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Heartless devil's king ki innocent mehbooba.....❤️❤️

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🦋🦋Shivani khari 🦋🦋

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कहते हैं......... "ज़िंदगी में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। जो होना तय है, वो होकर ही रहता है, चाहे आप लाख कोशिशें कर लें। यह कहानी है अद्विक और कनक की, दो ऐसे अजनबी जिनकी दुनियाएँ एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। कनक, एक 17 वर्षीय भ...

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Advik singhaniya...

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Kanak....

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Total Chapters (8)

Page 1 of 1

  • 1. advik or Kanak ❤️❤️ - Chapter 1

    Words: 1230

    Estimated Reading Time: 8 min

    Hiiii guys...🙏 कैसे हैं आप सब।। उम्मीद है अच्छे होंगे। ... 🥰🥰

    सो फ्रेंड उम्मीद करतीं हुं आप सब को मेरी कहानी पसंद आयेगी। जिस तरह से आप ने मेरी पहली कहानी को अपना प्यार दिया। उम्मीद करतीं हुं उसी तरह आप सब मेरी इस कहानी को भी अपना भर भर कर प्यार दोगे।😊😊

    तो कहानी सुरू करने से पहले में अपने हिरो हिरोइन का इंट्रोडक्शन करा देती हुं। 😊

    💐💐💐🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿💐💐💐

    तो पहले मिलते हमारी कहानी की हिरोइन से।......😊

    कनक शर्मा..... दिखने में इतनी सुन्दर की स्वर्ण से आई अफ़सरा को भी फेल कर दें। गोरा रंग। काली गहरी आंखें। भरी भरी पलके। क़मर से भी निचे तक आते हुए बाल। वह हल्की मोटी थी। पर फिर भी बहुत सुंदर और क्यूट लगती थी। उस के वह फुले हुए गालों को देख कर सब का खिंचने का मन करें। गुलाबी होंठों जिन के पास में साइट साइड में छोटा-सा तिल था। जो दिखने में बहुत प्यार लगता था।
    वह बिल्कुल क्यूट पांडा थी दिखने में। 17 साल की कनक अपनी मां गिता जी के साथ गांव सोनितपुर में रहीं हैं। कनक के पिता नीरज जी काले पेलिया की बिमारी से मर गये थे ‌। जिसे वह अपने ताई ताऊजी के साथ उस के घर पर ही रहती है। कनक की मां अपने जेठ जेठानी के घर पर नौकर बन कर काम करतीं हैं। जिस में कनक भी उन का साथ देती है। दोनों मां बेटी अपनी दुःख भरी जिंदगी में भी खुश थी।
    कनक के बारे में आगे स्टोरी में और जानें को मिलेगा।

    अभी चलते हैं कहानी के हिरो के बारे में जानें के लिएं।

    अद्विक सिंघानिया।..... सिंघानिया एम्पायर का CEO जिसे ने अपने मेहनत और लगन से सिंघानिया एम्पायर को top 1 . पर पहोंचा या है।
    दिखने में ऐसा की फिल्म के हिरो को भी फेल कर दें। अपने गुस्से और घमंड में चूर इतना रहता है की अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझता। सारी दुनिया इन्हें heartless devil's के नाम से जानती है।

    परिवार में। पिता (सुरज सिंघानिया। ) माता ( देविका सिंघानिया) छोटा भाई ( समर सिंघानिया ) छोटी बहन ( प्रिया सिंघानिया) समर और प्रिया जुड़वां बच्चे हैं। दोनों ही इस वक्त कॉलेज में सेकेंड इयर में पढ़ रहे हैं।

    चाचा (सुबोध सिंघानिया। ) चाची ( कोमल सिंघानिया) इन के दो बेटे हैं। ( राज़ सिंघानिया) और ( विराट सिंघानिया)

    और हम आगे जानेंगे फिलहाल अब चलते हैं कहानी की तरफ ।...

    💐💐🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿🧿💐💐

    दिल्ली एयरपोर्ट पर। ...✈️✈️

    एक लड़की जिस की उम्र 16 17 साल की लग रही थी। वह एयरपोर्ट पर बैठी इधर-उधर देख रहीं थीं। उस की आंखों में आसूं थे। उस के चहरे पर डर दिख रहा था। वह बैचेन थी। और इधर-उधर देख रहीं थीं।

    उस बच्ची को देख कर लग रहा था। जेसे वह किसी को ढुंढ रहीं थीं।

    उस लड़की ने लाल साड़ी पहन रखी थी। उस की मांग में सिन्दूर भर हुआं था। गले में बड़ा सा सोने का मंगलसूत्र पहन रखा था। जो की पुराने जमाने का लग रहा था। हाथों में मेहंदी लगीं हुई थी जिस का रंग बहुत गाढ़ा था। उस महंदी से रचें हुए हाथों में भर भर कर लाल चुड़ी पहन रखी थी। वह लड़की बिल्कुल नयी नवेली दुल्हन लग रही थी।
    लड़की दिखने में बहुत सुन्दर लग रही थी। वह थोड़ी सी मोटी थी। पर फिर भी वह बहुत क्यूट और खुबसूरत थी। बिल्कुल क्यूट पांडा की तरह। वह लड़की भाग कर एक ओल्ड लेडी के पास गयी और रोते हुए कहती हैं। काकी काकी आप ने मेरे पति बाबू को देख है। वह यही थे। अब पता नहीं कन्नू के पति बाबू का चलें गये कन्नू को छोड़ कर।

    उस लड़की को देखा कर वह ओलड लेडी कहतीं हैं। बेटा आप मुझे यहां की तो नहीं लगती आप कहां से हो और आप किस कि बात पर रहें हों।

    वह लड़की कहती हैं। काकी हमारे पति बाबू हम नहीं मिल रहें हैं ।

    वह ओल्ड लेडी कहतीं हैं। आप का नाम किया है बच्चा।

    वह लड़की रोते हुए कहती हैं। मेरा नाम कनक है। हम सोनितपुर से है। और हम यह अपने पति बाबू के साथ आयें है।

    आप को पता है वह ना बहुत बड़े आदमी हैं। उन के आगे पिछे काले रंग के कपड़े पहने हुए बड़े बड़े मोटे-मोटे आदमी अपनी हाथों में बंदूक लेकर रहते हैं।

    वह औरत उस बच्ची की मासुमियत से भरी बातों को सुन रही थी। और उसे उस बच्ची पर तरस भी आ रहा था। वह लाचारी में अपना सिर हिलाते हुए कहती हैं। पता नहीं कोन है तुम्हारा वह पति पर इतना जरूर जानतीं हुं जा भी है। वह बदनसीब है जो इस हिरे को छोड़ कर चला गया। इतना कहकर वह औरत चली जाती है।
    कनक बस रोते हुए इधर-उधर देख रहीं थीं। वह रोते हुए कहती हैं। मां ने तो कहा था कि पति बाबू हमें बहुत प्यार करेंगे। और हमें हमेशा खुश रखेंगे। पर पति बाबू तो कन्नू को छोड़ कर कहा चलें गये।

    कोई बात नहीं हो सकता है की वह किसी जरूरी काम से गये हों। वह बहुत बड़े आदमी हैं ना। हमें लेने जरूर आयेंगे। देख ना कन्नू पति बाबू जरूर आएंगे। हम यही बैठ जाते हैं। वह जब आयें तो हम ढुढेगे ना। और हम नहीं मिले तो परेशान हो जाएंगे।

    कनक वह एक साइड में जमीन पर बैठ जातीं हैं। और कहतीं हैं। पति बाबू जल्दी आ जाओ कन्नू को डर लग रहा है।

    दुसरी तरफ। .....
    सिंघानिया एम्पायर....

    सिंघानिया एम्पायर की बड़ी सी बिल्डिंग में जिस को देखने भर से ही गर्दन दर्द करने लगें। उस बिल्डिंग 35 वे फ्लोर पर बने केविन में ...

    एक लड़का जिस की उम्र तकरीबन 29 साल की थी वह अपने आफिस में बैठ लेपटॉप पर काम कर रहा था। और वह अपने असिस्टेंट से कहता है। शेखर जल्दी कर मेरी इंपोर्ट मीटिंग है। मैं इसे मिस नहीं कर सकता।

    शेखर डरते हुए कहता है। ओके बॉस।

    फिर वह अपने मन में कहता है। बॉस तो आ गये। और इन्हें देखकर भी नहीं लग रहा की इन्हें ज़रा भी उस लड़की की फिकर है। पता नहीं किया होंगा अब उस लड़की के साथ।

    शेखर उदास मन से अपने काम में लग जाता है।

    कुछ देर बाद शेखर और वह दोनों जल्दी से मीटिंग के लिए चलें गये।
    मीटिंग रूम में बैठा वह लड़का अपने गुस्से में सब को देख रहा था। तभी उस लड़के का फोन रिंग होता है। फोन पिक करता है।

    तो दुसरी तरफ से कोई शख्स कहता है। अद्विक तुम कब आये सोनितपुर से और मुझे बताया भी नहीं।

    अद्विक कहता है। डैड में बाद में बात करता हूं। वैसे मैं आप को कॉल करने वाला था। मैं जर्मनी जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए। और कब आऊंगा पता नहीं।

    अद्विक के डैड सूरज सिंघानिया कहते हैं। किया आदि तूं जर्मनी जा रहा है और तुने मुझे बताया भी नहीं। तूं अभी तो आया है। सोनितपुर से और अब मुझे से बिना मिले ही जा रहा है ये तो ग़लत बात है ना तेरी यार।

    अद्विक अपने डैड की बात सुनकर कहता है। डैड आप तो ऐसे बोल रहे हैं। जैसे में हर बार आप को बता कर जाता हूं।

    कुछ देर और अपने डैड से बात कर अद्विक फ़ोन काट देता है। और आफिस से निकल एयरपोर्ट की तरफ चला जाता है।

    वहीं कनक एयरपोर्ट पर बैठी थी और अपने पति का इंतजार कर रही थी पर उस का इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा था।


    Tu be continued 🙏 🙏 🙏

  • 2. अद्विक का दो साल बाद इंडिया आना। कनक का इंतजार ❤️❤️ - Chapter 2

    Words: 1249

    Estimated Reading Time: 8 min

    अद्विक कहता है। डैड में बाद में बात करता हूं। वैसे मैं आप को कॉल करने वाला था। मैं जर्मनी जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए। और कब आऊंगा पता नहीं।

    अद्विक के डैड सूरज सिंघानिया कहते हैं। किया आदि तूं जर्मनी जा रहा है और तुने मुझे बताया भी नहीं। तूं अभी तो आया है। सोनितपुर से और अब मुझे से बिना मिले ही जा रहा है ये तो ग़लत बात है ना तेरी यार।

    अद्विक अपने डैड की बात सुनकर कहता है। डैड आप तो ऐसे बोल रहे हैं। जैसे में हर बार आप को बता कर जाता हूं।

    कुछ देर और अपने डैड से बात कर अद्विक फ़ोन काट देता है। और आफिस से निकल एयरपोर्ट की तरफ चला जाता है।

    वहीं कनक एयरपोर्ट पर बैठी थी और अपने पति का इंतजार कर रही थी पर उस का इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा था।

    अब आगे। ....


    कनक का अपने पति बाबू के लिए इंतजार खत्म नहीं हो रहा था। वह उस का इंतजार कर रही थी। और इस इंतजार में ही दो साल बित गए। पर कनक की उम्मीद अभी भी नहीं टुटी थी।


    दो साल बाद।.............

    सुंदर सा घर जो की किसी महल से कम नहीं लग रहा था। सफेद पत्थरो से बना वह महल दुर से ही दिख रहा था। दूर दूर तक कोई भी घर उस महल के आस पास भी नहीं था। वह पुरी जगह उन्हीं की थी।

    सुंदर सा गार्डन फुलों से हरा भरा लग रहा था। उस घर के नेम प्लेट पर सिंघानिया पेरिस लेखा हुआं था।

    जहां आज काफी चहल-पहल थी। घर के नौकर यहां से वहां भाग रहे थे। सब के चहरे पर डर दिखाईं दें रहा था।

    एक लेडी जो कि दिखने में काफी सुंदर थी। वह सब नौकरों को कम बात रहीं थीं। और साथ ही में उन्हें डांट भी रहीं थीं।

    उस लेडी ( देविका जी) ने कहा। जल्दी जल्दी काम करों में रहा आदि कुछ ही देर में आता ही होगा। वह पुरे दो साल बाद आ रहा है। तो में नहीं चाहती । की कोई भी कमी हो। शाम को पार्टी है। और तुम सब इतने घिरे घिरे काम कर रहे हो। जल्दी करो।

    तभी पिछे से देविका जी के पति सूरज जी की आवाज आई। जो की उन से कह रहे थे।

    अरे जानू तुम तो अपने बेटे की आने की खुशी में अपने मासुम पति के भुल ही गई। ये तो अच्छी बात नहीं है ना जानू । ....

    देविका जी सूरज जी की तरफ देख कर महूं बना लेती है। और कहतीं हैं। आप तो मेरे बेटे से बहुत जलते हैं। मैं क्यूं खुश ना हुं। जब मेरा बेटा राजा आज पुरे दो साल बाद अपने प्रोजेक्ट को पूरा और मेरा नाम रोशन कर के आ रहा है। मैं क्यूं खुश ना होऊं।

    सूरज जी कहते हैं। ये बात तो है। पर वह आप का ही नही मेरा भी बेटा है। और रही जलने की बात तो है में जलूंगा ही क्योंकि तुम मेरे हिस्से का प्यार अपने उस खड़ूस बेटे को देती हों और बचा खुचा प्यार अपने उन दोनों नालायक समर और प्रिया को देती हों। अब बताओ ये बिचारा तुम्हारा पति कहा जाए।

    सूरज जी की बात सुनकर उन का भाई सुबोध जी पिछे से हंसते हुए कहते हैं। हा हा हा भाई ये बात तो है। आप ने बिल्कुल सही कहा। बताओं मेरे बड़े भाई के साथ कितनी ना इंसाफी हों रहीं हैं। भाई आप चिंता ना करें में हुं आप के साथ।

    सुबोध जी बोल तो रहें थे सुरज जी से पर देख रहे थे । देविका जी की तरह देख कर। जिसे देविका जी की हंसी छुट गई। सुरज जी मुंह बनाते हुए कहते हैं। ये बात तूं मुझे बोल रहा है या अपनी भाभी को।

    सुबोध जी देविका जी की तरफ उंगली कर। सुरज जी की तरफ देख कर कहते हैं। आप की तरफ भाई।

    देविका जी हंस पड़ी उन के साथ में सुबोध जी की पत्नी कोमल जी भी हंसने लगी।

    देविका जी कोमल जी की तरफ देख कर कहती हैं। चलो कोमल इन दोनों भाईयों का तो चलता रहेगा हम चलते हैं काम करना है बहुत। वैसे ये बच्चे कब तक आयेंगे।

    कोमल जी ने कहा। दीदी। चारों बच्चे (राज विराट, समर प्रिया ) आते ही होंगे। कॉलेज से आने का टाइम तो हों गया है। पर वह बोल रहे थे की अपने दोस्तों के साथ आयेंगे शाम की पार्टी से पहले आने के लिए बोल रहे हैं।


    दोनों चलीं गईं। दोनों भाई भी अपने कुछ काम में लग गए।

    दुसरी तरफ।

    एयरपोर्ट पर ✈️


    प्राइवेट एरिया की तरफ। जहा पर सेलिब्रिटी का ही आना जाना था। वह का एरिया पुरा काले रंग के कपड़े पहने बॉडीगार्ड से भरा था। सब के हाथों में गन थी। उस सब के बिच में से एक हैंडसम नौ जवान लड़का आता है। जो की किसी हिरो से कम नहीं लग रहा था। बल्क कलर का थ्री पीस सूट पहने। अपने खतरनाक ओरे के साथ चल कर बहार की तरफ आ रहा था।

    वह अपनी आंखों पर Glasses लगा कर एरोगेंट अंदाज में चल रहा था।

    जब वह बाहर कार कि तरफ जा रहा था तो वह खड़ी आस पास की लड़कियां उछल उछल कर उसे देखने की कोशिश कर रहीं थीं। पर गार्ड्स के चारों तरफ से घेरने की वजह से वह देख नहीं पा रही थी। जिसे उन सब लड़कियों का मुंह बन गया। और वह उदास हो कर रह गई।

    अद्विक अपने कार में बैठ जाता है । ड्राइवर डरते हुए उस से पहुंचता है। बॉस कहा जाना है।

    अद्विक घूर कर उसे देखता है तो वह डर जाता है। ड्राइवर के पसीने छूट जाते हैं।

    अद्विक सर्द आवाज में कहता है। ऑफिस चलों।
    ड्राइवर ओके बॉस बोल कर कार सिंघानिया एम्पायर के लिए कर देता है।

    वहीं एयरपोर्ट पर ही दूसरी तरफ जनरल एरिया की तरफ।

    वह एक लड़की गुलाब कर का सलवार सूट पहने। मांग में सिंदूर गले में मंगलसूत्र पहने करीब 19 साल की लड़की खड़ी थी। उस की आंखों में आसूं थे। वह चारों तरफ अपनी निगाहों से बड़ी उम्मीद के साथ देख रहीं थीं।

    उस कि आंखों के आंसु जो उस ने बहुत देर से रोक रखें थे। वह अब उस के गाल पर आ गये। उस लड़की ने अपने आंसु साफ करते हुए कहा। कन्नू पति बाबू तो आज भी नहीं आएं। पति बाबू कब आएंगे। इतने साल हो गए। किया उन्हें कन्नू याद नहीं।

    कनक अपनी बात कह कर रो देती है। वह बहुत देर तक वह एयरपोर्ट पर बैठी रही थी। अपने पति बाबू का इंतजार करतीं रहीं हैं।

    काफी देर तक बैठे रहने के बाद। कनक बाहर की तरफ देखतीं हैं जहां अब शाम होने को आईं थीं। ये देख कर कनक जल्दी से खड़ी होती है और खुद से कहतीं हैं। ओं हों कन्नू कितना वक्त हों गया। तुझे पति बाबू का इंतजार कर। पति बाबू तो आएं नहीं। पर अब तो। जाना होगा ना बड़ी मालकिन ने तो आज घर जल्दी आने को कहा था। और कन्नू तुने तो आज यही इतना वक्त कर लिया।

    पति बाबू कन्नू कल आएंगी। आप का इंतजार करने। कल जरूर आ जाना। आप को कन्नू बहुत याद करती है। आप ही तो हों कन्नू के। आप के अलावा कोई नहीं है मेरा । आ जाओ पति बाबू। अब कन्नू आप के बिना नहीं रह सकतीं हैं। पता नहीं क्यूं पति बाबू पर आज कन्नू को ऐसा लग रहा है जैसे आप मेरे आस पास ही हों। ....

    कनक अपने आंसु साफ कर एयरपोर्ट से निकल गई।

    Tu be continued 🙏 🙏 🙏 🙏

  • 3. अद्विक और कनक की शादी की बात।❤️❤️ - Chapter 3

    Words: 1522

    Estimated Reading Time: 10 min

    कनक अपनी बात कह कर रो देती है। वह बहुत देर तक वह एयरपोर्ट पर बैठी रही थी। अपने पति बाबू का इंतजार करतीं रहीं हैं।

    काफी देर तक बैठे रहने के बाद। कनक बाहर की तरफ देखतीं हैं जहां अब शाम होने को आईं थीं। ये देख कर कनक जल्दी से खड़ी होती है और खुद से कहतीं हैं। ओं हों कन्नू कितना वक्त हों गया। तुझे पति बाबू का इंतजार कर। पति बाबू तो आएं नहीं। पर अब तो। जाना होगा ना बड़ी मालकिन ने तो आज घर जल्दी आने को कहा था। और कन्नू तुने तो आज यही इतना वक्त कर लिया।

    पति बाबू कन्नू कल आएंगी। आप का इंतजार करने। कल जरूर आ जाना। आप को कन्नू बहुत याद करती है। आप ही तो हों कन्नू के। आप के अलावा कोई नहीं है मेरा । आ जाओ पति बाबू। अब कन्नू आप के बिना नहीं रह सकतीं हैं। पता नहीं क्यूं पति बाबू पर आज कन्नू को ऐसा लग रहा है जैसे आप मेरे आस पास ही हों। ....

    कनक अपने आंसु साफ कर एयरपोर्ट से निकल गई।

    अब आगे।........

    कनक एयरपोर्ट से निकल कर टेक्सी में बैठ कर। चलीं जाती है।
    और कुछ देर बाद उस की टेक्सी सिंघानिया पेरिस के बाहर आ कर रूकती है। वह टेक्सी ड्राइवर को पैसे दे कर अंदर की तरफ चली जाती है। वह अपने आंसु को साफ करतीं हैं जो की पुरे रास्ते वह वहाते हुएं आईं थीं। वह सिंघानिया पेरिस के अंदर जातीं हैं।

    तो उसे आंतें देख कर कोमल जी कहती हैं। कनक इतनी देर कर दी तुमने आने में। क्या तुम भुल गई की आज घर में पार्टी है। और तुम इतना देर से आ रही हों।

    कनक कोमल जी की गुस्से भरी आवाज सुनकर डर जातीं हैं। हालांकि वह गुस्से में नहीं बोल रही थी। पर कनक थीं ही इतनी मासूम की हल्की तेज़ आवाज़ को भी वह गुस्से भरी आवाज समझ लेती है। वह डरते हुए। कोमल जी के पास आते हुए कहतीं हैं।

    छोटी मालकिन माफ़ कर दो। आज पता नहीं कैसे देर हो गई। आगे से कन्नू कभी ऐसा नहीं करेंगी।

    कोमल जी कनक को गोर से देखतीं हैं। और उस के पास आते हुए कहतीं हैं। तूं क्यूं जाती है वह जब तुझे निराश ही होकर आना होता है। क्यूं तकलीफ़ देती है तूं खुद को कनक।

    कनक कोमल जी की तरफ अपना सिर उठा कर देखतीं हैं। और नम आंखों से कहतीं हैं। नहीं छोटी मालकिन। हमें वहां जाने से तकलीफ़ नहीं होती। बल्कि हम अगर वह ना जाएं तो हमें बेचैनी रहती है। हमें ये डर रहता है की कहीं हमारे पति बाबू हमें वह देखने हमें लेने तो नहीं आ गये। बस वहां जाकर थोड़ी आस लगा लेती हुं। अपने पति बाबू के आने की।

    कोमल जी कनक के मासुम चहरे को देखते हुए कहती हैं। दुआ करतीं हुं कि भगवान तेरी इस उम्मीद को कभी ना टुटने दें। और तेरे पति बाबू को जल्दी तेरे पास भेज दें।

    कनक हल्के से मुस्कुराते हुए कहती हैं। शुक्रिया छोटी मालकिन। आप देखना पति बाबू बहुत जल्द कन्नू को लेने के लिए आएंगे। और में ना आप सब से उन्हें मिलाऊंगी।

    तभी पिछे से देविका जी की आवाज आती है जो कि बोल रहीं थीं। हां और जब तुम उसे हम सब से मिलने के लिए लेकर आओ ना तब मैं ना उसे बहुत मारूंगी। उसे पुछूंगी की वह केसे कनक को छोड़ कर चला गया।

    कनक कहती हैं। हां बड़ी मालकिन आप ना पति बाबू को अच्छे से सबक सिखाना। फिर वह कन्नू को कभी छोड़ कर नहीं जाएंगे। हमेशा उस के साथ उसके पास रहेंगे।

    कनक कोमल और देविका जी से कुछ देर और बात करतीं हैं फिर kitchen में चली जाती है। कनक के जाने के बाद देविका जी कोमल जी से कहतीं हैं।

    कितनी मासुम है कनक। पता नहीं उस का पति उसे क्यूं एयरपोर्ट पर छोड़ कर चला गया। पहले तो उस से इतनी कम उम्र में ही शादी कर ली फिर उसे छोड़ कर चला गया। क्या 17 साल कोई उम्र ही नहीं होती। बच्ची की पढ़ने लिखने की उम्र में शादी हो गई। और अब पति का साथ होंने की बजह से इस अंजान शहर में रहन पड रहा है बिचारी को।

    कोमल कहतीं हैं। हां दीदी आप सही कह रही हो। मुझे तो लगता है की कनक का पति अब आयेगा ही नहीं उसे लेने के लिए। अब आप ही देखो ‌। जब हमें कनक से मिलें थे। तब वह खुद यहां दिल्ली आए हुए एक साल बता रही थी। तो अब तों उसे हमारे साथ रहते हुए एक साल और हों गया ।

    किया इन दो सालों में उस के पति को उस का खिंयाला नहीं आया होगी। ये भी तो हों सकता है उस के पति ने और शादी कर ली हों। वह अब नहीं आएगा।

    देविका जी कोमल जी की बात सुनकर सोच में पड जाती है और वह थोड़ी परेशान हों जाती है। वह कहती हैं। अगर ऐसा ही हुआ तो उस बच्ची की उम्मीद टूट जाएगी। वह बच्ची टूट जाएगी। उस का किया होगा वह इस अंजान शहर में केसे रहेंगी।

    सुरज जी सुबोध जी जो बहुत देर से उन दोनों की बात सुन रहे थे वह उन के पास आते हैं और सुरज जी देविका जी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहते हैं। तो हम उस बच्ची को अपने पास रखेंगे जैसे अब तक वह हमारे साथ रहती आईं हैं वैसे ही रहेंगी। बस थोड़ा बहुत बदलाव कर देंगे।
    देविका जी और कोमल जी ना समझीं में सुरज जी की तरफ देखतीं हैं।
    देविका जी कहती हैं। केसा बदलाव जी।
    सुरज जी कहते हैं। अगर कनक का पति उसे लेने नहीं आता है। तो हम अद्विक और कनक की शादी करवा देंगे वह हमारे साथ रहेंगी इस घर की बड़ी बहू बनकर। मुझे कनक अद्विक के लिए बहुत पसंद हैं।

    सुरज जी की बात सुनकर देविका जी और कोमल जी सुरज जी को देखने लगतीं हैं।
    कोमल जी कहती हैं। ये आप कैसी बात कर रहे हैं भाई साहब। अद्विक की शादी आप कनक से कराने की बात कर रहे हैं। आप को पता है ना अद्विक कैसा है। उसे सब heartless devil's कह के बुलाते हैं। और आप है कि मासुम कनक की शादी उसे कराने के लिए बोल रहे हैं।

    सुबोध जी कहते हैं। कोमल भाई सही कह रहे हैं। अद्विक को कनक ही बदल सकती है। और उसे पहले जैसा कर सकतीं हैं। कनक एक अच्छी लड़की है ‌ । और आज कल की दुनिया में इतनी अच्छी लड़की कहा ही मिलती है। तुम मानो या ना मानो पर कनक ही हमारे अद्विक के लिए ठीक है।

    देविका जी कहती हैं। पर किया वह मानें गा चलों एक बार को हम कनक को मना भी लेते हैं शादी के लिए पर किया तुम सब को लगता है कि मेरा खड़ूस और शैतान बेटा मान जाएगा शादी के लिए। तब सब ने देखा नहीं है। जब भी हम सब लड़की का नाम भी लें लेते हैं तो केसे चिड़ जाता है। ये तो हमारी ख़ुद किस्मती मानों की लाड साहब को अपनी मां चाची और बहन से चिड़ नहीं मचती। बल्कि हमें प्यार करता है। वरना तो वह तो हम से भी चिढ़ता। चिढकू कही का। हुं।
    इतना कहकर देविका जी अपना मुंह बना लेती है। जिसे देखकर सब हंसने लगते हैं। सुरज जी कहते हैं। अच्छा ठीक है। ये सब हम बाद में देखेंगे पहले हम पार्टी के लिए तैयार हो जाते हैं। भाई शैतान के आने की खुशी में हम ने पार्टी जो रखीं हैं। अब अच्छा तो दिखना पड़ेगा ना।

    देविका जी सुरज जी को घुरते हुए कहती हैं। खबर दार जो मेरे बेटे को शैतान बोला तो। मेरा राजा बेटा है वो।

    सुरज जी कहते हैं। हु हु अब तो तुम खुद अपने राजा बेटा को शैतान बोल रहीं थीं। मेने बोला तो आप को बुरा लगा।

    देविका जी कहती हैं। हां तो में बोल सकतीं हुं। पर आप नहीं।
    इसी तरह एक दूसरे से लड़ते-झगड़ते पार्टी का वक्त हो गया। सब मेहमान भी आने लगें। आज अद्विक के आने और प्रोजेक्ट जिस पर वह दो सालों से महन्त कर रहा था उसी की Success Party आज सुरज जी ने रखी थी। जिस में बड़े बड़े बिजनेस पार्टनर आयें हुए थे। सब अपने साथ अपनी फैमिली मेंबर्स को लेकर आएं थे। ख़ास कर बेटी को। क्योंकि सब का सपना था। सिंघानिया की फैमिली का हिस्सा बने का सब चाहते थे कि उन की बेटी की शादी अद्विक से हों जाएं । पर खड़ूस अद्विक किसी को भी भाव देता ही नहीं था।

    सब उस के आने का वेट कर रहे थे। अद्विक अभी तक आया नहीं था। पार्टी में।
    देविका जी कहती हैं। सुरज आदि अब तक क्यों नहीं आया है। पुछो ना फोन कर के उसे।
    सुरज जी कहते हैं। हां जानू मेने फोन पर बात कर लि है। आदि से। वह बस कुछ ही देर में आता ही होगा।

    देविका जी कहती हैं। इस लड़के का मन ही नहीं करता घर आने का। जब देखो काम काम करता रहा है। इसे काम के अलावा कुछ और नहीं आता है। भला आज तो सिधा घर आ जाता। आफिस जाने की किया जरूरत थी।

    Tu be continued 🙏 🙏 🙏

  • 4. हसीन महबूबा❤️❤️ - Chapter 4

    Words: 1271

    Estimated Reading Time: 8 min

    सब उस के आने का वेट कर रहे थे। अद्विक अभी तक आया नहीं था। पार्टी में।
    देविका जी कहती हैं। सुरज आदि अब तक क्यों नहीं आया है। पुछो ना फोन कर के उसे।
    सुरज जी कहते हैं। हां जानू मेने फोन पर बात कर लि है। आदि से। वह बस कुछ ही देर में आता ही होगा।

    देविका जी कहती हैं। इस लड़के का मन ही नहीं करता घर आने का। जब देखो काम काम करता रहा है। इसे काम के अलावा कुछ और नहीं आता है। भला आज तो सिधा घर आ जाता। आफिस जाने की किया जरूरत थी।
    अब आगे।.....,


    देविका जी सुरज जी को सुनाएं जा रही थी। और सुरज जी मुंह बन कर उन्हें सुन भी रहें थे। वह अद्विक को अपने मन में ही गालियां दे रहे थे।

    तभी सुरज जी के चहरे पर एक इस्माइल आ गई। वह सामने मेन गेट की तरफ देखते हुए कहते हैं। लो आ गया तुम्हारा राजा बेटा। अब जो भी कहना है अपने राजा बेटा को कहों।

    सुरज जी की बात सुनकर देविका जी पिछे मुडकर देखती है। उन का चहरा खिल गया। अद्विक को देंख कर।

    अद्विक कार से उतर कर अपने बिना एक्सप्रेशन वालें चहरे के साथ अंदर आता है। वह बहुत हैंडसम लग रहा था ‌। उस ने रॉयल blue 💙। कलर का थ्री पीस सूट पहन रखा था। जिसे वह बहुत हैंडसम और डैसीग लग रहा था। अपने एक हाथ को पैंट की जेब में डाल कर दुसरे हाथ से अपनी आंखों पर से गोगल्स उतारते हुए। अंदर पार्टी होल में आ रहा था।

    अद्विक का कातिलाना अंदाज देख कर पार्टी में जितनी भी लड़कियों के साथ साथ ओल्ड लेडी भी अद्विक पर फिदा हो गई थी। उस की पर्सनेलिटी ही इतनी कातिल, इतनी ज़हर थी। की किया ही कहने। अद्विक बाबू के।

    वह अंदर आता है। तो उस की मां देविका जी अद्विक के पास जातीं हैं। और उस के गले लग कर माथे पर किस्स कर कहती हैं।
    इतनी देर ला दी अपनी मां के पास आने में। किया तुझे अपनी मॉम की याद नहीं आई जो तूं दो सालों से जर्मनी में जा कर बैठ गया। हु ....

    अद्विक थोड़ी नरम आवाज में कहता है। मॉम ये इमोशनल ड्रामा करना बाद करों यार मैं जर्मनी बैठने नहीं गया था । काम करने गया था ।
    अद्विक की बात सुनकर देविका जी मुंह बना लेती है। अद्विक अपने डैड और चाचा जी के साथ बिजनेस पार्टनर से मिलने लगता है। वह सब से अपने एरोगेंट अंदाज में ही मिल रहा था। अपने सर्द ओरे के साथ। जिसे सब को उस से बात करने में भी डर लग रहा था। पर फिर भी सब हिम्मत कर के अद्विक से मिल रहे थे।

    अपनी पुरानी फैमिली मेंबर्स में से बस वह अपनी मां को ही प्यार से या नोर्मल बात करता था। वरना तो वह घर में सब से अपनी सर्द और कठोर आवाज में ही बात करता। सब को अपनी कंजी आंखों ( नीली आंखों ) से घूर घूर कर डराता रहता। जिस से सारे घर वाले डरते थे। जब भी वह किसी बात पर या फिर अपनी किसी मीटिंग या डील को लेकर गुस्सा रहता। तब तो मानों पुरे घर में शान्ति पर्स जाती। कोई भी डर से कुछ नहीं कहता ना एक आवाज आती। कोई भी उस वक्त ये नहीं चाहता था की वह किसी और का गुस्सा उन पर ना निकाल दें।

    इतना खोफ था हमारे अद्विक बाबू का आपने घर में। 😜 अब बस देखना ये है कि जब इन की महबूबा आयेगी जब भी अद्विक बाबू गुस्से में ही रहेंगे। यहां पर अपनी महबूबा के सामने उन का दुसरा ही चहरा देखने को मिलेगा। ...

    पार्टी खत्म होने को थी। धिरे धिरे कर के सारे गेस्ट जाने लगें। एक कोने में सोफे पर बैठा अद्विक अपने हाथ में रेड वाइन का गिलास लिये हुं बैठा हुआ था। वह अपने असिस्टेंट शेखर से बात कर रहा था।

    तभी उस की नजर एक हसीन खुबसूरत चहरे पर पड़ी। जिसे देखकर उस के शब्द उस के मुंह में ही रह गये। वह बिना कुछ बोले बस एक टक सामने देख रहा था। उस की दिल की धड़कन एक दब बड गई थी। उस के चहरे पर हैरानी और खुशी के भाव आ जाते हैं।

    सामने कनक black 🖤 semple साड़ी पहने खड़ी थी। जिस में उस का गोरा रंग उभर कर सामने आ रहा था। उस के माथे पर छोटी सी बिंदी थी। गले में मंगलसूत्र था जो की उस ने छुपा रखा था। आज कनक ने अपना सिंदुर छुपा रखा था। बालों में। जिस वजह से वह दिख नहीं रहा था।
    कनक किसी सर्वेंट को कुछ काम बता रही थी। जिसे उस के वह गुलाबी होंठों हिल रहें थे। वह बहुत क्यूट और खुबसूरत लग रही थी।

    अद्विक कनक को देखता है। उस की नजर बस कनक पर ही थीं। अद्विक को कुछ ना बोलता देख कर शेखर अद्विक को देखता है। जो की सामने की तरफ देख रहा था। वह भी उस साइड देखता है तो एक पल को तो वह भी कनक की खुबसूरती में खो गया था ‌ ।

    तभी उसे अपने उपर किसी की जलती हुई नजरें महसूस होती है। वह देखता है तो अद्विक उसे घूर रहा था। वह अद्विक की नजरों से डर जाता है। वह कहता है। सोरी बॉस। मैं अभी आता हूं। बोल कर अपनी जान बचा कर भाग जाता है।

    अद्विक फिर से उस तरफ देखता है। जहां पर कनक खड़ी थी। पर अब वह पर कोई भी नहीं था। कनक जा चुकीं की। वह चारों तरफ अपनी नजर घुमाकर देखता है। तो उसे कनक कहीं भी नहीं दिखती है।

    अद्विक की नजरें कनक को ढुढते हुए। वह खुद से कहता है। महबूबा यहां पर किया कर रहीं हैं। वह कैसे पेरिस में आई। वह तो अपने गांव में थी ना।

    अद्विक सोफे पर से उठ कर कनक को देखने लगता है। पर वह उसे कहीं भी नहीं दिखती है।

    सब गेस्ट जा चुके थे। अब बस फैमिली मेंबर्स ही बचें थे। कोमल जी अद्विक को बैचेन नजरों से यहा से वह देखता पातीं है थे। वह कहती हैं। आदि बेटा किया हुआ। किसे देख रहें हों।

    अद्विक अपने आप को नोर्मल दिखाता हूं। कहता है। किसी को नहीं। मैं अपने रूम में जा रहा हुं। बोल वह अपने फ्लोर पर चला जाता है।

    सब फैमिली मेंबर्स भी अपने अपने रूम में सोने के लिए चलें जाते हैं।

    वहीं अद्विक का फ्लोर। जहां पर बस देविका जी को ही जाना अलाउड था ।

    अद्विक अपने रूम में आ कर बॉथरूम में चला जाता है। और अपने कपड़े उतार कर शॉवर के निचे खड़ा हो जाता है।

    वह अपनी आंखें बंद कर के कहता है। महबूबा यहां पेरिस में थीं या फिर मेरा ही ब्हम था। पर अगर वो मेरा बहम होता थे। फिर अब से पहले मुझे मेरी महबूबा क्यों नहीं दिखी। आज ही क्यों।

    अगर ये मेरा बहम नही है और तुम सच में यही हों तो तुम्हारी कसम मेरी हसीन महबूबा मैं इस बार तुम्हें अपने से दूर नहीं जानें दुगा। तुम्हें अपना बना कर ही रहुगा। चाहिए तो इस के लिए मुझे कुछ भी करना पड़े।

    अद्विक शॉवर लेकर बहार आता है। और अपने कपड़े पहन कर सिगरेट जलाते हुए। बालकनी में चला जाता है।

    वह जा कर कुछ देर वह चांद को देखता है। फिर अपना फोन निकाल कर किसी को कॉल करता है। कुछ देर बात करने के बाद वह फिर से चांद को देखने लगता है।

    वह बालकनी से अपने रूम में जाने को होता ही है की तभी उस की नजर फिर से कहीं जा कर थम गयी। साथ ही में उसे एक मिट्टी आवाज सुनाई दी।

    Tu be continued ✍️ ✍️ ✍️

  • 5. मितवा रे ... ओं मितवा.....❤️ कनक की तड़प अपने पति के लिए ❤️❤️ - Chapter 5

    Words: 1267

    Estimated Reading Time: 8 min

    अद्विक शॉवर लेकर बहार आता है। और अपने कपड़े पहन कर सिगरेट जलाते हुए। बालकनी में चला जाता है।

    वह जा कर कुछ देर वह चांद को देखता है। फिर अपना फोन निकाल कर किसी को कॉल करता है। कुछ देर बात करने के बाद वह फिर से चांद को देखने लगता है।

    वह बालकनी से अपने रूम में जाने को होता ही है की तभी उस की नजर फिर से कहीं जा कर थम गयी। साथ ही में उसे एक मिट्टी आवाज सुनाई दी।

    अब आगे।...
    अद्विक बहार की तरफ देखता है। जहां पर कनक उसी काले रंग की साड़ी में गार्डन में यहां से वहां टहल रही थी।
    और साथ ही में वह गा रही थीं। उस की वह मिठी और दर्द से भरीं आवाज सिधे अद्विक के दिल तक जा रही थी।


    मितवा रे.. वो मितवा .........
    मितवा रे.. ओं मितवा..........


    कैेसे दिन बिते कोई जतन बता जा ....
    कैसे दिन बिते कोई जतन बता जा ......
    कहां जाऊं.. जाऊं कहां रहा दिखा जा...
    कहां जाऊं.. जाऊं कहां रहा दिखा जा....

    मितवा रे ... ओ मितवा...
    मितवा रे.. ओं मितवा..
    ........... ओं मितवा... ..

    कनक की आवाज में दर्द महसूस किया जा सकता था। वह इस वक्त कितने दर्द में थी इस का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता था। अद्विक भी कनक के दर्द को महसूस करते हुए। अपने रूम से निकला और लंबे कदमों से चलते हुए जल्दी से बाहर आ गया।
    कनक अपनी आंखें में आसूं लिए। अपने पति बाबू को याद कर गा रही थीं। ...

    चुड़ी चिंगारी लागे.. सोला लागे बिंदिया।...
    चुड़ी चिंगारी लागे... सोला लागे बिंदिया।..
    आंखीयो से उड़ गई.. रतियों की निंदिया।...
    हल्की सी झलक.. कभी तो दिखला जा..
    हल्की सी झलक.. कभी तो दिखला जा।..
    कहा जाऊं.. जाऊं कहां रहा दिखा जा..

    मितवा रे.. ओं मितवा....
    मितवा रे... ओं मितवा...
    .........ओं मितवा.....

    अद्विक कनक से थोड़ी दूरी पर खड़ा हो गया। और वह कनक के दर्द को गाने में महसूस करने लगा। हालांकि उसे अजीब सा लग रहा था। उसे बहुत अजीब फीलिंग आ रही थी। जो किया थी उसे समझ में नहीं आ रहा था। पर कनक के दर्द को महसूस कर उसे अपने सिने में हल्की चुंबन सी महसूस हो रही थी। वह कनक को देख रहा था। कनक गार्डन में वही पेड़ के पास खड़ी हो कर अपनी आंखें बंद कर उस पल को याद करतीं हैं जब उस की और अद्विक की शादी हुई थी। वह कितनी खुश थी। उस वक्त। उन पलों को याद करते हुए कनक की आंखों से आंसु बह रहें थे।



    पिया.. पिया गाएं जब बेरी पपीहा...
    ओं.. पिया.. पिया गाएं जब बेरी पपीहा...
    सुलग सुलग उठें..पिया सा मोहरा जियारा।
    पियासी मर जाऊं ..ना ये पियास बुझा जा। ..
    पियासी मर जाऊं. ना ये पियास बुझा जा।..

    कहा जाऊं.. जाऊं कहां रहा दिखा जा।..
    मितवा रे.. ओं मितवा...
    मितवा रे.. ओं मितवा..

    कैसे दिन बिते कोई जतन बता जा..
    कैसे दिन बिते कोई जतन बता जा..
    कहा जाऊं.. जाऊं कहां रहा दिखा जा।
    कहा जाऊं.. जाऊं कहां रहा दिखा जा।..

    मितवा रे.. ओं मितवा..
    मितवा रे.. ओं मितवा...
    ............ ओं मितवा.........

    (Yrr guys es song ko phle सुन लेना जिस किसी ने नहीं सुना हो। या फिर सुनते हुए ही इस चेप्टर को पढ़ना तब ही आप सब को कनक की फीलिंग और यहां गाना समझ में भी आएगा और अच्छा भी लगेगा। बिल्कुल ऐसा गाना लिखा है ना की कनक की एक एक फीलिंग को अद्विक और आप सब के दिल तक पहोंचे गी। ..😀 प्लीज यार एक बार मेरे कहने पर इस गाने को सुना बहुत अच्छा है। )

    कनक रोने लगी। वह रोते हुए कहाती है। कहां हों आप पति बाबू कन्नू को आप की बहुत याद आ रही है। आ जाओ ना।

    कनक ने अभी तक अद्विक को नहीं देखा था। वह वही गार्डन में रखीं कुर्सी पर बैठीं रोने लगी। उस ने अद्विक की तरफ से पिट कर रखी थी। अद्विक का कनक को रोते हुए देख कर उस के पास जाने के मन तो था। उस ने आगे बढ़कर कनक के कन्धे पर हाथ रखना चाहा। पर कनक की बात सुनकर वह हैरान रह गए।
    उस के हाथ जहां थे वहीं रूक गये। कनक कहती हैं। पति बाबू आप क्यों कन्नू को छोड़ कर चलें गये। आ जाओ ना वापस पति बाबू।

    अद्विक तो बस अपनी जगह पर रूक गया। वह अपने मन में कहता है। पति बाबू। वह शादीशुदा हैं। किया मेरी महबूबा की शादी हों गई इन दो सालों में और उस के पति ने उसे छोड़ भी दिया।

    अद्विक समझ रहा था कि कनक किसी और की पत्नी है। वह कनक को देख कर वहीं से अपने रूम में चला जाता है। कनक भी कुछ देर बाद अपने रूम में सर्वेंट क्वार्टर में चली जाती है। जो की दुसरी तरफ था। गार्डन के पिछे वालें एरिया में ‌ ।

    दरासल कनक सिंघानिया पेरिस में खाना बनाने के काम करतीं हैं। उस की मासुमियत और क्यूटनेस दें कर सब उसे प्यार से बातें करते हैं। हालांकि जब वह सिंघानिया पेरिस आई थी तब कुछ दिन तक रहीं थीं वह सिंघानिया पेरिस के रूम में। पर वह भी वह बस रूम में रही और फिर एयरपोर्ट पर चलीं जाती। अद्विक के इंतजार में।

    फिर उस ने जाने को बोला था तो उसे देविका जी ने ही अपने घर काम पर रख लिया। कनक भी उन की बात को मान गई थी। और वही काम करने लगी। सुरू में तो सिंघानिया परिवार में भी कोई उसे ठीक से बात नहीं करता था। बस एक दो मेंबर्स ही थे। जो उस से बात करते थे। पर फिर कनक का दर्द और उस की मासुमियत उस का वह मासुम सा चहरा। जो सब को अपना बना लेता है।

    तो सिंघानिया परिवार ही कहा पिछे रह जाता। वह भी कनक पर फिदा हो गया। और सब उसे अच्छे और प्यार से बात करने लगें थे। सब समझ गये थे कि। ये लड़की सच में मासुम है कोई छल नहीं कोई दिखावा नहीं है इस लड़की के भीतर।

    अब कनक सिंघानिया पेरिस में कैसे आई ये हम बाद में देखेंगे। पहले चलते हैं। अद्विक बाबू के पास।

    अद्विक का रूम।

    अद्विक गुस्से में अपने रूम में आता है। वह गुस्से से दीवार में हाथ मारते हुए कहता है। महबूबा ने शादी कर ली। वह ऐसे कर भी कैसे सकतीं हैं। किया उसे मेरा खिंयाला नहीं आया।

    तभी अद्विक कहता है। हों सकता है मेरी उस लड़की से शादी हों जाने की वजह से ये सब हुआ हों। आ आ आआ ये सब हों किया रहा है।
    मुझे पता लगाना ही होगा ‌ । आखिर महबूबा यहां पेरिस में कैसे आई। और उस का पति कोन है। कोन है वे जो द डेविल किंग ऑफ अद्विक सिंघानिया से दुश्मनी मोड लेना चाहता है।

    अद्विक अपना फोन निकालता है और किसी को कॉल कर कहता है। कुछ पता चला। कनक शर्मा के बारे में। फोन पर जो व्यक्ति था। वह अद्विक से कहता है। बॉस बस कल सुबह तक। सारी डिटेल्स आप के पास होगी।

    अद्विक फोन काट देता है। बेंड पर लेट जाता है। निंद तो उसे आने से रही बैचेन जो था। वह टाइम देखता है। तो रात के दो बज रहे थे।

    अद्विक अपने आंखें बंद कर अपनी और कनक की पहली मुलाकात के बारे में सोचने लगता है। कैसे जब उस ने पहली बार कनक को देखा था तो वह कितना उस में खो गया था। वह किस तरह से कनक को देख रहा। तभी उस वक्त ही कनक अद्विक का जुनून उस का पागलपन। मोहब्बत सुकुन सब कुछ उस वक्त ही बन गई थी कनक उस एक पल में ही। अद्विक बाबू का दिल कनक चुरा बैठी थी।

    Tu be continued 🙏 🙏 🙏

  • 6. advik or kanak ki pahle mulakat❤️❤️ - Chapter 6

    Words: 1136

    Estimated Reading Time: 7 min

    अद्विक फोन काट देता है। बेंड पर लेट जाता है। निंद तो उसे आने से रही बैचेन जो था। वह टाइम देखता है। तो रात के दो बज रहे थे।

    अद्विक अपने आंखें बंद कर अपनी और कनक की पहली मुलाकात के बारे में सोचने लगता है। कैसे जब उस ने पहली बार कनक को देखा था तो वह कितना उस में खो गया था। वह किस तरह से कनक को देख रहा। तभी उस वक्त ही कनक अद्विक का जुनून उस का पागलपन। मोहब्बत सुकुन सब कुछ उस वक्त ही बन गई थी कनक उस एक पल में ही। अद्विक बाबू का दिल कनक चुरा बैठी थी।

    अब आगे।...

    अद्विक अपनी आंखें बंद कर उन पलों को याद करने लगता है जब उसे अपने कनक को पहली बार उस के गांव में सोनितपुर में देखा था।

    दो साल पहले।..
    सोनितपुर गांव।.....

    अद्विक सोनितपुर में अपने जिगरीे दोस्त के साथ उस के मामा के यहां पर शादी में आया था। और साथ ही उसे कुछ बिजनेस के सिलसिले में काम भी था।
    जिस में वह वहां पर एक सप्ताह रूकने वाला था। वह एक दिन ऐसे ही गांव देखने के लिए अपने दोस्त यश के साथ जाता है।

    वह यश से बात करते हुए। गांव के खेतों की तरफ चला जाता है। वह खेतों की हरियाली देखते हुए जा रहा था। उसे काफी अच्छा महसूस हो रहा था। गांव की फ्रेस हवा महसूस कर रहा था।

    तभी उसे एक मिट्टी खनकती हुई आवाज़ आती। वह आवाज की दिशा में जाता है। तो वह देखता रहा जाता है। उस के सामने कनक पेड़ की टहनी पर झूला डाल कर। झूल रही थी। और उस के साथ में उस की सहेली भी खी।

    कनक झूले पर झूलते हुए हंस रही थी। उस की वह खनकती हुई आवाज़ चारों तरफ गुंज रही थी। झूले पर झूलते वक्त उस के वह लहराते हुए बाल उस का खुबसूरत चहरा ‌ । काली गहरी आंखें जो की झूले पर बैठने की वजह से खुशी से चमक रही थी। उस के होंठों की वह हंसी जो की अद्विक को कनक का दिवाना बना रहीं थीं।

    अद्विक बस कनक को ही देख रहा था। कनक की खुशी देख कर अद्विक के चहरे पर भी अंजाने में ही इस्माइल आ जाती है। यश अद्विक को देख रहा था। वह कहता है। किया हुआ आदि तूं किया देख रहा है।

    अद्विक यश की आवाज सुनकर होश में आता है। वह यश को कुछ नहीं कहता। और फिर से उस की नजर कनक पर चलीं जाती है। पर इस बार उस की आंखें छोटी हो जाती है। जब वह कनक का चहरा दो थोड़ी देर पहले खिल हुआं था। वह अब मुरझा गया था। उस की आंखों में नमी आ गई थी। और वह अपने कमर पर हाथ रख कर उसे सहला भी रहीं थीं।

    जिसे देखकर अद्विक पर रहा नहीं जाता है। और उस के क़दम कनक की तरफ चलें जाते हैं। वह कनक के पास जाकर खड़ा हो जाता है। कुछ देर तक तों वह कनक के चहरे को देखते रहता है।

    फिर कहता है। किया हुआ तुम्हें। तुम रो क्यों रही हो।
    अद्विक की आवाज सुनकर पहले तो डर गई। और हल्के से पिछे हों गई। वह डरते हुए कहती हैं। आप .. आप कोन हों साहब ।
    अद्विक अपने आवाज को सोफ्ट करते हुए कहता है। देखो बच्चा डरों मत में। तो यहां पर तुम्हारी मदद करने के लिए आया हूं ।

    कनक अपनी आंखों को टिमटिमाते हुए अद्विक को देखने लगतीं हैं। अद्विक कनक की इस अदा पर फिदा हों जाता है। वह अपने होंठों को हल्के से अपने दांतों तले दबाता है। और अपने मन में कहता है। ये कितनी क्यूट और मासुम है। क्या ये लड़की सच में इतनी मासूम है या मेरे सामने ही मासूम बनें का नाटक कर रही है।

    अद्विक कनक के चहरे को देखने लगता है। वह हल्के से मुस्कुरा कर कहता है। तुमने बताया नहीं बेबी डॉल की तुम रो क्यों रही हो। कोई परेशान ही।
    कनक क्यूट सा फेस बनाते हुए। अपने गालों पर उंगली रखते हुए कुछ सोचने लगतीं हैं। उसे सोचते देख कर अद्विक कन्फ्यूज़ हों जाता है फिर भी वह कनक को प्यार भरी नजरों से देखने लगता है।
    अद्विक कहता है। किया सोच रहीं हैं। बच्चा।
    कनक अद्विक को देख कर क्यूट सा फेस बना कर कहती हैं। कन्नू सोच रहीं हैं की वह आप से मदद लें के नहीं।
    अद्विक कहता है। क्यों। मैं मदद नहीं कर सकता तुम्हारी।
    कनक अपनी क्यूटनेस को ओवर लोड करते हुऐ कहतीं हैं। हां आप को नहीं पता मां ना कहती हैं की किसी अंजान से मदद और बात नहीं करनी चाहिए।
    अद्विक हल्के से मुस्कुराते हुए कहता है। और तुम्हारी मां ऐसा क्यों कहती हैं।
    अद्विक को कनक के साथ बात करने में बहुत मज़ा आ रहा था। उसे अच्छा लग रहा था कनक से बात कर के ‌।
    कनक अपने उसी क्यूट अंदाज में कहतीं हैं। ओं हों साहब आप किते बुधु हों।‌आप को नहीं पता। मां कहती हैं कि अगर हम अंजान आदमी ने मदद लेते हैं तो वह बच्चों को टोफी दें के अपने साथ लेकर चला जाता है। और फिर बच्चे कहा जाता है किसी को पता नहीं चलता है।
    अद्विक को कनक पर प्यार भी आ रहा था और हंसी भी। कनक की हर अदा अद्विक को उस का दिवाना बने पर मजबुर कर रही थी।
    वह कहता है। पर तुम बच्ची थोड़ी हों जो किसी भी इंसान के टोफी देने से उस के बहकावे में आ जाओगी।
    कनक अपने होंठों का पाउट बनाते हुए कहती हैं। ओं हों साहब आप तो सच्ची मे बुद्धु हों। आप को कन्नू बड़ी बच्ची दिख रही है। दोखो। वह गोल गोल घुम कर अद्विक को दिखाती है। और फिर कहतीं हैं। कन्नू अपनी मां की छोटी सी मासूम बच्ची है। और कोई कन्नू को लेकर चला गया तो उस की मां का किया होगा।

    कनक की बात सुनकर अद्विक उसे देखता है। वह सच्ची मे उसे क्यूट मासुम सी बच्ची ही तो लग रही थी।

    तभी कनक की सहेली जो कि उस के साथ थी। वह कहतीं हैं। कनक चल तेरे ताईं ताऊ को पता चल गया ना तु यहां है तो बहुत मार पड़ेगी चल जल्दी बहुत लेट हो गया। कल आ जाना और तब झूल लियो ठीक है चल अब।

    कनक उस लड़की की बात सुनकर उस के साथ भाग कर चलीं जाती है। और पिछे मुडकर अद्विक को देखते हुए कहती हैं। कन्नू और आप को कल बताएंगी साहब। अभी कन्नू को उस की मां के पास जाना है।

    कनक चलीं जाती है। और साथ ही में वह अद्विक का दिल अपने साथ लेकर चलीं गईं थीं।

    उसी दिन से अद्विक कनक के लिए इतना पागल और दिवाना हों गया था।

    अद्विक यही सब सोचते हुए सो गया था। वह कनक और अपनी पहली मुलाकात को सोच कर मुस्कुरा रहा था।

    Tu be continued ✍️ ✍️ ✍️

  • 7. अद्विक को पता चला कनक का सच। ... वह मेरी वाइफ है ❤️❤️ - Chapter 7

    Words: 1315

    Estimated Reading Time: 8 min

    अगली सुबह।

    अद्विक अपने टाइम रेडी हो कर आफिस के लिए निकल जाता है। वह रात से बैचेन था। उसे कुछ भी कर के जल्द से जल्द ये पता लगाना था कि कनक ने किस से शादी की है और वह यहां उस के घर में कैसे आई।

    आज उस का मुंड भी कुछ ठीक नहीं था। वह गुस्सा और चिड़चिड़ा हो गया था।

    अद्विक अपने आफिस में पहोंच जाता है। वह बिना किसी पर दिया दिया अपने केविन में चला जाता है। वह जाकर वह शेखर को अपने केविन में बुलाता है।

    कुछ देर बाद शेखर अद्विक के सामने खड़ा था। अद्विक बिना किसी भाव कहता है। शिवा को आने में कितना वक्त लगेगा। तुमने उस से पुछा जो काम मेने करने के लिए बोला था। वह उस ने किया के नहीं।

    शेखर कहता है। बॉस शिवा कुछ देर में आता ही होगा। बोल रहा था की जो भी बात है वह आप को ही बताएगा। तो शिवा ना मुझे से जायदा बात नहीं की। बस इतना कहा कि वह एक बजे से पहले आ जाएगा।

    अद्विक शेखर की बात सुनकर अपनी Watch में टाइम देखता है। अभी 12 बज रहे थे। अद्विक शेखर को कुछ कम बता कर अपना काम करने लग गया था।

    हालांकि उस का मन नहीं था कुछ भी काम करने का पर फिर भी उसे काम तो करना ही था।

    12:53 का वक्त हो रहा था। तभी अद्विक के केविन का डोर नॉक होता है। तब अद्विक अपनी रोबदार आवाज में। कम इन कहता है।

    एक हैंडसम नौ जवान लड़का अंदर आता है जिस की उम्र अद्विक के जितनी ही थी। वह अद्विक के पास जा कर खड़ा हो जाता है। और कहता है। बॉस आप का काम हो गया। जो अपने कहा था वो भी और जिस डिल के लिए आप ने मुझे रूस भेजा था वो भी। पर साला जोन्स बोहोत टांग अड़ा रहा था विच में। तो मेने साले की टंग ही काट दी।

    अद्विक कहता है। very good shiva । मुझे तुम से यही उम्मीद थी। अब तुम मुझे ये बताओं की कनक शर्मा की इन्फोर्मेशन क्या है। किया कुछ पता चला। वह यहा केसे आई। उस का पति कोन है।

    शिवा अद्विक की बात सुनकर बहुत सिरियस हो जाता है। वह बिना किसी एक्सप्रेशन के अद्विक को देखता है। और कहता है। बॉस किया आप को सच्ची मे नही पता की मैम का हसबेंड कोन है।

    अद्विक उस के चहरे को देखते हुए कहता है। नहीं पता तभी ही तो तुम से पुछ रहा हूं। देखो शिवा जो भी बात है मुझे बिना बात को घुमाएं बता दो मुझे पसंद नहीं है। ये बातें घुमाना।

    शिवा गहरी सांस लेता है और कहता है।दो साल पहले कनक शर्मा की शादी हुई थी। और उन का पति उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर छोड़ कर चला गया था। उन्हें पुरे एक साथ था। वह एयरपोर्ट पर बैठ कर अपने पति का इंतजार किया। पर उन का पति नहीं आया। दो दिन था बिना कुछ खाए पीए बही उस जगह बैठीं रहीं थीं। जिस जगह उन का पति उन्हें छोड़ कर गया था।

    तीसरे दिन जब उस से भुख बर्दाश्त नहीं हुई तो उस ने खानें के लिए भिख मांगी। तब उसे एक बोल्ड लेडी जो की वहीं एयरपोर्ट की केंटिन में काम करतीं थीं उस ने उसे वह अपने पास ही रखा और उन्हें खानें को दिया। फिर कनक वह उस के पास एयरपोर्ट पर ही रहती और वही से अपने पति के आने का इंतजार करतीं।

    अद्विक जो शिवा कि बातें बहुत ध्यान से सुन रहा था । पल पल उस के चहरे के एक्सप्रेशन बदलते जा रहे थे। उस के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी।

    अद्विक ने अपने कांपते हुए होंठों से कहा। किया.. किया.. कनक वहीं लड़की तो नहीं जिसे मेरे.. मेरी शा... शादी हुई थी। पर ये कैसे हो सकता है। मेरी शादी तो ..

    अद्विक शिवा को देखने लगता है शिवा कहता है। हां बॉस कनक मैम ही आप की वाइफ है। जिन्हें आप एयरपोर्ट पर छोड़ कर आएं थे। और फिर उस के बाद आप जर्मनी चलें गये थे।

    अद्विक हैरान रह जाता है। वह कुछ बोल ही नहीं पा रहा था। अद्विक शिवा को ही देख रहा था। उसे अब कल रात का वो पल याद आ रहा था जब कनक उसे याद कर के रो रही थी तड़प रही थी।

    अद्विक की आंखें अपने आप ही नम हो गई। वह अपने मन में कहता है। जिसे मेने सारी खुशियां देने का वादा किया था। उसे ही मेने जाने अंजाने में दर्द दें दिया। जिसे में महलों की रानी बनाना चाहता था। उसे मेने अपने ही महल की नौकरानी बना दिया। मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं। मुझे से इतनी बड़ी ग़लती केसे हो गई।

    अद्विक शिवा से कहता है। और वो सिंघानिया पेरिस में कैसे आई।

    शिवा कहता है। वो एक साल पहले आप के चारों भाई बहन (प्रिया, समर, राज, विराट) अपनी कॉलेज की ट्रिप पर से आ रहे थे। जब उन्हें कनक मैडम मिलीं। कोई आदमी उन के साथ बदतमीजी कर रहा था एयरपोर्ट पर ही उन के साथ छोड़ छाड़ कर रहा था। तब मैडम को आप के भाइयों ने ही बचाया था।

    मैडम बहुत डरी गई थी तों वह उन्हें उसी वक्त अपने साथ सिंघानिया पेरिस में लें कर आ गाये थे। वह सब ने मैडम से उन्हें घर बालों के बारे में पुछा था तो उन्हें अपने बारे में सब बता। कनक जाना चाहतीं थीं पर आप की मॉम ने उन्हें वही पेरिस में रहने के लिए बोल दिया। और वह काम करने के लिए भी। तब से ही कनक मैडम आप के घर पर काम करतीं हैं। और रोज़ दोपहर को एयरपोर्ट पर जातीं हैं। अपने पति के इंतजार में।

    शिवा कनक के बारे में सब बता देता है। जिसे सुनकर अद्विक सुन रह जाता है। अद्विक शिवा को जाने के बारे में बोलता है। शिवा चला जाता है। उस के जाने के बाद अद्विक कनक के बारे में सोचने लगता है। उसे अपने उपर बहुत गुस्सा आ रहा था। अद्विक खड़ा हो कर। अपने केविन में गुस्से में तोड़फोड़ कर देता है।

    वह गुस्से से चिल्लाते हुए कहता है। आआआआआ में ऐसा कैसे कर सकता हूं ‌ । मै मेरी महबूबा को एयरपोर्ट पर अकेला छोड़ आया था। मेरी महबूबा मेरे साथ मेरे पास थी। पर मेने खुद उसे खुद से दूर किया ‌ । मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं। महबूबा को मेने कितना दर्द दिया।

    अद्विक की आंखों के सामने कल साथ का सिन फिर से चलने लगा। वह कहता है। मुझे अभी अपनी महबूबा के पास जाना है। मैं अब उसे और खुद के लिए तड़पने नहीं दुगा। मैं मेरी महबूबा को वह सारी खुशियां हक दुगा जो उस के है।

    इतना कहकर अद्विक आफिस से निकल जाता है। शाम होने को ही आईं थीं। अद्विक कार में बैठ कर सिंघानिया पेरिस के लिए निकल गया था।

    कुछ देर बाद।

    अद्विक कि कार सिंघानिया पेरिस के बाहर आ कर रूकी। वह जल्दी से बाहर आया। और पेरिस के अंदर चला गया।

    सामने होल में ही सब बैठे थे। अद्विक बिना किसी पर ध्यान दिया। अपनी नजरें घुमाने लगता है। वह कनक को देख रहा था।

    देविका जी कहती हैं। आदि तूं आज इतनी जल्दी कैसे आ गया।

    अद्विक कहता है। कुछ नहीं मां कुछ काम नहीं था तो आ गया।

    अद्विक अपने रूम में चला जाता है। वह अभी किसी को भी अपने और कनक के बारे में नहीं बता सकता था। क्योंकि अभी वह पहले कनक से बात करने वाला था। उस के बाद ही वह सब को बताने के बारे में सोच सकता था। या फिर तब भी नहीं बताएं। ये तो उस के मुड़ के उपर है।

    अद्विक रूम में आना कर कहता है। ये महबूबा कहां है। कहीं फिर से एयरपोर्ट पर ही तो नहीं है।

    अद्विक रूम से निकल कर सिधा पेरिस से निकल जाता है। वह कार में बैठ कर एयरपोर्ट कि तरफ चला जाता है ‌ ।

    tu be continued ✍️✍️✍️

  • 8. अद्विक कनक का मिलन ❤️❤️ - Chapter 8

    Words: 1090

    Estimated Reading Time: 7 min

    देविका जी कहती हैं। आदि तूं आज इतनी जल्दी कैसे आ गया।

    अद्विक कहता है। कुछ नहीं मां कुछ काम नहीं था तो आ गया।

    अद्विक अपने रूम में चला जाता है। वह अभी किसी को भी अपने और कनक के बारे में नहीं बता सकता था। क्योंकि अभी वह पहले कनक से बात करने वाला था। उस के बाद ही वह सब को बताने के बारे में सोच सकता था। या फिर तब भी नहीं बताएं। ये तो उस के मुड़ के उपर है।

    अद्विक रूम में आना कर कहता है। ये महबूबा कहां है। कहीं फिर से एयरपोर्ट पर ही तो नहीं है।

    अद्विक रूम से निकल कर सिधा पेरिस से निकल जाता है। वह कार में बैठ कर एयरपोर्ट कि तरफ चला जाता है ‌ ।

    अब आगे।...

    कुछ ही देर में। अद्विक की कार एयरपोर्ट पर आ कर रूकी। वह जल्दी से कार से बहार आया और एयरपोर्ट के अंदर चला गया। अद्विक के गार्ड्स भी से के साथ साथ उसे कवर करते हुए चल रहे थे। उन का काम था अद्विक को प्रोटेक्ट करने का उस के बहुत से दुश्मन थे। जो कही भी कभी भी उस पर अटैक कर सकते थे।

    अद्विक अंदर जा कर कनक को देखने लगता है। वह बहुत बैचेन था। उसे सच्ची मे बहुत बुरा लग रहा था। जब से उसे पता चला था कनक के बारे में। वह अपने आप को ना जाने कितनी बार कोश चुका था। उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

    अद्विक बैचेन भरी नजरों से पुरे एयरपोर्ट पर अपनी नज़र घुमाते हुए देता है। तभी उस की नजर एक जगह जा कर रूक जाती है। और वह नजारा देख कर उस के सिने में दर्द की एक लहर दौड़ जाती है। वह अपने सिने पर हाथ रख कर घिमे कदमों से चलकर उस दिशा में जाता है।

    सामने कनक एक साइड ज़मीन पर बैठीं उस का इंतजार कर रही थी। वह वही जगह थी जहां पर अद्विक उसे छोड़ कर गया था।

    उस की आंखों में आसूं थे। और वह उस दिशा में ही देख रही थी जहां से दो साल पहले अद्विक उसे लेकर आया था। और उसे वहीं उस जगह छोड़ कर चला भी गया था।

    कनक अपने पति बाबू का इंतजार कर रही थी। उसे की उम्मीद टुट रहीं थीं। पर फिर भी कहीं ना कहीं उस का मासुम सा जो दिल था। वो उस की उम्मीद को टुटने नहीं दें रहा था।

    कनक अपने घुटने पर अपने हाथ रख कर बैठीं थीं। वह अपने आंसु साफ करते हुए कहतीं हैं। पति बाबू आज भी नहीं आएं। कन्नू फिर आज अकेले घर जाएंगी। आप कब आओगे पति बाबू। कन्नू सच्ची मे आप को बहुत याद करती है। आ जाओ ना पति...

    कनक रोते हुए कह रही थी। तभी उस के दिल की धड़कन बढ़ गई। और वह अपनी जगह से खड़ी हो कर। अपनी नजरें घुमाने लगी। कनक नजरें घुमाते हुए कहती हैं। पति बाबू.. मेरे पति बाबू यही है।

    अद्विक कनक के पास आ कर उस के पिछे खड़ा हो गया। वह कनक की बातें सुन रहा था और देख भी रहा था कि उसे उस के आने का एहसास हैं।

    अचानक कनक की आंखों के आंसु बड गये। और वह तेजी से बहने लगे।

    कनक सिसकते हुए। कहती हैं। पति.. पति बाबू.. आप . आप.. कन्नू को छोड़ कर क्यों चलें गये थे। अब दो साल बाद आप को कन्नू की याद आईं हैं।‌

    कनक बिना पिछे मुंडे कह रहीं थीं। शायद उसे अद्विक का पिछे खड़े होने का एहसान हों गया था। जिह वजह से वह अद्विक से सिखायत कर रही थी।

    अद्विक पहले तो कनक की बात सुनकर हैरान हो गया था।कि कनक बिना उसे देखें पहचान गयी कि उस का पति बाबू उस के पिछे खड़ा हैं। पर फिर बाद में वह आगे बढ़ कर उसे पिछे से ही गले लगा लेता है। जिसे कनक अपनी आंखें बंद कर लेती है। उस की आंखों से आंसु बह कर अद्विक के हाथ पर गिर जाते हैं। वह चुप खड़ी रो रही थी।

    अद्विक कनक को अपनी तरफ पलटता है। उस अपने सिने से लगा लेता है। कनक अद्विक की कमर पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए। उस के सिने से लग कर रो पड़ती है।

    अब तक भी अद्विक ने कुछ नहीं कहा था। वह बस चुप चाप खंडा कनक को अपने सिने से लगाएं खड़ा था।

    अद्विक अपनी चुप्पी को तोड़ते हुए कहता है। शशशशश... बस बस बच्चा चुप हों जाओ कितना रोगी। अब तो मैं आ गया हुं ना। बस भी करो।

    कनक अद्विक पर अपने पकड़ कसते हुए कहती हैं। नहीं नहीं पति बाबू आप कन्नू को छोड़ कर चलें गये थे। आप को पता है कन्नू कितनी अकेली थी। उस का कोई नहीं था।

    कनक की बात सुनकर अद्विक को तकलीफ़ होती है। वह उस के चहरे को अपने सिने से निकल कर अपने हाथों में भरते हुए कहता है। मुझे माफ़ कर दो। में आज के बाद कभी भी तुम्हें छोड़ कर नहीं जाउंगा। कभी भी नहीं। और अगर गया ना तो तुम मेरी डंडे से पिटाई करना। ओके।

    कनक ने अब कही जाकर अद्विक का चहरा देखा था। वह बहुत गोर से अद्विक को देख रहीं थीं। कितना बदल गया था वो इन दो सालों में। पहले से भी ज्यादा हैंडसम हो गया था उस का पति बाबू।

    कनक अपना हाथ बढ़ा कर अद्विक के चहरे पर फेरते हुए। जिसे अद्विक की आंखें बंद हो जाती है । कनक कहती हैं। पति बाबू आप सच्ची में कन्नू के पास ही हों ना। कहीं कन्नू कोई सपना तो नहीं देख रहीं हैं।

    अद्विक कनक के हाथ को अपने हाथ में लेते हुए उसे कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा है। और कहता है । नहीं महबूबा ये कोई सपना नहीं है। तुम्हारा पति बाबू तुम्हारे सामने ही है। चाहों तो तुम मुझे किस्स कर के भी देख सकतीं हैं। मैं मना नहीं करूंगा।

    अद्विक की बात सुनकर कनक का चहरा शर्म से लाल हो जाता है। वो शरमा कर अद्विक के सिने में अपना चहरा छुपा लेती है।

    बताओ कितने मासूम है। कनक इतने साल बाद पति आया। और आज भी बिना को सिकायत या गुस्सा के मान गई। ऐसा अद्विक सोच रहा था। क्योंकि मुझे तो पता है ना कि ये तो बेटा तुफान के आने की शान्ति है। 😂

    अद्विक कुछ देर तक तो कनक को गले से लगाएं हुएं ही खड़ा रहता है। फिर वह उस से अलग हो कर कहता है। चलो महबूबा घर चलते हैं।

    अद्विक कनक को अपनी गोद में उठा कर कार की तरफ चला जाता है।

    Tu be continued ✍️ ✍️ ✍️