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तेरा मेरा रिश्ता…”🩷

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Sadia khanam

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तेरा मेरा रिश्ता… 🩷” पात्र आरव – एक सीरियस और मेहनती लड़का, दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। अनन्या – खुशमिज़ाज, चुलबुली, लेकिन दिल से बहुत मासूम लड़की। काव्या – अनन्या की बेस्ट फ्रेंड, जो कभी–कभी उनके बीच गलतफहमियाँ पैदा करती है। ---...

Total Chapters (4)

Page 1 of 1

  • 1. तेरा मेरा रिश्ता…”🩷 - Chapter 1

    Words: 0

    Estimated Reading Time: 0 min

  • 2. तेरा मेरा रिश्ता…”🩷 - Chapter 2

    Words: 1254

    Estimated Reading Time: 8 min

    Part 2 (इज़हार के बाद की कहानी)

    नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं

    आरव और अनन्या अब एक-दूसरे के और क़रीब आ गए थे।
    ऑफिस के काम के बहाने वो साथ में लंच करने लगे, कभी-कभी शाम को कॉफ़ी, और वीकेंड्स पर छोटे-छोटे आउटिंग।

    अनन्या की मासूम बातें और उसकी हंसी आरव की ज़िंदगी में रौशनी बन चुकी थी।
    आरव, जो पहले सिर्फ काम और काम में डूबा रहता था, अब हर दिन का सबसे अच्छा पल अनन्या के साथ बिताए लम्हे होते।


    ---

    दिल की धड़कनें…

    एक दिन दोनों ऑफिस से जल्दी निकलकर इंडिया गेट गए।
    ठंडी हवा और चारों तरफ रोशनी… माहौल खुद ही रोमांटिक था।

    अनन्या ने अचानक आरव से पूछा –
    "अगर मैं तुम्हारी ज़िंदगी से चली जाऊँ, तो?"

    आरव कुछ पल चुप रहा… फिर उसके हाथ पकड़कर बोला –
    "तो मेरी ज़िंदगी की धड़कनें ही रुक जाएँगी।"

    अनन्या की आँखों में आँसू आ गए, और उसी रात उसने अपने दिल की पूरी दुनिया आरव को सौंप दी।


    ---

    छुपा हुआ डर

    लेकिन, प्यार जितना खूबसूरत होता है, उतना ही नाज़ुक भी।
    अनन्या के दिल में एक डर छुपा था – उसके घर वाले बहुत सख्त थे।
    उसके पापा चाहते थे कि उसकी शादी उनके बिज़नेस पार्टनर के बेटे से हो।

    अनन्या जानती थी कि अगर सच सामने आया, तो Part 3 (पहली दरार)

    अनकहा सच

    आरव अब नोटिस करने लगा था कि अनन्या कुछ छुपा रही है।
    वो पहले जैसी खुली और बेफ़िक्र नहीं रही।
    कभी–कभी अचानक चुप हो जाती, तो कभी उसकी आँखों में डर साफ़ झलकता।

    एक शाम कैफ़े में आरव ने सीधे पूछा –
    "अनन्या, तुम्हें मुझसे कुछ कहना है? तुम्हारी आँखें वो कह रही हैं जो लब नहीं कह पा रहे।"

    अनन्या ने गहरी सांस ली, पर हिम्मत नहीं जुटा पाई।
    "नहीं आरव… सब ठीक है," इतना कहकर उसने बात टाल दी।


    ---

    ग़लतफहमी की शुरुआत

    उसी रात आरव ने ऑफिस में अनन्या को अपने बॉस के साथ सीरियस बातें करते देखा।
    दूरी से ही लगा जैसे कुछ बहुत पर्सनल बात हो रही हो।
    आरव का दिल डोल गया – क्या वो सच में उससे कुछ छुपा रही है?

    घर जाकर पूरी रात वो सोचता रहा…
    "क्या मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सपना एक झूठ है?"


    ---

    सामने आया तूफ़ान 🌩️

    कुछ दिनों बाद अनन्या के घर में रिश्ता लेकर लड़के वाले आए।
    अनन्या ने साफ़ मना कर दिया, लेकिन उसके पापा ग़ुस्से से बोले –
    "हमारी इज़्ज़त से खेलोगी? ये शादी होगी तो इसी घर में इज़्ज़त रहेगी।"

    अनन्या की आँखों से आंसू बह निकले।
    वो कमरे में भाग गई, और सबसे पहले आरव को कॉल किया।
    लेकिन आरव, जो पहले से शक में था, फ़ोन उठाकर बस इतना बोला –
    "अगर तुम्हें मुझे छोड़ना ही था, तो इतना करीब आने की ज़रूरत क्या थी?"
    और उसने कॉल काट दिया।


    ---

    टूटा हुआ दिल 💔

    अनन्या सदमे में थी।
    जिसे वो अपनी पूरी दुनिया मान बैठी थी, उसने उस पर भरोसा ही नहीं किया।
    रातभर रोते हुए उसने सोचा –
    "क्या मोहब्बत में इतना आसान होता है भरोसा तोड़ना?" Part 4 (टूटा भरोसा, अधूरी मोहब्बत)

    आरव का पछतावा

    फोन काटने के बाद आरव पूरी रात सो नहीं पाया।
    दिल बार-बार कह रहा था कि उसने कुछ गलत किया है…
    लेकिन दिमाग उसे यही समझा रहा था कि “शायद अनन्या सचमुच उसे धोखा दे रही है।”

    सुबह ऑफिस में उसने अनन्या को देखा।
    उसकी लाल आँखें और सूजा हुआ चेहरा सब कुछ कह रहे थे।
    लेकिन आरव ने कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं की।


    ---

    अनन्या का संघर्ष

    घर में माहौल और भी बिगड़ चुका था।
    पापा बार-बार कह रहे थे –
    "ये शादी तय हो चुकी है, अब इसमें तुम्हारी मर्ज़ी की कोई जगह नहीं।"

    अनन्या ने एक आख़िरी बार हिम्मत जुटाकर कहा –
    "पापा, मेरी ज़िंदगी मेरी है। मैं किसी और से प्यार करती हूँ।"

    ये सुनकर घर में तूफ़ान आ गया।
    पापा ने ग़ुस्से में कहा –
    "अगर उस लड़के का नाम फिर ज़ुबान पर आया… तो ये घर तुम्हारे लिए नहीं रहेगा।"


    ---

    दूरी और खामोशी

    अनन्या चाहती थी कि आरव उसका सहारा बने।
    लेकिन आरव की चुप्पी उसके लिए और भी तकलीफ़देह थी।
    वो सोचने लगी –
    "जिस इंसान के लिए मैं पूरी दुनिया से लड़ रही हूँ, वो ही मुझ पर शक कर रहा है।"

    धीरे-धीरे उसने आरव से बात करना बंद कर दिया।
    आरव भी अपनी ईगो में खामोश रहा।


    ---

    काव्या की चाल

    इसी बीच काव्या ने आग में घी डाल दिया।
    उसने आरव से कहा –
    "देखा ना, मैंने पहले ही कहा था… अनन्या किसी और के दबाव में है। तुम्हारे लिए वो सिर्फ टाइमपास थी।"

    ये सुनकर आरव का दिल और भी टूट गया।
    उसने ठान लिया –
    "अगर अनन्या को मेरी ज़िंदगी में नहीं रहना, तो मैं भी अब उसके पीछे नहीं जाऊँगा।"


    ---

    अधूरा रिश्ता 💔

    दिन गुज़रते गए…
    दोनों एक-दूसरे से नज़रे चुराते रहे, लेकिन दिल से दूर न हो पाए।
    वो मोहब्बत अब खामोशी और दर्द में बदल चुकी थी।

    अनन्या की सगाई की तैयारियाँ घर में शुरू हो गईं…
    और दूसरी तरफ आरव ने अपने काम में खुद को झोंक दिया।

    लेकिन रातों की तन्हाई में दोनों ही एक-दूसरे का नाम लेकर रोते रहे। Part 5 (शादी का दिन और किस्मत का खेल)

    शादी की तैयारियाँ

    अनन्या के घर में सजावट हो रही थी।
    हर तरफ रोशनी, मेहमान, शोर-शराबा…
    लेकिन अनन्या के दिल में सिर्फ सन्नाटा था।

    उसकी नज़र बार-बार फोन पर जाती, जैसे उम्मीद हो कि आरव एक कॉल करेगा, एक मैसेज भेजेगा…
    पर स्क्रीन खाली ही रही।


    ---

    आरव की तन्हाई

    दूसरी तरफ, आरव अपनी बालकनी में बैठा अनन्या की यादों में डूबा था।
    हाथ में शराब का गिलास और आँखों में आंसू…
    "शायद किस्मत ने हमें साथ रहने के लिए बनाया ही नहीं," उसने खुद से कहा।

    लेकिन दिल मानने को तैयार नहीं था।
    वो बार-बार कह रहा था – “जाओ, आख़िरी बार उससे मिल लो। अगर वो तुम्हारी है तो रुक जाएगी, अगर नहीं… तो तुम्हें हमेशा के लिए छोड़ देनी होगी।”


    ---

    सच का खुलासा 🌩️

    उसी वक़्त काव्या का सच सामने आया।
    उसकी एक दोस्त ने आरव को बताया –
    "अनन्या तुम्हें कभी धोखा नहीं दे सकती थी। ये सब काव्या की चाल थी। उसने ही तुम्हारे बीच ग़लतफहमियाँ पैदा की थीं।"

    ये सुनकर आरव का दिल काँप गया।
    वो तुरंत अनन्या की शादी में पहुँच गया।


    ---

    शादी का मंडप

    मंडप में अनन्या बैठी थी, आँखों में आँसू लिए।
    आरव अचानक वहाँ पहुँच गया और सबके सामने बोला –
    "अनन्या, मैं जानता हूँ तुम मुझसे प्यार करती हो। ये शादी तुम्हारी ज़िंदगी बरबाद कर देगी। अगर आज चुप रहा तो हमेशा पछताऊँगा।"

    पूरा हॉल सन्न हो गया।
    अनन्या के पापा ग़ुस्से से खड़े हुए –
    "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शादी रोकने की?"

    अनन्या ने काँपती आवाज़ में कहा –
    "पापा, मैं आरव से प्यार करती हूँ… और ज़िंदगी उसी के साथ बिताना चाहती हूँ।"


    ---

    किस्मत का फैसला 💍

    कुछ पल की खामोशी के बाद दूल्हे ने (जिससे अनन्या की शादी हो रही थी) खुद मंडप से उठकर कहा –
    "अगर ये एक-दूसरे से प्यार करते हैं, तो इन्हें साथ रहने दीजिए। जबरदस्ती का रिश्ता कभी खुशियाँ नहीं देता।"

    पापा की आँखें भर आईं।
    वो चुपचाप पीछे हट गए और बोले –
    "ठीक है अनन्या, अगर यही तुम्हारा फैसला है, तो मैं मंज़ूर करता हूँ।"


    ---

    अंत – मोहब्बत की जीत ❤️

    भीड़ में तालियाँ गूंज उठीं।
    आरव ने अनन्या का हाथ थामकर कहा –
    "अब चाहे कोई भी मुश्किल आए, मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूँगा।"

    अनन्या मुस्कुराई और आँसुओं के बीच बोली –
    "तेरा मेरा रिश्ता अब हमेशा के लिए है।"

    और इस तरह उनकी मोहब्बत ने सारी मुश्किलों को जीत लिया। 🌹

  • 3. तेरा मेरा रिश्ता…”🩷 - Chapter 3

    Words: 0

    Estimated Reading Time: 0 min

  • 4. तेरा मेरा रिश्ता…”🩷 - Chapter 4

    Words: 0

    Estimated Reading Time: 0 min