किस्मत, जो नामुमकिन चीज को भी मुमकिन कर दे। इसी किस्मत ने जोड़ा दो दिलों को, जो चाहकर भी अलग न हो सके.... न बिछड़कर, न मरकर। सरगम मित्तल, जिसकी हर परेशानी से अलग एक छोटी सी दुनिया है, अपने सपनों के पीछे भागती है वो। वहीं सपनों से दूर है स्वयार्थ रा... किस्मत, जो नामुमकिन चीज को भी मुमकिन कर दे। इसी किस्मत ने जोड़ा दो दिलों को, जो चाहकर भी अलग न हो सके.... न बिछड़कर, न मरकर। सरगम मित्तल, जिसकी हर परेशानी से अलग एक छोटी सी दुनिया है, अपने सपनों के पीछे भागती है वो। वहीं सपनों से दूर है स्वयार्थ रायजादा, जो है सिर्फ खुद के लिए। शादी होने जा रही थी, स्वयार्थ की सरगम की दोस्त युक्ति से, पर किसे पता था, ये एक खेल था किस्मत का, अनजाने से ही सही उसकी शादी हो गई सरगम के साथ। क्या दोनों पहचान पाएंगे अपनी सालों पुरानी पहचान? क्या एक बार की अधूरी कहानी फिर से पूरी हो पाएगी?
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जोधपुर, राजस्थान
रात का वक्त,
एक लड़की एयरपोर्ट पर खड़ी हुई थी। उसने अपनी पीछे एक गिटार का बैग लिया हुआ था। नॉर्मल सी क्रॉप व्हाइट क्रॉप टॉप के साथ डेनिम पहनी हुई थी उसने। उसकी ओसियन ब्ल्यू आईज desperation से किसी को धुंध रही थी।
तभी उसके कानों में एक आवाज पड़ी," फाइनली, सरगम मित्तल जोधपुर आ गई ।"
ये सुनते ही सरगम मुस्कुराते हुए पीछे मुड़ी, बिना एक पल गंवाए उसने उस सामने खड़ी लड़की को हग कर लिया।
एक टाइट हग के बाद उसने उसे छोड़ा और जल्दी से बोली," पूरे 10 दिन से मैं तुमसे मिली नहीं थी दिया, I missed you so much...."
दीया उसे देखते हुए बोली," मैंने भी मिस किया, पर सबसे ज्यादा युक्ति ने , तुम्हें जल्दी से उससे मिलना है , वरना गुस्से से पागल हो जाएगी...."
सरगम जल्दी से बोली," उसी की शादी में आई हूं, वो भी पूरे एक दिन पहले, उससे तो मिलूंगी ही न।"
दीया कुछ पल रुककर बोली," जी जरूर! तुम पहली बार राजस्थान आई हो, उसके भी अलग मजे, मैं तुम्हें पूरा जोधपुर घुमाऊंगी , अब चलें ।"
सरगम ने सिर हिलाया और दीया के साथ कार की तरफ बढ़ गई ।
कुछ देर में वो कार में बैठी हुई थी, कार की खिड़की खुली थी,ठंडी ठंडी हवाएं उसके चेहरे को छूकर जा रही थी, आज मौसम काफी अच्छा था।
सरगम ने आंखें बंद की और उन हवाओं को महसूस करने लगी। एक अनजाना सा एहसास हो रहा था उसे।
लगभग 1 घंटे बाद, कार एक बड़े से पैलेस के सामने रुकी। रात के अंधेरे में वो पैलेस जगमगा रहा था।
दीया और सरगम कार से बाहर आई और पैलेस के अंदर गई।
अंदर आते ही सरगम की नजर हर तरफ जा रही थी, पहली बार उसने ऐसा कोई पैलेस देखा था।
सरगम हॉल के बीचों बीच खड़ी हुई थी, तभी किसी ने उसे एकदम से हग कर लिया, सरगम ने मुस्कुराहट से उस लड़की को हग किया।
ये युक्ति थी, सरगम दिया और युक्ति कॉलेज से ही बेस्ट फ्रेंड्स थे, दिया और युक्ति राजस्थान से ही थी, जबकि सरगम मुंबई से । अपनी पढ़ाई के लिए दीया और युक्ति मुंबई गई थी, जहां उन्हें सरगम मिली थी, तभी से ही तीनों साथ हैं।
कॉलेज से पासआउट होने के बाद दिया और युक्ति जोधपुर आ चुके थे, वहीं सरगम आज यहां आई थी, युक्ति की शादी में ।
युक्ति, सरगम से अलग होते हुए बोली,"अगर तुम आज नहीं आती, तो पक्का मैं बात नहीं करती तुमसे ।"
सरगम आंखें घुमाते हुए बोली," लेकिन मैं आ गई युक्ति शेखावत ....."
युक्ति मुस्कुराते हुए बोली," यही तो अच्छी बात है....! तुम आ गई ..... अब कुछ नहीं चाहिए...."
दीया सरगम के कंधे पर हाथ रखते हुए बोली," अपना दूल्हा भी नहीं चाहिए आपको भाभी...."
युक्ति उसके हाथ पर मारते हुए बोली," शट अप..... दीया रायजादा!"दीया ने सरगम को देखा और दोनों ही हँसने लगी थी, युक्ति चिढ़ते हुए बोली," दोनों मेरा मजाक उड़ा रहे हो..."
सरगम अपनी हँसी रोकते हुए बोली," बिल्कुल! तुम इसकी भाभी बनने वाली हो!"
युक्ति चिढ़कर फिर बोली," तो क्या ? तुम दोनों ऐसे मजाक उड़ा रही हो जैसे पता नहीं क्या ही होने जा रहा है!"
दिया उसे और चिढ़ाते हुए बोली," तुम्हारी शादी होने जा रही है, ऐसे चिढ़ना बंद कर दो, क्योंकि मेरे भाई कैसे हैं मैंने तुम्हें बताया था न...."
युक्ति कुछ बोलती उससे पहले ही उसकी मां राधिका उनकी तरफ आते हुए बोली," वो तो शादी के बाद ये अच्छे से देख लेगी, पहले मुझे तुम्हारी फ्रेंड को देखने दो ।"
बोलते हुए उन्होंने युक्ति को साइड किया और आगे आई , साथ ही में एक नौकरानी खड़ी हुई थी, जिसके हाथ में पूजा की थाल थी ।
सामने सरगम को देखते हुए ही वो रुक गई, वो बस उसे एकटक देखने लगीं थीं।
उन्हें ऐसे देख युक्ति बोली,"मां, क्या हुआ? आप उसे ऐसे क्या देख रही हैं नजर लग जाएगी उसे!"
उसकी बात सुनते ही राधिका होश में आई, उन्होंने सरगम को ऊपर से नीचे तक देखा और उसकी नजर उतारते हुए बोली," किसी की नजर न लगे !"
वो फिर सरगम को देखते हुए बोली,"आप बहुत खूबसूरत है सच में .....!"
बोलते हुए वो खोई हुई सी हल्का सा मुस्कुराई।
युक्ति उन्हें टोकते हुए बोली," मां ये मेरी ही दोस्त है, कोई और नहीं, आप इसे तुम कह सकती हो ।"
राधिका ने सरगम को देखा और हिचकिचाते हुए बोली," क्या मैं ....?"
सरगम बीच में ही मुस्कुराते हुए बोली," जरूर! आप जो चाहे बोल सकती हैं आंटी ....."
राधिका गौर से सरगम को देखने लगी, उनके चेहरे पर एक हिचकिचाहट बनी हुई थी।
उन्होंने बगल खड़ी उस औरत से आरती की थाल ली और बोली,"हमारे घर में मेहमानों को भगवान माना जाता है , मुझे आने में थोड़ी देर हो गई, वरना ये दरवाजे पर किया जाता है, पर कोई बात नहीं, मैं यही कर देती हूं"
वो मुस्कुराते हुए सरगम की आरती उतारने लगी, और उसका तिलक किया।
राधिका मुस्कुराते हुए बोली," आपका स्वागत है, जोधपुर में....!"
सरगम के होठों पर भी मुस्कुराहट खिल गई, उसने इन चीजों के बारे में सुना था, आज देख भी रही थी।
उसने राधिका के कपड़ों को देखा , राधिका ने इस वक्त एक लहंगा पहना हुआ था, कई सारे गहने। जैसे कोई फंक्शन हो।
उसे ऐसे देखते देख दिया धीरे से उसके कान में बोली," हमारे यहां ऐसे ही पहनते है!"
सरगम ने हां में सर हिलाया।
दीया और युक्ति दोनों ही यहां पली बढ़ी थी, रॉयल प्रिंसेस थी दोनों। उन दोनों के लिए ये सब नॉर्मल था , पर सरगम के लिए कहीं से भी ये नॉर्मल नहीं था।
कुछ देर बाद वो तीनों एक बड़े से कमरे में थी , ये कमरा खास सरगम के लिए तैयार करवाया था युक्ति ने ।
इस वक्त युक्ति कई सारी चीजें सरगम को दिखा रही थी, शादी के लिए।
दीया उन दोनों को देखते हुए बोली," मेरे भाई को ये सब शायद ही पसंद होगा, क्योंकि वो तो कई सालों से लंदन में हैं ।"
सरगम चौंकते हुए बोली," क्या? परसों से शादी शुरू होने वाली है, और वो लंदन में ....."
दीया सिर हिलाते हुए बोली," वो कल ही आने वाले हैं ।"
सरगम ने उसकी बात पर सर हिलाया, वहीं दीया फिर से टाइम देखते हुए बोली," बाप रे! 10 बज गए, मुझे घर जाना है, मां गुस्सा करेंगी, मैं कल फिर आऊंगी, हम तीनों मिलकर शॉपिंग पर जाएंगे।"
बोलकर वो भागते हुए बाहर निकल गई, सरगम उसे जाते देख बोली," 10 ही तो बजे हैं, क्या बड़ी बात है ।"
युक्ति उसे देखते हुए बोली," मैडम तुम भूल गई हो तुम कहां हो ? यहां लड़कियां देर रात घर से बाहर नहीं रहती ।"
सरगम ने उसकी बात पर थोड़ी हैरानी से सिर हिलाया।
दूसरी तरफ, राधिका किचेन में खड़ी कुछ सोच रही थी, वो खुद से ही बोली,"सरगम.... क्या मैं कुछ ज्यादा सोच रही हूं ? पर ऐसा कैसे हो सकता है ?"
वो किसी गहरी सोच में गुम थी।
वहीं सरगम खिड़की के पास खड़ी हुई थी, वो सामने देखते हुए युक्ति से बोली," तुम इस शादी से खुश तो हो न?"
युक्ति मुस्कुराते हुए बोली," मैं कैसे खुश न रहूंगी ! ......मेरा और उनका रिश्ता काफी पहले से जुड़ गया था। हमारे बड़ों ने जोड़ा था , खुश हूं मैं इस रिश्ते से , हमेशा से !"
सरगम हल्की सी हैरानी से बोली," काफी पहले से मतलब?"
युक्ति कुछ पल रुककर बोली," मतलब कि जब हम छोटे थे, वो मुझसे थोड़े बड़े थे।"
सरगम धीरे से बोली," बचपन में रिश्ता? मुझे नहीं पता था कि ऐसा भी होता है! तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया था , इसके बारे में ?"
युक्ति उसे एक नजर देखकर बोली," हमारे यहां ऐसा ही होता है, राजघरानों के रिश्ते बचपन में ही तय हो जाते हैं.... मैंने तुम्हें नहीं बताया था क्योंकि मुझे कभी ये ध्यान ही नहीं रहा उस वक्त ।"
सरगम सर हिलाते हुए बोली," और ये वो कौन हैं?"
युक्ति हल्का सा मुस्कुराई और बोली," वो, मतलब मेरे होने वाले पति।"
सरगम हंसते हुए बोली," मैंने नाम पूछा है...."
युक्ति धीरे से बोली,"पति का नाम नहीं लिया जाता, सरगम मित्तल, फिर भी मैं लेती हूं... ये वो मतलब, स्वयार्थ रायजादा ....."
सरगम धीरे से बोली," स्वयार्थ.... अच्छा क्या तुमने उसे देखा है?"
युक्ति कुछ सोचते हुए बोली," नहीं, मैंने उन्हें बचपन देखा था , उसके बाद से नहीं देखा, वो लंदन में रहते है कई सालों से ।"
सरगम ने कुछ सोचते हुए हां में सिर हिलाया और बोली,"जो भी हो, बहुत खुश हूं, मैं तुम्हारे लिए..."
युक्ति मुस्करा दी, उसे देख सरगम का चेहरा भी खिल गया।
दूसरी तरफ, एक प्राइवेट जेट में बैठा हुआ आदमी लगातार अपने लैपटॉप पर कुछ टाइप किए जा रहा था , वो काफी ध्यान से अपना काम कर रहा था, तभी उसके बगल बैठा, एक लड़का बोला," तुम्हारी शादी होने वाली है, अब तो अपना काम थोड़ा कम कर दो, कुछ दिनों के लिए ही सही ।"
वो आदमी बिना उसे देखे बोला," स्वयार्थ रायजादा किसी के लिए भी नहीं रुकता, लक्ष्य। न ही कभी रुकेगा।"
लक्ष्य ने उसे देखकर अपने सिर पर हाथ रख लिया।
आइने के सामने एक लड़की दुल्हन के जोड़े में तैयार खड़ी हुई थी। वो मुस्कुराते हुए खुद को देख रही थी, पर एक पल में उसकी मुस्कुराहट, आंसू में बदल गई। अगले ही पल वहीं लड़की तेजी से सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी, हर तरफ आग की लपटें उठ रही थी, हर कोई इधर उधर भाग भाग रहा था। वो दुल्हन की तरह सजी लड़की, अब उसी जोड़े में खून से लतपथ थी, अचानक उस लड़की के चीखने की तेज आवाज आई।
सरगम चीखते हुए उठी, उसके चेहरे पर पसीने की बूंदे थीं, वो गहरी गहरी सांसे ले रही थी। वो खुद को कंट्रोल करने की कोशिश करते हुए बोली," आज फिर..... मेरी नींद ऐसे ही खराब होती है .....! हे भगवान जी, ऐसा क्यों होता है?"
उसने नाइट स्टैंड रखे पानी के जग की तरफ देखा, तुरंत ही उसने पानी पीया, और हेडरेस्ट से सिर टिकाकर बैठ गई।
तभी एकदम से रूम का दरवाजा खुला और युक्ति अंदर आते हुए बोली," सरगम..... तुम ठीक तो हो न...? मुझे पता है, ये तुम्हारे उस नाइटमेयर की वजह से है, प्लीज बोलो तुम ठीक हो न?"
बोलते हुए वो उसके पास आकर बैठ गई।
सरगम जल्दी से बोली," मैं ठीक हूं, युक्ति.... बिल्कुल ठीक हूं, मुझे अब इसकी आदत हो गई है, तो तुम्हें टेंशन लेने की जरूरत नहीं है ओके!"
युक्ति उसके गाल पर हाथ रखकर बोली," पर मुझे होती है टेंशन.... मैं सच डर गई थी।"
सरगम कुछ बोलती उससे पहले युक्ति फिर बोली," वो अच्छा है मां अभी किचेन हैं, नीचे, वरना वो भी परेशान हो रही होती।"
सरगम आंखें बड़ी करके बोली," इस वक्त किचेन में ? ये मत बोलना सुबह हो गई है।"
युक्ति कुछ पल रुककर बोली," अभी 6 बजे हैं, मां किचेन खाना बना रही हैं, तुम सो सकती हो अभी , ठीक है। मैं बाद में तुम्हें उठाने आ जाऊंगी, आज वैसे भी कुछ गेस्ट आने वाले हैं, तुम्हें दीया के साथ शॉपिंग पर जाना है।"
सरगम उसे देखते हुए बोली," वो तो ठीक है पर , तुम नहीं जाओगी क्या हमारे साथ?"
युक्ति उसके सिर पर मारते हुए बोली," तुम भूल गई क्या? कल ही तो मैंने तुम्हें बताया था कि लड़कियां शादी से पहले घर से बाहर नहीं जाती, ये रिचुअल है... समझ गई।"
सरगम अपना सर सहलाते हुए बोली," अच्छा, ठीक है, मैं समझ गई, मार क्यों रही हो, ..... मुझे सोना है नींद आ रही है।"
बोलते हुए वो लेटने को हुई तभी उसका फोन रिंग हुआ।
सरगम ने युक्ति को देखा और धीरे से बोली ," मॉम का ही कॉल होगा!"
युक्ति बेड से उठते हुए बोली," मैं आती हूं!"
बोलकर वो रूम से बाहर चली गई।
वहीं सरगम कॉल पिक करके बोली," आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, मैं बिल्कुल ठीक हूं!"
दूसरी तरफ से माया यानी सरगम की मॉम बोली," पर मैं tensed हूं सरगम। मुझे पता है तुम नॉर्मल होकर नहीं उठती।"
सरगम मुस्कुराते हुए बोली," पर मैं ठीक हूं सच में, अच्छा मुझे नींद आ रही है मैं आपको बाद में कॉल करती हूं...!"
बोलकर उसने कॉल कट किया और बेड पर लेट गई।
सरगम की फैमिली में सिर्फ उसकी मॉम ही थी, माया मित्तल। बचपन से सरगम ने बस अपनी मॉम को ही देखा था, माया ने सरगम की परवरिश सिंगल मदर बनकर ही की थी। माया एक डॉक्टर थी। बिजी होने के बावजूद उसने सरगम की परवरिश में कोई कमी नहीं की थी।
वो दोनों साथ में काफी खुश थे।
लगभग 2 घंटे बाद सरगम की आंख फिर खुली, इस बार वो काफी फ्रेश फील कर रही थी।
उसने टाइम देखा और जल्दी से वॉशरूम में भाग गई, कुछ ही देर में वो ड्रेसिंग के सामने खड़ी थी, एक डार्क पिंक कलर की कुर्ती पहनी हुई थी, साथ में ब्ल्यू डेनिम।
कुर्ती उसने पहली बार पहनी थी,