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The Mafia's Hidden Rose

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The Silent Queen

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यह कहानी है आकृति राजवंश की। आकृति, जिसने अपने दिल की धड़कन सिर्फ़ ध्रुव राठौर के नाम कर दी थी। उसके लिए ध्रुव ही उसका सपना, उसकी मोहब्बत और उसका भविष्य था। लेकिन किसे पता था कि वही धड़कन, वही चाहत एक दिन उसकी मौत की वजह बनेगी। ध्रुव से धोखा खाने...

Total Chapters (3)

Page 1 of 1

  • 1. The Mafia's Hidden Rose - Chapter 1

    Words: 1374

    Estimated Reading Time: 9 min

    आज बारिश किसी अभिशाप की तरह बरस रही थी। बादल ऐसे बरस रहे थे मानो वे दुनिया के सारे दुख अपने भीतर समेटे हों। सड़कें पानी से लबालब भरी थीं, और हर बूंद में एक उदासी घुली हुई थी। ऐसे मौसम में, एक लड़की भीगी बिल्ली की तरह सड़क पर दौड़े जा रही थी। उसका नाम आकृति था। उसके बाल उसके चेहरे पर चिपक रहे थे, और बारिश के कारण उसके कपड़े शरीर से चिपके हुए थे, जिससे उसे दौड़ने में परेशानी हो रही थी।

    उसके पीछे एक लड़का था, ध्रुव। उसके हाथ में एक चमकीला चाकू था, जो बारिश में चमक रहा था। उसकी आँखें गुस्से से भरी हुई थीं, और उसका चेहरा कठोर था। वह आकृति को पकड़ने के लिए पूरी ताकत से दौड़ रहा था।

    आकृति बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी। हर बार जब वह देखती, तो ध्रुव उसे थोड़ा और करीब दिखाई देता। डर उसके दिल में घर कर गया था। वह जानती थी कि अगर वह पकड़ा गई, तो उसकी जान खतरे में है।

    तभी उसकी नज़र उस लड़के पर पड़ी। ध्रुव अब कुछ ही दूरी पर था। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, और उसके पैर भारी हो रहे थे। लेकिन वह हार मानने वाली नहीं थी। उसे जीना था, अपने माता-पिता के पास वापस जाना था।

    लड़के को देखकर आकृति चिल्लाते हुए बोली, "नहीं ध्रुव, प्लीज ऐसा मत करो! तुम्हें जो चाहिए मैं देने को तैयार हूँ, प्लीज मुझे मत मारो! मुझे अपने मम्मी-पापा के पास जाना है, प्लीज मुझे छोड़ दो! मैं नहीं आऊँगी तुम्हारी और माया की जिंदगी में कभी नहीं आऊँगी, प्लीज छोड़ दो मुझे!" उसकी आवाज़ बारिश में डूब गई, लेकिन ध्रुव ने उसे सुन लिया था।

    इस पर ध्रुव हंसते हुए कहता है, "नहीं नहीं आकृति बेबी, ऐसे कैसे मैं तुम्हें छोड़ दूँ? जब तक तुम मरोगी नहीं, तब तक तुम्हारा दिल मेरी माया को कैसे मिलेगा?" उसकी हंसी में कोई दया नहीं थी, सिर्फ क्रूरता थी।

    ऐसा कहते हुए ध्रुव ने एक झटके में आकृति को पकड़ लिया। उसने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसे पलट दिया। आकृति ने बचने की कोशिश की, लेकिन ध्रुव बहुत मजबूत था। उसने उसकी छाती पर चाकू रखा और बिना किसी हिचकिचाहट के उसे अंदर घुसा दिया, जिससे आकृति की एक दर्द भरी चीख निकल गई।

    आकृति की छाती से तेजी से खून बह रहा था, जो उसके कपड़ों को भिगो रहा था। दर्द असहनीय था, लेकिन उससे भी बुरा था विश्वासघात का दर्द। उसने ध्रुव पर भरोसा किया था, उसे प्यार किया था, और उसने उसे धोखा दिया था।

    आकृति की आँखों में से आँसू बह रहे थे, जो बारिश में कहीं गुम हो जा रहे थे। वह अपनी ज़िंदगी को अपनी आँखों के सामने से गुज़रते हुए देख रही थी। उसने अपने बचपन को याद किया, अपने माता-पिता के साथ बिताए खुशी के पल, और ध्रुव के साथ बिताए प्यार भरे पल। लेकिन अब सब खत्म हो गया था।

    उसने इस आदमी से कितना प्यार किया था, इतना प्यार किया था कि उसने अपने परिवार से छिपकर, परिवार के खिलाफ जाकर इस आदमी से मिला करती थी। उसके माता-पिता ने उसे चेतावनी दी थी कि ध्रुव अच्छा नहीं है, लेकिन उसने उनकी बात नहीं सुनी। उसने सोचा था कि वह जानती है कि उसके लिए क्या अच्छा है। लेकिन वह गलत थी।

    उसने अपने परिवार को कितना मनाया था ताकि वह उनके प्यार को एक्सेप्ट कर सकें, लेकिन आज उसके परिवार वाले सच्चे निकले और आकृति का विश्वास टुकड़ों में बिखर गया था, वैसे ही जैसे आज आकृति के दिल के हजारों टुकड़े हो गए थे।

    आकृति ध्रुव के चेहरे को छूते हुए दर्द भरी आवाज़ में बोली, "ध्रुव, मैंने तुमसे कितना प्यार किया और तुमने ही इतना बड़ा धोखा दिया? यह सही नहीं किया तुमने, ध्रुव।" उसकी आँखें दर्द और विश्वासघात से भरी हुई थीं।

    पर ध्रुव एक शैतानी भरी हँसी के साथ आकृति के गालों को छूते हुए कहता है, "क्या करूँ आकृति? प्यार तो मैं भी तुमसे करता था, लेकिन क्या करूँ? तुम में वह बात नहीं जो माया में है। चलो अगर तुम में वह बात हुई होती... लेकिन तुम्हारे पैसों ने मुझे तुम्हारा गुलाम बना दिया। मैंने तुमसे कितने पैसे मांगे, लेकिन तुमने एक-एक चीज़ का हिसाब मुझसे माँगा।

    बताओ मैं तुम्हारा प्यार था, ना तो तुम मुझे एक फूटी कौड़ी भी क्यों नहीं देती थी? तुम सारे डिसीजन खुद लेती थी, तो आखिर मुझे यह करना पड़ा। मुझे तुम्हें मारना पड़ा, आखिर जब तुम मरोगी नहीं, तब तक तुम्हारी प्रॉपर्टी मेरे हिस्से में कैसे आएगी?" ध्रुव की आँखें लालच से चमक रही थीं।

    तभी माया ध्रुव के पास में आते हुए आकृति को घूरते हुए कहती है और इन सब चीजों में मैंने ध्रुव का साथ दिया। माया के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।

    माया को देखकर आकृति शॉक्ड हो गई थी। वह सदमे की हालत में बोली, "माया, तुम भी मिली हुई थी इन सबमें?" माया उसकी सबसे अच्छी दोस्त थी। उसने कभी नहीं सोचा था कि वह उसे धोखा दे सकती है।

    जिस पर माया हंसते हुए बोली, "मिली हुई थी का क्या मतलब? ध्रुव के दिमाग में तुम्हें मारने का आईडिया मैंने ही डाला था।" माया की हंसी डरावनी थी।

    फिर वह ध्रुव की तरफ देखते हुए बोली, "क्यों बेबी, सही कहा ना मैंने?" माया ने ध्रुव की बांह को पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया।

    पर ध्रुव आकृति के सामने माया के होंठों पर किस करके कहता है, "बिल्कुल सही कहा।" ध्रुव और माया एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए।

    फिर माया बोली, "अब मैं अगर ध्रुव के पास हूँ ही तो तुम्हारी जगह लेने के लिए आकृति मैडम तुम्हें तो मरना ही होगा।

    हम इसे ऐसे नहीं छोड़ सकते वरना यह हमें छोड़ेगी नहीं। वैसे भी सुना है ना, कभी भी जख्मी शेर को जिंदा छोड़ने की गलती मत करना, वरना वह शेर ठीक होकर तुम्हें ही खा जाएगा।

    वैसे भी हमें इसका दिल चाहिए और अगर हमें इसका दिल नहीं मिला तो मैं मर जाऊँगी, इसलिए आकृति को मरना बहुत ज़रूरी है।" माया की आवाज़ में एक सनक थी।

    माया की बात सुनकर ध्रुव की आँखों में थोड़ा डर भर आया था। उसे माया की सनक से डर लगने लगा था।

    वो बोला, "ठीक है, अब हम इसे मार ही देते हैं।

    और वैसे भी दिव्य इसके घर गया है इसके माँ-बाप को मारने के लिए।" ध्रुव ने खुलासा किया।

    यह बात सुनते ही आकृति कहती है, "दिव्य? वह तो मेरा बहुत अच्छा दोस्त है, वह ऐसा नहीं कर सकता!" आकृति को विश्वास नहीं हो रहा था कि दिव्य भी उनके साथ मिला हुआ है। तो माया और ध्रुव जोर-जोर से हंसने लगते हैं। उनकी हंसी आकृति के कानों में गूंज रही थी।

    फिर आकृति की बात सुनकर माया अपनी हंसी को कंट्रोल करते हुए बोली, "दिव्य को तुमसे कोई फर्क नहीं पड़ता, तुम्हें तो मरना ही है, तुम आराम से मर सकती हो।" माया आकृति को घूर रही थी।

    माया आगे आई और आकृति के बालों को पकड़ के उसे चाकू को और अंदर तक घुसेड़ देती है। आकृति की आँखों में दर्द और नफरत थी।

    माया ने आकृति की छाती में इतनी बुरे तरीके से चाकू को घोंपा था जिसे देखने वालों की भी रूह कांप जाती। आकृति का शरीर कांप रहा था।

    आकृति का दिल ध्रुव निकाल लेता है और उसकी किडनी निकालने के बाद इसे वहीं छोड़कर माया और ध्रुव वहां से निकल जाते हैं। वे बारिश में गायब हो गए, जैसे वे कभी थे ही नहीं।

    आकृति की आँखें खुली हुई थी, उन आँखों में नफरत और बदले की भावना साफ दिखाई दे रही थी। उसकी रूह आसमान में देखते हुए बोली, "ध्रुव से प्यार करना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी, काश उसने टाइम रहते अपने माँ-पापा की बात को मान लिया होता तो शायद उसकी यह दुर्दशा ना हुई होती।"

    "काश मुझे एक मौका और मिलता और मैं अपनी पिछली की गई गलतियों को सुधार पाती।" कहते हुए आकृति की आँखों में से आँसू बहने लगते हैं।

    तभी एक बिजली जोर से चमकती है, जो सीधा आकृति के शरीर के ऊपर गिरती है जिससे आकृति का शरीर वहीँ जलकर राख हो जाता है।

    क्या होगा आकृति का? क्या वह ऐसे ही मर जाएगी या वापस आएगी अपने दुश्मनों को सजा देने के लिए? जानने के लिए बने रहिए मेरे साथ।

    आज के लिए बस इतना ही, बाकी कल.....

  • 2. The Mafia's Hidden Rose - Chapter 2

    Words: 2702

    Estimated Reading Time: 17 min

    अब आगे

    एक घर के एक रूम में एक लड़की बेड पर लेटी हुई थी, धीरे-धीरे उसकी आंखें खुलती है, तो खुद को एक अनजाने जगह पाती है,वह अपनी आंखें खोलते ही सबसे पहले अपने सीने पर हाथ रख लेती है और वहां पर देखते हुए कहती है, " मेरा हार्ट ❤️तो उन लोगों ने निकाल लिया था,फिर मैं जिंदा कैसे बच गई और मेरे सीने पर कट के निशान क्यों नहीं है, और यह कौन सी जगह है, वह जैसे-जैसे याद करती है उसके साथ क्या हुआ था, वह जोर-जोर से चीखने और चिल्लाने लगती है।

    रूम के अंदर लड़की के चीखने की आवाज आने लगती है, वही एक नर्स जो उसकी care करने के लिए yha रुकी थी वह लड़की को होश में आए हुए देखकर बाहर भाग के बाहर जाती है और ओर सबको इंफोम करती है बाद में वे डॉक्टर को बुलाते है डॉक्टर आने के बाद लड़की को हो चेक करता है

    ओर तभी  उसके फैमिली वाले  किसी को कॉल करके इन्फॉर्म करते हैं,कि उसको होश आ गया है,तो दूसरी तरफ से बिना कुछ कहे ही कॉल कट हो जाता है।

    वही डॉक्टर  लड़की को संभालने की कोशिश कर रहे थे,लेकिन वह लड़की बार-बार एक ही चीज रिपीट कर रही थी, उन्हें चोट लगी है।

    तभी रूम का दरवाजा जोर से खुलता है और एक कपल अंदर आता है,वह दोनों अंदर आते ही उस लड़की को बुरी तरीके से घूरने लगते हैं।

    वो लड़की कुछ कह पाती, उससे पहले ही वह आदमी आगे जाकर उसको खींचकर एक थप्पड़ लगा देता है और उसके ऊपर चिल्लाते हुए कहता है, " तुम्हें क्या लगता है, तुम्हारी मौत तुम्हें बचा सकती है इस शादी से,तुमने आखिर क्या सोचकर सुसाइड करने की कोशिश की।"

    वह लड़की अपने गालों पर हाथ रख लेती है,अपने सामने खड़े इंसान को देखकर समझने की कोशिश कर रही होती है,कि आखिर यह कौन है और किस बारे में बात कर रहे हैं।

    वो ये सब सोच ही रही होती है,तभी उसके सर में बहुत तेज दर्द होता है और एक-एक करके सारी चीजे उसके दिमाग में वीडियो की तरह चलने लगती है।

    ज़ब वो अपनी आंखें खोलती है, तो उसे सब कुछ क्लियर हो चुका था और वो अपने मन में कहती है,तो क्या मैं मर कर वापस जिंदा हो गई, वह भी किसी और की आइडेंटिटी लेकर, लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है।

    वो लड़की को जब तक अपनी कंडीशन के कुछ पता नहीं चला था,तभी उसने उस आदमी की चिखती हुई गुस्से से भरी आवाज सुनी।

    " शैतान लड़की तुम्हारी शादी का फैसला तो पहले ही हो चुका है, जिसे अब कोई भी नहीं बदल सकता, अगर तुम मर भी गई ना तो भी हम तुम्हारी लाश को मैरिज हॉल तक ले जाएंगे और तुम्हारी शादी करवाएंगे, इसलिए अब तुम कोई नाटक करने की कोशिश मत करना, क्योंकि इन सब से हमें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला,तो बेहतर होगा कि आने वाले दिनों में तुम एक अच्छी लड़की की तरह रहो और हम जैसा बोल रहे हैं बिल्कुल वैसा करो। "

    "वरना इसका अंजाम बहुत बुरा होगा, जो तुम्हें ही भुगतना पड़ेगा और वैसे भी तुम्हारी शादी तुम्हारी मां मरने से पहले ही उस लड़के से करवा कर गई थी,इसलिए तुम चाहकर भी शादी से नहीं भाग सकती और तुम्हें मुझे दोष देने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि जो भी तुम्हारे साथ हो रहा है,वह सब तुम्हारी किस्मत की गलती है, तुम्हारी किस्मत ही इतनी बुरी है,कि जिससे तुम्हारी शादी होने वाली है, वो पहले से जिन्दा लाश बना हुआ है, जिसकी सांसे तो चल रही हैं, लेकिन जिंदा होकर भी वह मरा हुआ है।"

    वो लड़की उन लोगों की बातें सुनती जाती थी, वैसे-वैसे उसे याद आने लगा था कि यह लोग इस शरीर की असली मालकिन के साथ क्या-क्या करते थे, यह लोग उसका कैसे जीना दुश्वार किए हुए थे, लेकिन तभी उसे याद आता है,जिससे इस लड़की की शादी होने वाली है, वह ध्रुव का ही छोटा भाई है।

    ये याद आते ही उस लड़की की आंखें ठंडी और सख़्त हो जाती हैं। लेकिन अगले ही पल, जैसे किसी ठान ली गई कसम की तरह, वो खुद से कहती है,"नहीं… मैं उस घटिया इंसान की मीठी बातों में कैसे आ सकती हूं? ध्रुव… उसने मुझसे सिर्फ धोखा नहीं किया, उसने मेरे मां-पापा और मेरा सबकुछ छीन लिया।"

    उसके होंठ भींच जाते हैं, आवाज में तेज़ी और आंखों में नफरत भर जाती है,

    "मुझे ध्रुव से… अपने और अपने मां-पापा की मौत का बदला लेना है। और इसके लिए… मुझे ये शादी करनी ही होगी। सिर्फ इसी रास्ते से मैं उसके घर में कदम रख सकती हूं… उसकी दुनिया में घुसकर… उसे उसी तरह तबाह कर सकती हूं, जैसे उसने मुझे किया।क्योंकि मेरी जैसी गरीब घर की लड़की इतने बड़े इंसान के पास नहीं पहुंच सकती।"

    उसने एक नजर सिर को झुकाया और अपने आप को देखा जिसे देखते ही एक बार फिर उसकी आंखों में आंसू आ गए, लेकिन ये खुशी आशू थे,वह 20 साल की थी और आज भी 20 साल की है, लेकिन उसके रंग रूप और चेंज हो गया था यह कोई और नहीं हमारी आकृति ही थी जिसका रिबर्थ हुआ था।

    आकृति को याद आता है,इस लड़की का नाम कशिश है, जो कॉलेज स्टूडेंट है और पार्ट टाइम जॉब करने से अपने कॉलेज की फीस भर्ती है, वह इन सब बातों को अभी सोच ही रही थी,कि तभी वह आदमी एक बार फिर उससे बात करने की कोशिश की उसने काफी देर तक इंतजार भी किया।

    लेकिन उस लड़की ने जब कोई जवाब नहीं दिया वह बेचारी देती भी कैसे,वो तो खुद में ही उलझी हुई थी फिर उस आदमी ने गुस्से में कहा,"तुम शैतान लड़की क्या तुमने मेरी बात सुनी भी या नहीं.........?"

    आकृति अभी भी सोच में ही डूबी हुई थी, उसने तभी अनकॉन्शियसली ही कहा, "ह्म्म्मम्म.... "

    "ठीक है बेहतर होगा कि तुम मुझे परेशान ही ना करो और ना ही अपने डैड को तुम्हारे साथ जबरदस्ती करने के लिए मजबूर करो वो औरत कशिश से कहती है!"

    ये कोई और नहीं कशिश के पापा विशाल की पत्नी और उसकी सौतेली मां नीलम थी।

    फिर वह विशाल जी से कहती है, "जी आप बेफिक्र हो जाइए, कशिश एक अच्छी लड़की है,वह कोई परेशानी पैदा नहीं करेगी, क्यों बच्चा मैं सही कह रही हूं ना।"

    नीलम जी की बातें सुनकर आकृति को बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा था और वह अपने मन में कहती है कितनी नौटंकी बाज औरत है,मुझे इसे देखकर यकीन हो गया कि इसने अपनी मीठी बातों की वजह से कशिश के पापा को अपने जाल में फसाया लिया होगा, अब से आकृति को हम कशिश ही कहेंगे और यह हमारी हीरोइन है।

    एक बार फिर विशाल जी कशिश पर चिल्लाते हुए कहते हैं, " तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा तुम्हारी मां कितने प्यार से तुम्हें बुला रही हैं और तुम हो कि कोई जवाब ही नहीं दे रही हो उसकी बातें सुनकर कशिश बिना किसी बात के उन दोनों की तरफ देखती है और कहती है, " मैं शादी के लिए तैयार हूं" अब आप दोनों खुश हो जाइये।

    विशाल और नीलम जी कशिश की बातें सुनते हैं,वह खुश हो जाते हैं और कहते हैं ,तो फिर ठीक हैं अब तुम तैयार हो जाओ कुछ दिनों में तुम्हारी शादी उसी लड़के के साथ है।"

    तो जान लेते हैं कशिश के बारे में।

    20 साल की बहुत ही प्यारी और इनोसेंट लड़की है, वह अभी कॉलेज में पढ़ती है, उसकी हाइट 5 फिट 4 इंच है, सुंदर चेहरा बड़ी-बड़ी ग्रीन आँखे उस पर बड़ी-बड़ी पलके,दूध जैसा गोरा रंग,सुर्ख लाल होंठ और कमर से नीचे आते बाल, देखने में बिल्कुल एक परी की जैसी, उसकी मॉम बहुत पहले ही मर चुकी थी, उसके पापा उससे पहले बहुत प्यार करते थे,लेकिन जब से उन्होंने दूसरी शादी की, वह कशिश को पूरी तरीके से भूल गए।

    विशाल जी और नीलम जी के दो बच्चे हैं, सिया और कबीर,यह दोनों भी अपनी मां की तरह ही कशिश को परेशान करने का एक मौका भी नहीं छोड़ते,उनका जितना काम होता है, सब कशिश से ही करवाते हैं।

    शादी का दिन

    कशिश की शादी के लिए एक बड़ा सा सेवन स्टार होटल बुक किया गया था और उसे एक राज महल की तरह सजाया गया था, ऐसा लग रहा था, जैसे आज किसी राजा की शादी हो,वैसे हो भी क्यों ना जयपुर के किंग कहे जाने वाले शिवांश सिंह राठौर की जो शादी थी, दुनिया भर के सभी बड़े-बड़े नाम जिन हस्तियों को आमंत्रित किया गया था, वहीं कशिश को कई सारी ब्यूटीशियन मिलकर तैयार करने में लगी हुई थी,कशिश बस एक पत्थर की मूरत की तरह अपनी जगह पर बैठी हुई थी,कशिश चुपचाप उन लोगों को खुद को तैयार करने दे रही थी,उसके चेहरे पर इस वक्त ना ही कोई खुशी थी और ना ही कोई उदासी।

    वहां पर सिया आती है और कशिश को देखते हुए कहती है, "तो मेरी प्यारी बहना कैसा लग रहा है, तुम्हें एक पैरालाइज इंसान की वाइफ बनकर।

    कशिश एक नजर उसे देखते ही फिर बिना किसी भाव के कहती है," तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा, मैं यहां पर तैयार हो रही हूं,तो तुम यहां से चली जाओ,क्योंकि मैं अपना टाइम तुम जैसे बच्चों के ऊपर वेस्ट नहीं करना चाहती।"

    कशिश बातें सुनकर सिया को बहुत ही तेज गुस्सा आता है, वह कुछ कहती,उससे पहले ही रूम में एक लड़की आती है,जिसकी उम्र 22 साल होगी।

    भाभी मैं आपकी इकलौती और प्यारी ननद आर्या सिंह राठौड़ हूं और मैं यहां पर आपको अपने साथ ले जाने के लिए आई हूं, कशिश आर्या को देखकर एक स्माइल पास करती है, और उसके साथ जाने लगती है, आर्या कशिश का हाथ पकड़ती है, और उसे मंडप में लेकर आ रही थी और वहां पर मौजूद सारे लोगों की नजर कशिश को देख उसे पर ही टिक सी जाती है।

    कशिश अपनी नज़रें झुकाए हुए चलकर मंडप की ओर आ रही थी।

    कशिश ने आज मेहरून कलर का शादी का जोड़ा पहना हुआ था,जिसमें वह कयामत लग रही थी,उसके पूरे बदन पर मैरून कलर बहुत ही सुन्दर लग रहा था,उसे देख लग रहा था जैसे कोई परी हो,जो परी लोक से उतर कर आई हो।



    कशिश

    कशिश शादी के मंडप में जाकर खड़ी हो जाती है,तभी वहां पर एक लड़का एक व्हीलचेयर पर एक लड़के को लेकर आता है,अपने सामने से आई आवाज को सुनकर कशिश जैसे ही अपनी नजर ऊपर करती है उसकी नजर सामने बैठे इंसान पर पड़ती है।

    ज़ब वह उसका चेहरा देखती है,कशिश की नजर में उस पर ही ठहर जाती हैं।

    उम्र लगभग 23 साल गोरा रंग,सुंदर पिक्चर चेहरे पर एक राजा वाला रोब,गहरी ग्रे आंखें,6 फीट हाइट,मस्कुलर बॉडी, जेल से सेट किए हुए बाल,मेहरून पहने हुए सूट में बहुत ही चार्मिंग लग रहा था, उसे देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा था, वह एक पैरलाइज इंसान है, उसके चेहरे पर अभी भी एक रोब बना हुआ था, राजाओं वाला।



    शिवांश

    उसने कभी इतना सुंदर लड़का नहीं देखा था,वह अपनी आंखें फाड़े उसे ही देख रही थी, तभी आर्या उसके कान के पास आकर कहती है, " भाभी वह अब आपके होने वाले हैं, आपकाे जितना मन करे उतना देख लीजिएगा, लेकिन उन्हें रूम में ले जाकर, अभी शादी कर ले।"

    (चलिए जान लेते हैं हम अपने हीरो के बारे में।)

    शिवांश सिंह राठौड़,ये एक राज घराने से बिलॉन्ग करते है ( जयपुर की हुकुम शाह जो पूरे देश में राज करते हैं, उसके कई सारे बिजनेस है,जो की पूरी इंडिया में फैले हुए है, यह स्वभाव से बहुत ही शांत है पर ज़ब गुस्सा आता तो सब डरते है इनसे,मगर अपनों के लिए बहुत ही शांत, इन्हे एक बार कोई चीज पसंद आ जाए, तो वह किसी भी हद तक जा सकते है उसे पाने के लिए, कोई भी इंसान इनके सामने खड़े होकर इनकी आंखों में आंखें डाल कर बात करने से भी डरता है।

    (चलिए जान लेते हैं उनकी फैमिली के बारे में)

    राजेस्वरी सिंह राठौर यह बड़ी रानी सा है और शिवांश की दादी,उदयवीर सिंह राठौर यहां के राजा सा है,और शिवांश के दादाजी , रघुवीर सिंह राठौर और इनकी पत्नी सुमित्रा सिंह राठौर,शिवांश की बड़ी मां है और यहां की छोटी रानी सा, क्योंकि उनके पति को यहां की राजगद्दी पर कभी नहीं बैठाया गया, क्योंकि यहां के जो राजा होते हैं उनके अंदर पैदा होते ही अलग से क्वालिटी होती है जो उदयवीर जी की बेटे के अंदर नहीं था,जो छोटी बेटी के अंदर थी यही शिवांश के पापा के अंदर भी थे,लेकिन वह राजा बनते ही कहीं अचानक से गायब हो गए।

    रघुवीर और सुमित्रा के तीन बच्चे हैं ध्रुव सिंह राठौर और आरव सिंह राठौर और उनकी छोटी बेटी आर्या सिंह राठौर, आर्या, आरव शिवांश को अपने बड़े भाई की तरह ट्रीट करते हैं, लेकिन ध्रुव उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करता, क्योंकि उसे लगता है उसने उसका हक मारा है, क्योंकि बड़े होने की नाते यह राजगद्दी उसकी थी,लेकिन मिली शिवांश को बाकी सब आगे कहानी में आप लोगों को पता चलेगा फिलहाल अपनी स्टोरी पर आते हैं।

    वह लोग शादी के लिए बैठ जाते हैं,कशिश बिल्कुल किसी गुड़िया की तरह बैठी थी, पंडित जी जो कह रहे थे, वह सब कर रही थी, उसके अंदर तूफान सा उठ रहा था, उसे ध्रुव की बातें याद आ रही थी,उन दोनों ने कैसे एक दूसरे से वादा किया था,वह दोनों एक दूसरे से शादी करेंगे,लेकिन आज उसकी शादी उसके छोटे भाई से हो रही थी।

    कशिश खुद को समझाते हुए कहती है, "नहीं मेरा ध्रुव कभी भी मुझे धोखा नहीं दे सकता, वह मुझे तो सच्चा प्यार करता था, जरूर दिव्य ने मुझसे झूठ बोला है, ताकि वह मुझे तोड़ सके,में जब ग्रुप से मिलूं उसे सारी बात बताऊं उसे यह भी बताऊंगी, मैं वापस आ गई हूँ,फिर सारी सच्चाई पता चलते ही, वो मुझे अपना लेगा, वो ये सब सोच ही रही थी, तभी उसके कान में पंडित जी की आवाज आती है, जो कह रहे थे,

    " कन्या के मांग में सिंदूर भरे,पंडित जी की बात सुनकर कशिश अपनी जगह से खड़ी होती है और शिवांश के हाथ को पड़कर उसके हाथों से अपनी मांग में सिंदूर भर लेती है।

    सिंदूर भरते ही कशिश की आंखें बंद कर हो जाती हैं, उसके दिल में एक अजीब सा एहसास हो रहा था, उसे समझ ही नहीं आ रहा था,कि ये एहसास कैसा है।

    और वही कशिश के छूते ही शिवांश के अंदर भी एक हलचल होने लगती है,वह भी अपनी सेंस में आ जाता है,उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो कितने दिनों बाद उठा हो लेकिन जैसे ही उसकी नजर अपने सामने जाती है, तो खुद को मंडप के अंदर पाता है, वह एकदम शौक हो जाता है,क्योंकि उसे जहां तक पता था,उसका तो बहुत जरूरी बुरी तरीके से एक्सीडेंट हुआ था, तो फिर वह शादी के मंडप में इस लड़की के साथ क्या कर रहा है,ये सब सोचते हुए वह अपने आसपास की चीजों को ऑब्जर्व करने लगता है।

    शादी संपन्न हो जाती है और आरव शिवांश को व्हील चेयर पकड़ता है,और उसे मंडप से बाहर ले जाने लगता है और आर्या कशिश को मंडप के बाहर लेकर आती है।

    कुछ समय बाद

    उनकी कार एक राजमहल के आगे रूकती है, आरव शिवांश को कार से बाहर लेकर आता है, और कशिश भी बाहर आती है, उसका चेहरा घुंघट से ढका हुआ था।

    महल के दरवाजे पर एक 65 साल की औरत हाथ में आरती की थाली लिए खड़ी थी,आर्या कशिश को उनके पास ले जाते हुए कहती है, भाभी सा इनसे मिलिए की रानी मां और हमारी और आपकी दादी सा राजेस्वरी सिंह राठौर और यह जो उनके बगल में खड़ी है वह मेरी माँ और हमारे शिवांश भाई की बड़ी माँ सुमित्रा सिंह राठौर।

    कशिश उन्हें प्रणाम करती है तो वह कशिश को आशीर्वाद देते हुए कहती है, "सदा खुश रहो और फिर दादी सा आर्या को से कहती है,"तुमने तो अपनी भाभी सा को देख लिया, अब तुम हमें नहीं दिखाओगी हमारी बहु रानी सा को,हम भी तो देखें हमारे होने वाली महारानी सा कैसी दिखती है।"

    दादी की बातें सुनकर आर्या कशिश का घूंघट उठा देती है,तो दादी सा जैसे ही कशिश का चेहरे को देखनी है,उनके चेहरे पर प्यारी मुस्कान आ जाती है और दादी सा कहती है,ये तो बिल्कुल एक परी की तरह है।

    शिवांश जैसे ही इतने दिनों बाद अपनी दादी को देखता है, उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं, लेकिन किसी को सच्चाई पता नहीं चल जाए,इसलिए वह अपना सर नीचे झुका लेता है।

    ____________🍁🍁🍁____________

  • 3. The Mafia's Hidden Rose - Chapter 3

    Words: 1855

    Estimated Reading Time: 12 min

    **💞"चाँदनी सी मुस्कान है दुल्हन के चेहरे पर,
    💞पिया के साथ कदम रखा उसने इस नए सफर पर।💞
    💞गृहप्रवेश की रस्म में सजी धजी है ये ड्योढ़ी,💞
    💞सपनों से सजी है दुनिया, प्यार से महकी है ये बगिया।💞

    💞कदम-कदम पर खुशियों के फूल खिलें,💞
    💞नई ज़िन्दगी में हर राह आसान मिलें।💞
    💞नये घर की चौखट पर तेरा ये पहला कदम,💞
    💞सदियों तक यूँ ही रहे, बस खुशियों का संगम।"💞**

    शादी की रस्में पूरी हो चुकी थीं। महलनुमा हवेली के अंदर अभी भी खुशियों की रौनक बाकी थी, लेकिन अब वक्त था दुल्हन को ससुराल वालों के सामने पेश करने का। दादी सा, जिन्हें पूरा परिवार सम्मान से यही नाम पुकारता था, ने कशिश का हाथ अपने हाथों में लिया। उनकी आँखों में एक स्नेह था, जिसमें एक गहरी चिंता भी छुपी हुई थी। "चलो बेटा, अब तुम दोनों आराम करो," शिवांश की माँ, सुमित्रा जी ने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उनकी मुस्कान में एक अजीब सी बेचैनी थी।

    आरव, शिवांश का छोटा भाई, शिवांश की व्हीलचेयर को धक्का देकर उनके कमरे की ओर ले जा रहा था। शिवांश की बड़ी बहन, आकृति, कशिश के पीछे-पीछे चल रही थी, उसके हाथ से झूठी उतारने में मदद करते हुए। पूरा परिवार एक साथ था, लेकिन हवा में एक तनाव साफ महसूस किया जा सकता था।

    कशिश का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वह इस भव्य महल और इन अजनबियों के बीच खुद को बिल्कुल अलग-थलग महसूस कर रही थी। दादी सा का हाथ थामे, वह चुपचाप उनके साथ चल रही थी, लेकिन उसका मन भीतर ही भीतर घबरा रहा था। "जी दादी सा," उसने धीरे से, लगभग फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ डर और अनिश्चितता से भरी हुई थी।

    जैसे ही कमरे का भव्य दरवाजा खुला, कशिश की सांस थम सी गई। कमरा उसकी कल्पना से कहीं ज्यादा शानदार और विशाल था। हवादार, ऊँची छतों वाले उस कमरे में हर चीज परफेक्ट और महंगी लग रही थी। कमरे के बीचोंबीच एक गोल आकार का बड़ा बेड रखा था, जिस पर बर्फ जैसी सफेद चादर बिछी थी और लाल गुलाब की पंखुड़ियों से 'लव' लिखा हुआ था। दीवारें गहरे ग्रे रंग की थीं, जो कमरे को एक राजसी एहसास दे रही थीं। पूरे कमरे में लाल गुलाब के फूल और सुनहरे रिबन वाले गुब्बारों से सजावट की गई थी, ठीक किसी बॉलीवुड फिल्म की सुहागरात की सेज की तरह।

    ये क्या मजाक है? कशिश ने मन ही मन सोचा, उसका दिल एकदम से भारी हो गया। क्या इन्हें बिल्कुल भी अहसास नहीं है कि शिवांश पैरालाइज्ड हैं? उन्हें बिस्तर से उठने तक में मदद की जरूरत पड़ती है... फिर ये सब सजावट, ये गुलाब... ये सब क्यों? क्या ये सब सिर्फ दिखावा है? उसकी आँखों में अनजाने ही पानी भर आया, जिसे उसने तुरंत पलकों को झपकाकर छुपा लिया।

    दादी सा ने कशिश का हाथ थामा और उसे बेड के पास ले जाकर बैठाया। उनकी आवाज़ में एक गहरा प्यार और थोड़ा दर्द छुपा हुआ था। "बेटा, हम जानते हैं," उन्होंने धीरे से शुरुआत की, "ये शादी तुम्हारी अपनी मर्जी से नहीं हुई है। तुम्हें एक ऐसे शख्स के साथ बाँध दिया गया है जो अभी खुद अपना ख्याल नहीं रख सकता।" उन्होंने शिवांश की तरफ देखा, जो व्हीलचेयर पर बेसुध से लेटे हुए थे, उनकी आँखें बंद थीं। "पर हमें, इस परिवार को, विश्वास है कि एक दिन हमारा शिवांश ठीक हो जाएगा। वह फिर से चलने-फिरने लगेगा। और तब... तब तुम्हारा उसके साथ ये बंधन और भी मजबूत होगा।"

    उन्होंने कशिश की ओर देखा, उनकी नजरों में एक गुजारिश थी। "तुम उसका दिल जीतना, बेटा। तुम एक समझदार लड़की हो, तुम्हें पता है कि रिश्ते कैसे निभाए जाते हैं। हम तुम्हारी हर जरूरत पूरी करेंगे। तुम्हें जो कुछ भी चाहिए, बस एक बार कहना। हमारा पूरा परिवार तुम्हारे साथ है। बस... बस तुम हमारे शिवांश का ख्याल रखना। उसे अकेला महसूस न होने देना।"

    कशिश का गला भर आया। वह कुछ बोलना चाहती थी, अपने डर, अपनी चिंताओं को ज़ाहिर करना चाहती थी। "पर दादी सा, वो हम... हम नहीं जानती... मतलब, उनका ख्याल कैसे..." उसकी आवाज़ लड़खड़ा गई।

    दादी सा ने उसका हाथ थपथपाया। "तुम कोशिश जरूर करना, बेटा। बस इतना ही काफी है।"

    तभी कमरे का दरवाजा खुला और सुमित्रा जी अंदर आईं। उनके चेहरे पर एक अलग ही तरह की आत्मविश्वास भरी मुस्कान थी। "माँ, आप इतना टेंशन क्यों ले रही हैं?" उन्होंने दादी सा से कहा, लेकिन नजरें कशिश पर टिकी हुई थीं। "आपको पता है ना, मैंने ही अपने शिवांश के लिए कशिश को चुना है। और मेरी नजरें," उन्होंने जोर देकर कहा, "कभी धोखा नहीं खातीं। यह लड़की जरूर अच्छे से ध्यान रखेगी शिवांश का। यह मजबूत है, हिम्मत वाली है।"

    व्हीलचेयर पर पड़े शिवांश की पलकें हल्की सी फड़फड़ाईं। वह सब कुछ सुन रहा था। तो यह सब... यह शादी... बड़ी माँ की एक सोची-समझी साजिश है? उसके मन में गुस्से की एक लहर दौड़ गई। क्या उन्होंने इस बेचारी, मासूम सी दिखने वाली लड़की को मेरी देखभाल के नाम पर, मेरी निगरानी करने के लिए लाया है? या फिर... उनका कोई और ही मकसद है? उसने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं, लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया। लेकिन मैं जल्द ही सबको दिखा दूंगा... मैं मरा नहीं हूँ। मैं लड़ना जानता हूँ। और मैं वापस आऊंगा।

    कुछ देर बाद, एक-एक करके सब लोग कमरे से चले गए। आरव शिवांश के लिए रात के कपड़े लेकर आया। "भाई साहब, आज तो बहुत थक गए होंगे," उसने कहा। तभी उसका फोन बज उठा। कॉल पर बात करते हुए उसके चेहरे का रंग उड़ गया। "क्या? अभी? ठीक है, मैं आ रहा हूँ।"

    उसने जल्दी से कपड़े कशिश के हाथ में थमा दिए। "भाभी, माफ करना, बहुत जरूरी काम आ गया है। क्या आप... क्या आप भाई साहब के कपड़े चेंज करवा देंगी? प्लीज?" इतना कहकर वह बिना कोई जवाब सुने, तेजी से कमरे से बाहर निकल गया।

    कशिश वहाँ खड़ी-खड़ी देखती रह गई, अपने हाथों में रखे नरम सूती कुर्ते और पजामे को देखते हुए। उसका दिल धक-धक करने लगा। उसने अपने जीवन में कभी किसी पुरुष के कपड़े नहीं बदले थे, खासकर एक ऐसे पुरुष के जिससे उसकी आज ही शादी हुई थी। डर के मारे उसके हाथ काँपने लगे।

    हिचकिचाते हुए, उसने शिवांश के पास जाके उनकी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। हर बटन खोलने में उसे एक अनंत समय लग रहा था। उसकी उंगलियाँ अजीब तरह से फिसल रही थीं। शिवांश उसके हर एक हलचल को महसूस कर रहा था, उसके हाथों का कंपन, उसकी सांसों की तेज गति। वह चाहता था कि वह बोल सके, उसे बता सके कि घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन वह अपनी इस जकड़न को तोड़ नहीं पा रहा था।

    आखिरकार, किसी तरह उसने शर्ट उतारकर उन्हें एक आरामदायक ब्लैक कॉटन टी-शIRT पहना दी। अब बारी थी पजामा बदलने की। यह और भी मुश्किल लग रहा था। उसने एक गहरी सांस ली और अपने दुपट्टे को अपनी आँखों पर बांध लिया। बस कर लो, कशिश। यह तुम्हारा फर्ज है। उन्हें एक मरीज की तरह देखो।

    अंधेरे में, सिर्फ छूकर, उसने उनका पजामा बदलने की कोशिश की। हाथ अजीब तरह से टटोल रहा था। तभी, एक अनचाही हलचल में, उसका हाथ गलती से शिवांश के जांघ के अंदरूनी हिस्से पर चला गया।

    "ओह! माफ करना! माफ करना भैया! गलती से हो गया!" वह चीखी और तुरंत पीछे हट गई, अपने मुँह पर हाथ रख लिया। उसका चेहरा शर्म और डर से तमतमा रहा था। हे भगवान! मैंने क्या कर दिया? और मैंने उन्हें 'भैया' कैसे कह दिया? यह मेरे पति हैं!

    व्हीलचेयर पर पड़े शिवांश के होठों के कोने पर एक बारीक सी मुस्कान तैर गई। इस घर में पागलों की कमी नहीं है, उसने मन ही मन सोचा, और लगता है एक नया पागल अभी-अभी आया है।

    किसी तरह, हाथ-पैर काँपते हुए, कशिश ने कपड़े बदलने का काम पूरा किया। उसने एक लंबी सांस ली, जैसे कोई बहुत बड़ा काम कर डाला हो। फिर उसने अपने भारी-भरकम जेवरात उतारने शुरू किए। हार, कानों के झुमके, नथ... एक-एक करके सब उतारकर उसने ड्रेसिंग टेबल पर रख दिए।

    जैसे ही वह अपनी आखिरी चूड़ी उतारने लगी, उसे अपनी माँ की आवाज़ याद आ गई। शादी से एक रात पहले, उसकी माँ ने उसे समझाया था, "बेटा, याद रखना। शादीशुदा औरत का हाथ और गला कभी खाली नहीं होना चाहिए। इससे उसके पति के ऊपर संकट आता है। यह एक अशुभ संकेत होता है।"

    उसकी आँखों में अचानक आँसू आ गए। इस विदेशी जगह में, इन अजनबियों के बीच, उसे अपनी माँ की याद बहुत सताने लगी। उसने हिचकिचाते हुए एक चूड़ी वापस अपने हाथ में पहन ली और अपने मंगलसूत्र को भी ठीक से पहन लिया, जैसे उसकी एकमात्र सुरक्षा का सहारा वही था।

    दिन भर की भागदौड़ और भावनात्मक उथल-पुथल ने उसे पूरी तरह से थका दिया था। वह बिना अपने कपड़े बदले ही, शिवांश के बगल में बेड पर लेट गई। आँखें बंद करते ही, नींद ने उसे अपने आगोश में ले लिया।

    जैसे ही कशिश की सांसें गहरी और नियमित हुईं, शिवांश की आँखें खुल गईं। उनमें एक अलग ही चमक थी। उसने धीरे-धीरे, बहुत संघर्ष करते हुए, अपने शरीर को हिलाना शुरू किया। मांसपेशियों में एक तेज दर्द था, जो लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से अकड़ गई थीं। पसीना उसके माथे पर आ गया, लेकिन हार मानना उसके स्वभाव में नहीं था।

    आखिरकार, एक जबरदस्त प्रयास के बाद, वह बिस्तर के किनारे तक पहुँचा और अपने पैरों को जमीन पर टिकाया। ठंडे फर्श का स्पर्श उसे एक अजीब सी ताकत दे गया। बेड का सहारा लेकर, वह धीरे-धीरे खड़ा हो गया। यह एक ऐतिहासिक पल था। वह लड़खड़ाया, लेकिन खुद को संभाल लिया।

    लड़खड़ाता हुआ, वह अपनी पुरानी लकड़ी की अलमारी की तरफ बढ़ा। उसने एक छिपे हुए तंबू को खोला, जो एक पुरानी डायरी के पीछे छुपा हुआ था। उसमें से उसने एक छोटा सा, ब्लैक पेंड्राइव और एक कील-भर का कागज का टुकड़ा निकाला, जिस पर कुछ कोडेड नोट्स लिखे थे। वह जानता था कि उसका एक्सीडेंट कोई साधारण सड़क दुर्घटना नहीं थी। उसकी अपनी ही हवेली की दीवारों के भीतर, उसके अपने ही खून के रिश्तेदारों में से किसी ने उसे मारने की कोशिश की थी। यह सब एक साजिश का हिस्सा था।

    उसने पेंड्राइव को मुट्ठी में जोर से भींच लिया, फिर उसे वापस छुपा दिया। वह धीरे-धीरे वापस बिस्तर की ओर मुड़ा। तभी उसकी नजर कशिश पर पड़ी, जो गहरी नींद में सो रही थी। चांदनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, उसकी थकान और मासूमियत को और भी निखार रही थी। एक पल के लिए, उसके चेहरे पर एक कोमलता आ गई। शायद... सिर्फ शायद... यह लड़की वाकई में मेरी मदद कर सकती है, उसने सोचा, शायद यही वह हथियार है जिसकी मुझे जरूरत है।

    वह बिस्तर पर वापस लेट गया और अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन उसका दिमाग एक योजना बनाने में लगा हुआ था। वह अपने दुश्मनों को पकड़ने, उन्हें उन्हीं की जाल में फंसाने की योजना बना रहा था। और अगले ही पल, उसने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। वह कशिश पर भरोसा करेगा। वह उसे अपनी सच्चाई बताएगा।

    💖"दिल से धड़कन तक,
    हर एहसास तुमसे है,💖
    💖मेरी हँसी, मेरी खुशी,
    हर जज़्बात तुमसे है।💖
    💖यूँ तो फिजाओं में बहारें और भी हैं बहुत,💖
    💖पर मेरे लिए तो सारी कायनात तुमसे है।"💞

    To be continued...