"एरर 404: इश्क़ नॉट फाउंड" डेटा और दिल के बीच की एक मज़ेदार और रोमांटिक जंग है। कहानी की शुरुआत महत्वाकांक्षी मार्केटिंग हेड अनन्या वर्मा से होती है, जिसका मानना है कि प्यार एक एल्गोरिदम है। उसकी दुनिया तब हिल जाती है जब उसे अपने नए डेटिंग ऐप "Zap" के... "एरर 404: इश्क़ नॉट फाउंड" डेटा और दिल के बीच की एक मज़ेदार और रोमांटिक जंग है। कहानी की शुरुआत महत्वाकांक्षी मार्केटिंग हेड अनन्या वर्मा से होती है, जिसका मानना है कि प्यार एक एल्गोरिदम है। उसकी दुनिया तब हिल जाती है जब उसे अपने नए डेटिंग ऐप "Zap" के लिए पुराने ख़्यालों वाले, शायराना डेवलपर आरव शर्मा को हायर करना पड़ता है। आरव, जो हाथ से लिखी चिट्ठियों और ग़ालिब की शायरी में विश्वास रखता है, अनन्या के "सिर्फ डेटा" वाले कॉन्सेप्ट को चुनौती देता है। टकराव तब बढ़ता है जब आरव चुपके से ऐप में एक "रूह का कनेक्शन" फ़ीचर डाल देता है, जो लोगों को उनकी भावनाओं के आधार पर मिलाता है। इस गड़बड़ी से नाराज़ अनन्या और आरव के बीच एक शर्त लगती है: कौन अपने तरीक़े से पहले सच्चा प्यार ढूंढेगा? इस शर्त के साथ शुरू होती है कॉमेडी ऑफ़ एरर्स से भरी डेट्स की एक श्रृंखला, जहाँ अनन्या के परफेक्ट डेटा मैच बोरिंग निकलते हैं और आरव के शायराना मैच अजीब। इस बीच, ऐप का "सिस्टम बग" बार-बार उन दोनों को एक-दूसरे के लिए मैच दिखाता है, जिसे वे नज़रअंदाज़ करते रहते हैं। देर रात ऑफिस में काम करते हुए, पिज़्ज़ा और कॉफ़ी पर, वे एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं। अनन्या को आरव की सादगी में सच्चाई दिखती है, और आरव को अनन्या के कठोर बाहरी रूप के पीछे एक संवेदनशील दिल। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब अनन्या का दुश्मन, विक्रम, आरव के सीक्रेट फ़ीचर का पर्दाफ़ाश कर देता है, जिससे अनन्या की नौकरी ख़तरे में पड़ जाती है। क्लाइमेक्स में, अनन्या आरव पर दोष डालने के बजाय उसके फ़ीचर को ऐप की सबसे बड़ी ताकत बताकर बोर्ड को प्रभावित कर लेती है। जीत के बाद, वे आख़िरकार अपने प्यार का इज़हार करते हैं। उनकी कहानी एक सफल बिज़नेस पार्टनरशिप और एक गहरी प्रेम कहानी में बदल जाती है। अंत में, वे शादी कर लेते हैं, यह साबित करते हुए कि सबसे अच्छा एल्गोरिदम दिल का होता है और ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत 'एरर' ही कभी-कभी सबसे बड़ा 'फ़ीचर' बन जाता है।
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### **अध्याय 1: दिल vs. डेटा** शीशे की दीवारों वाला वो कॉन्फ्रेंस रूम किसी फ्यूचरिस्टिक फ़िल्म के सेट जैसा लग रहा था। शहर का नज़ारा बाहर धुंधला था, लेकिन अंदर का माहौल एकदम साफ़ और तनाव से भरा हुआ था। कमरे के बीचों-बीच एक लंबी, चमकदार मेज थी, जिसके चारों ओर "ZapConnect" के बड़े-बड़े अधिकारी बैठे थे। सबके चेहरे पर एक जैसी गंभीरता थी, जैसे वे किसी देश की अर्थव्यवस्था पर नहीं, बल्कि उससे भी ज़रूरी किसी चीज़ पर फ़ैसला करने वाले थे। और उस फ़ैसले के केंद्र में थी अनन्या वर्मा। तीखे नैन-नक्श, कंधे तक कटे बाल, और एक महंगी, गहरे नीले रंग की पैंट-सूट में अनन्या आत्मविश्वास की जीती-जागती मूरत लग रही थी। उसके हाथ में एक छोटा सा रिमोट था और उसकी नज़रें सामने बड़ी स्क्रीन पर जमी थीं, जहाँ बड़े-बड़े अक्षरों में एक नारा चमक रहा था - **"No Dil, Only Data! Find Your Perfect Match in 3 Swipes!"** "लेडीज़ एंड जेंटलमैन," अनन्या की आवाज़ में एक ऐसी खनक थी जो किसी को भी ध्यान देने पर मजबूर कर दे। "आज हम सिर्फ़ एक ऐप लॉन्च करने की बात नहीं कर रहे हैं। हम प्यार करने के तरीक़े को हमेशा के लिए बदलने की बात कर रहे हैं। हम लॉन्च कर रहे हैं... 'Zap'!" उसने रिमोट का बटन दबाया और स्क्रीन पर ऐप का लोगो घूमने लगा। "आज की दुनिया में किसी के पास वक़्त नहीं है," अनन्या ने कमरे में चहलक़दमी करते हुए कहा। "किसी के पास महीनों तक कॉफ़ी डेट्स पर जाने, एक-दूसरे की आदतें समझने या ये जानने का टाइम नहीं है कि सामने वाले को पुरानी फ़िल्में पसंद हैं या नई। ये सब बहुत... इनएफिशिएंट है।" उसने 'इनएफिशिएंट' शब्द पर ऐसा ज़ोर दिया जैसे वो दुनिया का सबसे गंदा शब्द हो। "प्यार एक केमेस्ट्री है। और हर केमेस्ट्री के पीछे होता है डेटा! हमारा नया ऐप 'Zap' इसी फ़ॉर्मूले पर काम करता है। हम यूज़र की पसंद, नापसंद, उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी, उनके शॉपिंग पैटर्न... हर एक डेटा पॉइंट को एनालाइज करेंगे और हमारे एडवांस एल्गोरिदम की मदद से उन्हें देंगे... एक परफेक्ट मैच। कोई दिल नहीं, सिर्फ़ डेटा!" कमरे में कुछ लोगों ने प्रभावित होकर सिर हिलाया। अनन्या के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आई। "हमारा टारगेट ऑडियंस है 22 से 35 साल का वो युवा, जो अपने करियर पर फ़ोकस करना चाहता है, लेकिन एक कम्पैटिबल पार्टनर भी चाहता है। हमारा यूज़र रिटेंशन रेट... हमारे की परफॉरमेंस इंडिकेटर्स... सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि हम कितनी तेज़ी से और कितनी सटीकता से मैच देते हैं। Zap में कोई महीनों की बातें नहीं होंगी। तीन स्वाइप, एक चैट, और एक परफेक्ट डेट। सिंपल। एफिशिएंट। प्रॉफिटेबल।" प्रेजेंटेशन ख़त्म होते ही कमरे में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। अनन्या अपनी सीट पर जाकर बैठ गई, उसके चेहरे पर संतुष्टि का भाव था। तभी, कोने में बैठे विक्रम ने, जो कंपनी में उसका सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर था, एक झूठी मुस्कान के साथ कहा, "ब्रिलियंट प्रेजेंटेशन, अनन्या। लेकिन तुमने एक बहुत ज़रूरी डेटा पॉइंट मिस कर दिया।" अनन्या ने अपनी एक आईब्रो उठाते हुए पूछा, "और वो क्या है, विक्रम?" विक्रम ने नाटकीय अंदाज़ में कहा, "बजट। इस क्रांतिकारी ऐप को बनाने के लिए हमारे पास बजट बहुत कम है।" कंपनी के CEO, मिस्टर पुरी, ने अपनी मोटी ऐनक ठीक करते हुए कहा, "विक्रम सही कह रहा है, अनन्या। आईडिया शानदार है, लेकिन हमें इसे बहुत ही किफ़ायती बजट में बनाना होगा। हमें एक ऐसा डेवलपर चाहिए जो सस्ता भी हो और अच्छा भी।" अनanya का चेहरा थोड़ा उतर गया। उसे पता था कि कम बजट का मतलब है कॉम्प्रोमाइज। और कॉम्प्रोमाइज शब्द उसकी डिक्शनरी में नहीं था। *** दो दिन बाद, अनन्या अपने केबिन में बैठी थी और उसके सामने लैपटॉप पर डेवलपर्स की एक लिस्ट खुली थी। उसकी असिस्टेंट, प्रिया, एक कप ब्लैक कॉफ़ी लेकर अंदर आई। प्रिया ने हिचकिचाते हुए कहा, "मैम, मैंने उन सभी वेंडर्स से बात की है जो हमारे बजट में फिट हो सकते हैं। ज़्यादातर तो बड़ी कंपनियाँ हैं, लेकिन एक... एक छोटी सी कंपनी है जो सबसे कम क़ीमत कोट कर रही है।" अनन्या ने बिना नज़रें उठाए कहा, "नाम?" "दिल-Gic," प्रिया ने धीरे से कहा, जैसे उसे ख़ुद ये नाम लेने में शर्म आ रही हो। अनन्या ने अपनी नज़रें लैपटॉप से हटाईं और प्रिया को ऐसे देखा जैसे उसने कोई मज़ाक किया हो। "क्या कहा? दिल-लॉजिक? ये किसी कंपनी का नाम है या किसी टूटे हुए आशिक़ की डायरी का टाइटल?" प्रिया ने घबराकर कहा, "मैम, नाम तो अजीब है, लेकिन उनका काम ठीक बताया जा रहा है। और वो हमारे बजट से भी 20 परसेंट कम में काम करने को तैयार हैं।" अनन्या ने एक लंबी साँस ली। बजट। फिर से वही शब्द। उसने अपनी उँगलियों से माथा सहलाया। उसे अपनी शानदार प्रेजेंटेशन और अपने सपनों का ऐप एक अजीब से नाम वाली कंपनी के हाथों में जाता हुआ दिख रहा था। उसने मन मारकर कहा, "ठीक है। कल सुबह 11 बजे उनके साथ एक मीटिंग फिक्स करो। मैं ख़ुद देखना चाहती हूँ कि ये 'दिल-Gic' वाले क्या चीज़ हैं।" *** अगली सुबह, जब अनन्या और प्रिया गूगल मैप्स के सहारे एक पुरानी, भीड़-भाड़ वाली गली में पहुँचीं, तो अनन्या का दिमाग़ ख़राब हो गया। बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेट बिल्डिंग्स में काम करने की आदी अनन्या के लिए ये जगह किसी सदमे से कम नहीं थी। एक पुरानी सी बिल्डिंग की दूसरी मंज़िल पर एक छोटा सा दरवाज़ा था, जिस पर हाथ से पेंट किया हुआ एक बोर्ड लगा था - **"दिल-Gic - जहाँ लॉजिक दिल से मिलता है।"** अनन्या ने मुँह बनाकर दरवाज़ा खोला। अंदर का नज़ारा बाहर से भी ज़्यादा हैरान करने वाला था। वो कोई कॉर्पोरेट ऑफिस नहीं था। दीवारों पर पुरानी हिंदी फ़िल्मों, 'प्यासा' और 'काग़ज़ के फूल' के पोस्टर लगे थे। एक कोने में किताबों की एक अलमारी थी जिसमें ग़ालिब से लेकर गुलज़ार तक सब मौजूद थे। हवा में अगरबत्ती की हल्की-हल्की ख़ुशबू थी और बैकग्राउंड में किशोर कुमार का कोई पुराना गाना बहुत धीमी आवाज़ में बज रहा था। और उस सबके बीच, एक पुरानी सी लकड़ी की मेज पर, एक लड़का अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर झुका, आँखें बंद किए, गाने को महसूस कर रहा था। उसने एक साधारण सी कॉटन की शर्ट और जींस पहन रखी थी। उसके बिखरे हुए बाल और चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था। अनन्या ने अपना गला साफ़ किया। "अ... मिस्टर आरव शर्मा?" लड़के ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो अभी-अभी किसी और ही दुनिया से लौटा हो। उसने अनन्या को देखा, फिर प्रिया को, और मुस्कुराया। "वेलकम, वेलकम," आरव अपनी कुर्सी से उठते हुए बोला। "आप लोग ही ZapConnect से हैं न? आइए, बैठिए।" अनन्या ने नाराज़गी से चारों ओर देखा और एक कुर्सी पर ऐसे बैठी जैसे वो किसी बम पर बैठ रही हो। "मिस्टर शर्मा, हमारे पास ज़्यादा समय नहीं है। हम सीधे काम की बात पर आते हैं।" आरव ने मुस्कुराकर कहा, "ज़रूर। कहिए।" अनन्या ने अपना लैपटॉप खोला और प्रोफेशनल अंदाज़ में शुरू हो गई। "देखिए, हमारा ऐप 'Zap' एक डेटा-ड्रिवन प्लेटफॉर्म है। हमारा सबसे बड़ा चैलेंज यूज़र रिटेंशन और एंगेजमेंट है। आपके प्रपोज़्ड की परफॉरमेंस इंडिकेटर्स क्या होंगे? आप यूज़र के बिहेवियर को कैसे ट्रैक करेंगे ताकि हम उन्हें 3 स्वाइप के अंदर परफेक्ट मैच दे सकें?" आरव ने उसकी बातें बहुत ध्यान से सुनीं। उसके चेहरे पर कोई तनाव या घबराहट नहीं थी। जब अनन्या ने अपनी बात ख़त्म की, तो आरव कुछ देर चुप रहा। फिर उसने एक गहरी साँस ली और मुस्कुरा कर बोला। "मिस वर्मा," उसने बहुत शांत आवाज़ में कहा। "आप प्यार को एक मैथ प्रॉब्लम की तरह देख रही हैं। जबकि प्यार तो... एक एहसास है। इसे डेटा से नहीं, दिल से समझा जाता है।" अनन्या की आँखें हैरानी से फैल गईं। "व्हाट? आप कहना क्या चाहते हैं?" आरव अपनी कुर्सी पर थोड़ा आगे झुका। "आपकी बात सही है कि लोगों के पास वक़्त नहीं है। लेकिन कनेक्शन बनने में वक़्त नहीं, नीयत लगती है। जब दो लोगों की रूहें जुड़ती हैं, तो उन्हें किसी एल्गोरिदम की ज़रूरत नहीं पड़ती।" अनanya को लगा कि उसका दिमाग़ फट जाएगा। वो यहाँ बिज़नेस की बात करने आई थी और ये आदमी उसे रूह और कनेक्शन पर लेक्चर दे रहा था। उसने दाँत पीसते हुए कहा, "मिस्टर शर्मा, प्लीज़। मुझे ये फिलॉसफी मत समझाइए। मुझे ये बताइए कि आप मेरे ऐप के लिए कोड कैसे लिखेंगे? मुझे आंकड़े चाहिए, शायरी नहीं।" आरव के चेहरे पर वही शांत मुस्कान बनी रही। उसने अनन्या की आँखों में झाँका और फिर एक पल के लिए छत की ओर देखा, जैसे कुछ याद कर रहा हो। फिर उसने कहा, "इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया, वर्ना हम भी आदमी थे काम के।" एक पल के लिए कॉन्फ्रेंस रूम में पूरी ख़ामोशी छा गई। अनन्या का मुँह खुला का खुला रह गया था। उसे अपनी कानों पर यक़ीन नहीं हो रहा था। इस आदमी ने एक सीरियस बिज़नेस मीटिंग के बीच में... शायरी सुनाई थी! "आर यू किडिंग मी?" अनन्या की आवाज़ गुस्से से काँप रही थी। "ये... ये क्या बकवास है? ये एक प्रोफेशनल मीटिंग है, कोई मुशायरा नहीं चल रहा यहाँ!" तभी दरवाज़ा खुला और एक गोल-मटोल सा, खुशमिज़ाज लड़का दो प्लेटों में गरमा-गरम समोसे और हरी चटनी लेकर अंदर आया। "भाई, आ गए गरमा-गरम समोसे!" उसने मेज पर प्लेटें रखते हुए कहा। फिर उसने अनन्या और प्रिया को देखकर मुस्कुराया। "अरे, मैडम आप भी खाइए! एकदम ताज़ा हैं। हेलो, मैं बंटी।" अनन्या ने बंटी और समोसों को ऐसे देखा जैसे वे किसी और ग्रह से आए हों। उसने आरव को घूरकर देखा, जो अब समोसे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था। अनन्या खड़ी हो गई। उसका चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। "आई थिंक वी आर डन हियर। प्रिया, चलो।" वो दरवाज़े की तरफ बढ़ी, लेकिन फिर रुकी। बजट की मज़बूरी उसके सपनों पर भारी पड़ रही थी। उसने मुड़कर आरव से कहा, जो अब समोसा उठाने ही वाला था। "सुनिए, मिस्टर शायर," उसने तंज़ कसा। "ये प्रोजेक्ट आपको मिल रहा है, सिर्फ़ और सिर्फ़ इसलिए क्योंकि आप सबसे सस्ते हैं। लेकिन एक बात अपने दिमाग़ में डाल लीजिए... अगर मेरे ऐप में कोई भी गड़बड़ हुई, या आपने अपनी ये 'दिल वाली फिलॉसफी' मेरे कोड में डालने की कोशिश की... तो मैं आपकी इस 'दिल-Gic' नाम की दुकान को हमेशा के लिए बंद करवा दूँगी।" यह कहकर वो तेज़ी से बाहर निकल गई। आरव ने हाथ में समोसा लिए उसे जाते हुए देखा। उसके चेहरे पर अब भी हल्की सी मुस्कान थी। उसने बंटी की तरफ देखा। बंटी ने मुँह में समोसा भरते हुए कहा, "बड़ी ख़तरनाक मैडम हैं भाई। लगता है, इनका दिल नहीं, हार्ड डिस्क है।" आरव मुस्कुराया और अपनी कुर्सी पर वापस बैठ गया। उसने खिड़की से बाहर झाँका, जहाँ अनन्या अपनी कार में बैठ रही थी। उसने धीरे से कहा, "हार्ड डिस्क में भी कभी-कभी वायरस आ जाता है, बंटी... प्यार का वायरस।"
Chapter 2
अनन्या की कार जब ZapConnect के आलीशान ऑफिस बिल्डिंग के नीचे रुकी, तो उसके चेहरे पर अभी भी पिछली मीटिंग का गुस्सा साफ़ झलक रहा था। उसने दरवाज़ा खोला, एक गहरी साँस ली, जैसे बाहर की सारी बकवास अपने अंदर खींचकर अब बाहर छोड़ देना चाहती हो, और तेज़ी से अंदर चली गई। उसके पीछे-पीछे आ रही प्रिया ने उसकी चाल देखकर ही समझ लिया था कि मीटिंग अच्छी नहीं गई।
केबिन में पहुँचते ही अनन्या ने अपना लैपटॉप डेस्क पर पटका। "दिल-Gic! हद है! क्या मिस्टर आरव शर्मा को लगता है कि ये कोई कॉफ़ी शॉप है जहाँ वो ग़ालिब की शायरी सुनाएंगे और समोसे खाएंगे?" उसने गुस्से से कहा, "ये एक मल्टीनेशनल कंपनी है, प्रिया! हम यहाँ 'रूह' के कनेक्शन बनाने नहीं बैठे हैं! हम डेटा से 'मैच' बनाते हैं!"
प्रिया ने धीरे से कहा, "मैम, लेकिन... बजट की वजह से हमें उनसे ही काम करवाना होगा।"
अनन्या ने अपनी आँखें बंद कर लीं। "मुझे पता है, प्रिया! यही बात मुझे सबसे ज़्यादा परेशान कर रही है। ये आदमी मेरी पूरी विज़न को बर्बाद कर देगा। मैंने इतनी मेहनत की है इस ऐप के लिए, और अब ये सब... एक शायर के हाथों में!"
उसने अपनी कुर्सी घुमाई और खिड़की से बाहर देखने लगी, जहाँ दिल्ली की ऊंची-ऊंची इमारतें आसमान छू रही थीं। उसे अपनी सारी मेहनत और महत्वाकांक्षा ख़तरे में दिख रही थी। "ठीक है," उसने अपनी आँखें खोलीं और कठोरता से कहा। "अभी के अभी उन्हें कॉन्ट्रैक्ट भेजो। लेकिन साथ में एक बहुत ही सख्त NDA (नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट) और SLA (सर्विस लेवल एग्रीमेंट) भी भेजो। एक-एक चीज़ साफ़ होनी चाहिए। कोई 'दिल' नहीं, कोई 'रूह' नहीं। सिर्फ़ कोड, और वो भी मेरे बताए हुए पैरामीटर्स पर। और हाँ, रोज़ शाम को मुझे प्रोग्रेस रिपोर्ट चाहिए, ईमेल पर।"
प्रिया ने सिर हिलाया। "जैसी आपकी आज्ञा, मैम।" वह बाहर जाने लगी, तभी अनन्या ने उसे रोका।
"और प्रिया," अनन्या ने कहा, उसकी आवाज़ अब थोड़ी धीमी थी, "अगर वो अपनी किसी भी 'शायरी' या 'दिल की बात' वाले फ़ीचर का ज़िक्र करें, तो मुझे तुरंत बताना।"
"ओके, मैम।" प्रिया ने कहा और बाहर निकल गई।
अनन्या ने फिर से अपनी लैपटॉप स्क्रीन पर देखा। उसने 'Zap' का लोगो देखा – एक चमकदार, मॉडर्न डिज़ाइन। उसे अपनी मेहनत पर गर्व था। वह जानती थी कि यह ऐप क्रांति लाएगा। लेकिन इस 'दिल-Gic' वाले चक्कर ने उसे अंदर तक परेशान कर दिया था। "लेट्स सी, मिस्टर आरव शर्मा," उसने बुदबुदाया, "आपका 'दिल' जीतता है या मेरा 'डेटा'!"
***
उधर, दिल-Gic के छोटे से ऑफिस में, आरव चाय का कप हाथ में लिए मुस्कुरा रहा था। बंटी उसके सामने बैठकर एक और समोसा ख़त्म कर चुका था।
"भाई, ये तो कमाल है!" बंटी ने उत्साह से कहा। "इतनी बड़ी कंपनी का प्रोजेक्ट मिल गया! और वो भी ऐसी मैडम, जो खुद चलती-फिरती फ़ाइल है। गजब है भाई!"
आरव ने चाय की एक घूंट भरी। "तू नहीं समझेगा, बंटी। ये सिर्फ़ प्रोजेक्ट नहीं है। ये एक जंग है। दिल और डेटा की जंग।"
बंटी ने अपने मुँह में समोसा चबाते हुए कहा, "भाई, जंग में तो हथियार चाहिए। वो मैडम तो तलवार लेकर आई थीं, और तूने शायरी सुना दी।"
आरव मुस्कुराया। "मेरी शायरी ही मेरा हथियार है, बंटी। देख लेना, इस डेटा वाली मैडम को मैं दिल का मतलब समझाकर रहूँगा। इस ऐप को मैं सिर्फ़ 'डेटा' से नहीं, 'दिल' से बनाऊँगा।"
उसने अपनी मेज पर पड़े एक पुराने रजिस्टर को खोला, जिस पर कुछ रफ़ स्केच और कोड के नोट्स थे। उसने एक खाली पन्ना खोला और उस पर मोटे अक्षरों में लिखा - "रूह का कनेक्शन फ़ीचर।"
बंटी ने उसकी तरफ देखा। "ये क्या है, भाई? ये तो कॉन्ट्रैक्ट में नहीं है। कहीं वो मैडम नाराज़ हो गईं तो?"
आरव ने रजिस्टर पर एक और गहरी लकीर खींची। "यही तो गेम है, बंटी। वो मुझसे कोड लिखवाएँगी, और मैं उस कोड में 'दिल' डालूँगा। उन्हें पता भी नहीं चलेगा कि उनका डेटा वाला ऐप कैसे 'रूह' की बात करने लगेगा।" उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी।
अगले कुछ दिन अनन्या और आरव के बीच ईमेल और वीडियो कॉल की एक अंतहीन श्रंखला बन गए। अनन्या की हर ईमेल में 'KPIs', 'यूज़र जर्नी', 'फंक्शनल स्पेसिफिकेशन्स' और 'मेट्रिक्स' जैसे भारी-भरकम शब्द होते थे। आरव के जवाब उतने ही सरल और कभी-कभी 'फ़िल्मी' भी होते।
एक शाम, अनन्या को आरव की तरफ़ से एक ईमेल मिला, जिसका सब्जेक्ट था "Daily Progress Report - Zap Project."
अनन्या ने तुरंत उसे खोला, यह देखने के लिए कि उसने आज क्या 'कमाल' किया है।
ईमेल में लिखा था:
"प्रिय अनन्या वर्मा जी,
आज दिन भर आपके अद्भुत प्रोजेक्ट 'Zap' पर कार्य प्रगति पर रहा।
हमने आपके 'यूज़र प्रोफाइल क्रिएशन' मॉड्यूल पर सफलतापूर्वक काम किया है। हर 'स्वाइप' में छुपी भावनाओं को समझने की दिशा में एक और कदम।
आज की प्रगति को एक शेर के साथ व्यक्त करना चाहूँगा:
'ख़ुदा महफ़ूज़ रखे तेरी हर 'स्वाइप' को
के उस पर है मेरी ज़िंदगी का हर ज़ोर-ओ-शोर।'
आपका,
आरव शर्मा,
संस्थापक, दिल-Gic"
अनन्या का दिमाग़ फट गया। उसने ज़ोर से लैपटॉप की स्क्रीन बंद कर दी। "प्रिया!" उसने दहाड़ लगाई।
प्रिया भागकर अंदर आई। "जी मैम?"
"ये देखो!" अनन्या ने स्क्रीन की तरफ इशारा करते हुए कहा। "ये आदमी मुझे रोज़ शायरी भेज रहा है! ये क्या चल रहा है? मैंने उसे प्रोफेशनल रिपोर्ट भेजने को कहा था, न कि अपनी डायरी!"
प्रिया ने देखा और हल्की सी हंसी रोकी। "मैम, शायद... ये उनका तरीका है?"
"तरीका?" अनन्या ने चिल्लाकर कहा। "मेरा तरीका एक्सेल शीट है, उसकी शायरी नहीं! उसे अभी के अभी फोन लगाओ और कहो कि आइंदा मुझे ऐसी कोई फ़ालतू ईमेल नहीं चाहिए! सिर्फ़ टेक्निकल अपडेट्स! और अगर उसने दोबारा ऐसा किया, तो कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म!"
प्रिया ने डरते-डरते आरव को फोन लगाया।
आरव ने फोन उठाया। "हेलो?"
"मिस्टर शर्मा, अनन्या मैम आपसे बात करना चाहती हैं।" प्रिया ने कहा।
अनन्या ने फोन ले लिया। "मिस्टर शर्मा, क्या आपको मेरी पिछली ईमेल समझ नहीं आई थी?" उसकी आवाज़ में गुस्सा भरा था।
आरव ने शांत भाव से कहा, "जी मिस वर्मा, मैंने आपकी ईमेल ध्यान से पढ़ी थी। आप टेक्निकल अपडेट्स चाहती हैं। मैंने आपको वही भेजा। बस अपने अंदाज़ में।"
"आपका अंदाज़?" अनन्या हंस पड़ी, एक कड़वी हंसी। "आपका अंदाज़ मेरा प्रोजेक्ट बर्बाद कर रहा है! मुझे अपनी रिपोर्ट में 'स्वाइप में छुपी भावनाएँ' नहीं चाहिए! मुझे चाहिए 'बैकएंड इंटीग्रेशन', 'डेटाबेस स्कीमा' और 'API फंक्शनलिटी'!"
आरव मुस्कुराया। "मिस वर्मा, वो सब तो अंदर चल ही रहा है। लेकिन आप सिर्फ नंबर्स पर ही क्यों फ़ोकस करती हैं? प्यार तो भावनाओं का खेल है। हमारा ऐप भले ही डेटा पर चले, लेकिन उसका मकसद तो भावनाएँ जोड़ना है, है ना?"
अनन्या ने माथा पीटा। "आप एक डेवलपर हैं! फिलॉसफर नहीं! मैंने आपको क्या बताया था? कोई दिल नहीं, सिर्फ़ डेटा! आपका काम मेरा ऐप बनाना है, मेरे विचारों को बदलना नहीं!"
आरव ने बहुत नम्रता से कहा, "जी मिस वर्मा। मेरा काम आपका ऐप बनाना है। और मैं बना रहा हूँ। लेकिन उसमें थोड़ी सी 'दिल-Gic' डालना तो मेरा कॉपीराइट है न?"
अनन्या को लगा जैसे उसके कान से धुआँ निकल रहा हो। उसने गुस्से में फोन काट दिया। "अनरियल! ये आदमी मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ा रहा है।"
प्रिया ने फिर कहा, "तो मैम, क्या करना है?"
अनन्या ने गहरी साँस ली। "कुछ नहीं! अभी उसे काम करने दो। लेकिन मैं उस पर चौबीस घंटे नज़र रखूँगी। अगर उसने ज़रा सी भी चालाकी की, तो... तो वो देखेगा!"
***
आरव ने फोन काटा और बंटी को देखकर मुस्कुराया। "लगता है, मैडम का 'दिल' धीरे-धीरे डेटा से बाहर आ रहा है।"
बंटी ने अपनी आँखों को छोटा करते हुए कहा, "भाई, मुझे तो लगता है, वो अभी भी गुस्सा हैं। कहीं ये गुस्सा 'कॉन्ट्रैक्ट कैंसल' तक न पहुँच जाए।"
आरव ने आत्मविश्वास से सिर हिलाया। "नहीं, बंटी। उन्हें मेरी ज़रूरत है। और जब उन्हें पता चलेगा कि मेरा 'रूह का कनेक्शन' फ़ीचर क्या कमाल कर रहा है, तो वो खुद मेरा नाम जपती फिरेंगी।"
आरव ने अपनी कोडिंग स्क्रीन खोली। वह 'Zap' ऐप के लिए कोड लिख रहा था। एक तरफ अनन्या की सख्त 'रिक्वायरमेंट्स' थीं – सटीक मैचिंग, यूज़र प्रोफाइल, स्वाइप फंक्शनलिटी। और दूसरी तरफ, आरव चुपके से एक और कोड लिख रहा था, एक सीक्रेट फ़ीचर।
यह फ़ीचर यूज़र की पसंद-नापसंद को सिर्फ़ डेटा पॉइंट्स से नहीं जोड़ता था। यह उनकी "छिपी हुई इच्छाओं", उनकी "पुरानी यादों", उनकी "भावनात्मक पसंद" को स्कैन करता था। उदाहरण के लिए, अगर कोई यूज़र अपनी प्रोफाइल में "पुराने हिंदी गाने" लिखता था, तो आरव का एल्गोरिदम सिर्फ़ उन्हें "पुराने गाने" पसंद करने वाले से नहीं मिलाता था। वह देखता था कि कौन सा गाना, किस मूड में, किस समय पर? कौन सा कलाकार? क्या उस गाने में कोई ख़ास याद छुपी है?
और यही था 'रूह का कनेक्शन'। यह उन लोगों को मिलाता था जिनकी पसंद-नापसंद डेटा में भले ही अलग लगे, लेकिन जिनकी "रूह" एक ही धुन पर बजती थी। जैसे, किसी को समोसे में आलू पसंद हैं और किसी को चाय में अदरक। डेटा कहेगा ये अलग हैं, लेकिन आरव का "रूह का कनेक्शन" कहता था कि ये दोनों ही भारतीय मिडिल क्लास के ऐसे प्रतिनिधि हैं जिन्हें छोटे-छोटे, देसी टेस्ट से प्यार है। इन्हें मिलाओ!
आरव ने स्क्रीन पर कोड टाइप करते हुए मुस्कुराया। "ये सिर्फ कोड नहीं है, मिस वर्मा। ये तो भावनाओं का जाल है। आपका डेटा सिर्फ ऊपर-ऊपर का दिखेगा। लेकिन मेरा दिल... वो अंदर की बात पकड़ेगा।"
उसने "रूह का कनेक्शन" फ़ीचर को 'Zap' ऐप के कोर में इंटीग्रेट कर दिया, इस तरह से कि अनन्या का डेटा एनालिटिक्स इसे एक "नॉर्मल यूज़र प्रेफरेंस" की तरह देखे और इसे एक अलग फ़ीचर के रूप में पहचान न पाए।
***
एक हफ़्ते बाद, 'Zap' ऐप का बीटा वर्जन लॉन्च हो गया। ZapConnect के ऑफिस में एक छोटी सी मीटिंग हुई। अनन्या ने ऐप के डिज़ाइन और बेसिक फंक्शनलिटी को देखकर राहत की साँस ली। आरव ने अपनी 'शायरी' को कोड में तो नहीं डाला था। या उसे ऐसा लग रहा था।
"वेल डन, मिस्टर शर्मा," अनन्या ने आरव को वीडियो कॉल पर कहा। "डिज़ाइन क्लीन है, फंक्शनलिटी स्मूद है। मुझे खुशी है कि आपने 'प्रोफेशनल' रहने का फैसला किया।"
आरव ने मुस्कुराकर कहा, "जी मिस वर्मा। मैंने हमेशा कहा है कि मैं प्रोफेशनल हूँ। बस मेरा 'प्रोफेशनलिज्म' थोड़ा अलग है।"
अनन्या ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। "अब हम एक छोटे ग्रुप में बीटा टेस्टिंग शुरू करेंगे। मैं उम्मीद करती हूँ कि इसमें कोई 'फ़िल्मी ट्विस्ट' नहीं होगा।"
आरव हंस पड़ा। "आप चिंता मत कीजिए। ट्विस्ट तो ज़िंदगी में होते हैं। ऐप में नहीं।" उसने मन में सोचा, 'अभी के लिए तो नहीं।'
बीटा टेस्टर्स ने ऐप का इस्तेमाल करना शुरू किया। पहले कुछ दिन सब ठीक रहा। ऐप ने डेटा के आधार पर लोगों को मैच किया, जैसे अनन्या चाहती थी। लेकिन धीरे-धीरे कुछ अजीबोगरीब मैचिंग रिज़ल्ट्स आने लगे।
एक दिन, प्रिया, अनन्या के केबिन में भागती हुई आई। "मैम! कुछ अजीब हो रहा है!"
अनन्या ने अपनी एक्सेल शीट से नज़रें हटाईं। "क्या हुआ?"
"मैम, एक बीटा टेस्टर हैं, मिस्टर गुप्ता। उनकी प्रोफाइल में लिखा है कि उन्हें 'शाकाहारी खाना' पसंद है। और हमारा ऐप उन्हें मिस्टर शर्मा से मैच कर रहा है, जिनकी प्रोफाइल में साफ़-साफ़ 'चिकन टिक्का' लिखा है! ये कैसे हो सकता है?" प्रिया ने परेशान होकर कहा।
अनन्या ने अपनी एक आईब्रो उठाई। "क्या बकवास है ये? क्या हमारे एल्गोरिदम में कोई बग है?"
प्रिया ने लैपटॉप अनन्या के सामने रख दिया। "और ये देखिए, एक और केस है। मिस कपूर। उन्हें 'मॉडर्न आर्ट' पसंद है। और ऐप उन्हें एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर, मिस्टर सिंह से मैच कर रहा है, जिन्हें 'कबीर के दोहे' पसंद हैं।"
अनन्या ने प्रोफाइल देखी। "ये क्या हो रहा है? ये मेरे डेटा के हिसाब से तो बिल्कुल मैच नहीं कर रहे हैं!"
तभी उसके फोन पर एक नोटिफिकेशन आया। वह Zap ऐप की अपनी पर्सनल प्रोफाइल पर एक टेस्ट कर रही थी। उसने ऐप खोला।
स्क्रीन पर एक नोटिफिकेशन चमक रहा था: **"Congratulations! You have a new High-Potential Match: आरव शर्मा. Compatibility Score: 87%."**
अनन्या की आँखें फ़टी की फ़टी रह गईं। आरव शर्मा? ग़ालिब का शेर सुनाने वाला, समोसे खिलाने वाला, फिलॉसफी बघारने वाला आरव शर्मा? उसके डेटा के हिसाब से तो आरव उसकी प्रोफाइल से 0% भी मैच नहीं करता था!
"ये क्या है?" उसने अपने आप से कहा, उसकी आवाज़ काँप रही थी। "ये सिस्टम का बग है, या... या ये उसकी कोई चाल है?"
उसे याद आया आरव की बात – 'ट्विस्ट तो ज़िंदगी में होते हैं। ऐप में नहीं।'
अब उसे सब कुछ साफ़ नज़र आ रहा था। उस आदमी ने कुछ तो किया था! उसने अपनी 'दिल वाली फिलॉसफी' को उसके ऐप में डाल दिया था।
अगले ही पल, अनन्या ने अपना लैपटॉप उठाया और गुस्से में ZapConnect के ऑफिस से बाहर निकल गई। "उस 'दिल-Gic' वाले के ऑफिस में मुझे अभी के अभी जाना है!" उसने गुस्से से कहा। "आज मैं उसका सारा 'दिल' बाहर निकाल दूँगी!"
प्रिया उसके पीछे-पीछे भागी। "मैम, लेकिन...!"
अनन्या रुकी नहीं। उसके दिमाग़ में सिर्फ़ आरव का चेहरा घूम रहा था, वही शांत, शरारती मुस्कान वाला चेहरा। उसकी आँखों में आग थी। उसे उस आदमी से इस 'बग' का जवाब चाहिए था, जो अब सिर्फ़ उसके ऐप में नहीं, उसकी ज़िंदगी में भी घुस चुका था।
Chapter 3
अनन्या का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसकी गाड़ी, पिछली बार से भी तेज़ रफ़्तार से, उसी पुरानी, भीड़-भाड़ वाली गली में घुसी जहाँ दिल-Gic का ऑफिस था। इस बार उसके चेहरे पर सिर्फ़ नाराज़गी नहीं, बल्कि एक अजीब सी आग थी। प्रिया, जो उसके साथ बैठी थी, समझ गई थी कि आज तूफान आने वाला है।
"यही है ना?" अनन्या ने कार के रुकते ही दरवाज़ा खोलते हुए पूछा। उसकी आवाज़ में एक धार थी।
प्रिया ने डरते-डरते सिर हिलाया। "जी मैम... यही है।"
अनन्या ने बिना एक पल भी रुके बिल्डिंग की सीढ़ियाँ चढ़नी शुरू कर दीं। हर कदम के साथ उसका गुस्सा बढ़ता जा रहा था। उसका दिमाग तेज़ी से चल रहा था – गुप्ता जी का शाकाहारी और शर्मा जी का चिकन टिक्का, कपूर मिस का मॉडर्न आर्ट और सिंह साहब के कबीर के दोहे, और फिर... सबसे बड़ा 'बग', आरव शर्मा ख़ुद। 87% कम्पैटिबिलिटी स्कोर! ये मज़ाक था। ये उसके डेटा का, उसकी मेहनत का, और उसके पूरे विज़न का मज़ाक था।
वह दूसरी मंज़िल पर पहुँची, जहाँ दिल-Gic का वही पुराना, हाथ से पेंट किया हुआ बोर्ड टंगा था। उसने ज़ोर से दरवाज़ा धक्का दिया। दरवाज़ा एक तेज़ आवाज़ के साथ खुला और अनन्या अंदर धड़धड़ाती हुई घुसी।
ऑफिस में वही पुरानी फ़िल्मों के पोस्टर, किताबों की अलमारी और धीमी आवाज़ में बजता किशोर कुमार का गाना। आरव अपनी मेज पर बैठा था, शायद कोई कोड लिख रहा था, या शायद किसी शेर की धुन में खोया था। बंटी कोने में बैठकर एक किताब पढ़ रहा था, जिसके कवर पर बड़े-बड़े अक्षरों में "समोसे से प्यार का रास्ता" लिखा था।
दरवाज़े की आवाज़ से आरव और बंटी दोनों चौंके। आरव ने पलकें झपकाते हुए अनन्या को देखा। उसके चेहरे पर वही शांत, बेपरवाह मुस्कान थी, जिसने अनन्या का खून और खौला दिया।
"मिस्टर आरव शर्मा!" अनन्या की आवाज़ में इतनी तेज़ी थी कि किशोर कुमार का गाना भी एक पल के लिए सहम गया।
आरव ने धीरे से अपनी कुर्सी घुमाई। "अरे, मिस वर्मा। क्या बात है? आज आप इतनी जल्दी आ गईं? ख़ैरियत तो है?" उसकी आवाज़ में कोई तनाव नहीं था, जैसे उसे पता ही न हो कि क्या होने वाला है।
अनन्या ने अपना लैपटॉप उसकी मेज पर पटका, लगभग फेंकते हुए। "ख़ैरियत? आप मुझसे ख़ैरियत पूछ रहे हैं? ये क्या चल रहा है आपके ऐप में, मिस्टर शर्मा?"
आरव ने लैपटॉप की स्क्रीन पर देखा, जहाँ अनन्या की प्रोफ़ाइल खुली थी और उसके नीचे उसका 87% कम्पैटिबिलिटी मैच दिख रहा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "ओह! लगता है सिस्टम ने अपना जादू दिखाना शुरू कर दिया।"
"जादू नहीं, ये आपकी चालाकी है!" अनन्या ने गुस्से से कहा। "मैंने आपको साफ़-साफ़ कहा था कि मुझे सिर्फ़ डेटा चाहिए, कोई 'दिल' या 'रूह' नहीं। और आपने क्या किया? आपने मेरा पूरा ऐप बर्बाद कर दिया! ये मिस्टर गुप्ता और मिस्टर शर्मा का क्या चक्कर है? शाकाहारी और चिकन टिक्का कैसे मैच हो सकते हैं?"
आरव ने आराम से अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर झुका। "देखना मिस वर्मा, ये दुनिया सिर्फ डेटा से नहीं चलती। कुछ कनेक्शन ऐसे होते हैं जो एक्सेल शीट में नहीं आते। मिस्टर गुप्ता और मिस्टर शर्मा, भले ही खाने में अलग हों, लेकिन उनकी 'रूह' एक जैसी है। शायद दोनों को रात को नींद नहीं आती और छत पर टहलना पसंद है। या हो सकता है दोनों को पुरानी 'दोस्ती' पर बने गाने पसंद हों।"
अनन्या के चेहरे पर अविश्वसनीयता का भाव था। "क्या? ये क्या बकवास कर रहे हैं आप? आप लोगों को छत पर टहलने या दोस्ती के गाने के आधार पर मैच कर रहे हैं? ये मेरा डेटिंग ऐप है, कोई 'पुराने दोस्तों का क्लब' नहीं!"
"डेटिंग भी तो दोस्ती से ही शुरू होती है न, मिस वर्मा?" आरव ने मासूमियत से पूछा।
"ये सब आपका 'रूह का कनेक्शन' फ़ीचर है, है ना?" अनन्या ने उस पर उंगली उठाई। "जो आपने चुपके से मेरे ऐप में डाल दिया! मैंने आपको वॉर्न किया था! ये 'डेटा ब्रीच' है! ये 'अनप्रोफेशनल कोडिंग' है! मैं आपकी कंपनी को सू कर सकती हूँ!"
आरव की आँखों में एक चमक आई। "सू करेंगी? किस बात के लिए? लोगों को सही मायने में एक-दूसरे से मिलाने के लिए? मैंने वही किया है जो मैंने कहा था – डेटा को दिल से मिलाया।"
बंटी, जो अब तक चुप था, कुर्सी से उछला। "हाँ मैडम! भाई ने एकदम सही किया है! यही तो असली प्यार है! अरे, क्या पता शाकाहारी गुप्ता जी को चिकन टिक्का वाले शर्मा जी से मिलकर, 'शाकाहारी चिकन टिक्का' की रेसिपी मिल जाए!"
अनन्या ने बंटी को घूरा। "प्लीज़, आप चुप रहिए!"
वह फिर आरव की तरफ मुड़ी। "आप जानते हैं आपने क्या किया है? आपने मेरी नौकरी दाँव पर लगा दी है! अगर बोर्ड को ये पता चला, तो वो मुझे निकाल देंगे!" उसकी आवाज़ में अब गुस्सा कम और हताशा ज़्यादा थी।
आरव ने देखा कि अनन्या वाकई परेशान है। उसकी मुस्कान थोड़ी कम हुई। "मुझे अफ़सोस है कि आपको परेशानी हुई, मिस वर्मा। लेकिन मेरा विश्वास कीजिए, मैंने जो किया है, वो ऐप के भले के लिए ही है। लोग डेटा से थक चुके हैं। उन्हें कुछ असली चाहिए।"
"असली?" अनन्या हंसने लगी। "आपकी नज़र में असली क्या है? मुझे खुद देखिए! मेरा डेटा कहता है कि मेरा सबसे परफेक्ट मैच कोई इन्वेस्टमेंट बैंकर या कॉर्पोरेट CEO है। कोई ऐसा जो मेरी ज़िंदगी के 'हाई-KPIs' और 'टारगेट्स' को समझे। लेकिन आपका ये घटिया एल्गोरिदम मुझे आपसे मैच कर रहा है! आरव शर्मा! एक ऐसा इंसान जो 'ग़ालिब' पढ़ता है, समोसे खाता है और जिसका ऑफिस किसी पुराने म्यूज़ियम जैसा है!"
आरव को लगा कि ये बात अब पर्सनल हो रही है। उसकी आँखों में भी हल्की सी चमक आ गई। "और आपको क्या लगता है, मिस वर्मा? मुझे भी आपके जैसे 'वर्कहॉलिक', 'एक्सेल शीट वाली' लड़की से कोई मैच नहीं चाहिए। मेरा डेटा भी कहता है कि मेरा परफेक्ट मैच कोई ऐसी लड़की है जिसे चांदनी रात में शायरी पसंद हो, या फिर वो जो बारिश में पकौड़े खाए।"
दोनों एक-दूसरे की आँखों में घूर रहे थे। माहौल में तनाव और एक अजीब सी केमिस्ट्री घुल चुकी थी।
तभी आरव के चेहरे पर वही पुरानी शरारती मुस्कान वापस आ गई। "अच्छा तो फिर एक काम करते हैं, मिस वर्मा।"
अनन्या ने उसे गुस्से से देखा। "क्या?"
"एक शर्त लगाते हैं," आरव ने कहा। "ज़रा देखें आपका 'डेटा वाला प्यार' जीतता है या मेरा 'दिल वाला लॉजिक'।"
अनन्या ने अपनी बांहें मोड़ लीं। "शर्त? कैसी शर्त?"
आरव ने अपनी मेज से अपना फोन उठाया। "आप और मैं... दोनों Zap ऐप पर अपनी-अपनी प्रोफ़ाइल बनाएंगे।"
अनन्या ने नाक-भौं सिकोड़ी। "मेरी प्रोफ़ाइल पहले से है।"
"नहीं," आरव ने कहा। "आप एक नई प्रोफ़ाइल बनाएँगी, सिर्फ इस शर्त के लिए। और मैं भी बनाऊँगा। आप अपने डेटा के हिसाब से अपने लिए सबसे 'परफेक्ट' पार्टनर ढूँढेंगी। और मैं... मैं अपने 'रूह के कनेक्शन' वाले फ़ीचर पर भरोसा करूँगा।"
अनन्या ने उस पर शक की निगाह से देखा। "और ये सब किसलिए?"
आरव ने अपने हाथ हवा में फैलाए। "जिसका मैच पहले सफल और सच्ची डेट पर जाएगा, वो जीत जाएगा।"
अनन्या एक पल के लिए चुप हो गई। उसे आरव की इस चुनौती में कुछ दिलचस्पी लगने लगी थी। "सफल और सच्ची डेट? आप उसे कैसे परिभाषित करेंगे?"
"बहुत सिंपल है," आरव ने कहा। "डेट ऐसी हो, जहाँ दोनों को लगे कि उन्हें अपना 'परफेक्ट मैच' मिल गया है। एक ऐसी डेट, जिसके बाद वो दोनों आगे भी मिलना चाहें। कोई दिखावा नहीं, कोई फेक स्माइल नहीं। एकदम असली। और हाँ, अगर आपने या मैंने किसी भी तरह की चीटिंग की, तो वो काउंट नहीं होगा।"
अनन्या ने सोचा। यह एक मौका था आरव को हमेशा के लिए गलत साबित करने का। यह साबित करने का कि डेटा ही सब कुछ है, दिल-विल सब बकवास है।
"ठीक है," अनन्या ने आत्मविश्वास से कहा। "मुझे ये शर्त मंज़ूर है।"
बंटी, जो अब तक आँखें फाड़े सब सुन रहा था, मेज पर ज़ोर से हाथ मारकर बोला, "हाँ! अब आया मज़ा! लेकिन भाई, हारने वाले का क्या?"
आरव और अनन्या दोनों ने बंटी की तरफ देखा।
आरव ने शरारती अंदाज़ में कहा, "हारने वाले को... पूरे ऑफिस के सामने 'राजा बाबू' फ़िल्म का गाना 'सरकाई लो खटिया' पर डांस करना होगा।"
अनन्या का मुँह खुला रह गया। "क्या? ये... ये कैसी शर्त है? मैं कोई डांसर नहीं हूँ!"
आरव मुस्कुराया। "अरे, बस पाँच मिनट की बात है। और वो भी आपके पूरे ऑफिस के सामने। सोचा माहौल थोड़ा हल्का हो जाएगा।"
अनन्या गुस्से से लाल हो गई। "नहीं! ये मुझे मंज़ूर नहीं!"
आरव ने अपनी कुर्सी से उठते हुए कहा, "तो फिर आप हार मान लीजिये, मिस वर्मा। मान लीजिये कि आपका डेटा वाला प्यार मेरे दिल वाले लॉजिक से हार गया।"
उसकी बात ने अनन्या के आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचाई। हार? वो? कभी नहीं!
"ठीक है!" अनन्या ने दाँत पीसते हुए कहा। "मुझे मंज़ूर है! मैं डांस करूँगी... अगर मैं हारी! लेकिन अगर आप हारे, तो आपको भी करना होगा!"
आरव ने अपना हाथ आगे बढ़ाया। "डन डील!"
अनन्या ने हिचकिचाते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया और आरव के हाथ से मिलाया। उनके बीच की ये हैंडशेक सिर्फ एक शर्त नहीं, बल्कि एक युद्धविराम और एक नए रिश्ते की शुरुआत थी, जिसकी उन्हें अभी ख़ुद भी जानकारी नहीं थी।
"तो, कब से शुरू करें?" अनन्या ने चुनौती भरे अंदाज़ में पूछा।
"अभी से!" आरव ने मुस्कुराते हुए कहा। "मैं अपनी प्रोफ़ाइल बनाता हूँ। आप अपनी। और देखते हैं कौन पहले 'परफेक्ट मैच' पाता है।"
अनन्या ने घूरते हुए अपना लैपटॉप उठाया। "देखते हैं! मैं दिखा दूँगी कि डेटा इज़ किंग!"
वह तेज़ी से दरवाज़े की तरफ बढ़ी। बंटी उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था।
"ऑल द बेस्ट, मैडम!" बंटी ने उत्साह से कहा। "समोसे या चाय, जो भी चाहिए, बता दीजिएगा!"
अनन्या ने उसे कोई जवाब नहीं दिया, बस तेज़ी से बाहर निकल गई।
आरव ने अपनी कुर्सी पर बैठकर एक गहरी साँस ली। उसने मुस्कुराते हुए बंटी की तरफ देखा। "तो बंटी, तूने अपनी ज़िंदगी में कभी 'सरकाई लो खटिया' पर डांस किया है?"
बंटी ने अपनी आँखों को छोटा किया। "भाई, मैंने तो अब तक सिर्फ़ तेरे लिए ही डांस किया है। लेकिन इस बार मज़ा आएगा!"
आरव ने अपना फोन उठाया और Zap ऐप खोला। "चलो, अब असली खेल शुरू करते हैं।" उसने अपनी प्रोफ़ाइल बनानी शुरू की, जिसमें उसने अपनी पसंद-नापसंद को बहुत ही 'आरव शर्मा' वाले अंदाज़ में भरा – पुरानी शायरी, बारिश की बूँदें, चाय की चुस्की, और हाँ... "सच्ची बातें करने वाले लोग।"
उसे पता था कि ये शर्त सिर्फ़ एक डेटिंग ऐप के बारे में नहीं थी। ये उनके विचारों की लड़ाई थी। और आरव को पूरा यक़ीन था कि इस लड़ाई में 'दिल' ही जीतेगा। उसका 'रूह का कनेक्शन' फ़ीचर ही जीतेगा।
वहीं, अनन्या अपनी कार में बैठी तेज़ी से अपने ऑफिस की तरफ जा रही थी। उसके दिमाग़ में अब सिर्फ़ एक ही बात थी – शर्त जीतना। उसे दुनिया को, और ख़ासतौर पर उस आरव शर्मा को, ये साबित करना था कि उसकी डेटा-ड्रिवन अप्रोच ही सही है। "सरकाई लो खटिया"? नहीं! कभी नहीं! वो ये शर्त जीतेगी! उसे अपने 'परफेक्ट डेटा मैच' पर पूरा भरोसा था।
और इसी के साथ, 'एरर 404: इश्क़ नॉट फाउंड' की कहानी में एक नया, मज़ेदार मोड़ आ गया था। एक ऐसी जंग, जो सिर्फ़ दो लोगों के बीच नहीं, बल्कि 'दिल' और 'डेटा' के बीच थी, और जिसका नतीजा शायद 'इश्क़' के नाम लिखा था।
Chapter 4
अनन्या की गाड़ी जब ZapConnect के आलीशान ऑफिस की पार्किंग में रुकी, तो उसके दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही बात चल रही थी – उस आरव शर्मा को ग़लत साबित करना। उसके अंदर आग सी जल रही थी, ये आग किसी और की नहीं, बल्कि उसके अपने आत्म-सम्मान और सालों की मेहनत की थी, जिसे आरव अपने 'दिल वाले लॉजिक' से चुनौती दे रहा था। उसने गहरी साँस ली और तेज़ी से अपनी केबिन की तरफ बढ़ी।
केबिन में पहुँचते ही उसने अपना लैपटॉप खोला। प्रिया उसके पीछे-पीछे आई, उसके चेहरे पर सवालिया निशान था। "मैम, क्या हुआ?"
अनन्या ने अपनी आँखें स्क्रीन पर गढ़ाते हुए कहा, "कुछ नहीं हुआ, प्रिया। अब होगा।" उसने Zap ऐप खोला और अपनी प्रोफ़ाइल बनानी शुरू की। "अब मैं दिखा दूँगी कि असली मैचिंग कैसे होती है। नो 'छत पर टहलना', नो 'दोस्ती के गाने'।" उसकी उँगलियाँ तेज़ी से कीबोर्ड पर चल रही थीं।
उसने अपनी प्रोफ़ाइल को एकदम बारीकी से भरा। उसकी पसंद-नापसंद, उसके करियर गोल्स, उसकी लाइफस्टाइल – सब कुछ 'डेटा-ड्रिवन' था। 'पसंदीदा जगहें' में उसने "इंटरनेशनल बिज़नेस लाउंज" लिखा, 'शौक़' में "फाइनेंशियल न्यूज़ पढ़ना" और "ग्लोबल ट्रेंड्स का विश्लेषण करना", और 'लंबे समय के लक्ष्य' में "ग्लोबल मार्केटिंग हेड बनना" और "खुद की एक यूनिकॉर्न कंपनी खड़ी करना"। उसने सुनिश्चित किया कि हर जानकारी उसके प्रैक्टिकल, एंबिशियस स्वभाव को दर्शाए।
"ओके, डन!" उसने मुस्कुराते हुए कहा। "अब देखते हैं Zap का एल्गोरिदम क्या कमाल दिखाता है।" उसने 'मैच' बटन पर क्लिक किया।
स्क्रीन पर एक पल के लिए 'मैचिंग...' लिखा आया, और फिर एक तस्वीर और प्रोफ़ाइल सामने आई।
नाम: रोहन मल्होत्रा
प्रोफ़ेशन: इन्वेस्टमेंट बैंकर, मल्टीनेशनल फर्म
शौक़: ग्लोबल स्टॉक मार्केट, इकोनॉमिक्स पर डिबेट करना, गोल्फ़।
लाइफस्टाइल: लग्ज़री ट्रेवल, फाइन डाइनिंग।
कॉम्पैटिबिलिटी स्कोर: 98%
अनन्या के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई। "देखा, प्रिया? ये है परफेक्ट मैच! 98%! यही है डेटा का कमाल। अब इस आरव शर्मा को दिखाऊँगी कि उसका 'रूह का कनेक्शन' कहाँ टिकता है।"
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, "कॉन्ग्रेचुलेशंस, मैम! ये तो बहुत अच्छा मैच लग रहा है।"
"अच्छा नहीं, परफेक्ट!" अनन्या ने आत्मविश्वास से कहा। "अभी के अभी रोहन मल्होत्रा को मैसेज करो। उन्हें डिनर के लिए इनवाइट करो। बेस्ट रेस्टोरेंट, बेस्ट टेबल। आज रात ही।"
"ओके, मैम!" प्रिया ने तुरंत अपने फोन पर मैसेज ड्राफ्ट करना शुरू कर दिया।
अनन्या ने एक गहरी साँस ली, उसके कंधे अब तनावमुक्त लग रहे थे। ये शर्त उसकी प्रतिष्ठा का सवाल था। और अब तक तो सब सही जा रहा था। "सरकाई लो खटिया?" वो हँसी। "ये गाना मिस्टर शर्मा को अपने लिए प्रैक्टिस करना चाहिए।"
***
उधर, दिल-Gic के ऑफिस में, आरव ने अपनी प्रोफ़ाइल पूरी की। उसने जानबूझकर अपनी पसंद-नापसंद को थोड़ा अलग अंदाज़ में भरा था। 'पसंदीदा जगहें' में उसने "पुरानी दिल्ली की गलियाँ" लिखा, 'शौक़' में "ग़ालिब की शायरी पढ़ना", "किशोर कुमार के गाने सुनना" और "बारिश में चाय की चुस्की लेना", और 'लंबे समय के लक्ष्य' में "एक ऐसी दुनिया बनाना जहाँ लोग दिलों से जुड़ें, डेटा से नहीं।"
"ये मेरा डेटा है," उसने बंटी को दिखाया, "जो किसी एक्सेल शीट में नहीं आएगा।"
बंटी ने पढ़ा और मुस्कुराया। "भाई, ये तो एकदम तेरी प्रोफ़ाइल है। अब देखते हैं Zap तुझे किससे मिलाता है।"
आरव ने 'मैच' बटन पर क्लिक किया।
स्क्रीन पर आया: **"Congratulations! You have a new High-Potential Match: कविता कपूर. Compatibility Score: 93%."**
नाम: कविता कपूर
प्रोफ़ेशन: यूनिवर्सिटी लेक्चरर (हिंदी साहित्य)
शौक़: क्लासिक हिंदी कविताएँ पढ़ना और लिखना, पुरानी फ़िल्में देखना, शांत जगहों पर बैठना।
कॉम्पैटिबिलिटी स्कोर: 93%
आरव के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई। "कविता कपूर! 93%! हिंदी साहित्य! ये है 'रूह का कनेक्शन', बंटी! डेटा-वेटा सब फ़ेल है इसके आगे।"
बंटी ने ध्यान से देखा। "वाह भाई! ये तो वाकई तेरे टाइप की लग रही है। अब क्या? डेट पर कब जा रहा है?"
"आज ही!" आरव ने उत्साह से कहा। "इसे मेरा 'दिल वाला लॉजिक' कहते हैं। अभी मैसेज करता हूँ। इसे किसी शांत, साहित्यिक जगह पर ले जाऊँगा। शायद कोई पुरानी लाइब्रेर या कोई क़िताबों वाली कैफ़े।"
उसने कविता को मैसेज टाइप करना शुरू किया: "नमस्कार कविता जी, उम्मीद है आप ख़ैरियत से होंगी। मैं आरव शर्मा हूँ। Zap पर आपकी प्रोफ़ाइल देखी, और मुझे लगता है हम दोनों में 'कुछ बात' है, जो किसी एल्गोरिदम से ज़्यादा 'रूह' से जुड़ी है। क्या आप आज शाम मेरे साथ कुछ देर के लिए 'शायरी और चाय' पर मिल सकती हैं?"
बंटी ने पढ़कर दाँत निकाले। "शायरी और चाय? भाई, तू ज़्यादा फ़िल्मी हो रहा है।"
आरव ने उसे अनदेखा किया। "ये फ़िल्मी नहीं, बंटी। ये असली है।" उसने मैसेज सेंड कर दिया। "देख लेना, मेरी डेट आज ही सक्सेसफुल होगी। मैडम का डेटा फ़ेल हो जाएगा।"
***
उसी शाम, अनन्या रोहन मल्होत्रा के साथ शहर के सबसे महंगे रेस्टोरेंट में बैठी थी। रेस्टोरेंट की सजावट शानदार थी, वेटर हर कुछ मिनट में आकर उन्हें देखता था, और खाना प्लेट में किसी आर्ट वर्क जैसा लग रहा था। अनन्या ने सोच रखा था कि वह रोहन के साथ मिलकर अपने करियर और फ्यूचर प्लान्स पर डिस्कशन करेगी।
"सो, रोहन," अनन्या ने शुरुआत की, अपनी आवाज़ को आत्मविश्वास से भरकर, "आपके हिसाब से अगले क्वार्टर में ZapConnect को किस तरह के यूज़र सेगमेंट पर फ़ोकस करना चाहिए? क्या हम टियर-1 शहरों से टियर-2 की तरफ जाएँ, या अभी मेट्रोज पर ही अपनी पकड़ मज़बूत करें?"
रोहन ने एक वाइन का घूंट लिया और मुस्कुराया। "वेल, अनन्या, यह एक दिलचस्प सवाल है। देखिए, मार्केट डायनामिक्स इस समय बहुत वोलेटाइल हैं। आप Q4 के लिए अपने रेवेन्यू प्रोजेक्शन्स को कैसे देख रही हैं? मैंने हाल ही में एक रिपोर्ट पढ़ी थी जिसमें फिनटेक स्टार्टअप्स के ग्रोथ पैटर्न्स का विश्लेषण किया गया था, और मुझे लगता है कि उनका एग्रेसिव यूज़र एक्विजिशन मॉडल हमारे लिए एक बेंचमार्क हो सकता है।"
अनन्या ने मुस्कुराने की कोशिश की। "जी, बिल्कुल। हम भी इसी पर काम कर रहे हैं। यूज़र एक्विजिशन कॉस्ट और लाइफ़टाइम वैल्यू पर हमारा पूरा फ़ोकस है।"
"एक्जेक्टली!" रोहन ने उत्साह से कहा। "आप 'स्केल अप' की बात कर रही हैं, लेकिन क्या आपके पास 'पॉज़िटिव कैश फ्लो' के लिए कोई सॉलिड स्ट्रेटेजी है? मेरी फर्म ने पिछले साल एक बहुत ही सफल IPO किया था, और हमने देखा कि इन्वेस्टर्स हमेशा 'सस्टेनेबल ग्रोथ' पर ही ध्यान देते हैं, न कि सिर्फ़ 'बॉटम लाइन' पर।"
बातचीत का यही सिलसिला पूरी डेट पर चलता रहा। रोहन अपनी सफलता की कहानियाँ सुनाता रहा, स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव पर अपने 'एक्सपर्ट ओपिनियन' देता रहा, और अनन्या अपने करियर गोल्स और 'बिजनेस एक्यूमन' पर फ़ोकस करती रही। खाने के बीच में भी, जब पास्ता आया, तो रोहन ने कहा, "यह पास्ता भी बिलकुल शेयर मार्केट जैसा है – उतार-चढ़ाव भरा, लेकिन सही इन्वेस्टमेंट के साथ स्वाद अच्छा मिलता है।"
अनन्या ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसके होंठ दुखने लगे थे। वह अंदर से पूरी तरह से बोर हो चुकी थी। यह आदमी 'डेटा' पर तो परफेक्ट था, 'लॉजिक' पर भी खरा उतर रहा था, लेकिन उसके 'दिल' में कोई हलचल नहीं हो रही थी। एक पल के लिए उसे आरव का 'छत पर टहलने' वाला फ़ीचर याद आया, और उसने सोचा कि शायद वह 'बोरिंग डेटा' से ज़्यादा मज़ेदार होगा।
डिनर ख़त्म हुआ। रोहन ने बड़े ही प्रोफेशनल अंदाज़ में कहा, "अनन्या, आपसे मिलकर अच्छा लगा। हमारी बातें बहुत 'प्रोडक्टिव' रहीं। शायद हम भविष्य में किसी 'नेटवर्किंग इवेंट' में मिलें।"
"हाँ, बिल्कुल," अनन्या ने कहा, मुस्कुराते हुए। अंदर से वह ख़ुश थी कि यह डेट ख़त्म हुई। कोई दूसरी डेट नहीं, कोई 'सच्चा कनेक्शन' नहीं। उसका 'परफेक्ट डेटा मैच' बस एक 'परफेक्ट बिज़नेस पार्टनर' जैसा था, इससे ज़्यादा कुछ नहीं।
वह बाहर निकली, ठंडी हवा में एक गहरी साँस ली। "तो, मिस्टर शर्मा," उसने मन में कहा, "आपका डेटा फेल हो गया।" उसे अभी यह नहीं पता था कि आरव की डेट का क्या हाल हुआ था।
***
लगभग उसी समय, आरव कविता कपूर के साथ एक शांत कैफ़े में बैठा था, जहाँ दीवारों पर मशहूर शायरों की तस्वीरें टंगी थीं। टेबल पर दो कप चाय रखी थी, और माहौल में हल्की सी चंदन की ख़ुशबू घुल रही थी।
"तो, कविता जी," आरव ने शुरुआत की, "मुझे Zap पर आपकी प्रोफ़ाइल देखकर बहुत खुशी हुई। आजकल ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं जिन्हें ग़ालिब पसंद हो।"
कविता ने धीरे से मुस्कुराया। "हाँ, मुझे भी यही लगा। आजकल सब 'फास्ट-फ़ूड शायरी' पढ़ते हैं, असली 'मुगलाई शायरी' को कौन पूछता है।"
आरव हंस पड़ा। "सही कहा आपने! मेरा भी यही मानना है। तो, आपका पसंदीदा शेर कौन सा है ग़ालिब का?"
कविता ने अपनी आँखें बंद कीं, जैसे सोच रही हो। फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा:
"हाथों की लकीरों पर मत जा 'ग़ालिब',
किस्मत उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते।"
आरव ने तालियाँ बजाईं। "वाह! क्या बात है! ये तो बहुत गहरा शेर है। मेरा पसंदीदा तो ये है:
'इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया,
वर्ना हम भी आदमी थे काम के।'"
कविता फिर मुस्कुराई। "बहुत ख़ूब! क्या आपने 'दर्द मिन्नत-कशे दवा न हुआ' सुना है?"
आरव ने कहा, "जी सुना है। 'मैं न अच्छा हुआ, बुरा न हुआ'।"
और फिर उनका सिलसिला शुरू हो गया। पूरी डेट में, वे एक-दूसरे को ग़ालिब और मीर की शायरी सुनाते रहे। एक शेर आरव कहता, दूसरा कविता। कभी वो किसी शेर का मतलब समझाते, कभी किसी मिसरे की तारीफ़ करते। कैफ़े में आने-जाने वाले लोग उन्हें अजीब निगाहों से देख रहे थे।
आरव को लगा कि यह डेट मज़ेदार तो थी, लेकिन 'सच्ची' नहीं। कविता बहुत अच्छी थी, लेकिन उनकी बातचीत सिर्फ़ शायरी तक ही सीमित थी। कोई पर्सनल बात नहीं, कोई हँसी-मज़ाक नहीं, कोई स्पॉन्टेनिटी नहीं। वो सिर्फ़ दो 'शायरी सुनाने वाली मशीन' लग रहे थे। आरव को लग रहा था जैसे वो कोई 'पोएट्री स्लैम' कॉन्टेस्ट में बैठा हो।
डेट ख़त्म हुई। कविता ने धीरे से कहा, "आपसे मिलकर अच्छा लगा, आरव। आपके साथ शायरी सुनाने में बहुत मज़ा आया।"
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे भी, कविता जी। आपकी शायरी की पसंद बहुत अच्छी है।"
कोई दूसरी डेट का सवाल नहीं था। कोई 'आगे बढ़ने' का इरादा नहीं था। यह एक बहुत ही साहित्यिक, लेकिन भावनात्मक रूप से खोखली डेट थी।
आरव कैफ़े से बाहर निकला, उसके दिमाग़ में ग़ालिब के शेर गूँज रहे थे। "अच्छा तो फिर मेरा 'रूह का कनेक्शन' भी अभी तक 'सक्सेसफुल' नहीं हुआ।" उसने मुस्कुराते हुए कहा। "या तो ये बग है, या फिर मेरी 'रूह' बहुत ही अजीब है।"
***
अगले दिन सुबह, अनन्या अपने ऑफिस में बैठकर एक कप कॉफ़ी पी रही थी। उसकी मेज पर अभी भी 'Zap' ऐप का स्क्रीनशॉट खुला था, जहाँ रोहन मल्होत्रा की प्रोफ़ाइल दिख रही थी। 98% कॉम्पैटिबिलिटी। फिर भी, डेट फ़ेल थी।
"प्रिया," उसने अपनी असिस्टेंट से कहा, "रोहन मल्होत्रा को एक औपचारिक 'थैंक यू' ईमेल भेज दो। और लिखो कि हमारे 'करियर गोल्स' बहुत 'एलाइन' हैं, लेकिन 'व्यक्तिगत रसायनशास्त्र' थोड़ा मिसिंग है।"
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, "जैसी आपकी आज्ञा, मैम।"
अनन्या ने गहरी साँस ली। "डेटा इज़ किंग... लेकिन दिल का भी अपना 'अल्गोरिदम' होता है।" उसे आरव शर्मा की बात याद आई। क्या उसकी बात में सच में कुछ सच्चाई थी?
तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया। आरव शर्मा की तरफ़ से।
मैसेज था: "गुड मॉर्निंग मिस वर्मा। उम्मीद है आपकी 'डेटा-ड्रिवन' डेट सफल रही होगी। मेरी 'शायरी वाली' डेट तो एक 'पोएट्री फेस्टिवल' बनकर रह गई। लगता है अभी तक 'इश्क़ नॉट फाउंड'।"
अनन्या मुस्कुराई, एक सच्ची मुस्कान। कम से कम वह अकेली नहीं थी, जिसकी डेट उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। आरव ने यह मैसेज भेजकर एक अनकही बात कह दी थी – कि वे दोनों अभी भी एक ही कश्ती में थे, 'परफेक्ट मैच' की तलाश में।
उसने आरव को जवाब दिया: "गुड मॉर्निंग, मिस्टर शर्मा। आपकी तरह, मेरी 'एक्सेल शीट' भी अभी तक 'परफेक्ट मैच' नहीं ढूंढ पाई है। लगता है हमारे 'एल्गोरिदम' को कुछ 'बग फिक्सिंग' की ज़रूरत है।"
अनन्या को यह सोचकर हंसी आई कि कैसे वह अब आरव से 'कोड' की भाषा में ही बात करने लगी थी। यह एक अजीब सा मज़ेदार मोड़ था, जिसे उसने पसंद किया। शर्त अभी भी जारी थी, और दोनों को ही अब एक-दूसरे से ज़्यादा, खुद के 'मैचिंग फ़ॉर्मूले' पर सवाल उठने लगे थे। अब आगे क्या होगा, ये देखने वाली बात थी।
Chapter 5
अनन्या ने आरव का मैसेज पढ़ा और एक हल्की, अनचाही मुस्कान उसके होंठों पर तैर गई। उसके दिमाग का लॉजिक चिल्ला रहा था कि उसे इस 'बेवकूफी' पर गुस्सा होना चाहिए, लेकिन उसके अंदर कुछ था जो हल्की राहत महसूस कर रहा था। कम से कम, वह इस अजीबोगरीब 'मैचिंग फ़ेलियर' में अकेली नहीं थी।
वह थोड़ी देर तक बैठी रही, अपनी कॉफ़ी का कप पकड़े हुए। रोहन मल्होत्रा की 98% मैचिंग, जो अब 0% 'केमिस्ट्री' पर आकर रुक गई थी, उसके सामने एक सवाल खड़ा कर रही थी। क्या वाकई डेटा ही सब कुछ नहीं होता? क्या आरव शर्मा की बकवास में थोड़ी सच्चाई थी?
उसने अपने असिस्टेंट, प्रिया को बुलाया। "प्रिया, Zap ऐप पर पिछले दो दिनों के सभी नए मैच और उनकी 'सक्सेस रेट' का एक इमरजेंसी रिपोर्ट तैयार करो। और हाँ, वो 'रूह का कनेक्शन' वाला डेटा भी अलग से निकालो।" उसकी आवाज़ में अब सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि एक अजीब सी उत्सुकता भी थी।
प्रिया ने सिर हिलाया। "जी मैम, अभी करती हूँ।"
अनन्या को लगा कि ये ऐप, जिसने उसकी प्रोफेशनल ज़िंदगी को पूरी तरह डेटा-ड्रिवन बना दिया था, अब उसकी पर्सनल सोच को भी चैलेंज कर रहा था। 'सरकाई लो खटिया' डांस करने की कल्पना से ही उसे सिहरन हो रही थी, और उसे पता था कि इसे जीतने का एक ही रास्ता था – इस ऐप को सच में काम करने वाला बनाना।
***
उधर, दिल-Gic के ऑफिस में, आरव ने अनन्या का जवाब पढ़ा और खिलखिला कर हंस पड़ा। "देख बंटी! ये भी मान गई कि 'इश्क़ नॉट फाउंड'!"
बंटी, जो सुबह-सुबह ही अपनी 'समोसा-चटनी थ्योरी' को अपडेट करने में लगा था, ने सिर उठाकर देखा। "क्या हुआ भाई? मैडम भी फेल हो गईं क्या?"
"हाँ! उनकी 'एक्सेल शीट' वाली डेट भी मेरी 'शायरी वाली' डेट की तरह 'अनसक्सेसफुल' रही।" आरव ने कहा। "मतलब, मेरा 'रूह का कनेक्शन' भले ही लोगों को सीधे 'प्यार' तक न पहुँचा रहा हो, लेकिन उसका 'डेटा' भी कहीं न कहीं गड़बड़ है।"
बंटी अपनी कुर्सी से उछला। "तो इसका मतलब, शर्त अभी भी है! और दोनों का डेटा फेल है! भाई, अब क्या करेगा? कौन जीतेगा?"
आरव सोचने लगा। "देख, बंटी। शर्त अपनी जगह है। लेकिन अब ये सिर्फ शर्त नहीं, ये एक चैलेंज है। मेरा 'रूह का कनेक्शन' लोगों को अजीब तरह से जोड़ रहा है, और अनन्या का 'डेटा' उन्हें सिर्फ बोर कर रहा है। मतलब, दोनों में कहीं न कहीं कुछ 'बग' है।"
"बग? लेकिन तूने तो कहा था कि तेरा वाला 'फ़ीचर' है!" बंटी ने आँखें बड़ी कीं।
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, "बंटी, हर फ़ीचर में थोड़े 'बग' होते ही हैं, उन्हें 'फिक्स' करना पड़ता है। और अब मुझे लगता है, हमें इस 'सिस्टम' को मिलकर फिक्स करना होगा।"
तभी आरव के फोन पर अनन्या का कॉल आया। उसने रिसीव किया।
"मिस्टर शर्मा," अनन्या की आवाज़ में एक प्रोफेशनल टोन थी, लेकिन उसमें अब वह पुरानी तीखी धार नहीं थी। "मैंने Zap ऐप के डेटा का विश्लेषण किया है। और मुझे लगता है कि हमें इस 'अल्गोरिदम' को तत्काल रूप से देखना होगा। मैचिंग रिजल्ट्स बहुत ही... अजीब हैं।"
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं आपकी बात समझ रहा हूँ, मिस वर्मा। 'शाकाहारी-चिकन टिक्का' और 'शायरी-शायरी' वाले मैच, है ना?"
अनन्या एक पल के लिए चुप हुई। "जी, बिल्कुल। तो मैं आपको ZapConnect के ऑफिस में एक मीटिंग के लिए इनवाइट कर रही हूँ। आज दोपहर 2 बजे। हमें इस 'सिस्टम एरर' को फिक्स करना होगा।"
"2 बजे? ठीक है, मिस वर्मा। मैं आ जाऊँगा।" आरव ने कहा।
कॉल कट गया। आरव ने बंटी की तरफ देखा। "शायद अब अनन्या भी मानने लगी है कि 'डेटा' के साथ 'दिल' का तड़का ज़रूरी है। या शायद, उसे 'सरकाई लो खटिया' पर डांस करने का डर सता रहा है।" वह हँसने लगा।
***
दोपहर 2 बजे। ZapConnect का कॉन्फ्रेंस रूम। अनन्या मेज पर अपने लैपटॉप के साथ बैठी थी, उसके सामने एक बड़ा सा प्रेजेंटेशन खुला था, जिसमें Zap ऐप के अजीबोगरीब मैचिंग रिजल्ट्स का डेटा भरा था। आरव अंदर आया, अपने चिर-परिचित अंदाज़ में, एक साधारण टी-शर्ट और जीन्स में। उसके हाथ में एक पुरानी डायरी थी।
अनन्या ने उसे देखा। "प्लीज़ बैठिए, मिस्टर शर्मा। मुझे उम्मीद है आप गंभीर होकर इस मुद्दे को देखेंगे।"
आरव कुर्सी खींचकर बैठा। "जब बात 'दिल' की हो, तो मैं हमेशा गंभीर होता हूँ, मिस वर्मा। हाँ, 'डेटा' की बात अलग है।" उसने मुस्कुराते हुए कहा।
अनन्या ने एक गहरी साँस ली। "ठीक है, तो सुनिए। हमने पिछले 48 घंटों का डेटा एनालाइज किया है। आपकी 'रूह का कनेक्शन' फ़ीचर ने कुछ बहुत ही अजीब मैच बनाए हैं।" उसने स्क्रीन पर एक स्लाइड खोली। "देखिये, ये हैं मिस्टर कपूर, जो एक मॉडर्न आर्टिस्ट हैं और 'Minimalism' में विश्वास रखते हैं। और उनके साथ मैच किया है मिस सिंह को, जो कबीर के दोहे सुनती हैं और हाथ से बुनी शॉल पसंद करती हैं। यह कैसे हो सकता है?"
आरव ने स्क्रीन पर देखा। "बिल्कुल हो सकता है, मिस वर्मा। हो सकता है उन दोनों को शांति पसंद हो। या हो सकता है दोनों को अपनी कला में एक 'आध्यात्मिक' तत्व ढूंढना पसंद हो।"
"आध्यात्मिक तत्व?" अनन्या ने माथा पकड़ लिया। "मिस्टर शर्मा, यह एक डेटिंग ऐप है! लोग पार्टनर ढूंढ रहे हैं, 'गुरू' नहीं!"
"पार्टनरशिप भी तो 'आध्यात्मिक' ही होती है न, जब दो रूहें मिलती हैं।" आरव ने आराम से कहा।
अनन्या ने मुँह बनाकर एक और स्लाइड खोली। "ठीक है, ये देखिये। मिस्टर त्यागी, जो दिन में 18 घंटे काम करते हैं और उनका पूरा डेटा 'वर्क-लाइफ़ बैलेंस' को दर्शाता है। और उनका मैच हुआ है मिस खन्ना से, जो 'स्लो लिविंग' में विश्वास रखती हैं और उनका दिन सुबह योगा और शाम को बागवानी से शुरू और ख़त्म होता है।"
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, "शायद उन्हें एक-दूसरे की कमी पूरी करनी हो, मिस वर्मा। 'वर्कहॉलिक' को थोड़ा आराम चाहिए, और 'स्लो लिविंग' वाले को थोड़े 'टारगेट'।"
अनन्या ने अपना सिर हिलाया। "यह सब बकवास है! आपका 'रूह का कनेक्शन' पूरी तरह से अन-लॉजिकल है! और मेरा डेटा... मेरा डेटा, जो बिलकुल सही था, फिर भी काम नहीं किया! रोहन मल्होत्रा एक 'परफेक्ट मैच' था 'ऑन पेपर', लेकिन वो बोरिंग था! आप मेरे 'एल्गोरिदम' को दोष दे रहे हैं?"
आरव ने अपनी कुर्सी सीधी की। "मैं किसी को दोष नहीं दे रहा, मिस वर्मा। मैं बस यह कह रहा हूँ कि डेटा और दिल, दोनों अकेले अधूरे हैं। आपका डेटा सिर्फ ऊपर-ऊपर की चीज़ें दिखाता है। और मेरा 'रूह का कनेक्शन'... हो सकता है वो थोड़ा 'ज़्यादा रूहानी' हो गया हो, और 'ज़्यादा ग्राउंडेड' होने की ज़रूरत हो।"
यह पहली बार था कि आरव ने अपने फ़ीचर में किसी कमी को स्वीकार किया था। अनन्या थोड़ी हैरान हुई, लेकिन उसने इसे दिखाया नहीं।
"तो अब क्या?" अनन्या ने कहा। "हमें इसे ठीक करना होगा। ये एक बड़ा 'बग' है। अगर ये ऐसे ही चलता रहा, तो Zap की रेपुटेशन ख़तरे में पड़ जाएगी।"
"तो इसका 'सॉल्यूशन' क्या है, मिस वर्मा?" आरव ने पूछा।
अनन्या ने अपनी साँस ली। "हमें 'कोर अल्गोरिदम' में जाना होगा। इसे स्क्रैच से एनालाइज करना होगा। देखना होगा कि डेटा पॉइंट्स और 'रूह के कनेक्शन' के बीच का संतुलन कहाँ बिगड़ रहा है।"
आरव ने सिर हिलाया। "ये आसान नहीं होगा। ये बहुत गहरा कोड है। इसमें घंटों लगेंगे।"
"तो लगेंगे!" अनन्या ने दृढ़ता से कहा। "यह ऐप मेरे करियर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। मैं इसे ऐसे बर्बाद नहीं होने दे सकती।"
आरव ने उसकी आँखों में देखा। उसे अनन्या की प्रोफेशनल निष्ठा पसंद आई। "ठीक है, मिस वर्मा। तो फिर आज रात ही इस पर काम शुरू करते हैं। इस 'बग' को फिक्स करने के लिए हमें कई घंटे साथ बिताने होंगे।"
अनन्या थोड़ी हिचकिचाई। देर रात तक काम करना उसके लिए आम था, लेकिन आरव शर्मा के साथ? यह थोड़ा अलग था। पर ऐप की हालत देखकर उसके पास कोई और रास्ता नहीं था।
"ठीक है, मिस्टर शर्मा," अनन्या ने आख़िरकार कहा। "मैं अपनी टीम को देर रात तक रुकने के लिए कह देती हूँ। हम आज रात ही इसे फिक्स करेंगे। उम्मीद है आप पिज़्ज़ा और कॉफ़ी के साथ काम कर सकते हैं।"
आरव मुस्कुराया। "पिज़्ज़ा और कॉफ़ी? मिस वर्मा, मैं ग़ालिब के शेरों और चाय की चुस्कियों के साथ भी काम कर सकता हूँ।"
अनन्या ने आँखें घुमाईं, लेकिन उसके होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान आ गई। "ठीक है। बस आज रात 'शायरी' नहीं। सिर्फ़ 'कोड'।"
"डील!" आरव ने कहा।
जैसे ही आरव कॉन्फ़्रेंस रूम से निकला, अनन्या ने अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर झुककर एक लंबी साँस ली। आज रात उसे आरव शर्मा के साथ काम करना था, जिसे वह अब तक सिर्फ एक 'टेकी सनकी' मानती थी। यह उसके 'लॉजिक' के लिए एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन कहीं न कहीं, उसे लगा कि यह 'चुनौती' उतनी बुरी भी नहीं होगी। शर्त जीतने के लिए, और शायद कुछ और पाने के लिए भी, उसे इस 'बग' को फिक्स करना ही होगा।
Chapter 6
ZapConnect के ऑफिस में देर शाम तक हलचल बनी रही। अनन्या ने अपनी छोटी सी टीम को 'कोर अल्गोरिदम' को एनालाइज करने के लिए तैयार किया। एयर-कंडीशंड कमरा ठंडा था, लेकिन माहौल में एक अजीब सी गर्मी थी – काम की, तनाव की, और शायद थोड़ी उत्सुकता की भी।
अनन्या ने प्रिया को बुलाया। "प्रिया, कॉफ़ी मशीन को टॉप-अप कराओ, और हाँ, कुछ पिज़्ज़ा भी ऑर्डर कर दो। टीम के लिए।" उसने एक पल सोचा, "और मिस्टर शर्मा के लिए, एक चाय का इंतजाम कर देना। देसी स्टाइल वाली।"
प्रिया मुस्कुराई। "जी मैम। देसी स्टाइल वाली? पहली बार सुन रही हूँ।"
अनन्या ने उसे घूरा। "बस जो कहा है, वो करो।" वह जानती थी कि आरव को चाय पसंद है, उसने उसकी प्रोफ़ाइल में पढ़ा था। यह एक छोटी सी बात थी, लेकिन अब उसे लगने लगा था कि इन 'छोटी-छोटी बातों' पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
कुछ देर बाद, आरव कॉन्फ़्रेंस रूम में आया। टीम के बाकी सदस्य भी अपनी-अपनी जगह पर बैठे थे, उनके लैपटॉप खुले हुए थे। अनन्या ने उन्हें 'कोर अल्गोरिदम' का ओवरव्यू दिया।
"तो मिस्टर शर्मा," अनन्या ने आरव की तरफ़ देखा, "हम शुरुआत कहाँ से करें? आपके 'रूह का कनेक्शन' से, या हमारे 'डेटा पॉइंट्स' से?"
आरव मुस्कुराया। "मिस वर्मा, जब आप बीमार होते हैं, तो डॉक्टर बीमारी की जड़ पकड़ता है, लक्षणों को नहीं। हम पहले आपके 'डेटा पॉइंट्स' की जड़ें देखेंगे, फिर अपने 'रूह के कनेक्शन' के 'बग्स' को।"
अनन्या ने सिर हिलाया। "ठीक है। तो पहले हमारा 'कोर मैचिंग अल्गोरिदम'।" उसने स्क्रीन पर कोड खोल दिया। "देखिए, हम यहां यूज़र की डेमोग्राफिक्स, पसंदीदा जगहें, हॉबीज़, और प्रोफ़ेशनल बैकग्राउंड के आधार पर स्कोर देते हैं।"
आरव ने कोड को ध्यान से देखा। उसकी उँगलियाँ अपने आप स्क्रीन पर ज़ूम करने लगीं। "हम्म... सब कुछ बहुत 'लॉजिकल' है, मिस वर्मा। इतना लॉजिकल कि इसमें 'लाइफ़' ही नहीं है।"
अनन्या ने भौंहें चढ़ाईं। "मिस्टर शर्मा, यह एक डेटिंग ऐप है, 'योग साधना' शिविर नहीं।"
आरव ने स्क्रीन पर एक सेक्शन पर उंगली रखी। "देखिए, यहाँ आपने 'पसंदीदा संगीत' में 'Genre' डाला है – 'पॉप', 'रॉक', 'क्लासिकल'। लेकिन 'पॉप' पसंद करने वाला व्यक्ति 'एल्बम' पसंद करने वाले से कैसे मिलेगा? या 'रॉक' पसंद करने वाला 'गिटार रिफ' को कैसे महसूस करेगा? संगीत सिर्फ एक 'टाइप' नहीं होता, वो एक 'फीलिंग' होता है।"
अनन्या ने सोचा। "ठीक है, लेकिन हम डेटा में 'फीलिंग' कैसे कैप्चर करें?"
"आप नहीं कर सकतीं।" आरव ने कहा। "इसीलिए मैंने 'रूह का कनेक्शन' बनाया था। वो लोगों के 'मनपसंद मौसम' या 'सुबह उठकर सबसे पहले क्या करते हैं' जैसी चीज़ों से मैच करता है।"
अनन्या ने कहा, "और यही 'अजीबोगरीब मैच' बनाता है। मुझे 'बारिश पसंद है' और 'आपको चाय पसंद है', तो क्या हम परफेक्ट मैच हैं? क्या ये सब 'डेटा' में फिट बैठता है?"
आरव ने कहा, "कभी-कभी, मिस वर्मा, सबसे अच्छी चीज़ें 'डेटा' में फिट नहीं बैठतीं।" उसकी आवाज़ धीमी हो गई। "जैसे, मेरी दादी को 'पुरानी किताबें' पसंद थीं और मेरे दादाजी को 'अधूरे किस्से'। उनका कोई 'डेटा मैच' नहीं था, पर उन्होंने 60 साल साथ बिताए।"
अनन्या ने आरव की तरफ देखा। उसकी आवाज़ में एक उदासी थी। "मैं समझ सकती हूँ।" उसने कहा। "मेरे पिताजी हमेशा मुझसे कहते हैं कि 'डेटा कभी झूठ नहीं बोलता', इसलिए मैंने हमेशा डेटा पर ही भरोसा किया। मेरे लिए ज़िंदगी भी एक 'एक्सेल शीट' ही है।"
"तो आपकी एक्सेल शीट में 'प्यार' के लिए कोई कॉलम नहीं है?" आरव ने पूछा।
अनन्या ने अपनी आँखें घुमा लीं। "नहीं। 'प्यार' एक 'रिस्क फैक्टर' है, मिस्टर शर्मा। मैं 'कैलकुलेटेड रिस्क' लेती हूँ, 'अनकंट्रोल्ड इमोशंस' नहीं।"
आरव ने मुस्कुराया। "पर लाइफ में कुछ चीज़ें 'अनकंट्रोल्ड' ही अच्छी लगती हैं, मिस वर्मा। जैसे बारिश में भीगना, या बिना सोचे किसी को दिल दे देना।"
अनन्या चुप हो गई। उसने कभी इस तरह से सोचा ही नहीं था।
धीरे-धीरे, बातचीत कोड से हटकर उनकी ज़िंदगी पर आने लगी। पिज़्ज़ा आ चुका था, और टीम के बाकी सदस्य भी अपनी-अपनी बातचीत में मशगूल थे। अनन्या और आरव कॉन्फ्रेंस टेबल के एक कोने में बैठे थे, पिज़्ज़ा खाते हुए और कॉफ़ी पीते हुए। आरव की चाय भी आ गई थी।
"ये चाय अच्छी है," आरव ने कहा, एक चुस्की लेते हुए। "आपकी पसंद की, या प्रिया की?"
अनन्या ने मुस्कुराया। "मेरी ही। मैंने सुना है आप 'चाय के शौकीन' हैं। ये भी एक 'डेटा पॉइंट' ही है।"
आरव हंस पड़ा। "आप तो हर चीज़ को 'डेटा पॉइंट' ही बना देती हैं, मिस वर्मा।"
"क्योंकि मैं 'प्रैक्टिकल' हूँ, मिस्टर शर्मा। मुझे इमोशंस से ज़्यादा 'रीज़न' पर भरोसा है।" अनन्या ने कहा।
"और मैं 'रीज़न' से ज़्यादा 'इमोशन' पर। शायद यही वजह है कि हम दोनों एक-दूसरे से इतनी बहस करते हैं।" आरव ने कहा। "और शायद यही वजह है कि Zap ऐप को 'फिक्स' करने के लिए हमें एक-दूसरे की ज़रूरत है।"
अनन्या ने सिर हिलाया। "शायद। तो आपके हिसाब से 'रूह का कनेक्शन' में क्या 'फिक्स' करना चाहिए?"
"उसे थोड़ा 'ज़मीन से जोड़ना' होगा।" आरव ने कहा। "जैसे, 'बारिश पसंद है' के साथ 'बारिश में चाय की जगह गर्म पकौड़े पसंद हैं' भी पूछना होगा। या 'शायरी पसंद है' के साथ 'किसके साथ शायरी पसंद है' भी पूछना होगा। मतलब, 'भावना' के साथ 'सन्दर्भ' भी।"
अनन्या ने अपने लैपटॉप पर टाइप करना शुरू किया। "ओके, तो हम 'माइक्रो-प्रेफरेंसेज' को 'इमोशनल क्यूज' के साथ जोड़ेंगे। ये बुरा आईडिया नहीं है, मिस्टर शर्मा।"
आरव ने अपनी आइब्रो ऊपर उठाई। "मिस्टर शर्मा ने कहा? ये तो एक 'ऐतिहासिक पल' है।"
अनन्या ने हल्की सी हँसी। "ज़्यादा ख़ुश मत होइए। अभी बहुत काम बाकी है।"
घंटे बीतते गए। बाहर अंधेरा गहरा होता जा रहा था। टीम के कुछ लोग तो अपने डेस्क पर ही ऊंघने लगे थे। लेकिन अनन्या और आरव अभी भी पूरी लगन से काम कर रहे थे। वे अब 'तू-तू, मैं-मैं' करने की बजाय, एक-दूसरे के सुझावों को ध्यान से सुन रहे थे। अनन्या आरव को समझा रही थी कि कैसे 'यूज़र एक्सपीरियंस' को 'डेटा-ड्रिवन डिज़ाइन' से बेहतर बनाया जा सकता है, और आरव उसे बता रहा था कि कैसे 'यूज़र इमोशन' को कोड में 'कैप्चर' किया जा सकता है।
एक पल के लिए, अनन्या ने अपना लैपटॉप बंद किया और अपनी आँखें मसलीं। "लगता है मुझे थोड़ा ब्रेक लेना चाहिए। मेरी आँखें थक गई हैं।"
आरव ने देखा कि वह कितनी थकी हुई लग रही थी। "थोड़ी देर चाय पी लेते हैं? या कॉफ़ी?"
अनन्या ने मुस्कुराया। "कॉफ़ी। बहुत सारी कॉफ़ी।"
वे दोनों कॉन्फ्रेंस रूम से बाहर निकले और छोटे से किचन एरिया की तरफ गए। अनन्या ने कॉफ़ी मशीन से कॉफ़ी निकाली। आरव ने अपनी चाय खुद बनाई।
"आप इतनी मेहनत क्यों करती हैं, मिस वर्मा?" आरव ने पूछा। "मतलब, ये सिर्फ एक ऐप है। लोग आते-जाते रहेंगे।"
अनन्या ने एक लंबी साँस ली। "आप नहीं समझेंगे, मिस्टर शर्मा। मेरे लिए ये सिर्फ़ एक ऐप नहीं है। ये मेरा सपना है। मेरे पिताजी ने हमेशा कहा कि 'लड़की होकर तुम क्या करोगी?' मैंने हमेशा उन्हें ग़लत साबित करने की कोशिश की है। ये ऐप मेरी मेहनत का फल है। मैं दुनिया को दिखाना चाहती हूँ कि मैं क्या कर सकती हूँ।"
आरव ने उसकी आँखों में देखा। उसकी आवाज़ में एक सच्चाई थी, एक दर्द था जो आरव ने पहले कभी नहीं देखा था। "मुझे लगा था आप सिर्फ 'कॉर्पोरेट सीढ़ी' चढ़ना चाहती हैं।"
"नहीं," अनन्या ने कहा, उसकी आवाज़ धीमी थी। "मैं अपनी जगह बनाना चाहती हूँ। एक ऐसी जगह जहाँ कोई मुझसे ये न कहे कि मैं 'लड़की' हूँ और कुछ नहीं कर सकती।"
आरव ने धीरे से अपना कप नीचे रखा। "आपकी 'ज़िंदगी की एक्सेल शीट' में ये कॉलम बहुत गहरा है, मिस वर्मा।"
अनन्या की आँखें नम हो गईं, लेकिन उसने खुद को संभाला। "हाँ। और इसलिए, मैं इसे किसी भी क़ीमत पर सफल बनाना चाहती हूँ। कोई 'बग' इसे रोक नहीं सकता।"
आरव ने उसकी तरफ देखा। "तो फिर हम इसे मिलकर सफल बनाएंगे।" उसने ईमानदारी से कहा। "कोई 'एरर 404' इसे रोक नहीं सकता।"
अनन्या ने आरव की आँखों में देखा। पहली बार, उसने उसके चेहरे पर सिर्फ 'सनक' या 'शायरी' नहीं देखी, बल्कि एक गहरी समझ और सहानुभूति देखी। वह एक पल के लिए भूल गई कि वे शर्त पर थे। उसे लगा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति के साथ थी जो उसे सच में समझ सकता था।
तभी, कमरे में लगे सर्वर से एक तेज़ बीप की आवाज़ आई। आरव और अनन्या दोनों चौंक गए।
"क्या हुआ?" अनन्या ने पूछा।
आरव तेज़ी से सर्वर रूम की तरफ भागा। "मुझे नहीं पता। लगता है... सर्वर क्रैश हो गया।"
अनन्या का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। "क्रैश हो गया? नहीं! ये नहीं हो सकता!" वह भी उसके पीछे भागी। उनकी रातों की मेहनत, उनका सारा डेटा, उनका ऐप – सब कुछ दाँव पर लगा था। और ये सब उस समय हुआ था, जब वे एक-दूसरे को समझने लगे थे।
Chapter 7
आरव तेज़ी से सर्वर रूम की तरफ भागा, अनन्या उसके ठीक पीछे थी। कमरे में चारों तरफ़ कंप्यूटर और सर्वर के बड़े-बड़े रैक लगे थे, जिन पर लगी छोटी-छोटी हरी लाइटें अब तेज़ी से लाल हो चुकी थीं और एक अजीब सी चीख़ जैसी आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
अनन्या का चेहरा घबराहट से सफ़ेद पड़ गया। "ये क्या हुआ, आरव? क्या सारा डेटा चला जाएगा? हमारा ऐप... क्या सब ख़त्म हो गया?" उसकी आवाज़ में डर साफ़ झलक रहा था।
आरव ने एक पल के लिए उसे देखा, फिर तुरंत सर्वर रैक के सामने घुटनों के बल बैठ गया। "शांत हो जाओ, अनन्या। इतना घबराओ मत। सब ठीक हो जाएगा।" उसकी आवाज़ में एक अजीब सी स्थिरता थी, जो अनन्या को थोड़ी राहत दे रही थी। उसने तेज़ी से कीबोर्ड पर हाथ चलाया। "लगता है मेन पॉवर सर्ज हुआ है, या कोई बड़ी फाइल क्रैश हुई है।"
"पॉवर सर्ज? लेकिन यहाँ तो बैकअप जेनरेटर भी है!" अनन्या ने कहा, उसका दिमाग़ तेज़ी से काम कर रहा था।
"हाँ, लेकिन कभी-कभी बैकअप भी पहले 'मेन' पर डिपेंड करता है।" आरव ने कहा, उसकी आँखें स्क्रीन पर जमी हुई थीं। "देखो, सारे कनेक्शन डिसकनेक्ट हो गए हैं।"
वह सर्वर रैक के अंदर झाँका, जहाँ तारों का एक उलझा हुआ जाल था। उसकी उँगलियाँ तेज़ी से कुछ केबलों को चेक कर रही थीं। "अनन्या, क्या तुम वो लाल वाली टूल-किट ला सकती हो? जो कोने में है।"
अनन्या ने तुरंत टूल-किट उठाई और उसे आरव की तरफ़ बढ़ाया। उसका हाथ हल्का काँप रहा था। "क्या... क्या हम इसे ठीक कर पाएंगे?"
आरव ने टूल-किट से एक छोटा स्क्रूड्राइवर निकाला। "ज़रूर। मेरे सिस्टम में आज तक कोई 'बग' ऐसा नहीं आया जिसे मैंने फिक्स न किया हो।" उसने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी आँखों में भी तनाव साफ़ दिख रहा था। "देखो, मुझे यहाँ कुछ कनेक्शन ढीले लग रहे हैं। लगता है किसी ने गलती से तार खींचा होगा।"
वह सावधानी से तारों को फिर से कसने लगा, उसकी भौंहें सिकुड़ी हुई थीं। अनन्या उसके ठीक बगल में खड़ी थी, उसकी साँसें तेज चल रही थीं। कमरे में बीप की आवाज़ और सर्वर की घनघनाहट के सिवा और कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।
"अनन्या, ज़रा वो बड़ी वाली स्क्रीन पर देखो। क्या 'नेटवर्क मॉनिटर' पर कोई 'इनकमिंग रिक्वेस्ट' आ रही है?" आरव ने बिना मुड़े पूछा।
अनन्या ने तुरंत दूसरी स्क्रीन पर देखा। "नहीं! सब 'ज़ीरो' है। कुछ भी नहीं दिख रहा।" उसकी आवाज़ निराशा से भरी थी।
"हम्म... मतलब कनेक्शन टूटा है। कहीं न कहीं।" आरव ने कहा। वह एक और तार चेक कर रहा था। "अच्छा, ज़रा वो हरी वाली स्विच दबाना, जो उस नीले वाले बॉक्स पर है।"
अनन्या ने बताई हुई स्विच दबाई। "दबा दिया।"
कोई बदलाव नहीं।
अनन्या ने निराशा में आरव की तरफ देखा। "ये नहीं हो रहा है, आरव। मुझे लगता है हमें IT टीम को बुलाना चाहिए। शायद ये हमारे बस की बात नहीं है।"
आरव ने सिर ऊपर उठाया, उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें थीं। "नहीं। IT टीम आएगी, सब कुछ 'रिबूट' कर देगी, और हमें पता भी नहीं चलेगा कि 'बग' कहाँ था। हमें इसका 'रूट कॉज' ढूंढना होगा। ये हमारे ऐप के लिए बहुत ज़रूरी है।"
उसने फिर से तारों को देखा। "अनन्या, मुझे वो छोटा वाला टॉर्च देना, जो टूल-किट में है।"
अनन्या ने टॉर्च दी। आरव ने उसे सर्वर के बिल्कुल अंदरूनी हिस्से में चमकाया। "मुझे लग रहा था... हाँ! मिल गया!" उसकी आवाज़ में एक जीत का भाव था। "देखो, यहाँ एक छोटी सी 'केबल' निकली हुई है। ये 'मेन डेटा पाथ' को कंट्रोल करती है। अगर ये निकली, तो पूरा सिस्टम बैठ जाएगा।"
अनन्या ने झुककर देखा। वाकई, एक पतला सा तार अपनी जगह से खिसका हुआ था। "तो... इसे वापस लगा दो।"
आरव ने सावधानी से उस तार को उसकी जगह पर लगाने की कोशिश की, लेकिन हाथ में पसीना होने के कारण वह फिसल रहा था। "अनन्या, ज़रा तुम मुझे पकड़ो। ताकि मेरा हाथ स्थिर रहे।"
अनन्या ने बिना सोचे आरव के कंधे पर हाथ रखा, और उसे हल्का सा सहारा दिया। उनकी साँसों की गर्माहट एक-दूसरे को महसूस हो रही थी। आरव ने अपनी उँगलियों का सारा ज़ोर लगाकर उस तार को वापस उसकी जगह पर धकेला। एक हल्का सा 'क्लिक' सुनाई दिया।
आरव ने तुरंत मुँह ऊपर करके स्क्रीन की तरफ देखा। "चेक करो, नेटवर्क मॉनिटर!"
अनन्या ने अपनी आँखों में उम्मीद लिए स्क्रीन पर देखा। धीरे-धीरे, 'नेटवर्क मॉनिटर' पर हरे रंग की लाइटें जलने लगीं। 'इनकमिंग रिक्वेस्ट्स' की संख्या बढ़ने लगी। 'पॉवर इंडिकेटर्स' भी हरे हो गए।
कमरे में बीप की तेज़ आवाज़ रुक गई और सर्वर की घनघनाहट एक सामान्य 'हम' में बदल गई।
"हो गया!" अनन्या खुशी से चिल्लाई। उसकी आवाज़ में एक अद्भुत उत्साह था। "आरव! हो गया! सिस्टम 'ऑनलाइन' हो गया!"
आरव ने राहत की साँस ली। "हाँ! हो गया! मैंने कहा था न!" उसकी आँखों में एक चमक थी।
दोनों एक पल के लिए एक-दूसरे को देखते रहे। रात के उस सन्नाटे में, जहाँ सर्वर की आवाज़ के सिवा कुछ नहीं था, उनकी साँसें और धड़कनें एक-दूसरे को महसूस हो रही थीं। उनके चेहरे पर पसीना था, लेकिन आँखों में जीत की चमक और एक-दूसरे के प्रति एक नई समझ थी। वे थके हुए थे, लेकिन इस पल ने उन्हें एक-दूसरे के और क़रीब ला दिया था।
अनन्या ने देखा कि आरव के माथे पर पसीने की एक बूंद टपक रही थी। उसने बिना सोचे, अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसे पोंछ दिया। आरव हल्का सा चौंक गया, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
आरव ने अपनी नज़रें झुकाईं, और फिर धीरे से कहा, "तुम्हारी एक्सेल शीट सी ज़िंदगी में, मैं एक छोटा सा एरर ही सही... पर आज रात मैंने तुम्हारे सिस्टम को क्रैश होने से बचा लिया।" उसकी आवाज़ में हल्की सी शरारत थी।
अनन्या ने उसकी बात सुनी, और फिर एक गहरी साँस ली। उसकी आँखें चमक उठीं। उसने पहली बार खुलकर मुस्कुराया – एक ऐसी मुस्कान जो उसके चेहरे पर शायद ही कभी आती थी, एक ऐसी मुस्कान जो उसके दिल से निकली थी। वह अब 'प्रैक्टिकल' अनन्या नहीं थी, बल्कि एक ऐसी लड़की थी जिसने अभी-अभी एक बड़ी जंग जीती थी, और उस जंग में उसके साथ एक ऐसा अजीबोगरीब 'टेकी' था जिसने उसे सिखाया था कि 'एरर' भी कभी-कभी 'फ़ीचर' बन सकता है।
उसने अपना सिर हल्का सा झुकाया, उसकी मुस्कान और गहरी हो गई। "हाँ, मिस्टर शर्मा। मुझे लगता है... तुम इस 'सिस्टम' के लिए 'ज़रूरी' हो।"
आरव का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। अनन्या की यह मुस्कान, ये स्वीकारोक्ति... उसके लिए किसी भी कोड को डीबग करने से ज़्यादा बड़ी जीत थी। वह अपनी जगह से उठकर अनन्या की तरफ़ मुड़ा, उसके हाथ अनजाने में अनन्या की तरफ बढ़े। माहौल में एक अजीब सी ऊर्जा थी, कुछ ऐसा जो अनकहा था, पर महसूस किया जा सकता था। वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे, जैसे दुनिया में सिर्फ़ वही दो लोग हों।
तभी, कॉन्फ्रेंस रूम का दरवाज़ा तेज़ी से खुला।
"अरे भाई! क्या चल रहा है? मैंने सोचा था तुम लोग भूखे मर रहे होगे!" बंटी कमरे में घुसा, उसके हाथ में दो बड़े-बड़े पिज़्ज़ा बॉक्स थे। "देखो! मैंने डबल पनीर पिज़्ज़ा और कुछ नए वाले गार्लिक ब्रेड भी लिए हैं! क्या ख़ुशबू है! एकदम 'वाह-वाह'!"
बंटी की आवाज़ और पिज़्ज़ा की ख़ुशबू ने उस जादुई पल को पूरी तरह से तोड़ दिया। आरव और अनन्या दोनों चौंक गए, और तुरंत एक-दूसरे से दूर हट गए। अनन्या ने अपने बाल ठीक किए, और आरव ने अपना हाथ पीछे कर लिया।
बंटी ने उन्हें ऐसे अलग होते हुए देखा और माथा खुजाया। "क्या हुआ? तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो? सर्वर रूम में? लाइट इतनी डिम क्यों है? और ये क्या... पसीना क्यों आ रहा है? और मैडम, आप मुस्कुरा क्यों रही हैं? मुझे लगा था कि आप लोग 'बग' फिक्स कर रहे थे?"
अनन्या ने एक लंबी साँस ली और अपनी प्रोफेशनल आवाज़ में कहा, "हाँ बंटी, हम 'बग फिक्स' कर रहे थे। और सर्वर... सर्वर अब ठीक हो गया है।" उसने जानबूझकर 'आरव' का ज़िक्र नहीं किया।
आरव ने बंटी की तरफ घूरकर देखा, जैसे कहना चाह रहा हो, 'तेरी टाइमिंग का क्या कहूँ, यार!'
बंटी ने पिज़्ज़ा बॉक्स मेज पर रखे और उत्सुकता से पूछा। "अरे वाह! फिक्स हो गया? अकेले? तुम दोनों ने मिलकर? कमाल कर दिया! मुझे लगा था पूरी रात लगेगी। चलो, अब पिज़्ज़ा खाते हैं! मुझे तो भूख के मारे पेट में चूहे दौड़ रहे थे।"
अनन्या ने बंटी की तरफ देखा, और फिर आरव की तरफ। वह एक पल पहले के उस पल को याद कर रही थी, और अब बंटी की बेफ़िक्री को देखकर उसके होंठों पर फिर से एक छोटी सी, छिपी हुई मुस्कान आ गई।
"हाँ बंटी, चलो पिज़्ज़ा खाते हैं।" अनन्या ने कहा, और कॉन्फ़्रेंस रूम की तरफ मुड़ गई।
आरव ने बंटी की तरफ देखते हुए फुसफुसाया, "तू मेरा दोस्त है या मेरा दुश्मन? हमेशा ग़लत टाइम पर ही आता है!"
बंटी ने कंधे उचकाए। "क्या करूँ भाई? भूखे पेट थोड़ी न लव-स्टोरी बनती है!" वह हँसता हुआ पिज़्ज़ा के डिब्बे लेकर कॉन्फ़्रेंस रूम की तरफ़ बढ़ गया, माहौल को पूरी तरह हल्का-फुल्का कर चुका था।
आरव ने एक गहरी साँस ली, उस पल को याद करते हुए जो बंटी ने तोड़ दिया था। लेकिन अनन्या की वो मुस्कान, और उसका 'ज़रूरी' वाला शब्द... वह उसके दिमाग़ में गूँज रहा था। यह एक 'एरर' नहीं था, यह शायद एक नया 'कनेक्शन' था, जो अब और गहरा होता जा रहा था। शर्त तो अभी भी थी, लेकिन अब उसे लग रहा था कि यह शर्त सिर्फ एक बहाना थी, किसी और रिश्ते की शुरुआत का।
Chapter 8
कॉन्फ़्रेंस रूम में बंटी ने उत्साह से पिज़्ज़ा के दो बड़े-बड़े डिब्बे मेज पर रखे और बोला, "वाह मैडम! मैंने कहा था न, मेरी टाइमिंग कभी ग़लत नहीं होती! जब भूख लगती है, तभी मेरा पिज़्ज़ा आता है!" उसकी आवाज़ में वही चिर-परिचित बेफ़िक्री थी, जिसने एक पल पहले के जादुई माहौल को तार-तार कर दिया था।
अनन्या ने एक हल्की, बनावटी मुस्कान दी और अपने लैपटॉप की तरफ मुड़ गई। "हाँ बंटी, तुम्हारी टाइमिंग परफेक्ट है।" उसकी आवाज़ सामान्य होने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन आरव जानता था कि अंदर ही अंदर वह अभी भी उस पल की गूँज महसूस कर रही थी।
आरव ने बंटी की तरफ़ मुँह बनाकर देखा, जैसे कह रहा हो, 'कुछ तो कर ले यार, थोड़ी देर चुप रह जा!' लेकिन बंटी ने उसकी तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया। वह पहले से ही पिज़्ज़ा का एक बड़ा टुकड़ा उठा चुका था, जिससे चीज़ टपक रहा था, और उसे मज़े से खा रहा था।
"मैडम, आप भी खाइए! ये एक्स्ट्रा चीज़ और पेपरोनी वाला है, एकदम टॉप-क्लास! स्ट्रेस बस्टर!" बंटी ने पिज़्ज़ा का टुकड़ा अनन्या की तरफ बढ़ाते हुए कहा।
अनन्या ने एक टुकड़ा लिया, लेकिन उसकी निगाहें बार-बार आरव की तरफ जा रही थीं, और आरव की निगाहें भी चोरी-छिपे अनन्या को देख रही थीं। दोनों के बीच एक अजीब सी ख़ामोशी थी, जिसे बंटी अपनी बातों और पिज़्ज़ा की ख़ुशबू से भर रहा था।
"सर्वर तो ठीक हो गया, आरव," अनन्या ने ख़ामोशी तोड़ने की कोशिश की। "अब क्या? 'माइक्रो-प्रेफरेंसेज' पर काम शुरू करें?"
आरव ने एक गहरी साँस ली। "हाँ। शुरू कर देते हैं। जितनी जल्दी हो, उतना अच्छा।"
टीम के बाकी सदस्य, जो नींद से जागकर पिज़्ज़ा का इंतज़ार कर रहे थे, अब फटाफट अपने-अपने लैपटॉप पर काम में जुट गए। अनन्या और आरव ने भी खुद को काम में झोंक दिया, मानो उस रात के किसी भी दूसरे पल के बारे में न सोचने की कसम खा ली हो।
लेकिन मन कहाँ मानता है? अनन्या की उँगलियाँ कीबोर्ड पर चल रही थीं, पर उसका दिमाग़ बार-बार आरव के उस वाक्य पर अटक रहा था, "तुम्हारी एक्सेल शीट सी ज़िंदगी में, मैं एक छोटा सा एरर ही सही..." और फिर उसकी अपनी प्रतिक्रिया, "तुम इस 'सिस्टम' के लिए 'ज़रूरी' हो।" उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था। वह कैसे इतनी 'इमोशनल' हो सकती है? वह, अनन्या वर्मा, जो 'लॉजिक' और 'डेटा' पर जीती थी! यह सब आरव की वजह से हो रहा था। उसकी 'शायरी', उसकी 'ग़ालिब', उसकी 'रूह का कनेक्शन' वाली बातें... वह उसे 'डिस्ट्रैक्ट' कर रहा था।
उसने अपने मन में तेज़ आवाज़ में कहा, 'नो अनन्या! नो इमोशंस! यह सिर्फ एक 'प्रोफेशनल' रिश्ता है। एक 'बग फिक्सिंग' का कॉन्ट्रैक्ट! इससे ज़्यादा कुछ नहीं!' उसने जानबूझकर खुद को याद दिलाया कि वे एक शर्त पर थे। एक शर्त, जो उसे 'सही' साबित करेगी, और आरव को 'ग़लत'।
आरव भी कुछ ऐसी ही उधेड़बुन में था। अनन्या की वो मुस्कान... उसकी आँखों में वो चमक... 'ज़रूरी' वाला शब्द। क्या इसका कोई मतलब था? या उसने सिर्फ एहसान में कह दिया था? उसने बंटी को एक और पिज़्ज़ा का टुकड़ा खाते हुए देखा और सोचा, 'इसकी टाइमिंग... हे भगवान! अगर ये बीच में न आता तो पता नहीं क्या होता! या शायद अच्छा ही हुआ कि आ गया! कहीं मैं कुछ ऐसा न कर देता, जिसके लिए बाद में पछताना पड़ता।'
वह जानता था कि अनन्या उससे कितनी अलग थी। वह डेटा की दुनिया में जीती थी, और वह दिल की। उनका साथ आना, एक 'एरर' ही तो था। एक 'सिस्टम एरर'। पर क्या वह एरर 'प्यारा' था? उसे खुद भी नहीं पता था।
घंटे बीतते गए। सुबह के चार बज गए। टीम के सदस्य अब पूरी तरह से थके हुए थे। अनन्या ने कहा, "बस करो दोस्तों। बाकी का काम सुबह करेंगे। तुम सब घर जा सकते हो।"
टीम के सदस्य फ़ौरन उठकर खुशी-खुशी बाहर निकल गए। बंटी ने उबासी ली। "मैं भी चलता हूँ भाई। मुझे सुबह उठकर फिर से समोसे खाने हैं।" वह भी अपने पिज़्ज़ा बॉक्स लेकर निकल गया, जाते-जाते आरव को आँख मारते हुए।
कमरे में फिर से ख़ामोशी छा गई। अनन्या और आरव अकेले रह गए।
अनन्या ने अपने लैपटॉप को बंद किया और बैग में रखा। "मुझे लगता है कि हम दोनों के बीच एक बात साफ़ होनी चाहिए, मिस्टर शर्मा।" उसकी आवाज़ थोड़ी सख्त थी, जैसे उसने खुद को याद दिलाया हो कि उसे 'प्रैक्टिकल' रहना है।
आरव ने उसकी तरफ देखा। "क्या बात, मिस वर्मा?"
"ये सब जो आज हुआ," उसने हल्का सा हाथ हिलाकर सर्वर रूम की तरफ इशारा किया, "और ये जो हमने बातें कीं... ये सब 'प्रोफेशनल' था। सिर्फ़ काम। हमारी शर्त अभी भी बाकी है। और मैं आपको बता दूँ, मेरा 'डेटा-ड्रिवन अप्रोच' ही जीतेगा। 'रूह का कनेक्शन' सिर्फ एक 'फ़िल्मी' फ़ीचर है।" उसने अपनी आवाज़ में आत्मविश्वास लाने की पूरी कोशिश की।
आरव को लगा जैसे किसी ने गरम पानी डाल दिया हो। पल भर पहले की सारी नरमी ग़ायब हो चुकी थी। "अच्छा? तो ये सब बस 'प्रोफेशनल' था? और आपकी वो मुस्कान...?"
अनन्या का चेहरा सख़्त हो गया। "वो... वो राहत की मुस्कान थी कि हमारा सिस्टम बच गया। इसमें कोई 'फ़ीलिंग' नहीं थी। मैं अपनी ज़िंदगी को डेटा से कंट्रोल करती हूँ, आरव। इमोशन से नहीं।" उसने जानबूझकर उसका नाम लिया, जैसे उसे फिर से अपनी हदें याद दिला रही हो।
आरव ने एक पल के लिए अपनी आँखों में दर्द महसूस किया, लेकिन फिर उसने भी खुद को संभाल लिया। "ठीक है, मिस वर्मा। जैसा आप चाहें। अगर आपके लिए सब कुछ 'डेटा' ही है, तो ठीक है।" उसने भी अपनी आवाज़ में ठंडक भर ली। "तो फिर हम दोनों अपनी-अपनी 'परफेक्ट मैचिंग' की तलाश में जुट जाते हैं। देखते हैं कौन पहले 'सच्ची डेट' पर जाता है।" उसकी आवाज़ में चुनौती थी।
अनन्या ने सिर हिलाया। "डील। और मैं आपको बता दूँ, मेरा 'डेटा' कभी ग़लत नहीं होता।" उसने अपना बैग उठाया। "गुड नाइट, मिस्टर शर्मा।"
आरव ने जवाब में सिर्फ इतना कहा, "गुड नाइट, मिस वर्मा।"
अनन्या तेज़ी से कॉन्फ़्रेंस रूम से बाहर निकल गई। आरव वहीं खड़ा रहा, उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी। उसे लगा जैसे उसने अभी-अभी कोई बहुत प्यारी चीज़ खो दी हो, बिना उसे पाए ही। उसने एक गहरी साँस ली और खुद से कहा, 'पागल मत बन आरव। वो तुम्हारे टाइप की नहीं है। वो 'एक्सेल शीट' है, तुम 'शायरी' हो। ये मैच नहीं हो सकता।'
अगले दिन, ZapConnect के ऑफिस में माहौल बदला हुआ था। अनन्या सुबह सबसे पहले ऑफिस आ गई थी, उसके चेहरे पर एक अजीब सा दृढ़ संकल्प था। उसने सीधे अपने डेस्क पर जाकर लैपटॉप खोला और Zap ऐप पर अपनी प्रोफ़ाइल खोल ली।
"ओके Zap," उसने खुद से कहा, उसकी आवाज़ में चुनौती थी। "दिखाओ मुझे, तुम्हारा 'बेस्ट डेटा-ड्रिवन मैच' कौन है।"
उसने अपनी प्रोफ़ाइल को पूरी तरह से 'री-फाइंड' किया। उसने अपनी प्राथमिकताएं और भी सख्त कर दीं।
* **प्रोफेशन:** इन्वेस्टमेंट बैंकर, सीईओ, या हाई-लेवल मैनेजमेंट। (आरव को चिढ़ाने के लिए उसने 'ऐप डेवलपर' को लिस्ट से हटा दिया।)
* **एजुकेशन:** Ivy League या टॉप बिज़नेस स्कूल।
* **हॉबीज़:** गोल्फ, स्टॉक मार्केट एनालिसिस, फाइन डाइनिंग, ट्रैवल। (पार्टनर को बोर करने वाली हॉबीज़ जानबूझकर चुनीं, क्योंकि डेटा के हिसाब से यही "सफल" थी।)
* **लाइफस्टाइल:** अर्ली राइज़र, डिसिप्लिन, एम्बिशियस।
उसने हर कॉलम को ध्यान से भरा, एक भी चीज़ को 'इमोशनल' नहीं होने दिया। जब उसकी प्रोफ़ाइल अपडेट हो गई, तो उसने 'मैच' बटन पर क्लिक किया।
स्क्रीन पर कुछ सेकंड के लिए 'प्रोसेसिंग' घूमता रहा, फिर एक तस्वीर और प्रोफ़ाइल सामने आई।
**नाम:** राहुल कपूर
**प्रोफेशन:** सीनियर इन्वेस्टमेंट बैंकर, गोल्डमैन सैक्स।
**एजुकेशन:** हॉर्वर्ड बिज़नेस स्कूल।
**हॉबीज़:** इक्विटी रिसर्च, फाइन वाइन कलेक्शन, माउंटेन बाइकिंग।
**कम्पैटिबिलिटी स्कोर:** 98% (डेटा-ड्रिवन)
अनन्या की आँखें चमक उठीं। "परफेक्ट!" उसने कहा। "यह है मेरा डेटा-ड्रिवन मैच!" उसने तुरंत राहुल कपूर को 'स्वाइप राइट' किया।
तभी, उसके मोबाइल पर एक नोटिफिकेशन आया। राहुल कपूर ने भी उसे 'स्वाइप राइट' किया था। यह एक 'तत्काल मैच' था।
अनन्या ने खुशी से एक लंबी साँस ली। "देख लिया आरव शर्मा! मेरा डेटा कभी ग़लत नहीं होता!" उसने तुरंत राहुल कपूर को एक मैसेज भेजा: "Hello Rahul. Your profile looks interesting. Would you be open to a coffee meeting this week?"
दूसरी तरफ, आरव अपने ऑफिस में बैठा अपनी प्रोफ़ाइल को देख रहा था। अनन्या के साथ रात की बातचीत ने उसे भी अपनी शर्त को गंभीरता से लेने के लिए मजबूर कर दिया था। "रूह का कनेक्शन" उसे बार-बार अनन्या से मैच कर रहा था, जिसे उसने हर बार 'रिजेक्ट' किया था। लेकिन अब उसे कोई और मैच चाहिए था।
"बंटी, ज़रा मेरी प्रोफ़ाइल देखियो।" आरव ने बंटी को बुलाया। "मुझे एक 'सच्चा' मैच चाहिए। कोई ऐसा जिसे ग़ालिब पसंद हो, और जो पुरानी फ़िल्में देखता हो।"
बंटी ने आरव की प्रोफ़ाइल देखी। "भाई, ये क्या है? 'पसंदीदा गाना: कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है...' कौन लिखता है ये सब आजकल? और ये 'अधूरे चाँद पर घूमना' क्या है?"
आरव ने कहा, "अरे, यही तो 'रूह का कनेक्शन' है। लोग 'डेटा' में ये सब नहीं डालते।"
बंटी ने सर खुजाया। "ठीक है। देखते हैं। 'रूह' के कनेक्शन से कौन 'लपकता' है।" उसने 'मैच' बटन दबाया।
स्क्रीन पर एक लड़की की प्रोफ़ाइल सामने आई।
**नाम:** मीनाक्षी
**प्रोफेशन:** लाइब्रेरियन
**हॉबीज़:** क्लासिक लिटरेचर, शांत जगहें, पुरानी कविताएं।
**कम्पैटिबिलिटी स्कोर:** 95% ('रूह का कनेक्शन' पर आधारित)
आरव की आँखें चमक उठीं। "मीनाक्षी? लाइब्रेरियन? पुरानी कविताएं? ये तो परफेक्ट है!" उसने तुरंत 'स्वाइप राइट' किया।
उधर, अनन्या अपने फोन पर राहुल कपूर के मैसेज का इंतज़ार कर रही थी। उसका चेहरा आत्मविश्वास से चमक रहा था। उसे यक़ीन था कि उसकी डेटा-ड्रिवन डेटिंग अप्रोच उसे उसकी 'सच्ची डेट' पर ले जाएगी, और वह यह शर्त जीतने वाली थी। आरव के दिल वाले लॉजिक का क्या होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन अब खेल वाकई शुरू हो चुका था।
Chapter 9
अगले दिन की सुबह, मुंबई के एक पॉश होटल के कॉफ़ी शॉप में, अनन्या वर्मा इंतज़ार कर रही थी। उसने एक ग्रे रंग का फॉर्मल सूट पहना था, जो उसकी प्रोफेशनल इमेज को पूरी तरह से दर्शाता था। उसके सामने मेज पर एक पतला सा लैपटॉप खुला था, जिसमें उसकी आज की मीटिंग्स का शेड्यूल दिख रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार दरवाज़े की तरफ जा रहा था। उसे आज अपनी डेटा-ड्रिवन अप्रोच पर पूरा भरोसा था, कि राहुल कपूर, जो Zap ऐप के एल्गोरिदम के हिसाब से उसका 98% कम्पैटिबल मैच था, उसकी परफेक्ट डेट साबित होगा।
तभी, एक लंबा, स्मार्ट, सूट-बूट में व्यक्ति उसकी तरफ आता दिखा। राहुल कपूर का चेहरा बिलकुल वैसा ही था जैसा उसकी प्रोफाइल पिक्चर में था – गंभीर, आत्मविश्वास से भरा और बेहद प्रोफेशनल।
"हेलो, अनन्या?" राहुल ने एक ठोस आवाज़ में कहा, उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, जो होठों तक ही सीमित थी।
अनन्या उठकर खड़ी हुई और हाथ मिलाया। "हेलो राहुल। थैंक यू सो मच आने के लिए।" उसकी आवाज़ भी उतनी ही प्रोफेशनल थी, जितनी राहुल की।
वे दोनों बैठ गए। राहुल ने अपना लैपटॉप बैग पास वाली कुर्सी पर रखा। "नो प्रॉब्लम। मैंने आपकी प्रोफाइल देखी, इम्प्रेसिव! ZapConnect में मार्केटिंग हेड? बहुत अच्छा काम कर रही हैं आप।"
"थैंक यू। आप भी गोल्डमैन सैक्स में सीनियर इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं। यह भी कम नहीं।" अनन्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
वेटर आया और उन्होंने कॉफ़ी ऑर्डर की। कॉफ़ी आने के बाद, राहुल ने अपनी बात शुरू की, "तो, अनन्या, मैं आपकी Zap ऐप के बारे में थोड़ा रिसर्च कर रहा था। मुझे आपका 'यूज़र एक्विजिशन मॉडल' काफी इंटरेस्टिंग लगा। क्या आपने 'CPM' और 'CPC' पर कोई नया ए/बी टेस्टिंग की है?"
अनन्या हल्की सी चौंक गई। वह उम्मीद कर रही थी कि वे थोड़ा बहुत पर्सनल बातें करेंगे। "हाँ, हमने कुछ नए 'डिजिटल मार्केटिंग' कैंपेन्स चलाए थे... लेकिन, राहुल, मैं सोच रही थी, कि हम आज थोड़ा..."
राहुल ने उसे बीच में ही काट दिया, उसके चेहरे पर एक गंभीर भाव था। "आप जानते हैं, हाल ही में 'ग्लोबल मार्केट' में बहुत 'वोलेटिलिटी' आई है। खासकर 'टेक स्टॉक' में। क्या ZapConnect पर इसका कोई असर पड़ रहा है? आपके 'स्टॉक प्राइस' क्या कहते हैं?"
अनन्या ने एक लंबी साँस ली। "हम एक प्राइवेट कंपनी हैं, राहुल। हमारे 'स्टॉक' की बात नहीं है।" उसने अपनी कॉफ़ी का एक सिप लिया। "अच्छा, राहुल, आपके शौक क्या हैं? खाली समय में क्या करना पसंद करते हैं?"
राहुल ने अपनी कॉफ़ी का सिप लिया और सीधे अनन्या की आँखों में देखते हुए कहा, "शौक? वेल, मैं 'इक्विटी रिसर्च' में अपना ज़्यादातर 'फ्री टाइम' बिताता हूँ। 'मार्केट ट्रेंड्स' को एनालाइज़ करना मुझे बहुत पसंद है। और हाँ, 'फाइन वाइन कलेक्शन' मेरा एक 'पैशन' है। मैंने हाल ही में 2010 की 'बरगंडी' खरीदी है, जो मेरे पोर्टफोलियो के लिए एक 'एसेट' है।"
अनन्या के चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान आ गई। उसकी आँखों में अब चमक नहीं, बल्कि बोरियत थी। 'एसेट'? ये कैसा शौक है?
"और... स्पोर्ट्स में कुछ? फ़िल्में?" अनन्या ने एक और कोशिश की।
"स्पोर्ट्स? मैं गोल्फ खेलता हूँ। यह 'नेटवर्किंग' के लिए अच्छा है। और फ़िल्में... मैं सिर्फ 'डॉक्यूमेंट्रीज़' देखता हूँ, खासकर 'इकोनॉमिक्स' पर। मैंने हाल ही में 'द बिग शॉर्ट' देखी, जो 'सबप्राइम मोर्गेज क्राइसिस' पर आधारित है। बहुत अच्छी 'केस स्टडी' है।" राहुल ने एक सांस में कहा, जैसे वह किसी बोर्ड मीटिंग में अपनी रिपोर्ट पढ़ रहा हो।
अनन्या ने अपने दिमाग में एक 'चेकलिस्ट' बनाई। राहुल के पास सब कुछ था - अच्छी नौकरी, टॉप यूनिवर्सिटी की डिग्री, महंगे शौक... डेटा के हिसाब से वह 'परफेक्ट' था। लेकिन फिर भी, अनन्या को लग रहा था कि वह एक 'रोबोट' से बात कर रही है। उसके और राहुल के बीच कोई 'केमिस्ट्री' नहीं थी, कोई 'इमोशनल कनेक्शन' नहीं था।
"अनन्या, मुझे लगता है कि Zap ऐप को 'यूज़र रिटेंशन' पर थोड़ा और काम करना चाहिए। 'एल्गोरिदम' को और 'पर्सनलाइज्ड' बनाना होगा। 'डेमोग्राफिक डेटा' का ज़्यादा बेहतर इस्तेमाल होना चाहिए।" राहुल ने सलाह देते हुए कहा।
अनन्या ने अपने हाथ से अपना माथा सहलाया। यह एक डेट नहीं, एक 'बिज़नेस मीटिंग' बन गई थी। उसे लगा जैसे उसे 'एक्सेल शीट' से बनी किसी इंसान से बात करनी पड़ रही हो। 'मेरा डेटा तो ठीक था,' उसने सोचा, 'पर शायद डेटा ही सब कुछ नहीं होता।'
वह मुस्कुरा कर बोली, "हाँ राहुल। आपने 'वैल्युएबल इनपुट्स' दिए। मैं इस पर ज़रूर विचार करूंगी।" उसने अपनी घड़ी देखी। "मुझे लगता है मुझे अब चलना चाहिए। मेरी एक ज़रूरी मीटिंग है।"
राहुल ने तुरंत अपनी कलाई पर लगी महंगी घड़ी देखी। "ओह, ठीक है। मेरा भी अगला 'क्लाइंट कॉल' है। अच्छा लगा मिलकर।" उसने हाथ बढ़ाया।
अनन्या ने उसके साथ औपचारिक रूप से हाथ मिलाया और तेज़ी से कॉफ़ी शॉप से बाहर निकल गई। बाहर आकर उसने एक गहरी साँस ली, जैसे उसे किसी भारी बोझ से छुटकारा मिला हो। उसे लगा कि उसकी 'परफेक्ट डेट' एक 'परफेक्ट डिजास्टर' थी। 'डेटा ठीक था, पर दिल कहाँ था?' उसने अपने आप से पूछा।
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उधर, आरव शर्मा एक पुराने, शांत कैफ़े में बैठा था, जिसकी दीवारों पर मिर्ज़ा ग़ालिब के शेर लिखे हुए थे। उसकी आँखें चमक रही थीं। उसे अपनी मैच मीनाक्षी से मिलना था, जो Zap ऐप के 'रूह का कनेक्शन' फ़ीचर से मिली थी।
मीनाक्षी ठीक समय पर आई। उसने एक साधारण सी साड़ी पहनी थी, उसके चेहरे पर एक शांत भाव था। वह बिल्कुल वैसी ही थी जैसी आरव ने कल्पना की थी – लाइब्रेरियन, साहित्यिक और गंभीर।
"हेलो, मीनाक्षी। आरव।" आरव ने उत्साह से कहा और उठकर खड़ा हो गया।
"नमस्ते, आरव।" मीनाक्षी ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ बहुत ही कोमल थी।
वे दोनों बैठ गए। आरव ने वेटर को दो कप चाय का ऑर्डर दिया। "तो, मीनाक्षी, आपकी लाइब्रेरियन की जॉब कैसी चल रही है? क्या आप किताबों से घिरी रहकर ख़ुश हैं?" आरव ने एक प्यारी मुस्कान के साथ पूछा।
मीनाक्षी ने अपनी नज़रें झुकाईं। "हाँ। किताबें मेरी दुनिया हैं। वे असीमित ज्ञान का स्रोत हैं। जैसा कि ग़ालिब ने कहा है, 'मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं'।" उसने मुस्कुराने की कोशिश की, पर उसकी मुस्कान बहुत फीकी थी।
आरव ने उत्साह से कहा, "वाह! ग़ालिब! आप उनकी बहुत बड़ी फैन हैं?"
"हाँ। उनकी शायरी में एक गहरा अर्थ है। हर शब्द अपने आप में एक 'फिलासफी' है।" मीनाक्षी ने कहा, उसकी आँखों में किताबों की गंभीरता थी। "जैसे, 'न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता, डुबोया मुझ को होने ने, न होता मैं तो क्या होता'। क्या ज़बरदस्त शेर है न?"
आरव ने सिर हिलाया। "हाँ, बहुत अच्छा शेर है। लेकिन... मुझे लगता है कि कभी-कभी हमें शायरी से बाहर निकलकर थोड़ी आम बातें भी करनी चाहिए। जैसे, आपको कौन सी फ़िल्में पसंद हैं?"
मीनाक्षी ने सोचा। "मुझे पुराने ज़माने की फ़िल्में पसंद हैं। खासकर वो जिनमें साहित्यिक मूल्यों का प्रदर्शन हो। जैसे, गुरु दत्त की 'प्यासा', या चेतन आनंद की 'हीर रांझा'। उनमें जो दर्द और 'फिलासफी' है, वो आज की फ़िल्मों में कहाँ?"
"हाँ, 'प्यासा' तो मेरी भी फेवरेट है! 'मैं पल दो पल का शायर हूँ...' गाना... आह!" आरव ने ख़ुशी से कहा।
मीनाक्षी ने तुरंत टोका। "नहीं, आरव। 'मैं पल दो पल का शायर हूँ' साहिर लुधियानवी ने लिखा था, और वह फ़िल्म 'कभी कभी' का गाना है। 'प्यासा' में 'ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है' का बोल है, जिसे साहिर ने लिखा था, लेकिन ग़ालिब का असर उसमें भी दिखता है।"
आरव का मुँह खुला रह गया। "ओह... हाँ। सही कहा आपने।" उसे लगा जैसे वह किसी 'लिटरेचर क्लास' में बैठा हो।
उनकी चाय आ गई। आरव ने एक सिप लिया। "अच्छा, मीनाक्षी, आपको खाने में क्या पसंद है? कोई ख़ास पकवान?"
मीनाक्षी ने गंभीरता से कहा, "मुझे सादगी पसंद है। दाल-रोटी। जैसा कि शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने कहा है, 'और भी ग़म हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा'।"
आरव ने एक पल के लिए अपनी आँखों में दर्द महसूस किया। उसे लगा जैसे मीनाक्षी उसके हर सवाल का जवाब शायरी से ही देगी। वह ग़ालिब का फ़ैन था, लेकिन उसे अपनी डेट पर 'जीते-जागते इंसान' से बात करनी थी, 'शेर' से नहीं। उसने देखा कि मीनाक्षी ने उसकी आँखों में आँखें नहीं डालीं, बस दूर कहीं दीवारों पर लिखे शेरों को देख रही थी।
आरव ने एक गहरी साँस ली। "मीनाक्षी, आप... क्या आप कभी हंसती भी हैं? या सिर्फ शायरी में ही बात करती हैं?" उसने मज़ाक में कहा।
मीनाक्षी ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में कोई भाव नहीं था। "हंसी? हंसी 'फानी' होती है, आरव। 'जो बात ख़ुशी में कही जाए, वो अक्सर हल्की होती है।' ग़ालिब का एक शेर है... 'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले...'।"
आरव ने सिर पकड़ लिया। वह उठने वाला था। यह डेट नहीं, यह एक 'इंटेलेक्चुअल टॉर्चर' था। उसे लगा कि उसकी 'परफेक्ट मैचिंग' उतनी भी परफेक्ट नहीं थी जितनी उसने सोची थी। यह 'रूह का कनेक्शन' तो उसे एक 'भूत' से मिला गया था।
"ठीक है, मीनाक्षी। मुझे लगता है मुझे अब चलना चाहिए। एक ज़रूरी कॉल है।" आरव ने बहाना बनाया।
मीनाक्षी ने धीरे से सिर हिलाया। "ठीक है, आरव। फिर मिलेंगे। 'सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो', जैसा कि बशीर बद्र ने कहा है।"
आरव ने जल्दी से पैसे दिए और कैफ़े से बाहर निकल गया। बाहर आकर उसने ताज़ी हवा में साँस ली, जैसे उसे किसी घुटन भरे कमरे से छुटकारा मिला हो। उसे लगा कि उसका 'दिल वाला लॉजिक' भी कभी-कभी ओवरबोर्ड हो जाता है। 'ये क्या यार!' उसने खुद से कहा, 'मैं तो 'लाइब्रेरी' में ही बैठा रह गया।'
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अगले दिन, अनन्या सुबह-सुबह ऑफिस पहुँच गई, उसके चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था। वह अपने डेस्क पर बैठी थी, लैपटॉप खोलकर अपनी 'टु-डू लिस्ट' देख रही थी, लेकिन उसका दिमाग़ राहुल कपूर के साथ हुई डेट पर अटका हुआ था। 'डेटा परफेक्ट था, लेकिन इंसान... इंसान तो एक रोबोट निकला!' उसने सोचा।
तभी उसकी असिस्टेंट उसके पास आई। "मैम, गुड मॉर्निंग। आरव सर आए थे। उन्होंने कहा कि वो आपके लिए एक रिपोर्ट लाए हैं।"
अनन्या ने एक पल के लिए आँखें बंद कीं। 'आरव! अब ये क्या लेकर आया है?' उसने मन में सोचा। "ठीक है, भेज दो।"
आरव कमरे में आया, उसके चेहरे पर भी हल्की सी थकावट थी, लेकिन एक अजीब सी ख़ामोशी थी। उसके हाथ में एक फाइल थी।
"गुड मॉर्निंग, मिस वर्मा।" आरव ने औपचारिकता निभाई।
"गुड मॉर्निंग, मिस्टर शर्मा।" अनन्या ने जवाब दिया।
आरव ने फाइल उसके डेस्क पर रखी। "यह Zap ऐप के 'पॉजिटिव फीडबैक' की रिपोर्ट है। कुछ यूज़र्स को 'रूह का कनेक्शन' बहुत पसंद आ रहा है।"
अनन्या ने फाइल उठाई, लेकिन उसकी नज़रें आरव पर टिकी थीं। उसके दिमाग में एक बात थी, जिसे वह पूछना चाहती थी। "तो... आपकी डेट कैसी रही? 'रूह का कनेक्शन' वाली?" उसने जानबूझकर तंज कसा।
आरव ने एक पल के लिए अपनी आँखों में उदासी छिपाई। "मेरी डेट? वो... काफी 'शांत' थी। इतनी शांत कि मुझे लगा मैं किसी लाइब्रेरी में नहीं, किसी 'पॉडकास्ट' पर बैठा हूँ। और हर बात का जवाब शायरी में मिलता था।"
अनन्या ने हल्की सी हँसी दबाई। "ओह। तो आपका 'रूह का कनेक्शन' वाला 'एल्गोरिदम' फेल हो गया?"
आरव ने कंधे उचकाए। "शायद 'ओवर-क्वालिफाइड' मैच था। कभी-कभी बहुत ज़्यादा 'परफेक्ट' भी 'परफेक्ट' नहीं होता।" उसने काउंटर अटैक किया। "आपकी कैसी रही? आपका 'डेटा-ड्रिवन' मैच? मैं उम्मीद करता हूँ कि आपके 'इन्वेस्टमेंट बैंकर' ने आपको 'स्टॉक मार्केट' के नए 'ट्रेंड्स' के बारे में बहुत कुछ सिखाया होगा।"
अनन्या का चेहरा हल्का सा लाल हो गया। "वो... वो भी काफी 'इन्फोर्मेटिव' थी। इतनी 'इन्फोर्मेटिव' कि मुझे लगा मैं किसी 'सेमिनार' में बैठी हूँ, डेट पर नहीं।" उसने हल्की सी फ्रस्ट्रेशन में कहा। "सारा टाइम 'इकोनॉमी' और 'पोर्टफोलियो' की बातें। 'केमिस्ट्री' तो छोड़ो, 'इंसानियत' भी नहीं थी।"
दोनों एक पल के लिए एक-दूसरे को देखते रहे। उनकी आँखों में एक अजीब सी समझ थी। दोनों ने अपने-अपने 'परफेक्ट' मैचों से निराशा ही पाई थी। उन्हें महसूस हुआ कि भले ही वे एक-दूसरे से कितने भी अलग क्यों न हों, लेकिन उनके बीच जो 'केमिस्ट्री' थी, वह किसी 'डेटा' या 'शायरी' से नहीं आ सकती थी।
तभी, बंटी अंदर आया, उसके हाथ में चाय का कप था। "भाई! सुना मैडम की डेट हुई? कैसी रही मैडम? 'मस्त' था या 'बस्ट'?" बंटी ने आरव की तरफ आँख मारते हुए पूछा।
अनन्या ने तुरंत अपना चेहरा सीधा किया। "ये मेरा 'प्रोफेशनल' मामला है, बंटी।"
आरव ने बंटी की तरफ देखा और अपने दाँत पीसे। "जा यार, बंटी। अपना काम कर।"
बंटी ने अपनी चाय का एक सिप लिया। "ठीक है, ठीक है। मैं तो बस पूछ रहा था। पर भाई, मुझे तो लगता है, 'परफेक्ट' कुछ होता ही नहीं है। 'समोसे' में भी कभी-कभी आलू कम हो जाता है, तो क्या वो बुरा हो जाता है? नहीं न?"
बंटी की बात सुनकर अनन्या और आरव ने एक-दूसरे की तरफ देखा। बंटी की फ़ालतू की बात में एक अजीब सी सच्चाई थी। 'परफेक्ट' शायद सिर्फ एक्सेल शीट्स और कविताओं में होता है, असल ज़िंदगी में नहीं। और शायद 'एरर' ही कभी-कभी 'सही' मैच होता है।
आरव ने धीरे से कहा, "सही कहा बंटी।"
अनन्या ने अपनी मुस्कान छिपाई। उसे एहसास हुआ कि शायद उसके 'सिस्टम' का 'बग', जो उसे बार-बार आरव से मैच कर रहा था, वो 'बग' नहीं, बल्कि 'फ़ीचर' ही था। वह 'Error 404: Ishq Not Found' नहीं, बल्कि 'Ishq Found: With a Few Bugs' था।
यह एहसास उनके बीच एक नई, अनकही समझ लेकर आया। शर्त अभी भी बाकी थी, लेकिन अब उसका मतलब बदल चुका था।
Chapter 10
अगले कुछ दिन ZapConnect के ऑफिस में अजीब सी ख़ामोशी छाई रही। अनन्या और आरव दोनों अपनी-अपनी डेट्स की असफलता से उदास थे, लेकिन इसे स्वीकारने को तैयार नहीं थे। उनकी प्रतिद्वंद्विता अभी भी कायम थी, पर उसकी धार अब उतनी तेज़ नहीं थी। बंटी की "समोसे में आलू" वाली बात कहीं न कहीं उनके दिमाग़ में घर कर गई थी। उन्हें एहसास हो रहा था कि 'परफेक्ट' की उनकी अपनी परिभाषा, असल ज़िंदगी में उतनी काम की नहीं थी।
Zap ऐप को लॉन्च हुए कुछ ही हफ़्ते हुए थे, और नए अपडेट्स की ज़रूरत थी। 'रूह का कनेक्शन' फ़ीचर जहाँ कुछ यूज़र्स के बीच बहुत पॉपुलर हो रहा था, वहीं बाकियों के लिए वह थोड़ा अजीब था। अनन्या का 'डेटा-ड्रिवन' एल्गोरिदम भी कुछ 'मिस-मैचेस' दे रहा था, जिन्हें ठीक करना ज़रूरी था। इन सबको ठीक करने के लिए, अनन्या और आरव को पहले से ज़्यादा समय साथ बिताना पड़ रहा था।
एक शाम, सूरज ढल चुका था और ऑफिस लगभग ख़ाली हो चुका था। अनन्या अपने क्यूबिकल में बैठी ऐप के यूज़र फ़ीडबैक का विश्लेषण कर रही थी। उसके चेहरे पर हल्की सी झुंझलाहट थी।
"ये क्या है?" वह बुदबुदाई, "एक यूज़र लिख रहा है 'मुझे अपनी मैचिंग में कोई दिलचस्पी नहीं है क्योंकि उसे अदरक वाली चाय पसंद नहीं'?" उसने सिर हिलाया। "ये 'माइक्रो-प्रेफरेंसेज' कुछ ज़्यादा ही 'माइक्रो' हो रही हैं।"
आरव उसके क्यूबिकल के पास से गुज़रा। उसने अनन्या की आवाज़ सुनी और रुक गया।
"क्या हुआ, मिस वर्मा?" उसने पूछा।
अनन्या ने लैपटॉप की स्क्रीन उसकी तरफ घुमाई। "ये देखिए, मिस्टर शर्मा। आपकी 'रूह का कनेक्शन' का कमाल। लोग 'चाय की पसंद' पर रिश्ते बना रहे हैं। ये 'प्रोफेशनल' नहीं है।"
आरव ने स्क्रीन पर देखा और मुस्कुरा दिया। "प्रोफेशनल नहीं, पर 'असली' है, मिस वर्मा। कितने रिश्ते टूट जाते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें 'छोटी-छोटी बातों' पर एक-दूसरे से तालमेल नहीं मिलता।"
अनन्या ने आँखें सिकोड़ीं। "छोटी-छोटी बातें? ये कोई छोटी बात नहीं है, मिस्टर शर्मा। ये हमारे 'यूज़र रिटेंशन' पर असर डाल रहा है। हमें इस 'फ़ीचर' को 'बैलेंस' करना होगा।"
"तो क्या करें?" आरव ने एक कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठते हुए कहा। "इसे हटा दें? लोगों को उनके 'आलू के समोसे' और 'अदरक वाली चाय' से दूर कर दें?"
अनन्या ने एक गहरी साँस ली। "नहीं। हटाना नहीं है। इसे 'अंडरस्टैंड' करना है। हमें यह समझना होगा कि कौन सी 'छोटी बात' रिश्ते को बनाती है, और कौन सी 'तोड़ती' है। हमें 'डेटा' और 'दिल' के बीच का 'परफेक्ट बैलेंस' खोजना होगा।"
आरव ने उसकी तरफ देखा। "तो क्या आप यह मानती हैं कि 'दिल' भी ज़रूरी है?" उसकी आवाज़ में हल्की सी छेड़छाड़ थी।
अनन्या का चेहरा हल्का सा लाल हुआ। "मैं मानती हूँ कि 'यूज़र सेंटीमेंट्स' ज़रूरी हैं, मिस्टर शर्मा। और अगर वो 'दिल' से जुड़े हैं, तो ठीक है।" उसने अपने लैपटॉप पर कुछ टाइप करना शुरू कर दिया। "हमें आज रात देर तक काम करना होगा। इन 'माइक्रो-प्रेफरेंसेज' को 'मैक्रो-इनसाइट्स' में बदलने के लिए एक नया 'एल्गोरिदम' लिखना होगा।"
"पूरी रात?" आरव ने पूछा।
"हाँ। जब तक यह नहीं होता, हमें 'वर्क फ्रॉम ऑफिस' करना होगा।" अनन्या ने अपना फ़ोन उठाया। "मैं पिज़्ज़ा और कॉफ़ी ऑर्डर करती हूँ।"
आरव मुस्कुराया। "मेरी पसंद का?"
अनन्या ने उसकी तरफ देखा। "नहीं, 'कंपनी पॉलिसी' के हिसाब से। और 'इमोशंस' के हिसाब से नहीं।"
आरव हँस दिया। "जैसे आपकी पिछली 'डेटा-ड्रिवन' डेट 'कंपनी पॉलिसी' थी।"
अनन्या का मुँह बन गया। "मेरी डेट के बारे में बात मत कीजिए, मिस्टर शर्मा। अपनी 'शायरी वाली' डेट याद कीजिए।"
आरव ने सिर हिलाया। "ठीक है, ठीक है। नो पर्सनल अटैक। सिर्फ़ काम।"
और फिर, काम शुरू हो गया। रात धीरे-धीरे गहराने लगी। ऑफिस की बड़ी-बड़ी लाइटें जल रही थीं। अनन्या और आरव अपनी-अपनी स्क्रीन पर झुके हुए थे, कोड और डेटा के बीच उलझे हुए। पिज़्ज़ा आ गया। उन्होंने खाते-खाते भी काम जारी रखा।
आधी रात बीत चुकी थी। आरव ने अपनी कॉफ़ी का कप उठाया। "यह 'यूज़र फ़ीडबैक' वाला सेक्शन बहुत 'मेसी' है, मिस वर्मा। लगता है लोग अपनी ज़िंदगी के सारे किस्से ऐप में ही लिख रहे हैं।"
अनन्या ने एक लंबी उबासी ली। "हाँ, तभी तो हमें 'डेटा क्लिनिंग' की ज़रूरत है। हमें 'नॉन-रेलेवेंट' डेटा को हटाना होगा।"
आरव ने सिर हिलाया। "लेकिन कौन सा डेटा 'नॉन-रेलेवेंट' है? एक चाय वाले के लिए शायद उसकी चाय की पसंद सबसे 'रेलेवेंट' डेटा हो।"
अनन्या ने पेंसिल मेज पर रखी। "आप हमेशा अपनी फिलोसॉफी लेकर आ जाते हैं, मिस्टर शर्मा। मैं 'प्रैक्टिकल' बात कर रही हूँ।"
"मैं भी 'प्रैक्टिकल' ही बात कर रहा हूँ, मिस वर्मा। ज़िंदगी में 'डेटा' से ज़्यादा 'इंसानी' चीज़ें होती हैं।" आरव ने कहा। "अच्छा, आप हमेशा इतनी 'डेटा-ड्रिवन' क्यों रहती हैं? कभी कोई 'इमोशनल' फ़ैसला नहीं लिया?"
अनन्या ने एक पल के लिए अपनी नज़रें घुमाईं। "ये पर्सनल है, मिस्टर शर्मा।"
"हम रात के 2 बजे साथ बैठकर पिज़्ज़ा खा रहे हैं, मिस वर्मा। यह 'पर्सनल' ही है।" आरव ने मुस्कुराते हुए कहा।
अनन्या ने एक लंबी साँस ली। "ठीक है।" उसकी आवाज़ थोड़ी नरम हुई। "बचपन से ही मेरे पापा चाहते थे कि मैं कुछ बड़ा बनूँ। वह एक बहुत 'सक्सेसफुल' बिज़नेस पर्सन थे। उन्होंने हमेशा कहा कि 'सफलता सिर्फ आंकड़ों में दिखती है, भावनाओं में नहीं'। तो मैंने हमेशा उन्हीं की बात सुनी। इमोशंस को मैंने हमेशा एक 'बाधा' माना। मुझे लगा कि इमोशंस से लोग कमज़ोर होते हैं।"
आरव ने उसे ध्यान से सुना। "और अब?"
अनन्या ने कंधे उचकाए। "अब... अब मुझे समझ नहीं आता। कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं अपनी ज़िंदगी की सबसे 'बड़ी एक्सेल शीट' ही बनाती जा रही हूँ, पर उसमें 'खुशी' का कॉलम खाली है।" उसने अपनी उँगलियों से टेबल पर कुछ लिखने की कोशिश की। "मैं बस अपनी फैमिली को कुछ 'प्रूव' करना चाहती थी। खुद को 'बेहतर' साबित करना चाहती थी।"
आरव ने उसकी आँखों में देखा। "और अब आपको लग रहा है कि शायद 'बेहतर' बनने के लिए सिर्फ 'आंकड़े' ही काफी नहीं होते?"
अनन्या ने सिर हिलाया। उसकी आँखों में एक अजीब सी नमी थी। "शायद।" उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी। "आपके साथ काम करके मुझे महसूस हुआ कि 'फ़ीलिंग्स' भी 'पॉवरफुल' हो सकती हैं। जैसे आपकी 'रूह का कनेक्शन'। वो सिर्फ 'बग' नहीं है।"
आरव को लगा जैसे किसी ने उसके दिल पर हाथ रख दिया हो। उसे लगा कि अनन्या की कठोर बाहरी परत के नीचे एक बहुत ही संवेदनशील लड़की छिपी थी। "मेरा 'पुराना अंदाज़' भी सिर्फ 'दिखावा' नहीं है, मिस वर्मा।" आरव ने कहा। "मैं सच में ग़ालिब से प्यार करता हूँ, और पुराने गानों से भी। मुझे लगता है कि उन चीज़ों में एक 'असलीपन' है, जो आजकल की 'फास्ट-फॉरवर्ड' दुनिया में नहीं है।"
अनन्या ने उसकी तरफ देखा। "मुझे लगा था कि आप सिर्फ 'ड्रामा' कर रहे हैं।"
"नहीं। मैं हमेशा से ऐसा ही रहा हूँ।" आरव ने एक हल्की सी हँसी हँसी। "मुझे 'नया' और 'टेक्नोलॉजी' पसंद है, लेकिन 'नया' बनने की कोशिश में 'असलीपन' को खो देना मुझे पसंद नहीं है।"
अनन्या ने सिर हिलाया। "आपकी बात में दम है।"
वे दोनों कुछ पल के लिए ख़ामोश रहे, सिर्फ अपने-अपने विचारों में खोए हुए थे। उस ख़ामोशी में एक अजीब सी सहजता थी, जो पहले कभी नहीं थी। वे एक-दूसरे को समझने लगे थे, एक-दूसरे की दुनिया को जानने लगे थे। उन्हें एहसास हो रहा था कि वे कितने अलग थे, पर फिर भी कितने मिलते-जुलते थे। दोनों ही 'परफेक्ट' की तलाश में थे, पर शायद 'परफेक्ट' सिर्फ एक 'आईडिया' था, और 'असली' चीज़ कुछ और ही थी।
आरव ने फिर से अपनी स्क्रीन की तरफ़ देखा। "अच्छा, तो अब इस 'अदरक वाली चाय' वाले 'फ़ीचर' को कैसे 'ट्वीक' करें?" उसने जानबूझकर हल्की आवाज़ में कहा।
अनन्या मुस्कुराई। उसकी मुस्कान में अब वह बनावटीपन नहीं था, बल्कि एक सहजता और गर्मजोशी थी। "हमें एक 'सब-कैटेगरी' बनानी होगी। 'अदरक' जैसी 'माइक्रो-प्रेफरेंसेज' को एक 'बड़ी पसंद' के अंदर रखना होगा। जैसे, 'चाय' के अंदर 'अदरक', 'इलायची', 'दूध वाली'।"
आरव ने सिर हिलाया। "हाँ। और फिर एक 'वेटेज' असाइन करना होगा। कि 'चाय' की पसंद ज़्यादा 'इंपॉर्टेंट' है या 'अदरक' की।"
दोनों फिर से काम में जुट गए, लेकिन अब उनका 'तालमेल' पहले से बेहतर था। उनके बीच अब कोई 'छिपी हुई लड़ाई' नहीं थी, बल्कि एक 'सहयोग' की भावना थी। वे 'दिल' और 'डेटा', 'लॉजिक' और 'इमोशन' को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे थे, सिर्फ ऐप के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लिए भी।
घड़ी में सुबह के चार बज गए। अनन्या ने अपने लैपटॉप को बंद किया। "मुझे लगता है, आज के लिए इतना काफी है। बाकी का काम हम कल करेंगे।"
आरव ने भी अपनी स्क्रीन बंद की। "हाँ, मैं भी बहुत थक गया हूँ।"
वे दोनों उठ खड़े हुए। ऑफिस की विशाल ख़ामोशी में, उनके कदमों की आवाज़ गूँज रही थी।
अनन्या ने आरव की तरफ देखा। "थैंक यू, मिस्टर शर्मा।" उसकी आवाज़ अब बहुत नरम थी। "यह 'प्रोडक्टिव' रात थी।"
आरव मुस्कुराया। "हाँ, 'प्रोडक्टिव' थी, मिस वर्मा। और 'इंसाइटफुल' भी।"
वे दोनों एक-दूसरे की तरफ देख रहे थे। उस पल में, उनके बीच की सारी दूरी मिट चुकी थी। कोई शर्त नहीं थी, कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं थी, सिर्फ़ दो थके हुए लोग थे, जिन्होंने एक-दूसरे को थोड़ा और समझ लिया था।
आरव ने धीरे से कहा, "गुड नाइट, अनन्या।" उसने पहली बार उसका नाम लिया था, बिना किसी औपचारिकता या मज़ाक के।
अनन्या के दिल में एक हल्की सी धड़कन महसूस हुई। "गुड नाइट, आरव।" उसने भी जवाब में उसका नाम लिया।
वे दोनों ऑफिस से बाहर निकले। बाहर हल्की-हल्की ठंड थी, और सूरज निकलने में अभी देर थी। उस सुबह, उनके बीच कुछ बदल चुका था। एक 'एरर' जो उन्हें 'नॉट फाउंड' दिखा रहा था, अब 'फ़ाउंड' होने की राह पर था। और उन्हें यह एहसास भी नहीं था कि अगले ही पल उनकी ज़िंदगी में एक और बड़ा 'सिस्टम क्रैश' आने वाला था, जो उन्हें और क़रीब ले आएगा।
Chapter 11
अगले दिन की सुबह, मुंबई की सड़कों पर अभी भी रात का हल्का सा अँधेरा छाया हुआ था, जब अनन्या और आरव ZapConnect के ऑफिस से बाहर निकले। हवा में एक अजीब सी ताज़गी थी, जो उनके बीच हुई उस देर रात की बातचीत की सहजता से मेल खा रही थी। अनन्या ने अपने बैग की स्ट्रैप कसी और आरव की तरफ देखा।
"मुझे लगता है, मिस्टर शर्मा, कि आज की रात ने हमें कुछ नया सिखाया है," अनन्या ने कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी मुस्कान थी।
आरव ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। "हाँ, मिस वर्मा। 'डेटा' हमेशा 'ट्रेंड' नहीं बताता, कभी-कभी 'इंसान' को भी सुनना पड़ता है।"
वे दोनों कुछ कदम साथ चले, उनके बीच एक नई, अनकही समझ का पुल बन चुका था। पहली बार, उनके रिश्ते में 'शर्त' और 'प्रतिद्वंद्विता' से कहीं ज़्यादा कुछ था – वह थी आपसी समझ और सम्मान। अनन्या ने आरव की तरफ देखा, उसकी आँखों में अब वह कठोरता नहीं थी, बल्कि एक नरमी थी।
"ठीक है, मिस्टर शर्मा। मैं चलती हूँ। आपने बहुत मेहनत की," अनन्या ने कहा।
"आपने भी, मिस वर्मा। 'गुड नाइट' या 'गुड मॉर्निंग', समझ नहीं आ रहा," आरव हँसा।
अनन्या भी हँस पड़ी। "शायद 'गुड डे'।"
वे दोनों एक-दूसरे को अलविदा कह कर अपनी-अपनी दिशाओं में मुड़ गए। आरव अपनी पुरानी स्कूटर की तरफ बढ़ा, और अनन्या अपनी कैब का इंतज़ार करने लगी। उनके दिल में एक अजीब सी ख़ुशी और सुकून था। उन्हें नहीं पता था कि यह सुकून बस कुछ ही पलों का मेहमान था।
आरव ने जैसे ही अपनी स्कूटर की चाबी लगाई, उसका फ़ोन भयानक आवाज़ में बज उठा। स्क्रीन पर 'क्रिटिकल अलर्ट' लिखा था। उसकी नींद तुरंत गायब हो गई। उसने फ़ोन उठाया।
"हेलो, आरव शर्मा। बोल रहा हूँ।"
दूसरी तरफ से ZapConnect की टेक्निकल टीम का एक नया लड़का था, जिसकी आवाज़ घबराहट से काँप रही थी। "सर! सर! Zap ऐप का सर्वर क्रैश हो गया है! पूरी तरह से डाउन! 'एरर 500' आ रहा है हर जगह!"
आरव का माथा ठनका। "क्या?! क्रैश हो गया? कब?"
"अभी-अभी सर। बिलकुल 'जीरो ट्रैफिक' दिखा रहा है। पूरी तरह से 'ऑफलाइन' हो गया है!" लड़का लगभग चीख रहा था।
आरव ने तुरंत अपनी स्कूटर वहीं छोड़ी और वापस ऑफिस की तरफ भागा। "मैं अभी आ रहा हूँ! तुम सब 'लॉग्स' तैयार रखो! मैं चेक करता हूँ।"
वह तेज़ी से ऑफिस के अंदर भागा। उसकी साँस फूल रही थी, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ़ एक ही बात थी – 'सर्वर क्रैश'। Zap ऐप सिर्फ एक ऐप नहीं था, यह उसकी और अनन्या की मेहनत थी, उनकी शर्त थी, और अब उनकी दोस्ती की बुनियाद भी बन चुका था। अगर यह क्रैश ठीक नहीं हुआ, तो सब कुछ खत्म हो सकता था।
ऑफिस के अंदर घुसते ही उसने देखा कि अनन्या भी वहीं खड़ी थी, उसका चेहरा सफ़ेद पड़ चुका था। उसके फ़ोन पर भी वही अलर्ट था। उसकी आँखें आरव पर टिकी थीं।
"क्या हुआ, आरव?" अनन्या की आवाज़ में घबराहट थी।
"सर्वर क्रैश हो गया है, अनन्या! Zap ऐप पूरी तरह से डाउन है!" आरव ने जल्दी से सर्वर रूम की तरफ इशारा किया। "मुझे अंदर जाकर चेक करना होगा।"
वे दोनों बिना एक पल गंवाए सर्वर रूम की तरफ भागे। सर्वर रूम में, बड़ी-बड़ी मशीनें शांत पड़ी थीं, उनकी लाइट्स बुझी हुई थीं। यह मंज़र देखकर आरव का दिल डूब गया।
"ये कैसे हो सकता है? हमने रात भर काम किया था, सब कुछ ठीक था!" अनन्या ने लगभग चीखते हुए कहा।
आरव ने तुरंत एक कंसोल खोला और अपना लैपटॉप कनेक्ट किया। उसकी उँगलियाँ तेज़ी से कीबोर्ड पर चलने लगीं। "मुझे 'लॉग्स' देखने होंगे। पता नहीं क्या हुआ। लगता है किसी ने 'मेजर बग' इंट्रोड्यूस कर दिया है, या फिर कोई 'आउटसाइड अटैक' है।"
अनन्या उसके पास खड़ी रही, उसका चेहरा तनाव से सिकुड़ गया था। "क्या यह ठीक हो पाएगा, आरव? क्या हम इसे वापस ला सकते हैं?"
आरव ने जवाब देने के बजाय अपने कोड में ध्यान लगाया। "अभी कुछ कह नहीं सकता। यह बहुत बड़ा क्रैश है। पूरा 'डेटाबेस' ही हिल गया है।"
घंटे बीतते चले गए। सूरज पूरी तरह से निकल आया था और उसकी किरणें सर्वर रूम की खिड़की से अंदर आ रही थीं। आरव कोड की लाइनों में खोया हुआ था, और अनन्या उसके बगल में बैठी हुई थी, कभी अपनी एक्सेल शीट पर कुछ एनालाइज करती, तो कभी आरव की तरफ़ चिंता से देखती।
"मिल गया!" आरव ने अचानक कहा, उसकी आवाज़ में एक जीत की झलक थी।
अनन्या उछल पड़ी। "क्या?"
"एक 'मालवेयर' है! किसी ने जानबूझकर हमारे 'कोर कोड' में घुसपैठ की है और उसे 'करप्ट' कर दिया है! यह 'रैंडम क्रैश' नहीं है, यह एक 'अटैक' है!" आरव ने गुस्से से कहा।
अनन्या का चेहरा सख्त हो गया। "अटैक? किसने? क्यों?"
आरव ने सिर हिलाया। "अभी नहीं पता। लेकिन मुझे इसे तुरंत 'आइसोलेट' करना होगा, वरना यह पूरे सिस्टम को बर्बाद कर देगा।"
आरव फिर से अपने काम में जुट गया, उसकी उँगलियाँ तेज़ी से कीबोर्ड पर चलने लगीं, जैसे कोई कलाकार अपने कैनवास पर आखिरी स्ट्रोक दे रहा हो। अनन्या ने देखा कि आरव की आँखों में थकावट थी, पर एक जुनून भी था। वह समझ गई कि यह उसके लिए सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट नहीं था, यह उसका 'बच्चा' था।
"आरव, तुम्हें पानी चाहिए?" अनन्या ने पूछा, उसकी आवाज़ अब बहुत शांत और सपोर्टिव थी।
आरव ने बिना स्क्रीन से नज़र हटाए सिर हिलाया। अनन्या ने एक बोतल उठाई और उसे पानी दिया। आरव ने एक सिप लिया और बोतल वापस रख दी।
"तुम्हें क्या लगता है, कौन हो सकता है?" अनन्या ने पूछा।
आरव ने कोड देखते हुए कहा, "कोई 'कॉम्पिटिटर' हो सकता है, या कोई ऐसा जिसे हमारा 'आईडिया' पसंद नहीं आया हो। लेकिन जिसने भी किया है, उसने हमारे 'मेन सर्वर' को 'टारगेट' किया है।"
अनन्या को तुरंत विक्रम की याद आई। क्या वह इतना गिर सकता है?
घंटे और बीत गए। आरव पूरी तरह से पसीने से भीग चुका था। उसकी आँखों में लाल डोरे उतर आए थे। वह एक मुश्किल 'पैच' पर काम कर रहा था, जिसे ठीक करने में बहुत दिमाग़ लग रहा था।
"उफ़!" आरव ने अचानक अपना माथा खुजलाया। "ये 'एल्गोरिदम' इतना 'कॉम्प्लेक्स' है कि इसे 'अनडू' करना मुश्किल हो रहा है।"
अनन्या ने उसकी तरफ देखा। उसने अपनी एक्सेल शीट बंद कर दी थी और अब पूरा ध्यान आरव पर था। "तुम कर सकते हो, आरव। मुझे तुम पर भरोसा है।" उसकी आवाज़ में ईमानदारी थी। "तुमने मुझे सिखाया है कि कभी-कभी सबसे बड़े 'बग्स' में भी 'सोल्यूशन' छिपा होता है।"
आरव ने एक पल के लिए अपनी आँखों को बंद किया और फिर उन्हें खोला। अनन्या की बात ने उसे एक नई ऊर्जा दी। उसने फिर से अपनी उँगलियाँ कीबोर्ड पर चलाईं, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
और फिर, अचानक, सर्वर रूम की लाइटें फिर से चमक उठीं। कंसोल पर ग्रीन लाइट्स जलने लगीं।
"हो गया!" आरव ने लगभग फुसफुसाते हुए कहा।
अनन्या ने तुरंत अपना फ़ोन निकाला और Zap ऐप खोला। स्क्रीन पर उनका लोगो चमक रहा था, और 'मैच' के ऑप्शन दिख रहे थे। ऐप वापस ऑनलाइन आ चुका था।
"इट्स वर्किंग! आरव, तुमने कर दिखाया!" अनन्या खुशी से चिल्लाई।
आरव ने अपनी कुर्सी पर खुद को धड़ाम से गिरा दिया। उसकी साँस फूल रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक जीत की मुस्कान थी। उसने अपनी आँखों में थकान महसूस की। "हो गया। 'मालवेयर' को 'न्यूट्रलाइज' कर दिया है। और सिस्टम को वापस 'रिबूट' कर दिया है।"
अनन्या उसके पास आई और उसके कंधे पर हाथ रखा। "तुम... तुम कमाल हो, आरव।"
आरव ने ऊपर देखा। उसकी आँखों में थकान के बावजूद एक चमक थी। उसने अनन्या की आँखों में देखा। उन दोनों ने एक बहुत बड़े संकट का सामना किया था, और एक साथ मिलकर उसे हराया था। इस पल में, 'शर्त' और 'प्रतिद्वंद्विता' का कोई मतलब नहीं था। सिर्फ जीत का सुकून और एक-दूसरे के प्रति बढ़ता सम्मान था।
अनन्या धीरे से आरव के बगल में बैठ गई। वे दोनों कुछ पल के लिए ख़ामोश रहे, सिर्फ अपने शरीर को आराम दे रहे थे और उस पल की जीत का आनंद ले रहे थे। ऑफिस की शांत फिज़ा में, उनकी धड़कनें एक साथ धड़क रही थीं।
आरव ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में हल्की सी मिठास थी, "तुम्हारी एक्सेल शीट सी ज़िंदगी में, मैं एक छोटा सा एरर ही सही।"
अनन्या की आँखों में नमी आ गई। उसने पहली बार खुलकर मुस्कुराया, एक ऐसी मुस्कान जो उसके दिल से निकली थी, जिसमें कोई हिचक नहीं थी, कोई बनावटीपन नहीं था। उसकी आँखें आरव पर टिकी थीं, और उन आँखों में एक नया भाव था – प्यार।
वे एक-दूसरे की तरफ क़रीब आए, शब्दों की कोई ज़रूरत नहीं थी। बस उस पल में खो जाना चाहते थे, जहाँ सिर्फ वे दोनों थे, और उनकी अनकही कहानी थी।
तभी, सर्वर रूम का दरवाज़ा धड़ाम से खुला।
"अरे! आप दोनों अभी भी यहीं हैं?" बंटी की तेज़ आवाज़ गूँजी। "मुझे लगा आप लोग सुबह-सुबह भाग गए होंगे! मैं सोचा क्यों न सुबह-सुबह कुछ 'बड़ा' खाया जाए! देखिए क्या लाया हूँ!"
बंटी के हाथों में पिज़्ज़ा के दो बड़े-बड़े बॉक्स थे, और उसके चेहरे पर एक बेख़बर, ख़ुशी भरी मुस्कान थी।
आरव और अनन्या एक-दूसरे को देखकर अपनी हंसी दबाने लगे। उनका रोमांटिक पल का पूरी तरह से सत्यानाश हो चुका था। आरव ने धीरे से अपना सिर पकड़ा, और अनन्या ने अपनी आँखें घुमाईं। बंटी, हमेशा की तरह, माहौल बिगाड़ने में माहिर था।
लेकिन, उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान अभी भी बाकी थी। यह 'एरर' था, लेकिन यह उनका 'एरर' था। और उन्हें यह पसंद था।
Chapter 12
अध्याय 12
बंटी सर्वर रूम के दरवाज़े पर दो बड़े-बड़े पिज़्ज़ा बॉक्स पकड़े खड़ा था, उसके चेहरे पर सुबह-सुबह का पूरा जोश दिखाई दे रहा था। आरव और अनन्या एक-दूसरे के बेहद क़रीब थे, और उनके बीच बना वह जादुई पल बंटी की ज़ोरदार आवाज़ से चकनाचूर हो गया था। वे दोनों तुरंत एक-दूसरे से दूर हट गए, जैसे किसी ने उन्हें बिजली का झटका दे दिया हो। उनके गाल शर्म से लाल थे, और उनकी आँखों में एक अजीब सी असहजता थी।
"अरे! आप दोनों अभी भी यहीं हैं?" बंटी ने ख़ुद को दोहराया, पूरी तरह से माहौल की गंभीरता से अनजान। "मुझे लगा आप लोग सुबह-सुबह भाग गए होंगे! मैं सोचा क्यों न सुबह-सुबह कुछ 'बड़ा' खाया जाए! देखिए क्या लाया हूँ!" उसने दोनों पिज़्ज़ा बॉक्स उनकी तरफ़ लहराए। "सुबह-सुबह पिज़्ज़ा! बेस्ट कॉम्बिनेशन!"
आरव ने अपना माथा पकड़ लिया। उसकी आँखों में बंटी के लिए हल्की सी नाराज़गी थी, लेकिन साथ ही एक बेबसी भी। अनन्या ने अपनी नज़रें झुकाईं और अपने बिखरे हुए बालों को समेटने लगी।
"बंटी!" आरव ने धीमे से कहा, उसकी आवाज़ में गुस्सा छिपा था। "तुम... तुम क्या कर रहे हो यहाँ?"
बंटी ने मासूमियत से जवाब दिया, "अरे क्या बात है, भाई! रात भर जागे होगे ना? सोचा कुछ खिला दूँ! मैडम के लिए एक्स्ट्रा चीज़ वाला लाया हूँ, मुझे पता है उन्हें 'क्वांटिटी ओवर क्वालिटी' पसंद है!"
अनन्या ने एक हल्की सी घूर कर देखा। "क्वांटिटी ओवर क्वालिटी नहीं, मिस्टर बंटी। 'डेटा-ड्रिवन' चॉइस। और हाँ, सुबह-सुबह पिज़्ज़ा... यह 'हेल्थी' नहीं है।"
"अरे मैडम! कभी-कभी 'डेटा' को 'साइड' में रखकर 'दिल' की सुननी चाहिए! यह पिज़्ज़ा 'दिल' को ख़ुश कर देगा!" बंटी ने एक पिज़्ज़ा बॉक्स आरव की तरफ़ बढ़ाते हुए कहा।
आरव ने एक स्लाइस उठा ली, पर उसका ध्यान पिज़्ज़ा में नहीं था। वह बार-बार अनन्या की तरफ देख रहा था, जो अब अपनी बिखरी हुई फ़ाइलों को समेटने में लगी थी। उनके बीच की वो ख़ामोशी, वो क़रीबी... सब बिखर चुका था।
अनन्या ने अपने लैपटॉप को जल्दी से बंद किया। "मुझे लगता है, अब हमें चलना चाहिए। मेरे लिए एक 'इंपॉर्टेंट' मीटिंग है।" उसने घड़ी की तरफ़ देखा। "बस एक घंटे में शुरू हो जाएगी।"
बंटी ने पिज़्ज़ा का एक बड़ा निवाला मुँह में भरा और आधे चबाए हुए मुँह से बोला, "अरे मैडम! मीटिंग तो होती रहेगी! पहले 'फ्यूल' तो भर लो!"
अनन्या ने एक गहरी साँस ली। "मिस्टर बंटी, मैं 'प्रोफेशनल' हूँ, और मेरा 'टाइम मैनेजमेंट' बहुत 'सख्त' है।" उसने आरव की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो उसने तुरंत छिपा ली। "थैंक यू, आरव। सर्वर ठीक करने के लिए। तुमने बहुत अच्छा काम किया।" उसकी आवाज़ बहुत औपचारिक थी, जैसे वह किसी क्लाइंट से बात कर रही हो।
आरव ने सिर हिलाया। "नो प्रॉब्लम, अनन्या। यह मेरा काम था।" उसने भी अपने लहज़े को औपचारिक रखने की कोशिश की।
अनन्या ने तेज़ी से अपना बैग उठाया और सर्वर रूम से बाहर निकल गई। जाते-जाते उसने बंटी को एक और घूर कर देखा, शायद इसलिए कि उसने माहौल खराब कर दिया था।
बंटी, अनन्या के जाते ही आरव की तरफ़ मुड़ा। "क्या बात है, भाई? मैडम आज सुबह-सुबह इतनी 'प्रोफेशनल' क्यों हो गई हैं? कल रात कुछ ज़्यादा ही 'रोमांटिक' माहौल बन गया था क्या?" बंटी ने अपनी आँखें नचाईं और मुँह में दबा पिज़्ज़ा बड़ी मुश्किल से निगला।
आरव ने अपना सिर पकड़ लिया। "बंटी, तुम चुप रहोगे? कोई 'रोमांटिक' माहौल नहीं था। हम काम कर रहे थे। सर्वर क्रैश हो गया था, तुम्हें पता है!"
"अरे हाँ! सर्वर क्रैश! मैं तो भूल ही गया था! पर ये 'क्रैश' बड़ा कमाल का था, जिसने मैडम को पहली बार इतनी 'नॉर्मल' तरह से बात करते देखा!" बंटी हँसा। "मुझे लगा था तुम दोनों ने शर्त के चक्कर में 'प्यार' का 'बग' ही फिक्स कर दिया।"
आरव ने बंटी की तरफ गुस्से से देखा। "चुप कर, बंटी। और ये सब बकवास बंद कर। अब मैं जा रहा हूँ, मुझे कुछ नींद लेनी है।"
"अरे, तो फिर ये पिज़्ज़ा कौन खाएगा? मैंने सोचा था हम दोनों आराम से बैठकर 'समोसे में आलू' और 'अदरक वाली चाय' पर 'रिसर्च' करेंगे!" बंटी ने पिज़्ज़ा बॉक्स आरव की तरफ़ फिर से बढ़ा दिया।
आरव ने एक और पिज़्ज़ा स्लाइस उठाई और बंटी को चुप रहने का इशारा करके सर्वर रूम से बाहर निकल गया। उसका दिमाग़ अभी भी उस पल में अटका हुआ था जब वह अनन्या के क़रीब था। उसने अपनी उँगलियों को छुआ, उसे अब भी अनन्या के कंधे का एहसास हो रहा था। क्या वह पल सच में इतना ख़ूबसूरत था, या उसकी थकावट ने उसे ऐसा महसूस कराया?
वह जानता था कि बंटी की टाइमिंग ने सब गड़बड़ कर दी थी, लेकिन साथ ही उसे इस बात का अजीब सा डर भी था कि अगर बंटी न आता, तो वह क्या करता? क्या वह सच में अनन्या को किस कर लेता? यह सोचकर उसके दिल की धड़कन तेज़ हो गई। यह अनन्या वर्मा थी! उसकी प्रतिद्वंद्वी, उसकी 'डेटा-ड्रिवन' बॉस! और अब, उसके दिल में एक अजीब सी जगह बना रही थी।
आरव अपनी स्कूटर पर बैठकर अपने घर की तरफ चला गया। सुबह की ताज़ी हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी, पर उसके दिमाग़ में अनन्या की मुस्कुराती हुई आँखें घूम रही थीं, जो उसने पहली बार खुलकर देखी थीं। उसने अपनी पूरी ज़िंदगी 'ग़ालिब' की शायरी और 'पुराने गानों' में 'इश्क़' ढूँढा था, पर उसे कभी नहीं लगा था कि वह 'इश्क़' उसे एक 'एक्सेल शीट' से प्यार करने वाली लड़की में मिलेगा। यह तो 'एरर 404' से भी बड़ा 'बग' था!
इधर, अनन्या अपनी कैब में बैठकर घर जा रही थी। उसकी आँखें बंद थीं, पर उसके दिमाग़ में सर्वर रूम के अंदर का वह पल बार-बार घूम रहा था। आरव का चेहरा, उसकी आँखों की चमक, और वो शब्द – "तुम्हारी एक्सेल शीट सी ज़िंदगी में, मैं एक छोटा सा एरर ही सही।"
"उफ़!" अनन्या ने बुदबुदाया और अपनी आँखें खोल लीं। "मैं क्या कर रही हूँ? मैं एक 'डेवलपर' के बारे में सोचकर अपना कीमती समय क्यों बर्बाद कर रही हूँ? वह भी ऐसा डेवलपर जो 'पुराने ज़माने' का है और 'प्रोफेशनल' नहीं है!"
उसने खुद को डांटा। "अनन्या वर्मा, तुम्हें अपने करियर पर ध्यान देना है। विक्रम जैसे लोग तुम्हें नीचा दिखाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ेंगे। ये सब 'इमोशनल' बातें तुम्हारी 'प्रोडक्टिविटी' को ख़त्म कर देंगी!"
लेकिन फिर उसे याद आया कि कैसे आरव ने बिना किसी स्वार्थ के पूरी रात जागकर सर्वर ठीक किया था। कैसे उसने उस 'मालवेयर' को ढूंढा था, जिसकी वजह से Zap ऐप पूरी तरह से क्रैश हो गया था। उस पल में, उसकी सारी प्रोफेशनल कठोरता पिघल गई थी।
उसे अपने पिता की बात याद आई – "सफलता सिर्फ आंकड़ों में दिखती है, भावनाओं में नहीं।" क्या वह हमेशा यही करती रही थी? क्या उसने अपनी भावनाओं को इस हद तक दबा दिया था कि उसे अब पता ही नहीं चल रहा था कि असली ख़ुशी कहाँ है?
अनन्या ने अपना फ़ोन निकाला और Zap ऐप खोला। उसका ऐप बिलकुल ठीक काम कर रहा था। उसने एक पल के लिए आरव की प्रोफ़ाइल देखने का सोचा, पर तुरंत अपना विचार बदल दिया। "नहीं! अभी नहीं!" उसने खुद को कहा।
लेकिन उसके दिमाग़ में आरव का 'एरर 404' वाला मज़ाक घूम रहा था। 'Error 404: Ishq Not Found'। क्या सच में ऐसा था? क्या उसकी ज़िंदगी में 'इश्क़' सच में 'नॉट फाउंड' था, क्योंकि उसने कभी उसे खोजने की कोशिश ही नहीं की थी?
वह जानती थी कि उनके बीच कुछ बदल गया था। वह बदलाव सिर्फ सर्वर के ठीक होने का नहीं था, बल्कि उनके रिश्तों में आया एक नया अध्याय था। यह एक ऐसा 'कोड' था जिसे न आरव का 'दिल वाला लॉजिक' समझ पा रहा था, और न अनन्या का 'डेटा-ड्रिवन एल्गोरिदम'। यह बस हो रहा था। और यह 'एरर' अब उसे उतना बुरा नहीं लग रहा था। बल्कि, यह अब उसे दिलचस्प लगने लगा था।
अनन्या घर पहुँची, और जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, उसकी असिस्टेंट का फ़ोन आया। "मैम, CEO सर की तरफ़ से एक ईमेल आया है। आज शाम 4 बजे 'अर्जेंट मीटिंग' बुलाई गई है। Zap ऐप के क्रैश के बारे में।"
अनन्या का दिल एक पल के लिए धड़का। "ठीक है, मैं देख लेती हूँ।" उसने फ़ोन रखा। 'अर्जेंट मीटिंग'। इसका मतलब था कि उसे फिर से 'प्रोफेशनल' अनन्या वर्मा बनना होगा, जिसने अपनी भावनाओं को 'एक्सेल शीट' के नीचे दबा रखा था।
लेकिन इस बार, उसके दिमाग़ में सिर्फ़ मीटिंग का तनाव नहीं था, बल्कि एक अजीब सी उम्मीद भी थी। एक उम्मीद उस 'एरर' से, जिसने उसकी ज़िंदगी को एक नया 'अपडेट' देना शुरू कर दिया था। वह जानती थी कि आज की मीटिंग आसान नहीं होगी, पर उसे यह भी पता था कि इस बार वह अकेली नहीं थी। आरव उसके साथ था। और यह एहसास उसे अजीब सी ताक़त दे रहा था।
Chapter 13
अध्याय 13
अगले दिन, ZapConnect के चमकदार, आधुनिक ऑफिस में, अनन्या अपनी सीट पर बैठी एक्सेल शीट्स में गहराई से डूबी हुई थी। उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड पर तेज़ी से चल रही थीं, जैसे वह अपने हर एक्शन को डेटा पॉइंट से संचालित कर रही हो। लेकिन उसके माथे पर एक हल्की सी सिकुड़न थी, जो उसके अंदरूनी तनाव को साफ़ दिखा रही थी। उसका दिमाग बार-बार सर्वर रूम में बिताई उस रात पर चला जाता था – आरव की थकी हुई, पर जुनूनी आँखें, उसके होंठों से निकले वो अनकहे शब्द, और सबसे बढ़कर, बंटी के आने से ठीक पहले का वह पल, जब सब कुछ ठहर सा गया था।
"उफ़, अनन्या! ध्यान दो!" उसने खुद को बुदबुदाते हुए कहा। "तुम्हें Zap ऐप के नए 'यूज़र रिटेंशन' पर प्रेजेंटेशन तैयार करनी है, न कि किसी 'डेवलपर' के बारे में सोचना है!"
तभी, उसकी असिस्टेंट, रिया, एक कप कॉफ़ी लेकर उसके पास आई। "मैम, यह आपकी कॉफ़ी। और HR से कुछ फ़ाइलें आई हैं।"
अनन्या ने बिना देखे कप लिया और उसे लगभग मेज़ पर पटक दिया, जिससे कॉफ़ी हल्की सी छलक गई। "रिया, मैंने तुमसे कहा था कि मुझे 'अमेरिकनो' चाहिए, 'लेट' नहीं। और ये HR फ़ाइलें अभी क्यों? क्या तुम नहीं जानती कि मैं इस वक़्त कितने 'क्रिटिकल प्रोजेक्ट' पर काम कर रही हूँ?" उसकी आवाज़ में एक तीखापन था, जो अक्सर तब आता था जब वह तनाव में होती थी।
रिया थोड़ी घबरा गई। "सॉरी मैम। मैं बदलवा देती हूँ।" वह तुरंत वहाँ से हट गई।
अनन्या ने एक गहरी साँस ली, उसे खुद पर गुस्सा आया कि उसने रिया पर बेवजह झुंझलाहट दिखाई। यह आरव के बारे में सोचने का नतीजा था! उसने अपनी आँखें बंद कीं और फिर से खोलीं, खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी।
तभी उसके लैपटॉप पर एक नया ईमेल पॉप-अप हुआ। भेजने वाला था: 'आरव शर्मा, दिल-Gic सॉल्यूशंस'। सब्जेक्ट था: 'Zap App: Server Performance Report - Post-Crash Analysis'.
अनन्या ने झट से ईमेल खोला। उसकी उम्मीद थी कि शायद उसमें कुछ और लिखा होगा, कोई 'पर्सनल' बात, कल रात का कोई ज़िक्र। लेकिन नहीं। ईमेल बिलकुल 'प्रोफेशनल' था, जिसमें सर्वर की 'परफॉरमेंस', 'अपटाइम', 'डाउनटाइम' और 'मालवेयर डिटेक्शन' के बारे में पूरी 'डेटा-ड्रिवन' रिपोर्ट थी। कोई शायरी नहीं, कोई 'एरर' वाला मज़ाक नहीं।
फिर भी, अनन्या उसे एक बार पढ़ी, फिर दूसरी बार, और फिर तीसरी बार। वह हर शब्द, हर वाक्य को छान रही थी, जैसे कोई छिपी हुई बात ढूंढ रही हो। उसे लगा कि आरव ने जानबूझकर अपने 'ईमोशनल' साइड को दबाया होगा, ताकि वह 'प्रोफेशनल' दिखे। उसे ईमेल में कुछ भी ऐसा नहीं मिला, लेकिन फिर भी उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई, जिसे उसने तुरंत छिपा लिया।
उसने खुद को समझाया, "यह सिर्फ़ एक अच्छी 'रिपोर्ट' है, अनन्या। और कुछ नहीं।" लेकिन उसका दिल कुछ और ही कह रहा था।
उधर, आरव के छोटे से ऑफिस, 'दिल-Gic' में, बंटी एक खाली समोसे की प्लेट लिए आरव के सिर पर सवार था। आरव अपने कंप्यूटर पर कुछ कोड लिख रहा था, पर उसका ध्यान बार-बार फ़ोन पर जा रहा था, इंतज़ार कर रहा था कि शायद अनन्या का कोई मैसेज या कॉल आए।
"भाई, क्या चक्कर है?" बंटी ने आरव की कुर्सी के पीछे से झाँकते हुए कहा। "अनन्या मैडम आज बहुत 'प्रोफेशनल' लग रही हैं। मैंने देखा, उनकी असिस्टेंट बहुत डरी हुई लग रही थी।"
आरव ने बंटी की तरफ देखा। "तुम क्या देखते रहते हो दिन भर? जाओ अपना काम करो।"
"अरे मेरा काम तो यही है! 'मॉनिटरिंग' करना! मुझे शक है, भाई। कल रात कुछ ज़्यादा ही 'रोमांटिक' माहौल बन गया था क्या? जब मैं आया, तो तुम दोनों एकदम 'हग' करने वाले मूड में थे!" बंटी ने अपनी आँखें नचाईं और मज़ेदार अंदाज़ में बोला।
आरव का मुँह खुला रह गया। "बंटी! तुम पागल हो गए हो क्या? 'हग'? कुछ नहीं था ऐसा! हम काम कर रहे थे! और तुम क्या समझते हो मैं क्या कर रहा था? सर्वर क्रैश ठीक कर रहा था!"
"अरे भाई! मैं 'टेक्निकल' बंदा हूँ! मैं जानता हूँ जब दो 'मॉड्यूल्स' एक-दूसरे के इतने 'क्लोज' आते हैं, तो 'फंक्शनलिटी' कुछ और ही हो जाती है!" बंटी ने मुस्कुराते हुए कहा। "यानी कि, मुझे लगता है, तुम दोनों के बीच अब 'इश्क़ का एल्गोरिदम' रन हो रहा है! और वो भी 'बैकग्राउंड प्रोसेस' में!"
आरव ने अपना हाथ बंटी की तरफ बढ़ाया, जैसे उसे मारने वाला हो। "चुप कर, बंटी! वरना मैं तेरी सैलरी से 'समोसा अलाउंस' काट लूँगा!"
बंटी झट से पीछे हट गया। "अरे बाप रे! नहीं भाई! 'समोसा अलाउंस' नहीं! ठीक है, चुप रहता हूँ।" वह बुदबुदाया, "पर मैंने देखा है। कुछ तो है।"
आरव ने वापस स्क्रीन की तरफ देखा, लेकिन बंटी की बात उसके दिमाग में अटक गई थी। क्या सच में उनकी यह अजीब सी केमिस्ट्री अब दूसरों को भी नज़र आने लगी थी? बंटी जैसे बेखबर और खाने-पीने वाले इंसान को भी? यह सोचकर आरव को अजीब सी घबराहट हुई, और साथ ही, एक अजीब सी ख़ुशी भी।
वह जानता था कि अनन्या की तरफ़ से मिला वह 'थैंक यू' और उसकी आँखों में जो 'नरमी' उसने देखी थी, वह किसी भी डेटा रिपोर्ट से ज़्यादा मायने रखती थी। उनके बीच की शर्त अभी ख़त्म नहीं हुई थी, लेकिन अब उस शर्त के पीछे एक ऐसी भावना पनप रही थी, जिसे न 'डेटा' समझा सकता था और न ही कोई 'लॉजिक'। यह एक 'एरर' था, जो अब धीरे-धीरे एक 'फ़ीचर' में बदल रहा था।
आरव ने फिर से अपनी उँगलियाँ कीबोर्ड पर चलाईं, पर उसका मन कहीं और था। उसे एहसास हुआ कि अब उसके 'कोड' में, अनन्या का नाम भी जुड़ने लगा था। यह एक नया 'अपडेट' था, जिसके लिए उसने कभी प्लान नहीं किया था। और शायद, यही 'अपडेट' उसकी ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण 'अपडेट' होने वाला था।
Chapter 14
अध्याय 14
अनन्या ने शाम की मीटिंग ख़त्म की और अपने ऑफिस के शानदार केबिन में वापस आई। उसके लैपटॉप की स्क्रीन पर अभी भी 'Zap App' का 'यूज़र डैशबोर्ड' खुला हुआ था। उसे 'न्यू यूज़र एक्विजिशन' और 'यूज़र रिटेंशन रेट' के ग्राफ़्स की समीक्षा करनी थी। वह जानती थी कि उसे अब पूरी तरह से अपने काम पर ध्यान देना होगा, खासकर तब, जब विक्रम लगातार उसकी हर चाल पर नज़र रखे हुए था।
उसने एक लंबी साँस ली और माउस को घुमाया। "ठीक है, अनन्या। अब सिर्फ़ डेटा। कोई 'इमोशन' नहीं, कोई 'एरर' नहीं।" उसने खुद से कहा।
वह एक-एक करके नए यूज़र डेटा को एनालाइज़ कर रही थी। यूज़र्स के 'डेमोग्राफिक्स', उनकी 'पसंद-नापसंद' और ऐप पर बिताया गया 'औसत समय'। सब कुछ 'डेटा पॉइंट्स' में बंटा हुआ था। वह उन 'कम्पेटिबिलिटी स्कोर्स' को भी देख रही थी, जो Zap ऐप अपने 'एल्गोरिदम' के ज़रिये दिखाता था।
"हम्म, 'कम्पेटिबिलिटी स्कोर' 88%... 'मैच मेकिंग' 'हाई'... 'यूज़र इंगेजमेंट' 'एवरेज'..." वह बुदबुदा रही थी।
तभी, स्क्रीन के कोने में एक चमकीला, बड़ा-सा 'पॉप-अप नोटिफिकेशन' आया। यह आमतौर पर 'न्यू मैच' का नोटिफिकेशन होता था, लेकिन इस बार यह कुछ अलग लग रहा था। यह पहले से ज़्यादा बड़ा और आकर्षक था, जैसे ऐप खुद ही किसी ख़ास बात का ऐलान कर रहा हो।
अनन्या ने थोड़ा झुककर देखा। नोटिफिकेशन पर बड़े अक्षरों में लिखा था: "Congratulations! You have a new High-Potential Match!"
उसका दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उसने अपनी कुर्सी को थोड़ा पीछे खींचा। 'हाई-पोटेंशियल मैच'? यह Zap ऐप में एक नया फ़ीचर था, जो बहुत ही कम यूज़र्स को मिलता था। यह तब मिलता था जब ऐप का 'अल्गोरिदम' किसी ऐसे मैच को डिटेक्ट करता था, जिसके साथ यूज़र की 'केमिस्ट्री' और 'कम्पेटिबिलिटी' दोनों 'हाईएस्ट लेवल' पर हों।
और फिर, उसने 'मैच' का नाम पढ़ा। उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं।
"आरव शर्मा।"
अनन्या के मुँह से अनजाने में एक हल्की-सी आवाज़ निकली, "क्या?"
यह तीसरी बार था! पहली बार एक 'एरर' समझकर, दूसरी बार भी 'बग' मानकर उसने 'रिजेक्ट' कर दिया था। लेकिन इस बार, नोटिफिकेशन पर 'कम्पेटिबिलिटी स्कोर' चमक रहा था: "Compatibility Score: 93%."
93%? यह उसके अब तक के किसी भी मैच से कहीं ज़्यादा था! उसके 'डेटा-ड्रिवन' दिमाग ने तुरंत कैलकुलेट किया। यह स्कोर इतना हाई कैसे हो सकता था? क्या ऐप में कोई 'मेजर बग' था, जो बार-बार उसे आरव से 'मैच' कर रहा था? या... या फिर सच में...
उसके हाथ काँप रहे थे। पहले की तरह तुरंत 'रिजेक्ट' करने के बजाय, उसने हिचकिचाते हुए 'आरव शर्मा' के नाम पर क्लिक किया। उसका 'प्रोफ़ाइल' खुल गया।
आरव की प्रोफ़ाइल उतनी 'प्रोफेशनल' नहीं थी जितनी अनन्या को पसंद थी। कोई 'सोफिस्टिकेटेड' पोर्टफोलियो पिक्चर नहीं थी। एक साधारण सी तस्वीर थी जिसमें वह चाय का कप पकड़े मुस्कुरा रहा था। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, वही चमक जो उसने सर्वर रूम में देखी थी।
अनन्या ने 'धीरे-धीरे' उसकी प्रोफ़ाइल स्क्रॉल की। 'पसंदीदा फ़िल्में': "प्यासा", "मुग़ल-ए-आज़म", "शोले"। अनन्या ने अपनी भौंहें चढ़ाईं। 'क्लासिक'! बेशक! 'पसंदीदा शायरी': कुछ 'ग़ालिब' के शेर, कुछ 'मीरा' के भजन। 'पसंदीदा डायलॉग्स': "रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं..." और "मोना डार्लिंग..."
अनन्या के होंठों पर एक अनचाही, हल्की सी मुस्कान आ गई। ये सब 'चीज़ी' था! बिलकुल 'अनप्रोफेशनल'! 'डेटा' के हिसाब से तो यह प्रोफ़ाइल उसके 'परफेक्ट मैच' से कोसों दूर थी। उसे एक ऐसा 'पार्टनर' चाहिए था जो 'इन्वेस्टमेंट बैंकिंग' की बात करे, 'स्टॉक मार्केट' की बात करे, 'ग्लोबल इकोनॉमी' की बात करे! न कि 'मोना डार्लिंग' की!
लेकिन फिर भी, वह पढ़ती रही। उसकी 'हॉबीज़' में 'पुरानी किताबें पढ़ना', 'फ़िल्मी गाने सुनना', 'हाथ से चिट्ठियाँ लिखना' लिखा था। यह सब उसके 'डेटा' और 'लॉजिक' से बिलकुल विपरीत था, फिर भी अनन्या खुद को मुस्कुराने से रोक नहीं पाई। उसे आरव की बेपरवाही, उसकी सादगी और उसके 'पुराने ख़यालों' वाला अंदाज़ अब 'अनोखा' लगने लगा था, न कि 'चीज़ी'।
उसे आरव की आँखों में वह 'चमक' याद आई, जब उसने उससे कहा था, "तुम्हारी एक्सेल शीट सी ज़िंदगी में, मैं एक छोटा सा एरर ही सही।" उस वक़्त यह एक मज़ाक था, लेकिन अब इस 'मैच' को देखकर, उसे लगा कि क्या वह 'एरर' ही उसके लिए 'परफेक्ट फ़ीचर' तो नहीं था?
अनन्या ने अचानक ही ऐप बंद कर दिया। उसने न 'मैच' को 'स्वीकार' किया और न ही 'अस्वीकार'। वह 'आरव शर्मा' की प्रोफ़ाइल को उस 'अनिश्चित' स्थिति में छोड़ आई थी, जैसे वह उनके रिश्ते को एक 'पेंडिंग स्टेटस' में डालना चाहती हो।
उसके मन में एक अजीब सी उथल-पुथल थी। उसका 'लॉजिकल' दिमाग उसे चिल्ला रहा था कि यह एक 'बग' है, एक 'सिस्टम एरर'! लेकिन उसका दिल, जो अब 'एक्सेल शीट्स' से थोड़ा सा बाहर निकल आया था, उसे एक नई 'संभावना' दिखा रहा था।
"93%... कैसे हो सकता है?" वह फिर बुदबुदाई। यह 'सवाल' उसके दिमाग़ में गूंजता रहा। यह सिर्फ़ एक 'टेक्निकल एरर' नहीं था। यह उनके रिश्ते में एक नया अध्याय था, जिसकी शुरुआत हो चुकी थी, चाहे वह इसे माने या न माने। अनन्या अपनी कुर्सी पर झुकी और कंप्यूटर की तरफ देखती रही, जहाँ अब कोई 'नोटिफिकेशन' नहीं था, सिर्फ़ 'डेटा' के सूखे ग्राफ़ थे। लेकिन उसका मन 'डेटा' में नहीं, 'आरव शर्मा' की 'प्रोफ़ाइल' में अटका हुआ था।
Chapter 15
अध्याय 15
आरव अपने छोटे से, क़िताबों और पुराने गजेट्स से भरे ऑफिस में बैठा, अपने कंप्यूटर पर झुका हुआ था। उसने आज सुबह से लगभग बीस से तीस लाइनों का कोड लिख दिया था, लेकिन उसका दिमाग अभी भी पूरी तरह से फोकस नहीं हो पा रहा था। सर्वर क्रैश और अनन्या के साथ बिताई वह रात, उसके जेहन से निकल ही नहीं रही थी। उसे याद आया अनन्या का थक कर उसके कंधे पर सिर रखना, उसके हाथ का उसके हाथ से छू जाना और वह ख़ामोश पल जब सब कुछ ठहर सा गया था। उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई थी।
"बस करो आरव! काम पर ध्यान दो!" उसने खुद को झिड़कते हुए कहा। "वो बस एक 'प्रोफेशनल कलीग' है और तुम एक 'डेवलपर'। और रही बात शर्त की, तो वो अभी ख़त्म नहीं हुई है।"
वह कुछ देर और कोड लिखता रहा, लेकिन उसकी आँखें बार-बार फ़ोन की तरफ जा रही थीं, जैसे वह किसी अनकहे संदेश का इंतज़ार कर रहा हो। उसे लग रहा था कि अनन्या ने उसके भेजे गए 'परफॉरमेंस रिपोर्ट' वाले ईमेल को पढ़ लिया होगा, लेकिन उसकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया था।
तभी, उसके लैपटॉप की स्क्रीन पर एक बड़ा-सा, चमकदार 'पॉप-अप नोटिफिकेशन' आया। यह Zap ऐप का 'न्यू मैच' नोटिफिकेशन था। आरव ने सोचा कि शायद किसी 'बीटा टेस्टर' को नया 'हाई-पोटेंशियल मैच' मिला होगा, जिसकी 'कंपैटिबिलिटी' उसके 'रूह का कनेक्शन' फीचर से मैच हो रही होगी। उसने सोचा, चलो, अब कुछ तो नया 'डेटा' मिलेगा।
उसने माउस पर हाथ रखा और नोटिफिकेशन पर क्लिक किया। उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं।
नोटिफिकेशन पर बड़े अक्षरों में लिखा था: "Congratulations! You have a new High-Potential Match!"
और उसके ठीक नीचे, नाम था: "अनन्या वर्मा।"
आरव के मुँह से अनजाने में एक हल्की सी आवाज़ निकली, "अनन्या?"
यह तीसरी बार था! और इस बार, 'कम्पेटिबिलिटी स्कोर' चमक रहा था: "Compatibility Score: 93%."
93%? आरव का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। यह उसके खुद के बनाए 'रूह का कनेक्शन' वाले फीचर का 'मैच' था, और वह भी अनन्या के साथ? पहले दो बार उसने इसे 'बग' मानकर 'रिजेक्ट' कर दिया था, लेकिन 93%? यह कोई 'छोटा-मोटा एरर' तो नहीं हो सकता था! यह तो हद थी!
उसके मन में एक साथ कई ख़याल कौंधे। क्या मेरा 'अल्गोरिदम' ख़राब हो गया है? या फिर अनन्या और मेरे बीच सच में कोई 'कनेक्शन' है, जिसे मेरा ही 'कोड' पकड़ रहा है, लेकिन मैं नहीं देख पा रहा हूँ?
उसने अपने काँपते हुए हाथों से 'अनन्या वर्मा' की प्रोफ़ाइल पर क्लिक किया। अनन्या की प्रोफ़ाइल खुल गई। उसकी 'प्रोफ़ाइल पिक्चर' में वह हमेशा की तरह 'प्रोफेशनल' अंदाज़ में मुस्कुरा रही थी, सूट-बूट में। आरव ने सोचा, "अरे, इस लड़की की एक भी 'नॉर्मल' फोटो नहीं है क्या?"
उसने प्रोफ़ाइल स्क्रॉल की। अनन्या की पसंदीदा चीजें: 'एक्सेल शीट्स', 'डेटा एनालिटिक्स', 'प्रेजेंटेशन बनाना'। आरव मुस्कुराया। 'कम्पेटिबिलिटी स्कोर' 93% और पसंद-नापसंद में इतना बड़ा अंतर? क्या यही 'रूह का कनेक्शन' था?
फिर उसकी नज़र एक और ख़ास 'नोटिफिकेशन' पर पड़ी, जो प्रोफ़ाइल के कोने में छोटे अक्षरों में लिखा था: "Ananya Verma viewed your profile 10 minutes ago."
आरव की आँखें बड़ी हो गईं। अनन्या ने उसकी प्रोफ़ाइल देखी थी! और उसने अभी तक इसे 'रिजेक्ट' नहीं किया था! यह एक 'डेटा पॉइंट' था, जो किसी भी 'लॉजिकल' इंसान के लिए छोटा हो सकता था, लेकिन आरव के लिए यह बहुत बड़ा 'सिग्नल' था। यह 'सिग्नल' उसे बता रहा था कि अनन्या के मन में भी कुछ चल रहा था, कुछ ऐसा जिसे वह अपने 'डेटा-ड्रिवन' दिमाग से 'प्रोसेस' नहीं कर पा रही थी।
आरव अपने ख़यालों में खोया हुआ था, अचानक उसके कंधे पर एक वज़न महसूस हुआ।
"भाई! ये क्या देख रहा है तू?" बंटी की आवाज़ उसके कान में गूंजी। "क्या बात है! अनन्या मैडम? और 93%? भाई, ये तो क़िस्मत का 'ग्रीन सिग्नल' है! एकदम 'हाईवे' खाली है!"
बंटी आरव के कंधे के ऊपर से झाँक रहा था, उसकी आँखों में शरारत भरी थी। "अरे, अब तो 'स्वाइप राइट' कर दे! सोच क्या रहा है? अपनी ही 'ऐप' है! कर दे! 'सेटिंग्स' में 'चेंज' कर दे अगर 'मैच' नहीं हो रहा है तो! ये तो अपना ही 'अल्गोरिदम' है!" बंटी ने अपनी दाएँ हाथ की हथेली से हवा में एक काल्पनिक 'स्वाइप राइट' का इशारा किया।
आरव घबरा गया। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। "बंटी! हट यहाँ से! तू... तू क्या कर रहा है?" उसने तुरंत लैपटॉप की स्क्रीन बंद कर दी। जैसे किसी ने उसे चोरी करते हुए पकड़ लिया हो।
"अरे, बंद क्यों कर दिया? मैंने सब देख लिया! भाई, ये तो 'आफ़त-ए-इश्क़' है! अब तू 'इश्क़ का मारा' हो गया है! अब क्या करेगा?" बंटी ने उसे चिढ़ाते हुए कहा। "देख भाई, अगर 'लाइफ़' में 'कंफ्यूजन' हो, तो 'समोसे' खाया कर! 'लॉजिक' अपने आप आ जाता है।"
आरव ने अपना सिर पकड़ा। "बंटी, तुझे कितनी बार बोला है, मेरे काम में दखल मत दिया कर! जा, अपने 'ई-कॉमर्स पोर्टल' के लिए 'बग्स' ढूंढ! वरना मैं तुझे 'फिक्स' कर दूँगा!"
"ठीक है, ठीक है! जा रहा हूँ! 'फ़िक्स्ड बग्स' ही तो मेरी 'जिंदगी' है! पर याद रखना, 'इश्क़' भी एक तरह का 'बग' ही है, जो एक बार 'सिस्टम' में आ जाए तो जल्दी 'रिमूव' नहीं होता!" बंटी हंसते हुए वहाँ से चला गया, अपने पीछे अपनी 'ज्ञान' भरी बातें छोड़ गया।
आरव अकेला रह गया, उसका लैपटॉप बंद था, लेकिन उसका दिमाग़ अब पूरी तरह से अनन्या के उस एक 'एक्शन' पर अटका हुआ था – उसने उसकी प्रोफ़ाइल देखी थी, और उसे 'रिजेक्ट' नहीं किया था। यह उसे उम्मीद दे रहा था, एक छोटी सी उम्मीद की किरण।
वह अपनी कुर्सी पर पीछे की तरफ झुका और छत को घूरने लगा। उसने हमेशा सोचा था कि प्यार एक 'इमोशनल' चीज़ है, जो 'डेटा' और 'लॉजिक' से परे है। वह मानता था कि उसके 'रूह का कनेक्शन' फीचर में कुछ तो ख़ास है, जो सिर्फ 'डेटा' नहीं देखता, बल्कि 'दिल' की गहराइयों को समझता है। लेकिन अब, जब उसका अपना 'कोड' उसे अनन्या से 'मैच' कर रहा था, तो उसे अपनी ही धारणाओं पर शक हो रहा था।
क्या यह उसका अपना 'सबकॉन्शियस' था, जो उसके 'कोड' के ज़रिये 'रिफ्लेक्ट' हो रहा था? क्या उसका दिल, जो अभी तक 'Error 404: Ishq Not Found' दिखा रहा था, अब 'Ishq Found: Loading' की स्थिति में आ गया था?
वह 'शर्त' के बारे में सोचा। कौन जीतेगा? उसका 'दिल वाला लॉजिक' या अनन्या का 'डेटा वाला प्यार'? अब उसे लग रहा था कि यह शर्त सिर्फ़ एक खेल नहीं रही थी। यह उनके बीच पनप रहे एक ऐसे रिश्ते की शुरुआत थी, जहाँ 'डेटा' और 'दिल' दोनों एक-दूसरे से लड़ने की बजाय, एक-दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे थे।
आरव ने एक गहरी साँस ली। उसकी आँखें अब छत पर नहीं, बल्कि बंद लैपटॉप की काली स्क्रीन पर थीं, जिस पर उसकी और अनन्या की अनकही कहानी की परछाई दिख रही थी। उसे लग रहा था कि उसका जीवन, जो पहले 'साधारण कोड' की तरह सीधा-सादा था, अब अनन्या के 'एल्गोरिदम' से मिलकर एक जटिल, लेकिन ख़ूबसूरत 'प्रोग्राम' में बदल रहा था। और उसे इस नए 'प्रोग्राम' में आगे क्या होगा, इसका बेसब्री से इंतज़ार था।
Chapter 16
अध्याय 16
अनन्या अपने बड़े, चमकदार ऑफिस के कॉन्फ्रेंस रूम में अपनी टीम के साथ बैठी एक नए 'मार्केटिंग कैंपेन' के लिए 'टैगलाइन' पर 'ब्रेनस्टॉर्म' कर रही थी। सामने की सफ़ेद बोर्ड पर दर्जनों 'टैगलाइन्स' लिखी हुई थीं – ‘Zap: Your Data, Your Destiny!’, ‘Connect with Precision!’, ‘The Future of Dating is Here!’। लेकिन अनन्या संतुष्ट नहीं थी। उसे कुछ ऐसा चाहिए था जो 'डाटा' से आगे बढ़कर लोगों के 'दिल' को छू सके, कुछ ऐसा जो 'Zap' ऐप को सिर्फ एक 'टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट' नहीं, बल्कि 'इमोशनल कनेक्शन' का ज़रिया बना सके।
"नहीं! नहीं! यह सब बहुत 'कॉर्पोरेट' लग रहा है!" अनन्या ने हाथ हिलाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में साफ़ झुंझलाहट थी। "मुझे कुछ नया चाहिए! कुछ 'फ्रेश'! कुछ ऐसा जो 'डेटा' नहीं, 'दिल' की बात करे!"
उसने जैसे ही 'दिल' शब्द का इस्तेमाल किया, उसके दिमाग़ में आरव का चेहरा कौंध गया। उसकी वह बात – "मेरा दिल वाला लॉजिक..."। अनन्या ने अपनी आँखें हल्की सी भींची। 'दिल'! वह यह शब्द भी क्यों इस्तेमाल कर रही थी? यह सब उस 'अनप्रोफेशनल' डेवलपर का असर था।
"मैम, हमने सभी 'कीवर्ड्स' और 'ट्रेंडिंग हैशटैग्स' को एनालाइज़ किया है।" उसकी असिस्टेंट ने कहा, "लेकिन 'इमोशनल अपील' के साथ 'टेक्नोलॉजी' को जोड़ना थोड़ा मुश्किल हो रहा है।"
अनन्या ने एक लंबी साँस ली। "मुश्किल है, तभी तो हमें करना है। मुझे ऐसा कुछ चाहिए जो 'यूज़र' के दिमाग़ में बैठे, और 'दिल' में उतर जाए। सोचिए!"
उसकी टीम के चेहरे पर तनाव था। वे जानते थे कि जब अनन्या किसी चीज़ पर अड़ जाती थी, तो उसे हासिल करके ही मानती थी। घंटों तक 'ब्रेनस्टॉर्मिंग' चलती रही, लेकिन कोई भी 'टैगलाइन' अनन्या को पसंद नहीं आ रही थी। वह बार-बार अपनी एक्सेल शीट में लिखी पुरानी 'परफेक्ट पार्टनर' की 'डेफिनिशन' को याद कर रही थी और उसे आरव की 'ग़ालिब' वाली बातें याद आ रही थीं। कैसे दो विपरीत चीज़ें उसके दिमाग में एक साथ चल रही थीं, यह उसे ख़ुद भी समझ नहीं आ रहा था।
उधर, आरव अपने ऑफिस में बैठा अनन्या के साथ 'वीडियो कॉल' पर था। वे 'Zap' ऐप के 'परफॉरमेंस ऑप्टिमाइजेशन' पर बात कर रहे थे। आरव, अनन्या की 'स्क्रीन' पर देख रहा था, जहाँ वह अपनी टीम को डांट रही थी। अनन्या का चेहरा तना हुआ था, उसके माथे पर गहरी लकीरें थीं, और वह बार-बार अपने बालों को पीछे धकेल रही थी। आरव ने नोटिस किया कि वह आजकल बहुत ज़्यादा तनाव में रहने लगी थी। उसकी 'एक्सेल शीट' वाली दुनिया में 'स्ट्रेस' भी 'डेटा पॉइंट' की तरह बढ़ता ही जा रहा था।
"आरव, क्या तुम मेरी बात सुन रहे हो?" अनन्या की आवाज़ उसे 'कॉल' पर सुनाई दी, थोड़ी खीझ के साथ। "हमें 'लेटेन्सी' को 'मिनिमाइज़' करना होगा। 'सर्वर रिस्पॉन्स टाइम' अभी भी 'ऑप्टिमल' नहीं है।"
आरव ने ध्यान से उसकी बात सुनी, लेकिन उसका मन अनन्या के चेहरे पर दौड़ रहे तनाव को महसूस कर रहा था। उसे लगा कि वह सिर्फ़ 'टेक्निकल प्रॉब्लम' की बात नहीं कर रही है, बल्कि वह किसी और बड़ी परेशानी में थी। उसका दिल कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था। एक डेवलपर के तौर पर उसका काम 'बग्स फिक्स' करना था, लेकिन इस बार 'बग' उसके 'कोड' में नहीं, अनन्या की आँखों में दिख रहा था।
"हाँ, अनन्या। मैं सुन रहा हूँ।" आरव ने कहा। "मैं 'फ़ाइनेस्ट डिटेल्स' पर काम कर रहा हूँ। कल तक 'टेस्टिंग रिपोर्ट' भेज दूँगा।"
अनन्या ने एक गहरी साँस ली। "ठीक है, आरव। मुझे उम्मीद है कि तुम इसे जल्दी 'फिक्स' कर दोगे।" उसकी आवाज़ में थकान थी। "ओके, 'एंडिंग द कॉल'।"
अनन्या ने बिना किसी और बात के 'कॉल' काट दी। आरव कुछ देर तक 'स्क्रीन' की तरफ देखता रहा, जहाँ अब सिर्फ़ उसकी अपनी काली शक्ल दिख रही थी। उसे अच्छा नहीं लगा। वह जानता था कि वह अपनी 'टैगलाइन' को लेकर कितनी परेशान थी। उसने उसकी बातों में 'दिल' शब्द का इस्तेमाल सुना था। क्या यह एक 'संकेत' था?
आरव कुछ देर अपनी कुर्सी पर बैठा सोचता रहा। क्या किया जाए? उसे कुछ ऐसा करना था जिससे अनन्या को थोड़ा 'रिलैक्स' महसूस हो। 'कॉर्पोरेट' दुनिया में क्या करते हैं लोग? 'ऑफिशियल ईमेल' भेजते हैं? 'मीटिंग' फिक्स करते हैं? नहीं, यह अनन्या के लिए काफी नहीं था। उसे कुछ 'पर्सनल' चाहिए था, कुछ ऐसा जो उसे लगे कि कोई उसकी परवाह करता है।
अचानक उसे एक 'आईडिया' आया। अनन्या को कॉफ़ी बहुत पसंद थी। वह अपनी हर मीटिंग से पहले, या जब भी तनाव में होती थी, तो 'ब्लैक कॉफ़ी' पीती थी। उसे याद आया उसने किसी दिन सुना था कि अनन्या ने अपनी असिस्टेंट से कहा था कि उसे 'डाउनटाउन कैफे' की कॉफ़ी पसंद है।
आरव ने तुरंत अपना फ़ोन उठाया। उसने 'फ़ूड डिलीवरी ऐप' खोला। 'डाउनटाउन कैफे' उसके ऑफिस से थोड़ी दूर था, लेकिन उसने हिम्मत की। उसने अनन्या के ऑफिस का पता डाला और उसके लिए एक 'ब्लैक कॉफ़ी' 'ऑर्डर' की।
'डिलीवरी इंस्ट्रक्शंस' में उसने कुछ देर सोचा। क्या लिखा जाए? "फॉर अनन्या वर्मा, ZapConnect।" यह बहुत 'फॉर्मल' था। "कॉफ़ी फॉर स्ट्रेस।" नहीं, यह मज़ाक लग सकता था।
फिर उसे एक 'आईडिया' आया। उसने एक छोटा सा 'नोट' लिखने का फैसला किया, वही जो उसने अनन्या से पहली बार बहस करते हुए कहा था। उसने 'इंस्ट्रक्शन बॉक्स' में लिखा:
"डिलीवरी बॉय से कहना, मैडम को यह नोट कॉफ़ी कप पर चिपका कर दे। नोट पर लिखा हो: 'सबसे अच्छे आईडिया दिमाग़ से नहीं, दिल से आते हैं। और कभी-कभी अच्छी कॉफ़ी से। - आरव'"
उसने 'ऑर्डर प्लेस' कर दिया। अब उसे बस इंतज़ार था। उसका दिल अजीब सी तेज़ी से धड़क रहा था। यह एक 'नया कोड' था जो उसने 'अपनी ज़िंदगी' में 'रन' किया था। पता नहीं इसका 'आउटपुट' क्या होगा।
लगभग एक घंटे बाद, अनन्या अपनी 'ब्रेनस्टॉर्मिंग मीटिंग' से निकलकर अपने डेस्क पर वापस आई। उसका सर दुख रहा था। उसने अपने माथे पर हाथ फेरा। 'टैगलाइन' अभी तक नहीं मिली थी, और उसकी चिड़चिड़ाहट बढ़ती जा रही थी। तभी, उसकी असिस्टेंट उसके डेस्क पर एक 'कॉफ़ी कप' लेकर आई।
"मैम, आपके लिए कॉफ़ी आई है।" असिस्टेंट ने कहा।
अनन्या ने हैरानी से देखा। "कॉफ़ी? मैंने तो अभी 'ऑर्डर' नहीं की थी। किसने भेजी है?"
असिस्टेंट ने कप अनन्या की तरफ बढ़ाते हुए कहा, "डिलीवरी बॉय ने कहा कि 'आरव शर्मा' ने भेजी है।"
अनन्या ने कप ले लिया। उसकी आँखों में चमक आ गई। आरव ने भेजी है? वह थोड़ा हैरान हुई, फिर उसके होठों पर एक अनचाही सी मुस्कान आ गई। यह 'अनप्रोफेशनल' था, लेकिन 'प्यारा' था।
उसने कप को ध्यान से देखा। उस पर एक छोटा सा 'नोट' चिपका हुआ था, वही 'नोट' जो आरव ने 'डिलीवरी इंस्ट्रक्शंस' में लिखवाया था।
अनन्या ने 'नोट' पढ़ा: "'सबसे अच्छे आईडिया दिमाग़ से नहीं, दिल से आते हैं। और कभी-कभी अच्छी कॉफ़ी से। - आरव'"
उसने पहले तो अपनी आँखें घुमाईं। "दिल? फिर वही 'फ़िल्मी बातें'!" लेकिन फिर, उसके होंठों पर मुस्कान और गहरी हो गई। 'अच्छी कॉफ़ी से'... यह बात बिलकुल सही थी। उसे इस वक़्त एक अच्छी कॉफ़ी की सख्त ज़रूरत थी।
उसने कॉफ़ी का एक सिप लिया। गरम, कड़वी लेकिन ताज़गी भरी कॉफ़ी उसके गले से नीचे उतरी। उसे सच में बेहतर महसूस हुआ। आरव को कैसे पता चला कि वह तनाव में है? और यह कॉफ़ी... यह उसका पसंदीदा 'डाउनटाउन कैफे' की कॉफ़ी थी। आरव ने यह भी कैसे जाना?
अनन्या को यह 'जेस्चर' बहुत अच्छा लगा। यह 'डेटा' से परे था, 'लॉजिक' से परे था। यह 'इमोशन' था, 'केयर' था। और यह उसके 'टैगलाइन' के साथ उसके दिमाग़ में चल रही उथल-पुथल को एक पल में शांत कर गया।
उसने तुरंत अपना फ़ोन उठाया। आरव को सीधे फ़ोन करने के बजाय, उसने उसे एक छोटा सा 'मैसेज' भेजने का फैसला किया, बिल्कुल वैसे ही जैसे वह अपने काम के 'मेल' का जवाब देती थी, लेकिन इस बार उसमें एक 'सॉफ्ट' सी 'टच' थी।
उसने लिखा: "Thanks. The coffee was good. And maybe... the idea too."
अनन्या ने 'मैसेज सेंड' कर दिया। उसे लगा कि यह 'मैसेज' सिर्फ एक 'थैंक यू' नहीं था। यह उनके बीच की उस अजीब ख़ामोशी को तोड़ रहा था, जो सर्वर क्रैश की रात के बाद और 'तीसरे मैच नोटिफिकेशन' के बाद बनी हुई थी। यह एक छोटा सा 'ब्रिज' था, जो 'लॉजिक' और 'इमोशन' के बीच बन रहा था, धीरे-धीरे, एक 'लाइन ऑफ कोड' की तरह। वह जानती थी कि यह 'मैसेज' आरव को 'उम्मीद' देगा, और उसे भी इस 'एक्सचेंज' से एक अजीब सी 'खुशी' महसूस हुई।
Chapter 17
अध्याय 17
विक्रम अपनी क्यूबिकल से अनन्या के डेस्क की तरफ लगातार नज़र रखे हुए था। उसने देखा था कि कैसे अनन्या अपनी टीम के साथ 'ब्रेनस्टॉर्मिंग' के दौरान चिड़चिड़ी हो रही थी, कैसे उसकी असिस्टेंट उसके माथे पर शिकन देख रही थी। फिर अचानक, एक डिलीवरी बॉय एक कॉफ़ी कप लेकर आता है, और अनन्या का चेहरा खिल उठता है। यह बदलाव विक्रम को खटक रहा था। वह जानता था कि अनन्या कभी भी बेवजह ऐसे नहीं मुस्कुराती। उसके लिए हर मुस्कान के पीछे एक 'लॉजिक' होता था, एक 'डेटा' होता था।
"आजकल तो मैडम बहुत ख़ुश रहने लगी हैं, हैं ना?" विक्रम ने अपने बराबर वाली क्यूबिकल में बैठी अपनी सहयोगी, नेहा से कहा। "लगता है 'मार्केटिंग कैंपेन' बहुत सफल होने वाला है।" उसके लहज़े में ताना था, लेकिन नेहा को शायद यह समझ नहीं आया।
"पता नहीं सर," नेहा ने जवाब दिया। "मैम आजकल थोड़ी बदली हुई लग रही हैं। पहले से ज़्यादा 'रिलैक्स'।"
विक्रम ने अपने होंठ भींचे। 'रिलैक्स'? यह अनन्या के 'डिक्शनरी' में शायद ही कभी आता था। उसे लगा कि इस 'रिलैक्सेशन' के पीछे ज़रूर कोई राज़ है। उसकी नज़र कॉफ़ी कप पर पड़े उस छोटे से नोट पर गई, जिसे अनन्या ने अब भी कप पर लगा रहने दिया था। वह उसे ठीक से पढ़ नहीं पा रहा था, लेकिन कुछ तो था जो उसे 'अजीब' लग रहा था।
थोड़ी देर बाद, अनन्या की असिस्टेंट, प्रिया, अपनी डेस्क पर वापस आई। विक्रम ने मौक़ा लपका। वह धीरे से प्रिया की डेस्क की तरफ गया, जैसे कोई 'कैज़ुअल' बात करने के बहाने।
"प्रिया, क्या बात है?" विक्रम ने एक 'फ़र्ज़ी' मुस्कान के साथ कहा। "आजकल अनन्या मैडम बहुत 'चिल' लग रही हैं। लग रहा है जैसे उन्हें 'इश्क़' हो गया है।" उसने जान-बूझकर 'इश्क़' शब्द पर ज़ोर दिया।
प्रिया थोड़ी असहज हुई। वह जानती थी कि विक्रम, अनन्या का 'कॉम्पिटिटर' था और हर बात की खबर रखना चाहता था। "जी सर, वह तो बस 'वर्कलोड' थोड़ा कम हो गया है, और 'नया ऐप' भी अच्छा परफॉर्म कर रहा है।" उसने टाल-मटोल वाला जवाब दिया।
"अच्छा? 'वर्कलोड' कम हो गया है?" विक्रम ने अपनी भौंहें ऊपर उठाईं। "मुझे तो लगता है, उस 'दिल-Gic' वाले डेवलपर के साथ कुछ ज़्यादा ही 'दोस्ती' हो गई है। क्या नाम है उसका? आरव? सुना है, रात-रात भर ऑफिस में साथ काम करते हैं।" उसकी आवाज़ में 'व्यंग्य' था।
प्रिया ने नज़रें झुका लीं। "नहीं सर, ऐसी कोई बात नहीं है। बस 'प्रोजेक्ट' की डिमांड थी। आरव सर बहुत 'प्रोफेशनल' हैं।" उसका जवाब और भी ज़्यादा टाल-मटोल वाला था, और यही बात विक्रम के शक को और पुख्ता कर रही थी।
"प्रोफेशनल?" विक्रम ने अपने होंठों पर एक ख़तरनाक सी मुस्कान लाई। "हाँ, हाँ, 'प्रोफेशनल'। चलो कोई नहीं। तुम अपना काम करो।" उसने जान-बूझकर प्रिया को और नहीं छेड़ा। वह जानता था कि अब उसे और जानकारी यहाँ से नहीं मिलेगी।
विक्रम अपनी डेस्क पर वापस आया। उसका दिमाग़ तेज़ी से दौड़ रहा था। अनन्या और आरव के बीच कुछ तो चल रहा था, यह उसे साफ़ दिख रहा था। और यह 'दिल-Gic' वाला ऐप... जिसमें 'अजीबोगरीब मैचिंग' हो रही थी, और फिर भी उसके 'डेटा' के हिसाब से वह 'सक्सेसफुल' दिख रहा था। उसे लगा कि आरव ने ज़रूर ऐप में कोई 'सीक्रेट फीचर' डाला है, जिसके बारे में कंपनी को पता नहीं है, या जिसे छुपाया जा रहा है। अगर ऐसा था, तो यह एक बड़ा 'स्कैंडल' हो सकता था, एक ऐसा 'स्कैंडल' जिससे अनन्या का करियर हमेशा के लिए ख़त्म हो सकता था, और उसका रास्ता साफ़ हो सकता था।
'डेटा ब्रीच', 'अनप्रोफेशनल कोडिंग', 'प्राइवेसी इश्यूज़' – ये सारे शब्द उसके दिमाग़ में घूम रहे थे। यह एक ऐसा 'मौक़ा' था जिसे वह किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नहीं दे सकता था। उसे अब सिर्फ़ 'नज़र' नहीं रखनी थी, उसे अब 'कार्रवाई' करनी थी।
विक्रम ने अपने फ़ोन पर अपने एक पुराने 'कॉलेज फ्रेंड' का नंबर डायल किया, जो कंपनी के 'आईटी डिपार्टमेंट' में 'सीनियर इंजीनियर' था। उसका नाम राहुल था। राहुल और विक्रम की कॉलेज में अच्छी 'दोस्ती' थी, और विक्रम को पता था कि राहुल 'पैसों' के लिए कुछ भी कर सकता था।
"हेलो राहुल? कैसे हो?" विक्रम ने अपनी आवाज़ को जितना हो सके 'दोस्ताना' बनाने की कोशिश की।
"हाँ भाई, मैं बढ़िया। तू बता? अचानक कैसे याद कर लिया?" राहुल की आवाज़ आई।
"यार, एक छोटा सा 'काम' था।" विक्रम ने कहा। "ज़रा 'Zap' ऐप के 'सर्वर लॉग्स' और 'एक्टिविटी रिपोर्ट्स' चाहिए थीं। कुछ 'टेक्निकल एरर' आ रहे हैं, अनन्या मैडम को 'एनालाइज़' करना है।" उसने झूठ बोला।
"ओह, 'लॉग्स'?" राहुल ने कहा। "यार, वह तो बहुत 'कॉन्फ़िडेंशियल' होते हैं। वैसे भी, 'Zap' का सारा काम तो 'आउटसोर्स' किया हुआ है। 'दिल-Gic' वाले संभालते हैं 'सर्वर'।"
"अरे यार, 'इमरजेंसी' है। बोर्ड ने 'रिपोर्ट' मांगी है।" विक्रम ने अपनी आवाज़ में 'घबराहट' मिलाने की कोशिश की। "और वैसे भी, 'कोड' की कुछ 'डीटेल्स' चाहिए, 'बैकएंड' की। क्या कोई 'अनयूज़ुअल एक्टिविटी' है या नहीं? बस एक 'नॉर्मल ऑडिट' है, 'रुटीन'।"
राहुल कुछ देर सोचा। "हम्म... 'बैकएंड एक्सेस' तो मुश्किल है, लेकिन 'लॉग्स' और 'नेटवर्क ट्रैफ़िक' की कुछ 'रिपोर्ट्स' शायद मिल जाएं। लेकिन यार, 'सिक्योरिटी' के चक्कर में बहुत 'हेडएक' होता है।"
"यार, तेरा भाई बैठा है ना!" विक्रम ने कहा। "देख, अगर यह 'काम' हो गया, तो मेरी तरफ से 'बड़े वाला पार्टी' और 'बोनस' पक्का। समझ ले, 'करियर' का सवाल है।"
राहुल हंस पड़ा। "अच्छा! 'बोनस' की बात है तो देखता हूँ। लेकिन 'रिस्क' बड़ा है भाई। अगर कुछ 'गड़बड़' हुई तो 'नौकरी' जा सकती है।"
"अरे कुछ नहीं होगा!" विक्रम ने उसे 'आश्वस्त' किया। "कोई 'गड़बड़' नहीं है, बस 'रुटीन चेक' है। तुम बस 'डेटा' निकालो, बाकी मैं संभाल लूँगा। मैं तुझे 'व्हाट्सएप' पर 'स्पेसिफिकेशंस' भेजता हूँ। और हाँ, किसी को पता नहीं चलना चाहिए।"
"ठीक है, 'डील'!" राहुल ने कहा। "भेज दे। देखता हूँ क्या कर सकता हूँ।"
विक्रम ने फ़ोन रख दिया। उसके चेहरे पर एक 'कुटिल' मुस्कान आ गई। अब 'खेल' शुरू हो चुका था। उसे पूरा यकीन था कि उस 'दिल-Gic' वाले आरव ने ज़रूर कोई 'गोलमाल' किया है, और वह उसे सबके सामने लाएगा। अनन्या को नीचा दिखाने का यह 'सबसे बड़ा मौक़ा' था, और वह इसे किसी भी कीमत पर 'मिस' नहीं करने वाला था। उसने अपने मन में सोचा, "अनन्या वर्मा, तुम्हारा 'डेटा' अब मेरे 'लॉजिक' से टकराएगा।" वह अपनी साज़िश के अगले 'स्टेप' पर काम करने लगा।
Chapter 18
आरव अपने छोटे से ऑफिस में अपनी कुर्सी पर बैठा मुस्कुरा रहा था। उसकी ‘स्क्रीन’ पर अभी भी अनन्या का भेजा हुआ मैसेज खुला था – "Thanks. The coffee was good. And maybe... the idea too." यह चार शब्दों का मैसेज उसके लिए किसी ‘नोबेल प्राइज’ से कम नहीं था। सुबह से उसका मूड ‘रिफ्रेश’ था। बंटी ने भी उसके चेहरे पर ख़ुशी नोटिस कर ली थी।
"क्या बात है, भाई?" बंटी ने अपने हाथ में समोसे का पैकेट पकड़े हुए आरव की डेस्क पर दस्तक दी। "आज तो अपने ‘लॉजिक किंग’ आरव शर्मा का चेहरा एकदम खिला हुआ है! क्या 'नया कोड' लिखा है जो चेहरे पर इतनी ‘स्माइल’ आ गई?"
आरव ने मुस्कुराते हुए अपना फ़ोन उठाया और बंटी को अनन्या का मैसेज दिखाया। "देख, बंटी! मैंने कहा था ना? ‘दिल वाला लॉजिक’ काम करता है! ये मैडम भी अब ‘टैगलाइन’ में ‘दिल’ ढूंढने लगी हैं।"
बंटी ने मैसेज पढ़ा और उसकी आँखें फ़ैल गईं। "अरे वाह! ‘सिस्टम एरर’ ने ‘क्लिक’ कर दिया! ‘कॉफ़ी’ से ‘आईडिया’ तक पहुँच गए! भाई, अब देर किस बात की? ये ‘ग्रीन सिग्नल’ है! अगला ‘अपडेट’ क्या है? ‘लंच डेट’ या सीधे ‘शादी का प्रस्ताव’?" बंटी ने समोसे का एक बड़ा टुकड़ा मुँह में डालते हुए कहा।
आरव ने अपना सर हिलाया। "चुप कर, बंटी! ‘ओवर एक्टिंग’ मत कर। ये सिर्फ एक छोटी सी ‘अंडरस्टैंडिंग’ है। और मुझे लगता है कि अब मैं उन्हें थोड़ा ‘छेड़’ सकता हूँ।"
"छेड़ेगा?" बंटी ने मुँह का समोसा निगलते हुए हैरानी से पूछा। "अरे, भाई! तू तो मेरी ‘टिप्स’ पर ध्यान ही नहीं देता। ‘छेड़ना’ नहीं, ‘इम्प्रेस’ करना है! वो कॉर्पोरेट मैडम हैं, उन्हें ‘शायरी’ सुना, ‘ग़ज़लें’ सुना, ‘फ़िल्मी डायलॉग’ बोल। वो सब सुन कर वो..."
"बस कर, बस कर!" आरव ने उसे रोका। "मेरी ‘शायरी’ तो वैसे भी उन्हें ‘चीज़ी’ लगती है। मैं कुछ और ‘ट्राई’ करूँगा। कुछ ऐसा जो उनके ‘डेटा-ड्रिवन’ दिमाग़ को ‘हैक’ कर दे।" आरव के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी। उसे याद आया उनकी पहली मुलाक़ात। अनन्या ने कैसे कहा था, "मिस्टर शर्मा, आपको ‘Error 404’ पता है?" और उसने जवाब दिया था, "हाँ, वही जब ‘इश्क़ नॉट फाउंड’ होता है!"
उसे ‘आईडिया’ आ गया। वह अपनी ‘स्क्रीन’ की तरफ मुड़ा। "आज, उनके ‘लॉजिक’ को ही ‘एरर’ दिखाऊंगा!"
"क्या करेगा, भाई?" बंटी ने उत्सुकता से पूछा।
आरव ने अपने कीबोर्ड पर तेज़ी से उंगलियाँ चलाना शुरू कर दिया। "मैं ‘Zap’ ऐप में एक ‘ईस्टर एग’ डालूँगा।"
"‘ईस्टर एग’?" बंटी ने अपना सिर खुजाया। "यह कौन सा नया ‘वैलेंटाइन गिफ्ट’ है? खाने वाला है क्या?"
आरव हंस पड़ा। "नहीं, नासमझ! ‘ईस्टर एग’ एक ‘सीक्रेट फीचर’ होता है ‘सॉफ्टवेयर’ में। ‘डेवलपर्स’ उसे मज़े के लिए डाल देते हैं। ये ‘फीचर’ सिर्फ उन्हीं को दिखता है जो उसके बारे में जानते हैं।"
"तो तू अनन्या मैडम के लिए ‘सीक्रेट फीचर’ डालेगा?" बंटी की आँखों में चमक आ गई। "अरे! ये तो बहुत ‘रोमांटिक’ है! क्या डालेगा? ‘अनन्या यू आर माय लाइफ’?"
आरव ने उसकी तरफ देखा, "नहीं, बंटी। मैं उनके ‘लॉजिक’ को ही चुनौती दूँगा। वो ‘एरर 404’ की बात करती थीं ना? अब उनका ‘एरर 404’ मेरे ‘दिल’ की बात करेगा।"
आरव ने ‘Zap’ ऐप के ‘कोड’ में एक छोटा सा ‘सेक्शन’ खोला। उसने एक ‘कंडीशनल स्टेटमेंट’ लिखा। अगर कोई ‘यूज़र’ ऐप के ‘सर्च बार’ में ‘Error 404’ टाइप करेगा, तो एक ‘खास मैसेज’ पॉप-अप होगा। यह ‘मैसेज’ सीधे अनन्या के लिए एक ‘पर्सनल जोक’ होगा।
वह कोड लिखते-लिखते मुस्कुरा रहा था। बंटी उसके कंधे के ऊपर से झांक रहा था, कुछ भी न समझते हुए। "भाई, ये सब क्या है? ‘इफ’, ‘एल्स’, ‘स्विच’... ये सब ‘रोमांस’ में काम नहीं आएगा।"
"तू बस देख, बंटी।" आरव ने कहा। "ये ‘कोड’ उनके ‘दिमाग़’ में ‘एंटर’ करेगा, और उनके ‘लॉजिक’ को ‘आउटपुट’ देगा, जो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा।"
कुछ ही देर में, उसने कोड लिख लिया। जब वह ‘सर्च बार’ में ‘Error 404’ टाइप करेगा, तो ‘स्क्रीन’ पर एक ‘बड़ा सा पॉप-अप’ आएगा जिस पर लिखा होगा: **"Error 404: Logic Not Found. Please try searching with 'Dil' for better results. 😉"**
उसने मैसेज के अंत में एक ‘विंक इमोजी’ भी लगा दिया। यह ‘मैसेज’ सीधा उनकी पहली बहस पर एक ‘नटखट तंज’ था।
"ले, हो गया!" आरव ने खुशी से कहा। "अब इसे ‘पुश’ करना है।"
"तो अब मैडम को कैसे पता चलेगा?" बंटी ने पूछा। "वो थोड़ी ना ‘एरर 404’ ‘सर्च’ करेंगी?"
आरव ने लैपटॉप बंद किया और फ़ोन उठाया। उसने एक ‘प्रोफेशनल ईमेल’ लिखना शुरू किया, जिसमें ‘थोड़ी सी शैतानी’ छिपी थी।
**विषय: Minor Bug Fix Update - Search Functionality Testing**
**प्रिय अनन्या,**
**आशा है आप ठीक होंगी।**
**'Zap' ऐप के ‘सर्च फंक्शनलिटी’ में एक छोटा सा ‘बग फिक्स अपडेट’ ‘पुश’ किया गया है। यह ‘अपडेट’ ‘सिस्टम स्टेबिलिटी’ और ‘यूज़र एक्सपीरियंस’ को बेहतर बनाएगा।**
**क्या आप ‘सर्च फंक्शनलिटी’ का ‘टेस्ट’ कर सकती हैं? कृपया कुछ ‘कॉमन एरर कोड’ जैसे ‘404’ को ‘सर्च बार’ में टाइप करके देखें कि ‘सिस्टम रिस्पॉन्स’ कैसा है। यह हमें ‘डेटा’ कलेक्ट करने में मदद करेगा।**
**धन्यवाद,**
**आरव शर्मा**
**फाउंडर, दिल-Gic**
आरव ने ‘ईमेल’ को दोबारा पढ़ा। यह बिल्कुल ‘प्रोफेशनल’ लग रहा था, लेकिन इसके अंदर एक ‘छुपा हुआ मज़ाक’ था। उसे उम्मीद थी कि अनन्या इसे समझ जाएगी। उसने ‘सेंड’ बटन दबा दिया।
"भेज दिया!" आरव ने बंटी की तरफ देखकर कहा। "अब इंतज़ार करते हैं ‘आउटपुट’ का।"
बंटी ने अपना सर खुजाया। "मुझे तो कुछ समझ नहीं आया भाई। तू इतना ‘टेक्निकल’ होकर ‘रोमांस’ करेगा? मुझे लगता है मैडम को लगेगा कि तू उन्हें सच में ‘बग’ ढूंढने को कह रहा है।"
"देखते हैं, बंटी।" आरव मुस्कुराया। "उनकी ‘एक्सेल शीट’ वाली ज़िंदगी में ये ‘बग’ कुछ ‘रंग’ तो भरेगा ही।"
उधर, ZapConnect के ‘ग्लॉसी’ ऑफिस में अनन्या अपने डेस्क पर बैठी हुई अपनी ‘टैगलाइन’ पर काम कर रही थी। उसका लैपटॉप खुला था और ‘ब्रेनस्टॉर्मिंग’ के नोट्स बिखरे पड़े थे। कॉफ़ी का कप, जो आरव ने भेजा था, अभी भी उसकी डेस्क पर रखा था और उसकी सुगंध उसे अच्छा महसूस करा रही थी।
तभी, उसके लैपटॉप पर एक ‘नया ईमेल’ का ‘नोटिफिकेशन’ आया। भेजने वाला – आरव शर्मा।
अनन्या ने थोड़ी हैरानी से ‘ईमेल’ खोला। ‘विषय’ पढ़कर उसे लगा कि यह कोई ‘रेगुलर टेक्निकल अपडेट’ होगा। उसने ‘ईमेल’ पढ़ना शुरू किया। जैसे-जैसे वह पढ़ती गई, उसकी भौंहें सिकुड़ती गईं। ‘सर्च फंक्शनलिटी’ में ‘बग फिक्स’... और ‘कॉमन एरर कोड’ जैसे ‘404’ ‘सर्च’ करने को कहना... यह उसे थोड़ा अजीब लगा।
"Error 404?" अनन्या ने हल्के से बुदबुदाया। उसे तुरंत अपनी और आरव की पहली ‘मुलाक़ात’ याद आ गई, जब उसने ‘Error 404’ पर ‘इश्क़ नॉट फाउंड’ वाला जवाब दिया था। क्या वह जान-बूझकर यह कह रहा था? क्या यह उसका कोई ‘छिपा हुआ मज़ाक’ था?
अनन्या ने एक गहरी साँस ली। वह पहले तो ‘ईमेल’ को ‘इग्नोर’ करना चाहती थी। यह ‘अनप्रोफेशनल’ था कि कोई ‘डेवलपर’ उसे ऐसे ‘अजीबोगरीब रिक्वेस्ट’ भेजे, खासकर तब जब उनके बीच ‘कुछ-कुछ’ होने लगा था। लेकिन उसकी ‘उत्सुकता’ बढ़ रही थी। आरव ने ‘कॉफ़ी’ भेजी थी, ‘मैसेज’ पर ‘थैंक्स’ लिखा था। अब यह ‘अजीब रिक्वेस्ट’। क्या वह जानना चाहती थी कि इसके पीछे क्या है? उसके ‘लॉजिक-ड्रिवन’ दिमाग़ को इस ‘अजीब बिहेवियर’ को ‘एनालाइज़’ करना था।
वह अपने लैपटॉप पर ‘Zap’ ऐप खोलती है। उसकी उंगलियाँ ‘सर्च बार’ पर जाती हैं। एक पल को वह हिचकिचाती है। क्या यह कोई ‘वायलेंस’ होगा? क्या यह सच में कोई ‘बग’ होगा जिसे वह ठीक करना चाहता है? या फिर यह सिर्फ उसका ‘नटखटपन’ था, जिसे वह ‘कॉर्पोरेट ईमेल’ के पीछे छुपा रहा था?
अनन्या के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई। उसने फैसला किया। ‘एक बार तो ट्राई’ करना बनता है। यह ‘इक्वेशन’ तो ‘सॉल्व’ करनी ही होगी। उसने धीरे से ‘कीबोर्ड’ पर उंगलियाँ रखीं और ‘सर्च बार’ में टाइप करना शुरू किया। ‘E-r-r-o-r… 4-0-4’। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। अब क्या होगा? क्या कोई ‘बग’ आएगा? या कुछ और?
अनन्या को पता नहीं था कि यह ‘छोटा सा एक्शन’ उसके और आरव के रिश्ते में एक ‘बड़ा बदलाव’ लाने वाला था, एक ऐसा ‘बदलाव’ जो ‘डेटा’ और ‘लॉजिक’ से कहीं ज़्यादा ‘दिल’ की बात करेगा। वह ‘एंटर’ दबाने ही वाली थी।
Chapter 19
अध्याय 19
अनन्या की उंगलियाँ ‘एंटर’ बटन पर थीं। उसके अंदर एक अजीब सी ‘हलचल’ थी। वह जानती थी कि आरव ने जो ‘ईमेल’ भेजा था, वह सिर्फ एक ‘बग फिक्स’ के बारे में नहीं था। उसकी पहली मुलाकात, उनकी बहसें, और फिर आरव का ‘रूह का कनेक्शन’ वाला कॉन्सेप्ट… सब कुछ उसके दिमाग में घूम रहा था। उसने एक गहरी साँस ली, और ‘एंटर’ दबा दिया।
जैसे ही उसने ‘एंटर’ दबाया, ‘Zap’ ऐप की ‘स्क्रीन’ पर कुछ भी ‘सर्च रिजल्ट’ नहीं आया। इसके बजाय, एक बड़ा सा, पीले रंग का ‘पॉप-अप’ मैसेज उसकी ‘स्क्रीन’ पर चमक उठा। अनन्या की आँखें ‘बगले’ में आ गईं। उसने देखा –
**"Error 404: Logic Not Found. Please try searching with 'Dil' for better results. 😉"**
अनन्या ने उस मैसेज को एक बार पढ़ा। फिर उसने दोबारा पढ़ा, जैसे उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उसका ‘कॉर्पोरेट’ और ‘लॉजिक-ड्रिवन’ दिमाग इस तरह के ‘मैसेज’ को ‘प्रोसेस’ नहीं कर पा रहा था। उसकी भौंहें चढ़ी हुई थीं। ‘Logic Not Found’? और ‘Please try searching with Dil’? और अंत में वो ‘विंक इमोजी’... यह साफ-साफ आरव का ‘नटखटपन’ था, और यह सीधे उसकी पहली लड़ाई पर ‘तंज’ था!
पहले तो अनन्या को गुस्सा आया। "यह कितना ‘अनप्रोफेशनल’ है!" उसने मन ही मन सोचा। "वह एक ‘एम्प्लॉई’ है, और मुझे ‘कंपनी के ईमेल’ के ज़रिए ऐसे ‘मैसेज’ भेज रहा है!" लेकिन गुस्सा बस एक पल का था। जैसे ही उसने उस ‘मैसेज’ का ‘संदर्भ’ समझा, जो उसकी और आरव की पहली बहस के इर्द-गिर्द बुना गया था, उसके होंठों पर धीरे-धीरे एक मुस्कान फैलने लगी। यह मुस्कान बढ़ती गई, और फिर वह मुस्कुराते-मुस्कुराते हँसने लगी।
पहले धीमी हंसी थी, फिर वह खुलकर हँसी। उसकी हंसी इतनी तेज़ थी कि पास के ‘क्यूबिकल्स’ में बैठे ‘कलीग्स’ ने भी सिर उठाकर उसकी तरफ देखा। अनन्या वर्मा, जो हमेशा शांत और गंभीर रहती थी, आज ऐसे हँस रही थी जैसे उसने कोई ‘कॉमेडी फ़िल्म’ देख ली हो।
"अनन्या मैम... सब ठीक है?" उसकी असिस्टेंट, प्रिया ने संकोच करते हुए पूछा। प्रिया ने पहले कभी अनन्या को ऐसे हँसते हुए नहीं देखा था, खासकर ऑफिस में।
अनन्या ने मुश्किल से अपनी हंसी रोकते हुए हाथ के इशारे से प्रिया को चुप रहने को कहा। उसकी आँखों में अभी भी हँसी के आंसू थे। वह बार-बार उस ‘मैसेज’ को देख रही थी – "Logic Not Found... Dil..."। आरव ने उसके ‘डेटा’ और ‘लॉजिक’ को उसके ही ‘हथियार’ से चुनौती दी थी, और इसमें वह पूरी तरह सफल रहा था। यह एक ‘बग’ नहीं था, यह एक ‘मास्टरपीस’ था।
उसने अपना लैपटॉप बंद किया। उसका दिमाग़ अब किसी ‘एक्सेल शीट’ या ‘KPI’ पर नहीं था। वह सिर्फ आरव के इस ‘मज़ाक’ के बारे में सोच रही थी। उसने अपना फ़ोन उठाया। ‘डायल पैड’ पर आरव का नंबर था। उसने बिना सोचे ‘कॉल’ कर दिया।
उधर, आरव अपने ऑफिस में बंटी के साथ बैठकर इंतज़ार कर रहा था। बंटी बेचैन होकर बार-बार आरव की तरफ देख रहा था।
"भाई, कुछ ‘अपडेट’ आया? मैडम ने ‘रिप्लाई’ किया क्या?" बंटी ने पूछा। "मुझे तो लगता है वो गुस्सा हो गई होंगी। तूने इतना ‘पर्सनल’ और ‘अनप्रोफेशनल’ काम किया है।"
आरव ने अपनी नज़रें ‘फ़ोन’ पर टिकाए रखी थीं। "आराम से, बंटी। ‘बिग डेटा’ को ‘प्रोसेस’ होने में टाइम लगता है।"
तभी, आरव का फ़ोन बज उठा। ‘अनन्या वर्मा’ का नाम ‘स्क्रीन’ पर चमक रहा था। आरव का दिल एक पल के लिए ज़ोर से धड़का। उसने कॉल उठा ली।
"हाँ, अनन्या?" आरव ने अपनी आवाज़ को जितना हो सके ‘प्रोफेशनल’ रखने की कोशिश की, लेकिन उसके चेहरे पर एक उत्सुकता थी।
दूसरी तरफ से अनन्या की हँसी की आवाज़ आई। "मिस्टर शर्मा!" अनन्या ने हँसते हुए कहा, "यह... यह बहुत ही ‘अनप्रोफेशनल’ है! यह कौन सा ‘बग फिक्स’ था?" उसकी आवाज़ में अभी भी हँसी घुली हुई थी।
आरव के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान फैल गई। उसने बंटी की तरफ देखा और मुस्कुराया, जैसे कह रहा हो – "देखा? मैंने कहा था ना!"
"क्या हुआ, मिस वर्मा?" आरव ने मज़ाक में कहा। "क्या आपको ‘एरर 404’ मिला? मुझे तो लगा आपके ‘सिस्टम’ में कभी ‘एरर’ नहीं आता।"
अनन्या फिर हँस पड़ी। "‘एरर’ नहीं, मिस्टर शर्मा, यह एक ‘पूरा सिस्टम क्रैश’ था! ‘Logic Not Found’... ‘सच्चाई’ बताऊँ तो, मुझे लगा कि मेरे ‘सिस्टम’ में ‘वायरस’ आ गया है।"
"ओह, तो क्या मैंने आपके ‘सिस्टम’ को ‘हैक’ कर लिया?" आरव ने मुस्कुराते हुए पूछा।
"लगता तो कुछ ऐसा ही है!" अनन्या ने कहा। "और ‘विंक इमोजी’ क्यों लगाया था? क्या यह भी किसी ‘टेक्निकल स्पेसिफिकेशन’ का हिस्सा था?" उसकी आवाज़ अब पूरी तरह से सहज और मज़ेदार हो चुकी थी।
आरव ने बंटी की तरफ देखा जो ‘माइक’ के पास आकर सुनने की कोशिश कर रहा था। "कभी-कभी सबसे अच्छे ‘फ़ीचर्स’ कॉन्ट्रैक्ट में नहीं लिखे होते, मिस वर्मा। वो बस ‘दिल’ में होते हैं।" आरव ने धीरे से कहा।
अनन्या फ़ोन पर थोड़ी देर के लिए चुप हो गई। आरव की बात सीधी उसके दिल को छू गई। उसे लगा जैसे आरव ने उसके ‘कठोर खोल’ को भेद दिया था।
"आप बहुत... ‘बदमाश’ हैं, मिस्टर शर्मा!" अनन्या ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था, सिर्फ़ एक प्यारी सी शिकायत थी।
"और आप बहुत ‘लॉजिक वाली’ हैं, मिस वर्मा!" आरव ने जवाब दिया। "तो, मेरा ‘ईस्टर एग’ काम कर गया?"
"हाँ, काम कर गया।" अनन्या ने मुस्कुराते हुए कहा। "यह... यह अच्छा था। मुझे हँसी आ गई।"
"मुझे खुशी है कि मैं आपके ‘कॉर्पोरेट’ माहौल में थोड़ी ‘हँसी’ ला पाया।" आरव ने कहा।
"आपने सिर्फ ‘हँसी’ नहीं लाई, आरव।" अनन्या ने कहा, उसकी आवाज़ अब और भी नरम हो गई थी। "आपने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद... शायद ‘लॉजिक’ से ज़्यादा कुछ और भी है।"
आरव को यह सुनकर बहुत खुशी हुई। यह उनके बीच की पहली लंबी, गैर-कामकाजी बातचीत थी। उनकी सारी असहजता, सारी ‘प्रोफेशनल बैरियर्स’ अब टूट चुके थे। वे दोनों एक-दूसरे के साथ खुलकर हंस रहे थे, जैसे वे पुराने दोस्त हों। यह ‘एरर 404’ वाला ‘मैसेज’ सिर्फ एक मज़ाक नहीं था, यह उनके रिश्ते में एक नया अध्याय शुरू करने वाला ‘कोड’ था।
फोन पर हँसते-हँसते उन्होंने कुछ और बातें कीं, काम के बारे में नहीं, बल्कि ऐसे ही हल्की-फुल्की। अनन्या ने आरव से पूछा कि वह कैसे सोचता है ऐसी चीजें। आरव ने उसे अपने ‘पुराने फ़िल्मी’ और ‘शायरी वाले’ शौक के बारे में बताया, और अनन्या ने उसे पहली बार बिना किसी ‘चीज़ी’ कमेंट के सुना। यह बातचीत खत्म ही नहीं हो रही थी।
आरव जानता था कि यह सिर्फ एक ‘मैसेज’ नहीं था, यह एक ‘पल’ था। एक ऐसा ‘पल’ जहाँ उसके ‘दिल’ का ‘लॉजिक’ अनन्या के ‘डेटा’ वाले दिमाग़ पर हावी हो गया था, और अनन्या ने इसे खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया था। शर्त अब उनके लिए उतनी मायने नहीं रखती थी, जितना यह ‘कनेक्शन’ मायने रखता था।
Chapter 20
आरव ने जैसे ही फोन रखा, उसके चेहरे पर एक गहरी, सुकून भरी मुस्कान फैल गई। उसने एक गहरी साँस ली, जैसे कोई लंबी यात्रा पूरी करने के बाद लेता है। उसके कानों में अभी भी अनन्या की हँसी की गूँज थी। यह उसकी ज़िंदगी की सबसे मधुर ‘रिंगटोन’ थी। उसे लग रहा था जैसे उसके ‘सिस्टम’ का सबसे ‘कॉम्प्लेक्स बग’ अब ‘फिक्स’ हो गया था।
"क्या हुआ, भाई? क्या बात हुई? मुझे भी बता!" बंटी, आरव के कंधे पर अपना हाथ रखकर झट से पूछ बैठा। बंटी ने पूरी बातचीत सुनी तो नहीं थी, लेकिन आरव के चेहरे के हाव-भाव और बीच-बीच में आती अनन्या की खिलखिलाती हँसी ने उसे अंदाज़ा लगा दिया था कि कुछ ‘खास’ हुआ है। उसकी आँखें उत्सुकता से चमक रही थीं, जैसे कोई बच्चा दिवाली के पटाखों का इंतज़ार कर रहा हो।
आरव ने मुस्कुराते हुए अपना फ़ोन बंटी की तरफ बढ़ा दिया, जिस पर 'एरर 404' वाला मैसेज अभी भी खुला था। "अरे, मैडम हँस रही थीं। मेरा 'एरर 404' वाला 'मज़ाक' उन्हें पसंद आया।"
बंटी ने स्क्रीन पर देखा, फिर आरव की तरफ देखा, और उसकी आँखें फ़ैल गईं। "हँस रही थीं! भाई, ये तो सीधा-सीधा 'ग्रीन लाइट' है! ये 'एरर 404' नहीं, 'इश्क़ का नया वर्जन' है!" बंटी ने जोश में आकर आरव का कंधा थपथपाया। "अब तू देर मत कर! लोहा गरम है, मार दे हथौड़ा! पूछ ले डेट के लिए! अरे, 'दिल-Gic' का 'फाउंडर' हो, तो 'दिल' की बात करने में हिचकिचाता क्यों है?"
बंटी ने तुरंत खुद को उनका ‘ऑफिशियल लव गुरु’ घोषित कर दिया। वह अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और पूरे ड्रामाई अंदाज़ में एक्टिंग करने लगा। "देख, भाई, सबसे पहले उसे तू 'कॉफी' पिला। लेकिन किसी फैंसी जगह नहीं, किसी पुरानी 'ढाबे' पर, जहाँ 'पुरानी गज़लें' बजती हों। फिर, अचानक तू उसे 'फूल' देना और बोलना, 'एक फूल तेरी राह का, एक फूल मेरी बाहों का... मिलकर हमारी ज़िंदगी महकाएगा!'" बंटी ने हाथ में एक काल्पनिक गुलाब पकड़कर आरव की तरफ बढ़ाया, जैसे अनन्या सामने हो।
आरव, amused but also slightly exasperated, interrupt. "बस कर, बंटी! तू ‘ओवर एक्टिंग’ का 'नेशनल अवॉर्ड' लेगा क्या? वो अनन्या वर्मा है, अंजलि नहीं! ये सब 'फ़िल्मी डायलॉग' उस पर काम नहीं करेगा। उसे 'फ़िल्मी डायलॉग' नहीं, 'रियल लॉजिक' पसंद है। और वैसे भी, मुझे उसकी 'चीज़ी' शायरी सुनकर 'पसंद' नहीं आई थी।" आरव ने आँखों में शरारत लिए कहा।
बंटी ने अपनी छाती पर हाथ रखा। "अरे, भाई! 'रियल लॉजिक' में 'फीलिंग्स' भी तो होती हैं! तू बस इतना बोल, 'मैडम, मुझे आपसे एक 'बग' फिक्स करना है... मेरे दिल में। क्या आप मेरे साथ 'डिबग' करने चलेंगी?' ये 'टेक्निकल' भी है, और 'रोमांटिक' भी।" बंटी ने एक और 'पोज़' बनाया।
आरव ने अपना सिर हिलाया, लेकिन बंटी की बातें उसके दिमाग़ में कहीं न कहीं बैठ रही थीं। वह अपनी कुर्सी से उठा और छोटे से ऑफिस में चहलकदमी करने लगा। "लेकिन अब क्या? सीधे 'डेट' पर बुलाऊँ? क्या होगा अगर वो मना कर दे? हमारा 'प्रोफेशनल रिश्ता' भी ख़राब हो जाएगा।" उसके माथे पर हल्की सी शिकन थी। उसने इतने दिनों में अनन्या को करीब से जाना था। वह जानती थी कि अनन्या अपनी ‘प्रोफेशनल’ इमेज को लेकर कितनी गंभीर थी।
"अरे, भाई! 'रिस्क' तो लेना पड़ेगा! 'इश्क़' में 'बग' फिक्स करने के लिए 'टेस्टिंग' तो करनी ही पड़ेगी!" बंटी ने आरव को धक्का दिया। "तूने आज उसे हँसाया है, और वो हँसी है! इसका मतलब है 'कनेक्शन' बन गया है!"
आरव को बंटी की बातें अजीब लगती थीं, लेकिन उनमें एक अजीब सी सच्चाई भी थी। अनन्या ने उसे हँसते हुए 'बदमाश' कहा था, और यह 'बदमाश' शब्द आरव को 'प्यारा' लगा था। उसे लगा कि अब उनके बीच ऐसा कुछ है जो 'कोड' से ज़्यादा 'दिल' के करीब है। 'शायद... शायद मुझे पूछ ही लेना चाहिए। एक 'लंच' के लिए ही सही।' वह अपने विचारों में खो गया।
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उधर, ZapConnect के ‘ग्लॉसी’ ऑफिस में अनन्या अपनी कुर्सी पर बैठी हुई थी, उसके चेहरे पर एक शांत, संतोष भरी मुस्कान थी। काम का सारा तनाव, जो सुबह से उसे घेरे हुए था, जैसे हवा में उड़ गया था। उसने अपने लैपटॉप की स्क्रीन को देखा, जहाँ कुछ देर पहले 'एरर 404' वाला मैसेज चमक रहा था। उसने धीरे से लैपटॉप बंद किया।
'यह लड़का... आरव शर्मा। बिल्कुल अलग है।' अनन्या ने सोचा। 'पहले लगा सिर्फ एक 'पुराने ख्यालों वाला डेवलपर' है, जो 'शायरी' और 'पुरानी फिल्मों' की बातें करता है। लेकिन अब... वह मुझे हँसा सकता है, और मेरी 'लॉजिक' को चुनौती भी दे सकता है, और मुझे यह पसंद भी आता है।'
उसे 'एरर 404' वाला मैसेज फिर से याद आया। 'Logic Not Found... Dil for better results.' वह फिर से हँसी। 'उसने मेरी ही बात को मेरे ही ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया, और मुझे पसंद भी आया। गजब!' अनन्या के लिए यह एक 'नई फीलिंग' थी। वह हमेशा हर चीज़ पर नियंत्रण रखना पसंद करती थी, हर बात को 'प्रैग्मेटिक' तरीके से देखती थी। लेकिन आरव के साथ, उसे एक अलग तरह का 'कनेक्शन' महसूस हो रहा था, कुछ 'स्पांटेनियस' और 'रियल'। 'डेट' पर जाने का विचार शुरू में उसे 'अनप्रोफेशनल' लगा, लेकिन इस 'नए डायनामिक' को एक्सप्लोर करने की इच्छा अब ज़्यादा मज़बूत थी।
अनन्या ने एक गहरी साँस ली। 'मैं क्यों इंतज़ार करूँ? उसने पहला 'बग फिक्स' किया, मैं पहली 'फ़ीचर रिक्वेस्ट' करूँगी।' उसने तय किया। उसे लगा कि आरव ने एक कदम बढ़ाया था, अब उसकी बारी थी। वह इसे बहुत 'कैजुअल' रखना चाहती थी, जैसे यह सिर्फ काम से जुड़ा हो, लेकिन उसमें एक 'पर्सनल इंटरेस्ट' का हल्का सा संकेत हो।
उसने अपने फ़ोन में ‘मैसेज’ ऐप खोला। वह सोचने लगी कि कैसे शुरुआत करे। 'Shall we discuss the next app update over coffee?' – नहीं, यह बहुत 'फॉर्मल' है, और उसमें वो 'स्पार्क' नहीं है। 'How about lunch sometime?' – थोड़ा ज़्यादा 'डायरेक्ट' है, यह उसकी 'पर्सनालिटी' से मेल नहीं खाएगा।
अनन्या अपने होंठों पर उंगली फेरते हुए सोचने लगी। उसे आरव की 'कॉफी' याद आई, और फिर उसका 'एरर' वाला 'मज़ाक'। उसे उसी 'टोन' में जवाब देना था। उसे 'प्रोफेशनल' रहते हुए भी आरव के 'विट' को 'एक्नॉलेज' करना था।
उसने लिखना शुरू किया: **"मिस्टर शर्मा, आपकी 'कॉफी' वाकई अच्छी थी, और आपका 'एरर' भी मज़ेदार था।"** उसने इतना लिखा और फिर रुक गई। 'अब क्या?'
उसे याद आया कि आरव ने उसे 'कॉफी' 'ट्रीट' की थी। 'तो, अब मेरी बारी है।'
उसने आगे लिखा: **"मुझे लगता है आपने 'लंच' के लिए खुद को 'क्वालिफाई' कर लिया है। मेरा 'ट्रीट'।"**
अनन्या ने मैसेज को दोबारा पढ़ा। यह उसके लिए 'फॉर्मल' था, लेकिन 'ट्रीट' शब्द और पिछले 'कन्वर्सेशन' का 'संदर्भ' इसे स्पष्ट रूप से 'पर्सनल' बना रहा था। उसने अंत में एक छोटा सा 'स्माइली इमोजी' जोड़ दिया, जैसे एक हल्की सी आँख मारी हो। वह चाहती थी कि आरव इसे समझे। वह मुस्कुराई, 'परफेक्ट!' उसने 'सेंड' बटन दबा दिया।
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आरव अपने ऑफिस में बंटी की 'लव गुरु' वाली सलाहों को टालने की कोशिश कर रहा था। वह अभी भी इस दुविधा में था कि अनन्या को 'लंच' के लिए कैसे पूछे। उसे डर था कि कहीं 'ग़लत मैसेज' न चला जाए।
तभी, उसके फ़ोन पर एक 'नोटिफिकेशन' आया। 'अनन्या वर्मा' का नाम 'स्क्रीन' पर चमक रहा था, साथ में एक नया मैसेज। आरव का दिल ज़ोर से धड़का। उसने तुरंत फ़ोन उठाया।
उसने मैसेज पढ़ा। "मिस्टर शर्मा, आपकी 'कॉफी' वाकई अच्छी थी, और आपका 'एरर' भी मज़ेदार था। मुझे लगता है आपने 'लंच' के लिए खुद को 'क्वालिफाई' कर लिया है। मेरा 'ट्रीट'।"
आरव की आँखें खुशी से चौड़ी हो गईं। उसने मैसेज को दो बार पढ़ा, जैसे उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। "मेरा 'ट्रीट'!" उसने धीरे से पढ़ा। "उसने मुझे 'लंच' पर बुलाया है!" उसकी आवाज़ में एक अजीब सी 'उत्तेजना' थी।
बंटी, जो आरव के चेहरे पर अचानक आई इस ख़ुशी को नोटिस कर रहा था, पूछता है, "क्या हुआ, भाई? क्या ‘सर्वर डाउन’ हो गया?"
आरव खुशी से उछल पड़ा, लगभग अपनी कुर्सी को गिराते हुए। "नहीं, बंटी! 'सर्वर' एकदम 'अप' है! बल्कि 'सुपर-अप' है!" उसने तुरंत फ़ोन बंटी की तरफ बढ़ा दिया। "देख! देख, बंटी!"
बंटी ने मैसेज पढ़ा, और उसकी आँखें पॉप आउट हो गईं। "माई गॉड! 'मैडम' ने पहला 'स्टेप' लिया! भाई, तू तो 'विजेता' है! 'शर्त' का तो पता नहीं, पर 'दिल' जीत लिया!" बंटी ने ख़ुशी से चिल्लाते हुए आरव को गले लगा लिया।
आरव खुशी से पागल हो रहा था। उसने जल्दी से 'रिप्लाई' टाइप किया, कोशिश कर रहा था कि वह 'कूल' और 'कैजुअल' लगे, लेकिन अंदर ही अंदर वह ख़ुशी से नाच रहा था।
**"Only on one condition, Miss Verma. The place will be my choice. And I promise, there won't be any spreadsheets on the menu. 😉"** उसने अपना ही मज़ेदार 'विंक इमोजी' भी लगा दिया।
अनन्या को कुछ ही देर में आरव का 'रिप्लाई' मिल गया। उसने पढ़ा – "The place will be my choice. And I promise, there won't be any spreadsheets on the menu." वह हँस पड़ी। उसे ठीक से पता था कि उसका क्या मतलब था।
उसने तुरंत 'रिप्लाई' किया, "Deal! See you tomorrow."
आरव ने मैसेज पढ़ा। "सी यू टुमॉरो!" उसने बंटी की तरफ देखा और एक बड़ी सी मुस्कान दी।
अनन्या ने भी अपना फ़ोन अपनी डेस्क पर रखा और एक लंबी, ख़ुशहाल साँस ली। कल का 'लंच' अब सिर्फ 'लंच' नहीं था, यह एक नई शुरुआत थी, 'डेटा' और 'दिल' के बीच की एक नई, रोमांचक कहानी का पहला 'चैप्टर'। शर्त अब भले ही बाकी हो, लेकिन उनके बीच का व्यक्तिगत 'कनेक्शन' अब हर चीज़ से बड़ा हो चुका था।