आखिर दिल्ली की मशहूर बिजनेस क्वीन वामिका रौशन क्यों लेती है एक अजीब सा फैसला...?जिस वामिका के पास सब कुछ है — दौलत,शोहरत,पावर—वो क्यों अचानक अपने करियर और अपनी इमेज को बचाने के लिए एक नकली बॉयफ्रेंड हायर करने की डील करती है? वो मिलती... आखिर दिल्ली की मशहूर बिजनेस क्वीन वामिका रौशन क्यों लेती है एक अजीब सा फैसला...?जिस वामिका के पास सब कुछ है — दौलत,शोहरत,पावर—वो क्यों अचानक अपने करियर और अपनी इमेज को बचाने के लिए एक नकली बॉयफ्रेंड हायर करने की डील करती है? वो मिलती है निवान चौहान से — एक मध्यमवर्गीय लड़का, जो लाइब्रेरी में काम करता है, और जिसे पैसे की सख्त जरूरत है अपनी बहन की सर्जरी के लिए। वामिका डील करती है: "रिश्ता होगा पर, प्यार नहीं। साथ होगा पर, जज़्बात नहीं।" क्या निवान मान जाएगा इस अजीब डील को? क्या तीन महीने का ये खेल दोनों की ज़िंदगियाँ बदल देगा? या फिर ये सिर्फ एक धोखा साबित होगा? जानने के लिए तुरंत पढ़े "contracted boyfriend"।
निवान
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वामिका रौशन
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दिल्ली के पॉश एरिया में एक ब्लैक मर्सिडीज़ सिग्नल तोड़ती हुई निकल गई। पुलिस ने आंख उठाकर देखा ज़रूर, पर फिर सिर झुका लिया। नंबर प्लेट चमक रही थी: VR-1
वामिका रौशन...
नाम ही काफ़ी था।
शानदार ब्लैक पैंटसूट, सिल्की बाल जो कमर तक गिरते थे, और आँखों पर ब्राउन सनग्लास।
जैसे ही वह अपनी कंपनी 'रौशन एंटरप्राइजेज़' के ग्लास टॉवर में दाख़िल हुई, चारों तरफ़ बैठे लोग अपनी सीट से उठ गए।
अपने ऑफिस में एंट्री करते ही उसकी असिस्टेंट, निया, उसके कान में फुसफुसाई —
“मामला थोड़ा सीरियस है मैम… सोशल मीडिया पर एक आर्टिकल वायरल हो रहा है…”
वामिका ने सिर घुमा कर देखा — “व्हाट आर्टिकल, निया ?”
निया ने कांपते हाथों से फ़ोन आगे बढ़ाया।
हेडलाइन चमक रही थी—
"वामिका रौशन,
24 साल की उम्र में वो बना चुकी है अपना बिज़नेस साम्राज्य — 12 कंपनियों की सीईओ, टॉप 10 एशियन पावर लिस्ट में नाम, और देश की सबसे कम उम्र की सेल्फ-मेड अरबपति।
"शी हैज़ एवरीथिंग — वेल्थ, पावर, प्रेज़ेन्स… बट नो पार्टनर? नॉट ईवन अ व्हिस्पर ऑफ रोमांस? दैट्स अननैचुरल।"
वामिका ने फ़ोन की स्क्रीन को घूर कर देखा।
फिर अपने सनग्लास उतारे, और बड़े ठंडे स्वर में बोली —
"अननैचुरल? डिड दे जस्ट कॉल मी अननैचुरल फॉर नॉट डेटिंग समवन?
“अनबिलीवबल,” वो बुदबुदाई।
“वन स्टुपिड आर्टिकल… एंड नाउ दे थिंक आय’म इनकैपेबल ऑफ फीलिंग? वाओ।"
निया थोड़ा आगे बढ़ी — “मैम, ये आर्टिकल अब ट्रेंड में है। सोशल मीडिया पे मीम्स भी बन रहे हैं…और मैम, इन्वेस्टर्स थोड़ा अनकम्फर्टेबल हो रहे हैं… इमेज इम्पैक्ट हो रही है।”
वामिका धीरे से मुड़ी।
“फाइन।”
“अगर उन्हें ड्रामा चाहिए, आइ’ल गिव देम अ शो"
निया ने आँखें उठाकर उसकी तरफ देखा।
“लेट्स हायर वन।” उसने कहा।
निया चौंकी — “हायर व्हाट, मैम?”
वामिका उठ खड़ी हुई, बालों को पोनीटेल में बांधते हुए बोली —
“ए कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड।”
निया हैरानी से बोली —"मैम ...?"
“गेट मी अ कॉन्ट्रैक्ट रेडी,” वामिका ने कहा, “थ्री मंथ्स।
आई वांट अ मैन हू लुक्स रियल बट नोज़ द गेम।
नो ड्रामा। नो एक्सपेक्टेशंस। नो इमोशन्स।”
निया की आँखें फैल गईं —
"मैम, आप सच में सीरियस हैं?"
वामिका मुस्कुरा दी।
निया ने धीरे से पूछा,
"और फीलिंग्स ? अगर वो सच में—?"
"फीलिंग्स?"
वामिका ने हँसते हुए उसकी बात काट दी।
"ये सिर्फ तीन महीने का कॉन्ट्रैक्ट होगा।
रिश्ता होगा, पर प्यार नहीं। साथ होगा, पर जज़्बात नहीं।"
निया अभी भी समझ नहीं पाई थी, “लेकिन मैम, ऐसे कैसे? कहां मिलेगा ऐसा कोई जो...”
“...कहां मिलेगा ऐसा कोई जो...”
निया की बात अधूरी ही रह गई, क्योंकि वामिका अपनी टेबल तक पहुँच चुकी थी और लैपटॉप खोल चुकी थी।
उसने स्क्रीन पर टाइप किया:
"टेम्पररी कम्पैनियन – स्ट्रिक्टली प्रोफेशनल अरेंजमेंट। हाई पे।"
“हम ये पोस्ट नहीं डालेंगे। न ही किसी साइट पर। इसे पर्सनल नेटवर्क के थ्रू भेजो। सिर्फ़ लिमिटेड लोगों को। और...” उसने थोड़ी देर सोचते हुए कहा —
“उसकी बैकग्राउंड भी क्लीन होनी चाहिए। कोई स्कैंडल नहीं। नो सोशल मीडिया ड्रामा।”
निया ने धीरे से पूछा, “और... दिखने में?”
वामिका ने कंधे उचका दिए, “साधारण। पर भरोसेमंद। जितना कॉन्ट्रास्ट होगा, उतना पब्लिक इंट्रेस्ट जेनरेट होगा।”
वही दूसरी तरफ....
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक पुरानी लाइब्रेरी में।
धूप की हल्की रेखाएं लकड़ी की अलमारियों पर गिर रही थीं।
और उन्हीं के बीच वो खड़ा था निवान चौहान — छह फीट लंबा, चौड़ा सीना, गेहुआ रंग, आँखों पर एक पुराना ब्लैक फ्रेम का चश्मा, और हल्के बिखरे हुए घुंघराले बाल — जिन्हें शायद उसने कई दिनों से ठीक से संवारा नहीं था।
उसने एक मटमैले हरे रंग का स्वेटर पहन रखा था, जो हल्का सा घिस चुका था। उसकी आस्तीनें कोहनी तक चढ़ी हुई थीं।
और उसके पैरों के पास रखे जूते जो ज़्यादा चलने से घिस चुके थे।
वो धीरे-धीरे किताबें अलमारी में सजा रहा था जब फोन वाइब्रेट हुआ।
“निया खन्ना – रौशन इंटरप्राइजेज”
वो चौंका।
“रौशन इंटरप्राइजेज? किसी ने मज़ाक तो नहीं किया…”
फोन उठाया।
दूसरी तरफ़ से आवाज़ आई — “हेलो, आर यू मिस्टर निवान चौहान?”
“उह… जी, हां।”
“हमारी कंपनी को एक पर्सनल असिस्टेंट की ज़रूरत है। ये एक असामान्य असाइनमेंट है, लेकिन पे बहुत अच्छा है। अगर आप इंट्रेस्टेड हैं तो कल सुबह 11 बजे ऑफिस पहुंचिए। इंटरव्यू वामिका मैम खुद लेंगी।”
फोन कट गया।
निवान कुछ देर स्क्रीन देखता रहा —
“पर्सनल असिस्टेंट? हाई पे? इंटरव्यू... खुद वामिका रौशन लेंगी?”
उसकी उंगलियों ने जेब में पड़े पैसे गिने — गिनती फिर से वही खत्म हुई।
बहन की सर्जरी का पेमेंट अगली हफ्ते देना था।
वो सोच में पड़ गया।
लाइब्रेरी के कोने में एक टेबल के पास तीन-चार लड़कियाँ बैठी थीं, किताबें तो उनके सामने खुली थीं, लेकिन उनकी नजरें बार-बार एक ही दिशा में जा रही थीं।
“वो देख... वही है ना निवान चौहान?”
“हां… वही रिसर्च स्कॉलर… ऑक्सफोर्ड वाला…”
“कितना हैंडसम है यार... और इतना सिंपल भी।”
“कभी किसी से बात तक नहीं करता।”
“यू नो, मिस्टीरियस गाईज आर इवन मोर अट्रैक्टिव…” एक लड़की धीमे से मुस्कराई।
उसी समय, निवान पास से गुज़रा।
लड़कियाँ कुछ पलों को बिल्कुल चुप हो गईं।
सिर्फ एक फुसफुसाहट हवा में रह गई —
“इतना शांत कैसे रह सकता है कोई?”
पर निवान का चेहरा एकदम स्थिर था — जैसे इन नजरों की आदत हो उसे, या शायद इनसे कोई लेना-देना नहीं।
वो जाकर लाइब्रेरी के काउंटर के पास खड़ा हुआ।
“शर्मा सर, ये किताबें रजिस्टर कर दीजिए। मैं पुरानी अलमारी में कुछ रिपेयरिंग भी कर दूं?”
वहाँ बैठे बूढ़े लाइब्रेरियन ने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया, “तू न होता तो ये लाइब्रेरी कब की बिखर जाती, बेटा।”
निवान ने हल्की-सी मुस्कान दी और धीरे से अलमारी की तरफ बढ़ा।
वो नीचे झुका, लकड़ी की एक दराज़ खोलकर उसमें टूटे हुए ताले और ढीले पेंच ठीक करने लगा।
जेब से एक छोटा स्क्रू ड्राइवर निकाला — वही, जो वो हमेशा साथ रखता था।
धूप की एक रेखा उसकी आंखों पर पड़ी। उसने आंखें मिचकाईं, और चश्मा थोड़ा ऊपर चढ़ा लिया।
किसी और के लिए ये काम थकाऊ होता…
पर निवान के लिए ये उसकी दुनिया थी — स्थिर, शांत और सच्ची।
उसी वक्त लाइब्रेरियन शर्मा सर फिर उसके पास आए।
“बेटा, एक बात कहनी थी…”
निवान ने सिर उठाया — “जी, सर?”
“तू बहुत मेहनत करता है… मगर अब तू यहां अटका मत रह जाना।”
निवान थोड़ा चौंका — “क्या मतलब?”
“मतलब ये कि जब ज़िन्दगी किसी और रास्ते की दस्तक दे रही हो, तो उसे नजरअंदाज़ मत करना।”
शर्मा सर ने उसके कंधे पर हाथ रखा —
“ये रौशन इंटरप्राइजेज़ वाला कॉल… शायद कोई इत्तेफ़ाक नहीं है।”
निवान ने चुपचाप सिर झुका दिया।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
अगले दिन — सुबह 9:00 बजे।
रौशन एंटरप्राइज़ेज़ का हेड ऑफिस हमेशा की तरह चमक रहा था, लेकिन वामिका का मूड आज उतना पॉलिश्ड नहीं था।
वो अपने ऑफिस में दाख़िल हुई।
निया पहले से मौजूद थी, आँखों में हलकी बेचैनी लिए।
“गुड मॉर्निंग, मैम...” उसने धीरे से कहा।
वामिका ने उसे घूरा —
“कहाँ है वो फाइल जिसमें तुमने सारे कैंडिडेट्स की डिटेल भेजी थी?”
निया ने फौरन एक टैबलेट आगे बढ़ाया।
“मैम, ये पाँचों वो हैं जो आपके पैरामीटर्स पर खरे उतरते हैं। नो सोशल मीडिया प्रेज़ेन्स, क्लीन बैकग्राउंड, डीसेंट लुक्स, और..."
वो थोड़ा हिचकी — “...साधारण।”
वामिका ने टैबलेट लिया और स्क्रीन पर स्क्रॉल करने लगी।
कैंडिडेट 1:
नाम: आर्यन मल्होत्रा
प्रोफेशन: थिएटर आर्टिस्ट
नोट्स: एक्सप्रेसिव फेस, थोड़ा ओवर-द-टॉप
उसे देख वामिका बोली —"टू ड्रामेटिक। फिल्स लाइक ए डेली सॉप ऑडिशन। "
कैंडिडेट 2:
नाम: रोहित खन्ना
प्रोफेशन: फिटनेस ट्रेनर
नोट्स: सोशल मीडिया फेम, 300k फॉलोअर्स
उसे देख वामिका झल्ला कर बोली —“नो सोशल मीडिया ड्रामा कहा था, निया?” वामिका ने तीखी नजरों से देखा।
कैंडिडेट 3:
नाम: अर्जुन शेखावत
प्रोफेशन: मॉडल
नोट्स: दिखने में परफेक्ट, पर कॉन्ट्रैक्ट की डीटेल्स पर सवाल उठा रहा है
वामिका फिर बोली —“स्टूपिड .... नेक्स्ट।”
कैंडिडेट 4:
नाम: कबीर मेहरा
प्रोफेशन: स्कूल टीचर
नोट्स: डाउन टू अर्थ, नो सोशल मीडिया, लेकिन बहुत शर्मीला।
वामिका ने भौंहें चढ़ाईं — “शर्मीला? ये क्या कैमरे के सामने मेरा ‘बॉयफ्रेंड’ बनेगा ! ”
कैंडिडेट 5:
नाम: युवराज “यूवी” माथुर
प्रोफेशन: स्ट्रगलिंग शेफ, पार्ट टाइम कैफे मैनेजर
नोट्स: बैकग्राउंड क्लीन, दिखने में सिंपल, आत्मविश्वास अच्छा, लेकिन थोड़ा बेपरवाह।
वामिका थोड़ी देर स्क्रीन पर यूवी की प्रोफाइल घूरती रही।
फिर अचानक टैबलेट डेस्क पर पटक दिया।
“यू रियली थिंक... थिस इज़ द बेस्ट वी हैव?”
“मुझे एक स्मार्ट, कंट्रोल्ड, पब्लिक फ्रेंडली आदमी चाहिए था। ये सब तो...…ये सब तो ओवर-कॉन्फिडेंट है।
किसी में भी वो 'परफेक्ट बैलेंस' नहीं है जो मैं ढूंढ रही हूँ।”
निया ने धीरे से कहा, “मैम, आपने कहा था — नो एक्सपेक्टेशन्स। सिंपल और भरोसेमंद चाहिए था।”
वामिका कुर्सी से उठी, फ्रस्ट्रेशन से कमरे में चहलकदमी करने लगी —
"सिंपल डज़न्ट मीन साइलेंट।
मुझे कोई चाहिए जो शोभा भी दे और शो भी करे।
और इन सब में से कोई उस पैमाने पे खरा नहीं उतरता।”
वो रुक गई, एक लंबी सांस ली, और धीमे स्वर में बोली —
“कैंसिल द प्लान , निया। ये गेम ही गलत था शायद।”
*******
निवान ने गहरी सांस लेकर अंदर कदम रखा।
रिसेप्शनिस्ट ने ऊपर से नीचे तक उसे देखा।
“यू आर…?”
“निवान चौहान। मेरे नाम पर 11 बजे का अपॉइंटमेंट है।”
रिसेप्शनिस्ट ने स्क्रीन चेक की… और फिर फोन उठाकर कहा —
“मैम… ही इज़ हियर।”
कुछ देर बाद....
निवान चौहान अंदर आया ।
वामिका ने बिना उसे देखे ही कहा —
"यू आर लेट।"
निवान ने हल्के स्वर में कहा,
“माफ़ कीजिए… बस थोड़ा ट्रैफिक था।”
उसकी आवाज़ गहरी थी, पर शालीन — जैसे किसी पुराने रेडियो से निकली हो।
वामिका ने पहली बार सिर उठाया और उसे देखा।
वो कुछ पल उसे बस देखती रही — बिना पलकें झपकाए।
उसके कपड़े बेहद सामान्य थे — एक सफेद शर्ट, पुरानी ब्लैक पैंट, और वही ब्लैक फ्रेम वाला चश्मा।
वामिका ने खुद को संयत किया।
“यू आर…?”
“निवान चौहान।”
"सिट डाउन," उसने कुर्सी की तरफ इशारा किया।
निवान चुपचाप बैठ गया।
कमरे में कुछ सेकंड्स तक खामोशी छाई रही।
वामिका ने फ़ाइल उठाई — “निवान चौहान। रिसर्च स्कॉलर। ऑक्सफोर्ड फेलोशिप। फिजिक्स में मास्टर्स। फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी?”
वो निवान की तरफ भौंहें उठाकर देखती है ।
निवान मुस्कुराया — “डिग्रियाँ पेट नहीं भरतीं, मैम। लाइब्रेरी में काम कर के घर चल जाता है। और शांति भी मिलती है।”
वामिका को उसकी ईमानदारी अजीब सी लगी ।
“मुझे तुम्हारी बैकग्राउंड क्लीयरेंस मिली है,” उसने कहा, “नो सोशल मीडिया, नो स्कैंडल्स… कोई पास्ट भी नहीं।”
निवान हल्के से मुस्कराया —
“मेरा वक़्त सोशल मीडिया पर उड़ाने लायक नहीं। और पास्ट… सबका होता है, बस सब बताते नहीं।”
“तो बताओ, तुम इस असाइनमेंट के लिए क्यूँ इंटरेस्टेड हो?”
“क्योंकि मेरी बहन की सर्जरी है। और मैं उसके लिए कुछ भी कर सकता हूँ।"
कमरे में एक सेकंड की चुप्पी छा गई।
निया जो पीछे खड़ी थी, उसकी भी सांस थमी।
वामिका थोड़ा झिझकी, फिर बोली —"आपको पता है किस काम के लिए बुलाया गया है?"
निवान ने सिर हिलाया —
“निया जी ने बताया था… ‘पर्सनल असिस्टेंट’। असाइनमेंट थोड़ा अनोखा है।”
वामिका बोली —
“ये असाइनमेंट ‘पर्सनल’ से कुछ ज़्यादा है। तुम्हें मेरे ‘बॉयफ्रेंड’ का रोल निभाना होगा — इन पब्लिक। सिर्फ़ तीन महीने के लिए।”
निवान की भौंहें हल्का सा उठीं — लेकिन कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं।
“कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड।”
वामिका ने एक फाइल उसकी तरफ सरकाई।
“नो इमोशन्स, नो एक्सपेक्टेशन्स। प्रोफेशनल एग्रीमेंट। डीलिंग्स क्लियर होंगी, पेमेंट वीकली।”
निवान ने फाइल की ओर देखा। उसने उसे खोला नहीं, बस कुछ पल उस पर उंगलियां फेरता रहा ।
फिर उसकी नजरें वामिका पर उठीं।
“तीन महीने। फेक रिलेशनशिप। और बदले में हफ़्ते की पेमेंट?”
वामिका ने सिर हिलाया — “एक्जेक्टली.”
“आपको लगता है इससे आपकी पब्लिक इमेज बच जाएगी?”
वामिका की आंखों में एक पल के लिए चिंगारी सी चमकी —
"यू डोंट गेट टू क्वेस्चन मी, मिस्टर चौहान।"
उसने टेबल पर झुकर तीखे लहज़े में कहा।
"मैंने तुम्हें बुलाया है, तुम्हारी आलोचना सुनने नहीं।"
निवान ने एक पल को निया की तरफ देखा — फिर वामिका की तरफ।
और ठहरकर बोला —
“ ठीक है मै तैयार हूं।”
वामिका कुछ पल के लिए चुप हो गई।
इस शख्स में कुछ तो असर करने वाला था — न चकाचौंध, न चालाकी।
वो उठी, और धीमे से बोली —
“निया, कॉन्ट्रैक्ट रेडी करवा दो।”
कुछ देर बाद...
वामिका और निवान वामिका की ब्लैक मर्सिडीज के सामने खड़े थे ।
वामिका दरवाज़ा खोलकर एक तरफ खड़ी हुई —
"बैठो।"
निवान ने एक पल चमकती कार को देखा, फिर वामिका को।
“मैं… यहां बैठूं?”
वामिका ने भौंहें चढ़ाकर उसकी तरफ देखा ।
निवान सकपका गया और चुपचाप आगे की सीट पर बैठ गया। वामिका दूसरी तरफ से अंदर आई, सीट बेल्ट लगाई और गाड़ी स्टार्ट की।
कुछ मिनटों तक दोनों के बीच खामोशी थी — सिर्फ़ कार की मर्मराहट थी और शहर की हल्की हलचल।
निवान ने खिड़की के बाहर देखा —
“हम कहाँ जा रहे हैं?”
वामिका ने जवाब दिए बिना ही रेडियो ऑन कर दिया। फिर ड्राइव करते हुए बोली —
“तुम्हारे कपड़े, तुम्हारा हेयरकट, तुम्हारा चश्मा — सब बदलेगा।”
निवान ने उसकी तरफ देखा, थोड़ा असहज होकर —
“क्या मतलब… सब?”
वामिका ने एक तेज़ नज़र उस पर डाली —
“यू आर गोंना बी माई बॉयफ्रेंड ।”
निवान ने एक धीमी सांस ली —
“मुझे नहीं लगता ये ज़रूरी है…”
वामिका ने अचानक ब्रेक मारा — कार झटका खाकर रुकी।
उसने स्टीयरिंग से हाथ हटाया, पूरी तरह उसकी तरफ मुड़ी और तीखे स्वर में कहा —
“निवान, ये कोई कॉलेज प्रोजेक्ट नहीं है। ये एक डील है — मेरी छवि, मेरा नाम, मेरी कहानी। और उसमें तुम एक किरदार हो। अब अगर किरदार निभाना है, तो वैसे ही दिखना होगा जैसा डायरेक्टर चाहता है।”
निवान कुछ पल उसे देखता रहा — फिर धीरे से बोला,
“और डायरेक्टर आप हैं।”
वामिका ने उसकी आँखों में देखा।
वो डरपोक नहीं था — पर ना ही लड़ने वाला।
बस… स्थिर था।
ज़रूरत से ज़्यादा स्थिर।
“एग्जेक्टली,” उसने ठंडे स्वर में कहा और फिर कार दोबारा स्टार्ट की।
कुछ देर बाद कार एक लग्ज़री क्लोदिंग स्टूडियो के सामने रुकी।
वामिका बाहर निकली — और बिना मुड़े बोली —
“चलो।”
निवान पीछे-पीछे चलने लगा।
अंदर घुसते ही इंटीरियर ने जैसे एक झटका दे दिया हो उसे— हर तरफ रैक्स पर डिज़ाइनर कपड़े, महकते परफ्यूम्स, और सामने ग्लास में अपना चेहरा देखकर खुद निवान भी थोड़ा चौंका।
वामिका ने स्टाइलिस्ट को इशारे से पास बुलाया —
“इन्हें पूरी तरह ट्रांसफॉर्म करना है। बाल, कपड़े, एक्सेसरीज़ — एवरीथिंग. इनका पूरा लुक बदलो।”
स्टाइलिस्ट तुरंत मुस्कुराते हुए आगे आया।
“कम विद मी, सर,” उसने कहा।
निवान ने एक नज़र वामिका पर डाली — वो सोफे पर बैठ चुकी थी, फोन पर बिज़ी, मानो ये सब उसका रोज़ का काम हो।
वो चुपचाप स्टाइलिस्ट के पीछे चल पड़ा।
अगले ही पल वो हेयर वॉश एरिया में थे।
स्टाइलिस्ट ने निवान को एक बड़ी सी रीक्लाइनिंग चेयर पर बैठाया और धीरे-धीरे उसके बालों में गुनगुना पानी डाला।
निवान को बहुत अजीब लग रहा था।
कहाँ वो… कपड़े धोने वाले साबुन से अपने बाल धोता था — और कहाँ ये... महंगे शैम्पू की खुशबू, मुलायम हाथों की मसाज, और पीछे बजता सॉफ्ट म्यूज़िक।
उसने आँखें बंद कर लीं — पर शांति नहीं मिली।
ये सब... ज़्यादा था।
बिल्कुल अलग।
नकली सा।
“आर यू ओके, सर?” स्टाइलिस्ट ने मुस्कुराकर पूछा।
निवान ने हल्का सा सिर हिलाया —
“हां… बस थोड़ा नया है सब। थोड़ा ज़्यादा नया।”
स्टाइलिस्ट हँस दिया —
“यू वॉन्ट बी युज़्ड टू इट इन नो टाइम, सर।”
निवान मन ही मन सोच रहा था —
“लेकिन मैं यूज़्ड टू होना चाहता भी नहीं।”
स्टाइलिस्ट ने अब हेयरकट शुरू कर दिया था। बड़े ध्यान से, जैसे कोई कलाकार कैनवस पर ब्रश चला रहा हो।
इधर, बाहर…
वामिका अब भी अपने फोन में बिज़ी थी, लेकिन उसकी आँखें बार-बार उस कांच की दीवार की तरफ उठ रही थीं — जहाँ से अंदर का दृश्य हल्का-हल्का दिख रहा था।
करीब बीस मिनट बाद, स्टाइलिस्ट ने बालों की कटिंग पूरी की और एक बार फिर मुस्कुराकर बोला —
“अब चलते हैं फेस क्लीनअप की तरफ, सर। प्लीज़ इधर आइए।”
“फेस क्या?” निवान ने चौंककर पूछा।
निवान उठा और धीरे-धीरे उसके पीछे चलता गया।
कमरे के एक कोने में एक और रीक्लाइनिंग चेयर थी, सामने गोल लाइट वाला बड़ा शीशा। चारों तरफ स्किनकेयर प्रोडक्ट्स की कतारें — जिनके नाम तक वो नहीं पहचान पा रहा था।
जैसे ही वो चेयर पर बैठा, स्टाइलिस्ट ने एक नर्म टॉवल से उसके चेहरे को ढक दिया।
निवान ने आंखें बंद कीं —
भीतर कुछ बेचैनी थी।
“चेहरे पर इतने पैसे कोई क्यों खर्च करता है? साबुन से धोना क्या काफी नहीं होता?”
उसका मन बड़बड़ाने लगा।
स्टाइलिस्ट अब उसके चेहरे पर स्क्रब कर रहा था ।
अब चेहरे पर ठंडी क्रीम लगाई जा रही थी, फिर मसाज — वो आरामदायक था, लेकिन निवान का दिमाग उस पल भी पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पा रहा था।
“चेहरे पर ये क्रीम रगड़ रगड़ कर कही मेरे चेहरे को रबड़ ना बना दें ये लोग…” वो धीरे से बड़बड़ाया।
“सॉरी?” स्टाइलिस्ट ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।
निवान ने चौंक कर आंखें खोलीं —
“नहीं… कुछ नहीं…”
मसाज खत्म हुआ, मास्क लगाया गया, और कुछ देर के लिए उसे वहीं अकेला छोड़ दिया गया।
शीशे में खुद को देखकर कुछ पल तक वह बस देखता ही रह गया। चेहरा साफ़, दमकता हुआ, जैसे किसी टीवी ऐड का मॉडल।
कुछ देर में स्टाइलिस्ट वापस आया।
“डन, सर! यू आर रेडी फॉर द ट्रायऑन।”
अब उसे एक ट्रायल रूम की तरफ ले जाया गया, जहाँ पहले से कुछ डिज़ाइनर सूट, जैकेट्स, शर्ट्स और एक्सेसरीज़ रखी थीं।
हर कपड़ा महकता हुआ, हर बटन चमकदार —
“एक शर्ट की कीमत में तो हमारे घर की आधी ग्रोसरी आ जाए…”
उसने मन ही मन सोचा।
“ये शर्ट… कितने की होगी?” उसने एक शर्ट की तरफ इशारा करके धीरे से पूछा।
“ये? अराउंड थर्टी-फ़ाइव थाउज़ेंड, सर,” स्टाइलिस्ट ने बेपरवाही से कहा।
निवान का हाथ वहीं रुक गया।
“पैंतीस हज़ार… एक शर्ट के लिए?”
“पैंतीस हज़ार में तो मेरी माँ पूरे साल भर का राशन लाती हैं…”
उसने धीरे से शर्ट वापस रख दी।
“कोई सस्ती वाली नहीं है क्या?” उसने झिझकते हुए कहा।
स्टाइलिस्ट हँस पड़ा — “सर, यहाँ ‘सस्ता’ कुछ नहीं है।"
“सर, ये वाला पहनिए — और ये शूज़ इसके साथ परफेक्ट लगेंगे,”
स्टाइलिस्ट ने एक गहरे नीले रंग का ब्लेजर, सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउज़र उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा।
निवान ने अनमने ढंग से कपड़े लिए और ट्रायल रूम में घुस गया।
अंदर जाते ही उसने दरवाज़ा बंद किया और खुद को शीशे में देखा।
शर्ट को छूकर देखा —
“इतना मुलायम… ये तो तौलिये से भी ज़्यादा आरामदायक है।”
फिर ब्लेजर उठाया —
“अगर इस पर दाल गिर गई तो? कपड़े कैसे धोऊंगा मै…”
उसने धीरे-धीरे कपड़े बदले।
जब उसने खुद को पूरी तरह तैयार होकर शीशे में देखा, तो कुछ पल के लिए उसकी सांस रुक गई।
वो… वो जो सामने खड़ा था, वो कोई और लग रहा था।
बाल करीने से सेट, चेहरा दमकता हुआ, और वो ब्रांडेड कपड़े...
पर… आँखें अब भी वैसी ही थीं — उलझी हुई, सवालों से भरी।
“क्या ये मैं हूँ?”
उसने हल्के से दरवाज़ा खोला और बाहर निकल आया।
स्टाइलिस्ट ने तुरंत मुस्कुराकर कहा —
“पर्फेक्ट! चलिए, मैम को दिखाते हैं।”
निवान को लगा जैसे स्कूल में कोई टीचर प्रोजेक्ट चेक करने वाली हो।
वो स्टाइलिस्ट के साथ वामिका की तरफ बढ़ा।
वामिका अब भी फोन में बिज़ी थी — पर जैसे ही उसने उसकी आहट सुनी, उसने सिर उठाया।
उसकी नज़रें पहले एक पल को रुकीं — फिर धीरे-धीरे उसने फोन नीचे रखा।
निवान थोड़ी दूरी पर आकर खड़ा हो गया, दोनों हाथ साइड में, जैसे कोई जजमेंट का इंतज़ार कर रहा हो।
वामिका की नज़रें उसके बालों से लेकर शर्ट के कॉलर से लेकर शूज़ तक गईं।
“हम्म…” उसने सिर हल्का सा झुकाया, फिर बोली —
“यू क्लीन अप वेल, मिस्टर मिडल क्लास।”
निवान ने हल्की सी मुस्कान दी —
“थैंक यू… मैडम हाई क्लास।”
वामिका मुस्कुरा दी।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
वामिका ने बिना कुछ कहे निवान का हाथ पकड़ा — और तेज़ी से दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी।
उसका हाथ...
उसके हाथ की पकड़ गर्म थी, मज़बूत थी...
निवान के लिए यह पहली बार था, जब किसी लड़की ने इस तरह उसका हाथ थामा था — ऐसे जैसे वो उसका अपना हो।
वो वहीं रुक गया।
“चलो,” वामिका ने पीछे देखे बिना कहा, “मीडिया वाले बाहर वेट कर रहे होंगे, अब ड्रामा जो पूरा करना है।”
निवान कुछ नहीं बोल पाया।
वो बस उसकी उँगलियों की पकड़ को महसूस कर रहा था और भीतर कहीं, एक सिहरन सी दौड़ गई ।
उसका दिल धक-धक करने लगा।
वामिका ने पलटकर देखा और भौहें उचकाई।
निवान धीरे से बोला — “आपने... मेरा हाथ पकड़ा।”
वामिका एक पल को ठिठकी। फिर हल्के से मुस्कुरा दी — “हाँ, पकड़ा है। रिलेशनशिप का ड्रामा बिना टच के थोड़ी होता है। चलो अब।”
निवान हल्के से सिर हिलाकर, उसके साथ कदम मिलाने की कोशिश करने लगा।
पर दिल अभी भी उसकी उँगलियों की गर्मी से उलझा था।
दोनों बाहर निकले।
तभी ...
फ्लैश!
बाहर कदम रखते ही कैमरों की फ्लैश लाइट्स उन पर टूट पड़ीं।
रिपोर्टर्स चिल्लाए —
“वामिका मैम! इज़ ही योर बॉयफ्रेंड?”
“व्हाट्स हिज़ नेम?”
“आर यू टूगैदर?”
निवान घबरा गया — इतनी तेज़ लाइट्स, इतने सवाल, और अचानक से सबकी निगाहें उसी पर।
पर वामिका… वामिका शांत थी।
उसने मुस्कुराकर निवान की तरफ देखा — और कैमरों के सामने उसका हाथ और कसकर थाम लिया।
वामिका ने भीड़ की तरफ देखा — चकाचौंध करते कैमरे, माइक लिए बढ़ते रिपोर्टर्स, हर एक चेहरा जैसे सनसनी की तलाश में झुका चला आ रहा हो।
निवान की उंगलियाँ उसकी हथेली में जकड़ी हुई थीं — उसका हाथ थोड़ा कांप रहा था।
वामिका ने उसकी ओर देखा — फिर सीधे कैमरों की तरफ मुड़कर तेज़ आवाज़ में बोली—
"ही’ज़ स्केयर्ड। माई बॉय इज़ नॉट यूज़्ड टू दिस सर्कस। प्लीज़ मूव असाइड एंड मुझे आप सबको कोई जवाब नहीं देना है।"
कुछ रिपोर्टर्स सकपका गए। कैमरे कुछ इंच नीचे हो गए।
“पर मैम, बस एक स्टेटमेंट—”
“नो स्टेटमेंट्स!” वामिका सीधे मना कर दिया।
"बट मैम..."
“आपको हेडलाइन चाहिए, ना? तो सुनिए — हम साथ हैं। बाकी जो समझना है, वो आप खुद समझ लीजिए। अब रास्ता दीजिए।”
फिर वो निवान की तरफ थोड़ा झुकी और धीमे से बोली —
“जस्ट वॉक विद मी। लुक स्ट्रेट। डोंट थिंक।”
लेकिन… रिपोर्टर तो रिपोर्टर — एक पीछे हटा तो दूसरा आगे बढ़ गया।
“मैम! कल एक आर्टिकल वायरल हो रहा था कि आपके पास सब कुछ है — वेल्थ, पावर, प्रेज़ेन्स… बट नो पार्टनर? नॉट ईवन अ व्हिस्पर ऑफ रोमांस?......आज अचानक आपको किसी लड़के के साथ देखना क्या ये सिर्फ मीडिया के लिए लिया गया स्टंट है?या फिर कोई ड्रामा ?”
रिपोर्टर का सवाल किसी तीर की तरह हवा चीरता हुआ आया ।
वामिका वहीं रुक गई।
उसकी आंखें अब मुस्कुरा नहीं रही थीं — वो ठंडी हो गई थीं, सीधी उस रिपोर्टर की आंखों में गड़ीं।
“ड्रामा?” वामिका का लहजा एकदम स्थिर था, लेकिन हर शब्द जैसे चाकू की धार।
“अगर किसी औरत की ज़िंदगी में किसी का आना ‘ड्रामा’ कहलाता है, तो फिर आप सबका रिपोर्टिंग करना ‘तमाशा’ क्यों नहीं?”
रिपोर्टर सकपकाया, पर बोला — “हम तो बस... सवाल पूछ रहे हैं।”
“तो जवाब सुनो —” वामिका ने कहा और एक पल को चुप हो गई।
सभी कैमरों की लेंस अब और भी ज़ूम हो गई थीं।
हर माइक एक इंच और करीब आया।
निवान का दिल अब जैसे उसकी छाती से निकलकर उसके गले में धड़क रहा था।
उसकी साँसें हल्की-हल्की चल रही थीं।
उसकी आँखें वामिका को देख रही थीं लेकिन वामिका की आंखो में कोई डर नहीं था, वहां सिर्फ़ एक गहरी स्थिरता थी।
और तभी…
वामिका ने अचानक सामने खड़े मीडिया को अनदेखा कर, अपना चेहरा निवान की तरफ मोड़ा — और अचानक से उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए।
सब कुछ एक पल को ठहर गया।
फ्लैश चमकना भूल गया।
माइक हिलना बंद हो गए।
रिपोर्टर्स की आवाज़ें गले में अटक गईं।
और निवान…
बेचारा निवान तो जैसे वहीं रुक गया।
वो तो पहले ही वामिका के लहजे से कांप रहा था — और अब…
अब ये?
उसके होठ थरथरा गए, साँसें रुक गईं, और आँखें खुली की खुली रह गईं।
उसने कभी नहीं सोचा था कि इतने लोगों के सामने...
इतनी चमकती लाइट्स के बीच...
इतने कैमरों के सामने...
वो किसी के होंठ महसूस करेगा —
वो भी वामिका के।
वो पल छोटा था, पर बहुत कुछ कह गया।
वामिका ने धीरे से खुद को पीछे खींचा, उसकी आँखें अब फिर से नरम थीं।
वो निवान के चेहरे की घबराहट को देखकर हल्के से मुस्कुरा दी।
फिर मीडिया की ओर मुड़कर बोली —
“अब अगर ये भी ड्रामा लगे, तो शायद आपकी ज़िंदगी में प्यार नाम की कोई चीज़ कभी आई ही नहीं।”
उसने निवान का हाथ फिर से थामा, इस बार और मज़बूती से —
और भीड़ को चीरती हुई आगे बढ़ गई।
रिपोर्टर्स अब भी कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
निवान बेचारा वो हैरान ही रह गया।
उसके होठ अभी भी थरथरा रहे थे, दिल तेज़ी से धड़क रहा था, और दिमाग़ में हर पल वो वामिका के होंठों का एहसास गूंज रहा था।
इतनी भीड़, इतनी चमकदार रोशनी, और अचानक उस किस का पल... वो सब कुछ उसके लिए अभी भी सपने जैसा लग रहा था।
वो खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था, पर अंदर से पूरी तरह हिल चुका था।
“मैं... मैं...” उसने धीरे से फुसफुसा कहा , लेकिन शब्द जुड़ ही नहीं पाए।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
वामिका कार चला रही थी, सड़क की हल्की रोशनी उनके चेहरे पर पड़ रही थी। निवान पास की सीट पर बैठा, उसकी आँखें बार-बार वामिका की ओर उठतीं, फिर नीचे गिर जातीं।
वामिका ने अचानक बिना उसकी तरफ देखे, ठंडी आवाज़ में कहा,
“क्या तुम मुझे घूरना बंद करोगे?”
निवान ने हिचकिचाते हुए कहा ,
“आपने तो कहा था न… कोई ऐसी-वैसी हरकत नहीं करनी है। हम सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट रिलेशन में हैं… सिर्फ दिखावा…”
वामिका ने धीरे-धीरे कार की स्पीड बढ़ाई, फिर बिना उसकी तरफ देखे बोली —“तो?”
निवान चुप रहा…
उसके पास कोई जवाब नहीं था।
उसने अपनी उंगलियाँ आपस में भींच लीं। थोड़ा सा खुद में सिमट गया।
फिर वामिका ने अचानक कहा —
“जो मैंने किया वो एक जवाब था… तमाशे को तमाचा देने वाला जवाब बस। और वैसे भी मुझे कोई शौक नहीं है तुम्हें किस करने का। तुम सिर्फ मेरे कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड हो।”
निवान ने अपने आप से बहुत हल्के, लगभग बुदबुदाते हुए कहा —
“मुझे भी कोई शौक नहीं है…”
लेकिन वामिका, जो बाहर देखने में व्यस्त लग रही थी —
उसने सुन लिया था।
उसने तुरंत एक्सप्रेशन नहीं बदला, पर उसकी नजरें एक पल को स्टीयरिंग पर सख्त हो गईं।
“हंह? क्या कहा तुमने?”
निवान एकदम चौंक गया।
उसने खुद को कोसा — कि क्यों कहा, कैसे कहा, और क्यों वामिका ने सुन लिया।
वो झेंपते हुए बोला —
“कुछ नहीं… बस… मैं…”
वामिका ने हल्के से ब्रेक पर पैर रखा, कार थोड़ी धीमी हुई।
फिर उसने कहा —
“नाटक मत करो। साफ-साफ बोलो, क्या कहा?”
निवान धीरे से, झुंझलाते हुए बोला—
“बस इतना ही कि… मुझे भी कोई शौक नहीं है कि मैं कैमरों के सामने... किसी अजनबी से…”
वामिका की आँखें अब उस पर एक पल के लिए टिकी ।
वो हँसी नहीं, न ही गुस्सा हुई ।
फिर वो वापस रोड पर देखने लगी और ठंडे स्वर में बोली —
“अजनबी? अच्छा… अब हम अजनबी हैं?”
निवान चुप रहा।
उसने कोई सफाई नहीं दी। वो जानता था — वामिका की बात का जवाब देना आसान नहीं था।
और शायद ज़रूरी भी नहीं।
कुछ मिनट तक दोनों चुप रहे।
फिर…
वामिका ने खुद ही वो चुप्पी तोड़ी —
“तुमने ये जॉब क्यों लिया था?”
निवान ने सिर मोड़कर उसकी तरफ देखा —
“कहा था न, बहन की सर्जरी।”
वामिका धीरे से बोली —
“और अब?ढंग से 24 घंटे नहीं हुए और तुम्हें लगता है ये सब तुम्हारे लिए बोझ बन गया है?”
निवान ने हल्का सा सिर हिलाया —
“नहीं। बस… थोड़ा भारी है। इतना सब… रोज़-रोज़ की लाइमलाइट… मैं इसके लिए बना ही नहीं हूँ न।”
वामिका बोली —"सब कुछ सिर्फ़ एक समझौता है, मिस्टर चौहान।”
निवान ने खिड़की की तरफ देखा।
फिर धीरे से बोला —
“तब शायद उस समझौते में…
ऐसे पलों की कोई जगह होनी ही नहीं चाहिए थी।”
वामिका ने भौंहें चढ़ाईं — एक पल को उसकी पकड़ स्टीयरिंग पर कसी।
“कौन से पल?”
निवान ने धीरे से कहा—
वो जब आपने मुझे किस किया था — एक तमाशे के नाम पर।
आपने कहा था ‘नो इमोशन्स, नो एक्सपेक्टेशन्स’।
मैंने मान लिया।
पर आपके एक लम्हे ने… सब गड़बड़ा दिया।”
वामिका एक झटके में उसकी तरफ मुड़ी—"तो तुम चाहते हो कि मैं तुमसे माफी मांगू?"
निवान ने अपनी गर्दन हां में हिला दी।
वामिका की आंखे सिकुड़ गई।
"माफी?"
"तुम मुझसे माफी की उम्मीद कर रहे हो?"
निवान ने सिर नीचा किया, पर फिर सीधा देखा और कहा—
"मैंने सिर्फ़ कहा... अगर आपने मेरी लिमिट क्रॉस की, तो माफी बनती है।"
वामिका हँसी ।
"लिमिट? मिस्टर चौहान, तुम्हारी लिमिट वहीं ख़त्म हो जाती है जहां मेरा नाम शुरू होता है।
मैं वामिका रौशन हूँ — 12 कंपनियों की सीईओ, टॉप 10 एशियन पावर लिस्ट में नाम, और इस देश की सबसे कम उम्र की सेल्फ-मेड अरबपति।"
उसने कार को फिर से तेज़ कर दिया।
"तुम क्या हो?" उसने पूछा — तेज़ लेकिन ठंडे लहजे में।
"एक मिडल क्लास लड़का जो दिल्ली यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में काम करता है।जिसे आज सुबह मैंने कॉन्ट्रैक्ट पर रखा… सिर्फ़ इसलिए ताकि मीडिया के सामने मेरा अकेलापन कमज़ोरी ना बन जाए।"
निवान के हाथ मुट्ठी में बंधे थे। वो चुप था, लेकिन उसकी आँखों में कुछ टिमटिमा रहा था — चोट नहीं, आत्म-सम्मान।
कार धीरे-धीरे उस बड़े से बंगले के गेट के सामने पहुंची।
बंगला बहुत बड़ा और आलीशान था —
महल जैसा, जिसके बाहर चमचमाती लाइटें, महंगे फूलों के गमले, और एक भारी-भरकम गेट था।
गार्ड ने फौरन गेट खोला और सिर झुकाकर सलाम किया।
कार रुकी।
वामिका ने बिना निवान की ओर देखे कहा —
“उतरो।”
निवान चुपचाप बैठा रहा।
दो सेकेंड… तीन सेकंड…
वामिका की भौंहें ऊपर उठीं।
वो उसकी ओर मुड़ी ।
“मिस्टर चौहान, उतरो।”
उसका स्वर अब आदेशात्मक था।
लेकिन निवान वो वही बैठा हुआ था।
वामिका ने अपनी गर्दन उसकी ओर घुमाई।
उसके चेहरे पर अब खीझ साफ़ दिख रही थी।
“मिस्टर चौहान…”
उसने धीमे लेकिन तीखे लहजे में कहा,
“ये मुंह फुलाने और बच्चों जैसी हरकतें... बंद करो।”
निवान ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसका चेहरा दूसरी तरफ था, आँखें नीचे, होंठ ज़रा से फूले हुए।
जैसे किसी ने उसका पसंदीदा खिलौना छीन लिया हो —
या शायद... कोई एहसास।
वामिका ने गहरी साँस ली।
फिर हाथ से अपनी आँखें मलीं — थकान, या शायद झुंझलाहट छुपाने के लिए।
“तुम्हें लगता है ये सब बहुत मासूम लगता है?”
उसकी आवाज़ थोड़ी धीमी पड़ी, लेकिन अब भी सख्त थी।
“तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो। भले ही कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड...
पर मीडिया, पब्लिक, और मेरे आसपास के लोग यही मानेंगे कि हम रियल हैं।
तो प्लीज़... ये ‘नाराज़ बच्चा’ एक्ट… मेरे सामने मत करना।”
निवान ने अब भी कुछ नहीं कहा।
उसके चेहरे पर कोई साफ़ रिएक्शन नहीं था, लेकिन उसकी उंगलियाँ अब घुटनों पर हल्के-हल्के कांप रही थीं।
वामिका ने झुंझलाकर कार का दरवाज़ा खोला और बाहर निकल आई।
फिर उसके दरवाज़े की तरफ आई, हाथ से खटखटाया।
“चलो, बाहर निकलो।
वरना मुझे तुम्हें उठाकर ले जाना पड़ेगा — जो बहुत ड्रामेटिक होगा, और मैं पहले ही थकी हुई हूँ।”
निवान ने उसकी तरफ देखा।
“आप तो कहती थीं, लिमिट वहीं खत्म होती है जहां आपका नाम शुरू होता है...”
उसने आगे कहा,
“तो फिर मेरे पास रूठने का भी हक नहीं?”
वामिका कुछ पल उसे देखती रही।
फिर हल्की सी हँसी उसके चेहरे पर आई ।
“ मिस्टर चौहान !तुम गुस्से में भी इतने शरीफ लगते हो... कि कोई तुम्हें थप्पड़ मारे और तुम उसे पानी पिलाने लगो।”
निवान ने भी हल्की सी मुस्कान दी, लेकिन जल्दी ही वो गायब हो गई।
फिर उसने एक लंबी साँस ली, और कार से उतर आया।
दोनों कुछ कदम साथ चले — बंगले की ओर।
वामिका ने चलते हुए धीरे से कहा —
“कल सुबह आठ बजे एक प्रेस मीट है।
तुम्हे मेरे कंधे पर हाथ रखना पड़ेगा, मुस्कुराना पड़ेगा, और आई लव यू भी कहना पड़ सकता है।”
निवान ने तुरंत कहा —
“...पर मैंने कभी किसी लड़की को आई लव यू नहीं कहा है।”
वामिका के कदम एक पल को थमे।
“कभी नहीं?”
उसने पूछा — जैसे उसे भरोसा ही न हो।
निवान ने सिर हिलाया, बेहद संजीदगी से —
“कभी नहीं।
मेरे लिए वो लफ़्ज़… बहुत बड़ा है।
इतना बड़ा कि बस यूं... मीडिया के लिए, कैमरों के सामने... कह नहीं सकता।”
वामिका कुछ देर चुप रही।
फिर वो उसके पास झुकी, इतनी कि उसकी आवाज़ सीधी निवान के कानों में गूंजी —
“तो सीख लो, मिस्टर चौहान।”
और सीधे उसकी आँखों में देखकर मुस्कुरा दी — वो मुस्कान जो शहद की तरह मीठी नहीं थी, लेकिन ज़हर की तरह असरदार ज़रूर थी।
निवान ने कुछ नहीं कहा। बस उसने पीछे पीछे चलने लगा।
जहां वामिका तेज़ी से चल रही थी, लेकिन निवान के कदम धीमे और लड़खड़ाते थे।
निवान के माथे पर पसीने की नन्हीं बूंदें चमकने लगी थीं, और आंखें... आधी खुली, आधी बंद।
वामिका ने ध्यान नहीं दिया —
या यूं कहें, ध्यान देना नहीं चाहा।
पर जैसे ही उन्होंने मेन हॉल का मोड़ पार किया,
निवान की चाल एकदम धीमी हुई... और फिर अचानक —
धप्प!
वो वहीं, फर्श पर बैठ गया। नहीं — धसक गया, जैसे किसी ने उसकी सारी ताकत खींच ली हो।
वामिका पलटी।
"अब क्या नया ड्रामा है?" वो बड़बड़ाई।
"मिस्टर चौहान," उसने झुकते हुए कहा,
"मैंने कहा था ओवरएक्टिंग मत करना।"
पर जवाब नहीं आया।
निवान की आंखें बंद थीं, चेहरा सफेद, और होंठ सूखे।
उसके सीने की हल्की हलचल बता रही थी कि वो ज़िंदा है — लेकिन बिलकुल होश में नहीं।
वामिका का चेहरा बदल गया —
क्रोध से हैरानी, फिर चिंता में।
"ओ गॉड..." उसने फौरन उसका कंधा पकड़कर हिलाया,
"निवान? मिस्टर चौहान?… ये मज़ाक अच्छा नहीं है…"
पर निवान की गर्दन ढीली थी।
वामिका ने अपने हाथों से उसे संभालने की कोशिश की —
लेकिन जैसे ही उसने उसका वजन उठाना चाहा, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं —
“ओह फॉर गॉड्स सेक—”
उसने झल्लाकर कहा,
“कितना भारी है ये लड़का...!”
उसका खुद का बैलेंस बिगड़ गया, और वो भी आधी सी बैठी रह गई —
एक हाथ से निवान की पीठ को थामे, दूसरा ज़मीन पर टिका कर।
"गार्ड!"
उसने ज़ोर से चिल्ला कर पुकारा।
"गार्ड!"
कुछ ही पलों में दरवाज़े से दो सिक्योरिटी गार्ड भागते हुए अंदर आए।
"मैम?"
वामिका ने खीजकर कहा —
"उसे… मेरे कमरे के बगल वाले रूम में ले चलो।
और डॉक्टर को बुलाओ। नहीं… नहीं — डॉक्टर नहीं, बस नींबू पानी भेजो। शायद बस शुगर लो हो गई है।"
गार्ड्स ने सिर हिलाया और सावधानी से निवान को उठाने लगे।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
निवान अगले ही पल बड़े से बेड पर लेटा हुआ था।
उसकी आँखें धीरे-धीरे खुलीं।
उसे अपने सामने कुछ धुंधला सा दिखा और अगले ही पल उसके मुंह तेज चीख निकल पड़ी।
वामिका झल्ला उठी—
“ इडियट ..इतनी तेज़ चीख क्यों मारी?”
निवान की आंखे अब पूरी तरह खुल चुकी थी उसने सांस लेते हुए कहा, “म...मुझे लगा... च...चुड़ैल आ गई है!”
वामिका की भौंहें तनीं, वह उसे घूरने लगी।
“ मिस्टर चौहान,” उसने कड़क आवाज़ में कहा, “तुमने इतनी हिम्मत ....तुमने मुझे ‘चुड़ैल’ कहा? क्या तुम भूल गए मैं कौन हूँ?”
निवान ने एक पल को चुपचाप वामिका को देखा।
वो हल्का मुस्कुराया, और बेहद मासूमियत से बोला —
“न-नहीं, मैं तो... नींद में था। सपना देख रहा था शायद।”
फिर सिर खुजलाते हुए बोला,
“सपने में किसी ने मेरे कान में चीखा ... बिल्कुल वैसे ही जैसे अभी मैं चीखा था।”
वामिका का मुंह खुला का खुला रह गया।
फिर वो चुपचाप पलटी, कमरे में टहलने लगी।
“भगवान का शुक्र है, तुम ज़िंदा हो,” उसने बड़बड़ाते हुए कहा,
“वरना मैं इस कॉन्ट्रैक्ट के साथ-साथ केस भी झेल रही होती।”
निवान उठने की कोशिश करता है, लेकिन तभी उसकी नजर पूरे रूम में पड़ी।
उसका मुंह खुला का खुला रह गया।
“ये… ये क्या है…”
उसने फुसफुसाकर कहा।
अगले ही पल वो झटके से बेड से उतरा —
“ये आपका रूम है?!”
वामिका धीमे से बोली —
“नहीं। मेरा रूम तो बगल वाला है।”
“तो फिर—?” निवान ने हैरान होकर पूछा।
वामिका उसकी ओर पलटी, और बहुत ही नॉर्मल टोन में बोली —
“ये रूम आज से अगले तीन महीने के लिए तुम्हारा है।”
निवान ऐसे पीछे हटा जैसे किसी ने उसके सामने हीरा रखकर कहा हो ‘ये खा लो’।
“क्या??” उसकी आवाज़ एकदम ऊँची हो गई,
“न-नहीं… नहीं, मैं यहां नहीं रह सकता!”
वामिका ने भौंहें उठाईं, “कोई समस्या?”
“समस्या?”
निवान कमरे की ओर इशारा करता है —
“ये रूम… रूम नहीं, महल है!
मेरी तो पूरी कॉलोनी में इतना स्पेस नहीं है जितना इस रूम में है!
मुझे आदत नहीं है ऐसी जगह की।”
वामिका अब पास आ गई थी।
उसने उसकी ओर देखा और हल्के व्यंग्य से बोली —
“आदतें बदली जा सकती हैं, मिस्टर चौहान।
और वैसे भी, ये सिर्फ़ तीन महीने हैं।
रहना है, निभाना है... और मेरा ‘बॉयफ्रेंड’ दिखना है।”
निवान ने असहज होकर गर्दन खुजाई,
“लेकिन... ये अजीब सा लगता है।
मैं तो सोच रहा था मुझे स्टाफ क्वार्टर या गेस्ट रूम जैसा कुछ मिलेगा... ये तो—”
वामिका ने बीच में टोका —
“स्टाफ क्वार्टर? तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो,मिस्टर चौहान ।
गेस्ट नहीं, पोस्टर बॉय हो तुम इस पूरे तमाशे के।
तो जितना ‘रॉयल’ दिखोगे, उतना ‘रियल’ लगोगे।”
निवान ने अभी भी असहजता नहीं छोड़ी,
“पर मेरा सामान, मेरे कपड़े… वो तो मेरे पुराने बैग में हैं। इस रूम में तो… महंगे सूट्स, घड़ियाँ, परफ्यूम्स…”
वामिका ने लंबी सांस ली, जैसे उसकी सहनशक्ति का इम्तिहान लिया जा रहा हो।
“वो सब अब तुम्हारा है,” उसने स्पष्ट लहजे में कहा,
“सूट्स, घड़ियाँ, परफ्यूम्स — सब ब्रांड न्यू, तुम्हारे लिए खरीदे गए हैं। और हां, तुम्हारे पुराने बैग वाले कपड़े — उन्हें लॉन्ड्री में भेज दिया है। मेरी इमेज के साथ मेल खाना सीखो, मिस्टर चौहान।”
निवान ने धीरे से बड़बड़ाया —
“कपड़े बदलने से कोई इंसान रॉयल नहीं हो जाता…”
वामिका ने सुना। बहुत अच्छे से सुना।
वो उसकी ओर मुड़ी—
“सही कहा,” उसने शांत लेकिन सख्त आवाज़ में कहा,
“कपड़े नहीं बदलते इंसान को… पर दुनिया?
उसे कपड़ों से ही फर्क पड़ता है।
और हम फिलहाल उसी दुनिया को बेवकूफ बना रहे हैं।”
निवान चुप हो गया।
वो थोड़ा झेंपता है, फिर कमरे के कोने में रखे वॉर्डरोब की ओर बढ़ता है।
दरवाज़ा खोलते ही उसकी आँखें चौंधिया जाती हैं —
लाइन से टंगे महंगे कोट्स, सिल्क शर्ट्स, ब्लेज़र्स, और नीचे अलमारी में रखे चमचमाते जूते।
एक सेक्शन में घड़ियों की कतार, जैसे किसी म्यूज़ियम में हो।
और सबसे ऊपर, एक शेल्फ पर लिखा था —
“निवान चौहान – लिमिटेड एडिशन”
उसका मुंह खुला रह गया।
“लिमिटेड एडिशन?”
उसने हैरानी से पूछा।
वामिका मुस्कुरा दी —
“ब्रांडिंग ज़रूरी है।
मीडिया को लगे कि तुम कोई आम लड़के नहीं, एक ‘मिस्ट्री मैन’ हो।
पैसे नहीं... पर्सनालिटी बिकती है, मिस्टर चौहान।”
निवान ने वॉर्डरोब का दरवाज़ा धीरे से बंद किया।
फिर उसने वामिका की ओर देखा, गंभीरता से बोला—
“आपको लगता है ये सब दिखावा कभी भी रियल फील करेगा?”
वामिका ने उसकी आँखों में सीधे झांकते हुए कहा —
“नहीं।
लेकिन असलियत की भूख, और फरेब की भूख —
इन दोनों में बस एक कैमरा का फर्क होता है।
और हमें कैमरे को खाना देना है, सच्चाई को नहीं।”
कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर वामिका ने हल्का सा सिर झुकाया,
“अब फ्रेश हो जाओ। तुम्हारे लिए स्टाइलिस्ट आ रही है।
और हाँ, चेहरे पर वो ‘छोटे शहर वाला इनोसेंस’ थोड़ी देर के लिए छुपा देना… कल प्रेस मीट में तुम्हें वामिका रौशन का बॉयफ्रेंड लगना है, किराए का नहीं।”
वो बाहर निकलने लगी, लेकिन दरवाज़े पर रुककर मुड़ी —
“और हाँ —
आई लव यू की प्रैक्टिस कर लेना।
तुम्हें वो तीन शब्द कैमरे के सामने बोलने पड़ सकते हैं।”
निवान का चेहरा एकदम ढीला पड़ गया।
वामिका फिर दरवाज़े की चौखट पर ठिठकी।
निवान की ठहरी हुई हालत पर एक सरसरी नज़र डाली, फिर बोली —
“और हाँ…
डिनर के लिए नीचे आ जाना।
चुपचाप।
कोई बहाना, कोई बहस नहीं चाहिए।”
फिर वो एक झटके से मुड़ी और उसी रॉयल एटीट्यूड के साथ कमरे से बाहर निकल गई।
दरवाज़ा जैसे ही बंद हुआ,
निवान की आँखों से वो “आई लव यू की प्रैक्टिस कर लेना” वाला डायलॉग अब भी धुआं बनकर निकल रहा था।
उसने धीरे से सिर झुकाया…
फिर एक लंबी सांस छोड़ी।
“हुंह…”
उसने मुंह बिचकाया,
“आई लव यू की प्रैक्टिस कर लो!”
वो तेज़ी से कमरे में घूमने लगा —
हर दो कदम पर कुछ बड़बड़ाता, कुछ ताना मारता जैसे वामिका वहीं मौजूद हो।
फिर पलटकर शीशे के सामने खड़ा हो गया।
उसने नकली रोमांटिक एक्सप्रेशन बनाते हुए कहा —
“‘आई लव यू’… आई लव यू… आई लव यू…”
फिर अचानक मुंह बिगाड़ लिया —
“हा! इतनी बार बोलूंगा तो खुद से ही प्यार हो जाएगा!”
वो ज़ोर से हँस पड़ा, लेकिन वो हँसी थोड़ी खोखली सी थी।
फिर चुपचाप बेड पर जा बैठा।
सिर झुकाकर कुछ देर तक घुटनों को ताकता रहा।
“तीन महीने… सिर्फ़ तीन महीने…”
उसने खुद को याद दिलाने की कोशिश की।
लेकिन दिल के किसी कोने में चिढ़ के साथ एक हल्की बेचैनी भी कुलबुला रही थी।
कुछ देर तक निवान बेड पर बैठा रहा,
अपने मन की लड़ाई लड़ता रहा —
“तीन महीने… ये तीन महीने कैसे कटेंगे?”
तभी दरवाज़े पर हल्की खटखटाहट हुई।
दरवाज़ा खुला और एक सर्वेंट अंदर आया।
“साहब, मैडम ने डिनर के लिए बुलाया है,” उसने नम्र आवाज़ में कहा।
निवान ने मुँह बिचकाया,
“हाँ, हाँ, मैं आ रहा हूँ...”
पर मन अभी भी उलझा हुआ था।
निवान जैसे ही सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आया, उसकी आँखें डायनिंग एरिया की चमक देखकर एक पल के लिए ठहर गईं।
सिल्वर लाईनिंग वाली डाइनिंग टेबल, जिस पर एक के बाद एक चांदी की प्लेटें करीने से सजी थीं। क्रिस्टल के ग्लास में वॉटर, और सामने तीन-चार सर्वेंट्स अपनी-अपनी पोज़िशन में एकदम तैयार खड़े थे। और उस शाही टेबल के एक किनारे, वामिका बैठी थी — इस बार एक क्लासी ब्लैक सैटन ड्रेस में ।
निवान को देखते ही उसने नज़रे उठाईं — फिर हल्के से आँखें सिकोड़कर बोली,
"तुमने कपड़े चेंज नहीं किए?"
निवान थोड़ा चौंका, "खाने के लिए भी कपड़े बदलने होते हैं क्या?"
वामिका ने कुर्सी की टेक पर आराम से पीठ टिका दी,
"ये खाना नहीं है, मिस्टर चौहान," उसने बेहद ठहराव के साथ कहा, "ये एक ‘डिनर सेटअप’ है। और यहां डिनर मतलब ड्रेस कोड। समझे?"
निवान ने झुंझलाते हुए गर्दन खुजाई, फिर बड़बड़ाया,
"हमारे यहाँ तो थाली लेकर छत पर बैठ जाते थे... हवा भी मिलती थी, खाना भी पचता था..."
वामिका ने झल्लाते हुए आँखें मूँद लीं और बुदबुदाई —
"हे भगवान, ये लड़का मेरी इमेज का सर्वनाश कर देगा…"
फिर उसने धीमे स्वर में सर्वेंट को इशारा किया —
"प्लेट्स लगाओ।"
वही दूसरी तरफ, एक अंधेरे कमरे में...
कमरे की एक बड़ी स्क्रीन पर वामिका और निवान का वही पल चल रहा था—जब वामिका ने निवान के होंठों को छुआ।
उस स्क्रीन के सामने बैठे शख्स की आँखें कड़कती हुई स्क्रीन पर जमी थीं।
"आई डोंट लाइक दिस..."
उसकी मुठ्ठी अचानक कस गई,
दिल की धड़कन तेज़ हो गई।
"हू इज़ दिस बॉय...
द वन हूज़ सो क्लोज़ टू यू?
इज़ ही द रीजन बिहाइंड योर स्माइल, योर सीक्रेट्स?"
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
अगले दिन सुबह –
वामिका रेडी होकर सीधा निवान के कमरे की ओर बढ़ी।
वो दरवाज़े तक पहुँची…
दरवाज़ा आधा खुला था।
“निवान?”
उसने आवाज़ दी — कोई जवाब नहीं।
वो एक झटके में दरवाज़ा पूरा खोलती है —
और सामने जो नज़ारा था, उसने कुछ पल को उसकी साँसें रोक दीं।
निवान ज़मीन पर सो रहा था।
बिलकुल बेसुध…
एक पतला सा चादर ओढ़े, मुंह खुला पड़ा था,
और उसके खर्राटों की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।
वामिका का माथा ठनका।
“ज़मीन पर?!”
वो धीरे से खुद से बड़बड़ाई।
उसने तेज़ी से कमरे में कदम रखा —
“ये इंसान है या जंगल से आया आदिमानव?”
वो गुस्से में उसके पास झुकी —
“निवान! उठो!!”
निवान कुनमुनाया, करवट बदली पर उसके खर्राटे फिर भी जारी थे।
वामिका ने एक तकिया उठाकर उसके मुंह पर फेंका —
“उठो!! प्रेस है आज!”
निवान हड़बड़ाकर उठ बैठा।
“क्या हुआ?! भूकंप आया क्या?!”
वामिका ने दाँत भींचे —
“भूकंप नहीं आया, तुम आए हो मेरी लाइफ में… और वो भूकंप से कम नहीं है।”
निवान ने जम्हाई ली — फिर उठकर बैठ गया।
आँखें मसलते हुए बोला —
“सॉरी, वो… बेड बहुत नरम है… नींद नहीं आई… ज़मीन पर ही सो गया।”
वामिका कुछ पल उसे देखती रही…
फिर आवाज़ कुछ सख़्त करते हुए बोली —
“तुम्हें पता है तुम कौन हो इस वक़्त?
वामिका रौशन का बॉयफ्रेंड।
और वामिका रौशन के बॉयफ्रेंड की अगर ये खबर बाहर निकली कि वो ज़मीन पर सोता है — तो हमारा बनाया सारा प्लान ध्वस्त हो जाएगा। समझे?”
निवान ने थोड़ा चिढ़ते हुए कहा —
“आपको इमेज बनानी है और मुझे इंसानियत बचानी है?”
वामिका की आँखें कुछ पल के लिए नरम हुईं,
लेकिन उसने खुद को संभाल लिया।
“जवाब नहीं चाहिए।
बस पाँच मिनट में तैयार होकर नीचे आ जाओ।”
फिर उसने गहरी सांस ली,
चादर को उठाया और बेड पर फेंकते हुए कहा —
“कम से कम दिखावे के लिए ही सही… लेकिन बेड यूज़ किया करो।”
वामिका जैसे ही मुड़ने लगी,
पीछे से निवान की मासूम सी आवाज़ आई —
“आप ही रेडी कर दो न…”
वो बच्चों की तरह बोला,
“अगर ठीक से तैयार नहीं हुआ तो आप फिर मुझे सुनाओगी।”
वामिका ने भौहें चढ़ाईं —
“जाओ पहले नहा कर आओ।”
निवान हल्की मुस्कान के साथ बाथरूम की ओर चला गया।
वामिका ने उफ्फ करती हुई सिर झटक दिया और कमरे में इधर-उधर निगाह दौड़ाने लगी।
थोड़ी देर बाद —
बाथरूम का दरवाज़ा खुला।
वामिका ने अनायास ही पलट कर देखा…
और फिर उसका चेहरा जड़ हो गया।
निवान सिर्फ़ एक सफेद टॉवेल लपेटे बाथरूम से बाहर आया था।
बालों से पानी टपक रहा था,
शरीर पर पानी की बूँदें चमक रही थीं,
और चेहरे पर वही मासूम एक्सप्रेशन।
वामिका की नज़र कुछ देर तक टिक गई —
वो उसे सचमुच कुछ पल को घूरती रह गई —
बिलकुल बेझिझक, बेशर्मी से।
निवान टॉवेल थोड़ा ऊपर खींचते हुए,
और अपने बालों पर हाथ फेरते हुए बुदबुदाता है —
“ऐसे घूरिए मत… आदमी शर्मिंदा हो जाता है…”
वामिका ने एकदम खुद को सँभाला,
चेहरा फिर से नॉर्मल करने की कोशिश की।
“घूर नहीं रही थी, बस… एनालाइज़ कर रही थी।”
“क्या?”
निवान ने हैरानी से पूछा।
“तुम्हारी स्किन टोन पर कौन सा आउटफिट ठीक बैठेगा।”
उसने बिना पलक झपकाए कहा —
“और हाँ, अब जल्दी ड्रायर यूज़ करो वरना पानी की बूँदें शर्ट खराब कर देंगी।”
वामिका ने अपनी ही कही बातों पर एक पल को ठहरकर सोचा —
फिर जैसे झुंझलाकर बुदबुदाई…
“मैं भी क्या कह रही हूँ तुमसे…
तुम्हें कहाँ आता होगा ड्रायर यूज़ करना…
कभी किया होता, तब ना…”
निवान थोड़ा सकपका गया,
पर फिर मुस्कुरा दिया —
"सच में नहीं आता..."
वामिका गहरी साँस लेकर उसके पास आई।
“चलो, बैठो यहाँ।”
उसने चेयर की ओर इशारा किया।
निवान धीरे से बैठ गया।
वो पीछे से आई,
और अपने हाथों से उसके गीले बालों को ज़रा झटका देकर संभालने लगी।
बालों से पानी की बूँदें उड़कर उसके गालों तक जा पहुँचीं।
वामिका ने ड्रायर ऑन किया,
और उसके बालों को धीरे-धीरे सुखाने लगी।
निवान ने चुपचाप आँखें मूंद लीं।
वामिका का चेहरा अब थोड़ा झुककर उसके करीब था —
उसकी उंगलियाँ उसके बालों में बहुत सहजता से चल रही थीं।
फिर अचानक, वामिका की नज़र उसकी गर्दन पर पड़ी…
एक छोटी सी कट का निशान था।
वो हल्के से रुक गई।
“ये कैसे हुआ?”
उसने नर्म स्वर में पूछा।
निवान ने आँखें खोलीं।
“पुरानी बात है… बचपन में गिर गया था।”
वामिका की उंगलियाँ कुछ पल वहीं ठहर गईं।
कुछ पल बाद —
वामिका ने ड्रायर बंद किया।
उसके बाल अब सूख चुके थे।
फिर वह वार्डरोब की ओर बढ़ी,
एक ब्लेज़र, सफेद शर्ट और स्लेटी टाई निकालकर लाई।
वामिका ने कपड़े उसके सामने टेबल पर रखे।
“चलो, जल्दी पहन लो ये सब। टाइम नहीं है।”
निवान ने झिझकते हुए शर्ट उठाई,
लेकिन एकदम से वहीं रुक गया।
उसकी नज़र वामिका पर गई…
फिर खुद पर… फिर फिर से वामिका पर।
वो धीमे से बोला —
“आप… आप ज़रा बाहर जाइए ना…”
शरमाते हुए —
“मुझे… शर्म आ रही है।”
वामिका की आँखें धीरे से सिकुड़ गईं।
वो कुछ सेकेंड तक उसे घूरती रही —
“शर्म?”
वो एक भौंह उठाकर बोली,
“तुम्हें?”
निवान ने धीरे से ‘हाँ’ में सिर हिलाया,
टॉवेल पकड़े जैसे कहीं उड़ न जाए।
वामिका ठहाका मार कर हँस दी।
“ओह माय गॉड!"
निवान सकपका गया।
वो उसके पास आई,
और उसी टोन में बोली —
“अभी पाँच मिनट पहले तो तौलिया लपेटकर मेरे सामने वॉक कर रहे थे,
अब शर्म आ रही है?”
निवान ने मासूम सा मुँह बनाया —
“तब पता नहीं था कि आप ऐसे घूरेंगी…”
वामिका का चेहरा अचानक गंभीर हुआ —
फिर उसने धीमे से कहा —
“मैं नहीं घूर रही थी… देख रही थी।”
वो झुकी… उसकी आँखों में देखते हुए।
“फर्क होता है, निवान…
घूरने में नीयत होती है,
और देखने में… सिर्फ़ अहसास।”
निवान एकदम ठहर गया।
उसके गालों पर अब सचमुच हल्की सी लाली थी।
वो कुछ बोलने ही वाला था कि —
वामिका मुस्कुरा दी, और झटके से पीछे हट गई।
“अब जल्दी करो।
तुम बदलो, मैं पीछे मुड़ जाती हूँ — लेकिन बाहर नहीं जाऊंगी।”
“क्यों?”
निवान ने घबरा कर पूछा।
वामिका ने कंधे उचकाए —
“क्योंकि मुझे तुम पर भरोसा नहीं है —
कहीं ये टाई पैंट की बेल्ट में न बांध लो।”
निवान ने शर्म से चेहरा नीचे कर लिया ।
वामिका अब मुंह फेरकर खड़ी थी —
पीठ उसकी तरफ, लेकिन उसकी हल्की सी हँसी उसके कंधों में साफ झलक रही थी।
और निवान?
वो तो अब भी नर्वस…
कुछ ही सेकंड बाद —
निवान हिचकिचाते हुए बोला —
“शर्ट का बटन ऊपर वाला फँस गया है…”
वामिका ने आँखें बंद कीं — गहरी सांस ली।
“मैंने कहा था… मैंने कहा था… तुमसे नहीं होगा।”
वो पलटी,
धीरे-धीरे उसके पास आई।
निवान अब कुर्सी से खड़ा हो चुका था —
शर्ट आधी बटन हो चुकी थी,
लेकिन ऊपर का बटन कहीं फँस गया था।
वामिका ने बिना कुछ कहे, उसकी ओर हाथ बढ़ाया।
निवान ने ज़रा पीछे हटना चाहा —
“मैं खुद कर लूँगा…”
लेकिन तब तक वामिका उसके करीब आ चुकी थी —
इतना कि निवान की साँसें हल्की सी काँपने लगीं।
वामिका की उँगलियाँ उसके कॉलर के पास पहुँचीं —
बटन को धीरे-धीरे खोलने की कोशिश करते हुए उसने हल्की फुसफुसाहट में कहा —
“तुम्हारी ये मासूम शक्ल…
हमेशा मुसीबत में डाल देती है।”
निवान ने नज़रें झुका लीं —
“पर मैं तो कुछ करता ही नहीं…”
“वो ही तो दिक्कत है,”
वामिका ने मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम कुछ नहीं करते… लेकिन असर फिर भी कर जाते हो।”
बटन खुल गया।
वामिका ने फिर से बटन बंद करना शुरू किया ।
उसकी उंगलियाँ जब निवान की गर्दन के पास पहुँचीं,
तो उसने फिर से उस पुराने कट के निशान को देखा।
एक हल्की सी फिक्र उसके चेहरे पर आई,
पर उसने कुछ नहीं कहा।
बटन लगाते हुए,
उसने धीरे से टाई उठाई।
“अब ये भी मुझे ही बाँधनी पड़ेगी?”
वामिका टाई उठाकर जैसे ही आगे बढ़ी,
निवान झट से पीछे हटा —
हथेली आगे कर दी —
"अरे नहीं-नहीं, ये मैं खुद कर लूंगा!"
उसकी आवाज़ में घबराहट थी, और थोड़ी-सी उम्मीद भी…
कि शायद वामिका मान जाए।
लेकिन वामिका वहीं ठिठककर रुकी, मुस्कुराई नहीं —
सिर्फ़ उसकी ओर एक सीधी, स्थिर नज़र डाली।
"निवान…"
उसका लहजा अब नर्मी से ज़्यादा ठहराव लिए था —
"अगर तुम्हें आती होती, तो अब तक बाँध चुके होते।"
निवान ने जैसे कोई जवाब सोचने की कोशिश की,
पर होंठ हिले नहीं।
वामिका उसके और करीब आ गई —
टाई को हल्के से खोलकर उसके गले में लपेटने लगी।
निवान की पलकों में हरकत हुई।
वो चुपचाप उसे देखता रहा।
वामिका ने आख़िरी गिरह कसते हुए टाई को सीधा किया,
और उसकी कॉलर को सँवारा।
फिर उसकी निगाहें उसकी आँखों से टकराईं —
सीधी, गहरी, और कुछ कहती हुईं।
"अब बिल्कुल परफेक्ट लग रहे हो,"
उसने धीरे से कहा।
निवान ने मुस्कुरा कर पूछा —
"तो अब चलें?"
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
8 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत होनी थी।
फ्लैश लाइट्स, कैमरे, रिपोर्टर्स का शोर गूंज रहा था…
वामिका और निवान एक साथ स्टेज पर बैठे थे।
माइक पर सवाल आया —
"मिस रौशन, क्या आप दोनों रिलेशनशिप में हैं?"
वामिका ने हल्की मुस्कान दी, फिर निवान की ओर देखा।
निवान थोड़ा सकपकाया, लेकिन फिर याद आया —
“आई लव यू की प्रैक्टिस कर लेना…”
वामिका ने हल्की सी मुस्कान दी, फिर माइक निवान की ओर बढ़ाया।
निवान का गला सूख गया…
उसने कैमरे की ओर देखा, फिर वामिका की आंखों में।
माइक निवान के सामने था।
पूरी भीड़ की निगाहें उस पर टिकी थीं।
कैमरे उसकी हर हाव-भाव को कैद करने को तैयार थे।
निवान ने गहरी सांस ली, फिर हिंदी में धीमे से बोला —"जी हम दोनों रिलेशनशिप में है। "
एक सेकंड को सन्नाटा छा गया, फिर अचानक से सारे कैमरों की फ्लैश लाइट्स बेकाबू होकर चमकने लगीं।
रिपोर्टर्स अब टूट पड़े —
"कब से?"
"कहां मिले थे आप दोनों?"
"ये रिश्ता क्या वाकई असली है या सिर्फ दिखावा?"
"मिस रौशन, आपने पहले कभी पब्लिकली किसी को डेट नहीं किया, फिर अचानक से ये?"
मंच पर बैठा निवान थोड़ा सकपका गया। वो अपने हाथों की उंगलियाँ आपस में मरोड़ने लगा।
तभी एक रिपोर्टर ने थोड़ा तीखा अंदाज़ अपनाया —
"देखिए, निवान जी, आपको तो कभी भी वामिका जी के साथ नहीं देखा गया, ना किसी पार्टी में, ना किसी पब्लिक इवेंट में... तो क्या ये रिश्ता वाकई असली है या सिर्फ किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा?"
निवान ने झिझकते हुए माइक पकड़ा, फिर बोला —
"हम... हम दोनों पब्लिक अटेंशन से दूर रहना पसंद करते हैं। मतलब… हमारा रिश्ता नया नहीं है… बस हमनें कभी इसे लोगों की नज़रों में लाना ज़रूरी नहीं समझा…"
वो बोल ही रहा था कि उसकी नज़र वामिका पर पड़ी।
वो वामिका… जो अब उसे घूर रही थी।
निवान थोड़ा अटक गया। उसकी साँसें फिर गड़बड़ा गईं। वो अब समझ गया था कि उसने शायद एक शब्द ज़्यादा कह दिया।
वामिका ने अब माइक उठाया — उसकी मुस्कान फिर से वापस आ चुकी थी, लेकिन आंखों की वो सख्ती अब भी कायम थी।
"रिलेशनशिप्स की कोई डेट नहीं होती, ये तो एहसास होते हैं — जो धीरे-धीरे मजबूत होते हैं… और जब वक़्त सही लगे, तब दुनिया को बताया जाता है। हमनें भी वही किया है।"
रिपोर्टर फिर बोला —
"लेकिन मैम, ये सब अचानक क्यों? क्या ये बिज़नेस स्ट्रैटेजी का हिस्सा है?"
वामिका का चेहरा अब थोड़ा गम्भीर हो गया। उसने रिपोर्टर की तरफ देखकर धीमे पर ठोस लहजे में कहा —
"इफ लविंग समवन बिकम्स अ स्ट्रैटेजी, देन मेबी यू ऑल नीड टू रीथिंक व्हाट लव रियली मीन्स।
दिस इज़ नॉट अ बिज़नेस डील ।
इट्स रियल। इट्स पर्सनल।
एंड इट्स माइन टू शेयर ऑर नॉट शेयर — नॉट योर स्टोरी टू क्रिएट।"
रिपोर्टर अभी भी सवालों के साथ तैयार थे…
फिर एक रिपोर्टर ने सवाल किया —
"बट मिस रौशन, वाय चूज़ नाउ टू रिवील दिस रिलेशनशिप पब्लिकली? वज़ देयर सम इंसीडेंट ऑर प्रेशर?"
वामिका ने तुरंत जवाब दिया —
"नो इंसिडेंट। नो प्रेशर। जस्ट द करेज़ टू बी ऑनेस्ट।"
कुछ सेकंड तक वहाँ सन्नाटा रहा… फिर किसी ने फिर से माइक आगे बढ़ाया —
"मिस रोशन, जस्ट वन मोर क्वेश्चन —"
लेकिन वामिका ने अपना सिर हल्के से हिलाया, ना में।
फिर उसने माइक धीरे से टेबल पर रखा, अपने बालों को पीछे किया और बेहद शालीन अंदाज़ में बोली —
"हो गया। इनफ."
और बिना किसी और जवाब का इंतज़ार किए, वो खड़ी हुई।
निवान भी उठा।
दोनों स्टेज से नीचे उतरने लगे…
वामिका और निवान प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद तुरंत ही स्टेज से नीचे उतरे और अपनी कार की तरफ बढ़े।
कार में बैठते ही वामिका ने गहरी सांस ली और तुरंत ही निवान पर बरस पड़ी—
"यू इडियट!
इंग्लिश में बात नहीं कर सकते थे क्या?
इतनी सारी मीडिया थी, और तुम वो सब हिंदी में क्यों बोल गए?और तुम्हें क्या-क्या सिखाया था?
कि मेरे कंधे पर हाथ रखना है, कमर पर हाथ रखना है, मेरा हाथ पकड़ना है—लेकिन ये सब तो तुमने बिलकुल भी नहीं किया!"
निवान हल्की झिझक के साथ बोला —
“अगर… अगर इंग्लिश में… ग्रामर गलत हो जाती तो…या… कोई वर्ड गलत बोल देता, तो आप सबके सामने शर्मिंदा हो जातीं…”
वामिका ने झुंझलाकर चेहरा उसकी ओर घुमाया, और झुलसाती आवाज़ में बोली —
“ओह, वाओ! तो अब तुम मुझे प्रोटेक्ट करने लगे हो? शेम ऑन मी, मिस्टर चौहान… कि मैंने सोच लिया था कि तुम एक सिंपल रोल निभा लोगे—लेकिन तुम....ऊंह!"
निवान खिड़की की ओर देख रहा था, पर उसकी उंगलियाँ अब भी हल्के से काँप रही थीं। उसने कुछ कहने की कोशिश की, पर आवाज़ गले में अटक गई।
फिर अचानक, वामिका ने कार के ब्रेक मारे। कार झटका खाकर रुकी।
"अब नीचे उतरो," उसने कहा, बर्फ जैसे ठंडे लहजे में।
निवान चौंका। "क्या?"
"सुनाई नहीं दिया? नीचे उतरो," वामिका की आँखें अब उसकी ओर नहीं, सामने सड़क पर थीं।
"ये मज़ाक—" निवान ने कुछ कहने की कोशिश की।
"मुझे कोई मज़ाक पसंद नहीं।"
निवान कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा। फिर उसने चुपचाप दरवाज़ा खोला, और बाहर निकल आया।
वामिका ने कार स्टार्ट कर दी और आगे बढ़ गई।
फिर वामिका ने कुछ दूरी पर जाकर कार रोकी थी।
फिर उसने रिवर्स गियर लगाया और कार को धीरे-धीरे पीछे लाकर ठीक निवान के सामने रोका।
वामिका ने खिड़की का शीशा थोड़ा नीचे किया, और बिना उसकी ओर देखे बोली —
"बैठो।"
निवान थोड़ा हिचकिचाया, उसका चेहरा अब भी उलझा हुआ था।
"पर आपने तो कहा था उतरो करके ..." उसने धीरे से कहा।
वामिका ने एक लंबी सांस ली, उसकी उंगलियाँ स्टीयरिंग पर बेवजह घूम रही थीं। फिर उसने नज़र घुमाई —
"बैठ जाओ, वरना पिघल जाओगे… और फिर मीडिया वाले तुम्हें पिघला हुआ मिल्क चॉकलेट समझकर उठाकर ले जाएंगे…"
निवान के होंठ थोड़े से हिले लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
उसने चुपचाप दरवाज़ा खोला और फिर से कार में बैठ गया।
वामिका ने कार स्टार्ट की, और धीरे-धीरे कार आगे बढ़ने लगी।
निवान ने कुछ देर चुप रहने के बाद मासूमियत से कहा —
"जब आपको वापस बिठाना ही था… तो मुझे उतारा क्यों था?"
वामिका कुछ नहीं बोली। उसकी निगाहें सड़क पर थीं, लेकिन हाथ स्टेयरिंग पर जमे हुए थे… थोड़े सख्त।
निवान ने फिर थोड़ा झुककर धीमे से कहा —
"आपने ऐसा क्यों किया…?"
अब भी कोई जवाब नहीं आया।
निवान फिर बोला—"बोलिए...बोलती क्यों नहीं आप?"
वामिका ने अचानक गाड़ी साइड में रोकी।
धीरे से ब्रेक दबाया… इंजन बंद किया… फिर उसने रुख निवान की तरफ मोड़ा।
निवान फिर कुछ बोलने के लिए मुंह खोल रहा था कि...
तभी…
वामिका ने अपनी एक उंगली निवान के होंठों पर रख दी।
"श्श्श..."
निवान का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उसकी साँसें धीमी और भारी हो गईं।
दोनों की आँखें मिलीं ।
अचानक खोए हुए स्वर में वामिका बोल पड़ी—"योर आइज़… दे'अर रीअली ब्यूटीफुल।"
निवान की सांसें थम सी गईं,
उसका दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।
वामिका ने अपनी उंगली धीरे से उसके होंठों से हटा दी।
और कहा—
“मिस्टर चौहान, ऐसे फ्लर्ट किया जाता है समझे!"
निवान ने हल्के से ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई।
फिर धीरे से बोला —"थैंक्यू... "
वामिका ने ड्राइविंग सीट की ओर वापस मुड़ते हुए कहा—“किसलिए ?”
फिर उसने चाबी घुमाई, इंजन स्टार्ट किया, और कार फिर से आगे बढ़ने लगी।
निवान धीरे से बोला—
“आपने मेरी आंखों की तारीफ की न इसीलिए।
वामिका चिढ़ कर बोली —"वो मैने तारीफ नहीं की थी तुम्हारी।"
"तारीफ नहीं थी, तो फिर क्या था…" निवान फिर बोला।
वामिका ने एक हल्की सी तिरछी नज़र उसकी तरफ डाली, और बोली —
“बस... ऑब्जर्वेशन था। जैसे लोग कहते हैं — ‘वेदर इज़ नाइस टुडे’। तो कोई वेदर को थैंक्यू बोलता है क्या?”
निवान झट से बोल पड़ा —"हां..."
वामिका ने जोर से ब्रेक मारा — कार फिर से एक झटका खाकर रुकी।
"क्या? क्या कहा तुमने?" उसकी आवाज़ इस बार इतनी तीखी थी कि मानो हवा भी सहम गई हो।
निवान हल्के से सकपका गया, लेकिन मुस्कराने से खुद को रोक नहीं पाया।
"मैंने कहा — हाँ… अगर वेदर अच्छा हो, तो 'थैंक यू वेदर' बोल देना चाहिए।"
वामिका ने उसे घूरा जैसे वो उसके सामने बैठा कोई एलियन हो।
"यू आर इंपॉसिबल, मिस्टर चौहान!"
निवान फिर मुस्कुरा कर बोला —"थैंक्यू.."
"थैंक्यू किस बात का किया अब???" वामिका चिढ़ कर बोलीं।
"आपने मुझे ‘इंपॉसिबल’ कहा… वो भी पूरे इमोशन के साथ। "
वामिका ने तेज़ी से कार स्टार्ट की, जैसे अगर उसने कुछ देर और वहीं रुकी रही, तो या तो वो खुद पिघल जाएगी… या फिर निवान की वो मुस्कान उसके पूरे सिस्टम को क्रैश कर देगी।
"ओह गॉड… मुझे ही क्यों मिला ये डायलॉगबाज़..."
निवान फिर कुछ बोलने ही वाला था कि वामिका ने उसे एक तीखी नज़र से घूरा।
बस एक नज़र — और निवान वहीं ठिठक गया।
वो नज़र… सीधी नहीं थी, तीखी थी। चेतावनी से भरी।
निवान ने चुपचाप अपनी एक उंगली होंठों पर रख ली, और बिना कुछ कहे चुपचाप खिड़की के बाहर देखने लगा।
वामिका ने बमुश्किल से अपनी हँसी रोकी।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
कुछ देर बाद…
कार एक धीमे ब्रेक के साथ रुकी।
बाहर एक महंगा सा रेस्टोरेंट था ।
निवान ने खिड़की से झाँककर देखा, फिर नज़रें फेर लीं।
“उतरो।”
वामिका ने कहा।
निवान ने गर्दन घुमाई, उसके चेहरे को देखा।
"ये कहां लाईं हैं आप?"
“डिनर डेट।”
निवान थोड़ा हिचका।
"डिनर डेट?" — वो फुसफुसाया। जैसे ये दो शब्द किसी दूसरी ही भाषा के हों।
वामिका उसकी ओर देखे बिना बोली —
"हाँ। अब सवाल मत पूछो। उतरो जल्दी से।"
निवान चुपचाप कार से उतरा।
अभी उसने दो कदम ही बढ़ाए थे कि…
वामिका ने झट से उसकी कलाई थामी।
निवान चौंक गया।
उसकी नब्ज़ जैसे वहीं तेज़-तेज़ धड़कने लगी।
सर्द हवा थी, लेकिन उसकी हथेली में पसीना था।
वामिका ने उसकी कलाई को अपनी उंगलियों में कसकर पकड़ा, और फिर बिना उसकी तरफ देखे बिलकुल ‘कॉन्फिडेंट गर्लफ्रेंड’ वाले अंदाज़ में आगे बढ़ चली।
निवान उसकी पकड़ में बंधा… थोड़ा लड़खड़ाते हुए चला।
वामिका आगे… और वो थोड़ा पीछे।
रेस्टोरेंट के गेट के पास आते ही वामिका ने धीमे से कहा —
“शोल्डर स्ट्रेट। स्माइल फेक। और मेरी तरफ ऐसे मत देखो जैसे पहली बार कोई लड़की ने पकड़ी हो तुम्हारी कलाई।”
"मैं... मैं तो बस ये देख रहा था कि आपने इतना मज़बूती से कैसे पकड़ लिया…"
"ताकि तुम भाग ना सको।"
वो हल्के से मुस्कुराई।
निवान की रूह तक कांप गई।
"आप... आप इतना… पब्लिकली…"
"हां, मिस्टर चौहान। ये सब कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है। अब तुम्हें आदत डालनी पड़ेगी।"
"पर मेरा दिल…"
"धड़क रहा है, पता है मुझे। इतनी जोर से धड़क रहा है कि लोग पीछे से संगीत समझ लेंगे।"
वो झुंकी, उसके कान के पास फुसफुसाकर कहा —
"तुम्हारे कान तक लाल हो चुके हैं।"
निवान ने झेंपते हुए दूसरी तरफ देखा, लेकिन उसका हाथ अब भी वामिका की पकड़ में था।
रेस्टोरेंट का माहौल एकदम क्लासी था।
धीमा म्यूजिक, महंगी लाइटिंग, वेटर्स का सूट-बूट, और हर टेबल पर मोमबत्ती की रोशनी।
वामिका पूरे कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ रही थी, और निवान उसकी उंगलियाँ थामे उसके पीछे-पीछे।
टेबल तक पहुंचते ही एक वेटर ने झुककर कहा,
“मैम, आपकी टेबल रेडी है।”
वामिका ने सिर हिलाया और चेयर की ओर इशारा किया।
वहीं…
निवान, चेयर के पीछे जाकर खड़ा हो गया…
और झुककर बोला —
"मैने टीवी में देखा था हीरो हीरोइन के लिए ऐसा करता है तो हीरोइन खुश हो जाती है।"
इतना कहकर खुद सामने वाली चेयर पर बैठ गया।
वेटर ने पूछा —
“वाइन या स्पार्कलिंग वाटर, मैम?”
"स्पार्कलिंग वाटर।"
फिर उसने निवान की ओर देखा —
"यू?"
निवान झपटकर बोला —
“भैया, समोसा मिलेगा क्या यहाँ?"
वामिका ने घूर कर निवान को देखा।
उसने तुरंत सिचुएशन सम्हाली —
"हीज जस्ट जोकिंग।"
निवान ने कनखियों से देखा —
“मैं सीरियस था…”
वामिका ने धीमे से टेबल के नीचे से उसकी जांघ पर ठोकर मारी।
…निवान को ठोकर लगी तो उसने हल्की “आउच!” वाली आवाज़ निकाली।
वेटर थोड़ी देर वहीं खड़ा रहा ।
वामिका ने धीरे से आँखें मूँद लीं और माथे पर हाथ रख लिया — मानो भगवान से प्रार्थना कर रही हो कि “पृथ्वी फटे और मैं समा जाऊं।”
“तुम… तुम समोसे के बारे में पूछ रहे थे?” वो फुसफुसाई।
निवान अब तक मेन्यू कार्ड उठा चुका था और पूरी मासूमियत से देख रहा था —
“इतना बड़ा कार्ड… पर एक भी समोसे का ज़िक्र नहीं… कितना अजीब है ना?”
वामिका ने कार्ड झपट लिया, और धीमे से कहा —
“क्योंकि ये रोड साइड ठेला नहीं है, निवान। ये एक फाइव स्टार रेस्टोरेंट है।”
निवान ने अपनी गर्दन खुजलाई —
“तो फिर पाव भाजी?”
वामिका ने ज़ोर से सांस खींची … फिर मुस्कुरा दी वेटर की ओर देखकर कहा —" एक प्लेट हक्का नूडल्स विद मिक्स वेज ,एक प्लेट पनीर टिक्का और दो बटर नान, साथ में मिक्स वेज ग्रेवी।"
वेटर ने सिर हिलाया और चला गया।
निवान के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई —
"अब बात बनी!" वो खुश होकर बोला, "ये हुई ना घर जैसी बात… पनीर टिक्का! वाह!"
वामिका ने अपनी आँखें मटकाईं, पर हौले से मुस्कुरा दी।
निवान ने उत्साहित होकर पूछा —
"और दही भल्ले? मिलेंगे क्या?"
वामिका का चेहरा फिर पल भर के लिए जम गया।
उसने झट से अपनी वॉटर ग्लास उठाई और घूंट लिया, जैसे उसने कुछ सुना ही न हो।
"और सुनो," निवान ने आगे झुककर कहा, "अगर रोटी थोड़ी मोटी हो ना, तो टिशू में लपेटकर पैक भी करा लेंगे… रात को भूख लगे तो…"
वामिका ने वहीं टेबल के नीचे से फिर ठोकर मारी।
"आउच!"
"अब क्या किया मैंने?" वो फुसफुसाया।
वामिका ने होंठ भींचकर जवाब दिया —
"मैं चाहती थी कि आज तुम थोड़े 'क्लासी' दिखो… लेकिन तुम तो 'क्लास के बाहर बैठे लड़के' टाइप लग रहे हो।"
निवान ने बुरा नहीं माना। वो मेन्यू कार्ड को उलट-पलटकर देख रहा था, जैसे कोई रेसिपी बुक हो।
“ये जो 'क्विनोआ सालड' लिखा है… ये कोई कंपनी का नाम लग रहा है… इसे कौन खाता है भला?”
वामिका ने खुद को शांत रखने के लिए फिर से पानी पी लिया।
वो खुद को बार-बार समझा रही थी —
"इट्स ओके, वामिका… ब्रीद इन, ब्रीद आउट… तुम ही लाई हो इसे, अब झेलो भी…"
"वैसे एक बात बोलूं?"
"बोलो," वामिका ने थके हुए अंदाज़ में कहा।
"जब आपने मेरा हाथ पकड़ा था ना… तो मुझे लगा जैसे... रेलवे स्टेशन पे मम्मी खींचती है लाइन में लगाने के लिए।"
वामिका का मुंह खुला का खुला रह गया। वो कुछ कहने ही वाली थी कि तभी वेटर आ गया।
"योर ऑर्डर, मैम।"
टेबल पर प्लेटें सजीं।
निवान की आंखें चमक उठीं —
"अब आया मज़ा!"
उसने बिना किसी शर्म के चटनी में टिक्का डुबोकर मुंह में ठूंस लिया।
वामिका ने इधर-उधर देखा… पास की टेबल पर एक कपल उन्हें घूर रहा था।
वो धीरे से झुककर बोली —
"तमीज़ से खाओ निवान… लोग देख रहे हैं…"
"क्यों? इन्होंने टिक्का कभी नहीं देखा क्या?" — निवान ने मुँह भर के जवाब दिया।
वामिका ने गहरी सांस ली, फिर खुद को समझाते हुए बोली —
“कम से कम मुंह बंद करके चबाओ…”
निवान ने कहा —
"चबाने के लिए खुला चाहिए… बंद करके तो मुंह के अंदर अंधेरा हो जाता है!"
वामिका ने अपना माथा थाम लिया।
और फिर… वो ज़ोर से हँस दी।
“तुम… तुम बिल्कुल… चलते फिरते मीम हो!”
निवान ने गर्व से कहा —
"थैंक्यू। ये तो कॉम्प्लीमेंट है ना?"
वामिका मुस्कुराई।
निवान अब भी खा रहा था। एक हाथ में नान, दूसरे में ग्रेवी से लबालब भरी टिक्का की पीस… और चेहरे पर वही बेफिक्री।
वो पूरी तरह खाने में डूब चुका था — कभी चटनी में डुबोता, कभी अपनी उंगलियों से प्लेट को ऐसे साफ करता जैसे घर में बैठा हो।
वामिका अब उसे बस देख रही थी।
ना जाने क्यों… अब उसे गुस्सा नहीं आ रहा था।
ना शर्मिंदगी, ना फ्रस्ट्रेशन…
उसे पता ही नहीं चला कि कब उसके चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान फैल गई।
वामिका अब टेबल पर कोहनी टिकाकर उसे बस निहार रही थी।
ये लड़का…
बिलकुल परफेक्ट नहीं था।
लेकिन उसके साथ होने पर…
वो खुद को हल्का महसूस कर रही थी।
“क्या देख रही हो?” — निवान ने अचानक रुक कर पूछा, और नान का टुकड़ा मुंह के पास रोक लिया।
" मेरे चेहरे पर कुछ लग गया है क्या?”
उसने होंठों के पास उंगलियाँ ले जाकर पोंछा।
वामिका चौंकी उसने सिर हिलाया —
"नहीं… कुछ नहीं लगा…बस"
निवान ने हैरानी से पूछा —
"बस?"
तभी…
"ओएमजी!! वामिका रौशन??"
एक लड़की, ब्राइट रेड ड्रेस में, हाथ में एक डिजाइनर क्लच लिए, उछलती हुई उनकी टेबल की तरफ आई।
लड़की की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि रेस्टोरेंट में कुछ लोग पलटकर देखने लगे।
वामिका का चेहरा एक पल में बदल गया।
वामिका फुसफुसाकर, बिना मुस्कुराए बोली — "शीट… तान्या मल्होत्रा…!"
पर निवान…
वो वैसे ही बैठा रहा — बटर नान को ग्रेवी में डुबोता हुआ।
तान्या, चहकते हुए बोली — "गर्ल!! तुम यहाँ?? और… और ये कौन है? डोंट टेल मी… हीज़ द बोयफ्रेंड?"
वामिका मुस्कुराकर बोली —"यस... ही इज़ माई बॉयफ्रेंड।"
"व्हाआआट? फॉर रियल?"
तान्या ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें और फैला लीं।
"आई मीन…" — तान्या ने निवान की तरफ थोड़ा झुककर देखा,
"ही इज़ क्यूट... बट !"
निवान ने चम्मच को ज़मीन पर गिरने से पहले ही पकड़ लिया और बेतकल्लुफी से बोला —
"थैंक्यू, दीदी।"
दीदी?
वामिका का गिलास पकड़ता हाथ एक सेकंड को रुक गया।
तान्या का चेहरा भी थोड़ा अटक गया, लेकिन वो मुस्कुराते हुए बोली —
"ओह! सो डाउन टू अर्थ… ऐसे लड़के तो अब दिखते ही नहीं।"
वामिका ने बात संभाली —
"हम दरअसल कुछ इंपॉर्टेंट चीज़ डिसकस कर रहे थे, बिजनेस थिंग यू नो…"
"ओह! ऑफ कोर्स, ऑफ कोर्स…" तान्या ने फौरन अपना डिजाइनर क्लच अपने पर्स में दबाया और सिर हिलाया,
"सॉरी टू इंटरेप्ट! आय'म जस्ट सो हैप्पी फॉर यू…! यू बोथ लुक अडोरेबल टुगेदर ।"
इतना कहकर वो चली गई।
जैसे ही तान्या थोड़ी दूर पहुंची।
वामिका धीरे से चेयर पर सीधी हुई, गिलास उठाकर एक लंबा घूंट लिया, और फिर आँखें बंद कर ली जैसे वो अपने दिमाग को दोबारा सेट कर रही हो।
निवान अब भी टिक्का पर फोकस किए हुए था, लेकिन अब वो कनखियों से वामिका को भी देख रहा था।
“वो कौन थी?” उसने पूछा।
"तुमने उसे दीदी क्यों कहा?” वामिका ने बिना उसके सवाल का जवाब दिए अपना सवाल उठा दिया।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
निवान ने आख़िरकार प्लेट से ध्यान हटाया और बड़ी मासूमियत से वामिका की आँखों में देखा —
“आप ही तो बार-बार मुझे याद दिलाती हैं कि मैं आपका ‘कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड’ हूं… अब बॉयफ्रेंड होने के नाते, मैंने अनजान लड़की को दीदी कह दिया… इसमें ग़लत क्या है?”
वामिका की पलकें कुछ पल तक झपकी ही नहीं।
उसने धीरे से गिलास मेज़ पर रखा, गहरी साँस ली और झुककर थोड़े शांत लेकिन तंज़ भरे लहजे में बोली —
“ग़लत ये है… कि तान्या मल्होत्रा ‘अनजान’ नहीं है… वो मेरी क्लासमेट थी कभी… और मेरी सबसे बड़ी कॉम्पिटिटर भी।”
निवान की उंगलियाँ टिक्का से रुक गईं।
उसने सिर थोड़ा झुकाकर धीरे से पूछा —
“कॉम्पिटिटर? मतलब… एग्ज़ाम्स वगैरह में?”
वामिका की मुस्कान धीमे-धीमे एक कड़वाहट में बदल गई।
“नहीं निवान… लाइफ में। उस लड़की के लिए सबकुछ एक रेस था ।”
"लेकिन अब तो आप… 12 कंपनियों की सीईओ, टॉप 10 एशियन पावर लिस्ट में नाम, और देश की सबसे कम उम्र की सेल्फ-मेड अरबपति। फिर आप क्यों… एक तान्या मल्होत्रा जैसी लड़की को इतनी अहमियत दे रही हो?"
“क्योंकि… मैं आज जहां हूँ न, वहाँ पहुँचने की वजह सिर्फ मेरा सपना नहीं था… बल्कि उसका ताना भी था।”
निवान चौक गया।
वामिका की उंगलियाँ अब गिलास पर नहीं, अपनी कलाई की घड़ी पर थीं…
निवान थोड़ी देर चुप रहा… फिर धीरे से पूछा —
" ताना...कैसा ताना?"
वामिका की नज़रें एकदम उसकी तरफ उठीं।
वो कुछ पल चुप रही। फिर उसकी आँखों में जैसे कोई भूला हुआ लावा जाग गया।
"तान्या मल्होत्रा… मेरे बोर्ड रिज़ल्ट्स वाले दिन मेरे घर आई थी। उस वक़्त मैं थर्ड टॉपर बनी थी… और वो फर्स्ट।"
"मम्मी-पापा परेशान थे… क्योंकि उन्होंने मुझसे 'टॉप' की उम्मीद की थी।"
"तान्या ने आते ही मेरे सिर पर हाथ फेरा और कहा — 'कोई बात नहीं वामिका… सबका फर्स्ट आने का सपना नहीं पूरा होता। कोई-कोई सेकंड और थर्ड जैसे रोल्स के लिए बना होता है।' "
निवान की आंखें धीरे-धीरे चौड़ी होती गईं।
"वो बोली — तुम बहुत सिंसियर हो, लेकिन थोड़ा नॉर्मल भी रहो… जैसे लड़कियाँ होती हैं। अपने चेहरे का ध्यान रखो। लड़कियाँ रैंक से नहीं, चार्म से जीतती हैं। बॉयज़ भी उसी को चुनते हैं, जो परफेक्ट लगती है — बाहर से भी, और अंदर से भी।"
वामिका की आवाज़ अब कांप रही थी — लेकिन गुस्से से, दर्द से नहीं… बल्कि सालों से दबे उस एक ताने के बोझ से।
"उस दिन… पहली बार मैंने अपने कमरे का शीशा तोड़ा था।"
निवान हैरानी से वामिका को देख रहा था।
तभी वामिका का फ़ोन बजा।
वामिका ने एक लंबी साँस ली और कॉल रिसीव किया।
“यस, निया?”
दूसरी तरफ से निया की आवाज़ हल्की घबराई हुई थी —
“मैम, आपको अभी कंपनी वापस आना होगा। एक इमरजेंसी मीटिंग रखी गई है… हमारे सिंगापुर इन्वेस्टर्स ज़ूम पर हैं।"
कुछ देर बाद.....
काँच की ऊँची दीवारों के पार शहर की रौशनी झिलमिला रही थी। मीटिंग रूम के बड़े स्क्रीन पर ज़ूम कॉल ओपन था, और स्क्रीन पर 4 सिंगापुर इन्वेस्टर्स के चेहरे दिखाई दे रहे थे।
वामिका तेज़ी से अंदर दाखिल हुई,उसके पीछे फाइल लेकर चलती निया धीरे से बोली –“मैम, इनमें से एक इन्वेस्टर… मिस्टर रेहान मल्होत्रा है। तान्या मल्होत्रा का बड़ा भाई।”
वामिका के कदम एक पल को रुक गए।
उसका चेहरा सख्त नहीं हुआ, लेकिन उसकी आँखों की चमक बदल गई।
वो बिना कुछ बोले मीटिंग टेबल की ओर बढ़ी और अपनी सीट पर बैठ गई। निया ने फाइल उसके सामने रखी और धीरे से पीछे हट गई।
स्क्रीन पर चार इन्वेस्टर्स थे — तीन शांत और प्रोफेशनल लग रहे थे, लेकिन चौथे का चेहरा उसे जैसे अतीत में ले गया।
रेहान मल्होत्रा — तान्या का बड़ा भाई।
सबने एक साथ कहा —
“गुड ईवनिंग, मिस वामिका रौशन।”
वामिका ने मुस्कुराते हुए कहा —
“ गुड ईवनिंग, जेंटलमैन ।"
रेहान ने मुस्कुराकर कहा, "मिस वामिका। इट्स अ प्लेज़र टू मीट यू। मैने आपकी सक्सेस के बारे में बहुत कुछ सुना है ।”
वामिका ने भी हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया,
"थैंक यू, मिस्टर मल्होत्रा। आपकी कंपनी की ग्रोथ भी काफी इंप्रेसिव रही है… खासकर साउथईस्ट एशिया में।"
रेहान ने स्क्रीन पर बैठकर ज़रा झुकते हुए कहा —
"हम सिर्फ ग्रोथ नहीं, अब पार्टनरशिप्स में भी यकीन रखते हैं। और आपकी कंपनी इस वक़्त इंडिया की सबसे डाइनैमिक टेक फर्म मानी जा रही है।"
एक और इन्वेस्टर ने बात संभाली —
"हमारे बोर्ड ने फैसला किया है कि हम इंडिया में एक लॉन्ग-टर्म टेक एलायंस बनाएँगे। और उसके लिए 'रौशन एंटरप्राइजेज़' टॉप चॉइस है।"
वामिका ने ठहरकर एक नज़र स्क्रीन पर डाले चेहरों पर डाली, फिर बड़े प्रोफेशनल अंदाज़ में बोली —
“हमारे लिए भी ये एक बड़ी अपॉर्च्युनिटी होगी। लेकिन पार्टनरशिप से पहले, ट्रांसपेरेंसी और विज़न क्लैरिटी ज़रूरी है। मैं चाहूँगी कि हम एक स्ट्रक्चर्ड मीटिंग अगले हफ्ते सिंगापुर में रखें। फेस टू फेस।”
रेहान हल्के से मुस्कराया —
“ऑफ कोर्स। और अगर आपको बुरा न लगे… मैं चाहता हूँ कि हम इस कोलैबोरेशन को एक फ्रेश शुरुआत मानें। पुराने पर्सनल कनेक्शंस को पीछे छोड़कर।”
वामिका के चेहरे की मुस्कान हल्की सी ठिठकी।
उसने बहुत नपी-तुली आवाज़ में जवाब दिया —
“बिलकुल। बिज़नेस में फैसले इमोशन्स से नहीं, लॉजिक और फॉरकास्ट से लिए जाते हैं।”
बाकी इन्वेस्टर्स ने मीटिंग के एजेंडा पर बात शुरू की —
नंबर, ग्रोथ, AI-प्लान्स, और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स।
वामिका ने सब कुछ प्रोफेशनल अंदाज़ में हैंडल किया।
लेकिन हर बार जब रेहान बोलता, उसके लहजे में कुछ अलग होता —
जैसे वो शब्दों से ज़्यादा चेहरों को पढ़ रहा हो।
मीटिंग के आख़िर में जब बाकी इन्वेस्टर्स स्क्रीन से लॉगआउट करने लगे, तो रेहान रुका रहा।
स्क्रीन पर अब सिर्फ वही और वामिका आमने-सामने थे।
रेहान ने हल्की आवाज़ में कहा —
“वैसे… मुझे नहीं पता आप याद रखती हैं या नहीं, लेकिन हम एक बार मिल चुके हैं… तान्या की बर्थडे पार्टी में।"
वामिका की उंगलियाँ सामने रखी फाइल पर रुकीं।
उसने स्क्रीन की तरफ देखा, एक पल तक कुछ कहा नहीं।
“हाँ,” वो धीरे से बोली, “तब आप अमेरिका से लौटे थे। बिज़नेस स्टडी कम्प्लीट करके।”
रेहान की मुस्कान ज़रा और गहरी हुई।
“और आप… उस रात एक कॉर्नर में बैठकर मोबाइल में कोई फाइनेंशियल आर्टिकल पढ़ रही थीं, जबकि बाक़ी सब लोग डांस फ्लोर पर थे।”
वामिका ने हल्का सिर झुकाया —
“क्योंकि मुझे भीड़ में घुलना कभी पसंद नहीं था। और… उस पार्टी में मेरी मौजूदगी सिर्फ एक औपचारिकता थी।”
रेहान थोड़ी देर चुप रहा, फिर बोला —
“मुझे तब भी यही लगा था — कि आप बाकियों से अलग थीं। तान्या ने मुझे कहा था — ‘वो सिर्फ पढ़ने में तेज़ है, लाइफ जीने का टैलेंट नहीं है उसमें।’ ”
वामिका की नज़रों में एक पुराना चुभता हुआ साया सा लहरा गया।
रेहान ने बात आगे बढ़ाई —
“लेकिन पाँच साल बाद… आप उस लड़की से मीलों आगे खड़ी हैं। और मैं ये बात सिर्फ कंपनी वैल्यू या टाइटल्स की वजह से नहीं कह रहा।”
वामिका ने अब पहली बार थोड़ी सख्ती से कहा —
“आपको शायद नहीं पता, मिस्टर मल्होत्रा… मैं अपने काम को पर्सनल हिस्ट्री से अलग रखती हूँ।”
रेहान मुस्कराया—
“माफ़ कीजिए अगर मेरी बात हद से बाहर चली गई हो…
लेकिन आप सिर्फ़ एक सक्सेसफुल बिज़नेसवुमन नहीं हैं, वामिका।
आपमें एक ऐसी ग्रेस है जो कॉन्फिडेंस के साथ-साथ खामोशी में भी आवाज़ छोड़ती है।
तान्या ने शायद कभी देखा ही नहीं…
पर उस रात उस कॉर्नर में बैठी लड़की सबसे अलग और सबसे खूबसूरत थी।”
वामिका की उँगलियाँ फिर से फाइल पर आकर रुक गईं।
उसने गहरी साँस ली… और बिना किसी एक्सप्रेशन के कहा —
“थैंक यू। लेकिन इस समय… मेरा टाइम सिर्फ काम के लिए रिज़र्व है, कॉम्प्लिमेंट्स के लिए नहीं।”
इतने में उसके टेबल पर रखा फोन बजा — स्क्रीन पर "डॉ. मिहिर" का नाम फ्लैश हो रहा था।
वामिका ने बिना हिचकिचाए कॉल रिसीव करते हुए स्क्रीन पर रेहान की तरफ देखा।
“आई हैव टू टेक दिस कॉल मिस्टर रेहान।”
और बिना उसके जवाब का इंतज़ार किए, उसने ज़ूम कॉल डिसकनेक्ट कर दिया।
रेहान की मुस्कान स्क्रीन पर धीरे-धीरे फीकी पड़ गई…
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
रात का अंधेरा अपने पूरे सन्नाटे के साथ छा चुका था। वामिका अपने ऑफिस की बड़ी कांचवाली खिड़की के सामने बैठी थी — रीक्लाइनर चेयर पर, आंखें मूंदे। हल्की ठंडी हवा खिड़की के किसी अधखुले कोने से अंदर आ रही थी, और टेबल पर उसकी कॉफी अब ठंडी हो चुकी थी।
तभी…
एक हल्की सी, पर तेज़ गुलाब की खुशबू हवा में घुली।
वामिका की भौंहें थोड़ी सिकुड़ीं।
और फिर —
"आछीं!"
एक ज़ोरदार छींक के साथ उसकी आंखें खुल गईं।
उसने पहले सामने देखा — फिर दाएं — फिर बाएं।
और फिर… उसकी आंखें चौड़ी होती चली गईं।
टेबल, कुर्सी, फर्श... हर तरफ़ गुलाब ही गुलाब थे। लाल, गुलाबी, सफेद, यहां तक कि नीले रंग के भी।
इतनी तेज़ खुशबू थी कि उसे दोबारा छींक आई।
"आछीं!"
वो घबराकर उठ खड़ी हुई —
"व्हाट द हेल! ये सब कौन…"
तभी पीछे से एक धीमी आवाज़ आई —
"सॉरी… लगता है थोड़े ज़्यादा हो गए…"
वामिका ने मुड़कर देखा —
निवान!
एक बड़ा सा गुलदस्ता हाथ में पकड़े खड़ा था।
वामिका ने गुस्से और हैरानी के बीच झूलते हुए कहा —
"यू हैव लॉस्ट योर माइंड, मिस्टर चौहान!"
वामिका चिल्ला उठी —
"इडियट! मुझे एलर्जी है गुलाब से!!"
उसकी आंखें अब लाल होने लगी थीं, और नाक फिर से खुजली करने लगी।
"आछीं!!"
एक और छींक।
निवान ने घबरा कर गुलदस्ता फौरन पीछे खींच लिया, जैसे वो कोई बम हो —
"सॉरी-सॉरी-सॉरी! मुझे नहीं पता था .... मैं तो बॉयफ्रेंड हूँ ना… सोचा कि सरप्राइज़ दूँ… आपको खुश कर दूँ…"
वामिका का गुस्सा सातवें आसमान पर था —
"खुश?! छींक-छींक के मेरा दिमाग हिल गया है! और तुम्हें सरप्राइज़ देना था!"
लेकिन तभी उसे फिर छींक आई —
"आछीं!!"
"बस्स!!"
वो चिल्लाई —
"ले जाओ इसे… अभी के अभी! वरना मैं अभी के अभी तुम्हें ही बाहर फेंक दूंगी!"
निवान ने तुरंत एक नज़र इधर डाली, फिर उधर —
हर कोना गुलाबों से पटा पड़ा था।
टेबल के नीचे, सोफे के ऊपर, लैपटॉप के पास, यहां तक कि डस्टबिन में भी एक फूल झांक रहा था।
उसने माथा पकड़ लिया —
"ओह नो... मैंने तो पूरे गार्डन को ही ऑफिस में शिफ्ट कर दिया..."
वामिका ने हाथ कमर पर रखा और आँखें तरेरीं —
"क्या बड़बड़ा रहे हो?"
निवान ने फौरन चेहरा सीधा किया और मासूमियत से बोला —
"आप... आप प्लीज़ बाहर चली जाइए... जब तक मैं ये सब साफ़ कर दूं।
आपको और छींक आ गई तो... मेरा मर्डर कर दोगी!"
वामिका ने गुस्से में उसकी ओर देखा, फिर आँखें बंद कर लीं, खुद को कंट्रोल किया... और तेज़ कदमों से बाहर निकलने लगी।
चलते-चलते बड़बड़ाई —
"पता नहीं कहां से आ गया ये गधा...!"
निवान ने सुन लिया, लेकिन चुप रहा।
दरवाज़ा बंद होते ही उसने लंबी साँस ली और
फिर फटाफट गुलदस्ते से सारे फूल निकाले, और एक ट्रैश बैग में भरने लगा।
फर्श से फूल बटोरते-बटोरते वो फिसला —
"आउच!"
लगभग 20 मिनट बाद...
निवान पसीने-पसीने हो गया था, लेकिन अब तक साफ़ करने का 70% काम निपट चुका था।
उसी वक्त बाहर से हिल्स की आवाज़ आई —
टिक... टिक... टिक...
निवान ने चौंककर सिर घुमाया —
दरवाज़ा फिर खुला।
वामिका वापस आ गई थी।
पर इस बार उसने अपने चेहरे पर मास्क पहन रखा था।
उसकी आँखें अब भी हल्की लाल थीं।
निवान झेंपते हुए बोला —
"मैंने सोचा था... आपको स्पेशल फील कराऊँगा।
पर ये तो... ।"
वामिका ने एक गहरी सांस ली, फिर मास्क के पीछे से बोली —
"तुम्हारा दिमाग घास चरने गया था क्या?
गुलाब... पूरे ऑफिस में??
कभी सोचा कि पूछ लो पहले मुझे क्या पसंद है?"
निवान ने शर्म से गर्दन झुका ली।
"मैंने गूगल किया था। लिखा था, 'गर्ल्स लव रोज़ेस'..."
“गूगल?” उसने गर्दन टेढ़ी करके सवाल किया,
“तुम अपने सारे फैसले गूगल से करते हो?
तो अगली बार जब मैं गुस्से में दिखूं तो शायद अगली बार तुम ‘हाउ टू डील विथ ए एंग्री गर्लफ्रेंड’ भी सर्च कर लो!"
निवान ने चुपचाप सिर हिलाया — "हाँ, वो भी सर्च किया था…"
वामिका अब पूरी तरह से चिढ़ चुकी थी।
निवान धीमे से बोला —
“पर… मुझे लगा कि अगर मैं… थोड़ा कुछ खास करूं, तो शायद… आप—”
“शायद मैं पिघल जाऊंगी?” वामिका ने बात काटी।
“शायद मैं कहूँगी, ‘ओह माई गॉड, हाउ स्वीट!’
और फिर एक हैप्पी म्यूज़िक के साथ स्लो मोशन में तुम्हारी बाहों में गिर जाऊंगी?”
निवान अब बुरी तरह झेंप गया था।
वामिका गुस्से में बड़बड़ा रही थी ,
उसने एक कदम आगे बढ़ाया, मगर…
“ओह शिट!”
उसका पैर सीधा गया —
ट्रैश बैग में फंसा।
बैलेंस बिगड़ा, उसकी हील स्लिप हुई —
वामिका लड़खड़ाई।
और एक सेकंड के अंदर…
“आह!”
वो सीधा निवान के ऊपर गिर पड़ी।
दोनों ज़मीन पर थे —
वामिका ऊपर…
निवान नीचे…
और गुलाबों की पंखुड़ियाँ चारों ओर बिखरी हुईं ।
दोनों की साँसें अटक गईं।
निवान की आँखें खुली की खुली रह गईं —
वामिका इतनी करीब थी कि उसकी पलकों की हलचल भी साफ दिख रही थी।
और वामिका…
वो तो पूरी तरह शॉक में थी।
निवान धीमे से बोल पड़ा—
“अब... क्या मैं गूगल करूँ... कि ऐसे सिचुएशन में क्या करना चाहिए...?”
वामिका की आँखें सिकुड़ गईं, और फिर वो बोली—
“उठो…”
“मैं? आप तो ऊपर हैं।”
निवान ने धीमे से जवाब दिया।
वामिका ने गुस्से में दांत भींचे — “निवान!!!”
निवान ने फौरन दोनों हाथ हवा में उठा दिए — “ओके-ओके! नो टच, नो मूव… मैं बस… लेटा रहूँ हैना?”
“चुप!” वामिका गुर्राई।
वो धीरे-धीरे उठने लगी, लेकिन गुलाब की कोई बची-खुची पंखुड़ी उसके पैर के नीचे फिसल गई — और फिर…
धड़ाम!
वापस वहीं — दूसरी बार गिरावट!
इस बार दोनों के सिर आपस में टकरा गए — “औच!!”
निवान ने कराहते हुए कहा — “लगता है मेरी डेथ इसी ऑफिस में लिखी है…”
वामिका ने जैसे-तैसे खुद को संभाला और उठ खड़ी हुई । उसके बाल पूरे बिखर गए, मास्क टेढ़ा हो गया ।
वो बड़बड़ाते हुए बोली — “पहले गुलाब, फिर ये ड्रामा, अब सिर में चोट… और ऊपर से ये बेवकूफ़ी का भंडार…”
पीछे अब भी निवान ज़मीन पर बैठा हुआ था, एक हाथ से सिर सहलाते हुए, और दूसरे से फोन में कुछ सर्च करते हुए।
वामिका ने पीछे मुड़कर देखा।
थोड़ी देर उसे घूरती रही —
फिर आखिरकार उसकी भौंहें थोड़ी ढीली पड़ीं।
वो धीरे-धीरे चलकर वापस आई।
"क्या सर्च कर रहे हो?" वो बोली।
"गूगल से पूछ रहा हु ‘वामिका रौशन‘ के फेवरेट फूल कौन से है?”वो बेपरवाही से बोला।
वामिका ने मोबाइल छीन लिया —
“अब बस भी करो!”
"अरे मेरा फोन..." निवान उठ खड़ा हुआ।
"तुम्हारा फोन अभी जब्त है," वामिका ने कहा, उसकी आँखों में अब गुस्से के साथ-साथ थोड़ी थकावट और… हल्की सी मुस्कान भी तैरने लगी थी।
"तुम्हें ज़रूरत है थोड़ी रियलिटी से कनेक्ट होने की। हर बात गूगल नहीं बताता, मिस्टर चौहान।"
"तो फिर आप बताइए ना," निवान ने मासूमियत से कहा,
"आपके फेवरेट फूल कौन से हैं?"
"मेरे फेवरेट फूल कौन से हैं?
अगर तुम्हें याद नहीं,
तो शायद तुम्हे कॉन्ट्रैक्ट पढ़ना चाहिए फिर से।"
निवान चौंका —
"कॉन्ट्रैक्ट में फेवरेट फ्लावर भी था क्या?"
"नहीं," वामिका बोली, "पर एक लाइन ज़रूर थी — "नो हर वेल बिफ़ोर यू ट्राय टू इम्प्रेस हर।"
तुमने पढ़ा था या बस साइन करके सीधा सैलरी के कॉलम पर पहुंच गए थे?"
निवान थोड़ा झेंप गया।
"मैंने… थोड़ी जल्दी में था उस दिन। और हाँ, सैलरी कॉलम में काफ़ी ज़ीरो थे।"
"ज़ीरो दिमाग में भी दिख रहे हैं," वामिका ने कहा, वो अब पूरी तरह CEO मोड में आ गई थी।
"तुम्हें क्यों हायर किया था, याद है?"
निवान ने थोड़ा संजीदा होकर जवाब दिया —
"हां... अच्छी तरह से याद है...मीडिया को बताने के लिए कि आप आपकी लाइफ में भी लव है।"
"इग्ज़ैक्टली," वामिका ने कहा।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
अगले दिन।
डायनिंग टेबल पर हमेशा की तरह आज भी वामिका बैठी ब्रेकफास्ट कर रही थी। आज भी वो पर्फेक्टली ड्रेस्ड थी ।उसने अपने स्ट्रेट बालों को हल्की पोनी में बांध रखा था।
वो चुपचाप अपनी कॉफी पी रही थी।
और निवान, सामने बैठा था ।
पर उसकी नज़रें ब्रेकफास्ट करने से ज्यादा वामिका पर टिकी थीं शायद उसे कुछ कहना था, लेकिन शब्द जैसे गले में ही अटक रहे थे।
वामिका ने अचानक कहा —
"क्या हुआ? खा क्यों नहीं रहे? चक्कर खाकर बेहोश होना है क्या?"
"नहीं…" निवान ने जल्दी से टोस्ट उठाने की एक्टिंग की,
"ऐसे ही… सोच रहा था कुछ…"
"पूरे दिन तुम्हें मेरे आस-पास रहना है — तुम्हें एनर्जी चाहिए, सोचने की नहीं, खाने की ज़रूरत है," वामिका ने बेमन से टोस्ट पर मक्खन लगाते हुए कहा।
निवान हल्का सा मुस्कुराया — "आपको फ़िक्र है मेरी?"
वामिका ने उसकी तरफ बिना देखे जवाब दिया —
"नहीं।
मुझे अपनी इमेज की फिक्र है।
अगर मेरा कॉन्ट्रैक्टेड बॉयफ्रेंड बीच सड़क पर बेहोश हो गया,
तो मीडिया इसे 'ब्रेकअप ड्रामा' बना देगी।"
निवान ने एक फीकी हँसी के साथ सिर हिलाया —
"सही है..."
फिर एक सेकंड रुका, और धीरे से बोला —
"मुझे आपसे... एक बात कहनी थी..."
वामिका ने सिर उठाया —
"हूँ?"
निवान की उंगलियां टेबल के नीचे एक-दूसरे में उलझने लगीं।
"परसों… मेरी बहन की सर्जरी है… और… उसके लिए थोड़े पैसों की ज़रूरत है…"
एक पल के लिए वामिका की निगाहें ठहर गईं।
"कितने?" उसने सीधा पूछा।
निवान थोड़ा चौंका, फिर बोला —
"दो लाख... मैं जानता हूं पेमेंट महीने के एंड में—"
वामिका ने तुरंत फोन उठाया, कुछ टाइप करते और बोली —
“हो गया। दो लाख ट्रांसफर कर दिए हैं। चेक कर लो।”
निवान की आंखें फैल गईं —
“आपने… बिना कुछ और पूछे…?”
“तुमने कभी मुझसे फालतू बातें नहीं कीं,” वामिका ने शांत स्वर में कहा,
“तो मुझे लगा, इस बार भी झूठ नहीं बोल रहे हो।”
निवान बिल्कुल चुप हो गया।
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ये वही लड़की है — जो कल तक हर जवाब में एक नुकीला ताना छुपा रखती थी।
उसने धीमे से कहा —
“थैंक यू… सच में… आपने शायद मेरी बहन की जान बचा ली है।”
वामिका की निगाहें एक पल के लिए सॉफ्ट हुईं —
फिर उसने खुद को तुरंत कंट्रोल में लिया और सख्त लहज़े में बोली —
“ये थैंक यू मत बोलो। ये कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा नहीं है।”
“फिर क्या है?” निवान ने हौले से पूछा।
“...मानवता,” वामिका बोली — और एक सिप कॉफी लिया।
कमरे में कुछ देर खामोशी रही।
फिर अचानक वामिका ने टोस्ट का एक टुकड़ा उसकी प्लेट में सरकाते हुए कहा —
“अब खाओ।
क्योंकि अगर तुम भूखे पेट बेहोश हो गए,
तो मीडिया ही नहीं — मैं खुद तुम्हें निकाल दूंगी।”
निवान मुस्कुरा पड़ा —
“ओके बॉस।”
“बॉस नहीं,” वामिका बोली,
“गर्लफ्रेंड कहलाती हूं इन दिनों।”
निवान ने टोस्ट उठाया और हल्की मुस्कान के साथ कहा —
“गर्लफ्रेंड को देखकर भूख वैसे भी कम लगती है…”
वामिका ने एक तीखी नज़र उसकी तरफ डाली —
“फ्लर्टिंग कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा नहीं है, मिस्टर चौहान।”
“सॉरी…”
निवान ने बटर चाकू से प्लेट पर आड़ी-तिरछी लाइनें बनाते हुए कहा,
“बस… दिल से निकली बात थी…”
वामिका कुछ नहीं बोली।
पर इस बार, उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान जरूर तैर गई।
कुछ देर बाद...
वामिका उठी, अपनी कॉफी का आखिरी सिप लिया और टिशू से होंठ पोंछते हुए बोली —
“मेरा एक गार्ड तुम्हें हॉस्पिटल छोड़ देगा।
अपनी बहन से मिलकर आ जाना।
शाम को वापस यहीं चाहिए तुम।”
निवान ने उसकी आंखों में देखा — वहाँ न आदेश था, न संदेह… बस एक सीधी, सख्त सी पर परवाह करती बात।
निवान ने सिर हिलाया —
"थैंक यू…"
वामिका ने कोई जवाब नहीं दिया, बस पर्स उठाया और सीधी चल दी।
कुछ देर बाद...
वो जैसे ही अपने ऑफिस की बिल्डिंग में दाखिल हुई, रिसेप्शन से लेकर लिफ्ट तक सब की निगाहें उसकी ओर थीं ।
वो अपने केबिन में पहुँची ही थी कि उसकी असिस्टेंट निया टैबलेट लिए अंदर आई —
“मैम…” निया ने धीमे स्वर में कहा, “मिस्टर रेहान मल्होत्रा आये हैं… बिना अपॉइंटमेंट के।”
वामिका की आंखें सिकुड़ गईं।
एक पल के लिए उसने ठहरकर निया को देखा, फिर बोली —
"वो अपॉइंटमेंट के बिना आए हैं?"
"यस मैम… पर उन्होंने कहा था ये सिर्फ़ कुछ मिनट्स की बात है।"
वामिका ने घड़ी देखी, फिर खिड़की के बाहर झिलमिलाती इमारतों की तरफ कुछ सेकंड तक देखा।
“उन्हें कॉफी ऑफर की?”
“नहीं मैम… आपने मना किया था बिना इजाज़त किसी को कुछ ऑफर करने से।”
वामिका ने हल्के से सिर हिलाया, जैसे पुराने आदेश की पुष्टि खुद को भी याद हो गई हो।
“ठीक है… पाँच मिनट। ले आइए उन्हें।”
निया बाहर चली गई।
कुछ मिनट बाद – वामिका ने मीटिंग रूम का
दरवाज़ा खोला औ खुद अंदर घुसी ही थी कि
उसकी नजर रेहान पर पड़ी जो खिड़की के बाहर झांक रहा था।
उसने वही सिग्नेचर मुस्कान चेहरे पर सजा रखी थी।
“गुड मॉर्निंग, मिस वामिका।”
"मिस्टर मल्होत्रा, बिना अपॉइंटमेंट ऑफिस में आना थोड़ा अनप्रोफेशनल है।"
रेहान मुस्कुराया, धीमे से बोला —
"माफ़ कीजिए… पर कुछ बातें अपॉइंटमेंट लेकर नहीं होतीं।"
"अगर आप बिज़नेस की बात करने आए हैं, तो अगली मीटिंग सिंगापुर में है।
अगर पर्सनल बात करनी है, तो मैं क्लियर कर दूँ — मेरी लाइफ में उसके लिए जगह नहीं है।"
रेहान उसकी सख्ती पर भी मुस्कुराया —
"मैं आपको परेशान करने नहीं आया, वामिका।
बस एक बात कहनी थी।"
वामिका बोली —
“पर मुझे वो एक बात भी नहीं सुननी, मिस्टर मल्होत्रा।”
रेहान का चेहरा कुछ पल के लिए ठहर गया।
“कम-से-कम सुन तो लो…” वो बोला।
“मैं वही सुनती हूँ जो ज़रूरी हो,” वामिका ने ठंडे स्वर में कहा,
“और आपकी बातें… मुझे जरूरी लगती नहीं।”
रेहान मुस्कुराया —
“फिर भी कहूँगा,” उसने कहा,
“क्योंकि कुछ बातें सिर्फ कह देने से हल्की हो जाती हैं… चाहे सुनी जाएं या नहीं।”
वामिका ने बाँहें सीने पर मोड़ीं —
“आपके पास तीन मिनट हैं, मिस्टर मल्होत्रा। उसके बाद मैं मीटिंग में जा रही हूँ।”
रेहान ने धीमे स्वर में कहा —
“मुझे तुम्हें खोने का डर है…
हालाँकि, तुम्हें कभी पाया ही नहीं था।”
वामिका की आंखों में कोई बदलाव नहीं आया।
वो चुपचाप बोली—"मिस्टर मल्होत्रा, आइ एम इन अ रिलेशनशिप।"
रेहान की मुस्कान जैसे जम गई हो।
उसकी आँखों की चमक धीमी पड़ गई…
वो कुछ पल तक चुप रहा —
फिर गहरी सांस लेकर बोला —
“मैं जानता हूँ ... न्यूज देखी थी मैंने।वैसे… वो लड़का बहुत लकी है।"
वामिका ने एक लंबी सांस ली और धीमे-से कहा —
“अब आप जा सकते हैं, मिस्टर मल्होत्रा। आपने अपनी बात कह दी… और मैंने सुन ली।”
रेहान हल्का-सा मुस्कुराया, मगर उसकी आँखों में वो चंचल चमक अब बुझ चुकी थी।
वो उठा, पर जाते-जाते एक बार फिर बोला —
“अगर कभी… बहुत भीड़ में भी अकेलापन महसूस हो, तो याद रखना — एक शख़्स है जो तुम्हें समझना चाहता था।”
वामिका ने बिना उसकी तरफ देखे कहा —
“मैं भीड़ में नहीं… प्यार में हूं, मिस्टर मल्होत्रा। और वहाँ कोई जगह खाली नहीं।”
रेहान चुपचाप पलटा और मीटिंग रूम से बाहर निकल गया।
उसी वक़्त… वामिका अपने ऑफिस में वापस पहुंची।
वो दरवाज़ा बंद करते हुए खुद से बड़बड़ाई —
"इससे ज़्यादा ओवरड्रामैटिक इंसान मैंने नहीं देखा…"
उसने कुर्सी पर बैठते ही फाइल उठाई, मगर ध्यान फाइल पर नहीं था।
"एक बार मिले थे… बस एक बार।
न कोई बात, न जान-पहचान —
और अब इस तरह के डायलॉग?"
उसने बड़बड़ाते हुए पानी का ग्लास उठाया —
“‘मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता था…’ सीरियसली?”
उसने इंटरकॉम दबाया —
“निया, आज के सारे अपॉइंटमेंट्स मुझे मेल कर दो… और हाँ,
मिस्टर मल्होत्रा अब कभी बिना अपॉइंटमेंट आएं तो सीधे इनकार कर देना।"
कुछ देर बाद...
निवान कार की पिछली सीट पर बैठा था।
वामिका के बंगले से निकलते वक़्त ही उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान थी ।
कार वामिका का पर्सनल गार्ड चला रहा था, जिसका चेहरा बिल्कुल वैसा ही था जैसा बॉडीगार्ड्स का होता है — सीरियस, एक्सप्रेशनलेस, और हमेशा चौकन्ना।
निवान ने थोड़ी देर बाद ऊबकर पूछा —
"भाई… तुम्हारा नाम क्या है?"
गार्ड ने बिना पीछे देखे बोला —
"संदीप।"
"अच्छा संदीप भाई, इतना सीरियस क्यों रहते हो यार? मैं हॉस्पिटल जा रहा हूं, बैंक लूटने नहीं।"
संदीप चुप रहा।
"और सुनो," निवान झुका और थोड़ी आवाज़ धीमी की,
"तुम्हें अंदर तक चलने की ज़रूरत नहीं है, मैं अकेला जा सकता हूं..."
संदीप ने पहली बार रियर-व्यू मिरर में उसकी आंखों में देखा और बोला —
"मैम का आदेश है, आपको हर जगह एस्कॉर्ट करना है।"
"ओह प्लीज़!" निवान बड़बड़ाया,
"लगता है मैं बॉयफ्रेंड कम, बंदी ज़्यादा बन गया हूं।"
कुछ ही मिनट बाद... हॉस्पिटल के सामने कार रुकी।
निवान ने जल्दी से दरवाज़ा खोला, बाहर निकला और लंबी सांस ली —
"फाइनली!"
पर पीछे से संदीप भी उतर गया, बिल्कुल उसके पीछे खड़ा हो गया जैसे उसकी परछाई हो।
"ओह कम ऑन!" निवान ने खुद से कहा।
वो तेजी से हॉस्पिटल के गेट की ओर चला —
लेकिन हर दो कदम पर पीछे मुड़कर देखता —
और हर बार संदीप दो क़दम की दूरी पर ही होता।
"तुम्हें क्या लगता है, मैं भाग जाऊँगा?" उसने खीझते हुए पूछा।
संदीप ने ठंडी आवाज़ में कहा —
"मैम ने कहा है — आपकी सुरक्षा मेरी ज़िम्मेदारी है।"
"भाई मैं हॉस्पिटल में हूं!"
निवान ने गुस्से में सीढ़ियां चढ़ते हुए कहा,
"प्लीज़, बाहर वेट कर लो यार... मुझे अपनी बहन से अकेले मिलना है..."
संदीप थोड़ी देर रुका… फिर बोला —
"ठीक है, पांच मिनट। लेकिन अगर पांच मिनट बाद आप बाहर नहीं आए, तो मैं अंदर आ जाऊंगा।"
"जी हुज़ूर!"
निवान ने ड्रामेटिक अंदाज़ में सलाम ठोका और अंदर चला गया।
कुछ ही बाद....
निवान तेज़ी से चलते हुए उस वार्ड की ओर बढ़ा जहाँ उसकी बहन, विविधा, भर्ती थी।
हर कदम के साथ उसका दिल तेज़ धड़कने लगा था। पूरे रास्ते उसने खुद को संभाले रखा था, लेकिन अब… अब दरवाज़े के उस पार उसकी बहन थी ।
दरवाज़े के बाहर पहुंचते ही उसका पैर एक पल को ठिठका।
काँच की खिड़की से उसने अंदर देखा — विविधा बेहोश थी। ऑक्सीजन मास्क लगा था… हाथ में ड्रिप… माथे पर हल्की पट्टी… और चेहरा… सफेद तकिये पर और भी ज़्यादा फीका लग रहा था।
एक झटका-सा सा लगा उसे।
वो वहीं दीवार से टिक गया।
आंखें भर आई थीं… पर आँसू नहीं गिरने दे रहा था… क्योंकि उसे मज़बूत बनना था… उसके लिए।
धीरे से दरवाज़ा खोला… और अंदर चला गया।
वहाँ कोई नहीं था, बस एक नर्स दूर कोने में कुछ लिख रही थी।
निवान उसके सिरहाने पहुँचा… कुर्सी खींची और बैठ गया।
"विविधा…" उसने धीरे से उसकी उंगलियाँ पकड़ी।
उंगलियाँ ठंडी थीं।
उसने अपनी हथेली से उन्हें ढँक लिया।
“माफ़ कर ना यार… तुझसे हमेशा कहता था कि कुछ बड़ा करूंगा… तुझे सब कुछ दूंगा… पर देख, आज भी… तेरे लिए पैसे माँगने पड़े…”
उसकी आवाज़ कांपने लगी।
“तू सबसे छोटी है ना, पर हमेशा सबसे बड़ी बनके रही… मुझे डांटा भी, समझाया भी… और आज… तू चुप क्यों है, पगली?”
एक आंसू… हथेली पर गिरा।
विविधा की आँखें अब भी बंद थीं, पर ऐसा लगा जैसे उसकी उंगलियाँ हल्का सा हिली हों।
निवान का दिल एक पल के लिए रुक गया।
“तू सुन रही है?” उसने झुककर पूछा।
धीरे-धीरे निधि की पलकें हिलीं।
फिर… उसकी आवाज़ आई — बेहद धीमी… टूटी-सी…
“भैया…”
बस एक शब्द।
और वही शब्द… काफी था निवान को तोड़ने के लिए।
वो झुककर उसके माथे को चूमा, उसकी आँखों से अपनी आँसू की बूँदों को साफ किया।
“पगली सब ठीक हो जाएगा, सुन रही है ना?” उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मैं यहीं हूँ… और अब हर वक़्त तेरे साथ हूँ… कहीं नहीं जाऊंगा।”
विविधा की आँखें बंद हो गईं… पर होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई।
उस मुस्कान में भरोसा था।
भाई पर भरोसा।
तभी नर्स धीरे से पास आई —
"सर… डॉक्टर बुला रहे हैं।"
निवान ने एक बार फिर विविधा की उंगलियाँ थाम लीं, उसके माथे पर प्यार से हाथ फेरा और धीमे से बोला —
"मैं अभी आता हूँ… और कुछ भी हो जाए, अब तुझे कुछ नहीं होने दूंगा।"
वो उठा… एक बार पलटकर देखा… और कमरे से बाहर निकल गया।
कुछ देर बाद… डॉक्टर के केबिन में।
निवान ने दरवाज़ा खटखटाया।
अंदर से आवाज़ आई — “कम इन.”
निवान अंदर गया।
“डॉक्टर…” निवान ने झुककर नमस्ते किया।
डॉक्टर ने सिर उठाया, मुस्कराया, “हाँ निवान… बैठिए।”
“जी…” वो बैठ गया, फिर जेब से एक छोटा-सा बैग निकाला। ज़िप खोली। अंदर नोटों की गड्डियाँ थीं — सावधानी से गिनकर रखी गईं।
“ये रहे दो लाख रुपये, जैसा आपने कहा था… सर्जरी से पहले जमा कराने थे…”
डॉक्टर ने बैग की तरफ देखा और सर हिलाया, “बहुत अच्छा किया आपने। सर्जरी परसों है। टाइम से पैसे आ गए तो सारी तैयारी बिना देरी के शुरू हो जाएगी।”
“डॉक्टर…” निवान की आवाज़ थोड़ी धीमी पड़ गई, “उम्मीद है ना… सब ठीक होगा?”
डॉक्टर ने कुछ देर तक उसकी आँखों में देखा।
“सर्जरी जटिल है, पर हम पूरी कोशिश करेंगे। आपकी बहन की हालत नाज़ुक है… लेकिन हिम्मत मत हारिए।”
निवान ने चुपचाप सिर हिलाया।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
कुछ देर बाद…
सर्जरी के कागज़ी काम पूरे हो चुके थे। डॉक्टर्स ने सब समझा दिया था — रिस्क्स, प्रोसेस, और क्या-क्या ज़रूरी होगा अगले दो दिनों में।
लेकिन अब… वक्त था जाने का।
पर मन?
मन तो जैसे वार्ड के दरवाज़े पर अटक गया था… उस पल में, जब विविधा ने उसे 'भैया' कहकर पुकारा था।
निवान वापस उस वार्ड की ओर चला।
हर कदम भारी था।
दरवाज़ा खोलते हुए उसकी उंगलियाँ काँपीं।
वो अंदर गया।
विविधा अब भी वैसे ही लेटी थी — बस अब चेहरे पर थोड़ी रंगत लौट आई थी। साँसें भी थोड़ी सधी हुई लग रही थीं।
वो पास गया। फिर से वही कुर्सी खींची। बैठ गया।
कुछ पल चुपचाप उसे देखता रहा।
जैसे आँखें भर लेना चाहती हों ये चेहरा… ये पल… ये बहन…
उसने फिर से उसकी उंगलियाँ थामीं।
“दो दिन हैं तेरे पास…” उसने धीमे से कहा, जैसे उससे ज़्यादा खुद से बात कर रहा हो,
“फिर तू ठीक हो जाएगी, फिर एकदम पागल जैसी बातें करेगी, फिर मुझे डाँटेगी… और मैं सुनूंगा… जैसे हमेशा सुनता था…”
उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे नर्म पड़ गईं — अब गर्माहट लौट रही थी।
विविधा की पलकें फिर से हल्की-सी हिलीं।
निवान मुस्कराया,
“मैं जा रहा हूँ, बस थोड़ी देर के लिए। वापस आऊंगा… कल फिर आऊंगा… मैं हर रोज़ आऊंगा, समझी?”
विविधा ने आँखें खोलीं — आधी अधूरी — पर भाव साफ था…
"रुक जा..."
निवान का गला भर आया।
“माफ़ करना यार… अभी रुक नहीं सकता… वहाँ भी किसी का जवाब देना होता है… पर देख लेना, दो दिन बाद जब तू उठेगी ना… मैं तुझे तेरी पसंद की आइसक्रीम लाकर दूंगा… और तुझसे कोई और वादा नहीं करूंगा — बस हर रोज़ तुझे हँसाऊंगा।”
वो झुका, उसके माथे को छुआ… इस बार थोड़ी देर तक।
जैसे उसकी हर तकलीफ अपने माथे से खींच लेना चाहता हो।
फिर वो उठा।
पलटा।
दरवाज़े की ओर बढ़ा।
हर कदम भारी था…
हर कदम पीछे खींच रहा था…
पर जाना तो था ही…
वो बाहर निकला…
संदीप वैसे ही खड़ा था, वैसा ही सीरियस चेहरा।
निवान ने कुछ नहीं कहा। बस उसकी तरफ देखा… फिर कार की ओर बढ़ गया।
संदीप चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा।
कार के अंदर बैठते ही निवान ने खिड़की की तरफ देखा। हॉस्पिटल का वो वार्ड अब पीछे छूट रहा था।
उसने आँखें बंद कीं।
पर दिल में… सिर्फ एक चेहरा था।
विविधा।
उसकी बहन। उसकी जान।
संदीप ने गाड़ी स्टार्ट की।
कार हॉस्पिटल से दूर निकल गई…
कुछ ही देर बाद…
कार बंगले के सामने आकर रुकी। मुख्य गेट खुल चुका था, और अंदर हलचल सी थी।
गार्ड्स फॉर्मल अलर्ट पोज़िशन में थे।
दो-तीन नौकर घर के बाहर इधर-उधर दौड़ते दिखाई दिए। कोई पौधों को पानी दे रहा था, कोई लॉन से कारपेट समेट रहा था, और कोई दरवाज़े पर लगे शीशे को रगड़-रगड़कर चमका रहा था।
वो रोज़ की तरह की हलचल नहीं थी।
वो किसी "आने वाले तूफ़ान की तैयारी" थी।
कार से संदीप पहले उतरा। फिर उसने दरवाज़ा खोला।
निवान उतरा — पर नज़रों में अब भी वही हॉस्पिटल का धुंधला प्रतिबिंब था।
सामने खड़ा गार्ड झुक कर बोला — “मैम अंदर वेट कर रही हैं।”
निवान ने बस सिर हिलाया और बंगले के दरवाज़े की ओर बढ़ गया।
बीच में एक चेयर पर बैठी थी वामिका रौशन।
वो अपने टैबलेट पर कुछ पढ़ रही थी।
उसने स्लेट ग्रे पैंटसूट पहना था, बाल हमेशा की तरह परफेक्ट पोनी में, होंठों पर हल्की न्यूड शेड की लिपस्टिक।
पास ही उसकी असिस्टेंट निया खड़ी थी— आईपैड लिए।
“मैम, दुबई डील का फॉलोअप…” निया कुछ कहने ही वाली थी कि वामिका ने हाथ उठाकर उसे चुप करवा दिया।
दरवाज़े की तरफ देखते हुए बोली —
“वो आ गया।”
निवान जैसे ही अंदर दाख़िल हुआ, उसकी नज़र सीधे वामिका से टकराई।
वो सीधा चला आया।
वामिका ने टैबलेट एक तरफ रख दी।
“कैसी है तुम्हारी बहन?” उसने सीधे पूछा।
निवान थोड़ी देर देखता रहा, फिर बोला — “बेहतर है… लेकिन अभी… क्रिटिकल टाइम है…”
वामिका ने सिर हिलाया। “बैठो।”
निवान चुपचाप सामने के सोफे पर बैठ गया।
वामिका ने असिस्टेंट की ओर देखा — “हमें दस मिनट चाहिए।”
असिस्टेंट चुपचाप बाहर चली गई।
अब कमरे में सिर्फ दो लोग बचे थे।
“तुम्हारी हालत देखकर लग रहा है कि तुम्हें भी सर्जरी की ज़रूरत है — दिल की नहीं, नींद की।”वामिका बोली।
निवान हल्का सा मुस्कुराया। उसकी आवाज़ थकी हुई थी — “सच कहूँ… दो दिन से सिर्फ चाय और डर पी रहा था…”
वामिका ने उसके पास आकर पास रखी पानी की बोतल आगे बढ़ाई — “ड्रामा बंद करो। ये लो, पानी पियो। और ऊपर जाकर सो जाओ।”
निवान ने पानी लिया। बोतल थामी, फिर बिना देखे धीरे से बोला —
“थैंक यू… आज जो भी हुआ… शायद मैं कभी चुकता नहीं कर पाऊंगा…”
वामिका का चेहरा सख्त था, पर उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं।
वो बोली — “इमोशनल मत बनो, मिस्टर चौहान। मैं बाय चॉइस पत्थर दिल हूं, पर तुम्हारी बहन की हालत ने थोड़ी देर के लिए दरार डाल दी थी।”
निवान ने सिर झुकाया — “कभी-कभी दरारों से ही रोशनी आती है…”
एक पल के लिए दोनों के बीच खामोशी छा गई।
फिर वामिका ने कहा — “जाओ… ऊपर जाओ। और हाँ, डिनर मिस किया तो मत कहना कि मैंने बताया नहीं था।”
निवान ने धीरे से सिर हिलाया। और फिर ऊपर की ओर बढ़ गया।
हर कदम उसके लिए भारी था… पर इस बार — थकान की वजह अलग थी।
वो नहीं जानता था — पीछे खड़ी वामिका ने एक लंबी साँस ली थी।
जैसे कोई सीईओ नहीं, एक इंसान… कुछ पल के लिए खुद को देख रही थी — आईने में नहीं, निवान की आँखों में।
रात 11 बजे।
निवान, अपनी शर्ट उतारकर बेड पर फेंक चुका था। अब बस एक ग्रे ट्रैक पैंट में, बालकनी की रेलिंग से टिककर खड़ा था। उसकी आंखें बंद थीं… जैसे हर भाव, हर सोच उस हवा के साथ बहा देना चाहता हो।
वो थका हुआ था… दिल और दिमाग, दोनों थके हुए।
तभी…
क्लिक — दरवाज़ा खुला।
वामिका अंदर आई।
उसके कदम बहुत हल्के थे, लेकिन उसकी मौजूदगी बहुत भारी।
निवान ने आवाज़ नहीं सुनी, पर जैसे उसकी साँसों में वो खुशबू उतर गई थी — वामिका की खुशबू।
वो चौंका… और पीछे मुड़ा।
जैसे ही उसने देखा कि वामिका सामने है, वो फौरन झेंप गया।
जल्दी से बालकनी का परदा खींचा और खुद को उससे ढक लिया।
"आप… आप ऐसे अचानक…" निवान झेंपकर बोला।
वामिका ने दरवाज़ा पीछे से बंद किया। और धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी।
"नाइस व्यू…" उसके चेहरे पर न कोई झिझक थी…और न ही कोई शर्म…
"मैं... मैं शर्ट पहनने ही वाला था," निवान ने गड़बड़ाते हुए कहा।
वामिका शरारत से मुस्कुरा दी —
"ओह प्लीज़! ग्रो अप, निवान… यह कोई करण जौहर का फिल्मी सीन नहीं चल रहा जहाँ हीरो शरमाकर पर्दे के पीछे छुपता है।"
"आपको कम से कम दरवाज़ा तो खटखटाना चाहिए था।"
"दरवाज़ा?" वामिका ने हल्का सिर झुकाकर एक आँख मिचकाई —
"कॉन्ट्रैक्ट में लिखा है ना… तुम्हारा हर कमरा, हर पल — मेरी इजाज़त से चलता है।"
"पर ये मेरा पर्सनल—"निवान पर्दे के पीछे से झाँकते हुए बोला।
"पर्सनल कुछ नहीं होता, मिस्टर चौहान।"
वामिका अब तक उसके बेड के पास पहुँच चुकी थी।
उसने उसके बेड पर फैली शर्ट को दो उंगलियों से उठाया… और अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघा।
“हम्म… सैंडलवुड बेस… क्लासिक,” उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
निवान हक्का-बक्का रह गया।
"आप... आप क्या कर रही हैं?"
वामिका ने शर्ट वापस बेड पर फेंकी।
“अनालिसिस कर रही हूँ… तुम्हारे परफ़्यूम से लेकर तुम्हारे कॉन्फिडेंस तक को।”
फिर उसकी नज़र सीधे पर्दे के उस पार खड़े निवान पर गई —
“अब आ भी जाओ, पर्दे के पीछे से कोई डील नहीं होती।”
निवान हिचकते हुए बाहर निकला… हाथ अभी भी अपने सीने के पास… जैसे खुद को ढकने की कोशिश कर रहा हो।
“मैंने सोचा था… आप बिज़नेस वुमन हैं… प्रोफेशनल…”
वामिका ने उसे गौर से देखा। फिर अपनी जगह से उठी, उसके और क़रीब चली आई।
अब वो पर्दे से ज़रा ही दूरी पर थी… और निवान का गला एकदम सूख गया।
"एक बात बताओ, निवान…" वामिका ने धीमे स्वर में कहा।
"तुम हर बार मुझे देखकर ऐसे क्यों घबरा जाते हो? मैं कोई चुड़ैल नहीं हूँ।"
"मैं नहीं घबराता," निवान ने मुड़ते हुए कहा, पर उसकी नज़रें अब भी नीचे थीं।
"अच्छा? तो ये पर्दे वाला ड्रामा क्या है?"
वामिका ने उसकी ट्रैक पैंट की डोरी की तरफ देखा और शरारत से बोली —
"डोंट वरी, आई'म नॉट इंटरेस्टेड इन स्टीलिंग योर पैंट्स..."
"आप… आप बहुत बोल्ड हैं…"
"और तुम बहुत भोले हो," वामिका ने तुरंत कहा।
फिर वामिका उसकी ओर थोड़ी और झुकी।
उसके होंठों से बस कुछ इंच दूर निवान का चेहरा था।
निवान की धड़कनें अब हल्के शोर की तरह उसके सीने में गूंज रही थीं।
थक… थक… थक…
वामिका का चेहरा एकदम नज़दीक था…
इतना कि उसका गर्म सांसों का एहसास, निवान की ठंडी त्वचा को सुलगाने लगा।
वो कुछ बोलने ही वाला था कि…
एक अजीब सी स्मेल उसकी नाक से टकराई।
हल्की, तीखी… जैसे वाइन या व्हिस्की की मीठी-करारी खुशबू।
निवान ने न चाहते हुए भी सूंघा…
फिर तुरंत फुसफुसाया —
“आपने… ड्रिंक की है क्या?”
वामिका मुस्कराई नहीं…
उसने कोई जवाब नहीं दिया…
बस एक झटके में उसने परदा पीछे फेंका — और लड़खड़ा गई…
सीधा — निवान की बाँहों में।
"वामिका!"
निवान ने उसे पकड़ लिया… पर उसका खुद का संतुलन भी बिगड़ता जा रहा था।
वामिका की आंखें अब धीरे-धीरे बंद हो रही थीं…
उसका सिर निवान के कंधे से लग चुका था…
और वो धीमी आवाज़ में बुदबुदाई —
“नहीं तो…”
“आपने ड्रिंक की हुई है…”
निवान ने फिर से दोहराया, जैसे खुद को यकीन दिला रहा हो।
पर वामिका का जवाब सिर्फ एक हल्की सी साँस थी…
जो उसके कान के पास से होते हुए, उसकी रीढ़ में उतर गई।
कुछ सेकंड… कुछ साँसें… और पूरा कमरा जैसे थम गया।
निवान अब भी उसे थामे खड़ा था, लेकिन उसकी पकड़ अब हिचकती सी थी।
उसके गले से एक सूखी सी आवाज़ निकली —
“आपको बैठना चाहिए…”
वो उसे बेड तक लाने की कोशिश करने लगा, लेकिन वामिका ने उसकी बाह को पकड़ लिया।
“शश्श…”
उसने फुसफुसाते हुए कहा —
“एक सेकंड… ऐसे ही रहने दो… तुमसे… गर्मी सी आती है…”
“व्हाट?”
निवान हकबका गया।
“दिल की गर्मी, मिस्टर चौहान…”
उसने आँखें बंद रखते हुए कहा…
“यू हैव अ गुड हार्ट… और एक कन्फ्यूज्ड माइंड…”
वो अब पूरी तरह से उसके सीने पर टिक चुकी थी।
निवान की उंगलियां काँप रही थीं…
वो समझ नहीं पा रहा था —
वो उसे गिरने से बचा रहा है या खुद बहकने से।
“वामिका…”
उसने धीरे से कहा —
“आपको वाकई में रेस्ट चाहिए… मैं… मैं किसी को बुला देता हूँ…”
वामिका ने उसकी बाह को और कस लिया।।
“नहीं। किसी को मत बुलाना… कोई देखेगा… तो समझेगा कि…”
वो रुक गई।
निवान ने फुसफुसाकर पूछा —
“कि क्या?”
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
अगले ही पल…
वामिका लुढ़क गई।
उसकी आँखें बंद हो चुकी थीं… जैसे किसी ने स्विच ऑफ कर दिया हो।
“वामिका!”
निवान के गले से निकला एक हड़बड़ाया हुआ स्वर।
उसने जैसे-तैसे उसे थामा… और बेड तक लाया।
उसकी साँसें अब गहरी थीं… और होंठों से कुछ बुदबुदाहट बाहर आ रही थी।
वामिका बड़बड़ा रही थी…
“तुम्हारी गर्दन की नसें हिलती हैं जब तुम शर्म से झेंपते हो तब…”
“हाह… गले के नीचे का वो तिल… यू डोंट ईवन नो…”
निवान की आँखे फटी रह गईं।
उसका चेहरा लाल पड़ चुका था।
“ये… ये क्या बकवास…”
उसने सिर झटकते हुए खुद को काबू में लाने की कोशिश की।
वामिका ने करवट बदली, और अपनी बाँह उसके तकिये पर फैला दी।
फिर बोली — " बेबी ब्लू…"
बस!
इतना सुनते ही, निवान का दिमाग शॉर्ट-सर्किट कर गया।
"नोप!"
"आई कांट हैंडल दिस!"
उसने तेजी से एक कम्बल वामिका पर डाला, खुद को दूसरी ओर घुमाया और लंबी साँस लेकर कहा —
"कूल डाउन… शांति… शांतिनिकेतन…"
लेकिन फिर भी उसका चेहरा अब तक गर्म था, कान जल रहे थे।
और फिर… उसने वही किया जो हर शरीफ लड़का करता…
वो भागा — सीधा बाथरूम की तरफ!
दरवाज़ा बंद किया।
पीछे टिक गया।
और एक लंबी साँस छोड़ी।
"हे भगवान……"
उसने मिरर में खुद को देखा — चेहरा पसीने से भीगा हुआ, बाल बिखरे हुए और आंखों में डर सा…
"उसने मुझे… बेबी ब्लू कहा?!"
"मुझे?!"
उसने पानी चला दिया।
चेहरे पर छींटें मारे।
पर दिल अब भी बोल रहा था…
“दिल की गर्मी…”
“ओ नो नो नो नो… स्टॉप इट!”
उसने कान बंद कर लिए।
निवान अब भी बाथरूम के सिंक से टिका हुआ था।
"उफ्फ...!" उसने खुद से कहा, "नॉर्मल हो जा, भाई...।"
पर दिमाग कहाँ मानता है?
उसने धीरे से मोबाइल उठाया।
फोन अनलॉक किया।
गूगल खोला… और टाइप किया —
"व्हॉट डज़ बेबी ब्लू मीन?"
सर्च रिजल्ट खुलते ही उसकी आँखें और चौड़ी हो गईं।
पहला रिजल्ट:
"बेबी ब्लू" इज़ अ लाइट ब्लू कलर। इट मेक्स पीपल थिंक ऑफ पीस, क्यूटनेस, एंड समटाइम्स लव और रोमांस।"
दूसरा रिजल्ट:
"व्हेन समवन रिफर्स टू अ पर्सन ऐज़ 'बेबी ब्लू', इट कैन मीन दे फाइंड देम सॉफ्ट, अडॉरेबल, और इर्रेसिस्टिबली अट्रैक्टिव इन अ वल्नरेबल, चार्मिंग वे।"
“ओह माय गॉड…” निवान ने मोबाइल धीरे-धीरे नीचे सरकाया।
“तो उसने मुझे… इर्रिसिस्टेबलली अट्रैक्टिव बोला?!”
उसका चेहरा अब टमाटर रेड हो चुका था।
“नहीं… नहीं… ये सब उसने नशे में कहा होगा। बस ऐसे ही! ये कुछ नहीं है… नॉट अ बिग डील…”
उसने खुद को समझाने की कोशिश की।
पर तभी —
धप!
बाहर से कुछ गिरने की आवाज़ आई।
निवान का दिल एक बार फिर उछला।
उसने बाथरूम का दरवाज़ा हल्के से खोला…
झांका…
वामिका अब तक बेड पर थी… पर उसका एक पैर ज़मीन पर लटका हुआ था…
और वो बड़बड़ा रही थी —
“बेबी ब्लू… हुम्म… यू वॉक फनी जब टेंशन में होते हो…”
निवान की आंखें फिर चौड़ी।
"हद है!"
उसने बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया, और बड़बड़ाया —
"ये औरत… सीरियसली डेंजरस है!"
"नशे में भी… सीधा मेरे माइंड पे अटैक!"
अब वो मिरर के सामने खड़ा था, खुद से पूछ रहा था —
“क्या मैं वाकई इतना बेबी ब्लू दिखता हूँ?!”
कुछ देर बाद…
बाथरूम से बाहर निकलते वक्त निवान ने एक बार फिर वामिका को देखा।
वो अब भी बेड पर फैली पड़ी थी, बाल बिखरे हुए, कम्बल आधा गिरा हुआ… और होंठ अब भी कुछ बड़बड़ा रहे थे।
निवान ने आँखें बंद कर लीं।
"स्टे स्ट्रॉन्ग…" उसने खुद से कहा।
धीरे-धीरे कदमों से जाकर सोफे की ओर बढ़ा… और खुद को लगभग फेंक ही दिया।
थक चुका था — दिमाग से, दिल से, आत्मा से।
कुशन सीने पर रख लिया… और छत को घूरते हुए बोला —
"बस… तीन महीने…"
"बस तीन महीने और…"
"ये कॉन्ट्रैक्ट खत्म होते ही…
मैं वापस चला जाऊँगा।"
" अपनी बहन के साथ नई लाइफ शुरू करूँगा…"
उसने एक लंबी साँस ली, और मुंह दबा लिया — जैसे खुद को चुप कराने की कोशिश कर रहा हो।
"ये कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड बनना… सीरियसली… बहुत ही अजीब और खतरनाक है!"
"कभी कभी लगता है, मैं बॉयफ्रेंड नहीं, कोई एजेंट हूँ जो एक स्पाई गर्ल के साथ मिशन पर भेजा गया है।"
"और ये लड़की… उफ्फ…"
"शांत बैठे बैठी भी, मिसाइल छोड़ देती है…"
थोड़ी देर चुप रहा… फिर करवट बदलते हुए कुशन से चेहरा छुपा लिया —
"बेबी ब्लू… हहह… "मेरा मतलब है… भला ऐसा भी कौन बोलता है?!"
सुबह 8:02 AM बज रहे थे।
हल्की धूप खिड़की से छन कर कमरे में आ रही थी।
वामिका अब भी बेसुध सो रही थी।
पर सोफे पर पड़ा बेचारा बॉयफ्रेंड... यानी कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड… पूरी रात सो नहीं पाया था।
निवान ने अपनी आँखें मिचमिचाते हुए खोलीं, और सबसे पहले वही देखा —
कम्बल से बाहर लटकी वामिका की एक टांग…
"ओ गॉड… ये अब तक उसी पोज़ में है?"
उसने थके हुए अंदाज़ में खुद से कहा।
फिर —
वो उठा।
धीरे-धीरे चलकर बेड के पास गया।
वामिका अब शांति से सो रही थी। उसके बाल उसके चेहरे पर बिखरे थे, होंठों पर एक नर्म-सी मुस्कान थी… जैसे किसी मीठे ख्वाब में हो।
निवान ने एक पल को उसे देखा —
फिर धीरे से कम्बल उसके पैर पर चढ़ा दिया।
अगले ही पल
वामिका कुनमुनाई।
आँखें धीरे-धीरे खुलीं… पलकों पर अब भी नींद का भार था।
"हम्म…"
वो थोड़ी सी करवट बदलने ही वाली थी कि सामने खड़ा निवान दिख गया।
और जैसे ही उसकी धुंधली नज़रों ने निवान को पहचान लिया —
"आआआआआ!!"
एक ज़ोरदार चीख कमरे में गूंज उठी।
वामिका सीधे बैठ गई ।
"व्हाट द हेल!!"
"तुम मेरे रूम में क्या कर रहे हो?!"
निवान, जो बस कम्बल ठीक करने आया था, अब घबरा कर पीछे हट गया।
"अरे… ओह… नो! फिर से शुरू!" वो बुदबुदाया।
"तुम्हें कोई शर्म है या नहीं?"
वामिका अब अपने सीईओ मोड में आ चुकी थी ।
"बिना मेरी परमिशन… बिना नॉक किए… एक लड़की के रूम में?! ये कौनसी तहज़ीब है?"
निवान ने माथा पीट लिया।
"मैडम!! ये मेरा रूम है!!"
वामिका ने आँखें तरेरीं।
"झूठ! झूठ! बिल्कुल झूठ! मैं यहाँ सोई मतलब ये मेरा रूम है!"
निवान:
"नहीं… आप ही रात को मेरे बेड पर सो गई थीं!
मैंने तो आपको कम्बल ओढ़ा दिया बस — और खुद सोफे पर सो गया!"
वामिका ठिठकी।
पल भर को उसकी आँखें इधर-उधर घूमीं… जैसे दिमाग में कोई लाइट जलने वाली हो।
"रुको… मैं… मैं बेड पर कैसे पहुँची?"
निवान ने एक लंबी थकी हुई साँस ली और कहा —
"आप रात को बड़बड़ा रही थीं… 'बेबी ब्लू… गले का तिल…' वगैरह वगैरह…"
वामिका का चेहरा एकदम लाल!
"नहीं!!! नो वे!!"
"यस वे!" निवान ने मोबाइल उठाया, और मिरर की तरफ इशारा किया —
"देख लो… अब भी चेहरे पर लिखा है — क्राइम सीन!"
वामिका ने तकिया उठाकर निवान की तरफ फेंका —
"यू आर अ चीटर!"
"मैं क्या चीटर?! आपने तो मेरी मेंटल हेल्थ हिला दी पूरी रात!"
"यू मेन! तुम हमेशा लड़कियों को फंसा हुआ दिखाते हो… जबकि मैं तो… मैं तो बस…"
(वो अचानक ठिठकती है)
"मैं तो क्या?"
निवान:
"बस वही तो सवाल है! आप तो बस… क्या?"
वामिका अचानक चुप हो गई।
उसकी उंगलियाँ बालों को सुलझाने में लगी थीं… लेकिन चेहरा अब बुझा-बुझा सा था। जैसे कोई स्लो मोशन में फ्लैशबैक देखने लगा हो।
धीरे-धीरे उसके माथे पर शिकनें उभरने लगीं।
उसने अपना सिर हल्का-सा झटकाया… फिर एकदम से ठिठक गई।
उसकी सांसें तेज़ हो गईं।
"वेट…" वो बुदबुदाई, "मैं… मैं तो अपने रूम में ड्रिंक कर रही थी… रेड वाइन…"
निवान ने आंखें उठाईं — "ओ? वाइन?"
वामिका की आँखें अब कुछ खोजने लगी थीं…
"फिर मुझे कुछ याद आया था… हाँ! हाँ!" वो ज़ोर से बोली।
"मुझे… तुमसे कोई पेपर साइन करवाना था! हाँ!"
निवान ने सिर हिलाया — "ओह, अच्छा अच्छा ...फिर !"
"हां!" वामिका की आवाज़ अब और तेज़ हो गई, "और फिर… फिर मैंने दरवाज़ा खटखटाया था… शायद… शायद?"
वो अब माथा पकड़कर बैठ गई।
"फिर तुमने दरवाज़ा खोला… नहीं नहीं ....दरवाजा तो खुला हुआ ही था और तुम तुम बालकनी में खड़े थे ! तुमने… कुछ पहना नहीं था!"
निवान एकदम उखड़ गया — "मैडम!! मैंने ट्रैक पेंट पहना हुआ था! वो अलग बात है कि ऊपर शर्ट का नहीं पहना था… पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं —"
"चुप रहो!" वामिका ने झल्लाकर कहा, "फिर… फिर तुमने कहा था — 'आप अभी? इस टाइम?' और फिर… फिर…"
उसकी आँखें थोड़ी सी बड़ी हो गईं।
"फिर मैंने अंदर घुसते ही कहा था — 'बेबी ब्लू…'"
फिर… एक सेकंड की चुप्पी।
वो खुद ही अब चेहरा छुपा लेना चाहती थी।
"हे भगवान… मैंने तुमसे वो कहा?"
निवान की मुस्कान अब दब नहीं रही थी।
"हाँ मैडम जी… कहा। और सिर्फ इतना ही नहीं… आपने कहा था — ‘डोंट वरी, आई एम नॉट इंटरेस्टेड इन स्टीलिंग योर पैंट्स…!’"
वामिका अब ज़मीन में समा जाना चाहती थी। उसने तकिया उठाया, और अपने चेहरे पर दे मारा।
"नो नो नो नो… आई हैव नो मैमोरी ऑफ दिस…"
"लेकिन अब तो आ रही है न?" निवान मुस्कराया।
वामिका ने तकिया हटाया, और फिर बौखलाकर बोली —
"हाँ आ रही है… लेकिन तुमने मुझे रोका क्यों नहीं?!"
निवान: "क्या मैं बॉडीगार्ड हूँ? मैं तो खुद डरा हुआ था! आपने मुझे बेबी ब्लू कहा, मैं बाथरूम में भाग गया!"
वामिका: "तो वहीं बंद रहते! बाहर आने की क्या ज़रूरत थी?!"
निवान: "मैडम, सुबह हो गई थी! और मैं सिर्फ कम्बल डाल रहा था… ताकि आप ठंडी न पड़ जाएं… लेकिन आप तो मिसाइल मोड में जाग गईं!"
वामिका ने गहरी सांस ली।
फिर अपनी पीठ सीधी की, बालों को पीछे किया, और पूरी CEO स्टाइल में बोली —
"सुनो… तुम्हें तो शायद पता नहीं… लेकिन ये पूरा बंगला मेरा है। ये रूम मेरा है। यहाँ की हर चीज़ मेरी मर्ज़ी से चलती है।"
निवान ने आँखें तरेरीं — "और कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड की भी लाइफ आपकी मर्ज़ी से चलती है क्या?"
"बिल्कुल!" वामिका ने ठप्पा लगाया।
"तो फिर…" निवान पास आकर बोला, "आपको भी शायद ये जानना चाहिए कि आपने कॉन्ट्रैक्ट में लिखा था — ‘इन केस ऑफ इमोशनल ओवरलोड, द पार्टनर शैल बी एलिजिबल टू टेक ए मेंटल हेल्थ ब्रेक!’ और मैं अभी उसी ब्रेक पर हूँ!"
वामिका: "वो क्लॉज मैंने डिलीट करवा दिया था!"
निवान: "क्या?!"
वामिका मुस्कराई — "देखा… इसीलिए कहा था… लड़की से पंगा मत लेना, खासकर जब वो बंगले की मालकिन हो!"
अब निवान ने हाथ नाक के पास ले जाकर एक लंबी थकी हुई फूंक मारी।
"तो मतलब… अगर आप रात को बेबी ब्लू बोलें, और सुबह मुझे चोर कहें, तो भी गलती मेरी ही?"
वामिका: "बिल्कुल!"
"क्योंकि ये रूम… ये घर… ये सब मेरा है!"
"और तुम… सिर्फ एक किराए के बॉयफ्रेंड हो!"
निवान ने मुस्कराकर सिर हिलाया…
फिर कहा —
"ठीक है…मैडम जी। आप अपने बेबी ब्लू को लेकर खुश रहिए… मैं नहाने जा रहा हूँ… ताकि कल रात की इंसल्ट धुल सके।"
वो मुड़कर बाथरूम की ओर चल पड़ा।
"सुनो!" — वामिका की तेज़ आवाज़ ने उसे रोक लिया।
निवान के कदम थमे। उसने बिना पलटे पूछा,
"अब क्या हुआ मैडम?"
वामिका ने आंखें संकरी कर लीं, होंठों पर एक शरारती सी मुस्कान तैर रही थी।
"आज मेरे साथ ही तुम्हें चलना है।"
निवान घूमा, आँखें चौड़ी करके बोला—
"क-कहाँ?"
वामिका उठकर बेड के कोने पर बैठ गई, पैर नीचे लटकाए और बोली —
"जहाँ भी मैं जाऊँगी… तुम साथ चलोगे। बॉयफ्रेंड हो तो ज़िम्मेदारी निभाओ!"
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
नोट 📝
प्रिय पाठकों,
अभी मेरे एग्ज़ाम्स चल रहे हैं, इसलिए फिलहाल मैं स्टोरी के नए चैप्टर्स नहीं दे पा रही हूं। जुलाई में एग्ज़ाम्स खत्म हो जाएंगे, उसके बाद मैं वापस नियमित रूप से चैप्टर्स डालना शुरू करूंगी।
एग्ज़ाम्स के बाद मैं एक दिन में 2 या 3 चैप्टर्स लगातार दूंगी, ताकि आपको कहानी का मज़ा बिना रुकावट मिल सके।
तब तक थोड़ा इंतज़ार करना... और सपोर्ट बनाए रखना! ❤️🙏
डायनिंग टेबल बैठी वामिका ब्रेकफास्ट कर रही थी और उसके सामने बैठा निवान भी।
तभी हॉल से एक तेज़, तीखी और भरी हुई आवाज़ गूंजी —
"वामी प्रिंसेस!!! कहां हो तुम??"
वामिका का चेहरा एक झटके में चौक गया।
"शिट!! मॉम??"
निवान:
"मॉम? मतलब आपकी... मम्मी?!"
वामिका अपना सिर पकड़ते हुए बोली :
"हाँ… और ये आवाज़ का वॉल्यूम बता रहा है कि तूफान बंगले में घुस चुका है।"
और उसी वक्त — तेज़ हिल्स4 की ठक-ठक के साथ एक ग्रेसफुल लेकिन तमतमाई महिला डायनिंग एरिया में एंट्री करती है। गले में पर्ल नेकलेस, हाथ में पर्स, और आँखों में एकदम तीखी चमक लिए।
वामिका की मॉम — सौम्या रौशन।
सौम्या सख्त लहजे में बोली:
"तो यही है वो… जिससे तुम रिलेशनशिप में हो?"
वामिका:
"मॉम… गुड मॉर्निंग तो कह दीजिए…"
सौम्या निवान को घूरते हुए बोली:
"गुड मॉर्निंग तब होती जब सामने कोई समझदार इंसान बैठा होता।"
निवान ने धीरे से प्लेट नीचे रख दी।
निवान बड़े शालीनता से सिर झुका कर बोला :
"नमस्ते आंटी जी… मैं निवान।"
सौम्या:
"नमस्ते रहने दो। पहले ये बताओ, कौन हो तुम? कहाँ से आए हो? फैमिली बैकग्राउंड? पेरेंट्स? क्या करते हो?"
वामिका झट से बीच में बोल पड़ी:
"मॉम, प्लीज़! ये कोई जॉब इंटरव्यू नहीं है।"
सौम्या कड़वे अंदाज़ में बोली:
"मुझे फर्क नहीं पड़ता! मैं जानना चाहती हूँ कि मेरी बेटी किस क्वालिटी के लड़के के साथ रह रही है!"
निवान धीरे से बोला :
"मैं एक लाइब्रेरी में काम करता हूँ… और फैमिली…"
(वो थोड़ा रुकता है)
"फैमिली मेरी हैं नहीं सिर्फ एक 18 साल की बहन है। सिंपल मिडल क्लास बैकग्राउंड से हूँ।"
सौम्या एकदम तिलमिलाकर बोली :
"मिडल क्लास??!! वामी!!! तुमने मुझसे छुपाया कि ये लड़का… किसी अच्छे बैकग्राउंड से भी नहीं है?"
वामिका कुर्सी पीछे खिसकाकर खड़ी हो जाती है:
"मैंने कुछ नहीं छुपाया… बस बताया नहीं!"
सौम्या कड़े और कंट्रोलिंग लहजे में बोली :
"वामी, हमारा बिज़नेस कहाँ-कहाँ फैला हुआ है, ये तुम जानती हो। अमेरिका से लेकर दुबई, लंदन से लेकर सिंगापुर तक। तुम सिर्फ मेरी बेटी नहीं हो — तुम रौशन इंटरप्राइजेज की लीगसी हो। और तुम... तुम 12 कंपनीज़ की CEO हो। देश की सबसे यंग, सबसे टैलेंटेड, सबसे प्रिटी बिज़नेस वुमन!"
(वह उंगली उठाकर निवान की तरफ इशारा करती है)
"और ये? ये मिडल क्लास लाइब्रेरियन? Seriously वामी! ये लड़का तो तुम्हारे जूते की कीमत भी नहीं जानता होगा।"
वामिका मुड़ी, और ज़ोर से बोली —
"बस मॉम!! अब एक शब्द और नहीं!
आपने हमेशा कहा — 'वामी, तुम लायक हो दुनिया की बेस्ट चीज़ों की!'
तो हाँ मम्मी… मैंने चुना है इस दुनिया का सबसे सच्चा, सबसे प्योर इंसान।
पैसा नहीं… दिल देखा है मैंने।"
सौम्या बड़बड़ाते हुए दो कदम आगे बढ़ती है:
"तुम्हारी शादी मैने बचपन से ही मिस्टर कपूर के बेटे से कराऊंगी सोचा था , याद है न तुम्हें?!
एक मल्टी मिलियनेयर फैमिली — जिसका नाम सुनते ही लोग रास्ता छोड़ देते हैं!"
वामिका चिढ़ कर बोलीं:
"उस आदमी से? नेवर!
उसका नाम भी मत लीजिए मेरे सामने। "
निवान अब तक चुप था, लेकिन अब वो खुद को रोक नहीं पाया। वो खड़ा हो गया।
वो बड़ी ही शालीनता के साथ बोला:
"आंटी जी… आप जो सोच रही हैं, शायद उसमें आपका अनुभव बोल रहा है, और मैं उसका सम्मान करता हूँ।
लेकिन मैं भी उस दुनिया का हिस्सा हूँ जहाँ इज़्ज़त, प्यार और इंसानियत का दाम किसी बैलेंस शीट से नहीं तय होता।
मैं वामिका से प्यार करता हूँ… लेकिन सिर्फ इसलिए नहीं कि वो एक CEO है — बल्कि इसलिए कि वो एक इंसान है… एक बहुत अच्छी इंसान।"
सौम्या की आंखों में गुस्से की आग धधक उठी।
निवान के शब्द जैसे उसके कानों में चुभ से गए हों।
वह तेजी से आगे बढ़ी।
उसका पर्स एक तरफ झूल गया, आँखों की चमक अब क्रोध में बदल चुकी थी।
"इतनी हिम्मत?? मेरे ही घर में, मेरे ही सामने... और तू मुझसे बहस कर रहा है??"
वह गुस्से में अपना हाथ उठाती है —
एक करारा तमाचा मारने के लिए…
लेकिन —
उससे पहले ही एक मजबूत हाथ उसकी कलाई को थाम लेता है।
वामिका।
"डोंट!! मॉम… एक और कदम बढ़ाया तो… मैं वो वामी नहीं रहूंगी, जिसे आपने पाला है।"
सौम्या एक पल के लिए ठिठक जाती है।
उसे जैसे यकीन नहीं होता कि उसकी बेटी… उसके सामने… किसी के लिए इस तरह खड़ी हो गई।
सौम्या काँपती आवाज़ में बोली:
"तू… तू मुझे रोक रही है? मेरा हाथ पकड़ रही है?"
वामिका:
"हाँ मॉम… क्योंकि आप गलत हैं! और मैं गलत को सपोर्ट नहीं करती, चाहे वो मेरी माँ ही क्यों ना हो!आपने मुझे बिज़नेस सिखाया, डील्स करना सिखाया, लोगों को परखना सिखाया… लेकिन इंसान को इंसान समझना नहीं सिखाया।"
वह निवान की तरफ बढ़ती है और उसका हाथ थाम कर बोलती है:
"ये लड़का... मेरा पार्टनर है, मेरी चॉइस है। मेरी जिंदगी का वो हिस्सा, जो मुझे आपकी सो कॉल्ड लग्ज़री से ज्यादा समझता है।"
सौम्या का चेहरा पत्थर जैसा सख्त हो जाता है।
"अगर तुम इस लड़के के साथ रहना चाहती हो… तो रौशन हाउस छोड़ दो। अपना सब कुछ छोड़ दो।"
कुछ सेकंड का सन्नाटा… फिर…
वामिका आँखों में आग भरकर सौम्या की आँखों में आँखें डाल कर बोली —"ये प्रॉपर्टी मेरी है… मॉम। रौशन हाउस… रौशन इंटरप्राइजेज… आपने मुझे सब कुछ सौंपा था, याद है न? लीगल पेपर्स पर आपने साइन करके मुझे हक़ दिया था… इस नाम, इस विरासत का।"
सौम्या का चेहरा एक पल को जैसे सुन्न पड़ गया।
"वामी… ये… क्या बकवास है?"
"डैड का बिज़नेस घाटे में था… याद है न, मॉम?"
"लोन चुकाने के पैसे नहीं थे, क्लाइंट्स छोड़ के जा रहे थे… और तब… तब आपने सब छोड़ कर बैठने का सोच लिया था।"
"उस वक़्त मैं 21 की थी… और मैंने रौशन इंटरप्राइजेज को फिर से खड़ा किया।"
सौम्या की पलकें थोड़ी फड़कीं, लेकिन कुछ नहीं बोलीं।
"रौशन इंटरप्राइजेज आज जो भी है, वो मैंने बनाया है मॉम।
डैड का सपना था, पर उसे हकीकत मैंने बनाया।
आपने कहा था — 'लीड करना सीखो वामी, इमोशन्स को साइड रखो'…
तो आज मैं वही कर रही हूँ।"
वह अपनी माँ की आँखों में देखते हुए बोली: "आप मेरी माँ हैं — इस सच को कोई नहीं बदल सकता।
लेकिन आप अगर सोचती हैं कि मुझे ब्लैकमेल करके, मेरे प्यार को नीचा दिखा कर,
मुझे मेरी ज़िंदगी से अलग कर सकती हैं…
तो मॉम… आपने मुझे बिल्कुल नहीं जाना।"
सौम्या गुस्से से काँपती हुई बोली: "तुम मुझसे बगावत कर रही हो?"
वामिका ठंडी मुस्कान के साथ बोली: "नहीं मॉम… मैं खुद से वफ़ादारी कर रही हूँ।
बगावत तब होती जब मैं किसी और के लिए लड़ती…
यहाँ मैं अपने लिए लड़ रही हूँ। अपनी पहचान, अपनी पसंद, अपने प्यार के लिए।"
निवान धीरे से वामिका का हाथ और कस कर थाम लेता है।
सौम्या कुछ बोलने ही वाली थी कि—
वामिका उसे बीच में काटते हुए बोली: "आपके लिए लाइफ एक डील है मॉम।
लेकिन मेरे लिए? ये रिश्तों का घर है।
मैंने इस घर को कारोबार नहीं बनने दिया…
इसलिए शायद मैं आपको अब अजनबी लग रही हूँ।"
सौम्या निवान को एक नजर घूर कर धीरे से वामिका से बोली:
"तो… तुम्हारा फैसला फाइनल है?"
वामिका ने निवान की तरफ देखा… फिर सौम्या की ओर मुड़ी —
"हाँ, मॉम… मेरा फैसला फाइनल है।"
सौम्या की आँखों से अचानक एक आँसू बह निकलता है…
लेकिन वह बिना कुछ कहे धीरे से मुड़कर बाहर चली जाती है।
उसकी हिल्स की ठक-ठक अब पहले जैसी तेज नहीं… भारी लग रही थी।
निवान धीरे से वामिका के कंधे पर हाथ रखता है।
निवान:
"यू ओके?"
वामिका मुस्कुरा कर बोलती है —
"शायद पहली बार… मैं सच में ओके हूँ।"
निवान धीरे से वामिका की ओर मुड़ा। उसके चेहरे पर अब भी थोड़ी हैरानी बाकी थी। वो कुछ देर तक उसे देखता रहा, फिर हल्की मुस्कान के साथ, बेहद शांत लहजे में बोला—
"पर… आपने तो कहा था ना —
रिश्ता होगा, पर प्यार नहीं…
साथ होगा, पर जज़्बात नहीं…
'नो इमोशन्स, नो एक्सपेक्टेशन्स'
बस एक प्रोफेशनल एग्रीमेंट… वो भी तीन महीने का…
कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड."
वामिका अचानक चौंककर उसकी तरफ देखती है, फिर भौंहें चढ़ा कर चिढ़ते हुए बोलती है—
"हाँ तो? वही तो किया मैंने!"
"ड्रामा करना था न… तो कर दिया। मॉम को दिखाना था कि मैं तुम्हारे लिए सीरियस हूँ… तो वही किया।"
फिर थोड़ा और चिढ़कर बोली—
"तुम ज्यादा उड़ो मत, मिस्टर चौहान! कॉन्ट्रैक्ट था… और तुम बस एक कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड हो… बस इतना ही!"
फिर वो सामने रखे पानी का ग्लास उठाती है और एक घूंट भरकर फिर नज़रे फेर लेती है जैसे बात खत्म हो गई हो।
लेकिन… फिर—
वो अचानक वापस मुड़ी।
एक हाथ कमर पर और दूसरे हाथ की उंगली उसकी तरफ उठाकर बोली:
"और सुनो, मिस्टर चौहान…"
"ड्रामा में इमोशनल मत हुआ करो।"
"पहले ही कहा था — ये सिर्फ़ ड्रामा है, रियलिटी नहीं!"
वो थोड़ा आगे झुककर बोलती है —
"तुम कहीं सच में मुझे पसंद करने तो नहीं लगे न?"
निवान हकबकाकर उसे देखता है, फिर गहरी सांस लेता है और बड़ी मासूमियत से जवाब देता है —
"अरे नहीं नहीं… मैं कहां और आप कहां...
आप तो रौशन इंटरप्राइजेज की मालकिन, और मैं?
बस एक मामूली-सा कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड…
तीन महीनों का किरायेदार!
उसके बाद… सब ‘प्रोफेशनली’ खत्म।"
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
वामिका ने एक गहरी सांस ली।
फिर अपना ब्लेज़र ठीक किया…
बालों को एक झटके से पीछे किया…
और फिर वह ठंडी लेकिन कमांडिंग आवाज़ में बोली —
"चलिए मिस्टर चौहान... ऑफिस के लिए देर हो रही है।"
फिर एक पल रुककर, थोड़ा उसकी ओर मुड़ते हुए बोली —
"और हाँ मिस्टर चौहान, हरकतें पूरी बॉयफ्रेंड जैसी ही रहनी चाहिए… ओके?"
निवान भौंचक्का-सा उसे देखता रह गया।
"मतलब?"
"मतलब ये कि लिफ्ट में मेरा बैग पकड़ना, मीटिंग के पहले मुझे कॉफी लाकर देना, और जब भी मैं तुम्हें देखूं, तुम्हारी आंखों में वही एडमायरिंग लुक होना चाहिए... जैसे तुम मुझे सच में चाहते हो!"
निवान थोड़ा सकपकाया, लेकिन फिर अपनी आदत के मुताबिक़ हल्के अंदाज़ में मुस्कुराकर बोला —
"ओह, तो अब मैं बॉयफ्रेंड कम... पर्सनल असिस्टेंट ज़्यादा हो गया हूँ?"
वामिका उसके पास झुककर आंखों में आंखें डालते हुए बेहद सधे हुए लहजे में बोली —
"नहीं मिस्टर चौहान… पर्सनल असिस्टेंट की इतनी औकात नहीं होती कि मेरी माँ से लड़कर मेरा हाथ थाम सके।"
"तुम कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड हो… और फिलहाल तुम्हारा रोल मेरी दुनिया में सबसे ज़्यादा इम्पॉर्टेंट है। डोंट फॉरगेट इट।"
वो अपनी बात खत्म करते ही सीधी मुड़ती है और आगे बढ़ जाती है।
निवान भी मन ही मन बड़बड़ाते हुए उसके पीछे चलते लगता है।
ऑफिस पहुंचते ही…
वामिका पूरी बॉस लेडी मूड में होती है।
सभी स्टाफ उसे देखकर झुक कर बोलते है —
"गुड मॉर्निंग, मैम।"
वामिका सिर हिलाकर आगे बढ़ जाती है।
निवान थोड़े नर्वस स्टेप्स में पीछे चलता है, तभी वामिका मुड़ती है —
"स्टॉप!"
वो ठिठक जाता है।
"क्या हुआ?"
वामिका के तीखे लहजे में बोले "स्टॉप!" पर
निवान वहीं थम गया —
थोड़ा घबरा कर बोला,
"क्या हुआ? कुछ भूल गया क्या?"
वामिका बिना जवाब दिए तेज़ कदमों से उसकी ओर बढ़ती है।
सारा स्टाफ एक पल को काम छोड़कर उन दोनों की ओर देखने लगता है।
वामिका सीधा निवान के सामने आकर रुकी।
फिर बिना कुछ कहे...
उसकी शर्ट का कॉलर पकड़ा… और हल्के झटके से उसे अपनी ओर खींच लिया।
निवान की साँसें जैसे पलभर को थम गईं।
उसके और वामिका के बीच अब महज़ कुछ इंच का फासला था।
वो आंखें फाड़कर उसे देख रहा था।
"क्या… क्या कर रही हो?"
वो बमुश्किल बोल पाया।
वामिका उसकी कॉलर के पास अपनी उंगलियाँ फिराते हुए बोली —
"तुम्हारा कॉलर टेढ़ा है… और ये टाई —"
वह उसकी टाई को बड़ी नफ़ासत से ठीक करती है,
फिर उसकी शर्ट के ऊपर से एक अदृश्य धूल झाड़ते हुए बोली —"…पर्फेक्ट दिखना भी तुम्हारे रोल का हिस्सा है, मिस्टर चौहान।"
निवान की धड़कनों ने रफ्तार पकड़ ली थी।
उसके कान तक लाल हो चुके थे, और ज़ुबान जैसे हलक में अटक गई थी।
वामिका अब भी बेहद नॉर्मल और प्रोफेशनल लहजे में बोली —
"हम एक टीम हैं, और टीम में हर डिटेल मैटर करती है।"
"माय पार्टनर मस्ट लुक लाइक ए किंग — क्योंकि क्वीन मैं हूँ।"
फिर एक हल्की सी मुस्कान देकर बोली —
"अब ठीक लग रहे हो। चलो, मीटिंग शुरू होने वाली है।"
वह मुड़कर कॉन्फ्रेंस रूम की तरफ चलने लगती है।
निवान वहीं कुछ पल खड़ा रह गया…
उसे समझ ही नहीं आया कि ज़्यादा ध्यान अपनी धड़कनों पर दे या वामिका की उस मुस्कुराहट पर, जो सीरियस होकर भी कहीं न कहीं उसके दिल की दीवारें हिला गई थी।
वो गहरी सांस लेकर खुद को संभालता है और उसके पीछे चल पड़ता है।
मीटिंग रूम में लंबी टेबल पर बोर्ड के मेंबर्स बैठे हुए थे, प्रोजेक्टर ऑन था , हर चेहरा टेंशन में इधर उधर झांक रहा था।
जैसे ही वामिका एंटर करती है, सब खड़े हो जाते हैं।
साथ में चलता है निवान — जिसे देखकर बोर्ड के कुछ सीनियर मेंबर्स भौंहें चढ़ा लेते हैं।
वामिका बारीकी से सबके एक्सप्रेशन्स नोट करती है, फिर चेयर खींचकर बैठ जाती है।
"गुड मॉर्निंग एवरीवन। मीटिंग शुरू करने से पहले मैं आप सबको अपने नए… बिज़नेस एसोसिएट से मिलवाना चाहती हूँ।"
सबकी नजर निवान पर जाती है।
"मिलिए निवान चौहान से — ये कुछ महीनों तक हमारे साथ एक स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम करेंगे।"
एक सीनियर मेंबर खांसते हुए पूछता है —
"उन्हें किस डिपार्टमेंट में अपॉइंट किया गया है, मैम?"
वामिका मुस्कुराकर जवाब देती है —
"मेरे डिपार्टमेंट में। डायरेक्ट अंडर मी।"
सन्नाटा सा छा जाता है।
निवान धीरे से कान में फुसफुसाता है —
"स्पेशल प्रोजेक्ट? डायरेक्ट अंडर यू? अब ये क्या है?"
वामिका बिना उसकी तरफ देखे हल्के से जवाब देती है —
" अपना मुंह बंद रखो तुम।"
बोर्डरूम में कुछ पल के लिए घोर सन्नाटा छा गया।
एक-दो मेंबर्स ने एक-दूसरे की तरफ देखा, कुछ की नजरें सीधे निवान पर टिकी थीं —
जिसका कॉन्फिडेंस अब थोड़ी झिझक में बदलता दिख रहा था।
लेकिन कोई भी कुछ नहीं बोला।
सबके मन में एक ही बात घूम रही थी —
“यही तो वो लड़का है… जो उस दिन मीडिया के सामने वामिका रोशन का ‘बॉयफ्रेंड’ बनकर सामने आया था।”
पर ये वामिका थी —
रोशन ग्रुप की अकेली वारिस।
कौन उस लड़की से बहस करता
जो सौ करोड़ के डील पर अकेले दस्तखत कर सकती थी?
इसलिए सबने अपनी-अपनी जुबान बंद रखी…
और कुछ लिखने, कुछ स्क्रीन देखने का दिखावा करने लगे।
वामिका ने एक बार फिर पूरे रूम पर निगाह डाली।
फिर प्रोजेक्टर की ओर इशारा करते हुए बोली —
"लेट्स गेट बैक टू द एजेंडा —"
"विरांग प्रोजेक्ट"
— जो इस कंपनी का अभी तक का सबसे बड़ा और रिस्की इन्वेस्टमेंट था।
मीटिंग के बाद —
जैसे ही लोग अपनी फाइल्स समेटकर बाहर निकलने लगे,
वामिका अपनी सीट पर ही बैठी रही।
निवान उसकी बगल में खड़ा हुआ,
और थोड़े धीमे स्वर में बोला —
"सबके चेहरे देखे? जैसे मैं कोई इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट हूँ..."
वामिका हल्के से मुस्कुराई —
"तुम उनके लिए थ्रेट नहीं हो निवान… तुम मेरे लिए थ्रेट हो।"
वो चौंक गया —
"क्या?"
वो उसकी ओर झुककर बोली —
"क्योंकि जितना तुम रियल लगते हो… उतना रियल मेरा कोई प्लान नहीं था।"
उससे पहले निवान कुछ समझ पाता,
एक बोर्ड मेंबर — मि. मलिक — कमरे में लौटे।
मि. मलिक (सधी हुई आवाज़ में बोले):
"मैम, एक बात कहूं?"
वामिका ने चेयर से सिर उठाया:
"कहिए।"
"आप जानती हैं कि आपकी हर चॉइस कंपनी के रिव्यू और इंवेस्टर्स की नजर में होती है... ये नया ‘स्पेशल प्रोजेक्ट’ अगर मीडिया या मार्केट में ग़लत तरीके से इंटरप्रेट हुआ, तो आपको जवाब देना पड़ेगा।"
वामिका ठंडे स्वर में बोली —
"तो आप क्या चाहते हैं, मि. मलिक?
मि. मलिक थोड़ी देर चुप रहे, फिर बोले —
"मैं बस इतना चाहता हूँ कि आप जो भी फैसला लें… वो इमोशन्स से नहीं, लॉजिक से लें।"
वामिका की आँखों में एक पल के लिए चिंगारी-सी जली।
वो चेयर से सीधी खड़ी हुई और कदम आगे बढ़ाते हुए लगभग मि. मलिक के करीब आ गई।
"मि. मलिक,"
उसका स्वर संयमित था, लेकिन हर शब्द की धार तेज़ थी —
"अगर मैंने हर फैसला लॉजिक से लिया होता… तो आज इस कुर्सी पर मैं नहीं, कोई और बैठा होता।"
"मैंने ये कंपनी तब संभाली थी जब सबको लगा था कि मैं ये कर नहीं पाऊंगी।
मैंने अपने फैसलों से इस ग्रुप को सिर्फ स्टेबल नहीं किया, बल्कि डबल ग्रोथ दी है — और वो भी दो साल में।"
"तो अगर मेरी ज़िंदगी में कोई ‘स्पेशल प्रोजेक्ट’ आता है…
या मेरी पर्सनल लाइफ पब्लिक डोमेन में जाती है —
तो मुझे पता है कि उसे कैसे हैंडल करना है।"
मि. मलिक थोड़ा पीछे हटे, शायद वो जवाब की उम्मीद नहीं कर रहे थे।
वामिका ने ठंडी मुस्कान के साथ आगे कहा —
"और हाँ, कंपनी के लिए जो भी रिस्क होता है —
वो मेरा रिस्क होता है।
फायदे की गिनती आप लोग कर लेते हैं, नुकसान की जवाबदेही मैं निभा लेती हूँ।"
मि. मलिक ने झुककर सिर हिलाया —
"ठीक है मैम। जैसे आप ठीक समझें।"
जैसे ही वो बाहर निकले,
निवान ने वामिका की तरफ देखा ...थोड़ा अभिभूत, थोड़ा परेशान होकर।
"आपने उन्हें काफी सीधे जवाब दे दिया…"
वामिका ने एक गहरी सांस ली, फिर धीमे स्वर में बोली —
"कभी-कभी सच्चाई धीरे नहीं, तेज़ी से बोलनी पड़ती है… वरना लोग तुम्हारे कॉन्फिडेंस को ड्रामा समझ लेते हैं।"
निवान कुछ पल चुप रहा। फिर बोला —
"लेकिन एक बात पूछूं?"
वामिका ने सिर घुमाकर उसकी तरफ देखा।
निवान की नजरे जैसे ही वामिका की तीखी, पार करती हुई निगाहों से टकराई
वो झेंपकर बोला —
"नहीं… कुछ नहीं, रहने दो।"
और जैसे ही मुड़कर दरवाज़े की ओर बढ़ा…
वामिका ने झट से उसका हाथ पकड़ लिया।
निवान ठिठक गया।
उसका शरीर तो रुक गया, पर साँसें तेज़ हो गईं।
उसने झट से अपनी आंखें मूंदी… और दिल जैसे गवाही दे रहा था कि ये सिर्फ़ कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं रहा।
वामिका उसके सामने आई।
धीरे से उसकी ठुड्डी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया।
निवान की एक आंख खुली… फिर जल्दी से दूसरी भी।
उसकी नजरें वामिका के चेहरे पर थीं… और चेहरे से ज़्यादा उसकी आंखों पर।
वामिका बहुत सधे लहजे में बोली —
"तुम मुझसे कुछ पूछना चाहते थे…फिर रुके क्यों?"
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
निवान की पलकों में हलचल हुई।
वो झेंपते हुए बोला —
"वो… मैं भूल गया।"
वामिका ने उसकी आँखों को घूरते हुए कहा —
"झूठ बोल रहे हो।"
निवान ने धीरे से नज़र उठाई —
"नहीं… मतलब, हाँ… थोड़ा। पूछना तो कुछ और था, पर अब... पूछने की हिम्मत नहीं बची।"
वो थोड़ी और करीब आकर फुसफुसाई —
"तो क्या तुम भी डरते हो मुझसे?"
निवान ने धीरे से सिर हिलाया —
"न..."
उसका गला सूख चुका था, लेकिन जवाब साफ था।
"नहीं।"
वामिका की आँखों में एक अजीब सी चमक उभरी।
एक वो आग… जो किसी को जलाने के लिए नहीं, परखने के लिए होती है।
उसने निवान की टाई की नोक को दो उंगलियों में पकड़कर
धीरे-धीरे खींचा —
इतना पास… कि अब उनकी साँसें एक-दूसरे के गालों को छूने लगीं।
वो उसकी आँखों में देखती हुई बोली —
"नहीं डरते? तो अब डर जाओ मुझसे..."
निवान की साँस रुक-सी गई।
उसका चेहरा अब इतना पास था कि अगर वो कुछ बोलता भी… तो शब्द शायद बीच में ही पिघल जाते।
पर वामिका ने कोई मौका नहीं दिया।
उसने उसकी टाई को और पास खींचा,
और फुसफुसाकर कहा —
"क्योंकि मैं वो रिस्क हूँ… जो तुम्हारी पूरी ज़िंदगी बदल सकती है वो भी एक झटके में।"
निवान की आँखों में एक पल के लिए हल्की सी कंपकंपी दौड़ी।
उसने अपना चेहरा थोड़ा पीछे खींचा…
जैसे हिम्मत जुटाकर खुद को थोड़ा कंट्रोल में लाना चाहता हो।
लेकिन वामिका इतनी आसानी से पीछे हटने वालों में नहीं थी।
उसने फिर से उसकी टाई खींची —
इस बार थोड़ी और ज़िद के साथ।
निवान हल्का सा लड़खड़ा गया —
एक पल को लगा जैसे उसके पैर जवाब दे देंगे...
पर किसी तरह खुद को संभाल लिया।
मगर वामिका…
वो जो अब तक कॉन्फिडेंस की मिसाल थी —
उसके कदम थोड़े डगमगाए।
और अगले ही पल —
वो सचमुच लड़खड़ा गई।
"अरे!"
निवान के चेहरे से झेंप गायब हुई और फिक्र आ गई।
उसने फुर्ती से हाथ बढ़ाकर वामिका को थाम लिया —
एक हाथ उसकी कमर के पीछे गया, दूसरा उसके कंधे को थामे रहा।
वामिका उसके सीने से हल्के से टकराई।
कुछ सेकंड तक दोनों वैसे ही खड़े रहे —
जैसे वक्त रुक गया हो…
फिर धीरे-धीरे…
वामिका ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में वो तेज़ी अब नहीं थी — बस हल्की सी हैरानी, और कुछ... जिसे वो खुद समझ नहीं पा रही थी।
निवान ने धीमे से कहा —
"सीईओ बनने से पहले, थोड़ा बैलेंस करना भी सीख लिया करो।"
वामिका ने हँसने की कोशिश की, लेकिन आवाज़ धीमी थी।
"मैं तो बस… तुम्हें डराना चाहती थी… खुद ही गिर गई…"
निवान मुस्कराया — "आपको डराने के लिए ग्रेविटी की ज़रूरत नहीं है… वो तो आपकी आँखें ही काफी हैं।"
वामिका एक पल के लिए उसकी आँखों में देखती रही।
फिर वो खुद को संभालती हुई सीधी खड़ी हुई,
लेकिन अभी भी उसका एक हाथ निवान के सीने पर था।
"मैं... हॉस्पिटल जाना चाहता हूँ। मेरी बहन से मिलना है..." वो बड़ी मुश्किल से बोला।
वो सीधे बोली —
"नहीं।"
निवान चौंका —
"क्या?"
"साफ़-साफ़ मना कर रही हूँ।"
वो आगे बढ़ा, आवाज़ में बर्फ जैसा संयम —
"पर कल उसकी सर्जरी है, वामिका... आप जानती हैं न?"
वामिका के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई।
"जानती हूँ। और तुम भी जानते हो कि तुम मेरे कॉन्ट्रेक्ट बॉयफ्रेंड हो। मैं तुम्हें पेमेंट दे रही हूँ — और उसी पैसों से तुम्हारी बहन की जान बचने वाली है।"
निवान कुछ देर उसे देखता रहा... जैसे उम्मीद कर रहा हो कि शायद अब वो ज़रा सी नरम हो जाए।
निवान की आँखों में तड़प उभरी —
"लेकिन मैं उसके पास नहीं रह सकता? सिर्फ़ कुछ घंटे..."
"तुम्हारे वहाँ होने या न होने से सर्जरी पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। लेकिन तुम्हारे मेरे साथ ना रहने से मेरा पूरा प्लान बिगड़ सकता है।"
वामिका, जो हमेशा ठहराव की तरह लगती थी, आज किसी तूफान की तरह अड़ी रही।
निवान की नज़रें वामिका के चेहरे से हट नहीं रही थीं।
एक बार फिर, वो कुछ कहने को हुआ… लेकिन होंठ काँपकर रुक गए।
फिर बहुत धीमे से, उसने कहा —
"आपके प्लान में मेरा होना ज़रूरी है…
पर मेरी बहन के लिए मैं ज़रूरी नहीं?
वह मेरा 'रिश्ता' है, और आप... मेरा 'कॉन्ट्रैक्ट'।"
वामिका की आँखों में हलचल सी हुई, पर उसने खुद को संभाला।
"तुम जानते हो न, ये सब पर्सनल नहीं है।
मैं प्रोफेशनली सोचती हूँ, और तुम्हें भी वैसा ही करना होगा।"
निवान थोड़ी देर खामोश रहा।
उसके भीतर कुछ लड़ रहा था ...एक तरफ कॉन्ट्रैक्ट की चुप्पी और दूसरी तरफ रिश्ते की पुकार।
वामिका ने उसका हाथ पकड़ा।
"चलो..." उसने धीरे से कहा — वो आवाज़… न सख़्त थी, न बेरुख़ी भरी।
बल्कि कुछ ऐसा था, जो निवान के मन में एक राहत बनकर उतरा।
उसने आँखें झपकाईं, जैसे यक़ीन नहीं हो रहा हो।
"आप सच में... मुझे जाने दे रही हैं?"
वामिका ने कुछ नहीं कहा, बस उसकी ओर देखा।
वो नज़रों में जवाब ढूँढ रहा था।
"थैंक यू..."
उसका गला भीग गया, शब्द काँप गए।
"मैं नहीं जानता... आप बाहर से जितनी सख़्त लगती हैं,
अंदर से शायद... उतनी ही नर्म हैं।"
वो रुककर बोला —
"कभी-कभी सोचा करता था कि आपके दिल में कोई जगह बची भी है या नहीं...
पर आज लग रहा है कि शायद... मैंने आपको ग़लत समझा था।"
वामिका की चाल रुकी नहीं।
उसका हाथ अब भी निवान की कलाई को थामे हुए था,
लेकिन उसके चेहरे पर कोई खास बदलाव नहीं था।
निवान फिर बोला, और अबकी बार थोड़ा और भावुक होकर —
"मैं आपसे बहुत कुछ सीख रहा हूँ। सिर्फ़ काम नहीं...
इंसानियत भी। और आज जो आपने किया... उसके लिए मैं हमेशा..."
"रुको।"
वामिका की आवाज़ ने उसकी भावनाओं को ब्रेक लगा दिया।
निवान थोड़ा चौंका।
"क्या हुआ?"
वो एक ऑफिस डोर के सामने रुकी —
जहाँ बाहर एक नेमप्लेट पर लिखा था: "असिस्टेंट निया।"
दरवाज़ा खोला गया। अंदर एक निया शांति से लैपटॉप पर कुछ टाइप कर रही थी।
"निया," वामिका ने कहा,
"इसे सब समझा देना। क्या करना है, कैसे करना है, कब करना है… पूरा शेड्यूल।"
निवान का माथा सिकुड़ा।
"मतलब...?" उसने उलझकर पूछा।
वामिका ने उसका हाथ छोड़ दिया।
"मतलब ये कि तुम मेरे साथ ही रहोगे। बस अब प्रोफेशनली थोड़ा और पॉलिश होकर।
मेरे दोपहर के मीटिंग्स, प्रेज़ेन्स, पब्लिक अपीयरेंस — सब कुछ फिक्स है।"
निवान के चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे गायब होने लगी।
"तो आप... मुझे अस्पताल नहीं ले जा रही थीं?"
वामिका ने उसकी आँखों में देखा —
एकदम स्थिर नज़रों से।
"तुम्हें लगा मैं तुम्हें तुम्हारी बहन के पास ले जा रही हूँ?"
निवान की आँखों में गहराई बढ़ गई।
"आपने ‘चलो’ कहा था..."
"हाँ, चलो कहा था — ताकि तुम अपने काम की ज़िम्मेदारी समझो।
क्योंकि ये कोई इमोशनल ड्रामा नहीं है, निवान।
ये बिज़नेस है। और इसमें दिल नहीं, दिमाग़ से काम होता है।"
वो मुड़ी और आगे बढ़ने लगी।
निवान वहीं खड़ा रह गया —
हाथ अब भी थोड़ा उठा हुआ, जैसे किसी ने बीच रास्ते में उसे अकेला छोड़ दिया हो।
निया उठकर उसके पास आई।
उसने एक फाइल आगे बढ़ाई —
"ये आज का स्केड्यूल है, मिस्टर निवान।
2:30 पे आपको मिस वामिका के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए रेडी रहना है।
आपके आउटफिट्स अंदर हैं। और..."
वो थोड़ा झिझकी —
"आपकी बहन के हॉस्पिटल से अपडेट्स हम मंगवा लेंगे।"
निवान ने एक लंबी साँस छोड़ी।
निया ने एक गहरी साँस लेकर कहा —
"मिस्टर निवान सर, आप वामिका मैम के बॉयफ्रेंड हैं — कम से कम इस कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से।"
वो रुककर बोली,
"तो आपको उसी तरह चलना होगा… हर जगह, हर समय।"
निवान ने चुपचाप सिर हिला दिया।
निया ने एक नज़र उसकी तरफ फिर डाली
फिर वो थोड़ा धीमे से बोली —
"देखिए… मैं ये नहीं कहती कि जो हो रहा है वो सही है…
पर कभी-कभी कुछ ज़िम्मेदारियाँ हमें अपनी मर्ज़ी से बड़ी लगती हैं।
आप जो कर रहे हैं… वो आपकी बहन के लिए है, न?"
निवान ने उसकी तरफ देखा ।
"हाँ," उसने बस इतना कहा।
निया ने सिर हिलाया, फिर धीरे से मुस्कराई —
"तो फिर ये सब… बस एक पड़ाव समझिए।
तीन महीने ...कुछ दिन… कुछ इवेंट्स… और फिर सब खत्म।
उसके बाद आप अपने रास्ते… और मैम अपने।"
निवान ने एक फीकी मुस्कान दी —
"काश… चीज़ें इतनी आसान होतीं।"
निया अपने कंधे उचका कर बोली —
"कभी-कभी होना आसान नहीं होता, बल्कि बनाना पड़ता है।"
वो फाइल उसकी ओर बढ़ाते हुए बोली —
"ये आउटफिट्स हैं, और अंदर मेकओवर टीम भी है।
2:30 बजे से पहले सब रेडी होना चाहिए।"
निवान ने चुपचाप फाइल ली और दरवाज़े की ओर बढ़ा।
निया ने जाते-जाते फिर आवाज़ दी —
"और निवान सर…"
वो मुड़ा।
"मैम जैसी दिखती हैं… वैसी पूरी तरह हैं नहीं।
पर उनकी परतें समझने में बहुत वक़्त लगता है।"
निवान कुछ नहीं बोला।
बस धीरे से मुस्कराया।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
शाम ढल रही थी।
कार मेट्रो सिटी की हलकी ट्रैफिक से गुजर रही थी।
ड्राइवर आगे चुपचाप कार चला रहा था,
और पीछे...
वामिका और निवान एक अजीब सी चुप्पी में बैठे थे।
वामिका थोड़ी थकी हुई दिख रही थी,
पर उसकी नज़रें बार-बार साइड में बैठे उस इंसान पर जा रही थीं
जिसका चेहरा खिड़की की तरफ था जिसको भौंहें चढ़ी हुईं, थी और होंठ थोड़े फूले हुए।
उसने धीरे से करवट ली,
और फिर न चाहते हुए भी बोल पड़ी —
"निवान… ये क्या हरकतें हैं? "
निवान ने जवाब नहीं दिया।
बस नाक से लंबी साँस खींची,
जैसे कह रहा हो — “आपको क्या फर्क पड़ता है।”
वामिका ने आँखें तरेरी —
"अब इस तरह मुँह बनाकर कब तक बैठे रहोगे?"
"जब तक आपका ये CEO वाला रवैया ख़त्म नहीं होता,"
वो धीरे से बुदबुदाया।
वामिका को बात सुनाई दी,
पर उसने अनसुना करते हुए ठंडी मुस्कान दी।
"ओह… तो अब ड्रामा भी सीख लिया है।
बहुत इम्प्रूवमेंट हो रहा है तुम्हारे एक्टिंग स्किल्स में।"
"मुझे एक्टिंग करनी पड़ी, वामिका…
क्योंकि असलियत में तो मैं टूटा हुआ था।"
वामिका का चेहरा कुछ पल को गंभीर हो गया।
निवान अब उसकी तरफ मुड़ा ...
उसकी आँखों में अब वो गुस्सा नहीं था,
बल्कि एक सीधा सा सवाल था —
"अगर आपकी बहन ICU में होती...
तो क्या आप प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए तैयार हो पातीं?"
वामिका का चेहरा पल भर को पढ़ा नहीं जा सकता था।
फिर वो धीरे से बोली —
"मैं नहीं जानती।
लेकिन मुझे इतना पता है —
मैं कमज़ोर नहीं बनती।
कभी नहीं बनी।"
"कमज़ोर होना कोई जुर्म नहीं होता, वामिका।"
निवान ने कहा —
"पर किसी को मजबूर करना… शायद होता है।"
एक चुप्पी छा गई।
ड्राइवर अब भी चुपचाप था,
पर उसका आईने में देखने का तरीका बता रहा था
कि कार की पिछली सीट पर
कुछ ज़्यादा ही 'तापमान' है।
वामिका ने अपनी साँस रोकी,
जैसे खुद से लड़ रही हो।
फिर उसने कहा —
"तुमने पूछा था न,
क्या मैं तुम्हें हॉस्पिटल ले जा रही थी…
तो सच बताऊँ?"
निवान ने उसकी तरफ देखा।
"मैं एक सेकंड के लिए सच में सोच रही थी…
तुम्हें जाने दूँ।
सब कुछ कैंसल कर दूँ।
पर फिर दिमाग ने कहा —
तुम सिर्फ़ एक कॉन्ट्रैक्ट हो।
और मैं… इमोशन्स पर नहीं चलती।"
निवान कुछ नहीं बोला।
फिर बहुत धीमे से,
वह खिड़की से बाहर देखते हुए बुदबुदाया —
"काश… आप कभी सिर्फ़ इंसान बनकर सोच पातीं, वामिका।
बिना CEO हुए।
बिना प्लान के।
बिना कॉन्ट्रैक्ट के..."
वामिका ने उसकी तरफ देखा।
कुछ कहने को हुई —
लेकिन शब्द गले में अटक गए।
उसने बस खिड़की के बाहर देखना शुरू किया,
जैसे उस सवाल से बच रही हो।
फिर अचानक तेज़ आवाज़ में बोली —
"मैंने कहा था ना, मुझसे फालतू के सवाल-जवाब मत किया करो!"
निवान ने एकदम चौंककर उसकी तरफ देखा।
वो अब उसे नहीं, सामने की सीट को घूर रही थी —
पर उसकी आँखों में ग़ुस्से से ज़्यादा
कुछ और था…
शायद… बेचैनी।
निवान हल्की हँसी के साथ बोला —
"और मैं तो सोच रहा था कि हम कुछ 'नॉर्मल कपल्स' जैसे बिहेव कर रहे हैं — थोड़ा बहस, थोड़ा रूठना…"
वामिका ने मुँह मोड़ा उसकी तरफ —
"नॉर्मल कपल्स की तरह? तुम्हें याद दिलाऊँ —
हम एक कॉन्ट्रैक्ट पर हैं। कोई लव स्टोरी नहीं चल रही यहाँ।"
निवान की हँसी पल में गायब हो गई।
उसने एक गहरी साँस ली, फिर आँखें मूँदते हुए बोला —
"हर बार याद दिलाने की क्या ज़रूरत है?
जैसे मैं भूल जाता हूँ कि मैं आपके लिए बस एक 'डील' हूँ।"
वामिका अब थोड़ी चिढ़ गई थी।
"डील हो या नहीं, लेकिन तुम्हें प्रोफेशनल रहना पड़ेगा।
ये बच्चों जैसी नाराज़गी, ये इमोशनल ड्रामा — ये इस पैकेज का हिस्सा नहीं है।"
निवान अब सीधा उसकी तरफ मुड़ गया।
"पैकेज? वाह, अब तो मैं पैकेज बन गया?"
"हाँ," वामिका ने ठंडे स्वर में कहा —
"इसी पैकेज में तुम्हें रूल्स फॉलो करने थे।
कहाँ जाना है, किसके साथ दिखना है, क्या पहनना है — सब तय है।
और ये भी कि कब क्या महसूस करना है।"
निवान कुछ पल तक उसे देखता रहा,
फिर धीरे से मुस्कुराया —
एक थकी हुई, बेबस सी मुस्कान।
"ठीक है,"
उसने बहुत ही शांत लहज़े में कहा —
"कौन बहस करे…"
वो खिड़की की तरफ मुड़ गया,
और अपनी ऊँगली से शीशे पर कुछ लकीरें खींचने लगा,
जैसे बाहर की दुनिया को खुद से दूर कर रहा हो।
वामिका ने उसकी तरफ एक नज़र डाली —
उसकी चुप्पी अब उसे खटक रही थी।
कुछ देर पहले जो लड़का
गुस्से में था, तर्क कर रहा था,
अब वो… बस चुप था।
और ये चुप्पी कहीं ज़्यादा भारी लग रही थी।
कार अब एक रेड लाइट पर रुक गई।
दोनों के बीच सन्नाटा अब भी छाया हुआ था।
फिर अचानक…
वामिका ने धीरे से कहा —
"तुम्हें सच में लगा था कि मैं तुम्हें हॉस्पिटल ले जा रही हूँ?"
निवान ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने बस अपनी नज़रें झुका लीं।
वामिका ने धीरे से मुस्कराने की कोशिश की,
पर वो मुस्कान अधूरी ही रह गई।
"काश… मैं वैसी होती जैसा तुम सोचते हो।
पर मैं नहीं हूँ, निवान।
मैंने वो सब झेला है… जो तुम्हें कभी महसूस भी नहीं हुआ होगा।
इमोशन्स मुझे पीछे खींचते हैं — और मैं पीछे नहीं देखती।"
"फिर भी… आपने एक पल के लिए सोचा था न, कि मुझे जाने दो…" निवान बोला
"हाँ,"
उसने बिना उसकी तरफ देखे कहा —
"पर फिर उसी पल मुझे याद आ गया,
कि इस दुनिया में 'सोचना' और 'करना' दो अलग बातें होती हैं।"
निवान अब एकटक उसे देख रहा था।
फिर उसने धीरे से कहा —
"और कभी-कभी... सोच ही इंसान को इंसान बनाती है।"
वामिका ने उसकी तरफ देखा।
फिर रेड लाइट हरी हुई,
कार चल पड़ी।
वामिका ने धीमे से कहा —
"लेकिन मैं इंसान बनने से डरती हूँ, निवान...
क्योंकि जब मैं आख़िरी बार इंसान बनी थी —
मैं हार गई थी।"
निवान स्तब्ध रह गया।
शब्द उसके पास नहीं थे।
पर उस पल में,
वो समझ गया —
वामिका के सख़्त चेहरे के पीछे
एक बहुत टूटी हुई लड़की थी…
…जो सिर्फ़ ‘जीतने’ के नाम पर
खुद को खो चुकी थी।
रात को...
कमरा हल्के पीले लैम्प की रौशनी में नहाया हुआ था। बाथरूम का दरवाज़ा धीरे से खुला — वामिका बाहर निकली।
उसने एक हल्का नीला नाइटगाउन पहन रखा था, जो उसकी ठंडी और सधी हुई शख़्सियत से बिल्कुल विपरीत एक अजीब-सी नर्मी लिए था।
उसके बाल गीले थे, कुछ लटें उसके चेहरे पर चिपकी हुई थीं, जिन्हें उसने हटाने की कोशिश तक नहीं की।
वह सीधे बालकनी की ओर गई — जहाँ शहर की जगमगाती रोशनी एक अंतहीन खामोशी के साथ फैली हुई थी।
वो कुर्सी पर बैठी, साइड टेबल से एक सिगरेट उठाई — धीरे से लाइटर जलाया… और एक लंबा कश लिया।
धुएँ का घेरा हवा में फैला, और उसके साथ जैसे एक अनकहा बोझ भी…
तभी उसके फोन की स्क्रीन चमकने लगी — "मॉम कॉलिंग…"
वामिका ने एक पल के लिए देखा। स्क्रीन पर माँ का नाम देखकर उसकी आँखों में एक हल्की सी लहर उठी — पर चेहरा वैसा ही रहा: ठंडा… स्थिर।
उसने फोन उठाया… फिर कुछ सोचा… और पावर बटन दबाकर — फोन स्विच ऑफ कर दिया।
कमरे में अब सिर्फ़ हल्की हवा, सिगरेट का धुआँ और उसकी आँखों में भटकती पुरानी कोई याद बाक़ी थी।
वो वापस कुर्सी पर झुक गई, नीचे टेबल पर कोहनी रखकर सिगरेट को घूरते हुए एक फुसफुसाहट में खुद से बोली —
"काश मॉम, तुमने कभी पूछा होता कि मैं क्यों नहीं रोती…"
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
अगली सुबह...
वामिका रेडी हो चुकी थी।
उसने जैसे ही दरवाज़ा खोला,वो चौक गई क्योंकि दरवाजे के सामने खड़ा था निवान।
वह सफेद शर्ट और ब्लैक जैकेट में बेहद सुंदर लग रहा था।
वामिका को देखते ही हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई।
वामिका ने चौंककर कहा —
"मिस्टर चौहान! आज तो तुम मुझसे भी पहले रेडी हो गए…!"
निवान ने जैसे कुछ कहना चाहा, लेकिन वामिका बीच में ही आगे बोल पड़ी —
"मतलब अब मेरा काम और भी आसान हो जाएगा। टाइम पर पहुंचेंगे, प्रेस को भी टाइम मिलेगा —"
"एक मिनट... मुझे कुछ कहना है," निवान ने गंभीरता से कहा।
वामिका चुप हो गई। उसकी मुस्कान थोड़ी मंद पड़ गई।
"हूँ... बोलो," उसने ठहरकर कहा।
निवान ने एक गहरी साँस ली।
"आज मेरी बहन की सर्जरी है। ठीक 11 बजे...मैं जानता हूँ हम दोनों के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट है... पर क्या आज के दिन के लिए... बस आज के लिए आप मुझे कुछ घंटों की इजाज़त दे सकती हैं?"
वामिका का चेहरा सख़्त हो गया।
निवान उसका सख्त चेहरा देख कर चुप हो गया।
वो बस खड़ा रहा… उसकी आँखें जैसे वामिका की आँखों में कोई छोटी सी उम्मीद तलाश रही थीं।
पर वामिका की आँखें लगभग निर्विकार लग रही थी।
उसने कुछ पल निवान को यूँ ही देखा। फिर धीरे से बोली —
"तुम्हें लगता है ये इजाज़त माँगने से कुछ बदल जाएगा?"
निवान की आवाज़ धीमी हो गई —
"मैंने कोशिश करनी सही समझी..."
वामिका एक कदम आगे बढ़ी।
"कभी सोचा है, अगर हर बार तुम इमोशन्स की दुहाई देकर छूट माँगोगे, तो इस कॉन्ट्रैक्ट का मतलब क्या रह जाएगा?"
निवान ने नीचे देखने लगा।
"मुझे फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या सोचेंगे। पर मेरी बहन... वो अकेली है वहाँ। और मैं उसका अकेला परिवार हूँ।"
वामिका ने तीखी नज़रों से उसे देखा —
"और मैं क्या हूँ?"
निवान ने चौंककर उसकी ओर देखा।
उसका सवाल अप्रत्याशित था।
कुछ देर दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर वामिका ने खुद ही जवाब दिया —
"मैं एक ब्रांड इमेज हूं। और तुम उस इमेज का हिस्सा।"
उसने मुड़कर धीरे से कहा —
"11 बजे तुम्हारी बहन की सर्जरी है न?"
निवान की आँखों में हलचल हुई।
"हाँ..."
वामिका ने रुककर, एक छोटी सी फाइल उसे दी।
"इसमें सब कुछ है — तुम्हारी बहन के हॉस्पिटल का प्राइवेट अपग्रेड, और ऑपरेशन के बाद का केयर पैकेज।"
निवान हक्का-बक्का उस फाइल को देखता रहा।
"ये सब... आप?"
वामिका ने एक छोटी सी, ठंडी मुस्कान दी —
"हाँ। लेकिन जाने की इजाज़त... अभी नहीं।"
निवान की आँखें नम हो गईं।
"आप समझती हैं... फिर भी रोक रही हैं?"
वामिका ने सिर झुका लिया, जैसे खुद से लड़ रही हो।
फिर बोली —
"मैं इमोशनल नहीं हो सकती, निवान। मैं कमज़ोर नहीं पड़ सकती। और तुम्हें भी नहीं होने दूँगी।"
फिर उसने पीछे मुड़कर कहा —
"तैयार हो जाओ। प्रेस कॉन्फ्रेंस में तुम्हारे चेहरे पर ये आँसू नहीं दिखने चाहिए। तुम मेरे 'परफेक्ट बॉयफ्रेंड' हो — याद है न?"
वो जाने लगी।
निवान वहीं खड़ा रह गया।
पर उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी ...
शायद इसलिए कि अब उसे समझ आ गया था कि
वामिका के पास दिल है... बस वो उसे सबसे छुपाकर रखती है।
वामिका तेज़ी से कॉरिडोर की तरफ़ बढ़ गई। उसके कदम मजबूत थे, चाल में वही पुराना कॉन्फिडेंस था लेकिन उसकी पीठ... उसकी पीठ आज थोड़ी झुकी हुई लग रही थी।
जैसे उसने कोई बहुत भारी फैसला लिया हो।
निवान ने एक गहरी साँस ली।
फाइल को सीने से लगाया... और एक क्षण को अपनी आँखें बंद कर लीं।
"कम ऑन, निवान... तुम्हें स्ट्रॉन्ग रहना है," उसने खुद से कहा और आगे बढ़ गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल, सुबह 10:45 बजे
कैमरों की लाइट्स, रिपोर्टर्स की फुसफुसाहट, और चारों तरफ़ वामिका के नाम की गूंज जारी थी।
एक बड़ी टेबल पर वामिका और निवान साथ बैठे थे।
वामिका पूरे आत्मविश्वास में बोल रही थी। एक नया ब्रांड लॉन्च हो रहा था, और वो सब कुछ कंट्रोल में रख रही थी।
"यस, वी बिलीव इन स्टैंडिंग फॉर ईच अदर — बोथ पर्सनली एंड प्रोफेशनली। दैट्स व्हाट दिस कोलैबोरेशन इज़ अबाउट।" उसने मुस्कराते हुए कहा।
रिपोर्टर्स तालियाँ बजाने लगे।
निवान अब भी वहीं बैठा था, मुस्कराते हुए, पर उसकी आँखें बार-बार घड़ी की ओर जा रही थीं।
10:59 AM.
उसका दिल जैसे हर सेकंड के साथ तेज़ धड़क रहा था।
वामिका ने महसूस किया...
उसने बिना देखे ही, टेबल के नीचे निवान का हाथ हल्के से पकड़ लिया।
निवान चौंका।
उसने उसकी ओर देखा।
वामिका की निगाहें अब भी सामने कैमरों पर थीं ।
लेकिन उसके चेहरे पर एक बेहद हल्की मुस्कान थी।
"गो," उसने धीमे से कहा।
निवान की आँखों में चमक आ गई।
वो तुरंत उठा, झुक कर सभी को नमस्कार किया और तेज़ी से बाहर निकल गया।
रिपोर्टर्स सवाल करने लगे —
"व्हेयर इज़ मिस्टर चौहान गोइंग?"
वामिका ने माइक उठाया —
"मिस्टर चौहान...जहाँ उन्हें होना चाहिए, वहीं जा रहे हैं।"
रिपोर्टर्स थोड़े कन्फ्यूज़ हुए। कुछ ने अगला सवाल पूछने के लिए हाथ उठाया, लेकिन वामिका ने उसी मुस्कान के साथ सिर झुका दिया, जैसे कह रही हो — "यही आखिरी जवाब है।"
निवान तेज़ी से बाहर निकला।
वामिका के ड्राइवर ने पहले से कार स्टार्ट कर रखी थी।
“सर, हॉस्पिटल?” ड्राइवर ने पूछा।
“हाँ… और प्लीज़ थोड़ा तेज़ चलाना।”
वो कार में बैठा, और खिड़की से बाहर देखते हुए अपनी धड़कनों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था।
वो खुद को बार-बार याद दिला रहा था — "स्ट्रॉन्ग रहो... बस कुछ देर और..."
कार तेज़ी से हॉस्पिटल की ओर बढ़ने लगी।
रेड लाइट पर कार रुकी।
पास में खड़ी एक काली मर्सिडीज़ में बैठी एक महिला की नजरें अचानक निवान पर पड़ीं।
वो थी — सौम्या जी ।
गॉगल्स के पीछे उसकी आँखें सिकुड़ गईं।
“ह्म्म... प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर अचानक कहा जा रहा है ये ?” फिर उन्होंने ड्राइवर से कहा —
“उस गाड़ी का पीछा करो।”
ड्राइवर ने गाड़ी धीरे से उसी दिशा में मोड़ दी।
कुछ ही देर में कार हॉस्पिटल के सामने रुकी।
निवान जल्दी से बाहर निकला, और भागते हुए सेकंड फ्लोर की ओर बढ़ा।
निवान ने देखा ICU के बाहर एक नर्स खड़ी थी।
“डॉ. शाह?”
"ऑपरेशन शुरू हो चुका है सर... कुछ मिनट में अपडेट मिलेगा।"
निवान वहीं वेटिंग चेयर पर बैठ गया। उसकी हथेलियाँ ठंडी पड़ चुकी थीं।
सौम्या जी की कार कुछ दूरी पर आकर रुकी।
"ये कैसा ड्रामा है अब?"
वो अपनी कार से उतरीं, लेकिन अंदर नहीं गईं।
बस कुछ देर खड़ी रही, फिर अपना फोन निकाला।
"निवान चौहान के बारे में पूरी जानकारी चाहिए...।"
उन्होंने फोन रखा और बिना किसी को दिखे, वापस उसी कार में बैठकर वापस निकल गईं।
अंदर निवान अब भी बैठा था।
अचानक एक डॉक्टर बाहर आया।
"मिस्टर निवान?"
"हाँ, डॉक्टर... मेरी बहन... कैसी है?"
डॉक्टर मुस्करा कर बोला —
"ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा। रिस्क था... लेकिन वो स्ट्रॉन्ग रही। अब रीकवरी शुरू होगी।"
निवान की आँखें भर आईं।
"थैंक यू... थैंक यू सो मच, डॉक्टर!"
दूसरी तरफ वामिका अपने केबिन में अकेली बैठी थी।
उसने धीरे से अपना फोन उठाया और स्क्रीन पर कुछ देर तक एक ही नाम को देखती रही — "निवान"
लेकिन उसने कॉल नहीं किया।
बस स्क्रीन लॉक कर दी।
रात हो चुकी थी…
निवान की कार बंगले के पोर्च में आकर रुकी।
रात गहरा चुकी थी। हवाओं में हल्की ठंडक थी, और बंगले के चारों ओर अजीब सी खामोशी पसरी थी।
वो तेज़ क़दमों से अंदर आया, जैकेट उतारते हुए सीधा सीढ़ियाँ चढ़ा।
उसे पता था कि उसे थैंक्यू बोलना है।
सिर्फ एक बार।
बस इतना कहना है कि “आपने जो किया, उसके लिए शुक्रिया।”
इसलिए वो वामिका के कमरे की ओर बढ़ा।
कमरे का दरवाज़ा आधा खुला हुआ था।
अंदर लाइट्स मंद थीं… और बालकनी से आती हल्की सिगरेट की गंध हवा में घुल रही थी।
वो रुका।
फिर धीमे कदमों से अंदर गया।
वामिका बालकनी में खड़ी थी उसके बाल खुले थे, एक हाथ में ग्लास पकड़े हुए थी और दूसरे में सिगरेट।
रात की रोशनी उसके चेहरे को हल्का नीला कर रही थी।
उसकी पीठ सीधी थी, और निगाहें दूर शहर की रोशनी पर थीं।
निवान कुछ पल चुप रहा।
फिर कहा —
"वामिका..."
वामिका ने पीछे देखे बिना जवाब दिया —
"तुम्हारी बहन ठीक है?"
"हाँ... ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा। डॉक्टर ने कहा... अब सब ठीक रहेगा..."
वामिका ने एक कश लिया। फिर ठंडी आवाज़ में बोली —
"गुड फॉर हर।"
निवान थोड़ा आगे आया।
अब वो उसके बगल में खड़ा था, पर थोड़ी दूरी अब भी थी।
"मैं बस थैंक्यू बोलने आया था..."
वामिका ने सिगरेट का धुआँ आसमान की तरफ छोड़ते हुए एक हल्की मुस्कान दी ।
"देखो… आज तुम वहाँ गए, अपनी बहन के साथ थे यही काफी है। और जो ज़रूरत थी, मैंने दे दी। तुमने जो करना था, किया। मैंने जो करना था, कर दिया।बस इतना ही है। इससे ज़्यादा कुछ मत सोचो।"
"पर आपको फर्क पड़ा था... है ना?"
अब वामिका ने उसकी तरफ देखा।
"मिस्टर तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड ...मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता..."
"झूठ।"
वामिका का चेहरा पलभर के लिए सख्त हो गया।
"तुम्हें ये कहने का क्या हक है कि क्या झूठ है और क्या नहीं?"
"क्योंकि जब आपके हाथ ने मेरा हाथ पकड़ा था... वो कांप रहा था।
और जब आपने कहा 'गो'... उसमें सब कुछ था — डर, हिम्मत, उम्मीद... और..."
वो रुका, फिर धीरे से कहा,
"...फर्क भी।"
वामिका की पलकें एक सेकंड के लिए थमीं।
लेकिन उसने खुद को संभाल लिया।
"तुम बहुत ज़्यादा सोचते हो, निवान।
हम दोनों जानते हैं कि ये सब... रियल नहीं है।
तुम्हारी बहन की हालत, प्रेस कॉन्फ्रेंस, मेरा हाथ पकड़ना — सब एक टाइमिंग थी।
जो करना था, हो गया। अब ड्रामा बंद करो।"
"ड्रामा?"
फिर वो अचानक एक कदम और पास आ गया।
इतना पास कि अब दोनों की साँसें एक ही लय में चल रही थीं।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
वो दोनों एक-दूसरे के बेहद क़रीब खड़े थे।
निवान बोला— "आप वैसी नहीं हैं, जैसी लोगों को दिखती हैं..."
वामिका की भौहें सिकुड़ गई — "ओह? तो तुम बताओ कि मैं कैसी हूं?"
"आप बहुत ही... सॉफ्ट हार्टेड हो।" निवान धीमे से बोला।
वामिका का चेहरा तन गया। वो एकदम सीधी खड़ी हो गई, जैसे किसी ने उसकी ढाल को भेदने की कोशिश की हो।
"मिस्टर चौहान... कही तुम नाटक करते-करते सच में प्यार तो नहीं कर बैठे?"
निवान का चेहरा एक पल के लिए पूरी तरह झेंप गया।
उसने जल्दी से मुँह फेर लिया और बोला —
"न-नहीं! आप मेरी टाइप की नहीं हो!"
वामिका कुछ सेकंड तक उसे घूरती रही।
"टाइप?"
उसने धीमे मगर तीखे लहजे में कहा —
"मिस्टर चौहान, मैं परफेक्ट हूं!
लुक्स, ब्रेन्स, क्लास, पावर — सब कुछ है मेरे पास।
जो चाहे वो पा सकती हूं... और जिसे छोड़ना हो, उसे सेकंड्स में भूल सकती हूं।
मेरे सामने तुम जैसे लड़के सिर्फ एक डील होते हैं।
और तुम बोल भी कैसे सकते हो कि मैं तुम्हारी टाइप की नहीं हूं?"
निवान घबरा गया।
उसकी नजरें वामिका की आंखों से हटकर फर्श पर जा टिकीं।
"अ- अरे मेरा वो मतलब नहीं था..."
उसकी आवाज़ हकलाने लगी।
वामिका ने अपनी आंखें सिकोड़ लीं —
"जो भी मतलब हो, मिस्टर चौहान… शब्द तो तुमने ही चुने थे।"
वो मुड़ी, एक लंबा सिगरेट का कश लिया और बालकनी की रेलिंग पर कोहनी टिका दी।
कुछ पल सन्नाटा छा गया।
फिर, बिना उसकी तरफ देखे वो बोली —
"तुम्हें पता है… जब लोग मुझे देखते हैं, तो या तो डर जाते हैं, या इम्प्रेस हो जाते हैं।
कभी किसी ने ये नहीं कहा कि मैं सॉफ्ट हार्टेड हूं।
तुमने कहा… और अब कह रहे हो कि तुम्हारा वो मतलब नहीं था?"
निवान ने धीमे से कहा —
"मैंने कुछ गलत कह दिया क्या… मैं बस… आप से कुछ और कहना चाहता था…"
अब वामिका ने उसकी तरफ देखा।
"तो कहो। क्या कहना चाहते हो?"
निवान चुप ही रहा।
वो कुछ पल उसे देखती रही, फिर बोली —
"डर क्यों रहे हो?
प्यार नहीं करते न मुझसे?
तो बताओ... क्यों लड़खड़ाई तुम्हारी आवाज़ जब मैंने पूछा?"
निवान धीरे से बोला —
"मतलब कि… आप परफेक्ट हो, सब कुछ है आपमें — लुक्स, कॉन्फिडेंस, पावर…
लेकिन… मुझे जैसी लड़की पसंद है… वैसी नहीं हो आप। यही कहना चाहता था मैं…"
वामिका की आंखें एकदम छोटी हो गईं — वो अब सच में हैरान थी।
उसका चेहरा एक पल को बिना रिएक्शन के रहा, फिर
वो घूमकर एकदम उसके सामने आ खड़ी हुई।
"मिस्टर चौहान…"
उसने अपने दांत भींचते हुए कहा,
"कैसी लड़की पसंद है तुम्हें?"
निवान एक पल को झिझका, फिर बोला —
"मतलब… जो सीधी-सादी हो…
जो बिना कुछ बोले आंखों से सब कह दे…
मतलब... वो... स-सिंपल टाइप... जो साड़ी पहने, लम्बी चोटी बांधे... जिसे घर चलाना आए, चाय बनानी आए... जो ज़्यादा बोलती न हो..."
"ओह! और क्या?" वामिका ने तीखे स्वर में पूछा।
"बस... वहीं जो सीधी-सादी हो... ज़मीन से जुड़ी हो।
जो दिन में मंदिर जाए और रात को माँ से बात करे…
जिसके पाँव में पायल की आवाज़ हो और हाथों में चूड़ी की खनक…"
अब वामिका का चेहरा पिघलते ज्वालामुखी जैसा लग रहा था।
"सीधे कहो मिस्टर चौहान…
तुम्हें ऐसी लड़की चाहिए जो रसोई में काम करे, तुम्हारे घरवालों को जी कहे,
हर बात में सर हिलाए और खुद की सोच तक न रखे?"
निवान घबरा गया —
"न-नहीं! मेरा मतलब वो नहीं था... आप तो ग़लत ले रही हैं—"
"मैं ग़लत ले रही हूं?"
वामिका की आवाज़ अब तेज़ हो चुकी थी —
"मैं बारह मल्टीनेशनल कंपनियों की सीईओ हूं,
मेरे पास 500 करोड़ की प्रॉपर्टी है,
और तुम कह रहे हो तुम्हें चूड़ी-पायल वाली लड़की चाहिए?
सीरियसली, मिस्टर चौहान?
तुम्हें वो लड़की चाहिए जो दुपट्टा सर पर रखे और पूछे —
'खाना गरम कर दूं?'
न कि वो जो मीटिंग में माइक पकड़कर पूछे —
'यू आर श्योर अबाउट दा इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी?'"
निवान अब एकदम चुप हो गया था।
वामिका ने गहरी सांस ली, एक आखिरी बार उसकी ओर देखा और बोली —
"तुम्हारी टाइप की नहीं हूं ना मैं...?
अच्छा है... क्योंकि मेरी टाइप के लड़के तुम्हारे जैसे नहीं होते।"
निवान ने कुछ कहना चाहा, पर वामिका ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।
और खुद बोली —"मिस्टर चौहान...तुम सिर्फ मेरे कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड हो।
एक सौदे का हिस्सा... एक डील... और डील में इमोशन्स नहीं होते।"
"मैंने कहा था — न प्यार होगा, न जज़्बात। बस तीन महीने की कहानी है। मगर अब…अब मैं देखती हूं, कैसे नहीं होता तुम्हें मुझसे प्यार!"
निवान कुछ नहीं बोला। उसकी उंगलियाँ आपस में उलझने लगीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि बोले या चुप रहे।
"क्योंकि अब ये खेल सिर्फ खेल नहीं रहा, मिस्टर चौहान।अब ये मेरी इंसल्ट का सवाल है। और मैंने हारना सीखा नहीं है ।"
निवान ने एक लंबी सांस ली, लेकिन कुछ नहीं बोला।
वामिका पलटकर तेज़ क़दमों से बाहर जाने लगी, लेकिन फिर रुक गई।
बिना पीछे देखे बोली —
"वैसे भी...
मुझे तुमसे प्यार होने से रहा , मिस्टर चौहान।
लेकिन हां... तुम्हें मुझसे होगा।"
और वो तेज़ी से कमरे से बाहर निकल गई।
निवान वहीं खड़ा रह गया।
वहीं वामिका तेज़ी से अपने प्राइवेट ऑफिस में घुसी, और दरवाज़ा धड़ाक से बंद कर दिया।
उसके होंठ कसकर भींचे हुए थे।
उसने टेबल पर रखा कांच का पेपरवेट उठाया... फिर उसे फिर से वहीं रख दिया।
"बेवकूफ़ है वो...!"
"उसकी हिम्मत कैसे हुई.....मुझे किसी चूड़ी-पायल वाली लड़की से कम्पेयर करने की ...!"
उसने खुद को मिरर में देखा ।
"मैं वामिका रौशन हूं… लोग मेरा नाम सुनते ही खड़े हो जाते हैं… और ये लड़का… मुझे डिफाइन कर रहा है? सीरियसली?"
वो वापस अपनी कुर्सी पर बैठी, और सामने टेबल पर रखे पुराने कांट्रैक्ट फाइल को घूरने लगी।
फिर उसने फाइल बंद की… और खुद से बोली —
"ठीक है, मिस्टर चौहान। अब ये डील… असली मज़ा तब देगी, जब तुम… मुझे चाहोगे।
और मैं? मैं तुम्हें एक सेकंड भी तवज्जो नहीं दूंगी।"
लेकिन तभी —
ट्रिंग... ट्रिंग...
उसका फोन बजा।
स्क्रीन पर नाम चमक रहा था ... निवान चौहान।
वामिका का चेहरा फिर से तन गया।
उसने स्क्रीन को देखा… फिर मुट्ठी भींच ली।
वो बस देखती रही… और फिर आखिरी सेकंड पर कॉल पिक कर लिया।
"हां?"
"मैं… मैं बाहर हूं।"
"तो?"
"आपसे मिलना है।"
वामिका ने एक पल को आंखें बंद कीं, जैसे वो पलट कर उसे चिल्लाना चाहती हो, लेकिन…
"क्यों?"
"बस मिलना है… प्लीज़।"
वामिका मुस्कराई... शायद कुछ सोच कर।
फिर वो बोली —
"मुझे डिस्टर्ब मत करो, मिस्टर चौहान।"
सामने से निवान की आवाज आई—
"प्लीज़, सिर्फ दो मिनट—"
लेकिन वामिका ने अगले ही पल कॉल काट दिया।
उसने धीरे से मोबाइल को टेबल पर रखा और फिर अपनी टांगों को क्रॉस करते हुए कुर्सी पर पीछे टिक गई।
उसकी आंखें अब शांति से छत की ओर देख रही थीं, लेकिन दिमाग में एक ही बात गूंज रही थी —
"अब इमोशन्स नहीं, अब चालें चलनी हैं।"
उसने धीरे से आँखें बंद कीं, और खुद से बोली —
"तुमने मुझे चैलेंज किया है, मिस्टर चौहान... अब मैं तुम्हारे दिल की हर दीवार गिरा दूंगी। एक-एक करके... और जब तुम कहोगे कि तुम मुझसे प्यार करते हो… तब मैं हँसूँगी। क्योंकि उस दिन तक... मैं तुम्हें हरा चुकी होऊंगी।"
फिर उसने अपनी डायरी उठाई — वही डायरी जिसमें वो अब तक सिर्फ बिज़नेस प्लान्स लिखती थी।
आज पहली बार उसमें उसने लिखा:
"नया मिशन: निवान चौहान को वामिका रौशन से प्यार कराना।
और फिर… उसे दिखाना कि वामिका सिर्फ दिल नहीं तोड़ती… ईगो भी तोड़ती है।"
और उसने नीचे लिखा —
“डे वन: उसने मुझे चुड़ियों से मापा… अब मैं उसके होश उड़ाऊंगी।”
उसके होंठों पर फिर वही मुस्कान लौट आई।
“गेम ऑन, मिस्टर चौहान…”
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।
अगले दिन...
निवान अपने कमरे में तैयार हो रहा था।
उसने नेवी ब्लू शर्ट और नीचे व्हाइट पैंट पहन रखी थी। बाल अभी भीगे हुए थे ।
वो अभी शर्ट के बटन लगा ही रहा था कि तभी—
ठक-ठक।
दरवाज़ा किसी ने खटखटाया।
"आ रहा हूं..." — वो बोला, और दरवाज़े की तरफ़ बढ़ा।
उसने दरवाज़ा खोला...पर सामने कोई नहीं था।
"अजीब है..." — उसने दरवाज़ा बंद करने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि अचानक एक हाथ दरवाज़े के बीच आ गया।
निवान ने झट से दरवाज़ा पूरा खोल दिया।
सामने वामिका थी।
और आज की वामिका... किसी तूफान से कम नहीं लग रही थी।
उसने हाई नेक, फुल स्लीव्स ब्लैक ब्लाउज पहना था और उस पर लिपटी हुई ब्लैक साड़ी जिसमें बारीक डायमंड्स की झिलमिलाहट थी।
पैरों में ट्रांसपेरेंट हिल्स, और बाल खुले हुए ।
और चेहरे पर हमेशा की तरह एक भी मेकअप की परत नहीं।
निवान कुछ पल के लिए जैसे सांस लेना ही भूल गया।
"वा-वामिका...?" उसकी आवाज़ खुद में ही गुम थी।
वामिका ने बिना कुछ कहे, एक धीमी मुस्कान के साथ अंदर कदम रखा।
फिर दरवाज़ा अपने पीछे बंद कर दिया।
निवान एक कदम पीछे हटा, थोड़ा घबरा गया था शायद।
"अ-आप... कुछ चाहिए था क्या?"
वामिका बिल्कुल उसके सामने आ खड़ी हुई।
इतनी पास कि निवान को खुद को पीछे खींचने की जगह नहीं मिली।
उसने उसकी अधूरी बटन वाली शर्ट को देखा।
"लगता है… आज तुम्हें मेरी ज़रूरत है, मिस्टर चौहान।"
उसने धीरे से अपने दोनों हाथ उठाए — और निवान की शर्ट के बटन बंद करने लगी।
एक...
दो...
तीन...
हर बटन के साथ उसकी उंगलियों की नर्मी निवान की धड़कनों को तेज़ कर रही थी।
"क्या हुआ...? बोलते क्यों नहीं?"
निवान की धड़कनें बेकाबू हो गईं।
वो कुछ बोलना चाहता था... कुछ कहना... लेकिन उसकी ज़ुबान जैसे सुन्न हो गई थी।
जब वामिका आखिरी बटन पर पहुँची, तो उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा —
"अब ठीक लग रहे हो, मिस्टर चौहान।"
निवान एक झटके में पीछे हट गया।
"ये... ये सही नहीं है।"
"सही...? और तुम्हें ये फैसला कब से करने का हक़ मिल गया कि क्या सही है और क्या नहीं?"
वो अपनी आंखें तरेर कर बोली।
"मैं... मैं बस इतना जानता हूं कि... ये डील थी, और... डील में ऐसा कुछ—"
निवान बोल ही रहा था कि वामिका ने उसका वाक्य बीच में ही काट दिया।
"ओह गॉड, फिर से वही डील-वाली टेप चला दी? ग्रो अप, मिस्टर चौहान."
वो तेज़ी से उसके पास आई और उसकी आंखों में आंखें डालकर बोली —
"तुम्हें पता है... सबसे बड़ी गलती क्या थी मेरी? मैंने सोचा था तीन महीने की ये कहानी मेरे कंट्रोल में रहेगी।
पर अब मुझे मज़ा आने लगा है... तुम्हारे उस बेचैन चेहरे को देखकर।
उस हिचकिचाहट को पढ़कर... जब तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो,
लेकिन कह नहीं पाते।"
निवान की उंगलियाँ अब फिर से एक-दूसरे में उलझने लगी थीं।
"वामिका... प्लीज़... ये गेम मत खेलो। मैं कन्फ्यूज़ हो रहा हूँ।"
"तुम कन्फ्यूज़ हो रहे हो?" वामिका तिरछा मुस्कुरा कर बोली।
निवान अब थोड़ा झुंझलाया सा लगने लगा।
"मैंने ऐसा कभी नहीं चाहा था..."
वामिका बोली—"लेकिन अब मै चाह रही हूँ...मिस्टर चौहान। तुम्हें लग रहा है कि तुमने मुझे परख लिया है?
तो अब मैं तुम्हें बता दूँ, मिस्टर चौहान...
अब मैं तुम्हें परखूंगी।
हर दिन... हर पल।
क्योंकि मुझे यकीन है...
जो लड़की तुम्हें 'चाय बनानी आती है' चाहिए थी...
अब वो लड़की तुमसे चाय बनवाएगी ।"
फिर उसने निवान की ठुड्डी पकड़कर ऊपर उठाई और धीमे स्वर में बोली —"तीन महीने बचे हैं इस डील में, चौहान...
अब देखना... प्यार कौन करता है और किसको किससे डर लगने लगता है।"
और फिर वो बिना जवाब सुने, पलटी और दरवाज़ा खोलकर बाहर जाने लगी।
लेकिन इस बार... जाते वक्त उसने पीछे मुड़कर देखा।
और कहा —
"वैसे... ब्लू शर्ट में अच्छे लगते हो।"
निवान ने वामिका के जाने के बाद गहरी सांस ली, जैसे खुद को समेटने की कोशिश कर रहा हो।
पर तभी...
फिर से दरवाज़ा खुला।
वामिका वापस अंदर आई इस बार उसका एक हाथ कमर पर था, और दूसरे हाथ की उंगली से वो अपने बालों को पीछे कर रही थी ।
"और हाँ..." — उसने अपनी भूरी आंखें उसकी आंखों में डाल कर कहा —
"जल्दी नीचे आ जाना... चाय तुम्हारे हाथों से ही पियूंगी।"
फिर एक शरारती मुस्कान देकर वो दरवाज़ा बंद कर गई।
लगभग 10 मिनट बाद...
वामिका एक ऊँची स्टूल पर बैठी थी, बाल पीछे करके क्लिप में बाँध रखे थे।
उसकी नज़र लगातार किचन में लगे उस लड़के पर थी... जो उसके लिए चाय बना रहा था।
"दूध ज्यादा मत डालना..." — उसने धीरे से कहा।
"हाँ हाँ मैडम, आप तो सिर्फ़ बैठिए..." — निवान ने चाय छानते हुए ताना मारा।
वामिका भौंहें चढ़ाकर बोली, “एक्सक्यूज़ मी ? ताने मार रहे हो तुम मुझे...? वामिका रौशन को?"
निवान चिढ़ कर बोला —
"पता है मुझे आपका नाम, मिस वामिका रौशन। 24 घंटे, हर वक्त अपना नाम ही दोहराती रहती हो... 'मैं वामिका रौशन हूं... वामिका रौशन'..."
वो उसकी नकल करने लगा, अपनी आवाज़ को थोड़ा नाक में चढ़ाते हुए —
"हाय, आयम् वामिका रौशन...परफेक्शन इज़ नॉट अ चॉइस, इट्स माय हैबिट।"
वामिका हैरानी से उसकी तरफ़ देखने लगी, फिर अचानक हँस पड़ी —
"व्हाट?! कब बोला मैने ऐसा ?"
निवान ने कप उसके सामने टेबल पर रखते हुए कहा —
"नहीं, पर बोल सकती हो... आपकी वाइब है ऐसी!"
वामिका ने मग उठाया, घूंट भरा और फिर सिर झटका —
"हम्म... नोट बैड, मिस्टर चौहान। टेस्ट तुम्हारे मुंह से ज्यादा कड़वा नहीं है!"
"और आपके मुंह से तो तारीफ भी इंसल्ट जैसी लगती है!" निवान चिढ़ कर बोला।
वामिका चाय का घूंट लेते हुए बोली —
"और तुम्हारे मूड स्विंग्स तो किसी पुराने पंखे की तरह हैं...कब घूम जाएं, कोई भरोसा नहीं।"
निवान भी अपनी आंखे घुमा कर बोला —
"तो बंद कर दो पंखा, मैडम। वरना आपकी ये डायमंड साड़ी उड़ जाएगी।"
वामिका मुस्कराई, फिर बोली —
"तुम हमेशा मज़ाक में बात घुमा देते हो, निवान।
कभी दिल की बात सीधी क्यों नहीं कहते?"
"क्योंकि हर बार जब दिल की बात करने लगता हूँ, आपका 'डील' वाला चेहरा बीच में आ जाता है।" वो खीझ कर बोला।
वामिका धीरे से उठी, मग टेबल पर रखा और उसके सामने आ
खड़ी हुई —
"और अगर मैं कहूं कि अब मैं इस डील को सीरियसली नहीं ले रही?"
"तो मैं कहूंगा — बहुत देर कर दी मेहरबान आते-आते,"
वामिका कुछ पल उसे देखती रही, फिर बोली —
"और अगर मैं देर से सही, पर सच में आ गई तो?"
निवान का गला सूखने लगा।
"ये सब एक प्ले जैसा है।"
वामिका ने उसकी ठुड्डी फिर से ऊपर की और बोली —
" इसे प्ले ही समझो मिस्टर चौहान।"
वो कुछ और बोलती, उससे पहले—
निवान ने धीरे से कहा —
"अगर सब कुछ प्ले है... तो आप क्यों नहीं उतारती अपना नकाब ?"
वामिका अपनी जगह थम सी गई।
कुछ पल बाद बोली —
"क्योंकि जब मैं नकाब उतारती हूँ... लोग चले जाते हैं।
तुम भी चले जाओगे शायद।"
वामिका कुछ पल के लिए चुप रही,
फिर अगले ही पल एक अजीब सी, शरारती मुस्कान मुस्कुरा दी।
और फिर उसने निवान को हल्के से धक्का दिया... पर निवान को झटका जरूर लगा।
"चलिए मिस्टर कॉन्ट्रैक्ट बॉयफ्रेंड..." — वो आंखें मटकाते हुए बोली —"लेट हो रहे हैं हम!"
निवान थोड़ा हड़बड़ा गया।
"क्या? कहाँ? क्या हुआ अचानक?"
वामिका ने अपना मोबाइल उठाया, टाइम देखा और बोली —
"तुम्हारी एक्टिंग स्किल्स तो सही हैं, लेकिन
पंक्चुअलिटी पर काम करना होगा।"
" आप एक्टिंग कर रही थी अभी भी !" — निवान की आंखें फटी की फटी रह गईं।
वामिका कुछ नहीं बोली।
बस उसकी तरफ एक तेज़ नज़र डाली ।
निवान बेचारा अब पूरी तरह उलझ चुका था।
"मतलब... मतलब अभी जो सब हुआ वो भी—?"
वो खुद से ही सवाल कर रहा था, और वामिका…
अब बालों में क्लच फँसाते हुए दरवाज़े की ओर बढ़ गई।
"कम ऑन, मिस्टर चौहान,"
उसने दरवाज़ा खोलते हुए कहा,
"अगर ज़िंदगी में थ्रिल चाहिए, तो थोड़ा कन्फ्यूजन भी ज़रूरी है।"
"पर… मैं तो सिर्फ़ चाय बना रहा था!"
निवान अब भी वहीं खड़ा था, जैसे रिमोट से पॉज़ कर दिया गया हो।
वामिका ने फिर बिना देखे कहा —
"और अब तुम्हें मेरा बॉयफ्रेंड बनकर पार्टी में चलना है।"
"क्या?! पार्टी? किसकी पार्टी?"निवान बेचारा अभी भी हैरान था।
क्रमशः
आगे क्या होगा, ये जानने के लिए बस पढ़ते रहिए.... और साथ ही समीक्षा भी करें।