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Crazy For Her

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Sarvam

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लड़की की आखो मे अपने लिए नफरत देख लड़का टूट सा गया । उसने भर्रायी आवाज में कहा " मेरी बात मानो जान मेने कुछ भी जानबूझ कर नही किया! आई प्रोमिस मे सब ठीक कर दूंगा बस तुम मुझसे नफरत मत करो! मे तुमसे बोहोत प्यार.... " उसकी बात भी पूरी नही हुई उतने...

Total Chapters (65)

Page 1 of 4

  • 1. Crazy For Her - Chapter 1

    Words: 2393

    Estimated Reading Time: 15 min

    Note: स्वरचित रचना, जिसके सभी राइट मेरे पास सुरक्षित है! इसलिए कहानी को कॉपी करने की कोशिश ना करे ।




    अरुणाचल के तवांग मे सुनसान जगह पर वो लड़की खड़ी थी । उपर से हो रही हल्की बर्फबारी मे वो ठंड से कपकपा रही थी । लेकिन कहना मुश्किल था क्युकी वो काफी ज्यादा गुस्से मे भी थी । उसकी आखे हल्की लाल के साथ आसुओ से भरी थी । उसने सामने खडे लडके से कहा जिसे पुलिस ने पहले ही घेरा हुआ था " तुम्हारी वजह से मेरी बहन ने अपनी जान दे दी! भगवान के सजा देने का मे इंतेजार नही करूँगी क्युकी तुम्हे सजा देने का हक सिर्फ मेरा है! और उसे भी नही छोड़ूंगी जिसे तुमने बस पैसों के लिए बचाया था! "
    लड़की की आखो मे अपने लिए नफरत देख लड़का टूट सा गया । उसने भर्रायी आवाज में कहा " मेरी बात मानो जान मेने कुछ भी जानबूझ कर नही किया! आई प्रोमिस मे सब ठीक कर दूंगा बस तुम मुझसे नफरत मत करो! मे तुमसे बोहोत प्यार.... "
    उसकी बात भी पूरी नही हुई उतने में लड़की ने चिल्लाकर कहा " प्यार.... तुम्हे प्यार का मतलब भी पता है? जो एक अनाथ है उसे प्यार का मतलब कहा से समझ आयेगा? कहाँसे समझ आयेगा की एक जवान बेटी अपनी जान दे देती है तो उसकी फैमिली पर क्या गुजरती है । और नफरत ना करू... कैसे नफरत ना करू तुमसे? तुम नफरत के लायक हो सिर्फ नफरत के! "

    लड़का आगे बढने लगा तो पुलिस वालों ने उसे रोक दिया । वहा खडे ऑफिसर जिसकी वर्दी पर एस पी महेश लिखा हुआ था उसने कहा " तुम्हे अब निकलना चाहिए, क्या पता इसके लोग तुम्हे टार्गेट करे! "
    महेश की बात मानकर लड़की वहा से निकलने लगी तो लडका पागल सा हो गया । " प्लीज जान मुझे छोड़कर मत जाओ! मर जाऊंगा तुम्हारे बिना । हा हू अनाथ पर ऐसा नही की प्यार का मतलब ही नही समझता । तुम्हें देखकर सिखा है मेने वो मतलब । फिरसे मुझे अनाथ करके मत जाओ जान.... "
    लडकी ने एक बार भी पीछे मुड़कर नही देखा और दूर खड़ी टैक्सी मे जा बैठी । लडका फिरसे जुनून भरी आवाज में चिल्लाया " मे तुम्हे इतनी आसानी नही जाने दूंगा , तुम जहा जाओगी मुझे ही पाओगी! "
    लड़की ने टैक्सी वाले से कहा " एयरपोर्ट चलो! "
    गाडी वहा से निकल गयी जिसे आखो से ओझल होता हुआ वो लडका देखता रह गया ।




    उत्तर प्रदेश,
    लखनउ जिले में शहर के बाहर एक उची पहाडी पर वो खड़ी खाली आखो से नीचे जंगल को देख रही । काले रंग की हुडी जिसे उसने सर पर डाले हुए था । उसके हाथ हुडी की जेबों मे थे । नीचे काले रंग की जिन्स और पेर मे उसी रंग के जूते थे । कंधे से थोडा नीचे तक पोहोचते बाल जो उसने अजीब तरह से एक रबर बैंड मे फसाये थे जिसकी वजह से आगे के बाल हवा की वजह से बार बार चेहरे पर आ जाते । गहरी काली आखे जो बडी बडी थी ।

    उन्ही आखो मे मौजूद नमी के साथ वो पुराने खयालो मे खो गयी । एक छोटा सा घर जिसमे एक लड़की भागते हुए अंदर आई । उसने चिल्लाते हुए कहा " दीदी के लिए ट्रेनिंग लेटर आ गया! "
    सिडियो से एक आदमी दौड़ते हुए नीचे आया वही कीचन से एक औरत । उन्होंने उस लेटर को देख आवाज लगाई " आर्या ... आर्या देखो तो सही! "
    आखे मलते हुए आर्या बाहर आई । उसने टीशर्ट और शॉर्ट पहनी थी । उपर रेलिंग पर झुकते हुए उसने कहा " आपकी बेटी बॉडीगार्ड की ट्रैनिंग के लिए जा रही है फौज मे नही जिससे आप लोग इतना हल्ला मचाने लगे । "

    " अरे फर्क क्या है! कल को मेरी बेटी बडे बडे नेताओं को प्रोटेक्शन देगी! " आर्या की मा ने कहा तो उसके पिता भी उसका साथ देने लगे । सौम्या ने बैग से चॉकलेट का बड़ा सा बॉक्स निकाला तो उपर खड़ी आर्या की आखो मे चमक आ गयी । " हा... हा इतनी बडी बात है! सोमु ये तु जरूर मेरे लिए लाई होगी ना! " उसने कहा और सिडिया उतरकर नीचे आ गयी । सौम्या ने बॉक्स पीछे कर लिया तो आर्या आगे आने लगी ये देख सौम्या उसे अपने पीछे पुरे घर में दौड़ाने लगी । "

    पहाड़ की चोटी पर खडी आर्या के होठो पर मुस्कान आ गयी और अचानक ऐसा कुछ दिखा जिससे वो पहाडी के नीचे हाथ करते हुए जोरसे चीख उठी " सोमु.... ! "
    उसकी आवाज गूंज कर वापस उसे सुनाई देने लगी । पेड़ों पर बैठे पंछी भी आवाज सुनकर उड गये ।

    ठंडी हवा में गहरी सास भर आर्या ने कहा " मेरी सोमु... तेरे एक गुनेहगार को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया! अब बारी उन तीनों की जो जेल की सलाखे नही हेल की आग डिजर्व करते है । और जीते जी उस आग में डालना मेरा काम है! " जितनी आग उसके सीने में थी उससे कही ज्यादा आखो मे नजर आ रही थी । मुड़कर वो वहा से चली गई ।

    हायवे पर बनी छोटी सी टपरी जहा लोग चाय पीने रुक जाते थे । वही लगी टी वी पर न्यूज़ चल रही थी जिसे वहा मौजूद लोग कान लगाए सुन रहे थे ।
    " लखनऊ के जाने माने बिजनेस मेन देवांश ठाकुर को अरुणाचल के तवांग से अरेस्ट कर लिया गया है । हाल ही मे हुए 8 लोगों के बेहरहमी से कत्ल मे उनका हाथ माना जाता है । किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके खिलाफ सबूत पोहोचाये है । कहा जाता है वो सिर्फ बिजनेस मे नही अंडर वर्ल्ड मे भी पेर जमाये हुए है । द सीक्रेट माफिया किंग ऑफ एशिया देवांश ठाकुर! "
    टी वी पर चल रही न्यूज़ और वो नाम गर्म शीशे की तरह आर्या के कानों मे लग रहा था । उसने चिल्लाते हुए कहा " कबसे चाय मांग रही हूँ, सुनाई नही देता! "

    " अ... व.. माफ करना मेडम जी हम सुने नही! अरे इतना बड़ा आदमी अरेस्ट हुआ है इसलिए.... " टपरी वाले  ने कहा तो आर्या उसे घूरने लगी । उसने चुपचाप चाय का कप आर्या की तरफ बढ़ा दिया । आर्या बेंच के आखिरी छोर पर जा बेठी जिसे वहा मौजूद सभी लोग अजीब नजरों से देख रहे थे । भले ही उसकी आखो मे गुस्सा था पर कान टी वी पर चलती न्यूज़ पर ही थे ।

    डिस्ट्रिक्ट जेल लखनऊ,
    रिमांड होम में देवांश ठाकुर एक टेबल के पास लगी कुर्सी पर बैठा हुआ था । उसके हाथ टेबल पर थे और सर हल्का झुकाया हुआ था । आखे सूझ चुकी थी । क्युकी जबसे वो अरेस्ट हुआ तबसे नींद उसकी आखो से कोसो दूर हो गयी ।
    उसी वक्त वहा का दरवाजा खुला और एक लडका वकील के साथ अंदर आ गया । टेबल के सामने जाकर वो खडा हुआ और कहा " भाई.... "
    देवांश सोच मे डूबा अपने सामने खडे लडके विकी की तरफ देखता तक नही ।
    विकि ने दुबारा कहा " देव भाई.... ! "

    " मेरी जान कहा है? " मौत सी ठंडी आवाज में देवांश ने पूछा । विकि के चेहरे पर हल्का गुस्सा उतर आया । उसने कहा " आपको फसाकर वो भाग गयी तो आप क्यु उनके पीछे..... ! "

    " श्श्श्श्.... "  विकि की बात बीच में काटकर उसने कहा " सबसे पहले उसे ढूँडो और मैने क्या गलत किया है वो भी! "
    विकि ने कहा " भाई पहले आप बाहर आ जाओ फिर देखते है! "
    विकि ने वकील से फोर्मालिटि पूरी करने के लिए कहा जिससे देवांश को भी कोई आपत्ति नही हुई!

    शाम का वक्त,
    एक महल जैसे घर के अंदर सात से आठ गाडिया आकर रुकी । उस घर पर ठाकुर विला लिखा हुआ था । एक गार्ड के दरवाजा खोलते ही कार में से देवांश उतरा और सीधे घर के अंदर चला गया । जितना बाहर से बड़ा दिखता उससे कही ज्यादा वो अंदर से बड़ा था । फर्श से लेकर दीवारे और परदे तक सफेद रंग में थे । देवांश के आते ही सभी सरवंट ने उसके सामने सर झुकाना शुरू कर दिया जिसे इग्नोर कर वो सिधे सिडियो की तरफ बढ़ा ।

    तीसरे माले के सबसे बडे कमरे का दरवाजा खोलकर वो अंदर चला गया और जाकर बाथरूम मे रुका । कपड़े उतार कर उसने ठंडे पानी का शावर चालू कर दिया और उसके नीचे खडा हो गया । हाथ दीवार से टिकाए उसने आखे खोली जो पूरी लाल रंग की थी । उसके अंदर इस वक्त गुस्सा, दर्द, तडप, गिल्ट और भी कही सारे इमोशन कैद थे जिन्हे वो किसी भी कीमत पर बाहर नही लाना चाहता था ।
    कसकर आखे बंद करने पर उसके सामने एक चेहरा घूमने लगा... आर्या का चेहरा!

    आजसे ठीक एक महीने पहले,
    भारी बरसात में एक लड़की सलवार कमीज मे तेजी से सड़क पर भाग रही थी । रात के सिर्फ नो बज रहे होंगे पर रास्ता बिलकुल खाली और सुनसान था । आगे भागते हुए लड़की बार बार पीछे मुड़कर देख रही थी । दुप्पटे से उसने सर और चेहरा ढक रखा था । नंगे पेरो से वो सड़क पर भाग रही थी जबकि आठ लडके भेड़ियों की तरह उसके पीछे पड़े थे । उनके चेहरों पर हवस साफ झलक रही थी । लड़की मदत के लिए आवाज भी लगा रही थी पर कोई फायदा नही हुआ । भागते भागते वो थक चुकी थी जिसका फायदा उठाते हुए एक लडके ने पास आकर लड़की का दुप्पटा खिचा । लड़की खुदको संभाल नही पायी और लड़खडाते हुए रास्ते के बीच आ गयी । और उसी वक्त सामने से आती गाडी से टकराकर वही गिर पडी । लड़की के सर से खून बह रहा था पर उसने दुप्पटा नही छोड़ा । पीछा करते लडके भी पास आ गए । लड़की उठने की कोशिश करने लगी पर पैर में भी चोट थी ।
    उन आठ लड़को मे से एक लडका आगे आया और लड़की के पास आकर उसका बाजू पकड़ कर खडा किया । लड़की की आखो मे बेबसी के आसु थे और अब भागने या लड़ने की कोई शक्ति नही बची थी । लडका उसे लेकर एक कदम भी आगे बढ़ाता उससे पहले ही उसे अपने सर पर कुछ मेहसूस हुआ । लड़की का हाथ छोड़कर उसने सर पर हाथ लगाया और वैसे ही जमीन पर गिर पड़ा । उसके सर के बीचो बीच गोली लगी थी ।

    बाकी लडके एक कदम पीछे हट गए । उन्होंने सामने देखा तो एक लडका मुह में सिगरेट पकडे हुए था और उसके पास खडा लडका जिसने उसके उपर छाता पकड रखा था उसने लाइटर से सिगरेट जला दी । उनके सामने काले कपडे पहने दो गार्ड्स खडे थे जिनमे से एक के हाथ मे गन थी जिससे अभी अभी गोली चली ।
    पीछे बचे साथ लडको मे से दो ने भी गन निकाल कर सामने देवांश और विकि पर गन प्वाइंट कर दी ।
    देवांश ने उनके उपर ध्यान ना देकर लड़की की तरफ देखा जो काफी डरी हुई नजर आ रही थी । माथे से खुन बह रहा था और दुप्पटे से आधा चेहरा ढका हुआ था ।
    देवांश की नजर तो उन बडी बडी आखो मे ही अटक गयी थी जो रोने की वजह से लाल थी । वो लड़की को देखने में इतना बिजी हुआ की सामने से बात करते लडको की आवाज भी उसके कानों मे चुभने लगी । अपनी भौहें सिकुड कर उसने कमर पर लगी गन निकाली और एक एक कर उन सभी लोगों के शरीर में दाग दी । इससे भी मन नही भरा तो उसने गार्ड्स के हाथों से भी गन लेकर जमीन पर पडी लाशो पर चलाना शुरू कर दिया ।
    उन लडको मे एक ने कहा था " अगर लड़की चाहिए तो हमारे बाद ले जाना और बीच में आये तो तुम्हारी मा बहन को भी कोठे पर बिठा देंगे! "
    यही बात देवांश के इगो पर लग गयी क्युकी अपने परिवार के बारे में उसे कुछ भी पता नही था पर कोई उनका नाम ले तो उसका दिमाग खराब हो जाता । गोली की आवाज सुनकर वहा बने घरों मे से लोग झाककर बाहर देखने लगे । विकि ने उन्हे देखते हुए अपनी गन हवा में चला दी तो वो फोरण अंदर चले गए ।

    देवांश ने खुदको शांत कर अपनी नजरे लड़की की तरफ कर दी । उसने देखा वो पहले से ज्यादा डरी हुई लग रही है ये देख उसने हाथ मे पकड़ी गन गार्ड्स को थमा दी और कदम लड़की की तरफ बढ़ाए । वो लड़की दुप्पटे पर अपनी पकड मजबूत कर कदम पीछे लेने लगी तो देवांश अपनी जगह रुक गया ।
    हाथ आगे दिखा कर उसने गहरी आवाज में कहा " डरो मत, तुम सेफ हो । " लड़की ने अपनी नजरे उठाई तो देवांश उसकी आखो मे ही देख रहा था । थोडा सा झुकते हुए उसने अपने जूते उतार दिए और धीरे से लड़की की तरफ बढ़ा । उसने जूते जमीन पर रख खुद घुटनों पर बैठ गया । अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसने आखो से ही लड़की को जूते पहनने का इशारा किया । एक हाथ देवांश के हाथ पर रख उसने दूसरा कंधे पर रख जूते पहन लिए ।
    देवांश खडा हुआ और कोट उतार कर उसे पहना दिया । उसने कहा " चलो तुम्हे घर छोड़ देता हूँ! "
    लड़की ने डरते हुए ना मे गर्दन हिला दी तो देवांश ने लंबी सास लेकर आखे बंद करली । आजतक उसे मना करने वाला पैदा नही हुआ था और जिसने किया उसके पैदा होने का सबूत भी नही बचा । लेकिन ये लड़की... पहली मुलाकात मे माफिया के किंग को घुटनों पर बिठा दिया ।
    देवांश ने सक्त आवाज मे कहा " विकि इसे घर छोड आओ... ! "
    वो बिना रुके गाडी मे जा बैठा जिसके साथ गार्ड्स भी बैठकर चले गए । विकि ने लड़की की तरफ देख कहा " चलिए... भाई ने कहा है तो आपको घर छोडना ही पडेगा! "
    देवांश के जाते ही लड़की फोरण विकि के पीछे चल दी और जाते हुए वो नीचे पडी लाशों पर पेर देकर जा रही थी । गाडी मे बैठते ही दुप्पटे मे छुपे आर्या के चेहरे पर तिरछी मुस्कान आ गयी ।
    वही उनकी गाडी आगे बढी तो वहा एक घर की दीवार के पीछे छिपा साया बाहर निकल आया । उसने हाथ मे कैमरा पकड़ रखा था । " देवांश ठाकुर.... यू आर फिनिश! "








    To be continued...
    चलो समीक्षा और स्टिकर की बारिश करदो ।

  • 2. Crazy For Her - Chapter 2

    Words: 1812

    Estimated Reading Time: 11 min

    उस अंजान लड़की की मदत कर देवांश निकल तो आया था पर वो मासूम सी डरी हुई आखे उसके जहन से जाने का नाम ही नही ले रही थी ।
    कमरे मे बिस्तर पर लेटे लेटे वो बस करवट बदल रहा था और जब भी आखे बंद करता वो मासूम सी आखे उसका दिल धड़काने का काम शुरू कर देती ।
    झल्लाते हुए देवांश उठ कर बैठा और सर पकडते हुए " अंजान ही तो थी, फिर क्यु उसकी आखे मेरी आखो पर कब्जा जमाये बैठी है । दिल मेरा है लेकिन उसके खयाल से बार बार धडक रहा है! शरीर मेरा है लेकिन एक बार उसे छूना चाहता है । ओह्ह लड़की ... जिसका नाम भी नही जानता उसने कुछ पलों में पागल कर दिया देवांश ठाकुर को! " 
    वो उठकर बालकनी मे चला गया और मुह में सिगरेट पकड कर लाईटर से जलाने लगा । तभी नीचे एक गाडी आकर रुकी । देवांश ने लाईटर वापस जेब मे रख सिगरेट फेक दी । वो फोरन कमरे से बाहर निकल पड़ा ।

    ठाकुर विला के पोर्च मे गाडी रोक विकि बाहर आया और उंगली मे चाबी फसाकर उसे घुमाते हुए अंदर बढ़ा । सामने सिडिया उतर कर देवांश खडा था ।
    विकि उसके सामने जाकर रुकते हुए " सोए नही देव भाई? "
    " लड़की को छोड़ा? " देवांश ने अपना सवाल दाग दिया । विकि अपनी गर्दन हा मे हिला देता है ।
    " कहा छोड़ा? " देवांश ने पूछा तो विकि हैरानी से " आपकी तबियत तो ठीक है ना भाई? "
    देवांश ने उसे घुरा और कहा " लड़की के मामले मे मजाक नही ,कहा है ना? "
    विकि ने कहा " सोर्री भाई! उसे हॉटल के सामने छोड़ा! उसने कहा वो शहर मे नई है और फिल्हाल हॉटल मे रहती है, जॉब के लिए ही गयी थी और वो मुसीबत गले पड़ गयी । "
    " अच्छा ठीक है! जाकर सो जा, बोहोत रात हो गयी है! " देवांश ने कहा और सिडिया चढ़कर जाने लगा । विकि उसे देखता रह गया ।

    एक छोटे से घर का दरवाजा खोलकर आर्या ने अंदर कदम रखा । भीगे हुए कपडो मे ठंड से काप रही थी पर उसे कोई फरक नही पड़ा । उसने घर मे अपनी नजरे फिरायी तो आर्या और सौम्या एक दूसरे के पीछे भाग रही थी । एक तरफ खडी उसकी माँ उन्हे रुकने के लिए कह रही थी और सोफे पर बैठे उसके पापा अखबार पढते हुए हस रहे थे । एक पल में आर्या का सपना टूटा और घर में अंधेरे और धूल, जालों के सिवाय कुछ नही था ।
    वो टूटकर गिर पड़ती उससे पहले ही दो मजबूत बाजुओ ने उसके कंधे थाम लिए । उसने आर्या को गले लगाकर कहा " इतनी जल्दी बिखर जाओगी तो बदला लेने के लिए खुदको समेटना पड जायेगा! "
    " छह महीने... छह महीने हो गए महेश! मेरी सोमु के कातिल जिंदा है और चेन की सासे ले रहे है । मै कुछ नही कर पायी! ना अपने मा बाप के लिए ना अपनी सोमु के लिए, उन्हे बचा तक नही पायी! " वो महेश के सीने से लग फुट फुटकर रोने लगी । महेश ने कुछ ना कहकर उसे रोने देना सही समझा ।
    कुछ देर बाद वो आर्या को सोफे की तरफ ले जाकर बिठा देता है । उसके सामने घुटनों के बल बैठ महेश ने कहा " हमारा पंछी जाले मे फस चुका है! मे जल्द ही उसके खिलाफ वारंट निकालता हु उससे पहले तुम्हे कुछ दिनों के लिए शहर छोडना होगा! बाकी के सब कीडे है जो देवांश के जेल जाते ही झटपटाना शुरु कर देंगे! उनका हिसाब आसानी से नही करेंगे क्युकी वो जेल मे आराम से जिंदगी बिताने के लायक नही! "
    आर्या ने बहस ना करते हुए हा मे सर हिलाया और उठकर खडी हुई । महेश ने कहा " गलती से भी देवांश के सामने मत आना, वो कोई मामूली इंसान नही जिससे तुम अकेली निपट पाओगी! "
    " हम्म! " आर्या ने कहा और दोनो घर के बाहर निकल पड़े ।

    बडी मुश्किल से रात काटकर देवांश सुबह सुबह ही जिम में कसरत करने लगा । उसकी आखे ना सोने की वजह से लाल थी और वो पंचिंग बैग पर अपना गुस्सा उतारे जा रहा था । पसीने से लतपथ होने के बावजूद वो रुकने का नाम नही लेता जिसे देख एक तरफ खडा विकि उबासी लेने लगता है ।
    देवांश अपने मन " देवांश ठाकुर को परेशान करने वाले को वो जिंदा गाड देता है लेकिन तुम... तुम्हारा क्या करू मै? "
    एक तरफ रखा उसका फोन बजने लगा तो विकि झट से उठाकर " भाई... डिसूजा का फोन है! कल उसने डील की बात की थी ना? "
    देवांश रुक गया । उसने कहा " उसे बोल दो घंटे में ऑफिस आकर मिले ! " वो सीधे अपने कमरे की तरफ निकल गया । 
    आधे घंटे बाद ही वो सुट पहन कर एकदम रेडी विकि के साथ विला के बाहर था ।

    अंजान सडक के ट्रैफ़िक सिग्नल पर सभी गाड़िया रुकी । अपनी घडी मे देखते हुए देवांश पीछे सीट पर सर टिका लेता है पर अचानक ही उसके दिल की धडकन सौ की स्पीड से चलने लगी । देवांश ने आखे खोलकर दाई ओर देखा तो आर्या एक हाथ में ट्रे पकडे हुए गरीब बच्चों को केक बाट रही थी । सादा सा कुर्ता उसके नीचे जींस और पेरो मे सफेद रंग के जूते । धूल मिट्टी की वजह से उसने सर पर दुपट्टा लेकर आधा मुह कवर किया था । वो बच्चों से बात करते हुए जब भी अपनी आखे उठाती तो गाडी मे बैठा देवांश पागल हो उठता । काच पर हाथ रख उसने लंबी सास भरी और अगले ही पल दरवाजा खोलकर बाहर आया । विकि के साथ ड्राइविंग सीट पर बैठा गार्ड भी हैरान हो गया और दोनो दरवाजा खोलकर बाहर आए । आगे और पीछे चलती गाड़ियों मे बैठे गार्ड्स भी उतर कर आए ।
    रास्ते को पार करते हुए देवांश बदसवाद सा आगे बढ रहा था । उसी वक्त सामने खडी आर्या का दुपट्टा एक बच्चे के हाथ मे आया और अंजाने मे ही उसने वो खिच लिया । आर्या के छोटे छोटे बाल चेहरे पर आने लगे जिससे वो उस बच्चे को देख कर बीचारा सा मुह बना लेती है । बच्चे ने सोर्री कहा और दुपट्टा फोरन आर्या के सिर पर ओढ़ा दिया । इससे अंजान की उसका खूबसूरत चेहरा देख देवांश के कदम बीच रास्ते में ही रुक गए । अबतक सिर्फ वो आखे पागल किए जा रही थी और अब तो ये चेहरा... कैसे भूलेगा वो ये चेहरा? 
    सिग्नल ग्रीन होते ही गाडी वाले हॉर्न बजाने लगे जिसकी वजह से आर्या की नजर उस तरफ गयी । सामने देवांश को देख उसकी आखे डर से फैल गयी । ठीक उसी वक्त देवांश ने हॉर्न बजाने वाले की तरफ देखा था इस वजह से उसे पता ही नही चला की आर्या उसे देख कर भागते हुए निकल गयी ।

    गाडी मे बैठे इंसान ने सामने देवांश को देखा तो फोरन काच खोलकर " माफ करना भैया, पहचाने नही! "
    विकि ने आकर देवांश का हाथ पकड़ लिया और कहा " भाई ऐसे ही सड़क पर चले आए, कुछ हो जाता तो? "
    उसकी तरफ ध्यान ना देते हुए देवांश सड़क पार देखने लगा जहा आर्या खडी थी । " कहा चली गई वो? " देवांश ने कहा तो विकि उस तरफ देखते हुए " कौन भाई? "
    " वही कल रात वाली लड़की, अभी यही खडी थी! " देवांश ने परेशानी से यहाँ वहा देखते हुए कहा ।
    " आपको गलत फहमी हुई होगी! उस लड़की का तो चेहरा भी नही देखा था आपने! " विकि ने कहा तो देवांश गुस्सा करते हुए " मे पागल दिखता हु तुझे! "
    पीछे खडी गाड़ियों के हॉर्न बजने लगे । उनकी रुकी गाड़ियों की वजह से भी ट्रैफ़िक जाम हो गया था । विकि ने कहा " भाई चलो यहाँसे! " देवांश का हाथ पकड़ खीचते हुए वो गाडी की तरफ ले गया । गाड़िया वहा से निकलते ही देवांश " उस हॉटल की तरफ चल जहाँ उसे कल छोड़ा था! "

    " भाई?... " देवांश ने उसे कुछ कहने से पहले ही आखे दिखाई तो विकि ने फोरन गाड़िया घुमाने के लिए कहा ।
    हॉटल से अपना सामान लेकर निकलते हुए आर्या ने मुह पर मास्क लगा लिया । उसने कपडे बदल कर काले रंग का टीशर्ट और और उसी रंग की जींस डाली थी । बाल बांध कर एक कैप पहन ली और खुदसे कहा " उसने मुझे देख लिया! हाउ स्टुपिड आई एम, महेश ने कहा भी था उसके सामने ना जाऊ! " वो जल्दी जल्दी चलते हुए टैक्सी को हाथ देकर रोकती है ।
    उसने कहा " भैया एयरपोर्ट चलो! "
    मोबाइल निकाल कर उसने अर्जंट टिकट देखा तो आसाम तेजपुर का टिकट मिल गया । साथ ही उस जगह से जुडी कुछ यादें उसे याद आने लगी । उसने फोरन बुक कर महेश को मैसेज किया " मै तवांग जा रही हु! माहौल ठंडा होते ही मैसेज करना! "
    सामने से ओके का मैसेज आया ।

    हॉटल मे देवांश अपना गुस्सा काबू किए खडा था । विकि ने रिसेप्शन पर पूछा " कल जो लड़की को छोड़ने आया था उसका नाम, नम्बर और एड्रेस बता जल्दी ।"
    रिसेप्शन पर खडी लड़की ने अपने मेनेजर की तरफ देखा जिसने डरते हुए हा मे सर हिलाया ।
    लड़की ने कहा " जानवि, नम्बर 9877**67**  ! "
    देवांश ने नम्बर फोन मे सेव कर लिया ।

    विकि ने कहा " उनका रुम नम्बर? "
    " वो अभी अभी अपना सामान लेकर गयी है! " लड़की ने कहा " उन्हे कुछ जरूरी काम आ गया था । "
    देवांश ने कहा " कॉल करो उसे और कहो आपका सामान छुट गया है! "
    लड़की के पास बात मानने के सिवा रास्ता नही था । उसने कॉल लगाया तो दो तीन रिंग बाद ही सामने से आर्या " हैलो कौन? "
    देवांश ने स्पीकर का बटन दबा दिया । लड़की ने कहा " हैलो इज दिस मिस जानवि? आई एम कॉलिंग फ्रॉम जेएस हॉटल! "
    " ओह्ह एस! व्हाट हेपेन्ड? " आर्या ने कहा ।
    लड़की ने कहा " मैम आपका सामान छुट गया है! "
    सामने से आर्या " आप प्लीज संभाल कर रखिये ! मे वापस आकर ले लुंगी या फिर किसी फ्रेंड को भेज दूंगी! "
    लड़की ने ओके कह कॉल कट कर दिया और देवांश की तरफ देखने लगी । देवांश को यकीन हुआ की नम्बर गलत नही है तो वो फोरन वहा से निकल गया जिसके पीछे विकि और बाकी गार्ड्स भी निकल गए । उनके जाते ही रिसेप्शन पर खड़े लोगों ने चेन की सास ली ।

    गाडी मे बैठा देवांश नम्बर को " जान " से सेव करता है । उसके होठो पर मुस्कान थी । विकि ने कहा " आगे क्या करना है भाई? "
    " नम्बर ट्रैक करो! जान से दूरी बरदाश नही हो रही! "



    To be continued...

    स्टिकर और ढेर सारी समीक्षा दीजिये ।

  • 3. Crazy For Her - Chapter 3

    Words: 1230

    Estimated Reading Time: 8 min

    तेजपुर,
    एयरपोर्ट से बाहर कदम रखते ही आर्या को अपनी केब दिखी जिसमे बैठकर वो निकल पड़ती है मेट्रो स्टेशन । मेट्रो स्टेशन पोहोचते ही वो तवांग के लिए टिकट ले लेती है । काफी घंटो का सफर तय कर वो अपनी मंजिल तक पोहोच जाती है । स्टेशन से बाहर कदम रखते ही ठंडी हवा का झोका एकदम से आर्या के शरीर मे कपकपि पैदा कर गया । भले ही उसने मोटा सा ओवर कोट और सर पर कैप पहनी थी, लेकिन बाहर के लोगों के लिए वहा की ठंड सहना थोड़ा मुश्किल ही था । उसके गोरे गाल और नाक दोनो लाल हो चुके थे । गले में मफलर और हाथों मे ग्लब्स होने के बावजूद वो पछता रही थी । उसने एक तरफ देखा तो उसकी केब आ चुकी थी । बेग को घसीटते हुए वो टैक्सी तक ले आयी तो ड्राईवर ने उसे फोरन डिकी मे डालकर गाडी मे बैठ गया । आर्या बाहर के नजारे देखना छोड चुपचाप आखे बंद करके बैठी हुई थी । कितनी भी कोशिश करले , वो बातें और कुछ आवाजे उसके मन से जाने का नाम ही नही ले रही थी । आखिर कार उसने आखे खोलदी ।
    कुछ ही देर में वो छोटे पर बेहद खूबसूरत कॉटेज के सामने थी । अपना सामान लेकर वो अंदर गयी । अंदर जाते ही ठंड का एहसास होना थोड़ा कम हुआ । उसने फिरसे वही फेक आय डी दिखाया जो जानवि के नाम से बना था । ये सब शुरू होने से पहले ही महेश ने उसके लिए ये आय डी बना दिया था । कॉटेज को एक औरत चला रही थी । जिसका नाम सोनम था । उसने मुस्कुराते हुए आर्या को एक कमरे की चाबिया दी तो वो फोरन कमरे की तरफ बढ गयी । उसी के पीछे एक आदमी उसका सामान पोहोचाने आ रहा था ।

    वो फ्रेश हुई और फोरन ब्लैंकेट मे घुस गयी । उसने एक चीड़ के साथ कहा " काश की यहाँ गर्मी के मौसम में आती लेकिन नही चूल मची थी ना तुझे आर्या! पता नही सोमु को भी किस बात का नशा था जो इतनी ठंड में यहा आना चाहती थी! "
    उसने कहा और अचानक उदास हो गयी । " तु आना चाहती थी और मे तुझे कभी ना ला सकी! " उसने कहा और फोरन आखे बंद करली । उसे अपने सर मे तेज दर्द मेहसूस हो रहा था ।

    बोहोत सारी गाड़ियों का काफिला उसी कॉटेज से थोड़ी दूरी पर बने दूसरे कोटेज पर जा रुका । गर्म कपड़े पहने देवांश और विकि बाहर आ गए । विकि बुरी तरह ठंड से काप रहा था । अंदर चलते हुए उसने कहा " ये जरूरी था क्या भाई? वो वापस तो आने ही वाली थी ना? लेकिन नही आपको तो अपनी और साथ मे मेरी भी कुल्फी जमानी थी । "
    " चुप कर! " देवांश ने कहा । उसके आदमी फोरन रूम की चाबिया लेकर आए और उन्हे कमरे की तरफ लेकर बढ गए । ये रिज़ॉर्ट आर्या के रिजॉर्ट से काफी बड़ा और लगजरियस था ।

    अगले दिन, दोपहर हो चुकी थी और देवांश आराम से एक कुर्सी पर बैठा काम निपटा रहा था । उसके सामने विकि भी था और शायद दोनो को ही किसी खबर का इंतेजार था । विकि ने कहा " क्या फायदा हुआ यहा आने का जबकि वो सिर्फ सो ही रही है! "

    " तेरी तरह आराम से गाडी मे बैठ कर नही आयी ना? इसलिए! " देवांश ने कहा तो विकि मुह बना लेता है । तभी एक आदमी का मैसेज आया " वो निकल चुकी है! "
    देवांश उठा और कोट पहनने लगा । विकि का मन तो नही था फिर भी वो उठ गया । दोनो ही कॉटेज से बाहर निकल कर चल पड़े ।
    वहा के सबसे बडे बौद्ध मंदिर के सामने आर्या खडी थी । अंदर जाकर आने के बाद वो वही एक पत्थर की दीवार पर धुप मे बैठ गयी । वो धुप उसे काफी आराम दे रही थी । इससे अंजान की किसी की नजरे उसका एक पल के लिए भी पीछा नही छोड रही । आर्या उठी और जहा पर बोहोत सारे लोग थे वहा चली गई और उसी भीड़ में कही खो गयी । देवांश और विकि उसे हर जगह देखने लगे पर वो कही भी नही थी ।
    मंदिर के बाहर आर्या भागते हुए वहा से निकल रही थी । उसने कहा " क्या मुसीबत मोल ले ली है मैने! लीच की तरफ चिपकने आ जाता है! कुछ भी हो जाए पर इसके हाथ नही आना है आर्या! "
    उसने एक टैक्सी रुकाई और बैठकर लंबी सास ली ।

    लखनऊ,
    हॉस्पिटल मे एक लड़की के साथ महेश , डॉक्टर के सामने बैठा हुआ था । डॉक्टर ने कहा " आप उन्हे एक पल के लिए भी अकेला नही छोड सकते! उनकी बीमारी कम होने की जगह बढ़ती जा रही है और स्ट्रेस लेवल यही रहा तो एक दिन वो खुदको ही खत्म कर लेंगी । "
    लड़की ने फोरन महेश का हाथ कसकर पकड लिया ।
    महेश ने कहा " डॉक्टर इसका कोई तो इलाज होगा? "
    डॉक्टर ने अपना चश्मा ठीक किया और कहा " फिल्हाल तो यही इलाज है कि वो अपने आप को शांत रखे और वक्त पर दवाई लेती रहे! "
    कुछ देर बाद महेश उस लड़की का हाथ पकड़े हॉस्पिटल से बाहर खडा था । महेश ने कहा " डोंट वरी ऊर्जा! कुछ नही होगा हमारी आर्या को! "
    " काश की वो सब हुआ ही ना होता! " ऊर्जा ने सर पकड़ते हुए कहा तभी महेश का फोन बजने लगा । उसने देखा आर्या का था तो दोनो गाडी मे बैठे और महेश ने फोन स्पीकर पर डाल दिया ।
    " बोल आर्या क्या हुआ? " महेश ने कहा ।
    सामने से आर्या थोड़ी घबराई आवाज में " देवांश... देवांश ठाकुर तवांग मे है! "
    " व्हाट? " महेश और ऊर्जा दोनो चिल्लाए! " क्या उसने तुम्हे देख लिया? "

    आर्या परेशानी से " वो मेरे पीछे ही यहा तक आया है! उसने मुझे लखनऊ मे ही देख लिया था । पता नही वो क्यु मेरा पीछा कर रहा है? कही उसे कुछ पता तो नही चला होगा ना? "
    महेश ने कहा " पहले तो तु शांत हो जा! और दूसरी बात अबतक मैने सबूत किसी को भी नही दिए है! यहाँ बात कुछ और ही है! " ऊर्जा और महेश दोनो एक दूसरे को देखने लगे । ऊर्जा ने कहा " अगर वो तेरे लिए आया होगा तो उसे जाल मे फसाने का बोहोत अच्छा मौका है! "

    " मतलब? " आर्या नासमझी से पूछती है ।
    " फिल्हाल यु समझलो वो लखनऊ पुलिस की पोहोच से बाहर है! वारंट निकालते ही , कैसे भी उस तक खबर पोहोच ही जायेगी! लेकिन अगर तु उसे डिस्ट्राक्ट कर रोक पायी तो हमारे लिए उसे पकड़ना आसान हो जायेगा! " महेश ने कहा तो आर्या सोच मे पड गयी । आर्या ने एक पल बाद ही कहा " मै तैयार हु! तुम जल्द से जल्द पोहोचो! "
    फोन बंद करते ही ऊर्जा ने कहा " क्या ये सही होगा? "
    " सही हो या गलत , इसी बहाने आर्या का माइंड दूसरी ओर डायवर्ट हो जायेगा और वो ज्यादा सोचना बंद कर देगी! " महेश ने कहा तो ऊर्जा सहमति मे सर हिला देती है ।
    महेश अपने मन में " देवांश ठाकुर.. यु आर फिनिश! "



    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 4. Crazy For Her - Chapter 4

    Words: 1432

    Estimated Reading Time: 9 min

    तवांग, अरुणाचल
    दोपहर का वक्त,

    एक टैक्सी मे बैठी आर्या ने महेश से बातें कर फोन काट दिया । और टैक्सी वाले से कहा " भैया जल्दी चलो! "
    तभी टैक्सी वाले ने झटके से टैक्सी रोक दी । आर्या ने चीडकर कुछ कहना चाहा क्युकी उसका सर टकराते हुए बचा था । टैक्सी वाले ने फोरन सामने इशारा कर दिया तो आर्या भी वहा देखने लगी ।
    बोहोत सी गाडिया रास्ता रोके खडी हुई थी जिनके सामने होठो पर मुस्कान लिए देवांश एक गाडी से टेक लगाकर खडा था । आर्या ने कहा " पीछे ले लो! "
    " नही ले सकते! " टैक्सी वाले ने कहा तो आर्या ने पीछे की तरफ देखा । वहा और आसपास भी गाडिया रुकी हुई थी । आर्या के माथे पर पसीना आने लगा । उसने मन में कहा " क्या ये आदमी पागल है या मुझे पागल समझता है? "
    तभी विकि ने आकर काच पर हाथ मारा । ड्राईवर ने काच खोल दिया । विकि ने कहा " आइये मैडम... भाई बात करना चाहते है! "
    आर्या ने उसे देखा और ना मे गर्दन हिला दी ।
    विकि ने मुस्कुराते हुए कहा " जरा आसपास देखिये! आपको लगता है आप जा पाएंगी? चलिए भाई को इंतेजार कराने वाले लोग पसंद नही है! "
    आर्या अब भी उतरने का नाम नही लेती तो टैक्सी वाला कहता है " मैडम उतर जाइये ना! हमें दूसरी सवारी भी ढूंढनी पड़ेगी! "

    " म.. मै डबल पैसे दूंगी आपको! " आर्या ने कहा तो विकि ठंडी सास छोड़कर टैक्सी वाले के सर पर गन लगा देता है!
    " अरे नही चाहिए आपके डबल पैसे! बस उतर जाओ आप... " टैक्सी वाले ने डरते हुए कहा तो आर्या अपने बैग को कसते हुए दरवाजा खोल उतर जाती है । विकि ने पाचसौ का नोट निकाल कर टैक्सी वाले को थमा दिया । गार्ड्स के गाडी हटाते ही वो पूरी स्पीड से वहा से निकल गया । आर्या अपने बैग को पकडे अब भी उसी जगह खडी थी । उसने देखा रास्ता भी सुनसान ही था और इतने लोगों के साथ लड़ना मतलब सरासर बेवकूफी होगी!

    सामने हाथ बांधे खडा देवांश जुनूनी निगाहों से आर्या को देखे जा रहा था । विकि ने कहा " चलिए भी! " हाथसे इशारा करते हुए उसने कहा तब भी आर्या अपनी जगह से ना हिली ।
    देवांश ने हल्की सी गर्दन टेडी कर कहा " लड़की ने तुम्हे पहली मुलाकात मे ही घुटनों पर ला दिया था तो अब कैसे उम्मीद करते हो वो झुकेगी! " उसने गाडी का दरवाजा खोला और एक गर्म जैकेट निकाल कर आर्या की तरफ बढ गया । अपनी गर्दन झुकाए आर्या जैसे जैसे देवांश करीब आ रहा था बैग को अपने सीने से लगाए जा रही थी । उसकी धड़कने तेज थी और वो हल्का सा काप भी रही थी । देवांश उसके बिलकुल सामने खडा था और आर्या की नजर उसके जूतों पर अटकी हुई थी ।

    " लगता है मेरे जूतों से प्यार हो गया है तुम्हे? " देवांश ने कहा तो आर्या नासमझी से उपर देखती है । दोनो की आखे टकराई तो देवांश ने आगे कहा " यही.... यही देखा करो! "
    वो आर्या के बोहोत करीब आ चुका था । उसने हाथ मे पकडा जैकेट आर्या को ओढाया और गले से मफलर निकाल कर उसके गले में लपेट दिया । आर्या लगातार उसकी आखो मे देख रही थी ।
    देवांश ने अचानक उसके हाथ पकड़ लिए तो वो सहम गयी । वो हाथ पीछे खीचने लगी तो देवांश ने कहा " हाथ बोहोत ठंडे है तुम्हारे! यही खडे रहे तो बीमार हो जाओगी! कही बैठकर बात करे? "
    आर्या ने फोरन ना मे सर हिला दिया । देवांश ने सक्त आवाज में कहा " फिल्हाल तो सिर्फ बात करना चाहता हूँ, उसके लिए मुझे जिद पर उतरने के लिए मजबूर मत करो! "
    आर्या हाथ पीछे खीचने लगी तो देवांश ने उन्हे मजबूती से पकड कर कहा " तो तुम चाहती हो! "
    " म... म.. मुझे वापस जाना... है! " आर्या ने नजरे इधर उधर करते हुए कहा तो देवांश उसके हाथ छोड देता है ।
    " कैसे जाओगी? " उसने कहा तो आर्या को ध्यान आया इस वक्त वो काफी सुनसान इलाके मे खडी है । टैक्सी तो दूर की बात यहा इंसान मिलना भी मुश्किल है! वो परेशान हो गयी । उसने विकि की तरफ देखा तो विकि ने मुह बनाकर कहा " मै क्या ड्राईवर हु? भाई ले तो जा रहे है ना, आपको वापस भी छोड देंगे! "
    आर्या फोरन पीछे मुडी और पेदल ही मंदिर के तरफ जाने वाले रास्ते पर चलने लगी । आधे एक घंटे में वो पोहोच ही जायेगी ये सोचकर वो निकल पडी । वही देवांश और विकि दोनो ही हैरानी से उसे देखते रह गए । विकि ने गार्ड्स को इशारा किया तो वो फोरन बीच मे आकर आर्या का रास्ता ब्लॉक कर देते है ।
    आर्या गुस्से से पीछे मुडी तो विकि ने चिल्लाकर कहा " हा मै ड्राईवर ही हु! आ जाओ... छोड दूंगा मेरी मा! " 
    देवांश ने गाडी की तरफ इशारा किया तो आर्या वापस आकर उसमे बैठ जाती है । विकि ने गुस्से से देवांश को देखा तो उसने कहा " संभाल कर ले जाना! "
    विकि मुह बनाते हुए ड्राईविंग सीट पर बैठा और गाडी आगे बढ़ा दी । देवांश जैकेट की जेब मे हाथ डालते हुए सामने देखता रहा जबतक गाडी आखो से ओझल नही हुई! उसने लंबी सास भर ली ।
    " धड़कन से लेकर सासो तक कब्जा कर लिया! जान लेकर मनोगी क्या? " हल्के से हसकर उसने कहा " देवांश ठाकुर को मोहब्बत हो गयी है तुमसे! जुनून भरी मोहब्बत... जिसकी तलब नशे की तरह पल पल बढ रही है! अगर तुम ना मिली तो बर्बाद हो जाऊंगा! इसलिए तुम्हे आना होगा... मेरे पास, मेरी जिंदगी में! "
    एक आदमी के दरवाजा खोलते ही वो अंदर बैठा और गाडिया वहा से निकल पडी ।

    एक अंजान सडक पर चलती गाडी मे बैठे विकि ने मिरर मे देख कहा " दिक्कत क्या है भाई से? खा नही जायेंगे वो तुम्हे! "
    आर्या ने हैरानी से अपना सर उठाकर उसे देखा । लेकिन कहा कुछ भी नही ।
    विकि झल्लाते हुए " तुम्हारी तो बातें भी किश्तों में बिकती है! "
    " मुझे... उनसे डर लगता है! " आर्या ने धीरे से कहा तो विकि बिलकुल भी हैरान नही हुआ । पुरा लखनऊ उसके देव भाई से डरता है तो उसमे नई बात नही थी । लेकिन देवांश चाहता था कि ये लड़की उससे ना डरे । विकि ने अपने कान में लगे ब्लू टूथ पर हल्के से हाथ लगाया और कहा " अरे डर ... लेकिन किस लिए! भाई की इतनी अच्छी शकल देख कर तुम्हे डर क्यु लगता है ? "
    आर्या ने कहा " वो... उन्होंने उन लोगों को.. मार...! "

    विकि ने उसकी बात बीचमे काटकर कहा " हा तो तुम्हारी जान बचाने के लिए किया भाई ने! तुम्हे डर की जगह इज्जत महसूस होनी चाहिए ना! "
    आर्या ने उसे घूरते हुए मन में कहा " क्या करू की इसका भोपू बंद हो जाए! गले की हड्डी ही तोड देती हूँ साले की! जिंदगी भर मुर्गे की तरह चिल्लाता रहेगा! "

    " जवाब नही दिया तुमने? " विकि ने कहा तो आर्या खयालो से बाहर आकर " क... कुछ पूछा ? "
    " हा... तुम अकेली क्यु आयी हु? " विकि ने कहा ।

    आर्या सर्द आवाज में " मुझे ऐसा क्यु लग रहा है , जैसे आप मेरा पीछा कर रहे हो? दो दिन मे ही दुबारा मुलाकात होना कोइन्सिडेंट तो नही हो सकता! "
    उसकी बात सुनकर विकि सकपका गया । तभी उसके कान में देवांश की आवाज आयी " बोल मीटिंग के लिए आए है! "

    " हम मीटिंग के लिए आए है! " विकि ने कहा तो आर्या हा मे गर्दन हिला देती है । 
    अचानक उसने कहा " लेकिन मैने आपको चेहरा नही दिखाया था फिर मुझे पहचाना कैसे? "
    देवांश ने उधर सर पिट लिया वही विकि को अपना सर स्टेरिंग पर मारने का कर रहा था ।

    वो जबरदस्ती हसकर कहता है " वो क्या ना, भाई लोगों को याद रखने मे काफी अच्छे है! उन्होंने आपको आखे देख कर ही पहचान लिया । "
    उसके जवाब से आर्या बिलकुल भी सेटिस्फाई नही थी । वो लगातार विकि को घुरति रही जबकि विकि अब बिना किसी सवाल के चुपचाप गाडी चला रहा था । उसने मन में कहा " अच्छा खासा चुप थी खामखा इसका मुह खुलवा कर पेर पर कुल्हाडी मार ली । मिरर मे देख जब भी उसकी नजर आर्या से मिलती वो दात दिखा देता ।



    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 5. Crazy For Her - Chapter 5

    Words: 1495

    Estimated Reading Time: 9 min

    तवांग,
    शाम का वक्त ,

    कॉटेज के एक कमरे मे आर्या सर पकडे हुए चक्कर लगाए जा रही थी । उसे अपने सर मे काफी तेज दर्द मेहसूस हो रहा था । उसने कंट्रोल करने की काफी कोशिश की पर अंत में हारकर बैग से एक शीशी निकाल ली । उसके हाथ काप रहे थे । उस काच की शीशी से कुछ टेबलेट निकाल कर उसने खाई और वैसे ही बिस्तर पर लेट गयी । उसकी सासे तेज चल रही थी । यकीनन देवांश से हुई मुलाकात का उसपर काफी गहरा असर हुआ था । कुछ ही देर मे उसकी आख लगकर वो गेहरि नींद में चली गई ।
    लेकिन नींद में अब वो बड़बड़ाने लगी थी । आवाज साफ नही थी पर उसने कहा " स.. सोमु... मुझ... मुझे छोड़कर.. मत जाओ! पापा... मा....! मै... उन्हे.. उन्हे मार दूंगी! "

    वही दूसरी तरफ उस लाग्जिरियास कॉटेज मे देवांश आराम से सोफे पर बैठा हुआ था । उसकी नजर सामने लगी टेबल पर रखे फोन पर थी । फोन की लाइट बंद होते ही उसने दुबारा बटन दबाकर उसे जला दिया तो आर्या की तस्वीर का वोलपेपर दिखने लगा । वो शांत आखो से उस चेहरे की मासुमियत मे खोया हुआ था जो चेहरे पर धुप पड़ने की वजह से चमक रहा था ।
    ठीक उसी वक्त एकदम से रूम का दरवाजा खुला और विकि दनदनाते हुए अंदर आया ।
    देवांश ने अपनी आखे मिचली उतने मे विकि चिल्लाया " क्या.. क्या चाहते हो आप भाई? क्लियर करो मुझे! "
    वो ठंड से काप रहा था । देवांश ने उसे देख आराम से कहा " क्या लगता है तुझे? "
    विकि चीड़ से " यही की आप पागल हो चुके हो और हमे इसी वक्त लखनऊ के लिए निकलना चाहिए! "

    " उसे लिए बिना मै नही जाने वाला! " देवांश ने हाथ के बाजू मोड़ते हुए कहा ।

    विकि ने गुस्से से अपने ही बाल खिच लिए । उसने कहा " आपने कह दिया और वो एक पेर पर आपके साथ जाने के लिए तैयार हो जायेगी है ना? अरे देखना चाहिए था आपको कैसे भूके शेरनी की तरह मुझे घूर रही थी जब मैने वो झुट बोला! "

    देवांश हस पड़ा । विकि ने आखे छोटी करली तो वो फिरसे सीधा होकर बैठ गया ।
    देवांश ने खोए हुए आवाज में कहा " शेरनी हो या बिल्ली, लेकिन तेरी भाबी तो वही बनेगी! "

    " भाई दुबारा सोच लो! हम उसके बारे में कुछ भी नही जानते! " विकि ने कहा तो देवांश गहरी आवाज में " मुझे उसके बारे में नही उसे जानना है! मुझे सिर्फ इतना पता है कि उसका पास्ट नही पर उसका प्रेजेंट और फ्यूचर मेरा और सिर्फ मेरे साथ है ! "

    विकि उसकी बात सुनकर चुप हो गया ।
    कुछ देर बाद उसने धीमे से कहा " भाई हम यहा ज्यादा रुकने का रिस्क नही ले सकते! हमारा एक दुश्मन नही है । "
    देवांश ने पीछे सर टिकाया और कहा " किसे पता होगा , हम कहा है? "
    विकि ने सर हिला दिया तभी उसके फोन पर एक कॉल आया । उसने हल्के से देवांश के सामने सर झुकाया और कमरे से बाहर आकर फोन आंसर कर लिया ।
    सामने से बोहोत प्यारी और मासूमियत भरी आवाज आयी " हैलो... विकि! कहा हो तुम? "

    " शोना... तुम खाना नही खा रही हो ना? " विकि ने उसकी बात काटकर सक्त आवाज में कहा तो सामने से खिलखिलाहट सुनाई दी । विकि ने सर हिला दिया ।
    शोना ने कहा " जबतक तुम नही आ जाते शोना खाना नही खायेगी! "

    विकि ने बालो मे हाथ घुमा लिया । उसने अचानक बोहोत ही धीमी और सॉफ्ट आवाज में कहा " अगर मेरी शोना खाना खा लेगी तो विकि यहाँसे उसके लिए बोहोत सारे गिफ्ट्स और चॉकलेट लेकर आयेगा! "

    " तुम सच कह रहे हो? " सामने से चेहकते हुए शोना ने कहा तो विकि मुस्कुराते हुए " बिलकुल सच! अब आंटी को परेशान मत करना! अच्छे बच्चे की तरह रहो जबतक मै वापस नही आ जाता । विकि बोहोत जरूरी काम से आया है ना! "

    शोना ने कहा " ओके! मै सारी बातें मानूँगी! बस मेरी चॉकलेट और गिफ्ट्स मत भूलना! "
    उसने फोन काट दिया तो विकि की मुस्कान गहरी हो गयी । विकि फोन को हल्के से सर पर मारा और अपने कमरे की ओर चल दिया ।

    रात के ग्यारह बज रहे थे पर आर्या खाने के लिए कमरे से बाहर नही आयी । वहा की ओनर ने खाना उसके कमरे मे ही पोहोचाने के लिए कहा तो एक लड़का उसे लेकर आर्या के कमरे के बाहर खडा हो गया ।
    उसने तीन से चार बार दरवाजा खटखटाया पर आर्या ने कोई रिस्पोंस नही दिया । उसने आवाज भी लगाई पर कोई फायदा नही । वो लडका भागते हुए ओनर के पास जाकर सारी बात बता देता है ।
    वही रिसेप्शन पर खड़े एक लड़के ने फोरन फोन निकाल कर एक नम्बर पर मैसेज कर दिया । ओनर कमरे की दूसरी चाबी लेकर बढ गयी । उन्होंने दरवाजा खोला और अंदर देखा तो हैरान हो गयी ।

    ठंड मे सिकुडकर आर्या नीचे फर्श पर गिरी हुई थी । ओनर भागते हुए उसके पास पोहोची और उसे सीधा किया तो आर्या के माथे पर हल्की सी चोट लगी थी । जहा लाल निशान पड गया था ।

    कुछ ही देर मे कोटेज के बाहर बोहोत सी गाड़िया आकर रुकी । देवांश और विकि जल्दी जल्दी में उतर कर अंदर भागे जिनके पीछे उनके गार्ड्स भी थे । एकदम से इतने लोगों को अंदर आता देख सब हैरान हो गए ।
    एक कमरे के बाहर कुछ लोगों को खडा देख देवांश उसी तरफ बढ गया । गार्ड्स और विकि ने उन लोगों को फोरन वहा से भगा दिया । देवांश अंदर पोहोचा तो देखा आर्या बेड पर लेटी हुई थी । उसके पास एक लेडी डॉक्टर उसे चेक कर रही थी । कॉटेज की ओनर एक तरफ हाथ बांधे खडी थी । देवांश को अंदर आया देख उन्होंने कहा " जी कौन है आप लोग? और ऐसे अंदर कैसे आ गए? "
    देवांश कुछ कहता उससे पहले विकि ने कहा " भाबी है मेरी! यानी की भाई की गर्लफ्रेंड! "

    " अच्छा तो आप ही है वो , जिसकी वजह से इन्होंने दवाई का ओवर डोस ले लिया! कही आपने इनसे झगडा तो नही किया था! " डॉक्टर ने कहा तो देवांश और विकि दोनो ही हैरान हो गए । विकि ने कहा " भाई ऐसे नही है! भाबी ही जल्दी नाराज हो जाती है! "
    उसने देवांश का हाथ कसकर पकड रखा था ताकि वो कुछ भी ना कहे!
    डॉक्टर और ओनर ने अपनी गर्दन हिला दी ।
    डॉक्टर ने एक चिट्ठी बनाकर कहा " ये आजकल के बच्चे! प्यार भी जल्दी हो जाता है और झगड़े भी! डरने की बात नही है, बस बेहोश हुई है । मेने इंजेक्शन लगा दिया है सुबह तक होश आ जायेगा । ये कुछ दवाईया भी है और आगे से ध्यान रखे, अगर आपकी गर्लफ्रेंड इतनी ही सेंसिटिव है तो उनका खयाल भी रखिये । "

    विकि ने डॉक्टर के हाथ से चिट्ठी ले ली । डॉक्टर के साथ ओनर ने जाते हुए कहा " अपनी पहचान के लिए आई डी जमा करदो! "
    विकि ने कहा " हा चलिए.. हम भी यही रूम बुक करने वाले है । "
    ओनर ने गर्दन हिला दी । सबके जाने के बाद कमरे का दरवाजा एकदम से बंद हो गया तब जाकर देवांश को होश आया वो कबसे दूर खडा आर्या को ही देखे जा रहा था ।
    धीमे धीमे कदम बढ़ाते हुए वो आर्या के पास जाकर बैठ गया । उसने बोहोत आराम से आर्या का हाथ पकड कर अपने हाथ में ले लिया जैसे वो कोई नाजुक सी गुडिया हो । दुसरा हाथ उसने आर्या के सर की तरफ बढ़ा दिया । उसकी चोट पर हल्के से उंगली लगाकर उसने फोरन पीछे खिच ली ।
    उसके चेहरे पर दर्द साफ नजर आ रहा था । चिंता भरी आवाज में उसने कहा " जान... क्या तुम मुझसे इतना डर गयी... की... ? .... अच्छा ठीक है मै.. आगे से तुम्हे ज्यादा फोर्स नही करूँगा! "
    देवांश उसका हाथ सहलाने लग गया ।
    उसने कहा " जबसे होश संभाला है खुदको अकेला और बेसहारा पाया है! खाने के लिए भी रोज जान दाव पर लगानी होती थी वरना देवांश कपूर को कोई शौक नही है लोगों को मारते फिरने का । आज मेरे पास सबकुछ है बस प्यार की कमी है! अगर तुम मेरी जिंदगी में आ जाओगी तो वो भी पुरी हो जायेगी! प्लीज इस अनाथ को अपना कर आबाद करदो! मेरा हाथ थामकर मेरे लिए भी परिवार का प्यार बन जाओ । वादा करता हूँ दुनिया झुका दूंगा तुम्हारे सामने और अपना सर भी । तुम्हारी इज्जत और आत्म सम्मान अपनी जान से भी आगे रखूँगा । "
    वो सो रही थी पर ये बातें उसके कानों मे जरूर पोहोच रही थी । नींद में भी उस गंभीर चेहरे पर मुस्कान खिल गयी ।

    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 6. Crazy For Her - Chapter 6

    Words: 1486

    Estimated Reading Time: 9 min

    तवांग, अरुणाचल
    सुबह का वक्त,

    हवा की वजह से अचानक खिड़की खुली और ठंडी हवा का तेज झोका उस कॉटेज के कमरे मे आया । आर्या की नींद टूट गयी । उसके सर मे अब भी दर्द हो रहा था । उसने हाथ उठाना चाहा तभी उसे लगा किसी ने मजबूती से उसका हाथ थाम रखा है । आर्या चौक उठी और एकदम से गर्दन घुमाकर देखा तो देवांश बेड पर हाथ टिकाए सो रहा था । उसने पतली सी शर्ट पहन रखी थी जिस वजह से वो काप रहा था । आर्या ने दूसरे हाथसे आखे मलकर ध्यान से देखा तो फोरन देवांश को पहचान गयी । देवांश ने उसका पकड़ा हुआ हाथ वो खीचने ही वाली थी तभी उसके फोन पर मैसेज का टोन सुनाई पडा । आर्या ने जल्दी से फोन उठाकर देखा तो महेश के मैसेज थे ।
    " अपना काम जल्दी से शुरू करदो! कुछ भी करके तुम्हे उसका भरोसा जितना है । मै जल्द ही कमिश्नर सर से बात करने की कोशिश करूँगा! और अगर उन्होंने सपोर्ट नही किया तो उर्जा दूसरी कॉपी लेकर मीडिया के पास चली जायेगी! "
    आर्या ने झट से " ओके " का मैसेज भेजकर हिस्ट्री डिलीट करदी । फोन साइड पटक कर उसने दूसरा हाथ देवांश की तरफ बढ़ाया और बिना किसी भाव के उसके माथे पर बिखरे बाल हटा दिये । देवांश जो अबतक उनकी वजह कसमसा रहा था वो फिरसे शांत होकर सो गया । आर्या ने एकदम से हाथ पीछे कर लिया और खिड़की की तरफ देखने लगी । जिससे आती ठंडी हवा की वजह से उसके साथ साथ देवांश भी काप रहा था ।
    कुछ ही पल गुजरे होंगे और आर्या को एहसास हुआ जैसे देवांश जागने वाला हो ।
    आर्या झट से आखे बंद कर लेती है । देवांश ने सर उठाया तो सबसे पहले आर्या का चेहरा दिखा ।
    उसने उनींदी आवाज में कहा " गुड मॉर्निंग जान! आजकी सुबह बोहोत खूबसूरत है क्युकी सबसे पगले तुम्हारा चेहरा देखने को मिला! "
    वो उठकर खडा हुआ और अपनी पीठ सीधी कर आर्या के उपर झुक गया । आर्या ने मुट्ठी में ब्लैंकेट को भीच लिया । देवांश ने मुस्कुराते हुए आर्या के माथे पर होठ टिका कर कहा " उठ जाओ! तुम काफी देर से भुकी हो! "
    आर्या ने धीरे से अपनी आखे खोली तो देवांश का चेहरा उसके बिलकुल सामने था । आर्या चौक गयी । उसने दोनो हाथ सामने करते हुए एकदम से देवांश को दूर कर दिया ।
    देवांश को एहसास हुआ की उसकी हरकत की वजह से आर्या डर गयी है । उसने फोरन कहा " तुम.. कल रात बेहोश हो गयी थी । फिर डॉक्टर को भी बुलाना पडा ।"
    आर्या झट से उठकर बैठ गयी और ब्लैंकेट से खुदको कवर करते हुए कहा " लेकिन तुम्हे किसने बुलाया? "

    देवांश सकपका गया । उसने जवाब के लिए दिमाग पर जोर डालना शुरू कर दिया पर इस बीच आर्या की नजरे उसपर ही बनी हुई थी ।
    गहरी सास भरते हुए देवांश ने कहा " ओके फाइन! मैने अपने सोर्सेस से पता लगाया है! "
    आर्या बिलकुल भी हैरान नही थी फिर भी उसने ऐसे दिखाया जैसे वो हैरान है ।
    देवांश ने कहा " मैने तुम्हारे पीछे आदमी लगाए और तुम्हारे पीछे ही यहाँ तक आया हु! मीटिंग बस बहाना है पर.... पर... मै तुम्हे खोना नही चाहता था! "
    देवांश की इस बात पर आर्या जरूर हैरान हुई थी ।

    उसने हाथसे भगाने वाला इशारा करते हुए कहा " जाओ... मेरे कमरे से निकल जाओ! और ... और मुझसे पूछे बिना अंदर मत आना! तुम्हारे... तुम्हारे इरादे मुझे ठीक नही लग रहे । "

    देवांश ने हसते हुए कहा " तुम क्या मुझे चूहे की तरह भगा रही हो! सॉर्री पर तुम्हे कुछ खिलाए बिना मै यहाँसे नही जा सकता और जाना भी कहा है हमने यही पर रूम बुक कर लिया है तुम्हारे पास वाला! "

    आर्या चौक उठी । उसने कहा " क्यु कर रहे हो ये सब! देखो अगर तुम्हे लगता है मैने तुम्हे खून करते हुए देख लिया और किसी को बता दूंगी तो तुम मेरी साइड से सेफ हो! क्युकी तुमने उस दिन मुझे उन लोगों से बचाया था । "

    " डम्बो! " देवांश ने कहा और उसके पास जाने लगा तो आर्या एकदम से पीछे हटने लगी । गहरी सास भरते हुए देवांश वही रुक गया और कहा " और कितना साफ साफ बताऊ तुम्हे! सच्चा प्यार हुआ है तुमसे ! ना मेरे प्यार में घोट है ना इरादो मे! जो होता हु सबके सामने होता हु, चाहो तो किसी से भी पूछलो! पूरा लखनऊ जानता है! "

    आर्या चुप हो गयी । तभी किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी । देवांश ने जाकर दरवाजा खोला तो विकि नाश्ता लेकर अंदर आ गया ।
    उसने आर्या को जगा हुआ देख कहा " हमारी नींद उड़ाकर तुम्हारी नींद पूरी हुई? "
    आर्या की आखे छोटी हो गयी तो विकि ने कुछ ज्यादा ही मुस्कुराते हुए कहा " मेरा मतलब... हा.. कोनसी दवाई खा ली की डॉक्टर को ही बुलाना पडा! "
    " इट्स नन ऑफ युर बिजनेस! " आर्या ने मुह फेरकर कहा तो विकि उसके सामने आते हुए " ऐसे कैसे हमारा बिजनेस नही! ये देव भाई... पागलो की तरह खीचते हुए लाये है मुझे कल रात! वो भी इतनी सर्दी में । उपर से इस कॉटेज का हीटर सिस्टम .....एकदम बकवास! पूरी रात बेड पर वायब्रेट होता रहा ! "
    आर्या ने उसे देख कहा " तो अब ये भी मेरी गलती है! मैने तुम्हे इंवाईट किया... की आओ भई यहा मुफ्त का भंडारा लगा है, सबलोग महाप्रसाद का आनंद ले! मै अपनी तरफ से इतना ही महंगा कॉटेज अफोर्ड कर सकती हु! तुम लोग जाओ किसी फाइव स्टार होटल मे मैने रोक कर नही रखा! "
    विकि ने जैसे ही कुछ कहना चाहा देवांश ने उसके कंधे पर हाथ रख रोक दिया ।
    विकि ने मुह बनाते हुए कहा " उठो अब फ्रेश हो जाओ! हम तीनों का नाश्ता मै यही ले आया! "
    आर्या उसे घूरते हुए फ्रेश होने चली गई ।

    कुछ देर बाद तीनों कमरे मे लगी छोटी सी टेबल के इर्द गिर्द जमीन पर बीचे गद्दों पर बैठे हुए थे । विकि और आर्या की आखो ही आखो मे लडाई चल रही थी और देवांश चुपचाप खाना खाते हुए उन्हे देख रहा था ।
    विकि ने कहा " तुम जॉब ढूंढने आयी थी ना फिर अचानक यहा क्यु चली आयी? "
    " बताना जरूरी है? " आर्या ने आराम से कहा तो विकि हा मे गर्दन हिला देता है ।
    आर्या ने उसे घूरते हुए कहा " जबकि किसी ने मेरे सामने कुछ लोगों को शूट कर दिया तो एक नॉर्मल इंसान... मतलब मुझ जेसी अकेली लड़की से क्या एकस्पेक्ट करते हो तुम? "

    विकि ने परेशानी भरे लहजे मे कहा " यही की तुम किसी गर्म जगह या फिर बीच वगेरा पर भी जा सकती थी! ठंड में ठंडी जगह आने का क्या सीन है यार? "

    उसकी मासुमियत भरी बात पर ना चाहते हुए भी आर्या को हसी आने लगी थी । फिर भी उसने खुदको सक्त रखा और कहा " मेरे पैसे मेरी मर्जी! जहा जाना चाहू.... जाऊ, जब जाना चाहू .... जाऊ या फिर जिस मौसम मे जाना चाहू.... जाऊ! "
    विकि का दिमाग हैंग हो चुका था । तभी देवांश ने कहा " अगर तुम अभी वापस चलती हो तो भी तुम्हारी सेफ्टी की जिम्मेदारी मै लेता हूँ! ना तुम्हे कोई परेशान करेगा और ना किसी केस मे तुम्हारा नाम आयेगा! "

    आर्या ने उसकी तरफ देखा और बड़ा सा बाइट मुह में भरकर कहा " नही... अभी मुझे बर्फ पडने का इंतेजार है! एक स्नो मैन बनाऊँगी फिर वापस जाऊंगी! "
    देवांश मुस्कुरा उठा । उसने खाना छोड़कर आर्या की तरफ ही देखना शुरू कर दिया ।

    लखनऊ,

    एक सुनसान और पहाडी पर एक ऑफिसर के साथ खडा महेश उसे सारी बात बता चुका था ।
    ऑफिसर का चेहरा गंभीर था । वो ऑफिसर ऐसा इंसान था जिसपर महेश को बोहोत भरोसा था ।
    उन्होंने एकदम से कहा " देखो महेश... तुम्हारी बात मै समझ रहा हूँ पर बाकी डिपार्टमेंट भी समझे ये जरूरी नही! कौन कब और किसके साथ मिला हुआ है बताना मुश्किल होगा! हम फैमिली वाले लोग है, जितना देवांश के मेटर मे उलझेंगे उतना हमारे लिए खतरा बढ़ेगा! "
    महेश ने एकदम से कहा " तो उनके डर से हम ड्यूटी करना भी छोड दे क्या सर? "
    " मेरी बात सुनो....! " उन्होंने कुछ कहना चाहा तो महेश ने उनकी बात काटते हुए कहा " आप बस इतना बता दीजिए, मेरा साथ देंगे या नही? हा.. या ना! "
    गहरी सास भरते हुए उस ऑफिसर ने कहा " मुझे कमिश्नर सर से बात करने के लिए वक्त दो! सबकुछ चेक करने के बाद ही हम उन्हे सबूत देंगे वरना हमारे साथ क्या हुआ इसका निशान तक पीछे नही बचेगा! "
    महेश ने गर्दन हिला दि और कुछ देर बाद दोनो अलग अलग रास्ते निकल गए ।


    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 7. Crazy For Her - Chapter 7

    Words: 1412

    Estimated Reading Time: 9 min

    तवांग, अरुणाचल,
    सुबह का वक्त,

    उस कपकपाति ठंड में आर्या गर्म जैकेट हाथो में काले रंग के मौजे और पेरो मे बडे बडे बूट जो उसे ठंड से बचाने का काम कर रहे थे । कोटेज के पीछे ही कुछ दूरी पर बनी ढलान से वो तेजी से उतर रही थी । उसके पीछे देवांश और विकि भी भाग रहे थे और उनके पीछे गार्ड्स ।
    आर्या बुरी तरह हाफ रही थी लेकिन वो रुकी नही ।

    पीछे से विकि ने चिल्लाकर कहा " अगर तुम नही रुकी तो देख लेना! हाथ लगने पर चटनी बना दूंगा! "

    आर्या रुकी और एकदम से मुड़कर चिल्लाई " बेवकूफ कही के पहले पकड कर तो दिखाओ! "
    वो दुबारा पूरी ताकत से भागने लगी ।

    विकि रुका और देवांश से कहा " अब आप जाने और आपकी जान!... वरना इसके पीछे भागते भागते मेरी जान जरूर निकल जायेगी! "

    देवांश ने खडे होकर उसे घुरा तो विकि ने कहा " डरता नही हु इन नजरों से! बचपन से देखता आ रहा हूँ! "

    देवांश ने आखे छोटी कर एक कदम उसकी तरफ बढाया तो विकि थोडा पीछे हटते हुए " अरे पकड तो रहा हूँ ना... नाराज क्यु होते हो! "

    उसने दुबारा भागते हुए कहा " पता नही क्या खाकर आयी है ये लड़की जो अचानक इतनी ताकत आ गयी इसमे! "
    नीचे उतरती आर्या एकदम से रुक गयी । सामने इससे भी बडी ढलान थी । आर्या सामने देखने लगी जहा नीचे बसा गाव साफ दिखाई दे रहा था ।
    उतने मे विकि उसके बराबर आकर खडा हो गया । वो बुरी तरह हाफ रहा था । आर्या ने जोर से उसके कंधे पर हाथ मारते हुए कहा " क्यु बेटा.. बताओ अब कौन बच्चा है? "

    " हा.. हा.. तुम जीती...! लेकिन अगली बारी से ऐसे भगाना मत! " विकि ने लंबी लंबी सासे भरते हुए कहा!
    उतने में देवांश आर्या की दूसरी तरफ आकर खडा हुआ । आर्या ने देखा तो वो अपनी सासो को संभाल रहा था ।
    आर्या ने मुस्कुराते हुए भौहें उठाई तो देवांश ने एकदम से अपना हाथ उठाकर उसके सर पर रख दिया ।
    उसने कहा " जान... तुम्हे ऐसे भागना नही चाहिए था! अगर गिर जाती तो?... "

    " तो... चोट लग जाती! " आर्या ने आराम से कंधे उठाकर कहा तो देवांश ने सर हिला दिया ।
    आर्या ने एकदम से उपर देखा और हाथ सामने कर दिया । उसके हाथ पर बर्फ आकर गिरी थी ।

    आर्या ने खुश होकर कहा " देखो... मैने कहा था, आज बर्फ गिरेगी...! देखा ना... देखा...! "
    वो बच्चों की तरह खुश हो रही थी । क्युकी अब थोड़ी ज्यादा मात्रा मे बर्फ गिरना शुरू हो चुका था ।
    आर्या के चेहरे की खुशी देख देवांश के साथ साथ विकि के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी ।

    देवांश ने कहा " ठीक है... हमे वापस चलना होगा! "

    आर्या ने छोटा सा चेहरा बनाकर एकदम से ना मे सर हिलाया तो देवांश ने कहा " अगर बिमार नही होना चाहती तो वापस चलो! जब बर्फ जमा होगी हम वापस आयेंगे! "
    आर्या ने निचला होठ निकाल कर धीरे से सर हिला दिया ।
    देवांश ने उसके दोनो हाथ पकडे और एकदम से घूमकर अपने गर्दन मे लपेट कर उसे पीठ पर उठा लिया ।
    आर्या चौक उठी ।

    देवांश ने कहा " उतरना जितना आसान है... चढना उतना ही मुश्किल! तुम थक जाओगी! "
    आर्या ने कुछ नही कहा ।
    विकि फोरन सामने आकर " मै भी थक जाऊंगा! मुझे भी उठा लो! "

    देवांश ने आखे छोटी कर कहा " मेरे सर पर जगह खाली है... आओ बैठ जाओ! "
    विकि ने मुह बना लिया वही आर्या ने जीभ दिखा कर उसे चिड़ाने लगी ।
    विकि ने उसे घुरा तो आर्या हसने लगी ।

    विकि ने कहा " भाई ये लड़की मेरी जगह छीन रही है! "

    " लेकिन मैने तुझे कभी अपनी पीठ पर नही उठाया था! " देवांश ने आगे चलते हुए कहा तो विकि झल्लाते हुए " मै पीठ की नही जिंदगी की बात कर रहा हूँ! "

    " ओह्ह...! " देवांश ने कहा और मुस्कुरा दिया । विकि पेर पटकते हुए तेज तेज आगे चला गया ।
    आर्या इस वक्त खुलकर हस रही थी लेकिन जल्द ही उसे इस बात का एहसास हुआ और उसकी मुस्कान गायब हो गयी ।
    उसने सोचा " ये लोग मुझे और मेरी फीलिंग्स को अफेक्ट कर रहे है! मै.. मै मुस्कुरा रही... थी! "

    उसने खुदको डाटते हुए कहा " नो... नो आर्या... यू कांट! तुम इनकी बातो में नही आ सकती । तेरा एक ही मकसद है! देवांश कपुर की बर्बादी जिसने तेरी सोमु को बर्बाद करने वालों को पनाह दी! उसे जेल पोहोचाना तेरा पहला मकसद है! "

    कोटेज के कमरे मे खिड़की पर बैठे विकि और आर्या बाहर ही देखे जा रहे थे । उन्होंने कुर्सी ही खिड़की के पास लगाई थी और वहा हाथ पर चेहरा टिकाए काच से स्नो फॉल रुकने का इंतेजार कर रहे थे । उन दोनो की कुर्सी के बीच देवांश हाथ बांधे खडा था । उसकी नजर दोनो पर बनी हुई थी जो कुछ ही पल पहले झगडा कर एक दूसरे से नाराज होकर बैठे थे । देवांश ने गहरी सास ली और अपने हाथ दोनो के सर पर रख एक दूसरे की तरफ घुमा दिए ।
    दोनो ने मुह बनाते हुए दुबारा फेरना चाहे तो देवांश ने पकडे रखा और कहा " अगर मेरी जान के दोनो टुकड़े ऐसे नाराज रहेंगे तो मै किसकी साइड जाऊंगा! "

    " अफकोर्स मेरी! " विकि ने तुनक कर कहा तो आर्या उसे घूरते हुए " मुझे वैसे भी किसी की जरूरत नही! तुम्हारी तो बिल्कुल नही! " कहकर उसने देवांश की तरफ देखा और उसका हाथ अपने सर से झटक दिया ।
    वो वहा से उठने लगी तो विकि ने कहा " अरे.. अरे.. तुम तो सचमे नाराज हो गयी! मै तो... ऐसे... ही!.. अच्छा ठीक है देव भाई तुम्हारे.. अब तो खुश! "

    देवांश मुस्कुराया तो आर्या ने कहा " कोई जरूरत नही है! मै खुदके लिए काफी हु! "

    " जान...! " देवांश ने कहते हुए उसे दुबारा कुर्सी पर बिठा दिया " गुस्सा मत करो! विकि सचमे मे लडाई नही करता है! इन फेक्ट तुम वो पहली हो जिसके साथ वो इतना खुलकर बात कर रहा है ! "

    " हा... बिल्कुल...! " विकि ने उसका साथ देते हुए कहा " तुम हो इसलिए वरना मै ऐसे किसी के साथ भी बर्ताव नही करता! तुम्हे फक्र होना चाहिए खुदपर! "

    " किस खुशी में? " आर्या ने त्योरिया चढ़ाते हुए कहा ।

    विकि मुस्कुराया और कहा " यही की तुम सबसे स्पेशल हो! वरना हर किसी को मेरे साथ झगडा करने का मौका नही मिलता! "

    " व्हाटेवर... ! " आर्या ने मुह बनाकर कहा तो देवांश और विकि दोनो हस पड़े ।

    थोड़ी ही देर में स्नो फॉल बंद हुई और आर्या उछलते हुए बाहर भागी । वो सचमे खुश थी । यहाँ तक की अपनी जिंदगी की परेशानियों को भी भूल चुकी थी । वो तीनों फिरसे उसी जगह पोहोच चुके थे । लेकिन इस बार ठंड थोड़ी ज्यादा थी । विकि काप रहा था उसी बीच आर्या ने बर्फ का गोला बनाकर उसके मुह पर मार दिया ।
    विकि ने उसे घुरा तो आर्या ने कहा " क्या...? "

    विकि के चेहरे पर एकदम से शरारती मुस्कान आ गयी । उसने कहा " अगर हिम्मत है तो देव भाई को मारकर दिखाओ! "

    आर्या ने देवांश की तरफ देखा जो फोन मे नेटवर्क ढूंढने में बिजी था । आर्या ने कमर पर हाथ रख विकि से कहा " ऐसी बात है? "
    विकि ने झट से हा मे सर हिलाया ।
    आर्या झुकी और दूसरा गोला बनाकर देवांश के सर पर मार दिया ।
    देवांश गुस्से के साथ पूछे मुडा तो विकि एक कदम आर्या से पीछे होकर उसकी तरफ उंगली से इशारा कर देता है ।
    देवांश आगे बढ़ने लगा तो आर्या ने थूक निगलते हुए विकि की तरफ देखा तो वो वहा था ही नही । आर्या ने पीछे देखा तो वो भागते हुए काफी दूर जा चुका था ।
    आर्या ने अपनी तरफ आते देवांश को देख एकदम से कहा " विकि के बच्चे तुम आज गए! "
    वो भी विकि के पीछे भाग गयी तो देवांश वही रुक गया ।
    " अहह.. दिस लिटल ब्रैट...! क्या करू... इसपर तो गुस्सा भी नही आ रहा । "
    इतना कहकर वो वहीसे दोनो को देखने लगा जो एक दूसरे पर बर्फ फेकते हुए फिरसे झगडा कर रहे थे ।



    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 8. Crazy For Her - Chapter 8

    Words: 1524

    Estimated Reading Time: 10 min

    तवांग,

    बंद खिड़की की काच से आर्या एकटक बाहर लगे पेड को घूर रही थी ।
    उसने अपने मन में कहा " बिना मेरे बारे में पता लगाए बोहोत विश्वास किया है ना तुमने... ये मेरे लिए प्लस पॉइंट साबित होगा! दूसरा की तुम्हे मुझसे प्यार है! इस फीलिंग या प्यार का मजाक मै कभी नही उडाना चाहती पर तुम उस लायक नही हो! जिस दर्द से मे गुजर रही हूँ ना उससे तुम्हे भी गुजरना होगा! "
    उसी वक्त कमरे का दरवाजा खुला और देवांश विकि के साथ अंदर आया ।
    आर्या ने बिना देखे ही कहा " ये मेरा कमरा है.. तुम्हारा घर नही जो मुह उठाये चले आ रहे हो! "
    वो पीछे मुडी तो देवांश मुस्कुरा रहा था पर विकि की आखे उसे घूरे जा रही थी ।
    आर्या ने विकि की आखो मे आखे डालकर कहा " क्या? डरती नही हु तुमसे! "
    " हा वो तो हम पहली मुलाकात मे ही समझ गए थे! " विकि ने कहा तो आर्या सकपका गयी ।
    उसने बालो में हाथ घुमाया और सीधे बेड पर रखा बैग उठा लिया ।
    वो कमरे से बाहर चल पड़ी तो देवांश और विकि भी उसके साथ चलने लगे ।

    दोपहर का वक्त,

    जंगल के अंदर एक जमी हुई झील के पास वो खडे थे । विकि ने धीरे से अपनी नजरे आर्या की तरफ घुमाई जो अपने हाथों की बाजू पीछे सरकाते हुए उसे देखे जा रही थी ।
    विकि ने दात दिखाते हुए कहा " इतनी ठंड में इंसान जम जाए.. बीचारि झील क्या चीज है! "
    " ये बात यहा आने से पहले नही सोच सकते थे? " आर्या ने उसकी तरफ एक कदम बढ़ाया तो विकि ने फोरन देवांश को बीचमे खिच लिया ।
    आर्या देवांश के हाथ पकड़ कर इधर उधर हो रही थी.. उसी तरह विकि भी हो रहा था ।
    आर्या ने देवांश को देख कहा " हटो.. तुम बीचमे से! आज इस बंदर की खैर नही.. बड़ा आया था मै जगह सिलेक्ट करूँगा वाला! अब इस बर्फ मे सुलाऊँगी तुम्हे? "
    विकि ने देवांश की शर्ट पीछे से पकडते हुए कहा " कुछ भी हो जाए भाई.. बीच मे से नही हटना! ये लड़की मेरा कचूमर बना देगी! "
    देवांश आखे बंद किए चुपचाप उनकी हरकते सेह रहा था । बोहोत देर तक उनका पकडम पकड़ाई का सिलसिला बंद नही हुआ तो देवांश ने एकदम से आखे खोलकर आर्या को बाहों मे खिच लिया ।
    आर्या की ठुड्डी उसके कंधे पर टिकी हुई थी और आखे हैरानी से बडी हो रही थी ।
    पीछे खडे विकि ने दात दिखाकर कहा " झील ना सही.. रोमांस तो देखने को जरूर मिलेगा! "
    इतना कहकर वो जल्दी से भाग गया । वहा खड़े गार्ड्स भी उनकी तरफ पीठ किए खडे हो गए ।
    आर्या जब होश मे आयी तो उसने दूर होने की कोशिश की पर देवांश की पकड़ उसपर और ज्यादा कस गयी ।
    आर्या के दोनो हाथ नीचे झूल रहे थे ।
    उसके चेहरे के भाव सक्त हो गए और आखो मे नफरत भरने लगी ।
    उससे बेखबर देवांश ने सुकून के साथ आखे बंद कर अपना चेहरा आर्या की गर्दन मे छिपा लिया ।
    आर्या ने सोचा " यू केन डु इट आर्या.. ये गलत है पर इसने भी तुम्हारे साथ कुछ सही नही किया है! "
    अपनी आखो को कसकर बंद करते हुए आर्या ने हाथ देवांश की पीठ पर रख सर उसके कंधे पर टिका दिया ।
    देवांश ने जब महसूस किया तो उसके होठो पर मुस्कान आ गयी और उसकी पकड आर्या पर मजबूत हो गयी ।

    कुछ देर बाद, उस जमी हुई झील के उपर धीरे धीरे कदम रखते हुए आर्या आगे बढ रही थी ।
    इससे अंजान देवांश और विकि बात कर रहे थे ।
    विकि ने कहा " भाई शोना मेरे बिना रह नही रही है! आप कहो ना भाबी से वापस चलने के लिए! इतने दिन उससे दूर नही हुआ था और अब एकदम से उससे ना मिल पाने की वजह से उसकी हेल्थ पर असर पड रहा है! "
    देवांश ने सर हिलाया और कहा " ठीक है! तु शाम को निकल जाना.. हम दोनो कल तक आ जायेंगे! "
    विकि ने फोरन कहा " नही भाई.. आपको छोड़कर नही जाऊंगा! हम साथ ही चलते है! "
    देवांश ने सक्त आवाज में कहा " फिल्हाल शोना तेरे लिए ज्यादा जरूरी है! ... मै मेरा और मेरी जान का खयाल रख सकता हूँ! "
    विकि ने कुछ कहना चाहा पर देवांश ने हाथ दिखाकर उसे रोक दिया ।
    तभी उनके कानों मे कुछ गिरने की आवाज आयी और साथमे एक चीख भी ।

    लखनऊ,

    एक गाडी मे बैठे महेश के हाथ मे उसके सीनियर ऑफिसर ने लीफाफा पकड़ाया!
    उन्होंने कहा " बस अब इससे ज्यादा मुझसे कोई उम्मीद मत रखना! आगे जो भी होगा वो तुम्हारी जिम्मेदारी होगी । वारंट की खबर लिक नही होगी इस बात का विश्वास मै दिला सकता हूँ! क्युकी इस बारे में मेरे अलावा सिर्फ दो लोग जानते है और वो भी देवांश ठाकुर के काम के खिलाफ है! "
    महेश ने सर हिलाया और कहा " आप फिक्र ना करे सर! अब देवांश ठाकुर सीधा जेल और मीडिया की खबरों में आयेगा! ये सबूत उसे फासी की सजा भी दिला सकते है! "
    सीनियर ऑफिसर ने कहा " गुड लक... तुम्हे टीम मिल जायेगी! जिन्हे इस मिशन की कोई खबर फिल्हाल नही देंगे! जब देवांश को अरेस्ट करना होगा उससे कुछ पल पहले उन्हे पता चलेगा! इस वजह से अगर कोई गद्दारी पर भी उतर आया तो देवांश बच नही पायेगा! "
    महेश ने गर्व भरी मुस्कान लिए कहा " थैंक यु सर... मुझपर इतना भरोसा करने के लिए! मै आपकी कोशिश बेकार नही जाने दूंगा! "
    इतना कहकर उसने सेल्यूट किया । फिर उसने कैप और मास्क लगाया । आसपास देखते हुए वो चुपचाप गाडी से उतर कर निकल गया ।

    वही शहर के कोने मे बने उस सफेद घर के अंदर सोफे पर कुछ लोग बैठे हुए थे । सबसे बीच में एक पचास की उम्र का इंसान था । उसने सफेद रंग का कुर्ता पजामा पहना हुआ था । उसके चेहरे पर कोई भाव नही थे । उसके पास ही एक लड़का बैठा था जिसने काले रंग के कपड़े पहने हुए थे । दिखने में वो अच्छा खासा हैंडसम था । छह फिट की हाइट और कसी हुई बॉडी के साथ उसके आइब्रो पर एक कट था ।
    उन दोनो के सामने वाले सोफे पर कमिश्नर और उसके पास एक पॉलिटिशन बैठा हुआ था । साथ वाले सोफे पर दो और लड़के बैठे हुए थे । तिनों लड़के एक ही उम्र के लग रहे थे । उन लड़को के सामने एक दूसरा आदमी था जो एक बिजनेस मैन लग रहा था ।

    कमीश्नर के पास बैठे आदमी ( पॉलिटिशन) ने कहा " केस को बंद हुए छह महीने हो गए पर फिर भी इस देवांश ठाकुर का खतरा हमारे बच्चों के सर मंडरा रहा था । "
    बिजनेस मैन ने कहा " गलती भी हमारी ही थी जो उससे मदत मांगने चले गए! मदत तो नही की पर हमारे उपर खतरा जरूर बन गया! अगर चौधरी जी नही होते तो वो वकील हमारे बच्चों को उम्र कैद की सजा दिलाकर ही दम लेती । "
    बीच मे बैठे चौधरी के चेहरे पर अब भी कोई भाव नही थे । वो चुपचाप शराब का ग्लास उठाकर पीने लगा ।
    कमिश्नर ने कहा " कल देवांश अरेस्ट हो जायेगा.. उसके बाद इन दोनो को अंडर ग्राउंड रहने की जरूरत नही पड़ेगी! "
    दोनो लड़के .. तन्मय जो पॉलिटिशन आनंद का बेटा था और दूसरा मनबीर जो बिजनेस मैन पटेल का बेटा था उनके चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ गयी ।
    चौधरी के पास बैठे लड़के ने सर्द आवाज में कहा " अपने बेटों को समझा दो... पापा हर बार मदत के लिए नही आने वाले! बात इलेक्शन की है इसलिए ये बाहर है वरना काम तो जेल मे रहने वाला है किया था! "
    चौधरी ने अपने बेटे के कंधे पर हाथ रख उसे शांत रहने का इशारा किया ।
    पटेल और आनंद जबरदस्ती मुस्कुरा दिए । तन्मय और मनबीर ने अच्छे बच्चों की तरफ गर्दन झुका ली ।

    कुछ देर बाद कमिश्नर वहा से निकल गया और उनके कुछ देर बाद वो चारों भी बाहर आ गए ।
    तन्मय और मनबीर ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को हाय फाइव दिया ।
    तन्मय ने कहा " फाईनलि ब्रो... हम भी खुले आम घूम पाएंगे! "
    मनबीर ने कहा " हा ... इस बार उस साली वकील का शिकार करेंगे! बोहोत उछल रही थी ना कोर्ट मे.. देखते है उसका केस लडने कौन आता है! "
    आनंद और पटेल ने उन्हे घुरा तो दोनो लड़के चुपचाप गाडी मे जा बैठे ।

    घर के अंदर बैठे चौधरी ने कहा " क्या लगता है लक्ष्य ? देवांश कपूर कितने दिन के लिए जायेगा? "
    लक्ष्य ने हैरानी से अपने पिता की तरफ देखा और फिर कहा " इन नालायको की वजह से वो हमारे उपर भी खतरा था..  आई नो आप पूरी कोशिश करोगे वो कभी बाहर ना आये! "
    चौधरी ने मुस्कुराते हुए उसके कंधे पर थपथपाकर कहा " कल धकामा होने वाला है! "
    लक्ष्य ने गर्दन हिलाई और उठकर चला गया ।


    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 9. Crazy For Her - Chapter 9

    Words: 1252

    Estimated Reading Time: 8 min

    तवांग,

    दोपहर का वक्त था जब देवांश और विकि के कानों मे कुछ गिरने के साथ एक चीख सुनाई पडी । उन्होंने सबसे पहले अपने आसपास देखा तो आर्या गायब थी । देवांश सुन्न पड गया और पीछे मुड़कर देखा तो गार्ड्स के साथ विकि जमी हुई झील पर तेजी से आगे बढ रहे थे ।
    वहा पर एक जगह बर्फ टूटी हुई थी और नीचे पानी नजर आ रहा था । लेकिन आर्या कही भी नजर नही आयी । दो गार्ड्स बिना सोचे समझे अंदर कूद गए और विकि आर्या को आवाज लगाने लगा ।
    " जान..! " कहते हुए देवांश एकदम से होश मे आया और खुदको संभाले आगे बढ़ा । वो विकि के बिल्कुल सामने जाकर बैठा और अंदर देखने लगा ।
    उसने फोरन जैकेट उतारी । विकि को उसके इरादे समझने में देर नही लगी पर तबतक देवांश उस ठंडे पानी मे कूद चुका था ।
    विकी की सासे अटक गयी और अब वो जानवि के साथ देव नाम से भी चिल्लाये जा रहा था ।
    तभी गार्ड्स ने उसे पीछे खिचकर कहा " बर्फ टूट रही है.. आपको दूर होना होगा! "
    विकी पागलो की तरह उसे छोडने के लिए कहे जा रहा था ।
    कुछ ही पल गुजरे और पानी में हलचल होना शुरू हुआ । इसीके साथ दोनो गार्ड्स ने देवांश और आर्या को पकड कर बाहर निकाला ।
    देवांश ने आर्या को मजबूती से पकडे हुए था जबकि आर्या बेहोश हो चुकी थी ।
    विकि और बाकी सब उन्हे बाहर निकाल किनारे पर ले आए । देवांश ने फोरन अपना जैकेट लेकर आर्या को कवर कर दिया तो विकि ने अपना जैकेट निकाल कर देवांश को कवर किया ।
    " जल्दी कॉटेज चलो और डॉक्टर को भी बुला लो! " देवांश कहकर आर्या को उठाने ही वाला था उतने में विकि ने कहा " आप खुदको संभालो! मै ले चलता हूँ इन्हे! "
    देवांश ने सर हिला दिया । क्युकी वो खुद भी ठण्ड से काप रहा था ।

    कॉटेज मे पोहोच कर विकि ने ओनर को बुलाकर आर्या के गीले कपड़े बदलने के लिए कहा और खुद देवांश को उसके कमरे मे ले गया ।
    कुछ देर बाद डॉक्टर ने आर्या को चेक किया । वो अभी भी बेहोश थी और ठंड से काप रही थी ।
    देवांश कपड़े बदल कर आया तो डॉक्टर ने कहा " अच्छा हुआ इन्हे वक्त पर बाहर निकाला इसलिए ज्यादा दिक्कत वाली बात नही है ! बस इन्हे ठंड से बचाए रखे! अगर जरूरत पडे तो होस्पिटल मे एडमिट करना होगा! "
    देवांश ने आर्या की तरफ देखा जो काप रही थी । फिर उसने सर हिलाया और आर्या की तरफ बढ गया ।
    डॉक्टर चली गई और बाकी लोग भी कमरे से बाहर खडे हो गए । कॉटेज की ओनर अंदर आयी तो उसके हाथ मे एक ब्लैंकेट था । उसने देवांश को वो देते हुए कहा " तुम्हारे जितना प्यार करने वाला लडका पास हो तो और क्या ही चाहिए? "
    " ये बात इसे कैसे समझाउ? लडकी तो मान ही नही रही! " देवांश ने उदासी से कहा ।
    ओनर हल्के से हस पडी! फिर उन्होंने कहा " होता है बच्चे.. सबके साथ ऐसा ही होता है! लेकिन जब उसे एहसास होगा ना तुम्हारे प्यार का तो तुमसे ज्यादा टूट कर प्यार करेगी वो! "
    देवांश के मायूस चेहरे पर छोटी सी मुस्कान खिल उठी ।
    उसने खोये हुए कहा " अगर ऐसा हुआ तो शादी के बाद पहली ट्रिप पर यही आयेंगे! "
    " यु मीन.. हनिमुन! " ऑनर ने छेड़ते हुए कहा तो देवांश ने गला खराशते हुए आर्या को कंबल ओढा दिया ।
    ऑनर हस पडी और सर हिलाकर वहा से बाहर चली गई । 

    शाम का वक्त था , जब विकि अपने सामान के साथ बाहर गाडी के पास खडा था । उसने कहा " भाई आपको अकेले छोडना पता नही क्यु सही नही लग रहा! चलो ना आप दोनो भी! "
    देवांश ने उसके कंधे पर हाथ रख कहा " उसे ऐसी हालत में नही ले जा सकते! शोना को तेरी जरूरत है! तु जाकर उसका खयाल रख! अगर जिम्मेदारी लो तो उसे पुरा करना भी जरूरी है! "
    शोना की नर्स का फोन आया था उसने खुदको हार्म कर लिया है और बार बार विकि को बुलाने की जिद कर रही थी ।
    विकि ने गहरी सास ली और देवांश को गले लगा लिया । उसने कहा " अपना खयाल रखना भाई और प्लीज कही अकेले मत जाना! भरोसा करना और आख बंद करके भरोसा करना इसमे जमीन आसमान का फर्क है! "
    देवांश उससे अलग होकर " जानता हूँ तुम्हे मेरी बोहोत चिंता है पर तु जान के बारे मे ऐसी बातें मत किया कर! "
    " ठीक है नही करता आपकी जान के बारे मे बात! लेकिन किसी ने आपको चोट पोहोचाने के बारे में सोचा भी तो उसकी जान निकालने मे मै एक पल भी नही सोचूँगा! " विकि की आवाज बोहोत गंभीर थी ।
    देवांश ने सर हिला दिया और गाडी का दरवाजा खोल उसे जबरदस्ती अंदर बिठा दिया । तिन गाड़िया उसके सामने से निकल गयी जिन्हे आखो से ओझल होने तक वो देखता रहा ।
    फिर वो पलट कर अंदर की तरफ चला गया । आर्या के रूम का दरवाजा खोलकर वो पोहचा तो देखा आर्या फिरसे काप रही थी । देवांश फोरन उसके पास जाकर बैठा और सर पर हाथ लगाकर देखा तो माथा हल्का सा गर्म था ।
    देवांश हाथ पीछे खीचने लगा तो आर्या ने बेहोशी मे ही उसका हाथ पकड लिया ।
    उसने बोहोत धीमी आवाज में कहा " सोमु.. डोंट गो! "
    देवांश हैरानी से उसे देखने लगा । आर्या की आखे गीली थी और वो लगातार कुछ बड़बड़ा रही थी । उसके शब्द तो समझ नही आ रहे थे पर चेहरे पर उभरा दर्द वो साफ देख पा रहा था ।
    देवांश ने कहा " आई एम सोर्री! मुझे ये करना होगा! "
    इतना कहकर उसने हल्के से कंबल हटाया और उसके बिल्कुल पास लेट कर उसके सर के नीचे अपना हाथ डालकर उसे बाहो में भर लिया । ठंडी हवा में किसी ने आग जलाई हो ऐसे आर्या उसके करीब होकर सीने में छुप गयी । उसके कापते हाथ की पकड देवांश की पीठ पर शर्ट के उपर से भी नाखून चुभो रही थी । देवांश ने कोई हलचल नही की और धीमे धीमे उसके बाल पर हाथ फिराने लगा । आर्या का बडबड़ाना जारी था जिस वजह से उसके होठ देवांश के सीने पर हिल रहे थे । लेकिन चौकने वाली बात थी देवांश बिल्कुल असहज नही हुआ! उसका अपनी फीलिंग्स पर कुछ ज्यादा ही कंट्रोल था जिस वजह से उसके मन मे कोई गलत खयाल तक नही आया ।
    कुछ वक्त बाद आर्या की कंपन कम हुई और वो शांत होकर गहरी नींद मे चली गई । उसका बड़बड़ाना बंद हो चुका था ।
    देवांश ने उसे ठीक देख कर चेन भरी सास ली और खुद भी आखे बंद करली ।

    आधी रात का वक्त था जब बोहोत सी पुलिस की गाड़िया एयरपोर्ट से निकल गयी । महेश जो पूरी तैयारी के साथ अरुणाचल पोहोच चुका था उसके चेहरे की चमक साफ नजर आ रही थी ।
    वही देवांश अपने खिलाफ हो रही साजिश से अंजान थे । वो आराम से गहरी नींद मे सोया था जबकि उसके पास सोई आर्या नींद से जागकर उसे बोहोत बुरी तरह घूर रही थी । उसके हाथ मे छोटा सा कटर था जो वो पागलो की तरफ हवा में ही देवांश की गर्दन पर फिरा रही थी । उसके चेहरे पर पागलपन वाली मुस्कान थी ।


    To be continued...


    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 10. Crazy For Her - Chapter 10

    Words: 1361

    Estimated Reading Time: 9 min

    कॉटेज मे आधी रात का वक्त था जब आर्या अपने पास सो रहे देवांश को बुरी तरह घूर रही थी । उसके हाथ की पकड उस तेज धार वाले कटर पर मजबूत थी जो उपर से ही देवांश के गले का मुवायना कर रहा था ।
    उसकी आखे जल रही थी और ठंड का एहसास होते हुए भी उसके माथे पर हल्का पसीना उभर आया था ।
    देवांश की हल्की सी आख खुली तो आर्या की आखो को देख एक पल के लिए वो भी सहम गया था ।
    उसने पूरी आखे खोल गंभीर आवाज में कहा " तुम्हारे कपडे.. ओनर ने बदले है और सोर्री बिना परमिशन तुम्हे छूने के लिए या फिर तुम्हारे पास सोने के लिए पर तुम ठंड से काप रही थी । मेरे पास कोई दूसरा रास्ता भी नही था इसलिए... ! "
    आर्या की आखे नरम पड गयी । शायद वो इसलिए इतनी गुस्से मे थी जिसे देवांश ने बखूबी पहचान कर जवाब दिया । कटर आर्या ने पहले ही फुर्ती से छिपा लिया था । वो पीछे हटकर पिलो पर सर रखते हुए करवट बदल लेती है पर इस बीच उसने कुछ नही कहा ।
    देवांश ने धीमी आवाज में कहा " तुम्हे ठंड लग जायेगी! प्लीज.. केन आई हग यु... ! "
    आर्या ने कोई जवाब नही दिया पर उसकी बात को रेसिस्ट भी नही किया । देवांश ने धीमे से अपना एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे डाला और दूसरे हाथ को पेट पर लपेट उसे मजबूती से बाहों मे जकड लिया ।
    आर्या की आखे बंद हो गयी पर धडकने बगावत पर उतर आयी थी । उसकी पीठ देवांश के सीने से लगी हुई थी जिस वजह से देवांश का दिल अपने सीने मे धड़कते हुए महसूस हो रहा था उसे ।
    आर्या ने खुदसे कहा " ये.. ये आदमी.. ये मुझे बदल रहा है! क्यु इसका छूना गलत नही लगता मुझे? जितना दूर रहने की कोशिश करती हूँ उतनी ही इनोसेंट हरकते कर अपनी तरफ खिच लेता है मुझे! मै कैसे लडू इन एहसासों से? "
    देवांश ने उसकी गर्दन के नीचे रखे हाथ को एकदम से उठाते हुए उसके कंधे कवर कर लिए और बची हुई दूरी मिटा दी ।
    आर्या ने ठंडी सास लेकर उसके हाथों पर अपने हाथ रख दिए ।
    उसकी आखे बंद थी पर दिमाग मे अनगिनत खयाल दौड़ना बंद नही हो रहे थे । कुछ देर पहले ही उसने महेश का मैसेज पढ़ा था । बस कल का इंतेजार और देवांश हमेशा के लिए जेल की सलाको के पीछे । उसका काम बस देवांश को लखनऊ पोहोचाने तक का है बाकी का उसके दुश्मन निपटा देंगे ।
    पर दिल के एक कोने मे टीस उठ रही थी । कल शायद देवांश का प्यार और विश्वास पर से हमेशा के लिए भरोसा उठने वाला था , साथ ही जिसे वो जान बुलाता है उससे भी! ये नाम दुबारा उसके होठों पर शायद ही आए.. या फिर सिर्फ नफरत करने के लिए आए!
    आर्या ने लंबी सास छोड़ी और दिमाग को शांत कर नींद के आगोश मे चली गई ।
    देवांश जाग रहा था । मुस्कान थी उसके होठों पर , उन हाथों को देख... जो उसके हाथों पर काफी छोटे और खुबसूरत दिखाई दे रहे थे । उन्हे पकड कर चूमने का मन था पर नही.. उसकी इजाजत के बिना नही!
    आर्या के सर के पीछे बालों पर ही उसने होठ टिकाए और खुद भी सो गया ।

    अगली सुबह आर्या कुछ ज्यादा ही शांत हो चुकी थी । देवांश इसकी वजह शायद विकि के जाने को समझ रहा था । वो उसे जबरदस्ती बात करने के लिए मजबूर कर देता था चाहे वो गुस्से मे ही क्यु ना हो । वरना आर्या शायद ही कुछ बोल पाती हो किसी से ।
    पुरा दिन कमरे मे ही निकल गया था उसका, क्युकी नजरे बार बार फोन पर जा रही थी , जिसमे मैसेज आया था हम कुछ देर मे पोहोच जायेंगे!
    आर्या एकदम से बिस्तर पर से उतर गयी और लंबी सी जैकेट पहन ली । उसकी आखे रोज के मुकाबले ज्यादा लाल थी ।
    उसने पीठ पर छोटा सा बैग पहन लिया और कमरे से बाहर निकल पडी । ज्यादा सामान तो वो नही लाई थी पर जितना भी था वो एक बैग के अंदर ही पैक था । उसे अच्छे से पता था महेश उसका सामान पोहोचा ही देगा ।
    जैसे ही वो कमरे से बाहर आयी वहा खडे गार्ड्स एक दूसरे की तरफ देखने लगे ।
    आर्या आगे बढती उससे पहले ही एक गार्ड ने गर्दन झुकाते हुए अपना हाथ आगे कर दिया " सॉर्री मैम.. बस एक बार बॉस को आने दीजिए! "
    आर्या ने उन दोनो को घुरा पर कहा कुछ नही । कहती भी क्या , वो खुद एक बॉडी गार्ड है और भले ही उसे ऐसे कामो के लिए ना लगाया गया हो पर उनकी मजबूरी वो समझ सकती थी ।
    हल्के से मुह खोल उसने सास बाहर छोड कहा " जाकर बताओ उसे! मुझे बाहर जाना है! "
    जिसने हाथ आगे किया था उसने फोरन से उसे हटाया और हल्के से सर झुकाते हुए चला गया ।
    कुछ ही देर मे देवांश उसके सामने अपना कोट पहनते हुए आया पर उसके पीछे पीछे गार्ड्स की पूरी फौज तैयार खडी थी ।
    आर्या ने अपना गला तर करते हुए उसे देखा ।
    देवांश ने उसके सामने आकर कहा " हा ... चलो, कहा जाना है? "
    आर्या ने आखे ठंडी पड गयी । उसने बिना किसी भाव के कहा " जहा भी जाना होगा मै अकेली चली जाऊंगी! "
    देवांश ने घडी की तरफ देखा जिसमे ओलरेडि छह बज चुके थे ।
    उसने कहा " क्या दिक्कत है अब! क्यु जिद कर रही हो? बताओ कहा जाना है? "
    " देखो ये तुम्हारे गार्ड्स है मेरे नही.. इसलिए तुम्हे होगी आदत फौज लेकर घूमने की पर मुझे काफी इम्बेरेस फिल होता है! जा तो मै अकेली ही रही हु, तुम्हे आना है तो इन्हे साथ लेकर नही आ सकते! " इतना कहकर आर्या एकदम से जाने के लिए पलटी तो देवांश ने उसका हाथ थाम लिया ।
    " बस इतनी सी प्रॉब्लम है ना! कोई बात नही! " उसने गार्ड्स की तरफ देख कहा " हम अकेले ही जा रहे है, किसी को पीछे आने की जरूरत नही! "
    सभी गार्ड्स एक दूसरे का चेहरा देखने लगे । विकि का ऑर्डर था कुछ भी हो देवांश को अकेले नही छोडना है पर अब वो देवांश की बात भी कैसे टाल सकते थे ।
    एक गार्ड ने कुछ कहना चाहा तो देवांश ने हाथ दिखाते हुए उसे रोक दिया ।
    फिर वो आर्या का हाथ पकड कर कॉटेज से बाहर निकल गया ।
    आर्या की आखो मे खुशी थी अपना प्लान वर्क होने की वजह से ।
    जैसे जैसे सूरज की रोशनी खत्म हो रही थी वैसे ही ठंड अपना कब्जा जमाना शुरू हो गयी । एक जगह जाकर देवांश ने गाडी रोक दी । वो सुनसान जगह काफी बडे मैदान जैसी लग रही थी । नीचे जमीन की जगह जमी हुई बर्फ थी । आर्या ने एकदम से फोन निकाल कर कुछ किया और दरवाजा खोलकर बाहर उतर गयी ।
    देवांश भी दूसरी तरफ से उतरा । यकीनन इतनी ठंड में उसकी हालत खराब हो रही थी पर आर्या की खुशी के लिए वो कुछ भी सहने के लिए तैयार था ।
    एकदम से उसे कुछ आहट हुई और उसने पीछे मुडकर देखा । काले कपडे पहने बोहोत से लोग उनकी तरफ भागते हुए आ रहे थे पर वो पुलिस डिपार्टमेंट से थे ।
    देवांश एकदम से आर्या को अपनी बाहो मे छुपा लेता है ।
    वो लोग चारों ओर से आकर उन्हे घेर लेते है ।
    और उनके बीच से निकल कर महेश सामने आया । देवांश उसकी आखो मे देख रहा था पर महेश आर्या की तरफ ।
    देवांश ने ये देख अपना फोन निकालना चाहा पर फोन उसकी जेब से गायब था ।
    तभी एक ठंडी आवाज उसके कानों मे पडी " इसे ढूंढ रहे हो! "
    आर्या ने फोन उसके सामने कर दिया । देवांश की आखो मे हल्की सी हैरानी उतर आयी उतने में ही आर्या ने धक्का देकर उसे खुदसे दूर कर दिया और महेश के पास जाकर खडी हो गयी ।



    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 11. Crazy For Her - Chapter 11

    Words: 1498

    Estimated Reading Time: 9 min

    तवांग,
    शाम का वक्त,

    उस खुले मैदान में आर्या देवांश के बिलकुल सामने खडी थी । उपर से हो रही हल्की बर्फबारी मे वो ठंड से कपकपा रही थी । लेकिन कहना मुश्किल था क्युकी वो काफी ज्यादा गुस्से मे भी थी । उसकी आखे हल्की लाल के साथ आसुओ से भर गयी । उसने सामने खडे देवांश से कहा जिसे पुलिस के लोगों ने पहले ही घेरा हुआ था " तुम्हारी वजह से मेरी बहन ने अपनी जान दे दी! भगवान के सजा देने का मे इंतेजार नही करूँगी क्युकी तुम्हे सजा देने का हक सिर्फ मेरा है! और उसे भी नही छोड़ूंगी जिसे तुमने बस पैसों के लिए बचाया था! "
    आर्या की आखो मे अपने लिए नफरत देख देवांश टूट सा गया । उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था फिर भी उसने भर्रायी आवाज में कहा " मेरी बात मानो जान मेने कुछ भी जानबूझ कर नही किया होगा ! हम बात करते है ना.. आई प्रोमिस मे सब ठीक कर दूंगा बस तुम मुझसे नफरत मत करो! मे तुमसे बोहोत प्यार.... "
    उसकी बात भी पूरी नही हुई उतने में आर्या ने चिल्लाकर कहा " प्यार.... तुम्हे प्यार का मतलब भी पता है? जो एक अनाथ है उसे प्यार का मतलब कहा से समझ आयेगा? कहाँसे समझ आयेगा की एक जवान बेटी अपनी जान दे देती है तो उसकी फैमिली पर क्या गुजरती है । और नफरत ना करू... कैसे नफरत ना करू तुमसे? तुम नफरत के लायक हो सिर्फ नफरत के! "

    उसकी बात सुनकर देवांश आगे बढने लगा तो पुलिस वालों ने उसे रोक दिया ।
    महेश ने एकदम से कहा " तुम्हे अब निकलना चाहिए, क्या पता इसके लोग तुम्हे टार्गेट करे! "
    महेश की बात मानकर आर्या वहा से निकलने लगी तो देवांश पागल सा हो गया  " प्लीज जान मुझे छोड़कर मत जाओ! मर जाऊंगा तुम्हारे बिना । हा हू अनाथ पर ऐसा नही की प्यार का मतलब ही नही समझता । तुम्हें देखकर सिखा है मेने वो मतलब । फिरसे मुझे अनाथ करके मत जाओ जान.... "
    आर्या ने एक बार भी पीछे मुड़कर नही देखा और दूर खड़ी टैक्सी मे जा बैठी जिसे महेश ने पहले ही बुला लिया था।
    देवांश फिरसे चिल्लाया " मे तुम्हे इतनी आसानी नही जाने दूंगा , तुम जहा जाओगी मुझे ही पाओगी! "
    आर्या ने टैक्सी वाले से कहा " एयरपोर्ट चलो! "
    गाडी वहा से निकल गयी जिसे आखो से ओझल होता हुआ देवांश देखता रह गया ।

    देवांश को एकदम से ठंड का एहसास हुआ और वो अपनी यादों से बाहर आया । पिछले दो घंटो से वो शावर नीचे खडा आर्या को याद कर रहा था ।
    बाहर विकि दरवाजा पिटते हुए पागल हुआ जा रहा था ।
    देवांश ने एकदम से सर्द आवाज में कहा " आ रहा हूँ! " 

    बाथरूम का दरवाजा खुला और देवांश बाथरोब पहने बाहर आया । उसने देखा तो सामने विकि परेशान सा खडा था ।
    देवांश सोफे पर बैठते हुए " क्या हुआ? "
    " बोहोत कुछ... आपको ये देखना चाहिए! " विकि ने कहा और हाथ मे पकड़ी फाइल देवांश की तरफ बढ़ा दी ।
    फाइल खोलते ही उसकी आखे हल्की सी बडी हो गयी ।
    " इसलिए वो आपको गलत समझ रही है और सारे किए का भार आपके सर डाल दिया! " विकि ने कहा तो देवांश फाइल बंद करते हुए " जल्द से जल्द ढूँडो उसे! किसी भी हालत में वो मुझे अपने सामने चाहिए! "
    विकि ने सर हिला दिया और चला गया ।
    देवांश ने ठंडी आवाज में कहा " आर्या साहनी.. तुमने देवांश की आखो को भी धोका दे दिया! यू लिटल ब्रेट.. एक बार मिल जाओ बस.. ! "

    दो हप्ते बीत चुके थे आर्या को ढूंढते हुए लेकिन वो तो जैसे गायब ही हो गयी हो ।
    देवांश ने पूरी फाइल बार बार पढी थी । आर्या के बारे मे हर एक बात उसके जेहन मे छप गयी थी । उसके बारे मे छोटी से छोटी बात उसे पता चल चुकी थी ।
    इस बीच उसपर चल रहे केस का भी कायापलट हो गया । न जाने कैसे पर वो सबूत गायब हो गए । उसे कोर्ट ले जाने से पहले ही क्लीन चिट मिल गया ।
    इस बात से पटेल ( बिजनेस मैन) और आनंद ( पॉलिटिशन) सदमे मे आ गए थे ।
    चौधरी भी हैरान था । शायद देवांश की जड़े उससे ज्यादा मजबूत थी इसलिए वो इतनी आसानी से जेल के बाहर था । लेकिन वो सबूत.. किसी को भी अंदाजा नही था वो अचानक कहा गायब हो गए और किसने किए ।

    उस बंद पडे घर में फिरसे महेश आर्या के सामने खडा था । लेकिन इस बार वहा ऊर्जा भी मौजूद थी जो आर्या को शांत रहने के लिए कहे जा रही थी ।
    एक तेज आवाज हुई और वास टुटकर फर्श बिखर गया । आर्या गुस्से से हाफ रही थी । एकदम से उसने नाक के पास हाथ फिराया तो नाक से बहता खून हाथों और नाक के पास फेल गया ।
    ऊर्जा सुन्न पड गयी वही महेश की आखो मे डर नजर आने लगा । आर्या के कदम लडखडा रहे थे फिर भी वो बैठने का नाम नही लेती ।
    उसने दर्द भरी आवाज में कहा " क्यु.. क्यु वो देवांश खुले घूम रहा है! मैने वो किया था जो मेरे उसूलों के खिलाफ है महेश! कैसे गायब हो गए सबूत? तुमने कहा था एक बार वो जेल जाए तो बाहर आना मुश्किल है फिर.. कैसे बाहर आया वो? "
    आर्या चीख पडी थी । गुस्से मे उसका बदन काप रहा था । आखो से आसु दर्द बनकर झलक रहे थे ।
    " देखो .. इस घर में मेरी सोमु की खिलखिलाहट सुनाई पडती थी.. लेकिन कभी यहा तीनों की दर्द भरी चीखे भी गूँजी होंगी! और आज.. आज सबकुछ शांत है! ये घर .. घर नही रहा महेश! उन लोगों ने सबकुछ बर्बाद कर दिया! मेरी सोमु को बर्बाद कर दिया! मा पापा ने यही खुदको फासी लगा ली ।
    लेकिन फिर भी वो आज जिंदा है और मेरी सोमु हमेशा के लिए सो गयी ।
    मम्मा पापा.. क्या गलती थी उनकी? यही की वो अपनी बेटी के इंसाफ के लिए लडना चाहते थे! हार गए वो महेश.. हार गए और मै कुछ नही कर पायी! "
    वो गिरने लगी तो महेश ने जबरदस्ती उसके करीब जाकर संभाल लिया ।
    आर्या खुदको छुड़ाने की कोशिश करने लगी तो महेश ने कहा " शांत हो जाओ आर्या! मै और सीनियर पूरी कोशिश कर रहे है इस बात का पता लगाने की! "
    " क्या कर लोगे पता लगाकर? " आर्या फिरसे चीख पडी " सबूत तो खत्म हो गया ना! मैने तुम पर भरोसा कर कानून का सहारा लिया... पर तुम्हारे ही लोग गद्दार निकल आए! मुझे अब तुम्हारे कानून की कोई जरूरत नही , मै वही करूँगी जो मुझे सही लगेगा! सौम्या साहनी इनोसेंट थी पर आर्या मोनस्टर है! उन सबको हिसाब देना होगा! "
    इतना कहते हुए आर्या बेहोश हो गयी ।
    महेश ने उसे उठाते हुए सोफे पर ले जाकर लिटा दिया ।
    ऊर्जा उसके पास बैठ गयी । उसने कहा " क्या तुम सचमे नही जानते या फिर आर्या को बताना नही चाहते? "
    महेश ने सर झुका कर सर पर हाथ रख लिया ।
    " मैने खामखा आर्या को झूठी होप दी की कानून उसे इंसाफ दिलाएगा! लेकिन मै बस उसे जुर्म करने से रोकना चाहता था वरना हम दोनो जानते है आर्या क्या कर सकती है! "
    ऊर्जा भी सर झुका लेती है " हमारे हाथ कानून से बंधे है लेकिन उसके नही! "

    महेश ने उसकी तरफ देख कहा " तो तुम चाहती हो मै उसे उस रास्ते पर छोड दु जहाँसे वो कभी नही लौट पायेगी और शायद जिंदा भी ना रह पाए! "
    " अगर वो बदला न ले पायी तो उसका दिमाग वैसे भी उसकी जान ले लेगा! इससे बेहतर है कि उसे कोई रिग्रेट ना रहे! मै उसे किसी पागल खाने मे जानवर की तरह बंधे नही देखना चाहती! " ऊर्जा ने गुस्से के साथ कहा " और वो लोग कोई संत महात्मा नही जो जिंदा रहकर दुनिया का भला करेंगे! आज वो शांत बैठे है कल फिरसे किसी मासूम को शिकार बनाएंगे! याद करो उन्होंने कोर्ट के बाहर मुझे धमकी दी थी मेरी इज्जत लूटकर कोठे पर बिठाने की! "
    ऊर्जा की आवाज मजबूत थी पर महेश की आखे शर्म से झुक गयी । या तो उसे पुलिस मे होने का हक नही या मर्द होने का! ऊर्जा कमजोर नही है वो जानता है पर उसे प्रोटेक्ट करना उसकी जिम्मेदारी के साथ साथ जरूरत भी है! सौम्या की जगह आज ऊर्जा होती तो क्या सचमे वो इतनी ही शांति से काम ले पाता!
    उसने सोचते हुए एकदम से कहा " ठीक है .. मै आर्या के साथ हु! इंसाफ तो होगा चाहे लीगली या इलिगली! "
    ऊर्जा की आखे गर्व से उठ गयी ।
    लेकिन दोनो ही अंजान थे की घर के बाहर कोई उनपर घात लगाए बैठा हुआ है! शायद जो छह महीने पहले हुआ उसे कोई दोहराना चाहता है!



    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 12. Crazy For Her - Chapter 12

    Words: 1272

    Estimated Reading Time: 8 min

    लखनऊ,
    रात का वक्त,

    आर्या घर के हॉल मे ही सोफे पर सोई हुई थी । ऊर्जा ने उसे ब्लैंकेट ओढाया और कहा " हम कुछ खाने के लिए ले आते है! सुबह से कुछ नही खाया उसने रात को उठ जाए तो खा लेगी! "
    महेश ने सर हिला दिया और उठकर जैकेट पहन ली । ऊर्जा ने एक नजर आर्या को देखा और दोनो ही घर से बाहर निकल पडे ।
    शॉप ज्यादा दूर नही थी इसलिए वो पेदल ही चल पडे पर वो इलाका काफी सुनसान था ।
    वो आराम से बातें करते हुए चल रहे थे, इससे अंजान की घर के बाहर खडी गाड़िया उनके पीछे लग चुकी थी ।
    पहली वाली गाडी के पैसेंजर सीट पर बैठे तन्मय ने काच पर हाथ रखते हुए कहा " हाए.. कितना इंतेजार कराया इस वकील ने! आज जाकर हाथ आयी आसानी से जाने नही देंगे! "
    मनबीर उसकी बात पर सहमति जताते हुए हस पड़ा । पीछे चल रही गाडी एकदम से निकल कर तेजी से आगे चली गई । गाडी की आवाज और रोशनी देख महेश ने पलट कर देखा तो उसकी आखे हल्की सी बडी हो गयी । उसने बिना देरी किए ऊर्जा को अपनी तरफ खिच लिया । गाडी उनके बिलकुल करीब से होकर गुजरी थी जिस वजह से महेश गुस्से से चिल्लाया " अबे ओए.. अंधा है क्या? "
    कुछ दूरी पर जाकर ही गाडी रुक गयी तो ऊर्जा की पकड़ महेश की शर्ट पर कस गयी ।
    उसने धीरे से कहा " प्लीज महेश कोई झगडा मत करना.. ये इलाका काफी सुनसान है.. मदत के लिए भी कोई नही आयेगा! "
    महेश गुस्से मे काप रहा था पर ऊर्जा की बात भी सही थी । वो लड सकता है पर सिचुएशन पूछ कर नही आती और उसके खयाल को झटकने का मौका भी नही मिला उतने में पीछे वाली गाडी वहा आकर रुकी ।
    काच के अंदर बैठे दोनो जाने पहचाने चेहरों को देख ऊर्जा सहम उठी । उसने महेश की तरफ देखा तो उसने सबसे पहले अपनी गन निकाल ली ।
    " पीछे रहना और मेरे इशारा करते ही भाग जाना! " महेश ने कहा तभी आगे वाली गाडी पीछे आ गयी ।
    वो तन्मय और मनबीर के लोग थे जो उतरने ही वाले थे उतने में वहा बोहोत सी गाड़ियों का शोर सुनाई देने लगा । कुछ गाड़ियों को अपनी तरफ आता देख तन्मय की आखे बडी हो गयी ।
    उन गाड़ियों से ज्यादा उसपर बना खास लोगो उनकी डर की वजह था । गाडी के बोनेट पर जैगुआर बना हुआ था ।
    तन्मय ने एक डर के साथ कहा " देवांश ठाकुर आ रहा है.. जल्दी निकाल गाडी! "
    मनबीर के हाथ काप गए पर जान बचाना ज्यादा जरूरी था । उसने फोरन रिवर्स घेर डाल गाडी पीछे ली और उसे मोड़कर पूरी स्पीड से भगा दी । आगे वाली गाडी भी बिना देरी के उनके पीछे निकल गयी ।
    उन्हे जाता देख महेश ने गहरी सास ली और ऊर्जा की तरफ देखा जो हल्के से काप रही थी ।
    तभी उनके पास वो गाडिया आकर रुकी । बिच वाली गाडी का दरवाजा खुला और विकि मुस्कुराते हुए बाहर आया ।
    " क्यु दबंग बन रहे हो एस आई साहब! जब पता है मुसीबत सर पर मंडरा रही है तो बिना सिक्युरिटि के निकलना ही क्यु? " उसने कहा और देवांश के लिए दरवाजा खोल दिया ।
    महेश और ऊर्जा एकदम सीधे खडे हो गए । उसे देख महेश के हाथ की पकड गन पर कस गयी थी ।
    देवांश आराम से उतर कर अपना कोट सही करता है! उसने मुड़कर पीछे घर की तरफ देखा और कहा " मेरी जान वही है ना? "
    ऊर्जा ने गला तर करते हुए धीमी आवाज मे कहा " उसे अकेला छोड दो! "
    " नेवर...! " देवांश के होठों पर तिरछी मुस्कान थी । वो पैदल ही घर की तरफ जाने लगा तो बाकी सब भी उसके साथ चल पडे ।
    ऊर्जा और महेश भूत बन अपनी जगह खडे थे ।
    ऊर्जा ने एकदम से कहा " ये .. क्या करने वाला है महेश! अगर आर्या को होश आया और उसने उसे सामने देख लिया तो? "
    महेश कुछ भी सोच नही पा रहा था । उसके दिमाग मे एक ही बात चल रही थी " देवांश ठाकुर आर्या को किसी कीमत पर नही छोड़ेगा! "
    वो अच्छी तरह उसके पागलपन से वाकिप था ।
    उसने ऊर्जा का हाथ पकडा और तेजी से घर की तरफ बढ गया ।

    देवांश दरवाजे के सामने खडे होकर घर की तरफ देखे जा रहा था । महेश वहा आया तो विकि ने कहा " कमाल करते हो ऑफिसर ! तुमने मेरी भाबी को घरमे लॉक कर लिया! अब कृपया इसे खोलने का कष्ट करेंगे? "
    " देखिये...! " महेश ने समझाना चाहा तो देवांश सर्द आवाज मे उसे टोकते हुए " देखने दिखाने के लिए तुमने कुछ बाकी नही छोडा है! चुपचाप दरवाजा खोलो वरना हम तोड भी सकते है! लेकिन मेरी जान के घर का नुकसान नही करूँगा! कम ओन ओपन इट! "
    महेश ने चाबी लगाकर दरवाजा खोल दिया और अंदर जाकर लाइट जला दी ।
    देवांश की सबसे पहली नजर सोफे पर शांत होकर पडी आर्या की तरफ गयी । उसने अपने कदम आगे बढ़ाए तो पेर के नीचे टूटे वास के टुकडे आ गए ।
    उसके होठों पर तिरछी मुस्कान आ गयी " तो मेरी जान को बिलकुल अच्छा नही लगा मुझे जेल के बाहर देख! वेल क्या कर सकते है... ये सिस्टम ही ऐसा है कि खुदको बचाने के लिए इंसान कुछ भी कर जाता है! "
    ऊर्जा ने ठंडी आवाज मे कहा " लेकिन वो तुम्हारी तरह नही है! खुदको बचाने से ज्यादा वो सामने वाले को मारने मे यकीन रखती है! "
    देवांश उसकी तरफ पलट कर मुस्कुरा पड़ा ।
    उसने कहा " आई लाइक माई शेरनी एंड उसकी हर एक शिकायत, गुस्सा, नाराजगी और बदला सर आखो पर! "
    ऊर्जा ने नफरत से चेहरा फेर लिया ।
    देवांश फिरसे आर्या की तरफ पलट कर आगे बढ गया ।
    वो उसके सामने लगी टेबल पर बैठ ध्यान से उसके चेहरे को देखने लगा ।
    " कमाल है.. मैने सुना था तुम्हारा सिक्स सेंस काफी स्ट्रॉंग है! हल्की सी आहट पर भी अटैक मोड मे आ जाती हो , लेकिन हम तो यहा चिल्लाये जा रहे फिर भी तुम उठ नही रही! सच सच बताओ... मुझसे नजरे चुरा रही हो ना? "
    महेश ने एकदम से कहा " शुक्र मनाओ बेहोश है अभी वरना उसका अटैक मोड देखने से पहले ही तुम्हारी आखे बंद हो जाती! "
    देवांश की आखे छोटी हो गयी । उसने ध्यान से आर्या के चेहरे पर गौर किया तो नाक के पास अभी भी खून का हल्का सा लाल पन नजर आ रहा था ।
    उसे एकदम से याद आया " आर्या साहनी की मेंटल हेल्थ ठीक नही है! उसका दिमाग ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है और यही एक दिन उसकी जान लेगा! "
    देवांश खयालो से बाहर आकर आर्या के गाल पर हाथ रख देता है । उसने अंगूठे से गाल सेहला कर कहा " तुम्हे मरने की इजाजत नही है जान! यू हेव टू सर्वाईव! "
    उसने गहरी सास लेकर सबकी तरफ देखा और कहा " रात भर दरवाजे पर ही खडे रहने का इरादा है! चलो शुरू हो जाओ.. घर सुबह तक चमक जाना चाहिए! मेरे सास ससुर की आखरी निशानी है! "
    " क्या ये आदमी पागल है? " ऊर्जा ने एकदम से कहा जिसका जवाब देते हुए विकि " हा बिलकुल... आपने सुना नही है क्या कभी! "
    ऊर्जा उसे घुरति रह गयी ।

    अब सुबह का सूरज क्या तबाही लाने वाला था ये सिर्फ आर्या ही जानती थी ।


    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 13. Crazy For Her - Chapter 13

    Words: 1548

    Estimated Reading Time: 10 min

    सुबह का वक़्त था जब देवांश अपने हाथ मे पकड़ी चिट को गहरी नजरों से घूरे जा रहा था ।
    एक तरफ खडे महेश और ऊर्जा के होठो पर मुस्कान थी जिसे वो बिलकुल भी छुपा नही रहे थे ।
    वो अच्छे से जानते थे , आर्या कोई हवा का झौका नही वो तूफान है जिसे रोकना लगभग नामुमकिन है!
    इतने गार्ड्स के बीच से भी वो आराम से निकल गयी थी, उपर से देवांश का गुस्सा बढ़ाने के लिए वो चिट भी लिखी!

    " देवांश ठाकुर.. फिल्हाल मेरे लिए तुम आखिरी टार्गेट हो! तबतक अपनी लाइफ इंजॉय करलो! और रही मुझे कैद करने की बात... तो वो तुम अपने सपनो में भी नही कर सकते! "

    देवांश ने दुबारा से पढकर एक गहरी सास ली और फिर वो मुस्कुरा पड़ा ।
    " तुम्हे कैद करना भी कौन चाहता है! मारने के सही लेकिन बहाने से मेरे पास तो आओ! " खुदसे कहते हुए उसने विकि की तरफ देखा " लोकेशन? "
    विकि ने डेविल स्माइल के साथ कहा " सिटी मॉल के पीछे वाली बिल्डिंग! "
    महेश और ऊर्जा हैरान रह गए । इससे पहले की दोनो मे से कोई आर्या को काँटेक्ट कर पाता विकि ने उनके फोन ले लिए और कहा  " अब आप दोनो आराम से यहा आराम कीजिये! हम भाबी को अपने साथ लेकर ही जायेंगे! आप आना चाहो तो विला के दरवाजे हमेशा खुले है! बाकी हमारे गार्ड्स आपकी प्रोटेक्शन के लिए हाजिर है! "
    इतना कहकर वो आगे बढ चुके देवांश के पीछे चला गया ।

    सिटी मॉल के पीछे ही बने छोटे से स्टेडियम मे यूनियन पार्टी की रैली आकर रुकी हुई थी ।
    लोगों की भीड़ और मीडिया , पुलिस की मोजुदगी मे लक्ष्य चौधरी...पार्टी के युवा नेता पार्टी को रिप्रेजेंट कर रहा था ।
    उसके अलावा पार्टी से पुराने विधायक आनंद , उसका बेटा तन्मय और मनबीर भी साथ देने के लिए पोहोच चुके थे । रात में काले काम कर दिन में सफेद कपडे पहनकर संत बने फिर रहे थे दोनो भेड़िये!
    उनके उपर बनी वो खुनखार नजरे गुस्से से लाल हो चुकी थी ।
    ये कैसा इंसाफ था गुनाह करने वाला खुले आम लोगों के बीच इज्जत से घूम रहा है और जिसके साथ हुआ वो दुनिया से मुह फिराकर चला गया ।
    गुस्सा था उन आखो मे.. समाज के लिए और साथ ही इंसाफ दिलाने के लिए नाकामयाब हुए कानून के लिए भी ।

    एक बिल्डिंग की छत पर वो आराम से बैठी नीचे देख रही थी । उसने काले रंग की हुडी पहनी थी जिसकी बडी सी केप सर को पूरी तरह कवर किए थी । मुह पर मास्क लगा था और सिर्फ वो लाल हो चुकी आखे नजर आ रही थी । वो लाल आखे स्टेज पर बैठे सभी लोगों पर घुमि और आखिर में मनबीर पर जाकर रुकी!
    " बोहोत शौक है ना इज्जत से खेलने का! लड़कियों को ब्लेकमेल कर डराए रखने का? .. असली डर क्या होता है तुम्हे अब पता चलेगा! " आर्या ने तीखी आवाज मे कहा और बैग खोलकर कुछ चीजे बाहर निकाली ।
    वो किसी चीज के पार्ट्स लग रहे थे जिन्हे वो कुछ ही सेकण्ड मे असेम्लब कर टेरेस की रेलिंग पर टिका देती है!
    वो स्नाईपर रायफल थी ।
    उसकी लेंस पर अपनी आख लगाते हुए उसने स्टेज पर बैठे मनबीर के सीने पर निशाना लगाया ।
    वक्त गुजर रहा था और आर्या अब भी स्थिर नजर आ रही थी ।
    जैसे ही मनबीर अपनी जगह से खडा हुआ आर्या ने ट्रिगर पर उंगली रख एकदम से शूट कर दिया ।
    गोली की तेज आवाज वहा गूंज उठी और लोगों मे भगदड मच गयी ।
    आर्या ने तिरछी मुस्कान के साथ रायफल फिरसे डिसेम्बल कर बैग में डाली और एकदम से छत की दूसरी तरफ दौड पडी ।
    पुलिस फोर्स बिल्डिंग में एंटर कर तेजी से छत की तरफ बढ़ी पर आर्या पूरी प्लानिंग के साथ थी ।
    उसने छत के किनारे पोहोच देखा सामने दूसरी बिल्डिंग से जुडी एक रस्सी लगी हुई थी । उसने बिना किसी सेफ्टी के उस रस्सी पर लगा एक हुक पकड लिया और स्लाइड करते हुए दूसरी बिल्डिंग के छत पर पोहोच गयी ।
    पुलिस जब पहली वाली बिल्डिंग के छत पर पोहोची तो आर्या ने उन्हे देख दो उंगलियों से सेल्यूट कर दिया । और रस्सी चाकू से काट दी ।
    पुलिस के मैसेज भेजने से पहले ही आर्या उस छत पर दौड पडी । उसने एकदम से किनारे पोहोच कर नीचे छलांग लगा दी ।
    छत से एक रस्सी बंधी नीचे तंज गली में उतर रही थी । आर्या के हाथ मे ग्लब्स होने की वजह से वो आराम से रस्सी के सहारे नीचे स्लाइड कर गली में उतर गयी । उसने एक बार आसपास देखा और कुछ ही पलों में गायब हो गयी ।

    पुलिस फोर्स खाली हाथ वापस लौट गयी । स्टेज पर मनबिर नीचे गिरा हुआ था और तन्मय उसके पास उसे संभाले बैठा था ।
    एक तरफ लक्ष्य ठंडी नजरों से सामने वाली बिल्डिंग को घूरे जा रहा था ।
    तन्मय ने कहा " थेंक गॉड... शायद निशाना चुक गया
    और गोली कंधे को छुकर निकल गयी! अगर थोड़ी नीचे लगती तो ये यही मर जाता! "
    लक्ष्य उनकी तरफ पलट गया । उसने कहा " इतना रिस्क लेने के बाद तुम्हे लगता है किसी का निशाना चुक जायेगा? "
    मनबीर पहले ही डर से काप रहा था.. लक्ष्य की बात सुनकर ओर डर गया ।
    लक्ष्य ने देखा पुलिस वापस आ गयी है । उसने ठंडी आवाज मे कहा " काफी कडा इंतेजाम था आपकी सिक्युरिटी का! "
    ऑफिसर की गर्दन नीचे हो गयी । लक्ष्य ने आगे कहा " मुझे जल्द से वो आदमी चाहिए.. किसी भी हालत मे! "
    फिर उसने तन्मय की तरफ देखा " हॉस्पिटल ले जाओ इसे और बिना सिक्युरिटी के कही मत निकलना! "
    फिर वो गुस्से मे अपनी गाडी की तरफ बढ गया । एलेक्शन के माहौल मे ऐसा अटैक... पार्टी के लिए काफी बड़ा खतरा था । उपर से आज की पूरी मेहनत पानी में मिल गयी थी ।

    वही दूसरी तरफ आर्या भागते हुए एक गली से बाहर निकली तो वो एकदम से उसके कदम रुक गए । सामने बोहोत सारी गाड़िया और गार्ड्स खडे थे । उनके सामने विकि हाथ बांधे खड़ा था । आर्या को देख उसने शैतानी मुस्कान के साथ भौहें उठा दी ।
    आर्या की आखो मे चीड साफ नजर आने लगी । वो दुबारा से गली की तरफ पलट गयी तो वहा भी गार्ड्स आकर खडे हो चुके थे । आर्या ने जमीन पर पैर मार दिया । तभी उसने खुदसे कहा " इन्होंने मुझे ढूंडा कैसे होगा? "
    उसे शायद एहसास ही नही हुआ की उसकी दाएँ हाथ की उंगली मे एक रिंग चमक रही थी ।
    विकि ने कहा " यार  ... तुम्हे डर वर लगता है कि नही! पुलिस को छेडकर आ गयी? "
    आर्या सर्द निगाहों से उसे देखने लगी । उसने एकदम से कमर मे हाथ डाल गन निकालनी चाहि उससे पहले ही पीछे से एक फीमेल गार्ड ने आकर उसका हाथ पकड लिया ।
    आर्या ने सर हिला दिया । अब ये बोहोत ज्यादा हो रहा था । उसने गार्ड ने पकडा हाथ एकदम से घुमाया और उस गार्ड को जमीन पर पटक दिया ।
    विकि का मुह हल्के से खुल गया वही गाडी के अंदर बैठे देवांश की आखो मे एक जुनून उतर आया ।

    गार्ड ने नीचे गिरे होने के बावजूद आर्या का हाथ नही छोड़ा था ।
    आर्या ने गहरी सास ली । लेकिन कोई ऑप्शन नही था । दुसरे हाथ की मुट्ठी बनाकर उसने गार्ड के मुह पर मार दिया ।
    गार्ड की आखे बंद हो चुकी थी पर पंच लग पाता उससे पहले ही आर्या खुदको हवा में महसूस कर पा रही थी ।
    किसी ने उसे गुडिया की तरह उठा लिया था जैसे उसमे कोई वजन ही न हो!
    आर्या हक्की बक्कि होकर गर्दन घुमाते हुए देखती है तो देवांश मुस्कुराते हुए उसे सीधे गाडी की पिछली सीट पर डाल देता है ।
    वो उठ पाती उससे पहले ही वो अंदर आकर बैठ गया और मजबूती से उसके हाथ पकड लिए ।
    फिर उसने दूसरे हाथ से आर्या का मास्क नीचे कर दिया ।
    " उफ्फ कितना गुस्सा आता है तुम्हे जान? लेकिन मेरे प्यार के सामने फिर भी इसका कोई मैच नही! " देवांश ने प्यार से कहा तो आर्या ने उससे हाथ छुड़ा लिए और दरवाजा खोलने लगी । पर आगे की सीट पर बैठा ड्राईवर फोरन दरवाजे लोक कर देता है । पैसेंजर सीट पर विकि भी आकर बैठा हुआ था ।
    आर्या ने उसकी तरफ देखते हुए कहा " दरवाजा खोलो वरना तोड दूंगी... ! "
    विकि ने दात दिखाते हुए कहा " थोड़ी मेहेंगी है इसलिए अन ब्रेकेबल है! तुम्हे मेहनत करनी पड़ेगी.. करो करो.. तबतक हम आराम से घर पोहोच जायेंगे! "
    आर्या ने गर्दन टेडी करली । उसने सर्द आवाज मे कहा " मै गाडी की नही तुम तीनों की हड्डियों की बात कर रही थी । ड्राईवर के साथ साथ देवांश और विकि भी हैरान होकर उसे देखते है ।
    विकि ने गला तर करते हुए ड्राईवर को हिलाया " अबे चल ना... वरना घर पोहोचने से पहले है उपर जरूर पोहचा देगी! भाई संभाल लेना कुछ देर इसे! "
    आर्या हल्के से झुकी और जूते मे छुपाया खंजर बाहर निकाल कर देवांश पर चला दिया ।



    To be continued...


    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 14. Crazy For Her - Chapter 14

    Words: 1368

    Estimated Reading Time: 9 min

    एक अंजान सडक पर देवांश की गाड़ी पुरे स्पीड मे चलने लगी । गाड़ी की पिछली सीट पर जबरदस्ती बिठाई गयी आर्या ने जूते मे छुपाया खंजर निकाल कर एकदम से देवांश के उपर चला दिया ।
    देवांश की आखे बड़ी हो गयी वही विकि मिरर मे देख चिल्ला पड़ा ।
    आर्या का चाकू लगता उससे पहले ड्राइवर ने गाडी एक तरफ घुमा दी । चाकू सीट पर धस गया वही आर्या पूरी तरह देवांश के उपर आ गयी ।
    वो पहले से गुस्से मे थी । उसने चाकू बाहर निकालना चाहा तो देवांश ने उसके दोनो हाथ पकड़ लिए । विकि ने हल्के से उठते हुए पीछे झुक चाकू ले लिया ।
    आर्या खा जाने वाली नजरों से उसे घूरने लगी ।
    ये देख विकि ने कहा " भाई अच्छे से चेक करो इसे .. पता नही और क्या क्या छुपा रखा होगा! "

    आर्या ने खुदको पीछे खीचा तो देवांश भी उसके साथ खिचा चला आया जिस वजह से वो संभल न पायी और पीछे सीट पर लेट गयी ।
    देवांश ने मजबूती से उसके हाथ जकड़ते हुए मजाकिया अंदाज मे कहा " अगर किसी ने अभी हमे ऐसे देख लिया तो मेरे बारे में क्या सोचेंगे! छि.. छि! "
    विकि ने फोरन आखो पर हाथ रख कहा " हम कुछ नही देख रहे! "
    आर्या ने उसके कंधे पर सर मारा और पैर सीट से लगाते हुए देवांश को पलट कर उसके उपर आ गयी, लेकिन इस चक्कर मे दोनो सीट से नीचे गिर चुके थे ।
    विकि ने कहा " अच्छा हुआ गाडी थोड़ी बड़ी है! आप आराम से रोमांस कर सकते हो पर... मेरे खयाल से बेडरूम के लिए भी कुछ बचाके रखो तो? "
    आर्या ने गुस्से भरी आवाज में कहा " विकि के बच्चे अगर तुम्हारी जबान से एक शब्द भी बाहर आया तो उसे काट दूंगी! और तुम्हारे दिमाग के गंदे खयाल निकालने के लिए उसमे गोलिया डाल दूंगा! "
    उसने देवांश के सीने पर हाथ रख उठना चाहा तो सीट उसके कंधे से लग गया और वो दुबारा उसके सीने पर गिर पड़ी । दोनो लगभग वहा फस चुके थे ।
    देवांश ने गहरी मुस्कान के साथ कहा " देखा.. भगवान भी नही चाहते तुम मुझसे दूर जाओ! एंड डोंट फरगेट मैने क्या कहा था... तुम जहा जाओगी मुझे ही पाओगी!
    इसलिए अब आराम से घर पोहचने तक का इंतेजार करो.. किसी से मिलाना है तुम्हे! "

    आर्या ने आखे घुमाली और दुबारा कोशिश की पर कोई फायदा नही हुआ । देवांश आराम से उसे देखता रहा ।
    आर्या ने उसे घुरा और उसके सीने पर मुक्का मारते हुए चुपचाप सर वहा टिका दिया ।
    देवांश हस पड़ा था ।

    कुछ ही देर मे वो ठाकुर विला के अंदर पोहचे । गाडी रुकते ही विकि बाहर आकर पीछे वाला दरवाजा खोल देता है । उसके होठों पर हसी थी । बाकी सब भी गाडी के अंदर झाकने लगे जिसकी वजह से आर्या शर्म से पागल होने लगी ।
    विकि ने उसे खिचकर बाहर निकाला फिर देवांश को । बाहर आते ही आर्या सबको घूरने लगी तो वो सकपका गए और फोरन इधर उधर हो गए ।
    देवांश ने अपने कपडे ठीक किये और आर्या के पास आकर कहा " ऐसे घूरने से क्या होगा उन्हे? वजह भी तो तुमने ही दी थी, अब तुमसे कंट्रोल नही हो रहा तो...? "
    आर्या ने उसकी तरफ पलट के उसका मुह बंद कर दिया । देवांश ने वो बात काफी तेज आवाज में कही थी ।

    आर्या ने चीड़ के साथ कहा " तुम भूलो मत की मेरी बैग मे अभी भी स्नाईपर है! कितना वक्त लगेगा मुझे तुम्हे मारकर यहा से निकलने मे! "
    देवांश ने बेशर्मी के साथ उसके हाथ पर किस किया तो आर्या ने फोरन हाथ पीछे खिच लिया ।
    देवांश ने उसके करीब आकर कहा " वेल.. अगर तुम मुझे मार भी दोगी तो भी ये लोग तुम्हे कुछ नही करेंगे! लेकिन तुम बाहर तो कभी नही निकल पाओगी! ये सिर्फ घर नही है.. जेल है ! जहाँसे कोई चाहे तो भाग नही सकता! पर... मै तुम्हे जब चाहे तब बाहर ले जा सकता हूँ! "
    आर्या की आखे छोटी हो गयी । उसने एक नजर घर पर डाली तो देवांश की बातों में झुट नही लगा उसे । घर की दीवारे काफी मजबूत और उची थी । गेट भी मजबूत लोहे से बना हुआ था जहा कही सारे गार्ड्स पहरा लगाए थे । हर जगह कैमरा की नजरों मे थी ।
    आर्या ने गहरी सास ली और निचले होठ को काटना शुरू कर दिया ।

    देवांश ने उसके सामने चुटकी बजा दी " क्या हुआ.. डर लग रहा है? डोंट वरी कैद नही करूँगा तुम्हे? लेकिन बाहर जाने की लिए तुम्हे मेरी हर बात माननी होगी! "
    आर्या नीचे झुकी और जूता खोलने लगी ।
    सभी उसे हैरानी से देखने लगे ।

    विकि ने कुछ सोचते हुए कहा " लगता है ये जूते पहन कर किसी के घर नही जाती! "
    उतने मे आर्या ने जूता उठाकर देवांश को मार दिया ।
    " ओय्य.. क्या कर रही हो? " देवांश ने एकदम से उसे मिस कर दिया था । तभी आर्या ने दूसरा जूता फेका ।
    एक गार्ड ने आकर हवा में ही उसे पकड़ लिया ।
    आर्या गुस्से मे तिलमीलाते हुए " खुदको कही का महाराज समझते हो या मुझे अपना नौकर? बडे आए तुम्हारी मर्जी के बिना बाहर नही जा सकती ! देखती हूँ कौन रोकेगा मुझे? "
    इतना कहकर वो नंगे पाव ही बाहर की तरफ चल पड़ी । बीच रास्ते में ही बॉडी गार्ड्स खडे हो गए थे जिन्हे देख आर्या ने पीठ पर लगा बैग निकाल कर सामने किया और उसमे कुछ ढूंढने लगी ।
    देवांश ने गहरी सास भर ली । ये लडकी उसकी सोच से कही ज्यादा सनकी थी । पता नही आज कितना खुन कराबा कर चैन मिलने वाला था उसे!

    आर्या के हाथ में कटर लगते ही उसने उसे बाहर निकाल कर आगे बढती रही ।
    वो उन गार्ड्स तक पोहोच भी पाती उससे पहले ही एक प्यारी सी आवाज ने उसके कदम रोक दिए ।
    आर्या की आखे बड़ी हो गयी । इस आवाज को वो कैसे ना पहचानती!
    " सोमु...! " धीरे से कह वो पीछे पलट गयी । हा उसके सामने उसकी मासूम सी सोमु थी जो विकि के बाहो मे छुपे पीछे खडी नर्स की शिकायत कर रही थी ।
    " विकि.. इनसे कहो! मुझसे दूर रहे! ये गंदी है और.. और मुझे गंदी सी दवाइयाँ खिलाती है! " उसने अपनी बड़ी बड़ी पलके झपकाते हुए कहा तो विकि मुस्कुरा पड़ा ।
    उसने प्यार से सौम्या के सर पर हाथ फिरा दिया और कहा " लेकिन शोना दवाई नही खायेगी तो फिर जल्दी जल्दी स्ट्रॉंग कैसे होगी? "

    सौम्या ने सर हिला दिया " हा.. मुझे दीदी की तरह बोहोत ज्यादा स्ट्रॉंग बनना है! जैसे वो सबको मारती है वैसे मै भी मारूंगी, उन गंदे लोगों! "
    आर्या के कानों मे उसकी बातें पड़ रही थी जिसे सुनकर उसकी आखे भीग गयी । क्या हालत हो गयी थी उसकी सोमु की! उसके कदम उन दोनो के बिलकुल पास जाकर रुके!
    आर्या ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा " सोमु! "
    सौम्या ने बिलकुल भी उसकी तरफ नही देखा , जैसे उसकी बात उसके सुनी ही ना हो । आर्या को अपने सीने में दर्द महसूस होने लगा । वो गहरी गहरी सासे ले रही थी । माथे पर पसीना झलक आया और ऐसे लग रहा था जैसे गले में एक गुबार अटक गया हो ।
    देवांश ने फोरन आकर आर्या को सहारा दे दिया ।
    उसने धीमी आवाज में कहा " शांत.. शांत हो जाओ जान! तुम्हारी सोमु बिलकुल सेफ है! बस उस हादसे की वजह से दिमाग पर गहरा असर हो गया है! "
    आर्या ने उसकी तरफ देखा तो देवांश भी हैरान रह गया । आर्या की आखे लाल थी और नाक से लगातार खून बह रहा था ।
    देवांश ने फोरन अपना रुमाल निकाल कर उसके नाक पर रख दिया और सक्त आवाज में कहा " मैने कहा ना शांत हो जाओ! उन लोगों को मारने से पहले ही खुदको खत्म करना चाहती हो? "
    आर्या ने गर्दन हिला दी । उसकी आखे बंद होने लगी थी ये देख देवांश ने उसे अपने सीने में भर लिया ।



    To be continued....


    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 15. Crazy For Her - Chapter 15

    Words: 1491

    Estimated Reading Time: 9 min

    ठाकुर विला,
    रात का वक्त,

    आर्या को जैसे ही होश आया उसे महसूस हुआ जैसे कोई लगातार उसके सर पर हाथ फेर रहा है । उसने धीरे से आखे खोली तो खुदको एक कमरे मे बिस्तर पर सोए हुए पाया।
    उसने नजरे घुमाई तो देवांश उसके पास बैठा काम कर रहा था लेकिन उसका एक हाथ लगातार आर्या के बालो में चल रहा था ।
    आर्या के हिलने की आहट महसूस करने फाइल से ध्यान हटाकर उसकी तरफ देखा ।
    आर्या को जागते हुए देख उसने मुस्कान के साथ पूछा " हाउ यु फीलिंग? "
    आर्या उठकर बैठ गयी ।
    उसने गहरी सास लेकर अपना सवाल दाग दिया " हाउ.. ? सोमु जिंदा है! लेकिन महेश खुद उसका सामान उस पहाडी से ले आया था! उसकी बॉडी, मेडिकल रिपोर्ट? "
    देवांश ने सर हिला दिया । उसने कहा " जरूरी नही जो आखो को दिखाई दे या कानों को सुनाई दे वो हमेशा सच ही हो! मै उन लोगों को बचाने में कभी शामिल नही था, लेकिन वो मदत मांगने जरूर आये थे!
    पता नही किसने ये बात फेला दी हम उसके साथ खडे है, शायद इसलिए क्युकी फिर गवाह डरकर पीछे हट जाते! "

    आर्या ने सर पकड लिया " तुम्हारा नाम बीच में आ रहा था और तुम आराम से बैठे रहे, इतने महान हो? "
    देवांश ने एकदम से उसका चेहरा थामकर कहा " ट्रस्ट मी जान, मै नही था उस वक्त यहा.. तुम्हारी कसम! जबतक वापस आया तबतक केस खत्म हो चुका था और हमे सिर्फ वो लड़की मिली जिसकी दिमागी हालत खराब थी और लगभग वो पहाडी से कुदने ही वाली थी ।
    उसकी जान को खतरा हो सकता है ये जानते हुए ही हमने झूठे रिकॉर्ड बनाये थे होस्पिटल मे , ताकि सौम्या सेफ रहे! "

    " तुम तो किसी से भी भीड सकते हो फिर सोमु को छुपाने का क्या मतलब और क्यु तुमने उन्हे उन लोगों की तरह नही मारा जैसे उन छह को मारा था जो मेरे पीछे थे! " आर्या उसके हाथ अपने चेहरे से हटाते हुए कहने लगी ।
    देवांश ने कहा " दुनिया में जिसके पास पावर होती है वही मैदान में टिक पाता है और देवांश ठाकुर अकेला नही है ऐसा! उन दोनो को मारना इतना आसान नही था उन लड़को के बाप के बारे में तो पता लगा ही लिया होगा ।  तो उनके बापो का भी एक बाप है... चौधरी! जिसके साथ मै सामने से नही भीड़ सकता! "

    आर्या ने ठंडी सास छोड़ी! उसने बालो में हाथ घुमाया और कहा " अब मुझे यहा कबतक रखने का इरादा है तुम्हारा? तुम उनसे नही भीड सकते लेकिन वो मुझे नही जानते है! "

    " आज जो हरकत की है उसके बाद तो शायद जरूर जान जाते! सोचना भी मत की मै तुम्हे जाने देने वाला हु!
    पहले कोई कमजोरी नही थी तुम्हारी और ना जीने की वजह, लेकिन आज दोनो है! तुम्हे अब सोच समझ कर कदम रखना होगा! " देवांश ने सक्ति से कहा तो आर्या भी उसकी बात से सहमत हो चुकी थी ।
    सचमे उसकी जीने की कोई वजह नही थी इसलिए उसे मौत का भी कोई डर नही था... लेकिन अब वो आसानी से नही मर सकती! उसे जीना होगा, उसकी सोमु के लिए!

    तभी दरवाजे पर दस्तक हुई । आर्या एकदम से देवांश के हाथ अपने चेहरे से हटाकर दूरी बनाते हुए बैठ गयी । ये देख देवांश की भौहें चढ गयी ।
    उसने नाराजगी भरी आवाज में कहा " आ जाओ! "
    दरवाजा खुलते ही विकि और सौम्या अंदर आ गए ।
    आर्या गौर से उसे देखने लगी जैसे उसके चेहरे को आखो मे समा रही हो ।
    कैसी थी उसकी सोमु और कैसी हो गयी है, उसे आज भी रिग्रेट होता है कि वो क्यु गयी थी एब्रोड! अगर वो दो महीने वहा ना जाती तो यहा ये सब ना हुआ होता!
    इन दो महिनो मे कोई कोंटाक्ट नही हुआ था उसका सौम्या के साथ काम की वजह से ।
    लेकिन सौम्या के काफी सारे वॉयस मैसेज थे उसके लिए... वो आखिरी मैसेज जब वो दर्द और तकलीफ से लड़ रही थी, रोज केस में हो रही बातों को बता रही थी.. कैसे उसपर घटिया इल्जाम लगाए जा रहे थे, कैसे उसे बदनाम किया जा रहा था और आखिर मे मारने तक की कोशिश होने लगी!
    एक वक्त बाद उसके कोई मैसेज नही आये और जब आर्या ने वो मैसेज देखे तो वो लगभग सदमे मे चली गयी । पूरे छह महीने वो अपने दिमाग से लड रही थी और आज भी वही चल रहा है । उसकी जिंदगी का एक ही मकसद था... उन दोनो लडको को मारना!

    " क्या आप मुझसे मिलना चाहती थी? " उस प्यारी सी आवाज से आर्या होश मे आयी । सौम्या उसके सामने आकर बैठी थी और उसका हाथ भी पकड़ रखा था ।
    आर्या की आखे एक पल में नम हो गयी ।
    सौम्या ने गहरी मुस्कान लिए कहा " विकि ने बताया आप मुझसे मिलना चाहती हो! मैने देखा आपको खून निकल रहा था नाक से, आप बीमार हो क्या? "
    " नही... अब बिलकुल ठीक हु! " आर्या के गले से बडी मुश्किल से वो शब्द बाहर आये ।
    सौम्या मुस्कुरा दी उसने कहा " फिर तो बोहोत अच्छी बात है, वैसे आपका नाम क्या है? मेरा नाम शोना है! "
    आर्या ने गर्दन पर हाथ फिराया और कहा " मेरा नाम... मेरा नाम आर्या है! "

    " अरे... ! " , कहते हुए सौम्या चौक उठी " मेरी दीदी का नाम भी आर्या ही है! क्या आप जानते हो उन्हे? "

    " हा.. जानती हु ना! " आर्या ने रुँधे गले से कहा तो देवांश ने फोरन उसकी हाथ की उंगलियों मे अपनी उंगलियाँ फसा ली ।

    " फिर आप बताओ ना उनको की मेरे पास आ जाए! मैने कितना याद किया उन्हे, वो आ ही नही रही! क्या वो नाराज है मुझसे? " सौम्या का चेहरा रोने जैसा हो गया ।
    लेकिन उसकी बात सुनकर आर्या फुटफुटकर रो पडी ।
    उसने कहा " सॉर्री.. आई एम सॉर्री! मै नही थी तुम्हारे पास! नाराज तो तुम्हे होना चाहिए ना मुझसे! बोहोत बुरी बहन हु मै! "
    इतना कहकर उसने खुदको थप्पड मार लिया " मै नही कर पायी तुम्हे प्रोटेक्ट! नही हु मै अच्छी बहन! "
    उसका रोना बढ चुका था ये देख देवांश ने उसे फोरन संभाल कर अपने सीने से लगा लिया और विकि से कहा " बाहर ले जाओ उसे, डर रही है वो! "

    विकि ने देखा सौम्या सचमे काप रही थी । उसने फोरन उसे गोद मे उठा लिया और कमरे के बाहर चल पड़ा ।
    सौम्या बोहोत देर तक पीछे मुड़कर देखती रही ।

    वही आर्या रोते रोते दुबारा से बेहोश हो चुकी थी ये देख देवांश ने उसे ठीक से लिटाकर फोरन डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा ।
    आर्या का दिमाग जितना आज तक काबू मे रहा उतना ही सौम्या को देख ट्रिगर हो रहा था । सौम्या की हालत देख वो खुदको इल्जाम लगा रही थी । हर पल उसका गिल्ट बढ़ता जा रहा था जो उसके लिए हानिकारक था ।
    डॉक्टर ने आकर आर्या को चेक किया और कुछ दवाईया बदल दी ।
    उन्होंने कहा " अगर कोई इम्प्रोवमेंट ना लगे तो इन्हे होस्पिटल मे एडमिट कराना होगा! वी डोंट नो की वो कबतक नॉर्मल रह पाएंगी! अगर फिरसे उन्हे पागलपन...! "

    " बस बस डॉक्टर... चलिए आपको बाहर तक छोड दु! " देवांश की हालत देखते हुए विकि ने डॉक्टर की बात काट दी ।
    वो बोहोत टूटा हुआ लग रहा था और साथ मे शांत भी ।
    आर्या की हालत के बारे में जानकर पल पल वो डर का एहसास मेहसूस कर पा रहा था ।
    भले ही ये पागल लड़की उसकी फीलिंग ना समझे पर वो खुद तो समझता था कि किस हद तक उसे आर्या से मोहब्बत हो चुकी थी ।
    अगर उसे कुछ भी हुआ तो वो सास भी कैसे ले पायेगा ।

    उसने एकदम से अपना सर आर्या के कंधे पर टिकाते हुए चेहरा उसकी गर्दन मे छुपा लिया ।
    रुन्धि आवाज के साथ उसने कहा " मत तड़पाओ ना अब जान! क्यु परेशान कर रही हो यार, बोहोत प्यार करता हूँ मै तुमसे! अगर तुम ऐसे ही रही तो मै भी खुदको संभाल नही पाऊंगा! क्या ऐसा नही हो सकता की तुम कुछ दिन के लिए सबकुछ भूल!
    भूल जाओ अपना बदला और सिर्फ हमारे साथ हमारे लिए जियो! आई प्रोमिस अगर ऐसा हुआ तो मै खुद बिना किसी की पर्वा किये बीच चोराहे पर उन दोनो को लटका दूंगा , फिर उसके लिए कोई भी कीमत क्यु ना चुकानी पडे! "
    आर्या की आख से आसु की धार बहने लगी । वो देवांश को अपनी बाहो मे समा लेना चाहती थी, उसे शुक्रिया कहना चाहती थी... उसकी सोमु को जिंदा रखने के लिए!
    शुक्रिया कहना चाहती थी उसकी जिंदगी में आने के लिए और उससे प्यार करने के लिए पर वो अपने हाथ न बढ़ा सकी । चुपचाप देवांश की बाते सुनते हुए वो आखे बंद कर लेटी रही ।



    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 16. Crazy For Her - Chapter 16

    Words: 1304

    Estimated Reading Time: 8 min

    सुबह का वक्त,

    ठाकुर विला मे आख खुलते ही आर्या ने अपने उपर कुछ भारी सा महसूस किया । इस वक्त उसके चेहरे पर कोई भी भाव नही था । फिर उसने धीरे से नजरे नीची कर देखा, देवांश बच्चों की तरह उसके सीने पर सर रखे सो रहा था ।
    आर्या की आखे नरम पड गयी । उसने अपना एक हाथ उठाया और उँगली से देवांश के बाल माथे पर से हटा दिए । देवांश की पकड उसपर मजबूत हो गयी ।
    आर्या ने महसूस किया देवांश जाग रहा है । ये देख उसने कहा " देवांश उठ जाओ, बोहोत भारी हो तुम! "
    देवांश ने होठ सिकुड कर उनींदी आवाज में कहा " तो फिर अपने आपको इतना स्ट्रॉंग क्यु बताती रहती हो, जब मेरा वजन भी नही झेल सकती! मुझे लगा तुम इतनी धमकिया देती रहती हु तो थोडा टेस्ट किया जाए! "
    उसकी आखे अब भी बंद थी ।

    " माना कि मै बोहोत स्ट्रॉंग हु! ", आर्या ने कहा " इसका ये मतलब नही की तुम मेरी हड्डियों का कचूमर ही बना दो! उठो जल्दी! "
    देवांश ने मुह बनाते हुए धीरे से चेहरा उपर उठाया । बोहोत मासूम लग रहा था वो इस वक्त! कोई कैसे कहे की वो एक खतरनाक माफिया है!
    आर्या की नजरे उसके चेहरे पर टिक गयी । फिर उसने मासुमि से कहा " बोहोत भूख लगी है देवांश! "

    अपना गला तर करते हुए देवांश ने एक पल उसे देखा और फिर एकदम से उठकर बिस्तर से उतर गया । उसने कहा "  फ्रेश हो जाओ मै नाश्ता मंगाता हु! "
    आर्या ने कहा " मुझे सबके साथ खाना है! "
    देवांश फोन उठाने ही वाला था की रुक गया । उसने सर हिला दिया और कहा " ठीक है! तुम तैयार हो जाओ, सबके साथ नाश्ता करते है! वहा से कपडे ले लेना! "
    इतना कहकर उसने वेयरड्रॉब की तरफ इशारा कर दिया और खुद नहाने के लिए दूसरे कमरे मे चला गया ।
    आर्या ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा " यू ही बीचारे को जेल भेज कर आयी! इतना बुरा भी नही है... क्यूट है! "
    फिर वो भी उठकर तैयार होने चली गई ।


    तैयार होने के बाद वो सीधे नीचे चली गई । देवांश, विकि और सौम्या डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे । तिनों ने सिडियो पर खडी आर्या की तरफ देखा । उसने काले रंग की ओवर साइज टीशर्ट और ट्रैक पैंट पहनी थी ।
    " आर्या दीदी जल्दी आओ.. बोहोत भूख लगी है! " सौम्या ने कहा तो आर्या मुस्कुराते हुए जल्दी जल्दी सिडिया उतरने लगी ।

    वो सबके पास आकर खडी हो गयी । उसे सौम्या के पास बैठना था पर वो देवांश और विकि के बीच वाली चेयर पर थी ।
    आर्या विकि को घूरने लगी ।
    विकि ने देखा तो आराम से कहा " मुझे घूरने से तुम्हारा पेट नही भरेगा, चुपचाप भाई के पास बैठ जाओ! "
    इतना कहकर उसने मुस्कुराते हुए निवाला सौम्या की तरफ बढ़ाते हुए कहा " मेरी शोना मेरे हाथ से ही खाना पसंद करती है! "
    सौम्या ने फोरन सर हिला दिया और मुह खोलकर उसके हाथ से निवाला खा लिया ।
    आर्या ने टेबल पर से एक फोल्क हाथ मे उठाते हुए कहा " तुम्हे पता है, एक फोल्क भी इंसान की जान ले सकता है! खासकर तब... जब वो मेरे जैसे किसी के हाथ मे हो! "
    विकि ने पहला निवाला ही खाया था कि उसे एकदम से खासी छुट गयी ।
    सौम्या ने चिंता करते हुए कहा " क्या हुआ विकि? आराम से खाओ ना! "

    " वो शर्मा रहा है सोमु! ", आर्या ने आराम से कहा " तुम उसके पास बैठी हो ना इसलिए! आ जाओ मेरे पास, फिर बिलकुल आराम से खायेगा! "
    विकि ने खुदको शांत किया और कहा " भाई देखो ना इसे! "
    " ओह्ह.. बच्चा फिरसे पापा के पास शिकायत लेकर पोहोच गया! " आर्या ने मजाक उडाने वाले ढंग से कहा तो विकि चीड उठा ।
    इससे पहले की कोई कुछ कहता देवांश ने कहा " जान बैठ जाओ पहले! तुमने कल पुरा दिन कुछ नही खाया है! "
    आर्या ने आखे घुमाई और चुपचाप उसके पास बैठ गयी । सौम्या ने कहा " क्या तुम सचमे शर्मा रहे हो विकि? मै उठ जाऊ यहाँसे? "
    विकि ने फोरन कहा " बिलकुल नही शोना! दरसल आर्या को जलन हो रही है, मै तुम्हे खिला रहा हूँ और देव भाई उसे नही खिला रहे तो! "
    देवांश होठों से ग्लास लगाए मुस्कुरा पडा वही आर्या का हाथ खाते हुए रुक गया ।

    " देव भाई ... आप भी आर्या दीदी को खिलादो ना! फिर उन्हे जलन नही होगी! " सौम्या ने मासुमियत से कहा ।
    देवांश ने कहा " हा हा बिलकुल.. ! "

    आर्या ने विकि को देख ठंडी आवाज में कहा " इसके बदले तुम्हे मिर्ची ना खिला दी तो मेरा नाम बदल देना! "
    " वेल.. हुकुम का इक्का फिल्हाल मेरे पास है! ", विकि ने भौंहे चढाकर कहा " इसलिए तुम भी मेरे कंट्रोल मे हो मिस आर्या साहनी! "

    " हनन! ", आर्या भुनभुनाते हुए " मेरी सोमु को ठीक होने दो, फिर देखती हूँ कौन किसके हाथ मे आता है या पैर पडने! "
    देवांश ने एकदम से उसके सामने निवाला कर दिया जिसे वो बड़ा सा मुह खोलकर गुस्से मे खा गयी ।




    एक घर के कमरे मे तन्मय बिस्तर पर लेटा हुआ था । उसके पास मनबीर भी मौजूद था ।

    तन्मय ने कहा " क्या वो अटैक देवांश ठाकुर ने कराया होगा? "

    " ऐसा क्यु बोल रहा है भाई! तुझे मै चेन से सासे लेता देख अच्छा नही लग रहा क्या? " मनबीर ने डरसे घुट भरते हुए कहा ।
    तन्मय ने कहा " याद कर वो कितना पागल हो गया था जब उस सौम्या ने सुसाइड कर लिया था! उस वकील पर हाथ डालने गए थे तो उसके पकड मे आते हुए बचे है! तुझे पता है ना वो फेमिनिस्ट आदमी है... इतनी आसानी से जाने नही देगा हमे! "

    मनबीर ने कहा " भाड मे गया इलेक्शन, जान ज्यादा जरूरी है! फिरसे अंडर ग्राउंड हो जाते है! "

    " सही बोल रहा है! जरूरत पडने पर लक्ष्य सिर्फ खुदके और अपने बाप के बारे मे सोचता है! तो हम क्यु उनकी फिक्र करे? " तन्मय ने कहा ।

    भले ही वो अभी खुदको स्ट्रॉंग दिखा रहे थे, लेकिन डर दोनो के मन मे था । भले ही उन्हे सौम्या के लिए कोई पछतावा ना हो पर अपना गुनाह अच्छे से याद था! और ये भी याद था कि कोई है जो उन्हे उनके गुनाह गिनवाकर ही दम लेगा!



    एक कमरे मे लक्ष्य चौधरी लेपटॉप मे उंगलिया चला रहा था । उसकी नजरे स्क्रीन पर दौड रही थी पर चेहरा बिलकुल शांत था ।
    एकदम से उसने अपने हाथ रोक कर नजरे स्क्रीन पर जमाते हुए कहा " आई न्यू इट! ये देवांश ठाकुर का काम नही था! वो ना छुपकर वार करता है और ना ही किसी और से करवाता है! ये जो भी है दोनो को डराकर मारना चाहता है! आई एम इम्प्रेसड गर्ल ! "

    उसके होठों पर तिरछी मुस्कान आ गयी " ये चेहरा देखने की तम्मना बढ रही है! हु आर यु ? मै बस चाहता हूँ ये तुम ही रहो जिसे मै जानता हूँ! "
    आर्या के टेरिस पर जाते हुए फोटो को जुम किए वो देख रहा था । उसके सर की हुडी कुछ ज्यादा ही बडी थी और उस वक्त मास्क नही लगा था जिसकी वजह से उसके होठ और नाक साफ दिखाई दे रही थी ।

    उसने फोन निकाल कर किसी को लगा दिया और कहा " पता करो वो कहा गयी है! आई वांट देट स्नाईपर अलाईव! "
    फोन कट कर वो आराम से सोफे पर फेल कर बैठ गया और फोन को हाथमे घुमाने लगा । उसके होठों की मुस्कान बरकरार थी ।


    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 17. Crazy For Her - Chapter 17

    Words: 1372

    Estimated Reading Time: 9 min

    आर्या ने देवांश और सौम्या के लिए खुदको शांत तो कर लिया था पर उसके दिल में लगी आग शांत नही हुई थी । उसकी नजरे फिरसे कठौर हो गयी , जब टीवी पर यूनियन पार्टी के रैली की फुटेज दिखाई जा रही थी । हाथ मे पकडा हुआ एप्पल उसकी मजबूत होती उंगलियों का भार सह रहा था ।
    दूसरे हाथ मे पकडा हुआ चाकू भी लगातार उसके हाथ मे घूम रहा था । उसकी आखो मे अजीब सा पागल पन दौड़ने लगा था ।

    देवांश हाथ मे फोन घुमाते हुए घर के हॉल में पोहचा ही था कि आर्या को देख उसकी रफ्तार तेज हो गयी । उसने झट से टेबल पर रखा रिमोट उठा कर टीवी ऑफ कर दिया ।
    टीवी बंद होते ही आर्या जैसे गहरी नींद से जागी हो । उसने ठंडी सास छोड़ी और सामने देखा तो देवांश एकदम से उसके उपर झुकते हुए उसे गले लगा लेता है ।
    " जान...! " उसने भारी सास आर्या के गले पर छोडते हुए कहा ।
    आर्या ने उसकी पीठ पर दोनो हाथ रखे और धीरे धीरे उसकी पीठ पर फिराते हुए कहा " मै ठीक हु देवांश, ऐसे छोटी छोटी बातों से परेशान मत हो जाओ! मेरे बारे मे एक बात जानलो की मै जो भी चीज करने की सोचती हूँ उसे पुरा करके ही दम लेती हूँ और फिल्हाल तुम दोनो को वक्त देने के बारे मे सोचा है मैने! "
    देवांश ने उसकी गर्दन पर अपने होठ टिका दिए और धीरे से कहा " फिरसे तवांग जाए क्या? तुम्हे पसंद है ना वो जगह? "
    आर्या ने उसे दूर करते हुए कहा " मरना नही है वहा जाकर! और मुझे ठंडी जगह ज्यादा पसंद नही है, सोमु की जिद थी मै उसे वहा लेकर जाऊ पर कभी वक्त ही नही मिला! मुझे लगा मैने उसे हमेशा के लिए खो दिया है इसलिए कमसे कम उसकी लास्ट विश पूरी करूँगी इस वजह से वहा पर गयी । "
    " ओह्ह ...! " , देवांश ने भौहें उठाते हुए कहा " तो फिर कही दूसरी जगह चलते है, जो भी तुम्हे पसंद हो! "
    " इतने ठंडे मौसम मे मुझे सिर्फ बिस्तर और ब्लैंकेट पसंद होता है! " आर्या ने हाथ सिकुड कर कपकपाने एक्टिंग करते हुए कहा तो देवांश हस पडा ।
    उसने कहा " घूमने का मजा सर्दी मे ही आता है, चलो लोकेशन डिसाईड करते है! शोना भी हमेशा ही घर में बंद रही है, क्या पता बाहर जाने से बेहतर महसूस करे? "
    आर्या ने एक पल के लिए कुछ सोचा और फिर कहा " तुम सही बोल रहे हो! लेकिन जगह बिलकुल भी ठंडी नही होनी चाहिए! "
    देवांश ने सीने पर हाथ रखते हुए सर झुकाया " आपका हुकुम सर आखो पर सरकार! "

    जगह डीसाईड कर देवांश ने सबको पैकिंग करने के लिए बोल दिया क्युकी वो जल्द से जल्द आर्या को यहाँसे दूर ले जाना चाहता था ।
    बस कुछ दिनों की बात थी, डॉक्टर के कहे नुसार अगर आर्या की हेल्थ मे इम्प्रोवमेंट हुई तो उसके ठीक होने के चाँसेस ज्यादा थे । ये जगह उसके दिल के दर्द से जुड़ी थी और जबतक यहा रहती वो यादें उसका पीछा नही छोड़ती ।

    वो सभी एयरपोर्ट पर पोहचे जहा पहले से ही महेश और ऊर्जा सामान के साथ खडे थे । आर्या उन्हे देख हैरान रह गयी ।
    देवांश ने कहा " वो लडके एक बार उनके पीछे आ चुके है! अच्छा रहेगा अगर उन्हे अकेला छोड़कर ना जाए तो! "
    महेश ने कहा " बोहोत दिनों से ड्यूटी कर थक चुका हूँ, इसलिए लंबी छुट्टी ली है इस बार! "
    आर्या ने सर हिला दिया और निकल पड़े वो... राजस्थान!

    देवांश के शहर से निकलने की खबर जैसे ही मनबीर और तन्मय तक पोहची या फिर किसी ने जान बुझकर पोहचाई.. वो रिलैक्स होकर रह गए ।
    मनबीर घायल होने की वजह से उन्होंने घर से निकलने की हिम्मत तो नही की पर शायद जब भी निकलते तो कोई उन्हे दबोचने के लिए तैयार था ।

    शाम होते होते देवांश सभी को लेकर एक रॉयल पेलेस पोहच गया जिसे पुरा उन्होंने खुदके लिए ही बुक कर लिया था ।
    देवांश ने कहा " हम डेजर्ट मे कैंप करने वाले है आज रात, किसी को कोई दिक्कत तो नही! "
    आर्या ने एकदम से हाथ उठा दिया " दिन मे जितनी गर्मी हो उससे ज्यादा रात को ठंडी पड़ती है देवांश! मारना चाहते हो क्या मुझे तुम? "
    देवांश हल्के से उसकी तरफ झुका और अपनी जैकेट हिलाते हुए धीरे से कहा " डोंट वरी मै तुम्हे ठंड लगने से पहले ही अपनी बाहो मे छुपा लूंगा! "
    आर्या ने बुरा सा मुह बना लिया ।

    सौम्या काफी खुश हो गयी थी कैंप लगाने की बात पर तो आर्या बिलकुल मना नही कर पायी ।
    कुछ जरूरी सामान लेकर वो चले गए जगह ढूंढते हुए ।
    रात होने से पहले देवांश के गार्ड्स ने राउंड मे छोटे छोटे टेंट खडे कर दिए ।
    बीच में लकड़िया रख कर सब रेडी कर दिया और खाना बनाने की तैयारी करने लगे ।
    वो छह भी आराम करने की जगह गार्ड्स के साथ काम कर रहे थे ।

    रात गहरा चुकी थी और फायर जलाकर सभी उसके इर्द गिर्द बैठ गए ।
    लेकिन देवांश कबसे फोन पर लगा हुआ था ।
    उसने एक बार पलट कर सबकी तरफ देखा और हाथ से दो मिनट का इशारा किया ।
    फिर उसने ठंडी आवाज में कहा " मुझे वो दोनो बास्टर्ड किसी भी कीमत पर चाहिए वरना मेरी शेरनी पागल हो जायेगी! उनकी लोकेशन निकाल कर दबोच लो उन्हे! "

    सामने से कुछ कहा गया जिसपर देवांश ने आगे कहा " चौधरी जी बिलकुल शांति से पीछे हट जायेंगे! इलेक्शन आ रहे है.. वो कभी किसी स्केंडल का हिस्सा नही होंगे! रही बात दोनो के बाप की तो उनके बारे मे जरा गड़े मुर्दे उखाडो! मेरे वापस आते ही काम शुरू कर देंगे ! जल्द से जल्द खत्म करना है मुझे सबकुछ! "
    कहते हुए ही वो एकदम से शांत हो गया । हल्के से हो रहे उजाले में उसने देखा दो छोटे से हाथ उसके सीने पर लिपट गए थे पीछे से आकर!
    देवांश ने एकदम से फोन कट कर उन हाथों को पकडते हुए आगे खिचा । उसकी शेरनी गिल्ट भरी नजरों से देख रही थी उसे ।
    " जान...! " , देवांश के कहते ही आर्या उसके सीने से लगते हुए बोल पडी " सो सॉर्री देवांश! तुमसे माफ़ी मांगने मे भी शर्म आ रही है मुझे! "
    " तो फिर मत मांगो.. उस माफ़ी के बदले मै तुमसे प्यार मांगता हूँ! " देवांश ने बिलकुल आराम से कहा जिसे सुनकर आर्या की पकड उसकी पीठ पर कस गयी ।
    देवांश भी उसे मजबूती से बाहो मे भर कहता है " उन बातों के बारे मे बिलकुल मत सोचो जिनमे तुम्हारी गलती नही थी! तुम्हे जो दिखाया गया उसे सही गलत साबित करने के होश मे तुम नही थी! लेकिन अब सब कुछ ठीक है, तुम मेरे पास हो इससे ज्यादा मुझे कुछ नही चाहिए! "
    आर्या ने अपना सर उपर उठाया और देवांश का चेहरा हाथों मे भरते हुए कहा " हम्म! मै भरपाई अपने प्यार से पूरी करूँगी! "
    उसने कहा और पेरो के पंजो पर खडे होकर एकदम से होठ देवांश के होठों पर टिका दिए!

    देवांश की आखे बडी हो गयी । वो एक पल के लिए सास लेना भी भूल गया । साधारण गति मे चलने वाली धडकनो ने एकदम से रफ्तार पकड ली! और कुछ वक्त तक उसे एहसास ही नही हुआ उसकी जान उसे किस कर रही है ।
    देवांश को ऐसे देख आर्या ने जरा सी आखे खोली और एकदम से उसके होठ पर काट लिया ।
    हैरानी से बडी हो चुकी देवांश की आखे एकदम से बंद हो गयी और उसके दोनो हाथ आर्या के चेहरे को थाम लेते है । उसने भी आर्या का साथ देना शुरू कर बोहोत गहराई से उसके होठ चूमने लगा । दोनो की आखे बंद थी और धडकने एक साथ एक लय मे मिलकर धडक रही थी । सासे भी एकदूसरे मे घुलकर एक हो गयी थी और कोई भी पीछे हटकर अलग नही होना चाहता था ।
    कोई टेंशन नही और ना ही कोई गुस्सा, दोनो के चेहरे पर सिर्फ सुकून था इस वक्त!


    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 18. Crazy For Her - Chapter 18

    Words: 1292

    Estimated Reading Time: 8 min

    रात का वक्त,

    रेगिस्थान मे लगे टेंट के बीचो बीच आग जल रही थी जिसके इर्द गिर्द बैठे सभी खाना खा रहे थे ।
    हसी मजाक से ज्यादा विकि और आर्या की बहस चल रही थी जिसे सौम्या बोहोत हैरानी से देख रही थी ।
    उसने एकदम से कहा " आप दोनो एकदूसरे को इतना नापसंद क्यु करते हो? आपका झगडा हुआ है क्या? "
    महेश ने एकदम से कहा " तुम्हारी आर्या दीदी को बहस करने का मौका चाहिए होता है! जबतक एक दो को पीट ना दे उसका दिन शुरू भी नही होता और खत्म भी नही होता! "
    आर्या गर्दन टेडी कर उसकी तरफ देखने लगी । ऊर्जा ने कहा " हा मारपीट तो इसका बचपन का शौक है ! यहा तक के हमारे एस आई साहब भी नही बचे उसके गुस्से से! "
    महेश को खाते हुए एकदम से ठसका लग गया । आर्या ने उसकी पीठ सेहलाते हुए कहा " वर्दी पहन ली तो ज्यादा अकड़ने की जरूरत नही है! बचपन से जानती हु तुम्हे.. मंदबुद्धि! "
    " ए...! तुम दोनो अब मुझे बुलि कर रही हो मिलकर! " महेश ने नाराजगी से कहा ।
    " शादी करनी है ना तुम्हे? भूलों मत वो आज भी मेरी सुनती है! " आर्या ने भौहें चढ़ा ली तो महेश ने फोरन प्लेट साइड रख उसके कंधे दबाने लगा ।
    उसने लहजा बदलते हुए कहा " अपने प्यारे भाई का घर बसते नही देखना क्या तुम्हे? शादी होने दो प्लीज! "
    " हो कौन तुम? क्या मै जानती हु तुम्हे? " आर्या ने अपना कंधा झटकते हुए कहा ।
    सभी उन्हे देख मंद मंद मुस्कुरा रहे थे ।
    विकि ने मुह बनाते हुए कहा " सबको एक ही बात के लिए ब्लेकमेल कर परेशान करती हूँ! कभी तो कुछ नया ट्राई करो! "

    " मैने तुम्हे कब मना किया है, तुम भी मुझे सेम बात के लिए ब्लेकमेल करो! " आर्या ने अकड़ते हुए कहा तो देवांश हस पड़ा ।
    विकि ने देवांश को घुरकर देखा " मै तो कह दूंगा लेकिन मेरा सिक्का बोहोत पहले खोटा हो चुका है! अब वो मुझे नही मेरे प्यार के दुश्मन को जिताता है! "
    आर्या ने अपनी कॉलर चढ़ा ली और कहा " तुम दोनो पहले साबित तो करो.. तुमसे बेटर पार्टनर मेरी लड़कियो को नही मिलेगा, तभी मै कुछ सोच विचार कर पाऊँगी रिश्ता आगे बढ़ाने के लिए! "
    विकि और महेश की आखे छोटी हो गयी और आर्या आराम से खाना खाते हुए " रूल नम्बर वन , तुम्हे अच्छा खाना बनाना आना चाहिए! "
    विकि और महेश की आखे इस बार बडी हो गयी क्युकी दोनो ही इस मामले मे जीरो थे! फिर भी उन्होंने एक साथ कहा " उसमे कोनसी बडी बात है...! सिख.. सिख लेंगे! "
    आर्या ने आगे कहा " रूल नम्बर टू, बर्तन धोना भी आना चाहिए और सफाई करना भी! खास कर चीजों को अपनी सही जगह रखना पहले सीखना होगा! "
    " खुद तो एक नम्बर की आलसी और कामचोर है! उपर से हमे रूल सिखा रही है! " महेश ने बड़बड़ाते हुए कहा ।
    " तुम्हे जो भी कहना है खुलकर कहो, ताकि मै एक दो रूल ओर बढ़ा दु! " आर्या ने उसे कनखियो से देख कहा ।

    महेश उसके सामने हाथ जोडते हुए " माते.. मेरी इतनी हिम्मत की आपके सामने मुह भी खोलू? नादान बालक की गलतिया अपनी झोली मे लेकर... बस हा कर दीजिए! "
    आर्या ने हाथ उठा दिया " अवश्य ... ! कलसे काम पर लग जाना, हा भी कर देंगे! "
    ऊर्जा सर हिलाते हुए हस पडी ।

    खाने के बाद सभी कुछ देर वही बैठे रहे फिर नींद की वजह से एक एक निकल गए । सिर्फ आर्या और देवांश बैठे हुए थे वहा ।
    आर्या की पीठ देवांश के सीने से लगी थी और देवांश ने मजबूती से अपने हाथ उसके पेट पर लपेट लिए थे ।
    उसने अपना चेहरा आर्या की गर्दन मे छुपाया हुआ था और लंबी लंबी सासे भरते हुए वो कभी कबार होठों से हरकत भी कर देता था । आर्या की नजरे खुले आसमान पर थी । लेकिन देवांश की हरकत से वो बार बार चिहुक उठती ।
    गहरी सास लेकर उसने कहा " देवांश... जबसे मैने तुम्हे किस किया है , तबसे तुम बिगड रहे हो! "
    " बिगाड तो तुमने दिया है, अब मुझे दोष मत दो! " कहकर देवांश ने एकदम से उसकी टीशर्ट कंधे पर से सरका कर वहा होठ रख दिए ।
    आर्या आखे बडी किए आसपास नजरे फिराने लगी । गार्ड्स तो थे लेकिन कुछ दूरी पर.. वो भी उनकी तरफ पीठ किए हुए!
    चेन की सास लेकर उसने कहा " देवांश कुछ तो शर्म करलो! हम बाहर है, कोई देख लेगा! "
    देवांश होठो से उसका कंधा और गर्दन गीली करते हुए सीधे कान पर आ गया । फिर उसने मदहोश कर देने वाली आवाज में कहा " आखे निकाल लूंगा उसकी... जिसने मेरी जान पर नजर डाली! "
    आर्या ने मुह बना लिया " कोई गलती से भी तो देख सकता है ना! अब तुम ही शर्म बेचकर कही भी शुरू होने लगे तो उसमे लोगों की क्या गलती? "
    देवांश ने बिना जवाब दिए उसके कान को मुह में लेकर सक करने लगा । साथ ही उसके हाथ पेट पर चलते हुए टीशर्ट के अंदर आ चुके थे ।

    आर्या की सासे तेज चलने लगी । देवांश के पेट पर चलते हाथ पकड कर उसने कहा " देवांश कंट्रोल युर सेल्फ! "
    " क्यु.. तुम्हे डर लग रहा है कि तुम अपने आपको कंट्रोल नही कर पाओगी? " कहते हुए देवांश फिरसे हरकत करने लगा ।
    " बेशरम आदमी मै पुरे कंट्रोल मे हु, लेकिन तुम्हारा कोई भरोसा नही लग रहा मुझे! "

    देवांश ने उसे मजबूती से पकड़ कर अपना चेहरा कंधे पर टिका दिया और कहा " मै तुम्हारे अंदर कुछ बदलना चाहता हूँ! "
    " हनन..! " आर्या हैरानी से चेहरा उसकी तरफ घुमाती है!
    " एकच्युलि तुम्हारा नाम! ", देवांश ने उसके गाल पर होठ रख कहा " मिस आर्या साहनी... क्या तुम मिसेस आर्या देवांश ठाकुर बनोगी? "
    आर्या के होठो पर मुस्कान आ गयी " प्रपोज कर रहे हो? लेकिन मेरी रिंग कहा है? "
    देवांश हल्के से हस पड़ा " तुम सचमे आलसी हो जान! तुम्हे क्या लगता है... उस दिन मैने तुम्हे कैसे ढूंडा होगा? "
    आर्या ने चौकते हुए अपने हाथों को देखा । उसकी रिंग फिंगर मे रिंग थी और उसने नोटिस भी नही किया ।
    देवांश ने अपना हाथ आगे कर दिया जिसमे सेम पेटर्न की रिंग थी ।
    " उस दिन तुम बेहोश थी.. तब पहनाई थी! " देवांश ने कहा तो आर्या उसे घूरने लगी ।
    " ऐसे बिना प्रपोज किए रिंग पहना दी.. वो भी तब, जब मुझे होश नही था और रिंग मे कोन ट्रैकर डालता है देवांश! तुम ना ओवर पजेसिव वाले लवर हो.. जिसे हर वक़्त पता करना होता है उसकी गर्लफ्रेंड कहा है? "
    देवांश ने गहरी मुस्कान के साथ कहा " हा मुझे पजेसिव तो बनना पड़ेगा! क्युकी मेरी लवर ओर्डिनेरी गर्लफ्रेंड्स की तरह नही है! वो लाख सिक्युरिटी तोडकर भी मुझसे दूर भाग सकती है! "
    आर्या ने आइब्रो उठा दी " अब तो मुझे पता है ट्रैकर किसमे है, तुम्हे नही लगता मै इसे उतार कर भागूंगी? "
    देवांश ने कहा " सिर्फ रिंग नही हमारे प्यार की निशानी भी है, साथ ही मेरा दिल... ! जिस दिन तुमने इसे खुदसे दूर किया सोच लेना मेरी जान....! "
    " बस बस.. समझ गयी मै! ब्लडी ब्लेकमेलर...! " , आर्या ने उसकी बात काटते हुए कहा " नही उतारुँगी इसे..! वादा करती हूँ । "
    देवांश ने सर हिला दिया और उसका हाथ पकड़ कर होठो से लगा लिया ।
    आर्या वादों मे यकीन नही रखती पर जब कहती है तो उसे जान लगाकर पुरा भी करती है ।


    To be continued...

    स्टिकर और समीक्षा देना ना भूले ।

  • 19. Crazy For Her - Chapter 19

    Words: 2094

    Estimated Reading Time: 13 min

    राजस्थान, सुबह का वक्त,  

    आसमान मे सूरज निकल आ चुका था। वही टेंट के अंदर देवांश और आर्या एकदूसरे मे सिमटे हुए थे।  

    इतने मे बाहर से विकि चिल्ला पड़ा "देव भाई... ओ देव भाई! आज उठने का इरादा है या नही? सूर्य देवता भी हैरान है देखो, की आप अबतक कैसे सो रहे हो?"  

    उसकी आवाज सुनकर आर्या नींद मे ही झल्ला उठी। उसने देवांश के सीने मे सर छुपाते हुए कान पर हाथ रख लिए। देवांश ने भी उसपर बाहों की पकड़ कस दी। आखे खोलने की तकलीफ दोनो मे से किसी ने नही उठाई क्युकी वो लोग देर रात तक अपनी बातों मे लगे हुए थे।  

    बाहर विकि अपने साथ सबको जमा करके खडा था। उसने बड़बड़ा कर कहा "अब इनकी वजह से सबको यहा रुकना होगा क्या? एक काम करते है, हम पैलेस लौट जाते है। जब इनका हो जायेगा खुद उठकर आ जायेंगे!" 

    "क्या ऐसा करना ठीक रहेगा?" ऊर्जा परेशानी से बोली।  

    "वो अकेले थोड़ी होंगे? उनके लोग तो यही रहेंगे ना?" महेश विकि के बोलने से पहले ही बोल पड़ा।  

    विकि ने सर हिला दिया और उनको चलने का इशारा करते हुए आखिरी बार बोला "देव भाई, हम जा रहे है। देखो अभी भी वक्त है उठ जाओ। वरना टेंट निकाल कर साथ ले जायेंगे। फिर आना रेत मे नहाकर!" 

    अंदर से आर्या ने उनींदी आवाज में कहा "विकि के बच्चे मुह बंद करके निकल जाओ यहाँसे। वरना मै बाहर आयी तो तुम्हारी जबान को बाहर खिचकर उसी से तुम्हारा गला घोटकर किसी पेड़ पर लटका दूँगी।" 

    उसकी आवाज में चिडन थी। वही विकि आर्या की कही बात को इमेजिन करते हुए सहम गया। आखिर कार इस लड़की का कोई भरोसा भी नही था। वो कुछ कहती है मतलब उसे पुरा भी जरूर करती है। 

    "अभी तो मे जवान हु। इतनी जल्दी पेड़ पर लटक जाऊंगा तो मेरे सारे सपने अधूरे रह जायेंगे। " मुह मे ही बोलते हुए उसने सौम्या का हाथ पकड़ लिया जो अभी तक अपनी आखे मल रही थी। देवांश और आर्या के बिना ही वो लोग पैलेस के लिए लौट गए।  

    लगभग दो घंटे बाद जाकर देवांश जरा सी हलचल करते हुए जागा। किसी खूबसूरत सपने की तरह आर्या का चेहरा फिरसे उसके सामने था।  

    वो मुस्कुरा कर बोला "मॉर्निंग जान!" 

    "हम्म..!" आर्या नींद मे ही कुनकुनाई।  

    देवांश ने उसके कान मे फुक मारते हुए कहा "उठना नही है?" 

    "पहले नींद पूरी हो जाए उसके बाद!" 

    देवांश ने अचानक ही शरारत से कहा "बहुत थक गयी हो?" 

    "हा, अब सोने दो!"  

    आर्या ने कहा तो देवांश ने इस बार उसके कान पर हल्के से काटकर कहा "पर मैने ऐसा कुछ भी नही किया जिससे तुम थक जाओ। सरासर आरोप हुआ ये मुझपर!" 

    "आह्ह!", आर्या कराहते हुए अपनी आखे खोलकर बोली " जब मै सोने की कोशिश कर रही थी तो कौन था वो शक्स जो मुझे जगा जगाकर बाते कर रहा था? और बेशरम इंसान, तुम्हारे दिमाग मे हमेशा ऐसी घटिया बाते ही क्यु चलती रहती है?" 

    "बिलकुल नही!", कहते हुए देवांश उठकर बैठा और आर्या को भी खिचकर बिठा दिया "ये घटिया बाते थोड़ी ही है। प्यार भरी बाते है।" 

    "तुम्हारा प्यार उछल उछल कर बाहर आ रहा है आजकल! टेल मि वन थिंग, तुम हमेशा से ऐसे ही थे या फिर मैने ही तुम्हारे बारे में कुछ गलत सुना था?" आर्या ने जिज्ञासा वश पूछा।  

    देवांश मुस्करा दिया "नही, मै ऐसा कभी नही था और ना कभी होता अगर तुम मेरी जिंदगी मे ना आयी होती। ना वक्त था, ना ही वजह जो खुलकर मुस्कुरा सकु या बात बात पर मजाक कर सकु।" 

    "विकि के साथ रहकर भी तुम ऐसे रहे विश्वास करना मुश्किल है। वो इंसान पत्थर को भी बात करने के लिए मजबूर करदे।" आर्या सर हिलाते हुए बोली।  

    "ऐसा नही है। जिंदगी ने उसे भी बहुत तकलीफ दी लेकिन सब पर मात करके एक एक पल को खुलकर जीता है वो!"  

    आर्या ने कहा "तुम दोनो कबसे साथ हो?"  

    देवांश ने उसका बाजू पकडा और अपनी तरफ खिच लिया। आर्या अपनी पीठ उसके सीने से लगाकर बैठी तो देवांश के हाथ उसके पेट के इर्द गिर्द लिपट गए। फिर वो आर्या के बाल ठीक करते हुए बोला "बचपन से। एक ही अनाथाश्रम मे थे और एक साथ ही भागे। तुम शोना की वजह से उसके बारे में पता करना चाहती हो तो चिंता मत करो। खुदसे ज्यादा भरोसा है मुझे उसके उपर। आज शोना को कुछ याद नही, लेकिन भविष्य मे याद आता भी है तो विकि आराम से उसे संभाल लेगा।" 

    "मुझे भी उसपर भरोसा है। और गर्व भी, उसके जैसे साफ दिल इंसान बहुत कम मिलते है। " आर्या भावुक होकर बोली।  

    देवांश ने कहा "तो फिर वापस चले? मुझे लगता है बाकी लोग हमे अकेला छोड़कर जा चुके है।" 

    आर्या फौरन उठकर जाने को तैयार हो गयी। जब दोनो टेंट से बाहर आए तो देवांश की आखे सिकुड़ गयी। उसने फौरन आर्या को अपने पीछे कर लिया।  

    बालों को सवारते हुए आर्या ने कारण जानने के लिए देवांश की बगल से झांक कर देखा तो काले कपड़े पहने गार्ड्स के अलावा कुछ दूसरे लोग वहा पर खड़े दिख रहे थे। देवांश के गार्ड्स मे जो मुख्य था वो उन लोगों से कुछ बात कर रहा था।  

    आर्या हैरानी से बोली "हमने किसी रूल को तोड दिया यहा आकर? रॉयल गार्ड्स लग रहे है? हमे पकड़ कर ले जाने के लिए तो नही आ गए?" 

    "हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो मै उन्हे रोक कर रखूँगा और तुम पीछे से भाग जाना!" देवांश ने मजाकिया अंदाज मे कहा।  

    आर्या की आखे छोटी हो गयी। देवांश इतना शांत क्यु है अगर सामने वाले लोग उनके लिए आए हैं तो? वो बोली "अगर तुम मेरे लिए अपना बलिदान देना चाहते हो तो, मै उसे व्यर्थ नही जाने दूँगी। तुम्हारी बात का मान रखते हुए मै पक्का भाग जाऊंगी। माहिर हु मै भागने मे।" 

    देवांश ने गर्दन उसकी तरफ घुमाई। उसका मुह बन चुका था। इतने मे सामने कुछ हलचल हुई और सबके बीच मे से एक देवांश की ही उम्र का लड़का आगे आ गया। उसने शाही कपड़े पहले हुए थे।  

    देवांश की तरफ देखकर उसने हाथ लहराया तो देवांश मुस्कुरा दिया। आर्या आखे घुमाते हुए बोली "तो तुम उसे जानते हो?" 

    "हा ऐसा ही समझलो!" देवांश सर खुजाते हुए बोला।  

    वो लड़का आकर सीधे देवांश के हाथ पकड़ कर बोला "देवांश ठाकुर यू बास्टर्ड! यहा पोहच गए और बताना जरूरी तक नही लगा।" 

    "प्रिंस जयदीप! आपको खबर मिलनी चाहिए थी रुकने के लिए हमने आपका ही एक पैलेस बुक किया था! अब तो आप बिजी इंसान है, खबर मिल भी गयी तो जरूरी थोड़ी लगेगा आकर हमे वेलकम करे? शादी हो गयी और आपका काम भी निकल गया।" देवांश ने आखे तरेर कर कहा।  

    जयदीप आखे मिचकर बोला "फाइन..! माफ कर दीजिये! पर हमे पता चलने का आप इंतेजार ही क्यु करते रहे? सीधे कॉल मिला देते। अब आपके कारण हमारे साथ पता नही क्या होगा?" 

    देवांश हल्के से हस पड़ा तो जयदीप आखे छोटी कर उसे देखने लगा "हमे लगता है आपने जानकर अपने गले का फंडा हमारे गले में बांधा था? है ना?" 

    देवांश ने हसी रोकते हुए जोरसे हा मे सर हिला दिया "मैने वॉर्न किया था आपको राजकुमार! लेकिन प्यार मे अंधा इंसान ना आग देखता है ना खाई। एक पैर पर खडे हो गए शादी के लिए! आपके लिए पहले भी और अब भी एक ही बात कहूंगा, भगवान आप पर कृपा बनाये रखे!" 

    जयदीप ने सर हिला दिया "खैर, काफी समय बाद मिल रहे है। एक हग तो मिल ही सकता है।" 

    देवांश ने बाहे फैला दी तो जयदीप एकदम से उसके गले लग पीठ थपथपाते हुए बोला "तैयार हो जाइये ठाकुर साहब! अबतक आपका तूफान महल पोहच चुका होगा।"

    देवांश ने ठंडी आह भरी। इतने मे जयदीप की नजरे देवांश के पीछे खड़ी आर्या पर जा रुकी। एकदम से देवांश से अलग होकर वो बोला "ठाकुर साहब, कौन है ये?"

    देवांश ने मुस्कुराकर आर्या की तरफ देखा जिसकी एक भौंह हल्की सी उपर उठी हुई थी। देवांश ने उसका हाथ पकड़ कर अपने करीब करते हुए कहा "जान है मेरी!"

    जयदीप की आखे बड़ी हो गयी "असंभव, आपने.. आपने...!"

    "अब ऐसा भी रिएक्शन मत दीजिये जैसे मै कोई आठवा अजूबा हु। इंसान हु जिसे प्यार हो गया, इसमे आश्चर्य जैसी कोई बात नही!"

    जयदीप ने अपने हाथ जोड़कर कहा "प्रणाम भाबी सा। माफ कीजिये लेकिन विश्वास करना थोडा कठिन है। हमे सबसे पहले ये बताइये की किसने किसे प्रपोज किया? आई बेट ठाकुर साहब ऐसा करने तो नही वाले तो क्या आपने पहल की?"

    आर्या अजीब सा चेहरा बनाकर जयदीप की तरफ देखने लगी। प्रपोज क्या होता है? देवांश ने आर्या की बेहोशी मे उसे रिंग पहनाई थी। और किस आत्मविश्वास के साथ जयदीप ये बाते बोल रहा है? देवांश किसी सड़क छाप रोमियो की तरह उसके पीछे पड़ा था।

    आर्या कुछ कहती उससे पहले ही देवांश बोला "जान देवांश ठाकुर का फीमेल वर्जन है प्रिंस जयदीप। उनकी तरफ से पहल होना मेरे लिए खुशकिस्मती होती। लेकिन अफसोस, काफी मेहनत के बाद और एक बार जेल जाने के बाद ये मुझे मिली है!"

    देवांश की बात सुनकर आर्या ने उसे घूरा तो अपने होठ भीचते हुए देवांश ने हाथ खडे कर लिए।

    जयदीप गौर से उनकी तरफ देख रहा था "आह अच्छा! ये तो सचमे कमाल ही हो गया। उर्वशी जब ये बात जानेंगी तो पता नही खुश होंगी या हमे डॉक्टर का इंतेजाम करके रखना पड़ेगा?"

    लंबी सास छोड़कर वो आगे बोला "वापस जाकर देखते है महल मे क्या हो रहा होगा। चलिए, हम आपको लेने आए हैं।"

    "आप ना आते फिर भी हम आने ही वाले थे!" देवांश ने सर हिलाते हुए कहा और जयदीप के साथ आर्या को लेकर निकल गया।

    चौहान पैलेस,

    सौम्या, ऊर्जा और महेश के साथ खडा विकि महल के द्वार पर ही रुका हुआ था जब किसी ने उसका नाम तेज आवाज मे पूछा। विकि ने पलट कर देखा और उसकी आखे फैल गयी।

    गाडी से उतर कर एक लड़की तेज कदमों से उसकी तरफ बढ रही थी। उसने शाही पोशाख पहना था और सर पर डाला पल्लू चलते हुए ही पीछे सरका दिया। उसकी चाल अचानक ही मर्दानी हो गयी। विकि पलके झपकाए उसे देख रहा था। अचानक ही माथे पर शिकन लिए वो बोला "उर्वि?"

    उर्वशी उसके करीब आयी और उसने एकदम ही विकि की कॉलर मजबूती से पकड़ ली। फिर वो विकि को झकझोरते हुए बोली "साले कुछ शर्म हया बची है की नही तुम दोनों मे? समझ क्या रखा है हा मुझे? शादी करके निपटा दिया तो एक बार देखने तक नही आए। उर्वि मर गयी या जिंदा है इससे फरक नही पड़ रहा क्या तुम्हे? जैसे अपने कंधे से बोझ हल्का कर लिया था मुझे यहा भेजकर?"

    उसमे इतनी ताकत थी की वो विकि के पूरे शरीर को हिला सकती थी। विकि ने उसके हाथ पकड़ लिए और कहा "रुक ना मेरी मा। पहले खुद भी सास ले और मुझे भी लेने दे। तेरी शिकायत मै आराम से भी सुन लूंगा।"

    उर्वशी नही मानी। उसकी पकड़ विकि की कॉलर पर कस गयी तो विकि ने आगे कहा "अच्छा अच्छा, तुझे क्या लगता है हम यही घूमने के लिए क्यु आए जबकि कही ओर भी जा सकते थे?"

    उर्वशी की आखे छोटी हो गयी। अचानक ही उसने विकि को छोड़ दिया "सच सच बता, मेरे लिए आए हो ना ?"

    अपना गला आजाद पाकर विकि राहत से बोला "और नही तो क्या? तुझे सरप्राईज देने वाले थे। लेकिन लगता है प्रिंस ने सारा प्लान चौपट कर दिया।"

    सौम्या जल्दी से विकि का बाजू पकड़ कर उर्वशी को घूरने लगी। डर के साथ उसे गुस्सा भी आया जब उर्वशी ने विकि की कॉलर पकड़ी।

    महेश धीरे से ऊर्जा के कान के पास बोला "इस लडके के साथ लड़कियो को कुछ ज्यादा ही ऑब्सेषण है। जिसे देखो वो टूट पड़ती है। वैसे कौन होगी ये?"

    "शायद ये वो सोशियल वर्कर है जो शादी से पहले लखनऊ के सभी अनाथाश्रम को चलाती थी। उर्वशी.. राइट यही नाम है इनका!" ऊर्जा ने कहा तो उर्वशी ने एकदम से उसकी तरफ देखा।

    ऊर्जा चौक उठी। उर्वशी गौर से उसकी तरफ देखती रही। फिर उसने बाकी सबके उपर भी एक नजर डालकर विकि से कहा "मेरे अलावा ये कौनसे दोस्त बना लिए? आई एम जेलेस!"

    "तु कब जेलेस नही होती?", विकि मुह बनाकर बोला और सौम्या की तरफ इशारा कर दिया " ये है शोना, मेरी वाइफ ही समझले। ये एसपी महेश और वो एडवोकेट ऊर्जा!"

    "अरे वाह, कानून के रखवाले साथ लेकर घूम रहे हो। दोस्ती की आड़ मे अपने गैरकानूनी काम छुपाने के लिए फील्डिंग? नॉट बैड!" उर्वशी ने कहा तो महेश और ऊर्जा की आखे बड़ी हो गयी।

    To be continued...

    आगे जानने के लिए कहानी के साथ जुडे रहे। कमेंट के साथ साथ फॉलो करना बिलकुल भी ना भूले।

  • 20. Crazy For Her - Chapter 20

    Words: 1948

    Estimated Reading Time: 12 min

    सबलोग फ्रेश होकर डाइनिंग हॉल मे पोहचे तो उर्वशी ने खाना बनवाकर टेबल पर रख दिया था। 
    देवांश ने आते ही कहा "माई डियर..!"
    "डोंट, वरना बहुत जोरसे पंच मारूंगी देव!" उर्वशी ने उसकी तरफ घूर कर देखते हुए कहा। 
    बाकी सब लोग कुर्सिया खिचकर बैठ गए। वही देवांश उर्वशी के सामने पोहचा "चल अब ज्यादा नखरे मत कर। तुझे पता है तेरी नाराजगी और रूठने गुस्सा होने का मुझपर असर नही होता।"
    "इसलिए क्युकी तु कमीना है।", उर्वशी उसके सीने पर मारकर बोली "निर्दयी इंसान। कैसे तूने मुझे यहा चार दिवारी मे कैद करवा दिया। अपनी पसंद से बाहर घूम भी नही सकती हु?" 
    देवांश ने ध्यान से उर्वशी की तरफ देखा। भारी कपडो के साथ भारी गहने, ये उसकी उर्वि कभी नही थी। वो झल्ली तो हमेशा पैंट शर्ट और बिखरे बालों के साथ रहती थी। 
    देवांश ने सबकी तरफ देखा और कहा "आप लोग नाश्ता करलो। हम आते है!"
    फिर उसने उर्वशी का बाजू पकडा और उसे पिछले गलियारे मे ले गया। 
    विकि कुछ पल उस तरफ देखता रहा। अचानक ही उसने कहा "प्रिंस जयदीप, अगर उसने आपकी शिकायत लगाई तो होंगे आप यहा के होने वाले महाराज? देव भाई आपको फिर भी छत पर उल्टा टांग देंगे!"
    जयदीप मासूम चेहरा बनाकर बोला "आपको किस वजह से महसूस हुआ की आपकी उर्वि कुछ सहने वालों मे से है? उसने आते ही परिवार के विशेले सापों के फन कुचलना शुरू कर दिया था। हम खुद भी अपनी पूछ बड़ी संभाल कर रखते है ताकि गलती से भी हमसे कोई गलती ना हो जाए और नाराज होकर वो हमारी पूछ पर पैर रख दे!"
    विकि एकदम से हस पड़ा। महेश और ऊर्जा भी सर झुका कर हस पड़े। सौम्या को समझ नही आया और आर्या आराम से खाने पर टूट पड़ी थी। साथ ही उसके दिमाग मे एक बात घूमने लगी, जिसके बारे मे वो देवांश से सवाल नही कर पायी! देवांश ने कहा विकि और वो एक ही अनाथाश्रम थे और एक साथ ही भागे! आखिर क्यु? क्या मतलब था उसकी बात का?

    पिछले गलियारे के अंत मे आकर देवांश ने अपनी पीठ रेलिंग से टिका ली। उर्वशी उसपर हाथ रख सामने देखते हुए बोली "सिगरेट दे ना!"
    देवांश की भौहें चढ़ गयी "तुझे ये सब करना शोभा देता है अब?"
    "तेरी शोभा की ऐसी की तैसी!" इतना कहकर उर्वशी ने उसकी जेब मे हाथ डाला और सिगरेट, लाईटर निकाल लिया। 
    सिगरेट मुह मे दबाते हुए उसने जलाई और लाईटर देवांश की तरफ उछाल दिया। लंबा कश लगाते हुए उसने कहा "कैसा है लखनऊ?"
    "जैसा उर्वि छोड़कर आयी थी?" 
    उर्वशी ने नजरे उसकी तरफ घुमाई "तेरे जेल जाने की खबर आग की तरह फैली पिछले दिनों! फोन उठाना जरूरी समझता है या नही?"
    देवांश ने उसके हाथ से सिगरेट लेकर कश भरा और माथा सेहला कर बोला "परेशान था यार! मै खुद कुछ समझ नही पा रहा था तो तुझे क्या बताता और क्या समझाता?"
    उर्वशी ने कहा "तुम्हारे साथ जो लड़की आयी, वही है ना जिसने तुम्हे जेल पोहचाया?"
    देवांश ने ठंडी सास छोड़ी "उसे गलत फहमी थी। कोई विषय नही, लोड मत ले सब ठीक है अब! और वॉर्निंग समझ ले, दूर रहना उससे। मुझे तो अच्छा नही लगेगा वो बाद की बात है, पर उसे कुछ अच्छा नही लगता तो सामने वाला जमीन पर होता है।"
    उर्वशी ने मुह बिगाड़ कर दुबारा सिगरेट को छीन लिया तो देवांश बोला "तेरा प्रिंस तेरे शौक पूरे नही कर रहा क्या?"
    "करता है ना। लेकिन महल मे सारे कुत्ते भरे पड़े है। उनकी नाक यहा वहा सूंघने के लिए बहुत उपर रहती है। कितना भी जलील करो, अपनी हरकतो से बाज नही आते। बस एक बार मेरा प्रिंस किंग बन जाए! एक एक को महल से बाहर फिकवाउंगी!" उर्वशी ने कहा और एकदम से सिगरेट को रेलिंग पर रख बुझा दिया। 
    देवांश ने उसके कंधे पर हाथ रख अपनी तरफ घुमाया "तु खुश तो है ना यहा? अगर नही तो अभी बोल। तुझे वापस ले जाऊंगा अपने साथ।"
    उर्वशी ने उसका गाल छु लिया "बहुत खुश हु रे। बस मुसीबते अल्ट्रा प्रो मैक्स वर्जन की है। कोई ना, इतना तो उर्वशी ने बचपन मे झेला होगा!"
    देवांश हल्के से मुस्कुरा पड़ा। उर्वशी आगे बोली "तेरी उर्वि किसी से डरकर दबने वालों मे से बिलकुल नही है। प्रिंस का साथ तो मुझे ज्यादा स्पॉइल कर देता है। अगर वो मेरी हर एक बात के बारे मे सोचता है तो मेरी जिम्मेदारी बनती है उसका सम्मान बनाये रखू। कोई उसकी पीठ पीछे मेरी वजह से चार बाते बोले ये मुझे मंजूर नही। थोडे दिनों की बात है कहकर मै सह लुंगी।"
    "होशियार हो गयी तु तो?" देवांश ने कहा। 
    "और तु हो गया है शाणा! दोनो के दोनो लड़किया लेकर आये हो यहा? और ठाकुर साहब ने तो सीधे बारूद के ढेर मे माचिस की तीली लाकर रख दी। सम्भल कर रहना जरा। एक बार चिंगारी लग चुकी थी। अगली बार धमाका ना करदे!" उर्वशी ने सर्द आवाज में कहा। 
    देवांश ने लापरवाही से कंधे झटक दिए। ये देखकर उर्वशी ने उसके कन्धे पर मारा और हाथ पकड़ कर अंदर ले गयी। 

    खाते हुए सौम्या मटर खो ढूंढ ढूंढकर एक तरफ कर रही थी। 
    आर्या का ध्यान अचानक ही उसपर चला गया और वो सर झुका कर मुस्कुरा पड़ी "आज भी नही बदली मेरी जिंदगी सोमु! इसकी मटर से दुश्मनी सदियों तक चलती रहने वाली है!" 
    खुदसे कहकर उसने ठंडी आह भरी। इतने मे ही विकि ने उसका नाम पुकारा "आर्या साहनी!"
    आर्या ने एकदम से उसकी तरफ देखा तो विकि बोला "तुमने पूछा नही ये लोग कौन है? और खास कर उर्वशी के बारे मे! देव भाई तुम्हारे सामने उसे अकेले में ले गए, शक नही हो रहा तुम्हे?"
    विकि की बात सुनने के बाद जयदीप भी ध्यान से आर्या के जवाब का इंतेजार करने लगा। ऊर्जा और महेश अफसोस जता रहे थे, आखिर कितना गहरा वो विकि को रोस्ट कर देगी?
    आर्या ने मुह के अंदर जीभ घुमाई। फिर उसने हल्के से गला खराश कर कहा "दिमाग की जगह सिर्फ पानी भरा हो तो जरूर शक होता।"
    "अच्छा तो तुम्हारे पास दिमाग भी है और खुदको बहुत स्मार्ट समझती हो?" विकि ने एक भौंह उठा दी। 
    आर्या ने आराम से कहा " हा घुटने मे नही है तभी समझ गयी। अगर वो तुम दोनो को जानती है तो यकीनन तुम्हारी दोस्त या फिर रिश्तेदार होगी। शक की गुंजाईश खत्म होती है क्युकी एक तो वो शादी शुदा है और इसके बावजूद उसके पति शांति से यहा बैठे है। उन्हे पता है दोनो के बीच हेल्दी रिलेशन है। इसलिए मैने भी गेस लगा लिया।"
    जयदीप ने ताली बजा दी "इंप्रेसिव!" 
    "किसने तुम्हे इंप्रेस कर दिया मेरे अलावा?" उर्वशी ने आकर कहा और जयदीप की बगल मे बैठ गयी। 
    देवांश भी आर्या के पास बची खाली जगह पर बैठा। 
    जयदीप ने कहा "भाबी सा, ये सचमे इंप्रेसिव है। ठाकुर साहब ने अपना ही फीमेल वर्जन ढूंढ लिया है।"
    उर्वशी की आखे छोटी हो गयी। वो गौर से आर्या को देखने लगी जो खाना खाने मे व्यस्त हो चुकी थी। 
    आर्या उर्वशी की नजरे महसूस कर पा रही थी। बहुत देर बाद भी उसने वो नही हटाई तो आर्या ने कहा "मेरे चेहरे पर कुछ लगा है?"
    "वही तो देख रही हूँ?", उर्वशी ने एक नजर देवांश पर डालकर कहा " आखिर क्या लगा है तुम्हारे चेहरे पर जो देव पागल हो चुका है?"
    आर्या ने उसकी बात को पूरी तरह नजरंदाज कर दिया। यहा तक की उसने सर भी उपर नही उठाया। 
    "तुम करती क्या हो?" उर्वशी ने जवाब ना मिलने पर खिजते हुए कहा। 
    देवांश जो आखो से ही उर्वशी को चुप हो जाने के लिए इशारे कर रहा था। उसने दात भीचते हुए कहा "वो बॉडी गार्ड है।"
    "सही है तुम्हारा! फायदे के ही लोग आसपास जमा कर रखे है!" उर्वशी व्यंग से हसकर बोली। 
    ऊर्जा ने धीरे से कहा "क्या ये हमारा उपहास कर रही है? कबसे देख रही हूँ इसे!"
    "अभी जानती नही है ना हमारी आर्या को! उसके अंदर के रंग एक बार देखले फिर मजा आयेगा।" महेश ने आखे घुमाते हुए कहा। 
    उर्वशी ने फिरसे कहा "काफी कम दिन हुए है तुम दोनो को मिले! उसे आकर्षक चीजों को किसी भी कीमत पर पा लेनी की गंदी आदत है। तुमने उसके जुनून को प्यार कैसे समझ लिया? जुनून से शुरू हुआ प्रेम अक्सर अलग अलग मोड लेकर खत्म हो जाता है। तभी तो आज भी दुनिया में सच्चा प्यार अनमोल है?"
    आर्या ने इसबार अपना चेहरा उठाया "तुम क्या कहना चाहती हो मुझे समझ नही आ रहा। लेकिन सबसे अहम बात , ये ज्यादा वक्त साथ बिताने के बाद ही प्यार होता है ये पूरी तरह सही नही। मेरा मानना है, प्यार होने के लिए कुछ सेकंड्स का वक्त चाहिए। बाकी इंसान के उपर डिपेंड है वो उसे सिर्फ आकर्षण मानता है या फिर डेड एंड! कुछ वक्त साथ बिताकर तय करना की रिश्ते को आगे बढाना है या फिर नही , तो वो प्यार नही समझौता होगा। एक दूसरे की अच्छी बुरी आदते हम झेल नही पाते। और तब भी रिश्ते का अंत आपके कहे मुताबिक जुनून की तरह खत्म हो जायेगा। वो मुझे शायद एक महीने से जानता है लेकिन मै पिछले कही महिनो से उसके बारे मे पता कर रही थी। प्यार पर ना सही उसकी जबान पर मुझे खुदसे ज्यादा भरोसा हो चुका है। फिर भी ये भावनाएं मेरे लिए नई है। इसमे ढलना और इसकी आदत लगने मे थोडा समय तो जरूर लगेगा।"
    इतना कहकर आर्या ने देवांश की तरफ चेहरा घुमाया। देवांश की आखो मे एक सही इंसान को चुन लेने का घमंड नजर आ रहा था। 
    आर्या ने कहा "मुझे थोडे वक्त की जरूरत है। लेकिन मै पूरी कोशिश कर रही हूँ तुम्हारे साथ अपनी बाँडिंग मजबूत करने की। इस लव के एरा मे मैने अरेंज चुन लिया। मेरा साथ देना। पसंद तुम्हारी थी, निभाना मेरी भी जिम्मेदारी होगी!"
    देवांश ने टेबल के नीचे से आर्या की उंगलियों मे अपनी उंगलिया फसा ली "मेरा प्यार ही मेरा जुनून है। मरने के बाद ही खत्म होगा।"
    उर्वशी के होठो पर राहत भरी छोटी सी मुस्कान बनी हुई थी। जयदीप ने एक प्लेट उसके सामने सरकाई तो उर्वशी ने दोनो के उपर से ध्यान हटाया। 
    आर्या को ज्यादा बोलना पसंद नही था और ना वो अपने भावों को आसानी से व्यक्त कर पाती। पर उसकी इतनी गहरी बाते सुनने के बाद महेश और ऊर्जा का शक दूर हो गया। आर्या सचमे देवांश और उसके रिश्ते के लिए गंभीर थी। 
    इसी बीच उर्वशी ने कहा "माफ करना, तुम्हे परेशान करने की मंशा नही थी। जिंदगी ने कही धोके दिये है हमे। आसानी से किसी पर भरोसा नही कर पाते। प्लीज उसका साथ कभी मत छोडना।"
    आर्या ने पलके झपका कर धीरे से कहा "उसने कर्ज किया है मेरे उपर जिंदगी भर का। एक तो प्यार और अंधा विश्वास देकर, दूसरा मेरी जान की जान बचाकर!"
    आर्या भावुक हो चुकी थी। इसलिए देवांश उसका हाथ सेहलाने लगा। 
    गंभीर बन चुके माहौल को साधारण करने के लिए विकि ने नकली आसु पोछते हुए कहा "रुलाकर ही मानोगे तुम लोग। चलो अब खाना खाओ, या फिर एकदूसरे के प्यार से ही अपना पेट भरना है।"
    जयदीप ने एकदम से कहा "जबतक आप लोग यहा है हम काम से पूरी तरह छुट्टी ले लेते है। मस्त घूमेंगे, फिरेंगे और मजे करेंगे। सबसे पहले शॉपिंग के लिए चलते हैं।"
    सौम्या तपाक से बोली "मुझे घागरा चोली चाहिए, चमकीला वाला!"
    "जैसा मेरी शोना कहे। लेकिन उसके लिए पहले मटर को साईड निकालना बंद करो। अगर तुमने इसे पुरा खत्म किया तो हम तुम्हारे लिए जितने चाहिए उतने चमकीले घागरा चोली लेंगे।" विकि ने कहा तो सौम्या ने फौरन उसके सामने अपना हाथ कर दिया। 
    विकि ने गहरी सास छोड़ी । उसने सौम्या के हाथ पर हाथ रख कहा "पक्का वाला वादा।"
    उसके बाद सबलोग अपना नाश्ता खत्म करने मे लग गए। 





    To be continued...

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