"कहानी तो हर कोई लिखता है, मगर जो लकीरों में लिखा है... वो हमारी किस्मत होती है—ना बदली जा सकती है, ना मिटाई जा सकती है। ये कहानी है शिवाय मेहरोत्रा की—एक ऐसा नाम, जो खुद में ऐश्वर्य और अहंकार का पर्याय है। रुतबा ऐसा कि उसके चेहरे पर गुरूर की परछाईं... "कहानी तो हर कोई लिखता है, मगर जो लकीरों में लिखा है... वो हमारी किस्मत होती है—ना बदली जा सकती है, ना मिटाई जा सकती है। ये कहानी है शिवाय मेहरोत्रा की—एक ऐसा नाम, जो खुद में ऐश्वर्य और अहंकार का पर्याय है। रुतबा ऐसा कि उसके चेहरे पर गुरूर की परछाईं तक झांकने की इजाज़त नहीं। माँ और बहन के सिवा किसी को अहमियत नहीं देता, और बाकी रिश्तों से जैसे कोई लेना-देना ही नहीं। वो है उस विरासत का वारिस जो खून से लिखी गई है—ठंडी आंखों, गर्म ख़ून और बेजुबान दिल के साथ। और फिर... वो मिलती है — इक्षिता। एक 18 साल की लड़की, जो मासूमियत की परिभाषा है। अनाथ, मगर अपने संस्कारों से समृद्ध। चंचल, मगर भीतर कहीं एक खामोशी है जो खुद उससे भी छिपी है। एक ऐसी बीमारी से लड़ रही है जिसका नाम तक नहीं जानती — और शायद वक्त भी उसके साथ वही खेल खेल रहा है, जो किस्मत ने रच रखा है। अब सवाल ये है — क्या शिवाय का पत्थर सा दिल इक्षिता की नज़रों की मासूमियत से पिघलेगा? क्या दो विपरीत दिशाओं की ये ज़िंदगियाँ लकीरों की एक ही मंज़िल पर आकर थम जाएंगी? या फिर ये कहानी भी अधूरी रह जाएगी... जैसे कई कहानियाँ लकीरों की कैद में रह जाती हैं?" “ये सिर्फ़ कहानी नहीं... ये उन लकीरों की दस्तान है जो हमें जोड़ती भी हैं, और तोड़ती भी।”
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ऋषिकेश में,
Hope Orphanage,
सुबह के 6 बज रहे थे।
एक लड़की उठती है और तैयार होती है।
तैयार होने के बाद आश्रम के ही बने छोटे से मंदिर में पूजा करती है और नाश्ता करती है और बिना किसी को नींद से जगाए रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाती है लेकिन जाने से पहले आश्रम में जो केयरटेकर उसका ध्यान रखती थी जिनको वो लड़की प्यार से दाई माँ बुलाती थी उनके कमरे में जाकर छुपके से उनके पैर छूती है और आशीर्वाद लेकर निकल जाती है।
आज वो अपनी आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर के Famous कॉलेज एलिसिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स (काल्पनिक नाम) जा रही है जहाँ उसका एडमिशन हुआ है।
ये लड़की सादगी से ही कहर ढाती है, जिसकी मीठी सी बोली में ही शहद टपकता है और अपने अच्छे nature से सबका दिल जीत लेती है, अगर कोई लड़का एक नज़र देख ले तो पहली नज़र में प्यार हो जाए और एक पत्थर दिल इंसान की धड़कने तेज कर दे। ये है हमारी इक्षिता राजपूत।
इक्षिता को डिजाइनिंग और बिज़नेस में इंटरेस्ट है और दोनों को ध्यान में रखकर ही कॉलेज में एडमिशन स्कॉलरशिप के bases पर हुआ है और उसको पूरी स्कॉलरशिप मिली है।
आख़िरकार टॉपर जो है और एक बात और इक्षिता ऋषिकेश के भी सबसे बड़े स्कूल से ग्रेजुएट है जहां उसने अपनी 12वीं आर्ट्स स्ट्रीम से 98% के साथ स्टेट रैंक टॉपर बनकर पूरी करी है।
दसरी तरफ,
जयपुर में,
मेहरोत्रा Mansion,
एक औरत पिछले 30 मिनट से बोल रही थी 'शिवाय बेटा उठ जाओ कॉलेज के लिए लेट हो जाएगा'
शिवाय भी पिछले आधे घंटे से अपनी माँ को 5 मिनट बोलकर-बोलकर फिर से सो जाता था।
तभी एक लड़की आती है जिसका नाम श्रावणी है और अपनी माँ से बोली- माँ क्यों सुबह से चिल्ला रहे हो।
वो औरत श्रावणी से बोली- तो क्या करु बच्चे पिछले आधे घंटे से तेरे भाई को बोलकर थक गई हू कि उठ जा, पर इस लड़के को मेरी सुन्नी कहां है।
श्रावणी मन में बोली- मां, ये तो आपकी बहुत बड़ी गलत फहमी है क्योंकि भाई तो सुनते ही सिर्फ आपकी और मेरी है।
श्रावणी उनको शांत करते हुए बोली- माँ, मैं भाई को अभी लेकर आती हूँ और वहाँ से अपने भाई के कमरे में जाती है।
कमरे में शिवाय अपने पेट के बल आराम से अपना सिर तकिये में छुपाए सो रहा था और उसके बाल उसके माथे पर बिखरे हुए थे।
श्रावणी , अपने भाई के पास जाकर बैठती है और उसके बालों में अपना हाथ सहलाते हुए बोली- भाई, उठ जाओ ना। माँ कितनी देर से बुला रही है आपको।
[ये लड़का शिवाय है और जो लड़की उसको जगाने आई है वो है उसकी छोटी बहन श्रावणी उर्फ (प्रिंसेस) और वो औरत इन दोनो की माँ कृषा जी]
शिवाय नींद में ही अपना सर अपनी बहन की गोद में रख लेता है।
श्रावणी, शिवाय को वॉर्निंग देते हुए बोली- भाई, उठ जाओ, नहीं तो मैं आपसे बात नहीं करूंगी।
शिवाय जल्दी से उठकर बोला- प्रिंसेस, तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती।
श्रावणी मुस्कुरा देती और उसके बाल ठीक करते हुए बोली- शिव भाई, पता है माँ आपको कितनी देर से बुला रही है।
शिवाय- प्रिंसेस, मैं 15 मिनट में रेडी होकर आता हूं और वॉशरूम में भाग जाता है।
श्रावणी प्यार से उसके बाल सहलाते हुए बोली- भाई, कुछ नहीं हो सकता आपका और ये बोलते हुए कमरे से बाहर चली जाती है।
श्रावणी नीचे हॉल में आती है और बोली- माँ, भाई 15 मिनट में आ रहे हैं।
शिवाय का कमरा,
करीब 5 मिनट बाद, वॉशरूम का दरवाजा खुलता है और शिवाय बाहर आता है और इस समय कमर पर सिर्फ तौलिया था और शॉवर की वजह से उसकी सीने से लेकर उसके एब्स तक पानी टपक रहा था और इस वक्त शिव बहुत हॉट लग रहा था।
शिवाय सीधे अलमारी में जाता है और एक काली शर्ट, काली जींस और काले जूते पहनता है फिर ड्रेसिंग टेबल के पास आकार अपने बाल सेट करता है और टेबल से अपनी घड़ी उठाकर पहनता है और वॉलेट अपनी जींस की जेब में रखता है और कांधे पे बैग लिये कमरे से बाहर आता है।
जब शिवाय नीचे हॉल में आता है तो उसकी मां किचन में थी और वह अपनी मां के पास जाकर पीछे से उनको गले लगाता है, और उनके कांधे पर अपनी चिन रखकर बोला- सॉरी, मां आज देर हो गई।
कृषा जी नाराज़गी से बोली- ये ना तेरा रोज़ का है, मुझे तुझसे बात ही नहीं करनी है।
शिव ने मासूमियत से कहा- माँ, मैं रात को देर से सोया था और थका भी हुआ था, प्लीज ना कल से जल्दी नीचे आ जाऊंगा और आपको मैं हॉल में मिलूंगा, अब तो माफ़ करदो।
कृषा जी उसकी बात मानते हुए बोली- अच्छा ठीक है, बैठो टेबल पर मैं खाना लगाती हूं।
शिवाय जाकर डाइनिंग टेबल पर अपनी बहन के पास वाली कुर्सी पर बैठ जाता है और बोला- कॉलेज के पहले दिन के लिए तैयार।
श्रावणी घबराते हुए बोली- शिव भाई, डर लग रहा है।
शिवाय, श्रावणी को भरोसा दिलाते हुए बोला- मैं हूँ ना, और अगर कॉलेज में कोई परेशान करे ना तो सिर्फ मेरा नाम ले देना और उसका सिर सहला देता है।
कृषा जी टेबल पर खाना लगाती हैं और खुद भी बैठ जाती हैं।
तभी दरवाजे की घंटी बजती है।
कृषा जी उठने ही वाली थी लेकिन शिवाय बोला- माँ आप बैठो मैं देखता हूँ और जाकर दरवाजा खोल देता है।
तो सामने एक प्यारी सी लड़की खड़ी थी जिसका नाम अन्या है, और वो बोली- शिव भाई, वाणी कॉलेज चली गई?
शिवाय उसका सवाल सुनकर लापरवाही से बोला- नहीं अनु, अंदर आओ।
वो दोनो अंदर आते हैं और श्रावणी अन्या को देखकर बोली- अनु, तू तो मुझसे भी ज्यादा excited है।
अन्या खुश होकर बोली- मैं क्या करूँ, अब एक्साइटमेंट कम ही नहीं हो रही।
कृषा जी अपनेपन के साथ बोली- बेटा, आओ नाश्ता करलो।
अन्या मना करते हुए बोली- नहीं आंटी, मैं नाश्ता करके आई हूँ।
श्रावणी बीच में ही बोली- माँ, मेरा नाश्ता हो गया।
शिवाय उसको टोकते हुए बोला- प्रिंसेस, जल्दी से अपना नाश्ता खत्म करो।
श्रावणी भी फ़िरसे बोली- भाई बस और नहीं खाना।
शिवाय भी फिर उसका साथ देते हुए बोला- माँ, मेरा नाश्ता भी हो गया। ठीक है, प्रिंसेस चलो फिर मैं आप दोनो को भी कॉलेज ड्रॉप कर देता हू।
अन्या मना करते हुए बोली- नही शिव भाई, आप जाइये, डैड ड्रॉप कर देंगे।
शिव, श्रावणी को देखकर बोला- प्रिंसेस, आप देखलो आपको किसके साथ जाना है।
श्रावणी सोचते हुए बोली- भाई, मैं अनु के साथ आ जाती हूँ और आपको कॉलेज में मिलती हूँ।
शिव उन दोनों को निर्देश देते हुए बोला- ठीक है, ध्यान से जाना दोनो और वो खुद भी घर से कॉलेज के लिए निकल जाता है।
दूसरी तरफ,
अब तक इक्षिता की ट्रेन जयपुर पहुंच चुकी थी।
इक्षिता जयपुर पहुंच कर वहां से एक टैक्सी करती है जो उसको एलिसिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट् के सामने उतार देती है।
इक्षिता सिद्धा कॉलेज के अंदर जाती है और वॉचमैन से हॉस्टल का रास्ता पूछती है।
वॉचमैन कुछ बोलता है उससे पहले ही उस लड़की को देखकर उसकी बोलती बंद हो जाती है। वो सिर्फ लेफ्ट साइड का इशारा करता है और इक्षिता थैंक यू बोलकर निकल जाती है।
इक्षिता हॉस्टल में वार्डन से मिलकर रूम नंबर पूछती है, कमरे की चाबियां लेकर अपने सामान के साथ वहां पहुंच जाती है, तो देखती है कि एक लड़की आराम से एक बिस्तर पर सो रही है।
इक्षिता बिना उसको डिस्टर्ब किए अपना सामान एक तरफ रख कर अपने बैग से किताबें लेकर कॉलेज के लिए निकल जाती है।
वेसे तो इक्षिता बहुत सुंदर है लेकिन अभी तक उसने ब्लैक मास्क पहन रखा है लेकिन उसकी आंखें देखकर वो वॉचमैन कहीं खो गया था।
जब इक्षिता हॉस्टल की औपचारिकताएं (Formalities) पूरी कर रही थी तब तक शिवाय कॉलेज आ चुका था और अपने दोस्तों के साथ बैठकर फ्रेशर्स की रैगिंग का मज़ा ले रहा था जो कि उसके दो दोस्त वेदांत और अन्वी कर रहे थे।
(वे दोनों स्कूल टाइम से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।)
तभी वहां दो लड़कियां आती हैं और वो भाग कर शिव के गले लग जाती है, ये दोनों कोई और नहीं बल्कि श्रावणी और अन्या थी।
वेदांत दोनो लड़कियों को देखकर बोला- तुम दोनो को नहीं पता यहां रैगिंग चल रही है।
श्रावणी धमकी भरे स्वर में बोली- आपको पता है मैं किसकी बहन हूं।
अन्वी उसकी बात हवा में उड़ते हुए बोली- माफ़ कीजिए, इससे हमें परेशानी क्यों होगी और पहले तो तुम शिव से दूर हो जाओ।
श्रावणी, शिव को देखती है जो मुस्कुरा रहा था।
श्रावणी, अन्वी को देखकर गुस्से सेबोली- क्यों, ये मेरे इक्लोते बॉय फ्रेंड है।
अन्वी और वेदांत ये सुनकर शॉक हो जाते हैं।
शिव प्यार से बोला- प्रिंसेस, ठीक है। अब, introduction का time है।
वेदांत सवाल करते हुए शिव से बोला- ये दोनो है कौन,शिव?
शिव हस्ते हुए बोला- ये मेरी छोटी बहन है श्रावणी और ये मेरी बहन की दोस्त है अन्या जो कि मेरे लिए श्रावणी जैसी ही है।
अन्वी उसको गुस्से से घूरते हुए बोली- तभी मैं सोचू कि जो लड़का लड़कियों को अपने करीब तक नहीं आने देता उसकी गर्लफ्रेंड कैसी हो सकती है।
श्रावणी घबराते हुए पूछती है- भाई, मेरी भी रैगिंग करोगे क्या?
अन्वी ,श्रावणी और अन्य को देखकर मुस्कुरा देती है और बोली- तुम शिव की बहन हो इसलिए तुम दोनों की कोई रैगिंग नहीं होगी।
तभी वहां एक लड़की आती है जिसकी पायल से छन-छन की आवाज आ रही थी।
शिव को वो पायल की आवाज़ सुकून दे रही थी।
जब सब उस तरफ देखते हैं तो लड़कों की तो आंखें उस पर ठहर जाती है और लड़कियां उसकी खूबसूरती से जल रही थीं।
ये है हमारी इक्षिता।
अन्वी उस लड़की को देखते हुए अर्रोगंट आवाज़ में बोली- तुम इधर आओ।
इक्षिता भी वहां जाते हुए अपनी धीमी और सहमी हुई आवाज़ में बोली- जी बोलिए।
वेदांत सवालिए नज़रो से उसके झुके हुए चेहरे को देखते हुए पूछता है- तुम यहां नई हो?
इक्षिता हैरान थी फिर भी थोड़ी हिम्मत करके बोली- जी, लेकिन आप ये सब क्यों पूछ रहे हैं?
वेदांत भी उसी तरीके से बोला- सवाल नहीं, अपना introduction दीजिए।
इक्षिता अपनी नजर और चेहरा झुका कर बोली- मेरा नाम इक्षिता राजपूत है। मैं 18 साल की हूँ। यहाँ ऋषिकेश से आयी हूँ और फुल स्कॉलरशिप पर यहाँ एडमिशन मिला है और मैं इंटीरियर डिजाइनिंग की एमबीए के पहले साल में हूँ।
अन्वी ने दूसरा सवाल करते हुए पूछा- तुम्हारे मम्मी-पापा क्या करते हैं।
इक्षिता उदास आवाज़ में बोली- मेरे मम्मी-पापा की मृत्यु हो गई थी जब मैं 6 साल की थी। मैं एक अनाथ हूँ लेकिन मैं अक्षिता ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की मालिक हूँ जिसकी ownership मुझे 2 हफ्ते पहले मिली है।
शिव हेयरां परेशां होकर उसको देखते हुए बोला- रुको तुम अक्षत और इशिता राजपूत की बेटी हो, है ना?
इक्षिता अपना मास्क हटा देती है और अपनी पलकें झुकाये ही बोली- जी, मैं उनकी इक्लोती बेटी हूं।
वेदांत मुस्कुरा देता है और बोला- तो आज से और अभी से तुम्हारा एक बड़ा भाई है और तुम अनाथ नहीं हो।
इस बार इक्षिता ने अपनी पलकें उठाईं और वेदांत की तरफ देखकर मासूमियत से बोली- लेकिन मेरा तो कोई भाई नहीं है।
जब शिव उसे देखता है तो वो सम्मोहित हो गया था और एक तक उसे ही देखता जा रहा था।
वेद उसको भरोसा दिलाते हुए बोला- मैं हूं ना, मेरी कोई बहन नहीं है, तो क्या तुम मेरी बहन बनोगी?
इक्षिता के चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान आ जाती है और वो बोली- तो मैं आपको, भाई बोलू?
वेदांत ने हाँ मैं सिर हिलाते हुए अन्वी की तरफ़ इशारा करता और बोला- इसको भाभी बोलना है क्योंकि ये मेरी मंगेतर है।
इक्षिता हाँ मैं सिर हिलाकर बोली - ठीक है,भाई।
श्रावणी, इक्षिता के पास जाकर बोली- मैं भी सेम कोर्स और क्लास में हूँ, क्या तुम मेरी फ्रेंड बनोगी, मेरा नाम श्रावणी मेहरोत्रा है।
इक्षिता सिर्फ हां में सिर हिलाती है और उसका सरनेम रिपीट करते हुए बोली- मेहरोत्रा, है ना?
श्रावणी मासूमियत से हां में सिर हिला देती है।
इक्षिता एक नज़र शिव को देखती है और बोली- आप शिवाय मेहरोत्रा हैं, है ना?
शिव उसको देखकर पुष्टि करते हैं पूछता है- हाँ, पर तुम मुझे कैसे जानती हो?
इक्षिता उसका सवाल सुनकर मुस्कुरा देती है और प्यार से उसको देखते हुए बोली- मिस्टर मेहरोत्रा मैं तो आपको बचपन से जानती हूँ, दिमाग पर ज़ोर डालिए शायद याद आ जाए।
शिव सोचने का नाटक करते हुए, जैसे उसको बहुत याद करने के बाद याद आया हो और बोला- अरे हाँ, याद आया तुम्हारे ऋषिकेश जाने से पहले मैंने तुमसे वादा किया था कि मैं तुमसे शादी करूँगा, तब मैं 6 साल का था और तुम 4 साल की थी।
अन्या उसको देखते हुए मन में सोचती है 'वो तो बचपन में बोल दिया होगा' फिर शिव को देखते हुए बोली- लेकिन शिव भाई, आप तो अपना हर एक promise पूरा करते हो।
शिव उसको मुस्कुराकर देखता है और बोला- हाँ, तभी तो आज तक न किसी लड़की को अपने पास आने दिया है और न ही कोई आ पायी है।
इक्षिता मुस्कुराकर बोली-मुझे याद है, तब श्रावणी 3 साल की थी और अब 17 साल की है, है ना?
श्रावणी बड़ी सी मुस्कान के साथ हां में सिर हिलाकर बोली- हाँ, मेरी होने वाली भाभी।
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Ab aage,
इक्षिता कुछ नहीं बोलती लेकिन शिव बोलता- वेसे राजकुमारी बहुत ज्यादा बोलने लगी हो।
शिव अभी तुम तीनों क्लास में जाओ और ब्रेक टाइम में कैंटीन में मिलते हैं। तीनो वहा से क्लास में चले जाती है।
अन्वी- सभी लोग अपनी कक्षाओं में वापस जाएं और शुभकामनाएं।
इधर क्लास में शिव का ध्यान ही नहीं था और वो अपनी ही सोच में घूम रहा था और इक्षिता का भी कुछ यहीं हाल था।
अन्या- इक्षिता, क्या सोच रही हो।
इक्षिता तुम मुझे इशी बोल सकती हो, सब अनाथ आश्रम में मुझे इशी निकनेम से बुलाते थे।
श्रु- मैं तो आपको भाभी ही बुलाऊंगी।
इक्षिता- क्यों, मैं तो अभी ही वापस आई हूँ और अगर उन्हें कोई पसंद हुआ तो।
श्रु- पता है भाई ने आपसे वादा किया है इस बारे में मुझे, खुद उन्हें और आपके इलावा किसी को नहीं पता और भाई तो किसी और लड़की को एक आंख उठाकर भी नहीं देखते, सच्ची।
इक्षिता मुस्कुराती है और बोली- चलो लंच टाइम है कैंटीन चलते हैं।
अन्या- हाँ, चलते हैं भूख लगी है।
कैंटीन जाते वक्त इक्षिता का सर काफी भारी हो रहा था और थकावट का सोचकर कुछ खास ध्यान नहीं दिया उसने।
तीनो (इक्षिता, श्रावणी और आन्या) जब अंदर जाते हैं तो उनमें एक टेबल पर पहले से बैठे शिव, वेद, अन्वी दिख जाते हैं और उनके पास जाकर बैठ जाते हैं।
शिव बोला- प्रिंसेस, आपने सुबह अच्छे से नाश्ता क्यों नहीं किया था।
श्रावणी- वो क्या है ना भाई इंसान का पेट भर जाता है मेरा भी भर गया था लेकिन अभी बहुत भूख लगी है।
शिव बोला- मैं अभी सबके लिए ऑर्डर करके आता हूँ।
इक्षिता- शिव, मेरे लिए, प्लीज, कुछ ऑर्डर मत करना।
शिव रूका और पीछे घूमकर बोला- क्यों, इक्षु भूख नहीं लगी।
इक्षिता ना में सर हिला देती है।
शिव बोला- ठीक है तुम चॉकलेट मिल्कशेक पी लेना।
अन्वी- तुझे कैसे पता शिव की इक्षिता को चॉकलेट मिल्कशेक पसंद है।
शिव बोला- क्योंकि कुछ चीज कभी बदलती नहीं और इक्षु का चॉकलेट मिल्कशेक इतना पसंदीदा है कि पढ़ाई और चॉकलेट मिल्कशेक में से एक चूज करना हो तो यह चॉकलेट मिल्कशेक ही चूज करेगी, है ना?
इक्षिता, मुस्कुराती है और बोली- बिल्कुल सही।
शिव वहां जाता है और काउंटर पर 3 प्लेट मैगी और 2 प्लेट सैंडविच और 4 कोल्ड ड्रिंक्स और एक चॉकलेट मिल्कशेक अपने टेबल पर लेकर आने का बोलकर वापस आ जाता है।
जब शिवाय, इक्षिता को देखता है तो उसको वो सुबह से काफी ज्यादा कमजोर लग रही थी लेकिन शिव कुछ बोलता नहीं।
वेद बोला- इक्षिता, तुम जयपुर कब आई।
इक्षिता कुछ नहीं बोलती और शिव को देखने लगती और बोली- मेरा चॉकलेट मिल्कशेक और चुप हो जाती है।
शिव- पहले वेद के प्रश्न का जवाब दो, इक्षु।
इक्षिता- आज सुबह आई, अब खुश मैंने जवाब दे दिया लेकिन अब आप मेरा चॉकलेट मिल्कशेक लेकर आइए।
शिव बोला- 5 मिनट में आ रहा है, थोड़ा इंतज़ार करलो।
शिव की बात सुनकर कुछ नहीं बोलती और शिव को थोड़ा अजीब लगता है।
शिव, इक्षिता के पास जाकर बैठा है और उसका चेहरा अपनी तरफ करके बहुत ही कोमल स्वर उसे पूछता है- इक्षु तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है, क्या?
इक्षिता कुछ नहीं बोलती और शिव के सीने से लगकर रोने लगती।
शिव ये देखकर उसको अपने करीब करके उसका सर सहला देता है और थोड़ा परेशान होकर बोला- इक्षु बताओ मुझे क्या हुआ? रो क्यों रही हो?
इक्षिता को रोते देख शिव, श्रावणी और अन्या की तरफ देखता है जो ना में सर हिलाकर पता नहीं का जवाब देती है।
इक्षिता को रोता देखकर शिव उसको खुद से थोड़ा अलग करता है और उसका एक गाल अपने हाथ में लेकर उसका चेहरे ऊपर करता है, तो देखा पूरा चेहरा लाल था और उसकी बड़ी-बड़ी पलकें आँसुओं से भरी हुई थी।
वेद, इक्षिता के पास आया और बोला- बेबी, आप रो क्यों रहे हो? देखो यहां हम सबके साथ आप सब शेयर कर सकते हो।
इक्षिता कुछ नहीं बोलती और शिव के सीने में वापस से अपना सर छुपा लेती है।
शिव- इक्षु, अपने शिव को नहीं बताओगी क्या हुआ है? किसने कुछ बोला क्या?
इक्षिता धीरे से बोली- मैं सिर्फ शिव को बताऊँगी।
शिव- ठीक है, सिर्फ मुझे बताओगी तो बताओ, क्या बात है इक्षु और ये मेरी झाँसी की रानी आज रो क्यों रही है?
इक्षिता रोते हुए ही धीमी आवाज़ में बोली- शिव, मुझे नहीं पता पर पिछले कुछ महीनों से मेरी तबीयत कभी भी खराब हो जाती है और आज सुबह से ही मेरे सर में बहुत तेज दर्द हो रहा है जो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता है।
शिव उसको बच्चों की तरह सांत्वना देते हुए बोला- अब मैं हूं ना, सब ठीक हो जाएगा अभी हम थोड़ी देर मैं घर चलेंगे लेकिन उससे पहले अस्पताल जाएंगे, ठीक है।
इक्षिता- शिव, अस्पताल नहीं।
शिव- बिल्कुल चुप, और अस्पताल क्यों नहीं जाना?
इक्षिता धीरे से बोली- इंजेक्शन और वो कड़वी दवाइयां, गंदी।
अब तक उन सब का खाना भी आ जाता है।
शिव अपनी सैंडविच की प्लेट से एक त्रिकोण उठाकर इक्षिता के मुंह की तरफ कर देता है और बोला- इक्षु, थोड़ा सा खालो, जितना खा सकती हो।
इक्षिता- नहीं, मुझे नहीं खाना।
इक्षिता की सैंडविच के लिए ना सुनकर वेद बोला- मैगी खाओगी?
इक्षिता फिरसे ना में सर हिलाती है।
शिव- ठीक है, तुम अपना चॉकलेट मिल्कशेक आराम से पियो, तभी शिव के दिमाग में कुछ स्ट्राइक करता है, लेकिन उसके चेहरे के एक्सप्रेशन नॉर्मल थे।
इक्षिता आधा गिलास मिल्कशेक पीकर उसको टेबल पर रख देती है और बोली- शिव, और नहीं पीना तुम पिलो।
शिव-ठीक है, इक्षु पर पहले बताओ तुमने सुबह से क्या खाया है और कितना खाया है।
इक्षिता- मैंने सुबह 6 बजे 2 सैंडविच खाए थे और उसके बाद अब यह मिल्कशेक सिर्फ इतना ही।
शिव- तुम्हें पता है तुम प्रीमैच्योर हो ऊपर और तुम बच्चे जितना खाते हो।
वेद- इक्षिता प्रीमैच्योर बच्चा है, पर तुझे कैसे पता।
इक्षिता- शिव को मेरे बारे में सब पता होता है जो मुझे खुद नहीं पता वो भी।
शिव- मुझे एक बात बताओ तुम्हारे ऋषिकेश जाने के बाद, अंकल-आंटी तुम्हें कोई दवा देते थे, इक्षु।
इक्षिता सर पर हाथ रखकर सोचते हुए बोली- हाँ, शिव, पर मम्मी- पापा की मौत के बाद वो दवा बंद हो गई।
शिव- वो बंद नहीं होनी चाहिए थी।
वेद- पर बात क्या है शिव?
श्रावणी- भाई, आप परेशान लग रहे हो।
शिव एक नज़र इक्षिता को देखता है जो बार-बार अपनी पलकें झपका रही थी।
शिव- इक्षु, नींद आ रही है।
इक्षिता, हाँ में सर हिलाती है और माथा पकड़ कर बैठ जाती है।
शिव उसका सर अपने कंधे पर रखता है और उसका सर पर थपकी देता है और 5 मिनट में वो सो जाती है।
अन्वी- शिव भाई, आप परेशान क्यों हो ?
शिव- इसकी दवा बंद नहीं होनी चाहिए थी और तो और इसका इलाज चल रहा था।
श्रावणी- भाई, कैसा इलाज, कोंसा इलाज?
शिव- प्रिंसेस, इक्षु को ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) है, और कुछ समय पहले उसने जो कहा था उसके अनुसार वह स्टेज 4 पर है, ऐसा मुझे लगता है।
Ab aage,
अन्वी- शिव भाई, आप मज़ाक कर रहे है ना, बोलो।
श्रु- भाई, क्या अन्वी भाभी सच बोल रही है, आप मज़ाक कर रहे हो।
अन्या- श्रु, शिव भाई जब भी कुछ बोलते हैं तो सोच समझकर बोलते हैं और जान पर खतरा होना मजाक नहीं है।
वेद- अन्या बिल्कुल सही कह रही है, शिव सीरियस है।
अन्वी- इस हालत में उसका अकेले हॉस्टल में रहना उसके लिए सुरक्षित नहीं है और मुझे अपनी इतनी प्यारी ननद को खोना नहीं है और उसकी आँखों में आँसू थे।
वेद- रिलैक्स, अन्वी कुछ नहीं होगा इसलिए तुम Stress मत लो, तुम्हारी सेहत के लिए ठीक नहीं है।
शिव- प्रिंसेस, माँ को कॉल करो।
श्रु- सॉरी भाई, फ़ोन घर पे रह गया।
वेद- तू आंटी को फोन करना।
शिव- कर लेता पर जिस जेब में फ़ोन है उस तरफ इक्षु सो रही है और इसकी नींद बहुत कच्ची है, बचपन से।
अन्या- भाई, मैं आंटी को कॉल करूँ।
शिव हां में सर हिला देता है।
अन्या के कॉल करते हैं और दूसरी तरफ से कृषा जी कॉल रिसीव करती हैं- हां, बोलो बच्चे।
अन्या- आंटी वो शिव भाई को आपसे बात करनी है और फ़ोन स्पीकर पर है।
कृषा जी- बोलो शिव, क्या बात है।
शिव- माँ, आप NGO से घर जाओगे तो मेरे और प्रिंसेस के कमरे के सामने वाला कमरा साफ़ करवा देना प्लीज और उसमें सब कुछ नया रखना प्लीज बाकी सब मैं आपको घर आकर बता दूंगा और प्लीज गेस्ट रूम भी तैयार करवा देना मेरे दोस्तों के लिए, कुछ दिन हमारे साथ रहेंगे।
कृषा जी- ठीक है बच्चे, पर आप घर कितने बजे तक आ रहे हो।
शिव- माँ, आज 2 लेक्चर स्किप कर रहा हूँ क्योंकि बहुत जरूरी है और प्लीज आप हम सबके घर आने से पहले सब रेडी कर दोगे, प्लीज।
कृषा जी- ठीक है, मैं अभी एनजीओ से निकल रही हूं और फोन डिस्कनेक्ट कर देती है।
वेद- एक काम कर इसको ट्रस्टी रूम में लेजा वेसे भी ये कॉलेज तेरा है सिर्फ हम सब जानते हैं।
शिव- धीरे बोलो और सुनिश्चित करो कि इक्षु को ये बात पता न चले क्योंकि इसकी एडमिशन एप्लीकेशन मैंने पर्सनल बेसिस पर अप्रूव करवाई है। मुझे इसके एक-एक पल की खबर पता है लेकिन अगर इक्षु को पता चला तो वो गुस्सा हो जाएगी और मैं ऐसा नहीं चाहता।
श्रु- ठीक है भाई, हम सब ध्यान रखेंगे।
इक्षिता थोड़ी कसमसाती है और वो उठ जाती है।
शिव-अब ठीक हो।
इक्षिता, शिव को देखती है और सर हां में हिला देती है।
एक लड़की सबके पास आती है और शिव को देखकर अपने अच्छे बनने की एक्टिंग शुरू करती है और बोली- हैलो शिवाय। कैसे हो?
इक्षिता, शिव का हाथ पकड़ लेती है।
शिव ये मेहसूस कर लेता है और उस लड़की को इग्नोर करते हुए बोला- इक्षु, हम अभी अस्पताल जायेंगे और तुम डरना नहीं मैं, वेद, अन्वी, अन्या और प्रिंसेस तुम्हारे साथ हैं।
इक्षिता- शिव, अस्पताल जाना ज़रूरी है क्या?
शिव- हम्म, ज़रूरी है।
इक्षिता- ठीक है शिव।
वेद- बेबी सिस्टर उसके बाद हम आइसक्रीम खाएंगे।
शिव- नहीं, इक्षु को आइसक्रीम पसंद नहीं है, इसको मिल्कशेक पसंद है।
इक्षिता जब अपना आधा बचा हुआ मिल्कशेक टेबल पर देखती है तो बोली- शिव, मैं अपना मिल्कशेक ख़त्म करूँ।
शिव उसका सर सहलाकर बोला- हाँ, करलो और पीना हुआ तो मुझे बताना।
वो लड़की ये सब देख रही थी और बोली- ये लड़की है कौन और तुम पर हक कैसे जाता रही है, शिवाय।
शिव -मिस माया कपूर, ये मेरी होने वाली बीवी है, क्या ये स्पष्ट है और भी कुछ सुनना है तो सुनो अगर मेरी बहनों को या फिर मेरी इक्षु को तुम्हारी वजह से दुख हुआ या एक ख्रोंच भी आई तो तुम उस शैतान को देखोगी जो मैंने अपने अंदर छुपा रखा है।
इक्षिता- शिव, कोई बदतमीजी नहीं।
शिव- इक्षु, इसे दिख रहा है ना मुझे इससे बात नहीं करनी फिर ये होती कौन है ये पूछने वाली कि तुम मुझपर हक क्यों जता रही हो, बताओ मुझे?
इक्षिता- सॉरी, लेकिन शिव को आपसे बात नहीं करनी तो आप प्लीज चली जाइये और एक बार फिर सॉरी।
माया- तुम खुद को समझती क्या हो, अपनी हद में रहो, तुम जानती नहीं हो मैं कौन हूँ।
शिव-तुम जिसको हद में रहने का बोल रही हो वो चुटकियों में तुम्हें अर्श से फर्श पर ला सकती है। मैं बताता हूँ ये लड़की जिसके लिए तुम ये घटिया बातें बोल रही हो वो अक्षिता ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की मालिक और एक लोटी वारिस इक्षिता राजपूत से बात कर रही हो तो अपनी आवाज़ और एटीट्यूड अपनी जेब में रखो और निकलो मेरी नज़रों के सामने से।
मैया अपना पैर पटक वहां से चली जाती है।
इक्षिता- शिव, ये क्या किया और ये लड़की कौन थी, बताओ ना।
वेद- बेबी सिस्टर आप उनको छोड़ो चलो अभी हम अस्पताल चलते हैं और हमें आपकी भाभी (अन्वी) की रिपोर्ट भी लेनी है।
शिव- चलो, उठो जल्दी, फिर मैं घर पर अपनी इक्षु की पसंदीदा डिश बनाऊंगा।
इक्षिता- ठीक है, चलो।
सब कैंटीन से बाहर आते हैं तो शिव और वेद की नज़र इक्षिता के पैर पर जाती है तो दोनों एक दूसरे को देखते हैं।
इक्षिता- शिव, मेरे पैरों में दर्द हो रहा है। कुछ करो ना मैं और नहीं चल सकती।
शिव- ठीक है मैं तुम्हें गोद में उठा लेता हूँ।
इक्षिता- ठीक है, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, बस गल्ती से गिरा मत देना।
शिव- पहले हॉस्टल के कमरे की चाबी तुम वेद को पकड़ो।
इक्षिता अपनी जेब से चाबी निकालकर वेद को दे देती है।
वेद- अन्वी चलो, इसका सामान लेकर आना है।
अन्वी और वेद हॉस्टल जाते हैं और वार्डन से बात करके उस कमरे से इक्षिता का लगेज कार में रख देते हैं।
सब कार में बैठते हैं और करीब 30 मिनट बाद अस्पताल पहुंचते हैं।
अंदर जाकर अस्पताल में डॉ. नैना से मिलते हैं शिव कुछ बात करके उनकी इक्षिता का ब्लड सैंपल लेने का कहता है और वेद, अन्वी की रिपोर्ट लेता है जो नॉर्मल आई थी और 20 मिनट बाद बाहर आते हैं और गाड़ी से मेहरोत्रा मेंशन की तरफ चला देता है।
10 मिनट के बाद सब घर पहुंच जाते हैं और कृषा जी सोफे पर बैठ कर शिव, श्रावणी और बाकी सब का इंतजार कर रही थी।
शिव- माँ, खाने में क्या है।
कृषा जी, शिव का कान खींचकर बोली- तुम फोन करके सूचित कर सकते हो कि आने में थोड़ी देर हो जाएगी।
तभी कृषा जी की नज़र वेद, इक्षु और अन्वी पर जाती है और वो शिव का कान छोड़ देती है।
शिव- माँ, ये वेद, ये अन्वी और ये हमारी इक्षु।
कृषा जी, शिव के कहे आखिरी नाम को दोहराती है इक्षु और शिव से बोली- इक्षिता राजपूत, है ना?
शिव- जी माँ, आपकी होने वाली बहू।
कृषा जी- ठीक है वो तो मेरी बात पहली ही इसकी माँ से पक्की करके रखी है।
तभी दरवाजे से एक 40 साल के करीब आदमी अंदर आया और बोला- कृषा, आज खाने में क्या है?
कृषा जी- आज आप इतनी जल्दी आ गए, लगता है ज्यादा काम नहीं था ऑफिस में।
वो आदमी शिव और श्रावणी के पापा और कृषा जी के पति कुशाग्र मेहरोत्रा हैं।
श्रावणी- पापा, आप मेरे लिए क्या लेकर आये हो।
कुशाग्र जी- बहुत सारा प्यार।
जब उनकी नज़र इक्षिता पर जाती है तो वो बोलते हैं- यह इतनी प्यारी बच्ची कौन है।
शिव- पापा, ये हमारी इक्षु है और ये मेरे दोस्त वेद और अन्वी हैं और अगले महीने इनकी शादी है..
शिव- माँ, खाने में क्या है।
कृषा जी- दोनो बाप बेटे एक जैसे हैं, घर आये नहीं खाने में क्या है, ये सवाल पहला होता है? मैने आज खाना नहीं बनाया।
शिव- ये तो और भी अच्छी बात है।
कुशाग्र जी- बेटा, भूखे सोना है।
श्रावणी- नहीं, पापा आज भाई इक्षिता भाभी की पसंदीदा वेज बरयानी बनाने वाले हैं।
Ab aage,
कृषा जी- शिव के हाथ का खाना, अच्छी बात है। आज मेरी छुटी।
इक्षिता- शिव, मुझे कुछ नहीं खाना।
ये सुनकर कुशाग्र जी बोले- क्यों बेटा आप कुछ क्यों नहीं खाते।
शिव अपने पापा की बात काटकर इक्षु से बोला- ठीक है, खाने की मेज पर नीचे होनी चाहिए।
इक्षिता- ठीक है।
शिव, श्रावणी को देखकर बोला- प्रिंसेस, इक्षु को कमरे में ले जाओ और इसको अकेला मत छोड़ना, ठीक है?
श्रु- ठीक है भाई।
अन्या- भाई, मैं भी चलती हूँ, पापा इंतज़ार कर रहे होंगे।
शिव- ठीक है, ध्यान से जाना।
अन्या हां में सर हिलाती है और चली जाती है।
कुशाग्र जी- शिव, मेरी बात क्यों काटी तुमने।
शिव- क्योंकि मुझे इक्षु पर जबरदस्ती नहीं करनी है और इसके अलावा भी वह नाजुक है।
कृषा जी- मैं कुछ समझी नहीं।
वेद- आंटी, शिव ने हम सबको बताया है कि इक्षिता को कैंसर है और आज हम आने से पहले अस्पताल उसका ब्लड सैंपल लेकर आए हैं।
कुशाग्र जी- पर इक्षु की तो दवा चल रही थी और अक्षत और इशिता भी नहीं आये।
शिव- गलती से भी अंकल आंटी का नाम उसके सामने मत लेना। जब उसकी एप्लीकेशन कॉलेज में आई थी तो मैंने जांच करवाई थी तो पता चला कि उन दोनों की मौत हो गई थी जब इशु 6 साल की थी और उसके बाद से वह बहुत शांत रहने लगी थी और एक अनाथालय में थी जहां उसका कोई भी दोस्त नहीं है .
कुशाग्र जी- ये सब जानकारी तुम्हें कब मिली।
शिव- कल रात को, जिसको पढ़ते वक्त मेरी कब आंख लग गई, पता नहीं चला और सुबह मां से दांत भी पड़ गई।
कुशाग्र जी- हमें तुम दोनों की कोर्ट मैरिज करनी पड़ेगी क्योंकि इक्षु को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है इससे पहले इसके चाचा को पता चले कि इक्षु जिंदा है, समझे शिव।
शिव- मुझे पता है मुझे 3 दिन दीजिए मैं इक्षु से बात करके उनको समझाना पड़ेगा।
कृषा जी- ठीक है लेकिन पहले खाना बनाओ।
शिव- शादी से पहले उसके भाई की परमिशन भी लेनी है।
कृषा जी- पर इक्षु का तो कोई भाई नहीं है।
शिव- माँ, आज ही बना है और वेद की तरफ़ इशारा करता है।
वेद- चल ज़्यादा नौटंकी मत कर वेसे भी तू उसको मुझसे बेहतर जानता है लेकिन मैं भाई के फ़र्ज़ निभाने से पीछे नहीं हटूंगा।
शिव, वेद की बातें इग्नोर करके कुछ सोचते हुए बोला- एक काम करिए पापा आज खाना आप बनाइए।
कुशाग्र जी- ठीक है, तुम सब जाकर फ्रेश हो जाओ।
कुशाग्र जी किचन में जाते हैं और एप्रन पहनकर अपना काम करने लगते हैं वहीं शिव उन दोनों (वेद और अन्वी) को गेस्ट रूम के सामने छोड़ कर खुद अपने कमरे में चला जाता है।
नीचे हॉल में,
कुशाग्र जी ने सब कुछ गैस पर चढ़ाकर कुकर को बंद किया और खुद भी फ्रेश होने अपने कमरे में जाते हैं और 10 मिनट बाद नीचे आकर रसोई की तरफ जाते हैं और जाकर गैस बंद कर देते हैं।
शिव अपने कमरे से निकलकर इक्षु के कमरे में जाता है और अंदर इक्षु बिस्तर पर मुँह फुलाकर बैठी थी।
शिव उसके पास जाकर बगल में बैठता है और बोला- क्या हुआ इक्षु? प्रिंसेस ने कुछ कहा आपसे?
इक्षिता, शिव को देखती है और ना में सर हिलाती है।
शिव- दर्द हो रहा है कहीं पर इक्षु? बताओ मुझे.
इक्षिता- पता है शिव, मुझे तुम्हारी बहुत याद आई। मैं ऋषिकेश में बिल्कुल अकेली हो गयी थी। लेकिन अभी देखो मेरे पास तुम हो इसलिए मैं बहुत खुश हूँ। पर मेरे पैरों में अभी भी दर्द हो रहा है।
शिव-चलो नीचे चलते हैं।
इक्षिता-लेकिन कैसे?
शिव- अपनी गोद में।
इक्षिता- नहीं शिव, नीचे सब होंगे।
शिव, इक्षिता को अपनी गोद में उठाकर कमरे से बाहर आता है और नीचे आ जाता है और उसको सोफे पर बैठाकर खुद रसोई में जाता है और फ्रिज में से आइस पैक निकलता है और वापस हॉल में आकर सोफे के सामने वाले टेबल पर बैठता है।
कुशाग्र जी ये महसूस कर रहे हैं कि शिव उन्हें देखकर भी अनदेखा कर रहा है लेकिन वो कुछ नहीं बोलते।
इक्षिता- शिव, वहां क्यों बैठे हो।
शिव कुछ नहीं बोलता और उसके पैर से चप्पल उतारकर उसके पैर को अपनी जांघों (Thighs) पर रखता है और उस पर आइस पैक लगा रहा है।
इक्षिता- शिव, ठंडा है।
शिव- अब सूजन है तो ठंडा ही लगाऊंगा।
कुशाग्र जी ये देख मुस्कुरा देते हैं और कुशाग्र जी वहां आकर बैठ जाते हैं लेकिन कुछ नहीं बोलते।
इक्षिता- शिव, बस ना,नही तो मैं जम जाउंगी।
शिव- इक्षु बस हो गया।
करीब 45 मिनट तक आइस पैक से दोनों पैर पर रखा जाता है।
शिव- हो गया, और देखो सूजन बिल्कुल चली गई। अब बताओ पैरों में दर्द हो रहा है।
इक्षिता- नहीं, Thank you।
शिव- Thank you, मतलब हद है अपनी बीवी की सेवा करो और thank you। नहीं, मुझे किस चाहिए और वो भी अभी जैसे बचपन में करती थी।
तब तक सब नीचे आ जाते हैं और शिव की बात सुनकर एक दूसरे को देखते हैं।
इक्षिता-ठीक है और उसके दोनो गालों पर किस कर देती है।
शिव भी उसके गाल पर किस करता है और बोला- अभी अच्छे बच्चे की तरह थोड़ा सा खाना खाओ, प्लीज। जितना आप खा सकती हो, मैं ज्यादा फोर्स नहीं करूंगा, मैं वादा करता हूं।
शिव की प्रतिज्ञा वाली बात सुनकर इक्षु बोली- ठीक है, मैं तुम्हारी बात मान लेती हूँ क्योंकि फिर मेरे साथ मस्ती करने वाला पार्टनर नाराज़ नहीं होना चाहिए ना, है ना?
शिव बोला- ठीक है, मेरी जान।
वेद- बेबी सिस्टर, आप सिर्फ शिव की बात ही क्यों मानती हो।
इक्षिता ने सुनकर वेद को देखा और फिर शिव को देखकर बोली- सच्ची शिव, मैंने तुम्हारी बात कब मान ली मैं तो तुमसे हमेशा अपनी बातें मरवाना चाहती हूँ।
शिव- हाँ, तुमने मेरी कोई भी बात नहीं मानी।
इक्षिता, अन्वी को देखकर बोली- भाभी, आप भी शिव की तरह मेरी पार्टनर इन क्राइम बनेंगी।
अन्वी कुछ नहीं बोलती और वेद को देखने लगती है जो उसकी बात सुनकर मुस्कुरा रहा था और बोला- बताओ अन्वी?
अन्वी भी एक मुस्कान के साथ बोलती है-बिलकुल बनूंगी और आपके वेद भाई बहुत परेशान करेंगे।
इक्षिता को कुछ याद आता है तो वो शिव को देखने लगती है।
शिव- कुछ पूछना है।
इक्षिता- हम्म...
शिव- तो पूछो।
इक्षिता- रुद्राक्ष भाई कहाँ है।
मुझे याद है मेरे ऋषिकेश जाने तुम और वो बहुत उदास थे।
शिव- रुद्राक्ष अभी जयपुर में नहीं है वो किसी काम से अजमेर गया है कल आ जाएगा, फिर हम उसको सरप्राइज देंगे।
इक्षु खुश होकर शिव हग कर लेती है।
शिव भी उसको खुश देखकर खुश था और बोला- बच्चे मैंने आपसे कुछ बात करनी है।
कृषा जी- जिसको जो भी बात करनी है डिनर के बाद करना, चलो सब बच्चे पहले खाना खाओ।
वेद-आंटी आप सही बोल रही हो और अन्वी तुम्हें दवा भी लेनी है।
श्रु- भाई तो ऊपर थे, तो खाना किसने बनाया।
कृषा जी- तुम्हारे पापा ने।
वेद- चलो तुम दोनो भी।
शिव को अपनी गर्दन पर इक्षु की सांसें महसुस हो रही थी और जब वो सर नीचे करके देखता था तो इक्षु उसकी बाहों में ही सो चुकी थी।
शिव- माँ, इक्षु सो गयी।
श्रु- ऐसा कौन सोता है।
कृषा जी- ये तो बचपन से ऐसी ही है जब भी शिव के गले लगती थी तो 5 मिनट में ही सो जाया करती थी और वो मुस्कुरा देती है।
शिव, इक्षु को खुद से अलग करता है तो उसकी नींद टूट गई थी।
इक्षु- सॉरी, आंख लग गई थी।
शिव- कोई बात नहीं मुझे तो आदत है तुम्हारे ऋषिकेश जाने के बाद मेरी प्रिंसेस ने तुम्हारी कमी मेहसूस नहीं होने दी पर मैंने तुम्हें बहुत मिस किया।
तभी अन्वी का फ़ोन बजता है।
वेद- किसका कॉल है?
अन्वी- मम्मी का, तुम बात करो।
वेद कॉल रिसीव करता है तो उधर से चिल्लाने की आवाज़ आती है- टाइम देखा है, घर से बाहर अयाशी करती है जो तू अब तक घर नहीं आई और घर के काम कौन करेगा और वो सब कर रही है तो आज के बाद घर मत आना।
वेद के चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था और वो बोला- अन्वी, वेदांत खुराना के साथ हैं और हां मेरी बीवी है वो तो आप अपनी आवाज नीचे रखकर तमीज और तहजीब से बात कीजिए नहीं तो बात करने की जरूरत ही नहीं है। बात-बात पर जो आप एहसान जताती है उसकी ज़रूरत नहीं है क्योंकि मैं खुद बिना अपने पापा की कमाई उड़ाए भी इतनी कमाता हूँ कि अपनी बीवी के खर्चे और उसकी इच्छा को पूरा कर सकूँ तो आज के बाद इस नंबर पर कॉल मत कीजिएगा, मुझे उम्मीद है यह स्पष्ट है और फोन डिस्कनेक्ट कर देता है।
वेद और बाकी सब अन्वी की तरफ देखते हैं तो उसकी उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
वेद, अन्वी को गले लगाकर उसका सर सहलाता है और बोला- तुम क्यों रो रही हो, जब उस घर में किसी को भी तुम्हारी फिक्र ही नहीं है।
अन्वी को खुद से अलग करता है और आंसू साफ करते हुए बोला- मैं पापा से बात करता हूं, प्लीज रो मत और ज्यादा रोने से तबीयत खराब हो जाएगी और मैं आइसक्रीम भी नहीं खिलाऊंगा।
अन्वी, उदास और रूंधे हुए आवाज़ में बोली- नहीं खिलाओगे।
वेद- अगर रोने लग जाओगी तो नहीं खिलाऊंगा।
अन्वी अपने आंसू साफ करती है और वेद के गले लग जाती है और बोली- आई लव यू।
वेद- वो तो मुझे पता है इसीलिए मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ।
कृषा जी- बच्चे आप रो नहीं हम सब हैं ना, आप हम सबके साथ रहो।
श्रु- हाँ, और मुझे बड़ी बहन भी मिल जाएगी और भाई की तीन बहनें (अन्या, अन्वी और श्रावणी खुद) हो जाएंगी।
शिव- हाँ, तुम यहीं रहो।
वेद- शादी तक यहीं रहलो फिर तो मैं तुम्हें पूरे धूम-धाम से लेकर जाऊंगा।
कुशाग्र जी- हाँ, तुम्हारी शादी इसी घर से होगी।
इक्षिता- भाभी, आप रुकोगे ना।
इक्षिता के बोलने पर तो अन्वी भी मान जाती है और थैंक यू बोलती है।
वेद- अब खाना खाए, मुझे भूख लगी है।
शिव बोलता है- हाँ, चलो।
सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठते हैं और बातें करते हुए खाना खाते हैं।
इक्षु को वेद अपने हाथों से खिला रहा था और 3-4 चम्मच बिरयानी खाने के बाद वो बोली- बस भाई और नहीं खाना।
शिव- कस्टर्ड खाना है।
इक्षु- नहीं ना शिव, मुझे और कुछ नहीं खाना।
ये सुन वेद, शिव को देखता है और वो अपनी पलकें झपका देता है।
शिव- ठीक है, बच्चे अभी आराम करना और सुबह कॉलेज भी जाना है ना।
इक्षु, शिव को देखकर अपनी पलकें झपका रही थी और शिव खाना ख़त्म करके उसको अपने पास बुलाता है।
इक्षु को नींद आ रही थी तो वो शिव के पास जाती है और उसको गले लगाकर अपने सर उसकी गरदन में छुपा लेती है।
शिव कुछ नहीं बोलता और अपने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ता है और दूसरे हाथ से उसके बालों को सहला रहा था और इक्षु भी सो जाती है।
Ab aage,
इक्षु को सोते देख शिव बोला- माँ, यह तो सो गई अब।
कृषा जी- बच्चे इसको अपने कमरे में लेजाओ और फिर भी तुम दोनो का पसंदीदा अड्डा तुम्हारे कमरे की लाइब्रेरी में है, है ना?
शिव- आपको कैसा पता?
कृषा जी- माँ हू तेरी और दोनो को बचपन से जानती हू।
शिव- ठीक है, ठीक है।
वेद का फोन रिंग करता है तो वो कॉल रिसीव करता है और बोला- बोलो एकांश।
(एकांश, वेद का छोटा भाई है जो फ्यूचर में शिव का होने वाला जीजा जो बनने वाला)
एकांश- भाई, आप कहाँ हो?
वेद- सच में ये तुम माँ से पूछ सकते हो ना।
एकांश - हाँ, भाई लेकिन मुझे आपको बताना है कि भाभी के परिवार के घर आई है रिश्ता तोड़ने।
वेद शॉक में खड़ा हुआ और थोड़ी ऊंची आवाज़ में बोला- क्या?
तेज़ आवाज़ की वजह से इक्षु नींद में ही रोने लगती है। शिव उसका सर सहला देता है और इक्षु फिर से सो जाती है।
वेद- ठीक है मैं पापा से बात करता हूँ तू प्लीज सब कुछ संभाल ले।
एकांश- ठीक है भाई।
अन्वी- वेद क्या हुआ है, मुझे डर लग रहा है।
वेद- तुम्हारे वो तथाकथित घरवाले हमारा रिश्ता तोड़कर मेरे घर पहुंच गए हैं।
अन्वी- अब क्या होगा?
वेद अपने पिता ऋषभ खुराना को कॉल करता है और 5 मिनट में उन्हें सब समझाता है और घर पर स्थिति और अपनी मां दोनो को संभालने का बोलता है।
ऋषभ जी- चिंता मत करो, वेद मैं सब देख लूंगा।
वेद ये सुनकर कॉल डिस्कनेक्ट करता है।
तभी शिव का फोन टेबल पर रखा हुआ था उस पर नोटिफिकेशन की आवाज आती थी।
शिव का ध्यान उधर जाता है तो अस्पताल से मेल आया था।
शिव- राजकुमारी, अस्पताल की रिपोर्ट आ गयी है। कृपया, जाँच करो ना।
श्रावणी रिपोर्ट देखती है और ठंडे स्वर में बोली- स्टेज 4 ब्लड कैंसर।
शिव ने शुरू की बात तो सुनली थी पर जब उसका ध्यान इक्षु पर जाता है जो अभी उसकी गोद में कांप रही थी।
शिव ये मेहसूस करता है तो इक्षु का माथा छूकर देखता है तो उसके चेहरे के भाव एक पल में बदल जाते हैं।
कृषा जी, शिव के चेहरे के बदलते भाव देखकर कहती हैं- शिव क्या हुआ? अचानक से तुम इतना परेशान क्यों दिख रहे हो।
शिव- माँ, इक्षु को बुखार है और ये काँप रही है। प्रिंसेस थर्मामीटर लेकर आना।
श्रावणी, शिव की बात सुनकर जल्दी से मेडिकल बॉक्स लेकर आती है और उसमें से थर्मामीटर शिव को देती है।
शिव थर्मामीटर लेकर उसका (इक्षिता) तापमान जांचता है और उसके हाथ से थर्मामीटर छूट जाता है।
वेद- शिव कितना तापमान।
शिव अपनी काँपती आवाज़ में बोला- 100.6°F.
शिव, इक्षु को खुद से अलग करता है तो उसकी नींद टूट जाती है।
इक्षु धीरे से बोली- शिव, क्या हुआ?
शिव- इक्षु, कहीं दर्द हो रहा है, क्या? और झूठ बोलने के बारे में सोचना भी मत।
इक्षु- शिव, मुझे नहीं पता और तुम मुझे छोड़ कर नहीं जाओगे ना जैसे मम्मा-पापा चले गए, बोलो।
शिव- नहीं, कभी नहीं जाऊंगा और उसको गले से लगा लेता है।
इक्षु भी उसको कसकर गले लगा लेती है।
शिव- माँ, डॉक्टर आहूजा को बुलाओ उनको इक्षु की हालत अच्छे से पता है तो उनको पता होगा के...
वेद- इक्षु को इलाज कैसे देता है, है ना?
शिव- हाँ.
कुशाग्र जी डॉक्टर आहूजा को कॉल करके जल्दी से जल्दी उनके घर आने का बोलते है।
करीब 10 मिनट बाद,
डॉ. आहूजा आते हैं।
कुशाग्र जी के बोलने से पहले ही शिव बोला- मेरी इक्षु को बहुत तेज़ बुखार है और यह सामान्य बुखार नहीं है, उसे स्टेज 4 का ब्लड कैंसर है, आप उसकी स्थिति जानते हो प्लीज कुछ करो।
डॉ. आहूजा- शिव, एक इंजेक्शन है जिससे बुखार सुबह तक चला जाएगा लेकिन 2 हफ्ते तक उचित बिस्तर पर आराम और कमजोरी भी होगी उसके बाद हम इक्षिता की कीमोथेरेपी शुरू करेंगे क्योंकि बुखार संक्रमण बढ़ने का संकेत देता है और यह मेरी देखरेख में नहीं थी कुछ टेस्ट भी करने हैं और इक्षु को इंजेक्शन लगा देते हैं।
शिव- हम आज ही इसके ब्लड सैंपल अस्पताल की डॉ. नैना को देकर आए थे और अभी थोड़ी देर पहले ही रिपोर्ट आई है और डॉ. आहूजा को रिपोर्ट दिखा देता है।
डॉ. आहूजा ने रिपोर्ट पढ़ने के बाद बताया कि उसकी हालत गंभीर है। हमें कीमोथेरेपी जल्दी ही शुरू नहीं करनी होगी नही तो इसकी जान भी जा सकती है। मैं कुछ दवाइयाँ देता हूँ अगर फिर भी कुछ समस्या हुई तो नैना या मुझसे संपर्क कर लेना। नैना मेरी बेटी है और बहुत डॉक्टर भी। अब मैं विदा लेता हूं।
वेद उन्हें दरवाजे तक छोड़ कर आता है और अंदर आकर कुछ बोलता है उससे पहले शिव बोला- पापा, शादी का सर्टिफिकेट तैयार करवाइए। मैं कल सुबह ही इक्षु से बात करूंगा, लेकिन टेंशन मत लो, मैं अपनी जान को कुछ नहीं होने दूंगा और खुद से दूर भी नहीं जाने दूंगा।
कुशाग्र जी- शिव, इतनी जल्दी बाजी करना क्या ठीक होगा। मेरा मतलब अभी बच्ची की हालत तो देखो और इस हालत में तनाव उसके लिए अच्छा नहीं है, ये तुम भी जानते हो।
शिव कुछ कहते हैं उससे पहले ही श्रवणी बोली- भाभी को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी आज वो क्लास में लेक्चर छोड़ कर भाई के बारे में और उनके प्रॉमिस के बारे में सोच रही थी। मुझे लगता है कि भाई का निर्णय बिल्कुल सही है।
वेद- अंकल इसको इसके चाचू से भी तो सेफ रखना है तो शादी से बेहतर कोई ऑप्शन नहीं है, क्यों अन्वी।
अन्वी- मैं क्या बोलूँ जो आप सब को ठीक लगे।
शिव- इक्षु को खुद से दूर करता है तो इस वक्त वो सो नहीं रही थी लेकिन नींद उसकी आँखों में साफ नजर आ रही थी।
शिव के बोलने से पहले इक्षु थोड़ी ताकत से बोलती है- मैं तैयार हूं।
शिव- ठीक है अभी तुम सो जाओ और उसको अपनी गोद में बैठाकर उसका चेहरा अपने सीने में छुपा लेता और उसका सर सहला रहा था और कुछ ही देर में वो फिर से सो गई थी।
दोस्तों बताओ कहानी कैसी लग रही है।
Ab aage,
शिव शांत बैठे बस इक्षु को देख रहा था और मन में बोला- भगवान जी, कृपया मेरी इक्षु को जल्दी से ठीक करदो फिर मैंने इसके साथ बहुत सारी मस्ती करनी है और अपनी जान के लिए भी बहुत कुछ करना है।
श्रु- भाई, भाभी को ही मनाना है क्या, फिर भी कुछ बोलेगा।
शिव बोला- क्या, कुछ कहा आपने प्रिंसेस?
श्रु- आप कहां खोए हुए थे भाई?
शिव- कुछ नहीं बस कुछ सोच रहा था।
अन्वी- शिव, बोल ना क्या सोच रहा था।
कृषा जी- ऐसे तो बताने से रहा इससे अच्छा है मत ही पूछो।
शिव कुछ नहीं बोलता पर थोड़ा परेशान लग रहा था, जो सब समझ रहे थे।
शिव अपने फोन में देखता है कि एक और नोटिफिकेशन आया है और जब उस नोटिफिकेशन को देखता है तो मुस्कुरा देता है।
वेद- अभी तो देवदास की शक्ल बनाकर बैठा था और अब मुस्कुरा रहा है, ऐसा भी क्या है फोन में जिसे देखकर खुश हुआ जा रहा है।
शिव- माँ, कल सुबह रुद्राक्ष आ रहा है।
कृषा जी- अच्छी बात है अब देखना कैसे इशु तुम दोनो को परेशान करने वाली है।
शिव- चलेगा माँ, जितना मिस मैंने इसको और इसकी शैतानियों को किया शायद उतना तो पीछे छोड़े स्कूल के दोस्तों को भी नहीं किया।
कुशाग्र जी- बेटा अब इक्षु को ऊपर कमरे में लेकर जा और अच्छे से सुला दे नहीं तो पता चला इस डेविल क्वीन की हालत और खराब हो गई है।
शिव- हम्म, और ऊपर चला जाता है और इक्षु को अपने ही कमरे में लेजाकर उसी तरह खुद के ऊपर सुला लेता है।
हॉल में से बाकी सब भी अपने कमरे में चले जाते हैं।
गेस्ट कमरा,
वेद और अन्वी अंदर आते हैं।
वेद रूम लॉक करता है और अन्वी के कमर में अपने हाथ डालकर अपने क्लोज खींच लेता है।
अन्वी- वेद क्या कर रहे हो।
वेद- अन्वी, यार मूड मत ख़राब करो।
अन्वी- तुम्हारा मूड? मेरा क्या, मैं अभी सही मानसिक स्थिति में नहीं हूं, Please ना वेद, समझो।
वेद उसको छोड़ देता है और वॉशरूम में चला जाता है और ज़ोर से दरवाज़ा धड़ाम की आवाज़ के साथ बंद करता है।
अन्वी भी बिस्तर पर आकर अपने घुटनों को मोड़कर अपने सर को छुपाकर रोने लगती है।
थोड़ी देर बाद,
वेद बाहर आता है और अन्वी के पास जाकर उसका सर उठाता है और उसको रोते हुए देखकर खुद पर गुस्सा आ रहा था कि उसने ये क्या कर दिया।
अन्वी, वेद के गले लग कर रोने लगती है और रोते हुए ही बोली- स..स.. सॉरी वे.. वेद और रोने लगती है।
वेद उसको अपनी गोद में बैठाता है और उसके आंसू साफ करते हुए बोला- नहीं, नहीं, नहीं रोना नहीं है, मैं हूं ना और ये जो तुम मोती जैसे मोटे मोटे आंसू बहा रही हो वो मुझे पसंद नहीं है इसलिए शांत हो जाओ और मैं कुछ नहीं करूंगा. जब तुमने मना किया था मुझे गुस्सा आया था पर मैं समझता हूँ तुम्हारे लिए ये सब मुश्किल है, अब रोना बंद करो, और थोड़ा आराम करो और अब चलो तुम्हें आराम की जरूरत है।
अन्वी उसकी बाहों में ही बच्चों की तरह सो जाती है जैसे शिव की गोद में इक्षु सो गई थी।
अन्वी को सोते हुए देखकर उसका माथा चूमकर खुद भी सो जाता है और उसको खुद के ऊपर सुला लेता है।
अगली सुबह 7 बजे,
शिव का कमरा,
शिव के कमरे में हल्की धूप की रोशनी आ रही थी जो सीधे उसके मुँह पर आ रही थी।
शिव अपनी आंखें खोलता है तो उसके सामने इक्षु का छोटा सा, प्यारा सा, मासूम सा चेहरा देखता है तो मुस्कुरा देता है और माथे पर एक कोमल किस करता है।
शिव बहुत ही प्यार से और ध्यान से इक्षु को बिस्तर पर लेटाकर खड़ा ही हुआ था कि इक्षु कसमसाने लगते थे और नींद में ही सबक नहीं लगती थी तो शिव जल्दी ही उसको अपने ऊपर दोबारा लेटाकर सुला देता है।
शिव अब साइड में लैपटॉप रखकर कुछ काम कर रहा था और ऐसे ही 8:30 बजे बज जाते हैं।
शिव- इक्षु, उठो बेबी देखो कितना टाइम हो गया।
लेकिन इक्षु अभी भी सो रही थी।
शिव जानता था कि ये सब कमजोरी और थकान की वजह से है लेकिन फिर भी प्यार से उसको उठा रहा था।
गेस्ट कमरा,
अन्वी की आंख खुलती है लेकिन वेद को देखकर मुस्कुराती है और उठकर बाथरूम में जाती है और 20 मिनट के बाद बाहर आती है और मुंह फुलाकर बिस्तर पर बैठ जाती है।
10 मिनट बाद,
वेद उठता है और अन्वी को तैयार देखकर उसको पीछे से हग करता है और बोला- गुड मॉर्निंग बेबी। अन्वी कोई जवाब नहीं देती और शांति से अभी मुझे फुलाकर बैठी थी।
वेद- अरे मेरा बच्चा सुबह-सुबह मुँह फुलाकर क्यों बैठा है।
अन्वी थोड़ा चिढ़कर और गुस्से में बोली- शांति से बैठी अच्छी नहीं लग रही, जाओ जाकर तैयार हो जाओ और दिमाग खराब मत करो।
वेद- लेकिन मैंने तो कुछ बोला ही नहीं।
अन्वी उसी टोन में बोली- एक बार में समझ नहीं आया क्या या दोबारा बोलू, लेकिन मैं क्यों दोबारा बोलू तुम्हें समझ आ जाना चाहिए।
वेद- जा रहा हूँ और बाथरूम जाता है और तैयार होकर बाहर आता है और अपना फोन उठाकर देखता है कि कोई मैसेज या महत्वपूर्ण कॉल तो नहीं आया पर उसकी नज़र कैलेंडर पर आज की तारीख पर जाती है और नोट्स पर भी जिसमें अन्वी के पीरियड्स हैं तारीख लिखी थी जो आज की थी।
वेद उसके मूड स्विंग का कारण समझ गया था।
वेद- अन्वी, चलो नीचे, कॉलेज भी जाना है।
अन्वी- पता है मुझे, बताने की ज़रूरत नहीं है।
वेद कुछ नहीं बोलता उसको पता चल रहा था कि उसके कमांडिंग ऑफिसर का मूड ठीक नहीं है अभी।
अन्वी कमरे से बाहर जाती है और श्रावणी से टकरा जाती है।
श्रावणी- सॉरी भाभी।
अन्वी का मूड खराब था तो गुस्से में बोली- दिखाइ नहीं दे रहा तुम्हें, आंखे बंद करके चल रही हो, क्या?
श्रावणी कुछ बोलती तभी पीछे से वेद अपने होठों पर उंगली रखकर चुप रहने का इशारा करता है।
शिव का कमरा,
थोड़ी देर में इक्षु उठकर बैठ जाती है और बोली- गुड मॉर्निंग, शिव।
शिव- गुड मॉर्निंग, बेबी।
इक्षु- मैं तैयार होकर आती हूँ फिर कॉलेज चलेंगे, ठीक है?
शिव- पहले ये बताओ आप ठीक हो ना कमजोरी या थकावट तो महसूस नहीं हो रही।
इक्षु - शिव, मैं बिल्कुल ठीक हूं और मैं तो शैतान की रानी हूं और रानियां तो मजबूत होती हैं जब तक शैतान अपनी रानी के साथ है, है ना?
शिव- सही है, ठीक है अभी जाकर आराम से तैयार हो जाओ मैं भी हो जाता हूँ।
इक्षु- ठीक है शिव।
इक्षु अपने कमरे में कपड़े लेकर बाथरूम में चली जाती है और शिव भी अपने बाथरूम में चला जाता है।
दोनो अपने कमरे में 10 मिनट के बाद तैयार होकर कमरे से बाहर आते है।
Ab aage,
दोनो साथ में नीचे आते है।
हॉल में,
सोफे पर अन्वी बैठ कर नखरे कर रही थी और वेद बिलकुल चुप होकर उसकी नखरे उठा रहा था।
अन्वी- वेद, नेल पेंट लगाओ ना।
वेद- नहीं, मुझे ये सब नहीं आता अपने देवर से कराना उसको, ये सब अच्छी तरह आता है।
अन्वी- ठीक है, एकांश को कॉल करो।
शिव- क्या चल रहा है?
अन्वी- कुछ नहीं वेद से नेल पेंट लगाने को बोल रही थी।
शिव रसोई की तरफ देखकर बोला- माँ, प्रिंसेस कहाँ है?
तभी सीढ़ियों से श्रावणी नीचे आती है और बोली- भाई मैं यहां हूं।
शिव पीछे पलटता है तो बोला- क्या बात है! प्रिंसेस किसको प्रभावित करना है?
श्रावणी, शिव के पास आकर बोली- एक ही तो बात जो नखरे करता है पर मैं क्या करूं अब वो इस दिल से निकलता ही नहीं है।
इक्षिता, शिव के हाथ पकड़कर झुककर खडी होते हुए अपना सर रखती और बोली- श्रु, तुम क्या रुद्राक्ष भाई की बात कर रही हो?
श्रावणी- आपको कैसे पता चला भाभी। अब तक तो मैंने भाई को भी नहीं बताया।
तभी दरवाजे से आवाज़ आती है- कौन याद कर रहा था मुझे? बोलो जल्दी.
इक्षु दरवाजे पर देखती है तो भागकर जाकर उस लड़के के गले लग जाती है और बोली- मुझे आपकी याद आई रुद्र भाई लेकिन शिव से कम।
(ये लड़का कोई और नहीं रुद्राक्ष था जिसका प्यार सब रुद्र नाम से बुलाते है।)
मुख्य प्रवेश द्वार,
रुद्र- पता है मेरे बच्चे, शिव और आपकी बॉन्डिंग लेकिन मैंने और शिव ने भी आपको बहुत मिस किया, आखिरकार आपके लिए तो हम स्कूल में लड़कों की बैंड बजाते थे।
शिव दरवाजे के पास जाता है और प्यार से बोलता- इक्षु भागने से मना किया था ना।
इक्षु- लेकिन कब किया शिव।
शिव- अभी.
रुद्र- बच्चे, शिव सही बोल रहा है मैं आखिरी बार आया था आपसे मिलने तब आप 12 साल की थी और तब से अब तक आपकी सेहत बहुत गंभीर है आप अगर हमारी बात नहीं मानोगे ना तो मैंने आपसे बात नहीं करनी है।
इक्षु जब यह सुनती है तो उसकी आंखों से आंसू बह जाते हैं और शिव के गले लग रोने लगती है।
शिव- नहीं, आप रो नहीं, फिर अपनी एनर्जी सेव करना, ओके अभी गुड गर्ल की तरह हम ब्रेकफास्ट करके मेडिसिन लेंगे और फिर कॉलेज जायेंगे, ओके?
इक्षु- शिव, तुम तो गुस्सा नहीं होगे ना।
अंदर हॉल में,
अन्वी- वेद आइसक्रीम खानी है।
वेद, अन्वी को घूरकर देखता है और बोलता है- जो डिमांड करना है करो लेकिन कोई आइसक्रीम नहीं फीवर हो जाएगा और ठंडी चीज खाने से तुम्हें सख़्त मनाही है।
अन्वी- तुम मेरी कोई बात नहीं मानते हो और गुस्से में खड़ी होकर जाने लगती हो।
वेद- अन्वी बात तो सुनो।
अन्वी दो कदम चलती है और तभी उसका पैर ट्विस्ट हो जाता है और वो चिल्लाती है- आह्ह...
वेद उसके पास जाकर उसको अपनी गोद में उठाकर वापस सोफा पर बैठा देता है और बोला- मना किया था ना, अब चोट लगी ना और वेद की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।
अन्वी- चोट मुझे लगी, दर्द मुझे हो रहा है और रो तुम रहे हो? क्यूं?
वेद- जब अपना ध्यान नहीं रखोगे तो यही होगा ना।
वेद अपने आंसू साफ करता है और बोला- मैंने तय किया है कि हमारी शादी के बाद तुम्हारे भाई को हॉस्टल से अपने पास लेकर आएंगे और वे भी सिर्फ 5 साल का है और मैं वादा करता हूं कि मैं उसको अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करूंगा करूंगा और हम दोनो उसको हमारे छोटे से बच्चे की तरह बड़ा करेंगे।
अन्वी- ये सब बाद में करेंगे अभी मेरा पैर।
वेद- तैयार, १..२..३.. और पैर घुमा देता है और अन्वी की पकड़ वेद के कंधे पर कस जाती है। अब दर्द हो रहा है.
अन्वी- ना में सर हिला देती है और सोच कर बोली- आइसक्रीम।
वेद- मना कर दिया ना लेकिन अगर बात नहीं माननी तो यह आपकी इच्छा है मैं कुछ नहीं बोलूंगा।
अन्वी- एकांश को कॉल करो, अभी।
वेद- क्यों? मैं नहीं करने वाला खुद करलो. वैसे भी अभी तो वो ये सोच रहा होगा कि क्या पहनना है क्योंकि आज उसकी डेट है। पता नहीं एक हफ्ते में कितनी लड़कियां घुमाता है।
अन्वी- तो तुम मेरी नेल पेंट लगा दो। आइसक्रीम तो खिला नहीं रहे हो।
तीनो (शिवाय, इक्षिता, रुद्राक्ष) दरवाजे से अंदर आते हैं और श्रावणी सिर्फ रुद्र को देख रही थी अगर सही शब्दों में कहे तो खुले आम ताड़ रही थी।
इक्षु- शिव और अपनी पलकें झपकाने लगती है। शिव ये देखता है और बोला- बच्चे, नींद आ रही है।
इक्षु अपनी आंखें बंद करके फिर से खोलती है।
शिव उसको गोद में उठाकर सोफे पर बैठ जाता है और जब इक्षु को एडजस्ट करता है तो देखता है वह सो चुकी थी।
रुद्र की नज़र उन दोनों पर जाती और मुस्कुराता है और फिर वेद पर जो अभी अन्वी के हाथों के नाखूनों पर बेबी पिंक कलर की नेल पेंट लगा रहा था और बोला- अब खुश मेरी जान और आगे से गुस्सा करलो, चिल्ला लो, भले झाड़ू से मार लेना पर खुदको चोट मत पहुचाने, समझी?
अन्वी- ठीक है, लेकिन मुझे कुछ मीठा खाना है अभी।
वेद- मैं चॉकलेट मंगवा देता हूं और अपने बॉडीगार्ड को कॉल करके डेयरी मिल्क हार्ट ब्लश वाली चॉकलेट का बॉक्स लेकर आने का बोलता है।
रुद्र- वेद, इस नाचीज़ पर भी ध्यान देदो।
वेद- गर्लफ्रेंड बनालो ये बात उसे कहना और मेरी वाली की लाइफ में बहुत मुश्किल है तो मैं तो उसी पर ध्यान दूंगा।
अन्वी, वेद के सीने से लगकर आंखें बंद करती है और वो उसका सर सहला रहा था और जब देखता है तो वो जैसी रात में सो गई थी, वो अभी सो रही थी और वेद उसके माथे को चूमकर बोलता है- कितनी प्यारी लगती है सोते हुए और गुस्से में जब इसकी नाक लाल हो जाती है तब मन करता है इसको पूरी दुनिया से छुपाकर रखलु।
रूद्र- सही में अब तो गर्लफ्रेंड ढूंढनी पड़ेगी। तुम दोनो से मुझे जलन महसूस हो रहा है। तभी श्रावणी पूजा में पानी लेकर आती है और रुद्र के सामने करती है।
रुद्र पानी का ग्लास उठाकर पानी पीता है और ग्लास वापस रखकर धन्यवाद बोलने के लिए श्रावणी को देखता है तो उसकी नज़र उस पर ही ठहर जाती है और दिल की धड़कन तेज़ होती है और उसके मुँह से आप निकल जाता है 'Beautiful'.
Ab aage,
श्रावणी- आपने कुछ कहा, क्या?
रूद्र- हाँ, बहुत प्यारी लग रही हो।
श्रावणी- Thank you और वहां से गिलास और ट्रे लेकर वापस किचन में आ जाती है।
शिव- प्रिंसेस, माँ और पापा कहाँ हैं?
श्रावणी वापस हॉल में आकर बैठती है और बोली- मम्मी-पापा नानी के घर गए हैं क्योंकि उनकी हालत ठीक नहीं है और वो नाश्ता बनाकर गई है।
रुद्र- मुझे भूख लगी है और इनका मुझे पता नहीं।
श्रावणी- तो जाओ अपनी प्लेट लगाओ और खाओ।
शिव- प्रिंसेस प्लेट लगाओ खाने की और हाँ इक्षु की और मेरी एक ही प्लेट लगाना,ज्यादा नहीं खाएगी।
श्रु- जी भाई और किचन में जाती है और प्लेट में आलू की सब्जी और चपाती वापस आती है और प्लेट सामने रखती है और एक खाने की प्लेट रुद्र के हाथों में रखकर बोली- खा लीजिए और वहां से अपने कमरे में चली जाती है।
5 मिनट बाद,
कंधों पर बैग पहनने नीचे आती है और बोली- शिव भाई मैं अन्या के साथ कॉलेज जा रही हूं।
शिव- ठीक है, रुद्र ड्रॉप कर देगा।
रूद्र- हाँ, ठीक है, इसी वजह से मुझे कॉलेज में दाखिला लेना है।
दोनो निकल जाते है और अन्या भी उनके साथ जाती है।
अब घर पे,
वेद- अन्वी, उठो नाश्ता करलो।
अन्वी- वेद के गाल पर किस करती है और सॉरी बोलती है।
वेद- सॉरी, किस लिए?
शिव मजाक में बोला- तुझे टॉर्चर करने के लिए, है ना?
अन्वी, कुछ नहीं बोलती।
वेद, शिव को घुरता है और अन्वी से बोला- बताओ मेरी जान, सॉरी क्यों बोल रही हो।
अन्वी- वो मैंने तुमपर गुस्सा किया ना, सॉरी और सर झुका लेती है।
वेद उसका सर ऊपर करता है और बोला- सॉरी, मम्मा से गलती होने पर अगर पापा सॉरी ना बोले तो वो उनको घर से निकल सकती है और तुम सिर्फ फ्रस्ट्रेशन और इरिटेशन में चिल्लाने पर सॉरी बोल रही हो, मुझे घर से निकलोगे, क्या ?
मेरी घर बेटियाँ, बहुओं की चलती है क्योंकि हमारे दादू के पापा का मानना था कि जब घर औरत संभलती है तो लक्ष्मी और बरकत आती है इसलिए हमारे घर में वूमेन पावर चलती है और आई लव यू तो थोड़ा गुस्सा क्या मैं शांति से बैठ कर पूरी जिंदगी तुम्हारी दांत सुन सकता हूँ तो आज के बाद सॉरी मत बोलना और यही बात मैं हर महीने तुमसे समझाता हूँ।
अन्वी- पर मैं क्या करूँ।
वेद- मेरी स्कूल वाली झाँसी की रानी बनाओ।
अन्वी फीका सा हस्ती है और बोली- तब मॉम डैड थे ना तो कोई कुछ बोलता ही नहीं था लेकिन अब... और वेद को गले लगा लेती है।
वेद- अच्छा ये सब छोड़ो, मुझे बहुत भूख लगी तुम नाश्ता करोगी।
अन्वी- आइसक्रीम.
वेद- नहीं मिलेगी, जिद करनी है, मरना है जो करना है करो, आइसक्रीम तो नहीं मिलने वाली।
अन्वी- फिर मुझे कुछ नहीं खाना।
तभी, इक्षु की उठ जाती है और शिव को देखती है जो उसको ही देख रहा था और बोला- बच्चे, नाश्ता करलो।
इक्षु- नहीं, चॉकलेट मिल्कशेक, प्लीज।
शिव- ठीक है पर पूरा फ़िनिश करना।
इक्षु- ठीक है, फिर कॉलेज जायेंगे।
इक्षु की बात पर वेद बोला- अभी नहीं बेबी सिस्टर आप पहले ठीक हो जाओ फिर जाना।
वेद की बात सुनकर इशु उसको देखती है और फिर शिव की तरफ देखकर बोली- शिव, मुझे जाना है। कृपया ना शिव?
शिव- पर बच्चे... वो इतना ही बोला था कि इक्षु की आंखों से पानी मतलब आंसू आने लगते हैं।
शिव- नहीं बच्चे, हम कॉलेज जायेंगे लेकिन आप रोना नहीं, वादा? और उसके आंसू साफ करता है।
इक्षु- वादा, मैं नहीं रोऊंगी।
शिव- अच्छा पहले बताओ, आपको मैं ज्यादा पसंद हूँ या फिर रुद्र, बोलो बच्चे।
इक्षु- मैं आप दोनों से प्यार करता हूँ, लेकिन आपको थोड़ा ज्यादा नहीं, बहुत ज्यादा।
शिव मुस्कुराता है और इक्षु के गाल पर किस करता है और बोला- गुड गर्ल आप यहां पे बैठो मैं आपका मिल्कशेक लेकर आता हूं और किचन में चला जाता है।
वेद- बेबी सिस्टर आप खाना क्यों नहीं खाते, आप मिल्कशेक पर तो बच नहीं सकते ना, बच्चे।
इक्षु अपना सर नीचे कर लेती है और उसकी आँखों में नमी थी पर वो कुछ नहीं बोलती है।
शिव मिल्कशेक का गिलास लेकर आता है और टेबल पर रख देता है और बोला-बच्चे, क्या हुआ? मेरी तरफ़ देखो.
इक्षु कुछ प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी।
शिव ने थोड़ा सख्त होकर बोला- बच्चे मैंने कहा मेरी तरफ देखो।
इक्षु ऊपर देखती है और शिव उसकी आँखों में नमी देखकर बोला- बच्चा आप रो क्यों रही हो?
वेद- कुछ नहीं बस यहीं पूछ रहा था कि खाना क्यों नहीं खाता और बता रहा था कि मिल्कशेक बच नहीं सकता।
वेद की बात सुनकर शिव उसको घूरकर देख रहा था जैसे आंखों से ही खा जाएगा और इक्षु को पहली की तरह गोद में बैठाकर बोला- बच्चे, मुझे पता आप ज्यादा नहीं खाते और खा भी नहीं पाते, कोई बात नहीं जब आप ठीक हो जाओगी फिर हम पार्टी करेंगे और मासूमियत से बोला 'हम तीनों की मस्ती में क्या होता है मैं तो भूल गया'।
इक्षु,बच्चों वाली आवाज़ में बोल- कोल्ड ड्रिंक, मूवी, वेब सीरीज, पॉपकॉर्न,मिल्कशेक और सैंडविच।
शिव- ठीक है, तो आप मिल्कशेक खत्म करो फिर हम कॉलेज चलेंगे लेकिन अगर नहीं भी जाएंगे तो आपकी पढ़ाई का नुकसान नहीं होगा।
इक्षु- ऐसा भी होता है, पर क्यों?
अन्वी- वो इसीलिए क्योंकि अभी सब बच्चे नहीं आते वो अगले महीने तक आएंगे तब तक ठीक हो जाओगे।
इक्षु, सवालिये नज़रों से शिव को देखती है।
शिव- आप छोड़ो ये सब आप को कॉलेज जाना है तो हम जायेंगे।
इक्षु- मैं एक महीने में ठीक हो जाउंगी।
शिव- बेबी, आपका बोन मैरो इनफेक्टेड है और जब तक डोनर नहीं मिलेगा तब तक कोई मस्ती नहीं होगी, हम मस्ती करेंगे और हमारी पार्टी भी करेंगे और तब तो शुरू छोटी थी।
इक्षु- ठीक है, हम कॉलेज नहीं जायेंगे पर मैंने तुम्हारी कोई बात नहीं मानी, ठीक है।
शिव- जैसी आपकी आज्ञा मेरी डेविल क्वीन। अच्छा अभी ये मिल्कशेक ख़त्म करो।
इक्षु 2 मिनट के मिल्कशेक खत्म करती है और वेद की तरफ देखकर बोली- 'इक्षिता राजपूत' की शक्ति को कम मत समझो।
वेसे शिव अगर कॉलेज नहीं जायेंगे तो क्या करेंगे, हालांकि मुझे पता है कि SM माफिया किंग है और अंडर वर्ल्ड पर राज करता है, इसलिए मैं डेविल की क्वीन हूँ, है ना?
शिव- हाँ, बच्चों पर SM एक सीक्रेट है आपको किसने बताया।
इक्षु- रुद्र भाई ने आपको कुछ मत कहना मैंने अखबार में आर्टिकल पढ़ा था हमने SM लिखा था और मुझे लगा क्या फील हुआ कि मैं SM को जानती हूं और उस समय रुद्र भाई मुझसे 1 दिन के लिए मिलने आए थे वो भी किसी काम से आये और फिर मैंने उनको SM के बारे में पूछा तो उन्होंने मुझे सब बताया तो अगर आप गुस्सा नहीं होना शिव, प्लीज। एक बात और बताओ?
शिव- हाँ, बताओ।
इक्षु- मुझे इसकी परवाह नहीं कि आप क्या हो, कौन हो और कैसे हो, मायने यह रखता है कि हम एक दूसरे से प्यार करते हैं जो कभी नहीं बदलेगा और यह सब मेरे दिल की गहराइयों से है।
Ab aage,
शिव- मैं जानता हूं, अभी आपको आराम करना है।
वेद- मुझे माफ कीजिए, मुझे वो सब नहीं कहना चाहिए था।
इक्षु- शिव, रुद्र भाई कहाँ गए हैं।
शिव- रूद्र, राजकुमारी और अन्या को कॉलेज छोड़ दिया गया है और खुद को एनरोल करने गया है।
इक्षु- ठीक है.
तभी अन्वी का फोन रिंग करता है जिस पर अगस्त्य फ्लैश हो रहा था।
वेद कॉल रिसीव करके स्पीकर पर रखता है और बोला- हैलो अगस्त्य।
अगस्त्य बहुत प्यार से बोला- जीजू, दीदू कहाँ है? अन्वी- बेबी, आप रो रहे हो।
अगस्त्य- नहीं, दीदू मैं क्यों रोऊंगा?
वेद- झूठ नहीं बोलते बेबी?
अगस्त्य- नहीं दीदी, जीजू मैं नहीं रो रहा?
शिव- अगस्त्य अपने सबसे अच्छे दोस्त को नहीं बताओगे, क्या हुआ?
अगस्त्य रोते हुए बोला-वो मेरे सीनियर्स मुझे धमकाते हैं, दीदी मुझे यहां नहीं रहना, मैं आपके और जीजू के साथ रहना है।
वेद, अन्वी को देखता है जिसकी आँखों में आँसू देखकर बोला- बेबी, हम आपको लेने कल आ रहे हैं तो अभी आप रोना नहीं और पता है कि आप अपने सबसे अच्छे दोस्त की पत्नी से भी मिलना चाहते हैं और अभी और सिर्फ आज के लिए वो सब।
अन्वी- बेबी, हम कल नहीं आज शाम तक आपको लेने आ जायेंगे और वेद की तरफ देखती है।
वेद- ठीक है शाम तक पहाउंच रहे हैं अभी फोन रखो और क्लास में जाओ, बाय।
अगस्त्य बहुत खुश था और बोला- बाय, चलदी आने का बोलकर, कॉल डिस्कनेक्ट कर देता है।
इक्षु- शिव, यह कौन था?
शिव- ये आपकी अन्वी भाभी का छोटा भाई है, अगस्त्य।
इक्षु- कितने सालों का है, कितनी प्यारी आवाज़ है, बिल्कुल मेरी जैसी।
वेद- हाँ, वो बहुत प्यारा है सिर्फ 5 साल का है।
इक्षु- ओह, लेकिन वो कहाँ है?
अन्वी रूंधे गले के साथ बोली- ऋषिकेश में, हॉस्टल में रहता है।
वेद- अच्छा चलो अभी निकलना पड़ेगा तो कहीं शाम तक पहाउंचगे।
तभी दरवाजे से रुद्र अंदर आता है और बोला- इक्षु, मेरी किस नहीं दी आपने।
इक्षु- आते ही तो दे दी थी, रुद्र भाई।
इक्षु, शिव को देखती है जो कहीं खोया हुआ कुछ सोच रहा था।
इक्षु, ये देखकर छोटी सी किस उसके होंठ अपने होंठ रखकर पीछे हो जाती है।
शिव एक दम से होश आता है और बोला- ये क्या था?
इक्षु- किस, वो रुद्र भाई ने बोला था और सर झुका लेती है और आगे बोली- गुस्सा मत करना और आंखों से आंसू बहाकर शिव की शर्ट गीली कर रहे थे।
शिव- नहीं, बच्चे मैं गुस्सा नहीं कर रहा और आप रो नहीं मैं आपको कुछ नहीं बोल रहा और उसका माथे पर किस करता है और उसका सर अपने सीने से चिपका लेता है और प्यार से सहलाने लगता है और इशु की आंखें भारी होने लगी और वो सुबकते हुए थे कि अपने मुट्ठी, शिव की शर्ट को कस कर सो गई थी।
शिव-रुद्र, तू पागल-वागल है, बच्ची है वो अभी।
रूद्र-तू हमेशा इसकी बातों में कैसे आ जाता है।
शिव- जैसे तू मेरी राजकुमारी की चिकनी चुपड़ी बातों में आ जाता है। लेकिन मज़ाक से हटकर, हर छोटी बात पर रोने लगी है।
शिव- तुम दोनो ऋषिकेश के लिए निकालो और तुझसे बात करनी है रुद्र।
वेद और अन्वी चले जाते हैं और रुद्र सामने सोफे पर बैठ कर बोला-क्या बात है शिव?
शिव- उनकी तबीयत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है, और डॉ. आहूजा ने दो सप्ताह तक बिस्तर पर आराम करने की सलाह दी है। कल उसे बहुत तेज़ बुखार था। मैं उसके लिए चिंतित हूं और डरा हुआ भी हूं, क्या होगा अगर मैं उसे फिर से खो दूं।
रूद्र-इस बार हम हमारी जान को कुछ नहीं होने देंगे।
इक्षु को अचानक से पसीना आने लगता है और सांस फूलने लगती है।
शिव ये देखता है तो बोला-बच्चे अपनी आंखें खोलो, देखो शिव आपके पास है।
इक्षु एक बांध से आंखें खोलती है और जोर से चिल्लाती है और शिव को कसकर गले लगा लेती है।
शिव- शांत हो जाओ, बच्चे ने बुरा सपना देखा है और कुछ नहीं, मैं आपके पास और रुद्र से पानी लेकर आने का इशारा करता हूँ।
रुद्र भागकर जाता है और ग्लास में लेकर आता है और शिव की तरह पीछे से उसका सिर सहलाकर पानी का ग्लास उसके मुंह से लगा देता है और बोला-हम हैं बेबी आपके पास।
इक्षु कुछ देर में फिर से शिव से चिपकर सो जाती है और जैसे अगर उसको छोड़ दिया तो वो कहीं चला जाएगा।
तभी दरवाजे से कुशाग्र जी अंदर आते हैं और रुद्र उनको देखकर पैर छूता है और बोला- कैसे हो अंकल?
कुशाग्र जी- जीते रहो। हम बहुत अच्छे हैं.
कुशाग्र जी, शिव को देखकर उसके सर पर हाथ फेरते हैं और उसके सामने विवाह प्रमाण पत्र का लिफाफा पकड़ा देते हैं।
शिव, कुशाग्र जी को देखकर बोला- Thank you, पापा।
कुशाग्र जी- इसमे विवाह प्रमाण पत्र के साथ संपत्ति और इस घर के कागजात भी हैं जो तुम्हारे, इक्षु, रुद्र और श्रावणी के नाम पर हैं और इसमे दो विवाह प्रमाण पत्र हैं एक तुम दोनो का और एक वेद और अन्वी का लेकिन वो दोनो है कहाँ?
शिव- वो दोनो ऋषिकेश गए हैं अगस्त्य को लेने के लिए। माँ, कहाँ है? आई नहीं आपके साथ.
कुशाग्र जी- नहीं आई, तुम्हारी नानी की हालत ठीक नहीं थी इसलिए नहीं आई। कल तक आ जायेगी.
शिव हां में सर हिलाकर रुद्र से बोला- चल जाकर आराम कर, मैं भी इक्षु को कमरा लेकर जाता हूं और इंजेक्शन देता हूं।
कुशाग्र जी- मुझे ऑफिस जाना है, कुछ अर्जेंट बोर्ड मीटिंग है तो शाम को मिलता हूँ। तुम दोनो अपना और मेरी दोनो बच्चियों का ध्यान रखना और बाय बोलकर कहल जाते है और रुद्र अपने कमरे में और शिव, इक्षु को लेकर अपने कमरे में चला जाता है।
(रुद्र यहीं रहता है इसलिए उसका पहले से ही यहां कमरा है।)
रुद्र का कमरा, वो अंदर जाकर बैठ गया है और मुंह के बल जाकर गिर जाता है और खुद से बोला- आज तो बैंड बज गई। ऊपर से आज श्रावणी क्या कहर ढा रही है मन तो कर रहा था के अभी जाकर उसको प्रपोज करू पर उससे पहले शिव से बात करनी पड़ेगी आखिर बहन है उसकी और उठकर बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर बाहर आता है और यह वक्त उसे एक टी- शर्ट और शॉर्ट्स पहन रखी थी।
तभी कोई दरवाजा खटखटाता है तो रुद्र बोला- अन्दर आ जाओ।
श्रावणी अंदर आती है दरवाजा बंद करके रुद्र को देखती है जो लैपटॉप पकड़े बैठा था।
श्रावणी उसके पास जाकर उसका लैपटॉप बैंड करती है।
रूद्र- क्या बात है, वाणी?
श्रावणी उसकी गोद में बैठ कर बोली- मुझे आपकी याद आई।
रूद्र उसकी गाल पर किस करके बोला- मुझे भी तुम्हारी याद आई।
श्रावणी- झूठ नहीं बोलते।
रुद्र चौंककर बोला- कौन सा झूठ?
श्रावणी- एक कॉल भी नहीं किया आपने और आप कह रहे हैं कि आपने मुझे मिस किया। मैं नाराज़ थी लेकिन आपने एक सॉरी का मैसेज तक नहीं किया।
Ab aage,
रुद्र- अच्छा सॉरी, तुम्हें पता है ना मुझे तुम्हारी नाराज़गी और आँसू बिल्कुल पसंद नहीं है तो क्यों करती हो। वेसे आज बहुत खूबसूरत लग रही हो लेकिन कुछ कमी है।
श्रावणी- क्या, कमी है?
रुद्र- तुम्हारी मुस्कान गायब है और उसके पेट पर गुदगुदी करने लगता है और श्रावणी ज़ोर-ज़ोर से हंसती लगती है।
श्रावणी हंसते हुए बोल रही थी- रुद्र, कृपया मत करो,दर्द हो रहा है।
रुद्र रुक जाता है और परेशान होकर बोला- वाणी, कहां दर्द हो रहा है।
श्रावणी- पेट में, वो आज कॉलेज में पीरियड्स आ गए इसलिए मैं जल्दी घर आ गई और उसके सीने में सर छुपकर अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर लिपट जाते है और आंखें बंद कर लेती है और रुद्र उसका सर सहला रहा था और कुछ देर में थके होने की वजह से वो दोनो ऐसे ही सो जाते है।
शिव का कमरा,
अपनी इक्षु को देखकर मुस्कुराया और बिस्तर पर लेटाकर उसका माथा चूम लेता है।
तभी उसका फोन बजता है, वो देखता है जल्दी से साइलेंट पर करता है और कॉल रिसीव करके बोला- हैलो मां।
कृषा जी- बच्चे आप मेरा एक काम करोगे, प्लीज।
शिव- माँ, बोलिए।
कृषा जी- आपके कमरे के लॉकर में आपकी नानी माँ की रिपोर्ट्स रखी थीं हमें फोटो भेजोगे, प्लीज।
शिव- जी माँ बोलकर फोटो भेज देता है।
कृषा जी- thank you बच्चे।
शिव बच्चों की तरह बोला- मां, आप वापस कब आओगे।
कृषा जी- कल शाम तक आ जाउंगी।
शिव- ठीक है, मुझे आपकी याद आ रही है मम्मा।
कृषा जी- जानती हूं तभी कॉल किया।अच्छा सुनो इक्षु का और वाणी का ध्यान रखना।
शिव मुस्कुराया और बोला- माँ, उसके लिए आपका दामाद है ना।
कृषा जी- जानती हूँ, लेकिन फिर भी प्लीज एक बार देख लेना आप जानते हो ना कितने नखरे करती है आपकी बहन और हमसे तो झेल नहीं पाते आप दोनों कैसे झेलते हो, पता नहीं।
शिव-माँ, एकलौती बहन है और बहन पर प्यार नहीं लुटाया तो उसकी शादी के बाद पछतावा होगा।
कृषा जी- ठीक है बेटा आप प्यार लुटाइये हम फोन रखते हैं अपना और सबका ध्यान रखकर डिस्कनेक्ट कर देती है।
शिव एक बार इशू को देखता है और मुस्कुराता है और लैपटॉप लेकर सोफा पर बैठ जाता है।
जब टाइम दिखता है तो 6 बज रहे होते हैं, अब वो अपना लैपटॉप बैंड करके साइड रखता है और रुद्र को कॉल करता है।
रुद्र के कमरे में उसका फोन बजता है तो वह कॉल रिसीव करता है और नींद में बोलता है- क्या हुआ शिव पता कितने आराम से वाणी के साथ सो रहा था।
शिव- राजकुमारी, घर कितने बजे आयी।
रुद्र-11 बजे।
शिव थोड़ा परेशान होकर पूछता- वो ठीक तो है ना?
अब रुद्र की नींद उड़ चुकी थी और वो बोला- शिव, उसके पीरियड्स आ गए इसलिए घर आ गई और पेट में दर्द हो रहा था इसलिए मैंने उसको सुला दिया।
ये सुनकर शिव की सांस में सांस आई और बोला- ठीक है।
रूद्र- बोल क्यों कॉल किया?
शिव- ऐसे ही करलिया, वो इक्षु भी अभी तक सो रही है इसीलिए।
रुद्र- इक्षु, ठीक है ना?
शिव- हाँ, ठीक है सो रही है इसीलिए इंजेक्शन लगा दिया है।
रुद्र आगे बोलता है उससे पहले वाणी बोलती है-क्यों शोर कर रहे हो और बिल्कुल चुप हो जाओ और सोने दो मुझे और उसको गले लगकर वापस से सो जाती है।
शिव- जीजाजी आपने फोन नहीं रखा तो मेरी बहन आपका डोसा बना देगी और फिर खा भी लेगी क्योंकि वह उसकी पसंदीदा है।
रुद्र शिव की बात सुनकर सिर्फ हम्म बोलता है और कॉल डिस्कनेक्ट कर देता है।
फोन कट जाने के बाद शिव इक्षु के पास जाकर उसका सर सहलाने लगता है।
इक्षु उसको गले लगा लेती है और उसके सीने पर अपना सर रखकर सो जाती है।
तभी शिव के कमरे का दरवाजा खटखटाता है तो इशु उठकर बिस्तर पर बैठ जाता है और आंखें मसलते हुए शिव को देखने लगती है और नींद में बोली- कौन है मेरी नींद खराब करने वाला।
शिव जाकर दरवाजा खोलता है तो सामने कुशाग्र जी हाथ में दो गिलास मिल्कशेक के लिए खड़े थे।
शिव- पापा आप यहां।
कुशाग्र जी अंदर आते हुए बोले- हमारी बेटी कुछ खाती तो है नहीं और दोपहर में भी कोई लंच के लिए नीचे ही नहीं आया तो हमने सोचा अपने बच्चों के लिए मिल्कशेक बना लूं।
मिल्कशेक सुनकर तो इक्षु की सारी नींद उड़ गई और शिव को देखती है जैसे पूछ रही हो, क्या मैं मिल्कशेक पी सकती हूँ?
शिव, इक्षु से बोला - इसे पियो लेकिन धीरे-धीरे।
इक्षु- ठीक है, शिव वेसे बहुत निर्देश देने लगे हो।
शिव- तुम्हारा स्वास्थ्य मेरी प्राथमिकता है और तुम्हें तो सिर्फ मस्ती करनी है।
इक्षु- शिव वो हैरी पॉटर वाला उपन्यास है ना तुम्हारे पास जो हम तीनों ने बचपन ज़िद करके खरीदी थी।
ट्रे में से चॉकलेट मिल्कशेक का गिलास उठा लेती है और बोली- Thank you अंकल।
कुशाग्र जी- अंकल?? कोन अंकल??
इक्षु मासूमियत से बोली- आप।
कुशाग्र जी- मैं तो तुम्हारे पापा हूं, अंकल जाकर अन्य के पापा को बोलो।
इक्षु सिर्फ आंखें झपकते हुए मिल्कशेक पी रही थी।
कुशाग्र जी उनके सर पर हाथ फेरकर मुस्कुरा देते हैं और चले जाते हैं।
शिव- हाँ, वो हैरी पॉटर वाला उपन्यास का सेट संभाल कर रखा है, चाहिए।
इक्षु हां में सर हिलाती है।
रुद्र का कमरा,
रुद्र- वाणी, उठो देखो 6 बज रहे हैं।
वाणी अपनी आंखें मसलकर उठ जाती है और बोली- रुद्र, पेट में दर्द हो रहा है और ऐंठन हो रही है, और फिर उसके सीने से लग जाती है अपना चेहरा छुपा लेती है जैसे अपना दर्द उसको दे रही हो।
रुद्र उसका सर सहलाते हुए पूछता है- बच्चे, आपको भूख लगी है क्या?
वाणी ना में सर हिला देती है लेकिन तभी उसको बेचैनी और सीने में जलन जैसा महसूस होता है तो वो रुद्र से थोड़ी दूर होती है और एक हाथ अपने पेट पर और एक हाथ अपने सीने में जलन की वजह से अपने ब्रेस्ट और गले के बीच में रखकर खुद से ही सहलाने लगती है।
रूद्र-बच्चे, ठीक नहीं लग रहा ना आपको। वाणी कुछ बोलती है उससे पहले ही उसे उल्टी जैसा महसूस हुआ और अपना हाथ जो उसके ब्रेस्ट और गले के बीच के क्षेत्र को सहला रहा था अचानक से मुंह पर चला जाता है और उल्टी की वजह से मुंह गुस्से से फूल गया था और वो वॉशरूम की तरफ भाग जाती है।
रुद्र ये देखकर उसके पीछे जाता है तो देखता है कि वो उल्टी कर रही थी।
Ab aage,
रुद्र उसके पास जाकर उसकी पीठ सहलाता है और कुछ देर बाद जब उसको लगता है कि वाणी बेहतर महसूस कर रही है तो उसको गोद में उठाकर अपने कमरे में ले जाकर बिस्तर पर बैठा देता है।
वाणी- सॉरी,रुद्र।
रुद्र भ्रमित नज़रों से उसको देखते हुए बोला- सॉरी किसलिये, बच्चे??
वाणी- मेरी वजह से तुम परेशान हो गए ना।
रुद्र- नहीं, बेबी जिससे प्यार करते उसके नखरे नहीं उठाएंगे तो किसके उठाएंगे।
वाणी मुस्कुरा देती है.
रुद्र उसके माथे पर एक गहरी किस करता है और उसके होंठों पर एक हल्की किस करके बोला- चलो नीचे, डिनर का समय हो गया सब इंतजार कर रहे होंगे।
दोनो नीचे जाते है और देखते है तो सब नीचे थे जिसमे सिर्फ कृषा जी नहीं थी।
आप सब सोच रहे होंगे कि सब कैसे अन्वी और वेद तो अगस्त्य को लेने ऋषिकेश गए तो बात ऐसी है कि दोनों वेद के प्राइवेट चॉपर से गए तो जल्दी ही शाम तक वापस आ गए।
अगस्त्य- शिव भाई, ये खूबसूरत सी दीदी कौन है जो आपके साथ बैठकर किताब पढ़ रही है।
अन्वी- garv ये आपके शिव भाई की होने वाली पत्नी है।
अगस्त्य- बटरफ्लाई, इसका मतलब वह मेरी भाभी है, है ना?
इक्षु पुस्तक के नीचे करके उस बच्चे (अगस्त्य) को एक नज़र देखकर फिर से अपनी पुस्तक पढ़ने लगती है।
वेद- ठीक है चैंप, मेरे और आपके रुद्र भाई की बहन भी।
अगस्त्य सिर्फ हां में सर हिलाता है।
रुद्र और वाणी नीचे आते हैं और सबके साथ बैठकर डिनर करने लगते हैं।
वेद- शिव, इक्षु खाना नहीं खाएगी, क्या?
शिव- इक्षु अपना मिल्कशेक पहले ही पी चुकी है।
अगस्त्य अपनी कुर्सी से उतरकर इक्षु के पास जाकर उसका पकड़ लेता है और बोला- आप मेरी बात सुनो ना?
इक्षु ने ऐसा करके पुस्तक के अंतिम पृष्ठ से बुकमार्क निकाल दिया और उस पृष्ठ में डालकर जहाँ वह पढ़ रही थी और पुस्तक बंद करके टेबल पर रख देती थी और यह सब इतनी शांति से हुआ कि सब बालन थे।
इक्षु, अगस्त्य को देखकर बोली- बताओ, सुन रही हूँ।
अगस्त्य- आप बहुत सुंदर हो, बिलकुल मेरी दीदी जैसे तो बताइये मैं आपको क्या बुलाऊँ?
इक्षु उसकी बात सुनकर अपनी गोद में बैठ कर उसके गाल पर किस करती है और बोली- जो आपका मन करे वो बुलाओ।
रुद्र की नज़र बुक पर जाती है तो वो बोला- शिव ये हैरी पॉटर बुक ट्यून संभाल कर रखी थी अब तक, ये तो वहीं है जो हम इशिता आंटी से रोज़ रात को तीनो सोने से पहले सुनते थे, सिर्फ इशु और तेरी ज़िद पूरी करें के लिये.
इक्षु घूर कर रुद्र को देखकर तंज कसते हुए बोली- हां, सिर्फ शिव और मैं ही थे और साथ में प्रश्न पत्र भी हम ही तो लिखते एक लाइन ख़त्म होते ही पहले से 3 सवाल तैयार हम रखते थे, क्यों शिव सही बोला ना?
शिव, इक्षु के साथ दे रहा था और उसका हाँ में हाँ मिल रहा था।
रूद्र- अच्छा मैं हार मानता हूँ, सॉरी।
वाणी- भाभी ये किताब तो भाई के साथ-साथ मेरी भी पसंदीदा है।
आप प्लीज पढने के बाद मुझे दे दोगे। इक्षु हां में सर हिलाती है।
शिव- अगस्त्य बेबी, चलो डिनर करो।
अगस्त्य, अन्वी को देखकर बोला- बटरफ्लाई, आप किस तरह से इनको भी बोलूंगा।
अन्वी मुस्कुरा कर बोली- ठीक है, monkey।
अगस्त्य- बटरफ्लाई यार, monkey नहीं, macho monkey फिर जब मैं बड़ा हो जाऊंगा ना तो मैं आपको जीजू की रक्षा करूंगा।
वेद- ऑफकोर्स चैंप, चलो अभी डिनर करो।
अगस्त्य, इक्षु की गोद से उतरकर अपनी जगह पर जाकर बैठ गया।
शिव- अरे हाँ, पापा ने तेरे पैरेंट्स से बात की थी और अन्वी की सुरक्षा के लिए कोर्ट मैरिज ही सबसे अच्छा उपाय है, इसीलिए मेरे और इक्षु के साथ तेरी और अन्वी का मैरिज सर्टिफिकेट पापा ने बनवा लिया है और हमने सिर्फ सिग्नेचर करने हैं।
वेद एक नज़र अन्वी को देखता है और हाँ में सर हिला देता है।
सब अपना डिनर ख़त्म करते हैं और फिर हॉल में बैठते हैं और बातें करते हैं और श्रावणी रुद्र के बगल में बैठी थी और थकावट और दर्द की वजह से सोफे पर ही सो चुकी थी और नींद में अपना सर उसके सीने पर रखती है और अपने दोनो हाथ उसकी कमर के चारों ओर लपेट लेती है।
वहां पर कुशाग्र जी नहीं थे और शिव ये देख मुस्कुरा देता है।
रुद्र ये देखकर बोला- अंकल यहां होते तो क्या होता?
इक्षु मासूमियत से प्यारा चेहरा बनाकर बोली- फिर मैं पापा से बोलकर अपने बड़े भाई के लिए अपनी ननद की शादी का प्रस्ताव देती हूं क्योंकि शिव को कोई समस्या नहीं है।
शिव ये सुनकर बोला- इक्षु, सही बोल रही है।
अगस्त्य एक सोफे पर बैठा था और सब की बातें सुन रहा था पर उसको बड़े लोगों की बातें समझ कहाँ आती थी तो वो वहाँ से उठकर वेद के पास आकर उसकी गोद में बैठ गया और बोला- जीजू, मैं आपके और बटरफ्लाई के साथ नीनी करुँगा और डरते हुए बोला- मुझे अकेले नहीं रहना और उसको गले लगा लेता है।
वेद उसको ऐसे देखकर उसको अपने गले से लगाते हैं और पीछे से उसका सर सहलाते हुए बोला- ठीक है, आप हमारे साथ सो जाना, लेकिन वो अब भी उसको गले लगाए हुए थे।
तो वेद नीचे देखकर हंसते हुए बोला- ये तो सो गया बिलकुल अपनी बटरफ्लाई पर गया है।
अन्वी उसको देखकर मुस्कुराई और बोली- वेद, मेरा बंदर, मेरा जैसा नहीं होना चाहिए।
वेद- क्यों, क्या प्रॉब्लम है और एक दो खूबियां भाई बहन में मिलने से लेकर कितना पहाड़ टूट रहा है और 5 साल का बच्चा है ये अभी और बढ़ने में अभी टाइम लगेगा और मैंने वादा किया है कि हम अगस्त्य को अपने बेटे की तरह बड़ा करेंगे तो क्या समस्या है?
अन्वी बोलती है- कोई समस्या नहीं है पतिदेव, मैं बस चाहती हूँ कि ये अभी मेरी तरह कामज़ोर न पड़े समझे?
वेद- ठीक है एक समाधान है।
शिव- क्या समाधान है?
वेद- ये तुम्हारा भाई है, ये बात सिर्फ हम सब को और मेरे परिवार को पता है और हम 8 साल से रिलेशनशिप में हैं तो हमने गोद लेने की औपचारिकताएं पूरी करके ईसको अगस्त्य वेदांत खुराना बना देते हैं।
वेसे भी इसका जन्म प्रमाण पत्र नहीं है और तुम्हारे मम्मी-पापा ने तुम्हें अपने भाई की जिम्मेदारी दी है, उनकी अंतिम इच्छा थी और बड़ी बहन का दरजा मां का होता है तो क्या कहती हो मिसेज वेदांत खुराना।
अन्वी- तुम सच में ये करना चाहते हो।
वेद- हाँ, मैं ये करना चाहता हूँ।
अन्वी- तो ठीक है जैसे तुम्हें ठीक लगे और उसके सीने पर अपना सर रख लेती है।
Ab aage,
वेद मुस्कुराता है और सोते हुए अगस्त्य का माथा चूम लेता है।
अन्वी- वेद, एक बार सोचो और तुम्हारी माँ को तो कोई समस्या नहीं होगी ना।
पीछे दरवाजे से अंदर आते हुए एक लड़का बोला- क्या हुआ है?
वेद उसको इग्नोर करके अन्वी से बोला- मॉम को कुछ प्रॉब्लम नहीं होगी, चिंता मत करो लेकिन फिर भी अगर तुम्हें कोई चिंता है तो मैं अभी पूछ लेता हूँ।
वो लड़का बोला- भाई, मुझे इग्नोर नहीं कर सकते।
वेद उसको देखकर बोला- पहले मुझे एक बात बताओ एक हफ्ते में कितनी लड़कियां घुमाते हो अंश।
वो लड़का कोई और नहीं एकांश खुराना है सब प्यार से उसको अंश बुलाते है। देखने में हीरो वाली पर्सनालिटी है। हैंडसम और क्यूटनेस का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है। 6'5" ऊंचाई, भूरे बाल जो जेल से सेट किए हुए थे, काली क्रिस्टल आंखें, लंबी-तीखी नाक और पतले होठ, परफेक्ट जॉ लाइन, 8 पैक एब्स, फिट बॉडी और आज उसने सफेद शॉर्ट और नीली जींस पहनी थी सफेद जूतों के साथ और उसके एक हाथ में घड़ी पहनी थी।
अंश- भाई, ये सब कौन बोलता है आपसे, मेरी एक ही गर्लफ्रेंड है और मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ।
वेद मुस्कुराया और बोला- फिर कब मिलवा रहे हो?
अंश उसको मुस्कुराता हुआ देख बोला - भाई, ऐसा क्यों करते हो लेकिन अगर आपको मिलना है तो फिलहाल आप सबसे ही मिलवाएंगे क्योंकि वो माँ से मिलने के लिए अभी तैयार नहीं है।
वेद- ठीक है, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।
अंश- वैसे आप लोग क्या बात कर रहे थे और आप आज चॉपर लेकर कहां गए थे और बोलते हुए उनके नजर वेद की गोद में उनको गले लगाये सो रहे अगस्त्य पर गई।
वेद- हम इस नन्हे क्यूटपाई को ऋषिकेश लेने गए थे।
अंश की नज़र फिर रुद्र पर जाती है और वो बोला- आप वापस कब आए?
रुद्र- आज ही आया हूँ और फिर उसकी नज़र शिव के बगल में बैठी इक्षु पर जाती है जिसका पूरा ध्यान वापस से बुक पढ़ने पर लगा लिया था और बोला- कितनी क्यूट है ना भाई, सच बोल रहा अगर मेरा बस चलता ना तो मैं इसको पास रख लेता..
शिव उसकी बात सुनकर बीच काटकर बोला- क्या मतलब है, अंश?
अंश, शिव को देखकर बोला- बात तो पूरी करने दो और मैं कह रहा था बहन बनाकर।
इक्षु उसकी बात सुनकर किताब के नीचे करती है और एकांश को देखकर बोली- फिर आप मुझसे रक्षा बंधन पर राखी बांधवाओगे।
अंश हां में सर हिला देता है।
इक्षु, शिव को देखकर बोली- शिव, मैं इनको भी अपना भाई बनाऊँगी।
शिव उसके गाल पर किस करता है और बोला- हाँ, बना लो और देखो अब तुम्हारे तीन भाई हैं, खुश।
इक्षु खुश होकर शिव को गले लगाकर उसके गाल पर किस बैक करती है और बोली- हैप्पी से भी ज्यादा, आई लव यू।
यह सुनकर तो अंश सदमे में चला गया और इक्षु की आवाज़ से होश में आया और बोली- लेकिन आपने मुझे अपना नाम नहीं बताया।
अंश मुस्कुरा के बोला- मेरा नाम एकांश खुराना है और मैं वेद भाई का छोटा भाई हूं और घर का लाड़ला भी।
वेद- लाड़ले थे,अब मेरा बेबी लाड़ला होगा।
अंश- आपका बच्चा कहां से आया, कहीं आपने भाभी को शादी से पहले...
वेद- बेवकूफ मैं अगस्त्य की बात कर रहा हूं।
अंश- फिर ठीक है.
अन्वी- मैं जा रही हूँ कमरे में, ये पागल हो गया इसको गर्लफ्रेंड कहाँ से मिल गई मुझे तो शक है और ये बोलकर चली जाती है।
वेद उसको जाता हुआ देखकर मुस्कुरा देता है।
शिव, इक्षु को देखता है और बोला- बच्चे चलो अभी सोना है बाकी की किताब कल पढ़ लेना।
इक्षु, शिव की बात सुनकर किताब बंद कर देती है और उसको देखकर बोली- मेरे पैरों में दर्द हो रहा है।
शिव- ठीक है मैं तुम्हें गोद में उठा लेता हूँ और ऊपर जाकर बिना नखरे किये...
इक्षु उसकी बात काटकर बोली- बिना नखरे किये गुड गर्ल की तरह दवाई खाकर सो जाना है।
शिव उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देता है और फिर उसको अपने गोद में उठाकर कमरे में ले जाता है।
अंश- भाई, आप भाभी के जाने के बाद से मुस्कुरा रहे हो, क्या बात है?
वेद- ज़्यादा कुछ नहीं बस उसके पेट में दर्द है इसलिए वो तुम्हारी बात को बहाना बनाकर चली गई।
रूद्र- तू यहाँ क्यों आया है?
वाणी नींद में अपनी एक उंगली रुद्र के होठों पर रखती और बोली- चुप करो ना, सोने दो मुझे।
रुद्र उसका सर सहला देता है और श्रावणी फिर से सो जाती है।
अंश- बस भाई से मिलने का मन था इसीलिए आ गया।
वेद- अच्छा जी और ये चमत्कार कैसा हो गया।
अंश- भाई, ये सब छोड़ो, आप ये बताओ मेरे आने से पहले आप सब क्या बात कर रहे थे।
वेद-यही बात कर रहे हैं मैं अगस्त्य को अपने बेटे की तरह अपनाना चाहता हूं।
अंश ने उलझन में कहा- मतलब मैं कुछ समझा नहीं।
वेद- मतलब मैं इस 5 साल के क्यूट बेबी को अगस्त्य वेदांत खुराना का नाम देना चाहता हूँ।
अंश- ठीक है, भाई और मुझे लगता है कि इसकी सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है, पर भाई घर में सब मान जायेंगे आप फिर एक बार माँ से बात करलो क्योंकि उनकी कहीं बात अंतिम फैसला होता है।
रुद्र- हाँ, तू अभी ही बात करले।
वेद- अंश माँ को फ़ोन लगा।
अंश की पॉकेट में से फ़ोन निकालकर अपनी माँ को कॉल लगा देता है।
दूसरी तरफ से एक औरत कॉल रिसीव करती है जिसका नाम शारदा है।
शारदा जी अपनी प्यारी और परेशान आवाज़ में बोली- अंश कहाँ हो बेटा?
अंश- मैं मम्मा भाई के साथ हूं।भाई को ना आपसे महत्वपूर्ण बात करनी है।
शारदा जी- बात कराइये वेद से।
वेद- माँ आप कैसी हो?
शारदा जी- हम ठीक हैं बस आपने इस नटखट को लेकर थोड़े परेशान थे, आज खबर नहीं हुई थी इसलिए आपको क्या बात करनी है?
वेद- माँ मेरी पूरी बात सुनने के बाद प्रतिक्रिया देना प्लीज।
शारदा जी- ठीक है, बोलिए।
माँ मैं अगस्त्य को अपना बेटा बनाना चाहती हूँ और खुराना खानदान पोता बनाना चाहती हूँ मैं अगस्त्य को गोद लेना चाहता हूँ और ये बात मैंने खुद आगे से अन्वी से कही थी और मैंने उससे खुद वादा किया था कि मैं अगस्त्य को अपने बेटे की तरह बड़ा करुँगा और कभी भी उसको पराया या आउटसाइडर जैसा फील नहीं होने दूंगा।
ये सब वेद ने एक सांस में बोला था।
अंश उनको चुप देखकर बोला- मम्मी, कुछ तो बोलिए।
शारदा जी, बहुत ही साफ दिल की थी और बहुत प्यारी भी और वो समझती थी कि एक 5 साल के बच्चे को परिवार चाहिए होता है इसलिए वो बोली- ठीक है वेद, हम अगस्त्य को खुराना परिवार के बड़े बेटे और बड़े पोते होने हक देते हैं लेकिन अगर आपने अपने बच्चे होने के उनके साथ कभी कुछ गलत किया तो हम आपको कभी माफ नहीं करेंगे।
वेद एक गहरी सांस लेकर बोला- माँ, मैं आपसे प्रॉमिस करता, मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा।
शारदा जी- वेसे हमारी बहू कहाँ है?
वेद- माँ, उसकी थोड़ी तबीयत ठीक नहीं है और यात्रा से थक भी गई थी।
शारदा जी- आप दोनो ऋषिकेश गए थे ना आज, अगस्त्य को लेने।
वेद- हाँ माँ.
Ab aage,
शारदा जी- ठीक है बेटा और हमने कुशाग्र जी से कह कर तुम दोनों का मैरिज सर्टिफिकेट बनवा दिया है तो साइन कर लेना और हमारी बहू और पोते को भी लेकर आना।
अंश- मम्मा, आपकी बेटी को भी लेकर आएंगे।
शारदा हस्ते हुए बोली- जरूर, इक्षु को भी लेकर आना। अब हम फ़ोन रखते है. शुभ रात्रि।
वेद- शुभ रात्रि, माँ और फोन कॉल डिस्कनेक्ट कर देता है।
अंशु- Congratulations भाई।
वेद- Thank you,चल मैं सोने जा रहा हूँ।
तभी वेद के गोद में सो रहा अगस्त्य रोने लगता है और बहुत ज्यादा कसकर गले लगाता है जैसे मां के बच्चों को छोड़ कर जाने पर रोते है।
अगस्त्य के रोने की वजह से रुद्र के सीने से लगकर सो रही श्रावणी भी उठ जाती है।
वेद- champ, क्यों रो रहे हो और उसको गोद में उठाकर इधर से उधर टहल रहा था और उसकी पीठ सहला रहा था।
वाणी अद्खुली आँखों से बोली- garv क्यों रो रहा है?
रुद्र उसको अपने सीने से लगाकर उसका सर सहलाता है और बोला- वाणी सो जाओ और कुछ देर में वो फिर सो जाती है।
वेद की गोद में भी अगस्त्य कुछ आधे घंटे के बाद शांत हो जाता है और सो जाता है।
ये देखकर अंश, वेद के पास आता है बोला- भाई, मुझे जाना है और अगस्त्य के बालों को पीछे से चूमकर चला जाता है।
वेद, अगस्त्य को लेकर अपने कमरे में सीढियों से ऊपर चला जाता है।
रुद्र उसको ऊपर जाता है, एक नज़र श्रावणी को देखता है और उसको गोद में उठाकर कमरे में चले जाता है।
दूसरी तरफ,
एकांश अपनी कार में बैठकर वहां से चला गया। तभी उसका फोन बजता है तो वो देखता है कि इनाया का कॉल है।
वो कॉल रिसीव करता है बोला- अब कॉल क्यों किया है, इनु?
इनाया- मुझे माफ़ कर दो प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत हो।
अंशु- अच्छा जी.
वो रुंधे गले से बोली- प्लीज, आप नाराज़ मत हो।
अंश- इनु, प्लीज रोना नहीं, देखो तबीयत खराब हो जाएगी। मैं नाराज़ नहीं हूँ और मैं तुम्हें हॉस्टल लेने आ रहा हूँ तैयार रहना।
इनु- लेकिन अभी क्यों एकांश?
अंश- मुझे मिलना है और ऊपर से तुम्हारी फ़िक्र है, प्लीज़ तैयार हो जाओ।
इनु- ठीक है, मैं 5 मिनट में तैयार होकर नीचे आती हूँ।
अंश- ठीक है और फोन डिस्कनेक्ट कर देता है।
10 मिनट बाद,
वो हॉस्टल के सामने अपनी गाड़ी रोक देता है और सामने से वह आकर कार में बैठ जाती है।
इनु- एकांश, आप मुझे कहां लेकर जा रहे हैं।
अंश- सरप्राइज़ है एंजल।
इनु- ठीक है, एकांश।
अंश और इनु कुछ ३० मिनट बाद एक बगीचे में पहुंचे।
अंश कार से बाहर आकर दूसरी तरफ आकर इनु के लिए दरवाजा खोलता है और वो बाहर आ जाती है।
अंश दरवाजा बंद कर देता है और एक तक इनाया को देखने लगता है।
इनाया उसके सीने से लग जाती है और रोने लगती है।
अंश उसको गले लगाता है और उसके बाल सहलाते हुए बोला- एंजल, क्या हुआ? कुछ समस्या है? या डर लग रहा है?
इनाया ना में सर हिला देती है।
अंश- तो क्या बात है बच्चे, बताओ मुझे?
इनु धीरे से बोली- आप नाराज़ थे ना मुझसे और रोने लगती है।
अंश उसको खुद से दूर करके उसके दोनों गालों को अपने हाथों में लेकर उसका माथा चूम लेता है और आंसू साफ करके बोला- यह मोती मत बहाओ। अच्छे नहीं लगते तुम और मैं नाराज़ नहीं था और ना ही कभी हो सकता हूँ, बहुत कीमती हो तुम मेरे लिए इसीलिए प्लीज मत रोना और तुम्हें अपनी हालत ख़राब क्यों करनी है।
रोने की वजह से इनाया का चेहरा पूरा लाल हो गया था और जिस वजह से वह बहुत प्यारी लग रही थी।
शिवाय के घर,
शिव के कमरे में इक्षु अभी तक सोई नहीं थी और किताब पढ़ने की जिद कर रही थी क्योंकि उसको नींद नहीं आ रही थी।
शिव- इक्षु, सो जाओ बेबी।
इक्षु अब रोने लगती है और उसको रोता हुआ देख शिव किताब पढ़ने के लिए उसके सामने करता है और उसके आंसू साफ करते हुए बोला- बहुत जिद्दी हो गई हो और रोना नहीं लेकिन सिर्फ 30 मिनट उससे ज्यादा नहीं, ओके जान।
इक्षु- ठीक है.
कुछ 15 मिनट में किताब पढ़ते हुए शिव के सीने से लगकर बच्चों की तरह सो जाती है और शिव उसका माथा चूमकर खुद भी सो जाता है।
रुद्र के कमरे में भी वो श्रावणी को बिस्तर पर सुला देता है और खुद फ्रेश होने के बाद सोफे पर आकर उसका चेहरा देखते हुए सो गया।
वेद के कमरे में अलग ही सीन चल रहा था।
वेद अगस्त्य को गोद में लेकर कमरे में आता है और अगस्त्य को ठीक से बिस्तर पर सुला देता है और अन्वी को देखता है जो अपना पेट पकड़कर बिस्तर पर अपनी करवट बार-बार बदल रही थी।
वेद उसके पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़कर करवट बदलने से रोक कर बोला- क्या हुआ?
अन्वी दर्द में बोली- बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है।
वेद उसके माथे पर हाथ रख रहा है और बोला- अनु बुखार है?
अन्वी उसको गले लगाकर रोने लगती है और बोली- मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है, कुछ करो ना?
*क्या करेगा वेद?
*एकांश क्यों लेकर गया, इनाया को बगीचे में? *कौन है इनाया?
*क्यों सोया रुद्र सोफा पर?
*क्यों अन्वी इतने दर्द में है?
जान ने के लिए पढ़ते रहिए मेरी कहानी अनजाने में अपनापन...
दोस्तों कमेंट और लाइक तो कर दिया करो यार। ये तो गलत बात है ना मैं कितनी मेहनत करती हूँ लेकिन आप लोग तो मुझे सराहते ही नहीं, ये तो गलत बात है लेकिन कोई बात नहीं मैं फोर्स नहीं करुँगी और अपनी मेहनत के फल की मिठास का इंतज़ार करुँगी।
अगला एपिसोड भी आज ही डाल दूंगी लेकिन आप सब मेरी पहली कहानी भी पढना और उसको भी अपना प्यार देना। जिसका नाम है-The Love- Meri jaan,Mera junoon. ..@ novelbeat...jaakar padhiye...
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ये कहानी है ध्रुव ओबेरॉय और शर्लिन खुराना की है।
आपका ये उपन्यास - NOVELBEAT पर मिल जायेगी।
Ab aage,
वेद और अन्वी का कमरा,
वेद साइड दराज से टैबलेट निकालकर खिला दी और उसका सर लैप में रखकर बोला- माफ कीजिए, थोड़ा जल्दी ऊपर आ जाना चाहिए था लेकिन मां से बात कर रहा था इसलिए देर हो गई।
अन्वी- क्या बोला माँ ने?
वेद अब अन्वी को गोद में बैठाकर उसकी पीठ अपने सीने से लगाकर खुद भी बिस्तर के सिरहाने से अपनी पीठ लगा लेता है और अपने हाथ अन्वी की कमर के चारों ओर लपेट कर पकड़ लेता है और बोला- माँ मान गई, कल विवाह प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करके पहले पति-पत्नी बनेंगे और उसके बाद माता-पिता बनेंगे।
अन्वी पीछे घूमकर वेद की आंखों में देखकर थोड़ी हिचकीआते हुए बोली- वेद एक बात पूछो।
वेद- पूछो बेबी?
अन्वी- तुम मुझसे इतना प्यार क्यों करते हो और सिर्फ मेरे लिए मेरे भाई को अपना नाम दे रहे हो।
वेद- अन्वी, मैं तुम्हें खुश देखना चाहता हूँ और अगर तुम्हारी ख़ुशी अगस्त्य (गर्व) से जुड़ी है तो मुझे वो भी मंजूर है और गर्व को हम दोनों ने बचपन से अब तक हमने पाला है तो आगे भी सब कर लेंगे और कहीं ना कहीं ये भी सच है कि गर्व तुम्हारा छोटा भाई नहीं हमारा बेटा है और ये बात अब हमें सबको बताना चाहिए।
अन्वी- ठीक है, कल सब आएंगे और मैरिज सर्टिफिकेट पर सिग्नेचर करने के बाद सबको सच बता देंगे।
वेद- अन्वी, देखो ना इसको 3 महीने में 5 साल का हो जाएगा और कैसे छुपकर अपने बेटे को पाल रहे हैं।
अन्वी- हम्म, लेकिन कोई बात नहीं इस बार सब ठीक होगा और अगर मेरे चाचू को पता चलता है कि मेरा एक बच्चा है तो वो उसको टारगेट करते हैं लेकिन अब सब कुछ कंट्रोल में है।
वेद, अन्वी के माथे को चूमकर बोला- अच्छा अब सो जाओ, शुभ रात्रि।
अन्वी- शुभ रात्रि, वेद और अपना चेहरा उसके सीने में छुपकर सो जाती है।
वेद, अन्वी के बालों को सहला रहा था और दोनो को सोता हुआ देखकर कुछ देर में खुद भी सो जाता है।
रुद्र का कमरा,
आधी रात को वाणी की नींद खुली और वो रुद्र को सोफे पर देखकर बिस्तर से उठकर उसके पास जाकर सोफे का कुशन उसके सिर के नीचे रखती है और अलमारी से एक चादर निकालकर उसको उड़ा देती है और उसका माथे पर चूमकर मुस्कुरा देती है।
तभी रुद्र की आंख खुलती है और वाणी को अपने पास देखकर बोला- बच्चे, कुछ चाहिए, क्या?
वाणी ना में सर हिलाकर बोली- सॉरी, मेरी वजह से आपकी नींद टूट गई और सर झुका लेती है।
रुद्र- मुझे रात में नींद ज्यादा देर नहीं आती इसलिए बीच रात में कभी भी नींद टूट जाती है तो टेंशन मत लो।
वाणी उसकी ऊपर चढ़ कर बोली- आप मेरे साथ बिस्तर पर सो जाओ।
रूद्र- बिल्कुल भी नहीं तुम नींद में लात मार कर फिर बिस्तर से नीचे गिरा दोगी।
रुद्र की बात सुनकर वाणी बोली- मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी वादा।
रूद्र- ठीक है बाबा।
चलो सोते है और वो वाणी को गोद में उठाकर बिस्तर पर ले जाकर सुला देता है और खुद भी उसको गले लगाकर सो जाता है।
दूसरी तरफ़,
एकांश, इनाया को गार्डन के अंदर लेकर आता है और ताली बजाता है तो आस पास के एरिया को रंग बिरंगी फेयरी लाइट्स से सजाया गया था।
इनु- एकांश आपने ये सब किसलिए किया।
एकांश- बेबी लव, आप मेरी लाइफ हो, और पॉकेट से रिंग निकलता है और एक घुटने के बल बैठ कर मुस्कुराया और बोला- मेरी परी, मेरी बेबी लव, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?
इनाया ये सुनकर हां में सर हिलाकर जवाब देती है और अंश उसको रिंग पहना देता है।
इनु बोली- एकांश, आप प्लीज अब मुझे हॉस्टल छोड़ दीजिए।
एकांश बोला- इतनी जल्दी क्यों है तुम्हें, बोलो?
इनु सर झुकाकर धीरे से बोली- वो मैं आज सुबह कॉलेज नहीं गयी थी।
एकांश उसको देखकर मन में बोला- लगता है मैडम की तबियत ठीक नहीं है।
एकांश उसका चेहरा अपने हाथों में लेकर बोला- क्यों बेबी लव?
इनाया- एकांश, मेरी तबियत ठीक नहीं थी और अभी भी नहीं है, मुझे चक्कर आ रहा है।
एकांश- अच्छा पहले हम अस्पताल जायेंगे और फिर मैं तुम्हें हॉस्टल छोड़ दूंगा।
एकांश, इनाया को कार में बैठकर अस्पताल लेकर जाता है और डॉ. नैना के अंडर उसका चेक-अप करवाता है और रिपोर्ट्स कल आने का बोल देती है और दोनों अस्पताल से बाहर आते हैं और एकांश कार में बैठकर उससे पहले ही इनाया उसका हाथ पकड़कर उसके सीने से लग जाती है।
एकांश उसको अपनी बाहों में भर लेता और बोला- बेबी लव, कुछ बात करनी है।
इनु उसके सीने से लगकर बोली- बात तो करनी है पर कहीं और चल सकते हैं, क्या?
एकांश- ठीक है, मेरे पेंट हाउस चलते हैं।
थोड़ी देर बाद,
एकांश का पेंटहाउस,
दोनों अंदर जाते हैं और लिविंग रूम में सोफे पर बैठ जाते हैं।
अंश बोला- बताओ क्या बात है इनु?
इनाया- वो मेरा पास्ट...
अंश बोला- वेसे तो मुझे हम दोनो के पास्ट से कोई मतलब नहीं है लेकिन अगर तुम्हे गिल्ट है या लगता है के बताना जरूरी है तो उसे उगल दो, मैं सुन रहा हूँ।
इनाया लंबी सांस लेकर कहा- 3 साल पहले जब मेरा 18वां जन्मदिन था, उस दिन मैं बहुत खुश थी। मैंने अपने दोस्तों, परिवार के साथ जश्न मनाया था, पापा के बिजनेस पार्टनर भी बर्थडे पार्टी आए थे।
मेरी सौतेली माँ और सौतेली बहन श्वेता ने मेरा फ्रूट जूस स्पाइक कर दी थी जिस वजह से मेरा सर घूमने लगा था तो श्वेता ने मुझे होटल के रूम नंबर 103 में रेस्ट करने के लिए भेज दिया था और उस दिन मेरे साथ वो हुआ जो किसी भी लड़की के साथ कभी नहीं होना चाहिए था।
मेरा बलात्कार हुआ था।
उसके बाद मैं अपने सभी रिश्ते तोड़कर विदेश चली गई थी और पिछले साल ही वापस इंडिया आई थी।
एकांश उसकी बात सुनकर चौंक गए और बोले-तुम्हें कुछ भी याद है जो तुमने देखा हो जिसने उस आदमी को पहचान पाऊ।
इनाया- हां उसकी गर्दन पर एक शेर का टैटू था।
अंश- सॉरी, उस दिन मैं डैड के कहने पर एक मीटिंग के लिए होटल आया था और मेरी ड्रिंक भी किसने स्पाइक थी और मेरा सर चक्कराने लगा था, गर्मी लग रही थी और आराम करने के लिए अपने कमरे में जा रहा था लेकिन मैं गलती से रूम नंबर 104 की जगह 103 रूम नंबर में चला गया था।
इनाया उसके गले से लगकर बोली- मैं बहुत खुश हूं के उस कमरे में मेरी बहन के किराए के लिए हुए लोग नहीं थे।
Ab aage,
एकांश- अच्छा ठीक है, अब सब क्लियर है।
इनाया- हम्म..
एकांश- बेबी लव, आपको देखकर लग रहा है जैसे आप खुश नहीं हो।
इनु- एकांश, सर बहुत भारी हो रहा।
एकांश उसको खुद से दूर करता है तो देखता है कि पूरा चेहरा टोमैटो सॉस जितना लाल हो रखा है और उसके माथे पर हाथ लगाता है तो बुखार था।
अंश- तुम्हें बुखार था।
इनु- वो कल सुबह से..और चुप हो जाती है पर अपनी पलकों को बार-बार झपका कर खुला रखने की कोशिश कर रही थी।
अंश उसको गोद में उठाकर अपने कमरे में ले जाकर बिस्तर पर सुला देता है और खुद कपड़े बदलकर कैजुअल डालकर सोफा पर बैठ जाता है और लैपटॉप को ऑफिस में कुछ काम करता है और लैपटॉप बंद करता है और इनाया के पास आकर बिस्तर पर बैठ जाता है और इनाया का सर सहलाते हुए थोड़ा झुक कर उसका माथा चूम लेता है और खुद भी सो जाता है।
अगली सुबह,
मेहरोत्रा हवेली,
सब डाइनिंग टेबल पर बैठ कर नाश्ता कर रहे थे।
कृषा जी- शिवाय, आप ठीक हैं।
शिव- जी माँ। लेकिन आप ये क्यों पूछ रहे हो?
क्रशा जी- वो क्या है ना मेरा बेटा अपनी मां के बिना बहुत कम ही रहता है तो सोचा पूछ लू। उनकी बात सुनकर इक्षिता के अलावा सबको हसी आ जाती है।
शिव, इक्षिता का सर सहलाकर बोला- तुम्हें हंसी नहीं आ रही, क्या?
इक्षु मुस्कुरा कर उसके दोनों गालों पर बेबी किस करती है और बोली- मैं तो आपको अच्छे से जानती हूं कि आप मां, से कितना प्यार करते हो और मैं इसका सम्मान करता हूं।
इक्षु की बात सुनकर और उसकी हरकत देख सब मुस्कुरा देते हैं।
शिव बोला- ठीक है अब इतनी तारीफ करी है तो आज हम तुम्हारा पसंदीदा रंगीन लाइट वाले कैफे जाएंगे और हम सब जाएंगे।
इक्षु खुशी से खड़े होकर उत्साह में कूदने लगती है और उसको देखकर सब खुश थे और शिव बोला- इक्षु, अभी कूदना बंद करो, लग जाएगी।
इक्षु रुक कर बोली- शिवाय क्या हम, अंश भाई को भी बुला सकते हैं?
शिव उसकी (इक्षु) बात सुनकर वेद को दिखता है जो गर्व(Agastya) को खाना खिला रहा था।
इक्षिता की बात सुनकर वेद बोला- मैं उसको कॉल कर दूंगा।
अगस्त्य- पापा, चाचू आएंगे।
वेद, अगस्त्य के मुंह से पापा, सुनकर मुस्कुरा देता है और हां में सर हिलाता है।
अगस्त्य- बटरफ्लाई फिर मैं अपनी पसंदीदा वाली सफेद शर्ट पहनूं।
अन्वी- बिलकुल मेरा बच्चा.
अपनी बटरफ्लाई की बात सुनकर अगस्त्य झट से उसके गले लग बोला- Thank you मम्मा, मैं अभी तैयार होकर आता हूं और जाने से पहले उसके और वेद के गाल पर किस करता है और भागकर ऊपर जाने लगता है।
वेद, गर्व को भागकर जाते देख चिंता के साथ बोला- बच्चे, ध्यान से गिरना मत।
शिव--- मम्मी-पापा, ये कब हो गया और वेद तूने आंटी से बात करली।
वेद- हां, मैंने मां से बात की और अगर कुछ भी नहीं होता तो भी वो हमारा ही बेटा कहलाता, समझे रुद्र और ये उसने थोड़े एटीट्यूड और गर्व के साथ बोला था।
रुद्र- मुझे एटीट्यूड मत दिखाओ।
शिव- वेद, तुम कुछ बताने वाले हो ना, बोलो।
वेद- पहले विवाह प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करते हैं। कुशाग्र जी- ठीक है और टेबल के नीचे वाले दराज से विवाह प्रमाणपत्र के कागजात निकलते हैं और टेबल पर रख देते हैं।
तभी दरवाजे से एकांश और उसका हाथ पकड़े एक प्यारी सी लड़की अंदर आती है।
अंश- भाई, आप मेरी गर्लफ्रेंड से मिलना चाहते थे ना?
वेद- हां जरूर, कब मिल रहे हो। इनु- एकांश, तुम कौन हो?
वेद जो अभी तक फोन में कुछ देख रहा था वो एकांश के साथ खड़ी लड़की को देखने लगता है।
अंश- इनु, ये मेरे बड़े भाई वेदांत खुराना हैं और उनके बगल में जो बैठी है वो आज मेरी भाभी बनने वाली है।
इनाया हां में सर हिलाकर पलकें झुका कर बोलीं- हेलो.
वेद- हेलो, वे तुम बहुत क्यूट हो।
इक्षु- अंश भाई, मुझे भी तो मिलवाओ मेरी दूसरी भाभी से।
अंश- इनु, इसे मिलो ये मेरी प्यारी सी छोटी बहन, इक्षिता राजपूत।
इनाया सर उठाकर शॉक में बोली- इक्षिता राजपूत।
अंश- हां और होने वाली मिसेज शिवाय मेहरोत्रा लेकिन तुम इतने शॉक्ड क्यों हो।
इनाया रुंधे गले से बोली- क्योंकि उसकी माँ- पापा का एक्सीडेंट हो गया मेरी माँ- पापा की वजह से हुआ था और.. और पापा नशे में थे और उस वक्त वो मम्मी से लड़ई कर रहे थे। जब माँ-पिताजी की मौत के कुछ दिन बाद पता चला के जैसे मेरे माँ-पिताजी के साथ मैं थी, वे दूसरी कार में भी एक 6 साल की बच्ची थी और वो रोने लगती है और फिर रोते हुए बोली- और मैं तब 11 साल की थी.
अंश उसको गले से लगा लेता है और बोला- पहले रोना बंद करो।
इक्षिता बोली- हां, आप रो मत क्योंकि आप भी तो मेरी तरह छोटे थे ना और अगर आपको दोषी महसूस हो रहा है। तो शिव हमें कहते हैं कि अगर हम उसे स्वीकार कर लें तो अपराध कम हो जाता है और आपसे नाराज़ नहीं हुआ लेकिन अगर आपको सज़ा चाहिए तो आप मेरे अंश भाई को कभी चोट मत पहुँचाना।
शिव उसके गाल पर किस करता है और बोला- बच्चे, उसको सज़ा नहीं पेबैक बोलते।
इक्षु- हां- हां वही तुम समझ गए ना बहुत है।
अंश- इनु, प्लीज रोना बंद करो, देखो कल वैसे ही तुम्हें बुखार था। तबीयत और ख़राब हो जाएगी.
तभी सीधीयों से अगस्त्य नीचे आता है और वेद की गोद में बैठ जाता है और बोला- पापा, चाचू कब आएंगे।
वेद- चैम्प, आपके चाचू तो आ गये।
अंश- दोस्त, इतना हैंडसम इंसान दिखायी नहीं देता क्या?
अगस्त्य, अंश को देखकर बोला- अब आप अपोजिट साइड में हैं तो मैं क्या करूं? वेसे चाचू, ये खूबसूरत औरत मेरी चाची है क्या?
इनाया का रोना अब तब बैंड हो चुका था और वो अगस्त्य को देख रही थी।
तभी दरवाजे से शारदा जी और ऋषभ जी अंदर आते हैं और कृषा जी और कुशाग्र जी से मिलते हैं और सोफे पर बैठ जाते हैं और उन दोनों ने एकांश के साथ इनाया की शुरुआत से अब तक सभी बातें सुनली थी।
शारदा जी एक नजर ऋषभ जी को देखती हैं जो अपनी पलकें झपका कर हां का इशारा करती हैं।
शारदा जी थोड़े सीरियस और कड़क लहज़े में बोलीं- अंश, ये लड़की तुम्हारी गर्लफ्रेंड है।
शारदा जी की कड़क आवाज सुनकर इनाया डर गई थी और उसकी पकड़ एकांश के हाथ पर कस जाती है।
एकांश ये महसूस करता है और आंखों से ही शांत रहने का इशारा करता है और अपनी मां को देखकर बोला- हां, मम्मा।
शारदा जी खड़ी होकर उन दोनों के पास आती हैं और इनाया का चेहरा अपने हाथों में लेकर बहुत ही प्यार से बोलीं- क्या तुम अंश से प्यार करती हो?
इनाया डर से कांप रही थी फिर भी उनके सवाल का जवाब देती है और सर हां में हिलाकर कांपती हुई आवाज में बोली- जी, हम एकांश से प्यार करते हैं।
अंश उसको गले लगाता है और उसके बालों को सहलाने लगता है और अपनी माँ को देखकर बोला- मम्मा, आप इनु को डराना बंद करो, वेसे ही उसकी तबीयत ठीक नहीं है, प्लीज।
शारदा जी उसका सर सहलाकर बोली- बेटा आप डरो नहीं और वेसे भी हमें पसंद हैं और आप ये कब बताने वाले थे कि आपकी एक गर्लफ्रेंड है वो तो अच्छा है आपके पापा और मैंने सब सुन लिया।
अंश सामान्य रूप से बोला- जब इनु आपस में मिलने के लिए तैयार होती है, तब।
इनाया रोने लगी थी और वो कांप भी रही थी, अंश को जब ये महसूस होता है तो वो बोला- तुमने मुझसे कल वादा किया था कि तुम रोओगे नहीं।
अंश उसको खुद से दूर करके उसकी आंखों से आंसू साफ करता है और बोला- मैंने कहा था ना अगर तुम रोई तो मैं बात नहीं करूंगा पर अगर बात नहीं करूंगा तो तुम फिर से रोने लगोगी इसलिए मैंने ना बहुत अच्छा तरीका निकला है तुम्हारे आंसू रोकने का.
शारदा जी- और वो क्या है बेटा.
अंश अभी देखता हूं और इनाया को गुदगुदी करने लगता है और इनाया हंसते में बोली- एकांश मत करिये बहुत ज्यादा गुदगुदी हो रही है।
अंश रुक जाता है और बोला- अब रोना तुम, यहीं करूंगा।
शारदा जी दोनों को देखकर बोलीं- मुझे लगा था, तुम किस करोगे।
तभी दरवाजे से वकील अंदर आता है और बोला- मिस्टर खुराना ये मैरिज सर्टिफिकेट जो आपने मुझे बनाने के लिए बोला था।
एकांश- पापा, मैरिज सर्टिफिकेट तो भाई का कुशाग्र अंकल ने बनवा रखा है तो ये किसका है।
ऋषभ जी- नालायक तेरा शादी का सर्टिफिकेट है।
शिव उन सबको बातें करते देखते हैं अपने पेपर्स उठाकर उनपर सिग्नेचर करता और चुप चाप से इक्षु को भी इशारा करता हैं तो वो भी जैसा शिव ने कहा वैसा ही करती और उसके कान में बोली- मैंने तुम्हारी कोई भी बात नहीं मानी।
शिव सिर्फ हां में सर हिलाता है।
एकांश--- मम्मा-पापा आप दोनों सीरियस हो मैंने कल ही तो इनु शादी के लिए प्रपोज किया था।
अंश पेपर्स लेकर सिग्नेचर करता है और इनाया से बोला- इनु, मैंने सिग्नेचर कर दिए हैं और अगर तुम अभी तैयार हो तो सिग्नेचर कर सकती हो अन्यथा अपना समय ले लो।
इनाया अंश के हाथ से पेन लेकर बोली- आई लव यू और पेपर्स पर साइन कर देती है और पेन वहीं टेबल पर रख देती है।
अन्वी, वेद को देखती है और बोली- पहले सच फिर शादी।
Ab aage,
वेद- ठीक है, ठीक है जैसा तुम कहो वैसा करते है।
वेद उसकी गोद में देखता है जहां अगस्त्य उसकी शर्ट के बटन के साथ खेल रहा था।
वेद बोला- चैम्प, आप अभी ऊपर जाओ पापा को सबसे बहुत महत्वपूर्ण बात करनी है।
अगस्त्य बोला- नहीं, मैं नहीं जाऊंगा मुझे आपके पास रहना है और उसको गले लगा लेता हूं।
अन्वी- अच्छा ठीक है, आपको नहीं जाना तो मत जाओ और उसके गाल पर किस करती है।
अन्वी बोलती है- वेद, गर्व को बुखार है, तेज़ नहीं है लेकिन बढ़ने के चांस हैं। तुम्हें पता है कि वह कमजोर है।
वेद, अन्वी से बोला- मुझे पता है।
वेद, अगस्त्य से बोला- चैंप आप पापा की एक बात मानोगे।
अगस्त्य हाँ में सर हिलाता है।
वेद- आप थोड़ी देर निनी करलो फिर आप थक गए तो घूमने नहीं जा पाओगे।
अगस्त्य- पापा, आपकी गोद में सो जाउ।
शारदा जी- वेद, चल क्या रहा है।
वेद- मां, 15 मिनट रुक जाओ, प्लीज सब बता दूंगा।
15 मिनट बाद,
अगस्त्य, वेद की गोद में सो गया था।
शारदा जी- अब बताओगे, ऐसा कौन सा सच है जो तुम छुपा रहे हो।
वेद- मां, बता रहा हूं और प्लीज थोड़ा धीरे बोलो, अभी ही सोया है।
अगस्त्य नींद में बड़बड़ा रहा था और वेद को कसकर गले लगाता था।
वेद, शारदा जी से बोला- मां, आप बताएं हम कितने साल से रिलेशनशिप में हैं।
शारदा जी- तुम दोनों पिछले 4 साल से रिलेशनशिप में हो।
एकांश- नहीं मम्मी भाई-भाभी, पिछले 8 साल से रिलेशनशिप में है।
ऋषभ जी- हां, शारदा हमने अनवी और वेद का रिश्ता अविनाश से बात करके बचपन में पक्का किया था लेकिन उसके बाद वो US शिफ्ट हो गया।
वेद- पापा, मैं बताता हूं।
ऋषभ जी- चुप बिलकुल चुप पहले ही बहुत देर कर चुके हो। मुझे बात संभालने दो।
वेद कुछ बोलता उससे पहले ही अनवी उसका हाथ पकड़ कर चुप करा दिया।
ऋषभ जी- जब अविनाश वापस इंडिया आया तो उसने मुझे कॉल किया था और बताया था कि उसको ब्रेन ट्यूमर है और उसके जाने के बाद मैं अन्वी और श्रुति का ध्यान रखूं।
संयोग से, अन्वी का एडमिशन वेद के स्कूल में ही हुआ था और जब ये बात अविनाश ने मुझे बताई थी तो मैं बहुत खुश था और फिर मैंने क्लास और सेक्शन पूछा तो यह 9thA और वेद का भी सेक्शन और क्लास समान थी।
उस दिन जब वेद स्कूल से घर आया था तो शारदा अपनी मां के घर गई थी। वेद से मैं हमेशा पॉइंट टू पॉइंट बात करता हूं तो मैं पूछता हूं कि क्लास में कोई नया एडमिशन हुआ है इस साल।
तो वेद ने भी सच कहा- हां, पापा एडमिशन हुआ है और मेरी क्लास में एक नई लड़की आई है और वो प्यारी है उसका नाम अन्वी सहगल है।
कक्षा 9 का CR(Class Representative) हु तो विद्यार्थियों पर नजर भी रखी हुई और उसको निरीक्षण किया तो पता चला के वो बहुत ही चुप चाप और काफी शांत टाइप की है। क्लास में किसी से दोस्ती नहीं करती. लेकिन आप क्यों पूछ रहे हो?
फिर मैंने फोटो दिखाई और बताई के वो मेरे दोस्त की बेटी अभी ही US से वापस आई है और तुम उससे दोस्ती करो और मेरे कहने पर वेद ने अन्वी से दोस्ती की और सबसे अच्छे दोस्त बन गए और उसके बाद रिलेशनशिप में भी आ गए जब बच्चों की 12th ख़तम हुई तो अविनाश ने अन्वी को उसके बीमार होने वाली बात बताई और श्रुति को भी।
वेद- और फिर हमें उनकी आखिरी इच्छा सुनकर कोई सदमा नहीं लगा क्योंकि वो सिर्फ अपनी बेटी के बच्चे को देखना चाहते थे अन्वी और मैं उस टाइम कॉलेज में थे, और वो दिन मेरे लिए एक सदमा था, पापा और मम्मी के लिए।
वेद की नज़र इक्षु पर गई तो वो सो चुकी थी और उसको देखकर मुस्कुरा देता है।
शिव- आगे बोल सुन रहे हैं, हम।
वेद- ठीक है बोल रहा हूं लेकिन पहले इक्षु को ठीक से सुला दे।
शिव इक्षु को देखकर मुस्कुराएं और उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है।
वेद- अन्वी को जब ये पता चला था तो हम कैंटीन में थे और कॉल पर ये बात सुनने के बाद तो मैं खुद हैरान था उसे क्या बोलता लेकिन पापा की आखिरी इच्छा ने मुझे शॉक नहीं दिया तो मैंने अन्वी को उसी समय हां कह दिया था।
पापा हॉस्पिटल में एडमिट कर लो।
1 हफ्ते बाद,
कॉलेज से घर जाने वक्त अन्वी अचानक बेहोश हो गई थी तो मैं उसे हॉस्पिटल लेकर गया था, डॉक्टर ने ब्लड सैंपल लिया था और चेक-अप किया तो पता चला कि वह गर्भनिरोधक गोलियां ले रही है, असल में उसने कभी खाई तो दूर बात की है देखी तक नहीं थी जब अन्वी को ये बात पता चली तो उसका डॉक्टर से सबसे पहला सवाल था के इसके कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हुए।
डॉक्टर ने भी साफ-साफ बोला- के अब आप कभी मां नहीं बन सकतीं।
मैंने पहले ही श्रुति मां को कॉल कर दिया था और उनके कमरे के अंदर आते हुए सारी बात सुन ली थी और कहां के वह हमारी मदद करेंगी तो उनके माध्यम से हमें दुख-दर्द साइड करके सरोगेसी के माध्यम से हमारे बच्चे को दुनिया में लाने का सोचा। सब ठीक चल रहा था इस बारे में सिर्फ पापा को पता था लेकिन एकांश एक दिन मेरे फ्लैट में मुझसे मिलने आया था और उसने मुझे, अन्वी, श्रुति मां और पापा को साथ में देखा था।
इसे पहले कि उसे कोई गलतफहमी होती हमने उसे शुरू से लेकर गर्भावस्था के बारे में सब बता दिया था और पता है वो गर्भनिरोधक गोलियां अन्वी की चाची उसको दे रही थी।
एकांश ने भी ज्यादा कुछ नहीं बोला, बस यही कहा था कि आप मुझे परीक्षा में पास करा देना, आपका सीक्रेट सीक्रेट ही रखूंगा।
अब 10th क्लास में पढ़ रहे बच्चे से मैं क्या ही बोलता तो मैंने भी हां कह दिया और देखते ही देखते 9th महीना भी आ गया और जिस दिन श्रुति मां की डिलीवरी होने वाली थी उस दिन घर में कोई नहीं था और उनको लेबर पेन शुरू हो गया और जब तक मैं और अन्वी कॉलेज से घर आए तो हम उनको सिद्ध हॉस्पिटल लेकर गए वहां पता चला के उनकी हालत बहुत गंभीर है और इंटरनल ब्लीडिंग भी हो रही है डिलीवरी के कुछ घंटे बाद ही उनकी मौत हो गई और वो बच्चा कोई और नहीं मेरे और अन्वी का बेटा अगस्त्य है और उसके इस दुनिया में आने के बाद जब हमने उसको अविनाश पापा से मिलवाया तो वो बहुत खुश थे और उनको मां की मौत का पता चला तो उनकी भी सदमे से मौत हो गई लेकिन इस बच्चे ने अनवी और मुझे उसकी मौजूदगी का एहसास जरूर करवा दिया था इसलिए उसे सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए गुप्त रूप से सबसे छुपाना पड़ा सबको ये कहा के अन्वी का भाई है इसमें कोई शक नहीं वो अगस्त्य की मां है लेकिन फिर भी हमने ये किया उसके चाचा- चाची इस नन्हीं सी जान पर खतरा ना बन जाए और इसी वजह से हम ने ये बात आपसे छुपाई मां, I am really Sorry और इसमे एक Special Thank you शिव को भी जाता है जिसने मेरे कामज़ोर पडने पर अन्वी को एक बड़े भाई की तरह संभाल लिया। Thank you।
शारदा जी, वेद के सामने आई और खींच कर थप्पड़ वेद के गाल पर दे मारा।
वेद कुछ नहीं बोलता लेकिन शारदा जी बोलीं- ये थप्पड़ सब कुछ खुद से संभालने के लिए नही मारा ये थप्पड़ इसलिए मारा क्योंकि तुम इतने बड़े हो गए हो कि अपनी मां से बात छुपाने लगे हो ये बच्चा मेरा पोता है और अगर मुझे बताते ना बेटा तो तेरा साथ देती।
तूने सब अकेले संभलने के चक्कर में ना एक गलती कर दी वो ये कि तुम अन्वी की हिम्मत तो बन गया लेकिन खुद को मजबूत करने की जगह खुद उस वक्त कमज़ोर बन गया। वे मुझे ये उम्मीद नहीं थी के इतना कुछ भी हो सकता है लेकिन अब ये शादी...
अन्वी- आंटी, मुझे सिर्फ आपसे इतना बोलना है के ये सब मेरी वजह से हुआ है तो आपको जो कहना है मुझसे कहिए लेकिन वेद से कुछ मत कहिये और सर झुका लेती है।
शारदा जी- आंटी, किसको कहा तुमने और मुझे एक बात बताओ ये सब तुमने किया है क्या? नहीं ना और मैं कह रही थी कि ये शादी होगी तुम विवाह प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करो।
अन्वी बेटा तुम्हारी माँ मेरी दोस्त कम बहन थी तो अगर उसने नहीं बताया तो कुछ तो सोचा ही होगा और आंटी ना किसी और को बोलना मुझे तुम माँ ही बुलाओ तुम्हारे मुँह से वही अच्छा लगता है।
अन्वी ये सुनकर कुछ बोलती है, पहले ही वेद बोला- पापा, ये सास-बहू की दोस्ती के चक्कर में मुझे थप्पड़ पड़ गया।
ये सुनकर अन्वी वेद को घूरने लगी और फिर बोली- क्षमा करें।
वेद उसकी तरफ देखकर बोला- क्यों घर से बाहर निकलना चाहती हो। कितनी बार बोला है- पूरी दुनिया सॉरी बोल सकती है लेकिन खुराना खानदान की बहू- बेटियों को सॉरी बोलना अनुमत नहीं है पर तुम्हें समझ ही नहीं आता।
शारदा जी- वो नहीं होने वाला क्योंकि ये अपनी माँ पर गई है और तुम इसकी आदत डाल ही लो क्योंकि ये एक अपवाद है।
कृषा जी- बहुत हो गई बातें अब शादी के पेपर्स साइन करो।
अन्वी और वेद दोनों सिग्नेचर करने के बाद अगस्त्य की तरफ देखते हैं, जो अभी भी सो रहा था।
वेद उसके माथे पर बाल थे जो सोने की वजह से बिगड़ गए उनको ठीक करता है और बुखार की जांच करता है जो उतर गया था।
अगस्त्य बुदबुदाते हुए बोला- आई लव यू, मम्मा- पापा।
अन्वी बोलती है- मम्मा तो औपचारिकता है प्यार तो ये सिर्फ अपने पापा से ही करती है।
वेद बोला- मैडम वो क्या है ना अब उसके पापा उसकी मां से प्यार करते हैं तो मुझपर तरस खाकर वो मुझसे थोड़ा ज्यादा प्यार कर लेता है।
अन्वी- तो ठीक है कल सुबह से 5 बजे उठ जाना और गर्व को तैयार करके 8 बजे स्कूल भी छोड़ कर आना। अरे हां, कल तो तुम्हारी शौर्य मित्तल के साथ मीटिंग है ना, उसका क्या होगा वो तो सुबह 7 बजे है अब तुम क्या करोगे।
वेद- अन्वी देखो ये मत करो, मिस्टर मित्तल बहुत ही महत्वपूर्ण ग्राहकों में से एक है, वेसे ही मैं कॉलेज और स्टार्ट अप खुद से संभालने की कोशिश कर रहा हूं अब ऐसा मत करो प्लीज।
अन्वी- नहीं तुम्हें लगता है, बच्चों को तैयर करना उनका ध्यान रखना विशेष रूप से मां की ड्यूटी निभाना उसके बीच में अपने लिए समय निकालना, अपनी पढ़ाई को मैनेज करना और कामकाजी महिलाओं का काम करना तो कोई भी कर लेता है। है ना, तो कल ये सब कुछ तुम करोगे और मदद की इजाजत नहीं है और मैं, मां, कृषा आंटी, श्रावणी और इक्षु शॉपिंग के लिए जाएंगे।
इक्षिता उठ गई थी और अन्वी की बात सुनकर शिव को देखती है और बोली-शिव, तुम चलोगे तो मैं जाउंगी नहीं तो मुझे कहीं नहीं जाना।
शिव- इक्षु, अभी के लिए ना आप कहीं जा रही हैं और ना शॉपिंग की ज़रुरत नहीं है, वेसे भी अभी तो मैंने इशु के वापस आने पर इसकी पूरी की पूरी अलमारी में कपड़े रखवाए हैं और सॉरी अन्वी लेकिन आप उसकी हालत जानती हैं लेकिन हां अभी हम सब मेरी जान के पसंदीदा रंगीन रोशनी वाले रेस्तरां जरूर जाएंगे वो भी रात को डिनर करने के लिए, उसके साथ कोई समझौता नहीं।
Ab aage,
इक्षु- लेकिन मैंने तो सोचा था आज मैं खाना बनाउंगी।
शिव- तुम्हें खाना बनाना आता है।
इक्षु बड़ी सी और प्यारी सी मुस्कान के साथ बोली- हां और आज मुझे ना सूजी का हलवा बनाना है।
शिव- नहीं, तुम आराम करोगी।
इक्षु- प्लीज ना शिव, मान जाओ।
अगस्त्य उठ गया था और अपनी आँखें रगड़ता है और बोला- पापा, गुड मॉर्निंग।
वेद उसका हाथ पकड़कर बोला- चैंप, मैंने तुमसे कहा था ना ऐसे आपकी आंखों में दर्द होगा।
अगस्त्य बोला- ठीक है पापा।
शिव- नहीं इक्षु।
इक्षु उसके गाल पर कौन करती है और बोली- शिवाय, प्लीज मान जाओ।
शिव- फिर तुम सिर्फ हलवा बनाओगी और कुछ भी नहीं और मैं वादा करता हूं और उसके कान में कुछ बोलता है।
इक्षु- हो गया, लेकिन वादा पूरा करना नहीं तो...
रुद्र- वेसा कुछ नहीं होगा और हम तीनों का एक खाली रहस्य अभी लंबित है।
कुशाग्र- तुम तीनों नहीं सुधर सकते।
अगस्त्य- शिव भाई, हम वो कलरफुल लाइट वाले रेस्टोरेंट जाएंगे।
शिव- ऑफ कोर्स, जाएंगे और जैसे वो आपकी भाभी और वाणी की फेवरेट है आपका भी फेवरेट हो जाएगा।
वेद- वेसे उस रेस्टोरेंट का नाम क्या है।
इक्षु- मैं उस रेस्टोरेंट का मालिक हूं तो मुझसे पूछिए वेद भाई।
वेद- तो आप बता दीजिये।
इक्षु- Moonlight Restaurant।
अन्वी- मूनलाइट रेस्टोरेंट, पर उसे मैनेज कौन करता है जब तुम्हें हाल ही में सब पता चला है।
शिव- मैं और रुद्र सब मैनेज करते हैं।
रुद्र- मैं अपनी प्यारी सी बहन के ऑर्डर लेकर उसके अंडर काम कर सकता हूं लेकिन अपने पिता का वो फैमिली बिजनेस उनका लाडला बेटा ही संभाले मुझे जल्दी भर का इंटरेस्ट नहीं है उसमें।
इक्षु- आप और आपके पापा की शीत युद्ध कभी ख़तम होगी या नहीं। पता है, शिव पिछले बार ना ये अंकल के साथ आए थे और मुझे लगता था मुझसे बात करने से ज्यादा तो भाई उनसे बहस कर रहे थे।
शिव- इक्षु, के सामने लड़ना मना है, ना। आपने एक नियम तोड़ा, अब जुर्माना अदा करें। इशिता आंटी का नियम था.
इक्षु- आंटी?? कौन आंटी और किसकी आंटी??
शिव- अपनी माँ को भूल गई हो, क्या?
इक्षु- नहीं, पर अभी तो पेपर्स साइन करें तो वो तुम्हारी भी माँ हुई ना, शिव और मैं जीवन में पहली बार तुम्हारी बात मान रही हूं और मैं स्वीकार करती हूं।
शिव- कौन सी बात??
इक्षु-रसोई में न जाने की। एकांश- कृपया सभी लोग अपना समय दें।
वेद- बोलना अंश.
एकांश - मुझे और इनु को कॉलेज जाना है, तो मैं पूछ रहा था कि श्रावणी को जाना है के नहीं?
श्रावणी- जाना है, अंश भाई और अन्या को भी उसके घर से लेकर जाना है, प्लीज।
एकांश- ठीक है, जाओ अपना बैग ले आओ।
श्रावणी बैग लेकर आती है और सबको बाय बोलकर एकांश और इनाया के साथ कॉलेज के लिए निकल गया था।
20 मिनट बाद,
कार कॉलेज के बाहर रुकती है तो उसकी पिछली सीट से श्रावणी और अन्य उतारती है और बाईं ओर से इनाया उतारती है और उसके गले में मंगलसूत्र और मांग में सिन्दूर देख सब लड़कों के दिलों की धड़कन ही रुक गई थी और ड्राइवर सीट से एकांश बहार आता है और कार की चाबियाँ चौकीदार को देकर बोला- कृपया कार पार्क करवा दीजिए।
सभी लड़कियां आंखें फाड़कर एकांश को देख रही थीं।
इनाया धीरे से बोलीं- एकांश सब लड़कियां आपको घूरकर क्यों कर रही हैं।
श्रावणी- अंश भाई, ये तो इक्षिता 2.0 है।
एकांश- इनु, क्लास में जाओ मैं 5 मिनट में आता हूं।
इनाया हां में सर झुककर धीरे से बोली- ठीक है, एकांश।
आन्या- क्या अब आप हमारी भाभी हैं और अंश भाई की पत्नी भी हैं तो अब आप उनको एकांश की जगह अंश बुलाओ ना।
एकांश- अन्या, वाणी जाओ और इनाया को प्यार से बोला- तुम्हें मुझे एकांश बुलाना है या अंश तुम्हारी मर्जी अभी क्लास में जाओ मैं आता हूं, ठीक है?
इनाया धीरे से बोली- एकांश, मुझे ठीक नहीं लग रहा, प्लीज साथ में चलो ना।
पीछे से एक लड़की आती है और बोली- हैलो इनाया।
इनाया उदास आवाज में बोली- हेलो प्रिशा.
प्रिशा- हेलो एकांश.
एकांश उसको इग्नोर करता है और बोला- इनु, क्या हुआ?
इनाया धीरे से सर झुका कर बोली- एकांश मुझे पसंद नहीं जब कोई और लड़की आपको घूरकर देखती है।
एकांश-क्या तुम्हें ईर्ष्या हो रही है?
इनाया कुछ नहीं बोलती और उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं।
एकांश ये देखकर उसको गले से लगा कर बोला- अच्छा ठीक है, मैं साथ चलता हूं। प्लीज रोना बंद करो नहीं तो मैं..
इनाया उसे थोड़ा अलग हुई और बोली- प्लीज नहीं ना।
प्रिशा- लव बर्ड्स, तुम दोनों को आधे से ज़्यादा कॉलेज देख रहे हो।
पीछे से एक लड़का आकर प्रिशा को वापस गले लगाता है और बोला- हैलो, ईशा।
प्रिशा- प्रथम तुम भी ना, डर दिया ना मुझे।
प्रथम- सॉरी बेबी, वेसे बहुत प्यारी लग रही हो।
प्रिशा- धन्यवाद पतिदेव.
(दोस्तों, ये प्रथम और प्रिशा सबसे अच्छे दोस्त हैं इनाया और एकांश के और वो दोनो भी शादीशुदा हैं)
प्रथम- वेसे अंश तूने शादी कब की? पिछले दो दिनों से तो तुम दोनों ही कॉलेज में नहीं आ रहे थे।
एकांश- क्लास में चले, आराम से बैठूंगा।
चारों अपनी क्लास में जाते हैं और अपनी सीटों पर बैठ जाते हैं।
प्रिशा- अब बताओ?
एकांश- आज सुबह मैं इनु भाई से मिलवाने और उनका परिचय करवाकर गया और माँ ने सब सुनलिया और भाई और भाभी की शादी और शिव भाई की शादी के साथ हमारी भी शादी हो गई।
प्रिशा- ये तो सही नहीं, हम तुम दोनों के सबसे अच्छे दोस्त हैं, हमें तो बताना चाहिए ना।
प्रथम- इनाया कुछ बोलोगी?
इनाया कुछ नहीं बोलती और अपनी किताब पढ़ रही थी।
एकांश उसकी किताब बंद करता है और बोला- क्या बात है, इनु?
इनाया- कुछ नहीं.
एकांश उसके गाल पर हाथ रखकर बोला- बताओ ना, क्या हुआ?
इनाया उसके सीने से लगकर बोली- मुझे घर जाना है, मेरे पेट में दर्द हो रहा है।
तभी अंश के फोन पर नोटिफिकेशन आने की आवाज आती है और वो नोटिफिकेशन देखने के बाद वो बोला- इनु, ठीक है, हम घर चलते हैं। पहले प्रोजेक्ट फ़ाइल करें।
इनाया अपने बैग से प्रोजेक्ट फाइल निकालकर एकांश की तरफ कर देती है।
एकांश अपनी और इनाया की फ़ाइल सामने शिक्षक मंच पर रख कर उसको आज सुबह से अब तक की सारी बात बता दी और ये सुनकर उनके शिक्षक ने भी आश्वस्त किया कि इसीलिये जाने की अनुमति दी गयी है।
Ab aage,
एकांश अपनी सीट के पास गया और जैसे ही इनाया को लेकर क्लास बाहर जाने को हुई क्लास का एक लड़का पीछे से बोला- क्या बात है! इस लड़की को देखो तो शादी के बाद भी अपने आशिक को नहीं छोड़ा। ताली बजाओ दोस्तों.
इनाया एक नजर एकांश को देखकर बोली- आज तुम कुछ नहीं बोलोगे और नहीं कुछ करोगे।
प्रिशा- इनाया, तुम क्या बोल रही हो?
इनाया मुस्कुरायी और बोली- पूरी बात तो सुनलो, मैं कह रही थी के आज जो करूंगी मैं करूंगी।
एकांश- जैसी आपकी इच्छा, लेकिन ध्यान से, आपकी तबीयत ठीक नहीं है।
इनाया उस लड़के के सामने आकर बोली- हां, तो मिस्टर रोहन अग्रवाल आप मेरे किरदार पर उंगली उठा रहे हैं। तो एक बार अपने अंदर भी झाँक देखलो शायद अपनी कमिया नज़र आ जाये।
रोहन- वाह! अब तो आपकी जुबान भी चलने लगी।
प्रथम- रोहन, ज़ुबान संभालकर।
श्रावणी, एकांश की क्लास में आती है और बोली- भाई, चलो।
एकांश- चलते हैं, वाणी लेकिन पहले आज वो देखो जो इनु कर रही है और उसका चेहरा सामने की तरफ कर देता है।
इनाया- बोलने दीजिए, प्रथम भाई, मुझे भी सुनना है ये मेरे बारे में क्या सोचता है।
रोहन- ठीक है सुनो. तुम एक नंबर की चरित्रहीन लड़की हो, घटिया, बदचलन औरत हो।
इनाया ने इतना सुना ही था और एक थप्पड़ की आवाज पूरे क्लासरूम में गूंज गई और वो बोली- Just Shut Up। आप जानते हैं कि ये सारी बातें मैं तुम्हारे लिए भी बोल सकती हूं, लेकिन फिर तुममें और मुझमें फरक ही क्या रह जाएगा, आखिर भाई हो तुम मेरे। खून का रिश्ता है हमारा और जिसको तुम मेरा आशिक बोल रहे हो ना वह मेरा पति है। सुना पति है वो मेरे तो अपनी आवाज नीचे रखना और तुम मेरे भाई हो और ये थप्पड़ उस हक से मारा है और सुनलो जब अकेले पढ़ जाओगे और कोई तुम्हारा साथ नहीं देगा तब रोते हुए मेरे पास ही आओगे तो एक बात याद रखना मेरी तुम मुझे बोलोगे ठीक है लेकिन मां- बाबा की परवरिश पर उंगली मत उठाना और जैसे ही जाने को होती है तो बेहोश हो गई और रोहन ने उसको संभाल लिया।
एकांश- दोनों के पास आता है और सब वहां से हॉस्पिटल जाते हैं और एकांश बहुत परेशान थे।
हॉस्पिटल में,
हॉस्पिटल वार्ड में डॉक्टर इनाया का इलाज कर रहे थे बहार हॉस्पिटल वेटिंग एरिया में एकांश परेशान बैठा था।
रोहन किसी सोच में गुम था उसको देख प्रथम बोला- सब तुम्हारी गलती है, रोहन।
एकांश- रोहन से कुछ मत बोलो, उसकी गलती नहीं है।
रोहन- लेकिन जीजू, मुझे इतनी गलत बातें दी से नहीं बोलनी चाहिए थी।
एकांश- रोहन, तुम्हारी दी, बहुत मजबूत है और ये बात मुझे एहसास कराना जरूरी है, आज तुमने बोला, कल कोई और बोलेगा और पारस कोई और तो क्या करेगी वो। मैं इनु से बहुत प्यार करता हूं, केयर करता हूं लेकिन अगर किसी दिन मैं, तुम, भाई या प्रथम नहीं उपलब्ध हुए तो और अगर कभी ऐसा कुछ हो जाएगा जो भगवान ना करे कभी हो, तो मैं या तुम क्या कर लेंगे। लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये बेहोश कैसे हो गई।
श्रावणी- ये सब आपका प्लान था, अंश भाई।
एकांश- हां, लेकिन मुझे पता नहीं था कि ये सब इतना कॉम्प्लेक्स हो जाएगा।
तभी डॉक्टर वार्ड से बाहर आते हैं और बोले- मिस्टर खुराना, आइए केबिन में बात करते हैं।
रोहन- कोई गंभीर बात है डॉक्टर?
डॉक्टर- केबिन में बात करते हैं।
सब डॉक्टर केबिन के अंदर जाते हैं और बैठते हैं।
एकांश- बोलिए ना डॉक्टर, क्या बात है? कुछ गंभीर है?
डॉक्टर बोला- मिस्टर खुराना, आपकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है. उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, शायद किसी आघात के कारण और वो बहुत संवेदनशील हैं। उनहे खुश रखें और सुनिश्चित करें कि कोई भी तनाव ना ले और...
रोहन- और क्या? दी ठीक है ना?
डॉक्टर- और उनका ध्यान रखिये। ये कुछ दवाएं हैं, मैं लिख रहा हूं आप ये केमिस्ट से लीजिए और मैं डिस्चार्ज पेपर तैयार करवा देता हूं।
एकांश वो प्रिस्क्रिप्शन लेकर केबिन से बाहर आकर सामने बेंच पर बैठ गया और रोहन को देखने लगा।
रोहन- जीजू, वो एक्सीडेंट के समय माँ-पापा की लड़ाई दी को लेकर हो रही थी तनाव में पापा ने ड्रिंक की थी और उसके बाद में जो हुआ वो आप जानते हो। दी किसी को कभी कुछ शेयर नहीं करती। जीजू, वो आपके साथ शेयर करती है ना, सब कुछ मेरा दी के इलावा कोई नहीं है और रोते हुए बोला प्लीज उन्हें कुछ मत होने देना।
एकांश, रोहन के पास जाकर उसका सर सहलाकर बोला- तुम्हारी दी, मेरी भी जान है। मैं वादा करता हूं कि मैं उसको कुछ नहीं होने दूंगा। लेकिन पहले तुम उसको कान पकड़ कर सॉरी बोलोगे।
रोहन अपना आंसू साफ करता है और हां में सर हिला देता है।
सब इनाया के वार्ड में जाते हैं सिवये प्रथम के, तो उसका उतरा हुआ चेहरा देख एकांश उसके पास जाकर बैठता है और हाथ पकड़ कर बोला- इनु, प्लीज उठ जाओ। मैं वादा करता हूं मैं ऐसा दोबारा कभी नहीं करूंगा, प्लीज आई एम सॉरी।
रोहन भी दूसरी तरफ से आकर इनाया का हाथ पकड़ कर बोला- आई एम सॉरी दी। मैं तो आपका Immature बेवकूफ भाई हूं, प्लीज माफ कर दो। आज के बाद, कभी ऊंची आवाज में आपसे बात नहीं करूंगा, प्लीज आंखें खोलो ना।
इनाया अपने दोनों हाथ की पकड़ एकांश और रोहन के एक-एक हाथ पर टाइट कर लेती है जो उन दोनों ने पकड़ कर रखा था और धीरे से अपनी खोलती है और दोनों की आंखों में आंसू और बैचैनी देख धीरे से बोली- It's Okay, प्लीज मुझे कभी अकेले मत छोड़ कर जाना।
एकांश उसको गले लगकर बोला- कभी नहीं, आई लव यू। मैं आपसे बहुत प्यार है।
रोहन कान पकड़ कर बोला- आई एम सो सो सॉरी, दी।
एकांश- रहने दे मेरी गलती है।
इनाया- सॉरी मत बोलो प्लीज।
एकांश- ठीक है, जैसा आप कहें। मुझे एक बात बताओगी?
इनाया सिर नीचे करके बोली- पूछो ना?
एकांश- तुम्हें चक्कर क्यों आये?
इनाया- एकांश, मुझे नहीं पता, जब मैंने तुम्हारे पास आने के लिए टर्न लिया तो अचानक से आंखों के सामने अंधेरा छा गया।
डॉक्टर वार्ड में आएं और बोले- मिस्टर खुराना, प्लीज एक मिनट बाहर आइए ना।
एकांश- इनु, मैं अभी आया तब तक अपने भाई की बातें सुनो।
इनाया- रोहन, मुझे भूख लगी है।
एकांश वार्ड के बाहर आता है तो डॉक्टर बोले- आई एम सॉरी, मिस्टर खुराना वो रिपोर्ट गलत थी, असल में वही फर्स्ट नेम कि वजह से कन्फ्यूजन हो गई।
एकांश- मतलब इनाया ठीक है. डॉक्टर- जी, वो बिल्कुल ठीक है, सिर्फ कमजोरी की वजह से चक्कर आ गया है।
एकांश- बहुत बहुत धन्यवाद डॉक्टर साहब।
वार्ड के अंदर आ जाता है।
रोहन- जीजू, दी को भूख लगी है।
एकांश- हां, तो लंच के लिए चलते हैं और वे भी कमजोरी की वजह से चक्कर आ गए हैं तो अब से मैम आपका डाइट प्लान मम्मा देखेंगी।
Ab aage,
इनाया- नहीं न एकांश। मुझे तुम्हारी माँ से बहुत दर लगता है।
इकांश- अच्छा बाद में सोचेंगे या देखेंगे भी डिस्चार्ज पेपर्स रेडी है चलो, पेहले लंच करें है।
रोहन- जीजू,आप सब जाओ, मुझे.. और चुप हो जाए है।
प्रथम- मुझे... आगे बोलेगा।
एकांश- ज्यादा कुछ नहीं, हमारी जो जूनियर है मिस पल्लवी राणावत वो क्रश है हमारे साले साहब की या मुझे कहना चाहिए गर्लफ्रेंड है।
रोहन- जीजू, गर्लफ्रेंड है वो मेरी और मैं आप सबको शाम को जॉइन करूंगा।
इनाया अपने गाल पर हाथ रख कर दोनों की बातें सुन रही थी और बोली- कब मिल रहे हो, भाभी से।
रोहन- शाम को, ठीक है, अभी मैं जाऊ, प्लीज..
एकांश- अच्छा जाओ लेकिन शाम को टाइम से मूनलाइट रेस्टोरेंट पहुंच जाना।
रोहन- पक्का जीजू, बाय और चला जाता है। एकांश- दोस्तों, डबल डेट पर चले।
प्रथम- नहीं।
प्रिशा- किसका कॉल था,बेबी?
प्रथम- माँ का कॉल था। पूछ रही थी के घर कब आओगे। तुम्हें बहुत याद कर रही है।
इनाया- तो आप दोनों घर जा रहे हो भाई?
प्रथम उसके पास जाकर उसका सर सहलाकर बोला- हम्म, माँ की तबीयत ठीक नहीं है तो जाना पड़ेगा।
प्रिशा- पार्थ, माँ की तबीयत ठीक नहीं है।
प्रथम- नहीं ईशा कॉल जो बताया वहीं पूछने के लिए आया था लेकिन उनका ब्लड प्रेशर सुबह हाई तो घर चलता है और बाय बोलकर घर के निकल जाते हैं।
इनाया- एकांश, भूख लगी है।
एकांश- बेबी लव, आपने सुबह नाश्ता किया था मैंने अपने हाथों से खिलाया था उसके बाद हम मेहरोत्रा मेंशन गए फिर कॉलेज आए तो तब कमजोरी या थकान महसूस नहीं हुई।
इनाया- नहीं, पर क्यों पूछ रहे हो?
एकांश- क्योंकि अचानक चक्कर आना और बेहोश होना।
इनाया- एकांश, चलो ना मुझे यहां नहीं रहना।
एकांश- हाँ, चलो और हॉस्पिटल से दोनों रोज़वुड रेस्टोरेंट जाते हैं लंच करते हैं और जब बाहर आते हैं और अंश ने इनाया का हाथ पकड़ रखा था।
इनाया- एकांश, मुझे आइसक्रीम खानी है बोलकर चुप हो जाती है।
एकांश एक नजर इनाया को देखता है और फिर उसकी नजरों का पिछला करता है और उसकी तरफ देखकर बोला- नहीं घर चलो।
इनाया उसको देखती है और उसके साथ चलने लगती है लेकिन कुछ बोलती नहीं।
अंश उसके लिए कार का दरवाज़ा खोल्ता है और अंदर बैठाकर बोला- मैं 2 मिनट में आता हूं, कहीं जाना मत, ठीक है।
इनाया हां में सर हिलाती और अंश दरवाजा बंद करता है और सड़क पार करता है जाकर आइसक्रीम पार्लर में जाता है और चॉकलेट आइसक्रीम का टब लेकर वापस कार में आता है और ड्राइविंग सीट पर बैठ कर उसकी तरफ आइसक्रीम कर देता है। अंश जब इनाया को देखता है तो वो अपने दोनों हाथों को पेट पर लपेट कर बैठी थी।
एकांश उसका सर सहलाकर बोला- बेबी लव, मेरी तरफ देखो।
इनाया उसकी तरफ देखती है और धीरे से बोली- एकांश, बहुत दर्द हो रहा है।
एकांश- बेबी लव, तुम आइसक्रीम लो। तुम्हारा मन था ना, अब ये पूरी खालो।
इनु बच्चों की तरह खुशी से बोली- सच्ची, पूरी खालू।
एकांश मुस्कुराकर हां में सर हिलाकर बोला- पूरी खालो और कार ड्राइव करता है और कार मेहरोत्रा हवेली के बाहर रुकती है।
दोनों अंदर जाते हैं और इनाया आइसक्रीम खा रही थी और उसको बच्चों की तरह खाते देखकर अंश मुस्कुरा रहा था।
इनाया आइसक्रीम खाने के बाद खुदको देखती है और खुद से बोली- ये मैं हर बार आइसक्रीम खाते हुए छोटी बच्ची क्यों बन जाती हूं।
अंश एक नैपकिन लेकर उसके हाथ और मुंह साफ करके बोला- तुम्हें पता है, तुम मुझे ऐसे ही पसंद हो और मुझे कोई समस्या नहीं है, माँ-पिताजी, भाई-भाभी को कोई समस्या नहीं है वास्तव में यहाँ बैठे किसी को भी कोई समस्या नहीं है इसलिए तुम्हें खुद को बदलने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं तुमसे वैसे ही प्यार करता हूं जैसे तुम हो और मां कहती है कि अगर किसी के लिए खुद को बदलना पड़े तो वो प्यार नहीं होता इसलिए मैं पूरी जिंदगी तुम्हारे मुंह और हाथों से आइसक्रीम साफ कर सकता हूं।
इनाया- एक काम करना रोहन की शादी तुम ही करवाओ।
वेद- इनाया, रोहन कौन है?
इनाया- वो वेद भैया, र..र.. रोहन मेरा जुड़वा भाई है।
वेद- तो तुमने हम सबको उससे मिलवाया क्यों नहीं।
इनाया कुछ बोलती उसने पहले ही अंश बोला- भाई, शाम को डिनर पर आने के लिए बोला है और उसकी गर्लफ्रेंड और हमारे दोस्त प्रथम और प्रिशा भी आ रहे हैं।
शिव- ठीक है और इक्षु को देखता है जो टैबलेट पर अपने नोट्स पढ़ रही थी।
वेद- शिव, इक्षु कर क्या रही है टैबलेट में इतनी देर से।
शिव- पढाई कर रही है, समय बर्बाद करने से बेहतर है और पढाई का भी नुक्सान नहीं होगा।
श्रावणी- शिव भाई आपने कहा था ना भाभी को नोट्स दे देने के लिए लेकिन उन्हें बोला के वो नोट्स खुद बनायेंगे।
इक्षु- श्रु, मैं यहीं बैठी हूं। शिव- इक्षु, तुमने मना क्यों किया?
इक्षु- क्योंकि मैं अपने नोट्स खुद बनाती हूं और वे भी मुझे ना मुझे अपने नोट्स शेयर करना पसंद है और ना तो मैं किसी को अपने नोट्स देती हूं इसलिए मैं किसी को अपने नोट्स से बनाती हूं नोट्स लेती भी नहीं हूं।
शिव उसके गाल पर किस करता है और बोला- बहुत अच्छा, मुझपर जो गई हो।
इक्षु- वो याद है, मेरे जाने से पहले तुमने मुझे जो ब्लू डायमंड और व्हाइट स्टोन वाला ब्रेसलेट और पेंडेंट दिया था वो मैंने अभी भी संभाल कर रखा है।
शिव- मेरी इक्षु सर्वोत्तम है। मैं आपको बहुत बहुत प्यार करता हूँ।
इक्षु- शिव, मुझे कुछ बताना है ।
सब उसकी बात सुनकर उसको देखने लगते हैं।
शिव ये सुनकर बोला- आपको क्या बताना है, इक्षु? बताओ?
इक्षु- शिव, मुझे मम्मा की बहुत याद आती है।
रुद्र- ओह्ह, फिर तो आप पीहू से नहीं मिलोगी, है ना?
इक्षु- मुझे किसी से भी नहीं मिलना, आपसे भी नहीं भाई और शिव को गले लगा लेती है और कुछ देर में ही वो सो चुकी थी।
शिव को जब ये महसूस होता है तो वो मुस्कुराया और बोला- सब लोग आराम करें, इक्षु सो गई।
I love you all so much for your support for me and my story.
Ab aage,
वेद- रुद्र, पीहू कौन है?
रुद्र- पीहू मेरी 3 साल की छोटी बहन है।
शिव- हां, बहुत क्यूट और बहुत प्यारी है। अगस्त्य- रुद्र चाचू, वो मुझसे छोटी है।
रूद्र- हाँ, वो आपसे दो साल छोटी है।
वेद- तुम दोनों में 17 साल का अंतर है लेकिन तुम्हें पता है तुम्हारा ये रवैया अच्छा लगा क्योंकि तुम्हारी उम्र के हिसाब से हम सब तुम्हारे परिवार हैं और दोस्त हैं लेकिन अगर कोई बाहरी व्यक्ति ये सुनले तो वो तुम्हारी माँ की बेइज्जती, उन्हें अपमानित करेगा और तुम्हारी जगह कोई और होता तो खुद अपनी माँ का अपमान करता।
रुद्र- शायद तुम सही कह रहे हो और तुम्हें पता है मेरे पिता की मौत मेरे बचपन में ही हो गई थी तो मैं हमेंशा अपनी मां के साथ ही रहा हूं और मेरी मां इशु की मासी है और इशिता मासी ने आर्थिक रूप से मेरे लिए मां को बहुत सपोर्ट किया है। तो मेरे लिए मेरी माँ और मेरी मासी बहुत मजबूत महिला फिगर है और माँ को बेटी चाहिए थी तो उन्हें 4 साल पहले जिस अनाथालय को माँ फंडिंग करती है वहाँ पर बहुत प्यारी और छोटी बच्ची आई थी। कोई उसको अनाथालय से बाहर छोड़ गया था। माँ ने बताया था कि वो दिखेगी कुछ ही घंटे पहले इस दुनिया में आएगी। पता है मैं उससे बहुत प्यार करता हूं जितना मैं इक्षु से करता हूं शायद उतना। वे माँ को उसे देखकर मासी की याद आ गई थी इसलिए उसके गोद लेने के कागजात पर नाम इशिता है इशिता वर्मा और उपनाम शिव ने रखा था ये उपनाम रखने में बहुत अच्छा है।
शिव- वेसे मिशिता आंटी कब आ रही हैं।
रुद्र- माँ एयरपोर्ट से घर ही आ रही है और साथ में पीहू भी। मुझे उससे बात करनी थी लेकिन वो सो रही थी।
शिव- आ जायेंगे थोड़ी देर में, चिंता मत करो।
श्रावणी सबसे पूछती- किसिको कॉफी पीनी है?
रुद्र- तुम रहने दो मैं बनाता हूँ।
श्रावणी- क्यों, मेरे हाथों में मेहंदी लगी हुई नजर आ रही है या मैं बीमार हूं?
कृषा जी- ये कैसी बात कर रही हो, तुम रुद्र से?
रूद्र- ऐसा कुछ नहीं है, वाणी। यह सिर्फ तुमने पूछा तो मैंने सिर्फ मैंने अपनी बात कह दी।
श्रावणी- मैं क्या कॉफ़ी अच्छी नहीं बनाती जो आप सब हर बार ऐसा करते हो और वो रोने लगती है।
एकांश- एक काम करता है, कॉफ़ी ना मैं बनाता हूँ। वाणी, मेरी सहायता करो क्योंकि मुझे कुछ प्लान करना है। प्लीज मदद करोगी ना।
रुद्र, श्रावणी के आंसू साफ करता है और बोला- आई एम सॉरी, वाणी और धीरे से कान में बोलता है- आई लव यू, मेरी जान।
ये सुनकर श्रावणी के गाल गुलाबी हो जाते हैं।
श्रावणी- अंश भाई, मैं आपकी मदद करूंगी।
एकांश- ठीक है, तो चलो किचन में।
श्रावणी, रुद्र को देखकर बोली- ठीक है।
दोनों किचन में जाते हैं और 20 मिनट में सबके लिए कॉफ़ी और कुकीज़ बना कर लाते हैं।
इनाया कुकीज़ देखकर मुस्कुरा देती है और बोली- ये कुकीज़ आपने बनाई है, एकांश।
इनाया की बात सुनकर सब एकांश को देखने लगते हैं तो अंश बोला- Taste करलो पता लग जाएगा।
इनाया- एकांश, आप जानते हो ना मैं चाय पीती हूं या फिर कॉफी ही पीती हूं।
एकांश- हां, मुझे पता है कि तुम सिर्फ कुकीज़ खाओ।
इनाया उसको बच्चों की तरह देख रही थी और बोली- ठीक है।
एकांश- ठीक है, मैं तो मज़ाक कर रहा था।
इनाया- ठीक है।
एकांश- ये लो तुम्हारी हॉट चॉकलेट।
इनाया- Thank you।
शारदा जी- इनाया बेटा आप एकांश की सारी बातें मानती हो?
इनाया उनकी आवाज सुनकर ही डर गई और हकलाती आवाज में बोली- जी, हम सारी बातें मानते हैं।
तभी दरवाजे से एक प्यारी सी आवाज आती है- भैय्यू।
रुद्र ये आवाज सुनकर मुस्कुरा देता है- प्रिंसेस मैं यहां हूं।
पीहू भागकर रुद्र के पास जाती है और रुद्र उसको अपनी गोद में बैठाकर बोला- मैंने तुम्हें बहुत याद किया।
पीहू- मैंने भी, लेकिन मम्मा ने मुझसे ज्यादा आपको मिस किया।
रुद्र अपनी मम्मा को देखकर बोला- मम्मा, आप तो मुझे दिल्ली जाकर भूल ही गई।
मिशिता जी अपने दोनों हाथ कमर पर रखकर बोलीं- अच्छा बच्चे, मैं भूल गई, लेकिन सिर्फ मैसेज पर मैं बिजी हूं और तुम्हारे फोन से शिव कर रहा होगा।
शिव- मैंने कुछ नहीं किया लेकिन हां आपके जाने के बाद ये किसी काम से अजमेर गया था।
मिशिता जी- काम हो गया, क्या?
रुद्र मुस्कुरा कर बोला- अजमेर में जो पापा का होटल है वो भी आपके नाम पर ट्रांसफर किया है।
मिशिता जी- शिव को देखकर कुछ बोलती उसे पहले ही उनकी नज़र उसकी गोद में सो रही इक्षु पर जाती है और वो मुस्कुराकर बोली- ये प्यारी सी बच्ची कौन है? काफ़ी जानी पहचान लगती है।
वेद की नज़र अगस्त्य पर गई तो वो एक तक पीहू को ही देख रहा था। वेद उसके कान में धीरे से बोला- आपको पीहू पसंद है, क्या?
अगस्त्य उसको प्यार से देखते हुए ही बोला- बहुत ज्यादा, पापा।
वेद मुस्कुराकर बोला- अभी आप बहुत छोटे हो पहले दोस्ती करो।
अगस्त्य के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई।
रुद्र- माँ, ये जानी पहचान इसीलिये है क्योंकि ये शिव की जान है और इशिता मासी और अक्षत मोसा जी की इकलोती निशानी ये इक्षिता अक्षत सिंह राजपूत है।
मिशिता जी- ये मेरी ईशु की बेटी है लेकिन वो एक्सीडेंट।
शिव- उस एक्सीडेंट में सिर्फ इशिता मॉम की डेथ हुई थी। अक्षत अंकल बिलकुल ठीक है और इक्षु को सेफ रखने के लिए खुद उससे और हम सबसे दूर कर लिया लेकिन डेस्टिनी, लेकिन मुझे ये नहीं पता के वो कहां है।
मिशिता जी- जीजू, मुझे पता है, कहाँ होंगे लेकिन अगर बात इक्षु की सेफ्टी की है तो हम ऐसा एक भी कदम नहीं चलेंगे जिस बच्ची की जान खतरे में आ जाएं।
रुद्र- अब वो सेफ है, इसिलिये हम मौसा जी को ढूंढ सकते है क्योंकि इक्षु की शादी शिव से हो गई है और वो भी आज।
शिव- आप गुस्सा तो नहीं हो ना।
मिशिता जी-इशु को इक्षु के लिए तुम पेहले ही पसन्द और मुझे लेगता है इस्को तुमसे बेहतर कोई भी नहीं संभल सकता। Congratulations..