेशन  मौजूद  था फिर  भी उसे कुछ  भी अच्छा नही लग रहा था।



    अतिशय-" सुबह  से दो सौ ड्रेस  देख लिया पर मुझे कोई  भी पसंद  नही आया। अब  मै क्या करु। 



    तभी उसकी नजर एक सूट  पर गई।  वह सूट  उसके दादा जी ने गिफ्ट  मे दी थी । वह एक ब्लू कलर  का सूट था। वह उसी सूट  को पहन लेता है । उसे ऐसा लगा कि इसे पहनने से उसके दादी और  दादा जी का आर्शीवाद  भी उसे मिल जाएगा।



    वह अपने दादा दादी का आशीर्वाद  लेकर  तेजी से निकल  गया। वह अपनी पहली ही मीटिंग  मे लेट  हो कर अपना पहला इंप्रेशन  बर्बाद  नही करना चाहता था।



    वह आफिस  पहुंच कर  अपने केबिन  मे इधर उधर  टहल रहा था ,तभी उसके पास  आकर मेहुल  खडा हो गया। जिस कारण  वह मेहुल  से टकरा गया। उससे टकराने  के कारण अतिशय  चिढते हुए  कहता है -" तुझे खंभे की तरह  मेरे सामने खडा होने किसने कहा था। यार तेरी वजह  से चोट  लग  गई। 



    एक तो ऐसे ही टेंशन  से जान निकल  रही है। उपर से चोट भी लग गई।  पता नही ,आज मीटिंग  मे क्या होगा। वह मेरे बारे मे और लोगो की तरह का ओपिनियन  तो नही बनाएगा।"



    मेहुल-" शांत हो जा ,मेरे बाप। ये क्या दस क्लास  के बच्चे की तरह  बिहेव  कर  रहा है। तू कोई  टीनएज  बच्चा नही है। तू एक कामयाब  बिजनेस मैन  है। तुझे देख कर  लग ही नही रहा कि तू द ग्रेट  अतिशय  खुराना है जिससे मीटिंग  के लिए  लोग महीनो इंतजार  करते है और  एक तू है कि यहा दिवानो  की तरह  उसके इंतजार  मे ओलंपिक  का रेसर बन गया है। तब से केबिन  का दो सौ चक्कर  लगा चुका होगा। रिलेक्स  करो और  आराम  से बैठो।"



    " अति यार,  मै जानता हू कि तुम  उसे पसंद  करते हो,पर तुम्हे भी सही से बिहेव  करना ही होगा।तेरी ये बेताबी तेरा काम  बिगाड  देगी। इसलिए  अपने दिमाग  को शांत रखो।"



    अतिशय-" जब तुम्हे किसी से प्यार  होगा, तब पता चलेगा । यहा उसे देखने के बाद  मेरा दिल बुलेट  से भी तेज धडकने लगता है।और तू कह रहा है कि मै अपने दिल को शांत  रखू। अरे , कर पाता तो कर नही लेता।" 







    तभी उसके केबिन  का डोर नाॅक  हुआ। अतिशय उसे अंदर  आने कहता है। वह उसका प्यून था।



    अतिशय- " अरे काका, आप चुप  क्यो हो गए,  क्या बोलने आए थे"



    प्यून-" सर,कोई  मि पहल राजपूत और  शयश मेहरा आपसे मिलने आए है"



    अतिशय-" आप उन्हे मीटिंग  हाल  मे बैठाईए,  मै दो मिनट  मे आता हू।तब तक  उनसे चाय ,काॅफी भी पूछ लेना।"



    थोडी देर बाद  अतिशय  पूरे बाॅसी एटिट्यूड  मे मीटिंग  हाल  मे आता है।  वह उस ब्लू कलर  के सूट  मे वह बहुत  हैंडसम  लग  रहा था।



    वह आते ही अपने चेयर पर बैठ  कर  सबको ग्रीट करता है।शयश  और पहल भी उसे ग्रीट  करते है।



    अतिशय-" मि राजपूत,  क्या मीटिंग  स्टार्ट  हो सकता है,ऐसे तो हमारी सारी बाते हो चुकी है। बस डील  साइन करना बाकी है। 



    आप भी एक बार  क्रास  चेक कर लिजिए। मै बिजनेस  मे हंड्रेड  पर्सेंट  पारदर्शिता रखने मे यकीन  रखता हू। "





    उसकी बात पर  पहल मुस्कुराते हुए  कहता है-" इसे तो सारी दुनिया ही जानती है। आपकी ईमानदारी पर किसी को कोई  शक  नही हो सकता। मै तो आंख बंद कर  भी आप पर विश्वास  कर सकता हू।"



    अतिशय-" किसी पर भी आंख बंद कर  भरोसा नही करना चाहिए।  जहा भरोसा होता है ,वही धोखा होता है।"





    ........................





    पच्चीस साल  बाद 



    मुंबई 



    मूनलाइट  सनसाइन  बार



    बार पूरी तरह खचाखच  भरा था ,क्योकि इंडिया के बेस्ट सिंगर अवनीश  मेहरा परफार्मेस  देने वाला था।



    तभी वहा पर लगभग अठारह  साल  का एक लडका आता है। वह बार टेंडर  था। वह जल्दी से आने के चक्कर  मे एक लडके से टकरा जाता है। जिससे  वह पहला  लडका  दूसरे लडके को घबडाकर  सारी बोलता है।





    दूसरा लडका जो यही कोई  पच्चीस  साल  का होगा। उसका नाम रवि था। वह चिढते हुए  पहले लडके से कहता है- सूर्य,  तुझे दिखता नही है क्या। हर दिन टकराता ही चलता है। पता नही आई और  बाबा ने क्या सोच कर  तेरा नाम  सूर्य  रख दिया। तेरे आंखो पर तो हमेशा ग्रहण  ही लगा रहता था। तेरा नाम  तो सूर दास रखना चाहिए।  "



    सूर्य  एक अठारह साल का लडका था। उसके माम डैड  की डेथ तब हो गई  थी जब वह केवल  एक  साल  का था। उसके बाद उसे उसके बगल मे रहने वाले अंकल  आंटी ने पाला था। 



    वह दोनो उसे बहुत प्यार  करते थे पर उनके दोनो बच्चे रवि और कवि  सूर्य  को बिल्कुल पसंद  नही करते थे।



    सूर्य  रवि से-" सारी सर ,दुबारा गलती नही होगी।"



    यह पूरा बार भी रवि के डैड  जयेश  शाह का था। रवि यहा का मालिक था। उसे यह बिल्कुल  पसंद  नही था कि किसी के सामने सूर्य  उसे भाई  बोले, इसलिए  उसने उसे सर बोलने कहा था।"



    सूर्य  रवि के पास  से हटकर अपने बार  काउंटर  पर चला गया। वह अपने साथ मौजूद  दूसरे बार टेंडर  से कहता है- " आज क्लब  मे इतनी भीड क्यो है"



    दूसरा बार टेंडर  जिसका नाम  आयु था वो बोल पडा - " तू अपनी ही दुनिया मै खोया रहता है।आज मशहूर  सिंगर अवनीश  आने वाला है। वह आज यहा परफार्मेस  देगा। कितनी खुशी की बात  है। कि मै आज अपने क्रश देख पाउगा।"



    उसकी बात सुनकर  भी सूर्य  कुछ  भी नही बोला और अपना पूरा ध्यान केवल  काम पर  लगा दिया। यह देखकर  आयु बोल पडा-" पता नही ,किसी बात पर  रिएक्ट  क्यो नही करता  है। एक नंबर  का खडूस है।"



    कुछ देर बाद  वहा पर भीड बढने लगी। सूर्य  का काम  बढता जा रहा था। पर जब तक वह  काम करता था रवि किसी और  को मदद  के लिए  जाने नही देता था। 



    सूर्य  जल्दी जल्दी ड्रिंक  सर्व  कर रहा था। तभी अवनीश  का गाना शुरु हो गया। सूर्य  भी उसका गाना सुनने लगा।



    अगले भाग  मे जारी.....



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     ये स्टोरी एक साथ  दो डिफरेंट  टाइम  जोन मे चलेगी। ये दोनो टाइम  जोन एक दूसरे से रिलेटेड  है। प्लीज  ,इसे कंटिन्यू  पढते रहे तो स्टोरी समझ आने लगेगी।

  • 7. Billionaire 's obsessed love - Chapter 7

    Words: 1807

    Estimated Reading Time: 11 min

    अब आगे:-









    अतिशय  और पहल के बीच  वो डील हो जाती है। पहल अतिशय  से हाथ  मिलाता है। अतिशय  उससे हाथ  मिलाकर शयश की तरफ  अपना हाथ  बढा देता है और  शयश  भी पूरे जोश  के साथ  उससे हाथ  मिलाता है। फिर वह  लोग वहा से निकल  जाते है।









    वही अतिशय  धम्म  से अपना हाथ  पकड़कर  बैठ  जाता है। वह आज बहुत  खुश था क्योकि शयश  ने उससे हाथ  मिलाया था।









    तभी वहा पर मेहुल आता है और  अतिशय  को अपने आप  मे मुस्कुराता देख कर  बहुत  खुश  होता है। वह कहता है-" मैने सुना था कि प्यार  मे लोग  सुध बुध  खो बैठते  है पर  ये तो पूरा बावला बन गया है।मुझे समझ नही आ रहा कि इसका पागलपन  कैसे दूर होगा।"



    अतिशय  शयश के ख्यालो मे ही गुम  था कि उसके कानो के पास  कोई  आकर  जोर से चिल्लाया-"हू हू हहहहहह।"



    अतिशय  उस आवाज  से डर कर  चिहुंक  गया। फिर  उसकी नजर बगल मे खडी इंसान  पर पडी तो वह खुशी से उसके गले लग गया। उसके सामने उसका बेस्ट  फ्रेंड  जय अरोड़ा था। 



    अतिशय-" कहा था यार, कितने सालो बाद  मिला । मुझे तो भूल ही गए  हो "



    जय-" बकवास  ना कर यार, मै  I P S officer हू। पहले ट्रेनिंग  मे बिजी था। फिर  अलग अलग जगह पर जगहो पर पोस्टिंग  होती रही तो मिलने का समय ही नही मिल पा रहा था, आज भी इसलिए  आ पाया ,क्योकि अब मै यही पोस्टेड  हो गया हू। "





    अतिशय-" congratulations  yaar,finally  you fulfill  your  dreams, I am  really  happy for you. You  are  such a gem."





    जय-" thanks  yaar. ये मुबारकबाद  देना छोडो और  ये बताओ कि ऐसा क्या हो गया जो तेरे जैसा खडुस अपने आप मे हस रहा था।"



    तभी वहा पर आकर  मेहुल  बोल पडा-" वो बात यह है कि हमारे इस फ्रैंड  को लव एट फस्ट साइट  हो गया है और  आज इसने उससे हाथ  मिलाया था, इसलिए  वह  अपने आप  मे हस रहा है।" उसकी टांग खिचाई  करते हुए  उसने कहा।





    जय-" उसे बताया कि तुम उससे प्यार  करते हो"



    अतिशय-" नही, वह शादी शुदा है। मेरी किस्मत  मे बस उसकी याद  मे तडपना  लिखा है। शायद  दादा जी और दादी के अलावा किसी और  का प्यार  नही है।"





    जय-" अरे यार, ये कैसा हारे हुए  आशिक  की तरह  बात कर रहा है। तुम अतिशय  खुराना हो जो किसी डील  को नही छोडता और  तुम  अपना प्यार  छोड  रहे हो। अरे,उससे इजहार  करो । 



    अतिशय  उसे हासिल  करो। यह लैला मजनू की तरह  इश्क मे तड़पने से कुछ  नही मिलता। जब प्यार  है तो किसी भी कीमत  पर  अपना बनाओ। "



    अतिशय-" चाहता तो मै भी यही हू कि मै अपनी बाकी की लाइफ  उसके साथ  ही बिताऊ, उसे अपना बना लू। उसके साथ  रहू।पर वो कभी नही मानेगा। आज मैने देखा कि वह कितने प्यार  से अपनी वाइफ  से बात  कर  रहा था।"



    मेहुल-" देख यार, मेरा तो बस यही मानना है कि अपना प्यार  हासिल  करना चाहिए।  आखिर  प्यार  के लिए  तो हम जीते है। खैर ,छोडो। तुम  उसे छोड़कर  किसी और  से शादी कर लो। प्यार  का क्या है वो आज नही तो कल हो ही जाएगा।"



    अतिशय-" मै अतिशय  खुराना हू। मेरा प्यार कोई  सूट  नही है कि इसकी जगह दूसरे को इस्तेमाल  कर लूंगा।। मुझे तो जो कपडा भी पसंद  आता है तो मै उसे पा कर रहता हू।



    अब तुम  लोग भी देखते जाओ  कि यह अतिशय  खुराना अपना प्यार  कैसे हासिल  करता है। अगर उसे पाने के लिए  मुझे जो भी कीमत  चुकानी पडेगी वो मै चुकाउगा। 



    अब मै भी देखता हू कि मि शयश  मेहरा इस अतिशय  खुराना के चार्म  से कैसे बचता है। माय डार्लिंग स्वीटहार्ट, आय एम  कमिंग  इन योर लाइफ।  जस्ट  वेट फार मी।"





    ..................





    वर्तमान  समय



    मूनलाइट सनसाइन बार 



    अवनीश  ने माइक पकड लिया था जिसे देख कर  ही वहा जोर  जोर  से हूटिंग  हो रही थी। जिसे देख कर  सूर्य  मूंह  बनाते हुए  कहता है - " ऐसा कौन  सा चमत्कार  करने वाला है जो लोग  इतना पागल हो रहे है। लगता है कि लोगो को कोई  काम नही रहता किसी को भी उठाकर  स्टार  बना देते है।"





    आयू-" तू तो रहने ही दे । तू क्या इन चीजो को समझेगा, जब वह गाना गाता है तो सारा शमां ही झूमने लगता है। वह हमे वहा पहुंचा  देता है जहा पर हम अपने प्यार  के साथ  एक अलग ही दुनिया मे खो जाते है। हर तरफ  बस प्यार  ही प्यार  होता है। आपका साथी आपके साथ  होता है।"





    सूर्य-" अगर ऐसी बात है तो तू ही इन बातो मे यकीन  कर,तू ही वहा खो जा। पता नही, लोग कब समझेंगे प्यार  सिर्फ  और  सिर्फ  एक धोखा है। दिल टूटने और  इंसान  के बर्बाद  होने का सबसे बडा कारण  यही प्यार  ,इश्क और  मोहब्बत  होता है। "



    अगर उन्हे नही मानना तो ना माने ,सूर्या तू क्यो अपना दिल  जलाता है।  अब इस आयु के बच्चे को ही देख ले ,हर दूसरे दिन गर्लफ्रेंड  डिच  कर जाती है पर यह दुबारा किसी और के पीछे पड  जाता है।"



    तभी उसका ध्यान  अवनीश  पर जाता है और माइक  लेकर  लोगो के साथ  interaction कर रहा था।



    अवनीश-" गुड  इवनिंग,  फ्रेंड्स।  मै लेडीज  और  जेंटलमैन  नही कहूंगा क्योकि यहा मौजूद  सारे लोग  मेरे फ्रेंड्स  है।फ्रेंड्स  तो दिल से जुडे होते है। क्यो सही कहा ना।"



    सूर्य  अपने काउंटर  पर ड्रिंक  बनाते हुए  कहता है-" प्यार,  दोस्ती सब धोखा है।कोई  किसी का सगा नही होता। सब मतलब  के रिश्ते होते है।"



    आयु-" मेरे यार,  तेरी सोच ना तू अपने अंदर  ही रखा कर,कितना ज्यादा टॉक्सिक  है। जब देखो ,जहर ही उगलता  रहता है। पता नही ,उस इंसान  का क्या होगा जो तुझसे प्यार  करेगा।"



    सूर्य-" जो प्यार  की बात  करेगा,उससे तो मेरा कोई  कनेक्शन  हो ही नही सकता। तू यह फालतू की बकवास  अपने तक ही रखो।





    अवनीश-" मै आप लोगो के लिए  पता नही known person हू या नही, इसका पता नही । So I  let introduce myself.  I am  Avnish Mehra. I am a singer.





    उसकी बात  सुनकर  पब्लिक  हूटिंग ग करने लगी-" सर आपको कौन नही जानता । आपको अपना परिचय  देने की कोई  जरूरत  नही है।हम यहा आपका परफार्मेस  देखने जमा हुए  है। 



    अवि,वी नीड योर सांग। प्लीज  सींग  ए सांग फार अस।



    अवनीश- " ओके। आपके और मेरे साथ  के लिए  यह गाना डेडिकेटेड  है.......



    तू ही ये मुझको बता दे, चाहूँ मैं या ना

    अपने तू दिल का पता दे, चाहूँ मैं या ना

    तू ही ये मुझको बता दे, चाहूँ मैं या ना

    अपने तू दिल का पता दे, चाहूँ मैं या ना

    इतना बता दूँ तुझको

    चाहत पे अपनी मुझको यूँ तो नहीं इख़्तियार

    फिर भी ये सोचा दिल ने

    अब जो लगा हूँ मिलने, पूछूँ तुझे एक बार, ओ

    तू ही ये मुझको बता दे, चाहूँ मैं या ना

    Mmm, अपने तू दिल का पता दे, चाहूँ मैं या ना

    ऐसी कभी पहले हुई ना थीं ख़्वाहिशें

    ओ, किसी से भी मिलने की ना की थीं कोशिशें

    उलझन मेरी सुलझा दे, चाहूँ मैं या ना

    आँखों-आँखों में जता दे, चाहूँ मैं या ना

    मेरे छोटे-छोटे ख़्वाब हैं, ख़्वाबों में गीत हैं

    गीतों में ज़िंदगी है, चाहत है, प्रीत है

    अभी मैं ना देखूँ ख़्वाब वो जिनमें ना तू मिले

    ले, खोले होंठ मैंने, अब तक थे जो सिले

    मुझको ना जितना मुझ पे

    उतना इस दिल को तुझ पे होने लगा एतबार

    तन्हा लम्हों में अपने

    बुनती हूँ तेरे सपने, तुझसे हुआ मुझको प्यार, ओ

    पूछूँगी तुझको कभी ना, चाहूँ मैं या ना

    तेरे ख़्वाबों में अब जीना चाहूँ मैं क्यूँ ना?

    तू ही ये मुझको बता दे, चाहूँ मैं या ना

    अपने तू दिल का पता दे, चाहूँ मैं या ना



    उसके परफार्मेस  के बाद  जोर  जोर  से तालिया बज रही थी जिसे सुनकर  सूर्य  कहता है-" पता नही लोग ऐसा गाना सुनते कैसे है। इन्हे ये भी नही पता प्यार  व्यार  कुछ  नही होता। सबकुछ  प्राॅफिट  और  लाॅस  की तरह  होता है,अगर फायदा हो रहा है तो प्यार  है और  अगर लाॅस  होने लगे तो प्यार  भी खत्म  है।यह बस आपको बर्बाद  करता है।"



    जब लोगो का शोर  कम हो जाता है तो वह लोगो के बीच  से निकल  कर  सीधा ही अवनीश  के सामने खडा होकर  कहता है-" आप सेलिब्रेटी  हो ना, यह क्या बकवास  बातो को बढावा दे रहे है। प्यार  बिल्कुल  वैसा नही होता जैसा आप लोगो को बता रहे है।"



    अवनीश  एक दम से उसकी आंखो मे खो गया था।वह उसकी बातो को सुनकर  होश मे आते हुए  कहता है-" तो मि? तुम्हारा नाम  जान सकता  हू।"



    " मेरा नाम सूर्य  है।" सूर्य  ने जवाब  दिया।



    " सूर्य  तुम ही बता दो कि प्यार  क्या होता है। मुझे और इन सब को  भी जानना है।" अवनीश  ने कहा।



    अवनीश  की बात सुनकर  सूर्य  उसके हाथ  से लेकर माइक  खुद  ही पकड कर  गाने लगा.....





    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका

    दिल को हज़ार बार

    टोका टोका टोका

    दिल है हवाओं का

    झोंका झोंका झोंका

    दिल को बचाना

    धोखा न खाना

    धोका है प्यार

    यार प्यार है धोका



    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका

    दिल को हज़ार बार

    टोका टोका टोका

    दिल है हवाओं का

    झोंका झोंका झोंका

    दिल को बचाना

    धोखा न खाना

    धोका है प्यार यार

    प्यार है धोका



    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका

    हाँ आ हा हा हा हा

    हाँ आ हा हा हा हा

    हाँ ा हा हाँ ा

    हा आ आ आ आ

    ढूंढेगा कोई बहाना

    ढूंढेगा कोई निशाना

    हाँ ढूंढेगा कोई बहाना

    ढूंढेगा कोई निशाना

    दिल का बाज़ार है यहाँ

    तो दिल को दिलों से बचाना

    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका

    दिल को हज़ार बार

    टोका टोका टोका



    दिल है हवाओं का

    झोंका झोंका झोंका

    दिल को बचाना

    धोखा न खाना



    धोका है प्यार

    यार प्यार है धोका

    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका



    बचना इस आशिक से बचना

    काँटों की दोस्ती से बचना

    हाँ बचना इस आशिक से बचना

    काँटों की दोस्ती से बचना

    आँखों में भर ले अँधेरा

    तुम ऐसी रौशनी से बचना

    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका

    दिल को हज़ार बार

    टोका टोका टोका

    दिल है हवाओं का

    झोंका झोंका झोंका

    दिल को बचाना

    धोखा न खाना



    धोका है प्यार यार

    प्यार है धोका

    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका

    दिल को हज़ार बार

    टोका टोका टोका

    हाँ आ हा हा हा हा

    हाँ आ हा हा हा हा

    हाँ ा हा हाँ

    आ हा आ आ आ आ

    दिल को हज़ार बार

    रोका रोका रोका.





    सूर्य-" शायद आप सब को मेरा जवाब  मिल गया होगा। अगली बार  प्लीज  प्यार  मोहब्बत  की बात  मत करना। इससे बडा फरेब  किसी और  से नही मिल सकता है।"



    यह कहकर वह  वहा से निकल  गया। सारे लोग  उसे ही देख  रहे थे। अवनीश  का ध्यान  भी सूर्य  ने अपनी ओर  खींच  लिया था।



    सूर्य  अपने काउंटर  पर  आ गया और  ड्रिंक  बनाने लगा। तभी उसके पास  रवि आया। रवि को अपने सामने देख  कर  वह बहुत  घबरा गया।





    अगले भाग  मे जारी.........





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  • 8. Billionaire 's obsessed love - Chapter 8

    Words: 1351

    Estimated Reading Time: 9 min

    अब आगे:-






    अतिशय  -" अब यह सब बाते बाद  मे होती रहेगी। चलो ,घर चलो। दादू और  दादी इतने दिनो बाद  तुम्हे देख कर  बहुत  खुश  हो जाएगे।"


    कुछ देर बाद वह लोग खुराना हाउस मे थे।दादा जी और दादी बहुत  खुश  थे। वह तीनो मिल कर  वैसी ही मस्ती कर रहे थे जैसा वह बचपन  मे करते थे।

    जय-" मेहुल,  तूने शादी की

    मेहुल-" नही, अभी तक कोई  नही मिला ।  जय तुम  ये बताओ  कि तुम्हारा क्या हो रहा है"


    जय-" मै तो अखंड  सिंगल हू। इसका मतलब  यही है कि हमारे बैच मे सबसे पहले अति ही बैंड बाजा बजायेगा।


    कुछ  दिन बाद

    अतिशय  ने पी एस इंटरनेशनल  के बीस पर्सेन्ट  शेयर खरीद  लिए  थे । अब वह पी एस इंटरनेशनल  का मालिक मे से एक था।


    अतिशय शयश  को अपने पास  बुलाकर  कहता है-" मि मेहरा,ये कुछ  प्रोजेक्ट  फाइल  है। आज से तुम  इसपर मेरे साथ  काम  करोगे। तुम मुझे असिस्ट  करोगे।"

    शयश-" ओके सर। " यह कहकर वह  चला गया। उसके जाने के बाद  अतिशय  अपने डेस्क पर  रखे पेपर वेट को गोल गोल घुमाते हुए  कहता है-" अभी तुझे खुद  के पास  रखने का उपाय किया है। "


    अतिशय  ने कुछ  दिनो मे ही शयश  से दोस्ती कर ली थी। वह कोई  ना कोई  बहाने से अतिशय शयश को अपने पास ही रखता था। एक दिन  अतिशय  शयश  को अपने साथ  लेकर  एक बहुत  बडे माॅल  मे आया।

    शयश-" सर ,हम यहा क्यो आए है"

    अतिशय-"  अरे यार,  लोग  माॅल  क्यो आते है। बात यह है कि मुझे ना ओलंपिक  मे भाग लेना है तो उसकी तैयारी करने मै यहा आया हू।"

    शयश  उसकी बात सुनकर  ही समझ गया कि अतिशय  उसे ताना मार रहा है। वह कहता है-" मैने नही सोचा था कि आप ताना मारना भी जानते होगे। "

    अतिशय-" अभी तुम  मेरे बारे मे जानते ही कहा हो,साथ  रहो सबकुछ  जान लोगे। चलो अब शापिंग  करते है। मुझे कुछ  कपडे लेने है"

    फिर वह  शयश  का हाथ पकड़कर  उसे अपने साथ  उधर ले जाता है जिधर कपडो का सेक्शन  था। वह सीधे मेंस वियर  सेक्शन  मे जाता है और  तरह तरह  के टी शर्ट और  ट्राउजर और  जींस  खरीद  लेता है।

    फिर वह  एक  ब्लैक जींस और  ब्लैक  शर्ट  पसंद कर  शयश  के पास  आ जाता है।शयश  को समझ  नही आया कि वह यह जींस और  शर्ट  लेकर उसके पास  क्यो आया है।


    शयश-" सर, यह जींस और  शर्ट लेकर  मेरे पास  क्यो आए है। मै तो इसका लेबल भी नही खरीद  सकता । ये मेरे औकात  से बाहर  है।"

    उसकी बात सुनकर  अतिशय  उसका कमर पकड कर  अपनी ओर खींच कर  उसकी आंखो मे देखते हुए  कहता है-" अब तुम  अतिशय  खुराना के हो,दुनिया मे ऐसी कोई  चीज नही बनी जो तुम अफोर्ड  ना कर सको।"


    शयश  उसके हाथ  को अपनी कमर से हटाते हुए  कहता है-" आपके कहने का क्या मतलब  है? आपने मुझे कमर से क्यो पकडकर  रखा है। ये सब बहुत  अजीब  लग रहा है"

    उसकी बातो को सुनकर  अतिशय  को ध्यान  आया कि वो क्या कर रहा है।वह तुरंत  ही कहता है-" अरे यार,  तुम  मेरे फ्रेंड हो। मै अपने दोस्त  के लिए एक ड्रेस  तो खरीद  ही सकता हू। तुमने मुझसे दोस्ती की है तो उसे निभाओ। चलो जल्दी से इसे और इन सब कपडो को जल्दी से नापो।"

    शयश  -" ये कपडे मै नही ले सकता। यह सही बात  नही है।"

    अतिशय  उसकी कोई  भी बात  नही मानता और  उसके लिए  कपडे पसंद  कर  उसे ट्राई  करने देता रहा। करीब  दो घंटे बाद  अतिशय  ने शयश  के लिए  वाइन कलर का टाॅक्सीडो  चूज किया। साथ ही ब्लैक  जींस और वाइट  शर्ट  पसंद  किया। उसके साथ  मैंचिग  शू और सारे एक्सेसरीज थे। उसने अपने लिए  भी कपडे खरीदे थे।

    उसके बाद  वह  दोनो फूड  कोर्ट  मे जाकर  खाना खाने लगे। उन दोनो को ही शापिंग  करने के बाद  जोर  की भूख  लग गई  थी।

    अतिशय  खाना ऑर्डर  करता है। कुछ देर बाद  वह  लोग  वहा से निकल  गए।  अब  लगभग  रात हो चुकी थी। शयश  के फोन पर  रिंग हुआ।  शयश  ने अपना फोन  उठाया। फोन के दूसरे तरफ  से एक बच्चे की  प्यारी सी आवाज  आई-" डैडा, जल्दी से घर आओ। सक्षु को बहुत  नींद  आ  रही है। सक्षु को डैडा चाहिए ।"

    उसकी आवाज सुन कर  शयश  के चेहरे पर  स्माइल आ  गई।  वह अपने फोन  को किस कर कहता है-" बच्चा, डैडा अभी अपने प्रिंस के पास  आ रहे है।"

    उन दोनो की बात  सुनकर  अतिशय शयश  को उसके घर के लोकेशन  तक ड्राप कर चला गया। वह आज बहुत  खुश  था क्योकि उसने पूरा दिन शयश  के साथ  मस्ती करते हुए  बिताया था। वह भी वहा से अपने घर आ जाता है।


    .......


    वर्तमान  समय

    एक लग्जीरियस  रुम मे एक लडका सोया था। उसके उपरी बदन  पर  कोई  कपडा नही था।वो सिर्फ ट्राउजर  मे सोया था। अचानक  उसके माथे से पसीना आने लगा।

    उसे कुछ  धुंधली  आकृतिया दिखाई  पड रही थी। एक लगभग आठ साल  का लडका के हाथ  मे गन रहता है। वह रोज रहा था। वह बच्चा बार बार  कह रहा था कि वह वैसा नही करेगा।फिर  अचानक  ही उस बच्चे ने अपने सामने खडे आदमी पर गोली चला दी और वह आदमी खाई मे गिर गया।

    यह सपना देखते ही वह लडका की नींद  टूट  गई।  वह जल्दी से साइड  टेबल पर  रखे पानी के जग से पानी निकाल  कर  पीता है।जिससे वह शांत हो जाता है। वो बेड से उठकर  बालकनी मे जाकर  सिगरेट  पीने लगा।

    वही दूसरी ओर  रवि गुस्से से सूर्य  का हाथ पकड़कर उसे बार काउंटर  से बाहर  निकालकर अपने साथ  घसीटते हुए  ले जाने लगा। अ और  सूर्य  दोनो ने एक शब्द  भी नही बोला था। रवि का गुस्सा देख कर  ही सूर्य  शांत  था।

    वह उसे लेकर सीधे कार के अंदर बैकशीट पर धकेल  देता है। वह खुद  कार ड्राइव कर घर पहुंचता है। वह सूर्य  को पीछे से निकालता हुआ  उसका हाथ पकड़कर  जबरदस्ती घसीटता हुआ  अंदर हाल  के सोफे पर  जोर से पटक देता है। जिससे  कारण  सोफे के कोने से टकराकर  उसे चोट लग  जाती है। जिसे देख कर  जल्दी शालिनी जी वहा आई।

    शालिनी सूर्य  को सोफे से उठाकर  ठीक  से बैठाती  है। वह देखती है कि सूर्य  के सर से खून निकल रहा है। वह जल्दी से उसका फस्ट एड करती है। सूर्य चुप चाप  वैसे ही बैठा था।

    शालिनी-" यह  क्या  हरकत  है? रवि तुम  पागल हो गए  हो। कौन सा बडा भाई  अपने छोटे भाई  के साथ  ऐसी हरकत  करता है"

    रवि-" माम,  मेरी गलती नही है। आपके लाडले की हरकत  ही ऐसी है कि मुझे बहुत  जोर  का गुस्सा दिला देती है। पता नही ये ऐसे ही काम क्यो करता है जो मेरी परेशानिया  बढाए।

    फिर वह  सूर्य  को कंधे पर पकड़कर  उसे झटका देते हुए  कहता है-" तू जानबूझकर  ऐसा करता है। तू चाहता है कि मै बर्बाद  हो जाऊ। तुझे कितनी बार  समझा चुका हू कि बिना मतलब  के पंगे नही लेना चाहिए,  पर तेरी खोपड़ी मे कोई  बात आती ही नही है।"

    रवि उसे झटके से छोडते हुए  कहता है कि -" माम,  आज इसने अपने पागलपन  मे अवनीश  मेहरा से पंगे ले लिए । वो इतना पावरफुल  है कि हमे सड़क  पर  ला सकता है।"

    सूर्य-" भाई,  मै जाकर  पर्सनली  उनसे माफी मांग लूंगा। अगर वह सजा भी देगे तो उसे भी पूरा कर  दूंगा। आप चिंता मत किजिए, मै बार को कुछ  नही होने दूंगा।"

    रवि-" यही अच्छा रहेगा। तुम  कल सुबह  ही उनसे माफी मांगोगे। जब तक  सब कुछ  ठीक  नही कर लेते ,अपना चेहरा मुझे मत दिखाना।"

    अगली सुबह  सूर्य  अवनीश  के आफिस  मे था। वह अवनीश  से मिलने का appointment लेता है। वह बेसब्र  से अवनीश  का वेट कर रहा था जो अभी तक  आफिस  नही आया था।

    सूर्य  टेंशन  मे अपनी जगह  से उठकर  टहलने लगा और  एक इंसान  से टकराकर  गिरने लगा। गिरने से बचने के लिए  वह उसका सूट पकड़ लिया, पर सूट के सारे बटन को तोडता  हुआ  वो नीचे गिर गया। उसे चोट आई थी। वह कराह देता है। उसकी आंखे बंद  थी । वह अपनी आंखे जैसी ही खोलता है।वह सामने खडे शक्स  को देख कर  हैरान  रह  जाता है।

    अगले भाग  मे जारी......

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  • 9. Billionaire 's obsessed love - Chapter 9

    Words: 1353

    Estimated Reading Time: 9 min

    अब आगे:-








    अतिशय  मेहुल, पहल और शयश के साथ  था। आज  एशिया की सबसे बडी कंपनी माॅरिशन  के टेंडर  का रिजल्ट  आने वाला था।

    पहल और अतिशय  ने मिलकर  पी एस  इंटरनेशनल  की तरफ  से यह टेंडर  भरा था। पहल और शयश  बहुत  टेंशन  मे थे। यही हाल  मेहुल  का भी था।


    मेहुल  उस बडे से हाल  मे चक्कर  लगाना शुरु कर दिया था। मेहुल  को ऐसे चक्कर  लगाता देख कर  अतिशय  अपना मूंह  बनाते हुए  कहता है-" मेहुल,  तुम  शांति से बैठ क्यो नही रहे हो। अभी तक  तुमने इस हाल के जितने चक्कर  लगाए  है ,अगर अपनी नाक  की सीध मे लगातार  चलते रहते तो तुम आज दिल्ली से गाजियाबाद  पहुंच  ही जाते ,वह भी पैदल। अरे यार, बैठ भी जा, जो होना है वही होगा। तेरे चलने से रिजल्ट  चेंज  नही हो जाएगा।"

    मेहुल-" यहा टेंशन  से मेरी जान जा रही है और  तुझे मजाक  सूझ रहा है। जब तक  यह रिजल्ट  नही आ जाता ,तू चुप  ही रह। मुझे पता है कि तेरे लिए  और कंपनी के ग्रोथ  के लिए  यह टेंडर  हमे मिलना कितना जरुरी है। पिछले तीन दिन से लगातार  दिन  रात  तू इस पर काम  कर  रहा है। तूने तो टेंडर  मिलने के बाद  क्या क्या करना है ,उसकी भी पूरी लिस्ट  तैयार कर  रखी है।

    मुझे यह समझ नही आ रहा कि इतना सब होते हुए  भी तू इतना शांत कैसे है। मै तेरी जगह होता तो पता नही क्या करता।"


    अतिशय  कुछ  बोलता ,उससे पहले ही शयश  बोल पडा-" मेहुल,  आप बिल्कुल  सही कह रहे है। हम सब ने इस प्रोजेक्ट  के लिए  काफी मेहनत  की है। मैने तो अपने बाकी के प्रोजेक्ट  को किनारे कर इस पर काम किया है। यह मेरे कैरियर  के लिए  बहुत  जरुरी है। मुझे भी प्रमोशन और  इंक्रीमेंट  चाहिए।  यह मांगने के लिए  कुछ  तो एचीवमेंट  मेरे पास  होना चाहिए। " यह कहकर  वह  अपने नाखून  चबाने लगा।

    उसका इस तरह  नाखून  चबाना, अतिशय  को बिल्कुल  पसंद  नही आ रहा था। वह तुरंत  ही शयश  का हाथ पकड़कर  उसे रोकते हुए  कहता है-" शयू,  प्लीज  ना। ये बच्चो  जैसी हरकत  क्यो कर  रहा है। नाखून  चबाना  गंदी  आदत  होती है।अगर तुम  चाहते हो कि यह  प्रोजेक्ट पर  हम काम  करे तो यह प्रोजेक्ट  किसी भी कीमत  पर  हमारी ही होगी।

    इसलिए  डोंट  वरी, इस अतिशय  खुराना के होते हुए  तेरी चाहत  पूरी ना हो,ऐसा नही होगा। अब चाहे जो हो जाए  यह प्रोजेक्ट  तेरा ही होगा।"

    शयश-" मि खुराना, आप भी अच्छा मजाक  करते है। मेरे चाहने या ना चाहने से क्या  फर्क  पडता है। मै अपनी हैसियत  जानता हू। मै अगर कहूं कि मुझे एक मर्सिडीज  की लेटेस्ट  माडल  कार चाहिए  तो क्या ये विश पूरी हो जाएगी।"


    अतिशय-" अगर तेरी यही इच्छा है तो यह जरूर  पूरी होगी। तुम  यहा से बाहर  निकलोगे  और  वह कार  तेरे कदमो मे होगी। अब  तुम  आराम  से रिलेक्स  करो। कुछ  ही देर मे रिजल्ट  आने वाला है जो हमारी ही कंपनी को मिलेगा।"


    कुछ  ही देर बाद  टेंडर  का रिजल्ट  घोषित  होता है। यह टेंडर  अतिशय  को ना मिलकर  गुप्ता  इंडस्ट्रीज  को मिल जाता है।यह सुनकर  शयश और  मेहुल  दोनो ही अपसेट  हो गए। 

    शयश-" सारी मेहनत  पानी मे चली गई।  हमे यह प्रोजेक्ट  नही मिला। अब मेरी इंक्रीमेंट  नही होगी। मेरा खुद  का अपना घर बनाना है। ये सपना भी पूरा होने मे और समय लगेगा।मुझे अपने बच्चो को कुछ  और समय  तक उसी लोकल्टी  मे रखना पडेगा।"

    यह सब  शयश  बहुत  धीमे से बोल रहा था। पर अतिशय  ने सब कुछ  सुन लिया था। वह अपने मन मे कहता है-" अगर  तुम  नही चाहते कि बच्चे वहा रहे तो माय स्वीटहार्ट  वो अब वहा नही रहेंगे या वो पूरी लोकल्टी ही हमारे बच्चे के लिए  रहेगी। अब उस लोकल्टी का डेवलपमेंट मेरी कंपनी करेगी। ऐसे मेरी जान यह प्रोजेक्ट  करना चाहता है तो अभी इसी वक्त  यह प्रोजेक्ट  उसका होगा।"


    फिर  वह  एक  काॅल  करता है। अतिशय  उसे सबकुछ  समझा देता है।उसकी बात  समझ कर  उधर से ओके कहा जाता है।

    करीब  पांच मिनट  बाद  वहा पर गुप्ता इंडस्ट्रीज  का मालिक  एक अनाउंसमेंट  करता है-" अभी अभी मेरी कंपनी के 75% शेयर खुराना इंडस्ट्रीज  ने खरीद  लिए  है। आज और अभी से यह कंपनी खुराना इंडस्ट्रीज  के अंडर  आ गई  है। अब इस कंपनी के ऑनर  मि अतिशय  खुराना है। इसलिए  मै चाहता हू कि यह डील  मि खुराना ही साइन  करे।"


    अतिशय  पूरे एटिट्यूड  के साथ वहा पर आता है और  उस टेंडर  पर साइन  कर  देता है और  शयश की तरफ देख कर  बडी सी स्माइल  कर देता है। शयश  भी खुशी से आकर  उसके गले लग गया। यह देखकर  वह फ्रीज  ही हो गया।

    वही उन दोनो को देख कर  मेहुल  कहता है-" साला कमीना कही का, पहले बता नही सकता था कि वह क्या सोच रहा है। उसके प्यार  ने कहा कि उसे यह प्रोजेक्ट  करना है तो उस बावले पूंछ  ने एक कंपनी ही खरीद  डाली। यह कब क्या कर जाएगा कोई  नही बता सकता है। पर एक बात तो मानना पडेगा कि जो कोई  और नही सोच सकता, वही द ग्रेट  अतिशय  खुराना सोचता है। वह जितना भोला दिखता है ,उससे कही अधिक  धूर्त और  चालाक  है। सचमुच  आदमी के वेश मे लोमड़ी है। सियार भी इतने रंग नही दिखा सकता ,जितना ये एक दिन मे दिखा देता है। लगता है कि भगवान  ने इसका प्रोसेसिंग  युनिट  ही अलग बनाया है। कौवा से भी ज्यादा मक्कार  है।"

    उसकी बात सुनकर  अतिशय  कहता है-" अगर कोई  जानवर  छूट गया हो तो उससे भी मेरी तुलना कर ही देना। अगर तुम  इधर उधर  टहलना छोड  कर  समाधान  के बारे मे सोचते तो तुम्हे भी उपाय  मिल जाता,पर नही तुम्हे तो बेवकूफ  की तरह  की हरकत  करनी है। कभी कभी तो लगता है कि तुझसे बडा बेवकूफ  मै हू जो तुझे अपना असिस्टेंट  बनाए  रखा है।"

    ऐसे ही वह दोनो एक दूसरे से लडते झगडते  वहा से निकल  गए।


    ....................


    वर्तमान  समय


    सूर्य  अपनी आंखे खोलता है। उसे कमर मे चोट  लग  गई  थी। उसे दर्द  हो रहा था ,इसलिए  वह कराह देता है। वह जैसे ही सामने देखता है, सामने खडे शक्स  को देख  कर  उसे एक धक्का सा लगता है।

    उसके सामने अवनीश  खडा था। अवनीश  ही वह शक्स  था जिससे टकरा कर  सूर्य  गिर गया था और उसने उसके सूट  के सारे बटन तोड दिए  थे। यह देखकर  वह अपना जीभ  अपने होठो पर घूमा कर  उसे अपने दांतो से कांट लेता है।

    फिर  वह  अपने आप से बोलता है- " भाई  बिल्कुल  सही कहते है कि मेरे पास  आंखे नही बटन  है। शायद  मुझे ही चलना नही आता।रोज किसी ना किसी से टकरा ही जाता है। मेरा नाम  सच मे सूर्य  नही सूरदास  ही होना चाहिए ।

    कहा तो तू माफी मांगने आया था और  यहा आ कर  एक और स्यापा कर डाला। अरे माफी से याद  आया कि तू पहले वह काम  तो कर ले जो करने आया है।"


    वह उठने की कोशिश  करता है पर उठ नही पा रहा था। उसे कमर मे दर्द  हो रहा था। यह देखकर  अवनीश  उसे अपना हाथ  देता है और  उसे पकड़कर  वह उठ जाता है।

    अवनीश-" तो तुम  मुझसे माफी मांगने आए हो?"

    सूर्य  उसकी बात  मे हा मे हा मिलाते हुए  कहता है,पर आपको कैसे पता?"

    उसकी बात सुनकर  अवनीश  कहता है कि " यह बात  सिर्फ  मुझे नही यहा मौजूद  सारे लोगो को पता है।"

    सूर्य  अपने गाल पर  हाथ रख कर  सोचते हुए  कहता है कि " ये बात  सोचने वाली है कि इन सब को कैसे पता कि मै यहा माफी मांगने आया हू। आप लोग मन की बात  जान लेते है"

    उसकी बात सुनकर  वहा मौजूद  लोगो को हसी आ गई।  अवनीश  भी हसते हुए  कहता है कि" तुम  मेरे साथ  केबिन  मे चलो। हम दोनो वहा बैठ कर  बाते करेंगे।"

    उसकी बात मानकर  सूर्य  उसके साथ  केबिन  मे आ जाता है।केबिन  मे केवल  अवनीश और सूर्य  थे।

    अवनीश-" बोलो ,क्या बोलना है"

    सूर्य-" मै आपसे माफी चाहता हू जो कुछ  भी मैने कल किया। मुझे आपसे बहस नही करनी चाहिए थी।मैने बहुत  गलत  किया। प्लीज  ,मुझे माफ  कर  दीजिए। "

    अवनीश-" कर दूंगा पर मेरी एक शर्त है।"

    यह सुनकर  सूर्य  उसे देखने लगा।

    अगले भाग  मे जारी....

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  • 10. Billionaire 's obsessed love - Chapter 10

    Words: 1249

    Estimated Reading Time: 8 min

    अब आगे:-














    अतिशय  ने टेंडर  और दुबारा एक और  नई  कंपनी खोलने की खुशी मे पार्टी रखी थी जिसमे पहल और  शयश  भी इंवायटेड थे।

    शयश और  पहल  जैसे ही टेंडर वाली जगह से निकल  अपनी आफिस  की तरफ  जाने लगते है तो वो लोग  देखते है कि एक चमचमाती रेड कलर की लेटेस्ट  माडल  ,लिमिटेड  एडिसन मर्सिडीज  कार उसके सामने आ जाती है। जिसे देख कर  शयश और  पहल  दोनो की आंखे फटी रह जाती हैं । दोनो मे से किसी ने इतनी महंगी कार नही देखी थी।

    तभी उस कार  से एक आदमी निकलता है जो शायद  शो रुम मे काम करने वाला था।वह आकर  शयश  के पास  रुकते हुए  कहता है -" मि शयश,  यह आपकी कार की की है।"

    शयश उस आदमी को रोकते हुए  कहता है- " तुम पागल हो गए  हो। मै तो सपना मे भी इसे लेना तो बहुत  दूर  की बात है,छूना भी नही कर सकता  और तुम  यह कह रहे हो कि यह कार मेरी है।"


    शयश  की बात सुनकर  वह  शक्स  मुस्कुराते हुए  जवाब  देता है-" सर ,मै सही कह रहा हू। यह देखिए  इस कार के ऑनर शिप  के कागज  जिसमे साफ साफ लिखा है कि यह कार आपकी है। इसलिए  आप इसे रखिए।  मुझे वापस  लौट कर  जाना है।" इतना कह कर वह वहा से चला जाता है।

    शयश  अपने हाथ  मे उस कार की चाभी देख कर  शाॅक था। वही हाल पहल का भी था। वह दोनो वैसे ही शाॅक मे खडे थे कि यह क्या हुआ।  तभी पीछे से आती कार  के हाॅर्न  सुनकर वह  दोनो होश मे आते है। शयश  कार मे बैठता है। और उस कार  को चलाकर  निकल गया। वह अभी भी समझ नही पा रहा था कि अचानक  ही ऐसा कौन सा admirer उसकी लाइफ  मे आ गया है जो उसे इतना मंहगा गिफ्ट  दे सकता है। वह अपने दिमाग  के घोड़े लगातार  दौडा रहा था पर उसे समझ  नही आ रहा था।कुछ देर  सोचने के बाद  भी जब उसे कुछ  समझ  नही आता तो वह सीधे अपने जगह पर बैठ कर  अपना सिर पकड़कर बैठ  जाता है।सोचते सोचते उसका सिर  दर्द  होने लगा था। वह एक कप  चाय  पीने लगता है।


    वही दूसरी ओर  शयश  की रिएक्शन सोच  सोच कर  अतिशय  के चेहरे पर स्माइल  आ  गई  थी। वह कहता है कि " मेरी जान, मै जानता हू कि तुम  लगातार  यही सोच रहे होगे कि कही किसी ने तुम्हारे साथ  मजाक  तो नही किया। कौन है जो यह कर सकता है। अगर किसी ने यह दिया है तो क्यो दिया है। तुम अपने दिमाग  के घोडो  को हर तरफ  दौडा कर भी मेरे नाम  के आस पास भी नही आ पाए  होगे। माय डार्लिंग,  मै चाहता हू कि आज दिन भर  तेरे दिमाग  मे बस मै और मै ही रहू। तू मुझसे मिलने और  जानने के लिए  तडपो। मै चाहता हू कि तुम  दिल ही दिल मे मुझसे एक कनेक्शन  बना लो। ऐसे भी आज शाम को फिर  से तेरा दीदार  होगा।

    तेरी आंखो मे डूब जाना है
    तेरी लबो को पाना है
    तेरे अधरो का प्यास जगाना है
    तेरे दिल मे शोला बढाना है
    प्यार इस कदर करता हू
    शिद्दत से तुझ पर मरता हू
    दीवानगी की हद से गुजर जाउगा
    तेरे लिए जीना क्या मर जाउगा"




    यह बोलते हुए  एक अलग तरह  का जुनून ही उसके सर पर सवार था। वह अभी सच मे एक बेहद जुनूनी इंसान  नजर आ रहा था। वह आगे क्या करने वाला था, इस बारे मे कोई  नही जानता था। ये बात  सिर्फ  वही जानता था। उसकी आंखो मे शयश को पाने का उतावलापन  बढता ही जा रहा था। यह आगे जाकर  क्या मोड लेने वाला था, कोई  नही जानता था।

    ..............



    वर्तमान  समय


    अवनीश  मेहरा अपने केबिन  मे बैठ  कर  अपने सामने खडे  शक्स  को देख  रहा था। जो अजीब  सी हरकते कर रहा था।

    सूर्य-" देखिए  ,मै नही जानता था कि आप लोगो के मन की बात  भी जान लेते है। मैने अभी मन मे नही सामने से आपको साॅरी कहा है।"

    उसकी बात सुनकर  अवनीश  कहता है-" हैलो सूर्य,  मेरे अंदर  किसी के मन की बात  जानने की कोई  स्कील  नही है। तुम खुद  ही इतनी जोर जोर से बडबडा  रहे थे कि सबको पता चल गया था कि तुम  किस लिए  आए हो।"

    उसकी बात सुनकर  सूर्य  बेवकूफ  की तरह  बोल पडा -" हशशशश ,थैंक्स  भगवान  जी, आपका बहुत  बहुत  धन्यवाद, आज आपने बचा लिया। मुझे तो यह सोच  सोच  कर  ही डर लग रहा था कि कही इन्हे जादू तो नही आता। कही ये मुझे कबूतर  बना कर ना उडा दे। पर अब ठीक  है कि ये यह सब नही जानते है। मै इतनी छोटी सी उम्र मे अलिफ  लैला की कहानी के राजकुमारी की तरह  लडकी से चिडिया  नही बनना चाहता था। अब चलो, मेरा यह डर भी खत्म  हो गया।"

    उसकी  बैसिर  पैर  की बात  सुनकर  अवनीश  चाह कर भी अपनी हसी रोक नही पा रहा था। उसने अपनी पूरी लाइफ  मे ऐसी बात  नही सुनी थी। वह समझ नही पा रहा था कि कोई  इंसान  इस तरह  की बेवकूफी  भरी सोच कहा से ला सकता है।

    आखिर  कार वह वैसे ही हसते हुए  कहता है -" यार, डैम इट। तुम सचमुच  इसी planet के हो ना या किसी स्पेस शिप से लाकर यहा पटक दिए गए  हो। सीरियसली,  इस तरह की सीली  बाते तू कैसे सोच सकता है।

    तुझे सच मे जादू और  जादूगर  ,इन बकवास  चीजो मे विश्वास  है। मै तो आज तेरी बात  सुनकर  यही सोच  रहा हू कि कल बार मे जो लडका मुझसे मिला था ,वो तू ही था ना या फिर  तेरा कोई  हमशक्ल  था।"


    उसकी बात सुनकर  सूर्य  चिढते हुए  कहता है-" ऐ हैल्लो, मै कोई  ऐलियन  नही हू और ना ही मेरा कोई  हमशक्ल  है। अगर लोग प्यार, इश्क और  मोहब्बत  पर यकीन  रख सकते है तो जादू  तो उससे ज्यादा ही सही चीज  है।

    ऐसे मै यहा सिर्फ और  सिर्फ  आपसे माफी मांगने  आया था। मै चाहता हू कि आप या तो मुझे माफ  कर  दीजिए  या फिर  मुझे माफ  करने के बदले क्या चाहते है वह बता दिजीए  मै वह काम भी कर लूंगा ।"

    अवनीश  स्मर्क  करते हुए  कहता है-" मै तुम्हे माफ करने को तैयार  हू पर उसके लिए  मेरी एक शर्त  है।"

    सूर्य-" मुझे आपसे किसी कीमत  पर  माफी चाहिए।  आपकी शर्त  मुझे मंजूर है। आप प्लीज  अपनी शर्त  बताए। "

    अवनीश-" अगले छह  महीने तक  तुम मेरे असिस्टेंट  बनकर काम करोगे और  यही नही तुम  मेरे साथ  रहोगे।"

    उसकी शर्त  सुनकर  सूर्य  की आंखे फटी रह गई  थी। वह किसी तरह  कहता है -" मै यह कैसे कर सकता हू। मेरी तो अभी पढ़ाई  चल रही है। मै ऐसे ही किसी अंजान  शक्स  के साथ  कैसे रह सकता हू। प्लीज  प्लीज  प्लीज, कुछ  और सजा दे दिजिए  ना। " यह कहकर वह  पपी  फेस बना लेता है।

    अवनीश-" अच्छा ,ठीक  है। पर कालेज  के बाद  तुम सीधे मेरे पास आओगे और  मेरे असिस्टेंट  बनोगे। बस इतनी रियायत  दे सकता हू"

    अवनीश  की बाते सुनकर  वह अपनी शक्ल  रोने वाली बनाते हुए  कहता है-" ठीक  है,आ जाऊगा।तुम सब  मिलकर  बेचारे बच्चे की जान लेकर  रहोगे।" यह कहकर वह  मन ही मन उसे गालिया देने लगा ।

    अवनीश-" सूर्य,  मुझे गालिया देकर  मन भर गया हो तो तुम  अब जा सकते हो। तुम्हे कालेज  भी जाना होगा।"

    सूर्य  उसकी बात सुनकर  दौडते हुए  वहा से भाग  गया। वही अवनीश  कहता है-" बेबी बीयर,  आय एम  वेट फार  यू। " यह कहते हुए  उसके चेहरे पर मिस्टीरियस  स्माइल आ  कर  चली गई।


    अगले भाग  मे जारी ..............


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  • 11. Billionaire 's obsessed love - Chapter 11

    Words: 1676

    Estimated Reading Time: 11 min

    अब आगे:-








    शाम  को होनेवाले पार्टी के लिए  वह पिछले तीन घंटे से तैयार  हो रहा था, वह अभी तक  अपने लिए  एक कपडा चूज नही कर  पा रहा था। 


    तभी उसकी दादी वहा पर आती है। उसके कमरे का हाल देख  कर  वह कहती है-" अति बच्चा ये कमरे का क्या हाल बना दिया है। तेरा बेड बेड ना लगकर  कबर्ड  ही बना हुआ  है।

    ये फैशन परेड तुम  कब से कर रहे हो, चुप चाप  कोई  ड्रेस  सेलेक्ट  करो और  तैयार  हो। दिमाग  खराब  कर  रखा है।"

    अपनी दादी की बात मानकर  वह  एक वाइन कलर का टाॅक्सीडो पहन लेता है। वह साथ मे रोलेक्स घडी और gucchi का सैंट  लगाता है। फिर वह वाइन कलर  का ही गोगल्स  पहन लेता है। वह nike का जूता पहनता है।वह पूरे एटिट्यूड  मे चलकर  हाल मे आ जाता है।

    वही दूसरी ओर  शयश  भी आज वाइन कलर  का ही सूट पहने था। उसके साथ  उसकी वाइफ  पारुल भी आई थी। पारुल  ने आज क्रीम कलर  की साडी पहनी थी। वह भी बहुत  सुंदर  लग रही थी । पारुल  आज पहली बार  ऐसे किसी फंक्शन  मे आई थी। उसे पार्टी मे जाना पसंद  नही था पर शयश  के जोर देने पर वह आज आई थी।


    पार्टी की सारी तैयारी होटल के गार्डन  एरिया मे कराया गया था।पूरा गार्डन  ही लाइट और  फूलो से सजा था।सारे लोग  अब बस अतिशय  के आने का वेट कर रहे थे।

    कुछ  ही देर बाद  अतिशय  मेहुल  ,जय और अपने दादा और  दादी के साथ वहा आता है। वह सबसे पहले अपने दादा और  दादी को लेकर  वहा जाता है जहां नई  कंपनी खरीदने की खुशी मे केक कंटिग  का इंतजाम  किया गया था।


    पारुल  ने अपने एक हाथ  मे शयश  का हाथ  थाम  रखा था और  वही शयश  ने भी भी पारुल की कमर पकड  रखी थी।

    तभी वहा का होस्ट  एक अनाउंसमेंट  करता है-" welcome  ladies & gentle man. आज की पार्टी के होस्ट  मि. अतिशय  खुराना है जिन्हे यहा मौजूद  सारे लोग जानते है। आज की पार्टी एक और कंपनी के उनके साथ  मर्ज  होने की खुशी मे दी गई  है।

    इसलिए  मै मि अतिशय खुराना को बुलाकर  उनसे केक कंटिग करने की रिक्वेस्ट  करता हू कि वह यहा आए और  अपने हाथ  से इस केक  को कट करे।

    Please  welcome  Mr Atishaya Khurana.

    अतिशय  होस्ट  के पास  आकर  उससे माइक लेकर  कहता है-" मै तो कब से ही यहा खडा हू ,पर आपका ध्यान ही नही आया। चलिए  ,अब आपकी बात  मानते हुए  केक  कंटिग  की शुरुआत  की जाए।

    यह कहकर वह वहा पर मेहुल और  जय को भी बुला लेता है। उसके बाद  वह पहल और  शयश  को अपने पास  बुलाता है। पहल तो आ जाता है पर शयश  नही आता है।


    अतिशय  स्टेज से नीचे जाकर उसका हाथ पकड़कर उसे जबरदस्ती स्टेज पर  ले आता है।

    शयश-" सर ,ये क्या कर  रहे है, मै यहा क्या करुगा। ये आप लोगो की जगह है। मै यहा खडा होने लायक  नही हू। "

    यह कहकर वह  वहा से जाने लगा। उसकी बात सुनकर अतिशय उसका हाथ पकड़कर  उसे रोकते हुए  कहता है -" अगर तुम यहा खडे होने लायक नही तो यहा कोई और  भी खडा होने लायक  नही है। यह जगह तुम्हारी ही है ।"

    वह आगे कुछ  और  बोलता ,उससे पहले ही उसकी दादा और दादी बोल पडे-" अरे बेटा, अमीरी गरीबी कुछ  नही होता है। कभी भी अपने को कम नही समझना चाहिए। अगर तुम किसी जगह  पहुंच  गए  हो और तुमने वहा तक पहुचने मे कोई  गलत सहारा नही लिया तो वह तेरी ही जगह है।

    अति बच्चा,केक  कंटिग  करो। इस तरह  लोगो का बिना वजह  लोगो का समय बर्बाद  नही करना चाहिए। "

    अपनी दादा दादी की बात  मानकर  अतिशय  केक  कंटिग  करता है और  सबसे पहले अपने दादा और  दादी को केक  खिलाता है। फिर  अगला टुकडा सीधे शयश  के मूंह मे डालता है।

    तभी जय अतिशय  के कान मे बोलता है-" तूने तो कहा था कि आज तू सबके  सामने शयश  को प्रपोज  करेगा ,पर वह आज अपनी वाइफ के साथ  आया है ,अब तू क्या करेगा। अब अपने दिल की बात  उसे कैसे बताएगा।"

    मेहुल-" मै तो कहता हू कि आज  के लिए  यह आइडिया ड्राप कर दे। आज यह तू नही कर पाएगा।देखो अभी भी उसका सारा ध्यान  केवल  अपने वाइफ  पर ही है।"

    उन दोनो की बात  सुनकर वह  सीधे वहा पहुंच  जाता है जहा पर गिटार  रखा था। वह जाकर  सीधे उसे ट्यून कर गाने लगा....

    मैंने जब देखा था तुझको
    रात भी वो याद है मुझको
    तारे गिनते गिनते सो गया

    दिल मेरा धड़का था कसके
    कुछ कहा था तूने हँस के
    मैं उसी पल तेरा हो गया

    आसमानो पे जो खुदा है
    उससे मेरी यही दुआ है
    चांद ये हर रोज मैं देखूँ
    तेरे साथ में हैं


    वह शयश  का हाथ थाम  कर  बहुत प्यार  से उसकी आंखो मे देखते हुए  कहता है-" शयू, जिस दिन तुमसे रात मे मै टकराया था और  तुमने मुझे अपनी बाहो मे थाम कर  गिरने से बचाया था, उस दिन तुम मुझे बचा नही पाए। मै गिरने से तो बच गया पर तेरे प्यार  मे गिर गया। जब मेरी आंखे तेरी आंखो से टकरायी, उसी पल मै अपना सबकुछ  हार  गया। आय लव यू, मै  तुमसे बहुत  बहुत  बहुत  प्यार  करता हू।"

    वह उसकी आंखो मे ही देखते हुए  आगे का गाना गाने लगा.....

    आँख उठी मुहब्बत ने अंगड़ाई ली
    दिल का सौदा हुआ चांदनी रात में
    हो तेरी नजरें नें कुछ ऐसा जादु किया
    लुट गए हम तो पहली मुलकात मे

    आंख उठी …

    पाँव रखना न ज़मीन पर
    जान रुक जा तू घडी भर
    थोडे तारे तो बिछा दूँ
    मैं तेरे वास्ते

    अजमा ले मुझको यारा
    तू ज़रा सा कर ईशारा
    दिल जला के जगमगा दूँ
    मुख्य तेरे वास्ते

    मेरे जेसा इश्क में पागल है
    फ़िर मिले या ना मिले कल
    सोचन क्या हाथ ये दे दे
    मेरे हाथ हैं

    आँख उठी मुहब्बत ने अंगड़ाई ली
    दिल का सौदा हुआ चांदनी रात में
    हो तेरी नजरें नें कुछ ऐसा जादु किया
    लुट गए हम तो पहली मुलकात मे

    आंख उठी …

    हं ।।
    किस्से मोहब्बत के
    है जो किताबों में
    सब चाहता हूँ मैं
    संग तेरे दोहराना

    कितना जरुरी है
    अब मेरि खातिर तू
    मुशकिल है मुशकिल है
    लफ़्ज़ों में कह पाना

    आब तो ए आलम है
    तू जान मांगे तोह
    मैं शुकुन से दें दूँ सौगत में

    आँख उठी मुहब्बत ने अंगड़ाई ली
    दिल का सौदा हुआ चांदनी रात में
    हो तेरी नजरें नें कुछ ऐसा जादु किया
    लुट गए हम तो पहली मुलकात मे

    हं उठी …

    वही उसका इजहार ए मोहब्बत  सुनकर  शयश  बुत  बना खडा था। उसे होश तब आया जब लोगो ने तालिया  बजाने शुरु कर  दिया।

    अतिशय  शयश  के पास  आकर  सेडेक्टिव  आवाज मे कहता है-" शयू ,क्या तुम्हे मेरी बातो का यकीन नही हो रहा। ये बात  जो भी मैने कहा सब कुछ  सच है। बोलो तुम्हारा जवाब  क्या है....."



    ...........



    वर्तमान समय

    सूर्य  वहा से निकल  सीधे अपने कालेज  जाता है। वह अभी बी बी ए का सेंकेड  इयर स्टुडेंट  था। वह जैसे ही कालेज  पहुचता है तो वह देखता है कि उसके क्लास  शुरु होने मे केवल तीन  मिनट  बचे है। वह हडबडाते हुए  सोचता है-" ओय  सूर्य  के बच्चे, आज सुबह  सुबह  किसका मूंह देख  कर  उठा है जो यह सब तेरे साथ  हो रहा है। पर जहा तक मुझे याद  है कि आज भी रोज की तरह  अपना ही चेहरा देखा था।

    शीट, मै जानता हू कि मेरा चेहरा तो हैंडसम  है तो उसे देख कर  बैड लक नही आ सकता। इसका कारण  कुछ  और  होगा। तू बेकार  मे अपने इस हैंडसम  फेस को दोष  नही दे सकता।"

    यही सब बकवास  करता हुआ  वह बिना देखे दौड रहा था ,ऐसे ही दौडते हुए  वह एक आदमी से टकरा  गया, वह गिरता उसके पहले ही उस आदमी ने उसे पकड़कर  गिरने से बचा लिया।

    वही सूर्य  गिरने के डर से अपनी आंखे बंद कर  लिया था और  जब उसे एहसास  होता है कि वह नही गिरा तो वह अपनी आंखे खोल  कर सामने वाले शक्स को देखता है और  उस शक्स  को देख कर  वह  अपना मूंह बना लेता है।

    वह शक्स  उसे ठीक  से खडा कर  उसके कान मे कहता है-" सूर्य  तुम  मुझसे टकराने का बहाना ढूंढते  रहते हो ,जो बार बार  आकर  टकरा जाते हो। मै जानता हू कि तुम  मुझे पसंद और  प्यार करते हो। "

    सूर्य-" प्रोफेसर,  एक बार  फिर  से साॅरी, मै आपसे क्या, दुनिया मे किसी से भी टकरा सकता हू। मैने इसमे पी एच  डी कर रखी है।मै आपको क्या किसी से भी प्यार  नही कर सकता। ऐसे भी प्यार व्यार  कुछ  नही होता। यह केवल  एक धोखा होता है। मै धोखा नही खाना चाहता।"

    यह कहकर वह  वहा से निकल  गया ।वही दूसरा लडका उसे तब तक  देखता रह गया जब तक वह उसकी आंखो से ओझल नही हो गया।

    वही सूर्य  सीधे अपने क्लास  मे अपनी जगह पर बैठ कर  कहता है-" ये पता होता कि आज प्रोफेसर  नही आने वाला है तो मै इतना हडबडा कर नही आता और  उस इडियट  प्रोफेसर  से नही टकराता। "

    तभी उसके पास  उसका दोस्त  दीपक उसके आता है। वह उसका मुड खराब  देख कर  कहता है-" क्या हुआ,  आज फिर से प्रोफेसर  से टकरा गया क्या, पता नही तुम  पूरे कालेज  मे सिर्फ  उसी से क्यो टकराते हो।"


    सूर्य-" मै तो टकराने रिकार्ड  बना सकता हू। मेरा ऐसा कोई  दिन नही बीतता ,जब मै किसी से ना टकराऊ। उसके लिए  परेशान  नही हू। मुझे यहा से सीधे उस खडुस  द ग्रेट  अवनीश  मेहरा का असिस्टेंट  बनना है। वह मेरी मजबूरी का फायदा उठाना चाहता है। बस एक बार  मै उसकी शर्त  पूरा कर  दू तो फिर  उसे बताउगा  कि मै क्या चीज हू।"


    दीपक-" तू तो महान है, हर बार  बडे बडे पंगे ही लेता है। तू ऐसे काम ही क्यो करता है कि उसके बाद रिग्रेट  करता है। अब टेंशन  छोड कर  अपना काम  करो।"

    कालेज  खत्म  होने के बाद  सूर्य  अवनीश  के आफिस  पहुंच  जाता है,वह अवनीश  के केबिन  का गेट  खोल कर  जैसे ही अंदर जाता है,सामने का नजारा देख कर  वह  शाॅक  रह गया......


    अगले भाग  मे जारी.......


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    Take care bye

  • 12. Billionaire 's obsessed love - Chapter 12

    Words: 2099

    Estimated Reading Time: 13 min

    अब आगे:-








    अतिशय  की बात सुनकर  शयश  गुस्से से कहता है-" मि खुराना मैने कभी नही सोचा था कि आपके मन मे मुझे लेकर  ऐसे फिलींग  है। मै मर जाउगा पर आपसे कभी प्यार  नही करुगा।"

    फिर  वह जाकर  पारुल  का हाथ पकड़कर  उसे अपने साथ  लाकर  स्टेज  पर  अतिशय  के सामने खडा कर  देता है।पारुल  जो अतिशय  का कंफेशन  सुनकर  शाॅक  हो गई  थी ,वह इस तरह खींचे जाने से होश मे आ गई।


    वह अपने सामने खडे शक्स अतिशय  को देख रही थी ,जिसकी आंखे नम थी। वह हारा हुआ  लग रहा था।साथ ही साथ  उसके चेहरे पर जलन भी था।

    शयश  पारुल  का हाथ पकड  अतिशय  के सामने खडा होकर  कहता है - " मि खुराना, यह मेरी वाइफ  पारुल  है जिससे मेरी शादी के सात साल हो गए  है। हम दोनो एक साथ  बहुत  खुश  है। जब यह मेरे साथ  होती है तो मुझे लाइफ बहुत  खुबसूरत  लगती है। इतना ही नही, हमारे प्यार  की निशानी हमारे दो बच्चे भी है।

    हमारी एक प्यारी सी फैमिली है। हम लोग  एक साथ  बहुत  खुश  है। आप तो इस बात  को अच्छे से जानते होना कि मै शादीशुदा हू ,फिर भी मुझसे प्यार  क्यो किया।"

    अतिशय-" मैने जब पहली बार  तुम्हे देखा ना ,उसी समय मै अपना दिल  हार गया था। इसमे मेरी क्या गलती है। मै तुमसे प्यार  करता हू, प्यार  करना गलत  नही है।

    मै जब तुमसे टकराया  ना तो मेरा दिल  जोरो से धडकने  लगा था। मेरी धड़कन तेज हो गई  थी। मै तेरी आंखो मे डूब गया था, उस समय  मै यह नही जानता था कि तुम मैरिड  हो।"

    शयश-" अब तो जान गए  हो ना, फिर  क्यो मुझे प्रपोज  किया। तुम पागल हो गए  हो,मेरे ख्याल  से तुम्हे डाक्टर  की जरूरत  है। पता नही तुमने यह कैसे सोच  लिया कि मै तुम्हारे प्यार  को एक्सेप्ट  करुगा।तुम   ना मेरी बात  मानकर  एक psychiatrist से अपना इलाज  करवाओ।"

    शयश की बात सुनकर  अतिशय  शांत  हो गया था। वह उसे कुछ  नही बोला। वही शयश  की बात सुनकर  मेहुल  गुस्से से कहता है- " तुम  जानते भी हो कि तुम  किससे बात  कर रहे हो। वह अतिशय  खुराना है। वह इंडिया का टाप बिजनेस मैन  है और  तुम  उसे पागल  कह रहे हो। अभी उसने अपने दिमाग  से हारी हुई  बाजी को जीत मे बदल दिया।

    आगे से अपना मूंह खोलने से पहले सोच  समझ लेना।वह मेरा दोस्त  तुम्हे बहुत  चाहता है  ,अगर उसकी चाहत  को स्वीकार  नही कर सकते तो ठीक  है, पर उसका मजाक  नही बना सकते।"


    अतिशय-" मै ठीक  हू। तुम  इतना गुस्सा मत करो। इसने मुझे पागल  कहा है ना, तो ठीक  है अब ये मेरा पागलपन और  जुनून  देखगा। यह मेरा वादा है।तू यही सोचेगा कि तू पहले ही ठीक  था। यह जुनून  तुझे पाकर ही दम लेगा।

    अरे ये क्या, सब लोग  शाॅक  मे खडे हो। आप सब खुराना की पार्टी मे खडे है। आप लोग  आराम  से इंजाॅय  किजिए। मेरी यह हम्बल  रिक्वेस्ट  है कि सब लोग  खाना खाकर ही जाइए। "


    शयश  उसकी बात  को अनसुना कर  सीधे पारुल  का हाथ पकड़कर  वहा से निकल  गया। वह अभी भी बहुत  गुस्से मे था।



    कुछ देर बाद शयश  पारुल  के साथ  घर पहुंचता है। वह सीधे सोफे पर  धम्म  से बैठ  जाता है। वह अपना सिर  अपने हाथो से दबाने लगा।

    तभी उसकी माम रुपा उसके लिए  चाय  लेकर  आती है।वह उसे परेशान  देख कर  बहुत  प्यार  से पूछती है

    रुपा-" शयश,  तुम तो पार्टी मे गए थे ना। वहा ऐसा क्या हो गया जो इतने गुस्से मे हो। "

    शयश  अपनी माम  को परेशान  नही करना चाहता था ,इसलिए वह  बात बदलते हुए जवाब  देता है -" माम आप  चिंता मत  किजिए,  वो थोडा सा सिर दर्द  हो रहा है। चाय पी लूंगा तो सब ठीक  हो जाएगा।"


    वही दूसरी ओर  अतिशय  भी पार्टी से घर लौट कर  आता है। वह अपने दादा दादी को रोज की तरह  दूध देता है।

    प्रीतम और  प्रीति दोनो ही अतिशय  को लेकर  बहुत  अधिक  चिंता मे थे। पर वह जब उसे रोज का काम करते देखते है तो उन्हे लगता है कि वह  अब ठीक  है।

    अतिशय  अपने दादा दादी का हाथ  पैर दबा रहा था ,जब वह देखता है कि दोनो गहरी नींद  मे सो गए तो वह अपने कमरे मे जाता है और  डोर लाॅक कर  वही फर्श पर बैठ कर  जोर जोर से रोने लगा।

    " क्यो भगवान,  मेरी लाइफ  मे किसी का प्यार  नही लिखा। पहले जब मै सिर्फ  दो साल  का था, तभी मुझसे मेरे माम डैड  को छीन लिया। दादा जी और दादी ने मुझे बहुत  प्यार दिया,पर अगर तुम मुझसे मेरे माम डैड  अलग नही करते तो उनके साथ बोनस  मे मुझे दादा दादी का प्यार  मिलता।पर पता नही क्यो, आपने मेरे हिस्से मे सबका प्यार  थोडा थोडा ही लिखा है।देखिए  आज मुझे किसी से सच्चा प्यार  भी हुआ  तो वो शक्स  किसी और को प्यार  करता है। उसे मै एक पागल नजर आता हू। वह तो यह भी नही समझता कि प्यार  आदमी सोच समझ कर  नही करता ,वो तो एक एहसास  है जो अपने आप  पैदा हो जाता है।

    मै थोडे ना ऐसा चाहता था कि मुझे एक ऐसे इंसान  से प्यार  हो जाए  जो किसी और से प्यार  करता हो। पर कोई  बात  नही, इस बार  मे मेहुल और  जय  की बात  मानूगा। वो सिर्फ  और  सिर्फ  मेरा होगा। प्यार  हमेशा छोडने के लिए  नही होता ,कभी कभी उसे हासिल  करना भी होता है। मै उसे अपने प्यार  का शिद्दत  से एहसास  दिलाउगा। उसे यह बता कर  रहूगा कि अतिशय  खुराना कितने जुनून से उसे चाहता है। मै उसे अपना बनाना कर रहूगा।"

    उसके बाद  वह  रोना बंद कर  चुप चाप  फ्रेश होकर  आता है । अब उसके चेहरा पर आंसू नही था। वह अब शांत हो गया था। वह अपने बेड पर  लेट कर  कुछ  सोचने लगा और  कुछ  देर बाद  वह  सो गया।

    .....................


    वर्तमान समय


    सूर्य  कालेज पूरा करके सीधे ही टैक्सी लेकर  अवनीश  के आफिस  जाता है। उसे पता था कि उसके भाई और  अंकल के लिए  वह बार कितना जरुरी है। वह नही चाहता था कि उसकी बेवकूफी की वजह  से उसके अंकल  की सालो की मेहनत  बर्बाद  हो जाए।

    वह अपने आप  से बात  करते हुए  आफिस  के अंदर जाने लगा।" देख सूर्य, ये बात  सही है कि वो अवनीश  खुराना बेहद  ही खडुस और  जिद्दी है।एक नंबर  का अडियल  भी है। मुझे तो उसकी शक्ल  से चिढ है। अरे उसकी शक्ल  से तुझे क्या मतलब  है ,कौन सा तुझे उसे अपना बाॅय फ्रैंड बनाना है।  तू तो ऐसे बात  कर रहा है जैसे तू उससे शादी करने जा रहा हो।

    अरे तू सिर्फ  उसके साथ  काम  करने जा रहा है। तुझे सिर्फ  उसका असिस्टेंट  बनना है।"

    यह सब बात सोच कर  वह  लिफ्ट  लेकर  सीधा अवनीश के केबिन  मे चला गया। उसने जैसे ही केबिन  के अंदर  देखा ,उसकी आंखे फटी रह गई।

    केबिन  के अंदर  अवनीश अपनी  कुर्सी पर  बैठा था और  वही एक दूसरा लडका उसकी गोद  मे बैठा था। उस लडका का हाथ अवनीश  की गर्दन  मे लिपटा था। वही दोनो का चेहरा एक दूसरे के इतने करीब  था कि लग रहा था कि वह दोनो एक दूसरे को किस  करने वाले है।

    यह देखकर सूर्य  शाॅक  रह गया और  फिर  हड़बड़ाहट  मे उसके मूंह  से निकल  गया -" आय एम  साॅरी, मुझे नही पता था कि आप इतने बडे ठरकी हो कि अपने बाॅय  फ्रैंड के साथ  आफिस  मे ही रोमांस  कर  रहे हो। सर, रोमांस  करने से पहले डोर तो लाॅक  कर  लेते। बिना मतलब  का डिस्टर्बेस  हो गया। मै केबिन  से बाहर  जा रहा हू, आप दोनो कैरी ऑन किजिए। "

    इतना कह कर  वह  बाहर जाने लगा तभी उसे कुछ  गिरने की आवाज  आई।  उस आवाज  को सुनकर  वह पीछे मुंडा तो देखा  तो वह देखता है कि अवनीश  की गोद  मे बैठा लडका जमीन  पर  गिरा पडा है। यह देखकर वह  जल्दी से दूसरे लडके के पास जाकर  उसे उठाता है।


    फिर वह  अवनीश  को कहता है -" क्या सर, आपने यह क्या किया। कम से कम उसे सही से होल्ड  तो कर लेते, उसे नीचे गिरा दिया। सर ,आप  इतना प्यार  व्यार  करने के लिए  बोलते रहते है और  खुद  अपने बाॅय फ्रैंड  का सही से ख्याल  नही रख सकते है।"

    उसकी बात  सुनकर अवनीश  कहता है-" ऐ हैल्लो, अपने दिमाग  के घोडो को लगाम दो, यह कोई  मेरा बाॅय फ्रैंड  नही है। यह सिर्फ....

    उसके आगे वह कुछ  बोलता ,उससे पहले ही सूर्य  बोल पडा-" मै सही ही समझा था। आप बहुत  बडे ठरकी  हो। अरे सर यह सब शौक रात के अंधेरे मे लोग पूरा करते है। आप से रात तक का सब्र भी नही हुआ।  सर अगली बार  से यह सब रात  को ही करना, वर्ना मेरी तरह कोई और  आकर  आपको डिस्टर्ब  कर  देगा।"

    उसकी बात सुनकर  वह दूसरा लडका अपने मन मे कहता है-" इसके बोलने का मतलब  क्या है। इसे मै काॅल बाॅय  नजर आ रहा हू। इसकी तो ऐसी की तैसी करता हू।"

    वही अवनीश  जब उसकी बातो का मतलब  समझता है तो वह गुस्से से चिल्लाता है-" shut up, keep your mouth shut.  You idiot, you  have  no sense. You  speak so rubbish. "

    उसके जोर से चिल्लाने से सूर्य  घबराकर  शांत हो जाता है। उसके पूरे माथे पर  पसीना आने लगा था।वह लगातार  अवनीश  की ओर देख  रहा था जो गुस्से से धीरे धीरे उसकी तरफ  आ रहा था। तभी दूसरा लडका उसके पास आकर  उसके कंधे पर अपना हाथ  रखकर  कहती है-" बच्चे, तुमने सबकुछ  गलत समझा है। मै अवनीश  का बेस्ट फ्रेंड  पीयूष  बत्रा हू। आज काफी साल बाद  अमेरिका से मुंबई  अपने दोस्त  से मिलने आया था। कार्पेट मे पैर फसने के कारण  मै सीधे जाकर  उसकी गोद  मे गिर  गया और  अपने आप  को बचाने के लिए उसकी गर्दन  मे अपने हाथ  डालकर खुद  को गिरने से रोका और  उसी समय  तुम  आ गए  और  यह सब सोच  लिया।"


    उसकी बात सुनकर  सूर्य  अपना सिर  झुकाकर  उन दोनो को साॅरी बोलता है।

    सूर्य-" सर, आप दोनो जिस पोजिशन  पर थे तो मुझे लगा कि आप  लोग  एक दूसरे को किस कर  रहे है।ऐसे भी सेलिब्रिटी के बाॅय फ्रैंड  और  गर्लफ्रेंड होते ही है। वंस अगेन ,आय एम रियली  वैरी साॅरी।"

    पीयूष-" हे क्यूटी  पाई,तुम्हारा नाम  क्या है और  तुम  यहा क्या कर  रहे हो"

    उसकी बात सुनकर  सूर्य  शर्माते हुए  कहता है-" जी मै सूर्य  हू और आज से ही सर के असिस्टेंट  के तौर पर ज्वाइन  किया है।"

    उसे पीयूष  से शर्माता देख कर  अवनीश गुस्से से कहता है- थोडा काम  भी कर लो, बकवास  तो बहुत  कर लिया तुमने। मैने तुम्हे काम पर रखा है।तो पहले उसे ही करो।

    सबसे पहले धैर्य  को बुलाकर  उससे सारा काम  समझ लो। तुम  उसके असिस्टेंट  हो। क्योकि सुबह  से अब तक  वही मेरा असिस्टेंट  रहेगा। फिर  शाम से यह सब तुम्हे ही संभालना है।

    सबसे पहले मेरे लिए  एक कप काॅफी बनाकर लाओ। फिर  कबर्ड  से कपडे निकाल  देना। आगे से अपना मूंह  कम चलाना। अब यहा से जाओ।"

    सूर्य  उसकी बात मानकर  बाहर जाने लगा तभी वह किसी से टकराकर  गिरने  लगा  तो उस शक्स  ने उसे अपनी बांहो मे भर लिया। यह देखकर  अवनीश  का मुट्ठी बंध गया।वही सूर्य  जब  उस शक्स  को देखता है तो उसका मूंह बन गया। वो बोल पडा -" ओ गाॅड, संसार  मे इतने लोग है। उनमे से कई  बहुत  हैंडसम  है। आपको उनमे से कोई  नही मिला जिससे मै टकरा जाऊ ।अरे इसी केबिन  मे पीयूष  सर भी है,उन्ही से टक्कर  लगा देते पर नही,आप तो बार बार  इसी खडुस  प्रोफेसर  से टकरा देते है।

    सर, मै गिरने से बच गया। दुबारा देख कर  ही चलूंगा। अब तो अपने हाथो का पकड ढीला किजिए,  मुझे अपना काम  करने भी जाना है।"

    उसकी बात सुनकर  वह अपनी पकड  ढीली करता है और  सूर्य  उसके पास  से ऐसे भागता है जैसे उसके पीछे शेर पडा हो।

    पीयूष  उसकी हरकत  देख कर  हसते हुए  कहता है-" यार अवि, ये बहुत  प्यारा है।he is soooo cute like a baby panda. I really  like  him. अब तो सचमुच  ही इंडिया अचानक  ही बहुत  सुंदर  लगने लगा है। मै तो अब इस लडके पर लाइन मारने वाला हू। भगवान  करे कि वह सिंगल हो,अगर ऐसा हुआ तो मै उसे अपना बाॅय फ्रैंड  बना लूंगा।"

    उसका इतना कहना था कि अवनीश  और वह लडका उसे घूर कर  देखने लगे। यह देखकर  पीयूष  को अपने आसपास  का वातावरण  ठंडा होता लग रहा था,वह बोल पडा-" तुम  दोनो मुझे क्यो घूर रहे हो, ऐसा क्या हो गया है।"

    वह दोनो एक साथ  बोले-" उसका ख्याल  भी मन मे मत लाओ। वह मेरा बाॅय फ्रैंड  है।"

    यह सुनकर पीयूष  का दिमाग  चकरा गया और  वह दोनो एक दूसरे को घूर कर देखने लगे।

    अगले भाग  मे जारी........


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    Take care bye

  • 13. Billionaire 's obsessed love - Chapter 13

    Words: 2164

    Estimated Reading Time: 13 min

    अब आगे:-







    अतिशय  अगला दिन   पी एस इंटरनेशनल  के आफिस  पहुचता है । वह देखता है कि शयश  अभी तक  आफिस  नही आया है।यह देखकर  उसके चेहरे पर स्माइल  आ  गई  थी। वह कहता है-" शयू ,मुझसे पीछा छुडाने की कोशिश कर  रहे हो। पर मै भी अतिशय  खुराना हू, इतनी आसानी से तुम  मुझसे दूर नही जा पाओगे।

    तेरा पीछा ना छोडूगा माही वे

    अब तो लगता है कि तेरे बारे मे सब पता करना होगा।"

    यह सोच कर  वह  प्यून को बुलाता है।

    अतिशय-" शयश  मेहरा आफिस  क्यो नही आए है, उन्होने कोई  कारण  बताया है या नही"

    प्यून-" यस सर,उनका मैसेज आया था।उनके बेटे को फीवर  हो गया है। "

    अतिशय -" ठीक  है। अब तुम  जाओ। "

    अतिशय-" शयश  मेरी जान, ये तुमने सही नही किया। मेरे बेटे की तबीयत  खराब  है और  तुमने मुझे ही नही बताया। खैर जाने दो, माफ किया। आखिर  तुम परेशान  होगे। अब जब मेरा बच्चा बीमार  है तो मुझे उसकी माम  होने के नाते उसके पास  जाना ही होगा।
    मै ऐसी हालत  मे अपने बच्चे को अकेला कैसे छोड  सकता हू।"

    वह सीधे अपने कार की की उठा कर आफिस  से निकल  गया। वह पूरी स्पीड  मे कार को चलाकर  सीधे  उस लोकेशन  मे पहुंच  जाता है जहा शयश  रहता था। वहा मौजूद  लोग  उसे घूर  घूर कर  देख रहे थे। वह उन सब को इग्नोर कर  सीधे शयश  के घर के पास  पहुंच कर  डोर बेल  बजा देता है।

    डोर बेल की आवाज सुनकर  पारुल  आकर  गेट खोलती है।  वह अपने सामने अतिशय  को देख कर  शाॅक रह जाती है। उसी समय उसके पीछे से शयश  आता है और  पूछता है-" परी,  कौन है। तुम  दरवाजा पर ही क्यो खडी हो, अगर उस शक्स  को अंदर लेना है तो लो और डोर  लाॅक कर  दो। सारे लोग  आंखे गडाकर  बैठे होगे। यहा लोगो को बस दूसरे के घरो मे तांका झांकी करने मे मन लगता है।"

    पारुल  दरवाजा के पास  से हट जाती है और  अतिशय  को अंदर  आने कहती है। अतिशय  उसकी बात  पर  मुस्कुराकर  अंदर  आता है। अतिशय  को अपने सामने देख कर  शयश  शाॅक  रह  गया।

    शयश  अभी केवल  हाफ पैंट और vest मे था ,जिसे देख कर  अतिशय  सोफे पर से उठाकर  एक टीशर्ट  उसके उपर  फेंकता हुआ  कहता है कि " जान, इसे पहन लो,मै यह नही चाहता है कि तुम्हे इस तरह  मेरे अलावा कोई और  भी देखे। यह बात  कहते हुए  वह पारुल  को देख रहा था।

    पारुल  का भी पूरा ध्यान  केवल और केवल अतिशय  पर ही था। वो भी देख  रही थी कि आखिर  अतिशय  क्या करना चाह  रहा है।

    उसी समय  रुपा जी और शुंभाकर  भी आए। वह आकर  शयश  से पूछते है-" शयश  कौन आया है, तुम जवाब  क्यो नही दे रहे हो।"

    तभी उन दोनो की नजर अतिशय  पर पडी। उसे अपने यहा देख कर वह  दोनो बहुत खुश  हुए।  वह जल्दी से उसे सोफे पर  बैठाते हुए  कहते है-" मि खुराना, आप यहा , हम तो सपने मे भी नही सोच  सकते थे कि आप से कभी मिलना भी होगा। "  " मै बता नही सकती  कि मै आपको यहा देख कर  कितनी खुश हू " यह बात  रुपा ने कही।

    उन दोनो की बात सुनकर  अतिशय  कहता है-" माम  डैड  ,डोंट  वरी। बहुत  जल्द  ही मै हमेशा के लिए  आपके पास आकर  रहूंगा ।

    मै आपके बेटे से बहुत प्यार  करता हू। मै हमेशा के लिए  उसका बनना चाहता हू।"

    उसकी बात  ने वहा पर बम ही गिरा दिया था। वह लोग  यही समझने की कोशिश कर  रहे थे कि अतिशय  क्या बोल  रहा है।

    रुपा-" मि खुराना, आप एक लडका है और  मेरा बेटा भी एक लडका है। एक लडका दूसरे लडके से कैसे शादी कर  सकता है।


    एक पल के लिए  मै इस बात  को मान लेती हू कि दो लडके आपस  मे प्यार और  शादी कर  सकते है। पर मेरा बेटा शादी शुदा है और  वह दो बच्चे का बाप है। आप उससे शादी करने की बात कैसे सोच  सकते है।

    आप मेरी बात  मान कर  उसका पीछा छोड कर  किसी और  को खोज  लिजिए। ये शादी तो इस जन्म  मे होने से रही।" यह कहकर  वह चुप  हो गई। 

    उसकी बात सुनकर  अतिशय  हल्की स्माइल  अपने चेहरे पर  लाकर  कहता है-" मै आपके बेटे को बेहद  प्यार  करता हू। मै उससे पहली नजर का प्यार  करने लगा हू। मेरी लाइफ  मे उसकी जगह  कोई  नही ले सकता। मुझे पर इस बात  का कोई असर  नही पडेगा कि वह मैरिड  है। क्योकि प्यार  करना मेरे वश मे नही है। मेरा दिल  सिर्फ  और सिर्फ  शयू का साथ चाहता है और  उसका प्यार  चाहता है। मै उसे अपनी जान  से भी ज्यादा चाहता हू। मेरे लिए  शयू का साथ  दुनिया की किसी भी दौलत  से बढ़कर  है।"

    उसकी बात सुनकर  शयश  उसके पास आकर  एक जोरदार थप्पड  उसे खींच कर  मारता है और  कहता है-" मै कभी तेरा नही हो सकता हू, इसलिए  मेरा पीछा करना छोड दो। बिना मतलब का बकवास कर  सबको परेशान  कर  दिया है। अब तुम  यहा से जाओ,  कल मेरा resignation letter मिल जाएगा।" यह कहकर वह  उसका हाथ पकड़कर उसे वहा से निकाल  देता है।


    अतिशय  शयश  के घर के दरवाजे पर  खडा होकर  कहता है-" शयू ,तुम  चाहो या ना चाहो, अब तुम्हे मेरा बनना होगा। तुम  अब इस अतिशय खुराना के जुनून  बन गए  हो। अतिशय  खुराना अपनी जुनून  को शिद्दत  से निभाना जानता है। आज तक मुझे थप्पड  मारने का हिम्मत  किसी मे नही थी, पर तुमने वो भी कर दिया। चलो ,कोई बात  नही तुम  मेरे होने वाले हसबैंड  हो तो मेरे पर तेरा हक है। ओके बाय, बस एक बात  का दुख  है कि मै आज अपने बच्चो  को नही देख पाया। यह कहकर वह  वहा से निकल  गया।

    वही दूसरी ओर  शयश  अपना सिर पकड़कर  बैठ गया। वह समझ गया था कि उसे गुस्से मे अतिशय  पर हाथ  नही उठाना चाहिए। पर अब वो कुछ  नही कर  सकता था। वह बस अतिशय  क्या करने वाला है ,यही सोच  रहा था।...


    ......................



    वर्तमान समय

    मुंबई

    अवनीश  का केबिन


    वही पीयूष  उन दोनो के मूंह  से यह सुनकर  शाॅक  रह गया कि सूर्य  उन दोनो का बॉयफ्रेंड  है।

    पीयूष  कुछ देर  उन दोनो को देखता है और  फिर  जोर  जोर  से हसने लगा।उसे हसता देखकर  वह दोनो उसे घूर कर देख  रहे थे।

    पीयूष-" तुम  दोनो मुझे क्यो घूर  रहे हो। मतलब  हद है, बचपन  मे भी तुम  दोनो को एक ही सामान पसंद  आता था और  आज तुम  दोनो ने एक ही लडके को पसंद कर  लिया।

    सीरीयसली  तुम दोनो भाई  होने से ज्यादा rival लगते हो। हर बात पर  ही तुम  दोनो को एक दूसरे के खिलाफ  ही खडा होना होता ही है।"


    उसकी बात सुनकर अवनीश  बोल  पडा-" वो मेरा सगा  भाई  नही है। वह  मेरी स्टेप माम  का बेटा है। वह मेरा सौतेला भाई  है।"

    तभी वहा मौजूद  वह दूसरा शक्स  भी बोल पडा -" वो भगवान  को मेरी खुशी रास नही आई और  इस अवि को मेरी जिंदगी मे भेज  दिया। खडुस  कही का।"

    तभी पीयूष  बोल पडा-" अर्श,  चुप कर यार  । तुम दोनो हमेशा टाॅम और  जेरी  की  तरह लडते रहते हो। अब तो बडे हो जाओ "

    उसकी बात सुनकर  वह दोनो ही एक साथ  बोल  पडे- " हम दोनो बडे हो चुके है। बच्चा मत कहा करो। तेरी यही बात है जो हमे बिल्कुल पसंद  नही है।"


    पीयूष-" चलो कोई  तो बात है जो जिस पर  तुम  दोनो एग्री किए  हुए  हो।"



    अर्श-" अवि, मेरे सूर्य  से दूर रहो। वो सिर्फ  मेरा है। मै उसे बहुत  पसंद  करता हू।"


    अवनीश-" तू क्या कही का राजा है जो मै तेरी बात  मानूंगा, वह मुझे पसंद  है, वह मेरे दिलो-दिमाग  पर  छा चुका है, वह सिर्फ और सिर्फ  मेरा है"

    वह दोनो एक दूसरे का काॅलर पकड़कर मारने जा रहे थे ,उसी समय  सूर्य  आ गया। उसे देखकर  वह दोनो शांत  हो गए।  वह तीनो को चाय दे कर  कहता है-" सर,  अब काम की बात  कर ले, यह कहकर वह  उसे पूरा शेड्यूल  बताने लगा।"

    अर्श-" तुम  यहा क्यो काम कर रहे हो, मेरे होते तुम्हे काम करने की जरूरत  नही है। तुम  यह जाॅब छोड  दो"

    उसकी बात सुनकर सूर्य  चिढते हुए  कहता है-" आप यह क्या बकवास कर  रहे है। वह आप मेरे प्रोफेसर  है तो आपकी बकवास  बर्दाश्त  कर  लेता हू। मै अपनी मर्जी की मालिक हू।मुझे  जो करना होगा वो मै करुगा। ज्यादा मेरा बाॅय फ्रैंड  बनने की जरूरत  नही है। आप मेरे बाॅयफ्रैंड नही हो। दिमाग खराबकर रख दिया है। "


    उसके बाद वह  सीधे अवनीश  के पास  खडा होकर  बोलता है-" सर, आपको जानने के लिए  कोई और  नही मिला जो यह यहा है। आप ना इस इंसान  से कम मिला करो। यह अच्छे भले इंसान  को पागल बना सकता है "

    उसकी बात सुनकर  अर्श और  पीयूष  की आंखे हैरानी से बडी हो गई  और  वही अवनीश  के चेहरे पर  स्माइल आ  गई।  पर आगे का लाइन सुनकर  तीनो ही सदमे मे पहुंच गए  थे।

    सूर्य-" ये इंसान  किसी के भी दिमाग  की नसे हिला सकता है। पर आप का तो खुद का दिमाग  ही तो थोडा खराब  ही है तो आप भी बहुत  कम समय मे पागल हो जाएगे। अगर आप पागल  हो गए  तो मुझे एक पागल का असिस्टेंट  बनना पडेगा। मै किसी पागल का असिस्टेंट  कैसे बन सकता हू, मुझे पागलो से बहुत  डर लगता है। मैने सुना है कि पागल के साथ  रहते रहते लोग खुद  भी पागल बन जाते है। मै पागल नही बनना चाहता, अभी मेरी उम्र  ही क्या हुआ है ।मुझे अपनी लाइफ  मे बहुत कुछ  देखना है।इसलिए  मेरे लिए  आप इस इंसान  से दूर रहा किजिए। "


    पीयूष  आंखे फाड़कर अपने सामने खडे उस क्यूट  से लडके  को देख रहा था जिसने दो मिनट  मे ही उसके सामने खडे दोनो डेविल  की खडे खडे ही बेइज्जती कर दी थी।

    वही अर्श और  अवनीश  भी घूर कर  सूर्य  को देख  रहे थे जो उन दोनो की इतनी आराम  से बेइज्जत कर  भी बिना डरे उनके सामने खडा था।

    सूर्य-" अरे सर, आप दोनो मुझे ऐसे क्या देख  रहे है। मै जानता हू कि मै बहुत  हैंडसम और  क्यूट  हू, पर इस तरह  मत देखिए  वर्ना आपको मुझसे प्यार  हो जाएगा। मेरे जैसे हैंडसम  लडके को नजर लगाओगे  तो भगवान  माफ नही करेगा। आपको पता है मै बचपन  से ही बहुत  क्यूट  हू।"

    उसका बकवास सुनकर  अर्श और  अवनीश  दोनो एक साथ  कहते है-" गेट  आउट,  तुम यहा से जाओ  ।"

    सूर्य-" ठीक  है सर, पर कितनी देर बाद  आऊ, वो आपके साथ  मुझे मीटिंग  मे जाना होगा ना। मै आपका असिस्टेंट  हू तो यह मेरी ड्यूटी बनती है कि मै आपके साथ  ही रहू।"

    अवनीश अपने गुस्से को किसी तरह  शांत  कर कहता है-" मेरा दिमाग खराब  हो गया है। तुम  धैर्य  को यहा भेज दो। आज कोई  परफार्मेस  या मीटिंग  नही होगी।"

    सूर्य  अर्श  को देखते हुए  कहता है-" देखा सर,मैने बोला था ना कि इस प्रोफेसर  से दूर रहो पर आप अभी भी उसके साथ  खडे हो। देखा आप पर असर होना शुरु हो गया।अब जल्दी से उससे अलग हो जाओ, वर्ना पूरा पागल  हो जाओगे।"

    उसकी बात सुनकर अवनीश  चिढते हुए  कहता है-" अगर तुम  अभी के अभी मेरे आफिस  से ही बाहर  नही गए  तो मै तेरे भाई  को बर्बाद कर  दूंगा। "

    उसकी बात सुनकर  सूर्य  वहा से तुरंत  ही बाहर की ओर भागते हुए  कहता  है-" सर , मै जा रहा हू, प्लीज  ऐसा मत करना। अगर आपने ऐसा किया तो भाई  मुझे कच्चा चबा जाएगा। मै इतने कम ऐज मे मरना नही चाहता हू। मै कल कालेज  खत्म कर  आ जाऊगा। आप प्लीज  परेशान  मत होना। मै  अपने काम मे बहुत  ही  अधिक  punctual हू।"

    उसके जाने के बाद  अवनीश  अपना सिर पकड़कर बैठ  गया। उसे इस तरह देख  कर  पीयूष  कहता है-" congratulations  yaar,  both of you are  awesome. I  really appreciate you. बिल्कुल  अपनी टक्कर  का लडका खोजा है तुम दोनो ने अपने लिए।  जब से आया है सिर्फ  तुम दोनो का बैंड बजाता रहा और  उसने तुम्हे मजबूर  कर दिया कि तुम  दोनो उसे पंद्रह मिनट  मे ही यहा से निकाल  दो।
    अब तुम यहा अपना सिर पकड़कर  बैठै  हो और यह अर्श  जो डेविल  बनता फिरता है वह सिर्फ  गुस्से मे पेपर वेट  घुमा रहा है। मानना पडेगा उस लडके को, दो दो डेविल  से उलझ गया और  तो और  उन्हे उल्लू बना गया।"

    यह कहकर वह  फिर  से हसने लगा। वही सूर्य  आफिस  से बाहर  निकलकर  टैक्सी का वेट कर  रहा था तभी उसके पास  दीपक का फोन आता है।

    दीपक-" क्या सर, कैसा है। उस अवनीश  मेहरा ने आज  तो तेरी बहुत  बैंड बजायी  होगी। अगर काम  का प्रेशर  ज्यादा है तो फोन  रख  दे।"

    सूर्य-" मुझसे जबरदस्ती काम  सिर्फ  मेरा भाई  करवा सकता है और  कोई  नही। मै अभी आफिस  से बाहर निकलकर  टैक्सी का वेट कर रहा हू। उसने खुद  मुझे जाने के लिए  कह दिया। बडा आया  था सूर्य  ठाकुर  से पंगा लेने। आज का तो सबक सीखा  दिया, कल फिर  से सिच्युएशन  के हिसाब  से नया चाल  खोज  लूंगा। ओके बाय, मेरा टैक्सी आ गया है।"

    अगले भाग  मे जारी.............

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