ये कहानी है आरंभ की । जिसे एक बच्चा मिलता है जिसे वो गोद ले लेता है । वो उस बच्चे की माँ को बहुत ढूंढता है लेकिन उसे कुछ पता नहीं चलता । 7 साल हो जाते हैं और वो एक लड़की की माँ से टकराता है । जिसके बाद वो उसकी खूबसूरती से एट्रेक्ट होने लगता है । क्या... ये कहानी है आरंभ की । जिसे एक बच्चा मिलता है जिसे वो गोद ले लेता है । वो उस बच्चे की माँ को बहुत ढूंढता है लेकिन उसे कुछ पता नहीं चलता । 7 साल हो जाते हैं और वो एक लड़की की माँ से टकराता है । जिसके बाद वो उसकी खूबसूरती से एट्रेक्ट होने लगता है । क्या उनका ऐसा मिलना उनके बच्चों के लिए सही होगा । क्या वो एक दूसरे के बच्चों को अपनायेंगे ? पूरी कहानी क्या होगी जानने के लिए पढ़े '' यह कैसा पागलपन '' । राइटर - प्रियंका हर्ष आनंद से ।
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रात के 2 बज रहे थे । और दिल्ली शहर की कुछ जगह अब भी शोर गोल से भरी हुई थीं । दिल्ली जैसे बड़े शहर में किसी को फुरसत नहीं थी कि कोई एक दूसरे से बात भी करे ।
ऐसे में दुनिया का जाना माना बिजनेस मैन जिसके आसपास लड़कियों का जैसे काफिला रहता था सिर्फ एक नजर उसे देखने के लिए । लेकिन मजाल है कि कोई उसके दिल की मल्लिका भी बन सके ।
सिंघानिया परिवार की शाख इतनी लम्बी थी कि एक अकेला सिंघानिया ग्रुप पूरे वर्ल्ड की इकॉनिमी को अकेले ही बदल सकता था ।
कहते हैं दिवारों के भी कान होते हैं तो ऐसे में किसी की बुरी परछाई सिंघानिया परिवार की बहू पर आ गिरी ।
सालों पहले मिले धोखे ने उन्हें 6 साल के बेटे को अकेले रहने पर मजबूर कर दिया । और उसके इस अकेले पन में वो इटंस मजबूत हो गया कि कोई भी उसे हिला नहीं सकता ।
आरंभ सिंघानिया , इस वक्त अपने कमरें की सारी लाइट्स ऑफ किये गहरी नींद में सो रहा था । दिन भर की थकान ने उसे इतना मजबूर कर दिया था कि वो अब ऐसा सो गया था कि शायद किसी की भी आवाज़ से उसकी नींद ना टूटे ।
अचानक उसके फोन पर किसी का कॉल आने लगा । कॉल की रिंग बजने से आरंभ के शरीर में हलचल पैदा होने लगी । उसने नींद में ही अपना कॉल रिसीव करके नींद भरी आवाज़ में कहा '' हैलो । ''
दूसरी तरफ से एक औरत की आवाज़ उसे सुनाई दी '' क्या अपनी जिंदगी के सबसे बड़े राज को जानना चाहते हो मिस्टर आरंभ सिंघानिया ? ''
ये बात सुन कर आरंभ की आंखे लगभग खुल गईं थी । तभी उस औरत ने फिर कहा '' तुम्हारा बेटा अपनी आखिरी साँसे ले रहा है । आओ अगर उसे बचाना चाहते हो तो यहाँ आ जाओ । ''
ये बोल उसने कॉल कट किया और कुछ देर में ही उसके फोन पर एक लॉकेशन का मैसेज आया । उस मैसेज को देख आरंभ की आँखे कुछ छोटी हो गईं । वो ये बात सालों से जानता था कि कई बार इस तरह की चाले उसके साथ चली गईं थीं । इसलिए वो उस मैसेज को इग्नोर करके सोने लगा ।
कुछ देर बाद फिर उसके फोन पर एक मैसेज डिलीवर हुआ । अचानक उस मैसेज को पढ़कर आरंभ अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपने सिक्योरिटी चीफ को कॉल करते हुए बोला '' हमें अभी मसूरी जाना हैं । चौपर का अरेजमेंट करो । ''
2 घंटे बाद ,
आरंभ और उसके कुछ गार्ड्स मसूरी की एक बंद फैक्ट्री के बाहर खड़े थे । उस औरत ने जो लॉकेशन आरंभ को भेजी थी वो एक तरफ से जीपीएस की थीं ।
जैसे ही आरंभ ने इंटेलिजेंट्स ब्यूरों के हैड ने इसका पता लगाया तो वो जीपीएस को ट्रैक करने में काबियाब हो गया ।
आरंभ ने उसके हाथ के आई पैड लिया और भाग कर उसने कुछ देखते हुए वो एक जगह आकर रुक गया । इस वक्त मसूरी में हल्कि हल्कि बर्फबारी हो रही थी । लेकिन आरंभ अब भी अपनी नाईट ड्रेस में था ।
उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था और उस जमीन को देख कर उसने किसी को इशारा किया और जैसे ही कुछ गार्ड्स खुदाई का सामान लेकर वहाँ आये और खुदाई शूरू की वैसे ही आरंभ और बाकी सभी को कुछ घंटे पहले जन्में नवजात बच्चे कर रोने की दबी हुई आवाज़ सुनाई दी ।
आरंभ ने बौखलाते हुए सभी रोकते हुए कहा '' रुक जाओ । ''
ये सुन सभी जिस पॉजिशन में उसकी में जैसे फ्रिज हो गए । आरंभ खुद नीचे बैठा और हाथों से मिट्टी हटाने लगा । कुछ देर मिट्टी हटाने के बाद उसे एक बच्चे का गिली मिट्टी से सना चेहरा दिखा ।
वो छोटा सा नन्हा सा बच्चा ठीक से रो तक नहीं पा रहा था शायद उसकी नाक और मुँह में मिट्टी चली गई । लेकिन ये सब देख हर कोई हैरान था कि अगर इस बच्चे के अलावा कोई और बच्चा होता तो शायद अब तक दम तोड़ चुका होता । पर ऐसा नहीं हुआ । ये बच्चा अब तक जिंदा था ।
तो वहीं आरंभ को एक अजीब सा कनेक्शन उस बच्चे के साथ फील होने लगा । उसने उसे अपनी गोद में उठाते हुए कहा '' चली करो इसकी साँसे बंद हो जाएँ उससे पहले हमें इसे हॉस्पिटल लेकर चलना होगा । ''
उसके ऑर्डर्स को सुन हर कोई अपनी हरकत में आया और तुरंत गाड़ियों का अरेजमेंट हुआ और हर कोई सिटी हॉस्पिटल के लिए निकल गया ।
एक घंटे बाद , सिटी हॉस्पिटल ।
जैसे ही हॉस्पिटल के स्टॉफ को आरंभ सिंघानिया के आने की खबर मिली वैसे ही हर कोई अपनी अपनी हरकत में आ गये । हॉस्पिटल के बेस्ट डॉक्टर्स की टीम को टर्नी अरेंज किया गया था ।
आरंभ वहीं कॉरिडोर में बैठा इस बारे में सोच रहा था कि आखिर उस औरत ने क्यों इस नन्हीं सी जान को उसका बेटा कहा ? आखिर क्यों उसकी जान बचाने के लिए पूरी दुनिया में सिर्फ आरंभ को चुना गया ?
तभी उसका सिक्योरिटी चीफ फ़ैजल उसके पास आकर खड़ा हुआ और दबी हुई सी आवाज़ में बोला '' बॉस ! मसूरी शहर का हर एक हॉस्पिटल , क्लिनिक और छोटी से छोटी दाई से पूछताछ की गई लेकिन कोई नहीं जानता कि इस बच्चे की माँ कौन है ? ''
आरंभ ने अजीब से नजरों से उसे देखा और उसकी आँखों को देख फ़ैजल समझ गया था कि इस वक्त वो कितने गुस्से में था । तभी ओ टी से एक नर्स भाग कर आरंभ के पास आई और बोली '' बच्चे के पैरेंट्स कौन है ? ''
नर्स के इस सवाल पर आरंभ और फ़ैजल दोनों ने एक दूसरे को देखा और कहा '' क्यों कोई अर्जेन्ट बात है क्या ? ''
नर्स ने हड़बड़ाहट के साथ कहा '' बच्चे की प्री मैच्योर डिलीवर हुई है और हमें उसके पिता की जरूरत है । इस वक्त सिर्फ वहीं हैं जो उसकी जान बचाने में हमारी मदद कर सकते हैं । ''
नर्स के इस सवाल पर आरंभ और फ़ैजल दोनों ने एक दूसरे को देखा और कहा '' क्यों कोई अर्जेन्ट बात है क्या ? ''
नर्स ने हड़बड़ाहट के साथ कहा '' बच्चे की प्री मैच्योर डिलीवर हुई है और हमें उसके पिता की जरूरत है । इस वक्त सिर्फ वहीं हैं जो उसकी जान बचाने में हमारी मदद कर सकते हैं । ''
पिता शब्द सुन कर ही आरंभ ने कुछ हिचकिचाहट के साथ कहा '' उस बच्चे को किस चीज की जरूरत है । ''
ये कहते हुए ही आरंभ कुछ परेशान था । उसने उस औरत के मुँह से सुना थस कि उसका बच्चा । आखिर ये कैसे मुमकिन था । इतने में नर्स ने कहा '' बच्चे के लिए बोन मेरो की जरूरत है । और बच्चा सिर्फ घंटे भर का ही है इसलिए हम उसे किसी और का बोन मेरो नहीं दे सकते थे । हमें सिर्फ उसके पिता की जरूरत है । ''
ये सारी बातें सुन अचानक से आरंभ के फेस के एक्सप्रेशंस कुछ बदल गये । और वो बिल्कुल खामोश होकर उस औरत की बातों को याद करने लगा ।
काफी देर कुछ सोचने के बाद उसने नर्स से कहा '' मेरा बोन मेरो क्या आप बच्चे से मैच कर सकते हैं ? ''
ये कहकर वो खामोश हुआ और नजरें चुरा कर देखने लगा । क्योंकि ये हर कोई जानता था कि वो आखिर है कौन ?
नर्स ने अजीब सी नजरों से उसे उपर से नीचे तक देखा और फिर कुछ सोचते हुए कहा '' ओके सर । मैं अभी कुछ करती हूँ । ''
आधे घंटे के बाद ,
नर्स और पूरे हॉस्पिटल स्टॉफ की आँखे हैरानी से कुछ बड़ी हो गईं थीं । और ना चाहते हुए भी वो इस बात को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे थे कि वो छोटा सा बच्चा दुनिया के सबसे बड़े बिज़नेस टायकून द आरंभ सिंघानिया का बेटा था ।
इन सब से अलग आरंभ शॉक्ड होकर सूरज को उगते हुए देख रहा था । इन सब के बीच कब रात गुजर कर उजाला आने लगा था इसका अन्दाजा किसी को भी नहीं हुआ था ।
बच्चे की जान तो बच चुकी थी लेकिन उसकी पहचान उसे मिलनी अभी बाकी थी । इतने में फ़ैजल उसके पास आया और बोला '' बॉस ! डी एन टेस्ट हो चुका है । वो नन्हीं सी जान आप ही बेटा है । '
आरंभ खिड़की से बाहर की ओर देखते हुए बड़े ही इरोगेंट स्टाइल में कहता है '' हाउ इज पॉसिबल फ़ैजल । मेरा बेटा । मेरा बेटा कैसे कोई हो सकता है ? क्या मैंने कभी सपने स्पर्म डोनेट किये , या कभी किसी के साथ शारीरिक संबंध बना लिया । क्या ऐसा कुछ तुम्हें याद है ? ''
आरंभ किस मैंटल ट्रॉमा से इस वक्त गुजर रहा था ये सब फ़ैजल बहुत अच्छे से जानता था । और शायद इसलिए इस वक्त वो कुछ कहकर उसे और परेशान नहीं करना चाहता था ? और ये बात तो वो खुद भी जानता था कि वो हर वक्त किसी साये की तरह उसके इर्द गिर्द रहता था तो ये नामुमकिन था कि कोई उसका बेटा हो । पर अब डी एन ए टेस्ट रिपोर्ट्स उनके पास थी तो इस बात को झुठलाया भी नहीं जा सकतस कि उस नन्हीं सी जान में सच में आरंभ का खून दौड़ रहा था ।
हॉस्पिटल के कॉरिडोर से जो भी स्टॉफ मेंबर वहाँ से गुजर रहा था वो अजीब सी नजरों से उसे देख रहा था । आरंभ के बेटे की खबरें जैसे पूरे हॉस्पिटल में आग की तरह फैलीं हुईं थीं । हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि आखिर आरंभ कर बच्चे को जन्म किसने दिया था ।
जब ये सब कुछ वहाँ हो रहा था तो आरंभ के फोन पर उसके प्राइवेट असिस्टेंट कैरव का मैसेज आया ।
कैरव ने मैसेज में लिखा था कि आज 10 बजे बोर्ड ऑफ मेंबर्स की एक बड़ी मीटिंग रखी गई थी । आज यहाँ फैसला होने वाला था कि यूरोप की कम्पनीज में जो भी इन्वेस्टमेंट्स अब तक सिंघानिया ग्रुप ऑफ कॉपोरेशन से हो रहे थे क्या अब उन्हें रोकना चाहिये या फिर उसी तरह से चलते रहना चाहिये जैसे वो चल रहा है ।
ये मैसेज पढ़कर आरंभ ने फैजल से कहा '' जाओ और पता करो कि बच्चे की कंडीशन अब कैसी है ? अगर सही हो तो डिस्चार्ज पेपर्स रेडी करवाओ । और फादर के नाम में मेरा नाम लिख देना । और अगर उसकी कंडीशन अब भी क्रिटिकल है तो मीटिंग पोस्पॉन कर दो । जैसे ही बच्चे की तबियत ठीक होगी मीटिंग तब ही रखना । ''
ये बात सुन कर अचानक से ही फैजल एक दम शॉक्ड हो गया । वो शॉक्ड होकर वो सोच रहा था कि क्या सच में आरंभ उस बच्चे को एक्सेप्ट कर रहा है ? लेकिन ये बात तो खुद वो उससे पूछ नहीं सकता था ।
6 साल बाद ,
'' पापा आँखे खोलिये । देखिये फ्लाइट लैंड होने वाली हैं । ''
एक छोटे से बच्चे की आवाज़ आरंभ के कानों पर पड़ी । और कानों में जैसे ये मीठी सी आवाज़ आई वैसे ही आरंभ ने मुस्कुरा कर अपनी आँखें खोल लीं ।
और उसके गाल खींचते हुए बोला '' आई नो माय लिटल सन । ''
उस छोटे से बच्चे ने मुस्कुरा कर उसके हाथ को पकड़ते हुए कहा '' क्या हम सच में घर लौट रहे हैं ? ''
उसकी इस बात को सुन कर अचानक से ही उसके फेस के एक्सप्रेशंस बदल गये । और वो एक दम शांत होकर कहीं खोने लगा ।
तभी उस बच्चे ने फिर कहा '' बताइये ना डैड । ''
आरंभ ने एक स्ट्रिक्ट टोन में उसा बच्चे का हाथ झटक कर कहा '' हम वो घर 2 साल पहले ही छोड़ चुके हैं कबीर और मैं तुम्हारे मुँह से अब ये बात कभी ना सुनुँ । ''
कबीर को उसकी डांट खाने की ज्यादा आदत नहीं थी । शायद इसलिए उसकी आँखे नम हो गईं । आँखे नम होते ही वो नजरें और गर्दन झुका कर वहीं बैठ गया ।
कुछ समय बात उनका प्राइवेट जेट एक दिल्ली में लैंड हुआ । और कार में बैठ कर जैसे ही आरंभ का पूरा काफिला सिंघानिया हॉउस की तरफ गया तो अचानक एक लड़की से उसकी कार की टक्कर हो गई ।