यह एक **ओपन रोमांस स्टोरी** है – दो दुश्मन घरानों की। एक तरफ़ है **तामस**, शेरवुल्फ़ों का वारिस। दूसरी तरफ़ है **रीवा शाह**, वैंपायर कुल की चमकती हुई राजकुमारी। दोनों की नसों में नफ़रत बहती है, दोनों के खून में सदियों पुरानी दुश्मनी का ज़हर है…... यह एक **ओपन रोमांस स्टोरी** है – दो दुश्मन घरानों की। एक तरफ़ है **तामस**, शेरवुल्फ़ों का वारिस। दूसरी तरफ़ है **रीवा शाह**, वैंपायर कुल की चमकती हुई राजकुमारी। दोनों की नसों में नफ़रत बहती है, दोनों के खून में सदियों पुरानी दुश्मनी का ज़हर है… लेकिन दिल? वो किसी नियम को नहीं मानता। तामस – 22 साल का, लंबा-चौड़ा और जंगली-सा आकर्षण रखने वाला। उसकी आँखों में हमेशा गुस्से की आग जलती है और उसकी मौजूदगी इतनी भारी कि सामने वाला अनजाने ही झुक जाए। वो अपने कुल का सबसे ख़तरनाक शिकारी है, जिसकी ताक़त और स्पीड बाकी सब शेरवुल्फ़ से कई गुना ज़्यादा है। लेकिन उसकी असली पहचान सिर्फ़ कुछ ही लोगों को पता है— उसकी नसों में दौड़ रहा है एक अंधेरे देवता का श्राप, जो उसे बाकी सब से अलग और कहीं ज़्यादा ख़तरनाक बनाता है। रीवा शाह – दिखने में 19 साल की, मगर असल में 120 साल से भी पुरानी। उसकी हँसी में चुलबुलापन है, चालाकी है और आँखों में ऐसा जादू कि कोई भी पलभर में उसके वश में आ जाए। बोल्ड, बेबाक और बेहद शरारती। बाकी वैंपायरों की तरह उसका दिल ख़ामोश नहीं, बल्कि इंसानों की तरह धड़कता है। यही उसकी कमी है और यही उसकी सबसे बड़ी ताक़त भी। खून उसके लिए ज़रूरत ही नहीं, नशा और खेल दोनों है। कॉलेज की भीड़, क्लासरूम का शोर और कैंटीन की गहमागहमी के बीच इन दोनों की पहली नज़रें मिलीं। तामस की आँखों में शिकारी का गुस्सा, और रीवा की आँखों में चुनौती की चमक। पहली मुलाक़ात ही टकराव में बदल गई— जैसे आग और तूफ़ान आमने-सामने आ खड़े हों। तामस ने उसे देखा तो भीतर ही भीतर एक अजीब बेचैनी उठी। यह लड़की दूसरों जैसी नहीं थी। वो जानता था कि इसके पीछे कोई राज़ है। रीवा ने उसे देखा तो होंठों पर तिरछी मुस्कान आ गई। इतना दबदबा, इतनी जंगली नफ़रत— ये उसके लिए नया शिकार भी था और नया खेल भी। लेकिन यह कहानी मासूम इश्क़ की नहीं थी। यह कहानी थी – नफ़रत के बीच पनपते प्यार की। यह कहानी थी – जहाँ हर छुअन में आग थी, हर नज़र में चुनौती और हर मुलाक़ात में एक छुपा हुआ पैशन। दोनों के बीच खिंचाव ऐसा था जैसे दो चुंबक एक-दूसरे की ओर खिंचते हों, लेकिन बीच में सदियों पुरानी दुश्मनी दीवार बनकर खड़ी हो। वो दीवार टूटेगी या और मज़बूत होगी, यही तय करेगा उनका अंजाम। क्योंकि जब **शेरवुल्फ़ और वैंपायर** आमने-सामने हों… तो या तो खून बहता है, या आग भड़कती है। और यहाँ तो दोनों होने वाले थे— खून भी, आग भी… और प्यार भी।
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काली हवेली…
जैसे रात का अंधेरा उसमें घुलकर उसी का हिस्सा बन गया हो। सदियों से वीरान यह हवेली अपने भीतर न जाने कितने राज़ और कितनी परछाइयाँ समेटे बैठी थी। बाहर हवाओं की सनसनाहट थी, खिड़कियों के टूटे शीशों से छनकर आती ठंडी हवा अंदर कमरे में अजीब-सी खामोशी के साथ गूंज रही थी।
ऊपर की मंज़िल का सबसे बड़ा कमरा — आलिशान, मगर डरावना। दीवारों पर लटके पुराने पेंटिंग्स धुंधले पड़ चुके थे, फर्श पर मोटा कालीन बिछा था, और बीच में रखा था एक भव्य बिस्तर। बिस्तर पर गहरी लाल और काली मखमली चादरें, जैसे किसी की साँसों से गर्म हो रही हों।
उस बिस्तर पर लेटी थी एक लड़की।
**नग्न अवस्था में।**
उसका गोरा चमकता बदन चाँदनी की रौशनी में और भी निखर रहा था। काले, लहराते बाल उसके चेहरे और कंधों पर बिखरे हुए थे। उसकी टाँगें हल्की-सी फैलीं, हाथ ढीले-ढाले तकिए पर टिके, और उसका उभार हर साँस के साथ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहा थे । नींद गहरी थी, मगर बेचैनी उसके होंठों की हल्की हरकत से साफ झलक रही थी। होंठों पर एक दम गहरे लाल रंग कि लिपस्टिक थी ,
कमरे में सन्नाटा था, लेकिन उस सन्नाटे के बीच अचानक… **एक आहट।**
फर्श पर जैसे किसी ने धीरे से कदम रखा हो। मगर वहाँ कोई दिखाई नहीं दिया।
एक अदृश्य शक्ति धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी।
उसका कोई चेहरा नहीं था, कोई आकृति नहीं। सिर्फ़ एक मौजूदगी—भारी, गहरी, और रहस्यमयी। कमरे की हवा अचानक और ठंडी हो गई। झूमर हल्का-सा हिला, खिड़की का परदा सरसराया।
वो शक्ति बिस्तर तक पहुँची।
चादर पर एक लहर उठी… जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसे छुआ हो। लड़की नींद में ही करवट बदल गई। उसकी नंगी पीठ अब पूरी तरह से चाँदनी में नहा गई।
अचानक…
वो अदृश्य छुअन उसके होंठों को छू गया।
पहले हल्के से, जैसे कोई बर्फ़ का टुकड़ा वहाँ रख दिया हो। फिर उस छुअन में एक अजीब गर्मी घुल गई। लड़की ने अनजाने में होंठों को भींच लिया।
वो छुअन धीरे-धीरे उसके चेहरे से सुराही जैसी गर्दन की तरफ़ सरकने लगी।
उसकी साँसें भारी हो गईं।
गर्दन पर जैसे किसी ने अपनी उंगलियाँ फिराईं हों, वहाँ से सिहरन उसकी पूरी रीढ़ में दौड़ गई। नींद में डूबी उसकी बदन बिस्तर पर करवटें बदलने लगी।
कमरा और भारी हो चुका था।
झूमर अब तेज़ी से हिल रहा था, परदों से आती हवा मानो अदृश्य शक्ति की साँसों जैसी लग रही थी।
अब वो छुअन उसके उभारों के बीच तक उतर आया।
वो जगह जहाँ उसकी साँसों की धड़कन सबसे साफ़ सुनाई दे रही थी।
एक पल को वो स्पर्श रुक गया—जैसे कोई निहार रहा हो, महसूस कर रहा हो।
लड़की की आँखे फड़की।
उसके हाथों ने बिस्तर की चादर कसकर पकड़ ली।
और फिर अचानक—
उसकी नींद टूटी।
उसकी आँखें खुलीं।
चारों तरफ़ अंधेरा और सन्नाटा।
मगर दिल धड़कने लगा तेज़।
क्योंकि उसे महसूस हो रहा था—**कोई है यहाँ।**
वो अदृश्य स्पर्श अब भी था।
उसका यक़ीन पक्का था कि किसी ने उसके नंगे उभारों को छुआ है।
उसने साफ़ महसूस किया कि जैसे **कोई उसके स्तनों को हाथों में लेकर दबा रहा हो।**
उसका गला सूख गया।
चेहरे पर पसीना छलक आया।
आँखें डर और चाहत के बीच काँप रही थीं।
उसने एक झटके से करवट ली।
पर सामने… सिर्फ़ खाली हवा थी।
कोई नहीं।
मगर उसका शरीर बता रहा था कि कोई है।
हर नस, हर साँस उस छुअन की गवाही दे रही थी।
उसके होंठ काँप उठे।
वो डर और सिहरन के बीच फँस गई।
चाहत की एक महीन लहर भी उसके अंदर उठ रही थी, जिसे वो खुद समझ नहीं पा रही थी।
वो आँखें फैलाए कमरे के हर कोने को देख रही थी, लेकिन सामने अब भी कुछ नहीं।
और तभी…
फिर वही दबाव।
उसके नग्न बदन पर किसी अदृश्य हाथ का स्पर्श—
जिसे वो महसूस कर सकती थी, मगर देख नहीं पा रही थी।
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हवेली की रात और भी घनी हो चुकी थी। बाहर हवाओं की सनसनाहट अब कमरे तक साफ़ सुनाई दे रही थी। लेकिन उस पल, उस कमरे में, बिस्तर पर लेटी लड़की के लिए सारी आवाज़ें गायब हो चुकी थीं।
वो केवल **एक छुअन** महसूस कर रही थी।
उसका नग्न शरीर चादरों पर सिकुड़-सा गया था, लेकिन फिर भी उसके उभार ऊपर-नीचे हो रहा थे। उसकी साँसें अब सामान्य नहीं थीं—हर साँस के साथ हल्की **आह्ह्हृ......** उसके होंठों से फिसल रही थी।
वो अदृश्य शक्ति अब उसके और क़रीब आ चुकी थी।
इतनी क़रीब कि लड़की को लग रहा था जैसे कोई झुककर उसके बदन को अपने में समेट रहा हो।
उसकी नाज़ुक त्वचा पर गर्म और ठंडी लहरें एक साथ दौड़ रही थीं।
एक पल ऐसा लगा, जैसे उसके उभारों पर हल्का-सा दबाव बढ़ गया हो।
वो सिहर उठी।
उसकी आँखें अब भी खुली थीं, लेकिन सामने सिर्फ़ अंधेरा था।
फिर भी उसे महसूस हुआ—
कोई अदृश्य चेहरा उसके उभार पर झुक रहा है।
कोई उसे ऐसे छू रहा है, जैसे उसका हर अहसास पढ़ लेना चाहता हो।
उसके होंठों से अनायास एक **कराह** निकली।
धीमी, थरथराती, मगर स्पष्ट।
वो घबराई, मगर खुद को रोक न सकी।
उसका हाथ बिस्तर की चादर से छूटकर धीरे-धीरे हवा में उठा—जैसे किसी अदृश्य कंधे को पकड़ लेना चाहता हो।
लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।
बस वही मौजूदगी, जो और गहरी होती जा रही थी।
कमरा अब आहों और सिसकियों से गूंजने लगा।
हर बार जब वो छुअन उसके उभारों के इर्द-गिर्द घूमती, उसके गले से दबा-दबा **सिसकारा** बाहर निकल आता। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके उभार कोई पी रहा है |
उसके गाल लाल हो गए।
पलकों पर भारीपन था, मगर आँखें खुली रहना चाहती थीं।
वो देखना चाहती थी कि कौन है…
कौन है जो उसे इस तरह महसूस करा रहा है।
लेकिन उसकी नज़रें बार-बार हार जातीं।
सिर्फ़ हवा, सिर्फ़ सन्नाटा, सिर्फ़ अदृश्य लहरें।
वो अब डर और चाहत के बीच पूरी तरह बँट चुकी थी।
एक तरफ़ उसके भीतर की मासूमियत कह रही थी—“नहीं… ये ग़लत है।”
और दूसरी तरफ़ उसका थका हुआ तन उस स्पर्श को रोकना नहीं चाहता था।
उसने होंठ काट लिए।
उसके बदन से पसीने की बूँदें फिसलकर बिस्तर की चादर पर गिर रही थीं।
हर बूंद जैसे उस हवेली की खामोशी में एक नई ध्वनि बना रही थी।
अब वो अदृश्य शक्ति और बेबाक हो गई थी।
उसका स्पर्श नर्मी से गहराई तक उतर रहा था।
लड़की की कराहें और ऊँची होती जा रही थीं।
हर आह में डर और सुख का मिला-जुला स्वाद था।
उसके सीने से उठती हल्की सिसकियों ने कमरे की हवा बदल दी।
झूमर ज़्यादा तेज़ी से हिलने लगा।
खिड़की का परदा जैसे खुद-ब-खुद फड़फड़ाने लगा।
और फिर अचानक—
उसने आँखें भींच लीं।
उसका सिर पीछे की ओर झुक गया।
और होंठों से दबा-दबा एक लम्बा **“आह्ह…”** निकला।
उस पल, उसने खुद को रोकना छोड़ दिया।
वो उस अदृश्य छुअन को स्वीकार कर चुकी थी।
अब वो उसके साथ थी।
उसके बदन की हर नस उस रहस्यमयी शक्ति को आमंत्रित कर रही थी।
कमरा अब सिर्फ़ उसकी कराहों और सिसकियों से भरा था।
कभी धीमी, कभी तेज़।
कभी दबा-दबा स्वर, कभी खुला और मदहोश।
उसका शरीर चादरों पर तड़पता, करवटें लेता।
कभी हाथ कसकर चादर पकड़ते, कभी हवा में फैल जाते जैसे किसी को पकड़ना चाहते हों।
उसके बाल पसीने से भीगकर चेहरे से चिपक गए थे।
और वो अदृश्य शक्ति…
वो अब पूरे अधिकार से उसे छू रही थी।
उसकी साँसों में घुल रही थी।
उसके बदन पर अपनी मौजूदगी की लकीरें छोड़ रही थी।
लड़की अब पूरी तरह उसके साथ थी।
उसकी आँखों से डर मिट चुका था।
अब बस एक अजीब-सी तृप्ति की छाया थी, जो उसकी हर आह में गूंज रही थी।
उसके होंठों पर मुस्कान और सिसकी एक साथ तैर रही थी।
उसकी आँखें कभी खुलतीं, कभी बंद हो जातीं।
और हर बार उसे यही लगता कि कोई अदृश्य चेहरा उसके बेहद क़रीब है।
उसकी आहटों से हवेली की वीरानी अब और रहस्यमयी हो गई थी।
जैसे सदियों से खाली ये कमरा अब उसकी साँसों का घर बन गया हो।
वो अदृश्य शक्ति उसे पिघलाती रही…
वो लड़की उस अदृश्य आलिंगन में सिसकती रही…
और हवेली की दीवारें चुपचाप उस मिलन की गवाह बन गईं।
रिवा झटके से उठ बैठी। उभारों पर हाथ रखे, पसीना माथे से ढलक रहा था। आँखें खोलीं तो सामने वही पुराना लकड़ी का छत, वही लंबी खिड़की और पर्दों से आती हल्की सी सुबह की धूप। उसने हड़बड़ाकर चारों ओर देखा—कमरा वही था, उसकी अपनी हवेली का पुराना रूम।
*"ये… सपना था?"*
उसके होंठ बुदबुदाए। लेकिन दिल की धड़कन अब भी तेज़ थी। उसे साफ़ महसूस हो रहा था कि अभी थोड़ी देर पहले कोई उसके बेहद पास था। उसकी साँसों में अब भी वही अजीब-सी गर्माहट बसी थी। रिवा ने पानी की बोतल उठाई, दो घूँट पिए और चेहरा आईने में देखा।
आईने में वही रिवा शाह खड़ी थी—लंबे खुले बाल, हल्की-सी उलझन आँखों में और होंठों पर बेचैनी का निशान। उसने गहरी साँस ली और खुद को झटका दिया, *"नो! ये सपना था, और कुछ नहीं।"*
वो तेजी से उठी, वार्डरोब खोला और अपने फेवरेट आउटफिट की ओर बढ़ गई। उसने काला क्रॉप टॉप निकाला, जिसके किनारे पर सिल्वर की चमक थी, और साथ में नीली हाई-वेस्ट पेंट। एक-एक कपड़ा पहनते हुए वो खुद से बड़बड़ाती रही, *"डर से कुछ नहीं होता… और अगर वो कोई सच में था भी, तो… वो कौन हो सकता है?"*
कपड़े पहनकर उसने शीशे में खुद को देखा। होंठों पर हल्की लिप-ग्लॉस, आँखों में हल्की काजल की लाइनिंग और गले में चेन—पूरी तरह तैयार। उसने बालों को झटककर कहा,
*"कौन कहेगा मैंने रात भर डरावना सपना देखा था?"*
उसने बैग उठाया और जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला, हवेली का हाल दिखाई दिया। बड़ा-सा हॉल, ऊँची छतें और दीवारों पर लगी पुरानी पेंटिंग्स। लेकिन आज वहाँ रौनक थी।
दो सहेलियाँ पहले से ही वहाँ खड़ी थीं—रिया और तन्वी। दोनों हँसते हुए किसी बात पर ठहाके मार रही थीं।
"ओ हो, हमारी क्वीन आ ही गई!" रिया ने इशारा किया।
"आज तो किसी रैम्प वॉक से उतरकर आ रही लग रही है।" तन्वी ने छेड़ा।
रिवा ने हँसते हुए बाल झटक दिए, "देखो भई, कॉलेज है, कोई गाँव का मेला नहीं। ड्रेसिंग तो करनी ही पड़ेगी।"
तीनों की हँसी पूरे हॉल में गूँज उठी। तभी अचानक पीछे से किसी की आवाज़ आई—
"Wow… मेरी बेटी तो बिल्कुल मॉडल लग रही है।"
सबकी नजरें दरवाज़े की तरफ़ मुड़ीं। वहाँ उसकी माँ खड़ी थी। लंबे खुले बाल, वेस्टर्न ड्रेस—फ्लोरल शॉर्ट ड्रेस और हाई हील्स में। रिवा की माँ हमेशा की तरह जवान और स्टाइलिश लग रही थीं।
"मॉम!" रिवा दौड़कर उनसे गले मिली।
माँ ने हँसते हुए उसे कसकर पकड़ लिया और बोलीं, "यार, तुमसे एक शिकायत है।"
रिवा ने आँखें सिकोड़ लीं, "क्या?"
"इतनी हॉट लग रही हो कि लोग कहेंगे, ये बेटी है या बहन?"
रिया और तन्वी हँसते-हँसते लोटपोट हो गईं। रिवा ने शर्माते हुए मुँह बना लिया, "मॉम, आप भी ना…"
माँ ने उसके गाल पर हाथ रखा और अचानक गंभीर हो गईं।
"बेटा… तुम्हें याद है ना, मैंने कल क्या कहा था?"
रिवा चौंकी, "क्या?"
"आज कॉलेज में किसी से झगड़ा मत करना।"
रिवा ने भौंहें चढ़ाईं, "लेकिन क्यों? मतलब मैं किसी से लड़ने थोड़ी जाती हूँ।"
माँ ने गहरी साँस ली और उसकी आँखों में देखकर बोलीं,
"तुम्हारे डैड ही आकर तुम्हें सब समझाएँगे। तब तुम्हें सब पता चल जाएगा। अभी बस इतना याद रखो—आज के दिन कुछ भी ऐसा मत करना जो मुसीबत खड़ी करे।"
रिवा थोड़ी देर माँ की आँखों में देखती रही। माँ के चेहरे पर हल्की-सी चिंता की झलक थी।
*"डैड? और झगड़ा? आखिर ये सब चल क्या रहा है?"* उसने मन ही मन सोचा।
फिर उसने नटखट अंदाज़ में हँसते हुए कहा, "ओके मॉम… आज कोई फाइट नहीं। लेकिन अगर कोई खुद ही लड़ाई के लिए आगे आ जाए, तो?"
माँ ने हल्की मुस्कान दी, "फिर भी… इस बार तुम पीछे हट जाना।"
रिवा ने होंठ काटे और हाँ में सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखों में वही जिद थी। *"देखते हैं, आज क्या होता है।"*
उसने बैग कंधे पर डाला, सहेलियों को इशारा किया, "चलो, कॉलेज चलते हैं। आज मज़ा आएगा।"
हॉल में उसकी हँसी गूँज गई, लेकिन पीछे खड़ी माँ की आँखें कुछ और कह रही थीं—जैसे उन्हें पहले से अंदाज़ा हो कि कॉलेज में आज रिवा के सामने कौन-सी **तूफानी टक्कर** आने वाली है।
कार घर के सामने खड़ी थी। हमेशा की तरह ड्राइवर ने दरवाज़ा खोला और झुककर बोला,
“मैडम, बैठिए।”
लेकिन रिवा ने तुरंत हाथ उठाकर इशारा किया,
“नहीं शर्मा अंकल, आज मैं खुद ड्राइव करूंगी।”
“पर बेटा…”
रिवा ने चाभी झटकते हुए हँसकर कहा,
“आज मूड है स्पीड का। रिलैक्स, आप आराम करो।”
रिया और तन्वी ने आँखें फैलाकर देखा,
“ओ हो! आज तो मैडम का स्टंट मोड ऑन है।”
रिवा ने कंधे उचकाए, “ड्राइविंग का मज़ा तब है जब हवा से रेस लगे।”
तीनों लड़कियाँ कार में बैठीं और अगले ही पल इंजन गरज उठा। घर का आँगन छोड़ते ही कार तेज़ी से सड़क पर दौड़ने लगी। हवा में उनके बाल उड़ रहे थे, बैक सीट पर रिया और तन्वी चिल्ला-चिल्लाकर गाने गा रही थीं, और स्टीयरिंग पर बैठी रिवा की आँखों में वही आत्मविश्वास झलक रहा था।
“आज का दिन धमाकेदार होगा…” उसने मन ही मन सोचा, लेकिन कहीं न कहीं माँ की कही बात गूँज भी रही थी—“किसी से झगड़ा मत करना।”
कॉलेज का गेट नज़र आया। सुबह का समय था, तो कैंपस हलचल से भरा हुआ था। नए-नए स्टूडेंट्स इधर-उधर अपने क्लास ढूँढते फिर रहे थे। कुछ बच्चे डर-डर के खड़े थे, कुछ ग्रुप्स में बातें कर रहे थे।
रिवा ने कार पार्क की और बाहर उतरी। हमेशा की तरह उसकी एंट्री ने कई निगाहें अपनी तरफ़ खींच लीं। उसकी ड्रेसिंग, उसकी चाल, और उसके चारों ओर फैला अजीब-सा कॉन्फिडेंस—सब उसे भीड़ से अलग बना देता था।
लेकिन तभी हॉल के बाहर हलचल मच गई।
क्लास के नए स्टूडेंट्स का एक झुंड इकट्ठा था और बीचों-बीच एक लड़का खड़ा था—लंबा, चौड़े कंधे, चेहरे पर शरारती मुस्कान और आँखों में बदतमीज़ी का नशा। उसके साथ चार-पाँच और लड़के थे।
“अरे! नए बच्चे, वेलकम टू कॉलेज…” उस लड़के ने ज़ोर से कहा।
उसका नाम था डैनी—आज ही कॉलेज में आया था, लेकिन उसके तेवर पहले दिन से ही गुंडों वाले थे।
वो एक दुबले-पतले नए लड़के के सामने खड़ा होकर बोला,
“तुम्हें हमारी रैगिंग पास करनी होगी। वरना यहाँ टिकना मुश्किल है।”
बच्चा सहम गया।
रिया ने धीरे से तन्वी के कान में कहा,
“ये कौन है यार? पहले दिन से ही बॉस बना घूम रहा है।”
लेकिन रिवा चुप नहीं रह पाई। उसने आगे बढ़कर ज़ोर से कहा,
“ए, तुम! ये कोई रोडसाइड गुंडों का अड्डा नहीं, कॉलेज है।”
डैनी ने उसकी ओर देखा और आँखें तरेरीं।
“और तुम कौन हो मुझे रोकने वाली?”
“रिवा शाह,” उसने सीधा जवाब दिया।
पूरे कैंपस में अचानक सन्नाटा छा गया। सब जानते थे रिवा का नाम, उसकी फैमिली, और उसकी दबंग पर्सनैलिटी।
डैनी ने मुस्कराकर ताली बजाई,
“ओह… तो तुम हो मिस पॉपुलर। लेकिन यहाँ पॉपुलैरिटी नहीं चलेगी, यहाँ सिर्फ मेरा रूल चलेगा।”
वो उसके क़रीब आया और बोला,
“और अगर तुम्हें इतना शौक है हीरोइन बनने का, तो एक काम करो…”
उसने ज़ोर से कहा,
“सबके सामने अपना टॉप उतारो।”
पूरा कैंपस हैरान रह गया। लड़कियों ने चीखें दबाईं, लड़कों ने सीटी बजाई। रिया और तन्वी का चेहरा सफेद पड़ गया।
“क्या बकवास है?” रिवा गरज उठी।
लेकिन डैनी और उसके दोस्त हँसते हुए चारों ओर से उसे घेरने लगे।
“क्यों? डर गई? अभी तो कहा था कॉलेज है… दिखा दो ना कॉन्फिडेंस।”
रिया घबराकर बोली,
“रिवा… छोड़ो, मत उलझो इनसे।”
रिवा के होंठों पर गुस्से की कंपकंपी थी। उसका हाथ अनजाने में उठ गया था—वो डैनी को थप्पड़ मारने ही वाली थी।
लेकिन उसी पल माँ की आवाज़ उसके कानों में गूँजी—
“आज किसी से झगड़ा मत करना।”
उसने खुद को रोक लिया।
डैनी ने उसकी झिझक देखी और और ज़ोर से हँस पड़ा,
“देखा सबने? हमारी मिस रिवा शाह भी डरती है। अब या तो टॉप उतारो, या मान लो कि तुम सिर्फ नाम की शेरनी हो।”
उसके दोस्त और पास आ गए। चारों ओर का सर्कल छोटा होता जा रहा था। रिया और तन्वी असहाय खड़ी थीं।
रिवा का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। एक तरफ़ माँ की चेतावनी थी, दूसरी तरफ़ उसकी खुद की इज़्ज़त और गुस्सा।
उसने होंठ काटते हुए सोचा—
"अगर मैंने हाथ उठाया तो माँ की बात टूट जाएगी। लेकिन अगर चुप रही तो ये कमीना समझेगा मैं डर गई…"
डैनी ने फिर कदम आगे बढ़ाया, उसके बेहद क़रीब आकर फुसफुसाया,
“चलो बेबी… आज पूरे कॉलेज को शो दो। वरना तुम्हारे कपड़े मैं ही उतार दूँ।”
रिवा की आँखों में खून उतर आया। उसके हाथ अब काँप नहीं रहे थे, बल्कि मुट्ठी बन चुके थे।
उस पल रिवा ने महसूस किया—ये सिर्फ़ बदतमीज़ी नहीं, ये उसकी पहली असली टक्कर थी।
और शायद यही वो टक्कर थी जिसकी माँ ने पहले से चेतावनी दी थी।
डैनी की हँसी की गूँज पूरे कैंपस में फैल रही थी।
रिवा की साँसें तेज़ थीं, गुस्से से उसकी आँखें सुर्ख़ थीं। भीड़ गोल घेरे में खड़ी थी—कुछ के चेहरे पर हैरानी, कुछ पर मज़ाक, और बाकी सब तमाशे का मज़ा लेने में व्यस्त।
रिया ने काँपते हुए तन्वी का हाथ पकड़ लिया, “ये… ये तो हद कर रहा है। चल, प्रिंसिपल के पास चलते हैं।”
दोनों जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाकर भीड़ को चीरती हुई निकल गईं।
अब मैदान में रिवा अकेली थी।
सामने डैनी—अपने पाँचों गुंडा दोस्तों के साथ।
चारों तरफ़ दबे-दबे स्वर, धीमी हँसी और मोबाइल कैमरे ऑन हो रहे थे।
डैनी ने उसकी आँखों में देखकर कहा,
“क्या हुआ शेरनी? डर गई? अभी-अभी तो बड़ी अकड़ में थी।”
रिवा की मुट्ठियाँ भींची हुई थीं। माँ की आवाज़ अब भी कानों में गूँज रही थी—
"आज किसी से झगड़ा मत करना, बेटा।"
उसने गहरी साँस ली।
लेकिन तभी डैनी ने अचानक कदम आगे बढ़ाए और उसकी कलाई कसकर पकड़ ली।
भीड़ से कुछ लड़कियों की हाँफने की आवाज़ आई।
“अब सबके सामने साबित कर दो कि तुम सच में बिंदास हो… टॉप उतारो।”
उसकी आवाज़ इतनी ज़ोरदार थी कि पूरा कैंपस गूँज उठा।
एक पल को रिवा को लगा जैसे ज़मीन उसके पैरों तले खिसक गई हो।
उसके सीने में दिल धड़क नहीं—धमक रहा था।
भीड़ से किसी ने सीटी बजाई।
किसी और ने मोबाइल ऊपर उठा लिया।
एक लड़के ने ताना मारा—
“अरे जल्दी करो, इतना भी क्या सोचना!”
रिवा की आँखों में आँसू तैरने लगे थे, लेकिन होंठ अब भी ज़िद्दी बंद थे।
गुस्से और अपमान का तूफ़ान उसके भीतर उमड़ रहा था।
डैनी ने मुस्कुराकर कहा,
“चुप क्यों? या तो अभी सबके सामने कर लो… या फिर मैं खुद मदद कर दूँ।”
उसके दोस्त ठहाके लगाकर हँसने लगे।
भीड़ और पास खिसक आई।
रिवा की साँसें काँप रही थीं—
“माँ… अगर मैं आज भिड़ गई तो आपकी बात टूट जाएगी।
लेकिन अगर चुप रही तो ये कमीना जीत जाएगा।”
उसके काँपते हाथ धीरे-धीरे ऊपर उठे।
भीड़ में सन्नाटा छा गया।
सिर्फ कैमरों की लाल बत्ती टिमटिमा रही थी।
डैनी ने आँखें चमकाकर कहा,
“हाँ… ऐसे ही। सबको आज मज़ा मिलेगा।”
रिवा के माथे पर पसीने की बूँदें फिसल रही थीं।
उसने होंठ दबाए, दिल पर पत्थर रखा और धीरे से अपनी टाॅप की चेन पकड़ ली।
भीड़ में दबे स्वर—
“ये सच में कर रही है क्या?”
“ओ माय गॉड…”
“रिकॉर्ड कर, रिकॉर्ड कर!”
डैनी की हँसी और चौड़ी हो गई।
उसने फुसफुसाकर कहा,
“गुड गर्ल। यही चाहिए था मुझे।”
रिवा का हाथ काँप रहा था।
उसने चेन नीचे खिसकाना शुरू किया।
एक-एक इंच नीचे, और भीड़ की साँसें और तेज़ होती गईं।
अब माहौल ऐसा था कि हर कोई थम गया हो।
कोई बोल नहीं रहा था, कोई रोक नहीं रहा था।
बस खामोशी थी और रिवा का अपमान होता जा रहा था।
डैनी झुककर उसके कान में बोला,
“शाबाश… अब तो आधा काम हो गया। आगे बढ़ो… पूरा कर दो।”
रिवा की आँखें लाल हो चुकी थीं। वो अब तक टाॅप उतार चूकी थी और अब ब्रा में थी ,
उसकी नज़रें भीड़ पर गईं—सबकी आँखों में तमाशा देखने की भूख।
उसके कानों में डैनी की बात गूँजी—
“अब पैंट भी उतारो।”
पूरा कैंपस सन्न हो गया।
किसी ने चीख दबाई, किसी ने फिर सीटी बजाई।
रिवा का चेहरा सफेद पड़ चुका था।
उसके हाथ फिर से काँप उठे।
उसके अंदर दो तूफ़ान टकरा रहे थे—
माँ की बात… और उसकी खुद की इज़्ज़त।
भीड़ अब और पास आ गई थी।
डैनी उसकी ओर झुका और होंठों पर वही शैतानी मुस्कान लिए बोला,
“चलो शेरनी… अब असली शो टाइम।”
रिवा की साँस अटक गई।
उसकी उंगलियाँ बेल्ट के पास जा पहुँचीं…
और ठीक उसी पल—
रिया और तन्वी दौड़ते-हांफते प्रिंसिपल के ऑफिस पहुँचीं।
दरवाज़ा धड़ाम से खोला और दोनों अंदर घुस गईं।
प्रिंसिपल सर उस वक़्त किसी फाइल में डूबे थे। अचानक दो घबराई हुई लड़कियों को देखकर उन्होंने चौंककर चश्मा उतारा।
“क्या हुआ? क्यों ऐसे भागी आ रही हो?”
रिया की साँसें टूटी हुई थीं। उसने लगभग रोते हुए कहा,
“सर… कैंपस में बहुत बड़ा हंगामा हो रहा है।”
तन्वी ने जल्दी-जल्दी जोड़ा,
“नए एडमिशन वाला लड़का… उसका नाम डैनी है। वो सबके सामने रिवा से बदतमीज़ी कर रहा है। पूरे कॉलेज के बच्चे वहाँ जमा हैं। उसने—उसने हद पार कर दी है।”
प्रिंसिपल का चेहरा सख़्त हो गया।
“क्या? रैगिंग? और वो भी लड़कियों के साथ बदतमीज़ी?”
रिया ने सिर हिलाया, आँखों में आँसू थे।
“जी सर… सब लोग देख रहे हैं, लेकिन कोई रोक नहीं रहा। सब सिर्फ तमाशा बना रहे हैं। रिवा अकेली फँस गई है।”
तन्वी ने हाथ जोड़कर कहा,
“प्लीज़ सर, जल्दी चलिए। वरना बहुत देर हो जाएगी।”
प्रिंसिपल ने कुर्सी से तुरंत उठते हुए स्टाफ रूम की ओर इशारा किया।
“सब प्रोफेसर्स को बुलाओ… अभी!”
और वे तेज़ी से ऑफिस से बाहर निकल पड़े।
तभी रिवा ने पेंट भी उतार दी अब वो सिर्फ ब्रा पेंटी में शर्मिंदा खड़ी ,
डैनी की आँखों में खतरनाक चमक थी।
वो आगे झुककर गुर्राया—
“अगर सच में अकड़ दिखानी है तो… मेरे लिए कैटवॉक करके दिखा।”
भीड़ में ठहाकों की गूँज उठी।
किसी ने सीटियाँ बजाईं, किसी ने मोबाइल और ऊँचा उठा लिया।
रिवा का दिल धड़क रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर अब एक अलग-सी ठंडक उतर आई थी।
उसने गहरी साँस ली, और धीरे-धीरे पीछे हटकर बीचोंबीच जगह बनाई।
डैनी हँस पड़ा,
“ओ हो! अब मज़ा आएगा… शेरनी बनी मॉडल।”
लेकिन अगले ही पल रिवा ने सीधी गर्दन उठाई और पूरे आत्मविश्वास से अपने कदम आगे बढ़ाए।
उसकी चाल में न डर था, न झिझक।
जैसे किसी रैंप पर रौशनी में उतरती हुई मॉडल हो।
भीड़ एक पल को चुप हो गई।
सभी हैरान रह गए।
डैनी की मुस्कान थोड़ी देर के लिए जमी—उसने सोचा था रिवा रोएगी, टूटेगी, लेकिन यहाँ तो तस्वीर उलटी हो गई थी।
रिवा के कदम ताल पर, उसकी आँखें सीधी डैनी की ओर।
कदम दर कदम उसकी चाल में ऐसा कॉन्फिडेंस था कि लोग दंग रह गए।
वो डैनी के सामने आकर ठिठकी और बोली—
“मेरे जैसी लड़की शायद ही तुमने कभी देखी होगी। तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं है कि मैं कौन हूँ।”
भीड़ में सरगोशियाँ फैल गईं।
डैनी ने भौंहें तानी,
“क्या मतलब?”
रिवा ने हल्की हँसी दी,
“मतलब ये कि मैं इस साल का बिकिनी कॉम्पटीशन जीत चुकी हूँ। लोगों की नज़रें, कैमरे, तालियाँ—मैं सब देख चुकी हूँ। तुम्हारी ये घटिया धमकियाँ मुझे हिला नहीं सकतीं।”
भीड़ में कई लड़कियों के चेहरे चमक उठे—जैसे रिवा उनके लिए बोल रही हो।
कुछ लड़कों की हिम्मत टूट गई।
लेकिन डैनी अब और खिसिया गया था।
उसकी आँखों में झुंझलाहट उतर आई।
“बहुत अकड़ है न तुझमें…”
वो धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ा और हाथ उठाकर उसके कंधे को छूने ही वाला था।
भीड़ सन्न।
किसी ने आवाज़ नहीं निकाली।
और तभी—
धड़ाक!!!
एक जोरदार थप्पड़ डैनी के गाल पर पड़ा।
आवाज़ इतनी तेज़ थी कि पूरा कैंपस गूँज उठा।
डैनी लड़खड़ा गया।
उसकी आँखें हैरत से फैल गईं।
वो पलटकर देखने लगा कि किसने हिम्मत की।
भीड़ के बीच से कोई लंबा-चौड़ा लड़का आगे आया। सुपर हैंडसम,
आँखों में गुस्से की आग, चाल में ऐसा रौब कि भीड़ अपने आप हटती चली गई।
उसने डैनी की कॉलर पकड़कर तना चेहरा दिखाया और दहाड़ा, डैनी ने कहा,
“ ब्रो… आप।
भीड़ में सनसनी दौड़ गई।
रिवा ने भी पहली बार राहत की साँस ली। ये था डैनी का बड़ा भाई तामस ,
डैनी का चेहरा उस थप्पड़ की गूंज से अब भी सुलग रहा था।
उसकी आँखों में गुस्सा और हैरत दोनों ही तैर रहे थे।
भीड़ में हलचल मच गई।
हर कोई फुसफुसा रहा था—
“किसने मारा?”
“इतना जोरदार थप्पड़… और वो भी डैनी को?”
सभी की नज़रें एक ही दिशा में टिक गईं।
भीड़ के बीच से हटते चेहरों और घबराई साँसों के बीच एक शख़्स आगे बढ़ रहा था।
उसकी चाल में अजीब-सा रौब था। जैसे उसके हर कदम से ज़मीन खामोश हो जाती हो।
काला फिटेड शर्ट, ऊपर से खुले दो बटन, जिससे उसकी चौड़ी छाती झलक रही थी।
डेनिम जीन्स, भारी बूट्स और हाथ की मोटी घड़ी उसके स्टाइल को और खतरनाक बना रहे थे।
चेहरे पर हल्की दाढ़ी, तेज़ जॉलाइन और नज़रों में ऐसी आग…
जैसे कोई बादशाह अपने इलाक़े में घुस आया हो।
भीड़ में किसी ने फुसफुसाकर कहा—
“ये… ये तो तामस है!”
तुरंत दूसरी आवाज़ आई,
“डैनी का बड़ा भाई… और कॉलेज का सबसे हॉट, सबसे हैंडसम लड़का।”
लड़कियों की साँसें जैसे अटक गईं।
कईयों ने मोबाइल निकालकर छुप-छुपाकर रिकॉर्डिंग शुरू कर दी।
रिवा की आँखें भी पल भर को चौंधिया गईं।
उसने कभी इतना हॉट और डेंजरस इंसान एक साथ नहीं देखा था।
तामस ने सीधे जाकर डैनी की कॉलर पकड़ ली।
उसकी पकड़ इतनी सख़्त थी कि डैनी का गुस्सा वहीं ठंडा पड़ गया।
“डैनी…” उसकी भारी आवाज़ गूँजी,
“लड़कियों से इस तरह की हरकत दोबारा की… तो ये थप्पड़ तेरी सबसे छोटी सज़ा होगी।”
भीड़ एकदम खामोश।
सिर्फ तामस की दहाड़ गूँज रही थी।
उसने डैनी को झटका देकर पीछे धकेला।
फिर सबके सामने गरजकर बोला—
“लड़कियों की इज़्ज़त करना सीख। किसी की बेटी, किसी की बहन तेरे लिए तमाशा नहीं है। अगर हिम्मत दिखानी है तो मैदान में दिखा… किसी मासूम पर नहीं।”
डैनी शर्मिंदा-सा सिर झुकाए खड़ा रह गया।
लेकिन तभी…
तामस की नज़र रिवा पर गई।
वो पल जैसे ठहर गया।
भीड़, शोर, सारी हलचल जैसे गायब हो गई हो।
उसकी नज़रें बस रिवा पर टिक गईं—
भीगी आँखें, लेकिन चेहरे पर अजीब-सा कॉन्फिडेंस।
शरीर भले ब्रा-पेंटी में शर्मिंदगी के साथ ढका हुआ था, लेकिन उसकी आँखों में एक आग थी।
तामस को यक़ीन नहीं हुआ कि इस हालत में भी कोई लड़की इतनी मज़बूत खड़ी रह सकती है।
उसका दिल धड़कने लगा।
रिवा ने तुरंत पास रखे अपने कपड़े उठाए।
सभी के सामने उसने बिना झिझक शॉल और जीन्स पहन ली।
उसकी हर हरकत में अब भी वही शान थी, मानो वो किसी रैंप पर तैयार हो रही हो।
तामस की नज़रें उसके हर मूव पर टिकी रहीं।
वो चाहता तो नज़रें फेर लेता, लेकिन न जाने क्यों… कुछ उसे खींच रहा था।
भीड़ में सरगोशियाँ फिर शुरू हो गईं।
“लगता है तामस को रिवा पर नज़र टिक गई है।”
“पहली बार उसे किसी लड़की को ऐसे देखते हुए देखा है।”
रिवा ने कपड़े पहनकर सीधी गर्दन उठाई और बिना तामस से कुछ कहे वहाँ से निकलने लगी।
उसके कदम तेज़ थे, लेकिन दिल में अजीब-सी हलचल।
“ये कौन है…? और इतना क्यों देख रहा था मुझे?” उसके ज़ेहन में सवाल गूंजा।
तभी पीछे से डैनी की आवाज़ आई—
“भाई… रुकिए। आप जानते भी हो ये कौन है?”
तामस ने धीमे से भौंहें तानी।
“कौन है?”
डैनी ने गुर्राते हुए कहा—
“ये… हमारे दुश्मनों की बेटी है। मैं इसे बस सबक सिखा रहा था।”
भीड़ में सनसनी।
रिवा ठिठककर पल भर को रुक गई।
उसकी साँस अटक गई।
तामस की आँखों में पहले तो हैरत झलकी, फिर होंठों पर धीमी-सी मुस्कान खेल गई।
वो ठंडे स्वर में बोला—
“ओह… तो ये दुश्मन की बेटी है।”
डैनी ने उत्साहित होकर कहा—
“हाँ भाई… इसलिए मैं…”
लेकिन तामस ने बीच में ही रोक दिया।
उसकी गहरी आवाज़ भीड़ में गूँजी—
“तो पहले ये कहना चाहिए था, डैनी। क्योंकि ऐसी लड़की को तो मैं भी… कभी छोड़ने वाला नहीं हूँ।”
उसकी नज़रों में अब अजीब-सी चमक थी।
भीड़ ने सांसें खींच लीं।