वो एक मामूली लड़का लगता है — मस्तमौला, मज़ाकिया, हर किसी से हँसी-मज़ाक करने वाला… लेकिन उसकी आँखों में कुछ छुपा है। एक ऐसा रहस्य, जो दुनिया की सबसे ताक़तवर संस्थाओं को हिला सकता है। Aalam, एक इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप में काम करने वाला नौजवान, जिसे क... वो एक मामूली लड़का लगता है — मस्तमौला, मज़ाकिया, हर किसी से हँसी-मज़ाक करने वाला… लेकिन उसकी आँखों में कुछ छुपा है। एक ऐसा रहस्य, जो दुनिया की सबसे ताक़तवर संस्थाओं को हिला सकता है। Aalam, एक इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप में काम करने वाला नौजवान, जिसे कॉलेज की भीड़ में कोई खास नहीं समझता... लेकिन जब उसकी मुलाकात होती है Ira से — एक रहस्यमयी लड़की, जो खुद एक सीक्रेट ऑर्गनाइजेशन "Blue Paradise" से जुड़ी है — तब शुरू होती है एक ऐसी कहानी, जिसमें हर मुस्कान के पीछे एक साज़िश है, हर दोस्ती के पीछे एक मक़सद… और हर अध्याय के अंत में एक रहस्य। कौन है असली Aalam? क्या Ira को कभी सच्चाई का अंदाज़ा होगा? और वो USB जिसका नाम ही काफी है — Blue Paradise — उसमें क्या छुपा है?
The Aalam
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🖋️ Chapter 1: एक अजनबी साया
ये कहानी शुरू होती है एक शादी से... पर खत्म कहां होगी, कोई नहीं जानता।
दिल्ली की रौनकदार शामों में, आज एक खास महफिल सजी थी — किसी नामी बिज़नेस फैमिली की बेटी की शादी। गाड़ियों की लाइनें बाहर तक लगी थीं, और गेट से अंदर घुसते ही ऐसा लगता था जैसे कोई फ़िल्म की शूटिंग चल रही हो।
इसी भीड़ में, सबकी नज़रों का मरकज़ बनी थी — Ananya Singh।
उसने हल्का गुलाबी लहंगा पहना था, जिसमें सुनहरे धागों की कढ़ाई थी। बाल उसके कमर तक लहराते हुए, खुले थे और हल्की सी ब्राउन शेड वाली लाइट पड़ने से और भी चमक रहे थे। वो धीमी चाल से, बिना ज़रा भी घबराहट के, गार्डन की तरफ जा रही थी।
उसकी सुराहीदार गर्दन पर एक पतला सा हीरे का हार था, जो चांदनी की तरह चमकता था। लेकिन सबसे अलग थी उसकी आंखें — बड़ी, तेज़, और कुछ-कुछ सवाल करती हुई। वो अकेले नहीं आई थी, उसके साथ कुछ दोस्त और फैमिली के लोग भी थे, पर सबके बीच वो सबसे अलग नज़र आ रही थी।
और फिर... वो आया।
Aalam — काले जींस, सफेद शर्ट, रोल्ड स्लीव्स, और पैरों में सफेद स्नीकर्स। हल्की मुस्कान और आंखों में गहराई। किसी को नहीं पता था कि वो कौन है, बस इतना कि वो किसी दोस्त के साथ आया था, जिसे लड़की वालों की फैमिली जानती थी।
उसका चेहरा मासूम था, लेकिन चाल में ऐसा भरोसा था जो आम लोगों में नहीं होता। शर्ट के नीचे से उसकी 8 पैक एब्स की हल्की छाया भी उसे बाकियों से अलग बना रही थी। कोई उसे "सिंपल लड़का" कह सकता था, लेकिन जो आंखों से देख पाते, वो जानते कि उसमें कुछ और भी था।
Aalam बस चुपचाप फर्श की सफ़ाई का ध्यान रखते हुए चल रहा था, जब अचानक किसी ने पीछे से धक्का मारा — और वो सीधा जा टकराया Ananya से।
पल भर को दोनों की आंखें मिलीं।
कुछ सेकेंड… जो जैसे ठहर गए थे। आस-पास की सारी आवाज़ें धीमी हो गई थीं।
“Sorry,” Aalam बोला, लेकिन उसकी आवाज़ में झिझक नहीं, सच्चाई थी।
Ananya ने पहले तो गुस्से से देखा, लेकिन कुछ था उस लड़के की आंखों में... जिससे उसका गुस्सा छूमंतर हो गया।
वो आगे बढ़ने ही लगी थी कि Aalam ने झुककर उसका दुपट्टा उठाया, जो टकराहट में ज़मीन पर गिर गया था।
“ये गिर गया था,” उसने हल्की मुस्कान के साथ दिया।
और जैसे ही Ananya ने दुपट्टा लिया, किसी फोटोग्राफर ने उस पल को कैमरे में कैद कर लिया — Ananya का झुका सिर, Aalam का मुस्कुराता चेहरा और वो एक सेकंड का “लगभग गले लगने” वाला पल।
बस, अगले दिन वो फोटो वायरल हो गई।
किसी ने बिना जाने-समझे कैप्शन लगा दिया — "दिल्ली की सबसे अमीर लड़की, और उसका सीक्रेट बॉयफ्रेंड?"
रातों-रात इंटरनेट पर हलचल मच गई। लोगों ने फोटो को क्रॉप किया, मीम बनाए, गॉसिप उड़ाई।
लेकिन असली तूफ़ान तब आया जब Ananya के घरवालों को ये फोटो दिखी।
“ये लड़का कौन है?”
“हमारी बेटी की इज़्ज़त दांव पर लग रही है।”
“इसे अभी के अभी खोजो!”
---
शादी खत्म हो चुकी थी, पर Aalam के लिए अब एक नई शुरुआत होने वाली थी — वो जानता तक नहीं था कि एक पल की मुलाक़ात उसकी पूरी ज़िंदगी को झकझोर देगी।
Ananya भी अपने आप को समझ नहीं पा रही थी। उसे Aalam के साथ वो पल याद आ रहा था — कुछ तो अलग था उसमें। न वो उसकी खूबसूरती से डरा, न नाम पूछने में घबराया, और न ही ज़्यादा बोलने की कोशिश की।
शांति, सादगी, और... अजीब सा अपनापन था उस लड़के में।
अगले कुछ दिनों में, Aalam और Ananya की बातचीत एक कॉमन दोस्त के ज़रिए शुरू हो गई। WhatsApp पे हल्की-फुल्की चैट, फिर कॉल्स, फिर मिलने के बहाने...
Ananya जो हमेशा खुद को सबसे ऊपर समझती थी, पहली बार किसी के लिए इंतज़ार करने लगी थी।
और उधर Aalam?
वो जानता था कि वो इस रिश्ते में ज़्यादा उम्मीद नहीं कर सकता।
वो "Alpha Paradise" का मास्टरमाइंड था — एक ऐसा हैकर जिसने दुनिया की सबसे सिक्योर वेबसाइट्स को हिला कर रख दिया था। लेकिन उसने ये सब कभी शो नहीं किया।
Ananya को सिर्फ उसका सादापन और सोच पसंद आई थी। लेकिन Aalam… वो कुछ और ही सोच रहा था।
लेकिन Ananya को क्या पता था...
जिस लड़के की सादगी उसे भा गई थी,
वही लड़का एक ऐसा रहस्य छुपा रहा था,
जो उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल बन सकता था।
"क्योंकि Aalam सिर्फ एक सीधा-सादा लड़का नहीं था... वो उस खेल का हिस्सा था, जिसकी शुरुआत Ananya की एक मुस्कान से नहीं, बल्कि एक पुरानी साज़िश से हुई थी..."
क्या Ananya की ये मुलाक़ात इत्तेफाक थी... या कोई सोची-समझी चाल?
🙏 इस अध्याय को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद!
🤔 आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
❤️ अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो *लाइक* ज़रूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढ़ाता है!
💬 और एक छोटा सा *कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढ़ता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
📢 चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
- आपका अपना
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🖋️ Chapter 2: नज़दीकियाँ और दूरियाँ
अगली सुबह की हवा में कुछ अलग था। जैसे शहर जागा हो, लेकिन कोई राज़ लेकर। सोशल मीडिया पर हर जगह एक ही वीडियो छाया हुआ था — अनन्या सिंह और एक अनजान लड़का, डांस फ्लोर पर एक-दूसरे की आंखों में डूबे हुए। उस वीडियो की हर फ्रेम में कुछ था — मासूमियत, केमिस्ट्री और एक रहस्य।
लोगों ने नामों के कयास लगाए, अनन्या के फॉलोअर्स की संख्या रातों-रात बढ़ गई। लेकिन उसके घर का माहौल ठंडा नहीं, आग से भरा हुआ था।
“ये कौन है? किसने बुलाया था इसे उस शादी में?”
उसके पिता का चेहरा गुस्से से लाल था। एक नामी बिज़नेसमैन के लिए ये खबर किसी ताज़ा घाव जैसी थी।
अनन्या चुप थी। वो जानती थी कि कोई जवाब उन्हें संतुष्ट नहीं करेगा। और सच कहें तो, उसके पास खुद भी कोई जवाब नहीं था — बस एक एहसास था जो पहली नज़र में दिल के दरवाज़े पर दस्तक दे गया था।
वो वीडियो अनजाने में बना, लेकिन अब वो पूरे शहर में गूंज रहा था।
उधर, आलम ने अपना फोन बंद कर दिया था।
ना कॉल्स, ना मैसेज।
वो जानता था, ये तूफ़ान अब कुछ देर का नहीं — ये उसकी ज़िंदगी बदलने वाला है।
पर उसे फर्क नहीं पड़ा।
क्योंकि वो उस रात सिर्फ़ डांस नहीं कर रहा था... वो किसी और की आंखों में अपना चेहरा देख रहा था — और वो चेहरा उसे अच्छा लग रहा था।
---
कुछ दिन बीते। शादी का हंगामा तो थम गया, लेकिन अनन्या का दिमाग शांत नहीं हुआ। वो चाहती तो उस वीडियो को फेक बता सकती थी, माफ़ी मांग सकती थी, सब खत्म कर सकती थी।
पर उसने ऐसा कुछ नहीं किया।
बल्कि, एक दोपहर वो चुपचाप गाड़ी लेकर उसी गली में पहुंच गई जहाँ वो छोटा सा मकान था — आलम का।
“Hi,” उसने कहा।
आलम दरवाज़े पर खड़ा था — वही पुरानी सफेद शर्ट, लेकिन मुस्कान में कुछ नया था।
“तुम यहां?” उसने हल्का सा सिर झुकाया।
“मुझे... तुमसे कुछ बातें करनी थीं।” अनन्या की आंखों में झिझक नहीं थी, पर सवाल ज़रूर थे।
वो अंदर बैठी। पहली बार एक सादा, छोटा-सा कमरा किसी महल से ज़्यादा सुकून दे रहा था।
बातें शुरू हुईं — और फिर चलती चली गईं।
कॉलेज, किताबें, गाने, ज़िंदगी के इरादे… और फिर अनकही चीज़ें। वो जो दिल कहता है, पर जुबां नहीं कहती।
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अब मिलने का सिलसिला बढ़ने लगा। गुपचुप, चुपचाप, और बिना किसी नाम के।
एक दिन वो दोनों पार्क में बैठे थे — ठंडी हवा थी, खामोशियाँ थी, और बीच में कभी-कभी अनन्या की हँसी।
“तुम्हें देखता हूँ तो लगता है दुनिया इतनी खराब भी नहीं है,” अनन्या ने कहा।
“और तुम्हें देखता हूँ तो लगता है इतनी भी परफेक्ट नहीं,” आलम मुस्कुरा पड़ा।
वो हँसी, लेकिन उस हँसी के पीछे अब मासूमियत नहीं, अपनापन था।
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पर कहानी इतनी सीधी कहां होती है?
जिस दिन सब कुछ सामान्य लगने लगा था, उसी शाम... फिर कुछ हुआ।
एक नया वीडियो लीक हुआ।
इस बार कोई डांस नहीं।
इस बार — आलम और अनन्या एक लॉन में अकेले बैठे थे।
पास बैठना, हँसना, एक-दूसरे को देखना... और फिर, एक पल — जिसमें अनन्या ने आलम का हाथ थाम लिया।
वीडियो में कुछ भी अश्लील नहीं था, लेकिन समाज को कितनी देर लगती है एक इमेज बनाने में?
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टीवी चैनलों पर बहस शुरू हो गई।
“क्या लड़की बिगड़ रही है?”
“क्या ये रिश्ता स्वार्थ से भरा है?”
“कौन है ये लड़का जो शहर की सबसे अमीर बेटी के इतने करीब है?”
उधर, अनन्या का घर — फिर बवंडर का केंद्र बन गया।
“तुम उस लड़के से मिल रही हो?” उसके पिता ने चीखते हुए पूछा।
“हाँ,” उसने पहली बार सीधी नज़र से जवाब दिया।
“तुम जानती हो, वो कौन है?”
“नहीं… लेकिन मैं ये जानती हूँ कि मैं कौन हूँ।”
आलम अकेले अपने कमरे में बैठा था, बाहर हल्की बारिश हो रही थी और खिड़की पर टपकती बूंदों की आवाज़ के साथ उसके भीतर भी कुछ गिर रहा था — शांति। लेकिन यह सन्नाटा स्थायी नहीं था। उसके फोन की स्क्रीन टिमटिमाई — अनन्या का मैसेज था: “मैं बात करना चाहती हूं… लेकिन इस बार किसी को बताए बिना।” अगली सुबह, वो बिना किसी को कुछ कहे सीधे आलम के घर पहुंच गई। दरवाज़ा खुला, दोनों की आंखें मिलीं, और अनन्या ने कहा, “चलो यहां से कहीं दूर… जहाँ हमें कोई पहचानने वाला न हो।” आलम ने एक पल बिना सोचे, बस हौले से सिर हिलाया और अपना बैग उठाया।
दोपहर तक वे दिल्ली की एक लोकल कोर्ट में थे। कोई तामझाम नहीं, कोई शोर नहीं — सिर्फ दो नाम, दो दस्तखत और एक छोटा-सा वादा। उन्होंने शादी कर ली। कोर्ट मैरिज के बाद वे शहर के कोने में एक सस्ते-से, लेकिन शांत फ्लैट में शिफ्ट हो गए। वहाँ कोई उन्हें पहचानता नहीं था, ना कोई उन्हें जज करता था। ये घर छोटा ज़रूर था, लेकिन उन दोनों के लिए किसी महल से कम नहीं।
शुरू के कुछ महीने सपने जैसे बीते। अनन्या सुबह की चाय बनाना सीख गई, और आलम चुपचाप उसे देखकर मुस्कुराता। वो दोनों साथ में छोटे-छोटे काम करते — सब्ज़ी लाना, घर की सफाई, कभी-कभी सड़क किनारे गोलगप्पे खाना। अनन्या को धीरे-धीरे वो दुनिया पसंद आने लगी जिसे वो कभी "नीच तबके की" समझती थी। आलम की सादगी, उसकी मुस्कान और उसकी बातों की गहराई में वो खुद को खोती चली गई।
एक रात छत पर लेटे हुए जब आसमान में बादल गरज रहे थे, अनन्या ने उसकी ओर मुड़कर कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी सादगी में इतनी शांति हो सकती है।” आलम ने उसकी ओर देखा और बोला, “मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि कोई मुझे इस तरह समझेगा।” दोनों की आंखें एक-दूसरे में डूब गईं। वक्त जैसे थम गया था।
पर जैसे-जैसे महीने गुज़रे, जीवन की असलियत धीरे-धीरे सामने आने लगी। अब वो शादी सिर्फ़ चुपके से छुपाए गए इश्क की कहानी नहीं रही थी, अब उसमें जिम्मेदारियाँ भी शामिल थीं। आलम का स्वभाव पहले जैसा ही शांत रहा, लेकिन अनन्या के भीतर बेचैनी बढ़ने लगी। जिस लड़की की पूरी ज़िंदगी स्टेटस, महंगे कपड़े और हाई-सोसाइटी पार्टियों में बीती थी, अब वह एक साधारण घर में कैद सी महसूस करने लगी थी।
एक दिन जब आलम लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था, अनन्या उसके पास आकर बैठ गई और हल्के अंदाज़ में पूछ बैठी, “तुम हर रात इतना लेट क्यों सोते हो? और तुम्हारा लैपटॉप हमेशा लॉक क्यों रहता है?” आलम ने बिना उसकी ओर देखे कहा, “कुछ क्लाइंट्स हैं जो सिक्योरिटी प्रोजेक्ट्स पर काम करवा रहे हैं।” अनन्या ने कोशिश की मुस्कुराने की, लेकिन उसके मन में सवालों के बीज बो दिए गए थे।
धीरे-धीरे उसकी बातें बदलने लगीं। वो छोटे-छोटे तानों में अपने पुराने जीवन को याद करने लगी। “काश AC ठीक से चलता…”, “तुम्हारे पास कोई बड़ा प्लान भी है या ऐसे ही फ्रीलांसिंग चलती रहेगी?”, “मैंने सोचा था शादी के बाद हम कुछ बेहतर करेंगे…” आलम चुपचाप सुनता रहता, उसकी आंखों में कोई जवाब नहीं होता, बस वही पुराना सुकून — जिसे अनन्या अब ‘उदासीनता’ समझने लगी थी।
कभी-कभी आलम देर रात तक कुछ कर रहा होता, तो अनन्या चुपचाप उसकी स्क्रीन की झलक लेने की कोशिश करती। पर हर बार स्क्रीन लॉक रहती। उसे अब शक होने लगा था — “क्या आलम कुछ छुपा रहा है?” उसे नहीं पता था कि उसका पति दुनिया का सबसे खतरनाक और रहस्यमय हैकर — The Alpha है।
फ्लैट का वो सुकून अब बारीक़ दरारों में बिखरने लगा था। बातों का सिलसिला कम हो गया, हँसी के पल घटने लगे, और वो छत — जहाँ कभी दोनों साथ तारे गिनते थे — अब अकेली पड़ गई थी।
एक शाम, जब आलम बाजार से लौट रहा था, दरवाज़ा खोलते ही उसे घर में सन्नाटा मिला। अनन्या कमरे में थी, लेकिन उसकी आंखों में नमी थी। उसके हाथ में फोन था — और उसपर एक पुराना वीडियो खुला था… वो वायरल वीडियो जिसमें वो और आलम पहली बार डांस कर रहे थे। उस वीडियो को देखकर उसकी आंखों में जैसे सवाल तैरने लगे थे — “कहाँ खो गया वो एहसास? क्या ये सब सिर्फ़ एक पल का जोश था, या कोई गहरा रिश्ता?”
आलम कुछ कहना चाहता था, लेकिन उससे पहले ही अनन्या बोल पड़ी, “क्या हम वही लोग हैं जो उस रात थे?”
कुछ पलों की खामोशी के बाद आलम ने धीमे से कहा, “हम वही हैं… पर दुनिया ने हमें वैसा नहीं रहने दिया।”
और फिर… उस खामोशी में एक दरार और गहरी हो गई।
🖋️ Chapter 3: अनकही कसमे
शहर की दोपहर अपनी रफ्तार में दौड़ रही थी, लेकिन एक तस्वीर ने मानो पूरे सोशल मीडिया की नब्ज थाम ली थी — एक साधारण-सी बालकनी, जिसमें दो लोग खड़े थे। तस्वीर में कोई खास पोज़ नहीं था, कोई चमक-दमक नहीं थी, फिर भी उसमें कुछ ऐसा था जिसने लोगों को रुककर देखने पर मजबूर कर दिया।
बालकनी की रेलिंग पर झुके दो साये — एक लड़की जिसकी आँखों में पुरानी पहचान थी और एक लड़का, जिसकी मौजूदगी में सुकून और रहस्य दोनों थे। शहर के तेज़ इंटरनेट ने उन दोनों को पहचान लिया था। और जब चेहरे ज़रा पास से देखे गए, तो किसी ने कमेंट कर दिया — "ये तो अनन्या सिंह है!"
बस, वहीं से शुरू हो गया तूफान।
अनन्या सिंह — वही, जो करोड़ों की इकलौती वारिस थी। वही, जिसे तीन महीने पहले मनाली के लिए रवाना होते देखा गया था। उसने खुद कहा था, “थोड़ा ब्रेक चाहिए... मैं अपनी दोस्तों के साथ मनाली जा रही हूं।” घर वालों ने भी मान लिया था — कि लड़की अपना दर्द भुलाने, अपने टूटे मन को समेटने गई है।
पर ये तस्वीर...?
कहाँ की थी ये तस्वीर? और किसके साथ थी?
कमेंट्स की बाढ़ आ गई —
"ये मनाली नहीं है यार, ये तो दिल्ली की पुरानी कॉलोनी लग रही है!"
"जिसके साथ है, वो लड़का कौन है?"
"क्या... ये शादी कर चुकी है?"
और इस सबके बीच, वो तस्वीर वायरल हो चुकी थी — Ananya Singh spotted in Delhi balcony with unknown boy.
उधर, सिंह मेंशन के ड्राइंग रूम में ये तस्वीर टीवी स्क्रीन पर उभर रही थी, और राजेन्द्र सिंह की आँखें जैसे जल रही थीं।
“ये क्या मज़ाक है?” उन्होंने टेबल पर रखे ग्लास को फर्श पर दे मारा।
“सर...” मैनेजर ने कांपते हुए कहा, “ये तस्वीर 2 घंटे पहले अपलोड हुई थी, और अब तक दो मिलियन व्यूज़ हैं...”
“मनाली में है, बोल कर गई थी... और ये?” राजेन्द्र सिंह की आवाज़ गरज में बदल गई।
उसी वक्त उनके बेटे, रोहन ने आकर फोन आगे किया। “ये लो पापा... लोकेशन ट्रैक करवा ली है। यही दिल्ली की पुरानी रिंग रोड वाली कॉलोनी है।”
राजेन्द्र सिंह ने एक नजर फोन पर डाली और फिर बगैर कुछ बोले उठ खड़े हुए।
“गाड़ी निकालो। अभी।”
---
उधर, उसी कॉलोनी में एक छोटे-से कमरे में, अनन्या खिड़की से धूप देख रही थी। आलम अंदर लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था। दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों से थोड़ी दूरी थी — जैसे कोई बात जो ज़ुबान तक नहीं आ रही थी, लेकिन दिलों में घूम रही थी।
“तुम्हारा मूड ठीक नहीं है आज?” आलम ने बिना देखे पूछा।
अनन्या ने सिर झुका लिया। “नहीं... बस... कुछ सोच रही थी।”
उसने मोबाइल उठाया और खुद को रोक न सकी। सोशल मीडिया खोला — और जैसे ही उस वायरल तस्वीर पर नजर पड़ी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
“आलम... ये फोटो कैसे...?”
आलम ने लाकर स्क्रीन देखा और हल्की मुस्कान के साथ बोला, “तो अब सबको पता चल ही गया।”
“अब्बा... पापा...” अनन्या की आवाज़ कांप रही थी। “अगर उन्हें पता चल गया तो वो...”
तभी दरवाज़े पर ज़ोरदार दस्तक हुई।
धक-धक।
एक और दस्तक — अब और तेज़।
अनन्या और आलम दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
आलम ने धीमे से दरवाज़ा खोला।
सामने चार गार्ड, और बीच में खड़े — राजेन्द्र सिंह।
उनकी आँखों में आग थी। वो बिना अंदर आए बोले, “यही है वो जगह, जहाँ मेरी बेटी पिछले तीन महीने से छुपी बैठी है?”
अनन्या डरते हुए पीछे आई। “पापा... मैं आपको बताने वाली थी...”
“बिलकुल नहीं, चुप रहो। तुमने सिर्फ़ झूठ बोला है,” उन्होंने दहाड़ते हुए कहा। “मनाली का बहाना बना कर एक झोपड़ी में छुपी रही? और ये लड़का...” उन्होंने आलम की ओर देखा, “...इसी ने तुझे फँसाया है न?”
आलम कुछ कहने वाला ही था, कि राजेन्द्र सिंह ने इशारा किया। दो गार्डों ने बढ़कर आलम को ज़बरदस्ती बाहर धकेल दिया।
“अब देखता हूँ, कहाँ छुपता है तू।”
---
वो दोपहर जैसे किसी दुःस्वप्न की तरह थी।
कुछ ही देर में आलम का सामान बाहर फेंका गया — एक छोटा सा ट्रॉली बैग, एक टूटा मोबाइल, कुछ किताबें और एक पुराना लैपटॉप।
अनन्या कुछ नहीं कर सकी।
वो कुछ बोलना चाहती थी, पर एक झूठ जो उसने अपने पापा को बताया था — वही उसकी ज़ुबान को अब जकड़े हुए था।
उसे याद था जब उसने पहली बार कहा था — “मैं मनाली जा रही हूँ... थोड़ा घूमने, थोड़ा खुद को ढूंढने...”
और अब जब सच्चाई सामने आ गई थी, वो किसी को देख भी नहीं पा रही थी।
---
आलम पूरे दिन इधर-उधर घूमता रहा। दिल्ली की गलियों में उसके पास अब कोई घर नहीं था। शाम को जब सूरज ढलने लगा, वो एक बेंच पर बैठा — सोचता रहा।
“तो यही था नतीजा?” उसने खुद से पूछा।
वो मुस्कुरा पड़ा, लेकिन उस मुस्कान में कोई रंग नहीं था।
जैसे ही अंधेरा घिरा, उसकी नजर एक पोस्टर पर पड़ी — “ Electronics: Technician Needed, Full Time Work, Food & Stay Available”
वो धीमे कदमों से वहाँ गया।
दुकान के मालिक ने देखा — उसकी हालत अच्छी नहीं थी, लेकिन आँखों में चमक थी।
“काम आता है?” उन्होंने पूछा।
“थोड़ा-बहुत... सब आता है,” आलम ने धीमे से कहा।
मालिक ने गर्दन हिलाई, “तो ठीक है, कल से आ जाना। और सुनो, मेहनती रहना।”
आलम ने सिर झुकाकर “धन्यवाद” कहा और बाहर निकल गया।
---
उस रात उसने किसी को फोन नहीं किया, किसी से शिकायत नहीं की।
बस आसमान की ओर देखा और बुदबुदाया — “शायद यही वो मोड़ है... जहाँ से मेरी असल कहानी शुरू होती है।”
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🙏 इस अध्याय को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद!
🤔 आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
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📢 चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
कुछ महीने पहले तक Aalam एक ऐसे तूफान के बीच था, जिसने उसकी ज़िंदगी के हर कोने को बिखेर दिया था। शादी... वो भी इतनी जल्दी, बिना किसी प्लानिंग के, और फिर अगले ही दिन घर से निकाला जाना — ऐसा लगा जैसे ज़िंदगी ने उसके चेहरे पर बिना चेतावनी के तमाचा मार दिया हो। दिल्ली की वीआईपी गलियों से दूर अब उसका ठिकाना था एक पुरानी सी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान, जहाँ टूटे-फूटे गैजेट्स के बीच वो दिनभर उलझा रहता, और शाम को बस खामोशी ओढ़कर वापस अपने किराए के छोटे से कमरे में चला जाता।
शुरुआत में सब कुछ भारी लग रहा था। लेकिन वक्त ने उसकी पीठ थपथपाई और कहा, “चल आगे बढ़,” और Aalam भी वही करने लगा। धीरे-धीरे दुकान के मालिक को उस पर इतना भरोसा हो गया कि वो शहर से बाहर जाते हुए दुकान की पूरी जिम्मेदारी उसी के हाथों में सौंपने लगा। Aalam अब काम में इतना माहिर हो गया था कि ग्राहक आते ही वो बिना देखे बता देता, "आपको चार्जिंग पोर्ट नहीं, मदरबोर्ड रिप्लेसमेंट की ज़रूरत है।"
एक साल इसी दिनचर्या में बीत गया। न कोई पुराने रिश्तों की परछाई, न ही किसी नई शुरुआत का ख्वाब। बस सुबह दुकान, शाम सन्नाटा और बीच में थोड़ी-सी मज़ाक-मस्ती, कभी-कभी आस-पड़ोस की लड़कियों से थोड़ी छेड़खानी — लेकिन सब हद में।
फिर एक दिन, जैसे वक्त ने उसकी दुकान पर दस्तक दी — Ira।
दोपहर का समय था। बाहर हल्की धूप और हवा में कुछ नमी सी थी। दुकान के दरवाजे से एक लड़की ने झांकते हुए पूछा, "हाय, आपके पास Type-C कार्ड रीडर है?"
Aalam ने सर उठाकर देखा — उसके सामने खड़ी थी एक लड़की, नीले रंग की कुर्त्ती, बाल हल्के गीले, आंखों में गहराई, और चेहरे पर एक आत्मविश्वास भरी सी मुस्कान।
“Type-C?” Aalam ने मुस्कराते हुए कहा, “आपके जैसे स्मार्ट लोग तो Type-C नहीं, सीधा Cloud से डेटा ट्रांसफर करते हैं न?”
Ira हल्का मुस्कराई, “Cloud भी एक दिन धोखा दे जाता है, इसलिए Backup तो ज़रूरी है।”
“और Backup के लिए मैं ही काफी हूँ,” Aalam ने आंख मारते हुए जवाब दिया।
Ira हँस दी, लेकिन उस हँसी में न शर्म थी, न इन्कार — बस एक अजनबी के लिए थोड़ी सी ताज़गी।
Aalam ने उसे कार्ड रीडर पकड़ा दिया, और जाते-जाते बोला, “दूसरी बार आईं तो पेन ड्राइव पर डिस्काउंट मिलेगा, और तीसरी बार आईं तो… चाय भी पिलाऊँगा।”
Ira ने मुड़ते हुए कहा, “तीसरी बार के लिए पहले दूसरी बार तो आने दो।”
अगले कुछ दिनों में Ira फिर-फिर आने लगी। कभी हार्ड डिस्क लेने, कभी बैटरी बदलवाने, कभी बस "पास से जा रही थी तो सोचा देख लूं..." कहकर। Aalam ने भी अब हर बार के लिए नए मजाक, नए बहाने और कुछ फ्लर्टी लाइनें जमा कर ली थीं।
एक बार तो उसने पूछा ही दिया, “वैसे आप आती बहुत हैं… कहीं मेरे लिए तो नहीं?”
Ira ने मुस्कुराते हुए कहा, “इतने सारे सवाल पूछते हो… कहीं पत्रकार तो नहीं हो?”
Aalam ने जवाब दिया, “नहीं, पर आप पर एक सीरीज़ बन सकती है — ‘The Girl Who Bought Every USB.’”
Ira हँसी, लेकिन इस बार उसकी मुस्कान थोड़ी ठहरी हुई थी। जैसे उसके अंदर कुछ चल रहा हो, कुछ ऐसा जिसे वो दिखाना नहीं चाहती।
एक शाम, दुकान बंद होने में बस दस मिनट बचे थे। Aalam काउंटर साफ कर रहा था जब Ira फिर आ गई। इस बार उसके चेहरे पर थोड़ी थकावट और आँखों में हल्की घबराहट थी।
“कुछ चाहिए?” Aalam ने पूछा।
Ira ने कहा, “कोई ऐसा पुराना कंप्यूटर, जिसमें कुछ भी प्री-इंस्टॉल न हो।”
Aalam ने चौंकते हुए कहा, “इतना क्लीन सिस्टम तो मेरे दिल जैसा मिलेगा... मतलब आपको सॉफ्टवेयर टेस्ट करना है या... कुछ हटके चल रहा है?”
Ira ने बस इतना कहा, “कुछ पर्सनल प्रोजेक्ट्स हैं, और कुछ डिलीकेट चीजें हैं जिनके लिए बिना-छुए सिस्टम चाहिए।”
Aalam ने उसकी आँखों में झांका — एक पल के लिए दोनों चुप। फिर उसने कहा, “ठीक है, कल आना… कुछ जुगाड़ हो सकता है।”
Ira ने जाते-जाते पूछा, “वैसे… आप इतने भरोसे के क्यों लगते हैं?”
Aalam ने आंखों में चमक के साथ जवाब दिया, “क्योंकि मैंने बहुत कुछ खोया है… और अब खोने को कुछ नहीं बचा।”
Ira कुछ कहना चाहती थी, पर कुछ कहा नहीं। वो बस बाहर निकल गई, और Aalam... वो वहीं बैठा रह गया, दुकान की बत्ती बुझाकर।
उसी रात उसने अपनी जेब से Ira द्वारा दी गई पुरानी पर्ची निकाली — उस पर कुछ कोड्स और टाइमस्टैम्प्स थे, जो उसने पहले ध्यान से नहीं देखे थे। लेकिन आज... आज उसकी दिलचस्पी बढ़ गई थी।
लेकिन क्या Ira सच में सिर्फ़ सामान लेने आती थी? या वो भी किसी सवाल का जवाब ढूंढ रही थी?
Aalam के लिए वो अब सिर्फ एक कस्टमर नहीं थी… शायद उससे कहीं ज़्यादा।
दूसरे दिन शाम ढलने को थी। दुकान के बाहर नीम के पेड़ की छांव में बैठा Aalam अपने मोबाइल में कुछ स्क्रॉल कर रहा था। आस-पास की चहल-पहल से बेखबर, वो हर आने-जाने वाले चेहरे को बिना देखे भी पहचान चुका था। लेकिन आज, कुछ अलग-सा था। एक बेचैनी… या कहो कोई अधूरी सी उम्मीद जो उसके मन के कोने में बैठी थी।
और फिर वो आई।
Ira — वही हल्की मुस्कान, लेकिन आज उसकी चाल में थोड़ी जल्दी थी, और आंखों में वही हल्का डर, जो पिछले दिन दिखा था।
“तुम्हारा क्लीन सिस्टम तैयार है,” Aalam ने कहा।
Ira ने सिर हिलाया और चुपचाप दुकान के अंदर चली गई। उसने इधर-उधर देखा, जैसे कोई पीछा कर रहा हो। Aalam ने नोटिस किया, लेकिन कुछ कहा नहीं।
“क्या तुमने किसी को देखा बाहर?” Ira ने अचानक पूछा।
Aalam थोड़ा मुस्कराया, “तुम्हें देखकर सब देखता हूँ… लेकिन बताओ, कोई खास बात है?”
Ira ने जवाब देने की बजाय बस सिर झुका लिया, और फिर धीमे से पूछा, “तुम इतने शांत कैसे रहते हो?”
Aalam ने कुर्सी पीछे खिसकाई और कहा, “मैंने ज़िंदगी से सीखा है — जब लोग बहुत कुछ जानना चाहें, तब सिर्फ़ मुस्कुरा दो। सब कुछ कहना जरूरी नहीं होता।”
Ira कुछ कहने ही वाली थी कि तभी दुकान के बाहर एक तेज़ बाइक की आवाज़ आई — वही तेज़ इंजन, जो पहले कभी सुनाई नहीं दी थी। Ira एकदम चौक गई। उसने Aalam की तरफ देखा और धीमे स्वर में बोली, “क्या यहाँ कोई और आता है... इस वक़्त?”
Aalam ने लापरवाही से कहा, “शायद कोई नया ग्राहक हो... या कोई पुराना पीछा।”
Ira की आंखों में डर था, लेकिन उसने खुद को सम्भाला। “अगर कुछ हो, तो क्या तुम मदद करोगे?”
Aalam ने हँसते हुए कहा, “मुझे तो तुम्हारी कंपनी मिल रही है… बदले में कुछ तो देना पड़ेगा न।”
Ira ने कुछ पल उसे देखा, जैसे सवाल और भरोसे के बीच झूल रही हो। फिर उसने बैग से एक पुरानी USB निकाली और कहा, “इसे रख लो… अगर कभी लगे कि मैं कुछ छुपा रही हूँ, तो खोल लेना।”
Aalam ने USB ली, लेकिन ज़्यादा कुछ बोले बिना। उसने सिर्फ़ हल्के से सिर हिलाया, और एक मुस्कुराहट के साथ कहा, “इस पर कुछ मूवीज भी हैं या सिर्फ़ राज़?”
Ira ने जवाब दिया, “तुम खुद देख लेना… लेकिन शायद तुम्हें खोलने की हिम्मत न हो।”
इस बार Aalam हँसा — और पहली बार थोड़ा लंबा।
फिर उसने उसी USB को अपनी जेब में डालते हुए कहा, “ठीक है, पर वादा करो — अगली बार कुछ ऐसा लाना जिससे सिर्फ़ हँसी आए, डर नहीं।”
Ira ने कुछ जवाब नहीं दिया। बस दरवाजे की ओर देखा, जैसे किसी के आने की आहट सुन रही हो।
“चलो, अब मैं निकलती हूँ,” वो बोली।
“इतनी जल्दी?” Aalam ने पूछा, “मैं तो सोच रहा था कि आज दुकान बंद करके तुम्हें चाय पिलाऊँगा — वैसे भी शाम का मौसम बड़ा शानदार है।”
Ira ने मुस्कराकर कहा, “शायद अगली बार…”
वो जैसे ही बाहर निकली, Aalam उसके पीछे आया। दोनों दरवाजे पर खड़े थे, और तभी Ira पलटी और बोली, “तुम्हें ये USB वैसे ही नहीं मिली है, ध्यान रखना…”
Aalam ने उसकी आँखों में देखा और धीमे से कहा, “और तुम... हर बार कुछ अधूरा छोड़ जाती हो।”
Ira ने कुछ पल कुछ नहीं कहा — बस सिर झुकाया और सीढ़ियों से उतर गई। Aalam उसे जाते हुए देखता रहा… और फिर दुकान के अंदर लौट आया।
अंदर पहुँचकर उसने जेब से USB निकाली — उस पर लिखा था सिर्फ़ एक शब्द: “Blue.”
Aalam कुछ देर उसे घूरता रहा, फिर USB को टेबल पर रखा और गहरी साँस ली।
"हूँ..." उसने सोचा, "तो खेल शुरू हो चुका है, बस पता नहीं... खिलाड़ी कौन है, और शिकार कौन?"
बाहर मौसम बदलने लगा था, और एक नई चाल चलने वाली थी।
🙏 इस अध्याय को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद!
🤔 आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
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💬 और एक छोटा सा *कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढ़ता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
📢 चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
- आपका अपना
**The Aalam** ✍️
5 - साए की परछाईं
कभी दुकान की काउंटर के इस पार खडा एक सीधा- सादा लडका, और दूसरी तरफ वो लडकी, जो सॉफ्टवेयर डिजाइनर कहलाती थी — अब इन दोनों के बीच का रिश्ता सिर्फ ग्राहक और दुकानदार का नहीं रह गया था। पिछले कई हफ्तों से Ira की हर मुलाकात एक पैटर्न बन गई थी — रोज कोई नया सवाल, कोई नया सामान, कोई नया बहाना। और Aalam, जो अब तक उस दुकान में एक साल से काम कर चुका था, उसे Ira की हर अदा, हर सवाल और हर नजर की गहराई को पढना आता था। लेकिन Ira को अब तक ये नहीं पता था कि जिससे वो इतने दिनों से मिल रही थी, वो कोई मामूली लडका नहीं, बल्कि वो Alpha है, जिसके नाम से कभी Blue Paradise के सारे टॉप लेवल ऑपरेटिव्स तक थरथराते थे। और शायद Ira खुद भी एक ऐसे Mission पर थी, जहाँ उसे' अपने' की तलाश थी — मगर Aalam जानता था कि जो ‘अपना’ वो ढूंढ रही है, वो बहुत पहले से उसके सामने खडा है।
उस शाम Ira की चाल बदली हुई थी। उसकी आंखों में घबराहट थी, और चेहरा उतना स्थिर नहीं जितना वो रोज रखा करती थी। Aalam ने जैसे ही देखा कि वो बिना कुछ लिए दुकान से बाहर निकली और किसी दूसरी दिशा में चल पडी, उसने बिना देर किए उसका पीछा करना शुरू कर दिया। दिल्ली की वो गलियाँ जो दिन में भीड से भरी होती थीं, अब शाम की ढलती रौशनी में एकदम सूनी और रहस्यमयी लग रही थीं। Ira तेजी से एक वीरान बिल्डिंग में घुसी — एक अधूरी, टूटी- फूटी जगह जो बाहर से किसी पुराने गोदाम जैसी लग रही थी। Aalam ने दीवार की ओट से सब देखा, उसकी नजरों में फिर वही पुरानी शांति थी — वही जो हर खतरे से पहले उसके चेहरे पर आती थी। अंदर घुसते ही तीन नकाबपोश Ira पर टूट पडे — एक ने उसका बैग खींचा, दूसरा उसके रास्ता रोकने लगा, और तीसरा पीछे से हमला करने को बढा। Ira ने हिम्मत तो दिखाई, पर वो अकेली थी. और तभी, बिजली की रफ्तार से Aalam ने बिल्डिंग में कदम रखा।
उसका पहला हमला इतने तेजी से हुआ कि पहला हमलावर वहीं जमीन पर गिर पडा। दूसरे को उसने एक हाथ से गर्दन पकडकर दीवार से दे मारा और तीसरे के चाकू को अपने घुटने से जमीन पर गिरा कर एक झटके में उसकी कलाई मोड दी। Ira स्तब्ध खडी थी, जैसे उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि ये सब इतनी जल्दी और इतनी सफाई से कैसे हो गया। उसकी सांसें तेज थीं, माथे पर पसीना, और दिल में ढेरों सवाल। उसने Aalam की तरफ देखा, और धीरे से पूछा, तुमने ये सब कैसे किया? और. तुम्हें Blue Paradise के बारे में कैसे पता है? Aalam ने एक पल को उसकी आंखों में देखा, मुस्कुराया, और अपनी जैकेट की जेब से एक छोटी- सी USB निकाली — उस पर सफेद टेप से लिखा था ‘Blue Paradise’. उसने फ्लर्टिंग अंदाज में कहा, तुम्हारी एक USB में सेव था Mission Blue Paradise. मैंने वैसे ही पूछ लिया. तुम तो डर ही गई। Ira ने फुर्ती से USB उसके हाथ से छीनी और बिना पलटकर कहा, ये कुछ नहीं. बस एक fashion studio है। Aalam ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आंखों की कोनों में जो मुस्कान आई, वो Ira नहीं देख सकी — उसने मन ही मन इतनी जोर से हँसी दबाई, जैसे किसी ने बच्चा बनकर कोई बडी चाल जीत ली हो।
Ira बिना कुछ बोले बाहर निकल गई, और Aalam उसके साथ- साथ। रास्ते भर दोनों के बीच एक अजीब सी चुप्पी रही — न Ira ने कुछ पूछा, न Aalam ने कोई सफाई दी। लेकिन उनके बीच जो silence थी, वो किसी तूफान से पहले की शांति जैसी थी। घर पहुँचकर Ira ने बस दरवाजा खोला और अंदर चली गई, Aalam भी उसके पीछे। बाहर का अंधेरा अब गहरा हो चुका था, लेकिन दोनों के बीच की कहानी बस शुरुआत ले रही थी। और अब, ये सवाल कि“ Aalam कौन है? — Ira के जहन में एक जहर बन कर घर करने लगा था. और Aalam अब भी वही था — मस्त, मौजी, और हर जवाब को हँसी में छुपाकर रखने वाला।
जैसे ही दोनों घर के पास पहुँचे, Ira ने एक गहरी साँस लेते हुए पूछा, वैसे एक बात बताओ. तुम्हारे ये आठ पैक्स कहाँ से आए? तुम्हारा तो काम बैठकर लैपटॉप चलाना और दुकान संभालना है न? Aalam ने हँसते हुए कॉलर ठीक किया और बोला, Arey madam, दुकान पर बैठा हूँ तो क्या दिल बैठा लूँ? Gym रोज जाता हूँ. और हफ्ते में तीन बार shadow practice भी करता हूँ, body toh maintain रखनी पडती है न. कोई भी angle से देखकर ना कहे कि ये लडका हल्का है। Ira ने हँसते हुए सिर हिलाया, लेकिन उसकी नजरें जैसे पहली बार Aalam के अंदर झांकने लगी थीं।
Aalam ने मस्ती के अंदाज में उसकी तरफ देखा और बोला, वैसे इतनी तारीफ कर ही रही हो, तो चलो आज की बहादुरी की खुशी में एक कॉफी हो जाए? Ira ने तुरंत मना किया, नहीं Aalam, अभी नहीं. रात काफी हो गई है। Aalam ने आंखें सिकोडकर मुस्कराते हुए कहा, Acha. फिर मैं जबरदस्ती उठा के ले जाऊँ क्या? वैसे तुम जैसी लडकी को कंधे पर उठाकर भागना कोई बुरा सपना तो नहीं. Ira ने पहले आँखें तरेरीं, लेकिन फिर हँसते हुए हार मान ली, ठीक है, लेकिन सिर्फ़ एक कॉफी. और ज्यादा smart बने तो मुँह तोड दूँगी।
दिल्ली की वो कॉफी शॉप, जो रात दो बजे तक खुली रहती थी, अब उनके कदमों की आहट महसूस कर रही थी। वो दोनों अंदर पहुँचे — Ira ने black coffee ली, Aalam ने hazelnut cappuccino — और फिर दोनों एक कोने की table पर बैठ गए। Ira अब थोडी relaxed थी, और Aalam अपने usual flirty मूड में। उन्होंने म्यूजिक की धीमी बीट्स के बीच एक- दूसरे से छोटी- छोटी बातें कीं — Ira ने बताया कैसे उसने खुद को tech की दुनिया में डुबो दिया, और Aalam ने मस्ती में कहा, Tech से पहले दिल hack करना आता था. पर अब बस pendrive बिकती है।
लेकिन तभी Aalam की नजर दरवाजे से अंदर आते एक चेहरे पर पडी — उस शख्स को देखते ही उसका चेहरा तन गया, आंखें चौडी हो गईं। Ira अभी तक कुछ समझ नहीं पाई थी, लेकिन Aalam की निगाहें अब केवल उस अजनबी पर टिकी थीं, जिसने दरवाजे से प्रवेश किया. और हल्की मुस्कान के साथ उसी कॉफी शॉप की दूसरी तरफ बैठ गया।
वो कौन था?
क्या वो Ira के लिए आया था? या Aalam के अतीत का कोई साया था जो अब सामने आ गया था?
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
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The Aalam*
Chapter 6 : अधूरा सच
पिछली रात Ira और Aalam की पहली कॉफी डेट बनती तो एक खूबसूरत याद, लेकिन सब कुछ तब बदल गया जब कॉफी शॉप के दरवाजे से एक जाना- पहचाना चेहरा दाखिल हुआ — Aalam का पुराना कॉलेजमेट Rohit और उसके साथ Ananya Singh. वही अनन्या जिससे Aalam की चुपचाप शादी हुई थी और फिर दोनों अलग हो गए थे। Ira को अभी तक कुछ पता नहीं था, लेकिन जैसे ही Ananya की नजर Aalam पर पडी, वो गुस्से से कांपती हुई उनकी टेबल तक आ पहुँची — और वहीं शुरू हुआ वो तूफान, जो Ira की जिंदगी को भी बदलने वाला था।
Ananya ने बिना भूमिका के, Ira की आंखों में आंखें डालकर सीधा कहा, तुम जानती भी हो ये कौन है? Ira चौंक गई, और Aalam, जो अब तक मुस्कुराता रहता था, एकदम गंभीर हो गया। ये वही है जिसने मुझसे झूठ बोलकर शादी की, मेरे घरवालों की इजाजत के बिना, और फिर सबके सामने जब सच आया, तो मुझे छोडकर चला गया। Ira अब भी स्तब्ध थी — उसने Aalam की तरफ देखा, जैसे उसकी आंखों से जवाब खींचना चाहती हो, लेकिन Aalam की नजरें नीचे थीं। Ananya अब और तल्ख हो चुकी थी —“ इसने मुझे अपने मासूम चेहरे और मीठी बातों से फँसाया, और फिर जब सब पता चला, तो मुझे ही दोषी ठहराया गया। आज तक मैं अकेली सब झेलती रही, और ये देखो. यहाँ बैठा किसी और को अपना बना रहा है।
Ira अब खुद को रोक नहीं सकी — उसने धीमे लेकिन सख्त स्वर में पूछा, Aalam, क्या ये सब सच है? Aalam ने गहरी सांस ली, और पहली बार उसकी आवाज में मजाक नहीं, एक भारी सच था। हाँ Ira, मैंने उससे शादी की थी. लेकिन जो कहानी तुम सुन रही हो, उसमें सिर्फ एक पक्ष है। और मैं तुम्हें पूरा सच बताऊँगा. पर अभी नहीं, यहाँ नहीं। Ananya ने कटाक्ष के साथ कहा, सच? तुम्हारा कोई सच होता ही नहीं Aalam. सिर्फ कहानियाँ होती हैं, जो तुम्हारी आंखों से शुरू होती हैं और धोखे पर खत्म।
Ira ने कुछ नहीं कहा, बस उठ खडी हुई। उसकी आंखों में सवाल थे, लेकिन मुँह पर सन्नाटा था। Aalam ने चुपचाप बिल चुकाया और दोनों बाहर निकल गए, लेकिन अब उनके बीच जो चुप्पी थी, वो पहली बार डरावनी लग रही थी। सडक पर चलते वक्त Ira ने धीमे से कहा, तुम्हारे अतीत ने आज मुझे हिला दिया है, Aalam. उम्मीद है तुम्हारे पास जवाब होंगे. सही वाले।
Ananya की जहर उगलती बातें Ira को अंदर तक हिला गई थीं, लेकिन उससे ज्यादा असर Aalam पर हो रहा था। उसकी आंखें अब भी शांत थीं, लेकिन वो शांति किसी तूफान से कम नहीं थी। Ananya का हर शब्द जैसे पुरानी यादों को चीर कर बाहर निकाल रहा था। और तब Aalam ने आखिरकार चुप्पी तोडी —" Ira, जो तुमने सुना वो उसका सच है. मेरा नहीं। सच ये है कि Ananya ने मुझसे शादी की मांग की थी, अपने परिवार के खिलाफ जाकर। मैं पीछे नहीं हटा, लेकिन जब सबके सामने बातें खुलीं, तो वो खुद पीछे हट गई. और फिर मुझे ही दोषी ठहराया गया।
Ananya कुछ कहने ही वाली थी, तभी उसके साथ खडा Rohit आगे बढा और Aalam के करीब आकर बोला, इतना सच्चा है तू तो एक काम कर. मर्द है न? चल, मुझसे एक fight कर के दिखा। यहां बातों से नहीं, हाथों से फैसला होता है। Aalam हल्का मुस्कुराया और बोला, मुझे किसी को खुद पर साबित करने की जरूरत नहीं. और ना ही मैं सडकछाप लडाई करता हूँ। लेकिन Rohit रुकने वाला नहीं था। उसने आसपास बैठे लोगों की तरफ देखा और ऊँची आवाज में कहा, अगर डरता है तो सीधे मना कर दे. बहाने मत बना। चल एक गेम खेलते हैं। एक रेफ्लेक्स टेस्ट. अगर तेरे पास guts हैं तो।
Ira और बाकी लोग अब ध्यान से देखने लगे थे। Rohit ने वेटर को बुलाया और कहा, एक शराब का गिलास लाओ. एकदम भरा हुआ। Aalam अब भी चुपचाप खडा था। Rohit ने मेज पर एक खाली ट्रे रखवाई और दोनों को आमने- सामने खडा कर दिया। फिर बोला, गेम सिंपल है — दोनों अपने हाथ में गिलास पकडेंगे। कोई काउंटडाउन नहीं होगा। जब भी किसी को लगे कि अब फेंकना है, वो फेंकेगा. सीधा सामने वाले पर। बस रिफ्लेक्स का खेल है।
Aalam ने एक पल के लिए Ira की तरफ देखा, उसकी आंखों में सवाल थे, मगर कोई डर नहीं। उसने गिलास उठाया — बिना हिचकिचाहट के। Rohit मुस्कुराया, यही देखना चाहता था. चल अब देखते हैं कौन ज्यादा तेज है।
भीड अब चुप थी। Aalam और Rohit आमने- सामने खडे थे — दोनों के हाथ में शराब का भरा हुआ गिलास. आँखें सामने वाले की हर हरकत पर टिकी हुई थीं। हवा में एक अजीब- सा तनाव था, जैसे बिजली कडकने वाली हो। Ira की नजरें अब सिर्फ Aalam पर थीं — और वो पहली बार उसे यूं फोकस में देख रही थी जैसे कोई वॉरियर लडाई से पहले ध्यान लगाता है।
और फिर — एक फडफडाहट, एक हलचल — और गिलास हवा में उडता है!
और फिर — एक हल्की- सी फडफडाहट, एक साँसों में छुपा हुआ इशारा — और गिलास हवा में उडता है! कमरे की हवा कुछ देर के लिए थम- सी जाती है। शराब का छींटा अब किसी एक चेहरे पर गिरने वाला है. लेकिन किसके? Aalam का चेहरा अब भी शांत है, Rohit की मुठ्ठी थोडी ढीली पडी हुई है, और Ira की आंखें हल्की- सी नम होकर उसी क्षण को पकडने की कोशिश कर रही हैं — मानो वो लम्हा ही तय करेगा कि Kiss पर भरोसा करना है, और किससे बचना है। मगर सच तो यह है. कि कई बार असली चोट शराब की नहीं, सच्चाई की होती है — और आज शायद किसी का चेहरा भीगने से ज्यादा. किसी का नकाब उतरने वाला है।
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
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Chapter 7: खेल के उस पार
पिछले एपिसोड में जब Rohit ने“ Reflex Game” का ऐलान किया, तो भीड थोडी उत्साहित थी और Ira भीतर से बेचैन। लेकिन जैसे ही शराब से भरा गिलास हवा में उछला और Aalam ने अपनी जगह से हलका सा झुक कर बचाव किया — पूरे माहौल में एक सरसराहट दौड गई। शराब सीधे Rohit की सफेद शर्ट पर गिर चुकी थी। भीड में हल्की हँसी की फुसफुसाहटें गूँजने लगीं, और Aalam. वो अब भी मुस्कुरा रहा था, जैसे ये सब महज warming- up हो।
Rohit के चेहरे की मुस्कान झुलस गई। ये तो बस पहला राउंड था, उसने कहा, अब देखते हैं असली गेम में कौन जीतता है।
खेल शुरू हुआ — दस राउंड तय किए गए। एक ट्रे पर शराब के दो गिलास रखे जाते, दोनों खिलाडी आमने- सामने बैठते, कोई काउंटडाउन नहीं, बस आँखें और हाथ. और फिर रिफ्लेक्स।
Round दो — Aalam की मस्ती भरी आंखों में हल्की चमक. और फिर पलक झपकते ही गिलास Rohit के चेहरे पर।
Round तीन — Rohit जल्दी करता है, लेकिन Aalam इतनी फुर्ती से कूदकर बच जाता है कि Rohit खुद भी चौंक जाता है. और जवाबी हमले में फिर से शराब!
Round चार, पाँच, छह. भीड अब Aalam के साथ हो गई थी। हर बार Rohit की हरकत पहले होती, लेकिन गिलास उसी पर गिरता।
Round सात से नौ तक — जैसे Aalam उसके दिमाग को पढ रहा था। Ira अब भीगी आंखों से देख रही थी — ये कोई आम लडका नहीं था, ये कोई और ही खेल खेल रहा था। Ananya सन्न थी। उसकी बातों के बाद Aalam अब किसी हीरो की तरह खडा था।
Round दस — Rohit गुस्से से काँप रहा था, शराब में तरबतर, और Ego से भरा। उसकी मुट्ठियाँ भिंच चुकी थीं। Aalam ने हल्के से कहा, तू थक गया है Rohit. अब game छोड दे। लेकिन यही वाक्य था जो Rohit के अंदर की आग को हवा दे गया।
Game तो अब शुरू होगा! वो चिल्लाया और फिर तुरंत फोन निकाला, किसी को Call किया और बोला, भाई. अब तेरा number है। जल्दी आ, एक ‘खास’ गेम खेलना है।
भीड पीछे हटने लगी, Ira की साँसें भारी होने लगीं. और Aalam?
वो अब भी वहीं खडा था — मुस्कुराता हुआ, लेकिन अब उसकी आँखों की चमक बदल चुकी थी।
Rohit की Call पर कुछ ही मिनटों में कॉफी शॉप की हवा फिर से भारी हो गई। दरवाजे की घंटी बजी और अंदर आए दो नए चेहरे — एक लंबा- चौडा लडका जिसकी चाल में गुरूर और नजरों में चालाकी थी. उसका नाम था Rishi। साथ में थी उसकी Girlfriend Nidhi, जो आंखों से ही लोगों को कमजोर कर देने वाली मुस्कान रखती थी, लेकिन अंदाज में कुछ खतरनाक था। दोनों अंदर आए और Rohit ने उन्हें इशारा किया, बस, अब मजा आएगा। इस बार Coffee Test। Nidhi ने मुस्कुराकर कहा, Game की जगह चाय पार्टी बन गई क्या? लेकिन Rishi गंभीर था। उसकी नजरें सीधे Aalam पर जमी थीं। जैसे उसे कहीं पहले देखा हो, लेकिन वो याद नहीं आ रहा हो।
Rishi और Aalam के बीच हल्की बहस शुरू हुई। Rishi ने ताना मारते हुए कहा, तू reflex में तेज है या बस किस्मत अच्छी है? Aalam ने हँसते हुए कहा, तेरी तरह दूसरों के बल पर नाम नहीं बनाया. जब तुझे कोई hurt करता है, तू भाई को बुलाता है. मैं खुद लडता हूँ। Rishi की मुट्ठियाँ कस गईं। तभी वेटर दो steaming कप Coffee के साथ आया — एक intense, कडवी सी खामोशी पूरे माहौल में छा गई। इस बार खेल और भी खतरनाक था — क्योंकि शराब तो सिर्फ कपडे खराब करती थी. गर्म कॉफी तो जला सकती थी।
पहला राउंड शुरू हुआ। Aalam और Rishi आमने- सामने बैठे थे, दोनों के हाथ में कॉफी का कप था। Ira, Ananya, और बाकी सब सांस रोके देख रहे थे। अचानक — Rishi ने हल्की- सी हरकत की, Aalam ने भी अपना हाथ उठाया. और दोनों के हाथ एक साथ चले। कप हवा में. और Aalam की सफेद शर्ट पर कॉफी की एक गर्म बूंद गिरी। Ira हल्के से चीखी, लेकिन Aalam ने गर्दन हिलाई —“ मैं ठीक हूँ। पूरी भीड को लगा Aalam हार गया. लेकिन फिर जैसे ही सबने Rishi की तरफ देखा — उसकी कलाई काँप रही थी, और उसकी आँखों में कुछ डर- सा था। वो थोडा पीछे हटा, और मुस्कुराते हुए बोला, Not bad. बहुत सालों बाद किसी ने मुझे almost हराया।
अब बारी Aalam की थी। उसने बिना हिचक, अगले राउंड में अपनी चाल चलाई। Rishi की पलकों ने हल्की सी हरकत की — और फिर, एकदम में Aalam का हाथ बिजली- सा चला। कप उड गया, और Rishi के कंधे पर गर्म कॉफी गिर पडी। भीड में हडकंप मच गया। Rishi ने दर्द से कराहते हुए कुर्सी से झटका लिया और अपनी बांह को पकडा। Ananya और Nidhi दोनों उठीं, लेकिन उससे पहले एक जोरदार चीख पूरे हॉल में गूँज उठी —" आह!
सब चौंके। चीखने वाला कोई और नहीं, Rishi ही था।
सन्नाटा छा गया।
Ira Aalam के करीब आई —“ Aalam. अब ये खेल बनता जा रहा है कुछ और। Aalam ने उसकी तरफ देखा, एक हल्की सी मुस्कान, और फिर सिर घुमाकर Rishi की ओर देखा —“ अब तू क्या करेगा? भाई को बुलाएगा या. Boss को? Rishi चुप था, लेकिन उसकी आंखों में एक भय था. ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई ऐसा नाम लेने से डर रहा हो जो पूरे गेम को बदल सकता है।
क्या अगली बार जो आने वाला है. वो सिर्फ खेल का हिस्सा होगा या Aalam के अतीत की एक परत और खुलेगी?
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो* लाइक* जरूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढाता है!
और एक छोटा सा* कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
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8 - अधूरी कॉल, अधूरे जवाब
Rishi की आंखों में नाराजगी अब निकली हुई गर्म कॉफी के झटके से और गहरी हो गई थी। चारों ओर अजीब सी खामोशी फैल गई थी—हर कोई यह देख रहा था कि एक लडके ने दूसरे पर कॉफी इसलिए फेंकी क्योंकि वह उसे और उसकी दोस्ती के अर्थ से भिडना चाहता था। पर Aalam था कि एकदम बेपरवाह स्कूल वाला टीन—जैसे ये अक्सर होता रहता हो—बस मुस्कुराता चला गया, उसकी शर्ट पर ढकेल दी गई कॉफी भी अब फीकी लग रही थी।
Rishi ने अपनी कलाई पर दबाव महसूस किया। उसके मन में ये सवाल चल रहे थे—आखिर किसने उसे पीछे छोड दिया, कौन था Aalam, जो इस साहस के साथ उस शर्मनाक खेल को पल- भर में पलट सकता था? उसकी कलाई काँप रही थी—ये काँप उन सवालों का प्रतिफल थी जो वह खुद से नहीं पूछ पा रहा था।
वह अचानक अपनी जेब से फोन निकाले और अनाडी- सा नाम देखा—‘Bhaiya’। उसका हाथ काँपा, आंखों में एक उम्मीद जग रही थी—अब भाई की आवाज ही उसने अब तक टटोली नहीं थी। उसने स्क्रीन पर कई बार Call किया—बीच- बीच में निगाहें उठाकर Aalam के चेहरे की मुस्कुराहट देखी—इस बार उसके अंदर गहरी कटुता थी। फोन स्क्रीन पर ‘रिंग’. फिर ‘रिंग’. ‘रिंग’. लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उसने दोबारा उस नंबर को डायल किया—और फिर ‘रिंग’, ‘रिंग’, ‘रिंग’. लेकिन अजीब बात यह थी कि जवाब किसी ने नहीं दिया। कोई आवाज नहीं थी। कोई उठने का नाम नहीं ले रहा था। धडकनें तेज हो गईं। Rishi ने फोन गिरा दिया—“ अब तक मेरे भाई ने फोन क्यों नहीं उठाया? —एक जबरदस्त गुस्सा उबलने लगा।
चलो बाहर चलते हैं, उसने Nidhi से कहा। उसकी गुस्से से सुस्ती हुई आवाज थी। उसने Nidhi का हाथ कसकर पकड लिया और बाहर निकल गया।
भीड में खामोशी छा गई थी, कोई भी बहस नहीं कर रहा था, क्योंकि सब महसूस कर रहे थे—यह जंग अभी खत्म नहीं हुई थी। लोग धीरे- धीरे हटने लगे। Irakनफ, Ira अब तक Aalam की बात सुनने के लिए बेताब थी—उन्हें यह देखने की जिज्ञासा थी कि आखिर यह लडका है कौन?
Son सन्नाटे के बीच उसने Aalam के पास कदम बढ़ाए, उसकी आंखों में हल्की चिंता थी। Tumhare reflex. ये कैसे? उसकी आवाज थोडी काँपी हुई थी, पर सवाल साफ था।
Aalam ने पहले धीरे से सिर हिलाया, उसकी मुस्कान ठीक उसी तरह थी—हल्की, शरारती, और बेहद आत्मविश्वास से भरी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, जब dil mein fire ho. tenniya kuch bhi achhi speed se sekha jaa sakta hai.
लेकिन Ira ने आंखें तरेरीं—उसके सवाल का जवाब चाहिए था। वो जानना चाहती थी—ये लडका सच में कौन था, और इसकी बातें कितनी हकीकत और कितनी fiction थीं?
Aalam ने नजदीक आते हुए कहा, एक मज़ाक है. लेकिन अगर चलती speed में किसी को भी करा दूँ, तो उसमें मज़ा ही मज़ा होता है।
लेकिन Ira का चेहरा चुभ रहा था—वो प्यार नहीं, पर जिज्ञासा का सवाल बना हुआ था।
तभी Aalam ने एक नटखट फ्लर्टी अंदाज अपनाया—उसने Ira की तरफ नजरें झुकाते हुए कहा, Listen, मुझे तुम्हें सब बताना है. लेकिन एक वादा चाहिए।
Ira ने पहले हाथ पीछे खींचा, फिर झट से मुस्कुराई लेकिन धीमी आवाज में बोली, क्या promise चाहिए?
बस उसके इंटोंन में थोडी उम्मीद थी, थोडी अपेक्षा भी।
Aalam ने झुककर धीरे से कहा, एक kiss दे दो—एक sweet, fast kiss—मैं तुम्हें सारी सच बातें बताऊँगा।
Ira की आंखें अभी भी सस्पेंस से भरी थीं, लेकिन उसके चेहरे पर गुस्सा ढल गया। वह एक कदम पीछे हट गई। क्या ये. serious बात है?
Aalam ने एक पल के लिए गुड्डिया की तरह चुप हो कर। फिर एक पल मुस्कराते हुए सिर हिलाया—बस एक आम हँसी—और बोला, यह मेरी शर्त है। अगर तुम सच जानना चाहती हो, तो पहले थोडी boundary cross करनी होगी।
Ira ने उठ कर बताया, मैं नहीं आऊँगी. and I deserve a better explanation than flirting right now.
और फिर वो वहाँ से चल दी— उसकी चाल में इतनी सख्ती थी कि सारे सवालों की आग उसमें बुझ गई।
Aalam वहीं खडा रहा, उसकी आँखों में मुस्कुराहट अभी भी हल्की थी, लेकिन अब उसकी आँखों में डूबेला असमंजस भी था—मुस्कुराहट जैसे अदूर तक खिंच गयी थी, जैसे कोई खिडकी खुली हो. जिसमें खामोशियाँ ही खामोशियाँ फैली हों।
हवा ने एक बार फिर दर पख था दी. जैसे इस silence में कोई कुछ कह रहा हो।
अगले दिन, Ira अपने रोज के रूटीन की तरह कॉफी शॉप पहुँची। वो जानती थी कि कल रात जो कुछ हुआ, वो मामूली नहीं था — लेकिन Aalam की वो मस्ती भरी बातों में भी कोई गहराई छुपी हुई थी। वो सोच में डूबी थी, एक सवाल मन में उठ रहा था — क्या Aalam वाकई वैसा है जैसा दिखता है?
अभी उसने ऑर्डर देकर एक कोना पकडा ही था कि दरवाजे से Ananya की एंट्री हुई। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह घमंड था, चाल में वही ऐंठन — लेकिन जैसे ही उसकी नजर Ira पर पडी, वो सीधा उसकी टेबल पर आ गई। बिना कोई भूमिका बनाए, उसने सीधा हमला बोल दिया —“ तुम्हें पता है, Aalam ने मेरे साथ क्या किया था? उसने झूठ बोलकर मुझसे शादी की थी. और फिर उस सबको छोडकर भाग गया!
Ira चौंकी नहीं — उसने शांति से सिर उठाकर उसकी तरफ देखा। शायद तुम्हारा अनुभव अलग रहा होगा, लेकिन जो मैंने Aalam को देखा है. वो ऐसा इंसान नहीं है।
Ananya की आवाज और तीखी हो गई —“ तुम उसे जानती ही कितना हो? वो एक धोखेबाज है, ड्रामा करता है शरीफ बनने का। लेकिन उसके पीछे का सच. वो बहुत गंदा है। मैं उसकी बीवी रह चुकी हूँ!
Ira का चेहरा अब गंभीर था — लेकिन वो भावनाओं में नहीं बह रही थी। उसने सधी हुई आवाज में कहा, Ananya, तुम्हारा दर्द तुम्हारा सच हो सकता है. लेकिन वो मेरा सच नहीं है। मैं Aalam को एक दोस्त की तरह जानती हूँ, और मुझे उस पर भरोसा है।
Ananya की भौंहें तन गईं —“ तुम्हें बाद में पछताना पडेगा. ये लडका तुम्हें भी धोखा देगा, जैसे मुझे दिया!
Ira अब खडी हो चुकी थी। उसकी आंखों में वो सच्चाई झलक रही थी जो केवल अनुभव से आती है। अगर Aalam ने तुम्हें चोट दी, तो माफ करना. लेकिन मैं किसी की कही बातों पर आँख बंद करके यकीन नहीं करती। मैं खुद सच देखना चाहती हूँ, और अभी तक जो देखा है. उसमें Aalam झूठा नहीं लगा।
अनन्या गुस्से में फुफकारती हुई कॉफी शॉप से निकल गई। Ira वहीं खडी थी, लेकिन अब उसके मन में एक नई स्पष्टता थी।
अब सवाल ये नहीं था कि Aalam कौन है.
सवाल ये था कि Ira अब Aalam के कितने करीब है, और वो सच्चाई से कितनी दूर?
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो* लाइक* जरूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढाता है!
और एक छोटा सा* कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
आपका अपना
The Aalam*
Chapter 9: देर रात की दस्तक
पिछली रात की कडवी बहस के बाद Ira का मन अशांत था। Aalam की बातें, Ananya के इल्जाम, और उसकी अपनी भावना — ये सब कुछ एक गहरी उथल- पुथल बन चुके थे। उसी बेचैनी में उसने देर रात ग्यारह: बत्तीस बजे Aalam को Call लगाया। दूसरी बेल पर ही Call उठ गया।
अरे वाह. Ira madam इस वक्त Call कर रही हैं? क्या बात है, नींद नहीं आ रही, या मेरी याद ज्यादा सता रही है? Aalam का usual flirty अंदाज था।
Ira की आवाज थोडी गंभीर थी —“ Aalam, एक जरूरी बात है. अभी पास वाले हिलटॉप होटल आ सकते हो? मैं यहीं हूं।
Aalam एक पल को चौंका। Hotel? इस वक्त? तुम अकेली हो वहाँ?
हाँ, Ira ने जवाब दिया, और ये कोई रोमांटिक Call नहीं है, जरूरत है।
अब तो और दिलचस्प हो गया मामला, Aalam ने मुस्कुरा कर कहा, बस दस मिनट, और मैं वहाँ।
ठीक दस मिनट बाद Aalam बाइक से होटल के सामने पहुँचा। ब्लैक जैकेट, messy बाल, और usual confident बॉडी लैंग्वेज के साथ, वो रिसेप्शन पार करता हुआ ऊपर पहुँचा। Ira एक कोने के सोफे पर बैठी थी, माथे पर चिंता की रेखाएँ थीं। Aalam ने उसके पास पहुँचते हुए कहा, बोलो princess, इतना तडपाया क्यों? कहो, क्या ख्वाहिश है?
Ira ने उसकी तरफ देखा, सीधे सवाल दागा —“ Aalam, मुझे तुमसे पैसे चाहिए. अठारह हजार रुपए।
Aalam की मुस्कान थोडी जमी। वो एक पल को रुका —“ Wait. what?
हाँ, Ira ने दोहराया, मुझे अभी अठारह हजार रुपए की जरूरत है, बहुत अर्जेंट है। कल सुबह तक चाहिए.
Aalam एकदम शांत हो गया। ये उस Ira से बिल्कुल अलग था जो अभी तक सिर्फ बातों में उलझी रहती थी, या जो Ananya के आरोपों से बुरी तरह तिलमिलाई थी। Aalam ने हल्के से पूछा, किसलिए?
Ira ने नजरें चुराते हुए कहा, मैं नहीं बता सकती. बस इतना समझ लो कि मेरी एक दोस्त की मदद करनी है, जो बहुत बुरी हालत में है।
Aalam ने उसका चेहरा देखा — उसमें झूठ का कोई निशान नहीं था, लेकिन सवाल बहुत थे।
और फिर उसने अपनी जैकेट की जेब से मोबाइल निकाला, कुछ सेकंड सोचा. फिर बोला,
अठारह हजार रुपए दूँगा Ira. लेकिन उसके बदले मुझे भी कुछ चाहिए.
Ira ने एक गहरी साँस ली —“ क्या चाहिए?
Aalam ने मुस्कुराकर कहा —“ सिर्फ एक चीज. सच।
Ira की आँखें नीची थीं, और होंठ सिले हुए। होटल की उस टेबल पर बैठे हुए Aalam ने हल्के से उसके हाथ पर हाथ रखा —" इतना तो बता दो Ira. ये पैसे किसलिए चाहिए? उसकी आवाज में मजाक नहीं था, बल्कि एक ऐसी गंभीरता थी जो Ira ने पहले कभी महसूस नहीं की थी।
Ira ने अपनी उंगलियों को चटकाया, जैसे कोई फैसला ले रही हो। फिर एक गहरी सांस लेकर उसने कहना शुरू किया —
सुबह. सब कुछ अजीब तरीके से शुरू हुआ। सबसे पहले तो मेरी बहस हुई Ananya से. तुम्हें याद है, मैंने बताया था न, कल कॉफी शॉप में उससे टकरा गई थी?
Aalam ने सिर हिलाया —“ हाँ, और उसने तुम्हें मुझसे दूर रहने की सलाह दी थी?
बिलकुल। लेकिन उससे बहस के बाद मेरा मूड बहुत खराब हो गया। और तभी मेरे कुछ पुराने दोस्त—college के—मुझे फोन कर के बोले कि आज पार्टी कर रहे हैं, कहीं बाहर मिलते हैं। मुझे लगा शायद मूड बदल जाए, तो मैं चली गई।
Aalam ध्यान से सुन रहा था, उसने बीच में टोका नहीं। Ira का लहजा बदलने लगा था, वो अब थोडी तकलीफ में बोल रही थी।
जब मैं पहुँची तो वहाँ आठ- दस लोग थे। सबने खाना ऑर्डर किया, मस्ती शुरू हो गई, और मैं बस सुनती रही। एक लडका था — Saurabh, वो मेरे college में senior था। शुरू से ही उसके तेवर कुछ अलग रहते थे. बातों में जहर, मगर दिखावे में मिठास।
Aalam की आँखों में हल्की चमक आई —“ अच्छा. वो hero type?
Ira ने हल्की हँसी में जवाब दिया —“ नहीं. ज्यादा ही overacting करता था। लेकिन आज उसने जो किया. उसने सारी हदें पार कर दीं।
वो थोडी रुकी, फिर बोली —
जब सबने खा लिया, मस्ती कर ली, और उठने लगे, तो waiter आया और बिल रख दिया — रुपये अठारह हजार का। मैंने सोचा अब सब मिलकर शेयर करेंगे, लेकिन Saurabh अचानक सबके सामने बोला — ‘Arey, Ira toh treat de rahi hai! Usne toh kal mujhe message भी किया tha party ke liye. ’”
Aalam चौक पडा —“ तुमने message किया था?
Ira ने गुस्से से सिर हिलाया —“ नहीं! बिल्कुल नहीं! मैंने किसी को भी message नहीं किया था। उसने सबके सामने झूठ बोल दिया, और सब हँसने लगे। कुछ ने बोला ‘थैंक्स Ira’, कुछ ‘you’re sweet’, और सब हँसते हुए बाहर निकल गए। कोई रुका भी नहीं। मैं अकेली खडी रह गई, और waiter बार- बार घूर रहा था।
Aalam की मुट्ठी भींच गई थी। उसके अंदर एक अजीब गुस्सा उबल रहा था, लेकिन उसने खुद को रोका।
मैंने बहुत कोशिश की समझाने की, लेकिन waiter ने साफ कहा — ‘मैम, आपके नाम से table बुक थी, तो payment भी आपको ही करनी पडेगी। ’ मेरे पास कार्ड था, लेकिन लिमिट कम थी, और बाकी सब online चला गया था। अब तक एक भी दोस्त ने message तक नहीं किया, sorry तक नहीं कहा। बस. वही एक रास्ता था — तुम।
Ira ने Aalam की तरफ देखा — उसकी आंखों में गुस्सा भी था और शर्म भी। जैसे खुद पर गुस्सा हो कि उसने इतना भरोसा किया उन लोगों पर।
Aalam चुप था। उसके होठों पर अब मुस्कान नहीं थी। वो उठा, रिसेप्शन पर गया, और अपने फोन से scan कर रुपये अठारह हजार का बिल चुका दिया। वापस आकर उसने Ira के सामने खडे होकर कहा —“ अब debt नहीं, सिर्फ एक कर्ज बाकी है।
Ira चौंकी —“ क्या?
Aalam ने मुस्कुराकर कहा —“ जो दर्द तुमने सहा, उसका हिसाब उन लोगों से लेना है. और वो मैं खुद लूंगा।
Ira कुछ कहने वाली थी, लेकिन उसकी आवाज रुक गई। Aalam की आंखों में अब वो usual flirt नहीं था — वो गहराई थी, वो seriousness थी जो उसने आज पहली बार देखी।
Ira ने सिर झुकाया —“ Thank you, Aalam.
Aalam ने फिर वो मस्ती वाला अंदाज अपनाया —“ Ek kiss toh banta hai. chalo ab toh अठारह hazaar ka tohfa diya hai।
Ira ने नजरें तरेरी —“ Phir wahi flirting?
Aalam हँसते हुए बोला —“ Adat se majboor hoon. aur tumhari smile ki bhi aadat lag gayi hai।
Ira ने पहली बार हल्का सा मुस्कुराया।
लेकिन जैसे ही वो दोनों होटल से बाहर निकले.
एक काले रंग की कार, बिलकुल चुपचाप वहाँ रुकी थी। अंदर बैठा एक आदमी किसी को फोन पर कह रहा था
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो* लाइक* जरूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढाता है!
और एक छोटा सा* कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
आपका अपना
The Aalam*
🖋️ Chapter 10: "तुमने मेरा पैर तोड़ दिया!"
Ira और Aalam अब अक्सर साथ वक़्त बिताने लगे थे — चाहे कॉफी पीना हो या कहीं टहलने जाना। उनके बीच की दोस्ती अब सहज होती जा रही थी, लेकिन Ira अब भी Aalam को सिर्फ़ एक दोस्त मानती थी। एक दिन Aalam उसे अपनी एक पसंदीदा, शांत सी जगह पर ले गया जहाँ पेड़, झील और टूटे-फूटे झूले थे।
Aalam ने झूले पर बैठते हुए हल्के से मुस्कराया, “आओ Ira, चलो ज़रा बचपन में लौट चलें।” Ira ने ना-नुकुर की, लेकिन फिर बैठ गई। झूला झूलने लगा। पहले धीरे, फिर Aalam ने ज़रा मस्ती में आकर थोड़ा ज़ोर से झटका दे दिया।
“Woooo… stop it, Aalam!” Ira ने हँसते हुए चीखा।
लेकिन अगला झटका इतना तेज़ था कि Ira का संतुलन बिगड़ गया। वह झूले से सीधे ज़मीन पर गिरी।
“Aahh!” उसकी चीख ने सब कुछ थाम दिया। दर्द और हैरानी, दोनों उसके चेहरे पर एक साथ थे।
Aalam तुरंत उसके पास भागा — “Ira! क्या हुआ?”
Ira की आंखों में आंसू थे, “पैर… शायद मोच आ गई है…”
Aalam ने झुकते हुए उसका पैर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन Ira ने गुस्से से कहा, “Don't touch! मुझे अकेला छोड़ दो।”
Aalam ठिठक गया, और जैसे ही उसने हाथ हटाए, Ira फिर से ज़मीन पर गिर पड़ी। अब तक उसका चेहरा लाल हो चुका था — दर्द और अपमान दोनों की वजह से।
बिना कुछ कहे Aalam ने तुरंत अपने फोन से डॉक्टर को कॉल किया, उसकी आवाज़ में अब वो मस्ती नहीं थी, बल्कि एक गंभीर घबराहट थी — “सर, जल्दी आइए… बहुत दर्द में है।”
कुछ ही देर में डॉक्टर आया, Ira का पैर चेक किया, और सिर हिलाते हुए बोला — “मोच है। कल तक चलना नामुमकिन है।”
Ira अब चुप थी। उसकी आंखें गीली थीं और होंठ सख्त।
Aalam ने कहा — “कोई बात नहीं, हम व्हीलचेयर मंगा लेंगे।”
Ira ने तमतमाकर उसकी तरफ देखा — “व्हीलचेयर?! Seriously?”
Aalam ने हल्की सी हँसी में कहा — “क्या करूं, डॉक्टर ने मना कर दिया चलने को… मैं तो carry कर सकता हूँ लेकिन तुमने खुद ही मना किया था…”
Ira अब फट पड़ी — “तुम्हारे कारण ही तो ये सब हुआ है! तुम्हारी बेवकूफी, तुम्हारी मस्ती… तुम्हारी हरकतों की वजह से मैं गिर पड़ी!”
अब तक डॉक्टर जा चुका था। Ira ने लड़खड़ाते हुए उठने की कोशिश की, फिर फोन निकालकर चुपचाप कैब बुक की, और Aalam से बिना एक शब्द कहे वहाँ से निकल गई।
Aalam बस उसे जाता हुआ देखता रहा — पहली बार शायद उसके मज़ाक का जवाब इतना भारी पड़ा था कि वो खुद भी चुप हो गया।
झील के पास फिर से सन्नाटा लौट आया। बस कुछ सूखी पत्तियाँ थीं, और टूटे झूले की मद्धम सी आवाज़…
क्या Ira सिर्फ़ गिर गई थी, या Aalam के लिए उसकी सोच भी कहीं अंदर से बदल गई थी?
Aalam उस पल को आसानी से नहीं भूल सकता था — Ira की भरी हुई आंखें, उसकी कांपती आवाज़ और वो चुप्पी जो जाते-जाते सब कुछ कह गई थी। आमतौर पर हँसी-मजाक में हर बात को हल्का बना देने वाला Aalam, आज पहली बार कुछ बोल ही नहीं पाया था। Ira के जाने के बाद, वो वहीं कुछ देर खड़ा रहा, झील की ओर देखता हुआ, जैसे कोई जवाब तलाश रहा हो… लेकिन जवाब अब Ira के साथ चला गया था।
थोड़ी देर बाद जब Aalam को होश आया, तो उसने तुरंत अपनी बाइक स्टार्ट की और Ira की बुक की हुई कैब को ट्रेस करना शुरू कर दिया। उसका दिमाग कह रहा था, "रुक जा, सब सही हो जाएगा," लेकिन दिल कह रहा था, "वो तुझे गलत समझ कर गई है, उसे दिखा कि तू कैसा है।"
दिल्ली की सड़कों पर हल्का अंधेरा उतर आया था। ट्रैफिक का शोर अब धीमा पड़ रहा था, लेकिन Aalam की बाइक की स्पीड Ira की कैब से मेल खा रही थी। वो ज़रा दूरी बनाए हुए चल रहा था, ताकि Ira को उसकी भनक न लगे। उसने देखा कि Ira की कैब एक सुनसान सी गली में मुड़ी और फिर एक बड़े से गेट के सामने जाकर रुकी।
Aalam थोड़ा पीछे रुका, और एक खंभे के पीछे से देखने लगा। Ira कैब से उतरी, उसका पैर अभी भी हल्का-सा झुका हुआ था, लेकिन वो सीधी खड़ी रही। उसने जल्दी से पेमेंट किया और गेट खोलकर अंदर चली गई।
Aalam अब पहली बार Ira का घर देख रहा था। ये एक बड़ा-सा मकान था — दो मंज़िल का, गेट के अंदर एक छोटा सा लॉन, और ऊपर चार खिड़कियाँ। लगता था कि घर में कई लड़कियाँ रहती होंगी।
Aalam के कान में उसकी एक पुरानी बात गूंज गई — "मैं अपनी चार सहेलियों के साथ रहती हूँ, अकेलेपन से डर लगता है।"
वो गेट के पास पहुँचा और कॉल बेल दबाने की हिम्मत नहीं हुई। उसकी नज़रें दरवाज़े की दरार से अंदर झांक रही थीं। तभी उसने देखा — Ira अंदर डाइनिंग टेबल पर बैठी थी, पैर पर बर्फ की पट्टी रखे हुए। चेहरा अभी भी गुस्से से लाल था।
Aalam ने वापस मुड़ते हुए एक बैग में खाना पैक करवाया। वो एक अच्छे होटल में गया था जहाँ Ira को उसका पसंदीदा पनीर तंदूरी और नान मिल सके। साथ में एक सादा-सा नोट भी लिखा —
"ना मैंने जानबूझकर गिराया,
ना तुमने ग़लती से सहा,
मगर कुछ लम्हों में जो टूटा,
वो दोस्ती का भरम था या भरोसे का आइना?"
Aalam ने बैग में खाना रखा, और धीरे से Ira के दरवाज़े के बाहर रख दिया। फिर उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ कदम पीछे हट गया।
Ira ने दरवाज़ा खोला, नज़रें नीची थीं, शायद उसे अंदाज़ा था कि बाहर कौन होगा। उसने खाना देखा, बैग उठाया, और Aalam को बिना देखे दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया — कोई शब्द नहीं, कोई इशारा नहीं, बस चुप्पी।
Aalam वहीं कुछ सेकंड तक खड़ा रहा, और फिर एक लंबी साँस छोड़कर बाइक की ओर बढ़ा।
“कमाल है… इतना कुछ किया और आखिर में सिर्फ एक दरवाज़ा बंद मिला,” वो मुस्कराने की कोशिश करता है, लेकिन उसकी मुस्कराहट में आज हँसी नहीं थी।
घर लौटते वक़्त भी उसका दिमाग वही सवाल दोहराता रहा — क्या Ira को यकीन दिलाना ज़रूरी था? या वक़्त खुद ही सब सुलझा देगा?
दूसरे दिन सुबह Aalam फिर से Ira के दरवाज़े के पास गया, लेकिन इस बार सिर्फ एक कागज लेकर — उस पर कुछ शायरी थी:
"ख़ामोश चेहरों की बातें होती हैं,
हर चुप्पी में सदायें होती हैं।
जो सामने है, वो सब नहीं होता,
कुछ अधूरी ख्वाहिशें परछाईं होती हैं।"
वो कागज़ उसने दरवाज़े के नीचे से सरका दिया और वापस चला गया।
Ira ने वो कागज़ देखा, पढ़ा… और पहली बार उसकी आँखें भीगी नहीं, बस ठहर गईं। शायद अब वो समझने लगी थी कि Aalam जैसा दिखता है, वैसा नहीं है।
उसी दिन दोपहर में Ira की सहेलियाँ घर वापस आईं — Meenal, Shruti, Divya, और Aanya। सबने Ira को बैठे देखा और पूछा, "क्या हुआ तुझे?"
Ira ने बस इतना कहा, “झूले से गिर गई… लेकिन शायद सिर्फ बाहर से नहीं, थोड़ा अंदर से भी…”
Meenal ने पूछा, “मतलब?”
Ira ने धीरे से मुस्कराते हुए कहा, “कुछ दोस्तीयाँ जो हम सोचते हैं कि कभी नहीं टूटेंगी, वो टूट नहीं भी सकतीं… लेकिन उनमें दरारें आ जाती हैं।”
Shruti ने पूछा, “Aalam से झगड़ा हुआ?”
Ira ने सिर हिलाया, “नहीं… मैं बस उसे समझ नहीं पाई।”
Divya बोली, “तो फिर माफ कर दो। आजकल ऐसे लड़के कहाँ मिलते हैं जो खाना दे जाएँ और ग़लती पर भी कुछ न कहें।”
Ira ने फिर से खामोशी ओढ़ ली।
उसी शाम Ira के मोबाइल पर एक मैसेज आता है — "शायद तुम्हें फिर से पार्क झूला नहीं झूलना चाहिए, लेकिन अगर कभी दिल झूले जैसा लगे, तो बता देना… मैं पकड़े रहूंगा इस बार।"
Ira ने पहली बार मोबाइल देखकर हल्की मुस्कान दी। जवाब नहीं भेजा… लेकिन जवाब शायद उसकी मुस्कान में छुपा था।
रात को फिर से Aalam Ira के घर के बाहर आया — इस बार सिर्फ चुपचाप देखने, कि वो ठीक है या नहीं। और इसी बार Ira ने पर्दा हटा कर खिड़की से बाहर देखा — उनकी नज़रें मिलीं। पहली बार बिना शब्दों के कुछ कहा गया।
शायद Ira का दिल अब Aalam को दोस्त से थोड़ा ऊपर देखना शुरू कर रहा था।
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लेकिन अब सवाल ये है…
क्या Ira वापस Aalam की जिंदगी में खुलकर लौटेगी, या ये लम्हा भी बस एक और अधूरा इंतज़ार बनकर रह जाएगा?
🙏 इस अध्याय को पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद!
🤔 आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
❤️ अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो *लाइक* ज़रूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढ़ाता है!
💬 और एक छोटा सा *कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढ़ता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
📢 चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
- आपका अपना
**The Aalam** ✍️
Chapter 11: जवाब उसी की जुबान में
एक दिन बीत गया. दो दिन. फिर तीन — मगर Ira की ओर से कोई कॉल, कोई मैसेज, कोई खामोश Hi भी नहीं आया। आलम, जो अब तक हर सुबह Ira के मुस्कराते चेहरे का आदी हो चुका था, अब हर दिन उसकी गैर- मौजूदगी को उतनी ही शिद्दत से महसूस कर रहा था।
मगर वो आलम ही क्या जो गुस्से को चुपचाप पी जाए।
उस दिन दुकान जल्दी बंद की और सीधे Ira के घर के पास वाले पार्क की तरफ निकल पडा — वहीं जहाँ Ira की तीन सहेलियाँ शाम को अक्सर टहलने आती थीं। आज भी वो तीनों वही थीं — हँसती, मुस्कराती, और अपनी- अपनी सेल्फी में बिजी।
आलम ने हल्की मुस्कान के साथ अपने बालों को पीछे किया, शर्ट की बटन हल्के से ढीली की और एकदम फिल्मी स्टाइल में उनके पास पहुँचा।
हाय लेडीज. एक बात पूछनी थी, उसने कहा।
तीनों सहेलियाँ थोडी हैरान होकर उसकी तरफ देखने लगीं।
अगर मैं तुम तीनों को एक साथ डेट पर ले जाऊँ, तो किसी को ऐतराज तो नहीं होगा? आलम ने शरारती अंदाज में पूछा।
तीनों लडकियाँ पहले तो ठिठकीं, फिर खिलखिलाकर हँस पडीं।
तुम्हें तो Ira के साथ देखा था हम, उनमें से एक बोली।
वो तो अब बात नहीं करती मुझसे. तो सोचा तुम्हारा नंबर ट्राई कर लूँ, आलम ने आंख मारते हुए जवाब दिया।
ठीक उसी वक्त Ira अपने फोन में बिजी घर लौट रही थी, तभी उसकी नजर पार्क की तरफ गई — और वहीँ उसने देखा आलम उन तीनों के साथ फोटो खिंचवा रहा था, उनके कंधों पर हाथ रखे, हँसते हुए।
उसका चेहरा एक पल के लिए सुन्न पड गया।
Ira ने अनजाने में उनके स्टोरीज खोल लिए — और कुछ ही मिनटों में तीनों की इंस्टाग्राम पर फोटो अपडेट हो चुकी थी:
हमारे नए दोस्त के साथ — triple trouble! FunEvening# NoIraNoProblem"
Ira की आंखों में कुछ जलने लगा। कुछ ऐसा जिसे वो खुद समझ नहीं पा रही थी — क्या ये जलन थी? गुस्सा था? या कहीं न कहीं एक तगडा जवाब जो उसने खुद को ही देना था?
रात को Ira ने फोन उठाया — उसका नंबर तक डायल किया — लेकिन आखिरी सेकंड पर cut कर दिया।
लेकिन उधर. आलम मुस्कुरा रहा था।
उसके चेहरे पर किसी फतेह की तरह नर्मी थी। उसके मोबाइल में Ira की वो इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते वक्त की झलक सेव थी — और वो जानता था, Ira ने सब देखा है।
अगली सुबह. Ira दुकान पर पहुँची — पहली बार एकदम चुप।
कुछ लोग तो इतने जल्दी मूव ऑन कर लेते हैं न? उसने सीधे कहा।
आलम बिना देखे ही बोला, और कुछ लोग इतने देर से रिएक्ट करते हैं कि उन्हें पता भी नहीं चलता कि उनके लिए किसने कितना वेट किया।
Ira ने उसका चेहरा देखा — वो मजाक नहीं कर रहा था।
वो तुम्हारी तीनों ‘new besties’ कैसी हैं? Ira ने थोडी तीखी हँसी के साथ पूछा।
आलम झुककर बोला, उनसे भी कह दो, तुमसे ज्यादा दिलचस्प कोई नहीं मिला।
Ira ने कुछ पल उसकी आँखों में देखा — कुछ कहना चाहती थी लेकिन कह नहीं सकी। लेकिन आज पहली बार, उनके बीच एक नई शुरुआत की खामोशी गूंज रही थी।
अगले दिन सुबह से ही Ira थोडी बेचैन सी थी। एक तरफ वो खुद को समझा रही थी कि Aalam की लाइफ में उसकी कोई अहमियत नहीं, और दूसरी तरफ उसका मन बार- बार उस इंस्टाग्राम स्टोरी की तरफ खिंचता जा रहा था — Aalam, उन तीनों सहेलियों के साथ, और उस हँसी में जो Ira को अंदर से खटक रही थी।
उधर Aalam आज पूरे“ flirty revenge” के मूड में था।
दोपहर होते- होते, उसने दुकान बंद की और पार्क के रास्ते चलते हुए सीधे उन्हीं तीनों सहेलियों के पास पहुँच गया। इस बार उसके हाथ में था एक चौकलेट आइसक्रीम का बडा बॉक्स, और उसकी जेब में फोन — कैमरा ऑन।
Hey girls! क्या आइस्क्रीम लवर्स तैयार हैं? — Aalam ने फुल स्टाइल में पूछा।
बिलकुल! तीनों चहक उठीं।
Aalam ने तीनों को आइसक्रीम दी, उनके साथ दोबारा फोटो क्लिक की और खुद उनके साथ थोडा चॉकलेट स्मज अपने गाल पर भी लगा लिया — हँसी में, मस्ती में। लेकिन असली गेम यहीं से शुरू हुआ।
फोटो क्लिक होते ही, उसने कैमरा चुपचाप Ira की इंस्टाग्राम डीएम पर भेज दिया — सिर्फ एक लाइन के साथ:
Looks like I moved on. but the ice cream still misses you.
Ira ने जब वो फोटो देखी, उसकी उंगलियाँ स्क्रीन पर रुक गईं। उसकी आँखें कुछ पल के लिए स्थिर हो गईं। उसका दिमाग कुछ नहीं सोच पाया — और शायद दिल भी।
उसी समय, Aalam एक सेल्फी भी डालता है स्टोरी में — कैप्शन:
>" Dil hai chhota sa. revenge hai bada sa!
शाम होते- होते, Ira का पारा गरम हो चुका था। उसने अपने मोबाइल को बिस्तर पर फेंका, कुछ देर कमरे में चक्कर काटे और फिर फोन उठाकर एक छोटा- सा मैसेज टाइप किया:
Baatein banana aur pictures bhejna बंद करो. तुम क्या साबित करना चाहते हो?
Aalam का जवाब कुछ ही सेकंड में आया:
बस ये कि तुम्हारी इग्नोर करने की अदा Cute थी, लेकिन मेरा बदला Cutest है.
Ira ने एक लंबी साँस ली। वो कुछ और लिखने ही वाली थी कि उसकी एक सहेली अंदर आई और बोली, तू सच में उससे जल रही है न?
Ira ने हडबडा कर जवाब दिया, नहीं, बिल्कुल नहीं। मैं क्यों जलूँगी किसी से?
तू झूठ बोल रही है, सहेली हँसते हुए बोली। तू तो उसकी हर स्टोरी तीन बार देख चुकी है।
Ira का चेहरा थोडा शर्म से लाल हुआ। उसने फोन वापस उठाया और सोचा — क्या Aalam को फिर से एक मौका देना चाहिए? या उसे ये गेम और आगे बढाना चाहिए?
उधर Aalam भी मुस्कुरा रहा था — लेकिन उसकी मुस्कान में एक अधूरापन था। उसे Ira की चुप्पी से मजा तो आ रहा था, लेकिन कहीं ना कहीं, वो भी जानता था कि ये इगो अब इश्क में बदल रहा है. या फिर इश्क को इगो में बदल रहा है।
क्या Ira अब जवाब में कोई बडा गेम खेलेगी? या Aalam की ये शरारत उनके रिश्ते में दरार ला देगी?
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो* लाइक* जरूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढाता है!
और एक छोटा सा* कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
आपका अपना
The Aalam
Chapter 12: चाल बदल चुकी है
पिछले कुछ दिनों में Aalam ने Ira को अपनी फ्लर्टी हरकतों से जितना परेशान किया, उतना ही Ira के भीतर कुछ उबलने लगा था। वो Aalam की भेजी गई फोटो, उसका हर स्टेटस, और उसकी मुस्कान के पीछे छिपी मस्ती को देखकर एक अजीब- सी झुंझलाहट महसूस करने लगी थी। अब Ira को यकीन हो गया था कि अगर वो चुप बैठी रही, तो Aalam हर बार उसे परेशान करता रहेगा — इसलिए इस बार Ira ने ठान लिया, अब बारी उसकी है. और चाल भी उसकी होगी। वो सिर्फ जवाब नहीं देगी, बदले में दिल को झुलसा देने वाला burn देगी।
Girls, आज बाहर चलें? Ira ने अचानक कमरे में बैठे अपनी तीनों रूममेट्स से कहा।
क्यों, Aalam ने कुछ किया क्या? एक दोस्त ने हँसते हुए पूछा।
Ira के चेहरे पर हल्की सी शरारत भरी मुस्कान थी, इस बार मैं करूंगी। और वो देखेगा कि जलने का मतलब क्या होता है।
बस फिर क्या था, प्लान बना — Ira ने अपने दो कजिन्स Rachit और Kabir को Call किया, जो स्टाइलिश, स्मार्ट और पूरी तरह Ira के फेवर में थे।
Kabir ने फोन उठाते ही कहा, बोल Ira, किसका दिल जलाना है आज?
Ira ने हँसते हुए कहा, नाम मत पूछो, बस साथ चलो। थोडा show- off करना है, बस।
शाम होने तक पांचों तैयार थे। Ira ने जानबूझकर अपनी ड्रेसिंग को खास रखा था — मरून क्रॉप टॉप, डेनिम, खुले बाल और वो मुस्कान जिसे देखकर अच्छे- अच्छों के होश उड जाएं। उसने Kabir की बाइक पर पीछे बैठते हुए Aalam को एक फोटो भेजी —" Good company > Good coffee.
Aalam उस वक्त अपने कमरे में आराम से बैठा था, लेकिन ये फोटो जैसे बम की तरह गिरी। उसने फोटो को देखा, जूम किया, फिर कुछ नहीं कहा — बस एक धीमी सी“ ह्म्म. उसके होंठों से निकली। फिर फोन को मेज पर रखा, उठाया. फिर रखा। चेहरा शांत था, लेकिन आँखों में आग थी।
Ira को जवाब नहीं मिला, पर वो जानती थी कि चोट पहुंच चुकी है।
कुछ देर बाद अगली फोटो गई — इस बार बोट पर बैठे हुए, Kabir और Rachit के साथ हँसते हुए। Ira के कैप्शन में लिखा था:
जिसके साथ हँसी हो, वही रियल जिंदगी में जरूरी होता है!
Aalam अब तक शांत था। लेकिन ये खामोशी तूफान से पहले की थी।
अब Ira, उसकी तीनों सहेलियाँ और दोनों कजिन्स एक रोडसाइड कैफे पर पहुँचे जहाँ हल्का म्यूजिक और गर्मागरम मोमोज मिलते थे। माहौल हल्का था, लेकिन Ira का दिमाग तेजी से काम कर रहा था — और हर फोटो भेजी जा रही थी।
एक तस्वीर में सब मिलकर गोलगप्पे खा रहे थे, और Ira ने लिखा:
Flavours of life. without fake people!
Aalam अब तक चुप। लेकिन उसके चेहरे की शांति अब हल्की टेढी मुस्कान में बदल गई थी।
अचानक Ira का फोन वाइब्रेट हुआ —
Aalam का मैसेज था:
>“ Looks like you finally found someone fun. पर जो जलता है, वो बुझता नहीं, Ira. अब मेरी बारी है।
Ira एक पल को चुप रही। कुछ तो था उस लाइन में — जैसे वो लडका हर बार किसी और रंग में सामने आता था। Aalam का गुस्सा, उसका दर्द, और उसकी मस्ती — सब एकसाथ उस एक मैसेज में घुला हुआ था।
पर Ira ने हार नहीं मानी। उसने वापस भेजा —
Game on, Alpha boy. Let’s see how long you survive.
Aalam ने मुस्कुराते हुए अपने बालों को झटका दिया और कहा, Challenge accepted.
रात और गहरी हो चली थी। Ira ने अपने फोन को साइड में रखा और कैफे के पास लगे झूले पर बैठ गई। बाकी सब हँसते- मुस्कराते बातें कर रहे थे, लेकिन Ira की निगाहें कहीं खोई हुई थीं।
उसे लगने लगा था कि शायद ये सब एक खेल नहीं रह गया था। कहीं ना कहीं, उसे Aalam की बातें, उसकी छोटी- छोटी हरकतें, और उसके देख लेने वाला अंदाज अंदर तक छू गया था। लेकिन ये सब कब दिल तक पहुँच गया — Ira खुद नहीं जानती थी।
और तभी, Ira के फोन पर एक अनजान नंबर से Call आया।
उसने उठाया, Hello?
तुम जहाँ हो, वहीं रहो। मजा अब आएगा. दूसरी तरफ Aalam की मस्तीभरी आवाज थी।
Ira चौंकी, तुम यहाँ कैसे—”
कहा था ना. मेरी बारी है।
फोन cut चुका था।
Ira की धडकनें तेज हो गईं।
Ira अभी भी झूले पर बैठी थी, उसके बाल हल्के- हल्के हवा में उड रहे थे और मोबाइल उसकी गोद में था। उसका दिल अजीब- सी बेचैनी से धडक रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि Aalam के मैसेज ने उसके भीतर हलचल क्यों मचा दी थी। जो लडका कुछ घंटों पहले तक उसे चिढा रहा था, वो अब उसके आसपास कहीं मौजूद था। और उसने जो कहा था —“ मजा अब आएगा” — वो किसी हल्के मजाक जैसा नहीं लगा था, बल्कि एक तगडा जवाब देने की धमकी जैसी बात थी।
तभी, कुछ ही दूरी पर एक स्पोर्ट्स बाइक रुकी। उसका साइलेंसर एक भारी, लो- बेस गडगडाहट के साथ थमा और दो शख्स उतरे। पहला — जाहिर था — Aalam। और उसके साथ. एक लडकी।
लेकिन वो कोई आम लडकी नहीं थी।
लंबी, छरहरी कद- काठी, खुले सुनहरे बाल, स्ट्रैपलेस ब्लैक बॉडीकॉन ड्रेस, हाई हील्स और होंठों पर हल्की मुस्कान। उसकी चाल में ऐसा आत्मविश्वास था कि पूरे कैफे की नजर एक पल को उसी पर टिक गई। Ira की सहेलियाँ एकदम चुप हो गईं, और लडकों ने तो बिना पलकें झपकाए देखा।
Aalam ने बाइक लॉक की और उस लडकी की तरफ मुडकर कहा, Alyssa, चलो. थोडी गर्मी बढाते हैं।
Alyssa — हाँ, यही नाम था उसका। Aalam की पुरानी दोस्त, एक fashion blogger, जो मुंबई के बडे- बडे पेजेस पर ट्रेंड कर चुकी थी। और सबसे खास बात — उसका attitude एकदम" Don’t mess with me" टाइप था।
Aalam ने Alyssa का हाथ थामा और धीरे- धीरे Ira की तरफ आते हुए कहा, अरे Ira. तुम तो यहीं बैठी हो! मैं तो समझा किसी पार्टी में बिजी हो।
Ira ने उसे देखा, फिर Alyssa की तरफ देखा — थोडी हैरानी, थोडी जलन, और ढेर सारा गुस्सा। पर उसने चुप्पी साध ली।
Alyssa ने हाथ बढाया और कहा, Hi, I’m Alyssa. Aalam की very close friend. we’ve shared a lot of things together! उसने जानबूझकर" lot of things" पर जोर दिया।
Ira ने उसका हाथ shake नहीं किया, बस मुस्कुराकर कहा, Nice.
Aalam ने फिर कहा, Alyssa कह रही थी कि दिल्ली घूमने आई है, तो मैंने सोचा इसे अपने favourite कैफे ले आऊँ. जहाँ मेरी बहुत खास यादें हैं।
Ira का दिल जैसे किसी ने निचोड दिया हो।
Kabir और Rachit, जो Ira के कजिन्स थे, Aalam को देखकर खडे हो गए, लेकिन Aalam ने हल्के से हाथ जोडकर उन्हें भी Hi बोला, जैसे सबकुछ नॉर्मल हो।
Alyssa ने आगे बढकर झूले पर बैठने की कोशिश की, लेकिन Aalam ने कहा, नहीं नहीं. इस झूले पर तो बस Ira बैठती है, तुम यहाँ मेरे पास बैठो। और वो खुद एक स्टूल पर बैठ गया।
Alyssa झूले पर बैठते हुए बोली, Oh, she’s that Ira! अब समझ में आया कि तुम इतना disturb क्यों थे इस हफ्ते. Must be special, hmm?
Ira अब चुप नहीं रह सकी। उसने गहरी सांस ली, और उठकर बोली, Aalam, तुम बहुत अच्छे एक्टर हो।
Aalam ने सिर झुकाकर हँसते हुए कहा, और तुम अच्छी स्टोरी लिखती हो। बहुत ड्रामा है तुम्हारे हर कदम में।
Ira ने मुडते हुए कहा, और तुम्हारे हर कदम में बदला. अब समझ आया कि तुम किसी को हर्ट किए बिना रह नहीं सकते।
लेकिन तभी Alyssa ने कहा, Babe, calm down. ये सब jealousy नहीं तो और क्या है?
Ira की आँखों में गुस्से की आग जल उठी, पर उसने कुछ नहीं कहा। वो बस वहाँ से चली गई — तेज कदमों से, लेकिन आंसुओं को आंखों तक नहीं आने दिया।
Aalam वहीं बैठा रहा, मुस्कुराता हुआ, जैसे उसने कोई युद्ध जीत लिया हो।
लेकिन जैसे ही Ira वहाँ से दूर गई, Aalam की मुस्कान फीकी पड गई। उसने Alyssa की तरफ देखा और बोला, Thanks for coming. अब तुम जा सकती हो।
Alyssa थोडी चौंकी, That’s it? Tera revenge खत्म हो गया?
Aalam ने गहराई से कहा, नहीं. revenge नहीं था, बस ये देखना था कि Ira को कोई फर्क पडता भी है या नहीं।
Alyssa ने उसे एक नजर देखा और बोली, You’re in trouble, lover boy. big trouble.
वो बाइक पर बैठी और चली गई।
Aalam वहीं खडा रह गया — अकेला। जितनी भीड उसके आस- पास थी, अब वो सब धुंधली लगने लगी थी। दिल के अंदर कुछ टूटा था, जो बाहर झलकने लगा।
और दूसरी तरफ Ira. वो घर लौटते समय अपनी बाइक में बार- बार पीछे देख रही थी।
शायद उसे भी Aalam की कमी महसूस हो रही थी।
लेकिन अब सवाल ये नहीं था कि कौन किसे Miss कर रहा था.
बल्कि सवाल ये था —
क्या Ira अब वापस मुडेगी?
या Aalam खुद से हार जाएगा?
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो* लाइक* जरूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढाता है!
और एक छोटा सा* कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
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The Aalam*
Chapter 13: उलझे जज्बातों की दावत
इरा अब पूरी तरह से थक चुकी थी—न आलम का मजाक उडाना रुक रहा था, न उसकी लगातार फ्लर्टिंग। इरा को लगता था कि उसने एक अच्छे दोस्त को जाना, समझा, उसके साथ वक्त बिताया. लेकिन अब वो अपनी हदें भूलने लगा है। उसे हर वक्त इरा को चिढाने, जलाने और सताने में मजा आता है। और अब जब इरा ने उसकी फोटोज कुछ अजनबी लडकियों के साथ देखीं, तो वो अंदर से सच में टूट गई। हँसी मजाक में जो शुरू हुआ था, अब उसमें अहं और खुद्दारी भी शामिल हो गई थी। इरा को अब जवाब देना था, लेकिन सीधा नहीं — एक तीखा, प्यारा, और यादगार जवाब।
अगले दिन शाम को इरा ने आलम को Call किया।
हैलो? आज रात फ्री हो?
आलम ने हँसते हुए कहा, तेरे बिना कौन सा शादी में जा रहा हूँ, बोल कहाँ चलना है?
एक छोटी सी जगह है, होटल, डिनर पे चलेंगे?
क्या बात है मैडम, आज इतनी नरमी? कहीं दिल तो नहीं आ गया मुझपे?
ज्यादा उड मत। सात बजे तक तैयार रहना, लोकेशन भेज रही हूँ।
आलम थोडा हैरान जरूर हुआ लेकिन फिर वो तैयार हो गया। उसने अपनी ब्लैक शर्ट पहनी, हल्की सी जैल लगाई, जूते चमकाए और बाइक उठाकर चल पडा उस लोकेशन की ओर जो इरा ने भेजी थी।
वो एक प्राइवेट होटल था, बाहर से सादा, लेकिन अंदर से बेहद क्लासी। जब आलम पहुँचा, इरा पहले से वहाँ बैठी हुई थी, गहरे नीले रंग की ड्रेस में, एकदम शांत और शालीन।
अरे वाह, आलम ने कहा, आज तो लग रहा है कोई क्वीन डिनर पे बुला रही है।
तू तो हमेशा ही जोकर लगता है, इरा बोली, लेकिन आज उसकी मुस्कान में भी कुछ छुपा था — एक प्लान, एक बदला।
उन्होंने ऑर्डर किया — इरा ने कुछ महंगे डिशेज बताए, दो ड्रिंक्स, और डेजर्ट भी।
आलम कुछ- कुछ समझ रहा था कि ये नॉर्मल डिनर नहीं है, लेकिन फिर भी वो चुप रहा।
डिनर के दौरान इरा बातों में बहुत ही सीधी, सिंपल और दोस्ताना लगी। उसने आलम की बचपन की बातें छेडी, उनके पुराने किस्सों पर हँसी आई। आलम सोच में पड गया — क्या वाकई वो गलत सोच रहा था? क्या इरा फिर से दोस्ती के उसी मोड पर आ गई है?
खाना खत्म हुआ। आलम जब वॉशरूम से लौटा तो देखा इरा वहाँ से जा चुकी थी। वेटर ने एक स्लिप पकडा दी:
मैडम कह गई हैं कि आप उनका बिल पे करेंगे।
बिल पर नजर पडी — रुपये तीन हजार एक सौ सत्तर।
आलम की आँखें फटी की फटी रह गईं।
भाई ये तो डिनर नहीं, EMI है! उसने बुदबुदाया।
वो रिसेप्शन की तरफ बढा ही था कि रिसेप्शनिस्ट मुस्कुराते हुए बोली, मैडम जाते वक्त कह गईं कि Aalam उनका ड्राइवर है, बिल वो ही पे करेगा।
आलम एक पल को वहीं जम गया। गुस्सा, हँसी, और हैरानी — तीनों उसके चेहरे पर एक साथ थे।
उसने बिल चुकाया, रिसेप्शन पर ‘ड्राइवर’ की रसीद देखी, और बाहर निकला।
बाहर निकलते ही उसकी नजर सामने पडी — रोहित खडा था, एक नई लडकी के साथ। उसके हाथ में एक गुलाब, और चेहरे पर वही नकली मुस्कान।
ओए Aalam! क्या बात है भाई! आजकल बडे अमीर दिख रहे हो, होटल- वोटल में ड्राइवर बन गए हो क्या? रोहित ने चुटकी ली।
आलम मुस्कुरा दिया, कभी- कभी ड्राइवर भी VIP सवारी ले जाते हैं, तुझे क्या पता।
रोहित हँसते हुए बोला, सुन, अगली बार तुझे मेरी साली को भी ले जाना, तुझे बडा तजुर्बा हो गया है ड्राइविंग का।
आलम ने फिर भी जवाब नहीं दिया, बस उसके चेहरे की ओर देखता रहा।
लडकी जो रोहित के साथ थी, वो हँसकर आलम से बोली, हाय! I’m Riya. you’re cute।
आलम ने उसी अंदाज में जवाब दिया, You too. but sorry, आज ड्राइवर ड्यूटी खत्म हो गई।
और वहाँ से सीधा अपनी बाइक की तरफ बढ गया।
रास्ते भर वो मुस्कुराता रहा — गुस्से में भी और मजे में भी।
आलम की दुकान पर लौटते हुए मन कुछ हल्का- सा परेशान था। रोहित के कहे हुए कार रेस की बात उसके दिमाग में घूम रही थी, लेकिन उसने खुद को संभाला और खुद से कहा, चलो, अभी इस पर सोचने का वक्त नहीं है।
दुकान पर आते ही उसने पहली नजर Ira की तरफ डाली, जो आज भी कुछ दूर खडी मुस्कुरा रही थी। आलम ने धीरे से उसकी तरफ बढते हुए कहा, तुम्हें माफ कर दिया। पर ये वादा करो कि अब ऐसे झूठ और नाटक नहीं करोगी।
Ira ने आंखें झुका लीं, फिर धीरे से जवाब दिया, मैं वादा करती हूँ, आलम। तुमसे जो भी हुआ, उससे मुझे बहुत अफसोस है।
बस, आलम ने हँसते हुए कहा, मैं चाहता हूँ कि हम दोस्त बने रहें, वैसे जैसे पहले थे। अब वो ड्रामा छोडो और असली दोस्त बनो।
Ira ने सिर हिलाया, ठीक है, दोस्त।
दोनों के बीच एक खामोशी थी, जो दोनों के लिए नई शुरुआत का संकेत थी। आलम ने फिर हँसते हुए कहा, चलो, आज का दिन अच्छा गुजरने दो।
Ira भी मुस्कुराई और बोली, हाँ, आज से सब कुछ ठीक होगा।
आलम ने अपनी दुकान की तरफ देखते हुए कहा, लेकिन याद रखना, अगले महीने की अठारह तारीख को कार रेस है।
Ira ने आश्चर्य से पूछा, कार रेस?
आलम ने मुस्कुराते हुए कहा, अरे, ये तुम्हारे लिए नहीं है, बस एक मजाक समझो।
Ira ने ठिठक कर हँसी में कहा, ठीक है, मुझे अभी तुम्हारे ये सारे प्लान समझ नहीं आए।
आलम ने कहा, कोई बात नहीं, वक्त आने पर सब समझ आ जाएगा।
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो* लाइक* जरूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढाता है!
और एक छोटा सा* कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
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The Aalam*
chapter 14- Aalam Ki Royal Chhutti
आलम की दुकान पर वो दिन कुछ अलग सा था। हालाँकि बाहर की दुनिया वैसी ही भाग रही थी, पर उसके भीतर कुछ थम- सा गया था। इरा से बात तो हो चुकी थी, दोनों ने सुलह भी कर ली थी, लेकिन कुछ तो था जो उसके दिल में बोझ बना हुआ था। यही सोचते हुए उसने दुकान का शटर जल्दी गिरा दिया और बाइक उठाकर शहर से बाहर निकल पडा।
शहर की रफ्तार से दूर, कुछ घंटे बाद वो एक पुराने फार्महाउस पर पहुंचा — वही फार्महाउस जहां बचपन में वो और उसका सबसे करीबी दोस्त कबीर अक्सर गर्मियों की छुट्टियाँ बिताते थे। गेट पर पुरानी सी बेल बजाई, और कुछ ही देर में एक मुस्कुराता चेहरा दरवाजे पर दिखा।
अबे तू? कबीर ने हैरानी से कहा और आलम को गले लगा लिया।
मुझे कुछ दिन सुकून चाहिए था, तो सोचा कहाँ जाऊं. बस तेरी याद आ गई, आलम ने हँसते हुए कहा।
कबीर वही था — शांत, समझदार, और ऐसा इंसान जो दुनिया की चाल को पहले ही समझ जाता था। वो न केवल आलम का दोस्त था, बल्कि उसका सबसे मजबूत दिमागी साथी भी।
तू कुछ परेशान है, है ना? कबीर ने बिना किसी भूमिका के पूछा।
थोडा सा. सबकुछ बहुत जल्दी हो गया। Ira, viral videos, शादी, अलग घर. और फिर Rahul जैसा गिद्ध आसपास मंडरा रहा है।
कबीर कुछ देर सोचता रहा। फिर एकदम गंभीर होकर बोला,
अगर दिल का बोझ है, तो थोडे दिन यहीं रुक जा।
और हाँ, एक बात पूछूं. क्या वाकई तुझे Singh Group को खत्म कर देना चाहिए?
आलम कुछ पलों के लिए चुप रहा। फिर हल्की हँसी के साथ बोला,
तू हमेशा बडा सोचता है, कबीर। पर Singh Group कोई बिल्डिंग नहीं. वो एक सोच है, एक घमंड है, जो खुद को भगवान समझती है। मैं उसे गिराने नहीं आया, पर अगर वो मेरे सामने खडा हो. तो मैं झुकने वाला नहीं।
कबीर मुस्कुराया, जैसे उसे वही जवाब चाहिए था।
इधर शहर में, Rahul अब और भी बेचैन होने लगा था। उसे लग रहा था जैसे Ira अब उसे पूरी तरह इग्नोर कर रही है, और जब से उसे पता चला है कि Ira और Aalam अब ज्यादा समय साथ बिताते हैं, वो जलने लगा है।
वो अपने दोस्तों से कहता है,
वो Aalam कौन होता है Ira के करीब जाने वाला? वो तो एक दुकानदार है. और Ira? एक नामी Collage की third- year टॉपर!
Rahul ने Ira को पहले भी कई बार प्रपोज किया था, लेकिन हर बार Ira ने बडी विनम्रता से मना कर दिया। अब ये इनकार उसके अहंकार पर चोट कर रहा था।
उसे लगता है, Aalam को सबक सिखाना जरूरी हो गया है।
रात को फार्महाउस की छत पर आलम और कबीर चाय पी रहे थे।
कबीर, आलम ने कहा, मैं Ira से कुछ छुपा रहा हूँ. और मैं जानता हूँ, अगर वो सच जान गई, तो सब बिखर जाएगा।
तो सच बता क्यों नहीं देते? कबीर ने पूछा।
वक्त आने दो, आलम बोला। सच का असर भी वक्त पर निर्भर करता है। अभी नहीं. लेकिन जल्द ही।
कबीर ने सिर हिलाया। ठीक है। लेकिन याद रख, अगर तू नहीं बोलेगा. तो कोई और बोल देगा।
आलम की आंखें एकदम शांत थीं, लेकिन दिल में उथल- पुथल मची थी।
इधर, इरा को भी ये बात खटक रही थी कि Aalam उसे बिना बताए अचानक फार्महाउस चला गया। राहुल ने भी आज फिर एक बार उसे टोका, कहाँ गया तेरा hero Aalam? लगता है तुझे छोडकर भाग गया।
Ira ने उसे घूरते हुए देखा और बिना जवाब दिए वहाँ से चली गई, लेकिन उसके मन में सवाल उठने लगे थे —“ आलम कहाँ है? क्या हुआ अचानक? और क्या ये सब महज संयोग है. या कुछ और?
फार्महाउस में तीसरा दिन था। धूप हल्की, मौसम सुहाना और माहौल बेफिक्र- सा। आलम और कबीर छत पर चारपाई डाले, आम के अचार के साथ परांठे खा रहे थे।
कबीर, भाई. तू ना होता तो मैं आज भी दुकान की धूल में ही लिपटा रहता, आलम बोला।
कबीर मुस्कुराया, तू दुकान चलाने के लिए बना ही नहीं है, तू तो सिस्टम चलाने के लिए बना है।
दोनों हँस पडे।
अचानक, आसमान में एक तेज आवाज गूंजी। एक हेलिकॉप्टर पास आता दिखा। पहले तो कबीर चौंका, अबे. तूने फौज को बुला लिया क्या?
नहीं यार, आलम हँसते हुए बोला, ये तो मेहमान है. खास मेहमान।
हेलिकॉप्टर फार्महाउस के खुले लॉन में लैंड हुआ। धूल के गुबार के बीच एक सिग्नेचर स्टाइल में, सिगरेट के धुएं को हवा में उडाते हुए एक लडकी नीचे उतरी — गुलजीत कौर।
काले गॉगल, नीले बाल, लाल जैकेट और आत्मविश्वास ऐसा कि कोई भी पहली नजर में पहचान जाए — ये कोई मामूली लडकी नहीं।
कबीर ने कान में फुसफुसाया, भाई ये कौन है? रॉकेट से उतरी लगती है।
आलम हँसा, गुलजीत. मेरी बचपन की पहचान। पंजाब की डॉन, लेकिन हमारे लिए फैमिली।
गुलजीत ने आते ही कबीर को एक नजर देखा और आलम को जोर से गले लगाया।
ओये, तेरे बिना ये दुनिया कितनी बोरिंग लगती है, उसने कहा।
तू ना आती तो फार्महाउस को फार्म ही रहने देता, आलम ने जवाब दिया।
तीनों अब फार्महाउस की छत पर बैठे थे — म्यूजिक, बीयर और प्लानिंग।
गुलजीत ने कबीर से पूछा, तू जानता है न ये लडका कौन है असल में?
कबीर बोला, थोडा- थोडा जानता हूँ। लेकिन हर बार कुछ नया जान जाता हूँ।
गुलजीत मुस्कुराई, ये लडका बैंक में चुपचाप बैठेगा, और उसका ब्लैक डेबिट कार्ड साइलेंटली करोडों निकाल लेगा। किसी को कानोंकान खबर नहीं। न नाम, न फोटो. बस एक कोड— ‘Alpha’. पूरी दुनिया की फाइनेंशियल साइबर सिक्योरिटी के लिए एक खतरा. और एक उम्मीद।
कबीर ने हल्के से मुस्कराकर कहा, पर अब ये Alpha, दुकान पर चिप्स और चार्जर बेचता है।
आलम मुस्कुराया, कभी- कभी सादगी ही सबसे बडा नकाब होती है।
तीनों रातभर बात करते रहे — पुरानी यादें, आने वाली रणनीतियाँ और Singh Group के बारे में बातें।
गुलजीत ने पूछा, तो प्लान क्या है? Singh Group पर हमला या इंतजार?
आलम ने सिगरेट बुझाते हुए कहा, अभी नहीं। हर शेर को दहाडने के लिए सही जंगल और सही वक्त चाहिए। अभी बस एक परछाईं बनकर रहूंगा. वक्त आने दो।
इधर शहर में, Ira को अब भी कोई खबर नहीं थी कि आलम कहाँ है। Rahul अब और भी ज्यादा नफरत से भर चुका था। वो Collage में सबके सामने कहता, देखा, वो भाग गया। Ira से खेलकर भाग गया।
पर Ira बस चुप रहती। शायद उसे यकीन था कि आलम लौटेगा. लेकिन कब?
तीसरे दिन की सुबह। गुलजीत को वापस जाना था। हेलिकॉप्टर दोबारा फार्महाउस पर आया।
कबीर और आलम उसे गले लगाकर विदा करने आए। जाते- जाते गुलजीत ने कहा, तेरा असली खेल शुरू नहीं हुआ है, आलम। अगर तुझे लडना ही है, तो मैदान खुद चुने। मैं हमेशा तेरे साथ हूं।
आलम ने सिर झुकाकर कहा, और मैं वादा करता हूं. अगली बार, खेल रूल से नहीं होगा।
हेलिकॉप्टर उड चुका था।
कबीर ने आलम से पूछा, अब? वापस दुकान पर?
आलम ने मुस्कुराते हुए कहा, पता नहीं। लोग सोचते हैं मैं भाग गया। Ira सोचती है मैं नाराज हूँ। Rahul सोचता है मैं डर गया। और Singh Group सोचता है मैं हार गया।
वो रुककर बोला, पर अब. मैं तय करूंगा कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा।
क्या आलम वाकई दुकान पर वापस जाएगा?
या अब उसकी जिंदगी एक नए मोड पर निकल चुकी है?
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
अगर आपको ये हिस्सा पसंद आया हो तो* लाइक* जरूर करें — ये मेरी हिम्मत को बढाता है!
और एक छोटा सा* कमेंट* जरूर लिखें — मैं हर एक टिप्पणी पढता हूँ, और आपकी बातों से मुझे और लिखने की प्रेरणा मिलती है।
चलिए मिलकर इस कहानी को आगे बढाते हैं — आपकी सोच और राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
आपका अपना
The Aalam*
Chapter 15: चार दिन बाद.
गुलजीत कौर के जाने के बाद फार्महाउस पर एक अजीब- सी खामोशी छा गई थी। दो दिन की चहल- पहल, गपशप और मजाकों के बाद जब तीसरे दिन सुबह आसमान से हेलिकॉप्टर उतरा और उसमें से गुलजीत ने विदा ली, तो ऐसा लगा जैसे कोई कहानी अचानक रुक गई हो। कबीर फार्महाउस की बालकनी में बैठा चाय पी रहा था, और आलम सामने के मैदान में आंखें बंद किए, सूरज की रौशनी चेहरे पर महसूस कर रहा था।
कबीर ने मुस्कुराकर कहा, अबे भाई, चार दिन हो गए। दुकान नहीं जाना क्या?
आलम ने आंखें खोलीं और हौले से कहा, चलेंगे. पर अभी नहीं। थोडी और छुट्टी चाहिए।
तू वैसा ही है जैसे पहले था। दुनिया जल जाए, तुझे फर्क नहीं पडता। कबीर ने चाय का घूंट लेते हुए कहा।
और तू भी वैसा ही है — हमेशा टाइम, शेयर मार्केट, गोल्ड रेट, क्रिप्टो की बातों में डूबा हुआ, आलम हँसते हुए बोला।
चार दिन यूँ ही आराम और सुकून में बीते। कोई चिंता नहीं, कोई जिम्मेदारी नहीं। लेकिन पांचवें दिन सुबह, जब सूरज हल्के नीले आसमान पर चढने लगा था, आलम ने बिना कुछ कहे अपना बैग उठाया और कबीर से कहा, चलो, वापस चलते हैं।
दोपहर के करीब साढे बारह बजे, जब पुरानी दिल्ली की गलियों में गर्मी की चिलचिलाती लहरें दौड रही थीं, तभी आलम की एंट्री हुई — बिलकुल उसी अंदाज में जैसे कुछ हुआ ही नहीं। वही पुरानी जींस, सफेद ढीली- सी टीशर्ट, और चेहरे पर वही मस्तमौला मुस्कान।
दुकान के मालिक ने उसे देखकर कहा, अबे हीरो! जिंदा है तू? चार दिन से कोई खबर नहीं!
आलम ने हँसते हुए जवाब दिया, हां भाई, सोचा था कहीं चला जाऊं, तो थोडा खुद को भी समय मिले।
तेरा टाइम नहीं चलता, तेरे टाइम पर दुनिया चलती है, ऐसा लगता है मुझे, दुकान का छोटा हेल्पर बोला।
आलम ने उसकी पीठ थपथपाई, ज्यादा मत उड, वर्ना कूलर की हवा भी नसीब नहीं होगी।
सभी हँस पडे।
कुछ ही देर में वह काम पर लग गया — पुराने कंप्यूटर की वायरिंग ठीक करना, एक ग्राहक के मोबाइल की स्क्रीन चेंज करना और बीच- बीच में दुकान के सामने से गुजरती दुनिया को देखना। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ भी बदला नहीं।
शाम के करीब तीन बजे, जब सूरज थोडा नरम पड चुका था, तभी सामने से एक जाना- पहचाना चेहरा आता दिखा — ईरा।
वो सादे सलवार- कुर्ते में थी, बाल खुले हुए, आंखों में थकावट और होंठों पर एक धीमी मुस्कान। उसने दुकान के गेट से ही आलम को देखा और सीधे अंदर आ गई।
कहाँ गायब थे? ईरा ने सीधा सवाल दागा।
मैं तो यहीं हूँ, तुम ही तो गायब थीं, आलम ने हँसते हुए कहा।
ईरा ने नजरें फेर लीं, मैं Collage में बिजी थी।
अच्छा! वैसे अब तुम Collage में Kiss ईयर में हो? आलम ने जानबूझकर मासूम बनते हुए पूछा।
ईरा ने एक पल को उसकी ओर देखा, फिर बोली, थर्ड ईयर में. फाइनल सेमेस्टर चल रहा है।
ओह! तो अब तुम बहुत समझदार हो गई हो, आलम ने नजाकत से कहा।
ईरा मुस्कुरा दी, समझदार होना मजबूरी है. अब लापरवाह रहना अफॉर्ड नहीं कर सकते।
आलम ने थोडा गंभीर होते हुए कहा, जिंदगी को ज्यादा गंभीर बना लोगी, तो जीना भूल जाओगी। थोडा हँसना भी जरूरी है, ईरा।
कुछ पल खामोशी रही। फिर आलम ने ही बात आगे बढाई, कॉफी पियोगी?
ईरा ने कहा, नहीं, अब नहीं. मैं बस कुछ काम से आई थी।
काम? आलम ने आंखें तरेरीं, कौन सा काम?
वो. दरअसल एक assignment था —' Consumer Behaviour in Mid- Class Electronics Shops' उसी पर survey चल रहा है, तो सोचा तुम्हारी दुकान सबसे परफेक्ट है। ईरा ने थोडा बनावटी हँसी के साथ कहा।
वाह! अब तो मैं भी survey में शामिल हो गया! आलम ने नकली नाराजगी जताई।
ईरा हँसी नहीं, बस एक हल्की मुस्कान उसके चेहरे पर थी। उसने एक छोटा सा फॉर्म निकाला, कुछ सवाल पूछे, और जवाब नोट करने लगी।
बीच- बीच में दोनों के बीच वो पुरानी नोक- झोंक झलक रही थी, लेकिन एक बदलाव साफ था — अब दोनों की बातें जरा और संजीदा हो चुकी थीं। जैसे वक्त ने उनके बीच की मस्ती को थोडे अनुभवों की परत से ढक दिया हो।
जब ईरा जाने लगी, तो दरवाजे पर रुककर बोली, तुमने कहा था ना, कि सब ठीक हो जाएगा. शायद अब वक्त आ गया है तुम्हारी बात पर यकीन करने का।
आलम ने कोई जवाब नहीं दिया — बस मुस्कुराया। और वही मुस्कान ईरा के दिल में कहीं गूंजती रही।
जैसे ही वो बाहर निकली, एक बाइक सामने से तेजी से गुजरी। बाइक सवार ने मुडकर देखा — वो राहुल था।
वो रुका नहीं, लेकिन उसकी नजरें बहुत कुछ कह गईं।
आलम दुकान के अंदर लौट आया। शाम ढल रही थी। दुकान की बत्तियाँ जल चुकी थीं, और रेडियो पर एक पुराना गाना बज रहा था —
कभी- कभी मेरे दिल में ख्याल आता है.
उसने पीछे पलटकर देखा — अब सब कुछ फिर से वैसा हो रहा था, जैसा पहले था. लेकिन कुछ था जो अब भी अधूरा था।
वो नहीं जानता था कि अगले हफ्ते की अठारह तारीख उसे उस मोड पर ले आएगी. जहाँ से न दोस्त वही रहेंगे, न दुश्मन।
ईरा अब जा ही रही थी कि एक पल को ठिठक गई।
वैसे. तुम्हारी दुकान, तुम्हारा अंदाज, तुम्हारे बोलने का तरीका — सबकुछ इतना रियल है कि मुझे लगा कि इसका एक ब्लॉग बनाना चाहिए, ईरा ने मुस्कुराते हुए कहा।
ब्लॉग? आलम ने भौंहे चढाईं।
हाँ! मेरा Collage में एक project है — जिसमें हमें किसी लोकल बिजनेस पर एक रिपोर्ट और वीडियो डाक्यूमेंट्री बनानी है। तुम्हारी दुकान परफेक्ट है इसके लिए, ईरा ने कहा।
ओह. तो तुम मेरा इंटरव्यू लेने वाली हो? आलम ने हँसते हुए कहा।
कुछ वैसा ही। मैं तीन दिन के लिए यहाँ आऊँगी, थोडी शूटिंग करूँगी, तुमसे कुछ सवाल पूछूँगी और फिर एडिट करके वीडियो बनाऊँगी, ईरा ने कहा।
आलम ने मजाक में कहा, ठीक है, लेकिन मेरी फीस लगेगी — एक कप कॉफी रोज की।
Done! ईरा हँसते हुए बाहर निकल गई।
अगले तीन दिन ईरा रोज दुकान पर आती रही। वो मोबाइल कैमरे पर दुकान की छोटी- छोटी चीजों को रिकॉर्ड करती, आलम से बातें करती और फिर नोट्स लेती। एक बार उसने आलम से पूछा, तुम्हारी जिंदगी की सबसे बडी सीख क्या रही?
आलम ने बिना सोचे जवाब दिया, कभी किसी चीज को इतना सीरियस मत लो कि वो तुम्हें ही निगल जाए।
ईरा ने चुपचाप वो लाइन लिख ली — शायद उसके रिपोर्ट के किसी पन्ने में सबसे ऊपर जाने के लिए।
तीसरे दिन शूटिंग खत्म हुई। ईरा ने कैमरा बंद करते हुए कहा, मुझे नहीं पता ये वीडियो कितना अच्छा बनेगा, लेकिन मैं जानती हूँ कि इसमें कुछ ऐसा है जो किसी स्क्रिप्ट में नहीं लिखा जा सकता।
क्योंकि ये बिना एक्टिंग का वीडियो है, आलम ने कहा।
और शायद. बिना मास्क के इंसानों का, ईरा ने धीरे से जोडा।
अगले दिन सुबह, ईरा Collage के लिए निकलने ही वाली थी। उसने अपना बैग तैयार किया, project की फाइल्स समेटीं और रिपोर्ट का फोल्डर अच्छे से कवर में रखा।
नीचे गली में ऑटो उसका इंतजार कर रहा था।
लेकिन तभी दुकान के सामने कुछ शोर हुआ।
दो लोग — अनजान से चेहरे, बाइक पर थे — और अचानक से उन्होंने ईरा के हाथ से उसका बैग छीन लिया।
एक पल के लिए सबकुछ थम गया।
ईरा जोर से चिल्लाई, रुको! वो मेरा project है!
आस- पास के लोग इकट्ठा हो गए, लेकिन बाइक बहुत तेज थी — वो निकल चुके थे।
आलम बाहर भागा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
ईरा वहीं फुटपाथ पर बैठ गई। उसकी आंखों में आँसू थे — सिर्फ project की वजह से नहीं, बल्कि उस मेहनत, उस रिश्ते, उस connection के लिए जो उसने इन तीन दिनों में बनाया था।
आलम पास आया, चुपचाप उसके बगल में बैठ गया।
मेरे पास उसकी बैकअप फाइल है, आलम ने धीरे से कहा।
ईरा ने चौंक कर उसकी ओर देखा।
मैंने सोचा था कि तुमसे पहले ही चुपचाप एक कॉपी सेव कर लूं. क्योंकि तुम्हारा काम बहुत अच्छा था, आलम ने उसकी ओर देखते हुए कहा।
ईरा की आंखों में जो चमक थी — वो सिर्फ राहत की नहीं थी. उसमें विश्वास था।
पर तभी. सडक की दूसरी ओर से किसी की निगाहें उनपर जमी हुई थीं — राहुल।
उसकी मुट्ठियाँ भिंची हुई थीं, और चेहरा ऐसा जैसे कुछ सोच रहा हो।
पर अभी कोई कुछ नहीं जानता था. कि अगला कदम किसका होगा।
इस अध्याय को पढने के लिए दिल से धन्यवाद!
आपको क्या लगता है, अब आगे क्या होगा? क्या आलम सच्चाई तक पहुंचेगा या और गहराई में डूब जाएगा?
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