निशी एक अनाथ लड़की जिसके ज़ीने के बस दो ही सहारा है एक से नोबेल और दुसरी सोना जो उसे कभी ये तक मेहसूस होंने नहीं दिया कि वो अनाथ हें पर एक दिन जब उसकी आंख खुले तो उसने अपने आप को एक अलग ही दुनिया में पाया। ये कहानी है निशी की जो एक अनाथ थी पर एक... निशी एक अनाथ लड़की जिसके ज़ीने के बस दो ही सहारा है एक से नोबेल और दुसरी सोना जो उसे कभी ये तक मेहसूस होंने नहीं दिया कि वो अनाथ हें पर एक दिन जब उसकी आंख खुले तो उसने अपने आप को एक अलग ही दुनिया में पाया। ये कहानी है निशी की जो एक अनाथ थी पर एक दिन वो आ जाती है एक नोबेल की कहानी में जाहां उसकी सोल आ जाती है उस कहानी के villainess के अंदर तो क्या होगा इस कहानी में निशी के आने के बाद जानने के लिए पढ़ें मेरी नई कहानी reborn in another world
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एक 17 18 साल की लड़की लड़की सडक किनारे खड़ी थी उसने एक हाथ में अपनी किताबे पकडी थी और बार बार अपने दूसरे हाथ में पहनी घड़ी को देख बड़बड़ा रही थी छे बजने वाले हैं रोज पांच बजे तो आ जाता है आज क्या हुआ फिर ऊपर की तरफ देख है भोलेनाथ प्लीस इस बस को जल्दी भेज दो वरना वो हिटलर मेरी जान ले लेगी वो खुद में बात कर ही रही तभी उसकी नज़र सड़क के दूसरे साइड पर पड़ी जहां एक बुढ़ि औरत सड़क पार कर रही थी उसने एक हाथ में एक लाठी पकड़ी थी और दूसरे हाथ में एक किताब थी और वो बहुत मुश्किल से सड़क पार कर रही थी
उस लड़की ने उस औरत को एक नजर देख कर फिर से अपने बस के इन्तजार में लग गई फिर भी वो बिच बिच में उस ओर भी देख लेती थी तभी उसने देखा कि दूसरी साइड से एक कार आ रही है वो कार लगातार हॉर्न बजा रहा था पर शायद उस औरत को सुनाई नहीं दे रहा था ये देख वो लड़की ने भी बिना कुछ सोचे समझे उस ओर दौड़ लगा दी वो कार जैसे ही उस औरत को छूने वाली थी वो लड़की जल्दी से से उस औरत के सामने खड़ी हो गई और ठीक एक इन्च के दूरी पर वो कार भी रूक गया
जैसे ही उसे कोई भी दर्द का एहसास नहीं हुआ तो उसने झट से अपनी आंखें खोली तभी उस कार वाले ने गुस्से से कहा मरने के लिए मेरी ही गाडी मिली थी क्या कबसे हॉर्न बजा रहा हूं सुनाईं नहीं देता क्या बेहरी हो स स सरी भैया उस लड़की ने कहा तो वो लड़का ठीक है अब हटो यहां से ये बोल वहां से चला गया
उस कार वाले के जाने के बाद उस लड़की ने और उस औरत को देख कर बोली दादी आप ठीक तो है ना आपको कहीं लगी तो नहीं वो औरत बोली नहीं बेटा में बिल्कुल ठीक हूं thankyou बेटा मेरी जान बचाने के लिए आरे दादी आप कैसी बात कर रहे हैं ये तो मेरा फ़र्ज़ थी अब चलीए में आपको सड़क पार करा देती हूं ये वोल वो उस औरत को सड़क पार करा दी
वो लड़की - ठीक है दादी अब में चलती हु
वो बुढि औरत - बेटा रुकों तुम यहां क्या कर रही थी
वो दादी में बस का इन्तजार कर रही थी
बुढ़ि औरत बोली माफ करना बेटा मेरी वज़ह से तुम्हारा बस भी चला गया होगा
ये सुन लो लड़की बोली आरे दादी आप ये कैसी बातें कर रहे हैं बस ही तो था दुसरी मिल जाएगी उस लड़की कि बात सुन लो औरत बोली जाती रहो बेटा आज कल तुम्हारे जैसे लोग कहां है
Thank you दादी वो मुस्कुरा कर बोली तो वो बूढी औरत अपने हाथ में पकड़ी उस किताब को उस लड़की कि तरफ देते हुए कहा ये किताब रख लो बेटा तुम्हारी काम आयेगी में इस उम्र में इस किताब का क्या ही करुंगी
वो लड़की अपने आंखों में चमक लिए कहा आरे इसकी क्या जरूरत थी पर आप प्यार से दे रहे हैं तो में रख लेती हुं वैसे भी मुझे कहानी पढ़ना बहुत पसंद हैं तो फिर समझ लो ये किताब तुम्हारे लिए ही थी वो बूढी औरत एक मिस्टीरियस स्माइल के साथ कहती हैं तो वो लड़की नासमझी में बोल कुछ कहा आपने दादी नहीं बेटा वैसे तुम्हारा नाम क्या है वो लड़की एक प्यारी स्माइल के साथ बोली मेरा नाम निशी है दादी बहुत प्यारा नाम है बच्चा हमेशा ऐसे ही खुश रहो उस बुढ़ि औरत ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा
फिर निशी उस बुढ़ी औरत को वाए बोल वहां से चली जाती है और उसे जाते देख उस औरत के होंठों पर एक मिस्टीरियस स्माइल आ जाती है है और वो देखते ही गायब हो गई थोड़ी दूर जाकर निशी वापस पिछे मुडकर देखी तो वहां अब कोई नहीं था वो खुद में ही बोली आरे ये दादी इतनी जल्दी कहां चली गई फिर खुद के सर पर हल्का सा चपत मार कर कहती तू भी क्या बेकार कि बाते सोचने लगी जल्दी चल वरना आज तो वो हिटलर सच में मेरी जान लेकर ही मानेगी
शांत अनाथ आश्रय
ये आश्रम उतना बड़ा नहीं था ये किसी की एक पुरानी हवेली थी जो उसने अनाथ बच्चों के लिए दान में दिया था हवेली ज्यादा बड़ा नहीं था सिर्फ दो मंजिला का एक मकान था जो बहुत ज्यादा खुबसूरत था और हर साल देश के तीन सबसे ज्यादा रईस फैमिली इस आश्रम में पैसे डोनेट करते थे जिससे यहां के बच्चो को कोई भी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ता था सिर्फ निशी और सोना को छोड़कर कर उन्हें हेमा जी एक पैसा नहीं देती थी वो दोनों 10 साल की उम्र से ही छोटे मोटे काम कर के अपना खर्चा उठाती थी और इस आश्रम एक दूसरे के सुख-दुख के साथी कहने सोना हेमा जी कि बेटी थी पर उसे उनसे कभी मां बाली प्यार मिला ही नहीं वो बस दिखावे केलिए उसकी मां थी और सोना को भी उनसे कोई खास लगाव नहीं था
हेमा जी इनके हिस्से का सारा पैसा एक बच्ची पर खर्च कर देती उसका नाम मोनिका थी वो निशी की हम उम्र थी सोना से दो साल छोटी थी कहने को अनाथ थी पर उस आश्रम की मालकिन कि तरह रहती थी और हेमा जी तो उसे सोना से भी ज्यादा प्यार करते थे
यहां पर एक साथ 500 बच्चे आरम से रह सकते थे ये मकान वैसा था और पर फिलहाल यहां पर सिर्फ 150 बच्चों के साथ कुछ स्टाफ रहते थे वो सब बच्चे करीब पांच से दस साल तक थे और उन सब में बड़ी सोना मोना और निशी ही थे
उस आश्रम के बाहर बरांदे में एक लड़की बार बार दीवार पर टंगी घड़ी को देख रही थी और अपने हाथ आपस में मसल कर इधर उधर टहलते हुए बोली हे शिव जी अब बस आप ही बचा सकते हो मेरी दोस्त को वो बोल ही रही थी कि तभी एक औरत कि कड़क आवाज आती है आज तो तुम्हारे शिव जी भी उसे नहीं बचा सकते
उस औरत की बात सुन लो लड़की बोली मां आप उससे इतना चिढ़ती क्यूं है सोना तू उससे इतना प्यार क्यूं करती में तेरी मां हु और बो पता नहीं किसका गंदा खून से एक नम्बर कि मनहूस कही कि इसलिए तो कोई उसे गोद भी नहीं लेता मां सोना आगे कुछ कहती कि उसकी नजर दरवाजे पर पड़ी जाहां निशी अपने आंसु को कन्ट्रोल किए खड़ी थी
उसे देख वो औरत जो इस आश्रम की सम्भालती थी उनका नाम हेमा शर्मा था वो बोली आ गई मनहूस कहा मुंह काला कर रही थी हां उस औरत की बात सुन निशी ने कुछ नहीं कहा बस अपनी सिर झुकाकर कर सुबकने लगी
मां ये आप कैसी बात कर रहे हैं सिर्फ अम्बर हि तो यहां नहीं रहती ना और भी बहुत बच्चे हैं पर बो इसके तरहा मनहूस नहीं है पता नहीं बस सोना ने चिल्ला कर कहा जिससे हेमा जी का मुंह बन गया
अगर एक और शब्द अपने कहा तो मैं भुल जाउंगी की आपके साथ मेरा कोई रिश्ता भी है ये बोल वो निशी का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ कमरे में ले गई उसने उसे बेड पर बिठाया और उसे झट से अपने गले से लगा लिया और उसकी पीठ सहलाने लगी
में में क्या इतनी बुरी हु क्यु मुझे मेरे मम्मी पापा ने छोड़ दिया सच कहते हैं काकी की में मनहूस हु निशी सूबकते हुए कहा खबरदार जो अपने लिए तुने ऐसा कुछ कहा तो तेरे मम्मी पापा ने तुझे छोड़ दिया तो ये उनकी बुरी किस्मत जो उन्होंने इतनी प्यारी बेटी को खो दिया और कितनी बार कहा है कि उन लोगों को याद मत कर वो नहीं है तेरे प्यार के लायक ये बोल वो उसे चुप कराने लगी
रात का वक्त अम्बर टेबल पर बैठ कर एक किताब पढ़ रही थी जो उसे आज उस बूढ़ी औरत ने दिया था
थोड़ी देर पढ़ने के बाद वो गुस्से से उस किताब को बंद कर देती है गुस्से में बोली ये कैसी लड़की किसी के भी बेहकावे में आ जाती एक नम्बर की वेबकुफ लड़की थी उसकी फैमली इससे कितना प्यार करती है और ये वेबकुफो की तरहां दुसरे पर अंधा विश्वाश कर रही थी और राइटर ने इसे मासुम दिखाया है हां फिर मुंह बनाकर इसकी वजह से पता नहीं हमारी हिरोइन को कितनी तकलीफ़ झेलनी पड़ी होगी फिर घड़ी कि तरफ देख 1 बजने वाले हैं बाकी का कल पढ़ लुंगी अभी सो जाती हूं वरना वो डायन फिर से मुझे और मेरी मां पापा को सुनाने लग जाएंगी
ये बोल वो बूक को बही टेबल पर रखा और जाकर सोना के बग़ल में लेट गई उसके लेटते ही सोना उससे चिपक कर सो जाती है उसकी हरकत से उसके फेस पर एक स्माइल आ गई और वो भी आंखें बंद कर ली बस थोड़ा ही वक्त विता ही था कि उसे अचानक से बहुत तेज प्यास लगने लगती है तो वो जग देखती है जो खाली था फिर वो धीरे से सोना हाथ हटाती है और बेमन से उठ कर खाली जग उठाकर कमेरे से बाहर निकलती है
वो सीधे किचन में जा पानी पीती है और जग में पानी भर किचन कि लाइट आफ कर वहां से अपने कमरे कि तरफ चली जाती है वो जा ही रही थी कि उसे ऊपर छत से कुछ आवाजें सुनाई देती जेसे कोई किसी से बात कर रहा हो
तो क्या होगा आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए
आज के लिए इतना ही❤️🤗
Happy reading ❤️🤗
तो पहले में इन सबका इंट्रोडक्शन दे देता हूं
हेमा वर्मा ये बहत ही लालची किस्म कि औरत है और शान्ति अनाथ आश्रम कि देखभाल करती है
सोना वर्मा ये हेमा की बेटी से पर बिल्कुल उनसे उलट सब पर जान छिड़कने बाली ख़ास कर निशी पर ये निशी से दो साल बड़ी से इसलिए उसे बिल्कुल अपनी बच्ची कि तरह प्यार करती हे ये दिखने में बहुत सुंदर है सूनहेरा रंग कमर तक आती सुनेहरा बाल और सबसे सुंदर उसकी सुनहरी आंखें जो उसे और भी सुंदर बनाती है ये
निशी वर्मा ये एक अनाथ हें ये 18 साल की है और अभी कॉलेज के फर्स्ट इयर में है इसके लम्बे ब्राउन बाल जो थोड़े घुंघराले है नीली आंखें गोरा रंग गोल छोटा सा चेहरा देखने में बिल्कुल किसी डॉल जैसी
मोनिका वर्मा ये भी अनाथ हें और इसकी उम्र निशी जितनी ही है पर ये दिखाने में उतनी खुबसूरत नहीं है इसलिए उन दोनों से हमेशा जलती रहती है
अब आगे
निशी पानी का जग पकड़ कर वापस अपने कमरे की ओर जाने लगी रात अंधेरी में फैलीं शांती की बजह से उसे कुछ जानवरों को सरसराहट हल्की हल्की सुनाई दे रही थी उसका और सोना का कमरा सेकेंड फ्लोर पर था वो अपने कमरे की तरफ जा रही थी कि उसे उप्पर छत पर किसी कि बातें करने कि आवाज धीमी धीमी आवाज सुनाई दे रही थी
नीशी धीमी कदमों से उपर चली गई वो वो जैसे जैसे उपर जा रही थी वो आवाज़ भी साफ सुनाई दे रही थी वो जाकर दरवाजे के पास खड़ी हो जाती है और धीरे से देखती है तो हेमा जी किसी से बात कर रही थी और उसके पास मोना खड़ी हुई है
हेमा - देखो तूमने जेसे जेसे कहा था मेने वो सब क्या पर उस मनहूस को उसे अलग नहीं कर पाई उधर से कुछ कहा गया फिर वो बोली हां मेने उसकी याददाश्त जाने का फायदा उठाकर उसे अपनी बेटी बना लिया है तुम उसकी फिक्र मत करो और हां मेने जो कहा है उसके बारे में मत भुलना फिर उधर से कुछ कहा गया तो वो बोली तूम चिन्ता मत करो एक बार ये हवेली मेरे नाम हो जाये और मेरी बेटी उस मनहूस की जगह लेले जब देखना में उन दिनों का क्या हाल करती हुं इतना बोल वो फोन रख देती है
वहीं दरवाजे के पास खड़ी निशी उनकी बात सुन जम ही जाती है वो हकलाते हुए बोली म मतलब हो सोना इनकी असली बेटी नहीं है और में में भी अनाथ नहीं हु वो सोच ही रही थी कि उसके हाथ से जग छुट कर निचे गिर जाती है
वो आवाज़ सून वो दोनों जल्दी से सीढ़ियों के पास आते हैं तो वहीं निशी डरी सहमी खड़ी थी उसे देख हेमा जी बहुत ही गंदे तरीके से हंसने लगी तो तूझे अखीर पता चल ही गया ठीक कहा था उसने बहुत शातीर है ये लड़की सम्भाल कर रखाना पर अब क्या उनकी बात पर निशी गुस्से से बोली तु चुड़ैल कहीं कि आज तो तेरी कहानी खत्म में अभी सब कुछ सोना को बताती हूं ये बोल वो जल्दी जल्दी नीचे जाने लगी
उसे नीचे जाता देख वो दोनों के चेहरे पर एक शातिर मुस्कान आ गई फिर मोना अपनी फुर्ती दिखाते हुए जल्दी से उसे सीढ़ियों से धक्का दे देती हैं और निशी एक जोरदार चिक के साथ सीढ़ियों से लुढ़कते हुए सीधा निचे हल पर जाकर गिरि उसके सिर से बेहिसाब खुन वह रहे थे और उसकी आंखें धीरे धीरे बंद हो गई
तभी सोना के कमरे रखा नोबेल के अन्दर से एक तेज रोशनी निकली और थोड़ी देर में गायब भी हो गई
एक कमरे जो दिखने में किसी प्रिंसेस से कम नहीं था उस कमरे कि थीम pink or sky blue थी वहीं पर एक queen size bed एक लड़की मशीनो से घिरी थी उसके पास एक लड़की चेयर पर बैठी थी और उसके एक हाथ को पकड़ कर सो रही थी तभी बेड पर लेटी लड़की हाथों में थोड़ी हलचल हुई और उसकी आंखें फड़फड़ाने लगी ये मेहसूस कर वो लड़की की भी आंख खुल गई और जब वो देखती है कि बेड लेटी लड़की को धीरे धीरे होश आ राह है तो वो खुश हो कर नीचे सबको बुलाने चली गई
बेड पर लेटी लड़की की जब आंख खुलती हैं तो उसके सामने एक white selling नजर आती है और उसकी हाथ खुद बा खुद अपने सिर पर चली जाती हैं उसके सिर पर इस वक्त एक पट्टी बांधी थी और उसके दाहिने हाथ पर भी और उसके मुंह पर एक oxizen Mask लगा हुआ था
वो बड़ी मुश्किल से अपनी आंखों को इधर उधर घूमा कर देखने की कोशिश करती है और खुद से ही कहती हैं क्या मैं बच गई वो डायन और उसकी चूडेल बेटी ने तो मुझे धक्का दिया था किया सोना मुझे यहां लेकर आई हां ज़रूर उसने ही मुझे बचाया होगा बस एक बार ठीक हो जाऊं तब बताती हु उस मां बेटी को
वो अभी सोच ही रही थी कि तभी दरवाजा खुला और एक साथ बहुत सारे लोग कमरे के अंदर आ गये सब लोग उसे घेर कर खड़े हो गए उसने धीरे से अपनी oxygen mask निकला तो उसकी एक हल्की सी आह निकली उसकी आह सुन बो सब लोग परेशान हो गए
एक बुजुर्ग औरत उसके पास बैठ गई और प्यार से उसके सिर को सेहला कर बोली शिवी बच्चा आप ठीक तो हो ना आपको कहीं दर्द तो नहीं हो रहा है ना ये बेड पर लेटी लड़की जो और कोई नहीं हमारी निशी थी वो असमंजस में कभी उस औरत को देखती तो कभी बाकी सब को
तभी एक मिडिल एज औरत उसके पास आकर बोली गुड़िया देखो बच्चा मुझे पता है आप मम्मा से नाराज़ हो पर please बच्चा कुछ तो बोलो आप जो कहोगे मम्मा वहीं करेंगी हम आपको फिर कभी नहीं डांटेंगे बच्चा कुछ तो बोलो
निशी उन सब को देख बड़ी मुश्किल से बोली आ आप सब कौन है किसी की बात कर रहे हैं में कहा हु उसकी बात सुनकर सब जैसे हेरान हो गये वो मिडिल एज औरत कि आंखों से आंसु रुकने नाम ही नहीं ले रहे थे
तभी एक कड़क आवाज आई आर्यन जल्दी से डॉक्टर को बुलायो ये बोल वो उस कमरे से चला गया और उसके पिछे आर्यन भी वही दरवाजे के पास खड़ी लड़की से जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो अपने मुंह पर हाथ रख सीधे अपने कमरे में चली गई और वहां बहुत जोर से रोने लगी तभी एक लड़के ने उसके सिर को सेहलाया तो वो अपनी आंसु भरी आंखों से उस लड़के को देख तुरन्त उसके गले लग जोर जोर से रोने लगी
ये ये सब मेरी वजह से हूआ है भाई ना वो मूझसे लड़ती ना वो सीढ़ीयो से गिरती देखीये ना भाई मेरी वजह से क्या हो गया वो लड़का उसे समझाते हुए कहा नहीं बच्चा वो तो ऐसी है पर तुम तो समझदार हो ना फिर ये बच्चों जैसी बातें क्यु कर रही हो वो एक महीने से कोमा में थी इसलिए ऐसी बातें कर रही है
तभी एक लड़का अन्दर आया और बोला अभय भाई मेने डॉक्टर को कॉल कर दिया है वो बस पांच मिनट में आ रहे
अभय हम में जवाब दे वहां से चला जाता है फिर आर्यन उस लड़की के पास आकर उसे गले से लगा कर कहता है अनु तुझे भी पता है इसमें तेरी कोई ग़लती नही है तू रो मत वैसे भी उस नोटकी को सबको परेशान करने में मजा आता है इसलिए फिर से शुरू हो गई होगी समझी अब तो मत कल तेरा रोका हे रुद्र तूझे ऐसे देखेगा तो भाग जायेगा भाई ये बोल अनु उसे मारने लगती है
वहीं निशी के कमरे में जब वो बुजुर्ग औरत ये सब सुनती है तो बो सबको बाहर चलने के लिए कहती हैं और निशी से कहती हैं गुड़ियां आप ज्यादा मत सोचो बस आराम करो अभी डॉक्टर आते ही होंगे ठीक है निशी भी बस हां मैं सिर हिला देती है फिर वो सब उसे एक नजर देख वहां से चले जाते हैं
उनके जाते ही निशी बड़ी मुश्किल से उठती है और इधर उधर कुछ ढूंढने लगती जल्दी ही उसे टेबल फोन मिल जाता है वो जल्दी से उसमे अपना चेहरा देखती है तो शोक हो जाती है क्योंकि उसकी आंखों को छोड़ कर उसका पूरा चेहरा ही बदल गया था वो फोन को झटक कर खुद से ही बोली ये ये कौन से ये मेरा चेहरा तो नहीं है ना ही में इस जगह को जानती हु में में कहा हु वो लग भग पैनीक करने लगती है
तभी अचानक से पुरे कमरे धुआं फैलने लगता है और धीरे धीरे एक परछाई उसके सामने आती हैं उस परछाई को देख निशी और हैरानी से कहती हैं दादी आप यहां क्या कर रहे हैं ये वही बूढ़ी औरत थी जो निशी को उस दिन मिली थी
बूढ़ी औरत बोली में यहां तुम्हें तुम्हारा यहां आने का मकसद बताने आईं हु
निशी - मकसद कैसी मकसद और मैं कहां हूं और ये शरीर किसका है
बुढि औरत - ये एक नोवेल की दुनिया है जो किताब मेंने तुम्हें उस दिन दिया था बस उस किताब को तुम्हें बदलना है
निशी - बदलना है क्या बदलना से है और में ही क्यों बदलू please दादी मुझे कुछ नहीं बदलना मुझे मेरी सोना के पास जाना मुझे उसके पास ले चलो
बुढि औरत - अगर तुमने इस काहानी को एक खुबसूरत अंत दे दिया तो तुम खुद ही अपनी दुनिया में पहुंच जायोगी
निशी - मतलब में कुछ समझी नहीं
बुढि औरत बोली सब समझ जाऊगी पर याद रखना सिर्फ छे महीने है तुम्हारे पास इतना बोल लौ बुढ़ि औरत फिर से गायब हो गई
आज के लिए इतना ही byyyyy🤗🤗😍🥰💖😘
Thanks for reading 💖😘❤️🥰😍🤗🥰💖
आह ये दादी फिर कहा गायब हो गई और ये क्या बोल कर गई कहानी किताब अन्त बदलना है और गड़ कुछ समझ नहीं आ रहा फिर कुछ सोच कर एक मिनट में उस कहानी के अन्दर तो नहीं हु जो में सीढ़ियों से गिरने से पहले पढ़ रही पर मेने तो पूरी कहानी ही नहीं पढ़ी अब क्या करूं पहले मुझे अभी ये सिचुएशन समझनी होगी याद कर निशी आरे हां वो दादी जैसी दिखने वाली औरत बोल रही थी में यानी के ये लड़की एक महीने तक कोमा में थी और इस काहानी में कौन कोमा में थी
No no noये नहीं हो सकता में इस कहानी की villan के बड़ी में हु जो हमेशा हिरोइन को परेशान करती है पर वो हिरोइन तो इसकी बहन है ना गोद ली हुई मगर बहन तो है पर वो सब छोड़ अब ये सोच की मुझे क्या करना होगा फिर कुछ सोच कर आरे यार मेने तो पुरी कहानी ही नहीं पढ़ी पर कोई बात नहीं अब मैं पूरी करुंगी इस कहानी को अपने स्टाइल में इतना बोल वो कुछ सोचने लग जाती है
तो आइए जान लेते इस कहानी के सभी सदस्यों से के बारे में
अनन्या मेहता इस कहानी की हिरोइन और मेहता फैमिली कि गोद ली हुई बेटी दिखने बहुत सुंदर है बिल्कुल परी कि तरह और मासुम भी
रूद्र सिसोदिया ये है सिसोदिया खानदान के छोटे बेटे और इस कहानी के हीरो
शिवन्या मेहता मेहता परिवार की छोटी बेटी दिखने में सुंदर पर थोड़ी बिगड़ी हुई है और इस कहानी कि villainess भी
मेहता परिवार
दादी- माला मेहता
इनके दो बच्चे हैं बड़ा बेटा
पापा - शिवराज मेहता
मां - वानी मेहता इनके तीन बच्चे हैं
बड़ा बेटा - अभय मेहता 26 साल
गोद ली हुई बेटी - अनन्या मेहता 21साल
छोटी बेटी - शिवन्या मेहता 18साल
चाचा - प्रकाश मेहता
चाची - मीना मेहता
बड़ा बेटा - आर्यन मेहता 24साल
बेटी - नीयती मेहता 21 साल
नोबेल की कहानी कुछ ऐसी थी जब शिवन्या दस साल की थी तब एक एक्सीडेंट की वज़ह से उन्हें अनन्या मिली जब पता चला कि वो अनाथ से तो उसे मेहता परिवार गोद ले लिया पर जब शिवन्या थोड़ी होने लगी बड़ी तब धीरे धीरे सब बदलने लगा कुछ लोगों के वेहकाबे में आ कर वो धीरे धीरे अनन्या को निचा दिखाने लगी पर फिर भी अनन्या ने कुछ नहीं कहा पर उसके परिवार वालों को ये सब अच्छा नहीं लगता था वो उसे हमेशा डांट दिया करते थे जिसमें वो और भी अनन्या से नफ़रत करने लगी
ऐसे ही एक दिन उसने रूद्र को देखा और उसे देखते ही वो उसके पीछे पड़ गई पर रूद्र को अनन्या पसंद थी फिर जब उसे पता चला कि अनन्या और रूद्र का रोका होने वाला है तो वो आ गई अनन्या से लडने और उसे इतना गुस्सा आया कि वो अनन्या को घर से बाहर निकलने वाली थी पर लड़ते हुए ही सीढ़ियों से गिर गई और अभी होश में आई ये सब सोच कर निशी एक आह भरती है और कहती अगर सब कुछ पहले जैसा करना है तो मुझे सबकुछ भूलने का नाटक करना ही पड़ेगा वो सोच ही रही थी कि फिर से एक बार दरवाजा खुला और डॉक्टर के साथ पुरा परिवार अन्दर आया
(अब निशी का नाम शिवी है इस कहानी में)
शीवी एक आह भरी और बोली अब आगे इस कहानी में क्या हुआ था ये तो मेने पढ़ी ही नहीं और लगता है मेरा रिबर्न भी उसी दिन हुआ है अब मैं क्या करूं जाहां तक मुझे लगता ये जो इस कहानी की हिरोइन है ये जरूर अपना रोका रोक देगी जिस वजह इसका हिरो फिर से मेरे उप्पर ही चढ़ेगा फिर बच्चों कि तरहां रोते हुए बोली प्लीज़ भोलेनाथ मुझे नहीं रहना यहां मुझे मेरी सोना के पास जाना है इस चुड़ैल से बदला लेना है पता नहीं क्या हाल हुआ होगा मेरी सोना का भोलेनाथ मेरे वहां आने तक प्लीज़ मेरी सोना का ख्याल रखना
तभी दरवाजा खुला और इस उन सबके साथ डॉक्टर भी थे शिवि फिर से सबको अपनी अंजनी नजरों से देखने लगी ये देख फिर से सब घर वालों के दिल में एक टीस सी उठी पर सब ने खुद को सम्भाल लिया
तभी दीदी उसके पास गई और बोली बेटा ये डॉक्टर अंकल से ये बस तुम्हें चेक करेंगे तो इनसे डरना मत ठीक है बच्चा तो शिवी ने बस अपना सिर हिलाया फिर सब बहार चले गए थोड़ी देर चेक करने के बाद डॉक्टर भी बहार निकले और बोले घबराने की कोई बात नहीं है वो बिल्कुल ठीक है पर पर क्या डॉक्टर दादी ने कहा तो
डॉक्टर ने कहा ज्यादा ऊंचाई से गिरने कि वजह से उनके दिमाग पर गहरी चोट लगी थी उसकी वजह से हो सकता है कि उनकी कुछ यादें उनकी दिमाग से निकाल गया हो पर डॉक्टर वो तो हमें से किसी को भी नहीं पहचान रही है वानी जी ने नम आंखों से कहा तो डॉक्टर ने आगे कहा आप ज्यादा मत सोचिए वो एक महीने से कोमा में थी तो उसके ब्रेन को थोड़ा टाइम लग रहा है सब कुछ समझ ने में कभी मेंने उसे दवाई दे दिया है हो सके तो उसे आप लोग रेस्ट करने दे में कल फिर से आ जाउंगा उसे चेक करने में बोल वो वहां से चले जाते हैं और बाकी सब लोग भी एक नजर शिवी को देख अपने अपने कमरे में चले जाते हैं
उधर शिवी सोच रही थी कि आगे क्या करें वो ध्यान से बस उसने जीतनी दूर इस कहानी को पढ़ा था उसे सोच रही थी तभी उसे कुछ याद आता है और वो खुद में कहती तो कल से शुरू करते हैं असली ड्रामा में बोल वो आगे क्या करना है वो सोचती है और सोचते सोचते ही वो सो जाती है
स्टडी रूम में अभय और आर्यन बैठे थे
भाई आपको क्या लगता है वो नाटक कर रही या फिर सचमे उसकी याददाश्त जा चुकी है आर्यन ने अभय की तरफ देख कर कहा तो अभय ने कहा पता नहीं छोटे अगर ये उसकी कोई चाल है अनू की शादी रोकने का तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा
पर भाई इसमें उसकी कोई ग़लती नही आप तो जानते हो ना वो बचपन से ही attention seeker है अचानक अनु के आ जाने से हम सबका एटेंशन बंट गया तो उसका ऐसा बिहेव करना तो बनता है आर्यन ने कहा तो
पर हम ये भी नहीं भुल सकते कि अनु की ये हालत हमारी बजह से दुनिया वालो और उसे लगता है कि वो अनाथ हे इसलिए हमने उसे गोद लिया है पर सच्चाई तु भी अच्छे से जानता है उसकी इस हालत के पिछे भी उसका ही हाथ है अभय ने बिना किसी एक्सप्रेस के कहा
उसकी बात पर आर्यने ने भी कहा पर भाई उस टाइम वो भी बच्ची थी सिर्फ दस साल की थी वो बस मुझे इस बारे में और बात नहीं करना बहुत लेट हो गया है जाकर से जा अभय ने कहा तो आर्यन चुप चाप वहा से अपने कमरे में चला गया
अगली सुबह खिड़की से आती धुप सीधे शिवी के चेहरे पर पड़ी जिससे वो कसमसाने लगी उसने धीरे से अपनी आंख खोली तो उसे अपने आस पास किसी के होने का एहसास हुआ तो उसने नज़रें इधर उधर घूमाकर देखा तो उसके एक साइड शिवराज जी और दूसरे साइड वानी जी सो रही थी उनके पास मीना जी और शिवराज जी के पास प्रकाश जी सो रहे थे
वहीं सोफे पर आर्यन और उसके पैर के पास नियती हो रही थी सब उसके ही कमरे में थी सिवाय अभय और अनन्य को छोड़ कर क्युकी वो दोनों इसके उठने से पहले ही चले गये थे
इन सब को देख शिवी मन ही मन कहती ये सब यहां क्या कर रहे हैं क्या कर रात में सब यहां सो रहे थे ये देख कर उसके आंखों में पानी आ जाता है पर वो खुद को संभालती है और विना जी के सिर को सहलाने के लिए जेसे ही हाथ बढ़ाती है उसकी मुंह से एक हलकी सी चीख निकल जाती है जिससे सबकी आंखें खुल जाती है पर तभी सबको एक और चीख सुनाई देती तो देखते हे तो नियती सोफे से निचे पड़ी हुई थी और अपनी कमर को सहला रही थी
आर्यन जो शिवी की चीख हड़बड़ी में उठने लगा तो उसने गलती से नियती को एक रात मार दी जिससे वो धम से निचे गिर गई कोई कुछ कहता उससे पहले सबको शिवी की ज़ोर ज़ोर से हंसने की आवाज आई तो सब उसे ही देखते रह गए सब की आंखें थोड़ी नम हो गई एक महीने से जैसे इस घर में जान ही नहीं थी अब जैसे फिर पहले जैसा ही हो रहा था
सबको यु खुद को देखते देख वो हंसना बंद कर देती है और फिर अपनी नीली आंखों से टुकुर-टुकुर सब को देख अपनी क्यूट सी आवाज में बोली आप सब मुझे ऐसे क्यूं देख रहे हो अगर मेरी क्यूटनेस को आप सब की नजर लग गई तो उसकी बात सुन सब हंसने लगे सिवाय आर्यन और नियती के वो दोनों एक बार एक दूसरे को देख कमरे से बाहर निकल गये
उनको जाते देख शिवी बुरा तो लगा पर उसने अपने फैंस पर कुछ सों नहीं होने दिया तभी विना जी ने उसके चेहरे पर अपने दोनों हाथ रख बोले अब कैसी है मेरी बच्ची कहीं दर्द तो नहीं हो रहा है ना उनकी बात पर शिवी ने बस ना में अपना सिर हिलाया और हिचकते हुए कहा म मम्मा तो विना जी प्यार से उसे देखते हुए कहा हां मेरा बच्चा उनके मुंह से ये सुन शिवी की आंखें भर आईं और उसने विना जी गले लगा लिया
उसे इस तरहां सिसकते हुए देख बाकी सब डर गये तभी मीना जी भी उसके सिर को सहलाते हुए बोले क्या हुआ मेरी छोटी गुड़ीया को उनकी बात सुन शिवी उन्हें देखकर बोली छोटी मां आर्य भाई और नियू दी मुझसे नाराज़ हैं और भैयू और अनु कहा है मेने कल से उन्हें नहीं देखा क्या वो दोनों भी मुझसे नाराज़ हैं पर मेने तो इस बार कुछ भी नहीं क्या
उसकी बात सुन सबको थोड़ी हेरानी हुइ पर किसी ने कुछ नहीं कहा फिर विना जी बात सम्हालते हुए कहा बच्चा आपको तो पता ही है के आपके भैयू कितना बिजी रहते हैं और अनु को तो आप जानते हो वो आपको ऐसे देखेगी तो रो रो कर अपनी तबीयत ख़राब कर देगी
और रही बात उन दोनों की तो आज तो मैं अच्छे से उनकी खबर लुंगी कैसे उन्होंने मेरे प्रिंसेस को इग्नोर कर दिया प्रकाश जी ने थोडे नोटकी करते हुए कहा तो शिवी फिर से मुस्कुराने लगी और फिर विना जी उसे फ्रेस होने में मदद करने लगी और बाकी सब नीचे चले गए
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सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे विना जी और मिना जी सबको खाना सर्व कर रहे थे वहीं विना जी कि नजर बार बार सीढ़ियों कि तरफ देख रहे थे
मां आप बेकार में इन्तजार कर रहे हैं उसका ड्रामा अब खत्म हो गया है और उसे जो चाहिए था वो भी मिल चुका है तो आप नाश्ते पर ध्यान दें अभय ने बिना किसी को देखें अपना नाश्ता करते हुए कहा उसकी बात पर कोई कुछ कहता तभी सबको एक प्यारी सी आवाज सुनाई देती है
मम्मा जल्दी से खाना दे दो बहुत भूख लगी है शिवी जल्दी जल्दी सीढीयो से उतर रही थी इस वक्त उसने एक blue colour ki knee length dress पहनी थी जो उसके घुटनों तक आ रही थी नोबेल में रिवर्थ होने के बजह से उसे वाकयों के मुकाबले दर्द नहीं हो रहा था वैसे भी उसने कल से कुछ नहीं खाया था तो उसे अब सिर्फ खाना ही नजर आ रहा था
उसे इस तरहां निचे आता देख अभय का चेहरा और सख्त हो गया उसे सच में सब कुछ उसका एक नाटक ही लग रहा था वो अनु का डरा हुआ चेहरा देख कर कहा don't worry about her ये भी उसका एक ड्रामा ही था उसकी बात पर अनु कुछ कहती उससे पहले ही शिवी निचे आ गई
गुडमॉर्निंग मम्मा वो आते ही विना जी के गले लग कर बोली तो उसे ऐसे देख सब हैरान रह गए खुद विना जी भी हैरान हो गई पर वो अपनी हैरानी छुपाते हुए बोली very good morning बच्चा
लगता है अब तुम्हें हमारी जरूरत नहीं रही हां अब हम बुढ़ि जो हो गये है इतना बोल वो अपना मुंह फुला लेती है तो वहीं सब दादी जी को हैरान नजर से देख रहे थे
शिवी भी उन्हें अपने गले से लगा लेती है और कहती हैं आप तो मैरी जान ही मेरी प्यारी दादी इतना वो उनके गालों पर एक किस कर देती है और फिर सबको बारी बारी विश करती है तो सब उसे मुस्करा देखते हैं सिवाय अभय, आर्यन और नियती को छोड़ कर वो तिनों ना ही उसकी और देखते और ना ही उसे कोई रिप्लाई करते हैं
पर वो अपने उदासी को छुपा कर दादी के लेफ्ट साइड चेयर पर बैठ गई वहीं उसके राइट साइड चेयर पर अनु बैठी थी और उसके पास अभय शिवी ने एक नजर उन सबको देखा तो वो लोग चुपचाप अपना नाश्ता कर रहे थे
विना जी उसके प्लेट पर आलु का पराठा रख बोली बच्चा देखो आज ममा ने आपका फेवरेट आलु का पराठा बनाया है आपको पसंद हैं ना ये सुन उसने बस हल्के से मुस्कुरा दी और मेने तुम्हारी फेवरेट गाजर का हलवा बनाया है तुम्हें पसंद है ना मेरे हाथ का हलवा ये बोल मिना जो भी गाजर का हलवा सर्व कर दिया ये देख उसके होंठों पर एक गहरी मुस्कान खिल गई
मुझे सिर्फ आपके हाथ का खाना नहीं आपके हाथ से खाना खाना भी पसंद है छोटी मां शिवी की बात सुन उनके आंखों में हल्की नमी तेर गई वो जल्दी से एक निवाला उसको खिला कर बोली मुझे पता है इसलिए तो में हमेशा तुझे अपनी हाथों से ही खिलाती हु
ये देख जाहां सब खुश थे वहीं अयभ का ग़ुस्सा बढ़ने लगा था उसे फिर से ये सब उसकी चाल लग रही थी तुम ये सब करके क्या साबित करना चाहते हो उसका गुस्सा आखिर कार बाहर निकल ही गया क्योंकि शिवी हमेशा ऐसा ही करती कुछ दिन सबसे प्यार से बात करना और फिर ऐसे इग्नोर करना जेसे इस घर में उसके अलावा कोई और भी है वहीं ये सून शिवी असमंजस में उसे देखने लगी
में कुछ समझी नहीं भा उसकी बात पुरी होने से पहले ही वो गुस्से से चिल्ला कर कहा don't say a word Shivanya उसकी आवाज और लाल आंखें देख शिवी एक पल के लिए कांप गई उसने कस कर मिना जी का हाथ पकड़ लिए ये देख कर उन्होंने उसे कस कर अपने गले से लगा लिय
उसकी की बात पर शिवराज जी ने गुस्से से कहा अभय ये क्या तरीका है अपनी छोटी बहन से बात करने का पापा बस बहुत हुआ आप सब की बजह से ये इतना बिगड़ गई है अगर उसे लगता है कि आप सब की तरहां में भी इसके ड्रामें को सच मान लुंगी तो ये ग़लत है और तुम वो शिवी की तरफ उंगली पएन्ट कर बोल तुम्हें जो चाहिए था मिल गया ना सबका प्यारा, अटेंशन तो अब खुश रहो और हम सबको भी शान्ती से रहने दो और अगर तुम सोच रहे हो कि ये सब करके तुम रुद्र को हासिल कर सकते हो तो तुम गलत हो ये सुन अनु उसके हाथ पर हाथ रख उसे शान्त करती है
तो अभय उसके हाथ को दुसरे हाथ से पकड़ बोली नहीं अनु आज मुझे कहने दो अगर आज मेने नहीं कहा तो इसकी बदतमीज बढ़ती रहेगी फिर एक नजर शिवी की तरफ देखा जो अभी भी सिर झुका कर बैठी हुई थी ये देख उसके दिल में हल्का सा दर्द हुआ पर वो ये सब इग्नोर कर आगे कुछ कहता कि सबको दादी की रोबदार आवाज सुनाई दी बस बहुत हुआ अब कोई एक शब्द भी नहीं बोलेगा वरना उसे इसी वक्त इस घर से बाहर फिंकवा दुंगा भुलो मत ये घर आज भी मेरी है
फिर शिवी के सिर पर हाथ रख बोली गुड़िया तुम उसकी बात का बुरा मत मानना वो तो बस इट्स ओके दादी में ठीक हु और मेरा पेट भी भर अब मुझे थोड़ा आराम करना है ये बोल शिवी ने बड़ी मुश्किल से खुद के आंसु को बहने से रोका और जल्दी ही अपने कमरै की ओर चली गई शिवी को ऐसे जाता देख सब को काफी बुरा लगा पर अभय ने बिना उसकी तरफ देखे सीधा विला से बाहर चला गया और उसके पिछे आर्यन भी जाने लगा
आज के लिए इतना मिलते नेक्स्ट पार्ट पर..............🤗
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thanks for reading 🤗🤗🤗😘😘🥰🥰
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शिवी बड़ी मुश्किल से अपने आंसु को सम्भाल कर ऊपर अपने कमरे में चली गई और बेड पर लेट कर रोने लगी उसे लगा था अब शायद उसे एक फैमिली का प्यार मिलेगा पर वो शायद गलत थी वो अपने आंसु पोंछ कर कहती सिर्फ छह महीने मुझे जींस काम केलिए भेजा गया बस वो ख़तम कर के में भी अपने सोना के पास चली जाउंगी सिर्फ वही एक से जो मुझे से प्यार करती है इतना वोल वो फिर से रोने लगी
रात का वक्त सब अपने अपने कमरे में सोने चले गए थे पर शिवी ने ना ही कुछ खाया और ना ही अपने कमरे से बाहर निकली सब लोगों ने उसे बहुत बार बुलाने की कोशिश कि पर उसने ना ही दरवाजा खोला और ना ही कोई जवाब दिया वो सब भी तक हार बिना खायें सोने चले गए शिवी जो अभी तक बेड पर लेटी हुई थी उसे वहां घुटन होने लगी तो अपने कमरे से निकल कर चुपचाप बाहर गार्डन में चली गई
वो आज पहली बार इस रूम से बाहर निकली थी वैसे दो ही दिन हुए थे उसके रिवर्न को वो गार्डन को देखती है तो देखती ही रह गई गार्डन में दो सेंक्शन के थे और दोनों के बिच एक प्यार सा फाउन्टेन भी था जिस वज़ह से उसे और एक गार्डन नहीं दिखी उस फाउन्टेन के पानी में रंग बिरंगी मछलीया थी जो शिवी ने ही वहां पर रखे थे और कुछ फल लगे हुए वो सारे फल शिवी के पसंद के थे जीतन भी फुल थे फैमली मेंबर के पसंद के हिसाब थे और वहां पर बैठन के लिए सोफे कुर्सी और टेबल भी थे वो हर तरफ देखती है तो वाहा उसे अपने पसंद के फुल नहीं मिलते वाहा पर ज्यादा तर लाल और सफेद गुलाब के फुल थे जो अनु और नियती को पसंद थे अनु को सफेद गुलाब तो नियती को लाल गुलाब पसंद थे और और फुल थे जो सिर्फ पूजा के लिए थी और शिवी को नीले रंग के फूल ही पसंद थे
ये देख शिवी सेठ हो गई उसने नोबेल में पढ़ा था कि अनु आने से पहले इस जगह पर सिर्फ उसके पसंद के ही फुल थे और निशी बिल्कुल शिवी जैसी ही थी उसे यही लगता था कि राइटर ने उसको देख कर ही शिवी का केरेक्टर वनाया है
शिवी उदास हो कर वहीं मछलीयो के पास बैठ कर उनके साथ खेलने लगती है तभी उसकी नज़र अपने राइट साइड जाती है तो वो खुश हो हैरान दोनों ही हो गई दुसरे साइड भी एक गार्डन थी जो इस गार्डन जीतना ही बड़ा था पर फर्क सिर्फ इतना था कि यहां पर सिर्फ blue colour ke flowers ही थे यहां पर हर फुल blue colour का था चाहे वो ग़ुलाब हो orchid हो लोटस हो या फिर लीली हो उन सबके बीच में एक झूला था जिसे artificial flowers से डेकोरेट क्या हुआ था

शिवी ये देख खुशी से उछल पड़ी और दौड़ कर झुले पर बैठ गई उसे इस जगह पर एक अलग ही सुकुन मिल राहा वो वहां पर बैठ कर एक टक चांद को देखने लगी क्युकी निशी को चांद को देखना अच्छा लगता था
अभय और आर्यन जो अब आफिस से लोट रहे थे उनकी नजर भी शिवी पर चली शिवी को ऐसे उदास देख अभय को अब खुद पर गुस्सा आ रहा था आज तक उसने शिवी की इतनी गलती करने के बाबजूद उससे एक शब्द तक नहीं कहा पर पता नहीं उससे आज उसने अपना गुस्सा उस पर निकल दिया वो ये सोच उसकी तरफ बढ़ गया पर अनु को उसके पास जाता देख उसके कदम वही पर रूक गये
शिवी जो एक टक चांद को देख रही उसे भी नहीं पता चला कब उसके आंख से आंसु बहने लगे थे तभी किसी हाथ अपने चेहरे पर मेहसूस कर वो अपनी सिर घूमा कर देखती है तो अनु उसके पास बैठी थी और उसके हाथ में उसका फेबरेट रेडसस पास्ता था जो वो खुद उसके लिए बना कर लाई थी उसे देख वो अपना सिर घूमा फिर से चांद को देखने लगी क्युकी उसे अनू को देख सोना की याद आ रही वो भी उसे मनाने के लिए ऐसा ही करती थी
क्या तुम अभी भी मुझसे नाराज़ हो फिर वो अपनी कान पकड़ कर उसे कहती हे सरी मेरी बजह से तुम्हें इतनी छोटी आई प्लीज़ मुझे माफ़ करदो छोटी ये बोलते बोलते उसकी भी आख भर आईं थीं वहीं अभय जो उनसे बस थोड़ी दूर पर खड़ा हो कर उनकी बातें सुन रहा था उसे लगा शिवी फिर से उसके उपर चिल्लायेगी क्युकी आज उसने अनु की वजह से ही पहली बार उस पर गुस्सा क्या था पर शिवी की बात सुन उसके पेर वहीं जम गये
तुम्हें माफी मांगने की जरूरत नहीं जेसे भा नहीं मिस्टर मेहरा ने कहा कि हमेशा की तरहां गलती मेरी ही होगी पर मजे की बात क्या बताऊं मुझे तो मेरी ग़लती भी याद नहीं है शायद मेने तुम सबका बहुत दिल दुखाया है इसलिए तो दो दिन से कोई भी मुझसे बात भी नहीं कर रहा है पर I promise में आज से तुम चारों के सामने भी नहीं आउंगी वरना क्या पता मिस्टर मेहरा को मेरे चेहरे को देखा कर ही गुस्सा आ जाएं ये उसने रुंधे गले से कहा और वहां से उठ कर जाने लगी
अभय आर्यन और नियती जो पेड़ के पिछे छिप कर उनकी बाते सुन रही थी उसकी आंखों में भी आंसु आ गये और वो वहां से अपने कमरे में चली गई
वहीं अनु ने कहा कर उसका हाथ पकड़ लिए और वापस बिठा कर कहा तुम्हें जिनसे अपनी नाराज़गी दिखानी दिखाऊं पर खाने से नहीं तुमने सुबह से कुछ नहीं खाया है प्लीज़ खाने पर तो अपना गुस्सा मत निकालो उसकी बात सुन शिवी थोड़े रुके स्वर में कहा मुझे भूख नहीं है तभी उसके पेट से आवाज आई तो उसने उसे थोड़ा सा उसे गुदगुदी करते हुए कहा हां सुनाई दे राह है कि तुम्हें कितनी भूख लगी है और कितनी नहीं ये बोल उसने हल्का सा उसकी नाक को खिंचा तो एक आह के साथ उसकी मुंह खुल गई तो अनु ने जल्दी से उसे मूंह से पास्ता का एक चम्मच भर दिया
ये देख शिवी की आंखें एक बार फिर नम हो गई क्योकि सोना वो जब भी खाने में नखरे दिखाती या फिर रुठ ख़ाना नहीं खाती थी तो उसे हमेशा ऐसे ही खिलाती थी उसकी नम आखे देख अनु परेशानी होती हुई बोली क्या हुआ छोटी ज्यादा तिखा है पर मेने तुम्हारे हिसाब से ही मिर्ची डाली थी नहीं बस मुझे किसी अपने की याद आ गई अपने की किस अपने की शिवी की बात पर अनु ने उसे कन्फ्यूजन में देखा तो उसने कहा कुछ तुम खिलाऊं ना बहुत भूख लगी है उसने क्युट सी फेस बनाकर कहा तो अनु के होंठों पर भी एक स्माइल आ गई और वो ऐसे ही उसे खिलाने लगी
वहीं उनसे थोड़ी दूर खड़े अभय और आर्यन के होंठों पर भी एक मुस्कान आ गई और वो दोनों भी मेनशन के अंदर चले गए वहीं बाकी सब भी अपने अपने खिड़की से ये नजारा देख रहे थे उनके आंखों में भी आंसु थे ये खुशी के आंसु थे
आज के लिए इतना ही मिलते अगले पार्ट पर 🤗🤗😘😘🥰💖💕💕❤️💖💖
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ख़ान खाने के बाद शिवी ने किचन में अपने मुंह हाथ धोएं और फिर जाने लगी तभी उसकी नज़र डाइनिंग टेबल पर गई जाहां सारा खाना वैसे का वैसा ही था ये देख वो हिचकिचाते हुए अनू से बोली तुमने ख़ान खाया तो अनु मुस्कुराते हुए बोली जब इस घर की लाडली ने सुबह से कुछ नहीं खाया तो तुम्हें क्या लगता है बाकी सब आरम से खा कर सो रहे हैं
इसका मतलब सुबह से किसी ने भी ख़ान नहीं खाया जी नहीं अनु ने कहा तो शिवी फिर से रोने लगी उसे देख अनु को वो छोटी शिवी याद आ रही थी जो इस घर बिगड़ी हुई शेखजादी थी जो ऐसे ही छोटी छोटी बात पर रो देती थी ताकि सब उसके आगे पीछे घूमते हुए मनाने लगे ये देख वो ना में अपना सिर हिला कर बोली अभी भी बच्ची है
तुम जा कर सबको बुला कर लाओ में ख़ान गर्म कर देती हूं तो शिवी ने कहा नहीं तुम जाकर सबको बुला कर लाओ में ख़ान गर्म कर देती हु और वैसे भी तुमने भी कुछ नहीं खाया ये सुन अनु सबको बुलाने चली गई और शिवी सारा खाना गर्म करने लगी
थोड़ी देर बाद सब डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और विना जी मिना जी और शिवी टेबल पर खाना लगा रहे अब तक दस बज गए थे तो सारे सर्वेंट्स जा चुके थे शिवी ने विना जी और मिना जी को बैठाते हुए कहा मम्मा छोटी मां आप दोनों भी बैठो में ख़ाना सर्व करुंगी और सबको खाना सर्व करने लगी पर उसने अभय आर्यन और नियती की तरफ एक बार भी नहीं देखा और ऐसे ही ख़ान सर्व करने लगी थोड़ी देर बाद सब खाना खा कर अपने कमरे मे चले गए वहीं अभय शिवी से कुछ कहने ही वाला था उससे पहले शिवी वहां से चली गई क्युकी उसे अभी तक लग रहा था कि अभय के सामने भी वो रही तो वो फिर से गुस्सा करेगा और आज सुबह से ही वो अभय से बहुत डर गई थी
और ऐसे ही देखते देखते एक हफ्ता गुजरा गया इस बीच शिवी बिल्कुल ठीक हो गई थी और अभय आर्यन और नियती बात तो दूर उनके सामने भी नहीं जा रही थी वहीं अनु जबरदस्ती उससे बातें कर रही थी जिससे वो भी उसके कुछ बातों का जवाब दें देती थी उससे ही वो खुश हो जाती थी बात वो तीनों ने करने कि बहुत कोशिश कि पर शिवी उनको देख कर ही अपना रास्ता बदल लेती थी और उनके जाने के बाद ही कमरे से बाहर निकलती थी और उनके आने के बाद वो अपने कमरे में ही रहती थी
सब को ये सब अच्छा तो नहीं लगता था सब जानते थे कि इस बार शिवी जो कर रही है बिल्कुल सही कर रही इसलिए बाकी सब भी बस चुपचाप सब कुछ देख रहे थे
एक हफ्ते बाद, रात के करीब एक बज रहे थे तभी शिवी के कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और एक लम्बी परछाई धीरे से अंदर आया वो परछाई जैसे ही अन्दर आया तो वो हैरान रह गया क्योंकि कि बेड पर शिवी सो रही थी और उसके अगल बगल नियती और अनू सो रहे थे और वो तीनों बिल्कुल एक दूसरे से चिपक कर सो रहे थे तभी अचानक कोई अभय से टकरा जाता है तो वो शख्स चिल्लाता उससे पहले अभय उसके मुंह पर हाथ रख उसे घुर कर देखता है तो वो शख्स बस अपना दांत चमका देता और ये महाशय हमारे आर्यन बाबू थे वो भी यहां शिवी को देखने आये थे
अनु और नियती एक हफ्ते से रोज शिवी के सोने के बाद आकर उसके साथ ही सो जाते थे और वही अभय और आर्यन रोज रात को उसे देखकर ही सोने जाते थे क्योंकि वो मुस्कील से ही उसे देख पाते थे वो दोनों उन तीनों के माथे पर किस करते हैं और उन्हें अच्छे से ब्लाककेट से ढक कर वहां से चले जाते हैं
अगली सुबह सुरज कि किरने खिड़की के पर्दों से छन कर उन तीनों के चहरे पर पड़ती है तो शिवी कसमसा कर अपना मुंह नियती के गर्दन में छुपा देती और खुद को ब्लाककेट से कमर कर देती है जिससे नियती की आंखें खुल जाती है और अनु भी उठ जाती तो वो दोनों धीरे से बेड से उठते हैं और अपने कमरे में चले जाते हैं उनके जाने के बाद शिवी की भी आंख खुल जाती है और वो ब्लाककेट से अपना चेहरा निकल कर उस और देखती जाहां से वो दोनों गय थे उसे सब पता था कि वो चारों हर रोज उसके होने के बाद उसके कमरे में आते पर फिर भी उसे अभी डर लगता था कहीं वो लोग फिर से उसे इग्नोर करने ना लग जाए
आज अनु और रूद्र का रोका था और रात को सगाई तो आज सुबह से ही सब तैयारीयो में लगे हुए थे शिवी फ्रेश होकर निचे आती है तो पुरे घर को इस तरहां सजाते देख कन्फ्यूज़ होकर शिवराज जी से पूछती है पापा ये किस चीज की तैयारी कर रहे हैं आप सब लोग क्या आज कोई function है घर में नहीं बच्चा लगता है आप भुल गए आज अनु और रूद्र का रोका होने बाला शिवराज जी ने कहा तो बाकी सब की सांसे थम गई अनु की तो सांस लेने में दिक्कत होने लगी सब कुछ पल के लिए भुल ही गए थे कि शिवी की याददाश्त चली गई है
ये सुन शिवी ने बस हां अपना सिर हिलाया और सोफे पर बैठ गई और बोली मम्मा खाना तो बाकी सब हैरानी से उसे देखने लगे जेसे कोई अजूबे को देख रहे हो क्युकी सब लगा था कि अब शिवी कोई ना कोई तमाशा जरुर करेगी पर उसे तो जैसे अपने खाने के अलावा कुछ और दिखाई ही नहीं देता
तभी विना जी उसे ज्यूस का ग्लास देते हुए बोली हां पता मेरी बच्ची को सिर्फ उसका खाना ही प्यारा है पहले इससे अपने अंदर के अजगर को शांत कर लो नाश्ता बस बन रहा है ये सुन सब ठाहाका मार के हंसने लगे तो शिवी के मूंह बन गया और वो मूंह बनाते हुए ज्यूस पीने लगी फिर उसे कुछ याद आया तो वो चिल्लाती हुई बोली पापा तो उसका चिल्लाना सून सब एक पल के लिए डर ही गए
शिवराज जी जो किसी को कुछ समझा रहे थे वो तुरंत उसके पास दौड कर आए और उसके सामने घुटने पर बैठ बोले क्या हुआ बच्चा आप चिल्लाई क्यूं आपको अभी भी कहीं दर्द हो रहा है ये सून अभय जल्दी से बोला आर्यन जल्दी से डॉक्टर को फोन कर
अरे नहीं पापा वो में बिल्कुल ठीक हु आप फिर से निचे बैठ गई जल्दी से उठीये बच्चा अगर आपको कहीं दर्द नहीं हो रहा है तो आप इस तरहां चिल्लाइ क्यूं प्रकाश जी ने कहा तो शिवी कुछ याद करते हुए बोली वो पापा अभी अपने क्या कहा मेने ठीक से सुना नहीं वो मुझे सिर्फ मेरा खाना ही नजर आ रहा था ना ये सुन सबको हंसी आ गई
सेंतान ठीक हुए की नहीं तुम्हारी सेंतानी शुरू हो गई हां ये बोल प्रकाश जी ने उसके कान खिंच लिए मिना जी ने उनके हाथ को झटक कर कहा खबरदार जो मेरी बच्ची को हाथ लगाया तो आपका हाथ छोड़ दुंगी समझे ये सुन
U are best छोटी मां I know मेरा बच्चा शिवी की बात सून मिना जी ने प्रकाश जी को देख इतराने लगी तो उन्होंने अपना मूंह फुला लिया
गुड़िया आपको कुछ कहना था जैसे ही अभय की आवाज आई शिवी की पकड़ अपने आप ही शिवराज जी पर कस गई क्योंकि की आज भी उसकी आवाज से थोड़ी बहुत डर जाती थी ये देख अभय की मुठ्ठी कस गई उसे पता था कि उसने अपने गुस्से से इस नन्ही सी जान को डरा दिया है पर अब बहुत देर हो चुकी थी
आज के लिए इतना ही मिलते हैं अगले पार्ट पर🤗🤗
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शिवी बचपन से ही बहुत सेंसेटिव थी वो ऊंची आवाज से डर जाती थी इसलिए आज तक किसी ने उससे ऊंची आवाज में बात तक नहीं की इसीलिए वो अभय से अब तक डर रही थी
शिवी खुद को संभाल कर कहती है पापा अभी आपने कहा कि घर में function है हां बच्चा अनु का रोका है और रात को इंगेजमेंट शिवराज जी ने थोड़ा डरते हुए कहा क्युकी उन्होंने ने अपनी बेटी का पागलपन उस लड़के के लिए देखा था जो उसकी बहन को पसंद करता
क्या और आप सब ने मुझे बताया नहीं शिवी थोड़ा गुस्सा करते हुए कहा तो विना जी ने कहा क्या हुआ बच्चा आपको इससे कोई प्रोब्लेम है हां मुझे बहुत बड़ी प्रोब्लम है ये सुन अनु का अंदर ही अंदर फिर से डर लगने लगा बड़ी मुश्किल से उसने हां कहा था अब उसे फिर से अपने फैसले पर गुस्सा आ रहा था वो कैसे शिवी को हर्ट कर सकती ये सोच लो लगभग रोने ही बाली थी पर
दो दो function है और मुझे किसी ने बताया नहीं फिर नकली का रोते हुए आप सब मुझे से अब प्यार नहीं करते ये देख अनु की सांस में सांस आई कि वो इस रिश्ते से खुश हैं
विना जी उसके सिर पर मार कहा नौटंकी कहीं की सीधे सीधे नहीं बोल सकती सरी मम्मा पर मेरे पास कपड़े नहीं है अब मैं क्या पहनू शिवी बिल्कुल रोनी सूरत बनाकर कहती हैं तो शिवराज जी उसके हाथ में एक कार्ड थमा कर बोले जाओ अपने लिए शॉपिंग कर लेना और इतनी सी छोटी बात पर हार्टअटैक मत दिया कर ये सून शिवी अपना दांत चमका देती और कार्ड लेकर सीधे ऊपर भाग गईं और थोड़ी ही देर में वो तैयार हो कर निचे भी आ जाती है
उसने एक jumpsuit पहना था और अपने बालों को खुला छोड़ा था जिससे वो एक दम बच्ची लग रही थी

शिवी दरवाजे तक पहुंची ही थी कि तभी पीछे से अनु कहती हैं क्या हम भी तुम्हारे साथ चले शिवी बिना पिछे मुंडे ही कहती हैं तुम्हारा तो रोका है ना वैसे भी वो लोग दस बजे आएंगे और मुझे भी शॉपिंग करनी है नियती अनु को बिच में रोक कर बोलती है ठीक है जों आना चाहे आ सकते हैं ये बोल वो बहार चली जाती है नियती और अनु अपने कमरे मे बैंग लेने चले जाते हैं और अभय और आर्यन गाड़ी निकलने के लिए बाहर चले जाते हैं
शिवी अपने फोन में कुछ देख कर चल रही थी पर सामने से आ रहे शख्स से उसकी टक्कर हो गई और वो एक जोर कि आवाज के साथ निचे गिर गई वो शिवी अपनी कमर को सहलाते हुए बोली आह आंखें से बटन या फिर किसी को अपनी आंखें दान करके आएं हो तुम्हें इतनी क्यूट सी लड़की नहीं देखी हूं
ये सून सामने बाला लड़का अपनी आंखें छोटी कर उसे देखने लगा फिर जोर जोर से हंस कर बोला क्यूट और तुम ये सुन शिवी ने अपनी सिर उठाकर उस लड़के को देखा जो दिखने काफी हेंडसम 6 पेक्स एब्स और 6 फ़ीट हाईट पर उसे हंसता देख शिवी को बहुत गुस्सा आ गया
तुम सुअर कहीं के मुझ पर हंस रहे हो सुंदर लड़की देखी नहीं आ गये अपनी सुअर जैसी सकल लेकर हु शिवी ने मुंह बनाकर कहा
तुम चुड़ैल तो थी ही लगता है अब अंधी भी हो गई हो जो entertainment industry ke king रूद्र सिसोदिया को सुअर बोल रहे हैं वहीं उसके मुंह से चुड़ैल सून शिवी निचे बैठ कर ही उसके घुटने पर एक लात मारती है तो एक धम की आवाज से रूद्र निचे गिर गया जिसे देख वो भी हंसने लगी
तुम चुड़ैल डायन पागल औरत मुझे क्यु निचे गिराया रूद्र गुस्से से चिल्लाया तो शिवी कूद कर उसके कमर पर बैठ गई उसके कॉलर को पकड़ कर बोली तुम पागल आदमी मुझे चुड़ैल डायन कहा
क्योंकि तुम हो पागल औरत उठो मेरे उपर से रूद्र उसकी बाजू पकड़ कर उसे उठाने लगा पर शिवी टस से मस नहीं हो रही वो और गुस्से से उबल थे बोली तूमने फिर से मुझे पागल कहा अभी बताती हु ये बोल बोल इधर उधर देखने लगी और अचानक उसके बाल को पकड़ कर खींच ने लगीं जिससे रूद्र की एक जोर दार चीख निकल गई उसकी चीख सुन सब बाहर आ गये और बाहर का नजारा देख सबकी आंखें हैरानी से बाहर आ गए
शिवी डेविल स्माइल करके बोली क्या अब पागलों की तरहां चिल्ला क्यों रहे बोला हां फिर उसकी नकल करते हुए बोली क्या कहा था तुमने कि मैं किंग हु हेंडसम हु रूद्र सिसोदिया हु तुम एक नम्बर के सुअर हो बंदर जु में जितने जानवर है उन सबके बाप हो समझे
वहीं अनु तो मुंह खोले उसे देख रही थी जो लड़की कल तक इस लड़के के लिए उससे लड रही थी आज वो खुद उसे पता नहीं क्या क्या बोल रही है
तभी उन दिनों को किसी के हंसने की आवाज आई तो वो दोनों उस तरफ देखते हैं तो पूरा परिवार उन पर हंस रहा था वहीं प्रकाश जी तो उसे चेयर करते हुए बोली गुड गोइंग बच्चा मेने तुम्हे आज तक जितने भी मूव्स सिखाया है सब आज इस पर ट्राई करो अपने बिल्कुल सही कहा पापा गुड़िया तु ना एक काम कर आज इसे गंजा करदे मजा आयेगा अपने ही इंगेजमेंट पे जब ये गंजा बनकर घुमेगा ये बोल नियती भी हंसने लगी
वहीं अनु तो शॉक्ड रह गई इन सबकी बातें सुनकर तभी शिवी बोली सही कहा आपने नियु दि आज तो में इसे गंजा करके ही छोड़ूंगी ये बोल वो कर जोर से उसके बाल खिंचने लगी आह बेबी तुम रोको अपनी इस छोटी चुड़ैल को वरना ये सच में मुझे गंजा कर देगी आह
ये क्या बेबी सोना जादू टोना लगा रखा है कोई तुम्हें नहीं बचाने वाला है ना छोटे पापा बिल्कुल मेरी छोटी हल्क तभी अनु ये आप सब इसे रोकने के बजाय आप और बढ़ावा दे रहे हो शिवी छोटी बच्चा प्लीज़ उसे छोड़ दें उसे दर्द हो रहा है
कोई कुछ कहता उससे पहले एक बड़ा सा हाथ आकर शिवी को बिल्कुल किसी छोटे बच्चे की तरहां उठा लिया ये देख शिवी बिल्कुल किसी बच्चे की तरह अपनी हाथ पांव हवा में मारते हुए कहा भाई छोड़ो मुझे इस सुअर के बच्चे को में आज छोड़ूंगा नहीं इसने मुझे मुझ जैसी खुबसूरत और क्यूट सी लड़की को चुड़ैल डायन पता नहीं और क्या क्या कहा
वहीं शिवी के मुंह से एक हफ्ते बाद भाई सून अभय की आंखें नम हो गई पर उसने खुद को सम्हाल कर कहा गुड़िया वो अनु का होनेवाला पती है और सबसे ज्यादा जरूरी हमरे घर का मेहमान है वहीं अभय की बात सुन शिवी बिल्कुल शांत हो गई तो अभय ने उसे निचे उतार दिया तो वो जाकर शिवराज जी के गले लग गई
आज के लिए इतना ही मिलते हैं अगले पार्ट पर ❤️
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रूद्र जल्दी से खड़ा हो कर अनु के गले लग कर कहती आछा हुआ बेबी तुम आ गई वरना ये मुझे सच में गंजा कर देती ठीक ठीक है पहले तुम शांत हो जाऊं अनु उसकी पीठ को सहला कर बोली
वहीं शिवी शिवराज जी के गले लग कर नकली का सुबकने लगी और बोली पापा उसने मुझे चुड़ैल डायन पागल और पता नहीं क्या क्या कहा
ओ हेल्लो गुस्सा तो मुझे होना चाहिए था तुम्हारे वज़ह से मेने एक हफ्ते से अनु को देखा भी नहीं और मेरी मेहरबानी से कभी देख भी नहीं पाऊगे समझे एक सेकंड नहीं लगेगा तुम्हें इस घर से निकलेने में रूद्र की बात पर शिवी भी गुस्से में बोली
तुम तुम मुझे यहां से निकलोगी निकाल के दिखायो सच में चुड़ैल बना दुंगी फिर भटकती रहना चुड़ैल बनकर हां हां ये बोल रूद्र फिर से हंसने ये शिवी भी गुस्से चिल्लाई तुम रुको तुम्हे तो अभी बताती हूं सुअर के बच्चे
तभी पीछे से आवाज़ आई तो आपको हम सुअर नजर आते हैं ये आवाज़ सुन सब लोग उस और देखते हे तो एक मिडिल एज आदमी आदमी और एक औरत खड़े थे
वो मिडिल औरत चेहकते हुए आगे आई और बोली तुमने तो किया पेहचान की हे बेटा सूअर , सुअर के बच्चे वह पहले क्यु मेरे दिमाग क्यूं नहीं आया और फिर रूद्र के सिर पर मारते हुए बोली और तु इतनी सी प्यारी बच्ची को तु चुड़ैल बोल रहा है
वो मिडिल एज आदमी शिवी के सिर को प्यार से सहला कर बोले बच्चा किया में आपको सुअर जैसा दिख रहा हु तो शिवी भी फटाक से कहा नहीं अंकल सुअर तो वो आप तो बिल्कुल हेंडसम हो किसी हिरो की तरहां ये बोल अपनी आंखें टिमटिमा कर उन्हें देखने लगी जैसे कितनी ही सुंदर चीज़ देख रहे हो
शिवराज जी उसके सिर को अपने सिने में छुपा कर बोले आ गया मेरी बेटी से तारिफ लुटाने ये बोल उनके मुंह बन गए
तभी विना जी उस औरत के पास गईं और गले मिलते हुए कहा आप सब इतनी सुबह आप सब तो दस बजे आने वाले थे ना हां पर उससे पहले हमें अनु को शगुन जो देना था तो किसी के हाथों भिजवाने से अच्छा हम खुद ही आ गये
अगर नहीं आते तो इतना अच्छा नजारा देखने को कहा मिलता कि the great actor रुद्र को एक छोटी बच्ची ने धुल चटा दी ये बोल वो आदमी हंसने लगा
पापा this is no fair आप भी इसकी तरफदारी कर रहे हैं कोई मुझेसे प्यार ही नहीं करता ये बोल वो फिर से अनु के गले में अपना मुंह डाल दिया
अब सब बहुत हुआ चले सब अंदर चलते हैं ये बोल विना जी उन्हें अंदर ले गई
तो ये सिसोदिया फैमली
दादा जी - कपिलेश सिसोदिया
दादी जी - निर्मला देवी इनके एक बेटा और एक बेटी है
बेटा - राजवीर सिसोदिया ये शिवराज जी के बहुत अच्छे दोस्त हैं बचपन से इनकी पत्नी का नाम रागिनी सिसोदिया ये बिल्कुल नर्म दिल की औरत है और डिजाइनर भी है इनके दो बेटे हैं एक है रूद्र और दूसरे के बारे में आगे जानेंगे
बेटी - पायल कपूर इनकी शादी हो गई है और ये अभी लंडन में रहते हैं इनके दो बच्चे हैं जो अभी इंडिया में रहते हैं
बेटा - युग कपूर ये आर्यन के दोस्त हैं
बेटी - पलक कपूर ये हमारी शिवी की दोस्त जो हमारी शिवी को अभी तक नहीं पता
अब आगे कहानी में
वहीं अब सब सोफे पर बैठे हुए थे रूद्र और शिवी एक दूसरे अभी भी घूर रहे थे रागिनी जी ने एक थाल अनु को देकर बोली बेटा अप ये पहन कर रेड्डी हो जाना और फिर दो पैकेट शिवी और नियती को लेकर कहा ये आप दोनों के लिए फिर वो सब थोड़ी देर बात करने के बाद चले गए और बाकी सब भी जल्दी से तैयारियां करने लगे
कुछ देर बाद एक साथ कई कार्स मेहता मेनशन के आगे रुकीं उस कार्स से सारे सिसोदिया फैमिली आ जाती है और मेहता परिवार उनकी स्वागत करने लगे
सब लोग सोफे पर बैठे थे रूद्र और उसके पास युग बैठा था तु किया बोल रहा है भाई उसने तूझे पिटा उसकी बात पर रूद्र झल्ला कर कहा हां यार लगता है अनु सही कह रही थी उसका दिमाग सच में स्टंट गया है मेरा मतलब कि उसकी मेमोरी लॉस हो गई है
चलो कुछ तो अच्छा हुआ कम से कम अब उसकी वो पुरानी वाली आदतें वापस लोट आई हो बड़ा मज़ा आता था उसके साथ पुरानी आदत पुरी की पुरी चुड़ैल बन कर वापस आई है रूद्र ने अपने बाल को सेहला कर कहा तो युग की हंसी निकल गई
तभी सबको पायल की छन छन आवाज आई तो सब सीढ़ियों कि तरफ देखने लगे नियती अनु को लेकर सीढ़ियों से उतर रही थी एक लाल कलर की अनारकली पहन कर वो सच में बहुत खूबसूरत लग रही थी रूद्र तो उसे देख अपनी सास लेना ही भुल गया

अनन्य की लुक

नियती की लूक
अनु के आते ही युग रूद्र के पास से उठ गया और नियती रूद्र को देख मुंह बनाते हुए उसके पास अनु को बैठा दिया अनु ने अब तक नजरें उठा कर रूद्र को देखा भी नहीं था आज सच में आपको का जाने का मन कर रहा हे रूद्र ने धीरे से उसके कान में कहा तो अनु शर्म गई मैं देख रूद्र के होंठों पर एक मुस्कान खिल गई
तभी पलक इधर उधर देख विना जी से बोली आंटी शिवी कहा है क्या वो अभी तक गुस्सा है एक काम करती हूं में ही उसके पास चली जाती हु पलक बिना विना जी कि बात सुने बहा से चली उसको जाता देख विना जी ना में सिर हिला कर बोली ये लड़की कभी किसी की बात नहीं सुनती
वहीं शिवी अपने कमरे में तैयार हो रही थी उसने आज पहली बार इतनी हेवी ड्रेस पहनी थी जिसको वो सम्हालने में लगी थी तभी कोई आकर उसे पिछे से गले लगा लेता है जिससे शिवी एक पल के लिए चोक गई और आंखें फाड़े उसे देखने लगी
आज के लिए इतना ही मिलते हैं अगले पार्ट पर 💖💖💖💖💕❤️❤️💕💕🥰😘💕💖🥰😘😘😘 Happy reading 😍😍🤗🤗💖💖🥰😘😘💖❤️❤️💖❤️💕💖🥰😍🥰😘😚💕💖❤️