कृष , जिसके लिए इश्क पूरी दुनिया था । जिसे अपनी वाइफ समायरा से बेहद प्यार था । उसने अपनी जिंदगी का हर सपना , उसके साथ ही देखा था लेकिन समायरा एक मगरुर , घमंडी, खुबसूरत और अमीर लड़की ..... जिसने कृष से छूटकारा पाने के लिए एक गंदा खेल खेला .... और अंत... कृष , जिसके लिए इश्क पूरी दुनिया था । जिसे अपनी वाइफ समायरा से बेहद प्यार था । उसने अपनी जिंदगी का हर सपना , उसके साथ ही देखा था लेकिन समायरा एक मगरुर , घमंडी, खुबसूरत और अमीर लड़की ..... जिसने कृष से छूटकारा पाने के लिए एक गंदा खेल खेला .... और अंत में उससे प्यार की उम्मीद करते करते वो टूट ही गया और उसके पास आखिर रास्ता बचा था और वो थी मौत - क्योंकि मोहब्बत में मिली बेवफाई का दर्द , उसकी सहने की सीमा से बाहर था लेकिन जब उसने मौत को गले लगाना चाहा तो डेस्टिनी ने एक बार फिर उसके साथ गेम खेला - जन्नत साहनी एक खुबसूरत और मुंहफट लड़की ने उसकी जान बचा ली । समायरा , जिसे कृष ने खुद चुना था और जन्नत जिसे उसके लिए तकदीर ने चुना था । कृष को अब इश्क से नफ़रत हैं और जन्नत को कभी इश्क पर भरोसा ही नहीं था । जन्नत शादी के लिए एक लड़का ढूंढ़ रही थी और तकदीर ने उसे कृष से मिलाया तो क्या वह जन्नत के लिए भी एक आॅप्शन बन जायेगा या फिर डेस्टिनी एक बार फिर गेम खेलेगी ? जन्नत ने कृष को क्या आॅफर दिया होगा जो वह शादी के लिए तैयार हो गया ? कहते हैं कि - जिनका मिलना तकदीर में होता हैं वो हर बंधन , मर्यादा , नियम सभी को तोड़कर मिल ही जाते हैं तो किसकी तकदीर में हैं इश्क और किसकी तकदीर में नफ़रत जानने के लिए पढ़िये - Love 💕 Fated
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मोहब्बत को तकदीर ने मिलाया होता तो शायद आज वह भी खुश होता लेकिन उसे तो उसकी तकदीर ने ही छल लिया । जिसके प्यार के लिए वह अपनों से लड़ गया आखिर में उस प्यार ने ठोकर मारकर , उसे अपने चौखट के पार कर दिया और वह भी चला आया हमेशा हमेशा के लिए ..... कभी भी उस गली में मुड़कर ना देखने के लिए .... जहां उसके दिल को तोड़कर, टुकड़ों में बिखेरा गया हो ...!!
आज , उसने सबकुछ छोड़कर अपने आपको उस दलदल से बाहर निकालने की कोशिश की थी और .....!!
इस वक्त एक खुबसूरत सी लड़की, उसके सामने बैठी थी चेहरे पर मुस्कुराहट लिये , लाल रंग के सूट में उसकी खूबसूरती और निखर कर आयी थी और उसकी मांग पर चमकता सिंदूर इस बात का गवाह था कि अब , उसपर उसका हक था लेकिन .... हकीकत अलग ही थी ।
उसका खुद का नाम कृष था , केवल और केवल कृष ... जिसका खुदका कोई सरनेम नहीं था । हकीकत इससे कुछ अलग थी लेकिन उसने सबकुछ वक्त पर छोड़ दिया था ।
कल रात समायरा , जो उसकी पत्नी थी उसके धोखे में टूटकर , वह अपने आपको मौत के गले लगाने आया था लेकिन उसकी टकराहट , इस खुबसूरत हुस्न की मल्लिका , जन्नत से हो गयी और उसने उसको बचा लिया और यह उसी का रिजल्ट था कि वह आज सुबह ही उससे शादी कर चुका था ।
वह जन्नत के एकटक देखने के कारण कुछ हिचकिचाहट महसूस कर रहा था । इसलिए उसने अपने पेंट को कसकर मुठ्ठी में जकड़ लिया , उसकी यह तरकीब जन्नत से भी छूपी नहीं थी और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी ।
जन्नत ने उसकी तरफ एक नजर देखा और बोली - तुमने कल रात मुझे सबकुछ नहीं बताया । तुमने , मुझे बताया कि समायरा ने , तुम्हें धोखा दिया और उस धोखे में टूटकर तुम अपनी जान देने चले थे लेकिन बात कुछ और भी हो सकती हैं । आई मीन ..... क्या तुम मुझे अपनी कहानी पूरी तरह सच्चाई के साथ बताओगे।
उसकी बात पर कृष ने उसे एकटक देखा । कृष की जिंदगी में अबतक बहुत से लोग आये थे और चले भी गये लेकिन हर किसी ने उसकी तरफ अपने कदम हमेशा से अपने स्वार्थ के लिए बढ़ाए थे । कभी भी उसने किसी के चेहरे पर अपने लिए फिक्र या फिर चिंता नहीं देखी लेकिन आज जन्नत की आवाज में अपने लिए चिंता देख , उसकी आंखों में से पानी छलक आया ।
जन्नत , उसकी आंखों में आंसू देख - ऐ ...! मैंने कुछ ग़लत पूछ लिया ।
जिस पर कृष ना में गर्दन हिलाने लगा । जन्नत के चेहरे पर छायी परेशानी , उससे बर्दाश्त नहीं हुई। वह - नहीं , ऐसी बात नहीं हैं । आंसू आने की वजह कुछ और ही थी ...खैर मेरी जिंदगी में कुछ ऐसा नहीं , जो मैं तुमसे छूपाउ ।
इतना कहकर वह छः महिने पहले की यादों में खो गया .................
कृष ने हमेशा से अमीर बनने के सपने देखे थे और इसके लिए उसने एमबीए की पढ़ाई पूरी की .... और बहुत सी कंपनीयों में इंटरव्यू दिया और आखिरकार उसकी जाॅब लग ही गयी । समायरा के दादाजी , नवल साहू ने उसे अपना असीस्टेंट बना लिया , उन्हें पूरा आॅफिस बाबासाहेब ही कहता था । कुछ वक्त में ही , वह उनके बहुत करीब हो गया था और वह अपने मन की हर व्यथा उससे कहने लगे थे । दिल के साफ और नेकदिल शख्स थे वो और उनकी इकलौती पोती थी समायरा साहू .... मां बाप , उसके बचपन में ही गुजर गये और बाबासाहेब ने उसपर कभी भी रोका टोकी नहीं की और नतीजन वो बिगड़ती चली गयी । बाबा साहेब हमेशा ही उसके लिए चिंतित रहते थे और इसलिए उसको सुधारने के लिए उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जो उसे हमेशा के लिए बर्बाद कर गया ।
उन्होंने समायरा के सामने शर्त रखी थी कि अगर उसे बिजनेस में हिस्सा चाहिए तो उनकी पसंद के लड़के से शादी करनी पड़ेगी और इसके लिए उन्होंने कृष को चुना । समायरा के पास आॅप्शन नहीं था और उसके पास तो विकल्प ही नहीं था क्योंकि उन्होंने वादा किया था कि वो उसके आश्रम को बचा लेंगे। वो आश्रम , उसके लिए बहुत जरुरी था जहां उसने अपना बचपन गुजारा और उसके जैसे और भी बच्चे गुजार रहे थे ।
उसे कभी भी समायरा से प्यार नहीं हुआ था लेकिन साथ रहते हुए किसी से भी लगाव हो सकता था और उसे भी हो गया था । जिसके पास कभी कोई अपना कहने के लिए नहीं रहा हो ..... अगर उस इंसान को कोई रिश्ता मिल जाये तो अपनी लाइफ के हर खालीपन के भरने की उम्मीद वह उसी शख्स से करने लगता हैं । वही उम्मीद कृष ने भी करी लेकिन समायरा ने उसकी यह उम्मीद तोड़कर बिखेर दी और आखिर में वह खुद भी टूटकर बिखर गया । उसने अपनी तरफ से समायरा का हर तरह से ख्याल रखा लेकिन वह समायरा की नजरों में बस एक लालची किस्म का इंसान था जिसे सिर्फ समायरा की दौलत चाहिए थी । दौलत इंसान को अंधा कर देती हैं लेकिन समायरा ने दौलत के नशे में हर हद पार कर दी । उसे अपना पैसा और प्राॅप्रटी चाहिए थी जो बाबासाहेब ने कृष नाम कर दी थी । बाबासाहेब उसकी हरकतों को देखकर भी नजरंदाज कर देते ...वो हर पल मेरे साथ बद्तमीजी करती । अपने दोस्तों के सामने उसका मजाक उड़ाती या फिर मुझे नौकरों की तरह ट्रीट करती थी । मुझे लगा कि वक्त के साथ वह सुधर जायेगी लेकिन हमेशा कि तरह ही इस बाय